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सबसे बड़ी पार्टी की कमान नितिन नवीन के हाथ, निर्विरोध अध्यक्ष नियुक्त

नई दिल्ली नितिन नवीन भारतीय जनता पार्टी (BJP) के निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए हैं। रिटर्निंग ऑफिसर के लक्ष्मण ने बताया कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर नितिन नवीन के पक्ष में 37 सेट नॉमिनेशन पेपर फाइल किए गए। बीजेपी अध्यक्ष पद के लिए नितिन नवीन के नाम का प्रस्ताव करने वालों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल थे। सभी नामांकन पत्र वैध पाए गए। नामंकन में मौजूद रहे बीजेपी के दिग्गज नितिन नवीन के नामांकन में बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष अध्यक्ष जेपी नड्डा और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और धर्मेंद्र प्रधान, भूपेंद्र यादव और किरेन रिजिजू सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में रिटर्निंग ऑफिसर के. लक्ष्मण को कागजात का पहला सेट सौंपा, जबकि अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू और कई राज्यों के नेताओं द्वारा अतिरिक्त नामांकन प्रस्तुत किए गए, जो नबीन के लिए समर्थन की व्यापकता को रेखांकित करता है।   कैसे होता है भाजपा अध्यक्ष का चुनाव? भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव पार्टी की राष्ट्रीय परिषद और राज्य परिषदों के प्रतिनिधियों से मिलकर बने निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है। इस पूरे प्रकिया की देखरेख पार्टी के राष्ट्रीय प्रतिवेदक द्वारा की जाती है। किसी राज्य के निर्वाचक मंडल के कोई भी 20 सदस्य संयुक्त रूप से राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए ऐसे व्यक्ति का नाम प्रस्तावित कर सकते हैं जो चार कार्यकाल तक पार्टी का सक्रिय सदस्य रहा हो और उससकी सदस्यता के 15 साल हो चुके हों। लेकिन ऐसा संयुक्त प्रस्ताव कम-से-कम पांच ऐसे राज्यों से आना चाहिए, जहां राष्ट्रीय परिषद के लिए चुनाव हो चुके हों।  

जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमला जारी, मुठभेड़ में कमांडो की शहादत, कल 8 सुरक्षाकर्मी घायल

जम्मू-कश्मीर जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में आंतकियों के साथ चल रही मुठभेड़ में विशेष दल का एक कमांडो शहीद हो गया है। सेना ने इसकी पुष्टी की है। शहीद कमांडो की पहचान उत्तराखंड निवासी गजेंद्र सिंह के रूप में हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक गजेंद्र रविवार को आतंकियों की गोलीबारी में घायल नौ जवानों में शामिल थे। अत्याधिक घायल होने की वजह से उन्होंने इलाज के दौरान अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।   नाग्रोटा स्थित व्हाइट नाइट कोर ने सोमवार को शहीद जवान को श्रद्धांजलि दी। सेना ने कहा, "व्हाइट नाइट कोर के जीओसी और सभी रैंक हवलदार गजेंद्र सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, जिन्होंने चल रहे ऑपरेशन त्राशी I के दौरान एक आतंकवाद विरोधी अभियान को बहादुरी से अंजाम देते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया।" इसमें आगे कहा गया, "हम उनके अदम्य साहस को नमन करते हैं और इस गहरे दुख की घड़ी में शोक संतप्त परिवार के साथ मजबूती से खड़े हैं।" रविवार दोपहर करीब चतरू के उत्तर-पूर्व में स्थित सोनार वन क्षेत्र में सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस के संयुक्त तलाशी अभियान के दौरान गोलीबारी शुरू हो गई। अधिकारियों के अनुसार, तलाशी दल ने जैश-ए-मोहम्मद के संदिग्ध दो से तीन विदेशी आतंकवादियों को रोका, जिन्होंने ग्रेनेड का इस्तेमाल करते हुए जवाबी हमला किया। किश्तवाड़ में दूसरे दिन भी सर्च ऑपरेशन जारी है। अधिकारियों के मुताबिक, स्थानीय जंगलों में पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद से जुड़े 2 से 3 आतंकी छिपे हुए हैं। आतंकियों को पकड़ने के लिए सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बोलं की कई टीमें इलाके में तैनात हैं। ड्रोन और आर्मी के स्पेशल कुत्तों की मदद से भी आतंकियों की खोजबीन की जा रही है।  

