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ओल्ड टैक्स रिजीम पर बजट 2026 में बड़ा फैसला? सैलरी वालों की बढ़ सकती है खुशी

 नई दिल्ली एक फरवरी को आम बजट पेश किया जाएगा. इस बजट से पहले टैक्सपेयर्स के मन में ये सवाल उठ रहा है कि ओल्ड टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) का भविष्य क्या होगा. क्योंकि करीब 95 फीसदी लोग न्यू टैक्स रिजीम (New Tax Regime) में शिफ्ट हो चुके हैं. दरअसल, सरकार पहले ही न्यू टैक्स रिजीम (New Tax Regime) को डिफॉल्ट विकल्प बना चुकी है, और सरकार का फोकस भी न्यू टैक्स रिजीम पर ही है. इस बीच लोगों के मन में ये सवाल उठ रहा है कि क्या बजट में सरकार ओल्ड टैक्स रिजीम को पूरी तरह से खत्म करने की घोषणा कर सकती है? ओल्ड टैक्स रिजीम का क्या होगा? हालांकि जानकार मान रहे हैं कि इस बजट में ओल्ड टैक्स रिजीम को पूरी तरह खत्म करने की संभावना कम है, लेकिन इसे धीरे-धीरे अप्रासंगिक बनाने की रणनीति जरूर अपनाई जा सकती है, क्योंकि जिस तरह से न्यू टैक्स रिजीम में लगातार पिछले कुछ वर्षों से बदलाव हो रहे हैं. उससे सरकार का रुख साफ है कि वह एक सरल, कम छूट वाला और कम विवाद वाला टैक्स सिस्टम चाहती है.  न्यू टैक्स रिजीम इसी सोच पर आधारित है, जिसमें कम टैक्स स्लैब (Tax Slab) हैं और ज्यादातर छूट और कटौतियां हटा दी गई हैं. लेकिन अभी भी ओल्ड टैक्स रिजीम उन लोगों के लिए फायदेमंद है, जिनके पास होम लोन, HRA, LIC, PPF, ELSS और NPS जैसे निवेश के विकल्प हैं, यानी उन्होंने इन विकल्पों में निवेश कर रहे हैं. जानकार ये बता रहे हैं कि इस बजट में सरकार न्यू टैक्स रिजीम को और लोकप्रिय बनाने के लिए कदम उठा सकती है, ताकि बाकी टैक्सपेयर्स भी ओल्ड टैक्स रिजीम को छोड़कर न्यू में शिफ्ट हो जाएं.  न्यूज टैक्स रिजीम को लोकप्रिय बनाने की कवायद इनमें सबसे बड़ा कदम स्टैंडर्ड डिडक्शन को बढ़ाना हो सकता है. अभी न्यू टैक्स रिजीम में 75,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है. सरकार इसे बढ़ाकर 1 लाख रुपये तक कर सकती है. इसका सीधा फायदा सैलरीड क्लास को मिल सकता है. फिलहाल स्टैंडर्ड डिडक्शन को मिलाकर 12.75 लाख रुपये तक की सैलरी पर कोई आयकर नहीं लगता है.  दूसरा बड़ा और अहम बदलाव NPS को न्यू टैक्स रिजीम में शामिल करना हो सकता है. फिलहाल ओल्ड टैक्स रिजीम में NPS पर अतिरिक्त 50,000 रुपये की छूट मिलती है, जबकि न्यू टैक्स रिजीम में यह सुविधा नहीं है. अगर सरकार न्यू टैक्स रिजीम में भी NPS (खासतौर पर एम्प्लॉयर कंट्रीब्यूशन) को टैक्स फ्री या डिडक्शन के दायरे में लाती है, तो रिटायरमेंट सेविंग को बढ़ावा मिलेगा और कॉर्पोरेट कर्मचारियों के लिए न्यू रिजीम ज्यादा आकर्षक बन जाएगी.  अगर ओल्ड टैक्स रिजीम की बात करें तो इसमें सैलरीड क्लास को 50,000 रुपये तक का स्टैंडर्ड डिडक्शन का लाभ मिलता है. इसके अलावा 80C के तहत PF, LIC, ELSS में निवेश पर 1.5 लाख रुपये तक की छूट, 80D में हेल्थ इंश्योरेंस, HRA, और होम लोन के ब्याज पर टैक्स बचाया जा सकता है. इस रिजीम में टैक्स स्लैब 0 से 2.5 लाख तक शून्य, 5 लाख तक 5%, 10 लाख तक 20% और उससे ऊपर 30% है. 

