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GST रेट कट का बड़ा ऐलान कल, रोजमर्रा की चीजें और इलेक्ट्रॉनिक्स हो सकते हैं सस्ते

नई दिल्ली देश में जीएसटी यानी गुड्स एंड सर्विस टैक्स में सुधार को लेकर तैयारियां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बीते 15 अगस्त को लाल किले से किए गए ऐलान के बाद से ही तेज हैं, अब आज से जीएसटी काउंसिल की बैठक शुरू हो रही है और दो दिवसीय इस बैठक में जीएसटी रेट्स में बदलाव से लेकर चार की जगह दो टैक्स स्लैब को लेकर अंतिम मुहर लगेगी. जीएसटी रिफॉर्म के जरिए सरकार का लक्ष्य दरअसल, टैक्स स्ट्रक्चर को आसान बनाना और उपभोक्ताओं को सीधा फायदा पहुंचाना है. उम्मीद है कि नए बदलाव के बाद रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले दूध-पनीर से लेकर टीवी-एसी और कार-बाइक तक की कीमतें कम हो सकती हैं.  जीएसटी सुधारों पर क्या बोलीं वित्त मंत्री?  बता दें कि देश में तमाम अलग-अलग टैक्स को खत्म करते हुए जीएसटी 1 जुलाई 2017 को लागू किया गया था. हालांकि, विपक्ष इस गुड्स एंड सर्विस टैक्स को हमेशा से ही 'गब्बर सिंह टैक्स' कहकर सरकार पर निशाना साधती रही है, लेकिन केंद्र सरकार इसे आर्थिक सुधार की दिशा में उठाया गया अपना बड़ा कदम करार देती है. अब इसे और आसान बनाने की तैयारी के तहत इसमें शामिल टैक्स स्लैब की संख्या को घटाने और तमाम रेट्स को युक्तिसंगत बनाने के लिए आज से तमाम प्रस्तावों पर मंथन शुरू हो रहा है. बैठक शुरू होने से पहले मंगलवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जीएसटी सुधारों को लेकर बड़ा बयान दिया था और कहा कि इसका लक्ष्‍य अर्थव्‍यवस्‍था को पूरी तरह से खोलना और पारदर्शिता लाना है, जिससे छोटे उद्योगों की बड़ी मदद होगी. चार स्लैब नहीं, अब रहेंगे सिर्फ दो केंद्र सरकार ने जीएसटी के तहत आने वाले चार टैक्स स्लैब (5%, 12%, 18%, और 28%)  को कम करके 12% और 28% टैक्स को हटाने की की तैयारी की है. मतलब सिर्फ 5% और 18% वाले जीएसटी स्लैब बचेंगे. पीएम नरेंद्र मोदी के ऐलान के बाद हुई मंत्री समूह (GoM) की बैठक में भी 12% और 28% स्लैब को खत्म करने के प्रपोजल को मंजूरी दी जा चुकी है. प्रधानमंत्री ने इस जीएसटी सुधार को देशवासियों के लिए दिवाली गिफ्ट के तौर पर संबोधित किया है. हालांकि, सरकार द्वारा किए जाने वाले जीएसटी रेट्स में इन बदलाव से रेवेन्यू का करीब 40,000 करोड़ के नुकसान का अनुमान जताया गया है, लेकिन ये देश के आम आदमी के लिए बड़ी राहत भरे सुधार साबित होंगे.   क्या-क्या चीजें हो सकती हैं सस्ती?  जीएसटी रिफॉर्म से जुड़े प्रस्ताव लागू होते हैं, तो फिर रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले तमाम सामान सस्ते हो जाएंगे, जिनमें दूध-पनीर, से लेकर नमकीन, साबुन, तेल, कपड़े शामिल हैं, इसके साथ ही स्लैब चेंज होने पर जूते, TV, AC, मोबाइल और कार-बाइक्स के दाम में भी बड़ी कमी देखने को मिल सकती है. प्रस्ताव के तहत जिन सामानों पर जीएसटी स्लैब को 12 फीसदी से कम करते 5 फीसदी के दायरे में लाने की तैयारी यानी इन्हें सस्ता करने का प्लान है, उनमें पैकेज्ड फूड्स जैसे: नमकीन (भुजिया), चिप्स, पास्ता, नूडल्स, जैम, Ketchup, पैकेज्ड जूस, कंडेंस्ड मिल्क, घी, मक्खन, चीज और दूध से बने बेवरेजेस हैं.  जीएसटी की बैठक में  जीरो जीएसटी स्लैब के दायरे में भी सरकार द्वारा इजाफा करने की उम्मीद जताई जा रही है और ऐसे में इस लिस्ट में कई रोजमर्रा के जरूरी सामानों को शामिल किया जा सकता है, जो फिलहाल 5% और 18% जीएसटी के दायरे में आते हैं. बीते दिनों आई बिजनेस टुडे की एक रिपोर्ट की मानें, तो इन सामानों में खासतौर पर फूड प्रोडक्ट शामिल होंगे, जिनमें यूएचटी दूध, प्री-पैकेज्ड पनीर, पिज्जा ब्रेड और रोटी को Zero GST स्लैब में लाया जा सकता है. इसके अलावा पराठा भी शामिल हो सकता है, जिस पर 18% जीएसटी लागू है. कोको बेस्ड चॉकलेट, फ्लेक्स, पेस्ट्री से लेकर आइसक्रीम तक पर लागू जीएसटी स्लैब में बदलाव किया जा सकता है और ये 18% से कम करते हुए 5% हो सकता है.  GST Reforms में क्या-क्या बदलेगा? GST Reforms में होने वाले बदलावों को अगर कम शब्दों में बताए तो जीएसटी के तहत चार स्लैब कम होकर दो स्लैब रह जाएंगे। इसकी वजह से कई चीजों पर टैक्स कम हो जाएगा। ये टैक्स 10 फीसदी तक घट सकता है। वहीं कुछ वस्तु ऐसे भी होने वाले हैं, जिनमें कोई टैक्स नहीं देना होगा। अब उन वस्तुओं के बारे में बात करते हैं, जिनमें शून्य टैक्स लग सकता है। इसका मतलब है कि इन वस्तुओं के खरीद पर जल्द कोई टैक्स नहीं देना पड़ेगा। GST Rate Cut किन वस्तुओं पर नहीं है कोई टैक्स? मीडिया रिपोर्ट के अनुसार GST Reforms के बाद रोजमर्रा इस्तेमाल होने वाली जरूरी वस्तुओं पर शून्य टैक्स हो जाएगा। देश में बहुत जल्द जीएसटी के तहत चार टैक्स स्लैब की जगह अब दो टैक्स स्लैब ही रहने वाले हैं। अब 5% और 12% के दो टैक्स स्लैब होंगे। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो जरूरी वस्तुएं जैसे पनीर, पिज्जा ब्रेड, खाखरा, चपाती और रोटी जैसी खाद्य वस्तुओं पर कोई टैक्स नहीं लगेगा या फिर 5 फीसदी टैक्स लगाया जा सकता है। ऐसे ही स्टेशनरी, चिकित्सा उपकरण और दवाइयों पर कोई टैक्स नहीं लिया जाएगा या फिर 5 फीसदी टैक्स लिया जा सकता है। किस पर कितना टैक्स, क्या-क्या सस्ता? मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जीएसटी टैक्स स्लैब में कुछ इस तरह से बदलाव हो सकता है-     12 फीसदी टैक्स स्लैब वाले 99 फीसदी प्रोडक्ट 5 फीसदी वाली कैटेगरी आ जाएंगे।     28 फीसदी टैक्स स्लैब में आने वाली वस्तु 18 फीसदी टैक्स स्लैब में शामिल हो जाएंगे। इस तरह से 10 फीसदी तक टैक्स कम हो जाएगा। वहीं लग्जरी और हानिकारक वस्तुओं पर 40 फीसदी टैक्स लगेगा। इसकी साथ ही पेट्रोलियम और सोने और हीरों जैसी वस्तु पर पहले जैसे ही टैक्स लगेगा। हालांकि सरकार की ओर से इसकी पुष्टि नहीं हुई है। शिक्षा से जुड़े सामान भी हो सकते हैं जीएसटी फ्री   सरकार के पास शिक्षा से जुड़ी तमाम चीजों को भी जीएसटी से फ्री करने का भी प्रस्ताव है. काउंसिल की बैठक में  मानचित्र, वॉटर सर्वे चार्ट, एटलस, दीवार मानचित्रों, ग्लोब, मुद्रित शैक्षिक चार्ट, पेंसिल-शार्पनर के साथ ही प्रैक्टिस बुक, ग्राफ बुक और लैबोरेटरी नोटबुक को जीएसटी से छूट मिल सकती है, … Read more

