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Vingroup ने साइन किया MoU, तेलंगाना में 3 बिलियन डॉलर का निवेश और मल्टी-सेक्टर इकोसिस्टम का निर्माण

नई दिल्ली इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनी Vingroup ने तेलंगाना सरकार के साथ एक मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग (MoU) साइन किया है, जो राज्य के सबसे बड़े प्रपोज़्ड विदेशी इन्वेस्टमेंट में से एक है, जिसका मकसद एक बड़ा मल्टी-सेक्टर इकोसिस्टम बनाना है. हैदराबाद में तेलंगाना राइजिंग ग्लोबल समिट में अनाउंस किया गया, 3 बिलियन डॉलर का यह प्रपोज़ल फेज़ में लागू किया जाएगा. इसमें स्मार्ट अर्बन डेवलपमेंट, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, 2,500 हेक्टेयर में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, टूरिज्म, रिन्यूएबल एनर्जी और बड़े पैमाने पर कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट शामिल होंगे. यह एग्रीमेंट Vingroup की इंडिया स्ट्रैटेजी में भी एक बड़ा कदम है, जो वियतनाम के सबसे बड़े प्राइवेट ग्रुप के ग्लोबल एम्बिशन को दिखाता है. VinFast और GSM के साथ इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा MoU की खास बातों में से एक यह है कि तेलंगाना में भारत की पहली बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक टैक्सी फ्लीट लाने का VinGroup का प्रपोज़्ड इंट्रोडक्शन. कंपनी अपनी मोबिलिटी ब्रांच, GSM, और VinFast गाड़ियों का इस्तेमाल करके राज्य में एक फुल मोबिलिटी-एज़-ए-सर्विस प्लेटफॉर्म बनाने का प्लान बना रही है. VinHomes द्वारा संचालित स्मार्ट शहरी विकास MoU में आगे VinHomes Smart City प्रोजेक्ट का प्रस्ताव भी दिया गया है, जिसे 1,080 हेक्टेयर में प्लान किया गया है और इसे लगभग 2 लाख लोगों के रहने के लिए डिज़ाइन किया गया है. इस बड़े डेवलपमेंट प्रोजेक्ट से लगभग 10,000 नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है और इसमें कम ऊंचाई वाली और ऊंची इमारतों वाले क्लस्टर, मॉडर्न सुविधाएं, सीमित जगह और सस्टेनेबल प्लानिंग के सिद्धांत शामिल होंगे. शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर MoU के ज़रिए, Vingroup का मकसद 70 हेक्टेयर प्लान्ड ज़मीन पर ज़रूरी सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना है, जिसमें उसका VinSchool K-12 एजुकेशन नेटवर्क, VinMec मल्टी-स्पेशलिटी हॉस्पिटल और V-Green EV चार्जिंग इकोसिस्टम शामिल हैं. इन कोशिशों का मकसद बड़े पैमाने पर स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट को सपोर्ट करना और तेलंगाना की हेल्थकेयर और एजुकेशन कैपेसिटी में योगदान देना है. पर्यटन, मनोरंजन और रीन्यूवेबल एनर्जी विस्तार MoU में VinWonders के तहत 350 हेक्टेयर के टूरिज्म और एंटरटेनमेंट हब के प्लान की भी जानकारी दी गई है, जिसमें एक थीम पार्क, ज़ू और सफारी शामिल हैं. रिन्यूएबल एनर्जी के मामले में, VinGroup के VinEnergo डिवीज़न ने भविष्य के शहरी इलाकों और बड़े मोबिलिटी इकोसिस्टम को साफ बिजली से पावर देने के लिए 500 हेक्टेयर में 500 MW का सोलर फार्म बनाने का भी प्रस्ताव दिया है. ज़मीन, प्लानिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर की प्लानिंग MoU के हिस्से के तौर पर, तेलंगाना सरकार ने ज़मीन की पहचान और बंटवारे में मदद करने, मास्टर प्लानिंग में तालमेल बिठाने, एडमिनिस्ट्रेटिव प्रोसेस में मदद करने और ज़रूरी कनेक्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने का वादा किया है. प्रोजेक्ट की टाइमलाइन में तेज़ी लाने के लिए मौजूदा राज्य पॉलिसी के तहत इंसेंटिव पर भी विचार किया जाएगा. एग्रीमेंट पर बात करते हुए, तेलंगाना सरकार के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने कहा कि, "Vingroup का USD 3 बिलियन का इन्वेस्टमेंट 'तेलंगाना राइजिंग' विज़न में एक बहुत बड़ा भरोसा है, खासकर सस्टेनेबल शहरी विकास और ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमारा फोकस. यह कैपिटल से कहीं ज़्यादा है." उन्होंने आगे कहा कि, "यह एक फ्यूचरिस्टिक, नेट-ज़ीरो शहर बनाने और भारत का पहला बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक टैक्सी फ्लीट लाने के लिए एक पार्टनरशिप है, जो सीधे हमारे नागरिकों के जीवन की क्वालिटी में सुधार करेगी. हमारी सरकार इस ग्लोबल विज़न को लोकल हकीकत बनाने के लिए तेज़ी से काम करने की गारंटी देती है." Vingroup Asia और VinFast Asia के CEO फाम सान्ह चाउ ने कहा कि, "Vingroup तेलंगाना में बहुत ज़्यादा पोटेंशियल देखता है और हम राज्य सरकार के साथ लंबे समय की पार्टनरशिप बनाना चाहते हैं. मेगा अर्बन डेवलपमेंट, बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर और एक कॉम्प्रिहेंसिव इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इकोसिस्टम देने में हमारे प्रूवन ट्रैक रिकॉर्ड के साथ, हमें विश्वास है कि तेलंगाना के साथ हमारा कोलेबोरेशन टैंजिबल वैल्यू जेनरेट करेगा, सस्टेनेबल डेवलपमेंट को बढ़ावा देगा और स्थानीय निवासियों के लिए जीवन की क्वालिटी को बेहतर करेगा."

ओमान ने PAK के टुकड़े करने में भारत का साथ दिया था, अब पीएम मोदी का वहां दौरा, क्या होगा अगला कदम?

नई दिल्ली इतिहास के पन्ने पलटें तो साल था 1971. भारत और पाकिस्तान के बीच जंग छिड़ी थी. पाकिस्तान के दो टुकड़े होने वाले थे और एक नया देश बांग्लादेश नक्शे पर उभर रहा था. उस वक्त दुनिया का कूटनीतिक माहौल भारत के खिलाफ था. अमेरिका अपना सातवां बेड़ा भेज रहा था और इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) के लगभग सभी ताकतवर देश सऊदी अरब, ईरान, जॉर्डन मजहब के नाम पर पाकिस्तान के साथ खड़े थे. लेकिन उस घने अंधेरे में एक चिराग था जो भारत के लिए जल रहा था. वह देश था ओमान. ओमान वह मुस्लिम देश था, जिसने अरब और इस्लामिक जगत के भारी दबाव को दरकिनार करते हुए, यूएन से लेकर हर वैश्विक मंच पर भारत का खुलकर समर्थन किया था. जब सब पाकिस्तान को बचाने में लगे थे, ओमान भारत की सच्चाई के साथ खड़ा था. अगले हफ्ते, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उसी ओमान की धरती पर कदम रखने जा रहे हैं. 17-18 दिसंबर का यह दौरा सिर्फ फाइलों पर दस्तखत करने का नहीं, बल्कि 54 साल पुरानी उस वफादारी को नमन करने का है. 1971 की वो कहानी, जो अक्सर नहीं सुनाई जाती 1971 की जंग के दौरान पाकिस्तान ने खुद को ‘इस्लाम के किले’ के रूप में पेश किया था. अरब देशों पर भारी दबाव था कि वे भारत का बायकॉट करें. उस वक्त ओमान के सुल्तान कबूस बिन सईद ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया. उन्होंने साफ कर दिया कि ओमान, भारत के रणनीतिक हितों के खिलाफ नहीं जाएगा. सऊदी अरब और जॉर्डन जैसे देश सुल्तान कबूस से बेहद खफा हो गए थे. लेकिन सुल्तान अड़े रहे. उन्होंने न सिर्फ भारत का कूटनीतिक समर्थन किया, बल्कि अपनी बंदरगाहों और सुविधाओं के दरवाजे भी भारत के लिए खुले रखे. अब जब पीएम मोदी ओमान जा रहे हैं, तो वह एक तरह से उस दोस्ती का कर्ज चुकाने जा रहे हैं. ओमान भारत के लिए सिर्फ एक ‘ट्रेडिंग पार्टनर’ नहीं, बल्कि ‘ऑल वेदर फ्रेंड’ यानी हर मौसम का साथी है. ‘दिल’ के बाद अब ‘डील’ की बारी 1971 में ओमान ने दिल से साथ दिया था, 2025 में वह भारत की इकॉनमी को रफ्तार देने जा रहा है. पीएम मोदी के इस दौरे पर भारत-ओमान फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर होना लगभग तय है. इस समझौते के बाद भारतीय सामान जैसे कपड़ा, जेम्स, ज्वेलरी, मशीनरी बिना किसी टैक्स के ओमान के बाजारों में बिक सकेगा. इससे चीन को झटका लगना तय है. ओमान रणनीतिक रूप से बहुत अहम जगह यानी अरब सागर और फारस की खाड़ी के मुहाने पर है. भारत वहां दुकम (Duqm) पोर्ट पर पहले से ही मौजूदगी दर्ज करा चुका है. फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के जरिए भारत वहां चीन के प्रभाव को कम करेगा और अपनी जड़ें जमाएगा. ‘पुणे’ वाला कनेक्शन और सुल्तान से याराना     कूटनीति में निजी रिश्तों का बहुत मोल होता है. ओमान के मौजूदा सुल्तान हैथम बिन तारिक के रगों में भारत से जुड़ी यादें हैं. सुल्तान हैथम के पिता ने भारत के पुणे शहर में पढ़ाई की थी. ओमान का शाही परिवार भारत को अपना दूसरा घर मानता है.     पीएम मोदी और सुल्तान हैथम के बीच गजब का तालमेल है. पिछले साल जब सुल्तान भारत आए थे, तो यह उनकी पहली राजकीय यात्रा थी. अब पीएम मोदी का वहां जाना उस दोस्ती को और गहरा करेगा.     ओमान में करीब 8 लाख भारतीय रहते हैं. पीएम मोदी जब उनसे मिलेंगे, तो यह संदेश जाएगा कि भारत अपने नागरिकों और अपने पुराने दोस्तों, दोनों का ख्याल रखता है. जॉर्डन और इथियोपिया भी जाएंगे पीएम मोदी की यह यात्रा सिर्फ ओमान तक सीमित नहीं है. वे जॉर्डन और इथियोपिया भी जा रहे हैं. यह तीनों देश मुस्लिम आबादी के लिहाज से भारत के लिए बहुत मायने रखते हैं. जॉर्डन (97% मुस्लिम): तब और अब: 1971 में जॉर्डन पाकिस्तान के साथ था, लेकिन आज 2025 में जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला पीएम मोदी के करीबी दोस्त हैं. किंग अब्दुल्ला, जो पैगंबर साहब के वंशज माने जाते हैं, उनका पीएम मोदी का स्वागत करना इस्लामिक दुनिया में भारत की बदलती छवि का सबूत है. यह दौरा फिलिस्तीन मुद्दे पर भारत के संतुलन को दिखाएगा. इथियोपिया (34% मुस्लिम): पहला दौरा: यह किसी भारतीय पीएम का पहला इथियोपिया दौरा होगा. वहां 4 करोड़ से ज्यादा मुस्लिम आबादी है. भारत वहां अफ्रीका में अपनी पैठ बढ़ाने जा रहा है. 1971 की नींव पर 2025 का महल पीएम मोदी का यह दौरा बताता है कि विदेश नीति में ‘मेमोरी’ कितनी अहम होती है. भारत ने नहीं भुलाया कि जब दुनिया खिलाफ थी, तब ओमान साथ था. ज जब ओमान के साथ ऐतिहासिक FTA होने जा रहा है, तो यह 1971 के उस बीज का फल है जिसे सुल्तान कबूस ने बोया था. ओमान में ‘इकॉनमी’ की बात होगी (FTA के जरिए), लेकिन उसकी बुनियाद में ‘दिल’ की वो बात होगी जो 1971 में पाकिस्तान के दो टुकड़े होते वक्त ओमान ने भारत के कान में कही थी- हम तुम्हारे साथ हैं. यह दौरा उसी भरोसे को रीन्यू करने का है.

8वें वेतन आयोग पर सरकार का महत्वपूर्ण बयान, पेंशनर्स और कर्मचारियों को कब से मिलेगा लाभ

नई दिल्‍ली.  8वें वेतन आयोग की सिफारिशें आने में अब सिर्फ 17 महीने का समय बचा है. इससे पहले केंद्र सरकार ने सोमवार को एक बार फिर आयोग की शर्तों को लेकर जारी कयासों पर विराम लगाते हुए स्‍पष्‍ट जानकारी दी है. वित्‍त राज्‍यमंत्री पंकज चौधरी ने संसद में 8वें वेतन आयोग को लेकर स्‍पष्‍ट जानकारी दी है. उन्‍होंने आयोग की सिफारिशों को लागू करने के लिए फंड के इंतजाम को लेकर भी जवाब दिए. संसद में चर्चा के दौरान वित्‍त राज्‍यमंत्री ने बताया कि अभी केंद्रीय कर्मचारियों की संख्‍या करीब 50.14 लाख है, जबकि 69 लाख के आसपास पेंशनर्स भी हैं. 8वां वेतन आयोग लागू होने के बाद इन सभी को फायदा दिया जाएगा. केंद्रीय मंत्री ने लिखित जवाब में 8वें वेतन आयोग के टर्म ऑफ रेफरेंस और इसके लागू होने की तारीख जैसे सवालों के भी जवाब दिए हैं. उनसे पूछा गया कि 8वें वेतन आयोग के लिए वित्‍तवर्ष 2026-27 के बजट में फंड आवंटन को लेकर क्‍या योजना है. क्‍या सरकार पेंशनधारकों और कर्मचारियों की शिकायतों का निवारण करेगी. कबसे लागू होगा 8वां वेतन आयोग जबसे 8वें वेतन आयोग की घोषणा हुई है, सभी कर्मचारियों और पेंशनधारकों का सबसे बड़ा सवाल यही था कि इसे लागू कब से किया जाएगा. संसद में केंद्रीय मंत्री ने इस सवाल का जवाब दिया है. उन्‍होंने कहा कि आयोग की सिफारिशों को लागू करने की तिथि के बारे में घोषणा बाद में की जाएगी. फिलहाल आयोग को अपने गठन के 18 महीनों के भीतर अपनी सिफारिशों हर हाल में पेश करनी होगी. 7वां वेतन आयोग 31 दिसंबर, 2025 को समात्‍प हो जाएगा, लेकिन अभी तक 8वें के लागू करने की तिथि का खुलासा नहीं हुआ है. आयोग बनने के बाद अब तक क्‍या हुआ केंद्रीय मंत्री ने बताया कि आयोग की सिफारिशों को लागू करने के लिए जरूरी फंड पर समय के साथ फैसला किया जाएगा. इसके लिए पहले से तय प्रक्रिया का भी पालन किया जाएगा. 41 दिन पहले 8वें वेतन आयोग को बनाने के बाद से अब तक कई कदम उठाए जा चुके हैं. केंद्र सरकार ने इसके टर्म ऑफ रेफरेंस को मंजूरी दे दी है, जिसका गजट नोटिफिकेशन भी 3 नवंबर, 2025 को जारी किया जा चुका है. किस आधार पर सैलरी तय करेगा आयोग पे कमीशन मूल वेतन के स्‍ट्रक्‍चर, पेंशन, अलाउंस और अन्‍य सुविधाओं को ध्‍यान में रखते हुए अपनी सिफारिशें तैयार करेगा. उसका मकसद कर्मचारियों और पेंशनर्स को उचित भुगतान दिलाना है. आयोग के सामने फिटमेंट फैक्‍टर में बदलाव करने की भी चुनौती है, जिसके आधार पर कर्मचारियों के वेतन में भी बदलाव आएगा. सरकार ने आयोग के गठन के बाद से अब तक कई कदम उठाए हैं, जो कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन पर सीधे तौर पर असर डालने वाला है.  

पश्चिम बंगाल बनाम केंद्र: मनरेगा शर्तों पर ममता बनर्जी ने जताया कड़ा विरोध

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत 100 दिन की नौकरी योजना के लिए केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित नए पात्रता मानदंड का विरोध किया। उन्होंने कूचबिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) विरोधी रैली को संबोधित करते हुए इस मामले में केंद्र की नई शर्तों का विरोध करते हुए उनकी मसौदा प्रति भी फाड़ दी। मुख्यमंत्री बनर्जी ने कहा कि कुछ दिन पहले हमें नए श्रम संहिता पर एक नोटिस मिला। केंद्र सरकार ने 100 दिन की रोजगार योजना की पात्रता के लिए नई शर्तें लगाई थीं। मैं ऐसी शर्तों से सहमत नहीं हूं। ये शर्तें अपमानजनक प्रकृति की हैं, इसलिए मैं नोटिस की एक प्रति फाड़ रही हूं। यह मेरे लिए कोई केंद्रीय नोटिस नहीं है, बल्कि यह मेरे लिए बस एक कोरा कागज है। मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि पश्चिम बंगाल सरकार को 100 दिन की नौकरी योजना के लिए केंद्र सरकार से अभी तक 51,617 करोड़ रुपए की धनराशि नहीं मिली है। उन्‍होंने कहा कि मुझे केंद्रीय कोष की परवाह नहीं है। अगर अगले साल विधानसभा चुनावों के बाद तृणमूल कांग्रेस सत्ता में वापस आती है तो हम राज्य की अपनी 100 दिन की नौकरी योजना शुरू करेंगे। साथ ही उन्होंने कूचबिहार में जिला तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व को अंदरुनी कलह और गुटबाजी से दूर रहने की चेतावनी दी। सीएम ने कहा कि युद्ध के समय सबसे महत्वपूर्ण बात एकजुट रहना है। आप सभी को आम लोगों की सेवा के लिए एकजुट होकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस एसआईआर प्रक्रिया में मतदाता सूची में अपना नाम बरकरार रखने में आम लोगों को होने वाली कठिनाइयों को दूर करने के लिए पूरे राज्य में 'क्या मैं आपकी मदद कर सकती हूं' शिविर चलाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे बूथ हर ग्राम पंचायत में स्थापित किए जाएंगे। शिविरों का एकमात्र उद्देश्य लोगों की सहायता करना होगा।

राहुल गांधी का आरोप: संघ देश की हर संस्था पर नियंत्रण चाहता है

नई दिल्ली  संसद के शीतकालीन सत्र में मंगलवार को चुनाव सुधार पर चर्चा हो रही है। नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने लोकसभा में चर्चा के दौरान आरएसएस पर देश की सभी संस्थाओं पर कब्जा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "क्या आपने कभी सोचा है कि महात्मा गांधी ने खादी पर इतना जोर क्यों दिया? उन्होंने आजादी की लड़ाई खादी के कॉन्सेप्ट के इर्द-गिर्द क्यों लड़ी? उन्होंने सिर्फ खादी ही क्यों पहनी? यह सिर्फ एक कपड़ा नहीं है, यह भारत के लोगों की भावना है।" असमिया गमछे से लेकर कांचीपुरम साड़ी तक की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि हमारा देश भी एक फैब्रिक की तरह है। देश के सारे धागे एक जैसे हैं। हमारा देश 150 करोड़ लोगों से बना है और सारे धागे एक जैसे हैं। आरएसएस सभी संस्थाओं पर कब्जा करना चाहता है। 30 जनवरी, 1948 को महात्मा गांधी की छाती में तीन गोलियां लगीं। नाथूराम गोड्से ने हमारे राष्ट्रपिता की हत्या कर दी। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि यह असहज करने वाला सच है, लेकिन इसे कहना होगा। सभी लोग जानते हैं कि कैसे भारत के विश्वविद्यालयों में वाइस चांसलरों की नियुक्ति हो रही है। इससे कोई मतलब नहीं है कि व्यक्ति की योग्यता क्या है, बस उसकी एक योग्यता है कि वह संघ से जुड़ा हो। राहुल गांधी द्वारा आरएसएस पर निशाना साधे जाने के बाद सत्ता पक्ष के सदस्यों ने सदन में हंगामा शुरू कर दिया। इसके बाद स्पीकर ओम बिरला ने राहुल गांधी से कहा कि आप चुनाव सुधार पर बोलिए, किसी संगठन का नाम मत लीजिए। वहीं, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि हम लोग नेता प्रतिपक्ष को सुनने के लिए बैठे हैं, लेकिन अगर वह विषय पर ही नहीं बोलेंगे, तो सबका समय खराब होगा। सत्ता पक्ष की ओर से विरोध जताने पर राहुल गांधी ने कहा कि मैंने कुछ भी गलत नहीं कहा है। शैक्षणिक संस्थाओं पर कब्जा किया जा रहा है। कुलपति की नियुक्ति एक संगठन से जुड़ाव के आधार पर की गई है। संस्था के लोगों ने सीबीआई-ईडी पर कब्जा किया है। चुनाव आयोग पर भी एक संस्था का कब्जा है, जो चुनाव को नियंत्रित करती है। राहुल गांधी ने आगे कहा कि मैं जो कुछ भी कह रहा हूं, उसके मेरे पास सबूत हैं। भाजपा लोकतंत्र को कमजोर करने के लिए चुनाव आयोग का इस्तेमाल कर रही है। सीजेआई को सीईसी की नियुक्ति प्रक्रिया से हटाया गया। 2023 में नियम बदलकर यह प्रावधान किया गया कि किसी भी चुनाव आयुक्त को दंडित नहीं किया जा सकता। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले ऐसा किया गया। सीसीटीवी और डेटा को लेकर भी नियम बदले गए।

परीक्षा पे चर्चा 2026: छात्रों के लिए गोल्डन चांस, रजिस्ट्रेशन ओपन—जानें पूरी प्रक्रिया

नई दिल्ली  भारत सरकार द्वारा परीक्षा पे चर्चा (Pariksha PE Charcha 2026) के 9वें एडिशन के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 1 दिसंबर से प्रारंभ कर दी गई है। छात्र, अभिभावक और शिक्षक सभी इस कार्यक्रम के लिए ऑनलाइन माध्यम से innovateindia1.mygov.in की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर पंजीकरण (PPC 2026 Registration) कर सकते हैं। इसके अलावा, पेज पर उपलब्ध डायरेक्ट लिंक की मदद से भी आसानी से आवेदन किया जा सकता है। PPC 2026 के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 11 जनवरी 2026 तय की गई है। मोबाइल नंबर या ईमेल आवश्यक परीक्षा पे चर्चा 2026 में भाग लेने के लिए पंजीकरण करते समय छात्रों को मोबाइल नंबर या ईमेल ID में से किसी एक की आवश्यकता होगी। इस वर्ष पहली बार Digilocker लॉगिन के माध्यम से रजिस्ट्रेशन करने का विकल्प भी उपलब्ध कराया गया है, जिससे प्रक्रिया और सरल हो गई है।       सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट innovateindia1.mygov.in पर जाएं।     होम पेज पर Participate Now विकल्प चुनें।     अपनी श्रेणी Student (Self Participation), Student (Participation through Teacher Login), Teacher या Parent में से किसी एक का चयन करें और दिए गए विकल्प Click to Participate पर क्लिक करें।     अब अपना पूरा नाम, मोबाइल नंबर या ईमेल आईडी दर्ज कर पंजीकरण करें।     आगे की आवश्यक जानकारी भरकर रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को पूरा कर लें। पिछले वर्ष बना गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड परीक्षा पे चर्चा देशभर में अत्यंत लोकप्रिय कार्यक्रम है। वर्ष 2025 में 3.53 करोड़ प्रतिभागियों ने PPC में रजिस्ट्रेशन कराया था, जिसे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स द्वारा मान्यता दी गई। इस बार PPC 2026 फिर से लौट आया है ताकि विद्यार्थियों में आनंददायक शिक्षा और तनाव-मुक्त परीक्षाओं को प्रोत्साहित किया जा सके। छात्रों को मिलेगा PM से सवाल पूछने का अवसर वर्ष 2025 में तीन करोड़ से अधिक लोगों ने परीक्षा पे चर्चा में भाग लिया था। इस बार भी निबंध प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को प्रधानमंत्री से सीधे सवाल पूछने का अवसर मिलेगा। साथ ही, छात्र, शिक्षक और अभिभावक पीएम के साथ सीधे संवाद कर सकेंगे। इसके अलावा दस शीर्ष “एग्जाम वॉरियर्स” को पीएम आवास में प्रधानमंत्री से मुलाकात का विशेष मौका भी मिलेगा। वर्ष 2018 से शुरू हुई यह पहल अब अपने नौवें संस्करण तक पहुंच चुकी है।

न्यायपालिका में भूचाल: 120 MPs ने जज के खिलाफ महाभियोग नोटिस दायर किया

नई दिल्ली  संसद के मौजूदा शीतकालीन सत्र में मद्रास हाई कोर्ट के एक सीटिंग जज के खिलाफ महाभियोग लाने की तैयारी पूरी हो गई है। विपक्षी इंडिया गठबंधन के करीब 120 सांसदों ने उस नोटिस पर दस्तखत कर दिए हैं। मंगलवार को तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के अगुवाई में विपक्षी दलों के सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को महाभियोग लाने की मांग करने वाला यह प्रस्ताव सौंपा। स्पीकर ओम बिरला को जब ये नोटिस सौंपा जा रहा था, तब उनके चैम्बर में DMK संसदीय दल की नेता कनिमोझी, पार्टी के नेता टीआर बालू, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा भी मौजूद थीं। 9 दिसंबर को सौंपे गए महाभियोग नोटिस के मुताबिक, मद्रास हाई कोर्ट के जज जस्टिस जीआर स्वामीनाथन को हटाने के लिए भारत के संविधान के अनुच्छेद 217 और 124 के तहत ये प्रस्ताव पेश किया गया है। जस्टिस स्वामीनाथन पर क्या आरोप? इस नोटिस में आरोप लगाया गया है कि जस्टिस स्वामीनाथन के व्यवहार ने न्यायिक निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। इसके अलावा जस्टिस स्वामीनाथन पर एक सीनियर वकील और एक खास समुदाय के वकीलों का गलत तरीके से पक्ष लेने का भी आरोप लगाया गया है और दावा किया गया कि उनके हालिया फैसले राजनीतिक विचारधारा से प्रभावित थे, जो सेक्युलर संवैधानिक सिद्धांतों के खिलाफ हैं। इस प्रस्ताव के साथ भारत के राष्ट्रपति और भारत के मुख्य न्यायाधीश को भेजे गए पत्रों की प्रतियां भी संलग्न की गईं। DMK का ये कदम क्यों? बता दें कि DMK की तरफ से यह कदम जस्टिस स्वामीनाथन के उस आदेश के बाद उठाया गया है, जिसमें पिछले दिनों उन्होंने निर्देश दिया था कि मदुरै की थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ियों की चोटी पर स्थित मंदिर में पारंपरिक कार्तिगई दीपम जलाया जाए। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि इस पारंपरिक अनुष्ठान से दरगाह या मुस्लिम समुदाय के अधिकारों का किसी तरह से कोई उल्लंघन नहीं होगा लेकिन तमिलनाडु सरकार ने कानून और व्यवस्था बिगड़ने का हवाला देते हुए हाई कोर्ट के इस आदेश को लागू करने से इनकार कर दिया था। सांप्रदायिक टकराव की स्थित पैदा की गई DMK का आरोप है कि जस्टिस स्वामीनाथन के फैसले के बाद तमिलनाडु में भाजपा द्वारा सांप्रदायिक टकराव की स्थित पैदा की गई है। गौरतलब है कि तमिलनाडु सरकार ने दरगाह के पास स्थित मंदिर में ‘कार्तिगई दीपम’ जलाने की अनुमति देने के मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख किया है। उच्चतम न्यायालय ने तिरुपरमकुंद्रम में स्थित पत्थर के एक दीप स्तंभ ‘दीपथून’ में दरगाह के निकट अरुलमिघु सुब्रमणिय स्वामी मंदिर के श्रद्धालुओं को परंपरागत ‘‘कार्तिगई दीपम’ का दीपक जलाने की अनुमति देने के मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ तमिलनाडु सरकार की याचिका पर सुनवाई के लिए पांच दिसंबर को सहमति जताई थी।   हमारे धैर्य की परीक्षा न लें… मंदिर और दरगाह विवाद में क्यों भड़क गए मीलॉर्ड? मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने चार दिसंबर को मदुरै के जिला कलेक्टर और शहर के पुलिस आयुक्त द्वारा दायर एक अंतर-न्यायालयी अपील खारिज कर दी और एकल न्यायाधीश के आदेश को बरकरार रखा, जिसमें श्रद्धालुओं को दीपथून में ‘कार्तिगई दीपम’ दीप जलाने की अनुमति दी गई थी। जब आदेश का क्रियान्वयन नहीं हुआ तो एकल न्यायाधीश ने तीन दिसंबर को एक और आदेश पारित कर श्रद्धालुओं को स्वयं दीप जलाने की अनुमति दे दी तथा केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) को उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। 

दफ्तर में कहर बनकर टूटी आग: इंडोनेशिया की 7 मंजिला इमारत में कम-से-कम 20 लोगों की जान गई

जकार्ता  मंगलवार को  इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता की एक सात मंजिला ऑफिस बिल्डिंग में भयंकर आग लग गई। अधिकारियों ने बताया कि इस हादसे में कम-से-कम 20 लोगों की मौत हो चुकी है। यह आग बिल्डिंग की पहली मंजिल से शुरू हुई, और घनी धुआं व तेज लपटों के साथ तेजी से पूरे भवन में फैल गई।  घटना उस वक्त हुई जब कई कर्मचारी भवन के अंदर मौजूद थे। आग लगने की जानकारी मिलते ही बचाव दल मौके पर पहुंचा, लेकिन कई लोग फँस गए थे।  प्रारंभिक जानकारी में मृतकों की संख्या में अंतर रहा। कुछ सूत्रों ने 17 मृत्यु की पुष्टि की है, जबकि अन्य रिपोर्टों में यह संख्या 20 बताई गई। आग बुझाने व फंसे लोगों को बचाने का काम जारी है। राहत-कार्य व शव निकलने की प्रक्रिया अभी जारी है। 

चीन की सत्ता में हलचल: घोटाले में फंसे खेल मंत्री को फांसी, तय समय पर होगी सजा पूरी

बीजिंग  चीन के पूर्व खेल मंत्री गाओ झोंगवेन को अदालत ने भ्रष्टाचार और सत्ता के घोर दुरुपयोग के आरोप में मौत की सज़ा सुनाई है। सज़ा पर दो साल की राहत दी गई है, जिसका मतलब है कि दो साल के भीतर कोई और राहत न मिलने पर सज़ा सीधे फांसी में तब्दील हो सकती है।  चीन की अदालतों के मुताबिक, गाओ झोंगवेन ने 33.4 मिलियन डॉलर (लगभग 280 करोड़ रुपये) की रिश्वत ली थी। यह रिश्वत कई कारोबारी समूहों और खेल संगठनों से ली गई थी, जिसमें पदों पर गलत नियुक्तियाँ, फंड जारी करवाना और सरकारी परियोजनाओं में पक्षपात करना शामिल था।   गाओ झोंगवेन चीन के खेल मंत्री रहने के साथ-साथ चीन की ओलंपिक कमेटी का भी प्रभारी रह चुका है। आरोप है कि इन पदों का इस्तेमाल उसने करोड़ों की उगाही और ‘फेवर’ बेचने के लिए किया। चीनी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, गाओ ने न केवल पैसा लिया बल्कि कई बार सत्ता का दुरुपयोग करते हुए अपने करीबी लोगों को बड़े पद दिलाए, अनुबंध फिक्स किए और बड़े खेल आयोजन ठेके के बदले रिश्वत ली।चीन में पिछले कुछ वर्षों से राष्ट्रपति शी जिनपिंग की तरफ से एक बड़े पैमाने पर 'एंटी-करप्शन अभियान' चलाया जा रहा है।लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह अभियान जितना भ्रष्टाचार के खिलाफ है, उतना ही राजनीतिक विरोधियों को खत्म करने का भी तरीका बन चुका है। गाओ झोंगवेन के खिलाफ कार्रवाई ने CCP के भीतर की अंदरूनी खींचतान और सत्ता संघर्ष की परतें भी खोल दी हैं।   चीन दुनिया के उन देशों में शामिल है जहाँ भ्रष्टाचार में भी मौत की सज़ा दी जाती है।लेकिन दो साल की ‘रिप्रीव’ वाली सज़ा अक्सर राजनीतिक मामलों में दी जाती है, ताकि आरोपी को नियंत्रित रखा जा सके और पूरी व्यवस्था पर सरकार की पकड़ बनी रहे। चीन ओलंपिक आयोजन और खेल प्रबंधन को अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि का अहम हिस्सा मानता है।ऐसे में, देश के पूर्व खेल मंत्री का 280 करोड़ रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा जाना चीन की ग्लोबल छवि पर बड़ा झटका है।

टुकड़े-टुकड़े होने की आशंका! विशेषज्ञ बोले—पाकिस्तान फिर चला 1971 वाले रास्ते पर

इस्लामाबाद  पाकिस्तान एक बार फिर विभाजन के मुहाने पर खड़ा दिख रहा है। 1971 में बांग्लादेश बनकर टूट चुका पाकिस्तान अब अपनी ही जमीन को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटने की तैयारी कर रहा है। इसे शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की हाइब्रिड सरकार “प्रशासनिक सुधार” बता रही है, लेकिन देश के भीतर और बाहर के विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह कदम पाकिस्तान की पहले से हिलती नींव को और कमजोर कर देगा। IPP नेता का बड़ा ऐलान- 3 हिस्सों में बांटेंगे !  पाकिस्तान के संचार मंत्री और IPP नेता अब्दुल अलीम खान ने खुलकर कहा कि “छोटे प्रांत बनना निश्चित है।” उन्होंने ऐलान किया कि सिंध, पंजाब, KP और बलूचिस्तान-हर प्रांत को तीन-तीन हिस्सों में बांटा जाएगा। उन्होंने एशिया के दूसरे देशों का हवाला देकर कहा कि छोटे राज्य बेहतर प्रशासन देते हैं। लेकिन पाकिस्तान में इसे “शासन नहीं, सत्ता को बांटने की नई साजिश” माना जा रहा है।   1971 की परछाई फिर लौटी आजादी के समय पाकिस्तान में पाँच प्रांत थे ईस्ट बंगाल, वेस्ट पंजाब, सिंध, NWFP और बलूचिस्तान। 1971 में ईस्ट बंगाल बांग्लादेश बन गया, पाकिस्तान आधा रह गया। अब फिर से पाकिस्तान में विभाजन की चर्चा है लेकिन इस बार खुद सरकार की मर्जी से। पाकिस्तान का आधा हिस्सा पहले ही संकट में है । बलूचिस्तान में अलगाववाद चरम पर, KP में TTP की हिंसा अनियंत्रित, सेना और सरकार पूरी तरह असफल, और उस बीच प्रांतों के नए टुकड़े करने की घोषणा ! एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह कदम बलूच विद्रोह और पख्तून असंतोष को और भड़काएगा। थिंक टैंक्स की कड़ी चेतावनी सिंध की सबसे बड़ी पार्टी PPP ने ऐलान कर दिया है कि वह सिंध के विभाजन के खिलाफ सड़क से संसद तक लड़ाई लड़ेगी। मुख्यमंत्री मुराद अली शाह ने कहा कि “सिंध को बांटने की कोई कोशिश बर्दाश्त नहीं होगी।”यानी शहबाज-मुनीर सरकार का यह फैसला देश के भीतर नया गृहयुद्ध भी खड़ा कर सकता है। पूर्व टॉप ब्यूरोक्रेट सैयद अख्तर अली शाह ने इसे “खतरनाक प्रयोग” बताते हुए कहा-“पाकिस्तान की समस्या प्रांत कम होना नहीं, शासन पूरी तरह फेल होना है।” उन्होंने याद दिलाया कि अय्यूब खान के ‘दो प्रांत मॉडल’ और ‘बेसिक डेमोक्रेसी’ सिस्टम ने पाकिस्तान को और बर्बाद किया था। थिंक टैंक PILDAT के चीफ अहमद बिलाल महबूब ने कहा-“नए प्रांत बनाना महंगा, जटिल और राजनीतिक रूप से विस्फोटक कदम है।” उनका कहना है कि असल समस्या है …     कमजोर संस्थाएँ     ग़ायब लोकल गवर्नेंस     खराब कानून-व्यवस्था     सेना का राजनीतिक हस्तक्षेप     इनसे निपटे बिना प्रांत बढ़ाना केवल “नई अव्यवस्था” पैदा करेगा।     पाकिस्तान की जनता पूछ रही-टूटते देश को और क्यों तोड़ रहे हो?     देश में महंगाई, आतंकवाद, बेरोजगारी, आर्थिक गिरावट अपने चरम पर है।     ऐसे में प्रांतों के टुकड़े करने की घोषणा ने जनता में गुस्सा बढ़ा दिया है। सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं-“कंगाल पाकिस्तान को और टुकड़ों में बांटने की जरूरत क्यों? पहले सरकार और सेना अपनी नाकामी सुधारें।” एक्सपर्ट्स की चेतावनी-“बंटवारा हुआ तो संभाल नहीं पाओगे।” सभी विशेषज्ञ एक आवाज़ में कह रहे हैं कि अगर पाकिस्तान ने यह फैसला लागू किया और पहले से जले हुए बलूचिस्तान व KP में नए प्रशासनिक नक्शे थोपे गए,तो अलग राष्ट्रों की मांग खुलकर फट सकती है। मुनीर-शहबाज सरकार इसे ‘सुधार’ बता रही है,लेकिन विशेषज्ञ इसे पाकिस्तान का एक और आने वाला 1971 बता रहे हैं।