1 अप्रैल से टोल टैक्स में बदलाव, Fastag के जरिए अब बिना रुके होगा कटाव

नई दिल्ली अगर आप अक्सर हाईवे पर सफर करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। 1 अप्रैल 2026 से नेशनल हाईवे के टोल प्लाजा पर नकद (Cash) भुगतान गुजरे जमाने की बात हो जाएगी। केंद्र सरकार ने टोल प्लाजा पर कैश लेन-देन को पूरी तरह बंद करने का फैसला किया है। सिर्फ FASTag और UPI से होगा भुगतान केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के अनुसार, देश को डिजिटल अर्थव्यवस्था बनाने और टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारों को खत्म करने के लिए यह निर्णय लिया गया है। 1 अप्रैल के बाद टोल प्लाजा पर केवल FASTag और UPI ही भुगतान के मान्य माध्यम होंगे। खत्म होंगी लंबी लाइनें, हटेगी 'कैश लेन' वर्तमान में कई टोल प्लाजा पर FASTag होने के बावजूद लोग कैश लेन का इस्तेमाल करते हैं, जिससे जाम की स्थिति बनी रहती है। नए नियम के लागू होने के बाद:     टोल प्लाजा से कैश लेन पूरी तरह हटा दी जाएगी।     वाहन चालकों को जाम से निजात मिलेगी और यात्रा समय की बचत होगी।     पारदर्शिता बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था पूरी तरह डिजिटल होगी। MLFF: बिना बैरियर के सरपट दौड़ेंगे वाहन सरकार 'मल्टी लेन फ्री फ्लो' (MLFF) टोलिंग सिस्टम लाने की तैयारी में है। इसके तहत…     बिना बैरियर के टोल: शुरुआत में देशभर के 25 टोल प्लाजा पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इसे लागू किया जाएगा।     सेंसर तकनीक: इस सिस्टम में कोई बैरियर नहीं होगा। वाहन बिना रुके गुजरेंगे और ऊपर लगे कैमरे व सेंसर FASTag के जरिए अपने आप टोल काट लेंगे।     सुगम यात्रा: पायलट प्रोजेक्ट सफल होने के बाद इसे पूरे देश में लागू किया जाएगा, जिससे हाईवे पर वाहनों की गति बाधित नहीं होगी।  

645 हमले, एक साल! बांग्लादेश में हिंदू उत्पीड़न पर यूनुस सरकार की चौंकाने वाली रिपोर्ट

ढाका बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने सोमवार को कहा कि 2025 के दौरान देश में अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों से जुड़ी अधिकतर घटनाएं 'आपराधिक प्रकृति' की थीं और उनका सांप्रदायिक उद्देश्यों से कोई संबंध नहीं था। मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस की प्रेस शाखा ने यह बयान जारी किया, जो ऐसे समय में आया है जब कुछ दिन पहले, 9 जनवरी को भारत ने बांग्लादेश पर वहां अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों से 'तेजी से और दृढ़ता से' निपटने का दबाव डाला था तथा इन घटनाओं को बाहरी कारणों से जोड़ने के प्रयासों को 'चिंताजनक' करार दिया था। भारत ने यह प्रतिक्रिया हाल के कुछ सप्ताहों में बांग्लादेश में कई हिंदुओं की हत्या की घटनाओं के संदर्भ में दी थी।   2025 में अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़ी कुल 645 घटनाएं अंतरिम सरकार ने एक वर्ष के आधिकारिक पुलिस रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि 2025 में जनवरी से दिसंबर के बीच पूरे बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़ी कुल 645 घटनाएं दर्ज की गईं। सरकार ने कहा कि हालांकि हर घटना चिंता का विषय है, लेकिन आंकड़े एक स्पष्ट और साक्ष्य-आधारित तस्वीर पेश करते हैं कि अधिकतर मामले सांप्रदायिक नहीं, बल्कि आपराधिक प्रकृति के थे। मुख्य सलाहकार के सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए बयान के अनुसार, इन 645 घटनाओं में से 71 में सांप्रदायिक तत्व पाए गए। इनमें मंदिरों में तोड़फोड़ के 38 मामले, आगजनी के 8 मामले, चोरी का 1 मामला, हत्या का 1 मामला तथा मूर्तियों को तोड़ने की धमकी, भड़काऊ सोशल मीडिया पोस्ट और पूजा स्थलों को नुकसान पहुंचाने जैसी 23 अन्य घटनाएं शामिल हैं। बयान में आगे कहा गया कि इन 71 घटनाओं में से 50 मामलों में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की और उतनी ही गिरफ्तारियां की गईं, जबकि 21 मामलों में एहतियाती या जांच संबंधी कदम उठाए गए। शेष 574 घटनाएं सामाजिक विवादों से जुड़ी थीं, जिनमें पड़ोसियों के बीच विवाद (51), भूमि संबंधित संघर्ष (23), चोरी (106), व्यक्तिगत दुश्मनी (26), बलात्कार (58) और अप्राकृतिक मौत के 172 मामले शामिल हैं। दिसंबर 2025 में सांप्रदायिक हिंसा की 51 घटनाएं अंतरिम सरकार ने कहा कि यह रिपोर्ट चुनौतियों से इनकार नहीं करती और न ही पूर्णता का दावा करती है, बल्कि व्यापक राष्ट्रीय संदर्भ में अल्पसंख्यक समुदायों को प्रभावित करने वाले अपराध के रुझानों की एक तथ्यात्मक, साक्ष्य-आधारित तस्वीर पेश करने का प्रयास करती है। उसने कहा कि हालांकि सभी अपराध गंभीर हैं और उनके लिए जवाबदेही जरूरी है, लेकिन आंकड़े दिखाते हैं कि अल्पसंख्यक पीड़ितों से जुड़ी अधिकांश घटनाएं सांप्रदायिक शत्रुता से नहीं, बल्कि व्यापक आपराधिक और सामाजिक कारकों से प्रेरित थीं। इस महीने की शुरुआत में बांग्लादेश हिंदू बौद्ध क्रिश्चियन यूनिटी काउंसिल (BHBCUC) ने आरोप लगाया था कि जैसे-जैसे आम चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है, देश में सांप्रदायिक हिंसा खतरनाक दर से बढ़ रही है। बांग्लादेश में संसदीय चुनाव 12 फरवरी को होने हैं। काउंसिल ने कहा था कि उसने अकेले दिसंबर 2025 में सांप्रदायिक हिंसा की 51 घटनाएं दर्ज की हैं। भारत ने क्या कहा था विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 9 जनवरी को कहा था कि हम लगातार चरमपंथियों द्वारा अल्पसंख्यकों तथा उनके घरों व व्यवसायों पर किए जा रहे हमलों का चिंताजनक सिलसिला देख रहे हैं। उन्होंने कहा था कि ऐसी घटनाओं से तुरंत और सख्ती से निपटना जरूरी है। जायसवाल ने यह भी कहा था कि इन घटनाओं को व्यक्तिगत प्रतिद्वंद्विता, राजनीतिक मतभेदों या बाहरी कारणों से जोड़ने की एक चिंताजनक प्रवृत्ति देखी जा रही है। गौरतलब है कि अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार के सत्ता से हटने के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के सत्ता संभालने के बाद से भारत और बांग्लादेश के संबंधों में तनाव आया है। भारत बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं पर हो रहे हमलों को लेकर लगातार चिंता जता रहा है।

