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सऊदी अरब का बयान: परमाणु हथियारों के लिए पाकिस्तान से सौदा कर सकते हैं

रियाद सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हुए रक्षा समझौते की पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है। खासतौर पर भारत के लिहाज से यह महत्वपूर्ण है क्योंकि पाकिस्तान उसका चिरप्रतिद्वंद्वी है, लेकिन सऊदी अरब से भी अच्छे रिश्ते रहे हैं। ऐसे में दोनों के बीच हुए करार का भारत पर क्या असर होगा, यह अहम है। भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से यह बात कही भी गई है कि हम इस पर नजर रख रहे हैं। वहीं इजरायल का भी रिएक्शन आया है कि यह समझौता हमारे और भारत के चलते हुआ है। इजरायल की ओर से कहा गया है कि हम मिडल ईस्ट में एकमात्र परमाणु शक्ति संपन्न देश हैं और शायद इसीलिए सऊदी अरब ने पाकिस्तान से समझौता किया है। पाकिस्तान दुनिया का इकलौता परमाणु शक्ति से संपन्न मुस्लिम देश है। दरअसल सऊदी अरब की लंबे समय से यह इच्छा और मजबूरी रही है कि वह परमाणु हथियारों की सुरक्षा तलाशता रहा है। यही नहीं कुछ साल पहले ऐसी चर्चाएं थीं कि सऊदी अरब यूरेनियम का भंडार बढ़ा रहा है। इसका उद्देश्य परमाणु बम तैयार करना हो सकता है। लेकिन सऊदी अरब ने ऐसी चर्चाओं को खारिज कर दिया था। अमेरिकी पत्रकार बॉब वुडवार्ड ने अपनी पुस्तक 'War' में अमेरिकी सांसद लिंडसे ग्राहम और सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के बीच एक बातचीत का जिक्र किया है। इस मजेदार बातचीत में अमेरिकी सांसद पूछते हैं कि क्या सऊदी अरब की ओर से यूरेनियम का भंडार जुटाना क्या परमाणु हथियारों की ओर कदम बढ़ाना है। इस पर मोहम्मद बिन सलमान ने मजेदार जवाब देते हुए कहा था, 'हमें बम बनाने के लिए यूरेनियम की जरूरत नहीं है। हमें जरूरत होगी तो एक बम पाकिस्तान से खरीद लेंगे।' वहीं सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुल्ला अजीज बिन सलमान ने कहा था कि हम यूरेनियम का भंडार इसलिए बढ़ा रहे हैं ताकि उसका असैन्य इस्तेमाल हो सके। हमारा परमाणु हथियार जुटाने का कोई इरादा नहीं है। माना जा रहा है कि मोहम्मद बिन सलमान के उसी इरादे के तहत पाकिस्तान के साथ करार किया गया है कि परमाणु हथियारों से संपन्नता का नैरेटिव मिल सके। इजरायल के मुकाबले कतर, सऊदी अरब, मिस्र, यमन और ईरान समेत तमाम मुस्लिम देशों की यह कमजोरी रही है कि उनके पास परमाणु हथियार नहीं है। बता दें कि ईरान और इजरायल के बीच पिछले दिनों छिड़ी कुछ दिनों की जंग के दौरान भी पाकिस्तान ने कहा था कि हम जंग में उतरने को तैयार हैं। पाकिस्तान के एक नेता ने यहां तक कहा था कि हम ईरान के लिए परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।  

सुप्रीम कोर्ट का फैसला: भीमा कोरेगांव के आरोपी वरवर राव को झटका

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को भीमा कोरेगांव मामले में गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के तहत आरोपी कार्यकर्ता और कवि पी वरवर राव पर लगाई गई मेडिकल जमानत की शर्त में बदलाव करने की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया. इस शर्त के तहत, अगर उन्हें ग्रेटर मुंबई क्षेत्र छोड़ना है, तो उन्हें ट्रायल कोर्ट से पूर्व अनुमति लेनी होगी. जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर की दलीलें सुनने के बाद याचिका को खारिज कर दिया गया. ग्रोवर ने दलील दी कि राव चार साल से जमानत पर हैं, लेकिन उनकी सेहत बिगड़ती जा रही है. पहले उनकी पत्नी उनकी देखभाल करती थीं, लेकिन अब वह हैदराबाद चली गई हैं इसलिए उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है. वरिष्ठ वकील ने कहा, ‘आज भी वह चक्कर आने से गिर पड़े. राव की पेंशन 50,000 रुपए है, लेकिन उन्हें हर महीने 76,000 रुपए खर्च करने पड़ते हैं. तेलंगाना में उन्हें मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं मिलती हैं, लेकिन ग्रेटर मुंबई में उन्हें हर बार स्वास्थ्य सुविधाओं पर पैसा खर्च करना पड़ता है.’ जस्टिस माहेश्वरी ने असहमति जताते हुए कहा, ‘सरकार उनके स्वास्थ्य का ध्यान रखेगी, अन्यथा उसी कोर्ट में जाएं, हमें इसमें कोई रुचि नहीं है.’ वहीं, ग्रोवर ने यह भी बताया कि मामले की कार्यवाही सीआरपीसी की धारा 207 के चरण में है और मुकदमा जल्द पूरा होने की संभावना नहीं है. उन्होंने यह भी अनुरोध किया कि राव को बाद में आवेदन करने की अनुमति दी जाए, लेकिन कोर्ट ने आदेश में ऐसी कोई बात दर्ज करने से इनकार कर दिया. साल 2022 में मिली थी जमानत दरअसल, अगस्त 2022 में जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ ने राव को उनकी उम्र, स्वास्थ्य स्थितियों और उनके ओर से बिताई गई 2.5 साल की वास्तविक हिरासत अवधि को ध्यान में रखते हुए मेडिकल आधार पर जमानत दी थी. इसके अलावा, पीठ ने यह भी कहा था कि मामले में मुकदमा शुरू नहीं हुआ है और आरोपपत्र दायर होने के बावजूद आरोप भी तय नहीं किए गए हैं. यह आदेश दिया गया था कि राव मुंबई स्थित विशेष एनआईए अदालत की स्पष्ट अनुमति के बिना ग्रेटर मुंबई क्षेत्र से बाहर नहीं जाएंगे और किसी भी तरह से अपनी स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं करेंगे, न ही किसी गवाह से संपर्क करेंगे और न ही जांच को प्रभावित करने का प्रयास करेंगे.  

जामनगर को वन्यजीव संरक्षण हेतु सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी

अहमदाबाद  सुप्रीम कोर्ट ने जामनगर वन्यजीव संरक्षण को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जामनगर को एक बार फिर वन्यजीव संरक्षण के लिए आदर्श और सुरक्षित जगह माना गया है. विशेषज्ञों ने यह भी पुष्टि की है कि यहां का मौसम, हवा-पानी की गुणवत्ता और आसपास का प्राकृतिक वातावरण, वंतारा में रह रहे अलगअलग प्रजातियों के लिए अनुकूल है. रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि दुनिया के कई मशहूर ज़ूलॉजिकल पार्क और नेशनल पार्क भी बड़े शहरों या औद्योगिक क्षेत्रों के पास बने हुए हैं. जैसे- ब्रॉन्क्स ज़ू (न्यूयॉर्क), टियरपार्क बर्लिन (जर्मनी) और लंदन ज़ू (यूके). इसके अलावा, दक्षिण अफ्रीका का ह्लुह्लुवेइम्फोलोज़ी पार्क, स्पेन का डोनाना नेशनल पार्क और अमेरिका का एवरग्लेड्स नेशनल पार्क भी शहरी या औद्योगिक इलाकों के पास होने के बावजूद सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं. SIT की रिपोर्ट में क्या है सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि वंतारा की सुविधाएं पहले से ही एक बड़े रेज़िडेंशियल टाउनशिप, कई गांवों और घनी आबादी वाले इलाकों के पास हैं. इससे कभी कोई स्वास्थ्य या पर्यावरणीय समस्या नहीं हुई है. इसलिए यह कहना गलत है कि औद्योगिक क्षेत्र के पास होने से वंतारा असुरक्षित है. संरक्षण के क्षेत्र में एक नया मानक अनंत अंबानी के नेतृत्व में वंतारा ने पशु देखभाल और संरक्षण के क्षेत्र में एक नया मानक स्थापित किया है. उनकी सक्रिय भागीदारी और वैज्ञानिक तरीकों पर आधारित कार्य यह सुनिश्चित करता है कि वंतारा का हर प्रयास- चाहे वह संरक्षण हो या पशुओं के आवास को बेहतर बनाना सकारात्मक परिणाम लाए. इसी वजह से वंतारा आज अपने प्रयासों के लिए प्रशंसनीय उदाहरण बन गया है.  

भारत का ऑपरेशन सिंदूर: आधी रात 1.30 बजे हमले के पीछे की असली वजह सामने आई

नई दिल्ली  पहलगाम आतंकी हमले का बदला लेने के लिए भारतीय सेना ने रात के डेढ़ बजे ही ऑपरेशन सिंदूर क्यों चलाया था? इस बारे में CDS अनिल चौहान ने बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने झारखंड की राजधानी रांची में एक कार्यक्रम में बताया कि 7 मई 2025 की रात को पाकिस्तान में घुसकर आतंकवादी ठिकानों पर हमला किया था. रात 1 बजे से 1:30 बजे के बीच हमला किया था और इतनी रात को इतने बजे हमला करने के पीछे भी 2 वजहें थीं.   इन 2 वजहों से किया आधी रात को हमला उन्होंने कहा कि आधी रात के करीब अंधेरा घना होता है, उस समय सैटेलाइट इमेज कैप्चर करना और सबूत इकट्ठा करना सबसे मुश्किल काम होता है. फिर भी भारतीय सेना ने रात 1 से 1:30 बजे के बीच हमला किया, क्योंकि भारत को अपने सैटेलाइट पर भरोसा था कि वे रात को भी तस्वीरें कैप्चर कर पाएंगे. दूसरा कारण यह था कि भारतीय सेना पाकिस्तान के नागरिकों को नुकसान से बचाना चाहती थी. हालांकि हमला करने का सबसे अच्छा समय सुबह 5:30-6 बजे के बीच होता, लेकिन उस समय पहली अजान या पहली नमाज होती है. बहावलपुर और मुरीदके में उस समय लोगों की काफी चहल-पहल हो सकती थी. इसलिए रात के एक से डेढ़ बजे के बीच हमला किया.   7 मई को ही क्यों किया गया था अटैक? CDS अनिल चौहान ने बताया कि 7 मई की रात को ही पाकिस्तान में एयर स्ट्राइक करने का फैसला कई कारणों से किया गया था. एक तो उन दिनों फ्लाइट्स की आवाजाही बंद थी, दूसरा मौसम भी अनुकूल था. 7 मई के बाद बारिश होने का पूर्वानुमान था, इसलिए फैसला किया गया कि 7 मई की रात को मौसम साफ रहेगा तो उसी तारीख को ऑपरेशन सिंदूर चलाया जाए, जिसमें इस बार सेना के तीनों अंगों को जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जबकि उरी और बालाकोट एयर स्ट्राइक में सिर्फ एयरफोर्स ने जिम्मेदारी निभाई थी. सेना को बैक स्पोर्ट के लिए स्टैंड बाय मोड पर रखा गया था.

टैरिफ की धमकी पर रूस सख्त, ट्रंप को दिया दो-टूक संदेश

वाशिंगटन  अमेरिका लगातार भारत, चीन समेत सभी यूरोपीय देशों को रूस से तेल खरीदने पर एतराज जता रहा है। यहां कि ट्रंप ने जी7 देशों और यूरोप से यह तक कहा दिया कि रूस और उससे संबंध रखने वाले देशों पर कड़े प्रतिबंध लगाए जाएं। अब रूस ने पहली बार ट्रंप की धमकियों का सीधा जवाब दिया है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने एक इंटरव्यू में ट्रंप के धमकी को दरकिनार करते हुए कहा कि अमेरिका केवल धमकी देकर भारत और चीन को रूस से तेल खरीदने से नहीं रोक सकता। कहा कि दोनों देश राष्ट्रीय हित में तेल खरीदना जारी रखेंगे। दबाव या टैरिफ जैसे कदम उनका फैसला नहीं बदल सकते। ब्रिटेन में ट्रंप ने जताथा था विरोध अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप कल ब्रिटेन दौरे पर थे। इस दौरान उन्होंने एक बार फिर रूसी तेल पर आपत्ति जताई थी। ट्रंप ने रूस से भारत की तेल खरीद का विरोध करते हुए टैरिफ लगाने को सही ठहराया था। इससे पहले भी लगातार ट्रंप रूस से तेल खरीदने वाले देशों को उच्च टैरिफ लगाने की धमकी दे चुके हैं।

भूकंप के तेज झटकों से दहला रूस, रिक्टर स्केल पर 7.8 की तीव्रता दर्ज

मॉस्को  रूस के पूर्वी क्षेत्र कामचटका में शुक्रवार को 7.8 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस हुए। इस शक्तिशाली भूकंप के बाद सुनामी की चेतावनी जारी की गई है। हालांकि, भूकंप की वजह से अभी तक किसी के हताहत होने की खबर सामने नहीं आई है। भूकंप का केंद्र जमीन के 10 किलोमीटर नीचे था। मुख्य भूकंप के बाद 6 घंटे तक झटकों का सिलसिला जारी रहा। USGS के आंकड़ों के अनुसार, 30 से ज्यादा आफ्टरशॉक्स दर्ज किए गए, जिनकी तीव्रता 4.4 से 5.8 के बीच रही। इन झटकों ने स्थानीय लोगों में दहशत फैला दी और कई लोग घरों से बाहर निकलकर खुले स्थानों में चले गए।। क्षेत्रीय गवर्नर व्लादिमीर सोलोदोव ने कहा कि आपातकालीन टीमें हाई अलर्ट पर हैं। भूकंप के तेज झटकों के बाद लोगों में दहशत का माहौल है। सोशल मीडिया पर भूकंप के कई वीडियो सामने आए हैं, जिसमें फर्नीचर, कारें, लाइट्स तेजी के साथ हिलते दिखाई दे रहे हैं। आफ्टरशॉक्स के सिलसिले     12:28 AM – 7.8 (मुख्य झटका)     12:38 AM – 5.8     12:56 AM – 5.6     1:33 AM – 5.6     3:07 AM – 5.7     5:52 AM – 5.4 इसके अलावा, दर्जनों झटके 4.4 से 5.4 तीव्रता के बीच रहे। सुनामी का अलर्ट जारी भूकंप के कुछ ही मिनटों के भीतर आवासीय भवनों और सार्वजनिक सुविधाओं का निरीक्षण शुरू कर दिया गया। कई तटीय क्षेत्रों में 0.5 मीटर से 1.5 मीटर ऊंची लहरें उठने का अनुमान है। अधिकारियों ने निवासियों से तटीय इलाकों से दूर रहने की अपील की है। इससे पहले शनिवार (13 सितंबर) को भी कामचटका में 7.4 तीव्रता का भीषण भूकंप आया, जिसके बाद सुनामी की चेतावनी जारी की गई थी। 7.8 रही भूकंप की तीव्रता अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) की मानें तो भूकंप का केंद्र कामचटका प्रायद्वीप के पूर्वी तट से के पास धरती से करीब 85 किलोमीटर नीचे था. तो वहीं दूसरे भूकंप का केंद्र धरती के नीचे 30 किलोमीटर नीचे था. रूस की स्टेट जियोफिजिकल सर्विस के मुताबिक, भूकंप की तीव्रता 7.8 रही और उसके बाद करीब 5 आफ्टरशॉक लगे. भूकंप के झटकों के तुरंत बाद अमेरिकी मौसम विभाग ने सुनामी का अलर्ट जारी किया है. इसके साथ ही लोगों से समुद्री तटों से दूर रहने की अपील की है. क्यों कामचटका में आते हैं भूकंप? पेट्रोपावलोव्स्क-कमचाट्स्की दुनिया के सबसे भूकंपीय सक्रिय क्षेत्रों में आता है. यहां प्रशांत प्लेट और उत्तरी अमेरिकी प्लेट आपस में टकराती हैं, जिसके चलते अक्सर भूकंप आते रहते हैं. एक सप्ताह पहले शनिवार को इसी इलाके में 7.4 तीव्रता का भूकंप आया था. हालांकि, तब प्रशांत सुनामी चेतावनी केंद्र (PTWC) ने कहा था कि सुनामी का कोई खतरा नहीं है. लगातार खतरे में कामचटका लगातार आने वाले तेज भूकंप यह दिखाते हैं कि रूस का यह इलाका हमेशा खतरे में रहता है. यहां रहने वाले लोग हर बार नई दहशत के बीच जीते हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां लगातार नज़र बनाए हुए हैं. इससे पहले बुधवार को भी नेपाल में भूकंप आया था. तब 4 की तीव्रता वाले भूकंप से देश हिला था. भूकंप की गहराई 10 किमी थी. एक हफ्ते में तीसरी बार भूकंप के झटके रूस के कामचटका में पिछले एक महीने के भीतर कई बार भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं. बीते एक सप्ताह में ये तीसरी बार है कि जब कामचटका की धरती भूकंप के कारण कांपी है. शुक्रवार रात को यहां 2 बार झटके महसूस किए गए हैं. इससे पहले, 29 जुलाई 2025 को कामचटका तट के पास 8.8 तीव्रता का भीषण भूकंप आया था. इसे पिछले एक दशक के सबसे बड़े भूकंपों में गिना गया. इस भूकंप के बाद कई देशों में अलर्ट जारी किया गया था. भूकंप के बाद समुद्र में ऊंची-ऊंची लहरें उठने लगी थी. हालांकि मौसम विभाग के अलर्ट के बाद लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया था.

पेंशन स्कीम पर बड़ा अपडेट: कर्मचारियों को 30 सितंबर तक करना होगा विकल्प चयन, वरना छूट सकते हैं फायदे

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए पेंशन को लेकर बड़ा फैसला किया है. वित्त मंत्रालय ने सभी सरकारी कर्मचारियों से अपील की है कि वे 30 सितंबर 2025 की समयसीमा से पहले ही यूनाइटेड पेंशन स्कीम (यूपीएस) का विकल्प चुन लें, ताकि उनके आवेदन समय पर निपटाए जा सकें और भविष्य में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े. सबसे बड़ी बात यह है कि निर्धारित समयसीमा के अंदर इस विकल्प को नहीं चुनने पर सरकारी कर्मचारियों को दोबारा मौका नहीं मिलेगा. एनपीएस में शामिल कर्मचारियों के लिए यूपीएस का विकल्प सरकार ने 1 अप्रैल 2025 से नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) के अंतर्गत यूनाइटेड पेंशन स्कीम (यूपीएस) की शुरुआत की थी. इसके तहत कर्मचारियों को निश्चित पेंशन की सुविधा मिलेगी. एनपीएस में शामिल पात्र कर्मचारी और पूर्व सेवानिवृत्त कर्मचारी 30 सितंबर 2025 तक यूपीएस का विकल्प चुन सकते हैं. मंत्रालय का कहना है कि यदि कोई कर्मचारी एनपीएस में बने रहने का विकल्प चुनता है, तो वह अंतिम तिथि के बाद यूपीएस में शामिल नहीं हो सकेगा. इसीलिए सभी पात्र कर्मचारियों को सलाह दी गई है कि वे समयसीमा से पहले ही अपना निर्णय स्पष्ट करें. 30 सितंबर 2025 तक यूपीएस चुनें वित्त मंत्रालय ने बयान में कहा कि एनपीएस के तहत काम करने वाले मौजूदा कर्मचारी और रिटायर्ड लोग 30 सितंबर 2025 तक यूपीएस चुन सकते हैं. अभी तक 20 जुलाई तक करीब 31,555 सेंट्रल गवर्नमेंट कर्मचारियों ने इस स्कीम का ऑप्शन लिया है. मंत्रालय ने सलाह दी है कि देर न करें, क्योंकि अंतिम समय में भीड़ से प्रोसेस में देरी हो सकती है. अगर आपका मन बदल जाए तो 25 अगस्त को दी गई एक खास सुविधा का फायदा ले सकते हैं. मंत्रालय ने एक बार का एकतरफा स्विच ऑप्शन शुरू किया है, जिससे यूपीएस चुनने वाले कर्मचारी बाद में एनपीएस में वापस जा सकते हैं. मिलेंगे ये सभी फायदे ये स्विच सुविधा रिटायरमेंट से एक साल पहले या वॉलंटरी रिटायरमेंट से तीन महीने पहले तक इस्तेमाल कर सकते हैं. इसका मतलब है कि अगर कोई कर्मचारी यूपीएस ले ले और बाद में लगे कि एनपीएस बेहतर है, तो एक बार मौका मिलेगा. ये फैसला सोच-समझकर लेना होगा, क्योंकि ये सिर्फ एक तरफा है. यूपीएस का फायदा ये है कि रिटायरमेंट पर आधी सैलरी पेंशन के रूप में मिलेगी, जो मार्केट की चाल पर निर्भर नहीं. अगर कर्मचारी की सर्विस के दौरान मौत हो जाए या वे अक्षम हो जाएं, तो सीसीएस (पेंशन) रूल्स 2021 या सीसीएस (एक्स्ट्राऑर्डिनरी पेंशन) रूल्स 2023 के तहत लाभ मिलेगा. इसके अलावा, रिटायरमेंट ग्रेच्युटी और डेथ ग्रेच्युटी का फायदा भी यूपीएस में बढ़ाया गया है. टैक्स में भी राहत है, क्योंकि यूपीएस को इनकम टैक्स एक्ट 1961 के तहत एनपीएस जितने ही छूट मिलेंगे. ये सुविधाएं कर्मचारियों को आर्थिक सुरक्षा देती हैं. मंत्रालय का मकसद है कि हर कर्मचारी को फायदा मिले, इसलिए ऑनलाइन क्रेजी सिस्टम से आवेदन करें. अगर तकनीकी दिक्कत हो तो नोडल ऑफिस में फॉर्म जमा कर सकते हैं. लंबे समय से कर्मचारी एनपीएस से नाखुश थे, क्योंकि उसमें मार्केट रिस्क था. यूपीएस आना जैसे उनकी सुनवाई हुई. लेकिन 30 सितंबर की डेडलाइन नजदीक है, तो जल्दी फैसला लें. दिल्ली में एक कर्मचारी ने कहा, “मैं यूपीएस लेना चाहता हूं, लेकिन डर है कि समय निकल न जाए.” मंत्रालय का कहना है कि देर करने से नुकसान हो सकता है. अगर आप सेंट्रल गवर्नमेंट में हैं, तो अपने डिपार्टमेंट से बात करें और पोर्टल चेक करें. ये स्कीम परिवारों को मजबूत करेगी और रिटायरमेंट की चिंता कम करेगी. सरकार का ये कदम कर्मचारी हित में बड़ा है, लेकिन समय पर एक्शन जरूरी है. कितने कर्मचारियों ने चुना यूपीएस? सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 20 जुलाई 2025 तक करीब 31,555 केंद्र सरकार के कर्मचारी यूपीएस से जुड़ चुके हैं. मंत्रालय का मानना है कि अंतिम समय में विकल्प चुनने पर तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनों का सामना करना पड़ सकता है. इसलिए जल्द निर्णय लेना कर्मचारियों के हित में होगा.

यासीन मलिक का बड़ा खुलासा: मनमोहन सिंह ने हाफिज सईद से मिलने पर जताया आभार!

नई दिल्ली जम्मू और कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के आतंकवादी यासीन मलिक ने दिल्ली हाईकोर्ट में दिए हलफनामे में पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत मनमोहन सिंह का जिक्र किया है। उसका दावा है कि पाकिस्तान में आतंकवादियों से मुलाकात के बाद तत्कालीन पीएम सिंह ने उन्हें शुक्रिया अदा किया था। साथ ही उसने कई और बड़े नेताओं के नाम लिए हैं। मलिक टेरर फंडिंग मामले में उम्र कैद की सजा काट रहा है।  रिपोर्ट के अनुसार, 25 अप्रैल को दिए हलफनामे में मलिक ने 2006 में पाकिस्तान में हुई लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज सईद से मुलाकात के बारे में बताया गया है। उसने कहा है कि पाकिस्तान के साथ शांति स्थापित करने के लिए बैकचैनल वार्ता का हिस्सा थी और भारत के वरिष्ठ खुफिया अधिकारियों के कहने पर की गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, मलिक का कहना है कि इंटेलिजेंस ब्यूरो के तत्कालीन विशेष निदेशक वीके जोशी ने उससे दिल्ली में मुलाकात की थी। यह मुलाकात उस समय हुई थी, जब मलिक 2005 में कश्मीर में आए भूकंप के बाद पाकिस्तान जाने की तैयारी कर रहा था। कथित तौर पर जोशी ने अुरोध किया था कि वह इस मौके का इस्तेमाल पाकिस्तान के राजनीतिक नेतृत्व और आतंकवादियों के संपर्क साधने में करे, ताकि पीएम के शांति प्रयासों को समर्थन मिले। मलिक का दावा है कि उसे साफतौर पर बताया गया था कि जब तक आतंकियों को बातचीत में शामिल नहीं किया जाएगा, तब तक पाकिस्तान के साथ बातचीत से कुछ नहीं मिलेगा। आतंकी ने कहा कि इस अनुरोध पर वह सईद समेत अन्य लोगों से मिलने के लिए तैयार हुआ। हलफनामे में मलिक ने बताया है कि किस तरह सईद ने जिहादी समूहों की बैठक बुलाई थी। पीएम की प्रतिक्रिया रिपोर्ट के मुताबिक, मलिक का कहना है कि आईबी से बातचीत के बाद उसे कहा गया कि प्रधानमंत्री को सीधे ब्रीफ करे। उसने कहा कि वह उसी शाम तत्कालीन पीएम सिंह से मिला और उस समय तत्कालीन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन भी थे। मलिक का दावा है कि सिंह ने उसके प्रयासों के लिए व्यक्तिगतरूप से धन्यवाद दिया था। रिपोर्ट के अनुसार, मलिक ने कहा, 'जब मैं पाकिस्तान से दिल्ली लौटा, तो आईबी के विशेष निदेशक वीके जोशी डिब्रीफिंग का हिस्सा बने। वह मुझसे होटल में मिले और तत्काल प्रधानमंत्री को ब्रीफ करने का अनुरोध किया।' उसने कहा, 'मैं उस शाम प्रधानमंत्री से मिला, जहां एनके नारायणन मौजूद थे। मैंने उन्हें मेरी मीटिंग के बारे में बताया और संभावनाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने मेरे प्रयासों, समय, धैर्य और समर्पण के लिए मेरा धन्यवाद दिया।' हलफनामे में मलिक ने अटल बिहारी वाजपेयी, सोनिया गांधी, पी चिदंबरम, आईके गुजराल और राजेश पायलट से हुई मुलाकातों का भी जिक्र किया है।

नीरव मोदी की नई रणनीति से प्रत्यर्पण पर लग सकता है बड़ा झटका

नई दिल्ली ब्रिटेन की अदालत ने नीरव मोदी की उस अपील को स्वीकार कर लिया है, जिसमें उसने अपनी प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को फिर से खोलने की मांग रखी। इससे उसे जल्द भारत लाने की कोशिशों को झटका लग सकता है। इस फैसले के बाद भारत सरकार और जांच एजेंसियां लंदन को जवाब भेजने की तैयारी में हैं, ताकि लंबी कानूनी लड़ाई से बचा जा सके। सीनियर अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, 'नीरव मोदी ने अपनी कानूनी टीम के जरिए पिछले महीने यूके की वेस्टमिंस्टर कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी, जिसमें उसने भारत में प्रत्यर्पण के खिलाफ अपील को फिर से खोलने की मांग की। अदालत ने इसे स्वीकार कर लिया है और भारत सरकार को नोटिस भेजा गया है।' नीरव मोदी ने अपनी अर्जी में दावा किया कि अगर उसे भारत भेजा गया तो कई एजेंसियां उससे पूछताछ करेंगी और इस दौरान उसे यातना का सामना करना पड़ सकता है। अदालत ने अभी इस अर्जी पर सुनवाई की तारीख तय नहीं की है। एक अन्य सरकारी अधिकारी ने कहा, 'हम विस्तार से जवाब देने की तैयारी कर रहे हैं, जो राजनयिक चैनलों के जरिए भेजा जाएगा। हम नीरव के दावों का खंडन करेंगे। अदालत से इस अर्जी को खारिज करने की अपील करेंगे, क्योंकि प्रत्यर्पण का आदेश 2022 में ही अंतिम हो चुका था।' पंजाब नेशनल बैंक घोटाला क्या है? भारत सरकार यह बताने की योजना बना रही है कि अगर नीरव को प्रत्यर्पित किया गया, तो उसका मुकदमा पूरी तरह भारतीय कानून के अनुसार होगा। साथ ही, किसी भी एजेंसी की ओर से उससे पूछताछ नहीं की जाएगी। बता दें कि नीरव मोदी पर पंजाब नेशनल बैंक घोटाले में धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश, विश्वासघात, भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग और करार उल्लंघन के गंभीर आरोप हैं। 2011 से 2017 तक उन्होंने अपनी कंपनियों (जैसे फायरस्टार डायमंड, सोलर एक्सपोर्ट्स) के लिए पीएनबी के मुंबई ब्रांच से 1,200 से अधिक फर्जी लेटर्स ऑफ अंडरटेकिंग (LoU) हासिल किए, जो विदेशी बैंकों से कर्ज लेने के लिए इस्तेमाल हुए। बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से ये एलओयू बिना गारंटी या रिकॉर्ड जारी किए गए, जिससे बैंक को 13,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

टैरिफ गतिरोध पर उम्मीद: भारत और अमेरिका 2 महीने में कर सकते हैं समाधान

कोलकाता भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने भारतीय निर्यातकों के लिए एक आशा की किरण जगाते हुए गुरुवार को कहा कि भारत-अमेरिका टैरिफ मुद्दों का समाधान अगले 8-10 हफ्तों में निकल सकता है। भारत चैंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा आयोजित एक सत्र को संबोधित करते हुए, नागेश्वरन ने कहा कि गतिरोध को समाप्त करने के लिए दोनों सरकारों के बीच बातचीत का दौर पहले से ही चल रहा है। उन्होंने कहा, "मेरा अनुमान है कि अगले आठ से 10 हफ्तों में, हम भारतीय वस्तुओं पर अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ का समाधान देख पाएंगे।" नागेश्वरन ने संकेत दिया कि भारत-अमेरिका के बीच रेसिप्रोकल टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर लगभग 15 प्रतिशत करने के लिए भी बातचीत चल रही है। अमेरिका की ओर से भारत पर रूसी तेल खरीदने के कारण अतिरिक्त 25 प्रतिशत का टैरिफ लागू है। इस प्रकार अमेरिका में आने वाली भारतीय वस्तुओं पर कुल 50 प्रतिशत लागू हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच प्रधानमंत्री मोदी के 75वें जन्मदिन पर हुई बातचीत के बारे में पूछे गए एक सवाल पर, नागेश्वरन ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि व्यापार गतिरोध जल्द ही सुलझ जाएगा। उन्होंने कार्यक्रम के साइडलाइन में न्यूज एजेंसी आईएएनएस से कहा, "मुझे लगता है कि बातचीत चल रही है और जैसा कि मैंने पहले कहा था, मुझे उम्मीद है कि यह जल्द ही सुलझ जाएगा।" इस बीच, भारत और अमेरिका ने पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार समझौते (बीटीए) को जल्द से जल्द संपन्न करने के प्रयासों को तेज करने का फैसला किया है। भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौता वार्ता के मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच के नेतृत्व में संयुक्त राज्य अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय के अधिकारियों का एक दल इस सप्ताह भारत पहुंचा। उन्होंने वाणिज्य विभाग के विशेष सचिव और मुख्य वार्ताकार राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में भारतीय अधिकारियों की एक टीम के साथ भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते सहित भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर चर्चा की। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, "भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार के स्थायी महत्व को स्वीकार करते हुए, व्यापार समझौते के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा सकारात्मक और दूरदर्शी रही।" वाणिज्य मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, व्यापार संबंधी चर्चाएं कई स्तरों पर चल रही हैं। व्यापार संबंधी मुद्दों पर दोनों पक्षों की मानसिकता सकारात्मक है।