दाल टैरिफ पर भारत का फैसला, अमेरिका में मचा हंगामा, ट्रंप तक पहुंचा मामला

वॉशिंगटन अमेरिका और भारत के बीच ट्रेड डील एक बार फिर अटकती नजर आ रही है। इस बार इस डील के रास्ते में रोड़ा बनी है दाल। दो अमेरिकी सांसदों ने इसको लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पत्र लिखा है। इसमें ट्रंप से कहा गया है कि वो भारत पर दबाव बनाएं कि अमेरिकी दालों के आयात से 30 फीसदी इंपोर्ट ड्यूटी हटाई जाए। अमेरिकी सांसदों ने भारत द्वारा लगाई गई इंपोर्ट ड्यूटी को गैर-जरूरी बताया गया है। साथ ही इनका यह भी कहना है कि इसकी वजह से अमेरिकी उत्पादकों को काफी नुकसान हो रहा है। बता दें कि भारत ने यह आयात शुल्क अमेरिका द्वारा भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने के बाद लगाया है। आशंका है कि इसके चलते अमेरिका-भारत के बीच चल रही ट्रेड डील फिर पटरी से उतर सकती है।   सांसदों के लेटर में क्या कहा गया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यह पत्र रिपब्लिकन सीनेटरों ने लिखे हैं। इनमें से एक हैं मोंटाना से स्टीव डेन्स और दूसरे हैं उत्तरी डकोटा से केविन क्रेमर। पत्र में कहा गया है कि उनके राज्य दो बड़े दाल उत्पादकों में से हैं, जिसमें मटर भी शामिल है। भारत इनका सबसे बड़ा उपभोक्ता है, जो विश्व का 27 फीसदी है। इसके मुताबिक भारत में लेंटिल्स, चिकपीज, सूखी दालों और मटर की सबसे ज्यादा खपत है। लेकिन भारत ने इन श्रेणियों में अमेरिकी निर्यात पर टैरिफ लगा रखा है। अमेरिकी सांसदों ने कहा कि भारत ने पिछले साल 30 अक्टूबर को पीली दाल पर भी 30 फीसदी टैरिफ लगा दिया। पीएम मोदी से बात करने की सलाह अमेरिकी सांसदों ने भारत द्वारा लगाए गए टैरिफ को अनफेयर बताते हुए अमेरिकी दाल उत्पादकों को नुकसान होने की बात कही है। साथ ही अमेरिकी सांसदों ने राष्ट्रपति ट्रंप को सलाह दी है कि वह दाल पर भारत द्वारा लगाए गए टैरिफ को लेकर पीएम मोदी से बात करें। ताकि दोनों देशों के बीच एक सहयोग बने, जिससे अमेरिकी उत्पादकों और भारतीय उपभोक्ताओं दोनों को फायदा मिल सके। दोनों सीनेटरों ने अपने राज्यों में बेहतर कृषि उत्पादों के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति का शुक्रिया भी अदा किया। लंबे समय से तनाव बता दें कि टैरिफ के मुद्दे पर भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से तनाव कायम है। इसकी शुरुआत अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर 50 प्रतिशत शुल्क (टैरिफ) लगाने के बाद हुई। इस टैरिफ में रूसी कच्चे तेल की खरीद पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क भी शामिल है। इन तनावों के बीच अमेरिकी अधिकारियों द्वारा भारत के प्रति गलत टिप्पणियां माहौल को और खराब कर रही हैं। कुछ दिन पहले ही वाइट हाउस के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने एक बार फिर भारत की आलोचना करते हुए सवाल उठाया कि अमेरिका के नागरिक भारत में कृत्रिम मेधा (एआई) के लिए भुगतान क्यों कर रहे हैं?  

भारत की ग्रोथ को लेकर IMF का सकारात्मक दृष्टिकोण, FY26 में 7.3% की वृद्धि का अनुमान