बंगाल SIR पर सुप्रीम टिप्पणी: CJI सूर्यकांत बोले– जनता के मानसिक दबाव को समझे चुनाव आयोग

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने आज (सोमवार,19 जनवरी को) भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को साफ निर्देश दिया कि पश्चिम बंगाल में चल रहे विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण (SIR) के दौरान जिन करीब 1.25 करोड़ लोगों के खिलाफ "तार्किक विसंगतियों" (logical discrepancy) की आपत्ति उठाई गई है, उन सभी के नाम पब्लिश किए जाएं। देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने ये आदेश दिया है। पीठ में CJI के अलावा, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस जॉयमाल्य बागची भी शामिल हैं। सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा कि दस्तावेजों के वेरिफिकेशन के लिए करीब दो करोड़ लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं।   सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग को यह समझना चाहिए कि पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन की वजह से लोग कितने "तनाव" में हैं। बार एंड बेंच की रिपोर्ट में कहा गया है कि ये नोटिस मोटे तौर पर तीन कैटेगरी में बांटे गए हैं- मैप्ड, अनमैप्ड और लॉजिकल गड़बड़ी। कोर्ट ने आगे कहा कि 'लॉजिकल गड़बड़ी' कैटेगरी के तहत, अधिकारियों ने पिता के नाम में गड़बड़ी, माता-पिता की उम्र में गड़बड़ी और दादा-दादी की उम्र में अंतर देखा है। इसी दौरान अदालत ने गौर किया कि राज्य में 1.25 करोड़ मतदाता “तार्किक विसंगतियों” की सूची में शामिल हैं। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग को पश्चिम बंगाल के ग्राम पंचायत भवनों, तालुका प्रखंड कार्यालयों और वार्ड कार्यालयों में “तार्किक विसंगतियों” की सूची में शामिल लोगों के नाम प्रदर्शित करने का निर्देश दिया। बता दें कि SIR के दौरान मतदाताओं के विवरण में कई किस्म की विसंगतियां पाई गई हैं। राज्य में 2002 की मतदाता सूची से संतानों के संबंध में तार्किक विसंगतियों में माता-पिता के नाम का बेमेल होना और मतदाता और उनके माता-पिता के बीच आयु का अंतर 15 वर्ष से कम या 50 वर्ष से अधिक होना भी शामिल है। पीठ ने कहा कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के जारी विशेष गहन पुनरीक्षण से प्रभावित होने की संभावना वाले लोगों को अपने दस्तावेज या आपत्तियां प्रस्तुत करने की अनुमति दी जाए। उच्चतम न्यायालय ने निर्देश दिया कि दस्तावेज और आपत्तियां प्रस्तुत करने के लिए कार्यालय पंचायत भवनों या ब्लॉक कार्यालयों के भीतर स्थापित किए जाएंगे। पीठ ने कहा, “राज्य सरकार पंचायत भवनों और प्रखंड कार्यालयों में तैनाती के लिए राज्य निर्वाचन आयोग को पर्याप्त श्रमशक्ति उपलब्ध कराएगी।” न्यायालय ने कहा, “इस संबंध में, हम निर्देश देते हैं कि सुचारू कामकाज के लिए प्रत्येक जिला, ईसीआई या राज्य सरकार द्वारा कर्मचारियों के लिए जारी किए गए निर्देशों का सावधानीपूर्वक पालन करे।” उच्चतम न्यायालय ने निर्देश दिया कि पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) यह सुनिश्चित करने के लिए बाध्य होंगे कि कानून-व्यवस्था की कोई समस्या न हो और सभी गतिविधियां सुचारू रूप से पूरी हों। सर्वोच्च न्यायालय पश्चिम बंगाल में चल रही एसआईआर प्रक्रिया में मनमानेपन और प्रक्रियात्मक अनियमितताओं के आरोपों से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था।  

