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शोएब बशीर का काउंटी करियर नया मोड़, डर्बीशायर के साथ जुड़े अगले दो साल के लिए

लंदन इंग्लैंड के ऑफ स्पिन गेंदबाज शोएब बशीर ने घरेलू क्रिकेट में ज्यादा मौके पाने के लिए 2026 सत्र से डर्बीशायर टीम के साथ दो साल का करार किया है। समरसेट टीम में उन्हें लगातार खेलने का मौका नहीं मिल पा रहा था, इसलिए उन्होंने यह फैसला लिया है। 22 वर्षीय शोएब बशीर पिछले दो वर्षों से इंग्लैंड की टेस्ट टीम का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने 2024 में टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया और अब तक 19 टेस्ट मैचों में 68 विकेट लिए हैं। इसके बावजूद वह समरसेट टीम में जैक लीच की जगह नहीं बना पाए और उन्हें नियमित रूप से मैच खेलने का अवसर नहीं मिला। लगातार मैच न खेलने की वजह से चयनकर्ताओं को भी चिंता होने लगी थी। हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के 2025-26 एशेज दौरे के लिए इंग्लैंड टीम में उनका चयन नहीं हुआ और उनकी जगह ऑलराउंडर विल जैक्स को टीम में रखा गया। घरेलू क्रिकेट में बशीर का प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय स्तर जैसा प्रभावशाली नहीं रहा है। समरसेट के लिए उन्होंने सभी प्रारूपों में 23 मैच खेले, जिसमें सिर्फ 21 विकेट ही ले सके। काउंटी चैंपियनशिप में उनका औसत भी काफी ज्यादा रहा। डर्बीशायर के मुख्य कोच मिकी आर्थर ने इस करार में अहम भूमिका निभाई। उनकी टीम ने पिछले सत्र में डिवीजन टू में तीसरा स्थान हासिल किया था। बशीर ने कहा कि डर्बीशायर में एक अच्छा और रोमांचक माहौल है। उन्होंने कहा कि मिकी आर्थर जैसे अनुभवी कोच के साथ काम करना उनके लिए बड़ा मौका है। वह ज्यादा लाल गेंद का क्रिकेट खेलना चाहते हैं, अपने खेल में सुधार करना चाहते हैं और टीम को आगे बढ़ाने में योगदान देना चाहते हैं। इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड भी बशीर के विकास पर ध्यान दे रहा है। बोर्ड के प्रबंध निदेशक रॉब की सलाह पर बशीर ने सत्र से पहले जिम्बाब्वे में पूर्व पाकिस्तानी स्पिन गेंदबाज मुश्ताक अहमद के साथ एक सप्ताह का विशेष अभ्यास भी किया है। डर्बीशायर में बशीर अब स्पिन विभाग का हिस्सा होंगे, जहां जैक मोर्ले और जो हॉकिन्स पहले से मौजूद हैं। वह एलेक्स थॉमसन की जगह लेंगे। कोच मिकी आर्थर ने कहा कि टीम में अच्छे और गुणवत्ता वाले खिलाड़ियों को शामिल करना उनका लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि इंग्लैंड के मौजूदा अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी को टीम में जोड़ना बहुत उत्साहजनक है और बशीर टीम में अनुभव और ऊर्जा लेकर आएंगे।  

किसानों से धोखा महंगा पड़ेगा, घटिया बीज पर 30 लाख तक जुर्माना तय करने का प्रस्ताव

