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नेवल अकादमी में फिर गोलीबारी, 9/11 की याद में अफरातफरी का माहौल

वाशिंगटन  अमेरिका में एक बार फिर गोलीबारी की घटना ने हड़कंप मचा दिया है। इस बार निशाना मैरीलैंड स्थित अमेरिकी नौसेना अकादमी बनी जहां हुई फायरिंग में कई कैडेट और अन्य लोग घायल हो गए। घटना के बाद पूरे कैंपस को सील कर दिया गया है और हमलावर की तलाश जारी है। क्या हुआ था? रिपोर्ट के अनुसार नौसेना अकादमी में तैनात एक मिडशिपमैन ने छात्रों को एक ईमेल भेजकर तुरंत अंदर जाने और दरवाजा बंद करने की चेतावनी दी। ईमेल में साफ लिखा था, "यह कोई ड्रिल नहीं है।" रिपोर्ट्स के मुताबिक गोलीबारी की आवाज बैनक्रॉफ्ट हॉल में सुनी गई जहां 1600 से ज्यादा मिडशिपमैन रहते हैं। हालाँकि अभी तक किसी के मारे जाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो भी वायरल हो रहे हैं जिनमें कैंपस में एक मेडिवैक हेलीकॉप्टर उतरता दिख रहा है लेकिन इसकी भी अभी तक पुष्टि नहीं हो पाई है।   सुरक्षा एजेंसियां मौके पर घटना के तुरंत बाद नेवल अकादमी और पास के नेवी बेस को सुरक्षा कारणों से लॉकडाउन कर दिया गया है। अकादमी के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट नवीद लेमर ने बताया कि जब तक आरोपी पकड़ा नहीं जाता किसी को भी अंदर-बाहर जाने की अनुमति नहीं होगी। मैरीलैंड के गवर्नर वेस मूर के ऑफिस ने बयान जारी कर कहा कि स्थिति पर काबू पा लिया गया है और फिलहाल नेवल अकादमी पर कोई बड़ा खतरा नहीं है। वहीं एनसीआईएस और मैरीलैंड स्टेट पुलिस भी एनापोलिस पुलिस के साथ मिलकर जांच में जुट गई हैं।  

भारतीय श्रद्धालु हादसा: नेपाल में बस पर टूटती भीड़, दर्शन के बाद लौट रहे यात्रियों की हालत गंभीर

काठमांडू  नेपाल में जारी हिंसा की चपेट में भारतीय पर्यटक भी आ गए हैं। काठमांडू स्थित पशुपतिनाथ धाम के दर्शन कर लौट रहे श्रद्धालुओं पर सरकारी विरोधी आंदोलनकारियों ने हमला बोल दिया। इस हमले में बस में बैठे कई लोग चपेट में आ गए। 