सेमीकंडक्टर में भारत की बड़ी छलांग, 2047 से पहले बन सकता है ग्लोबल लीडर

नई दिल्ली भारत तेजी से घरेलू स्तर पर सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का निर्माण कर रहा है और मंगलवार को सेमीकॉन इंडिया 2025 में इंडस्ट्री लीडर्स ने कहा कि देश 2047 से पहले दुनिया का सेमीकंडक्टर पावरहाउस बन सकता है। सेमीकॉन इंडिया के साइडलाइन में समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए इंडस्ट्री लीडर्स ने कहा कि भारत की मजबूत प्रतिभा, सहायक नीतियां और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां इस परिवर्तन को आगे बढ़ाने वाले प्रमुख कारक हैं। एसईएमआई (सेमीकंडक्टर इक्विपमेंट एंड मटेरियल्स इंटरनेशनल) के सीईओ और प्रेसिडेंट ने कहा कि भारत का सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तेज वृद्धि के रास्ते पर है। उन्होंने आईएएनएस से कहा, "अगर भारत की मौजूदा रफ्तार जारी रहती है, तो देश 2047 तक सेमीकंडक्टर का पावरहाउस बना सकता है।" चिप निर्माण में वैश्विक परस्पर निर्भरता के महत्व पर जोर देते हुए, मनोचा ने कहा कि भारत को वैल्यू चेन में अपना सही स्थान खोजना होगा, जिसकी शुरुआत असेंबली और परीक्षण से होगी, जबकि आने वाले वर्षों में बड़े वेफर फैब आने की उम्मीद है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण "भारत की सबसे छोटी चिप सबसे बड़ा बदलाव लाएगी" का भी समर्थन किया और बताया कि सेमीकंडक्टर अब आधुनिक जीवन का आधार हैं। मीडियाटेक इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर अंकु जैन ने कहा कि सेमीकॉन इंडिया 2025 देश के लिए एक मील का पत्थर है। इससे सेमीकंडक्टर क्षेत्र में देश को घरेलू स्तर पर क्षमताएं विकसित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, "भारत में घरेलू स्तर पर बनी चिप्स 2025 के अंत तक बाजार में आ जाएंगी और 1.60 लाख करोड़ रुपए की वैल्यू के 10 फेब्रिकेशन प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दे दी गई है। सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री विकसित करके भारत केवल एक इंडस्ट्री का निर्माण नहीं कर रहा, बल्कि अरबों लोगों तक टेक्नोलॉजी को पहुंचा रहा है।" जैन ने कहा कि भारत एक तेजी से बढ़ता हुआ बाजार है। अधिक रिसर्च एंड डेवलपमेंट टैलेंट का विशाल पूल, सपोर्टिव इकोसिस्टम, देश को मीडियाटेक के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार बनाते हैं। गति शक्ति विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मनोज चौधरी ने कहा कि भारत अभी सेमीकंडक्टर निर्माण के शुरुआती चरण में है, लेकिन प्रगति तेजी से हो रही है। उन्होंने कहा, "अगले 10-20 वर्षों में, भारत वैश्विक स्तर पर अपनी एक मजबूत पहचान बनाएगा। दुनिया की 20 प्रतिशत डिजाइन टैलेंट पहले से ही यहां मौजूद हैं और डीएलआई जैसी योजनाओं से मिलने वाले समर्थन के साथ, स्वदेशी चिप डिजाइन और निर्माण को काफी बढ़ावा मिलेगा।" एमर्सन के कंट्री हेड और डायरेक्टर शीतेंद्र भट्टाचार्य ने कहा कि सरकार सही नीति बनाकर इंडस्ट्री को सपोर्ट कर रही है और स्थानीय कंपनियां इनोवेशन पर फोकस कर रही है। मुझे लगता है कि अगले 10 वर्षों में देश इनोवेशन में काफी आगे बढ़ सकता है। इससे आत्मनिर्भरता में मदद मिलेगी। उन्होंने आगे कहा कि देश के पास एक बड़ा बाजार है। हर इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद में सेमीकंडक्टर का उपयोग होता है। इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद हर व्यक्ति की जरूरत है ऐसे में आने वाले समय में सेमीकंडक्टर सेक्टर देश की जीडीपी में बढ़ा योगदान देगा। कायन्स सेमीकॉन प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ रघु पैनिकर ने कहा कि यह इवेंट बहुत बड़ा मौका है। इससे उत्पादकों को इंडस्ट्री के लोगों से मिलने और अपना प्रोडक्ट दिखाने का अवसर मिलता है, जिससे विकास के नए अवसर खुलते हैं। उन्होंने आगे कहा कि देश में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का विकसित करने पर सरकार का फोकस होना बहुत अच्छा संकेत है, क्योंकि आज के समय में सीलिंग फैन से लेकर कार और रेलवे आदि में सेमीकंडक्टर का उपयोग हो रहा है। ऐसे में अगर इनका उत्पादन स्थानीय स्तर पर होता है तो प्रोडक्ट्स की लागत में कमी आएगी। डेल्टा इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया के बिजनेस हेड- इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन एसबीपी डॉ. संजीव श्रीवास्तव ने बताया कि आज के समय में हर इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट में सेमीकंडक्टर का उपयोग किया जा रहा है। भारत भी एक बड़ा बाजार है। ऐसे में यह इंडस्ट्री 2047 तक विकसित भारत बनाने में काफी योगदान देगी। 