नई दिल्ली केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को मीडिया से बात करते हुए नए सीड एक्ट (सीड एक्ट 2026) की विशेषताओं और उसके किसानों पर होने वाले प्रभावों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह विधेयक किसानों की सुरक्षा, बीज की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने वाला ऐतिहासिक कदम है। शिवराज सिंह ने कहा कि बीजों की गुणवत्ता पर अब किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अभी तक 500 रुपए तक का जुर्माना था, लेकिन अब प्रस्ताव है कि 30 लाख रुपए तक जुर्माना हो और अगर कोई जानबूझकर अपराध करता है तो सजा का भी प्रावधान है। उन्होंने कहा कि सब कंपनियां खराब नहीं हैं, लेकिन जो किसान को धोखा देंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। मीडिया के सवालों के जवाब में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अब देश में बीज की ट्रेसिबिलिटी की व्यवस्था स्थापित की जाएगी। हमने कोशिश की है कि ऐसा सिस्टम बने जिसमें यह पूरा पता चल सके कि बीज कहां उत्पादित हुआ, किस डीलर ने दिया और किसने बेचा। हर बीज पर क्यूआर कोड होगा, जिसे स्कैन करते ही किसान यह जान सकेगा कि वह बीज कहां से आया है। इससे घटिया या नकली बीज न केवल रोके जा सकेंगे बल्कि यदि वे बाजार में आएंगे भी तो जिम्मेदार व्यक्ति पर शीघ्र कार्रवाई संभव होगी। कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने बताया कि जैसे ही ट्रेसिबिलिटी लागू होगी, नकली या खराब बीज की पहचान तुरंत हो जाएगी। उन्होंने कहा कि खराब बीज आएंगे ही नहीं, और अगर आएंगे तो पकड़े जाएंगे। जिसने खराब बीज दिया, उसे दंड दिया जाएगा। इससे किसानों को भ्रमित करने वाली कंपनियों और डीलरों की मनमानी पर लगाम लगेगी। उन्होंने कहा कि अब हर सीड कंपनी का रजिस्ट्रेशन किया जाएगा, जिससे यह साफ रहेगा कि कौन सी कंपनी अधिकृत है। पंजीकृत कंपनियों की जानकारी उपलब्ध रहेगी और कोई भी अनधिकृत विक्रेता बीज नहीं बेच पाएगा। इससे बाजार में फर्जी कंपनियां खत्म होंगी और किसानों को सही स्रोत का बीज मिलेगा। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने इस भ्रम को दूर किया कि नया कानून किसानों के परंपरागत बीजों पर रोक लगाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा, ''किसान अपने बीज बो सकते हैं, दूसरे किसान को बीज दे सकते हैं। स्थानीय स्तर पर जो परंपरागत बीज विनिमय की परंपरा है, वो जारी रहेगी। इसमें कोई दिक्कत नहीं है।'' उन्होंने उदाहरण दिया कि ग्रामीण इलाकों में बोनी के समय किसान आपस में बीज लेते-देते हैं और बाद में उसे सवा गुना वापिस कर देते हैं, यह पारंपरिक प्रणाली आगे भी जारी रहेगी।

‘लोकतंत्र से खिलवाड़’—हजारों वोटर लिस्ट से बाहर, संजय राउत का बीएमसी चुनावों पर हमला

