samacharsecretary.com

80 साल की उम्र में बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का निधन

ढाका  राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहे बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का निधन हो गया है. बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की प्रमुख खालिदा जिया ने ढाका के एवर केयर हॉस्पिटल में उपचार के दौरान अंतिम सांस ली. वह 80 वर्ष की थीं. खालिदा जिया पिछले कुछ समय से बीमार चल रही थीं. खालिदा जिया की अगुवाई वाली पार्टी बीएनपी ने उनके निधन की पुष्टि की है. बीएनपी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा है कि डॉक्टर्स ने कुछ ही समय पहले उन्हें मृत घोषित किया है. खालिदा जिया ने सुबह 6 बजे आखिरी सांस ली. लंबे समय से बीमार चल रही थीं और ढाका के एवर केयर हॉस्पिटल में उनका उपचार चल रहा था. बीएनपी की सोशल मीडिया पोस्ट के मुताबिक 29-30 दिसंबर की रात पूर्व पीएम खालिदा की तबीयत ज्यादा बिगड़ गई. खालिदा की हालत बिगड़ते देख उपचार के लिए विदेश ले जाने की भी तैयारी थी. कतर से एक विशेष विमान भी ढाका पहुंच गया था. इस विमान को ढाका एयरपोर्ट पर स्टैंडबाई में रखा गया था. मेडिकल बोर्ड ने खालिदा जिया को ढाका के केयर हॉस्पिटल से लंदन के लिए उड़ान भरने की इजाजत नहीं दी. बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया कई बीमारियों से जूझ रही थीं. वह मधुमेह, गठिया, लीवर सिरोसिस के साथ ही हृदय रोग से पीड़ित थीं. 80 साल की खालिदा जिया आईसीयू में थीं, जहां हालत बिगड़ने पर पिछले कुछ दिनों से उनको वेंटिलेटर पर रखा गया था. बीती रात उनकी तबीयत अधिक बिगड़ गई. एक दिन पहले ही किया था नामांकन बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद अंतरिम सरकार का गठन हुआ था और अब देश में नई सरकार चुनने के लिए चुनाव हो रहे हैं. इन चुनावों में खालिदा जिया भी उम्मीदवार थीं. खालिदा ने अपने निधन से कुछ ही घंटे पहले 29 दिसंबर को नामांकन दाखिल किया था. खालिदा जिया ने बोगरा-7 सीट के लिए नॉमिनेशन किया था. बांग्लादेश की पहली महिला पीएम थीं खालिदा खालिदा जिया के नाम बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री होने का रिकॉर्ड भी है. वह साल 1991 में पहली बार प्रधानमंत्री बनीं और उसके बाद भी दो बार उन्होंने बांग्लादेश सरकार का नेतृत्व किया. बेनजीर भुट्टो के बाद खालिदा जिया दुनिया में ऐसी दूसरी महिला नेता हैं, जिन्होंने किसी मुस्लिम देश की प्रधानमंत्री का पद संभाला. राष्ट्रपति की पत्नी से बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री तक  खालिदा जिया बांग्लादेश की राजनीति की एक बहुत ही मजबूत और चर्चित शख्सियत रही हैं. एक समय वह सिर्फ एक सैन्य अधिकारी की पत्नी थीं, लेकिन हालात ने उन्हें राजनीति में ला खड़ा किया और आगे चलकर वह बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं. खालिदा जिया का जन्म 1945 में हुआ था. उनकी पढ़ाई सामान्य रही और शुरू में राजनीति से उनका कोई सीधा नाता नहीं था. उनकी शादी बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति और सेना प्रमुख जियाउर रहमान से हुई. जियाउर रहमान की हत्या के बाद खालिदा जिया की जिंदगी पूरी तरह बदल गई. पति की मौत के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की कमान संभाली. 1991 में बनी पहली महिला प्रधानमंत्री धीरे-धीरे उन्होंने खुद को एक मजबूत नेता के रूप में साबित किया. 1991 में वह बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं. इसके बाद भी वह कई बार सत्ता में रहीं और लंबे समय तक देश की राजनीति को प्रभावित करती रहीं. उनके कार्यकाल में विकास के साथ-साथ कई विवाद भी सामने आए, लेकिन उनके समर्थक उन्हें एक साहसी और जुझारू नेता मानते हैं. खालिदा जिया का जीवन संघर्ष, सत्ता, आलोचना और नेतृत्व से भरा रहा है. उन्होंने यह दिखाया कि कठिन हालात में भी एक महिला देश की राजनीति में सबसे ऊंचे पद तक पहुंच सकती है. जानें शुरुआती जीवन और परिवार खालिदा जिया का जन्म 15 अगस्त 1945 को तत्कालीन ब्रिटिश भारत (अब बांग्लादेश) के दिनाजपुर जिले में हुआ था. उनका जन्म एक साधारण परिवार में हुआ. उनके पिता का नाम इस्कंदर मजीद था, जो एक व्यापारी थे. बचपन से ही खालिदा जिया शांत स्वभाव की थीं और राजनीति से उनका कोई सीधा जुड़ाव नहीं था. कहां से खालिदा जिया ने की  पढ़ाई  खालिदा जिया ने अपनी शुरुआती पढ़ाई दिनाजपुर मिशनरी स्कूल से की.इसके बाद उन्होंने सुरेंद्रनाथ कॉलेज (अब ईडन महिला कॉलेज), ढाका से आगे की पढ़ाई पूरी की. उनकी पढ़ाई सामान्य रही और उस समय तक उनके जीवन का लक्ष्य राजनीति नहीं, बल्कि पारिवारिक जीवन था. 1959 में जियाउर रहमान से शादी खालिदा जिया की शादी 1959 में जियाउर रहमान से हुई, जो उस समय पाकिस्तानी सेना में अधिकारी थे. 1971 में जब बांग्लादेश का मुक्ति संग्राम हुआ, तब जियाउर रहमान एक प्रमुख सैन्य कमांडर के रूप में उभरे. बाद में वे बांग्लादेश के राष्ट्रपति बने. यहीं से खालिदा जिया का जीवन पूरी तरह बदल गया. वे देश की प्रथम महिला (First Lady) बनीं, हालांकि उस समय भी वे राजनीति से दूर ही रहीं.  1981 में राजनीति में एंट्री 1981 में एक सैन्य विद्रोह के दौरान राष्ट्रपति जियाउर रहमान की हत्या कर दी गई. यह घटना खालिदा जिया के जीवन का सबसे बड़ा झटका थी. पति की मृत्यु के बाद, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेताओं ने खालिदा जिया से पार्टी का नेतृत्व संभालने का आग्रह किया. इसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और BNP की अध्यक्ष बनीं. 1990 में गिरी इरशाद सरकार  खालिदा जिया ने उस समय के सैन्य शासक हुसैन मोहम्मद इरशाद के खिलाफ लोकतांत्रिक आंदोलन का नेतृत्व किया. उनकी अगुवाई में हुए आंदोलनों के चलते 1990 में इरशाद सरकार गिर गई. 1991 में बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री 1991 में हुए आम चुनावों में BNP ने जीत हासिल की और खालिदा जिया बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं. इसके बाद वे 1991–1996 और 2001–2006 तक दो बार प्रधानमंत्री रहीं. प्रधानमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल में लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत हुई, अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ, शिक्षा और बुनियादी ढांचे पर काम हुआ.