रेलवे की बड़ी खुशखबरी, जल्द शुरू होगी वंदे भारत की स्लीपर सर्विस

नई दिल्ली  भारतीय रेलवे रेलयात्रियों को जल्द ही एक खास तोहफा देने जा रहा है। जानकारी के मुताबिक रेलवे इसी महीने देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन शुरू कर सकता है। हाल ही में आई एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। रेल से सफर करने वाले यात्री काफी समय से पहले वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में यह उनके एक बड़ी खुशखबरी है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक वंदे भारत ट्रेनों की तरह स्लीपर ट्रेनों के कोच को भी यात्रियों के आराम का ख्याल रखते हुए तैयार किया गया है। वहीं नवीनतम तकनीक पर ध्यान केंद्रित करते हुए, वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों को लंबी और मध्यम दूरी की यात्राओं के लिए तैयार किया गया है। इसमें कई खास फीचर्स भी होंगे, जो अब तक किसी ट्रेन में देखने को नहीं मिले हैं। वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की खासियतें वंदे भारत स्लीपर ट्रेन अधिकतम 180 किमी प्रति घंटे की गति से दौड़ने में सक्षम होगी। वहीं इसमें कई वर्ल्ड क्लास फैसिलिटी भी होंगी। इनमें यूएसबी चार्जिंग सुविधा के साथ, पब्लिक अकाउंसमेंट सिस्टम और इनसाइड डिस्प्ले पैनल, सीसीटीवी कैमरे और मॉड्यूलर पैंट्री शामिल हैं। वहीं दिव्यांग यात्रियों के लिए खास बर्थ और शौचालय की भी सुविधा होगी। इसके अलावा प्रथम श्रेणी एसी कोच में गर्म पानी से शॉवर की सुविधा भी मिलेगी। रेल मंत्री ने क्या बताया? पिछले महीने गुजरात के भावनगर में एक कार्यक्रम में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की थी कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन जल्द ही शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा था, "वंदे भारत स्लीपर बहुत जल्द, सितंबर में आ रही है।" इससे पहले 25 जुलाई, 2025 को राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में रेल मंत्री ने बताया था कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का पहला रेक चालू होने वाला है। वैष्णव ने कहा था, "वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट का पहला प्रोटोटाइप पहले ही तैयार हो चुका है। परीक्षणों और उससे प्राप्त अनुभव के आधार पर वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का पहला रेक जेल ही शुरू होने वाला है।" हालांकि इन ट्रेनों के लॉन्च की तारीख अभी फाइनल नहीं हो पाई है। वहीं रूट को लेकर जानकारी भी सामने नहीं आई है। मार्ग पर अंतिम निर्णय रेलवे बोर्ड द्वारा लिया जाएगा।  