नई दिल्ली.  भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने एक बार फिर भरोसा जताया है. ताजा वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में IMF ने भारत के आर्थिक विकास अनुमान को बढ़ाया है. रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा और अगले वित्त वर्ष में भारत की ग्रोथ पहले के आकलन से तेज रहने की उम्मीद है. बेहतर आर्थिक प्रदर्शन, मजबूत घरेलू मांग और लगातार बढ़ती गतिविधियों ने भारत को दुनिया की तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बनाए रखा है. वहीं निजी संस्था मूडीज रेटिंग्स ने सोमवार को अनुमान लगाया कि भारत मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में 7.3 प्रतिशत की ग्रोथ हासिल करेगा. मूडीज ने कहा कि मजबूत आर्थिक विस्तार से औसत घरेलू आय को सपोर्ट मिलेगा और इंश्योरेंस प्रोटेक्शन की मांग बढ़ेगी. FY26 और FY27 के लिए ग्रोथ अनुमान बढ़ा IMF ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है. यह अक्टूबर में दिए गए अनुमान से 0.7 प्रतिशत ज्यादा है. वहीं, FY27 के लिए ग्रोथ अनुमान को 6.2 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.4 प्रतिशत कर दिया गया है. IMF का कहना है कि FY28 में भी विकास दर लगभग 6.4 प्रतिशत के आसपास स्थिर रह सकती है, हालांकि अस्थायी और चक्रीय समर्थन धीरे-धीरे कम होंगे. मजबूत तिमाही प्रदर्शन से बढ़ा भरोसा IMF के अनुसार, साल की तीसरी तिमाही में उम्मीद से बेहतर नतीजे और चौथी तिमाही में मजबूत रफ्तार ने ग्रोथ अनुमान को ऊपर ले जाने में अहम भूमिका निभाई. रिपोर्ट में कहा गया है कि अनुकूल आधार प्रभाव और अल्पकालिक कारकों से फिलहाल अर्थव्यवस्था को सहारा मिला है. साल की पहली छमाही में भारत की अर्थव्यवस्था 8 प्रतिशत से ज्यादा की दर से बढ़ी, जिसने वैश्विक एजेंसियों को सकारात्मक संकेत दिया. सरकार और वर्ल्ड बैंक के अनुमान से मेल भारत सरकार ने 6 जनवरी को जारी अपने पहले अग्रिम अनुमान में FY26 की ग्रोथ 7.4 प्रतिशत रहने की बात कही थी, जो IMF के नए अनुमान के काफी करीब है. इससे पहले वर्ल्ड बैंक भी भारत को लेकर अपना अनुमान बढ़ा चुका है. वर्ल्ड बैंक ने FY26 में 7.2 प्रतिशत ग्रोथ और उसके बाद करीब 6.5 प्रतिशत विकास दर का अनुमान लगाया है. इसकी वजह मजबूत घरेलू मांग और उपभोक्ता खर्च में स्थिरता बताई गई है. वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत की भूमिका IMF ने सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर भी उम्मीदें बढ़ाई हैं. 2026 के लिए वैश्विक ग्रोथ अनुमान 3.1 प्रतिशत से बढ़ाकर 3.3 प्रतिशत कर दिया गया है. अमेरिका की ग्रोथ 2.4 प्रतिशत और चीन की 4.5 प्रतिशत रहने की संभावना जताई गई है. IMF का मानना है कि व्यापार नीतियों से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, निवेश और निजी क्षेत्र की अनुकूलन क्षमता दुनिया की अर्थव्यवस्था को संतुलन में बनाए हुए है.