गणतंत्र दिवस समारोह: किसान-श्रमिक से लेकर वैज्ञानिक तक, 10 हजार खास मेहमानों को मिला आमंत्रण

नई दिल्ली कर्तव्य पथ पर आयोजित हो रहे 77वें गणतंत्र दिवस कार्यक्रम के लिए अपने क्षेत्र में उतकृष्ट कार्य करने वाले 10 हजार खास मेहमानों को भी आमंत्रित किया गया है। इनमें किसान, श्रमिक, वैज्ञानिक से लेकर एथलीट तक शामिल हैं। सरकार ने पिछले साल भी अलग-अलग क्षेत्रों में नाम कमाने वाले खास मेहमानों को आमंत्रित किया था। सरकारी कार्यक्रमों में भाग लेने वालों पर इसबार भी विशेष ध्यान दिया गया है। इसबार इन अतिथियों में आय और रोजगार सृजन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले बेस्ट इनोवेटर्स, रिसर्चर और स्टार्ट-अप, स्वयं सहायता समूह और प्रमुख सरकारी पहलों के अंतर्गत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले शामिल हैं। विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप के विजेता, नेचुरल तरीके से खेती करने वाले किसान और गगनयान, चंद्रयान आदि इसरो के अभियानों में अपने काम के जरिए नई पहचान बनाने वाले वैज्ञानिक आदि भी इसमें शामिल हैं। वहीं हेल्थ और एजुकेशन सेक्टर में उतकृष्ट कार्य करने वाले भी खास मेहमानों की लिस्ट में हैं। रेहड़ी-पटरी विक्रेता, गायक और पीएम मुद्रा योजना से लोन हासिल कर सफल बिजनेस चलाने वाली महिलाएं भी शामिल हैं। जमीनी स्तर पर विकास में उल्लेखनीय योगदान दे रहे लोगों को भी बुलाया गया है। इनके अलावा भी लिस्ट में कई क्षेत्र में उतकृष्ट कार्य करने वालों को आमंत्रित किया गया है। बैठने के लिए अलग से खास व्यवस्था सरकार का मानना है कि ऐसा करके राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को सम्मान तो मिलेगा ही साथ ही राष्ट्रीय कार्यक्रमों में जन भागीदारी बढ़ाने के सरकार के उद्देश्य को भी नई ऊर्जा मिलेगी। खास मेहमानों के लिए कर्तव्य पथ पर बैठने के लिए अलग से खास व्यवस्था की गई है। परेड के बाद इनके दिल्ली भ्रमण और मंत्रियों से संवाद की भी प्लानिंग की गई है। नदियों के नाम पर दर्शक दीर्घा आपको बता दें कि रक्षा मंत्रालय ने इस बार वीआईपी कल्चर खत्म करते हुए दर्शक दीर्घाओं का नामकरण नदियों के नामों- जैसे गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र, कावेरी, कोसी, कृष्णा, महानदी, नर्मदा, पेन्नार, पेरियार, रवि, सोन, सतलुज, तीस्ता, वैगई आदि पर किया है।  

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने अफजाल अंसारी के रुख की सराहना की, बोले सांसद– समर्थन में हूं