दमघोंटू दिल्ली: AQI 400+ पहुंचा, दो दिन भारी प्रदूषण का अलर्ट, नजरें बारिश पर

 नई दिल्ली ठंड और कोहरे के साथ मिलकर प्रदूषण और घातक हो गया है। सोमवार को दिल्ली की वायु गुणवत्ता गंभीर स्तर पर पहुंच गई। दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक 400 से ऊपर है और दिल्ली की हवा में सवा तीन गुने से ज्यादा प्रदूषक कण मौजूद है। वायु गुणवत्ता पूर्व चेतावनी प्रणाली का अनुमान है कि अगले दो दिनों के बीच भी वायु गुणवत्ता का स्तर बहुत खराब स्तर पर ही रहेगा। इसके बाद बारिश के आसार बन रहे हैं। सवाल यह कि क्या बारिश देगी राहत? हवा धीमी, पलूशन को मिला कोहरे के साथ विशेषज्ञों की मानें तो हवा की गति इतनी धीमी है कि प्रदूषक कणों का बिखराव बेहद धीमा हो रहा है। पलूशन कोहरे के साथ मिलकर हवा को ज्यादा प्रदूषित कर रहा है। इससे दिल्ली की हवा में स्मॉग देखा जा रहा है। खासतौर पर सुबह और शाम के वक्त इसे साफ देखा जा सकता है। इससे लोगों को सांस लेने में परेशानी, गले और नाक में खराश, आंख से पानी आना जैसी तमाम किस्म की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। 401 पर एक्यूआई केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक, सोमवार शाम को चार बजे दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 401 अंक रिकॉर्ड किया गया। इस स्तर की हवा को गंभीर श्रेणी में रखा जाता है। एक दिन पहले रविवार को दिल्ली में एक्यूआई 390 अंक पर था। यानी बीते 24 घंटे में दिल्ली के एक्यूआई में 10 अंकों की बढ़ोतरी हुई है। इन इलाकों में अति गंभीर श्रेणी में पलूशन दिल्ली के चार इलाकों का सूचकांक सोमवार को अति गंभीर श्रेणी में पहुंच गया। इनमें वजीरपुर, रोहिणी, आनंद विहार और जहांगीरपुरी जैसे इलाके शामिल हैं। वजीरपुर में एक्यूआई 462, रोहिणी में 455, जहांगीरपुरी में 459, आनंद विहार में 455 अंक रिकॉर्ड किया गया। वायु गुणवत्ता के मानकों के मुताबिक, एक्यूआई के 450 से ऊपर होने पर हवा को अति गंभीर श्रेणी माना जाता है। यानी इन इलाकों में हालत ज्यादा खराब हैं। सवा तीन गुना ज्यादा पलूशन सीपीसीबी के आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली-एनसीआर की हवा में सोमवार की शाम चार बजे पीएम 10 कणों का स्तर 330.5 और पीएम 2.5 कणों का स्तर 220.5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पर रहा। बता दें कि हवा में पीएम 10 का स्तर 100 और पीएम 2.5 कणों का स्तर 60 से कम होने पर ही उसे स्वास्थ्यकारी माना जाता है। इसके अनुसार, दिल्ली-एनसीआर की हवा में अभी मानकों से सवा तीन गुना ज्यादा प्रदूषक कण मौजूद हैं। दो दिन नहीं मिलेगी राहत वायु गुणवत्ता पूर्व चेतावनी प्रणाली का अनुमान है कि मंगलवार और बुधवार को हवा की रफ्तार ज्यादातर समय में दस किलोमीटर प्रति घंटे के आसपास रहेगी। इतना ही नहीं अधिकतम और न्यूनतम तापमान की स्थिति कमोबेश ऐसी ही रहेगी। मौसम विभाग ने भी मंगलवार और बुधवार को दिल्ली में मध्यम से घने कोहरे का येलो अलर्ट जारी किया है। इन मौसमी परिस्थितियों के कारण प्रदूषक कणों का विसर्जन बेहद धीमा रहेगा। इससे पलूशन से राहत नहीं मिलेगी। बारिश और हवा में तेजी देगी राहत मौसम विभाग की मानें तो पहली जनवरी को दिल्ली के साथ ही एनसीआर के अलग-अलग हिस्सों में हल्की बारिश या बूंदाबांदी देखी जा सकती है। लेकिन यह काफी नहीं होगी। मौसम विज्ञानियों की मानें तो यदि दिल्ली-एनसीआर में बारिश के बाद हवा तेज होती है तो इससे पलूशन से काफी राहत मिलेगी। 2, 3 और 4 जनवरी को दिल्ली में हवा की स्पीड 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटे तक जा सकती है। ये संकेत अच्छे हैं। इससे पलूशन से राहत मिलने की संभावना है।

आयुष दवाओं की क्वालिटी टेस्टिंग के लिए 108 लैब अप्रूव, झूठे और भ्रामक विज्ञापनों पर गिरेगी गाज

 नई दिल्ली  क्या आप अपनी सेहत के लिए आयुर्वेद, सिद्ध या यूनानी दवाओं पर भरोसा करते हैं? अगर हां, तो सरकार ने इन दवाओं की विश्वसनीयता और सुरक्षा बढ़ाने के लिए एक बड़ा और अहम कदम उठाया है। केन्‍द्रीय आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने जानकारी दी है कि इन दवाओं की गुणवत्ता को सुनिश्चित करने के लिए 108 प्रयोगशालाओं को मंजूरी दे दी गई है। इसका सीधा मतलब है कि अब बाजार में मिलने वाली आयुष दवाओं की जांच और भी सख्ती से होगी। लैब और इंफ्रास्ट्रक्चर को मिली मजबूती आयुष मंत्री के मुताबिक, ये सभी 108 लैब 'ड्रग्स रूल्स, 1945' के तहत मंजूर यानी लाइसेंस प्राप्त हैं। बता दें, सरकार ने सिर्फ नई प्रयोगशालाओं को मंजूरी ही नहीं दी है, बल्कि मौजूदा ढांचे को भी मजबूत किया है:     देश भर में 34 स्टेट ड्रग टेस्टिंग लैबोरेटरीज की क्षमता बढ़ाई गई है।     सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन आयुर्वेद साइंसेज (CCRAS) के तीन क्षेत्रीय अनुसंधान संस्थानों को भी ड्रग्स रूल्स 1945 के नियम 160E के तहत मंजूरी दी गई है। अक्सर देखा जाता है कि दवाओं को लेकर बढ़ा-चढ़ाकर दावे किए जाते हैं। इस पर रोक लगाने के लिए सरकार ने एक खास निगरानी कार्यक्रम लागू किया है, जो कि 'आयुष औषधि गुणवत्ता एवं उत्पादन संवर्धन योजना' (AOGUSY) के तहत काम करता है। इसके लिए तीन स्तरों पर एक नेटवर्क तैयार किया गया है:     एक नेशनल फार्माकोविजिलेंस सेंटर (NPvCC)     पांच इंटरमीडियरी फार्माकोविजिलेंस सेंटर (IPvCs)     देश भर में 97 पेरिफेरल फार्माकोविजिलेंस सेंटर (PPvCs) इन सेंटर्स का मुख्य काम भ्रामक विज्ञापनों पर नजर रखना और उनकी रिपोर्ट राज्य के अधिकारियों को देना है, ताकि गलत दावे करने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सके। इसके अलावा, इसका मकसद उपभोक्ताओं की सुरक्षा करना है। जागरूकता और सर्टिफिकेशन पर जोर सरकार लोगों को जागरूक करने और दवाओं की क्वालिटी सुधारने के लिए लगातार प्रयास कर रही है:     जागरूकता अभियान: अब तक देश भर में 3,533 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं, जिनसे 3,18,575 लोगों को लाभ हुआ है।     सर्टिफिकेशन: आयुष मंत्रालय दवा निर्माताओं को प्रोत्साहित कर रहा है कि वे 'विश्व स्वास्थ्य संगठन' के दिशा-निर्देशों के अनुसार और 'क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया' से अपनी दवाओं का सर्टिफिकेशन हासिल करें। योजना के लिए 122 करोड़ का है बजट आयुष फार्मेसी और ड्रग टेस्टिंग लैब को उच्च स्तर का बनाने के लिए सरकार ने AOGUSY योजना के तहत साल 2021-22 से 2025-26 तक के पांच वर्षों के लिए 122.00 करोड़ रुपये का वित्तीय आवंटन किया है। इससे आयुष दवाओं के निर्माण और जांच की गुणवत्ता में बड़ा सुधार आने की उम्मीद जताई जा रही है।  

स्वाद में देसी, पहचान में ग्लोबल: जामुन-आम से बनी भारतीय वाइन ने जीता दुनिया का दिल

नई दिल्ली भारत में बनने वाली वाइन अब सिर्फ अंगूर तक सीमित नहीं रही है। फलों से तैयार की गई भारतीय वाइन, खासतौर पर बिना अंगूर वाली वाइन, अब धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी अलग पहचान बना रही हैं। घरेलू बाजार में बिक्री की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी रहने के बीच अब भारतीय वाइन निर्माता अपना फोकस विदेशों की ओर बढ़ा रहे हैं, जहां ‘मेड इन इंडिया’ वाइन को नए स्वाद और नई पहचान के तौर पर देखा जा रहा है। निर्यात में रिकॉर्ड बढ़त दर्ज इकोनॉमिक टाइम्स (ET) की एक रिपोर्ट में ट्रेड रिसर्च संस्था GTRI के हवाले से बताया गया है कि मौजूदा वित्त वर्ष के पहले सात महीनों में भारत से वाइन का निर्यात बढ़कर करीब 6.7 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। यह आंकड़ा पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में दोगुने से भी अधिक है। हालांकि अभी भी एक्सपोर्ट में अंगूर से बनी वाइन का दबदबा बना हुआ है, लेकिन इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि अब विदेशी ग्राहक भारतीय फलों से बनी वाइन में भी तेजी से रुचि दिखा रहे हैं। जामुन, आम और सेब से बनी वाइन की बढ़ती लोकप्रियता जामुन के अलावा कश्मीरी सेब और अल्फांसो आम से तैयार की गई वाइन पहले ही विदेशी बाजारों में अपनी जगह बना चुकी हैं। पुणे स्थित एक वाइनरी ब्रिटेन (UK) को आम से बनी वाइन का निर्यात कर रही है, जबकि कश्मीरी सेब से बनी क्राफ्ट साइडर ब्रिटेन के कुछ चुनिंदा बाजारों में उपलब्ध है। इन उत्पादों ने यह साबित कर दिया है कि भारत में उगने वाले फलों की विविधता वाइन इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा अवसर बन सकती है। विदेशी बाजारों में क्यों बढ़ रही भारतीय वाइन की मांग इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि विदेशी पर्यटक और ग्राहक नए-नए फ्लेवर और अनोखे स्वाद को आजमाने के लिए हमेशा उत्सुक रहते हैं। यही वजह है कि UAE, अमेरिका और यूरोप जैसे बाजारों में भारतीय वाइन की मांग लगातार बढ़ रही है। हालांकि ज्यादा टैक्स और इंपोर्ट ड्यूटी के कारण कीमतें एक चुनौती बनी रहती हैं, लेकिन इसके बावजूद यह कारोबार वाइन मेकर्स और विदेशी इंपोर्टर्स दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है। जामुन वाइन की ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय एंट्री हाल ही में मुंबई से अमेरिका के लिए लगभग 800 केस वाइन की एक खास खेप भेजी गई, जिसमें जामुन से बनी भारतीय वाइन शामिल थी। यह पहली बार है जब जामुन से तैयार की गई वाइन अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंची है। महाराष्ट्र के नासिक क्षेत्र में स्थित सेवन पीक्स वाइनरी में बनी यह वाइन अब न्यूयॉर्क और न्यू जर्सी के चुनिंदा रेस्टोरेंट्स में परोसी जाएगी। जामुन जैसे आम लेकिन विशिष्ट भारतीय फल से बनी वाइन का विदेशी ग्राहकों तक पहुंचना भारतीय वाइन इंडस्ट्री के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। भारत में वाइन उद्योग और सामने मौजूद चुनौतियां भारत में वाइन निर्माण अभी भी एक उभरता हुआ क्षेत्र है, जिसकी शुरुआत लगभग तीन दशक पहले हुई थी। देश का वाइन बाजार लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इसमें अभी भी इंपोर्टेड वाइन की हिस्सेदारी ज्यादा है। वहीं, नॉर्थ-ईस्ट भारत जैसे क्षेत्रों में कीवी और चावल से बनी पारंपरिक वाइन को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की कोशिशें जरूर हुईं, लेकिन सरकारी सपोर्ट और सब्सिडी की कमी के कारण निरंतर एक्सपोर्ट करना चुनौतीपूर्ण साबित हुआ है। इसके बावजूद, फलों से बनी भारतीय वाइन की बढ़ती वैश्विक मांग यह संकेत देती है कि आने वाले समय में यह सेक्टर और तेजी से आगे बढ़ सकता है।  

कलकत्ता हाई कोर्ट ने दी बड़ी व्याख्या, विदेश में रहने वाले पति-पत्नी का तलाक विदेश में हो सकता है

कलकत्ता  कलकत्ता हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण कानूनी व्याख्या करते हुए कहा है कि यदि पति या पत्नी में से कोई एक विदेश में निवास कर रहा है, तो भारत में संपन्न हुई शादी के बावजूद विदेशी अदालत में तलाक के मामले की सुनवाई की जा सकती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि भारतीय कानून में ऐसी किसी प्रक्रिया पर पूर्ण रोक नहीं है। यह फैसला न्यायमूर्ति सब्यसाची भट्टाचार्य और न्यायमूर्ति सुप्रतिम भट्टाचार्य की खंडपीठ ने उस मामले में दिया, जिसमें तलाक के अधिकार क्षेत्र (ज्यूरिस्डिक्शन) को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया था। मामला क्या था मामले के अनुसार, दंपती का विवाह 15 दिसंबर 2018 को कोलकाता में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुआ था। पति ने 4 सितंबर 2024 को कोलकाता की अलीपुर अदालत में तलाक की याचिका दायर की। इसके बाद 10 अक्टूबर 2024 को पत्नी ने ब्रिटेन की एक अदालत में तलाक और भरण-पोषण (मेंटेनेंस) का मामला दाखिल किया। पत्नी का कहना था कि वह वर्ष 2015 से ब्रिटेन में पहले छात्र वीजा और बाद में वर्क वीजा पर रह रही है, और पति-पत्नी के रूप में उनका अंतिम साझा निवास भी ब्रिटेन में ही था। निचली अदालत का फैसला और हाई कोर्ट की दखल ब्रिटेन की अदालत ने मई 2025 में पति को भरण-पोषण देने का आदेश दिया था, लेकिन अलीपुर की निचली अदालत ने इस आदेश पर रोक लगा दी। निचली अदालत का मानना था कि चूंकि पति ने पहले भारत में तलाक की अर्जी दी थी और पत्नी के पास ब्रिटेन की स्थायी नागरिकता नहीं है, इसलिए विदेशी अदालत को अधिकार क्षेत्र प्राप्त नहीं है। हालांकि, कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस निर्णय को पलट दिया। हाई कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियां हाई कोर्ट ने कहा कि पति ने स्वयं ब्रिटेन की अदालत में उपस्थित होकर गवाही और साक्ष्य प्रस्तुत किए थे, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वह वहां की न्यायिक प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल था। ऐसे में वह बाद में उस अदालत के अधिकार क्षेत्र पर सवाल नहीं उठा सकता। कोर्ट ने पति के इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि ब्रिटेन में तलाक का आधार, विवाह का पूरी तरह टूट जाना, भारतीय कानून के अंतर्गत मान्य नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णय का हवाला देते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि जब वैवाहिक संबंध इस हद तक बिगड़ जाएं कि उनके सुधरने की कोई संभावना न बचे, तो इसे क्रूरता के समान माना जा सकता है और यह तलाक का वैध आधार हो सकता है। विदेशी अदालतों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यद्यपि हिंदू विवाह अधिनियम में जिला अदालत से तात्पर्य सामान्यतः भारतीय अदालतों से है, लेकिन बदलते वैश्विक परिप्रेक्ष्य में विदेशी अदालतों की सुनवाई को पूरी तरह अमान्य नहीं ठहराया जा सकता।  

95% मुद्दों पर सहमति के साथ रूस-यूक्रेन संघर्ष खत्म होने के करीब, जानें ट्रंप-जेलेंस्की मीटिंग में क्या हुआ

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के बीच  हुई अहम मुलाकात के बाद यूक्रेन युद्ध को लेकर उम्मीदें तेज हो गई हैं. दोनों नेताओं ने कहा है कि युद्ध खत्म करने के समझौते के बेहद करीब पहुंच चुके हैं, हालांकि अब भी एक-दो ऐसे मुद्दे हैं जो सबसे ज्यादा उलझे हुए हैं. यह बातचीत अमेरिका के फ्लोरिडा में ट्रंप के मार ए लागो रिसॉर्ट में हुई, जहां दोनों नेताओं ने करीब तीन घंटे तक बंद कमरे में चर्चा की और बाद में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की. बातचीत पर क्या बोले ट्रंप-जेलेंस्की डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्हें लगता है कि कुछ ही हफ्तों में यह साफ हो जाएगा कि शांति वार्ता सफल होगी या नहीं. उनके मुताबिक बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है और दोनों पक्षों के बीच भरोसा बढ़ा है. जेलेंस्की ने भी इसे सकारात्मक बैठक बताया और कहा कि शांति के ढांचे पर अहम सहमति बन चुकी है. सबसे बड़ा दावा सुरक्षा गारंटी को लेकर किया गया. जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन की सुरक्षा गारंटी पर पूरी सहमति बन गई है. वहीं ट्रंप ने कहा कि इस पर करीब 95 फीसदी सहमति हो चुकी है और यूरोपीय देश इसमें बड़ी भूमिका निभाएंगे, जबकि अमेरिका उनका समर्थन करेगा. दोनों नेताओं ने माना कि बिना मजबूत सुरक्षा गारंटी के स्थायी शांति संभव नहीं है. किस बात पर नहीं बन पाई सहमति? हालांकि दोनों नेताओं ने माना कि डोनबास क्षेत्र को लेकर अब भी सहमति नहीं बन पाई है. रूस चाहता है कि यूक्रेन अपनी सेना को डोनबास से पूरी तरह हटा ले, जबकि यूक्रेन इसके लिए तैयार नहीं है. ट्रंप ने कहा कि यह बेहद कठिन मुद्दा है, लेकिन इस पर भी बातचीत आगे बढ़ रही है. जेलेंस्की ने साफ किया कि यूक्रेन जिस इलाके पर नियंत्रण रखता है, वह उसे छोड़ने का फैसला केवल जनता की सहमति से ही कर सकता है और इसके लिए जनमत संग्रह का विकल्प खुला है. मीटिंग से पहले ट्रंप ने की पुतिन से बातचीत इस बैठक से ठीक पहले ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच भी फोन पर बातचीत हुई थी. ट्रंप ने इसे उपयोगी बताया, जबकि क्रेमलिन ने इसे दोस्ताना बातचीत कहा. रूस की तरफ से कहा गया कि यूरोप और यूक्रेन की ओर से प्रस्तावित 60 दिन का युद्धविराम युद्ध को लंबा कर सकता है और डोनबास पर फैसला जल्द होना चाहिए. रूस ने यह भी बताया कि आर्थिक और सुरक्षा मुद्दों पर काम करने के लिए संयुक्त कार्य समूह बनाने पर सहमति बनी है. मीटिंग के दौरान यूक्रेन पर होते रहे हमले यह मुलाकात ऐसे समय हुई जब रूस ने कीव और अन्य यूक्रेनी इलाकों पर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए. इन हमलों से कीव में बिजली और हीटिंग व्यवस्था प्रभावित हुई. जेलेंस्की ने इन हमलों को शांति प्रयासों पर दबाव बनाने की कोशिश बताया, जबकि ट्रंप ने कहा कि उन्हें लगता है कि पुतिन और जेलेंस्की दोनों ही शांति को लेकर गंभीर हैं. बातचीत में जापोरिज्जिया न्यूक्लियर पावर प्लांट का मुद्दा भी उठा. अमेरिका ने इस पर साझा नियंत्रण का प्रस्ताव रखा है और वहां बिजली लाइनों की मरम्मत का काम शुरू हो चुका है. अमेरिका और यूक्रेन के बीच 20 बिंदुओं की शांति योजना पर भी चर्चा हुई, जिसमें करीब 90 फीसदी मुद्दों पर सहमति बताई जा रही है. क्या यूक्रेन जाएंगे डोनाल्ड ट्रंप? ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर उनके यूक्रेन जाने से युद्ध खत्म होता है तो वह यूक्रेन जाने और वहां की संसद को संबोधित करने के लिए भी तैयार हैं. हालांकि उन्होंने इसे फिलहाल जरूरी नहीं बताया. जेलेंस्की ने उन्हें यूक्रेन आने का न्योता दिया. इस पूरी प्रक्रिया में यूरोपीय देशों की भूमिका भी बढ़ रही है. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री के साथ जेलेंस्की की फोन पर बातचीत हुई है और आगे यूरोपीय नेताओं के साथ संयुक्त कॉल की योजना है.

बांग्लादेश में कट्टरपंथियों के मंसूबे बुलंद, बैनर लगाकर नरसंहार की धमकी दे रहे

चटगांव  बांग्लादेश में उस्मान हादी की हत्या के बाद हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं. इस घटना के बाद से देश में हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों में डर बढ़ गया है. हाल ही में दीपू चंद्र दास की कथित तौर पर फर्जी ईशनिंदा के आरोप में भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या किए जाने से यह डर और गहरा गया है. एक ताजा घटना में चटगांव के राउजान उपजिला में एक बैनर सामने आया है, जिसमें हिंदू और बौद्ध समुदाय के दो लाख लोगों को मारने की साजिश का दावा किया गया है. यह बैनर उस इलाके से बरामद हुआ है, जहां मंगलवार को हिंदू समुदाय के घरों में आगजनी की गई थी. फिलहाल पुलिस ने बैनर को जब्त कर लिया है. बांग्लादेशी सम्मिलित सनातनी जागरण जोट के प्रतिनिधि कुशल बरुण चक्रवर्ती ने बताया कि उन्होंने हिंसा से पीड़ित हिंदू परिवारों से मुलाकात की है. उनके मुताबिक, बैनर में लिखा था कि हिंदू और बौद्ध समुदाय को पूरी तरह खत्म करने की योजना बनाई गई और इसके लिए फंडिंग भी की गई. इस पूरे मामले में इस्लामी कट्टरपंथी तत्व उस्मान हादी की हत्या के पीछे भारत का हाथ होने का बिना सबूत दावा कर अल्पसंख्यकों को निशाना बना रहे हैं. ‘हिंदुओं और अल्पसंख्यकों का वजूद मिटा देंगे’ स्थानीय मीडिया और पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि बैनर में भड़काऊ और डराने वाली भाषा का इस्तेमाल किया गया था. हिंदू और बौद्ध समुदाय के करीब दो लाख लोगों को मारने की साजिश का दावा किया गया. अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ खुले तौर पर हिंसा की धमकी दी गई. इलाके को साफ करने और अस्तित्व खत्म करने जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया. संदेश का मकसद डर फैलाना और सांप्रदायिक तनाव भड़काना बताया जा रहा है. यह बैनर उसी क्षेत्र से मिला, जहां मंगलवार को हिंदू समुदाय के घरों में आग लगाकर उन्हें जिंदा जलाने की कोशिश की गई थी. ऐसे में पुलिस मान रही है कि बैनर और आगजनी की घटना आपस में जुड़ी हो सकती हैं. इस तरह से पोस्टर सिर्फ धमकी नहीं, सामूहिक हिंसा की मानसिक तैयारी की तरह हैं, जो अल्पसंख्यकों का मनोबल तोड़कर उन्हें डराती हैं. यूनुस हिंदुओं का नामोनिशान मिटवा देंगे क्या? बांग्लादेश में सिर्फ दिसंबर के महीने में अब तक 4 हिंदुओं की हत्याएं हो चुकी हैं, जबकि देश में हुए सत्ता परिवर्तन के दौरान से लगातार हिंदुओं को टार्गेट किया जा रहा है.     जोगेश चंद्र रॉय को 7 दिसंबर को बेरहमी से गला रेतकर मार डाला गया. जोगेश के साथ उनकी पत्नी सुबर्णा रॉय की भी हत्या कर दी गई, दोनों का शव उनके घर के अंदर से मिला.     18 दिसंबर 2025 को भालुका में दीपू चंद्र दास को ईशनिंदा के आरोप में लोगों ने पीट-पीटकर मार डाला और शरीर को आग के हवाले कर दिया गया था. इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान खींचा.     इसी महीने राजबारी जिले में अमृत मंडल नामक एक हिंदू युवक को भी भीड़ के पीट-पीटकर मार डालने की खबरें आईं. 24 दिसंबर को देर रात उनके ऊपर अचानक हमला हुआ और उन्हें बचने तक का मौका नहीं मिला, 25 दिसंबर को उनकी मौत हो गई. इसके अलावा मंगलवार को हिंदुओं को घर में जिंदा जलाने के मकसद से उनके घरों में आग लगा दी गई थी और अब उन्हें नरसंहार के बैनर ने और दहशत फैला दी है. सवाल ये है कि क्या बांग्लादेश में हिंदू होना अपराध हो गया है? यूनुस के राज में हिंदुओं की यूं ही हत्या होती रहेगी और वे उन्हें मरते देखेंगे?

सुपर फास्ट ब्रह्मोस मिसाइल: एयर डिफेंस सिस्टम S-400, THAAD, आयरन डोम का निकलेगा दम

नई दिल्ली  ऑपरेशन सिंदूर ने ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल की प्रचंडता को पूरी दुनिया तक पहुंचा दिया. पाकिस्‍तान के अति सुरक्षित नूर खान एयरबेस को कुछ ही मिनटों में गहरा जख्‍म देना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. इस्‍लामाबाद को पता भी नहीं चला और उसका सबसे महत्‍वपूर्ण सैन्‍य एयरबेस ब्रह्मोस का शिकार बन गया. दिलचस्‍प बात यह है कि पाकिस्‍तान अपने संवेदनशील ठिकानों पर चीन निर्मित एयर डिफेंस सिस्‍टम डिप्‍लॉय किया हुआ है. इसके बावजूद पड़ोसी देश के सैन्‍य अमले को पता नहीं चल सका कि ब्रह्मोस किधर से आया और उसके सीने पर वार कर दिया. इससे इस बात का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि यदि भारत चाहता तो नूर खान एयरबेस के साथ ही पाकिस्‍तान के अन्‍य महत्‍वपूर्ण ठिकानों को पलभर में तबाह कर देता, पर इंडियन आर्म्‍ड फोर्सेज ने बस ट्रेलर दिखाया और स्‍पष्‍ट रूप से बता दिया कि पाकिस्‍तान का कोई भी कोना सेफ नहीं है. ब्रह्मोस को अभी तक इंटरसेप्‍ट करना किसी भी रडार सिस्‍टम के लिए संभव नहीं हुआ है. विशेषज्ञों का तो यहां तक कहना है कि साल 2040 तक इसे इंटरसेप्‍ट कर पाना आसान नहीं होगा. इस बीच, ब्रह्मोस को लेकर एक और बड़ी खबर सामने आई है. इंडियन डिफेंस साइंटिस्‍ट अब इस घातक मिसाइल का हाइपरसोनिक वर्जन डेवलप करने में जुटा है. ऐसे में किसी भी एयर डिफेंस सिस्‍टम के लिए इसे पकड़ पाना और भी मुश्किल हो जाएगा. यह चीन और पाकिस्‍तान जैसे देशों की नींद उड़ा सकती है. भारत की सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल ब्राह्मोस को लेकर एक बार फिर बड़ी और अहम जानकारी सामने आई है. ब्राह्मोस एयरोस्पेस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भरोसा जताया है कि मौजूदा और भविष्य की चुनौतियों के बावजूद 2035 से 2040 तक भी ब्राह्मोस मिसाइल को इंटरसेप्ट करना दुश्मनों के लिए बेहद मुश्किल रहेगा. अधिकारी के मुताबिक, भले ही विरोधी देश अपने रडार, सेंसर और स्पेस-आधारित ट्रैकिंग सिस्टम को अपग्रेड कर लें, फिर भी एकल ब्राह्मोस लॉन्च को रोकने की संभावना बहुत कम बनी रहेगी. अब तक के रिकॉर्ड पर नजर डालें तो ब्राह्मोस की इंटरसेप्शन दर सैद्धांतिक रूप से शून्य है. यानी आज तक किसी भी ऑपरेशनल परिस्थिति में ब्राह्मोस मिसाइल को रोका नहीं जा सका है. यह बात हाल ही में मई 2025 में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भी साबित हुई, जब भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए. इस ऑपरेशन में Su-30MKI लड़ाकू विमानों से दागी गईं ब्राह्मोस मिसाइलों ने अपने अधिकांश लक्ष्यों को सफलतापूर्वक नष्ट किया. इस अभियान ने युद्ध जैसे हालात में भी ब्राह्मोस की विश्वसनीयता और मारक क्षमता को एक बार फिर साबित कर दिया. ब्रह्मोस मिसाइल का हाइपरसोनिक वर्जन इस विरासत को आगे बढ़ाते हुए ब्राह्मोस-2 यानी हाइपरसोनिक संस्करण पर भी काम तेजी से चल रहा है. यह नई मिसाइल मैक 7 (8600 किलोमीटर प्रति घंटे से भी ज्‍यादा की गति) से भी ज्यादा की रफ्तार से उड़ान भरेगी, जो मौजूदा ब्राह्मोस से दोगुने से अधिक है. इसके पहले परीक्षण उड़ान 2028 के आसपास होने की संभावना है. ब्राह्मोस-2 की हाइपरसोनिक ग्लाइड क्षमता इसे लगभग अजेय बना देगी. विशेषज्ञों का मानना है कि यह मिसाइल अगले 20 से 30 वर्षों तक क्रूज़ मिसाइल वॉर की परिभाषा बदल सकती है. ब्राह्मोस की ताकत उसकी खास बनावट और तकनीक में छिपी है. यह मिसाइल मैक 2.8 से मैक 3 की रफ्तार से उड़ती है और उड़ान के दौरान अचानक दिशा बदलने में सक्षम है. यह बेहद कम ऊंचाई पर उड़ान भरती है, जिससे रडार को इसे समय रहते पकड़ना मुश्किल हो जाता है. इसके अलावा इसमें इनर्शियल नेविगेशन और सैटेलाइट गाइडेंस का मिश्रण है, जो ट्रैकिंग और इंटरसेप्शन को और जटिल बना देता है. भारत और रूस के संयुक्त प्रयास से बनी यह मिसाइल समय के साथ लगातार विकसित होती रही है. शुरुआत में इसकी रेंज 290 किलोमीटर थी, जिसे अब बढ़ाकर 450 से 900 किलोमीटर तक किया जा चुका है. यही कारण है कि ब्राह्मोस को जमीन, समुद्र, हवा और पनडुब्बी से लॉन्च किया जा सकता है. ब्रह्मोस को रोक पाना चुनौती वरिष्ठ अधिकारी ने वास्तविक युद्ध अनुभवों का हवाला देते हुए यूक्रेन युद्ध का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि रूस की P-800 ओनिक्स मिसाइल (जिसे ब्राह्मोस का तकनीकी पूर्वज माना जाता है) पश्चिमी देशों की मदद से लगाए गए आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम के सामने भी केवल लगभग 6 प्रतिशत तक ही इंटरसेप्ट की जा सकी. P-800 ओनिक्स भी सुपरसोनिक गति और समुद्र की सतह के बेहद करीब उड़ान भरने की क्षमता रखती है. इसके बावजूद पैट्रियट जैसे अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम भी इसे पूरी तरह रोकने में नाकाम रहे. इससे यह साफ होता है कि इतनी तेज रफ्तार और कम ऊंचाई पर उड़ने वाली मिसाइलों को रोकना आज भी एक बड़ी चुनौती है. चीन-पाकिस्‍तान का निकलेगा दम भविष्य की बात करें तो अधिकारी का मानना है कि 2040 तक ब्राह्मोस की इंटरसेप्शन दर बहुत सीमित ही रहेगी. अगर पाकिस्तान या चीन जैसे क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी गैलियम नाइट्राइड (GaN) आधारित AESA रडार, तेज गति वाले इंटरसेप्टर और बेहतर सेंसर सिस्टम भी विकसित कर लेते हैं, तब भी अधिकतम 15 से 20 प्रतिशत मामलों तक ही ब्राह्मोस को रोका जा सकेगा. उन्होंने यह भी कहा कि इन उन्नत तकनीकों को पूरी तरह लागू करना आसान नहीं है. इसके लिए भारी वित्तीय निवेश, तकनीकी विशेषज्ञता और अलग-अलग प्रणालियों का जटिल एकीकरण जरूरी होता है, जो निकट भविष्य में सभी के लिए संभव नहीं है.

नए साल में नई नियमावली: 1 जनवरी से बदल रहे हैं LPG, बैंकिंग और वाहन नियम

नई दिल्ली आपसे बस कुछ ही दिनों में साल 2025 अलविदा कहा जाएगा और नए साल की आमद होगी. 1 जनवरी 2026 से सिर्फ लोगों के घरों का कैलेंडर ही नहीं बदलेगा. बल्कि कई ऐसे नियम भी बदलेंगे जिनका असर सीधे आपकी जेब, प्लानिंग और रोजमर्रा के कामों पर पड़ेगा. बैंकिंग से लेकर सरकारी सेवाएं, गाड़ियों की कीमतें, LPG गैस तक. नए साल से यह बदलाव महसूस होंगे. इसके लिए जरूरी है कि समय रहते समझ लें कि क्या बदल रहा है. क्यों बदल रहा है और आपको क्या करना चाहिए. चलिए आपको बता रहे हैं 1 जनवरी 2026 से किन चीजों में कौन-कौन से बदलाव होने जा रहे हैं.  LPG और फ्यूल की कीमतें 1 जनवरी को घरेलू और कमर्शियल LPG गैस सिलेंडर की कीमतों की समीक्षा होगी. दिसंबर में कमर्शियल सिलेंडर 10 रुपये सस्ता हुआ था. इसलिए उम्मीद है कि घरेलू सिलेंडर में भी राहत मिल सकती है. अगर ऐसा होता है तो रसोई का  मंथली बजट थोड़ा हल्का होगा. इसके साथ ही एविएशन फ्यूल की कीमतों में बदलाव  हो सकता है. इसका सीधा असर हवाई टिकट के किराए पर पड़ सकता है. अगर ईंधन महंगा हुआ तो फ्लाइट महंगी होंगी और सस्ता हुआ तो टिकट के दाम घट सकते हैं.  कार खरीदना होगा महंगा 2026 में कार खरीदने का प्लान है तो खर्च बढ़ने के लिए तैयार रहें. जनवरी से कई ऑटो कंपनियां कीमतें बढ़ाने जा रही हैं. Honda अपनी कारों के दाम 1 से 2 फीसदी तक बढ़ा सकती है. Nissan करीब 3 फीसदी और MG 2 फीसदी तक बढ़ोतरी की तैयारी में है. BYD की Sealion 7 नए साल में महंगी होगी. Mercedes-Benz ने 2 फीसदी इजाफे का संकेत दिया है. जबकि BMW की कारें 3 फीसदी तक महंगी हो सकती हैं.  सरकारी कर्मचारियों और मजदूरों के लिए बदलाव 1 जनवरी 2026 से 8वां वेतन आयोग लागू होने की उम्मीद है. क्योंकि 7वां वेतन आयोग 31 दिसंबर को खत्म हो रहा है. इसके साथ ही महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी की संभावना है. इसका मतलब है कि केंद्र और राज्य कर्मचारियों की सैलरी में सीधा फायदा. कुछ राज्य जैसे हरियाणा, पार्ट टाइम और दिहाड़ी मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने पर भी काम कर रहे हैं.  आधार पैन और बैंकिंग नियम पैन और आधार लिंक करने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर 2025 है. अगर यह काम नहीं किया तो जनवरी 2026 से पैन इनएक्टिव हो जाएगा. इसका असर बैंकिंग, निवेश और ITR फाइलिंग सब पर पड़ेगा. इसके अलावा नया ITR फॉर्म आ सकता है. जिसमें पहले से भरी बैंक और खर्च की जानकारी होगी. बैंकिंग नियमों में भी बदलाव होंगे. क्रेडिट स्कोर एजेंसियां अब हर हफ्ते डेटा अपडेट करेंगी. पहले 15 दिन में होता था. यानी लोन और कार्ड से जुड़ा असर जल्दी दिखेगा. 

₹79,000 करोड़ की मंजूरी से बदलेगी सेना की ताकत, DAC के फैसले से क्या होंगे बड़े बदलाव?

नई दिल्ली भारतीय सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमताओं और युद्धक प्रभावशीलता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक बड़ा रणनीतिक निर्णय लिया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने सोमवार को लगभग ₹79,000 करोड़ के रक्षा खरीद प्रस्तावों के लिए 'आवश्यकता स्वीकृति' (AoN) प्रदान की। यह मंजूरी मुख्य रूप से भविष्य के युद्धक्षेत्र की जरूरतों, जैसे ड्रोन तकनीक, सटीक मारक क्षमता और उन्नत रडार प्रणालियों पर केंद्रित है। थल सेना के लिए स्वीकृत प्रस्तावों में आधुनिक तकनीक का समावेश किया गया है, जो सामरिक युद्ध क्षेत्र में भारत की बढ़त सुनिश्चित करेंगे। लोइटर मुनिशन सिस्टम: सामरिक लक्ष्यों पर सटीक और घातक हमले करने के लिए इन प्रणालियों की खरीद को मंजूरी दी गई है-     लो लेवल लाइट वेट रडार: ये रडार छोटे आकार के और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले मानवरहित हवाई प्रणालियों (UAVs) का पता लगाने और उन पर नज़र रखने में सक्षम होंगे।     पिनाका एमआरएलएस (MLRS): पिनाका मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम के लिए लंबी दूरी के निर्देशित रॉकेट गोला-बारूद को मंजूरी मिली है, जिससे उच्च मूल्य वाले लक्ष्यों को अधिक सटीकता से निशाना बनाया जा सकेगा।     ड्रोन डिटेक्शन सिस्टम: एकीकृत ड्रोन डिटेक्शन एंड इंटरडिक्शन सिस्टम एमके-II (Mk-II) भारतीय सेना की महत्वपूर्ण संपत्तियों की रक्षा करेगा। भारतीय नौसेना: समुद्री जागरूकता और सुरक्षित संचार नौसेना की क्षमताओं को आधुनिक बनाने के लिए निम्नलिखित प्रस्तावों को हरी झंडी दी गई है-     बीपी टग्स (Bollard Pull Tugs): ये टग्स बंदरगाहों और संकरे जलक्षेत्र में जहाजों और पनडुब्बियों की पैंतरेबाजी और लंगर डालने में सहायक होंगे।     सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो (HF SDR): हाई फ्रीक्वेंसी एसडीआर मैनपैक के शामिल होने से बोर्डिंग और लैंडिंग ऑपरेशंस के दौरान लंबी दूरी का सुरक्षित संचार सुनिश्चित होगा।     HALE RPAS (पट्टा): हिंद महासागर क्षेत्र में निरंतर निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने के लिए हाई एल्टीट्यूड लॉन्ग रेंज रिमोटली पायलेटेड एयरक्राफ्ट सिस्टम को पट्टे (Lease) पर लिया जाएगा। वायुसेना: एयरोस्पेस सुरक्षा और लंबी दूरी की मारक क्षमता भारतीय वायु सेना (IAF) के बेड़े को और अधिक घातक बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण हथियारों और प्रणालियों की घोषणा की गई है। ये हैं-     एस्ट्रा एमके-II मिसाइल: हवा से हवा में मार करने वाली इस उन्नत मिसाइल से लड़ाकू विमानों की दुश्मन को लंबी दूरी से नष्ट करने की क्षमता बढ़ेगी।     SPICE-1000 गाइडेंस किट: यह किट भारतीय वायुसेना की लंबी दूरी की सटीक मारक क्षमता (Precision Strike) को और मजबूत करेगी।     फुल मिशन सिमुलेटर: एलसीए (LCA) तेजस के लिए सिमुलेटर पायलटों के प्रशिक्षण को अधिक किफायती, सुरक्षित और प्रभावी बनाएंगे।     ऑटोमैटिक टेक-ऑफ लैंडिंग रिकॉर्डिंग सिस्टम: यह तकनीक एयरोस्पेस सुरक्षा में सुधार करेगी और हर मौसम में स्वचालित रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराएगी। आर्थिक और औद्योगिक प्रभाव ये सभी प्रस्ताव 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा देंगे। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन परियोजनाओं से भारतीय रक्षा उद्योगों, विशेषकर रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों (DPSUs) और निजी क्षेत्र के एमएसएमई (MSMEs) को बड़े पैमाने पर ऑर्डर मिलेंगे, जिससे देश में रोजगार और तकनीकी नवाचार को गति मिलेगी। भविष्य की रणनीतिक तैयारी ₹79,000 करोड़ का यह निवेश न केवल सेनाओं की वर्तमान कमियों को दूर करेगा, बल्कि भारत को भविष्य के 'टेक्नोलॉजी-ड्रिवेन' युद्धों के लिए भी तैयार करेगा। पिनाका और एस्ट्रा जैसी स्वदेशी मिसाइल प्रणालियों पर भरोसा जताना वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती रक्षा निर्यात क्षमताओं और रक्षा विनिर्माण में स्वावलंबन का प्रमाण है।