23 करोड़ लोग प्रभावित: गंगा, ब्रह्मपुत्र और गोदावरी क्षेत्र डूबने के कगार पर

  नई दिल्ली एक नई वैश्विक स्टडी के अनुसार भारत के कई बड़े नदी डेल्टा क्षेत्र तेजी से डूब रहे हैं. यह डूबना समुद्र के बढ़ते जल स्तर से भी तेज है. गंगा-ब्रह्मपुत्र, महानदी, ब्राह्मणी और गोदावरी जैसे डेल्टा सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. शोधकर्ताओं का कहना है कि अत्यधिक भूजल निकासी इस समस्या का मुख्य कारण है, जिससे लाखों लोगों को बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है. डेल्टा क्षेत्र क्या हैं और क्यों महत्वपूर्ण? नदी डेल्टा वो जगहें हैं जहां नदियां समुद्र में मिलती हैं. ये क्षेत्र सिर्फ 1 प्रतिशत भूमि पर फैले हैं, लेकिन दुनिया की लगभग 6 प्रतिशत आबादी (35 से 50 करोड़ लोग) यहां रहती है. भारत में गंगा-ब्रह्मपुत्र, महानदी, ब्राह्मणी, गोदावरी, कावेरी और कबनी जैसे डेल्टा लाखों लोगों का घर हैं. ये डेल्टा कृषि, मछली पालन, बंदरगाहों और व्यापार के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं. वे आर्थिक, पर्यावरणीय और सामाजिक रूप से जरूरी हैं. लेकिन ये बहुत नाजुक हैं क्योंकि ज्यादातर हिस्से समुद्र तल से सिर्फ 2 मीटर ऊपर हैं. जलवायु परिवर्तन से बढ़ते समुद्र स्तर, तूफान, बाढ़ और मौसम में बदलाव इन क्षेत्रों को खतरे में डाल रहे हैं. समस्या क्या है: भूमि का डूबना (सब्सिडेंस) स्टडी 'नेचर' जर्नल में प्रकाशित हुई है. इसमें 29 देशों के 40 बड़े डेल्टाओं का विश्लेषण किया. इनमें से आधे से ज्यादा डेल्टा सालाना 3 मिलीमीटर से ज्यादा डूब रहे हैं. 13 डेल्टाओं में डूबने की गति समुद्र स्तर के बढ़ने (लगभग 4 मिलीमीटर प्रति वर्ष) से भी तेज है.     ब्राह्मणी और महानदी डेल्टा: सबसे तेज डूब रहे हैं. ब्राह्मणी के 77 प्रतिशत और महानदी के 69 प्रतिशत क्षेत्र डूब रहे हैं. कई हिस्सों में गति 5 मिलीमीटर प्रति वर्ष से ज्यादा है.      गंगा-ब्रह्मपुत्र, गोदावरी, कावेरी और कबनी: इनमें भी बड़े पैमाने पर डूबना हो रहा है. 90 प्रतिशत से ज्यादा क्षेत्र प्रभावित है. दुनिया भर में लगभग 4.6 लाख वर्ग किलोमीटर डेल्टा भूमि डूब रही है, जो कुल डेल्टा क्षेत्र का 54-65% है. बड़े डेल्टा जैसे गंगा-ब्रह्मपुत्र, नील, मेकॉन्ग आदि कुल डूबते क्षेत्र का 57 प्रतिशत हिस्सा हैं. मुख्य कारण: भूजल की अत्यधिक निकासी मानवीय गतिविधियां डूबने का मुख्य कारण हैं. भारत में गंगा-ब्रह्मपुत्र और कावेरी डेल्टा में भूजल निकासी सबसे बड़ा दोषी है. कृषि, उद्योग और घरेलू उपयोग के लिए पानी निकाला जा रहा है, जो रिचार्ज होने से तेज है. इससे जमीन के नीचे की मिट्टी सिकुड़ जाती है. सतह नीचे चली जाती है. अन्य कारण…     बांध और बैराज: महानदी और कबनी जैसे डेल्टाओं में ऊपरी इलाकों के बांध नदियों की गाद (सिल्ट) को रोक देते हैं. पहले ये गाद डेल्टा को ऊंचा रखती थीं, लेकिन अब कमी से डूबना बढ़ रहा है.     जनसंख्या और भूमि उपयोग: ज्यादा लोग रहने से भूमि पर दबाव बढ़ता है.     समुद्र स्तर बढ़ना: जलवायु परिवर्तन से समुद्र ऊंचा हो रहा है, जो डूबने के साथ मिलकर खतरा दोगुना कर देता है. 18 डेल्टाओं में जैसे भारत के ब्राह्मणी, महानदी, गंगा-ब्रह्मपुत्र और गोदावरी, डूबना समुद्र स्तर बढ़ने से तेज है. इससे बाढ़ का खतरा बढ़ता है, भले समुद्र में बड़ा बदलाव न हो. लाखों लोगों का खतरा इन डेल्टाओं में रहने वाले 23 करोड़ से ज्यादा लोग बाढ़ के खतरे में हैं. शहर जैसे कोलकाता (गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा में) तेजी से डूब रहे हैं, जिससे बाढ़, खेती की हानि, नमक का पानी घुसना और बुनियादी ढांचे को नुकसान हो रहा है.     कृषि और जल संसाधन: खेत बर्बाद हो रहे हैं. मीठा पानी कम हो रहा है.     पर्यावरण: वेटलैंड्स (गीली भूमि) नष्ट हो रहे हैं, जो बाढ़ से बचाव करती हैं.     समाज: गरीब और ग्रामीण समुदाय सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. वे निचले इलाकों में रहते हैं. पलायन मुश्किल है. इससे सामाजिक तनाव बढ़ सकता है. स्टडी कहती है कि ये समस्याएं एक-दूसरे को मजबूत करती हैं, जिससे डेल्टा पृथ्वी के सबसे नाजुक परिदृश्य बन गए हैं. दुनिया का परिदृश्य यह समस्या सिर्फ भारत की नहीं है. नील (मिस्र), चाओ फ्राया (थाईलैंड), मेकॉन्ग (वियतनाम) जैसे डेल्टा भी प्रभावित हैं. शहर जैसे ढाका, शंघाई, बैंकॉक डूब रहे हैं. लेकिन भारत के कई डेल्टा अनप्रिपेयर्ड हैं – मतलब खतरा ज्यादा है लेकिन तैयारी कम, क्योंकि संस्थागत और आर्थिक संसाधन कम हैं. क्या किया जा सकता है? शोधकर्ता चेतावनी देते हैं कि अगर भूजल निकासी को नियंत्रित नहीं किया, गाद प्रवाह को बहाल नहीं किया और अनुकूलन योजनाएं नहीं बनाईं, तो आने वाले दशकों में बाढ़, भूमि हानि और विस्थापन बढ़ेगा.     भूजल प्रबंधन: निकासी पर रोक, रिचार्ज को बढ़ावा.     बांधों का प्रबंधन: गाद को डेल्टा तक पहुंचने दें.     अनुकूलन: बाढ़ रोधी दीवारें, मैनग्रूव लगाना.     नीतियां: स्थानीय समुदायों को शामिल करें, विशेषकर आदिवासी और ग्रामीणों को. यह अध्ययन हमें याद दिलाता है कि डेल्टा क्षेत्रों की रक्षा जरूरी है, वरना लाखों जीवन खतरे में पड़ जाएंगे. वैश्विक स्तर पर सहयोग और तत्काल कदम उठाने की जरूरत है.  