नई दिल्ली ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने गाजीपुर से समाजवादी पार्टी के सांसद अफजाल अंसारी को एक पत्र भेजकर गाय की गरिमा और सुरक्षा का विषय उठाने के लिए साधुवाद दिया है। इस पर खुशी जताते हुए सांसद अफजाल अंसारी ने कहा है कि वह विभिन्न मंचों से इस मुद्दे को उठाते रहते हैं और समय आने पर संसद में भी उठाएंगे। सांसद ने कहा कि इस्लाम धर्म के मानने वालों की गाय के प्रति भावना के सवाल पर लोगों में गलत धारणा भर दी गई है। गाय का घी सभी के लिए बहुत मुफीद है, अमृत समान है। मुसलमानों के बारे में यह गलत प्रोपेगंडा है। इस देश में हिंदू धर्म की धार्मिक मान्यताओं को आहत करने की मुसलमानों की कभी मंशा नहीं रही।   सांसद अफजाल अंसारी ने कहा कि बचपन में जब हमें नजला हो जाता था तो मां गाय का पुराना घी मंगाकर छाती पर मल कर सेंक देती थी। यह सर्वोत्तम दवा मानी जाती थी। माना जाता था कि नजला और छाती की जकड़न ठीक हो जाएगी। सांसद ने ये बातें यू ट्यूब चैनल ‘बृजभूषण मारकंडेय’ से बातचीत के दौरान कहीं। अफजाल अंसारी ने कहा कि लोगों में गलत धारणा भर दी गई है कि मुसलमान गाय का मांस खाने के लिए आतुर है। ऐसा है नहीं और यदि कोई ऐसा सोचता है तो वह या तो अपने नबी की बातों को समझ ही नहीं पाया या पढ़ नहीं पाया या सुन नहीं पाया। सांसद ने कहा कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने जब गोरक्षा के लिए कदम उठाया तो मुझे बहुत अच्छा लगा। गाजीपुर के सांसद ने कहा कि शंकराचार्य जी के इस अभियान का मैं समर्थक हूं। सार्वजनिक मंचों पर प्रशंसा करता हूं। समय आएगा तो संसद में भी बोलूंगा। गोरक्षा के लिए मुखर हैं शंकराचार्य बता दें कि ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद लंबे समय से गौ रक्षा के लिए मुखर हैं। वह गाय को राष्ट्र माता घोषित करने, गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और पूरे देश के लिए समान कानून बनाने की मांग करते हैं। अपनी इस मांग को लेकर उन्होंने 'गौ प्रतिष्ठा यात्रा' जैसे आंदोलन चलाए हैं। वह देश भर में गौ रक्षा के प्रति जन-जागृति लाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। इसके साथ ही वह राजनीतिक दलों से इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाने की अपील करते हैं। वह लोगों से गौ रक्षक उम्मीदवारों का समर्थन करने की अपील करते हैं।  

‘अब शांति मेरी जिम्मेदारी नहीं’ नोबेल पर भड़के ट्रंप, नॉर्वे PM को लिखा पत्र लीक

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर जुनून अब अपने अगले शिखर तक पहुंचता नजर आ रहा है। इस बार की नोबेल विजेता मचाडो ने भले ही उन्हें अपना नोबेल पदक सौंप दिया हो, लेकिन इसके बाद भी ट्रंप का नॉर्वे की नोबेल समिति को लेकर गुस्सा कम नहीं हुआ है। उन्होंने नॉर्वे के पीएम जोनास गहर स्टोरे को एक पत्र लिखकर कहा है कि अब, जबकि उन्हें नोबेल पुरस्कार नहीं दिया गया है, तो वह 'केवल शांति' के बारे में सोचने की जरूरत महसूस नहीं करते हैं।   रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्टोरे को लिखे एक पत्र में उन्हें नोबेल पुरस्कार न दिए जाने का जिक्र किया। इतना ही नहीं उन्होंने नोबेल समिति में नॉर्वे सरकार की भूमिका को अपनी विदेश नीति से भी जोड़ा। उन्होंने लिखा, "आपके देश ने मुझे 8 से अधिक युद्धों को रोकने के बावजूद नोबेल शांति पुरस्कार न देने का निर्णय लिया, इसलिए अब मुझे केवल शांति के बारे में सोचने की कोई बाध्यता महसूस नहीं होती, हालांकि शांति हमेशा सर्वोपरि रहेगी, लेकिन अब मैं इस बारे में सोच सकता हूं कि संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए क्या अच्छा और उचित है।" ट्रम्प ने आगे ग्रीनलैंड पर डेनमार्क की संप्रभुता पर सवाल उठाया और तर्क दिया कि न तो डेनमार्क और न ही मौजूदा सुरक्षा व्यवस्थाएं इस क्षेत्र को प्रमुख शक्तियों से बचा सकती हैं। उन्होंने कहा, "डेनमार्क अकेले चीन और रूस जैसी शक्तियों से ग्रीनलैंड की रक्षा नहीं कर सकता। वैसे भी उसके पास ग्रीनलैंड के स्वामित्व का कोई अधिकार क्यों है? उनके पास कोई लिखित दस्तावेज नहीं है। बस इतना है कि सैंकड़ों सालों पहले एक नाव ने वहां पड़ाव डाल लिया था, ऐसे तो हमारी भी सैकड़ों नावें वहां उतरती थीं।" अमेरिका के लिए कुछ करे नाटो नाटो में अमेरिका की भूमिका पर बात करते हुए ट्रंप ने दावा किया, "नाटो की स्थापना के बाद से अमेरिका ने किसी भी अन्य देश की तुलना में इसके लिए अधिक काम किया है, और अब नाटो को भी संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए कुछ करना चाहिए। जब तक ग्रीनलैंड पर अमेरिका का पूर्ण नियंत्रण नहीं हो जाता, तब तक दुनिया सुरक्षित नहीं रहेगी।”  

आतंक के मुद्दे पर जयशंकर का कड़ा रुख, पोलैंड के डिप्टी पीएम को पाकिस्तान की सच्चाई बताई

नई दिल्ली भारत ने पोलैंड को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि सीमा पार आतंकवाद के मामले में वह सीधे या अप्रत्यक्ष तरीके से पाकिस्तान का समर्थन ना करे। इसके अलावा विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रूस के साथ व्यापारिक संबंध बनाए रखने पर भी गलत तरीके से निशाना बनाए जाने को लेकर गहरी चिंता जताई है। बता दें कि पोलैंड के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री राडोस्लॉ सिकोर्सकी इन दिनों भारत की यात्रा पर हैं। पड़ोस के आतंकियों की सहायता बंद करें विदेश मंत्री डा. एस जयशंकर ने पोलैंड से आतंकवाद को कतई बर्दाश्त न करने की नीति अपनाने का आग्रह करते हुए कहा है कि उसे भारत के पड़ोस में आतंकवादी ढांचों को किसी भी प्रकार से सहायता नहीं देनी चाहिए। डा. जयशंकर ने भारत यात्रा पर आये पोलैंड के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की के साथ सोमवार को यहां वार्ता के दौरान शुरुआती बयान में कहा कि पोलैंड इस क्षेत्र के लिए कोई अजनबी नहीं हैं और वह सीमा-पार आतंकवाद की लंबे समय से चली आ रही चुनौती से भली-भांति परिचित हैं। उन्होंने कहा कि पोलैंड को आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति अपनानी चाहिए और हमारे पड़ोस में आतंकवादी ढांचे को किसी भी प्रकार से सहायता नहीं करनी चाहिए। विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों पक्षों की बातचीत में क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर चर्चा स्वाभाविक रूप से शामिल होगी। विशेष रूप से अपने-अपने पड़ोस के संबंध में आकलनों का आदान-प्रदान उपयोगी रहेगा। उन्होंने कहा कि वह यूक्रेन संघर्ष और उसके प्रभावों पर भारत के विचार पहले भी स्पष्ट रूप से साझा कर चुके हैं और उन्होंने जोर देकर कहा है कि चुनकर भारत को निशाना बनाना न केवल अनुचित बल्कि अन्यायपूर्ण भी है। विदेश मंत्री ने कहा कि वह आज एक बार फिर इस बात को दोहरा रहे हैं। दोनों की हैं अलग-अलग चुनौतियां विदेश मंत्री ने कहा कि यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया में काफी उथल-पुथल है। उन्होंने कहा कि भारत और पोलैंड अलग-अलग क्षेत्रों में स्थित हैं जिनकी अपनी-अपनी चुनौतियां और अवसर हैं इसे देखते हुए विचारों और दृष्टिकोणों का आदान-प्रदान करना स्वाभाविक रूप से उपयोगी है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध भी निरंतर प्रगति कर रहे हैं लेकिन इन पर निरंतर ध्यान दिए जाने की जरूरत है। भारत और पोलैंड के बीच परंपरागत रूप से गर्मजोशीपूर्ण और मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं। हाल के वर्षों में ये संबंध उच्च-स्तरीय राजनीतिक आदान-प्रदान तथा सशक्त आर्थिक और लोगों के बीच संपर्कों से आगे बढकर मजबूत हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वर्ष 2024 की पोलैंड यात्रा के दौरान संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया गया। डा. जयशंकर ने कहा कि दोनों देश बातचीत के दौरान 2024 से 28 तक कार्ययोजना की समीक्षा करेंगे जिसके माध्यम से हम अपनी रणनीतिक साझेदारी की पूरी क्षमता को साकार करना चाहते हैं। इसके अलावा व्यापार और निवेश, रक्षा और सुरक्षा, स्वच्छ प्रौद्योगिकियों तथा डिजिटल नवाचार में सहयोग को आगे बढ़ाने के तरीकों पर भी चर्चा करेंगे। विदेश मंत्री ने कहा कि पोलैंड मध्य यूरोप में भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है और दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 7 अरब डॉलर है जिसमें पिछले एक दशक में लगभग 200 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। पोलैंड में भारतीय निवेश तीन अरब डॉलर से अधिक हो चुका है, जिससे पोलैंड के नागरिकों के लिए रोजगार के अनेक अवसर सृजित हुए हैं। भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि, बड़े बाजार का आकार और निवेश-अनुकूल नीतियाँ वहां के व्यवसायों के लिए अपार अवसर प्रदान करती हैं। रूस से व्यापारिक संबंधों को लेकर निशाना बनाना ठीक नहीं भारत ने रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच, मॉस्को के साथ व्यापारिक संबंधों को लेकर नई दिल्ली को "चुनिंदा और अनुचित तरीके से निशाना बनाए जाने" पर पोलैंड के समक्ष गहरी चिंता व्यक्त की है। यह निशाना टैरिफ और अन्य दबावकारी हथकंडों के माध्यम से साधा जा रहा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने वारसॉ को सीमा पार आतंकवाद से संबंधित मामलों में पाकिस्तान को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी प्रकार का समर्थन न देने की कड़ी चेतावनी दी है।

डॉ. चिन्मय पण्ड्या: शिक्षा केवल ज्ञान नहीं, चेतना और समझ का प्रकाश है

हरिद्वार हरिद्वार स्थित जीवन विद्या आलोक केन्द्र देवसंस्कृति विश्वविद्यालय का सातवां समावर्तन समारोह गंगा तट पर आध्यात्मिक संतों, देसंविवि के प्रतिकुलपति व विदेशी विशिष्ट मेहमानों के सानिध्य में सम्पन्न हुआ। समारोह का शुभारंभ राष्ट्रगान व देसंविवि के कुलगीत के साथ हुआ। समावर्तन समारोह के मुख्य अतिथि जूना अखाड़ा के पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि जी ने कहा कि गायत्री परिवार ने बीते दशकों में युग चेतना को जगाने का ऐतिहासिक कार्य किया है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग के अधिकार एवं कर्त्तव्यो के प्रति जाग्रत करने वाला एक व्यापक सांस्कृतिक अभियान है। उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार ने नर-नारी समानता को व्यवहार में उतारते हुए महिलाओं को आत्मसम्मान, शिक्षा और नेतृत्व का अवसर प्रदान कर रहा है। साथ ही छुआछूत जैसी सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन, समाज में एकता-समता की भावना के विस्तार तथा मानवीय मूल्यों की पुनर्स्थापना में भी इसकी भूमिका अत्यंत प्रभावशाली रही है। उन्होंने कहा कि आज जब समाज अनेक प्रकार की चुनौतियों से गुजर रहा है, तब गायत्री परिवार द्वारा दिया गया यह विचार-दर्शन नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हो रहा है। इस अवसर पर समारोह के अध्यक्ष देसंविवि के प्रतिकुलपति डॉ चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि “आज की शिक्षा का लक्ष्य केवल बाहर की चुनौतियों से जूझना नहीं, बल्कि भीतर की सुप्त चेतना को जगाना है। बाहर की आग को बुझाना और अंदर की आग-सेवा, सद्भाव और राष्ट्रभाव को प्रज्वलित करना ही सच्ची दीक्षा है।” उन्होंने कहा कि यह उपाधि एक परिवर्तनकारी यात्रा का आरंभ है, ऐसी यात्रा जो चेतना के मार्ग को रूपांतरण के मार्ग में परिवर्तित करती है। यदि युवा अपनी शिक्षा को सेवा, संस्कार और साधना से जोड़ दें, तो वे न केवल अपने जीवन को सार्थक बना सकते हैं, बल्कि राष्ट्र और मानवता के उत्थान में भी निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि जब चिंतन, चरित्र और व्यक्तित्व ऊपर की ओर उठना प्रारंभ करते हैं, तभी व्यक्ति अपने जीवन को सही दिशा देने में सक्षम होता है। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य मानवीय चेतना का विकास और समाज के प्रति उत्तरदायित्व का बोध कराना है। यह दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के लिए एक नई शुरुआत, नई जिम्मेदारी और नए संकल्प का प्रतीक बनकर सामने आया, जहाँ शिक्षा को जीवन निर्माण की प्रक्रिया के रूप में देखने का संदेश स्पष्ट रूप से उभरकर आया। इस दौरान हाउस आफ लार्ड लंदन के सदस्य लार्ड कृष रावल ने कहा कि देसंविवि शैक्षणिक संस्थान के साथ ही एक आध्यात्मिक सांस्कृतिक अभियान के रूप में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शानदार कार्य किया है। हाउस आफ लार्ड लंदन के सदस्य लार्ड मेंल्डसन ने कहा कि लंदन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने सम्पूर्ण गायत्री परिवार अपनी शुभेच्छा भेजी है। इस अवसर पर शांतिकंुज व्यवस्थापक योगेन्द्र गिरि, स्वामी राम हिमालयन विवि के विवि कुलपति डॉ विजय धस्माना, डॉ अजय तिवारी, डॉ फिरोज मिस्त्री, डॉ जहान मिस्त्री, डॉ शोभित माथुर, डॉ दिनेश शास्त्री, डॉ सतीश कुमार शर्मा, पौलैण्ड स्थित भारत के राजदूत कार्तिकेय जौहरी सहित विश्व के 20 से अधिक देशों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। प्रतिकुलपति ने अतिथियों को रुद्राक्ष की माला, युग साहित्य आदि भेंटकर सम्मानित किया।

अयोध्या के बाद अब बंगाल! भव्य राम मंदिर और भाजपा कनेक्शन पर सियासी हलचल

कोलकाता ममता बनर्जी की अध्यक्षता वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) शासित राज्य पश्चिम बंगाल में इस साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं लेकिन उससे पहले वहां मंदिर-मस्जिद के बहाने ध्रुवीकरण की कोशिशें तेज हो गई हैं। पिछले महीने तृणमूल कांग्रेस से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने राज्य के मुर्शीदाबाद जिले के बेलदांगा में 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद का शिलान्यास किया था। उसके बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद दुर्गा आंगन और महाकाल मंदिर का शिलान्यास किया और अब नादिया जिले के शांतिपुर में ‘बंगाली राम’ थीम पर भव्य राम मंदिर बनाने की योजना सामने आई है, जो इन दिनों चुनावी राज्य में चर्चा का विषय बनी हुई है।   क्या है ‘बंगाली राम मंदिर’ की योजना? यह मंदिर सिर्फ पूजा-पाठ का स्थल नहीं होगा, बल्कि बंगाल की सांस्कृतिक विरासत को समर्पित एक बड़ा केंद्र बनेगा। मंदिर की अवधारणा 15वीं शताब्दी के प्रसिद्ध कवि कृतिबास ओझा की परंपरा पर आधारित है। कृतिबास ओझा ने ही संस्कृत रामायण का बंगला अनुवाद ‘श्रीराम पंचाली’ लिखा था, जिसे आज भी बंगाल के घर-घर में पढ़ा जाता है। इसी वजह से भगवान राम के इस रूप को ‘बंगाली राम’ या ‘हरा राम’ कहा जाता है। कौन बना रहा है मंदिर? रिपोर्ट के मुताबिक, इस मंदिर का निर्माण श्री कृतिबास राम मंदिर ट्रस्ट करवा रहा है। यह ट्रस्ट 2017 से ही इस परियोजना पर काम कर रहा है। रविवार को ट्रस्ट ने इस बात की जानकारी दी है कि मंदिर के लिए जमीन का अंतिम सर्वे पूरा कर लिया गया है। इसे परियोजना की औपचारिक शुरुआत माना जा रहा है। भाजपा से क्या कनेक्शन? इस ट्रस्ट के अध्यक्ष और शांतिपुर के पूर्व तृणमूल विधायक अरिंदम भट्टाचार्य हैं, जो अब भाजपा में हैं। हालांकि, उनका कहना है कि यह कोई चुनावी परियोजना नहीं है। उन्होंने बताया कि शांतिपुर भक्ति आंदोलन की धरती रही है और कृतिबास ओझा ने राम को बंगाली संस्कृति से जोड़ा। इसी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए यहां भव्य राम मंदिर के निर्माण की योजना बनाई गई है, जो निर्माण के शुरुआती दौर में पहुंच चुका है। कितनी जमीन और कितनी लागत? उन्होंने बताया है कि इस मंदिर के लिए 15 बीघा जमीन स्थानीय निवासी लितन भट्टाचार्य और पूजा बनर्जी ने दान की है। इस परियोजना को करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से साल 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह मंदिर परिसर में केवल मंदिर ही नहीं, बल्कि एक ऐसा केंद्र होगा, जहां सांस्कृतिक केंद्र, मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज और शोध केंद्र भी होंगे। नेपाल के प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर से जुड़े वैदिक विद्वान अर्जुन दासतुला को इस मंदिर का संरक्षक बनाया गया है। क्यों उठ रहे हैं सवाल? स्थानीय निवासियों का कहना है कि शांतिपुर का संबंध कृतिबास ओझा की रामायण से जुड़ा है, इसलिए यहां राम मंदिर बनना चाहिए। कई लोग आगे भी जमीन दान करने की इच्छा जता रहे हैं लेकिन कुछ लोग इसकी टाइमिंग पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि मंदिर निर्माण ऐसे समय में सामने आया है जब बंगाल में मंदिर-मस्जिद की राजनीति तेज है, लेकिन ट्रस्ट का कहना है कि इसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है और यह पूरी तरह धार्मिक और सांस्कृतिक परियोजना है। शांतिपुर का ऐतिहासिक महत्व वहीं, अरिंदम भट्टाचार्य ने कहा कि अगर सरकार सहयोग करना चाहे तो उसका स्वागत किया जाएगा। हुगली नदी के तट पर स्थित शांतिपुर भक्ति आंदोलन, चैतन्य महाप्रभु की परंपरा और कीर्तन संस्कृति का प्रमुख केंद्र रहा है। ऐसे में ‘बंगाली राम मंदिर’ इस क्षेत्र को एक नई धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान दे सकता है।