मुंबई शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने शुक्रवार को बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनावों को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) में खराबी और आचार संहिता के उल्लंघन का दावा किया। नतीजों के दिन एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राउत ने कहा कि मुंबई में दिख रहा वोटिंग पैटर्न एक गंभीर मामला है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन इलाकों में वोटर लिस्ट से हजारों मतदाताओं के नाम गायब थे, जहां शिवसेना (UBT), महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) और कांग्रेस को पारंपरिक रूप से मजबूत समर्थन मिलता है। मालूम हो कि बीएमसी चुनाव में भाजपा गठबंधन की बड़ी जीत हुई है। वहीं, तीन दशकों बाद देश के सबसे अमीर नगर निगम से शिवसेना यूबीटी बाहर हो गई।   उन्होंने आरोप लगाया, "हजारों लोगों के नाम, जिन्होंने विधानसभा चुनावों में भी वोट दिया था, वोटर लिस्ट से गायब हैं। यह खास तौर पर उन इलाकों में हो रहा है जहां शिवसेना (UBT), एमएनएस या कांग्रेस के वोट ज़्यादा हैं।" राउत ने यह भी दावा किया कि कई पोलिंग बूथ पर EVM खराब थे। उन्होंने कहा, "जहां NCP के लिए वोट बटन दबाया गया, वहां BJP की लाइट जल गई। शिव सेना (UBT) के जलती हुई मशाल के निशान और MNS के इंजन के निशान के साथ भी ऐसा ही हुआ।'' उन्होंने आगे कहा कि चुनाव आयोग से बार-बार शिकायतें की गईं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। सीनियर भाजपा नेताओं और मुंबई म्युनिसिपल कमिश्नर भूषण गागरानी की मीटिंग पर सवाल उठाते हुए, राउत ने मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट के उल्लंघन का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "कल, शाम करीब 6 बजे, सीनियर भाजपा नेताओं और मुंबई म्युनिसिपल कमिश्नर के बीच एक मीटिंग हुई। क्यों? आचार संहिता अभी भी लागू है। आप कमिश्नर के साथ 1.5 घंटे बैठे और क्या तय किया? क्या आपने आज का नतीजा पहले से ही तय कर लिया था?" राउत ने एग्जिट पोल के समय पर भी चिंता जताई, यह दावा करते हुए कि उन्हें आधिकारिक वोटिंग प्रतिशत घोषित होने से पहले ही जारी कर दिया गया था। उन्होंने कहा, "वोटिंग प्रतिशत आने से पहले ही एग्जिट पोल आ गए। यह क्या है? कुछ जगहों पर वोटिंग अभी भी चल रही थी, लेकिन भाजपा से जुड़े आउटलेट्स ने उन्हें एक-एक करके जारी करना शुरू कर दिया। भाजपा नेताओं ने अपनी जीत का जश्न मनाना शुरू कर दिया। यह किस तरह का लोकतंत्र है?" गुरुवार को इससे पहले, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव 2026 को लेकर चिंता जताई थी, जिसमें वोटर लिस्ट, मिटने वाली स्याही और पुरानी ईवीएम मशीनों से जुड़ी समस्याओं का ज़िक्र किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग इन समस्याओं को दूर करने के लिए काफी कुछ नहीं कर रहा है और सरकार पर चुनावी प्रक्रिया में हेरफेर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। मतों की गिनती शुक्रवार सुबह शुरू होने के बाद रुझानों के अनुसार, बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसकी सहयोगी शिवसेना आगे हैं। मुंबई के 227 वार्ड में से भाजपा 88, शिवसेना 28, शिवसेना यूबीटी 73, कांग्रेस आठ वॉर्डों में आगे है। इसके अलावा, एमएनएस सात वॉर्ड में आगे है।  