डोनाल्ड ट्रंप को दिखाई हकीकत! जर्मनी बोला- भारत के बिना अधूरी है दुनिया

बेंगलुरु ऐसे वक्त में जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत पर टैरिफ ठोक रहे हैं, तो ठीक उसी वक्त जर्मनी ने दुनिया को दिखा दिया है कि भारत की ताकत और अहमियत को नज़रअंदाज़ करना असंभव है. जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वाडेफुल बेंगलुरु पहुंचे, जिससे भारत के साथ उनके दो दिवसीय आधिकारिक दौरे की शुरुआत हुई. विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार उनका यह दौरा 2 से 3 सितंबर तक चलेगा. भारत रवाना होने से पहले ही वाडेफुल ने भारत को ‘हिन्द-प्रशांत में एक अहम साझेदार’ बताया और कहा कि दोनों देशों के रिश्ते राजनीति, अर्थव्यवस्था और संस्कृति सभी स्तरों पर बेहद करीबी हैं. उन्होंने कहा, ‘सुरक्षा सहयोग से लेकर नवाचार (Innovation), प्रौद्योगिकी और कुशल श्रमिकों की भर्ती तक… हमारी रणनीतिक साझेदारी के विस्तार की बड़ी संभावनाएं हैं.’ जर्मन विदेश मंत्री ने बताई भारत आने की वजह वाडेफुल ने बेंगलुरु से अपने कार्यक्रम की शुरुआत की, जहां वे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का दौरा करेंगे. इसके बाद वे दिल्ली जाएंगे, जहां 3 सितंबर को वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात करेंगे. उन्होंने भारत की वैश्विक भूमिका पर जोर देते हुए कहा, ‘भारत की आवाज़, जो दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश और सबसे बड़ा लोकतंत्र है, इंडो-पैसिफिक के रणनीतिक क्षेत्र से कहीं आगे तक सुनी जाती है. इसी कारण मैं यहां वार्ता के लिए आ रहा हूं.’ जर्मन मंत्री ने यह भी कहा कि भारत और जर्मनी साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर खड़े हैं और आज की भूराजनीतिक चुनौतियों के दौर में दोनों देशों को मिलकर नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बचाना होगा. यूरोप में भारत का सबसे करीबी साझेदार जर्मनी यह दौरा ऐसे समय पर हो रहा है जब जर्मनी इंडो-पैसिफिक में आर्थिक और सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने, तकनीकी साझेदारी बढ़ाने और भारत से कुशल श्रमिकों की भर्ती पर जोर दे रहा है. विदेश मंत्रालय के मुताबिक, जर्मनी यूरोप में भारत का सबसे करीबी साझेदार है. दोनों देशों के रिश्ते 1951 से हैं और 2021 में उन्होंने 70 साल पूरे किए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर ओलाफ शोल्ज़ पिछले दो वर्षों में छह बार मिल चुके हैं, जो इस रिश्ते की गहराई को दर्शाता है. साफ है कि जब अमेरिका भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, जर्मनी जैसे यूरोपीय दिग्गज देश दुनिया को यह संदेश दे रहे हैं कि ‘भारत वैश्विक व्यवस्था के लिए अनिवार्य है और दिल्ली की ताकत को कोई नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता.’

Su-57 अब भारत में होगा मैन्युफैक्चर, अमेरिकी F-35 की डील पर मंडराया खतरा

नई दिल्ली चीन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्‍ट्रपत‍ि व्‍लाद‍िमीर पुत‍िन की मुलाकात देख अमेर‍िका परेशान हो ही रहा था क‍ि डोनाल्‍ड ट्रंप की नींदें उड़ाने वाली एक और खबर आ गई. एक रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस अपने पांचवीं पीढ़ी के सबसे एडवांस्ड लड़ाकू विमान सुखोई Su-57 को भारत में बनाने की योजना पर गंभीरता से विचार कर रहा है. यह कदम न केवल दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करेगा बल्कि अमेरिका के F-35 लड़ाकू विमान को भारत में बेचने की कोशिशों पर भी सीधा असर डालेगा. डोनाल्‍ड ट्रंप भारत को F-35 फाइटर जेट बेचा चाहते थे, उसी के ल‍िए जंग लड़ रहे थे, लेक‍िन अगर रूस ये फैसला ले लेता है तो उनके सपने चकनाचूर हो जाएंगे. भारतीय वायुसेना लंबे समय से पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की जरूरत पर जोर देती रही है. सूत्रों के मुताबिक, भारत को फिलहाल कम से कम दो से तीन स्क्वॉड्रन एडवांस्ड फाइटर जेट्स की आवश्यकता है. इस रेस में एक ओर है रूस का Su-57 और दूसरी तरफ है अमेरिका का F-35.रूस ने साफ संदेश दिया है कि वह न केवल भारत को ये विमान बेचना चाहता है, बल्कि इन्हें यहीं भारत में बनाने के लिए तैयार है. इस परियोजना में हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) अहम भूमिका निभा सकती है, जो पहले से ही नासिक में Su-30 MKI का निर्माण करती है. निवेश और लागत पर मंथन रूसी एजेंसियां इस वक्त इस बात का आकलन कर रही हैं कि भारत में Su-57 का उत्पादन करने के लिए कितनी बड़ी निवेश राशि की जरूरत होगी. अगर यह प्रोजेक्ट शुरू होता है, तो इसका फायदा दोहरा होगा. भारत को दुनिया के सबसे आधुनिक लड़ाकू विमान मिलेंगे. इन विमानों की लागत भी कम हो जाएगी, क्योंकि निर्माण यहीं पर होगा. भारत में पहले से कई फैक्ट्रियां हैं जो रूस के बनाए सैन्य उपकरण तैयार करती हैं. इन्हें Su-57 प्रोडक्शन के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है. अमेरिका की टेंशन: F-35 पर ग्रहण ये खबर ऐसे वक्त आई है जब अमेरिका और भारत के बीच ट्रेड वॉर जैसी स्थिति बनी हुई है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में भारत पर कई सेक्टरों में 50% तक का टैरिफ और रूसी तेल आयात का हवाला देते हुए अतिरिक्त 25% शुल्क लगाया है. अमेरिका लगातार भारत पर दबाव डाल रहा है कि वह F-35 खरीदे. लेकिन अगर भारत और रूस मिलकर Su-57 का निर्माण करने लगते हैं, तो यह ट्रंप की योजना पर पानी फेर देगा. यह साफ संकेत होगा कि भारत अपनी रक्षा ज़रूरतों में रूस के साथ गहरी साझेदारी रखता है. S-400, S-500 और अब Su-57 भारत ने हाल के वर्षों में रूस से S-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदा है और अब उसने S-500 में भी रुचि दिखाई है. रूस चाहता है कि इसके साथ ही भारत Su-57 को भी अपनी वायुसेना का हिस्सा बनाए. दिलचस्प बात यह है कि भारत पहले भी रूस के फिफ्थ जेनरेशन फाइटर एयरक्राफ्ट (FGFA) प्रोग्राम का हिस्सा रह चुका है. हालांकि, तकनीकी और वित्तीय मतभेदों के कारण भारत ने इस प्रोजेक्ट से दूरी बना ली थी. लेकिन मौजूदा वैश्विक हालात और अमेरिका-भारत तनाव ने एक बार फिर इस प्रोजेक्ट को ज़िंदा कर दिया है. भारत का अपना फाइटर प्लान रूस के साथ यह संभावित डील ऐसे समय में चर्चा में है जब भारत खुद भी अपना स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान बनाने की तैयारी कर रहा है. इस विमान का पहला टेस्ट फ्लाइट 2028 तक होने की उम्मीद है और इसे 2035 तक वायुसेना में शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है. इसका मतलब है कि अगले 10 साल भारत के लिए बेहद अहम हैं. तब तक उसे या तो किसी बड़े साझेदार की मदद से फिफ्थ जेनरेशन जेट्स की ज़रूरत पूरी करनी होगी या फिर वायुसेना में बड़ी कमी का सामना करना पड़ेगा. भारत के लिए बड़ा मौका     अगर Su-57 का उत्पादन भारत में होता है तो इसके कई फायदे होंगे.     भारत को मिलेंगे अत्याधुनिक स्टेल्थ फाइटर जेट्स.     रक्षा निर्माण क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होंगे.     भारत रूस के साथ रक्षा साझेदारी को और गहरा करेगा.     अमेरिका के दबाव और शर्तों से बचकर अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखेगा.  

इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट लागू, अवैध घुसपैठियों पर सख्ती

नई दिल्ली भारत में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों और इमीग्रेशन मामलों को नियंत्रित करने के लिए बनाया गया इमीग्रेशन एंड फॉरेनर्स ऐक्ट, 2025 1 सितंबर से लागू हो गया है. गृह मंत्रालय ने सोमवार को इसका नोटिफिकेशन जारी किया. यह बिल संसद के बजट सत्र के दौरान पारित हुआ था और 4 अप्रैल 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इसे मंज़ूरी दी थी. अब इसे एक कानून के रूप में लागू कर दिया गया है. गृह मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव नितेश कुमार व्यास द्वारा जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है, "केंद्र सरकार इमीग्रेशन एंड फॉरेनर्स ऐक्ट, 2025 (13 ऑफ 2025) की धारा 1 की उपधारा (2) में प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए 1 सितंबर 2025 को लागू होने की तिथि घोषित करती है." इस ऐक्ट के तहत भारत में प्रवेश करने, ठहरने या बाहर जाने के लिए नकली पासपोर्ट या वीजा का इस्तेमाल करने (यानी जालसाजी करने) वालों को अब 7 साल तक की जेल और अधिकतम 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है. न्यूनतम सजा 2 साल और न्यूनतम जुर्माना 1 लाख रुपये तय किया गया है. अगर कोई विदेशी नागरिक बिना वैध पासपोर्ट या ट्रैवल डॉक्यूमेंट, जैसे बिना वीजा के भारत में प्रवेश करता है, तो उसे 5 साल तक की जेल या 5 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों दंड मिल सकते हैं. ब्यूरो ऑफ इमीग्रेशन को नए अधिकार इस ऐक्ट ने ब्यूरो ऑफ़ इमीग्रेशन को और मज़बूत बनाया है. अब यह एजेंसी अवैध विदेशी नागरिकों को तुरंत डिपोर्ट कर सकेगी और राज्यों के साथ सीधा कोऑर्डिनेशन करेगी. इसी के साथ, होटल, यूनिवर्सिटी, अन्य एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन, हॉस्पिटल और नर्सिंग होम को विदेशी नागरिकों से जुड़ी जानकारी समय-समय पर देना अनिवार्य कर दिया गया है. किसी भी संस्थान में अवैध विदेशी नागरिकों की आवाजाही पाए जाने पर उसका रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया जाएगा. एयरलाइंस और शिप कंपनियों पर भी सख्ती सभी इंटरनेशनल एयरलाइंस और शिप कंपनियों को भारत पहुंचने पर अपने पैसेंजर और क्रू का पूरा मैनिफेस्ट और एडवांस इन्फॉर्मेशन सिविल अथॉरिटी या इमीग्रेशन ऑफिसर को देना होगा. नया कानून लागू होने के बाद पुराने क़ानून को समाप्त कर दिया गया है. यह नया ऐक्ट विदेशी नागरिकों और इमीग्रेशन से जुड़े सभी मामलों को एक ही कानून के तहत लाता है. अलग-अलग चार कानून को किया गया समाप्त इससे पहले तक अलग-अलग चार कानून लागू थे, जिसमें पासपोर्ट (एंट्री इंटू इंडिया) ऐक्ट, 1920; रजिस्ट्रेशन ऑफ़ फॉरेनर्स ऐक्ट, 1939; फॉरेनर्स ऐक्ट, 1946 और इमीग्रेशन (कैरियर्स लाइबिलिटी) ऐक्ट, 2000 शामिल थे. अब ये सभी कानून समाप्त कर दिए गए हैं. गृह मंत्रालय का मानना है कि इस कानून से भारत में राष्ट्रीय सुरक्षा और इमीग्रेशन व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकेगा, साथ ही उन विदेशी नागरिकों पर सख्ती होगी जो नकली पासपोर्ट या वीज़ा की आड़ में देश में रह रहे थे.

