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PF निकासी आसान हुई: डेबिट कार्ड और ATM से अब 75% पैसा तुरंत निकालें

 नई दिल्ली पीएफ निकासी को लेकर अक्सर लोगों की शिकायत होती है, प्रक्रिया आसान नहीं है. खुद केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया भी मानते हैं कि लोगों को PF निकासी में अभी भी काफी दिक्कतें आती हैं. वो कहते हैं कि अपने ही पैसे निकालने के लिए लोगों को 10 तरह के फॉर्म भरने पड़ते हैं. इससे लोगों को परेशानी होती हैं, लेकिन सरकार इस नियम को बदलने के लिए फैसला कर लिया है. अब एक क्लिक में PF का पैसा लोग निकाल पाएंगे. एक कार्यक्रम में मनसुख मांडविया ने कहा कि जल्द ही PF निकासी की प्रक्रिया बेहद आसान होने वाली है. उन्होंने बताया कि मार्च 2026 तक PF अकाउंट से सीधे UPI और ATM के जरिए पैसा निकालने की सुविधा शुरू की जाएगी. इस नई व्यवस्था के बाद PF निकासी की प्रक्रिया बैंक से पैसे निकालने जितनी आसान हो जाएगी. तेजी से चल रहा है काम सरकार पीएफ को UPI और एटीएम से जोड़ने की पूरी तैयारी कर चुकी है. इसकी प्रक्रिया चल रही है और मार्च से पहले कर्मचारी सीधे एटीएम से पीएफ का पैसा निकाल सकेंगे. उन्होंने कहा कि पहले ही PF खाते को बैंक खाता, आधार और UAN से जोड़ा जा चुका है. वहीं अब डेबिट कार्ड और ATM में EPFO निकासी विकल्प को जोड़ दिया जाएगा. जिससे जरूरत पड़ने पर कर्मचारी कभी भी अपने PF का 75 फीसदी पैसा निकाल सकेंगे. श्रम मंत्रालय के मुताबिक मार्च 2026 से पहले PF अकाउंट से अमाउंट सीधे UPI और ATM के जरिए पैसा निकालने की सुविधा शुरू की जाएगी. इसकी तैयारियां तेजी से चल रही हैं. इसलिए PF खाताधारकों को अब एक क्लिक में सुविधा मिलने वाली है. अब आइए जानते हैं कि ये कैसे संभव होगा?  कैसे PF का पैसा ATM से निकलेगा? सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि फिलहाल PF अकाउंट को UPI से लिंक करने का कोई विकल्प उपलब्ध नहीं है. EPFO जब यह सुविधा शुरू करेगा, तब इसके लिए ऑनलाइन प्रक्रिया दी जाएगी. अनुमान है कि यह सुविधा EPFO मेंबर पोर्टल और UMANG ऐप दोनों पर उपलब्ध होगी. PF अकाउंट को UPI से जोड़ने के लिए UAN (Universal Account Number) का एक्टिव होना सबसे जरूरी शर्त होगी. इसके साथ ही सदस्य का आधार, बैंक अकाउंट और PAN को UAN से लिंक होना अनिवार्य रहेगा. मोबाइल नंबर भी आधार और बैंक खाते से लिंक होना चाहिए, क्योंकि पूरी प्रक्रिया OTP आधारित वेरिफिकेशन पर होगी.  हालांकि प्रक्रिया को लेकर EPFO ने अभी तक कोई दिशा निर्देश जारी नहीं किया है, लेकिन अनुमान लगाया जा रहा है कि सदस्य को EPFO पोर्टल या UMANG ऐप में लॉग-इन करना होगा. संभव है कि वहां एक नया ऑप्शन दिखाई देगा, उदाहरण के लिए 'Link PF with UPI' या फिर 'PF Withdrawal via UPI'. इस विकल्प पर क्लिक करने के बाद सदस्य को अपनी UPI ID दर्ज करनी होगी. इसके बाद संबंधित UPI ऐप जैसे कि Google Pay, PhonePe, Paytm या BHIM पर एक नोटिफिकेशन आएगा, जहां से PF अकाउंट को जोड़ने की अनुमति देनी होगी. वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद PF अकाउंट सफलतापूर्वक UPI से लिंक हो जाएगा. उसके बाद ATM से सीधे में UPI के जरिये अमाउंट ट्रांसफर हो जाएगा. हालांकि EPFO ने अभी तक इस प्रोसेस पुष्टि नहीं की है.  चुटकी में निकलेगा PF अमाउंट सरकार का कहना है कि PF-UPI लिंकिंग से लोगों को बड़ी राहत मिलने वाली है, इससे PF अमाउंट आसानी से निकाल जा सकेगा और प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी हो जाएगी. इसके लिए EPFO सदस्य को अपना KYC पूरा और अपडेट करना होगा. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मौजूदा नियमों के तहत भी सदस्य अपनी EPF राशि का 75% हिस्सा तुरंत निकाल सकते हैं. बाकी पीएफ में 25 फीसदी राशि इसलिए छोड़ी गई, ताकि कर्मचारियों की नौकरी की निरंतरता बनी रहे और उन्‍हें पीएफ पर मिलने वाले ब्‍याज का लाभ मिल सके.    

नई दिल्ली में भारत टैक्सी की शुरुआत, ड्राइवरों के लिए बेहतर कमाई के अवसर

 नई दिल्ली Bharat Taxi Service Launch: नए साल की शुरुआत के साथ ही राजधानी दिल्ली में टैक्सी सर्विस सेक्टर में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है. 1 जनवरी से दिल्ली में भारत टैक्सी ऐप (Bharat Taxi) की आधिकारिक लॉन्चिंग होने जा रही है, जो यात्रियों को भरोसेमंद, सुरक्षित और किफायती कैब सेवा देने का दावा करती है. तेजी से डिजिटल हो रहे ट्रांसपोर्ट सेक्टर में यह ऐप एक देसी विकल्प के तौर पर अपनी पहचान बनाने की तैयारी में है. सरकार की पहल से शुरू हो रही यह सेवा ओला और ऊबर जैसी निजी कंपनियों के विकल्प के तौर पर देखी जा रही है. क्या है भारत टैक्सी ऐप भारत टैक्सी एक मोबाइल आधारित कैब बुकिंग प्लेटफॉर्म है, जो अन्य कैब सर्विस प्रोवाइडर्स जैसे ही स्मार्टफोन से ऑपरेट की जा सके. इसे आम भारतीय यात्रियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है. यह सेवा सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव के तहत शुरू हुई है, जिसे दुनिया का पहला ऐसा नेशनल मोबिलिटी कोऑपरेटिव बताया जा रहा है जो पूरी तरह ड्राइवरों के हक की बात करता है. यह ऐप लोकल और आउटस्टेशन दोनों तरह की यात्रा के लिए सेवाएं देगा.   सर्ज प्राइसिंग से मिलेगी राहत भारत टैक्सी सर्विस की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि यात्रियों को ओला और ऊबर की सर्ज प्राइसिंग से छुटकारा मिलेगा. पीक टाइम या खराब मौसम में मनमाना किराया बढ़ने की समस्या से अब लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है. भारत टैक्सी में किराया पहले से तय और पारदर्शी होगा.  ड्राइवरों को मिलेगा ज्यादा फायदा भारत टैक्सी ऐप ड्राइवर फ्रेंडली मॉडल पर काम करेगी. इसमें ड्राइवरों को 80 प्रतिशत से भी अधिक किराया मिलने का दावा किया गया है. इससे ड्राइवरों की आमदनी बढ़ेगी और वे बिना किसी अतिरिक्त दबाव के बेहतर सेवा दे सकेंगे. कई बार देखा गया है कि, कैब ड्राइवर प्राइवेट टैक्सी प्रोवाइडर्स की मनमानी से परेशान होते हैं. दिल्ली में मजबूत तैयारी लॉन्च से पहले ही दिल्ली में करीब 56 हजार ड्राइवरों ने भारत टैक्सी ऐप पर पंजीकरण करा लिया है. यह आंकड़ा दिखाता है कि ड्राइवर कम्यूनिटी में इस प्लेटफॉर्म को लेकर जबरदस्त उत्साह है. सरकार को उम्मीद है कि शुरुआत से ही यात्रियों को पर्याप्त वाहनों की उपलब्धता मिलेगी. ऑटो, कार और बाइक की सुविधा भारत टैक्सी ऐप पर यात्रियों को ऑटो, कार और बाइक टैक्सी तीनों की सुविधा मिलेगी. इससे कम दूरी से लेकर लंबी यात्रा तक हर जरूरत के लिए एक ही प्लेटफॉर्म उपलब्ध होगा. नए साल से दिल्ली की सड़कों पर यह देसी ऐप कितना असर दिखाता है, इस पर सभी की नजरें बनी रहेंगी. यूजर्स को क्या मिलेगा खास भारत टैक्सी ऐप में रियल टाइम ट्रैकिंग, 24×7 कस्टमर सपोर्ट, कैश और डिजिटल पेमेंट विकल्प और सेफ्टी फीचर्स जैसे कई आधुनिक विकल्प दिए जाएंगे. इस कैब सर्विस का फोकस फैमिली ट्रैवलर्स, कॉरपोरेट यूजर्स और टूरिस्ट्स पर रहेगा, ताकि हर वर्ग को बेहतर अनुभव मिल सके. ड्राइवर्स के लिए नए मौके इस ऐप के जरिए टैक्सी ड्राइवर्स को भी स्थायी कमाई का अवसर मिलेगा. कंपनी का कहना है कि ड्राइवर्स के लिए कम कमीशन, समय पर भुगतान और टेक्निकल सपोर्ट जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी. इससे ड्राइवर्स और प्लेटफॉर्म के बीच भरोसे का रिश्ता मजबूत होगा. ऐप हुआ लाइव Bharat Taxi मोबाइल ऐप फिलहाल गूगल प्ले स्टोर पर ट्रायल और फीडबैक के लिए उपलब्ध है. कोऑपरेटिव का कहना है कि ऐप का iOS वर्ज़न भी जल्द ही लॉन्च किया जाएगा. फिलहाल दिल्ली और गुजरात में के लिए इसका ट्रायल शुरू किया गया है. गूगल प्लेस्टोर पर इसका मोबाइल ऐप भारत टैक्सी ड्राइवर (Bharat Taxi) के नाम से प्रदर्शित हो रहा है. यहां ध्यान रखें कि, वही ऐप डाउनलोड करें जो सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड द्वारा जारी किया गया है.

स्कूल से दूर देश की 45.4% लड़कियां: देखें राज्यों के अनुसार आंकड़े

नई दिल्ली संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान लड़कियों की शिक्षा को लेकर एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। सरकार द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, देशभर में अब भी 45.4 प्रतिशत लड़कियां स्कूल नहीं जा रही हैं। यह स्थिति बताती है कि तमाम योजनाओं के बावजूद बालिका शिक्षा अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। महाराष्ट्र में हालात सबसे खराब राज्यवार आंकड़ों पर नजर डालें तो महाराष्ट्र की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक है, जहां 66 फीसदी लड़कियां स्कूल से बाहर हैं। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश (54.8%), मिजोरम (53.8%), जम्मू-कश्मीर (53.7%) और ओडिशा (49.5%) में भी बड़ी संख्या में लड़कियां शिक्षा से वंचित हैं। केरल सहित कुछ राज्यों का बेहतर प्रदर्शन वहीं दूसरी ओर, केरल लड़कियों की शिक्षा के मामले में अन्य राज्यों से आगे नजर आता है। यहां केवल 33.2 फीसदी लड़कियां स्कूल नहीं जातीं। मध्य प्रदेश (37.8%) भी राष्ट्रीय औसत से बेहतर स्थिति में है। हालांकि बिहार (45.7%), राजस्थान (46.2%) और उत्तर प्रदेश (47.2%) अब भी राष्ट्रीय औसत के आसपास या उससे ऊपर हैं। राज्यवार स्कूल न जाने वाली लड़कियों का प्रतिशत राष्ट्रीय औसत – 45.4% महाराष्ट्र – 66% हिमाचल प्रदेश – 54.8% मिजोरम – 53.8% जम्मू-कश्मीर – 53.7% ओडिशा – 49.5% उत्तर प्रदेश – 47.2% राजस्थान – 46.2% बिहार – 45.7% मध्य प्रदेश – 37.8% केरल – 33.2% प्री-स्कूल से 12वीं तक के आंकड़े यह डेटा प्री-स्कूल से लेकर कक्षा 12वीं तक का है और पिछले पांच वित्तीय वर्षों (FY 2022 से FY 2026) पर आधारित है। इसमें 2025 और 2026 के आंकड़े अस्थायी हैं, जिनमें आगे बदलाव संभव है। ये आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि लड़कियों की शिक्षा को लेकर अभी और गंभीर प्रयासों की जरूरत है, ताकि भविष्य में यह अंतर कम किया जा सके।

ढाका में सुरक्षा संकट: भारत ने वीजा सेवाएं रोकीं, एमईए ने बांग्लादेश से मांगा जवाब

नई दिल्ली भारत के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को भारत में बांग्लादेश के हाई कमिश्नर रियाज हमीदुल्लाह को तलब किया। विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश में बिगड़ते सुरक्षा माहौल पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने इस बात का भी जिक्र किया, जिसमें कुछ कट्टरपंथी लोगों की तरफ से बांग्लादेश में भारतीय हाई कमीशन के आसपास कुछ चिंताजनक हालात पैदा करने की बात कही गई। बांग्लादेशी मीडिया के अनुसार, बांग्लादेश के ढाका में स्थित भारतीय वीजा ऑफिस के बंद होने की जानकारी दी गई है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि बांग्लादेशी राजदूत का ध्यान खासतौर पर उन कट्टरपंथी लोगों की गतिविधियों की ओर दिलाया, जिन्होंने ढाका में भारतीय मिशन के आसपास सुरक्षा को लेकर अप्रिय स्थिति बनाने की योजना की घोषणा की है। इसके अलावा, भारत ने बांग्लादेश में हाल की कुछ घटनाओं के बारे में कट्टरपंथी लोगों द्वारा बनाई जा रही झूठी कहानी को पूरी तरह से खारिज कर दिया। एमईए ने चिंता जताई कि मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने न तो पूरी जांच की है और न ही घटनाओं के बारे में भारत के साथ कोई काम के सबूत साझा किए हैं। विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया, "भारत के बांग्लादेश के लोगों के साथ करीबी और दोस्ताना रिश्ते हैं, जो आजादी की लड़ाई से जुड़े हैं। हम बांग्लादेश में शांति और स्थिरता के पक्ष में हैं। हमने लगातार शांतिपूर्ण माहौल में स्वतंत्र, निष्पक्ष, सबको साथ लेकर चलने वाले और भरोसेमंद चुनाव कराने की मांग की है।" भारत ने यूनुस की अंतरिम सरकार से कहा कि वह अपनी कूटनीतिक जिम्मेदारियों के हिसाब से बांग्लादेश में भारतीय मिशन और पोस्ट की सुरक्षा सुनिश्चित करें। इससे पहले रविवार को, भारत ने यूनुस सरकार के दावों को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उसने पड़ोसी देश में शांतिपूर्ण माहौल में निष्पक्ष, स्वतंत्र, सबको साथ लेकर चलने वाले और भरोसेमंद चुनाव कराने का लगातार समर्थन किया है। भारत की ओर से यह टिप्पणी शेख हसीना के हालिया बयान को लेकर बांग्लादेश में भारतीय राजदूत को तलब किए जाने के बाद आई। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने कभी भी अपनी जमीन का इस्तेमाल बांग्लादेश के लोगों के हितों के खिलाफ कामों के लिए नहीं होने दिया है। भारत बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के 14 दिसंबर 2025 के प्रेस नोट में किए गए दावों को पूरी तरह से खारिज करता है। हम उम्मीद करते हैं कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार अंदरूनी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगी, जिसमें शांतिपूर्ण चुनाव कराना भी शामिल है।

आई पेरियासामी की याचिका खारिज, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मद्रास हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत

चेन्नई मद्रास हाईकोर्ट ने बुधवार को तमिलनाडु के ग्रामीण विकास मंत्री आई. पेरियासामी और उनके परिवार के सदस्यों को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कोई भी अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय एजेंसी को सुने बिना और उसका पक्ष आए बिना किसी प्रकार की अंतरिम सुरक्षा नहीं दी जा सकती। मुख्य न्यायाधीश मनींद्र मोहन श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की प्रथम खंडपीठ ने कहा कि ईडी को नोटिस जारी किए बिना और उसे जवाब दाखिल करने के लिए पर्याप्त समय दिए बिना याचिकाकर्ताओं को कोई राहत नहीं दी जा सकती। अदालत ने ईडी के विशेष लोक अभियोजक आर. सिद्धार्थन को एजेंसी की ओर से नोटिस स्वीकार करने की अनुमति दी और ईडी को निर्देश दिया कि वह इस मामले में दायर सभी रिट याचिकाओं पर 5 जनवरी 2026 तक विस्तृत जवाबी हलफनामा दाखिल करे। यह याचिकाएं मंत्री आई. पेरियासामी, उनके पुत्र आई.पी. सेंथिलकुमार और पुत्री पी. इंदिरा द्वारा दायर की गई हैं, जिनमें धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत उनके खिलाफ दर्ज प्रवर्तन केस सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) को चुनौती दी गई है। यह ईसीआईआर राज्य पुलिस द्वारा पहले दर्ज एक अनुपातहीन संपत्ति मामले के आधार पर दर्ज की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने ईसीआईआर और उससे जुड़े सभी कार्रवाई को रद्द करने की मांग करते हुए दलील दी कि मौजूदा परिस्थितियों में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत गठित एक विशेष अदालत ने पहले मंत्री को डीवीएसी द्वारा दर्ज मूल (प्रेडिकेट) अपराध से बरी कर दिया था। हालांकि, उस बरी किए जाने के आदेश को बाद में वर्ष 2025 में मद्रास हाईकोर्ट ने पलट दिया। इसके बाद पेरियासामी ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जहां से उन्हें अंतरिम राहत मिली और आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी गई। सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई अंतरिम सुरक्षा का हवाला देते हुए मंत्री और उनके परिवार ने तर्क दिया कि चूंकि ईडी की कार्यवाही मूल अपराध पर निर्भर है, इसलिए मनी लॉन्ड्रिंग की जांच आगे नहीं बढ़नी चाहिए और तत्काल राहत दी जानी चाहिए। हालांकि, हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इस स्तर पर कोई अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार करते हुए कहा कि पहले ईडी को सुना जाना आवश्यक है। मामले की अगली सुनवाई ईडी द्वारा जवाब दाखिल करने के बाद होगी।

मोबाइल चोरों पर शिकंजा: नोएडा पुलिस ने स्नैचिंग गैंग तोड़ा, करोड़ों का माल जब्त

नोएडा नोएडा के फेस-1 थाने की पुलिस ने मोबाइल चोरी और स्नैचिंग की वारदातों को अंजाम देने वाले एक शातिर अंतर्राज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से करीब दो करोड़ रुपए कीमत के 70 मोबाइल फोन, 28 आईपैड, एक टैबलेट, 265 मोबाइल फोन पार्ट्स, एक एप्पल टीवी डिवाइस और वारदात में प्रयुक्त एक स्कूटी बरामद की है। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह अब तक 500 से अधिक घटनाओं को अंजाम दे चुका है और दिल्ली-एनसीआर समेत कई जिलों में सक्रिय था।  पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बुधवार को लोकल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की मदद से सेक्टर-14 नोएडा क्षेत्र से चार आरोपी फिरोज, फरदीन, सलीम और दानिश को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार अभियुक्त दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों के निवासी हैं और लंबे समय से संगठित तरीके से मोबाइल फोन व अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की चोरी और स्नैचिंग की घटनाएं कर रहे थे। पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, बुलंदशहर, मथुरा सहित अन्य जनपदों में भीड़-भाड़ वाले स्थानों को चिह्नित करते थे। विशेष रूप से धार्मिक कार्यक्रमों, जनसभाओं और मेलों में वे आम लोगों की तरह शामिल होकर मौके का फायदा उठाते थे। आरोपियों ने बताया कि शक से बचने के लिए वे अपनी पहचान बदल लेते थे और हिंदू नामों का प्रयोग करते थे, ताकि भीड़ में किसी को उन पर संदेह न हो।  इसी दौरान वे महंगे और ट्रेंड में चल रहे आईफोन, स्मार्टफोन और टैबलेट चोरी कर लेते थे। चोरी किए गए मोबाइल फोन और उनके पार्ट्स को आरोपी 'ऑन डिमांड' सप्लाई करते थे। बाजार में जिन मॉडलों की ज्यादा मांग होती थी, उन्हीं डिवाइस को निशाना बनाकर वे चोरी करते और फिर अलग-अलग राज्यों में उनके पार्ट्स बेचकर मोटा मुनाफा कमाते थे। पुलिस के अनुसार, बरामद इलेक्ट्रॉनिक सामान की अनुमानित कीमत लगभग दो करोड़ रुपए है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, गिरफ्तार चारों अभियुक्तों के खिलाफ दिल्ली और गौतमबुद्धनगर में पहले से ही कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इनमें चोरी, स्नैचिंग और अन्य संगीन धाराओं के मामले शामिल हैं। थाना फेस-1 पुलिस का कहना है कि आरोपियों से आगे की पूछताछ की जा रही है, जिससे गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों और चोरी के नेटवर्क का भी खुलासा होने की संभावना है। 

ग्लोबल एनर्जी गेम बदलने की तैयारी: चीन ने खारे पानी से बनाया पेट्रोल, लागत सुनकर उड़ जाएंगे होश

बीजिंग  चीन ने ऊर्जा और जल संकट की दो वैश्विक समस्याओं का एक साथ समाधान पेश कर दुनिया को चौंका दिया है। शानडोंग प्रांत के रिजाओ शहर में स्थापित एक अत्याधुनिक फैक्ट्री समुद्र के खारे पानी को ग्रीन हाइड्रोजन (भविष्य का पेट्रोल) और पीने योग्य अल्ट्रा-प्योर पानी में बदल रही है। इस प्लांट की सबसे खास बात यह है कि यह पारंपरिक बिजली या ईंधन पर निर्भर नहीं है। फैक्ट्री को ऊर्जा मिलती है पास की स्टील और पेट्रोकेमिकल इकाइयों से निकलने वाली बेकार गर्मी (वेस्ट हीट) से, जिसे अब तक बेकार समझकर छोड़ दिया जाता था। यही वजह है कि इसकी उत्पादन लागत बेहद कम हो गई है। इस तकनीक को विशेषज्ञ “वन इनपुट, थ्री आउटपुट” मॉडल कह रहे हैं। इसमें इनपुट के रूप में समुद्र का खारा पानी और इंडस्ट्रियल वेस्ट हीट का इस्तेमाल होता है, जबकि आउटपुट में तीन उपयोगी चीजें मिलती हैं। पहला, हर साल लगभग 450 क्यूबिक मीटर साफ पीने योग्य पानी, जिसका इस्तेमाल घरेलू और औद्योगिक दोनों जरूरतों के लिए किया जा सकता है। दूसरा, सालाना करीब 1,92,000 क्यूबिक मीटर ग्रीन हाइड्रोजन, जो स्वच्छ ईंधन के रूप में इस्तेमाल होती है। तीसरा, करीब 350 टन खारा घोल (ब्राइन), जिसे समुद्री केमिकल्स बनाने में प्रयोग किया जाता है।   इस तरह इस फैक्ट्री में कुछ भी बेकार नहीं जाता। हर उत्पाद का दोबारा उपयोग होता है, जिससे पर्यावरण पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ता। लागत की बात करें तो समुद्र के पानी को पीने लायक बनाने में सिर्फ 2 युआन यानी लगभग 24 रुपये प्रति क्यूबिक मीटर खर्च आ रहा है। यही कारण है कि इस तकनीक को अमेरिका और सऊदी अरब जैसी उन्नत तकनीकों से भी आगे माना जा रहा है। ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन इतना है कि उससे 100 बसें लगभग 3,800 किलोमीटर तक चल सकती हैं। समुद्र से घिरे देशों के लिए यह तकनीक भविष्य में पानी की कमी और स्वच्छ ऊर्जा संकट का स्थायी समाधान बन सकती है।    

वीरता और राष्ट्रबोध की नई पहचान है ‘परमवीर दीर्घा’ : प्रधानमंत्री मोदी

नई दिल्ली राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में ‘परमवीर दीर्घा’ का उद्घाटन किया। इस दीर्घा में परमवीर चक्र से सम्मानित सभी 21 वीरों के चित्र प्रदर्शित किए गए हैं। इसको लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर खास प्रतिक्रिया दी। पीएम मोदी ने कहा कि परमवीर दीर्घा में देश के अदम्य वीरों के ये चित्र हमारे राष्ट्र रक्षकों को भावभीनी श्रद्धांजलि हैं। एक लंबे कालखंड तक, राष्ट्रपति भवन की गैलरी में ब्रिटिश काल के सैनिकों के चित्र लगे थे। अब उनके स्थान पर, देश के परमवीर विजेताओं के चित्र लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति भवन में परमवीर दीर्घा का निर्माण गुलामी की मानसिकता से निकलकर भारत को नवचेतना से जोड़ने के अभियान का एक उत्तम उदाहरण है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर 'परमवीर दीर्घा' के उद्घाटन की फोटो शेयर करते हुए लिखा, ''हे भारत के परमवीर, है नमन तुम्हें हे प्रखर वीर। ये राष्ट्र कृतज्ञ बलिदानों पर, भारत मां के सम्मानों पर। राष्ट्रपति भवन की परमवीर दीर्घा में देश के अदम्य वीरों के ये चित्र हमारे राष्ट्र रक्षकों को भावभीनी श्रद्धांजलि हैं। जिन वीरों ने अपने सर्वोच्च बलिदान से मातृभूमि की रक्षा की, जिन्होंने भारत की एकता और अखंडता के लिए अपना जीवन दिया, उनके प्रति देश ने एक और रूप में अपनी कृतज्ञता अर्पित की है। देश के परमवीरों की इस दीर्घा को, दो परमवीर चक्र विजेताओं और अन्य विजेताओं के परिवारजनों की गरिमामयी उपस्थिति में राष्ट्र को अर्पित किया जाना और भी विशेष है।'' एक अन्य पोस्ट में पीएम मोदी ने लिखा, ''एक लंबे कालखंड तक, राष्ट्रपति भवन की गैलरी में ब्रिटिश काल के सैनिकों के चित्र लगे थे। अब उनके स्थान पर, देश के परमवीर विजेताओं के चित्र लगाए गए हैं। राष्ट्रपति भवन में परमवीर दीर्घा का निर्माण गुलामी की मानसिकता से निकलकर भारत को नवचेतना से जोड़ने के अभियान का एक उत्तम उदाहरण है। कुछ साल पहले सरकार ने अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में कई द्वीपों के नाम भी परमवीर चक्र विजेताओं के नाम पर रखे हैं।'' आखिरी पोस्ट में उन्होंने लिखा, ''ये चित्र और ये दीर्घा हमारी युवा पीढ़ी के लिए भारत की शौर्य परंपरा से जुड़ने का एक प्रखर स्थल है। ये दीर्घा युवाओं को ये प्रेरणा देगी कि राष्ट्र उद्देश्य के लिए आत्मबल और संकल्प महत्वपूर्ण होते हैं। मुझे आशा है कि ये स्थान विकसित भारत की भावना का एक प्रखर तीर्थ बनेगा।'' राष्ट्रपति भवन में एक विशेष दीर्घा बनाई गई है। इस दीर्घा की विशेषता यह है कि यह स्थान देश के वीर सपूतों को समर्पित है। इस दीर्घा का उद्घाटन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया। यहां पर परमवीर चक्र विजेताओं के चित्रों को सम्मान के साथ प्रदर्शित किया गया है। इस पहल का उद्देश्य परमवीर चक्र विजेता, राष्ट्रीय नायकों के अदम्य साहस और बलिदान से देशवासियों को अवगत कराना है।

कनाडा से बड़ी खुशखबरी: नागरिकता कानून में ऐतिहासिक बदलाव, भारतवंशियों को मिलेगा फायदा

कनाडा  कनाडा ने अपने नागरिकता नियमों में एक बड़ा बदलाव किया है, जिससे विदेश में पैदा हुए या गोद लिए गए बच्चों को कनाडाई नागरिकता का मार्ग खुल गया है। 15 दिसंबर से बिल C-3 लागू हो गया है, जिससे नागरिकता के अधिकार में महत्वपूर्ण विस्तार हुआ है। यह कदम उन परिवारों के लिए विशेष रूप से उपयोगी माना जा रहा है जिनके सदस्य विदेश में रहते हैं या पैदा हुए हैं। कनाडा में बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय निवास कर रहा है, इसलिए यह नया नियम भारतीय मूल के नागरिकों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकता है, खासकर उन बच्चों के लिए जिनके माता-पिता कनाडा के नागरिक हैं लेकिन वे खुद विदेश में पैदा हुए हैं। नए नियम से क्या बदला अब कनाडाई नागरिक माता-पिता विदेश में पैदा हुए या गोद लिए बच्चों को नागरिकता दे सकते हैं, बशर्ते कि माता-पिता ने बच्चे के जन्म या गोद लेने से पहले कम से कम तीन साल (1095 दिन) कनाडा में शारीरिक रूप से निवास किया हो। यह परिवर्तन नागरिकता के प्रति देश के दृष्टिकोण को अधिक उदार और आधुनिक बनाता है। अब पहली पीढ़ी के बाहर भी नागरिकता की पात्रता का विस्तार किया गया है।   बिल C-3 क्यों जरूरी? कनाडा में 2009 में लागू “फर्स्ट-जनरेशन लिमिट” के नियम ने विदेशी जन्मे बच्चों को नागरिकता से वंचित कर दिया था, भले ही उनके माता-पिता कनाडा के नागरिक हों। यह नीति कई वर्षों से कानूनी और राजनीतिक विवाद का विषय रही है। दिसंबर 2023 में ओंटारियो सुपीरियर कोर्ट ऑफ जस्टिस ने इस सीमा के मुख्य हिस्सों को असंवैधानिक बताया था। अदालत ने कहा कि यह नियम उन नागरिक परिवारों के लिए गलत नतीजे दे रहा है जो कनाडा के बाहर बच्चे का जन्म या गोद लेने के बाद नागरिकता चाहते हैं। इसके बाद संघीय सरकार ने अपील न करने का फैसला किया और बिल C-3 को लागू कर व्यापक सुधार किया। भारतीय समुदाय पर असर कनाडा में भारतीय मूल की एक बड़ी आबादी रहती है। कई ऐसे बच्चे हैं जिनका जन्म विदेश में हुआ लेकिन उनके माता-पिता की पहचान कनाडाई नागरिक के रूप में है। इस नए नियम से वे अब नागरिकता के लिए सीधे आवेदन कर सकेंगे और उन्हें कई अधिकार मिलेंगे जो पहले प्रतिबंधित थे।

इथियोपिया में अफ्रीकी चैप्टर क्लोज, अब अरब दुनिया में भारत की सियासी पकड़ मजबूत करेंगे PM मोदी

अफ्रीका अफ्रीका में कूटनीतिक इतिहास रचने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब अरब जगत में भारत की रणनीतिक मौजूदगी को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन देशों की अपनी चार दिवसीय यात्रा के अंतिम चरण में बुधवार को इथियोपिया से ओमान के लिए रवाना हो गए। यह यात्रा भारत की अफ्रीका और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती रणनीतिक सक्रियता का अहम संकेत मानी जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी की यह इथियोपिया की पहली आधिकारिक यात्रा थी, जो ऐतिहासिक साबित हुई। इस दौरान भारत और इथियोपिया ने अपने पारंपरिक और ऐतिहासिक संबंधों को औपचारिक रूप से ‘रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक बढ़ा दिया। प्रधानमंत्री मोदी और इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली के बीच व्यापक द्विपक्षीय वार्ता हुई, जिसके बाद विभिन्न क्षेत्रों में कई अहम समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए। यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने इथियोपियाई संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित किया, जहां उन्होंने आतंकवाद, वैश्विक शांति और विकास पर भारत का स्पष्ट दृष्टिकोण रखा। इसी दौरान उन्हें इथियोपिया का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘द ग्रेट ऑनर निशान ऑफ इथियोपिया’ प्रदान किया गया। प्रधानमंत्री मोदी यह सम्मान पाने वाले पहले विदेशी नेता बने। अब प्रधानमंत्री मोदी ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक के निमंत्रण पर मस्कट पहुंचेंगे।   ओमान में वे रणनीतिक साझेदारी को और गहराई देने, व्यापार, निवेश, ऊर्जा और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा करेंगे। इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी वहां प्रवासी भारतीय समुदाय को भी संबोधित करेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह दौरा व्यापार, निवेश, ऊर्जा, रक्षा, सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, कृषि और संस्कृति सहित विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की व्यापक समीक्षा और क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श का अवसर प्रदान करेगा। यह प्रधानमंत्री मोदी की ओमान की दूसरी यात्रा होगी।