समंदर में तनाव: भारतीय पोत पर हमला, 18 लोगों को जबरन हिरासत में लेने का आरोप

नई दिल्ली 8 दिसंबर 2025 की दोपहर भारतीय नाविकों के परिजनों के लिए एक भयावह कहानी की शुरुआत हुई। उस दिन कैप्टन विनोद परमार को अपने भाई- टैंकर वेलियंट रोर के कमांडिंग कैप्टन विजय कुमार- का घबराया हुआ फोन आया। आवाज कांप रही थी। उन्होंने बताया कि उनके जहाज का अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में होने के बावजूद ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स द्वारा पीछा किया जा रहा है। इसके बाद लाइन कट गई।   परिजनों के बयानों के मुताबिक, इसके बाद जो हुआ वह किसी बुरे सपने से कम नहीं था- ईरानी नौसेना की ओर से कथित तौर पर बिना उकसावे की फायरिंग, टैंकर को जब्त करना और 10 भारतीय नाविकों का रहस्यमय ढंग से गायब हो जाना। डेढ़ महीने से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन ये नाविक न तो अपने परिवारों से संपर्क कर पा रहे हैं और न ही बाहरी दुनिया से। अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में घटना, VLSFO होने के बावजूद ‘डीजल तस्करी’ का आरोप यह टैंकर दुबई स्थित ग्लोरी इंटरनेशनल FZ LLC द्वारा संचालित है। 16 भारतीय, एक श्रीलंकाई और एक बांग्लादेशी सदस्य- कुल 18 क्रू सवार थे। तकनीकी खराबी के चलते सिस्टर वेसल MT Coral Wave के साथ खड़े रहने के बाद यह पहली यात्रा पर निकला था और यूएई के खोर फकान की ओर तकनीकी सहायता लेने जा रहा था। घटना यूएई के दिब्बा पोर्ट के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में बताई जा रही है। कैप्टन परमार के अनुसार, ईरान ने जहाज पर छह मिलियन लीटर डीज़ल की तस्करी का आरोप लगाया, जबकि टैंकर में बहुत कम सल्फर वाला ईंधन तेल (वीएलएसएफओ) था। ईरानी पक्ष ने सैंपल एनालिसिस रिपोर्ट को खारिज कर दिया और जहाज पर कब्जा कर उसे Bandar-e-Jask ले जाया गया। मारपीट, बंधक बनाना, उपकरण जब्त रिपोर्ट क मुताबिक,परिजनों का आरोप है कि फायरिंग से जहाज को नुकसान पहुंचा और कुछ क्रू घायल हुए। बाद में ईरानी कर्मियों ने जहाज पर चढ़कर क्रू के साथ मारपीट की, उन्हें बंधक बनाया गया और सभी मोबाइल, लैपटॉप व अन्य उपकरण जब्त कर लिए गए। सभी 18 नाविकों को एक ही मेस रूम में ठूंस दिया गया और बाथरूम तक जाने के लिए भी सशस्त्र पहरे में ले जाया गया। केवल कैप्टन को प्रतिदिन कुछ मिनट कॉल की अनुमति दी गई। न हिरासत आदेश, न कारण- MLC 2006 का हवाला परिवारों का कहना है कि अब तक ईरानी अधिकारियों ने न तो औपचारिक हिरासत आदेश जारी किए हैं और न ही जब्ती के ठोस आधार बताए हैं। भारत और ईरान दोनों समुद्री श्रम कन्वेंशन, 2006 के पक्षकार हैं, जो नाविकों के अधिकारों की सुरक्षा करता है। 10 भारतीय जेल भेजे गए, संपर्क टूटा 6 जनवरी को हालात और बिगड़े। बयान दर्ज करने के बहाने 18 में से 10 नाविकों को जहाज से बाहर ले जाया गया और बाद में Bandar Abbas की जेल भेज दिया गया। इनमें चीफ ऑफिसर अनिल सिंह, सेकेंड इंजीनियर और कई जूनियर इंजीनियर शामिल हैं। उसी शाम अनिल सिंह की पत्नी गायत्री को एक मिनट का कॉल आया- उन्होंने झूठे स्मगलिंग आरोपों में जेल भेजे जाने की बात कही। इसके बाद कोई संपर्क नहीं। परिवारों की पीड़ा, मां की तबीयत बिगड़ी तीसरे इंजीनियर केतन मेहता के परिवार का कहना है कि जब से जहाज जब्त हुआ है, उनसे कोई बात नहीं हो पाई। केतन परिवार का एकमात्र कमाने वाला है। तनाव के चलते उनकी हृदय-रोगी मां को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। गायत्री कहती हैं- मेरे बेटे ने पीएमओ को 20-25 ईमेल भेजे, कोई जवाब नहीं। बस हमारी बात विदेश मंत्री एस जयशंकर तक पहुंचा दी जाए। जहाज पर बचे 8 भारतीय- खाने का संकट जहाज पर बचे आठ नाविक बेहद कठिन हालात में हैं। परिजनों के मुताबिक, उन्हें केवल पानी दिया जा रहा है और वे चावल-दाल पर गुजारा कर रहे हैं। राशन दो-तीन दिन में खत्म होने की आशंका जताई गई है। दूतावास से सीमित मदद, हाई कोर्ट की शरण परिवारों ने 12 दिसंबर को डीजी शिपिंग से संपर्क किया, फिर मामला विदेश मंत्रालय और तेहरान स्थित दूतावास तक गया। 17 दिसंबर को दूतावास ने Bandar Abbas स्थित कांसुलेट से संपर्क करने की सलाह दी, लेकिन कांसुलर एक्सेस के अनुरोध बार-बार ठुकरा दिए गए। अब परिजन दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचे हैं। कोर्ट ने केंद्र सरकार को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। खामेनेई-नेतृत्व वाले शासन के खिलाफ हिंसक प्रदर्शनों, इंटरनेट ब्लॉकेड और हालिया अस्थिरता ने परिजनों की चिंता और बढ़ा दी है। लंबे समय से चल रही अनिश्चितता ने क्रू के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाला है।