गुजरात की प्राचीन धरती पर मिशन मंगलयान-2 की तैयारी शुरू

अहमदाबाद  कांटेदार झाड़ियां, कठोर रेगिस्तानी इलाका, चंद लोगों की आबादी, न खेती न पानी… फिर भी गुजरात का यह गांव आज मंगलमय है. राज्य के कच्छ जिले में भुज से लगभग 100 किमी दूर स्थित है यह गांव. इसका नाम है मटानोमाध. यह गांव खेती या बसावट के लिए अनुपयुक्त है. लेकिन, अब इसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) गुलजार करने वाली है. अब आप सोच रहे होंगे कि इस गांव में ऐसा क्या खास है जो इसरो की नजर पड़ी है. दरअसल, गांव की मिट्टी का मंगल ग्रह से सीधा कनेक्शन है. इसी कारण इसरो अब इस गांव को मंगलयान-2 मिशन का संभावित टेस्ट बेड बनने जा रहा है. दरअसल, यहां 2016 में खोजे गए जारोसाइट नामक खनिज की उम्र को हाल ही में 5.5 करोड़ वर्ष (पेलियोसीन काल) पुराना साबित किया गया है. यह मंगल पर मिले इसी खनिज से पूरी तरह मिलता-जुलता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज पृथ्वी और मंगल के भूवैज्ञानिक इतिहास को जोड़ती है और इसरो को लाल ग्रह की सतह, खनिज विज्ञान तथा जैव रसायन का अध्ययन करने का धरत पर ब्लूप्रिंट देगी. अहमदाबाद के स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर (एसएसी), सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय (एसपीपीयू) और लखनऊ के बिरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पेलियोसाइंसेज के शोधकर्ताओं की टीम ने जर्नल ऑफ द जियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया में पिछले महीने प्रकाशित अध्ययन में इसकी पुष्टि की. लीड रिसर्चर आदित्य धरैया ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया- हमारी खोज न केवल पृथ्वी के भूवैज्ञानिक अतीत को मंगल से जोड़ती है, बल्कि एस्ट्रोबायोलॉजी (ग्रहों पर जीवन, उसके उद्गम और विकास का अध्ययन), खनिज अन्वेषण और भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए एक स्थलीय ब्लूप्रिंट प्रदान करती है. रिसर्चर आदित्य धरैया अध्ययन के समय एसपीपीयू के जियोलॉजी डिपार्टमेंट में थे. मंगलयान-2 के लिए क्रांतिकारी यह खोज मंगलयान-2 के लिए क्रांतिकारी हो सकती है, जो 2026 में लॉन्च होने की योजना है और इसमें रोवर, हेलीकॉप्टर, स्काई क्रेन तथा सुपरसोनिक पैराशूट शामिल होंगे. जारोसाइट एक पीला, लोहे से भरपूर सल्फेट खनिज है, जो पृथ्वी पर ऑक्सीजन, लोहा, सल्फर और पोटैशियम युक्त खनिजों के पानी की मौजूदगी में प्रतिक्रिया से बनता है. मंगल पर इसका पता 2004 में नासा के ऑपरचुनिटी रोवर ने लगाया था, जो मंगल पर प्राचीन काल में पानी की मजबूत मौजूदगी का साक्ष्य था. मटानोमाध में यह खनिज क्ले में बारीक कणों के रूप में मिला, जो पानी मिलाने पर फैल जाता है. लैब टेस्ट में वैज्ञानिकों ने पाया कि यह मिश्रण मंगल की सतह पर पाए जाने वाले सल्फेट्स और क्लेस से काफी मिलता है. धरैया ने कहा कि कच्छ में लाखों वर्ष पहले ज्वालामुखी गतिविधि प्रमुख थी. सल्फर युक्त ज्वालामुखी राख समुद्री जल से मिलकर जारोसाइट बना. यह दुर्लभ है, क्योंकि पृथ्वी पर यह आमतौर पर अवसादी चट्टानों में नहीं मिलता. यह साइट मंगल के लिए फील्ड-एनालॉग मिशनों का आदर्श स्थान बन सकती है, जहां रोवर की गति, उपकरण टेस्टिंग, ड्रिलिंग और भू-रसायन प्रयोग किए जा सकेंगे. वैज्ञानिकों का कहना है कि जारोसाइट जैसे सल्फेट्स में जैविक अणु और जीवन समर्थक तत्व फंस सकते हैं, इसलिए मटानोमाध के सैंपल्स मंगल की प्राचीन रसायनिक क्रियाओं और जीवन की संभावना को समझने में मदद करेंगे. वैश्विक स्तर पर जारोसाइट मैक्सिको, कनाडा, जापान, स्पेन और अमेरिका के यूटा-कैलिफोर्निया में मिला है, लेकिन मटानोमाध की दुर्गमता इसे विशेष बनाती है. 2016 में एसएसी की टीम ने कच्छ में इसे पहली बार रिपोर्ट किया, जबकि केरल के वरकाला क्लिफ्स पर भी पाया गया, लेकिन वह पर्यटन स्थल होने के कारण शोध के लिए पूरी तरह उपयुक्त नहीं है. भारत में यह इकलौती साइट नहीं है भारत में मटानोमाध ही एक मात्र साइट नहीं है. इसरो का हिमालयन आउटपोस्ट फॉर प्लैनेटरी एक्सप्लोरेशन (होप) मिशन लद्दाख के हाई-एल्टीट्यूड गांव में मंगल और चंद्रमा की स्थितियों का सिमुलेशन कर रहा है. अगस्त में त्सो कार वैली (4500 मीटर ऊंचाई) में दो क्रू मेंबर्स ने 10 दिनों तक मंगल हेबिटेट के मॉडल में रहकर परीक्षण किया, जहां ऑक्सीजन कम, हवा पतली और तापमान शून्य से नीचे है. लद्दाख पर्यावरणीय परीक्षण के लिए, जबकि मटानोमाध भूविज्ञान और खनिज संरचना के लिए आदर्श है. मंगलयान-2 में चार पेलोड्स- मार्स ऑर्बिट डस्ट एक्सपेरिमेंट (MODEX), रेडियो ऑकल्टेशन, एनर्जेटिक आयन स्पेक्ट्रोमीटर और लैंगमुइर प्रोब होंगे. यह LVM3 रॉकेट से लॉन्च होगा और एयरोब्रेकिंग तकनीक से ऑर्बिट को कम करेगा. मॉम ने 74 मिलियन डॉलर की अपेक्षाकृत बहुत कम लागत में पहली कोशिश में सफलता पाई थी. इसने भारत को एशिया का पहला मंगल ऑर्बिटर बनाने वाला देश बनाया. अब मंगलयान-2 रोवर-हेलीकॉप्टर कॉम्बो के साथ जीवन की खोज करेगा.

पाकिस्तानी नेताओं की चीन में गुप्त बैठक, पीएम शहबाज और जनरल मुनीर शामिल

बीजिंग  चीन में पाकिस्तानी नेताओं का जमावड़ा लगा हुआ है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ तो एससीओ समिट में हिस्सा लेने पहुंचे ही थे। पाकिस्तान आर्मी के चीफ असीम मुनीर भी वहां पहुंच चुके हैं। जब मंगलवार को पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिले तो वहां पर असीम मुनीर भी मौजूद थे। इतना ही नहीं, इस दौरान पाकिस्तान के डिप्टी पीएम इशाक डार भी वहां मौजूद थे। यह मुलाकात एससीओ सम्मेलन खत्म होने ठीक अगले दिन हुई है। गौरतलब है कि इस सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी चीन गए थे। एससीओ समिट में पहलगाम आतंकी हमले और आतंकवाद को लेकर एक संयुक्त वक्तव्य भी जारी हुआ था। यह भारतीय लिहाज से काफी अहम था, क्योंकि इसमें पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र हुआ। चीनी सेना की परेड में लेंगे हिस्सा असीम मुनीर पाकिस्तान के सबसे ताकतवर लोगों में शुमार हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद मुनीर का प्रमोशन कर दिया गया था। उन्हें फील्ड मार्शल का पद दिया गया है। मुनीर का दावा था कि ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान ने पूरा जवाब दिया था। वह उस पाकिस्तानी टीम का हिस्सा थे, जिसने तियानजिन में एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लिया था। अब वह बुधवार को द्वितीय विश्व युद्ध में जापान के खिलाफ चीन की जीत की 80वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में चीनी सेना की एक भव्य परेड में शामिल होंगे। सेना प्रमुख के तौर पर दूसरी यात्रा मुनीर के शरीफ़ के साथ उस परेड को देखने जाने की संभावना है, जिसमें चीनी सेना हवाई, जमीनी, इलेक्ट्रॉनिक और मिसाइल प्रणालियों सहित सभी प्रकार के अपने सबसे आधुनिक हथियारों का प्रदर्शन करने की योजना बना रही है। ये हथियार प्रणालियां पाकिस्तानी सेना के लिए काफ़ी मायने रखती हैं, क्योंकि उसके 80 प्रतिशत से ज़्यादा हथियार चीन से ही आते हैं। सेना प्रमुख के रूप में यह उनकी दूसरी चीन यात्रा है। फील्ड मार्शल के रूप में पदभार संभालने के बाद, जुलाई में चीन की अपनी पहली यात्रा के दौरान, मुनीर ने उपराष्ट्रपति हान झेंग से मुलाकात की थी। लेकिन तब वह राष्ट्रपति शी जिनपिंग से नहीं मिले थे। बता दें कि इससे पहले असीम मुनीर अमेरिका भी गए थे। वहां पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें लंच पर आमंत्रित किया था। क्या हुई बात पाकिस्तान के उप प्रधान मंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार, जो टीम का हिस्सा भी थे, ने कहा कि मुनीर, शरीफ और शी जिनपिंग ने द्विपक्षीय और क्षेत्रीय सहयोग पर व्यापक बातचीत की। डार के अनुसार, जिनपिंग ने कहा कि दोनों पक्षों को करीबी चीन-पाकिस्तान के संबंधों की बेहतरी पर काम करना चाहिए। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग के हवाले से कहा कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे और चीन-पाकिस्तान मुक्त व्यापार समझौते के उन्नत संस्करणों के निर्माण के लिए चीन पाकिस्तान के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार है।  

रेल पर सवार होकर चीन पहुंचे किम जोंग उन, शाही बेड़े में क्या-क्या शामिल?

