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निपाह वायरस का खतरा फिर बढ़ा बंगाल में, 2 लोग भर्ती; CS ने SOP के पालन पर जोर दिया

कोलकाता: निपाह वायरस का डर एक बार फिर पश्चिम बंगाल में लौट आया है. वायरस से संक्रमित होने के बाद दो लोगों को हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है. उन्हें बारासात के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में एडमिट किया गया है. पता चला है कि दोनों पीड़ित पेशे से नर्स हैं और उन्हें आइसोलेशन में रखा गया है. वायरस से संक्रमित लोगों की उम्र 22 से 25 साल के बीच है. हेल्थ डिपार्टमेंट ने उनकी पहचान गुप्त रखी है. खबर है कि राज्य सरकार का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार सुबह स्थिति का जायजा लेने के लिए अस्पताल गया. स्वास्थ्य विभाग पूरे मामले पर कड़ी नज़र रख रहा है. उन्होंने लोगों के सवालों और चिंताओं को दूर करने के लिए दो हेल्पलाइन नंबर शुरू करने की घोषणा की है. नंबर हैं 033-2333-0180 और 9874708858. संक्रमित लोगों के संपर्क में आए व्यक्तियों की पहचान करने की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है. संक्रमण को और फैलने से रोकने के लिए एक खास स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू किया गया है. राज्य के स्वास्थ्य सचिव नारायण स्वरूप निगम ने कहा, 'घबराने की कोई बात नहीं है. हम स्थिति पर करीब से नजर रख रहे हैं. सभी जरूरी कदम उठाए गए हैं, और संक्रमण को कंट्रोल में रखने के लिए कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग की जा रही है.' वायरस के स्रोत और फैलने के बारे में राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती ने कहा, 'निपाह वायरस संक्रमण का स्रोत चमगादड़ हैं. इसलिए, चमगादड़ जिन चीजों को खाते हैं, उन्हें खाने से बचने की सलाह दी जाती है.' चीफ सेक्रेटरी नंदिनी चक्रवर्ती ने कहा, 'निपाह से निपटने के लिए तय एसओपी को पूरी तरह से लागू कर दिया गया है. आम लोगों से मैं कहना चाहूंगी कि वे ऐसे फल या खाने की चीजें न खाएं जो चमगादड़ों से दूषित हो सकती हैं. क्योंकि चमगादड़ निपाह वायरस के वाहक माने जाते हैं.' स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार प्रभावित दोनों नर्सें निजी कारणों से पुरबा बर्धमान गई थी. हालांकि, उनका राज्य से बाहर यात्रा करने का कोई इतिहास नहीं है. उनका फिलहाल एक प्राइवेट अस्पताल में इलाज चल रहा है, और उनकी हालत पर करीब से नजर रखी जा रही है. उनके खून के सैंपल एम्स कल्याणी भेजे गए हैं. स्वास्थ्य सचिव ने आगे कहा कि राज्य में निपाह वायरस की टेस्टिंग के लिए पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर है. खास नोडल अस्पतालों की पहचान की गई है, और किसी भी इमरजेंसी स्थिति से निपटने के लिए सभी तैयारियां कर ली गई हैं. प्रभावित लोगों के परिवार के सदस्यों को भी मेडिकल निगरानी में रखा गया है. इस स्थिति में कई डॉक्टरों के संगठनों ने प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए हैं. उनका आरोप है कि राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने अभी तक कोई भी साफ तौर पर दिखने वाला जन जागरूकता अभियान या इमरजेंसी पब्लिक हेल्थ उपाय नहीं किए हैं. एसोसिएशन ऑफ हेल्थ सर्विसेज ने प्रिंसिपल सेक्रेटरी को एक पत्र लिखकर कहा, 'संक्रमण को रोकने के लिए 'युद्ध स्तर पर' जिस तरह के कदम उठाने की जरूरत है, वे असल में दिख ही नहीं रहे हैं. इससे यह शक होता है कि क्या प्रशासन जानबूझकर स्थिति को छिपाने की कोशिश कर रहा है या मामले की गंभीरता को समझने में नाकाम हो रहा है.'मेडिकल कम्युनिटी के कुछ लोगों के अनुसार, स्थिति और भी चिंताजनक है क्योंकि पश्चिम बंगाल ने 2001 में सिलीगुड़ी में निपाह वायरस के विनाशकारी प्रकोप और उसके गंभीर परिणामों को पहले ही देखा है. इस अनुभव के बावजूद तेजी से कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग, क्वारंटाइन और अन्य जरूरी महामारी विज्ञान उपायों को लागू करने में देरी पर सवाल उठाए जा रहे हैं. इस स्थिति में संबंधित संगठनों ने स्वास्थ्य विभाग और निदेशालय से तुरंत दखल देने की जोरदार मांग की है. उनका तर्क है कि घबराहट फैलाने के बजाय, वैज्ञानिक जानकारी के आधार पर जनता को शिक्षित करना सरकार की जिम्मेदारी है. व्यक्तिगत स्वच्छता के तरीकों, संक्रमण से बचाव के तरीकों और वास्तविक स्थिति को साफ तौर पर समझाने के लिए सरकार की ओर से तुरंत घोषणा की जरूरत है. उन्होंने कोविड -19 महामारी के अनुभव से सीखते हुए विस्तृत दैनिक स्वास्थ्य बुलेटिन प्रकाशित करने की भी मांग की है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई भी महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई न जाए और जानकारी में कोई असमानता न हो.

भारत ने जो JF-17 गिराया था, पाकिस्तान ने अब इंडोनेशिया से डील की, विमान को ठिकाने लगा रहा है

इस्लामाबाद चीन की मदद से लड़ाकू विमान बना रहा पाकिस्तान अब इसे दूसरे देशों को बेचने के लिए छटपटा रहा है. बांग्लादेश के बाद अब पाकिस्तान JF-17 को लेकर इंडोनेशिया के साथ डील करने वाला है. बताया जा रहा है कि लड़ाकू विमान की खरीद को लेकर इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री और पाकिस्तानी वायुसेना चीफ के बीच एक बैठक हुई है. इस बैठक में JF-17 और किलर ड्रोन को लेकर बातचीत की गई.  ये बातचीत ऐसे समय में हुई है, जब पाकिस्तान कई देशों के साथ डिफेंस डील को लेकर बातचीत कर रहा है. हाल ही में बांग्लादेश के एयर चीफ मार्शल ने भी पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर से मुलाकात की थी, जिसमें JF-17 की डील को लेकर चर्चा हुई थी. इसके साथ ही लीबिया और सूडान की सेना के साथ भी डील को लेकर बातचीत चल रही है. अब इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री सफरी शम्सुद्दीन और पाकिस्तानी वायुसेना के एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्धू से मुलाकात की है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से इसकी जानकारी दी है. रॉयटर्स ने बताया कि इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय और पाकिस्तानी सेना से जुड़े सूत्रों ने इस मुलाकात की पुष्टि की है. सूत्रों ने बताया कि ये बातचीत JF-17 लड़ाकू विमान की बिक्री को लेकर हुई थी. ये एक मल्टी-रोल फाइटर जेट है, जिसे पाकिस्तान ने चीन के साथ मिलकर बनाया है. ये वही JF-17 है, जिसे ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना ने मार गिराया था. रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि बातचीत के दौरान 40 से ज्यादा JF-17 की बिक्री को लेकर चर्चा की गई. एक सूत्र ने ये भी कहा कि इंडोनेशिया की पाकिस्तान की शह पर ड्रोन खरीदने में भी दिलचस्पी है. इंडोनेशिया को क्यों चाहिए JF-17? इंडोनेशिया की वायुसेना के ज्यादातर विमान पुराने हो चुके हैं, इसलिए उसे नए विमानों की जरूरत है. सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान JF-17 जेट और एयर डिफेंस सिस्टम की बिक्री को लेकर चर्चा कर रहा था. रिटायर्ड एयर मार्शल आसिम सुलेमान ने बताया कि इंडोनेशिया की डील पाइपलाइन में है और वह 40 JF-17 खरीद सकता है. पिछले महीने ही इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने दो दिन का पाकिस्तान का दौरा किया था. इस दौरे का मकसद दोनों देशों के बीच संबंध बेहतर बनाने के साथ-साथ रक्षा सहयोग बढ़ाना था. इंडोनेशिया ने पिछले कुछ सालों में लड़ाकू विमान के लिए कई ऑर्डर दिए हैं. 2022 में उसने 8.1 अरब डॉलर में फ्रांस से 42 राफेल खरीदने पर डील की थी. पिछले साल तुर्की के साथ 48 KAAN फाइटर जेट को लेकर डील हुई थी. ये सौदे इसलिए हो रहे हैं, ताकि इंडोनेशियाल अपने पुरानी फ्लीट को बदल सके. बताया जा रहा है कि इंडोनेशिया की चीन के साथ J-10 फाइटर जेट और अमेरिका के साथ F-15EX जेट खरीदने पर भी बात चल रही है. डिफेंस डील कर रहा पाकिस्तान पाकिस्तान कई देशों के साथ डिफेंस डील कर रहा है. पाकिस्तान अपने JF-17 को बेचने की भरपूर कोशिश कर रहा है. पाकिस्तान, बांग्लादेश के साथ भी एक डिफेंस डील करना चाहता है, जिसके तहत मुशाक ट्रेनिंग जेट और JF-17 की बिक्री शामिल है. बताया जा रहा है कि पाकिस्तान, सऊदी अरब के साथ भी एक डील के लिए बातचीत कर रहा है, जिसकी कीमत 2 से 4 अरब डॉलर हो सकती है. अगर ये समझौता होता है तो पाकिस्तान को सऊदी से जो लोन मिला है, उसके बदले में उसे मिलिट्री सप्लाई की जाएगी.  

सुप्रीम कोर्ट का निर्णय: कॉन्ट्रेक्ट पर काम करने वालों को सरकारी कर्मचारियों के समान अधिकार नहीं

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि किसी एजेंसी के जरिए अनुबंध पर नौकरी पाने वाले कर्मचारी सरकारी महकमों/ निकायों के नियमित कर्मचारियों के बराबर समानता का दावा नहीं कर सकते। शीर्ष अदालत ने सरकारी महकमों/निकायों के नियमित नौकरी को सार्वजनिक संपत्ति बताया। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और विपुल एम. पंचोली की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि नियमित नियुक्तियां पारदर्शी प्रक्रिया से होती हैं, जिससे सभी योग्य उम्मीदवारों को बराबर मौका मिलता है। पीठ ने कहा कि किसी एजेंसी/ठेकेदार के जरिए नौकरी देना उसकी मर्जी पर छोड़ दिया जाता है, जिससे कानून में दोनों श्रेणी पूरी तरह से अलग हो जाती हैं। शीर्ष अदालत ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा 2018 में पारित फैसला रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने किसी तीसरे पक्ष (ठेकेदार) द्वारा नगर निगम के लिए 1994 में अनुबंध पर रखे गए कर्मियों को नियमित कर्मचारी के समान वेतन एवं भत्ता से संबंधित लाभ देने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक नियमित और अनुबंध कर्मचारियों के बीच फर्क नहीं होंगे, तो अलग-अलग नियुक्ति तरीकों (स्थायी, अनुबंध और तदर्थ) के मूलभूत आधार अपनी पवित्रता खो देंगे। पीठ ने कहा कि कानून में इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती क्योंकि किसी राज्य प्राधिकार के तहत नौकरी एक सार्वजनिक संपत्ति है और देश के हर नागरिक को इसके लिए आवेदन करने का हक है। शीर्ष अदालत ने कहा कि नियमित नियुक्ति में सुरक्षा उपाय इसलिए हैं ताकि कोई पक्षपात या अन्य बाहरी विचार न हो, जहां लोगों को, केवल योग्यता के आधार पर, कानून में ज्ञात पूरी तरह पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से भर्ती किया जाता है। यह था मामला सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में नंदयाल नगरपालिका परिषद की अपील पर यह फैसला दिया है। अपील में हाईकोर्ट के 2018 के फैसले को चुनौती दी गई थी। यह मामला ठेकेदार जरिए नौकरी पर रखे गए सफाई कर्मचारियों से जुड़ा था और इस समय-समय पर ठेकेदार भी बदलता रहा।

EPFO का बड़ा फैसला, अब UPI के जरिए आसानी से निकाल सकेंगे PF का पैसा

नई दिल्ली कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने लाखों कर्मचारियों के लिए बड़ा बदलाव किया है. अब PF खाते से पैसा निकालने के लिए लंबे फॉर्म और बैंक वेरिफिकेशन की झंझट नहीं रहेगी. नया नियम UPI आधारित निकासी को संभव बनाता है, जिससे सेकंडों में पैसा सीधे खाते में ट्रांसफर होगा. यह सुधार खासकर सैलरीड क्लास और मध्यम वर्ग के लिए राहत है, जो इमरजेंसी में PF पर निर्भर रहते हैं. NPCI के साथ साझेदारी से शुरू हुई यह सुविधा डिजिटल इंडिया की दिशा में एक अहम कदम है. अब तक PF निकालने की प्रक्रिया बेहद लंबी और पेपरवर्क से भरी होती थी. कर्मचारी को अलग-अलग फॉर्म भरने पड़ते थे, बैंक वेरिफिकेशन और कई स्तर की जांच से गुजरना पड़ता था. इस कारण निकासी में कई बार हफ्तों का इंतजार करना पड़ताथा. यही वजह थी कि EPFO ने तकनीकी बदलाव की ओर कदम बढ़ाया और UPI को PF निकासी से जोड़ने का फैसला किया. नए नियम से कर्मचारियों को सबसे बड़ा फायदा समय की बचत का होगा. अब मेडिकल खर्च, बच्चों की पढ़ाई या शादी जैसे अचानक आने वाले खर्चों में PF तुरंत मददगार बनेगा.पेपरवर्क खत्म होने से क्लेम रिजेक्शन की संभावना भी घटेगी. पारदर्शिता बढ़ेगी क्योंकि पैसा सीधे कर्मचारी के बैंक खाते में जाएगा. यह सुविधा PF को बैंक खाते जितना लिक्विड बना देगी. UPI आधारित निकासी NPCI के सहयोग से शुरू की गई है. शुरुआत BHIMUPI से होगी और धीरे-धीरे Paytm, PhonePe, GPay जैसे लोकप्रिय ऐप्स भी जुड़ेंगे. RBI की गाइडलाइन के अनुसार, सामान्य ट्रांजैक्शन की लिमिट ₹1 लाख प्रतिदिन होगी, जबकि मेडिकल, एजुकेशन और IPO से जुड़े मामलों में यह सीमा ₹5 लाख तक बढ़ाई जाएगी. इससे सुरक्षा और दुरुपयोग रोकने की गारंटी मिलेगी. लेबर मिनिस्टर मनसुख मंडाविया ने कहा कि यह बदलाव कर्मचारियों को पेपरवर्क से मुक्त करेगा और क्लेम रिजेक्शन कम करेगा. उद्योग जगत के विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम डिजिटल इंडिया की रणनीति को मजबूत करेगा और कर्मचारियों को वित्तीय आत्मनिर्भरता देगा. फिनटेक सेक्टर के लिए भी यह एक बड़ा अवसर है क्योंकि UPI प्लैटफॉर्म पर PF निकासी जुड़ने से डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम और व्यापक होगा. EPFO ने संकेत दिया है कि शुरुआत छोटे अमाउंट से होगी और धीरे-धीरे बड़े अमाउंट पर भी यह सुविधा लागू होगी. कर्मचारियों को EPFOऐप पर अपनी UPI ID लिंक करनी होगी और KYC अपडेट रखना होगा. आने वाले समय में यह सुधार PF को रिटायरमेंट प्लानिंग का और भी मजबूत स्तंभ बना देगा.

DRDO ने KK रेंज में किया MPATGM मिसाइल का सफल परीक्षण, मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल पर काम

नई दिल्ली भारत की रक्षा तकनीक में एक और बड़ी उपलब्धि. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 11 जनवरी 2026 को महाराष्ट्र के अहिल्या नगर के KK रेंज में मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM) का सफल फ्लाइट टेस्ट किया. यह मिसाइल टॉप अटैक मोड में चलते हुए टारगेट (मूविंग टैंक) को मारने में पूरी तरह सफल रही. यह भारत की सेना के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि यह आधुनिक मुख्य युद्ध टैंकों (Main Battle Tanks) को आसानी से नष्ट कर सकती है. MPATGM मिसाइल क्या है और इसमें क्या खास है? MPATGM एक तीसरी पीढ़ी की फायर एंड फॉरगेट (Fire & Forget) मिसाइल है. इसका मतलब है कि सैनिक मिसाइल छोड़ने के बाद उसे गाइड नहीं करना पड़ता—मिसाइल खुद ही लक्ष्य को ढूंढकर मारती है. यह मिसाइल बहुत हल्की है, जिसे एक सैनिक आसानी से कंधे पर उठाकर ले जा सकता है. मुख्य विशेषताएं     टॉप अटैक मोड: मिसाइल टैंक के ऊपर से (टॉप) हमला करती है, जहां टैंक की सबसे कमजोर जगह होती है (टैंक का ऊपरी हिस्सा पतला होता है).     इमेजिंग इन्फ्रारेड (IIR) होमिंग सीकर: दिन और रात दोनों में काम करती है. यह थर्मल इमेजिंग से टारगेट को देखती है.     टैंडम वॉरहेड: दो विस्फोटक हेड्स—पहला टैंक के रिएक्टिव आर्मर को तोड़ता है, दूसरा मुख्य बॉडी को नष्ट करता है. आधुनिक टैंकों को भी हरा सकती है.     ऑल इलेक्ट्रिक कंट्रोल सिस्टम: बहुत तेज और सटीक.     उच्च प्रदर्शन साइटिंग सिस्टम: सैनिक को टारगेट साफ दिखाई देता है.     प्रोपल्शन सिस्टम: तेज और दूर तक मार करने में सक्षम.     लॉन्च तरीका: ट्राइपॉड (तीन पैरों वाला स्टैंड) या सैन्य वाहन से लॉन्च की जा सकती है. इस टेस्ट में क्या हुआ? DRDO की हैदराबाद स्थित डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी (DRDL) ने इस टेस्ट को अंजाम दिया. टारगेट के रूप में एक थर्मल टारगेट सिस्टम इस्तेमाल किया गया, जिसे जोधपुर की डिफेंस लेबोरेटरी ने बनाया था. यह सिस्टम एक चलते हुए टैंक की तरह दिखता और महसूस होता है. मिसाइल ने टॉप अटैक मोड में चलते टारगेट को सटीक निशाना लगाकर सफलतापूर्वक नष्ट किया. इस मिसाइल को किस-किसने बनाया? यह पूरी तरह स्वदेशी है. DRDO की कई लैबोरेटरीज ने मिलकर इसे विकसित किया…     रिसर्च सेंटर इमरत (RCI), हैदराबाद – सीकर और गाइडेंस     टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी (TBRL), चंडीगढ़ – वॉरहेड टेस्टिंग     हाई एनर्जी मैटेरियल्स रिसर्च लेबोरेटरी (HEMRL), पुणे – विस्फोटक सामग्री     इंस्ट्रूमेंट्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (IRDE), देहरादून – साइटिंग सिस्टम उत्पादन पार्टनर: भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL). रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO, इंडस्ट्री और पार्टनर्स को बधाई दी. उन्होंने कहा कि यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. DRDO चेयरमैन डॉ. समीर वी. कमत ने कहा कि यह सफल परीक्षण हथियार प्रणाली को भारतीय सेना में शामिल करने की दिशा में एक बड़ा कदम है. क्यों महत्वपूर्ण है यह टेस्ट? भारतीय सेना को आधुनिक एंटी-टैंक हथियार मिलेगा, जो दुश्मन के टैंकों (जैसे चीन या पाकिस्तान के) को आसानी से रोक सके. टॉप अटैक क्षमता से टैंक के सबसे मजबूत रिएक्टिव आर्मर को भी पार कर सकती है. फायर एंड फॉरगेट से सैनिक सुरक्षित रहते हुए हमला कर सकता है.  यह आत्मनिर्भर भारत अभियान का हिस्सा है—अब भारत विदेशी मिसाइलों पर निर्भर नहीं रहेगा. यह सफलता DRDO की लगातार बढ़ती क्षमता को दिखाती है. जल्द ही MPATGM भारतीय सेना में शामिल होकर देश की रक्षा को और मजबूत बनाएगी. 

भारत में बिटक्वाइन निवेश पर सरकार की सख्ती, 5 नए नियमों की घोषणा

दिल्ली भारत में बिटकॉइन और क्रिप्टो ट्रेडिंग करने वालों के लिए सरकार ने 5 सख्त नियम लागू कर दिए हैं. FIU-IND के निर्देशों के तहत अब लोकेशन ट्रैकिंग, लाइव सेल्फी KYC, VPN पर रोक, फंड्स के स्रोत की जानकारी और बेनेफिशियरी डिटेल अनिवार्य होगी. नियमों के उल्लंघन पर अकाउंट फ्रीज हो सकता है. भारत में बिटक्वाइन या क्रिप्टो ट्रेडिंग करने वालों की अब खैर नहीं है. भारत में बिटकॉइन (Bitcoin), एथेरियम (ETH) या अन्य किसी भी क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने वालों के लिए सरकार और वित्तीय खुफिया इकाई (FIU-IND) ने 5 सख्त नियमों को लागू कर दिया है. ये नियम इसलिए लागू किए गए हैं, ताकि देश में मनी लॉन्ड्रिंग और ऑनलाइन फ्रॉड को रोकने के लिए क्रिप्टो एक्सचेंजों (Crypto Exchanges) पर नकेल कसी जा सके. अब किसी भी भारतीय एक्सचेंज (जैसे WazirX, CoinDCX, CoinSwitch) या भारत में रजिस्टर्ड विदेशी एक्सचेंज पर ट्रेडिंग करना पहले जैसा आसान नहीं रहा. लोकेशन ट्रैकिंग सबसे बड़ा बदलाव ‘लोकेशन’ को लेकर है. अब जब भी आप किसी क्रिप्टो ऐप में लॉगिन करेंगे, तो ऐप आपसे आपकी Live Location का एक्सेस मांगेगा. यदि आप लोकेशन एक्सेस नहीं देते हैं या आप भारत की सीमा से बाहर (IP Address) पाए जाते हैं, तो आपका अकाउंट फ्रीज हो सकता है. सरकार का मकसद यह सुनिश्चित करना कि यूजर भारत के नियमों के दायरे में है. लाइव सेल्फी अब सिर्फ आधार कार्ड या पैन कार्ड अपलोड करना अब काफी नहीं है. केवाईसी (KYC) को और सख्त बनाते हुए अब ‘Liveness Check’ अनिवार्य कर दिया गया है. अब आपको ऐप पर अपनी लाइव सेल्फी खींचनी होगी और कई बार वीडियो वेरिफिकेशन भी देना पड़ सकता है. यह कदम फर्जी अकाउंट्स को बंद करने के लिए उठाया गया है. VPN का इस्तेमाल प्रतिबंधित अक्सर ट्रेडर अपनी पहचान छिपाने के लिए VPN (Virtual Private Network) का इस्तेमाल करते है. नए नियमों के मुताबिक, अगर सिस्टम ने डिटेक्ट किया कि आप VPN का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो एक्सचेंज को आपका ट्रांजैक्शन तुरंत ब्लॉक करने का आदेश है. फंड्स का स्रोत अगर आप एक निश्चित सीमा (जैसे 50,000 रुपये या उससे अधिक) से ज्यादा का निवेश करते हैं, तो आपको यह बताना होगा कि यह पैसा कहां से आया है. एक्सचेंज आपसे बैंक स्टेटमेंट या सैलरी स्लिप मांग सकता है. बेनेफिशियरी की जानकारी क्रिप्टो ट्रांसफर के नियमों (Travel Rule) को कड़ाई से लागू किया जा रहा है. अगर आप अपने वॉलेट से किसी और के वॉलेट में क्रिप्टो भेज रहे हैं, तो आपको सामने वाले (रिसीवर) का नाम, पता और वॉलेट डीटेल्स एक्सचेंज को देनी होंगी. बिना पूरी जानकारी के ट्रांजैक्शन फेल हो जाएगा.

THAAD और आयरन डोम को पीछे छोड़ देगा नया एयर डिफेंस सिस्टम, F-35, Su-57, J-35 होंगे नाकाम

नई दिल्ली ऑपरेशन सिंदूर के बाद एयर डिफेंस सिस्‍टम को आधुनिक बनाने की जरूरत शिद्दत से महसूस हुई. इसके बाद भारत ने मिशन सुदर्शन चक्र बनाने का ऐलान किया. मिशन के तहत DRDO के साथ ही डिफेंस से जुड़ी अन्‍य एजेंसियां मॉडर्न टेक्‍नोलॉजी की मदद से रडार डेवलप करने में जुटी हैं. हाल के दिनों में स्‍टील्‍थ एरियल थ्रेट (5th जेनरेशन फाइटर जेट समेत) का खतरा काफी बढ़ गया है. भारत के पड़ोस में स्थित चीन के पास पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान का बड़ा बेड़ा है. माना जाता है कि चीनी सेना के पास ऐसे ड्रोन सिस्‍टम भी है, जो स्‍टील्‍थ है. बता दें कि स्‍टील्‍थ डिवाइस का रडार क्रॉस सेक्‍शन (RCS) काफी कम होता है, जिस वजह से सामान्‍य रडार या एयर डिफेंस सिस्‍टम के लिए इसे इंटरसेप्‍ट करना काफी मुश्किल है. ऐसे में संघर्ष या युद्ध की स्थिति में दुश्‍मनों को बढ़त मिल जाती है. रूस-यूक्रेन वॉर और इजरायल का गाजा और ईरान पर अटैक के बाद स्‍टील्‍थ वॉर-प्‍लेन, ड्रोन और मिसाइल की डिमांड बढ़ गई है. ऐसे में दुनिया के तमाम देश पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट और हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल समेत अन्‍य डिफंस इक्विपमेंट डेवलप करने में जुटे हैं. भारत भी इसमें पीछे नहीं रहना चाहता है. एक तरफ 5th जेनरेशन फाइटर जेट डेवलप करने के लिए AMCA प्रोजेक्‍ट लॉन्‍च किया है तो दूसरी तरफ पांचवीं पीढ़ी (स्‍टील्‍थ) के खतरों से निपटने की दिशा में भी लगातार काम किया जा रहा है. इस क्रम में भारत को बड़ी सफलता मिली है. भारत एंटी स्‍टील्‍थ रडार ग्रिड बना रहा है. भारत की वायु रक्षा प्रणाली जल्द ही एक महत्वपूर्ण तकनीकी बढ़त हासिल करने जा रही है. देश के उभरते एयर डिफेंस आर्किटेक्चर में पैसिव कोहेरेंट लोकेशन रडार (PCLR) को शामिल किया जा रहा है, जिसे अब राष्ट्रीय स्तर के ‘एंटी-स्टेल्थ रडार ग्रिड’ या लो ऑब्ज़र्वेबल डिटेक्शन नेटवर्क (LODN) का अहम हिस्सा माना जा रहा है. इस नेटवर्क का उद्देश्य आधुनिक स्टेल्थ और लो-ऑब्जर्वेबल हवाई खतरों का प्रभावी ढंग से पता लगाना और उन्हें निष्क्रिय करना है. भारत का यह मल्‍टी-लेयर्ड डिटेक्शन फ्रेमवर्क विभिन्न फ्रीक्वेंसी बैंड और डिटेक्शन सिद्धांतों पर आधारित सेंसरों को एक साथ जोड़ता है. इसमें पहले से मौजूद और प्रस्तावित VHF बैंड सर्विलांस रडार, लंबी दूरी के लो-लेवल रडार और वोस्तोक-डी (Vostok-D) जैसे सिस्टम शामिल हैं. PCLR की तैनाती से उन डिटेक्शन गैप्स को भरने में मदद मिलेगी, जिनका फायदा आमतौर पर स्टील्थ एयरक्राफ्ट उठाते हैं. बता दें कि यह सिस्‍टम अमेरिकी THAAD और इजरायली आयरन डोम से एक कदम आगे की बात है. मतलब ये भारतीय एयर डिफेंस सिस्‍टम के सामने बौने हो जाएंगे. PCLR पारंपरिक रडार सिस्टम से बिल्कुल अलग सिद्धांत पर काम करता है. यह कोई भी रेडियो फ्रीक्वेंसी सिग्नल खुद प्रसारित नहीं करता. इसके बजाय यह वातावरण में पहले से मौजूद सिग्नलों (खासतौर पर कमर्शियल FM रेडियो ब्रॉडकास्ट) का इस्तेमाल करता है. जब कोई हवाई लक्ष्य (Aerial Threat) इन सिग्नलों को बाधित करता है या परावर्तित करता है, तो PCLR उस बदलाव का विश्लेषण कर विमान की मौजूदगी और मूवमेंट का पता लगाता है. इस वजह से यह सिस्टम पूरी तरह से साइलेंट रहते हुए निगरानी करने में सक्षम होता है. एयर डिफेंस सिस्टम क्या है? एयर डिफेंस सिस्टम ऐसी सैन्य व्यवस्था है, जिसका मकसद देश की हवाई सीमा में घुसने वाले दुश्मन के लड़ाकू विमानों, मिसाइलों, ड्रोन और अन्य हवाई खतरों का समय रहते पता लगाना और उन्हें नष्ट करना होता है. यह सिस्टम देश के अहम सैन्य ठिकानों, शहरों और नागरिक इलाकों को हवाई हमलों से बचाने का काम करता है. एयर डिफेंस सिस्टम के मुख्य हिस्से कौन-कौन से होते हैं? एयर डिफेंस सिस्टम मुख्य रूप से तीन हिस्सों पर आधारित होता है – पहला, रडार और सेंसर, जो हवा में मौजूद किसी भी संदिग्ध वस्तु का पता लगाते हैं. दूसरा, कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम, जो रडार से मिले डेटा का विश्लेषण कर खतरे का आकलन करता है. तीसरा, इंटरसेप्टर हथियार जैसे मिसाइलें या गन सिस्टम, जो दुश्मन के लक्ष्य को मार गिराते हैं. एयर डिफेंस सिस्टम कैसे काम करता है? जैसे ही रडार किसी दुश्मन विमान या मिसाइल को पकड़ता है, उसकी गति, दिशा और ऊंचाई की जानकारी कमांड सेंटर को भेजी जाती है. इसके बाद खतरे के स्तर के अनुसार फैसला लिया जाता है कि उसे ट्रैक किया जाए या तुरंत नष्ट किया जाए. जरूरत पड़ने पर एयर डिफेंस मिसाइल दागी जाती है, जो हवा में ही लक्ष्य को नष्ट कर देती है. भारत के लिए एयर डिफेंस सिस्टम क्यों जरूरी है? भारत की सीमाएं लंबी हैं और पड़ोसी देशों से सुरक्षा चुनौतियां बनी रहती हैं. आधुनिक युद्ध में मिसाइल और ड्रोन का खतरा तेजी से बढ़ा है. ऐसे में एयर डिफेंस सिस्टम भारत को अचानक होने वाले हवाई हमलों से बचाने, रणनीतिक ठिकानों की सुरक्षा करने और देश की संप्रभुता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है. भारत में कौन-कौन से प्रमुख एयर डिफेंस सिस्टम मौजूद हैं? भारत के पास स्वदेशी और विदेशी तकनीक से बने कई एयर डिफेंस सिस्टम हैं. इनमें आकाश मिसाइल सिस्टम, S-400 ट्रायम्फ, बराक-8 और स्पाइडर जैसे सिस्टम शामिल हैं. ये अलग-अलग ऊंचाई और दूरी पर आने वाले खतरों से निपटने में सक्षम हैं और मिलकर देश की मजबूत हवाई सुरक्षा कवच तैयार करते हैं. India Anti Stealth Radar Grid: एंटी स्‍टील्‍थ रडार ग्रिड के अस्‍तित्‍व में आने के बाद अमेरिकी F-35, रूसी Su-57 और चीन के J-35 जैसे पांचवी पीढ़ी के विमानों को इंटरसेप्‍ट कर उसके हमले को नाकाम बनाना आसान हो जाएगा. (फाइल फोटो/Reuters) दुश्‍मन कैसे होंगे चारों खाने चित्‍त? PCLR को एक पैसिव मल्टीस्टैटिक रडार के रूप में डिजाइन किया गया है. इसमें भौगोलिक रूप से अलग-अलग स्थानों पर लगे रिसीवर एक ही लक्ष्य को विभिन्न कोणों से ट्रैक करते हैं. ‘इंडियन डिफेंस रिसर्च विंग’ की रिपोर्ट के अनुसार, यह स्‍ट्रक्‍चर दुश्मन के लिए सिस्टम को समझना, उसकी लोकेशन पहचानना या उसे निष्क्रिय करना बेहद कठिन बना देती है. चूंकि इसमें कोई एक ट्रांसमीटर नहीं होता, इसलिए इसे दबाने या निशाना बनाने का कोई स्पष्ट बिंदु नहीं होता. इस रडार की एक और बड़ी ताकत इसका लो-फ्रीक्वेंसी सिग्नलों पर निर्भर होना है. आधुनिक स्टील्थ विमान आमतौर पर हाई-फ्रीक्वेंसी रडार से बचने के लिए डिजाइन किए जाते हैं, … Read more

वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का किराया तय, RAC टिकट न मिलने की चेतावनी

नई दिल्ली Vande Bharat Sleeper Express का इंतजार खत्म होने वाला है। नई रेल अगले सप्ताह से पटरियों पर दौड़ सकती है। इसी बीच खबर है कि यात्रियों को नई ट्रेन में RAC यानी रिजर्वेशन अगेंस्ट कैंसिलेशन जैसी सुविधाएं नहीं मिलेंगी। साथ ही इसका किराया राजधानी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों से ज्यादा हो सकता है। स्लीपर ट्रेन की शुरुआत गुवाहाटी-हावड़ा रूट पर होने जा रही है। वंदे भारत सीरीज की यह पहली स्लीपर ट्रेन होगी। अब तक दौड़ रहीं ट्रेनें चेयर कार हैं।  रिपोर्ट के अनुसार, यात्री को कम से कम 400 किमी दूरी के बराबर किराया देना होगा। 9 जनवरी को जारी सर्कुलर के हवाले से बताया गया, 'कम से कम 400 किमी दूरी का भुगतान करना होगा…। सिर्फ कन्फर्म टिकट ही इस ट्रेन के लिए जारी किए जाएंगे। RAC/वेटलिस्ट/पार्शियली कन्फर्म्ड टिकट का कोई प्रावधान नहीं होगा। सभी उपलब्ध बर्थ एडवांस रिजर्वेशन पीरियड (ARP) से उपलब्ध होंगी।' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले सप्ताह स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाने जा रहे हैं। अन्य ट्रेनों की तरह वंदे भारत स्लीपर में महिलाओं, दिव्यांगों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए कोटा होगा। कितना होगा किराया 3एसी के लिए यात्रियों को 2.4 रुपये प्रति किमी, 2एसी के लिए 3.1 रुपये प्रति किमी और 1एसी के लिए 3.8 रुपये प्रति किमी होगा। ऐसे में ट्रेन का न्यूनतम किराया थर्ड एसी के लिए 960 रुपये, सेकंड एसी के लिए 1240 रुपये और फर्स्ट एसी के लिए 1520 रुपये होगा। हालांकि, इसमें GST यानी वस्तु एवं सेवा कर शामिल नहीं है। यह फिलहाल दोनों शहरों के बीच 120-130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी तथा असम और पश्चिम बंगाल के प्रमुख जिलों को कवर करेगी। दोनों राज्यों में इस साल चुनाव होने वाले हैं। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पावरप्वॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से जानकारी दी थी, जिसके अनुसार 16 डिब्बों वाली इस ट्रेन में 11 डिब्बे थर्ड एसी, चार डिब्बे सेकंड एसी और एक डिब्बा फर्स्ट एसी शामिल हैं। कुल 823 सीटों में से 611 थर्ड एसी में, 188 सेकंड एसी में और 24 फर्स्ट एसी में हैं। ट्रेन में उपलब्ध अन्य विशेषताओं में बेहतर कुशनिंग के साथ एर्गोनॉमिक रूप से डिजाइन किए गए बर्थ, सुगम आवागमन के लिए वेस्टिब्यूल वाले स्वचालित दरवाजे, बेहतर सस्पेंशन और शोर कम करके बेहतर यात्रा आराम, स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली (कवच), आपातकालीन टॉक-बैक प्रणाली और उच्च स्वच्छता मानकों को बनाए रखने के लिए कीटाणुनाशक तकनीक शामिल हैं।

ऑस्ट्रेलिया में आतंक के खिलाफ बड़ा कदम, PM अल्बनीज़ ला सकते हैं नया सख्त कानून

कैनबरा ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ ने दिसंबर में हुए बोंडी आतंकी हमले के बाद बड़ा फैसला लेते हुए संसद का विशेष सत्र बुलाने की घोषणा की है। सरकार हेट स्पीच, चरमपंथ और हथियारों पर सख्त कानून लाने जा रही है। संसद के दोनों सदन 19 और 20 जनवरी को बैठेंगे, जबकि पहले संसद का सत्र 2 फरवरी को शुरू होना था। प्रधानमंत्री अल्बनीज़ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “बोंडी बीच के आतंकियों के दिमाग में नफरत थी और उनके हाथों में बंदूकें थीं। यह कानून दोनों से निपटेगा, और हमें दोनों से निपटना ही होगा।” सरकार द्वारा पेश किया जाने वाला “कॉम्बैटिंग एंटीसेमिटिज़्म, हेट एंड एक्सट्रीमिज़्म बिल” व्यापक सुधारों का पैकेज है। इसमें नफरत से जुड़े अपराधों पर सख्त सज़ा, युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने वाले हेट प्रीचर्स के खिलाफ नए गंभीर अपराध, और डराने-धमकाने व उकसावे पर कठोर कार्रवाई का प्रावधान शामिल है। साथ ही प्रतिबंधित प्रतीकों पर रोक को और मजबूत किया जाएगा। अगर यह बिल पास हो जाता है, तो गृह मंत्री को नफरत फैलाने वालों का वीज़ा रद्द करने या अस्वीकार करने का अधिक अधिकार मिलेगा। इसके अलावा सरकार संगठनों को “प्रतिबंधित हेट ग्रुप” घोषित कर सकेगी। सरकार इस विधेयक पर बहस से पहले बोंडी आतंकी हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने के लिए संसद में शोक प्रस्ताव भी लाएगी। नए कानून के तहत नेशनल गन्स बायबैक स्कीम भी शुरू की जाएगी, जिसका मकसद ऑस्ट्रेलियाई सड़कों से अवैध हथियारों को हटाना है। प्रधानमंत्री ने कहा, “हम चाहते हैं कि ऑस्ट्रेलिया ऐसा देश बना रहे जहां हर व्यक्ति को अपनी पहचान पर गर्व करने का अधिकार हो। लेकिन नफरत, हिंसा और समाज को बांटने वाला व्यवहार गैरकानूनी होगा।”गौरतलब है कि 8 जनवरी को ही प्रधानमंत्री अल्बनीज़ ने बोंडी हमले के बाद देश में यहूदी विरोध और सामाजिक सौहार्द से जुड़े मुद्दों की जांच के लिए रॉयल कमीशन गठित करने की घोषणा की थी। यह ऑस्ट्रेलिया में जांच का सर्वोच्च स्तर है, जिसकी अध्यक्षता पूर्व हाईकोर्ट जज वर्जीनिया बेल करेंगी। आयोग की रिपोर्ट दिसंबर के मध्य तक आने की उम्मीद है।

वैष्णो देवी यात्रियों के लिए शुभ समाचार, जानिए कब दर्शन के लिए खुलेगी पुरानी गुफा

कटड़ा वैष्णो देवी भवन पर पुरानी गुफा के कपाट मकर संक्रांति के उपलक्ष पर बुधवार को विधीबद पूजा अर्चना के साथ खोले जाएंगे। हालांकि श्रद्धालुओं को उस समय ही पुरानी गुफा से दर्शन को मौका मिलेगा ,जब भवन में श्रद्धलुओं की कतारों में गिरावट होगी। 14 जनवरी बुधवार  विद्वानों द्वारा मंत्र उच्चारण के बाद पुरानी गुफा के कपाट खोल दिए जाएंगे। जिस दौरान श्राइन बोर्ड के आला अधिकारी भी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।