आसिम मुनीर का सख्त संदेश: पाकिस्तान के ‘मकसद’ पर फिर गरमाया बयान, क्या है अगला एजेंडा?

इस्लामाबाद पाकिस्तान के चीफ ऑफ डिफेंस, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का एक बयान काफी चर्चा में है। इस बयान में आसिम मुनीर ने कहा कि पाकिस्तान इस्लाम के नाम पर अस्तित्व में आया था। अब वह इस मोड़ पर है, जहां वह अपने इस लक्ष्य को हासिल कर सकता है। खास बात यह है कि जब मुनीर ने यह बात कही तब वहां पर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ, पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज समेत कई अन्य वरिष्ठ सिविल और मिलिट्री अधिकारी मौजूद थे। इसके अलावा कैबिनेट मंत्री, पॉलिटिकल लीडर्स और शरीफ परिवार के सदस्य मौजूद थे। मौका था, नवाज शरीफ के पोते और मरियम नवाज के बेटे जुनैद सफदर की शादी का रिसेप्शन का।   कहां बोल रहे थे मुनीर इस दौरान पत्रकारों से बात करते हुए आसिम मुनीर ने कहा कि पाकिस्तान तेजी से अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ रहा है। इंडिया टुडे के मुताबिक मुनीर ने कहा कि पाकिस्तान को इस्लाम के नाम पर बनाया गया था। आज यह इस्लामिक देशों में अलग अहमियत रखता है। उन्होंने आगे कहा कि अल्लाह के रास्ते पर आगे बढ़ना खास नियामत है। पाकिस्तान ने हाल के दिनों में मुस्लिम एकता के नाम पर कुछ देशों से डिफेंस और फाइनेंस की डील की है। इन देशों में सऊदी अरब और तुर्की का नाम प्रमुख है। इसके अलावा पाकिस्तान इस्लामिक नाटो बनाने की भी योजना बना रहा है। अंतर्राष्ट्रीय पहचान की बात इतना ही नहीं, मुनीर ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान का दबदबा बढ़ाने की बात की। संभवत: वह डोनाल्ड ट्रंप के साथ वाइट हाउस में मीटिंग और डिनर की तरफ इशारा कर रहे थे। इसके अलावा पाकिस्तान के गाजा पीस में शामिल होने का भी उन्होंने जिक्र किया। इतना ही नहीं, मुनीर ने यह भी बताने की कोशिश की कि मई 2025 में भारत के साथ युद्ध में पाकिस्तान हावी रहा था। कैसे अलग हैं मुनीर बता दें कि फील्ड मार्शल आसिम मुनीर अपने पूर्ववर्तियों से काफी अलग हैं। पिछले आर्मी चीफ ज्यादातर सैंडहर्स्ट-प्रशिक्षित अधिकारी थे, जो औपचारिक रूप से राजनीति और धर्म दोनों से दूर रहते थे, और उन्हें पश्चिमी संगीत और व्हिस्की का शौक था। इसके उलट मुनीर, हाफिए-ए-कुरान हैं। हाफिज-ए-कुरान उसे कहते हैं, जिसे कुरान याद है। ऐसे में मुनीर के लिए धर्म एक बड़ा आधार है। मुनीर, मिलिट्री इंटेलीजेंस और आईएसआई दोनों के मुखिया हैं। उनके पद ग्रहण करने के बाद से ही पाकिस्तानी सेना में धर्म की तरफ रुझान दिखाई देने लगा है। सेना में धर्म का बढ़ता प्रभाव मुनीर के नेतृत्व में, सेना ने न केवल राज्य की रक्षा करने के रूप में ही नहीं, बल्कि इस्लाम की रक्षा करने के रूप में भी अधिक स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया है। इसमें 7वीं सदी के अरबी और इस्लामी प्रतीकों का भारी इस्तेमाल किया गया है। सशस्त्र विरोधियों, जिनमें बलोचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा के विद्रोही शामिल हैं, को ‘फितना अल-खवारिज’ और ‘फितना अल-हिंदुस्तान’ कहा गया है, जिससे उन्हें धर्मभ्रष्ट विद्रोही और भारतीय दलाल के रूप में चित्रित किया गया है।  

भारत-UAE दोस्ती की नई तस्वीर: एयरपोर्ट पर पीएम मोदी ने UAE राष्ट्रपति का किया आत्मीय स्वागत

नई दिल्ली संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान एक दिन की आधिकारिक यात्रा पर सोमवार शाम राजधानी दिल्ली पहुंचे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रोटोकॉल तोड़ते हुए हवाई अड्डे जाकर स्वयं उनका स्वागत किया। शेख नाहयान की अब से कुछ देर बाद पीएम मोदी के साथ वार्ता होगी जिसके बाद संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति आज ही स्वदेश लौट जायेंगे। शेख नाहयान की यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर हो रही है।   संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति का पद संभालने के बाद यह उनकी भारत की तीसरी आधिकारिक यात्रा होगी, और पिछले एक दशक में यह उनकी भारत की पांचवीं यात्रा होगी। यह यात्रा हाल ही में हुए उच्च-स्तरीय आदान-प्रदान से मिली मज़बूत गति पर आधारित है, जिसमें सितंबर 2024 में अबू धाबी के शहजादा शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की यात्रा और पिछले वर्ष अप्रैल में अमीरात के उप प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री तथा दुबई के क्राउन प्रिंस शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम की यात्रा शामिल है। क्यों अहम है यह यात्रा उनकी भारत यात्रा पश्चिम एशिया में ईरान-अमेरिका संबंधों में आई तीव्र गिरावट, यमन को लेकर सऊदी अरब और यूएई के बीच बढ़ते तनाव और गाजा में अस्थिर राजनीतिक परिदृश्य के कारण उत्पन्न स्थिति के बीच हो रही है। यूएई के राष्ट्रपति की यात्रा के बारे में जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि व्यापार और निवेश, रक्षा उद्योग सहयोग और ऊर्जा पहलों पर भारतीय नेतृत्व के साथ वार्ता होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी दोनों देशों के नेताओं के बीच मुलाकात के दौरान चर्चा होने की संभावना है। सत्ता संभालने के बाद से नाहयान की यह भारत की तीसरी आधिकारिक यात्रा है, जबकि गत 10 वर्षों में यह उनकी पांचवीं यात्रा है। गौरतलब है कि खाड़ी क्षेत्र की दो प्रमुख शक्तियों यूएई और सऊदी अरब के बीच मतभेद हाल के दिनों में खुलकर सामने आए हैं, खासकर दक्षिणी यमन को लेकर। सऊदी अरब ने आरोप लगाया है कि यूएई वहां अलग दक्षिणी राज्य की मांग कर रहे अलगाववादी समूहों का समर्थन कर रहा है। दोनों देश उत्तरी यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए बने अरब गठबंधन का हिस्सा रहे हैं, लेकिन पर्दे के पीछे तेल-समृद्ध दक्षिणी यमन क्षेत्र और रणनीतिक रेड सी कॉरिडोर व बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य पर प्रभाव बढ़ाने की होड़ चलती रही है। दिसंबर 2025 में दक्षिणी यमन में तेज सैन्य और राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिले, जहां अलग दक्षिणी राज्य की मांग तेज हुई। इसके बाद सऊदी अरब ने क्षेत्र में हवाई हमले तेज किए और यूएई पर अलगाववाद को समर्थन देने का आरोप लगाया। यूएई ने तेजी से क्षेत्र से अपने कदम पीछे खींच लिए, जबकि रियाद ने तुर्की, पाकिस्तान, कतर और मिस्र के साथ एक नया समूह बनाकर अपनी स्थिति मजबूत की। ऐसे भू-राजनीतिक परिदृश्य में यूएई का भारत की ओर रुख करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि नई दिल्ली को एक स्थिर और भरोसेमंद साझेदार के रूप में देखा जाता है।    

16 भारतीय नाविक ईरान में फंसे, सरकार ने उनकी रिहाई के लिए उठाया कूटनीतिक कदम

नई दिल्ली  ईरान में जब्त किए गए वाणिज्यिक जहाज 'एमटी वैलेंट रोर' पर फंसे 16 भारतीय नाविकों की सुरक्षित घर वापसी के लिए भारत सरकार ने अपनी कूटनीतिक कोशिशें तेज कर दी हैं। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने स्पष्ट किया है कि वह ईरानी अधिकारियों के साथ निरंतर संपर्क में है ताकि भारतीय नागरिकों को जल्द से जल्द कॉन्सुलर एक्सेस और कानूनी मदद मिल सके। जहाज जब्ती और कूटनीतिक पहल 14 दिसंबर को ईरान द्वारा हिरासत में लिए गए इस जहाज के मामले में भारत ने सक्रियता दिखाते हुए बंदर अब्बास और तेहरान, दोनों स्तरों पर बातचीत की है।     लगातार संपर्क: भारतीय राजदूत स्तर की चर्चाओं के माध्यम से ईरान पर दबाव बनाया जा रहा है कि न्यायिक प्रक्रिया को तेज किया जाए।     परिवार से संपर्क: दूतावास ने ईरानी नौसेना और अधिकारियों से अनुरोध किया है कि क्रू मेंबर्स को भारत में उनके चिंतित परिजनों से बात करने की अनुमति दी जाए।     खाद्य आपूर्ति: जनवरी की शुरुआत में जब जहाज पर राशन और पानी का स्टॉक खत्म होने लगा, तब भारतीय मिशन के हस्तक्षेप के बाद ईरानी नौसेना ने आपातकालीन रसद (Emergency Supply) पहुंचाई। बहुपक्षीय सहयोग और कानूनी सहायता जहाज की मालिक कंपनी संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में स्थित है, जिसके चलते यह मामला त्रिपक्षीय कूटनीति का रूप ले चुका है।     दुबई से दबाव: दुबई स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास जहाज के मालिक पर दबाव बना रहा है कि वह क्रू के लिए उचित कानूनी प्रतिनिधित्व और वित्तीय सहायता सुनिश्चित करे।     ईरानी अदालतों में पैरवी: भारतीय दूतावास ईरान की अदालतों में फंसे हुए नाविकों के लिए स्थानीय कानूनी विशेषज्ञों का इंतजाम कर रहा है, ताकि उन्हें न्यायिक जटिलताओं से राहत मिल सके।  

दो हाई-स्पीड ट्रेनें टकराईं स्पेन में, 21 मृत और दर्जनों घायल; बचाव अभियान सक्रिय

मैड्रिड: स्पेन के कॉर्डोबा प्रांत में एक भीषण ट्रेन हादसा हुआ. इस दुर्घटना में कम से कम 21 लोगों की मौत हो गई जबकि 70 लोग घायल हो गए. घटना के तुरंत बाद राहत बचाव अभियान चलाया गया. इस हादसे में एक ट्रेन के पटरी से उतरकर दूसरी ट्रेन में टक्कर मारने से ये भीषण रूप ले लिया. यूरो न्यूज ने अधिकारियों के हवाले से बताया कि स्पेन के कॉर्डोबा प्रांत में एक तेज रफ़्तार इरियो ट्रेन के पटरी से उतरकर दूसरी ट्रेन से टकराने से कम से कम 21 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए. यह हादसा एडमुज के पास हुआ. घटना के समय इरियो ट्रेन में करीब 300 यात्री थे. ये ट्रेन मलागा से मैड्रिड-पुएर्ता डे अटोचा जा रही थी. इरियो ट्रेन अचानक पटरी से उतर गई और मैड्रिड-ह्यूएलवा रूट पर चल रही एक एवीई ट्रेन से टकरा गई. दूसरी ट्रेन स्पेन की सरकारी रेलवे कंपनी रेनफे चला रही थी. सोशल मीडिया पर यात्रियों द्वारा शेयर किए गए फुटेज में टक्कर के बाद कई डिब्बे बुरी तरह क्षतिग्रस्त नजर आए. प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि टक्कर भूकंप जैसी लगी, जबकि यात्रियों को बचाने के लिए खिड़कियां तोड़नी पड़ीं, जिससे कई लोग कटने से घायल हो गए. यूरो न्यूज ने बताया कि कई यात्रियों ने ट्रेनों के अंदर धुआं होने की भी सूचना दी और मेडिकल मदद मांगी. स्पेनिश रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर ऑपरेटर एडीआईएफ ने कहा कि मैड्रिड और अंडालूसिया के बीच सभी ट्रेन सर्विस अगली सूचना तक रोक दी गई हैं. इसने पुष्टि की कि मौके पर इमरजेंसी सर्विस तैनात कर दी गई हैं और स्थानीय अधिकारियों, रेनफे और इरियो के साथ मिलकर रात भर ऑपरेशन जारी रखेंगी. स्पेन के पब्लिक ब्रॉडकास्टर आरटीवीई के पत्रकार साल्वाडोर जिमेनेज जो मलागा से इरियो ट्रेन में सफर कर रहे थे, ने कहा कि आखिरी दो डिब्बे पटरी से उतर गए, जिसमें से एक पूरी तरह पलट गया. उन्होंने कहा, 'हम शाम 6:40 बजे मलागा से समय पर निकले थे. एक पल ऐसा लगा जैसे भूकंप आया हो और ट्रेन पटरी से उतर गई हो.' उन्होंने आगे कहा कि यात्रियों को हथौड़ों से खिड़कियाँ तोड़कर बाहर निकाला गया. इमरजेंसी टीमें मौके पर मौजूद हैं और हालात का जायजा ले रही है, घायलों का इलाज कर रही हैं और नुकसान का पूरा पता लगा रही हैं. रेड क्रॉस ने कॉर्डोबा से एक मेडिकल एम्बुलेंस और जैन से तीन और एम्बुलेंस मंगाई हैं. यूरो न्यूज ने बताया कि यह हादसे में शामिल दोनों ट्रेनों के यात्रियों को जरूरी चीजें भी दे रहा है. स्पेन के ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर ऑस्कर पुएंते ने कहा कि वह एडीआईएफ ऑपरेशंस कंट्रोल सेंटर से हालात पर नजर रख रहे हैं और जैसे ही पक्की जानकारी मिलेगी, अपडेट शेयर करेंगे. मैड्रिड की रीजनल प्रेसिडेंट इसाबेल डियाज आयुसो ने घायलों के इलाज के लिए कम्युनिटी ऑफ मैड्रिड के अस्पतालों की मदद की पेशकश की. उन्होंने कहा, 'कॉर्डोबा में हुए दुखद हादसे के बाद कम्युनिटी ऑफ मैड्रिड के अस्पताल और 112 इमरजेंसी टीमें स्टैंडबाय पर हैं और अंडालूसी रीजनल गवर्नमेंट के पास हैं,' उन्होंने यह भी कहा कि रिश्तेदारों की मदद के लिए मैड्रिड के एटोचा स्टेशन पर सपोर्ट टीमें तैनात की जाएंगी. अधिकारियों ने ट्रेन के पटरी से उतरने का कारण पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है.

क्या है ट्रंप का बोर्ड ऑफ पीस और PM मोदी को इसके लिए कितना भुगतान करना होगा?

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Modi) को बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने पत्र में इस पहल को मध्य पूर्व में शांति को पुख्ता करने और वैश्विक संघर्ष को सुलझाने का एक ऐतिहासिक और साहसिक प्रयास बताया है। भारत के लिए इस न्योते के मायने क्या हैं। जानते हैं अगर भारत इस बोर्ड का हिस्सा बनता है तो क्या होगा। पहले समझें क्या है बोर्ड ऑफ पीस ट्रंप ने गाजा पट्टी में इजरायल और हमास के बीच हुए युद्धविराम समझौते के दूसरे चरण के तहत इस बोर्ड की शुरुआत की है। वॉशिंगटन, ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को गाजा और उसके आसपास शांति एवं स्थिरता लाने के लिए एक नए अंतरराष्ट्रीय निकाय के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि यह निकाय अन्य वैश्विक संघर्षों में भी अहम भूमिका निभा सकता है। मूल रूप से, इस नए निकाय को गाजा के पुनर्निर्माण के लिए शासन की देखरेख और वित्तपोषण समन्वय का कार्य सौंपा जाना है। भारत के लिए क्या हैं मायने इस बोर्ड की अध्यक्षता ट्रंप के पास होगी। अगर भारत न्योता स्वीकार करता है, तो वह तीन सालों के लिए बोर्ड का हिस्सा बन जाएगा। हालांकि, अगर किसी देश को सदस्य बने रहना है, तो आर्थिक रूप से योगदान भी देना होगा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हर देश को 1 बिलियन डॉलर देने होंगे। इसके साथ ही वह स्थाई सदस्य बन जाएगा और इस धन का इस्तेमाल बोर्ड की गतिविधियों में होगा। बहरहाल, शुरुआत के तीन सालों की सदस्यता के लिए किसी देश को आर्थिक योगदान नहीं देना होगा। शामिल देश गाजा में होने वाले अगले चरण के सीजफायर के बाद गतिविधियों पर नजर रखेंगे। इनमें नए फिलिस्तीनी समिति, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल की तैनाती, हमास से हथियार लेने की प्रक्रिया और गाजा का दोबारा निर्माण शामिल है। पीएम मोदी को भेजा पत्र ट्रंप ने मोदी को एक पत्र लिखा, जिसे भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया पर साझा किया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने पत्र में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को मध्य पूर्व में 'शांति बहाल करने के लिए एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक व शानदार प्रयास' में शामिल होने और साथ ही 'वैश्विक संघर्ष के समाधान के लिए एक साहसिक नए दृष्टिकोण' पर काम करने के लिए आमंत्रित करना उनके लिए बहुत सम्मान की बात है। गोर ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि उन्हें ट्रंप का निमंत्रण मोदी तक पहुंचाने का सम्मान मिला है, जिसमें उन्हें ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है और यह निकाय 'गाजा में स्थायी शांति लाएगा'। राजदूत ने कहा कि बोर्ड स्थिरता और समृद्धि हासिल करने के लिए प्रभावी शासन का समर्थन करेगा। ट्रंप ने मोदी को लिखे पत्र में 29 सितंबर को गाजा संघर्ष को समाप्त करने की व्यापक योजना की घोषणा के साथ-साथ मध्य पूर्व में शांति लाने के लिए अपनी 20-सूत्री रूपरेखा का भी उल्लेख किया। किन देशों को न्योता भारत के अलावा इजरायल, मिस्र, तुर्की, कतर, पाकिस्तान, कनाडा और अर्जेंटीना सहित लगभग 50 देशों को आमंत्रित किया गया है। सदस्यों की आधिकारिक सूची की घोषणा आने वाले दिनों में दावोस में होने वाली विश्व आर्थिक मंच की बैठक के दौरान होने की संभावना है। व्हाइट हाउस ने बोर्ड के विजन को लागू करने के लिए एक कार्यकारी समिति की भी घोषणा की है। इस समिति में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, जारेड कुशनर, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा और उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट गेब्रियल जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं।