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भारत की सख्ती से सहमा पाकिस्तान, ऑपरेशन सिंदूर के डर से बॉर्डर पर लगाए एंटी-ड्रोन उपकरण

नई दिल्ली  ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने पाकिस्तान पर कई हवाई हमले करते हुए उसे बुरी तरह पराजित किया था। उस हार का भय पाकिस्तान के मन से जा नहीं रहा है। अब उसने एलओसी के पास एंटी ड्रोन सिस्टम की तैनाती बढ़ा दी है, जिससे भारत अगली बार हवाई हमले करता है तो उसे कुछ सोचने-समझने का समय मिल सके। हालांकि, ऑपरेशन सिंदूर के समय पाकिस्तान के चीनी एंट्री ड्रोन सिस्टम बिल्कुल काम नहीं किए थे और भारत ने जहां चाहा था, वहां हमला किया था। मीडिया के अनुसार, पाकिस्तान ने एलओसी के पास पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) के आगे वाले इलाकों में एंट्री ड्रोन की तैनाती को बढ़ाया है। उसने रावलकोट, कोटली, भीमबर सेक्टर पर नए काउंटर अनमैन्ड एरियल सिस्टम (C-UAS) लगाए हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने 30 डेडीकेटेड एंटी-ड्रोन सिस्टम्स लगाए हैं। इसके जरिए पाकिस्तान अपने एयरस्पेस को बेहतर करने में लगा हुआ है। पाकिस्तानी सेना ने इलेक्ट्रॉनिक और काइनेटिक काउंटर यूएएस सिस्टम का मिक्स लगाया है। इसको लेकर दावा किया जाता है कि यह दस किलोमीटर की रेंज में आने वाले छोटे या फिर बड़े ड्रोन का पता लगा सकता है। हालांकि, यह युद्ध के समय कितना काम आएगा, यह तो समय पर ही पता चलेगा। वहीं, पाकिस्तान सफराह एंटी यूएवी जैमिंग गन का भी इस्तेमाल करता है, जिसे कंधे से चलाया जाता है और आसानी से डेढ़ किलोमीटर की रेंज में आने वाले ड्रोन को मार गिराया जा सकता है। ऑपरेशन सिंदूर अब भी जारी है अप्रैल महीने में पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमला करके कई पर्यटकों की जान ले ली थी। इसके बाद भारत ने मई के शुरुआत में ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया और पीओके से लेकर पाकिस्तान तक, लश्कर, जैश जैसे आतंकियों के ठिकानों पर हवाई हमले किए। इसमें बड़ी संख्या में आतंकी मारे गए। पाकिस्तान ने भी जवाबी कार्रवाई की और जम्मू-कश्मीर से गुजरात तक बॉर्डर के इलाकों में तुर्की ड्रोन के जरिए हमले की नाकाम कोशिश की। भारत ने फिर जवाब देते हुए पाकिस्तान के कई एयरबेस को तबाह कर दिया था। हालांकि, बाद में दोनों देशों के बीच युद्धविराम की घोषणा हो गई, लेकिन भारत ने साफ कर दिया कि ऑपरेशन सिंदूर खत्म नहीं हुआ है और यह अब भी जारी है। अगर पाकिस्तान की ओर से आगे कोई भी हमला किया गया तो उसे 'एक्ट ऑफ वॉर' माना जाएगा।

16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया प्रतिबंध की वकालत, मद्रास हाई कोर्ट ने केंद्र को दी सलाह

मदुरै मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने केंद्र सरकार को बड़ा सुझाव दिया है कि वह ऑस्ट्रेलिया की तर्ज पर कानून लाने की संभावना तलाशे, जिसमें 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का उपयोग पूरी तरह से प्रतिबंधित किया जाए. जस्टिस केके रामकृष्णन और जस्टिस जी जयचंद्रन की डिवीजन बेंच एक जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई कर रही थी, जिसमें इंटरनेट पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई गई. याचिकाकर्ता एस विजयकुमार ने कोर्ट में 'रिट ऑफ मैंडमस' की मांग की थी. उन्होंने पूरे देश में सभी इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स (ISP) को 'पैरेंटल विंडो' या पैरेंटल कंट्रोल सुविधा अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने की मांग की. याचिकाकर्ता का मुख्य तर्क था कि इंटरनेट पर अश्लील सामग्री और चाइल्ड सेक्शुअल अब्यूज मटेरियल (CSAM) आसानी से उपलब्ध है, जो नाबालिग बच्चों तक पहुंच रहा है. इससे बच्चों का मानसिक और भावनात्मक विकास खतरे में पड़ रहा है. हाई कोर्ट ने याचिका पर विस्तार से सुनवाई के बाद इसे निपटाते हुए कहा, 'हम समझते हैं कि ऑनलाइन CSAM वाली वेबसाइट्स और URL लगातार अपडेट होती रहती हैं और सक्रिय रहती हैं. हालांकि, इसके साथ-साथ यूजर एंड पर भी नियंत्रण जरूरी है. यह नियंत्रण केवल पैरेंट कंट्रोल ऐप या सुविधा से ही संभव है. इसके लिए अंतिम उपयोगकर्ताओं को चाइल्ड पोर्नोग्राफी के खतरे और बचाव के उपायों के बारे में जागरूक करना अनिवार्य है.' भारत में भी बने ऑस्ट्रेलिया जैसा कानून हाई कोर्ट ने आगे जोर देते हुए कहा, 'अंततः यह व्यक्तिगत चुनाव और अधिकार है कि कोई व्यक्ति ऐसी घृणित सामग्री देखे या न देखे. लेकिन बच्चों के मामले में जोखिम बहुत अधिक है, इसलिए माता-पिता की जिम्मेदारी भी उतनी ही बढ़ जाती है. याचिकाकर्ता के अधिवक्ता के सुझाव पर हम कहते हैं कि भारत सरकार ऑस्ट्रेलिया जैसे कानून की संभावना तलाश सकती है, जिसमें 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया का उपयोग वर्जित किया गया हो.' मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने अंतरिम राहत के तौर पर निर्देश दिया कि जब तक ऐसा कानून नहीं बनता, तब तक संबंधित अधिकारी जागरूकता अभियान को और अधिक प्रभावी बनाएं. सभी उपलब्ध माध्यमों से संवेदनशील समूहों, खासकर बच्चों और अभिभावकों तक संदेश पहुंचाया जाए. कोर्ट ने उम्मीद जताई कि केंद्र और राज्य स्तर पर बने आयोग इस दिशा में ठोस कार्ययोजना बनाकर उसे पूरी तरह लागू करेंगे. विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया का अंधाधुंध उपयोग बच्चों में मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं, साइबर बुलिंग और अनुचित सामग्री के संपर्क में आने का खतरा बढ़ा रहा है.

बांग्लादेश में अराजकता के साये में जनसंख्या विस्फोट: कंडोम संकट के बीच रिकॉर्ड जन्मदर

नई दिल्ली  शेख हसीना की सरकार के पतन के साथ ही बांग्लादेश अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। वहां हर दिन उपद्रव देखने को मिल जा रहे हैं। इस सबके बीच एक गंभीर संकट सामने आ खड़ी हुई है। बांग्लादेश इन दिनों कंडोम की भारी किल्लत का सामना कर रहा है। इसके कारण जन्मदर में भी बीते 50 वर्षों में भारी उछाल हुआ है। बांग्लादेश का यह ताजा संकट फंड की कमी और मानव संसाधन की भारी कमी के कारण उत्पन्न हुआ है। इसकी वजह से बीते कुछ वर्षों में गर्भनिरोधकों की आपूर्ति लगातार घटती गई है, जिसका सीधा असर देश की जनसंख्या वृद्धि पर पड़ रहा है। स्थिति यह है कि परिवार नियोजन महानिदेशालय के पास उपलब्ध कंडोम का स्टॉक मात्र 39 दिनों के लिए बचा है। ऐसे में अगले वर्ष की शुरुआत में कम से कम एक महीने तक कंडोम वितरित नहीं किए जा सकेंगे। इससे परिवार नियोजन सेवाएं बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका है। 50 वर्षों में पहली बार बढ़ी प्रजनन दर यह संकट ऐसे समय सामने आया है जब देश में कुल प्रजनन दर के मामले में पिछले 50 वर्षों में पहली बार वृद्धि दर्ज की गई है। मल्टीपल इंडिकेटर क्लस्टर सर्वे 2025 के अनुसार, प्रजनन दर 2024 के 2.3 से बढ़कर 2.4 हो गई है। विशेषज्ञों और सरकारी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि गर्भनिरोधकों की कमी बनी रही तो प्रजनन दर और बढ़ सकती है। गर्भनिरोधकों के उपयोग में भारी गिरावट सर्वे के अनुसार, 15 से 49 वर्ष की विवाहित महिलाओं में गर्भनिरोधकों का उपयोग 2019 के 62.7% से घटकर 58.2% रह गया है। आधुनिक गर्भनिरोधकों तक पहुंच भी 77.4% से घटकर 73.5% रह गई है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि गर्भनिरोधकों की उपलब्धता और प्रजनन दर के बीच सीधा संबंध है। कोविड के बाद बिगड़ी स्थिति बांग्लादेश के अधिकारियों के मुताबिक, कोविड-19 महामारी (2020) के दौरान गर्भनिरोधकों की मांग तो बढ़ी, लेकिन सरकार ने उस समय परिवार नियोजन को प्राथमिकता नहीं दी। एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त वहां की मीडिया आुटलेट 'द डेलीस्टार' को बताया कि 2023 में स्वास्थ्य मंत्रालय ने करीब एक साल तक गर्भनिरोधकों की खरीद रोक दी, जिससे आपूर्ति में भारी अंतर आ गया। एक रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2019 में कंडोम की आपूर्ति 97.48 लाख थी, जो सितंबर 2025 तक घटकर 41.52 लाख रह गई। एक अधिकारी ने बताया कि सरकार ने पिछले महीने सभी पांच गर्भनिरोधकों की खरीद के लिए एक परियोजना को मंजूरी दी है, लेकिन खरीद प्रक्रिया पूरी होने में कम से कम तीन महीने लगेंगे। उन्होंने कहा कि सीमित मात्रा में कंडोम की खरीद की जा रही है, फिर भी अगले साल एक महीने तक सप्लाई बाधित रह सकती है। ढाका विश्वविद्यालय के जनसंख्या विज्ञान विभाग के प्रोफेसर अमीनुल इस्लाम का कहना है कि गर्भनिरोधकों और स्टाफ की कमी ने जन्म नियंत्रण गतिविधियों को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, जिसका सीधा असर प्रजनन दर पर पड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में कई दंपति दो से अधिक बच्चे चाहने लगे हैं, जो चिंता का विषय है।  

रहमान की सीख और जमीनी हकीकत: कानून-व्यवस्था पर सवाल, हिंदू की लिंचिंग से मचा हड़कंप

ढाका  बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के नेता तारिक रहमान 24 दिसंबर को जब अपना मुल्क लौटने की तैयारी कर रहे थे. तो उनके मन में बांग्लादेश को लेकर एक सपना था. सेकुलर बांग्लादेश का, लोकतांत्रिक बांग्लादेश का. उस बांग्लादेश का जहां कानून का राज होगा. बांगलादेश को लेकर उनका सपना उनके भाषणों में साफ दिखता है. लेकिन ठीक उसी समय बांग्लादेश में कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही थी.  24 दिसंबर की रात को बांग्लादेश के राजबाड़ी जिले के पांग्शा उपजिला में होसेंडांगा पुराने बाजार क्षेत्र में रात करीब 11 बजे एक भीड़ ने हिन्दू युवक अमृत मंडल की हत्या कर दी. भीड़ ने सबसे पहले अमृत मंडल पर हमला किया और उसकी खूब पिटाई कर दी. पुलिस ने उन्हें गंभीर हालत में उन्हें बचाया और अस्पताल पहुंचाया, जहां रात करीब 2 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया.  25 दिसंबर को अमृत मंडल की मौत हो गई और 25 दिसंबर को ही तारिक रहमान 17 सालों बाद लंदन से बांग्लादेश लौटे.  पहले दीपू, अब अमृत, 6 दिन में 2 हिन्दुओं की लिंचिंग दीपू चंद्र दास की हत्या के 6 दिन बाद हुए इस कत्ल से बांग्लादेश का हिन्दू समुदाय सदमे में है. बांग्लादेश की पुलिस और अंतरिम सरकार इस घटना पर पर्दा डालने की कोशिश कर रही है.  पुलिस का कहना है कि यह सांप्रदायिक हमला नहीं था, बल्कि स्थानीय अपराधी गतिविधियों से जुड़ा मामला था. पुलिस का दावा है कि अमृत मंडल के खिलाफ हत्या सहित कई आपराधिक मामले दर्ज थे. और उसे एक स्थानीय गिरोह का सरगना माना जाता था. अगर बांग्लादेश पुलिस का दावा सच भी है तो भी एक भीड़ को किसी की हत्या की इजाजत नहीं दी जा सकती है. 25 दिसंबर को तारिक रहमान जब ढाका में अपनी पहली सभा को संबोधित कर रहे थे तो उन्होंने बांग्लादेश में हर कीमत पर कानून-व्यवस्था की मर्यादा कायम रखने की सलाह चीफ एडवाइजर मोहम्मद यूनुस को दी थी.  तारिक रहमान ने बुधवार को  कहा, “देश की शांति और अनुशासन को किसी भी कीमत पर बनाए रखना होगा. साजिशों का मुकाबला करने के लिए सभी को धैर्य के साथ आगे बढ़ना होगा.” ये बांग्लादेश मुसलमानों-हिन्दुओं का है BNP के कार्यकारी अध्यक्ष ने कहा कि, "लोग लोकतंत्र वापस चाहते हैं. साथ मिलकर, हम एक सुरक्षित बांग्लादेश बनाएंगे."  तारिक रहमान ने भले ही लोकतांत्रिक और सुरक्षित बांग्लादेश का सपना देखा हो लेकिन मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाला बांग्लादेश में हिन्दुओं के लिए न तो लोकतंत्र है और न ही वे यहां सुरक्षित दिख रहे हैं.  पहले 18 दिंसबर को दीपू चंद्र की हत्या इसके बाद 24 दिसंबर को अमृत मंडल की हत्या इसी का सबूत है.  तारिक रहमान के सपनों का बांग्लादेश अबतक सेकुलर दिखता है. 25 दिसंबर को अपने भाषण में उन्होंने इस बात पर जोर दिया.  तारिक रहमान ने ढाका के बाहरी इलाके पूर्बांचल में लाखों की भीड़ को संबोधित करते हुए कहा, "आज बांग्लादेश के लोग बोलने का अपना अधिकार वापस पाना चाहते हैं. वे अपने लोकतांत्रिक अधिकार वापस पाना चाहते हैं." "अब समय आ गया है कि हम सब मिलकर देश बनाएं. यह देश पहाड़ों और मैदानों के लोगों, मुसलमानों, हिंदुओं, बौद्धों और ईसाइयों का है. हम एक सुरक्षित बांग्लादेश बनाना चाहते हैं, जहां हर महिला, पुरुष और बच्चा घर से निकलकर सुरक्षित घर लौट सके." यूनुस के राज में चटगांव में हिन्दुओं पर हमले बढ़े बांग्लादेश के चट्टगांव में भी हिन्दू परिवारों पर हमले हुए हैं और मोहम्मद यूनुस की पुलिस रस्मी कार्रवाई के अलावा कुछ नहीं कर पा रही है. चटगांव के राउज़ान के तीन इलाकों में पांच दिनों में अल्पसंख्यक समुदायों के चार घरों पर आगजनी की घटनाओं की एक सीरीज़ ने उपज़िला के निवासियों में डर फैला दिया है.  पीड़ितों और पुलिस के अनुसार हमले देर रात किए गए हमलावरों ने घरों में आग लगाने से पहले उनके मुख्य दरवाजों को बाहर से बंद कर दिया था.  हमले से बचते हुए ये हिन्दू परिवार बांस या टिन की दीवारों को काटकर भागने में कामयाब रहे.  ताज़ा घटना मंगलवार को सुबह करीब 3:45 बजे राउज़ान नगर पालिका के पश्चिम सुल्तानपुर के शिल्पारा में हुई, जिसमें सुलाल शिल और अनिल शिल के घरों को निशाना बनाया गया.  पुलिस ने घटनास्थल के पास से एक संदिग्ध हाथ से लिखा बैनर ज़ब्त किया. इसमें 43 मोबाइल फोन नंबर भी थे. दोनों परिवारों के आठ सदस्य घरों के अंदर सो रहे थे, वे घने धुएं और आग की लपटों से जागे.  सुलाल के बेटे मिथुन शिल, जो दुबई में रहते हैं और तीन महीने पहले अपनी शादी के लिए घर लौटे थे, ने कहा, "हम घबरा गए और बाहर भागने की कोशिश की, लेकिन हमने पाया कि दोनों दरवाजों पर बाहर से कुंडी लगी हुई थी." "आखिरकार, हमें अपनी जान बचाने के लिए बांस और टिन की दीवारों को काटना पड़ा." मिथुन ने बताया कि उनका पासपोर्ट, फर्नीचर और एक महीने पहले शादी में मिले करीब 10 लाख रुपये के शादी के तोहफे आग में जलकर खाक हो गए.  

अफेयर के शक ने ली जान, बच्चों के सामने पेट्रोल डालकर पत्नी को जिंदा जलाया, आरोपी फरार

हैदराबाद  हैदराबाद में एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है। यहां एक शख्स ने अपनी पत्नी को बच्चों के सामने ही आग लगाकर मार डाला। इतना ही नहीं उसने भागने से पहले अपनी बेटी को भी आग में धक्का दे दिया। घटना हैदराबाद के नालाकुंटा इलाके की है। पुलिस ने बताया कि पति को पत्नी पर अफेयर का शक रहता था औऱ इसको लेकर दोनों में झगड़ा होता रहता था। जानकारी के मुताबिक 24 दिसंबर को आरोपी अपनी पत्नी त्रिवेणी को बच्चों के सामने ही परेशान करने लगा। इसके बाद उसने त्रिवेणी पर पेट्रोल डाला और आग लगा दी। जब बेटी ने मां को बचाने की कोशिश की तो आरोपी ने उसे भी आग में धक्का दे दिया। इसके बाद आरोपी वहां से फरार हो गया। जानकारी के मुताबिक आरोपी वेंकटेश और त्रिवेणी ने लवे मैरिज की थी। उनका एक बेटा और एक बेटी है। वेंकटेश को शक था कि पत्नी का किसी और के साथ अफेयर है। इसके बाद वह अकसर पत्नी को प्रताड़ित करता था। हाल ही में त्रेवेणी भी अपने मायके गई थी। त्रिवेणी के वापस लौटने के बाद फिर झगड़ा शुरू हो गया। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज करके जांच शुरू कर दी है। वहीं वेंकटेश अब भी फरार है। पुलिस का कहना है कि आरोपी को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। दोनों बच्चों को फिलहाल ननिहाल भेज दिया गया है। आसपास के लोगों का कहना है कि शादी के कुछ दिनों के बाद से ही उनमें अनबन रहने लगी थी। वहीं बीते कुछ दिनों से झगड़ा ज्यादा होने लगा था। इसीलिए त्रिवेणी कुछ दिनों के लिए अपने मायके चली गई थी।  

आज बांग्लादेश में स्टार एंट्री, 17 साल पहले बेल लेकर लंदन फरार थे तारिक रहमान

ढाका  बांग्लादेश में तारिक रहमान ने हीरो जैसी एंट्री की है। गुरुवार को उनके समर्थन में लाखों लोगों की भीड़ उमड़ी। उन्होंने भी मां, माटी और मानुष वाला संदेश देने की कोशिश की। बांग्लादेश की जमीन पर पहुंचकर वह नंगे पैर खड़े हुए, मां खालिदा जिया से मुलाकात की और बांग्ला मानुष के लिए भविष्य की योजनाओं को लेकर बात की। तारिक रहमान का बांग्लादेश के उन दो परिवारों में से एक से नाता रहा है, जो देश की राजनीति की धुरी रहे हैं। उनमें से एक परिवार की नेता शेख हसीना इन दिनों भारत में शरण लिए हुए हैं। वहीं दूसरा परिवार बेगम खालिदा जिया का है, जो फिलहाल बीमार चल रही हैं। तारिक रहमान उनके ही बेटे हैं। तारिक के पिता जिया उर रहमान भी पीएम रह चुके हैं। रहमान की कहानी भी कम रोचक नहीं है। वह 2008 में उस वक्त लंदन निकल गए थे, जब उन्हें जेल से बेल पर रिहाई मिली थी। इसी दौरान वह मौका देखकर लंदन के लिए निकल गए थे। वह जिया उर रहमान और खालिदा जिया के सबसे बड़े बेटे हैं। खालिदा जिया 1991 में देश की पहली महिला पीएम बनी थीं। लेकिन तारिक रहमान के राजनीति में चर्चे तब शुरू हुए, जब 2001 से 2006 के बेगम खालिदा जिया के दौर में उन पर भ्रष्टाचार, हिंसा जैसे आरोप लगे थे। इसी बीच उनकी मां की सत्ता से 2006 में विदाई हो गई थी और सैन्य समर्थन वाली केयरटेकर सरकार आई थी, जिसने उनके खिलाफ जांच की। आर्मी ने देर रात को किया था तारिक रहमान को अरेस्ट मार्च 2007 में तारिक रहमान को आर्मी यूनिट्स ने अरेस्ट कर लिया था। उन्हें उनके ढाका स्थित लग्जरी घर से निकालकर देर रात में ले जाया गया था। कई महीनों के बाद वह बेल पर रिहा हुए थे और फिर इलाज कराने के नाम पर लंदन चले गए और वहां से लौटे ही नहीं। फिर वह सीधे गुरुवार को ही ठीक 17 साल के बाद वापस लौटे। रहमान और बीएनपी की ओर से लगातार कहा जाता रहा है कि उनके ऊपर आरोप राजनीतिक थे, लेकिन विपक्ष से अलग भी ऐसे लग रहे हैं, जो उन पर संदेह करते रहे हैं।   विकिलीक्स के खुलासों में तारिक रहमान पर क्या कहा गया था यहां तक कि 2011 में आए विकिलीक्स के खुलासों में भी तारिक रहमान को लेकर दावा किया गया था कि वह हिंसा को बढ़ावा देने वाले और मनमाने ढंग से सत्ता चलाने वाले शख्स हैं। हालांकि अब उन्हें बांग्लादेश में नए तेवरों के साथ पेश किया जा रहा है। उनकी हीरो जैसी एंट्री हुई है और आने वाले पीएम के तौर पर उन्हें देखा जा रहा है। तारिक रहमान ने भी इस मौके को खूब भुनाया है। उन्होंने आते ही इमोशनल बातें की हैं और बांग्लादेश में हिंसा को खत्म करने की बात कही है। हालांकि यह देखना होगा कि सत्ता हासिल करने के बाद उनका रुख क्या होगा।  

दिल्ली हाईकोर्ट के बाहर गूंजा आक्रोश, उन्नाव रेप मामले में कुलदीप सेंगर को जमानत न देने की मांग

नई दिल्ली  उन्नाव रेप केस में दोषी पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से मिली सशर्त जमानत के खिलाफ लोगों में गुस्सा बढ़ने लगा है। उन्नाव रेप केस की पीड़िता के परिवार और अन्य महिला कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट के बाहर सेंगर की जमानत के खिलाफ विरोध प्रदर्शन अपनी नाराजगी जाहिर की। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से वहां विरोध-प्रदर्शन नहीं करने की अपील की। इसके साथ ही चेतावनी देते हुए कहा, “यहां प्रदर्शन करना मना है और गैर-कानूनी है। पांच मिनट बाद आपके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। अगर आप विरोध करना चाहते हैं, तो जंतर-मंतर जाएं।” रेप पीड़िता की मां ने कहा कि जमानत खारिज की जानी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि वह न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएंगी, उन्होंने हाईकोर्ट के फैसले पर अविश्वास जताया। उन्होंने बताया, "उसकी जमानत खारिज होनी चाहिए। हम सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। हमें हाईकोर्ट पर भरोसा नहीं रहा। अगर हमें सुप्रीम कोर्ट में न्याय नहीं मिला, तो हम दूसरे देश जाएंगे, मेरे पति के हत्यारे को तुरंत फांसी दी जानी चाहिए।" महिला एक्टिविस्ट योगिता भयाना ने कहा कि उन्होंने उन्नाव रेप पीड़िता के लिए न्याय की मांग करते हुए शांतिपूर्वक ढंग से दिल्ली हाईकोर्ट आए हैं। हमारी कोर्ट से अपील है कि उनकी याचिका पर सुनवाई की जाए। उन्होंने कहा कि अगर न्याय नहीं मिला तो वे विरोध प्रदर्शन करेंगे। योगिता भयाना ने कहा, "आज, हम शांतिपूर्वक ढंग हाईकोर्ट आए हैं ताकि हमारी बेटी के साथ हुए अन्याय को खत्म किया जाए और जो याचिका हम दायर करने वाले हैं, उसे सुना जाए। अगर हमें न्याय नहीं मिला, तो हम विरोध करेंगे, और यह हमारा अधिकार है।" कांग्रेस नेता मुमताज पटेल ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले की आलोचना करते हुए इसे "बहुत बड़ा झटका" बताया और कहा कि यह फैसला देशभर की महिलाओं का आत्मविश्वास कम करता है। मुमताज पटेल ने कहा, ''हाईकोर्ट जिस तरह से एक टेक्निकल वजह से सेंगर को क्लीन चिट दे दी है, यह एक बहुत बड़ा झटका है। यह देश में एक बहुत गलत मिसाल कायम कर रहा है। इस फैसले से सिर्फ उनका ही नहीं, बल्कि पूरे देश की महिलाओं का भी आत्मविश्वास कितना टूट गया होगा। दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्नाव रेप केस में पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को जमानत (सजा पर रोक) दे दी है। दिल्ली की सीबीआई कोर्ट ने सेंगर को एक नाबालिग से रेप के मामले में दोषी ठहराया था। वो फिलहाल उम्रकैद की सजा काट रहे थे। उन्हें इस शर्त पर राहत दी गई है कि वे 15 लाख रुपये का बेल बॉन्ड जमा करें। हालांकि, वह जेल में ही रहेंगे क्योंकि पीड़ित के पिता की कस्टडी में मौत के मामले में उन्हें अभी तक जमानत नहीं मिली है। दिल्ली हाईकोर्ट में अपील और सजा निलंबित करने की अर्जी पेंडिंग है। उस मामले में उन्हें 10 साल की सजा सुनाई गई थी। जमानत देते समय, हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि सेंगर उस 5 किलोमीटर के इलाके में नहीं जाएंगे जहां पीड़ित दिल्ली में रहता है। यह भी निर्देश दिया गया है कि सेंगर दिल्ली में ही रहेंगे। वह पीड़ित के परिवार के सदस्यों से संपर्क नहीं करेंगे।  

चयनात्मक संवेदना पर सवाल: गाजा के लिए आवाज़, बांग्लादेश में दीपू चंद्र दास की हत्या पर चुप्पी क्यों?

ढाका  बांग्लादेश में दीपू चंद्र दास (30) की लिंचिंग पर एंटरटेमेंट इंडस्ट्री से जुड़े कई सिलेब्रिटीज ने जमकर गुस्सा निकाला है। जाह्नवी कपूर, काजल अग्रवाल और जया प्रदा जैसी दिग्गज हस्तियों ने इस घटना पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। इन सितारों ने न सिर्फ इस हत्या की निंदा की है, बल्कि बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा पर भी गहरी चिंता व्यक्त की है। इस बीच सोशल मीडिया पर भी #JusticeForDipuChandraDas ट्रेंड कर रहा है। जाह्नवी ने इंस्टा पर लंबा पोस्ट लिखा है। उनका कहना है कि यह अकेली घटना नहीं है। जया प्रदा ने हिंदुओं की सुरक्षा की मांग की है वहीं मनोज जोशी का कहना है कि गाजा के लिए सब आगे आते हैं हिंदू की हत्या पर चुप्पी साधना ठीक नहीं।    दीपू चंद्र दास कपड़ों की फैक्ट्री में काम करता था। बीते हफ्ते भीड़ ने ढाका से करीब 100 किमी दूर मयमनसिंह में पीट-पीटकर मार डाला था। इस घटना का एक दिल दहलाने वाला वीडियो वायरल हुआ जिसमें दीपू की नेकेड बॉडी को पेड़ से बांधकर जला दिया गया और भीड़ खुशी मना रही थी। जाह्नवी कपूर ने इस घटना पर चुप रहने वालों को पाखंडी बताया है। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर लंबा पोस्ट लिखा है जिसमें घटना को अमानवीय और कसाईनुमा बताया है। गुस्सा नहीं आ रहा तो आप पाखंडी हैं जाह्नवी लिखती हैं, बांग्लादेश में जो कुछ भी हो रहा है, वह बेहद बर्बर और क्रूर है। यह सरेआम कत्लेआम है और यह कोई अकेली या इकलौती घटना नहीं है। अगर आपको इस अमानवीय लिंचिंग के बारे में नहीं पता है, तो इसके बारे में पढ़ें, वीडियो देखें और सवाल पूछें। और अगर यह सब देखने के बाद भी आपको गुस्सा नहीं आता, तो यकीन मानिए यही वह पाखंड है जो हमें पता चलने से पहले ही खत्म कर देगा। हम दुनिया के दूसरे कोने में हो रही चीजों पर तो आंसू बहाते रहेंगे, जबकि हमारे अपने भाई-बहनों को जिंदा जलाकर मार दिया जा रहा है। जया प्रदा बोलीं- फट रहा है कलेजा आज मैं बहुत दुखी हूं। आज मेरा कलेजा फट रहा है, ये सोचकर कि एक इंसान के साथ इतनी दरिंदगी कैसे हो सकती है। बांग्लादेश में दीपू चंद्र दास नाम के एक मासूम हिंदू भाई को भीड़ ने मिलकर मार डाला, सिर्फ मारा ही नहीं, उसे पेड़ पर बांधकर उसे आग लगा दी। क्या यही वो नया बांग्लादेश है। यह मामूली हिंसा नहीं है। ये सरासर मॉब लिंचिंग है। सीधा सनातन धर्म और हिंदुत्व पर प्रहार है। हमारे मंदिर तोड़े जा रहे हैं, हमारी बहनों की इज्जत पर प्रहार कर रहे हैं। हम कब तक चुप रहेंगे। हमें न्याय मांगना चाहिए। काजल अग्रवाल बोलीं- जागो हिंदुओं काजल अग्रवाल ने अपने इंस्टाग्राम पर पोस्टर शेयर किया है। इसमें एक पोस्टर के जरिये इस क्रूर घटना को दिखाने की कोशिश की है। साथ में लिखा है, जागो हिंदुओं। चुप्पी आपको नहीं बचाएगी। साथ में लिखा है, हिंदुओं पर सबकी नजरें हैं। हिंदू की हत्या पर क्यों चुप्पी एक्टर मनोज जोशी ने कहा, 'जब गाजा या फिलिस्तीन में कुछ होता है तो सब आगे आ जाते हैं लेकिन बांग्लादेश में एक हिंदू मारा गया तो बहुत दुख होता है कि कोई आगे नहीं आया। समय इस बात का जवाब देगा। दीपू के बाद हुई एक और हत्या बता दें कि बांग्लादेश में दीपू चंद्र दास की हत्या के बाद एक और युवक की हत्या की खबर है। बुधवार रात को भीड़ ने 29 साल के अमृत मंडल नाम के शख्स को पीटकर मार डाला। पुलिस का कहना है कि अमृत पर लोगों से उगाही का आरोप था।  

10 साल बाद वतन वापसी: भारत ने किया इलाज, अमेरिकी हेल्थकेयर सिस्टम पर उठे सवाल

नई दिल्ली  अमेरिका में करीब एक दशक गुजारने वाले प्रवासी भारतीय (NRI)का एक पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। उन्होंने अमेरिका के हेल्थ सिस्टम का एक ऐसा सच उजागर कर दिया है, जिस पर लोगों की काफी टिप्पणियां आ रही हैं। उन्होंने रेडिट पर इस शीर्षक से एक डिटेल पोस्ट लिखी है कि 'भारत ने मुझे ठीक कर दिया।' उन्होंने अपनी बीमारी का जिक्र करते हुए कहा कि मैं आभारी हूं कि भारत में आकर ठीक हो गया। अमेरिका में तो किसी भी व्यक्ति की हेल्थ से ज्यादा तवज्जो कमाई पर दी जाती है। वहां पर मरीजों को सिर्फ मनी मेकिंग मशीन के तौर पर देखा जाता है। NRI शख्स ने लिखा, 'भारत ने मुझे बचा लिया। यह बात सच है। मैंने अमेरिका में 10 साल गुजारे। वे लोग मेरी शिक्षा और करियर को लेकर हैरान होते थे, लेकिन मैं अपने घर और परिवार को मिस कर रहा था।' उन्होंने लिखा कि मैं डेटा साइंटिस्ट के तौर पर काम कर रहा था और 2017 में वह बीमार हो गए थे। इस दौरान जब उन्हें अमेरिकी अस्पतालों का रुख करना पड़ा तो परेशानी का सामना करना पड़ा। NRI शख्स ने लिखा, 'अमेरिका का हेल्थकेयर सिस्टम ऐसा है कि लोगों में डर पैदा कर देता है। एक सामान्य एंजाइटी की समस्या को लो इतना जटिल और डरावना बना देते हैं कि पूछिए मत।' उन्होंने लिखा कि 2018 की शुरुआत में मुझे पता चला था कि सिज़ोअफेक्टिव डिसऑर्डर की समस्या मुझे हो गई है। यह बढ़ता ही रहा, जबकि मैंने अमेरिका में कई डॉक्टरों को दिखाया था। यूज़र ने लिखा, 'अगर मुझे अब भी सिज़ोफ्रेनिया होता तो नौकरी नहीं कर पाता। सिज़ोफ्रेनिया से पीड़ित लोग मतिभ्रम और भ्रम के शिकार होते हैं।' इसके बाद वह लिखते हैं कि मैंने सेकेंड ओपिनियन के लिए भारत का रुख किया। मैं बेंगलुरु NIMHANS अस्पताल के एक डॉक्टर से मिला। इसके बाद मेरा सिज़ोअफेक्टिव डिसऑर्डर कुछ समय से ठीक हो गया। अब मुझे मूड डिसऑर्डर और कभी-कभी एंग्जायटी है।' उनकी इस पोस्ट पर कई लोगों ने सहमति जताई और कहा कि भारत लौटने का आपका फैसला ठीक था। इसके अलावा कई लोगों ने अमेरिका में हेल्थकेयर की महंगी कीमतों पर भी सवाल उठाया। एक यूजर ने लिखा कि यह बात सही है कि भारत दुनिया के उन कुछ देशों में शामिल है, जहां हेल्थकेयर की सुविधा अच्छी है और दाम भी कम है। मैं इस बात की हर जगह सराहना करता हूं।

नक्सल मोर्चे पर सुरक्षा बलों की बड़ी जीत: ओडिशा में टॉप इनामी गणेश उइके सहित 6 नक्सली मारे गए

भुवनेश्वर ओडिशा के कंधमाल जिले में गुरुवार को सुरक्षा बलों के साथ हुई मुठभेड़ में शीर्ष माओवादी नेता गणेश उइके समेत छह नक्सली मारे गए। राज्य में नक्सल विरोधी अभियान का नेतृत्व कर रहे वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि, यह मुठभेड़ चकापाद पुलिस स्टेशन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले घने जंगलों में हुई। नक्सली पर था 1.1 करोड़ इनाम मारा गया गणेश उइके (69 वर्ष) सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति का सदस्य था और ओडिशा में इस प्रतिबंधित संगठन का प्रमुख था, जिस पर प्रशासन ने 1.1 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। मूल रूप से तेलंगाना के नलगोंडा जिले का रहने वाला उइके, पक्का हनुमंतु और राजेश तिवारी जैसे कई नामों से भी जाना जाता था। सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी उपलब्धि पुलिस ने बताया कि इस सफल ऑपरेशन में गणेश उइके के अलावा पांच अन्य नक्सली भी मारे गए हैं, जिनमें दो महिलाएं शामिल हैं। फिलहाल अन्य नक्सलियों की पहचान नहीं हो पाई है। सुरक्षा बलों के लिए इसे एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है क्योंकि उइके लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की रडार पर था और क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों मे शामिल था। फिलहाल इलाके में अभी भी तलाश अभियान जारी है। गृह मंत्री ने क्या कहा? सुरक्षा बलों की सफलता पर गृह मंत्री अमित शाह की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा गया 'नक्सल मुक्त भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि। ओडिशा के कंढमाल में चलाए गए एक बड़े अभियान में केंद्रीय समिति के सदस्य गणेश उइके समेत छह नक्सलियों को मार गिराया गया है। इस बड़ी सफलता के साथ, ओडिशा नक्सलवाद से पूर्णतः मुक्त होने के कगार पर है। हम 31 मार्च 2026 से पहले नक्सलवाद को समाप्त करने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।'