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अमेरिकी खेल बिगड़ा, ट्रंप की रणनीति भारत की सख्त नीति के सामने फेल

 नई दिल्ली भारत और अमेरिका में ट्रेड डील (India-US Trade Deal) का ऐलान हो चुका है. इसका फ्रेमवर्क भी जारी किया जा चुका है और फैक्टशीट रिलीज होने के बाद इसमें अमेरिका की ओर से चुपचाप बड़ा बदलाव भी किया गया है. ये चेंज दालों (Pulses) से जुड़ा हुआ है. जी हां, भारत के साथ ट्रेड डील में अमेरिका की दाल नहीं गल पाई और भारत की रेड लाइन ने डोनाल्ड ट्रंप का पूरा खेल ही बिगाड़ दिया. आइए जानते हैं कैसे मोदी सरकार के किसानों के हित में अपना रुख अडिग रखने को साफ असर इस व्यापार समझौते में देखने को मिला है?  एग्री प्रोडक्ट पर ट्रंप की नहीं चली  सबसे पहले बात करते हैं 'दाल' को लेकर भारत की रणनीति के कामयाब होने के बारे में, तो बता दें कि बीते दिनों Donald Trump ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील के एग्जिक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किए थे. इसके बाद दोनों देशों ने डील का फ्रेमवर्क और फैक्टशीट जारी कर दी थी. लेकिन नया मोड़ तब आया, जब अमेरिका ने इस India-US Trade Deal Factsheet में अचानक बदलाव कर दिया, जो खासतौर पर भारत के लिए राहत भरा है. दरअसल, व्हाइट हाउस ने अमेरिकी टैरिफ लिस्ट में भारतीय दालों का जिक्र ही हटा दिया. यानी इस डील में Pulses शामिल नहीं की गईं.  India-US Trade Deal की संशोधित फैक्टशीट को देखें, डील के तहत भारत द्वारा 500 अरब डॉलर के अमेरिकी सामानों की खरीदारी की शर्त को प्रतिबद्धता (Committed) के बजाय अब इरादा या योजना में तब्दील कर दिया गया है. मतलब ये बाध्यकारी नहीं है. वहीं US White House की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, डील के तहत लागू प्रोडक्ट कैटेगरी की लिस्ट से कृषि शब्द को हटाया गया है. कुछ वस्तुओं, जिनमें दालें भी शामिल हैं, उन्हें Tariff Cut सूची से दूर कर दिया गया है. भारत ने पहले ही खींच दी थी Red Line गौरतलब है कि भारत ने अबतक जिन भी देशों से व्यापार समझौते किए हैं, उनमें भारतीय कृषि और डेयरी सेक्टर को दूर रखा है. देश के किसानों के हित के साथ किसी भी तरह का कोई समझौता न करने के लिए भारत ने पहले ही रेड लाइन (Red Line) खींच रखी थी. बता दें कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील लंबे समय तक अटकी रहने के पीछे ये भी एक अहम कारण रहा था, क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी एग्री-डेयरी प्रोडक्ट के लिए भारतीय बाजार में Tariff Free एंट्री पर अड़े हुए थे, जबकि भारत अपने रुख पर सख्ती से कायम रहा. अब इसका असर भी देखने को मिला है.  एग्री-डेयरी क्षेत्र को लेकर कैसा रहा भारत का रुख? गौरतलब है कि भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बातचीत शुरू होने से लेकर इसके फाइनल होने तक भारत का Agri-Dairy Sector को लेकर रुख साफ रहा है. जब अमेरिका ने अपने ऐसे प्रोडक्ट्स को भारतीय बाजार में एंट्री दिलाने के लिए दबाव बढ़ाया था, तो बीते साल जुलाई महीने में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दो-टूक कह दिया था. भारत किसी दबाव में नहीं आएगा और अपने मूल हितों खासतौर पर किसानों के हित से समझौता कतई नहीं करेगा. उन्होंने कहा था कि 'Nation First हमारा मूल मंत्र है और किसी भी तरह की कोई बातचीत दबाव में नहीं होगी. भारतीय किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए ही बातचीत की जाएगी. अब India-US Trade Deal का ऐलान होने के बाद भी उन्होंने साफ किया है कि इस समझौते से भारत के किसानों और उनकी खेती को किसी भी तरह का नुकसान नहीं होगा. इसमें कोई भी ऐसा उत्पाद शामिल नहीं है, जो भारतीय किसानों की आजीविका या देश की कृषि को प्रभावित कर सके. पीयूष गोयल ने भी बताया क्या-क्या डील से बाहर?  शिवराज सिंह चौहान के अलावा केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी ट्रेड डील के ऐलान और फ्रेमवर्क जारी होने के बाद कहा था कि यह समझौता किसानों के हितों की सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका को बनाए रखने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है. मक्का, गेहूं, चावल, सोया, पोल्ट्री, दूध, पनीर, एथेनॉल (ईंधन), तंबाकू, कुछ सब्जियां और मांस जैसे संवेदनशील कृषि व डेयरी उत्पादों को पूरी तरह संरक्षित रखा गया है.  सबसे बड़ा उत्पादक, आयातक भी भारत सिर्फ दालों के लिहाज से देखें, तो भारत विश्व में दलहन का सबसे बड़ा उत्पादक, उपभोक्ता और आयातक है और लगातार इस सेक्टर में आत्मनिर्भरता पर जोर देता रहा है. बीते कुछ वित्तीय वर्षों में उत्पादन के आंकड़े देखें, तो रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में दाल उत्पादन  2022–23 में 26 मिलियन टन के करीब, 2023–24 में लगभग 24 मिलियन टन और 2024–25 में 25–27 मिलियन टन के बीच रहा है.  मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक सबसे बड़े उत्पादक राज्य हैं. वहीं भारत कई देशों में दाल का निर्यात भी करता रहा है. इनमें बांग्लादेश, नेपाल, UAE, श्रीलंका, अमेरिका और कनाडा सबसे ऊपर रहे हैं. आयात की बात करें, तो 2024-25 में रिकॉर्ड 73 लाख टन दालों का इंपोर्ट किया गया था, जो घरेलू खपत का करीब 15% से अधिक था.   

इंतजार खत्म, भारत ने किया बड़ा रक्षा सौदा पक्का: 114 राफेल और 6 P8I विमान शामिल

नई दिल्ली भारत की ताकत में और इजाफा होने जा रहा है. इंडियन एयरफोर्स के बेड़े में राफेल जेट की संख्या बढ़ने जा रही है. जी हां, जिसका इंतजार था, वह घड़ी आ गई है. रक्षा मंत्रालय की रक्षा खरीद परिषद ने फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की एक बड़ी डील को मंजूरी दे दी है. इतना ही नहीं, अमेरिकी टोही एयरक्राफ्ट P-8I डील को भी हरी झंडी मिल गई है. रक्षा मंत्रालय की डीएसी यानी रक्षा खरीद परिषद की बैठक में यह फैसला हुआ. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन की भारत यात्रा से ठीक पहले यह फैसला आया है, जिससे दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत होंगे. रक्षा मंत्रालय की डीएसी यानी रक्षा खरीद परिषद ने फाइटर जेट राफेल की खरीद को आज यानी गुरुवार को मंजूरी दी. इतना ही नहीं, भारतीय नौसेना के लिए 6 अतिरिक्त P-8I विमानों की खरीद को भी मंज़ूरी मिली है.  राफेल डील करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये की है, जो भारत की अब तक का सबसे बड़ा रक्षा सौदे बन जाएगा. डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) की मीटिंग में इस पर फैसला लिया गया, जो रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई. इसके बाद इस सौदे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी से भी मंजूरी लेनी होगी. एयरफोर्स के लिए बेहद अहम है यह डील यह डील इंडियन एयर फोर्स के बेड़े में फाइटर जेट्स की कमी को दूर करने के लिए बहुत जरूरी थी. अभी भारतीय वायुसेना के पास सिर्फ 29 स्क्वाड्रन हैं, जबकि जरूरत 42 की है. पुराने एयरक्राफ्ट रिटायर हो रहे हैं, इसलिए नए और आधुनिक फाइटर जेट्स की जरूरत थी. राफेल जेट्स फ्रांस की कंपनी दासो एविएशन से लिए जाएंगे.  इनमें से 18 जेट्स तैयार हालत में (फ्लाई-अवे कंडीशन) आएंगे, जबकि बाकी 96 भारत में ही बनाए जाएंगे. इससे ‘मेक इन इंडिया’ को बड़ा बूस्ट मिलेगा और हजारों नौकरियां पैदा होंगी. अब जानते हैं कि राफेल जेट्स की खासियत क्या है? राफेल मल्टी-रोल फाइटर हैं. यानी हवा से हवा, हवा से जमीन और समुद्री हमलों में इस्तेमाल हो सकते हैं. पाकिस्तान इसकी ताकत देख चुका है. राफेल फाइटर जेट्स पहले ही ऑपरेशन सिंदूर में अपना दमखम दिखा चुके हैं. वायुसेना के वाइस चीफ एयर मार्शल नागेश कपूर ने कहा है कि राफेल जैसे नए जेट्स से एयर फोर्स की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी. ये जेट्स लंबी दूरी तक उड़ सकते हैं, तेज रफ्तार और आधुनिक हथियारों से लैस हैं. इससे चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों से खतरे का मुकाबला करना आसान होगा. पी-8आई पॉसिडॉन एयरक्राफ्ट अब बात पी-8आई पॉसिडॉन एयरक्राफ्ट की. ये 6 अतिरिक्त एयरक्राफ्ट इंडियन नेवी के लिए हैं. पी-8आई बोइंग कंपनी का बनाया हुआ है और समुद्री निगरानी के लिए इस्तेमाल होता है. ये दुश्मन की सबमरीन, जहाजों और एयरक्राफ्ट को दूर से ही पकड़ सकता है. भारत के पास पहले से 12 पी-8आई हैं, और ये नए 6 और ताकत बढ़ाएंगे. समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के लिए ये बहुत महत्वपूर्ण हैं, खासकर हिंद महासागर में जहां चीन की गतिविधियां बढ़ रही हैं. यह डील क्यों इतनी बड़ी है? फ्रांस से गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट डील है, इसलिए पारदर्शिता ज्यादा है. पहले 36 राफेल की डील में भी ऐसा ही हुआ था, जो 2016 में साइन हुई. अब 114 की डील से IAF की स्क्वाड्रन संख्या बढ़कर 35-36 के करीब पहुंच जाएगी. राफेल डील की खास बातें     इस डील के अनुसार, भारत फ्रांस की कंपनी डसॉल्ट एविएशन से 18 राफेल विमान सीधे खरीदेगा. बाकी 96 विमान भारत में ही बनाए जाएंगे. इनमें से कुछ विमान दो सीट वाले होंगे, जिनका उपयोग पायलटों को ट्रेनिंग देने के लिए किया जाएगा. इस डील में आधुनिक तकनीक भारत को देने और ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने की बात भी शामिल है.     भारतीय वायुसेना के के बेड़े में पहले से ही दो स्क्वाड्रनों में 36 राफेल विमान शामिल हैं, जिनमें से ‘सी’ वेरिएंट की अंतिम डिलीवरी दिसंबर 2024 में हुई थी.     राफेल विमानों का इस्तेमाल भारत ने पिछले साल मई में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में किया था, जिसमें पाकिस्तान के ठिकानों पर सटीक हमले किए गए थे.     राफेल विमानों का इस्तेमाल स्कैल्प (एससीएएलपी) मिसाइल को लॉन्च करने के लिए किया गया था, जो 250 किलोमीटर से ज्यादा दूर तक बहुत सटीक हमला कर सकती है. इसके अलावा यह मेटियोर हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल, हैमर हथियार, स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और आधुनिक रडार से भी लैस है.     पिछले साल जून में भारत और फ्रांस ने डसॉल्ट एविएशन और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड के बीच चार बड़े समझौतों की घोषणा की थी, जिससे भारत को राफेल विमानों की डिलीवरी तेजी से मिलने में मदद मिलेगी.  

राहुल गांधी पर विशेषाधिकार हनन का मामला, केंद्र सरकार नोटिस भेजने की तैयारी में

नई दिल्ली लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ BJP के सांसद निशिकांत दुबे ने सदन में एक 'सब्सटेंटिव मोशन' (Substantive Motion) पेश किया है। इस प्रस्ताव के जरिए उन्होंने राहुल गांधी की संसद सदस्यता रद्द करने और उन पर जीवनभर चुनाव लड़ने से प्रतिबंध लगाने की मांग की है।   क्या है पूरा मामला? निशिकांत दुबे ने न्यूज एजेंसी से बातचीत में साफ किया कि उन्होंने राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव नहीं, बल्कि एक 'ठोस प्रस्ताव' (Substantive Motion) दिया है। दुबे का आरोप है कि राहुल गांधी जॉर्ज सोरोस जैसी बाहरी ताकतों की मदद से देश को गुमराह कर रहे हैं। प्रस्ताव में की गई मुख्य मांगें भाजपा सांसद ने अपने प्रस्ताव में गंभीर आरोप लगाते हुए निम्नलिखित मांगें रखी हैं:     राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता को तुरंत खत्म किया जाए।     उन्हें भविष्य में किसी भी चुनाव को लड़ने के लिए आजीवन अयोग्य घोषित किया जाए।     दुबे ने कहा कि इस मामले पर सदन में विस्तार से चर्चा होनी चाहिए कि किस तरह विदेशी ताकतों के साथ मिलकर देश को भ्रमित किया जा रहा है। किरेन रिजिजू का राहुल गांधी पर पलटवार केंद्रीय संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को कहा कि हम सदन को गुमराह करने और बेबुनियाद बयान देने के लिए राहुल गांधी के खिलाफ प्रिविलेज नोटिस फाइल करने जा रहे हैं। लोकसभा और राज्यसभा में प्रोसीजर और कंडक्ट ऑफ बिजनेस के बहुत साफ नियम हैं। जब कोई सदस्य दूसरे सदस्य पर गंभीर आरोप लगाना चाहता है, तो आपको नोटिस देना होगा और आरोप को साबित भी करना होगा। राहुल गांधी ने ऐसा क्या कहा जिस पर मचा घमासान किरेन रिजिजू ने कहा कि मैंने रिक्वेस्ट की है कि राहुल गांधी को सदन में बुलाया जाए ताकि वे अपनी बातों को साबित कर सकें। राहुल गांधी ने सरकार और प्रधानमंत्री पर बेकार और झूठे आरोप लगाए हैं, यह कहते हुए कि प्रधानमंत्री ने भारत और भारतीय हितों को बेच दिया है। किस आधार पर? उन्होंने बिना कोई नोटिस दिए हरदीप सिंह पुरी पर गंभीर आरोप लगाया है। इससे पहले नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा से समझौता किया है और देश का विदेशी ताकतों के सामने 'समर्पण' कर दिया है। उनके इस बयान पर सत्ता पक्ष की ओर से जोरदार विरोध हुआ। यूएस ट्रेड डील के मुद्दे पर बोले राहुल गांधी राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौता करते समय भारत के हितों को शर्मनाक तरीके से गिरवी रख दिया। उन्होंने इसे 'नॉनसेंस' कदम बताते हुए कहा कि सरकार ने कृषि, आईटी, डेटा और लोगों के हितों से जुड़े कई मामलों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने झुकाव दिखाया है। राहुल गांधी के बयान पर किरेन रिजिजू ने जताई आपत्ति उनके इस बयान पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आपत्ति जताई। उन्होंने राहुल गांधी की टिप्पणियों को 'बेतुका' बताया और कहा कि आलोचना रचनात्मक होनी चाहिए। रिजिजू ने मांग की कि असंसदीय शब्दों को कार्यवाही से हटाया जाए। सदन की कार्यवाही देख रहे अध्यक्षीय पीठासीन सदस्य जगदंबिका पाल ने भी राहुल गांधी से आपत्तिजनक शब्दों से बचने को कहा। राहुल गांधी ने इसे स्वीकार किया, लेकिन सरकार को घेरना जारी रखा। इस तरह सदन में शुरू हो गया हंगामे और नारेबाजी का दौर सदन में उस समय हंगामा और नारेबाजी शुरू हो गई जब विपक्षी सदस्यों ने राहुल के 'सरेंडर' वाले आरोप का समर्थन किया, जबकि सत्ता पक्ष के सदस्य उनका विरोध करते रहे। राहुल गांधी ने आगे कहा कि यह सरकार देश, किसानों, आईटी सेक्टर और ऊर्जा सुरक्षा को बेच चुकी है और अमेरिका के सामने पूरी तरह झुक गई है। इस पर किरेन रिजिजू ने पलटवार करते हुए कहा कि कोई माई का लाल पैदा नहीं हुआ जो देश को बेच सके। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के अब तक के सबसे मजबूत नेता हैं। रुचिर शुक्ला निशिकांत दुबे का बयान सांसद निशिकांत दुबे ने कहा, "मैंने आज लोकसभा में राहुल गांधी के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया है कि कैसे वह सोरोस जैसी ताकतों की मदद से देश को गुमराह कर रहे हैं। मैंने प्रस्ताव में कहा है कि इस विषय पर चर्चा होनी चाहिए, उनकी सदस्यता समाप्त की जानी चाहिए और उन्हें जीवन भर चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।"

नया वीडियो सामने आया: किरेन रिजिजू ने दिखाया PM मोदी और स्पीकर पर कांग्रेस सांसदों का आक्रामक रवैया

नई दिल्ली केंद्रीय संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस सांसदों का एक और वीडियो जारी किया है. किरेन रिजिजू ने गुरुवार को आरोप लगाया कि संसद में विपक्ष और सरकार के बीच हाल ही में हुए टकराव के दौरान कांग्रेस सांसदों का एक बड़ा ग्रुप लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के चैंबर में घुस गया, जहां उन्होंने उन्हें गालियां दीं और पीएम मोदी को धमकाया. केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इस घटना का एक वीडियो भी शेयर किया है. किरेन रिजिजू ने इस वीडियो के जरिए कांग्रेस को घेरा है. इस वीडियो के बारे में उन्होंने दावा किया कि इसे गैर-कानूनी तरीके से रिकॉर्ड किया गया था, जिससे संसद में तनावपूर्ण कार्यवाही जारी रहने के बीच एक नया राजनीतिक मुद्दा बन गया है. किरिन रिजिजू ने वीडियो जारी करते हुए लिखा, ‘यह एक गैर-कानूनी वीडियो क्लिप है जिसे एक कांग्रेस सांसदों ने तब बनाया था, जब 20-25 कांग्रेस सांसद माननीय स्पीकर के चैंबर में घुसे, उन्हें गालियां दीं और माननीय प्रधानमंत्री को धमकाया. हमारी पार्टी बहस और चर्चा में विश्वास करती है और कभी भी सांसद को मारपीट करने के लिए बढ़ावा नहीं देती.’ इससे एक दिन पहले यानी बुधवार को भी केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर बड़ा आरोप लगाया था. उन्होंने कहा था कि कांग्रेस के सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के साथ अभद्र व्यवहार किया. इसका उन्होंने एक नया वीडियो जारी किया है. उन्होंने कहा कि विपक्ष सदन के अंदर स्पीकर के निर्देशों का खुलेआम उल्लंघन करता है और फिर उन पर उनके साथ भेदभाव करने का आरोप लगाता है. केंद्रीय मंत्री ने पार्लियामेंट के नियमों को बार-बार तोड़ने के लिए विपक्ष की भी आलोचना की और उन्हें स्पीकर के खिलाफ नो-कॉन्फिडेंस मोशन पेश करते समय भी तय नियमों और नॉर्म्स को मानने की सलाह दी. संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए किरेन रिजिजू ने कहा, ‘लोकसभा स्पीकर के चैंबर में घुसकर अभद्रता की गई और भला-बुरा कहा गया. फिर, स्पीकर ने जो रूलिंग दिया. उसे भी नहीं माना. राहुल गांधी कहते हैं कि उन्हें सदन में बोलने के लिए किसी की परमिशन की जरूरत नहीं है. वे अपनी मर्जी से बोलेंगे. यह मेरा बोलने का अधिकार है. सब कुछ रिकॉर्ड पर है.’ उन्होंने कहा कि जब तक सदन में स्पीकर से परमिशन नहीं मिलती है, तब तक कोई नहीं बोल सकता है. सदन का कोई भी सदस्य, चाहे वह सांसद हो या प्रधानमंत्री, स्पीकर की परमिशन से ही बोलता है, लेकिन विपक्ष के नेता के लिए पार्लियामेंट के नियमों का कोई मतलब नहीं है. केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आगे बताया कि कम से कम 20-25 कांग्रेस सांसद लोकसभा स्पीकर के चैंबर में घुस गए और उनके साथ अभद्रता की। मैं भी वहीं पर मौजूद था. स्पीकर बहुत नरम इंसान हैं, नहीं तो कड़े कदम उठा सकते थे. जिस वक्त स्पीकर के साथ अभद्रता की जा रही थी, उस समय केसी वेणुगोपाल, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कांग्रेस के कई सीनियर नेता भी अंदर मौजूद थे, और वे उन्हें लड़ने के लिए उकसा रहे थे.

रूस-अमेरिका टकराव: पुतिन का जुकरबर्ग को सबक, चीन पर भी नजर

मॉस्को  मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp ने आरोप लगाया है कि रूस ने देश में उसकी सेवाओं को पूरी तरह ब्लॉक करने की कोशिश की है, ताकि यूजर्स को स्‍टेट सपोर्टेड डोमेस्टिक ऐप की ओर मोड़ा जा सके. Meta Platforms के स्वामित्व वाले इस ऐप के प्रवक्ता ने बताया कि रूस का यह कदम इंटरनेट स्पेस पर नियंत्रण बढ़ाने और विदेशी टेक कंपनियों की भूमिका सीमित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है. तो क्‍या रूस भी चीन की राह पर चलने की तैयारी कर रहा है. दिलचस्‍प है कि चीन ने मैसेजिंग एप से लेकर सोशल साइट्स तक खुद की डेवलप की है. बीजिंग का उद्देश्‍य है कि इसके जरिये देश में पश्चिमी देशों के प्रभाव को रोका जा सकेगा और अमेरिका-यूरोप के टेक्‍नोलॉजी मोनोपोली पर लगाम लगाया जाएगा. अब रूस के कदम ने एक तरफ जहां मेटा चीफ मार्क जुकरबर्ग को उनकी औकात दिखा दी तो दूसरी तरफ अमेरिकी दादागिरी को भी ठोस चुनौती दी है. यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद मॉस्को और वेस्‍टर्न टेक्‍नोलॉजिकल कंपनियों के बीच तनाव लगातार बढ़ा है. रूसी अधिकारी घरेलू स्तर पर विकसित ऐप ‘MAX’ को बढ़ावा दे रहे हैं, जिसे सरकार समर्थित बताया जा रहा है. हालांकि, आलोचकों का कहना है कि इस ऐप का इस्तेमाल यूजर्स की निगरानी और डेटा ट्रैकिंग के लिए किया जा सकता है, लेकिन सरकारी मीडिया ने इन आरोपों को निराधार करार दिया है. WhatsApp ने कहा कि रूस द्वारा उठाए गए कदम यूजर्स को एक सरकारी-स्वामित्व वाले सर्विलांस ऐप की ओर धकेलने की कोशिश है. कंपनी ने एक बयान में कहा, ‘हम उपयोगकर्ताओं को जुड़े रखने के लिए हर संभव प्रयास जारी रखेंगे.’ हालांकि, कंपनी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि रूस में सेवा बहाली को लेकर आगे की रणनीति क्या होगी. WhatsApp पर सख्‍ती इस बीच, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने सरकारी समाचार एजेंसी TASS को दिए वीडियो बयान में कहा कि WhatsApp की वापसी रूसी कानूनों के पालन पर निर्भर करेगी. उन्होंने कहा, ‘अगर Meta कॉरपोरेशन कानून का पालन करती है और रूसी अधिकारियों के साथ संवाद करती है, तो समझौते की संभावना बन सकती है. लेकिन यदि कंपनी अडिग रुख अपनाती है और कानून के अनुरूप ढलने के लिए तैयार नहीं होती, तो कोई संभावना नहीं है.’ फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रूस के संचार नियामक रोसकोमनादज़ोर ने WhatsApp को अपने ऑनलाइन डायरेक्टरी से हटा दिया है. बताया जाता है कि रूस में इस ऐप के करीब 10 करोड़ यूजर्स हैं, जो इसे देश के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स में से एक बनाता है. इस कदम को रूस की डिजिटल नीति में एक और सख्ती के तौर पर देखा जा रहा है. Apple पर भी गाज रूस ने पिछले साल WhatsApp और टेलीग्राम जैसी विदेशी मैसेजिंग सेवाओं पर कुछ कॉल सुविधाओं को सीमित करना शुरू कर दिया था. अधिकारियों का आरोप है कि ये प्लेटफॉर्म धोखाधड़ी और आतंकवाद से जुड़े मामलों में कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ जानकारी साझा करने से इनकार करते हैं. इसके अलावा दिसंबर में Apple के वीडियो-कॉलिंग ऐप FaceTime को भी ब्लॉक कर दिया गया था. टेलीग्राम के रूसी मूल के संस्थापक पावेल ड्यूरोव पहले ही कह चुके हैं कि उनकी कंपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और यूजर्स की गोपनीयता की रक्षा के प्रति प्रतिबद्ध रहेगी. वहीं, मानवाधिकार संगठनों और डिजिटल राइट ग्रुप्‍स का कहना है कि रूस द्वारा घरेलू प्लेटफॉर्म्स को बढ़ावा देना और विदेशी सेवाओं को सीमित करना इंटरनेट स्वतंत्रता पर गंभीर असर डाल सकता है. डिजिटल संप्रभुता विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद केवल तकनीकी कंपनियों और सरकारों के बीच नियामक संघर्ष तक सीमित नहीं है, बल्कि यह डिजिटल संप्रभुता, डेटा नियंत्रण और नागरिकों की ऑनलाइन स्वतंत्रता जैसे व्यापक मुद्दों से भी जुड़ा हुआ है. WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म के संभावित पूर्ण प्रतिबंध से रूस में लाखों यूजर्स की रोजमर्रा की संचार व्यवस्था प्रभावित हो सकती है. संकेत साफ है कि रूस और वेस्‍टर्न टेक कंपनियों के बीच टकराव आने वाले समय में और गहरा सकता है, जिसका असर वैश्विक डिजिटल इकोसिस्टम पर भी पड़ सकता है.

पूर्व आर्मी चीफ की किताब लीक, अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की जांच शुरू

नई दिल्ली पूर्व आर्मी चीफ जनरल (रिटायर्ड) एमएम नरवणे की किताब के लीक का मामला अब गंभीर साजिश की दिशा में बढ़ता दिख रहा है. सूत्रों के मुताबिक शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि किताब को मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस की अनिवार्य क्लीयरेंस के बिना सुनियोजित तरीके से लीक किया गया. कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी और अमेरिका में बिकी किताब सूत्र बताते हैं कि किताब का सर्कुलेशन कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी और अमेरिका जैसे देशों में हुआ. इतना ही नहीं, इन देशों में यह किताब ऑनलाइन सबसे पहले बिक्री के लिए उपलब्ध हुई. इसी को ध्यान में रखते हुए दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने आपराधिक साजिश की धाराओं में एफआईआर दर्ज की है और जांच का दायरा अमेरिका, कनाडा, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया तक बढ़ाया गया है. जांच में यह भी सामने आया है कि लीक हुई कॉपी सबसे पहले .io डोमेन एक्सटेंशन पर अपलोड की गई थी, जो ब्रिटिश इंडियन ओशन टेरिटरी से जुड़ा कंट्री कोड डोमेन है. इसके बाद यह कई अन्य होस्टिंग प्लेटफॉर्म पर फैल गई. किताब के ISBN नंबर की जांच स्पेशल सेल अब किताब के ISBN नंबर की भी जांच कर रही है. ISBN यानी इंटरनेशनल स्टैंडर्ड बुक नंबर, 13 अंकों का एक यूनिक डिजिटल कोड होता है जो किसी भी किताब की पहचान के लिए इस्तेमाल होता है. लीक वर्जन में जो ISBN नंबर मिला है, वह ‘Four Stars Of Destiny’ नाम से प्रकाशित एमएम नरवणे की किताब का ही बताया जा रहा है. इस कोड को लेकर Penguin India से भी पूछताछ की जा रही है. आज तक की पड़ताल में अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी में ऑनलाइन बिक्री कर रही वेबसाइटों पर जो ISBN कोड मिला, वह भी Penguin India की ओर से जारी इसी किताब से जुड़ा पाया गया. राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने की तैयारी संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाया जाएगा. रिजिजू ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने सदन को गुमराह किया और निराधार बयान दिए. हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह प्रस्ताव कब और किसकी ओर से लाया जाएगा. माना जा रहा है कि लोकसभा में सत्ता पक्ष का कोई सदस्य विशेषाधिकार प्रस्ताव का नोटिस दे सकता है.

US ट्रेड डील से न्यू लेबर कोड तक, इन मांगों को लेकर देशव्यापी भारत बंद

नई दिल्ली  संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और देश की 10 प्रमुख केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते, केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों और नए श्रम कानूनों के विरोध में 12 फरवरी को भारत बंद का आह्वान किया है। आंदोलन को INTUC, AITUC, CITU, HMS सहित कई राष्ट्रीय यूनियनों का समर्थन प्राप्त है। संगठनों का दावा है कि करीब 30 करोड़ मजदूर हड़ताल में भाग ले सकते हैं. बंद के समर्थन में कई बैंक यूनियनों के शामिल होने से देशभर में बैंकिंग सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका है. AIBEA, AIBOA और BEFI जैसी यूनियनों ने हड़ताल में शामिल होने का निर्णय लिया है, जिससे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में कामकाज धीमा रह सकता है. किन सेवाओं पर पड़ेगा असर? परिवहन सेवाएं कई राज्यों में प्रभावित हो सकती हैं. बस, ऑटो और ट्रक यूनियनों के समर्थन के कारण सार्वजनिक और निजी परिवहन बाधित हो सकता है. बड़े शहरों में यातायात व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका है. बैंकिंग सेवाओं में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में काउंटर सेवाएं धीमी रह सकती हैं और चेक क्लीयरेंस में देरी संभव है. हालांकि, बैंक औपचारिक रूप से बंद नहीं रहेंगे. ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान और एटीएम सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी.बाजार और व्यापार पर भी असर पड़ सकता है. कई व्यापारिक संगठनों और मंडियों ने हड़ताल को समर्थन दिया है, जिससे थोक और खुदरा बाजार आंशिक या पूर्ण रूप से बंद रह सकते हैं. सरकारी कार्यालयों में ट्रेड यूनियनों के प्रभाव वाले विभागों में कर्मचारियों की उपस्थिति कम रह सकती है, जिससे कामकाज धीमा हो सकता है. स्कूल और कॉलेजों के संबंध में स्थानीय प्रशासन स्थिति के अनुसार निर्णय ले सकता है. परिवहन और सुरक्षा कारणों से कुछ जिलों में छुट्टी घोषित की जा सकती है. SKM की किसानों से अपील ट्रेड यूनियनों का दावा है कि इस हड़ताल में संगठित और असंगठित क्षेत्रों के लाखों मजदूर शामिल हो सकते हैं. एसकेएम ने किसानों से अपील की है कि वे भारी संख्या में प्रदर्शनों में शामिल हों और औद्योगिक श्रमिकों के साथ एकजुटता दिखाएं. उनका कहना है कि सरकार की नीतियां केवल कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई जा रही हैं, जिससे आम जनता की आजीविका पर सीधा हमला हो रहा है.  कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने समर्थन किया है. उन्होंने एक्स पर पोस्ट साझा कर लिखा, 'आज देशभर में लाखों मजदूर और किसान अपने हक की आवाज बुलंद करने सड़कों पर हैं. मजदूरों को डर है कि चार श्रम संहिताएं उनके अधिकारों को कमजोर कर देंगी. किसानों को आशंका है कि व्यापार समझौता उनकी आजीविका पर चोट करेगा और मनरेगा को कमजोर या खत्म करने से गांवों का आखिरी सहारा भी छिन सकता है.' उन्होंने सरकार पर किसानों-मजदूरों की आवाज को नजरअंदाज करने का आरोप लगाते हुए आगे लिखा, 'जब उनके भविष्य से जुड़े फैसले लिए गए, उनकी आवाज़ को नजरअंदाज किया गया. क्या मोदी जी अब सुनेंगे? या उन पर किसी 'grip' की पकड़ बहुत मजबूत है? मैं मजदूरों और किसानों के मुद्दों और उनके संघर्ष के साथ मजबूती से खड़ा हूं.' कौन-सी सेवाएं रहेंगी सामान्य? अस्पताल, एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी. दमकल विभाग, हवाई यात्रा और एयरपोर्ट संचालन पर असर नहीं पड़ेगा. डिजिटल बैंकिंग और एटीएम सेवाएं भी चालू रहेंगी. क्या 12 फरवरी को बैंक बंद रहेंगे? भारतीय रिजर्व बैंक या किसी बैंक की ओर से 12 फरवरी को आधिकारिक अवकाश घोषित नहीं किया गया है. शाखाएं खुली रहेंगी, लेकिन यूनियन की भागीदारी के कारण सेवाओं में आंशिक बाधा आ सकती है. अगर आप 12 फरवरी को बाहर निकलने की प्लान बना रहे हैं तो अपने शहर की परिवहन व्यवस्था की स्थिति पहले से जांच लें. बैंकिंग कार्यों को संभव हो तो ऑनलाइन निपटाएं और बाजार या सरकारी कार्यालय जाने से पहले स्थानीय अपडेट अवश्य देखें. बंद की वजह: किन मुद्दों पर आंदोलन? कई किसान, मजदूर और कर्मचारी संगठनों ने भारत बंद का समर्थन करते हुए केंद्र सरकार की नीतियों पर गंभीर आपत्तियां जताई हैं। प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:     भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते का विरोध     चार नए लेबर कोड वापसी की मांग     सरकारी उपक्रमों के निजीकरण का विरोध     पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली     न्यूनतम वेतन में वृद्धि     निर्माण और बिजली क्षेत्र के मजदूरों के अधिकारों की सुरक्षा     कृषि संबंधित कानूनों और नीतियों में बदलाव की मांग कई राज्यों में बस, ऑटो-रिक्शा और ट्रक यूनियनों के भी हड़ताल में शामिल होने की संभावना है, जिससे परिवहन सेवाओं पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है. किन सेवाओं पर पड़ेगा असर? 1. परिवहन सेवाएं कई राज्यों में बस, ऑटो और लॉरी ड्राइवर्स यूनियनों के समर्थन के कारण सार्वजनिक व निजी परिवहन प्रभावित हो सकता है. बड़े शहरों में यातायात व्यवस्था में बाधा आने की संभावना है.  2. बैंकिंग सेवाएं सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में काउंटर सेवाएं धीमी रह सकती हैं. चेक क्लीयरेंस में देरी की आशंका बनी हुई है. हालांकि, बैंक बंद नहीं होंगे और ऑनलाइन लेन-देन व एटीएम सेवाएं सामान्य रहेंगी. 3. बाजार और व्यापार कई व्यापारिक संगठनों और मंडियों ने हड़ताल को नैतिक समर्थन दिया है, जिससे बड़े शहरों में थोक और खुदरा बाजार आंशिक या पूर्ण रूप से बंद रह सकते हैं. 4. सरकारी कार्यालय ट्रेड यूनियनों के अधिक प्रभाव वाले विभागों में कर्मचारियों की उपस्थिति कम रहने की संभावना, जिससे सरकारी कामकाज धीमा हो सकता है. 5. स्कूल और कॉलेज सुरक्षा और परिवहन समस्याओं को देखते हुए, कुछ राज्यों में जिला प्रशासन स्कूल-कॉलेजों की छुट्टी घोषित कर सकता है. जो सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी     एंबुलेंस, अस्पताल और अन्य आपातकालीन सेवाएं     दमकल विभाग     हवाई यात्रा और एयरपोर्ट संचालन     डिजिटल बैंकिंग और एटीएम क्या बैंक औपचारिक रूप से बंद रहेंगे? नहीं. भारतीय रिजर्व बैंक या किसी भी बैंक ने 12 फरवरी को अवकाश घोषित नहीं किया है. शाखाएं खुली रहेंगी, लेकिन यूनियन भागीदारी के कारण सेवा में रुकावट आ सकती है.

केन्या के 20 लाख लोग भुखमरी की चेतावनी,सूखे के कारण भुखमरी के हालात

नैरोबी केन्या के उत्तर पूर्वी इलाकों से दिल दहला देने वाली खबरें आ रही हैं। संयुक्त राष्ट्र और कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, केन्या के कई हिस्सों में भीषण सूखे की वजह से 20 लाख से अधिक लोग भुखमरी की कागर पर खड़े हैं। सबसे बुरा असर पशुपालक समुदायों पर पड़ा है जिनका पूरा जीवन अपने पशुओं पर निर्भर रहता है। केन्या के राष्ट्रीय सूखा प्रबंधन प्राधिकरण ने बताया है कि देश के करीब 10 जिले इस वक्त पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं। सोमालिया की सीमा से सटे मंडेरा जिले में स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि इसे चेतावनी स्तर पर रखा गया है, जिसका मतलब है कि वहां अब हालात काबू के बाहर हो रहें हैं।  पूर्वी अफ्रीकी देश केन्या इस समय पिछले कई दशकों के सबसे भीषण सूखे का सामना कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र (UN) और विभिन्न राहत संगठनों द्वारा जारी ताजा रिपोर्टों के अनुसार, देश के उत्तर-पूर्वी इलाकों में सूखे की स्थिति भयावह हो गई है, जिससे 20 लाख से अधिक लोग गंभीर भुखमरी का शिकार हैं। केन्या के राष्ट्रीय सूखा प्रबंधन प्राधिकरण के मुताबिक, देश के करीब 10 जिले इस समय सूखे से जूझ रहे हैं। सोमालिया से सटे केन्या के उत्तर-पूर्वी मंडेरा जिले में स्थिति “चेतावनी” स्तर पर पहुंच गई है। इसका मतलब है कि पानी की गंभीर कमी के कारण पशुओं की मौत हो रही है और बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे हैं। जनवरी के अंत में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा था कि यही परेशानी सोमालिया, तंजानिया और यहां तक कि युगांडा तक फैल रही है, जहां लोग इसी तरह के मौसम और पानी की गंभीर कमी से जूझ रहे हैं। हाल के हफ्तों में सोमाली सीमा के पास सूखाग्रस्त इलाकों से झकझोर देने वाली तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें मवेशियों को बेहद कमजोर और कुपोषित हालत में देखा जा सकता है। इस संकट की सबसे बड़ी वजह दुनिया भर में बढ़ रही ग्लोबल वार्मिंग और जसवायु परिवर्तन है। वैज्ञानिकों का कहना है कि धरती का तापमान का चक्र पूरी तरह से बिगड़ गया है। पहले केन्या और आसपास के इलाकों में बारिश का एक निश्चित समय होता था। अब वह समय लगातार छोटा होता जा रहा है। हाल ही में अक्टूबर से दिसंबर के बीच जो बारिश होनी चाहिए थी, वह पिछले कई दशकों के मुकाबले कम रही है। यह इलाका अब जलवायु परिवर्तन की मार झेलने वाला सबसे संवेदनशील हिस्सा बन गया है। बेजुबान जानवरों और मासूम बच्चों पर असर  इस सूखे का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि सोमालिया सीमा के पास का इलाका, जहां पशुओं को कभी इन परिवारों की संपत्ति और गौरव हुआ करते था। अब हड्डियों का ढांचा बनकर रह गए हैं। पानी और चारे की कमी के कारण हजारों पशु दम तोड़ चुके हैं। पशुओं की मौत का सीधा असर वहां रहने वाले लोगों की खाने और कमाई पर पड़ा है। दूध और मांस की कमी की वजह से छोटे बच्चे गंभीर कुपोषण का शिकार हो रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही मदद नहीं पहुंची, तो यह स्थिति एक बड़े मानवीय संकट में बदल जाएगी क्योंकि बच्चों के शरीर में बीमारियों से लड़ने की ताकत खत्म होती जा रही है। पूरे क्षेत्र में हाहाकार  यह परेशानी सिर्फ केन्या तक सीमित नहीं है। जनवरी के अंत में जारी विश्व स्वास्थय संगठनों के आंकड़ों के अनुसार, यह संकट अब सोमालिया, तंजानिया और युगांडा जैसे पड़ोसी देश भी तेजी से फैल रहा है। पूरी दुनिया में हो रहे कार्बन उत्सर्जन और बढ़ते प्रदूषण का खामियाजा उन गरीब समुदायों को भुगतना पड़ रहा है।

US को अब भारत ही होगा भरोसेमंद साथी, अमेरिकी कंपनियों का मैन्युफैक्चरिंग सेंटर बनेगा देश में

नई दिल्ली  भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील हो चुकी है. अब एक और अच्छी खबर आई है. भारत अब अमेरिकी कंपनियों का सहारा बनेगा. जी हां, खुद अमेरिका का कहना है कि भारत अब चीन से निकलने वाली अमेरिकी कंपनियों के लिए नया ठिकाना होगा. अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) जैमिसन ग्रीर के मुताबिक, चीन से बाहर निकलने वाली अमेरिकी कंपनियों के लिए भारत एक नया अड्डा हो सकता है. कारण कि यहां लोग हैं और मैनुफैक्चरिंग कैपेसिटी है. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के लिए इंपोर्ट के मामले में भारत एक अच्छा सोर्स हो सकता है. दरअसल, फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में जैमिसन ग्रीर ने ये बातें कहीं. जब उनसे पूछा गया कि अगर अमेरिकी कंपनियां चीन से सप्लाई चेन हटाना चाहें तो क्या भारत सही जगह है, तो उन्होंने साफ कहा कि हम जानते हैं कि कई कंपनियां पहले से ही उस दिशा में जा रही हैं. हम चाहते हैं कि सप्लाई चेन अमेरिका में हों या जितना हो सके घर के पास हों. लेकिन जब ग्लोबलाइजेशन से हटते हैं तो सप्लाई चेन को बदलना पड़ता है. भारत इसके लिए एक अच्छा रास्ता हो सकता है. वहां बहुत सारे लोग हैं, मैन्युफैक्चरिंग की क्षमता है.’ भारत बनेगा अमेरिका का नया बिजनेस अड्डा उन्होंने यह भी जोड़ा, ‘हम चाहते हैं कि अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग और अमेरिकी वर्कर सबसे पहले हों, लेकिन जहां हमें दूसरे देशों से आयात करना हो, वहां भारत एक अच्छा स्रोत हो सकता है,बशर्ते व्यापार संतुलित और निष्पक्ष हो.’ अमेरिका का यह बयान भारत के लिए बड़ा संदेश है. अमेरिका अब भारत को चीन का विकल्प मान रहा है. भारत की युवा आबादी, बढ़ती फैक्ट्री क्षमता, अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकार की नीतियां इसे आकर्षक बनाती हैं. कई अमेरिकी कंपनियां पहले से ही भारत में प्लांट लगा रही हैं. ऐपल, गूगल, अमेजन, टेस्ला जैसे नाम इस दिशा में कदम बढ़ा चुके हैं. इससे क्या फायदा होगा? इस डील के बाद दोनों देशों को फायदा होगा. भारत को अमेरिकी बाजार में ज्यादा निर्यात का मौका मिलेगा, रोजगार बढ़ेंगे, टेक्नोलॉजी आएगी. वहीं, अमेरिका को सुरक्षित और भरोसेमंद सप्लाई चेन मिलेगी, चीन पर निर्भरता कम होगी. कुल मिलाकर देखा जाए तो अमेरिका का भारत पर भरोसा बढ़ता जा रहा है. साउथ एशिया में भारत अब अमेरिका का विश्वसनीय साथी बन रहा है. न सिर्फ ऊर्जा में, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन में भी. भारत बनेगा अमेरिका का नया बिजनेस अड्डा क्या भारत वास्तव में रूसी तेल खरीदना बंद कर रहा है? अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) जैमीसन ग्रीर या ग्रीयर ने मंगलवार को कहा कि भारत ने रूसी तेल की खरीद को पहले ही धीरे-धीरे कम करना शुरू कर दिया है और अमेरिका एवं अन्य स्रोतों से ऊर्जा की खरीद को फिर से बढ़ा रहा है. ‘फॉक्स बिजनेस’ के साथ इंटरव्यू में इस सवाल पर कि क्या भारत वास्तव में रूसी तेल खरीदना बंद कर रहा है, ग्रीयर ने कहा: ‘संक्षिप्त उत्तर हां है. उन्होंने पहले ही रूसी ऊर्जा उत्पादों की अपनी खरीद को कम करना शुरू कर दिया है. उन्होंने अन्य स्रोतों से खरीद को फिर से बढ़ाना शुरू कर दिया है.' सप्लाई चेन पर ग्रीर का पूरा बयान क्या है? फॉक्स न्यूज़ के साथ एक इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि अगर अमेरिकी कंपनियां चीन से सप्लाई चेन हटाना चाहती हैं, तो क्या भारत सही जगह होगी, तो इस पर अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव एम्बेसडर जैमीसन ग्रीर ने कहा, ‘हम जानते हैं कि कई कंपनियां पहले से ही उस दिशा में जा रही हैं. हम चाहते हैं कि सप्लाई चेन यहां यूनाइटेड स्टेट्स में हों और जितना हो सके घर के पास हों. हम जानते हैं कि जब आप ग्लोबलाइज़ेशन से हटते हैं और जब आप एक ज़्यादा मज़बूत और सुरक्षित इकॉनमी की ओर बढ़ते हैं, तो हमारे देश के सामने आने वाली सभी चुनौतियों का एक प्रोसेस होता है. किसी न किसी पॉइंट पर आपको सप्लाई चेन को इधर-उधर करना ही होगा; भारत इसके लिए एक रास्ता हो सकता है. उनके पास वहां बहुत सारे लोग हैं, उनके पास मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी है. बेशक, हम यह पक्का करना चाहते हैं कि अमेरिकन मैन्युफैक्चरिंग सबसे पहले और सबसे ज़रूरी हो और अमेरिकन वर्कर सबसे पहले हों, लेकिन जहां तक हम दूसरे देशों से इंपोर्ट करना चाहते हैं, भारत एक अच्छा सोर्स हो सकता है, जब तक यह बैलेंस्ड और फेयर हो.' भारत पर अब कितना टैरिफ है? भारत और अमेरिका ने शनिवार को अंतरिम व्यापार समझौते के लिए एक रूपरेखा पर पहुंचने की घोषणा की जिसके तहत दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए कई वस्तुओं पर आयात शुल्क कम करेंगे. ट्रेड डील के साथ ही अमेरिका ने भारत का टैरिफ घटाकर 18 फीसदी कर दिया है. एडिशनल टैरिफ भी हटा दिया है.

पालमपुर में खुला देश का दूसरा ट्यूलिप गार्डन, महसूस करें ‘देखा एक ख्वाब’ वाली फीलिंग

पालमपुर  हिमाचल प्रदेश के पालमपुर में धौलाधार की वादियों में देश का दूसरा ट्यूलिप गार्डन सैलानियों के लिए खोल दिया गया है. कश्मीर के बाद देश का दूसरा और प्रदेश का पहला ट्यूलिप गार्डन कुछ वर्ष पूर्व पालमपुर में हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान में स्थापित किया गया था. यहां पर ट्यूलिप्स की विभिन्न प्रजातियों को लगाया जाता है.  यह गार्डन हिमाचल प्रदेश की प्राकृतिक सौंदर्य को बढ़ावा एवं पर्यटन को अग्रसर करने में मदद कर रहा है. गौर रहे कि कश्मीर में ट्यूलिप गार्डन में चर्चित ‘देखा एक ख्वाब को सिलसिले हुए’ गाना शूट हुआ था और यह गाना ट्यूलिप से जोड़ा जाता है. जानकारी के अनुसार, पालमपुर स्थित आईएचबीटी संस्थान केंद्र सरकार और सीएसआईआर ने 2022 को फ्लोरीकल्चर मिशन के तहत इस ट्यूलिप गार्डन का आगाज किया था. संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. भव्य भार्गव ने कहा कि इस बार ट्यूलिप की 6 किस्मों के  50000 पौधे लगाए गए है. उन्होंने बताया कि 5 साल में 23 लाख ट्यूलिप तैयार करने का लक्ष्य रखा है. सीएसआईआर ने 2022 को फ्लोरीकल्चर मिशन के तहत इस ट्यूलिप गार्डन का आगाज किया था. सीएसआईआर के निदेशक डॉ. सुदेश कुमार यादव ने बताया कि जब से यह गार्डन खोला गया है कि तब से अब तक 4 लाख से ऊपर दर्शक यहां आ चुके हैं. इस बार भी दर्शकों  का आंकड़ा एक लाख से अधिक रहने की संभावना है. डॉ. सुदेश कुमार यादव ने कहा कि  संस्थान कुछ कम्पनी के  के साथ मिलकर बल्ब प्रोडक्शन पर काम कर रहा हैं इसमें और ऑफ सीजन में ट्यूलिप लेने की कोशिश की जा रही है. इस वर्ष दिल्ली मुख्यालय में भी 1000 से ज्यादा ट्यूलिप लगाए गए है और उन्हें भी आम जनता के लिए खोला दिया गया है. संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. भव्य भार्गव ने कहा कि इस बार ट्यूलिप की 6 किस्मों के  50000 पौधे लगाए गए है.गौर रहे कि हालैंड में ट्यूलिप के फूलों की सबसे अधिक पैदावार होती है और वहीं से अन्य देश इन्हें आयात करते हैं. भारत में भी हालैंड से ही ट्यूलिप मंगवाए जाते रहे हैं. हालांकि, अब आईएचबीटी के वैज्ञानिकों के प्रयासों से देश में फूलों की खेती में एक बड़े बदलाव हुआ है.