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अटल बिहारी वाजपेयी थे भविष्य को पहचानने वाले नेता, भारत को बनाया न्यूक्लियर पावर: नायडू

अमरावती  आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी एक दूरदर्शी नेता थे, जिन्होंने भारत को परमाणु शक्ति बनाकर दुनिया के सामने भारतीयों की क्षमताओं को साबित किया। गुरुवार को वाजपेयी की 101वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कारगिल युद्ध के दौरान वाजपेयी ने स्पष्ट कर दिया था कि यदि कोई भारत को चुनौती देगा तो वह उचित जवाब देगा। यही संकल्प हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से भी देखने को मिला। मुख्यमंत्री नायडू ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ अमरावती राजधानी क्षेत्र के वेंकटपालेम में अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा का अनावरण किया। इस अवसर पर उन्होंने वाजपेयी के जीवन पर आधारित फोटो प्रदर्शनी देखी और कार्यक्रम स्थल पर लगे विभिन्न स्टॉलों का भी अवलोकन किया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने पास ही आयोजित सुशासन दिवस की जनसभा में हिस्सा लिया। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री श्रीनिवास वर्मा और पेम्मासानी चंद्रशेखर, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पीवीएन माधव, राज्य मंत्री सत्यकुमार यादव, पी. नारायण, कंदुला दुर्गेश सहित कई नेता मौजूद रहे। टीडीपी, भाजपा, जनसेना के कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में आम नागरिकों ने प्रतिमा अनावरण समारोह में भाग लिया। इससे पहले मुख्यमंत्री नायडू ने ‘एक्स’ पर वाजपेयी को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने लिखा, “अपने नाम की तरह ही अटल बिहारी वाजपेयी जी राष्ट्र सेवा के संकल्प में अटल थे। वे गरिमामय राजनेता, कवि हृदय और दुर्लभ दूरदर्शिता वाले नेता थे, जो अपनी ईमानदारी, विनम्रता और दलों के बीच सहमति बनाने की क्षमता के लिए जाने जाते थे।” टीडीपी प्रमुख ने वाजपेयी के साथ अपने संबंधों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने भारत की सुरक्षा को मजबूत किया, शासन को नई दिशा दी और अपने विचारों व कार्यों से पीढ़ियों को प्रेरित किया। उन्होंने कहा, “मुझे उनके साथ काम करने और उनकी बुद्धिमत्ता से सीखने का सौभाग्य मिला। देश के विकास में उनके परिवर्तनकारी योगदान के लिए उन्हें हमेशा सम्मान और कृतज्ञता के साथ याद किया जाएगा।” सुशासन दिवस की जनसभा में मुख्यमंत्री ने दोहराया कि अमरावती को विश्वस्तरीय शहर के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यहां के किसानों का बलिदान ही अमरावती में वाजपेयी स्मृति वनम के निर्माण की प्रेरणा है। उन्होंने कहा, “यह स्मारक हम अटल बिहारी वाजपेयी को ऐसा भव्य सम्मान देने के लिए बना रहे हैं, जिसे इतिहास याद रखेगा।” मुख्यमंत्री ने बताया कि भाजपा ने अटल–मोदी सुशासन यात्रा शुरू की है और गठबंधन सरकार मिलकर 26 जिला मुख्यालयों में वाजपेयी की प्रतिमाएं स्थापित कर रही है। उन्होंने कहा कि गठबंधन सरकार वाजपेयी की जयंती को सुशासन दिवस के रूप में मना रही है। नायडू ने पूर्व मुख्यमंत्री और टीडीपी संस्थापक एन. टी. रामाराव (एनटीआर) के योगदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि एनटीआर और वाजपेयी ने इतिहास की दिशा बदल दी। एनटीआर ने गैर-कांग्रेस दलों को राष्ट्रीय मोर्चे के तहत एकजुट किया। वाजपेयी और एनटीआर के बीच लंबे समय से संबंध रहे। जनसंघ से भारतीय जनता पार्टी के गठन तक की यात्रा भी अत्यंत महत्वपूर्ण रही। मुख्यमंत्री ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने देश के बुनियादी ढांचे की मजबूत नींव रखी। स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना, जिसकी शुरुआत ताड़ा से चेन्नई के बीच हुई, उनकी दूरदृष्टि का उदाहरण है। उन्होंने दूरसंचार क्षेत्र में उदारीकरण की पहल की, जो ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था की रीढ़ बना।

अटल जी की कविता से झलकी अडिग भारत की आत्मा, पीएम मोदी ने डायरी में किया साझा

नई दिल्ली  'टूट सकते हैं मगर हम झुक नहीं सकते…' ये पंक्तियां सिर्फ एक कविता नहीं हैं, बल्कि एक सोच, एक संकल्प और एक जीवन-दर्शन हैं। आज अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती पर ये शब्द फिर से चर्चा में हैं, लेकिन इस बार वजह कुछ खास है। वजह है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दशकों पुरानी निजी डायरी का वह हस्तलिखित पन्ना, जिसमें अटल की यह कविता लिखी है। यह पन्ना केवल यादों का हिस्सा नहीं है, बल्कि इस बात का सबूत है कि कैसे विचार एक व्यक्ति से निकलकर पीढ़ियों तक देश की दिशा तय करते हैं। उस दौर की कल्पना कीजिए, जब नरेंद्र मोदी एक युवा कार्यकर्ता थे। न पद था, न सत्ता, बस संगठन, संघर्ष और सीखने की ललक। ऐसे समय में अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेता सिर्फ मंच से भाषण नहीं देते थे, वे अपने शब्दों से रास्ता दिखाते थे। अटल बिहारी की कविता, जिसमें सत्ता से सत्य के संघर्ष की बात है और अन्याय के सामने न झुकने का साहस है, उसी युवा मन में उतर गई। नरेंद्र मोदी ने उन शब्दों को सिर्फ पढ़ा नहीं, उन्हें अपनी साधना बना लिया। आमतौर पर राजनीति को सत्ता का खेल कहा जाता है, लेकिन यह प्रसंग बताता है कि राजनीति असल में विचारों की यात्रा है। अटल बिहारी को 'अजातशत्रु' कहा गया। वे ऐसे नेता थे जिनके विरोधी भी सम्मान करते थे। उनकी राजनीति में संवाद था, कविता थी और लोकतंत्र के प्रति गहरा विश्वास था। वही विश्वास पीएम नरेंद्र मोदी की सोच में भी दिखाई देता है, जहां संघर्ष को अवसर और चुनौती को संकल्प में बदला गया। डायरी का वह पन्ना इस बात का प्रतीक है कि गुरु-शिष्य की परंपरा आज भी जीवित है। अटल बिहारी के लिए कविता अभिव्यक्ति थी और पीएम मोदी के लिए वही कविता ऊर्जा का स्रोत बनी। यह दिखाता है कि नेतृत्व अचानक पैदा नहीं होता, वह वर्षों की साधना, अनुशासन और आदर्शों से गढ़ा जाता है। एक युवा कार्यकर्ता का उन शब्दों से जुड़ना और वर्षों बाद देश का नेतृत्व करना, यह अपने आप में एक प्रेरक यात्रा की कहानी को दर्शाता है। पीएम मोदी की डायरी में लिखे छंद की फोटो शेयर करते हुए, इसमें कहा गया है, "अजातशत्रु अटल बिहारी वाजपेयी जी के साहस, दृढ़ विश्वास और संकल्प के शब्द युवा नरेंद्र मोदी की डायरी में जगह पाए। नरेंद्र मोदी की पर्सनल डायरी का यह हाथ से लिखा हुआ पन्ना, जो दशकों पहले लिखा गया था, एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक आदर्शों के हस्तांतरण को दर्शाता है।" छंद की पहली कुछ पंक्तियां इस प्रकार हैं, "हम टूट सकते हैं, लेकिन झुक नहीं सकते! "सत्ता के खिलाफ सच की लड़ाई, न्याय अत्याचार से लड़ता है, अंधेरे ने चुनौती दी है, आखिरी किरण ही रोशनी है।"

संविधान की नई पहचान: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संथाली भाषा में किया संविधान का विमोचन

नई दिल्ली  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में संथाली भाषा में भारत का संविधान जारी किया। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि यह सभी संथाली लोगों के लिए गर्व और खुशी की बात है कि भारत का संविधान अब संथाली भाषा में, ओल चिकी लिपि में उपलब्ध है। इससे वे संविधान को अपनी भाषा में पढ़ और समझ सकेंगे। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि इस वर्ष हम ओल चिकी लिपि की शताब्दी मना रहे हैं। उन्होंने विधि एवं न्याय मंत्री और उनकी टीम की प्रशंसा की, जिन्होंने शताब्दी वर्ष में भारत के संविधान को ओल चिकी लिपि में प्रकाशित करवाया। भारत के राष्ट्रपति के आधिकारिक एक्स हैंडल पर पोस्ट में बताया गया, "अलचिकि लिपि में लिखित संताली भाषा में भारत के संविधान का लोकार्पण करते हुए मुझे हार्दिक प्रसन्‍नता हो रही है। यह हमारे लिए गौरव एवं प्रसन्नता की बात है कि भारत का संविधान संताली भाषा में प्रकाशित हुआ है।"पोस्ट में आगे लिखा गया, "संताली भाषा में संविधान का उपलब्ध होना समस्त संताली समुदाय के लिए अत्यंत हर्ष का विषय है। ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल, असम और बिहार में रहने वाले सभी संताली लोग अपनी मातृभाषा एवं लिपि में लिखे गए संविधान को पूरी तरह जान सकेंगे। संविधान के अनुच्छेदों को वे ठीक से समझ सकेंगे।" इस कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल मौजूद रहे। बता दें कि संथाली भाषा, जिसे 2003 के 92वें संविधान संशोधन अधिनियम के माध्यम से संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था, भारत की सबसे प्राचीन जीवित भाषाओं में से एक है। यह झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और बिहार में बड़ी संख्या में आदिवासी लोगों द्वारा बोली जाती है।

इतिहास रचा गया: सिंगापुर हिंदू बोर्ड की CEO बनीं सरोजिनी पद्मनाथन

सिंगापुर  सिंगापुर के हिंदू बोर्ड में मंदिरों और भारतीय संस्कृति के प्रबंधन के लिए एक अनुभवी महिला नियुक्त सिंगापुर, 25 दिसंबर (भाषा) सिंगापुर में प्रमुख हिंदू मंदिरों का प्रबंधन करने वाली एक वैधानिक संस्था, हिंदू एंडावमेंट्स बोर्ड (एचईबी) ने जन सेवा को समर्पित एक अनुभवी नेता को अपना नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया है। सरोजिनी पद्मनाथन को बुधवार को एचईबी का मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया गया। अपने 40 वर्षों के शानदार करियर में उन्होंने 1990 के दशक में अस्पतालों के पुनर्गठन और कोविड-19 महामारी के दौरान संगठनात्मक मजबूती बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय और हेल्थ साइंसेज अथॉरिटी में वरिष्ठ पदों पर कार्य किया, जहां उन्होंने चिकित्सा, नर्सिंग और प्रशासनिक क्षेत्रों में कार्यबल विकास का नेतृत्व किया। साप्ताहिक ‘टैब्लॉइड' (लघुपत्र) ‘तबला!' के अनुसार, 57 वर्षीय पद्मनाथन इससे पहले एचईबी की वित्त सदस्य रह चुकी हैं। इस दौरान उन्होंने वित्तीय प्रशासन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया और बोर्ड के संचालन से गहरे से जुड़ी रहीं। इसमें इसके चार मंदिर, एक पुनर्वास केंद्र और धार्मिक कार्यक्रम शामिल हैं। वर्ष 1968 में स्थापित एचईबी ने कहा, ‘‘उनका नेतृत्व अनुभव और मजबूत प्रशासनिक पृष्ठभूमि उन्हें बोर्ड की समुदाय-केंद्रित पहलों का मार्गदर्शन करने के लिए उपयुक्त बनाती है।'' पद्मनाथन जीवगंथ अरुमुगम का स्थान लेंगी, जो सितंबर 2024 से इस पद पर कार्यरत थे। हिंदू एंडावमेंट्स बोर्ड सिंगापुर के प्रमुख हिंदू मंदिरों – जैसे श्री मरिअम्मन मंदिर और श्री शिवन मंदिर का प्रबंधन करता है। इसके अलावा, यह संस्कृति, समुदाय और युवा मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय समुदाय के लिए सांस्कृतिक, धार्मिक और परोपकारी कार्यक्रमों की भी देखरेख करता है।    

भविष्य की फैक्टरी? चीन में AI संभाल रहा 5000 लूम का काम, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

नई दिल्ली  हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर चीन की एक विशाल टेक्सटाइल फैक्ट्री के वीडियो तेजी से वायरल हुए हैं, जिनमें चीन के शिनजियांग प्रांत के अराल शहर में 5,000 से अधिक लूम (बुनाई मशीनें) स्वचालन और AI‑आधारित नियंत्रण के तहत 24 घंटे, 7 दिन nonstop चल रही हैं, और वहां कोई मानव श्रमिक दिखाई नहीं दे रहा। यह क्लिप टेक्सटाइल उद्योग में चीन के ऑटोमेशन रुझान को लेकर वैश्विक चर्चा का विषय बना हुआ है। दावा किया जा रहा है कि 5000 करघे (looms) पूरी तरह AI के सहारे, बिना किसी इंसान के 24 घंटे चल रहे हैं।   इन वीडियो को “ZERO Humans Factory” और “Fully Autonomous Textile Plant” जैसे दावों के साथ साझा किया जा रहा है।  विशेषज्ञों के मुताबिक यह चीन की स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग क्रांति का उदाहरण है, लेकिन यह दावा अभी प्राधिकृत समाचार स्रोतों में पुष्ट नहीं हुआ है।  हालांकि, इस वीडियो को लेकर यह स्पष्ट प्रमाणित नहीं हुआ है कि यह किसी प्राधिकृत समाचार एजेंसी या सरकारी स्रोत द्वारा पुष्टि की गई रिपोर्ट है। यह मुख्य रूप से सोशल मीडिया और प्लेटफॉर्म वीडियो पोस्ट्स में दिखाई जा रहा तस्वीरों/फुटेज पर आधारित है, जिसका अर्थ है कि इसे फैक्ट‑चेक की आवश्यकता है।     ऑटोमेशन है, लेकिन इंसान गायब नहीं प्रमाणिक औद्योगिक रिपोर्ट्स और चीन के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक, यह दावा भ्रामक और अधूरा है।  चीन ने वाकई AI-संचालित लूम्स, रोबोटिक यार्न हैंडलिंग, ऑटो-क्वालिटी डिटेक्शन और स्मार्ट सेंसर सिस्टम को बड़े पैमाने पर अपनाया है। लेकिन पूरी तरह इंसान-मुक्त टेक्सटाइल फैक्ट्री फिलहाल मौजूद नहीं है। AI क्या करता है?     करघों की गति और पैटर्न का ऑटो कंट्रोल     धागे की टूट-फूट का तुरंत पता     ऊर्जा दक्षता और उत्पादन ऑप्टिमाइज़ेशन     रियल-टाइम डेटा एनालिटिक्स इंसान कहां जरूरी ?     मशीन मेंटेनेंस और इमरजेंसी इंटरवेंशन     सॉफ्टवेयर मॉनिटरिंग     क्वालिटी ऑडिट और फाइनल इंस्पेक्शन     सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स क्यों फैल रहा है ‘ZERO Humans’ नैरेटिव? विशेषज्ञों के अनुसार, चीन की तकनीकी ताकत को अति-नाटकीय तरीके से दिखाने और सोशल मीडिया एंगेजमेंट बढ़ाने के लिए ऐसे दावे किए जाते हैं। वास्तविकता में इसे “High Automation Factory” कहना ज्यादा सही होगा, न कि “No Humans Factory”। चीन में टेक्सटाइल उद्योग में ऑटोमेशन और स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग का विकास कई वर्ष से चल रहा है। औद्योगिक इंटरनेट और टेक्नोलॉजी से जुड़ी रिपोर्ट बताती हैं कि चीन की कई टेक्सटाइल फैक्ट्रियाँ AI, IoT और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम के साथ काम कर रही हैं, जहाँ मशीनें उच्च गति पर लगातार चल रही हैं और केवल निगरानी के लिए कुछ लोग मौजूद रहते हैं। लेकिन यह सत्यापित नहीं हुआ है कि कोई फैक्टरी पूरी तरह बिना किसी मानव हस्तक्षेप के चल रही है। आमतौर पर उत्पादन लाइनें स्वचालित हैं, मगर इंसानों की निगरानी, रख‑रखाव और गुणवत्ता नियंत्रण अभी भी अधिकांश औद्योगिक सेट‑अप में आवश्यक है। चीन में ऑटोमेशन क्यों बढ़ा? चीन अब औद्योगिक ऑटोमेशन को राष्ट्रीय रणनीति का हिस्सा बना रहा है, जिसमें AI‑संचालित रोबोट्स और मशीनें लागत कम, उत्पादन तेज और गुणवत्ता बढ़ाने में सहायता कर रही हैं।   रिपोर्टों के अनुसार, चीन में मैन्युफैक्चरिंग रोबोट्स की तैनाती दुनिया के कई देशों से अधिक है, जिससे ट्रेड‑वॉर और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में चीन अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।  भारत‑चीन टेक्सटाइल मुकाबला  चीन की टेक्नोलॉजी‑भारी उत्पादन प्रणाली से भारत जैसे बड़े कपड़ा उत्पादक देशों पर प्रभाव भी दिख रहा है।  चीन सस्ते निर्यात और उच्च क्वालिटी उत्पादन के लिए ऑटोमेशन का लाभ उठा रहा है, जिससे दुनियाभर के बाजारों में चीन का प्रभाव और मजबूत हो रहा है। वहीं भारत में तकनीक‑उन्मुख अपग्रेडेशन और एक्सपोर्ट‑फोकस्ड प्रयासों से वैश्विक कपड़ा आपूर्ति श्रृंखला में हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश हो रही है। उदाहरण के लिए भारत अब कई बाजारों में कपड़ा निर्यात के नए केंद्र के रूप में उभरा है। ऐसे में AI‑बेस्ड ऑटोमेशन, मशीन‑ड्रिवन उत्पादन, और मानव श्रम की भूमिका में बदलाव आज वैश्विक टेक्सटाइल प्रतिस्पर्धा के नए परिदृश्य हैं।

खिलाड़ी ने पूछा- और कैसे हो, पीएम मोदी ने दिया फनी रिप्लाई, वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल

 नई दिल्ली सांसद खेल महोत्सव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश भर के प्रतिभावान खिलाड़ियों से बात कर रहे थे. इसी दौरान उन्होंने हरियाणा के एक उभरते बॉक्सर से बातचीत की जो ओलंपिक में जाने का सपना देखता है. बातचीत की शुरुआत ही इतनी मजेदार थी कि देखते ही देखते ऑनलाइन वायरल हो गया.  जैसे ही प्रधानमंत्री कहते हैं – नीरज, राम-राम. उधर से बॉक्सर का जवाब मिलता है – और कैसे हो. इस पर पीएम मोदी मुस्कुराने लगते हैं और कहते हैं – मैं तेरे जैसा ही हूं. इस बॉक्सर के साथ पीएम मोदी की बातचीत का ये हिस्सा काफी वायरल हो रहा है. बॉक्सर नीरज ने इतनी मासूमियत से पीएम से सवाल करता है और उनके सवालों के जवाब देता है, जिसे सुनकर किसी की भी हंसी छूट जाए.  बॉक्सर नीरज की मासूमियत ने लोगों को किया कायल आगे पीएम मोदी बॉक्सर से पूछते हैं – अच्छा नीरज, ये नीरज का नाम सुनकर ही तुम्हें लगा होगा कि मेरा नाम नीरज है तो मैं भी नीरज चोपड़ा बन जाऊं. इस पर फिर बॉक्सर मासूमियत से जवाब देता है- हां जी. इसके बाद  पीएम नीरज को अपने बारे में कुछ बताने को कहते हैं. बॉक्सर बताता है कि मेरा नाम नीरज है जी. मेरे पिता जी का नाम बलवान सिंह है. वो कॉपरेटिव सोसाइटी में काम करते हैं. मम्मी घर का काम करती है और मैं हरियाणा के टोहाना के डांगरा गांव का रहने वाला हूं. मैं बॉक्सिंग खिलाड़ी हूं और नेशनल मेडलिस्ट भी हूं. पीएम मोदी ने पूछा – आपने खेलों में आगे करियर बनाने का सोचा है. इस पर नीरज ने कहा- हां जी, मैं आगे बॉक्सिंग मे आगे जाना चाहता है. पीएम मोदी ने जब पूछा कि क्या आप मोबाइल पर इंटरनेट पर दुनिया के बड़े-बड़े बॉक्सरों के मैच देखते हैं. इस पर नीरज ने कहा कि हां, जरूर देखता हूं. दुनिया के भी और अपने देश के भी बड़े बॉक्सरों के खेल देखता हूं और उनसे सीखता हूं. इससे मोटिवेट भी होता हूं.  पीएम मोदी ने चुटकी लेते हुए की बातचीत पीएम मोदी ने फिर नीरज से मजाकिया अंदाज में पूछा कि जब आप मोबाइल पर बैठे रहते होगे तो आपके पिता जी कहते होंगे ये क्या कर रहे हो. जाओ जाकर खेलो. नीरज ने बतााय कि हां ऐसा तो होता है, लेकिन बॉक्सरों की अच्छी फाइट देखकर खुद को रोक नहीं पाता.  नीरज ने ओलंपिक गोल्ड मेडल लाने का किया वादा पीएम मोदी ने पूछा कि क्या नीरज क्या मैं आज मानकर जाऊं कि आने वाले समय में हमारा एक और हरियाणवी बॉक्सर देश को ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीताएगा. इस पर नीरज ने बताया कि हां जी, जरूर. इस पर लोग तालियां बजाने लगे. नीरज ने कहा कि इस ओलंपिक में या उसके अगले ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतकर आऊं और आपके हाथ में लाकर दे दूं.

चीन में भारतीय ट्रैवल व्लॉगर को 15 घंटे डिटेन, बुनियादी ज़रूरतों से भी रखा गया वंचित

चीन  भारतीय ट्रैवल व्लॉगर अनंत मित्तल, जिन्हें सोशल मीडिया पर “ऑन रोड इंडियन” के नाम से जाना जाता है, ने चीन में अपने कथित हिरासत अनुभव को लेकर सनसनीखेज दावा किया है। अनंत के अनुसार, 16 नवंबर को चीन के एक एयरपोर्ट पर उन्हें चीनी अधिकारियों ने रोक लिया और लगभग 15 घंटे तक हिरासत में रखा।अनंत ने इंस्टाग्राम पर साझा किए गए वीडियो में बताया कि हिरासत के दौरान कई घंटों तक उनसे कोई बातचीत नहीं की गई। उनका कहना है कि उन्हें बाथरूम जाने की अनुमति नहीं दी गई और बार-बार मांगने के बाद ही थोड़ा-सा पानी उपलब्ध कराया गया।   अनंत के मुताबिक, चीनी अधिकारियों ने उनके बैग और निजी सामान की गहन जांच की, हालांकि उसमें कुछ भी अवैध नहीं मिला। इसके बावजूद उनसे लंबी पूछताछ की गई। अनंत का दावा है कि यह पूरी कार्रवाई उनकी अरुणाचल प्रदेश से जुड़ी टिप्पणी के कारण हुई। करीब 15 घंटे बाद, पूछताछ पूरी होने पर उन्हें छोड़ दिया गया। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर चीन की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, संवेदनशील राजनीतिक मुद्दों और विदेशी नागरिकों के साथ व्यवहार को लेकर बहस तेज हो गई है।हालांकि, इस मामले पर चीनी अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, और यह दावा फिलहाल व्लॉगर के व्यक्तिगत बयान पर आधारित है।

‘उर्मिला फाइल्स’ विवाद में उबाल: पूर्व भाजपा विधायक ने पुष्कर धामी और दुष्यंत गौतम का लिया नाम, कहा— मजबूर हुआ तो जान दे दूंगा

हरिद्वार  अंकिता भंडारी केस से जुड़े वायरल-ऑडियो पर मुकदमे का सामना कर रहे भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर ने अब नया खुलासा किया है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया है कि अभिनेत्री उर्मिला सनावर कांग्रेस के इशारे पर भाजपा नेताओं को बदनाम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के खेल में वह भाजपा नेता दुष्यंत गौतम, सीएम पुष्कर सिंह धामी, प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और स्वामी यतीश्वरानंद की छवि खराब करने की कोशिश कर रही है। अपनी बात रखते हुए वो भावुक हो गए। कहा कि मेरे पास आत्महत्या के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। गुरुवार को हरिद्वार में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सुरेश राठौर ने आरोप लगाया कि उर्मिला सनावर कांग्रेस के इशारे पर उन्हें और भाजपा नेताओं को बदनाम कर रही है। कांग्रेस द्वारा पत्रकारवाताओं पर भी पूर्व विधायक ने सवाल खड़े किए। ज्ञात हो कि पिछले कुछ दिनों से उर्मिला सनावर स्वयं को पूर्व विधायक सुरेश राठौर की पत्नी बताकर उन पर कई आरोप लगा रही है। यही नहीं उर्मिला ने सोशल मीडिया पर अंकिता भंडारी हत्याकांड पर भी भाजपा नेताओं को घेरा है। रायपुर सीट से विधायकी का प्रस्ताव मिला? गुरुवार को पूर्व विधायक सुरेश राठौर ने पत्रकारवार्ता कर कहा कि उर्मिला सनावर को कांग्रेस ने रायपुर देहरादून सुरक्षित सीट से प्रत्याशी बनाने का प्रस्ताव दिया है। वह कांग्रेस के हाथ में खेल कर भाजपा के वरिष्ठ नेता दुष्यंत गौतम, प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, सीएम पुष्कर सिंह धामी, स्वामी यतीश्वरानंद की छवि खराब करने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस के नेताओं के संपर्क में है इसकी भी जांच हो। आत्महत्या के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा पूर्व विधायक ने कहा कि उसके द्वारा किए जा रहे गलत फैब्रिकेटेड ऑडियो जारी कर रही है इससे वह बहुत परेशान हैं और आत्महत्या करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा। पूर्व जिला पंचायत सदस्य आरती गौड़ को भी बदनाम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उसके खिलाफ जो मुकदमे दर्ज करवाए उसकी पुलिस जांच करें और उर्मिला को गिरफ्तार कर सजा दे। अपने परिवार, बच्चों को बचाना है। फैक्ट्री भी बेचनी पड़ी। कुछ ढाबा चलाने वाले रविदासाचार्य बने घूमकर समाज को बदनाम कर रहे हैं। फैक्ट्री बेचकर कैश दिया, कितना दिया यह नहीं बता पाए नेता पूर्व विधायक ने अभिनेत्री को लाखों रुपये कैश देने का आरोप लगाया। राठौर ने कहा कि पुलिस ने जब कार्रवाई नहीं की तो, उन्होंने फैक्ट्री बेचकर कैश उर्मिला को दिया। आरोप लगाया कि बार बार वह डिमांड करती है। कैश कितने दिया इस सवाल पर राठौर ने जवाब देते हुए कहा कि यह तो उर्मिला से ही पूछो।

SIR के बाद अब जनगणना पर फोकस, 2026 में हर घर तक पहुंचेगी सरकारी टीम

देहरादून  हिमालयी राज्य उत्तराखंड में वोटर लिस्ट के विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) के बीच जनगणना की तैयारी भी शुरू हो गई। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने जनगणना के लिए 19 विभिन्न श्रेणियों में मंडल, जिला, ब्लॉक और तहसील स्तर पर जनगणना अधिकारियों की नियुक्ति के आदेश दे दिए। मंडल स्तर पर संपूर्ण क्षेत्र के नोडल अफसर कमिश्नर होंगे। जबकि जिलों में नगर निगम क्षेत्रों को छोडकर बाकी पूरे क्षेत्र के प्रमुख जनगणना अधिकारी संबंधित जिले के डीएम होंगे।   सचिव-जनगणना दीपक कुमार ने बताया कि केंद्र सरकार ने जनगणना का कार्यक्रम जारी करते हुए अहम दिशा-निर्देश दिए हैं। इसके लिए अधिकारियों का प्रशिक्षण शुरू किया जा रहा है। इसके तहत अगले वर्ष अप्रैल से सितंबर के बीच किसी एक महीने में 30 दिन तक प्रदेश भर में सघन अभियान चलाकर मकानों की गणना की जाएगी। सारी प्रक्रिया आधुनिक उपकरण की मदद से केंद्र सरकार द्वारा तैयार किए गए साफ्टवेयर पर की जाएगी। कुमार ने बताया कि उत्तराखंड समेत सभी पर्वतीय राज्यों के एक महीने का अतिरिक्त समय दिया गया है। सचिव-जनगणना दीपक कुमार ने बताया कि जनगणना की तैयारी शुरू की जा रही है। 19 विभिन्न श्रेणियों में जनगणना अधिकारियों की नियुक्ति के आदेश कर दिए गए हैं। जल्द ही अधिकारियों और कार्मिकों के प्रशिक्षण शुरू किए जाएंगे। इसकी अधिसूचना भी जारी की जा रही है। 2027 में दस दिन तक होगी जनगणना की रिहर्सल मकानों की गणना के बाद फरवरी 2027 में किसी भी दस दिन तय कर जनगणना का अभियान चलाया जाएगा। इसमें पूर्व में मकानों की गणना का सत्यापन भी होगा। साथ ही इस अवधि में नए बने या छूटे भवनों को भी शामिल किया जाएगा। इसके बाद केंद्र सरकार के स्तर पर जनगणना का अंतिम कार्यक्रम जारी होने पर विधिवत रूप से राष्ट्रीय स्तर पर अभियान शुरू कर दिया जाएगा। चकराता-हरिद्वार में जनगणना का एक पायलट चक्र पूरा जनगणना की विधिवत शुरूआत से पहले हर स्तर पर रिहर्सल शुरू हो चुकी है। सूत्रों के अनुसार उत्तराखंड में चकराता में 22 गांवों में मकानों का सर्वेक्षण कर गणना की जा चुकी है। मैदानी जिलों में जनगणना के लिए हरिद्वार को चुना गया था। यहां हरिद्वार नगर निगम के एक वार्ड में मकानों का ब्योरा तैयार किया जा चुका है। नई जनगणना में सामने आएगी तस्वीर वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार उत्तराखंड की जनंसख्या महज 1.01 करोड़ आंकी गई थी। राज्य के विकास से जुड़ी योजनाएं, विभिन्न कल्याणकारी पेंशन, सब्सिड़ी आदि योजनाओं का आंकलन भी इसी के आधार पर किया जा रहा है। जबकि पिछले 14 साल में राज्य की जनसंख्या काफी ज्यादा बढ़ चुकी है। प्रमाणिक संख्या आने से राज्य में विकास योजनाओं का आकार और लक्ष्य तय करना आसान हो जाएगा। वर्ष 2011 की जनगणना के दौरान राज्य में कुल परिवार-घरों की संख्या को 19 से 20 लाख के करीब दर्ज किया गया था। हालिया कुछ वर्षों में उत्तराखंड में शहरीकरण तेजी से बढ़ा है।

नए साल में मौज ही मौज: 2026 में वीकेंड पर पड़ेंगे कई फेस्टिवल, मिलेंगी ज्यादा छुट्टियां

 नई दिल्ली नया साल 2026 आने में अब बस कुछ ही दिन रह गए हैं. पुराना साल खत्म होते ही सारी छुट्टियां खत्म हो जाएंगी और नए कैलेंडर में फिर से नई छुट्टियां और फेस्टिवल अपडेट हो जाएंगे. अब ऐसे में सबसे पहले ये देखना होता है कि वीकेंड यानी शनिवार और रविवार की छुट्टी के दिन नए साल में कौन-कौन से पर्व त्योहार पड़ रहे हैं. क्योंकि वीकेंड से एक दिन आगे या पीछे त्योहार होने से जहां छुट्टियां बढ़ जाती हैं. वहीं अगर साप्ताहिक अवकाश के दिन फेस्टिव हॉलिडे पड़ जाए तो मजा किरकिरा हो जाता है.  अगले साल 2026 में कई ऐसे त्योहार हैं, जो शनिवार और रविवार को मनाए जाएंगे. ऐसे में इनकी अलग से छुट्टी मिलने वाली नहीं है. ये हमारे साप्ताहिक अवकाश में ही समायोजित हो जाएंगे. अगले साल 8 ऐसे फेस्टिवल हैं जो शनिवार और रविवार के दिन आएंगे.     पहले महीने शनिवार-रविवार को नहीं है कोई फेस्टिवल 2026 में पहले महीने यानी जनवरी में कोई त्योहार या राष्ट्रीय पर्व शनिवार या रविवार को नहीं है. फरवरी में दो-दो हॉलिडे रविवार को आ रहे हैं. महीने के पहले ही दिन यानी 1 फरवरी रविवार को रविदास जयंती है. वहीं 15 फरवरी (रविवार) को महाशिवरात्रि है. ये है लिस्ट 1 फरवरी (रविवार ) – रविदास जयंती 15 फरवरी (रविवार)- महाशिवरात्रि 21 मार्च (शनिवार) को ईद (चांद नजर आने पर निर्भर करेगा) 5 अप्रैल (रविवार) – इस्टर डे 15 अगस्त (शनिवार) – स्वतंत्रता दिवस 17-20 अक्टूबर – दुर्गा पूजा इसमें रविवार और शनिवार  8 नवंबर (रविवार) दिवाली 15 नवंबर (रविवार) छठ पूजा मार्च में भी एक त्योहार ऐसा है जो शनिवार या रविवार को हो सकता है. 21 मार्च को शनिवार है और भारत में इस दिन ईद मनाए जाने की संभावना है. वैसे यह पूरी तरह से चांद के दिखाई देने पर निर्भर करता है.  इसी तरह 5 अप्रैल को रविवार के दिन इस्टर डे की छुट्टी रहेगी.  दिवाली और छठ भी रविवार को अगले साल 2026 में  15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस भी शनिवार के दिन है. इसी तरह अक्टूबर में 17 से 20 अक्टूबर तक चार दिन तक मनाए जाने वाले शारदीय नवरात्र यानी दुर्गापूजा के दौरान भी शनिवार और रविवार की छुट्टी आ जाएगी. इसके अलावा नवंबर में दो बड़े फेस्टिवाल दिवाली और छठ पूजा भी रविवार को ही है.