यूएन मंच पर भारत ने पाकिस्तान को घेरा, कहा– नफरत की राजनीति छोड़ो

संयुक्त राष्ट्र संयुक्त राष्ट्र के मंच पर एक बार फिर कायराना हरकत दिखाने के बाद भारत ने पाकिस्तान को तगड़ी लताड़ लगाई है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान द्वारा जम्मू कश्मीर का मुद्दा उठाए जाने के बाद ‘विभाजनकारी एजेंडे’ को आगे बढ़ाने के लिए वैश्विक मंचों का दुरुपयोग करने के लिए पाक को सुनाते हुए कहा कि ऐसे देशों को संकीर्ण विचारधारा से बाहर निकालने की जरूरत है।   संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में काउंसलर एल्डोस मैथ्यू पुन्नूज ने गुरुवार को कहा कि आत्मनिर्णय के अधिकार का दुरुपयोग बहुलतावादी और लोकतांत्रिक देशों में अलगाववाद को बढ़ावा देने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे समय में जब सदस्य देशों को संकीर्ण विचारों से ऊपर उठना चाहिए, पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र के सभी मंचों और प्रक्रियाओं का दुरुपयोग कर अपने विभाजनकारी एजेंडे को आगे बढ़ाता रहा है।’’ संयुक्त राष्ट्र महासभा के पूर्ण सत्र में ‘संगठन के कार्य पर महासचिव की रिपोर्ट’ पर राष्ट्रीय वक्तव्य देते हुए पुन्नूज ने कहा, ‘‘यह मंच भी इसका अपवाद नहीं है और पाकिस्तान ने भारत के अभिन्न और अविभाज्य अंग केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर का अनुचित उल्लेख किया।’’ उन्होंने कहा, ‘‘आत्मनिर्णय का अधिकार संयुक्त राष्ट्र चार्टर में निहित एक मौलिक सिद्धांत है। हालांकि इस अधिकार का दुरुपयोग बहुलतावादी और लोकतांत्रिक देशों में अलगाववाद को प्रोत्साहित करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। पाकिस्तान की आदत है लेकिन उसे निराधार आरोपों और झूठ का सहारा नहीं लेना चाहिए और वास्तविकता से दूर तस्वीर को पेश करने से बचना चाहिए।’’ बता दें कि भारत की यह कड़ी प्रतिक्रिया संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत आसिम इफ्तिखार अहमद द्वारा महासभा में अपने वक्तव्य में जम्मू कश्मीर का संदर्भ दिए जाने के बाद आई। पाकिस्तान बार-बार संयुक्त राष्ट्र और उसके विभिन्न मंचों पर जम्मू कश्मीर का मुद्दा उठाता रहा है, लेकिन इस मामले में उसे व्यापक अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कोई खास समर्थन नहीं मिला है।  

पीयूष गोयल का बड़ा बयान: देश में 2 लाख से अधिक स्टार्टअप रजिस्टर्ड, 21 लाख लोगों को मिला रोजगार

नई दिल्ली   देश में शुक्रवार को 'स्टार्टअप इंडिया' पहल को 10 साल पूरे हो चुके हैं। इस अवसर पर राष्ट्रीय राजधानी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें देश के प्रमुख स्टार्टअप उद्यमियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि आज भारत में करीब 2 लाख स्टार्टअप रजिस्टर्ड हैं। इन स्टार्टअप्स के जरिए अब तक 21 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल चुका है। भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम लगातार मजबूत हो रहा है और देश की आर्थिक प्रगति में अहम भूमिका निभा रहा है। पीयूष गोयल ने आगे कहा कि भारतीय स्टार्टअप आज 50 से ज्यादा अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। इनमें टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर, एग्रीटेक, फिनटेक, ड्रोन टेक्नोलॉजी और डीप टेक जैसे क्षेत्र शामिल हैं। उन्होंने बताया कि पिछले बजट में सरकार ने 10 हजार करोड़ रुपए का 'फंड ऑफ फंड्स' घोषित किया था, जिसके जरिए हाई-टेक और डीप टेक स्टार्टअप्स को प्राथमिकता दी जा रही है। केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि देश के कुल स्टार्टअप्स में से करीब 50 प्रतिशत स्टार्टअप टियर-2 और टियर-3 शहरों से आ रहे हैं, जो इस बात का सबूत है कि उद्यमिता अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रही। उन्होंने कहा कि कर्नाटक और तमिलनाडु अब ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग के बड़े केंद्र बनकर उभर रहे हैं। पीयूष गोयल के मुताबिक, दुनिया के 100 से ज्यादा देश भारत के साथ स्टार्टअप सेक्टर में साझेदारी करना चाहते हैं। सरकार इस दिशा में योजना बना रही है कि इन देशों के साथ सहयोग को कैसे आगे बढ़ाया जाए, ताकि भारतीय स्टार्टअप्स को वैश्विक स्तर पर और ज्यादा अवसर मिल सकें। इससे पहले केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि 'स्टार्टअप इंडिया' क्रांति को एक दशक पूरा हो गया है। यह एक साहसिक कदम था, जिसने भारत को बड़ा सोचने और उससे भी बड़ा करने की ताकत दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस दूरदर्शी पहल की सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण देश में डीपीआईआईटी द्वारा मान्यता प्राप्त 2 लाख से अधिक स्टार्टअप्स और उनके द्वारा पैदा किए गए 21 लाख से ज्यादा रोजगार हैं। पीयूष गोयल ने कहा कि इस सफलता को यह तथ्य और खास बनाता है कि इससे टियर-2 और टियर-3 शहरों में उद्यमिता की भावना को नई ऊर्जा मिली है और युवाओं व महिलाओं को सशक्त बनाया गया है। राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस के अवसर पर उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों की यह यात्रा निरंतरता, समावेशिता और विकास को दर्शाती है, साथ ही भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम के उज्ज्वल भविष्य का भरोसा भी देती है।

अफगानिस्तान में भारत की एंट्री, कंगाल पाकिस्तान की दवा इंडस्ट्री को लगा बड़ा झटका

अफगानिस्तान अफगानिस्तान में इन दिनों एक दिलचस्प बदलाव देखने को मिल रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर फजल अफगान नाम के एक अफगान ब्लॉगर की कहानी इस बदलाव की गवाह है। फजल को सिरदर्द के लिए 'पारोल' (तुर्की का ब्रांड) खरीदना था जिसकी कीमत 40 अफगानी थी। लेकिन फार्मासिस्ट ने उन्हें भारत में बनी वही दवा महज 10 अफगानी में दे दी। फजल का कहना है कि भारतीय दवा न केवल चार गुना सस्ती थी, बल्कि उसका असर भी बहुत तेज रहा। यह केवल एक व्यक्ति का अनुभव नहीं है, बल्कि पूरे अफगानिस्तान में भारतीय दवाएं अब पाकिस्तानी दवाओं की जगह ले रही हैं। क्यों टूटा पाकिस्तान का वर्चस्व? दशकों से अफगानिस्तान अपनी बुनियादी चिकित्सा जरूरतों के लिए पाकिस्तान पर निर्भर था। वहां की लगभग 70-80% दवाएं पाकिस्तान से आती थीं। लेकिन अक्टूबर-नवंबर 2025 में दोनों देशों के बीच हुई हिंसक सीमा झड़पों के बाद स्थितियां बदल गईं। अफगानिस्तान के उप प्रधानमंत्री अब्दुल गनी बरादर ने घटिया गुणवत्ता का हवाला देते हुए पाकिस्तानी दवाओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। अफगान व्यापारियों को भारत, ईरान और मध्य एशिया से विकल्प तलाशने को कहा गया। तोरखम और चमन जैसे प्रमुख सीमा व्यापारिक रास्तों के बंद होने से पाकिस्तान से होने वाली सप्लाई पूरी तरह ठप हो गई। संकट के समय का सच्चा साथी भारत जब अफगानिस्तान दवाओं की कमी से जूझ रहा था, तब भारत ने मानवीय आधार पर मदद का हाथ बढ़ाया। नवंबर 2025 में भारत ने 73 टन जीवन रक्षक दवाओं की खेप काबुल भेजी। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने 108 मिलियन डॉलर की दवाएं भेजी थीं, जबकि 2025 के अंतिम महीनों में ही यह आंकड़ा 100 मिलियन को पार कर गया। भारत केवल दवाएं ही नहीं भेज रहा, बल्कि वहां अस्पतालों का निर्माण भी कर रहा है। काबुल में इंदिरा गांधी चिल्ड्रेन्स हॉस्पिटल (400 बेड) इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। जाइडस लाइफसाइंसेज का मेगा डील भारतीय फार्मा दिग्गज जाइडस लाइफसाइंसेज ने नवंबर 2025 में अफगानिस्तान के 'रोफी इंटरनेशनल ग्रुप' के साथ 100 मिलियन डॉलर का समझौता (MoU) किया है। इस समझौते के तहत भारत न केवल दवाएं निर्यात करेगा, बल्कि भविष्य में अफगानिस्तान में ही मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने के लिए तकनीक हस्तांतरण भी करेगा। इससे अफगानिस्तान की आयात पर निर्भरता कम होगी और वहां के लोगों को सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली दवाएं मिल सकेंगी।  