बीजिंग आमतौर पर किसी देश का सर्वोच्च नेता दूसरे देश की यात्रा के लिए हवाई जहाज का उपयोग करता है, ताकि कम समय में वह वहां पहुंचे और वापस लौट आए। लेकिन उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन हवाई जहाज के बजाय ट्रेन का इस्तेमाल करते हैं। वे बख्तरबंद रेलगाड़ी में सवार होकर दूसरे देश की सीमा में प्रवेश करते हैं। एक बार फिर उन्होंने चीन जाने के लिए इसी रेलगाड़ी का उपयोग किया और मंगलवार को चीन पहुंचे। 1300 किलोमीटर की दूरी तय की ट्रेन ने उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग से चीन की राजधानी बीजिंग तक लगभग 1300 किलोमीटर की दूरी तय की। बुधवार को बीजिंग में 'विक्ट्री डे' परेड होने वाली है, जिसमें किम जोंग उन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य विश्व नेताओं के साथ शामिल होंगे। उम्मीद है कि इस सैन्य परेड के जरिए वे अमेरिका के खिलाफ अपनी त्रिपक्षीय एकता का प्रदर्शन करेंगे। किम जोंग उन पहली बार लेंगे हिस्सा किम और व्लादिमीर पुतिन उन 26 विश्व नेताओं में शामिल हैं, जो बीजिंग में आयोजित होने वाली इस विशाल सैन्य परेड में शी जिनपिंग के साथ हिस्सा लेंगे। यह परेड द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति और जापानी आक्रामकता के खिलाफ चीन के प्रतिरोध की 80वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में हो रही है। यह ऐसा अवसर होगा, जिसमें किम जोंग उन अपने 14 साल के शासनकाल में पहली बार किसी बड़े बहुपक्षीय आयोजन में भाग लेंगे। साथ ही यह पहला मौका होगा, जब अमेरिका को चुनौती देने वाले देशों के नेता किम, शी और पुतिन एक ही स्थान पर एक साथ नजर आएंगे। इस ट्रेन में क्या-क्या है? उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के लिए ट्रेन से इतनी लंबी यात्रा करना कोई नई बात नहीं है। उनके पिता और दादा भी ऐसा कई बार कर चुके हैं। यानी, यह परंपरा उनके दादा ने शुरू की थी, जिसे आज तक कायम रखा गया है। किम जोंग उन के पिता, किम जोंग इल ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया। कहा जाता है कि किम जोंग इल को हवाई जहाज से यात्रा करने में डर लगता था, इसलिए वे ट्रेन से सफर करते थे। किम जोंग उन ट्रेन यात्रा बुलेटप्रूफ ट्रेन में 90 डिब्बे इस गहरे हरे रंग की ट्रेन में कॉन्फ्रेंस रूम, ऑडियंस चैंबर, बेडरूम, सैटेलाइट फोन और फ्लैट स्क्रीन टीवी जैसे साधन मौजूद हैं। नवंबर 2009 में दक्षिण कोरिया के एक समाचार आउटलेट ने बताया था कि इस बुलेटप्रूफ ट्रेन में कुल 90 डिब्बे हैं। इन डिब्बों में लाल रंग की लेदर आर्मचेयर हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस ट्रेन की गति 50 किलोमीटर प्रति घंटा है। इस रेलगाड़ी का नाम 'टाएयेनघो' है, जिसका कोरियाई भाषा में अर्थ 'सूरज' है। यह उत्तर कोरिया के संस्थापक किम इल सुंग का प्रतीक माना जाता है। उत्तर कोरियाई नेताओं का ट्रेन से क्या है संबंध? बताया जाता है कि लंबी दूरी की यात्राओं के लिए ट्रेन का उपयोग करने की परंपरा किम इल सुंग ने शुरू की थी। किम जोंग उन के दादा, किम इल सुंग, वियतनाम और पूर्वी यूरोप तक ट्रेन से यात्रा करते थे। इस ट्रेन की सुरक्षा की जिम्मेदारी उत्तर कोरिया के सुरक्षा एजेंट संभालते हैं। वे बम या अन्य खतरों को ध्यान में रखते हुए ट्रेन के मार्ग और अगले स्टेशनों की जांच करते हैं। बता दें कि 2001 में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलने के लिए किम जोंग इल ने दस दिन की ट्रेन यात्रा कर मॉस्को पहुंचे थे।  

भारत ने अमेरिका से कहा- ट्रेड डील पर डेडलाइन की बात नहीं करेंगे

नई दिल्ली  भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर सहमति ना बनने पर खिसियाए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीते सोमवार को एक बार फिर भारत को निशाने पर लिया था। ट्रंप ने कहा कि भारत अब टैरिफ कम करने की पेशकश कर रहा है, लेकिन अब बहुत देर हो चुकी है। इसके एक दिन बाद अब भारत ने एक बार फिर उन्हें दो टूक जवाब दिया है। भारत के वाणिज्य औऱ उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को एक कार्यक्रम में कहा है कि भारत डेडलाइन वाले ट्रेड डील पर कभी चर्चा नहीं करता है। पीयूष गोयल ने अमेरिका-भारत ट्रेड डील पर भारत के दृष्टिकोण पर बातचीत करते हुए हुए कहा कि भारत जल्दबाजी में समझौते करने के लिए दबाव में काम नहीं करता। उन्होंने कहा, "हम कभी भी समय-सीमा वाले व्यापार समझौतों पर बातचीत नहीं करते। हम सिर्फ अच्छे और पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार समझौतों पर ही बातचीत करते हैं।" अमेरिका के साथ बातचीत जारी- गोयल पीयूष गोयल ने आगे कहा कि भारत अपने सभी समझौतों में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, "हम एक समान और पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार समझौते के लिए हमेशा तैयार हैं।" केंद्रीय मंत्री ने इस दौरान यह पुष्टि भी की है कि भारत अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर सक्रिय रूप से चर्चा कर रहा है। गोयल ने कहा, "अभी बहुत कुछ हुआ है, अभी बहुत कुछ होना बाकी है। BTA के लिए अमेरिका के साथ हमारी बातचीत जारी है।’’ छठे दौर की वार्ता स्थगित गौरतलब है कि भारत और अमेरिका मार्च से इस समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। अब तक पांच दौर की वार्ता पूरी हो चुकी है। हालांकि 27 अगस्त से 50 प्रतिशत शुल्क लगाए जाने के बाद अमेरिकी दल ने अगले दौर की वार्ता के लिए भारत का अपना दौरा स्थगित कर दिया है। इसके बाद अभी तक छठे दौर की वार्ता के लिए कोई तारीख तय नहीं की गई है। गोयल ने कार्यक्रम में यह भी कहा है कि भारत ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात, मॉरीशस, ब्रिटेन और चार यूरोपीय देशों के समूह ईएफटीए के साथ मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर कर चुका है और अन्य देशों के साथ संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं।