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अब फौज ही फैसला करेगी! आसिम मुनीर बने Supreme Commander, PM भी रहेंगे साइडलाइन?

इस्लामाबाद  पाकिस्तान में सेना प्रमुख आसिम मुनीर का कद एक बार फिर बढ़ गया है। जानकारी के मुताबिक बहुचर्चित 27वां संविधान विधेयक पाकिस्तान की संसद में पास हो गया है। इसके तहत सेना प्रमुख के बेतहाशा ताकत मिल गई है। सेना प्रमुख आसिम मुनीर अब तीनों सेनाओं के प्रमुख होंगे। प्रस्ताव के मुताबिक प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की अगुआई में ये सारे बदलाव लागू होंगे। इस नए कानून से सेना प्रमुख को सुपरपावर मिल जाएगी जो कि तख्तापलट को संवैधानिक मंजूरी देने के बराबर है।   इस विधेयक में संविधान के 243वें आर्टिकल में बदलाव किया गया है। यह आर्टिकल सशस्त्र बलों से जुड़ा हुआ है। इसके तहत राष्ट्रपति प्रधानमंत्री के मशविरे पर सेना प्रमुख और रक्षा बल प्रमुख की नियुक्ति करेंगे। सेना प्रमुख अब रक्षा बलों के प्रमुख भी होंगे। इसके अलावा रक्षा प्रमुख ही राष्ट्रीय सामरिक कमान के प्रमुख की नियुक्ति प्रधानमंत्री से सलाह करके करेंगे। बता दें कि आसिम मुनीर को पहले ही फील्ड मार्शल का पद दे दिया गया था। वहीं इस संविधान संशोधन विधेयक से इसे संवैधानिक मान्यता दे दी गई है। फील्ड मार्शल का पद और विशेषाधिकार आजीवन बने रहेंगे। इसके अलावा अब जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के अध्यक्ष का पद समाप्त कर दिया जाएगा। पाकिस्तान के कानून मंत्री ने बताया कि अब 27 नवंबर के बाद से सीजेसीएससी के पद पर नियुक्ति नहीं होगी। इसके अलावा इस कानून से सरकार को फील्ड मार्शल, मार्शल ऑफ एयर फोर्स और ऐडमिरल ऑफ फ्लीट के पद पर अधिकारियों के पदोन्नत करने का अधिकार भी मिल जाता है। पाकिस्तानी मीडिया का कहना है कि भारत के ऑपरेशन सिंदूर से परेशान होने के बाद पाकिस्तान ने ये बदलाव किए हैं। एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने पिछले महीने कहा था कि भारत के हमलों में अमेरिकी एफ-16 विमान समेत कम से कम 12 पाकिस्तानी सैन्य विमान नष्ट हो गए या क्षतिग्रस्त हो गए। भारत का कहना है कि मई में भारतीय सेना द्वारा विभिन्न पाकिस्तानी सैन्य ढांचों पर बमबारी के बाद पाकिस्तान ने संघर्ष समाप्त करने का अनुरोध किया था। संघर्ष के तुरंत बाद, पाकिस्तान सरकार ने सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर को ‘फील्ड मार्शल’ के पद पर पदोन्नत कर दिया, जिससे वह देश के इतिहास में इस पद पर पदोन्नत होने वाले दूसरे शीर्ष सैन्य अधिकारी बन गये थे। ॉ इसके अलावा सेना का समन्वय ठीक करने के लिए उसने चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज का पद सृजित करने की योजना बनाई थी। प्रधानमंत्री भी फील्ड मार्शल को हटा नहीं सकते बता दें कि फील्ड मार्शल का पद प्रधानमंत्री भी छीन नहीं सकते हैं। वहीं प्रधानमंत्री राष्ट्रीय सामरिक कमान के कमांडरों की नियुक्ति करेंगे जिससे पाकिस्तान के परमाणु कमान ढांचे पर सैन्य नियंत्रण स्थापित हो जाएगा। इसके अलावा फील्ड मार्शल पर महाभियोग लगाने या फिर उपाधि खत्म करने का अधिकार भी प्रधानमंत्री के पास नहीं होगा। रिटायरमेंट के बाद फील्ड मार्शल को और भी जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं।

इतिहासिक क्षण: 79 साल बाद सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल शरा पहुंचे अमेरिका

 वॉशिंगटन सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल शरा अमेरिका के दौरे पर पहुंचे हैं। यह दौरा बेहद ऐतिहासिक है क्योंकि साल 1946 के बाद पहली बार कोई सीरियाई राष्ट्रपति अमेरिका के आधिकारिक दौरे पर वॉशिंगटन पहुंचे हैं। सीरियाई राष्ट्रपति का अमेरिका दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब अमेरिका ने सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल शरा का नाम आतंकवादी सूची से एक दिन पहले ही हटाया है। सोमवार को होगी ट्रंप से मुलाकात सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल शरा वॉशिंगटन में सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करेंगे। इससे पहले जब मई में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब का दौरा किया था, उस वक्त सऊदी अरब के रियाद शहर में भी ट्रंप की अहमद अल शरा से मुलाकात हुई थी। सीरिया में अमेरिका के राजदूत टॉम बराक ने उम्मीद जताई कि अहमद अल शरा के इस अमेरिका दौरे पर सीरिया की सरकार, आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट के खिलाफ अमेरिका के नेतृत्व वाले गुट में शामिल होने के समझौते पर हस्ताक्षर कर सकती है। शरा का नाम आतंकवादी सूची से हटा मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका, सीरियाई राजधानी दमिश्क के पास एक सैन्य अड्डा बनाने की योजना बना रहा है। इस सैन्य अड्डे का मकसद मानवीय सहायता के काम में समन्वय बताया जा रहा है। अमेरिका के विदेश विभाग ने पुष्टि की है कि अहमद अल शरा को आतंकवादी सूची से हटा दिया गया है क्योंकि शरा ने सीरिया में लापता अमेरिकियों का पता लगाने और बचे हुए रसायनिक हथियारों को खत्म करने की सहमति दी है। इससे पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने भी अहमद अल शरा पर लगे प्रतिबंधों को हटा लिया था, जिसके बाद शरा ने सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा को भी संबोधित किया। ऐसा करने वाले भी शरा पहले सीरियाई राष्ट्रपति हैं। आतंकी संगठन अल कायदा से रहा है जुड़ाव अहमद अल शरा के पूर्व के संगठन हयात तहरीर अल-शाम (HTS) का खूंखार आतंकी संगठन अल-कायदा से जुड़ाव था। यही वजह थी कि अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने शरा का नाम आतंकवादी सूची में डाला हुआ था। हालांकि बाद में शरा सक्रिय राजनीति में उतरे और बीते साल बशर अल असद के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व किया। सत्ता संभालने के बाद से, शरा और सीरिया के नए नेतृत्व ने खुद को अपने उग्रवादी अतीत से दूर कर सीरियाई लोगों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने एक अधिक उदार छवि पेश करने की कोशिश की है।

इस्कॉन नाम का हक किसका? मुंबई-बेंगलुरु विवाद पर SC का बड़ा निर्णय

बेंगलुरु  बेंगलुरु इस्कॉन मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट की बेंच में मतभेद देखने को मिला है। दरअसल, इस्कॉन के मुंबई और बेंगलुरु गुटों के बीच मंदिर के नियंत्रण को लेकर लंबे समय से मुकदमा चल रहा है। एससी ने एक साल से अधिक समय तक इस पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। लेकिन, मई में पीठासीन न्यायाधीश जस्टिस एएस ओका के रिटायरमेंट से ठीक पहले बेंगलुरु शाखा के पक्ष में फैसला सुनाया गया। जस्टिस ओका और एजी मसीह की पीठ ने मई 2011 में कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया था, जिसमें बेंगलुरु मंदिर का नियंत्रण मुंबई शाखा को दिया गया था। एचसी ने अप्रैल 2009 के ट्रायल कोर्ट के उस डिक्री को रद्द कर दिया था जो बेंगलुरु गुट के पक्ष में था।  हाई कोर्ट के फैसले के 14 साल बाद और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के 6 महीने बाद अब दोनों पक्ष लगभग शुरुआती स्थिति में वापस आ गए हैं। क्योंकि जस्टिस जेके माहेश्वरी और एजी मसीह की पीठ ने 16 मई के फैसले की समीक्षा के लिए मुंबई शाखा की याचिका पर विभाजित फैसला दिया है। जस्टिस माहेश्वरी ने पाया कि मुंबई ब्रांच ने फैसले की समीक्षा के लिए मामला बनाया है। अपने आदेश में उन्होंने कहा, 'समीक्षा याचिकाओं को खुली अदालत में सूचीबद्ध करने के आवेदनों को मंजूरी दी जाती है। पक्षकारों को नोटिस जारी किया जाए।' दोनों जजों की अलग-अलग राय जस्टिस माहेश्वरी मानते हैं कि मुंबई शाखा को खुली अदालत में अपना पक्ष रखने की अनुमति मिलनी चाहिए, जिसमें फैसले में चूक की ओर इशारा है। दूसरी ओर, जस्टिस मसीह ने कहा, 'समीक्षा याचिकाओं, समीक्षा के अधीन फैसले और उसके साथ संलग्न सामग्री की सावधानीपूर्वक जांच हुई है। मैं संतुष्ट हूं कि रिकॉर्ड पर कोई स्पष्ट त्रुटि नहीं है या समीक्षा याचिकाओं में कोई मेरिट नहीं है, जो आरोपित फैसले पर फिर से विचार करने की गारंटी दे। इसलिए समीक्षा याचिकाएं खारिज की जाती हैं।' पीठ ने कहा कि मतभेदों के चलते समीक्षा याचिकाओं को सीजेआई के समक्ष निर्देशों के लिए रखा जाए और आवश्यक कार्रवाई की जाए।  

भूकंप से कांपा जापान: 6.7 तीव्रता के झटकों के बाद इवाते में खतरे की घंटी

टोक्यो जापान के उत्तर-पूर्वी इलाके में शनिवार शाम 6.7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया, जिसके बाद अधिकारियों ने इवाते प्रीफेक्चर के तटीय क्षेत्रों के लिए सुनामी की चेतावनी जारी की। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) के अनुसार, यह भूकंप शाम 5 बजे के बाद इवाते के तट से दूर समुद्र में आया। झटके इवाते और पड़ोसी मियागी प्रीफेक्चर में तेज़ी से महसूस किए गए, जिनकी तीव्रता जापान के 0 से 7 के भूकंपीय पैमाने पर 4 दर्ज की गई।  अधिकारियों ने तटीय इलाकों के लोगों से समुद्र तट से दूर रहने और ऊँचाई वाले स्थानों पर जाने की अपील की है। अभी तक किसी बड़े नुकसान या जनहानि की सूचना नहीं मिली है, लेकिन प्रशासन समुद्र के जलस्तर और आफ्टरशॉक्स (भूकंप के बाद आने वाले झटकों) पर नजर बनाए हुए है। ट्रेन सेवाओं को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है, और स्थानीय प्रशासन ने अपने आपातकालीन प्रतिक्रिया केंद्र  सक्रिय कर दिए हैं ताकि हालात का आकलन किया जा सके।  जापान, जो प्रशांत महासागर के "रिंग ऑफ फायर" क्षेत्र में स्थित है, अक्सर भूकंप और सुनामी का सामना करता है। इस भूकंप ने लोगों को 2011 के भयानक पूर्वी जापान भूकंप और सुनामी की याद दिला दी, जिसने भारी तबाही मचाई थी और फुकुशिमा परमाणु संकट को जन्म दिया था। फिलहाल, JMA इवाते के तटीय क्षेत्रों के लिए चेतावनी जारी रखते हुए भूकंप की गहराई और संभावित झटकों का विश्लेषण कर रही है।  

मौत को मात! डॉक्टरों ने कर दिखाया कमाल, महिला फिर लौटी जिंदगी में

नई दिल्ली  मरने के बाद सांसे थम जाती हैं, धड़कने रुक जाती हैं और रंगो में खून दौड़ना बंद होता है, तो शरीर धीरे-धीरे ठंडा पड़ने लगता है। लेकिन, एशिया में पहली बार दिल्ली के डॉक्टरों ने चमत्कार कर दिया है। डॉक्टरों ने 55 साल की मर चुकी महिला की रगो में फिर से खून का प्रवाह (ब्लड सर्कुलेशन) शुरू कर दिया। ऐसा महिला के अंगों को दान करने के लिए किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, मृत महिला के शरीर में फिर से ब्लड का प्रवाह द्वारका के HCMCT मणिपाल अस्पताल में किया गया। यह प्रोसीजर एशिया में अपनी तरह का पहला है, जहां अंगों को निकालने के लिए मौत के बाद ब्लड सर्कुलेशन फिर से शुरू किया गया। इस बीमारी से लड़ रही थीं गीता गीता चावला नामक महिला मोटर न्यूरॉन नामक बीमारी के कारण पैरालाइज़्ड थीं। इसलिए वह काफी समय से बिस्तर पर थीं। उन्हें 5 नवंबर को सांस लेने में काफी समस्या होने लगी, तो आनन-फानन में अस्पताल लाया गया। जैसे-जैसे उनकी हालत बिगड़ी, परिवार ने उन्हें लाइफ सपोर्ट पर न रखने का फैसला किया। अंतता उन्होंने 6 नवंबर को रात 8:43 बजे इस दुनिया को छोड़ दिया। मौत के बाद ब्लड सर्कुलेशन क्यों शुरू किया? गीता चावला की ख्वाहिश थी कि मरने के बाद उनके अंगों को दान कर दिया जाए। उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए, मेडिकल टीम ने नॉर्मोथर्मिक रीजनल परफ्यूजन (NRP) नामक एक दुर्लभ और जटिल प्रोसीजर किया। एक्स्ट्राकॉर्पोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सीजिनेटर (ECMO) का इस्तेमाल करके, डॉक्टरों ने उनके पेट के अंगों में ब्लड सर्कुलेशन को सफलतापूर्वक फिर से शुरू किया। ऐसा तब हुआ, जब उनका दिल धड़कना बंद हो गया था और ECG लाइन फ्लैट होने के पांच मिनट बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया गया था। मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिटिकल केयर मेडिसिन के चेयरमैन डॉ. श्रीकांत श्रीनिवासन ने कहा, "एशिया में यह पहली बार है कि दान के लिए अंगों को सुरक्षित रखने के लिए मौत के बाद सर्कुलेशन फिर से शुरू किया गया।" एशिया में पहली बार, दिल्ली के डॉक्टरों ने किया कमाल उन्होंने आगे कहा, "भारत में अंग दान आमतौर पर ब्रेन डेथ के बाद होता है, जब दिल अभी भी धड़क रहा होता है। सर्कुलेटरी डेथ के बाद दान (DCD) में, दिल धड़कना बंद हो जाता है, इसलिए समय बहुत महत्वपूर्ण होता है। NRP का इस्तेमाल करके, हम लिवर और किडनी को सुरक्षित रूप से निकालने और अलॉट करने के लिए काफी देर तक जीवित रख पाए।" गीता ने दी कई लोगों को नई जिंदगी प्रोसीजर के बाद, नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (NOTTO) ने अंगों को तुरंत ट्रांसप्लांटेशन के लिए अलॉट कर दिया। चावला का लिवर इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (ILBS) में 48 साल के एक व्यक्ति को ट्रांसप्लांट किया गया, जबकि उनकी किडनी मैक्स हॉस्पिटल, साकेत में 63 और 58 साल के दो अन्य पुरुष मरीजों को दी गईं। उनकी कॉर्निया और त्वचा भी दान की गई, जिससे कई मरीजों को फायदा हुआ।  

ATS का बड़ा एक्शन: हथियार सप्लाई करते तीन संदिग्ध गिरफ्तार, देश में हमले की साजिश का खुलासा

अहमदाबाद / नई दिल्ली गुजरात में आतंकी साजिश रचने के आरोप में तीन संदिग्ध लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आतंक रोधी दस्ते (ATS) ने हथियार सप्लाई करते समय तीनों संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया है। देश में आतंकी हमले की साजिश रचने के आरोप में पकड़े गए इन लोगों की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। अहमदाबाद से तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया पुलिस की तरफ से जारी बयान में कहा गया, 'गुजरात एटीएस ने अहमदाबाद से तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। ये पिछले एक साल से गुजरात एटीएस के रडार पर थे। तीनों को हथियार सप्लाई करते हुए गिरफ्तार किया गया। ये देश के विभिन्न हिस्सों में आतंकी हमले करने की योजना बना रहे थे।'

PM मोदी उत्तराखंड दौरे पर: बच्चों से लिया गुलाब, लॉन्च किए विकास प्रोजेक्ट्स

देहरादून उत्तराखंड रजत जयंती मना रहा है। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देहरादून पहुंचे। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने उनका भव्य और पारंपरिक ढोल-वाद्य यंत्रों से स्वागत किया। इस मौके पर पीएम मोदी बच्चों से मिले, उन्हें दुलार किया। बच्चों ने पीएम मोदी को गुलाब का फूल भेंट किया। पीएम मोदी ने एफआरआई में एक कार्यक्रम के दौरान बुजुर्ग और अन्य लाभार्थियों से संवाद किया। इसके बाद राज्य में 8140 करोड़ की विभिन्न परियोजनाओं का शुभारंभ और लोकार्पण किया।   उत्तराखंड की रजत जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को प्रदेश को 8,260 करोड़ रुपये की बड़ी सौगात दी। पीएम मोदी ने विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। ये परियोजनाएं पेयजल, सिंचाई, तकनीकी शिक्षा, ऊर्जा, शहरी विकास, खेल और कौशल विकास जैसे कई प्रमुख क्षेत्रों से जुड़ी हैं। पीएम मोदी ने जिन परियोजनाओं का शुभारंभ किया, उनमें देहरादून शहर के 23 जोनों में पेयजल आपूर्ति बढ़ाने के लिए अमृत योजना के तहत जलापूर्ति परियोजना, पिथौरागढ़ जिले में इलेक्ट्रिकल सबस्टेशन, सरकारी भवनों में सोलर पावर प्लांट, और नैनीताल के हल्द्वानी स्टेडियम में एस्ट्रोटर्फ हॉकी ग्राउंड शामिल हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इस मौके पर कहा कि देवभूमि उत्तराखंड आज विकास की नई ऊंचाइयां छू रहा है। उन्होंने प्रदेशवासियों को राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ की शुभकामनाएं दीं और कहा कि यह दशक उत्तराखंड के तेज विकास का दशक साबित होगा। प्रधानमंत्री उत्तराखंड राज्य गठन की रजत जयंती समारोह में शामिल होने के लिए राज्य पहुंचे हैं। समारोह में उन्होंने बच्चों से मुलाकात की, बुजुर्गों से संवाद किया और जनता से जुड़ने वाले कई भावनात्मक पल साझा किए।

भ्रष्टाचार मामले में बड़ी कार्रवाई: मेहुल चोकसी की संपत्तियां होंगी नीलाम

अहमदाबाद 23 हजार करोड़ के पीएनबी घोटाले के आरोपी मेहुल चौकसी की 13 संपत्तियों की नीलामी की प्रक्रिया जल्द ही शुरू होने वाली है। पीएमएलए अदालत ने 46 करोड़ रुपये की कंपनियों की नीलामी की इजाजत दे दी है। इनमें बोरीवली का एक फ्लैट (कीमत 2.6 करोड़ रुपये), बीकेसी में भारत डायमंड बोर्स और कार पार्किंग का स्पेस (कीमत 19.7 करोड़), गोरेगांव की 6 फैक्ट्रियां (18.7 करोड़), चांदी की ईंटें, कीमती रत्न और कंपनी की कई मशीनें शामिल हैं। विशेष जज एवी गुजराती ने कहा, अगर इन संपत्तियों के ऐसा ही पड़ा रहने दिया जाता है तो इनकी कीमत घटती ही चली जाएगी। इसलिए उन्हें तुरंत नीलाम करना जरूरी है। जज ने कहा कि लिक्विडेटर को फिर से प्रॉपर्टी का वैल्युएशन करवाने का अधिकार है। इसके बाद संपत्तियों की नीलामी की जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि लिक्विडेटर इससे प्राप्त राशि को जमा करने के लिए आईसीआईसीआई बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट कर सकता है। बता दें कि एनसीएलटी ने 7 फरवरी 2024 को लिक्विडेटर की नियुक्ति की थी। इसके बाद कोर्ट ने नीरव मोदी और चोकसी की संपत्तियों की कीमत निर्धारित करने को अनुमति दे दी थी। बता दें कि इस समय नीरव मोदी यूके की जेल में है और चोकसी बेल्जियम की जेल में है। बेल्जियम के सुप्रीम कोर्ट पहूंचा मेहुल चोकसी मेहुल चोकसी ने बेल्जियम के सुप्रीम कोर्ट में 17 अक्टूबर को एंटवर्प की अपीलीय अदालत के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध को ‘लागू करने योग्य’ करार दिया गया था। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। एंटवर्प स्थित अपीलीय अदालत के सरकारी अभियोजक ने कहा कि चोकसी ने 30 अक्टूबर को ‘कोर्ट ऑफ कैसेशन’ (उच्चतम न्यायालय) में अपील दायर की थी। महाधिवक्ता केन विटपास ने जवाब में कहा, “यह अपील पूरी तरह से कानूनी तथ्यों तक सीमित है और इसका निर्णय शीर्ष अदालत द्वारा किया जाएगा। इस प्रक्रिया के दौरान, प्रत्यर्पण की प्रक्रिया निलंबित रहेगी।” 17 अक्टूबर को एंटवर्प की अपीलीय अदालत के चार सदस्यीय अभियोग कक्ष ने जिला अदालत के प्री-ट्रायल कक्ष द्वारा 29 नवंबर 2024 को जारी आदेशों में कोई खामी नहीं पाई। अदालत ने मुंबई की विशेष अदालत द्वारा मई 2018 और जून 2021 में जारी गिरफ्तारी वारंटों को ‘लागू करने योग्य’ करार दिया, जिससे मेहुल चोकसी के प्रत्यर्पण का मार्ग प्रशस्त हो गया। अपीलीय अदालत ने फैसला सुनाया कि 13,000 करोड़ रुपये के पीएनबी घोटाले के मुख्य आरोपी भगोड़े चोकसी को भारत प्रत्यर्पित किए जाने पर निष्पक्ष सुनवाई से वंचित किए जाने या दुर्व्यवहार का सामना किए जाने का “कोई खतरा” नहीं है। सीबीआई ने अपने आरोपपत्र में आरोप लगाया है कि 13,000 करोड़ रुपये के घोटाले में अकेले चोकसी ने 6,400 करोड़ रुपये की हेराफेरी की है। घोटाले का पता चलने से कुछ दिन पहले जनवरी 2018 में एंटीगुआ और बारबुडा भाग गए चोकसी को बेल्जियम में देखा गया, जहां वह कथित तौर पर इलाज कराने के लिए पहुंचा था। भारत ने मुंबई की विशेष अदालत द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट के आधार पर 27 अगस्त, 2024 को बेल्जियम को प्रत्यर्पण अनुरोध भेजा। भारत ने चोकसी की सुरक्षा, भारत में मुकदमे के दौरान उसके सामने आने वाले आरोपों, जेल व्यवस्था, मानवाधिकारों और चिकित्सा आवश्यकताओं के संबंध में बेल्जियम को कई आश्वासन दिए हैं।

पाकिस्तान की नई रणनीति? दशकों बाद बांग्लादेश में दिखा उसका युद्धपोत

बांग्लादेश बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार हटने और मोहम्मद यूनुस की अगुआई में अंतरिम सरकार गठित होने के बाद से ही भारत के साथ संबंध तनावपूर्ण हो गए हैं। वहीं बांग्लादेश की अंतरिम सरकार का झुकाव पाकिस्तान की ओर बढ़ता ही जा रहा है। अब पाकिस्तानी सेना का एक युद्धपोत बांग्लादेश के कटगांव पोर्ट पर पहुंच गया है। 1971 के युद्ध के बाद पहली बार है जब यहां कोई पाकिस्तानी पोत पहुंचा है। जानकारी के मुताबिक पाकिस्तानी नौसेना का पीएनएससैफ (PNF SAIF) युद्धपोत चटगांव पहुंचा है। बांग्लादेशी नौसेना ने पाकिस्तानी युद्धपोत का जबरदस्त स्वागत भी किया। पाकिस्तान का युद्धपोत चटगांव पहुंचना भारत के लिए चुनौती वाली बात है। जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान किसी तरह से भारत की घेराबंदी करने का प्लान बना रहा है। 1971 के बाद से ही बांग्लादेश और पाकिस्तान के संबंध अच्छे नहीं रहे हैं लेकिन पिछले कुछ महीने में सब कुछ बदल गया है। इस समय पाकिस्तान के नौसेना प्रमुख ऐडमिरल नावीन अशरफ भी बांग्लादेश की यात्रा पर हैं। पाकिस्तान के टॉप मिलिट्री कमांडर जनरल साहिर श्मशाद मिर्जा कुछ दिन पहले ही बांग्लादेश की यात्रा पर गए थे। उन्होंने मोहम्मद यूनुस से भी मुलाकात की थी। बता दें कि बांग्लादेश में पिछले साल अगस्त में हिंसक छात्र आंदोलन हुआ था। इसके बाद शेख हसीना को देश छोड़कर भागना पड़ा था। फिलहाल वह भारत की शरण में हैं। वहीं मोहम्मद यूनुस को बांग्लादेश की अंतरिम सरकार का मुख्य सलाहकार नियुक्त किया गया था। अफगानिस्तान से खराब होते संबंधों के बीच पाकिस्तान बांग्लादेश में नई संभावनाएं तलाश कर रहा है। अफगानिस्तान की तालिबान सरकार और भारत के बीच संबंध लागातार मजबूत हो रहे हैं। वहीं अफगानिस्तान के साथ पाकिस्तान का तनाव बढ़ता ही जा रहा है। इस्तांबुल में तीसरे चरण की शांति वार्ता का भी कोई सार्थक परिणाम नहीं निकला। ऐसे में वह चाहता है कि बांग्लादेश से करीबी बढ़ाकर भारत को धौंस दिखाने की कोशिश की जाए। हालांकि बांग्लादेश में यह स्थिति कब तक रहेगी यह भी कहा नहीं जा सकता है। फरवरी में ही बांग्लादेश में आम चुनाव होने हैं। आवामी लीग ने यूनुस सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलना शुरू कर दिया है।  

गौरव का पल: ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे होने पर विश्वभर में हुआ विशेष आयोजन

वाशिंगटन  दुनिया भर में भारतीय दूतावासों ने देश के राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम' के 150 वर्ष पूरे होने पर सामूहिक गायन, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सामुदायिक समारोहों के साथ प्रवासी भारतीयों में एकता और राष्ट्रीय गौरव की भावना को प्रतिबिंबित किया। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा 1875 में रचित, वंदे मातरम को सबसे पहले उनके उपन्यास आनंदमठ में शामिल किया गया था और बाद में यह भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान एक नारा बन गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को इसकी 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में साल भर जारी रहने वाले स्मरणोत्सव का उद्घाटन किया। वाशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास ने शनिवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि सात नवंबर को भारतीय प्रवासी छात्रों द्वारा सामूहिक गायन के साथ इस मील के पत्थर को चिह्नित किया गया। ओटावा में, उच्चायुक्त दिनेश के. पटनायक ने भारतीय प्रवासी सदस्यों और उच्चायोग के अधिकारियों के साथ ‘वंदे मातरम' गायन का नेतृत्व किया। इस कार्यक्रम में ओडिसी नृत्य का प्रदर्शन भी किया गया। मिशन ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘इस अमर स्तुति का सम्मान करते हुए, हम एक आत्मविश्वासी, आत्मनिर्भर और पुनरुत्थानशील विकसित भारत 2047 के प्रति अपने संकल्प की पुष्टि करते हैं।'' दोहा में, राजदूत विपुल ने एक कार्यक्रम में राष्ट्रगीत के सामूहिक गायन का नेतृत्व किया, जिसे दूतावास ने राष्ट्र को जोड़ने वाली देशभक्ति और एकता की भावना के प्रति एक सम्मान बताया। रियाद में, राजदूत सुहेल एजाज खान ने भारतीय समुदाय के साथ ‘वंदे मातरम' गायन में भाग लिया और कहा कि उन्हें मातृभूमि की भावना को महसूस करने पर ‘‘गर्व'' हो रहा है। कैनबरा स्थित भारतीय उच्चायोग ने पर्थ में एक सामुदायिक सभा का आयोजन किया, जहां उच्चायुक्त डी. पी. सिंह ने राष्ट्रगीत गायन का नेतृत्व किया। मिशन ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ‘‘इस सामूहिक गायन में आईएएसवी त्रिवेणी पर सवार तीनों सेनाओं के अभियान ‘समुद्र प्रदक्षिणा' की सभी महिला दल की सदस्य भी शामिल हुईं-जो समुद्र के पार भारत की भावना, एकता और नारी शक्ति के प्रति एक सम्मान है।'' लंदन में, उच्चायोग के अधिकारियों ने राष्ट्रगीत गाकर इसे मातृभूमि के लिए एक सम्मान बताया, जो भारत के लिए एकता, गौरव और प्रेम को प्रेरित करती रहती है। इसी तरह नेपाल, पेरू, चिली, अर्जेंटीना, कोलंबिया, दुबई, सिंगापुर और दक्षिण अफ्रीका सहित कई अन्य देशों के भारतीय मिशन ने भी राष्ट्रगीत की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में गायन और सामुदायिक कार्यक्रमों का आयोजन किया। भारत की संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 को आधिकारिक तौर पर ‘वंदे मातरम' को राष्ट्रगीत के रूप में अपनाया था। प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को अपने भाषण में कहा कि वंदे मातरम ‘‘हमें हमारे इतिहास से जोड़ता है और हमारे भविष्य को नया साहस देता है''। इस गीत को हर युग में प्रासंगिक बताते हुए मोदी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर' का स्पष्ट संदर्भ देते हुए कहा, ‘‘जब दुश्मन ने आतंकवाद का इस्तेमाल करके हमारी सुरक्षा और सम्मान पर हमला करने का दुस्साहस किया, तो दुनिया ने देखा कि भारत दुर्गा का रूप धारण करना जानता है।''