महाभियोग मामले में झटका: जस्टिस यशवंत वर्मा की संसदीय कमेटी के खिलाफ अर्जी खारिज

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा को बड़ा झटका दिया है। शीर्ष अदालत ने अधजली नकदी मामले में महाभियोग प्रस्ताव पर उनके खिलाफ आरोपों की जांच कर रहे संसदीय पैनल के खिलाफ उनकी याचिका खारिज कर दी है। इस याचिका में उन्होंने लोकसभा स्पीकर द्वारा उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए बनाई गई संसदीय समिति की वैधता को चुनौती दी थी।   जस्टिस वर्मा ने समिति के गठन पर यह कहते हुए सवाल उठाया था कि उन्हें हटाने का प्रस्ताव राज्यसभा के उपसभापति ने खारिज कर दिया था। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एससी शर्मा की बेंच ने 8 जनवरी, 2026 को इस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब कोर्ट ने इस अर्जी को खारिज कर दिया है, जिससे संसदीय समिति को आगे बढ़ने की इजाजत मिल गई है। जजेज इन्क्वायरी एक्ट के तहत जांच समिति 16 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस वर्मा की दायर याचिका पर सुनवाई करने का फैसला किया था। इस याचिका में लोकसभा स्पीकर के उस कदम को चुनौती दी गई थी जिसमें उन्होंने जजों (जांच) एक्ट के तहत "एकतरफा" तरीके से उनके खिलाफ जांच के लिए एक कमेटी बनाई थी। सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने कोर्ट में जस्टिस वर्मा का प्रतिनिधित्व करते हुए कहा था कि 1968 के एक्ट की धारा 3(2) के तहत कमेटी का गठन कानून द्वारा समान रूप से व्यवहार किए जाने और सुरक्षा पाने के उनके अधिकार का उल्लंघन करता है। उन्होंने तर्क दिया कि हालांकि संसद के दोनों सदनों में उसी दिन हटाने के प्रस्ताव के नोटिस दिए गए थे, लेकिन स्पीकर ने एकतरफा तरीके से कमेटी का गठन किया। पिछली सुनवाई पर यानी 8 जनवरी को अदालत ने इस पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। पिछले साल अगस्त में लोकसभा अध्यक्ष ने बनाई थी कमेटी बता दें कि अगस्त 2025 में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सदन में महाभियोग प्रस्ताव आने के बाद जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यों वाले पैनल की घोषणा की थी। इस तीन सदस्यीय पैनल में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार, मद्रास हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस मनिंदर मोहन और सीनियर एडवोकेट बीवी आचार्य शामिल हैं। मामला क्या? यह पैनल जस्टिस वर्मा के आवास से भारी मात्रा में अधजली नोटों के मिलने के बाद उनके खिलाफ लाए गए महाभियोग प्रस्ताव के बाद गठित की गई थी।पिछले साल मार्च में, दिल्ली में जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास पर लगी भीषण आग के बाद, कैश के बंडल मिले थे, जिनमें से कुछ 1.5 फीट से भी ज़्यादा ऊंचे थे। तत्कालीन चीफ जस्टिस ने इस घटना का संज्ञान लिया था और जस्टिस वर्मा का ट्रांसफर दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट कर दिया था।  

‘कुर्सी जाने का डर था, लेकिन मैंने इसे दायित्व समझकर किया…’, बोले PM मोदी

 नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि युवाओं की तरह उन्हें भी जोखिम लेना पसंद है. पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक भविष्य को खतरे में डालकर निर्णय लिए हैं, क्योंकि ये फैसले देश हित में थे. दिल्ली के भारत मंडपम में नेशनल स्टार्ट अप डे पर युवाओं से संवाद करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज हम स्टार्ट अप इंडिया के 10 साल पूरे होने का माइल स्टोन सेलिब्रेट कर रहे हैं. पीएम मोदी ने कहा कि भारत के युवाओं का फोकस देश की समस्याओं का समाधान करने पर है. सिर्फ 10 साल में स्टार्ट अप मीडिया मिशन एक क्रांति बन चुका है. भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट अप इको सिस्टम है. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज जोखिम लेना जिंदगी की मुख्यधारा में शामिल हो चुका है. मंथली सैलेरी से आगे सोचने वालों को अब न सिर्फ एक्सेप्ट किया जाता है बल्कि उन्हें रिस्पेक्ट भी मिलता है. पीएम मोदी ने कहा कि याद कीजिए आज से 10 साल पहले हालत क्या थे. व्यक्तिगत प्रयास औऱ इनोवेशन के लिए बहुत गुंजाइश ही नहीं थे. हमने इसे चुनौती दी. हमने युवाओं को खुला आसामान दिया. आज नतीजा हमारे सामने है. 10 साल में ये क्रांति बन चुका है. युवाओं के रिस्क लेने की क्षमता का तारीफ करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि युवाओं की तरह उन्हें भी रिस्क लेना पसंद है. जोखिम लेने की प्रवृति की सराहना करते हुए पीएम मोदी ने कहा, "साथियो रिस्क टेकिंग पर मैं खास तौर पर जोर देता रहा हूं, क्योंकि ये मेरी भी पुरानी आदत है, जो काम कोई करने के लिए कोई तैयार नहीं होता, जो काम दशकों से पहले की सरकारों ने नहीं छूए, क्योंकि उनमें चुनाव हारने का, कुर्सी जाने का डर था. जिन कामों के लिए लोग आकर कहते थे. ये बहुत पॉलिटिकल रिस्क है. मैं उन कार्यों को अपना दायित्व समझकर जरूर करता था." प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि, "आप की तरह ही मेरा भी मानना है जो काम देश के लिए जरूरी है उसे किसी न किसी को तो करना ही होगा, किसी न किसी को रिस्क लेना ही होगा. नुकसान होगा तो मेरा होगा. लेकिन अगर फायदा होगा तो मेरे देश के करोड़ों परिवार का होगा."  पीएम ने कहा कि पिछले 10 सालों में ऐसा इको सिस्टम तैयार हुआ है जो इनोवेशन को बढ़ावा देता है.  भविष्य के उद्यमियों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज भारत में सवा सौ एक्टिव यनिकॉर्न है. जबकि 2014 में इनकी संख्या मात्र 4 थी. आज के स्टार्ट अप यूनिकॉर्न बन रहे हैं. ये बेहद अच्छी खबर है. पीएम मोदी ने कहा कि मेरे देश का नौजवान आज कंफर्ट जोन में अपनी जिंदगी गुजारने को तैयार नहीं है, उसे घिसी पिटी जिंदगी पसंद नहीं है .   

ऑपरेशन सिंदूर के बाद मुरीदके में कोई जगह नहीं बची, लश्कर के प्रमुख अब्दुल रऊफ ने किया खुलासा

 मुरीदके आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के सबसे प्रमुख नेताओं में से एक अब्दुल रऊफ ने एक समारोह के दौरान भारतीय मिसाइल हमलों की विनाशाकारी ताकत का कच्चा चिट्ठा खोला है। रऊफ ने स्वीकार किया कि 6 और 7 मई को हुए भारतीय हमलों ने उनके सबसे महत्वपूर्ण प्रशिक्षण केंद्र और मुख्यालय की कमर तोड़ दी है। मुरीदके में नए आतंकियों को संबोधित करते हुए रऊफ ने उस मंजर का वर्णन किया जिसे अब तक लश्कर छिपाने की कोशिश कर रहा था। उसने संगठन के 'हब' के रूप में इस्तेमाल होने वाली एक ठिकाने के विनाश के बारे में बताया। उसने कहा. "6-7 मई को जो हुआ, उसके बाद वह जगह अब मस्जिद नहीं रही। आज हम वहां बैठ भी नहीं सकते। वह पूरी तरह खत्म हो चुकी है। वह ढह गई है।" उसका यह बयान लश्कर की ओर से अब तक का सबसे बड़ा कबूलनामा है। आमतौर पर लश्कर जैसे संगठन अपनी कमजोरियों और नुकसान को छिपाते हैं, लेकिन रऊफ ने भारतीय स्ट्राइक की सटीकता को साबित कर दिया है। बाल-बाल बचे थे आतंकी अब्दुल रऊफ ने अपने संबोधन में एक और महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उसने बताया कि भारतीय मिसाइलों के गिरने से चंद लम्हे पहले ही वहां मौजूद ट्रेनी को कैंप से बाहर निकाला गया था। यह दर्शाता है कि भारतीय खुफिया एजेंसी और सेना के पास सटीक जानकारी थी और हमला इतना अचानक था कि लश्कर के पास संभलने का वक्त नहीं था। भारतीय सेना द्वारा मई के शुरुआती हफ्ते में चलाए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' का लक्ष्य सीमा पार आतंकी बुनियादी ढांचे को नष्ट करना था। अब्दुल रऊफ वही कमांडर है जिसने हमले में मारे गए आतंकियों का अंतिम संस्कार कराया था। उन जनाजों की तस्वीरों ने पहले ही भारी नुकसान के संकेत दिए थे, लेकिन अब रऊफ के शब्दों ने इसकी आधिकारिक पुष्टि कर दी है।