9 सितंबर को यह घटना हुई थी, जिसके बारे में अब बस ड्राइवर ने जानकारी दी है। बस के ड्राइवर ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों ने उनकी बस को घेरा और उस पर पत्थरबाजी की, जिससे बस की खिड़कियां टूट गईं और कई यात्री घायल हो गए। यह घटना नेपाल के मौजूदा हालात को दर्शाती है, जहां जेन-जी कही जाने वाली युवा पीढ़ी का प्रदर्शन जारी है। बस ड्राइवर रामू निषाद ने सोनौली में मीडिया से बताया कि वे पशुपतिनाथ मंदिर से दर्शन करके लौट रहे थे, जब अचानक से भीड़ ने उनकी बस को घेर लिया। उन्होंने कहा, 'प्रदर्शनकारियों ने बिना किसी वजह के बस पर हमला कर दिया। बस में महिलाएं और बुजुर्ग यात्री भी थे, लेकिन हमलावरों ने किसी की परवाह नहीं की।' इस पथराव में बस की खिड़कियां टूट गईं और कई यात्रियों को चोटें आईं। घटना के बाद स्थानीय अधिकारियों ने घायल यात्रियों को तुरंत काठमांडू के एक अस्पताल में भर्ती कराया। इसके बाद भारतीय दूतावास ने नेपाल सरकार से मदद मांगी। दोनों देशों के बीच समन्वय से बाकी यात्रियों को विशेष विमान से भारत वापस लाने का इंतजाम किया गया। बता दें कि नेपाल में सरकार विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं, जिसमें ज्यादातर कम आयु वर्ग के युवा ही शामिल हैं। इसी के चलते इन्हें जेनरेशन Z कहा जा रहा है। इन प्रदर्शनों में अब तक 34 लोगों की जान जा चुकी है। बीते गुरुवार को जेन-जी समूह ने कहा था कि संसद को भंग किया जाना चाहिए और संविधान में बदलाव होने चाहिए ताकि वह लोगों की इच्छाओं के हिसाब से हो। इस राजनीतिक संकट को सुलझाने के लिए जेन-जी के कुछ प्रतिनिधियों ने नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल और आर्मी चीफ अशोक राज सिगडेल के साथ आर्मी हेडक्वार्टर में बातचीत भी की है। बता दें कि नेपाल में अब भी यह तय नहीं हो पाया है कि अंतरिम सरकार का नेतृत्व कौन करेगा। पीएम केपी शर्मा ओली ने इस्तीफा दे दिया है और उनके कैबिनेट के 5 सदस्य पद छोड़ चुके हैं। इसके बाद भी हालात सुधरे नहीं हैं। इसके अलावा 'जेन Z' के कई गुटों के बीच भी आपसी मतभेद पैदा होने की खबरें हैं।  

हाईकोर्ट में हड़कंप: बम की चेतावनी के बाद सभी लोग इवैक्यूएट, जांच टीम मौके पर सक्रिय

नई दिल्ली/मुंबई देश के दो उच्च न्यायालयों में शुक्रवार को बम की धमकी मिली। इसके चलते दिल्ली से मुंबई तक हड़कंप मच गया और उच्च न्यायालयों को खाली करा लिया गया है। दोनों जगहों पर एक ही दिन में हाई कोर्ट को बम की धमकी मिली। इस धमकी से कानून के जानकारों और आम लोगों में डर फैल गया। दिल्ली में मिली धमकी के कुछ ही घंटों बाद मुंबई हाई कोर्ट को भी ऐसी ही धमकी मिली, जिससे सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया। दोनों कोर्ट में कार्यवाही तुरंत रोक दी गई और सभी को बाहर निकाल लिया गया। दिल्ली हाई कोर्ट और बॉम्बे HC में अफरा-तफरी का माहौल दिल्ली हाई कोर्ट में सुबह एक ईमेल के जरिए बम की धमकी दी गई थी। इस ईमेल में दावा किया गया था कि कोर्ट परिसर में बम रखे गए हैं। यह खबर फैलते ही कोर्ट की सभी बेंचों में काम तुरंत बंद हो गया और वहां मौजूद वकीलों, स्टाफ और बाकी लोगों को परिसर से बाहर निकाला जाने लगा। अचानक हुए इस काम से कोर्ट में अफरातफरी का माहौल बन गया। लोग डर के मारे कोर्ट कॉम्प्लेक्स से बाहर भागते दिखाई दिए। सुरक्षा टीमों ने संभाला मोर्चा धमकी मिलते ही दिल्ली पुलिस और बम डिस्पोजल स्क्वाड सहित सुरक्षा बल तुरंत हरकत में आ गए। एहतियात के तौर पर पूरे इलाके को घेर लिया गया और वहां फायर ब्रिगेड की गाड़ियां और एंबुलेंस भी बुला ली गईं। इसके बाद खोजी कुत्तों के साथ टीमों ने पूरे कोर्ट परिसर की अच्छी तरह जांच की। दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के वाइस प्रेसिडेंट, सच्चिन पुरी ने बताया, ‘हम सुरक्षाकर्मियों के साथ पूरा सहयोग कर रहे हैं। एहतियात के तौर पर हमने सभी वकीलों को कोर्ट परिसर खाली करने के लिए कहा है। सभी बेंचों ने भी काम बंद कर दिया है।’ धमकी देने वाले का दावा और ईमेल की जानकारी इस मामले पर सीनियर एडवोकेट प्रमोद कुमार दुबे ने बताया, 'धमकी भरा एक ईमेल फैलाया गया है, जिसमें कहा गया है कि यह शख्स आईएसआईएस से है। ईमेल में क्या लिखा है, यह साफ नहीं है। पुलिस और बम स्क्वाड मौके पर पहुंच गए हैं।’ दिल्ली पुलिस के सूत्रों ने बताया कि ईमेल में पाकिस्तान और तमिलनाडु के मिलकर ‘होली फ्राइडे' को धमाके करने की बात कही गई है। ईमेल में लिखा है कि जज के कमरे और कोर्ट परिसर में तीन बम लगाए गए हैं और दोपहर 2 बजे तक कोर्ट खाली करने के लिए कहा गया है। ईमेल भेजने वाले की आईडी ‘kanimozhi.thevidiya@outlook.com' बताई गई है। ईमेल में यह भी लिखा है कि साल 2017 से पुलिस में हमारे लोग हैं, जो 'इस होली फ्राइडे' के लिए तैयार हैं। मुंबई हाई कोर्ट भी हुआ खाली दिल्ली हाई कोर्ट की तरह ही, मुंबई हाई कोर्ट में भी बम की धमकी मिली। इसके बाद यहां भी वकीलों और स्टाफ को तुरंत परिसर खाली करने के लिए कहा गया। अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच चल रही है। एडवोकेट मंगला वाघे ने बताया, 'आज मुंबई हाई कोर्ट में बम की धमकी मिली। इसलिए कोर्ट को खाली करा लिया गया है और पुलिस इसकी जांच कर रही है।' एक और वकील ने बताया कि पुलिस ने उन्हें बाहर जाने को कहा और बताया कि यह बम की धमकी की अफवाह है। उन्होंने यह भी बताया, 'पुलिस ने कहा कि यह चीफ जस्टिस का आदेश है।' अब तक किसी भी जगह पर कोई भी संदिग्ध चीज नहीं मिली है। अधिकारियों ने बताया कि जांच चल रही है और ईमेल भेजने वाले का पता लगाया जा रहा है।  

PM मोदी मणिपुर पहुंचने वाले हैं, हिंसा की यादों के बीच तैयारियाँ तेज़, जानिए क्या है प्लान

मणिपुर  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मणिपुर में घातक जातीय हिंसा के दो साल बाद शनिवार को पूर्वोत्तर राज्य का दौरा करेंगे। इस दौरान वह मणिपुर भी जाएंगे। राज्य के मुख्य सचिव ने इसकी पुष्टि की है। मुख्य सचिव ने कहा कि मिजोरम से लौटने के बाद प्रधानमंत्री दोपहर करीब 12:30 बजे चुराचांदपुर पहुंचेंगे। बता दें कि यह जिला बुरी तरह हिंसा से प्रभावित था। चुराचांदपुर से प्रधानमंत्री इंफाल जाएंगे और 1200 करोड़ की परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे। बता दें कि चुराचांदपुर कुकी बहुल है तो वहीं इंफाल में मैतेई समुदाय की संख्या ज्यादा है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों के बीच संतुलन बनाना चाहते हैं। जानकारी के मुताबिक पीएम मोदी कुकी बहुल चुराचांदपुर के पीस ग्राउंड से 7,300 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे और मेइती बहुल इंफाल में 1,200 करोड़ रुपये की लागत वाली बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उद्घाटन भी करेंगे। विपक्षी दल कुकी और मेइती समुदायों के बीच जातीय संघर्ष के बाद राज्य का दौरा न करने को लेकर बार-बार प्रधानमंत्री की आलोचना करते रहे हैं। इस संघर्ष में मई 2023 से अब तक 260 से अधिक लोग मारे गए हैं और हजारों लोग बेघर हो गए हैं। मणिपुर सरकार ने गुरुवार शाम एक बड़ा होर्डिंग लगाया, जिसमें शनिवार को चुराचांदपुर के पीस ग्राउंड और इंफाल के कांगला किले में प्रधानमंत्री के कार्यक्रमों की घोषणा की गई।मोदी के दौरे से पहले राज्य की राजधानी इंफाल में ऐसे और भी होर्डिंग लगाए गए। मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद फरवरी से मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू है। राज्य सरकार ने गुरुवार को एक परामर्श भी जारी किया, जिसमें पीस ग्राउंड में आयोजित ‘‘वीवीआईपी कार्यक्रम’’ में शामिल होने वाले लोगों से कहा गया कि वे ‘‘चाबी, कलम, पानी की बोतल, बैग, रूमाल, छाता, लाइटर, माचिस, कपड़े का टुकड़ा, कोई भी नुकीली वस्तु या हथियार और गोला-बारूद’’ न लाएं। वहीं, एक अन्य अधिसूचना में लोगों से 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों और बीमार व्यक्तियों को कार्यक्रम स्थल पर लाने से बचने को कहा गया। मणिपुर सरकार ने इससे पहले मोदी के दौरे के मद्देनजर चुराचांदपुर जिले में एयर गन पर प्रतिबंध लगा दिया था। इस बीच, अधिकारियों ने बताया कि इंफाल और चुराचांदपुर जिला मुख्यालय शहर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। इंफाल में लगभग 237 एकड़ में फैले कांगला किले और चुराचांदपुर के पीस ग्राउंड में तथा उसके आसपास बड़ी संख्या में राज्य और केंद्रीय बलों के जवान तैनात किए गए हैं, जहां इस कार्यक्रम के लिए एक भव्य मंच तैयार किया जा रहा है। मणिपुर के एकमात्र राज्यसभा सदस्य लीशेम्बा संजाओबा ने प्रधानमंत्री के दौरे को लोगों और राज्य के लिए ‘‘सौभाग्य का क्षण’’ बताया। भाजपा सांसद ने कहा, ‘‘यह सौभाग्य की बात है कि मोदी लोगों की कठिनाइयों को सुनेंगे…मणिपुर में पहले भी हिंसक झड़पों का इतिहास रहा है। हालाँकि, किसी भी प्रधानमंत्री ने ऐसे समय में राज्य का दौरा नहीं किया और लोगों की बात नहीं सुनी।’’ प्रमुख कुकी-जो समूहों ने भी प्रधानमंत्री के मणिपुर दौरे का स्वागत किया है और इसे ‘‘ऐतिहासिक तथा दुर्लभ अवसर’’ बताया है। समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठनों में से एक कुकी-ज़ो काउंसिल ने दावा किया कि मोदी का यह दौरा किसी प्रधानमंत्री के इस क्षेत्र में आने के लगभग चार दशक बाद हो रहा है। काउंसिल ने मोदी के दौरे का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘हमारे घावों को भरने, हमारी गरिमा को बहाल करने तथा कुकी-जो लोगों के भविष्य की सुरक्षा के लिए हम आपके नेतृत्व पर भरोसा करते हैं।’’ कुकी-ज़ो समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले कई अन्य संगठनों ने भी प्रधानमंत्री के दौरे की सराहना की, लेकिन उनके स्वागत में नृत्य कार्यक्रम की योजना का विरोध किया। महिला संगठन ‘इमागी मीरा’ ने कहा कि मोदी को अधिकारियों को निर्देश देना चाहिए कि वे मेइती लोगों को राष्ट्रीय राजमार्ग पर आवाजाही की अनुमति दें और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करें।  

टैरिफ और भारत की शक्ति पर मोहन भागवत की खुली टिप्पणी, जानें असर

नागपुर  टैरिफ और रूस से तेल आयात के चलते भारत और अमेरिका के बीच संबंधों में गिरावट आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया है, जिसके चलते दुनियाभर में उनकी किरकिरी हो रही है। इस बीच, राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने अमेरिका का बिना नाम लिए हुए टैरिफ को लेकर उनपर निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि दुनिया में लोगों को डर लगता है कि ये बड़ा हो जाएगा तो मेरा क्या होगा? मोहन भागवत ने एक कार्यक्रम में कहा, ''भारत बड़ा होगा तो हमारा स्थान कहां होगा, इसलिए लागू करो टैरिफ। हमने तो कुछ किया नहीं। जिसने किया था, उसको पुचकार रहे हैं, क्योंकि ये साथ रहेगा तो भारत पर थोड़ा दबाव बना सकते हैं। यह क्यों है, सात समंदर पार आप लोग हैं, हम यहां पर हैं। कोई संबंध तो है नहीं, लेकिन डर लगता है। मैं, मेरा के चक्कर में ये सारी बातें हो रही हैं। जब समझ में आता है कि मैं मेरा, हम हमारा है। ये सारी समस्याएं दूर हो जाती हैं। दुनिया को आज हल चाहिए। उन्होंने अपनी अधूरी दृष्टि के आधार पर हल निकालने का बहुत प्रयास किया, लेकिन नहीं मिला, क्योंकि मिलना संभव नहीं है।'' भागवत ने कहा कि भारत महान है और भारतीयों को भी महान बनने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत बड़ा है तथा वह और बड़ा होना चाहता है। आरएसएस प्रमुख ने कहा कि अगर मनुष्य अपना रवैया ‘‘मैं’’ से ‘‘हम’’ में बदल लें तो सभी मुद्दे सुलझ जाएंगे। दुनिया समाधान तलाश रही है। भागवत ने कहा कि मनुष्य और राष्ट्र जब तक अपने वास्तविक स्वरूप को नहीं समझेंगे, तब तक वे समस्याओं का सामना करते रहेंगे। नागपुर में ब्रह्माकुमारी विश्व शांति सरोवर के सातवें स्थापना दिवस समारोह में भागवत ने कहा कि ब्रह्माकुमारी की तरह ही आरएसएस भी आंतरिक चेतना को जागृत करने के लिए काम करता है। जब तक मनुष्य और राष्ट्र अपने वास्तविक स्वरूप को नहीं समझेंगे, तब तक वे समस्याओं का सामना करते रहेंगे। अगर हम करुणा दिखाएं और भय पर विजय पाएं, तो हमारा कोई शत्रु नहीं रहेगा। बता दें कि ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में सिर्फ भारत से ही नहीं, बल्कि चीन-रूस समेत तमाम देशों के साथ अमेरिका के रिश्ते खराब हुए हैं। दरअसल, रेसिप्रोकल टैरिफ के नाम पर ट्रंप दुनियाभर पर शुल्क लगा रहे हैं। पहले भारत पर 25 फीसदी टैरिफ लगाया, लेकिन बाद में रूस से तेल खरीदने के चलते 25 फीसदी और शुल्क लगा दिया। इससे भारत, चीन और रूस एक बार फिर से करीब आते हुए दिखाई दिए। ट्रंप को अपनी यह गलती समझ आई और हाल ही में भारत के प्रति उन्होंने अपना रुख नरम किया। ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को अपना दोस्त बताते हुए कहा कि अमेरिका और भारत के बीच व्यापार वार्ता सफल निष्कर्ष पर पहुंचेगी।  

उड़ान भरते ही रनवे पर गिरा SpiceJet विमान का पहिया, मुंबई एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग

मुंबई  गुजरात के कांडला से मुंबई आ रहे स्पाइसजेट के Q400 विमान का आउटर व्हील टेकऑफ के तुरंत बाद रनवे पर गिर गया. मुंबई में लैंडिंग के समय पायलट ने इमरजेंसी की घोषणा की, हालांकि विमान की सेफ लैंडिंग हुई. स्पाइसजेट का बॉम्बार्डियर DHC8-400 विमान, जिसकी उड़ान संख्या SG-2906 थी, ने शुक्रवार दोपहर 2.39 बजे कांडला एयरपोर्ट के रनवे नंबर 23 उड़ान भरी. टेक आफ के तुरंत बाद टावर कंट्रोलर ने विमान से एक काले रंग की बड़ी वस्तु रनवे पर गिरती देखी. इंस्पेक्शन टीम ने जाकर देखा तो प्लेन का पहिया गिरा हुआ था. फ्लाइट ने दोपहर 15:51 बजे मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट (CSMIA) पर तकनीकी खराबी की सूचना के बाद इमरजेंसी लैंडिंग की. एयरपोर्ट प्रशासन ने सावधानी के तौर पर फुल इमरजेंसी घोषित किया था. हालांकि, विमान ने रनवे नंबर 27 पर सुरक्षित लैंडिंग की. विमान में चालक दल समेत करीब 78 यात्री सवार थे. वे सभी सुरक्षित हैं. लैंडिंग के बाद एयरपोर्ट पर सामान्य परिचालन बहाल हो गया. बॉम्बार्डियर DHC8-400 में ट्राइसाइकिल लैंडिंग गियर सिस्टम होता है, जिसमें नोज गियर पर दो पहिये और प्रत्येक मुख्य लैंडिंग गियर पर दो मुख्य पहिये होते हैं. स्पाइसजेट के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, '12 सितंबर को कांडला से मुंबई जा रहे स्पाइस जेट Q400 विमान का एक बाहरी पहिया उड़ान भरने के बाद रनवे पर पाया गया. विमान ने मुंबई की अपनी यात्रा जारी रखी और हवाई अड्डे पर सुरक्षित उतरा. लैंडिंग के बाद, विमान टर्मिनल तक पहुंचा और सभी यात्री सामान्य रूप से उतरे.' इससे पहले 29 अगस्त को स्पाइसजेट की दिल्ली-श्रीनगर फ्लाइट की श्रीनगर एयरपोर्ट पर प्रायोरिटी लैंडिंग करानी पड़ी थी. अधिकारियों ने बताया कि फ्लाइट अचानक तेजी से नीचे आने लगी, तभी कैप्टन ने श्रीनगर एयरपोर्ट के एटीसी से प्रायोरिटी लैंडिंग की अनुमति मांगी. दरअसल, फ्लाइट में केबिन प्रेशर की चेतावनी मिली थी. इसके बाद फ्लाइट SG-385 को श्रीनगर एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतारा गया. स्पाइसजेट की इस फ्लाइट में 4 बच्चों सहित 205 यात्री और चालक दल के 7 सदस्य सवार थे. यात्रियों या चालक दल के सदस्यों ने किसी भी प्रकार की चिकित्सा सहायता का अनुरोध नहीं किया.

डोनाल्ड ट्रंप की उम्मीदों पर पानी: नोबेल शांति कमेटी ने किया खारिज

ओस्लो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार कह चुके हैं कि उन्होंने 7 युद्ध रुकवाए हैं और इसके लिए तो उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए। उनके इन बयानों से अनुमान लगाया जाता है कि वे नोबेल पुरस्कार के लिए आतुर दिख रहे हैं, लेकिन नोबेल कमेटी पर इसका कोई असर नहीं लगता। नॉर्वे की नोबेल कमेटी का कहना है कि हम पर किसी तरह का दबाव नहीं चलता है। हम पूरी स्वायत्तता और स्वतंत्रता के साथ फैसले लेते हैं। जनवरी में अमेरिका की सत्ता फिर से संभालने वाले डोनाल्ड ट्रंप कई बार कह चुके हैं कि वह नोबेल शांति पुरस्कार के हकदार हैं। वह बराक ओबामा का भी जिक्र कर चुके हैं कि उन्हें तो यह सम्मान बहुत जल्दी मिल गया था। उनका कहना है कि वह 6 से 7 जंग रुकवा चुके हैं और वह नोबेल शांति पुरस्कार के हकदार हैं। यही नहीं उनका कहना है कि मैं रूस और यूक्रेन के अलावा इजरायल और हमास के बीच की जंग भी रुकवाने के लिए तत्पर हूं। एएफपी को दिए इंटरव्यू में नोबेल कमेटी के सचिव क्रिस्टियन बर्ग हार्पविकेन ने कहा, 'यह सही है कि किसी खास कैंडिडेट को लेकर मीडिया में काफी चर्चा है। लेकिन यह भी सच है कि इससे हमारे फैसले पर कोई असर नहीं पड़ता। हम अपने मानकों के अनुसार ही निर्णय लेते हैं। इसमें कोई बाहरी फैक्टर काम नहीं करता और ना ही किसी तरह का प्रेशर चलता है।' 10 अक्टूबर को होने वाला है नोबेल पुरस्कार का ऐलान इस साल के नोबेल पुरस्कारों का ऐलान 10 अक्तूबर को होने वाला है। डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि उनके नाम की सिफारिश बेंजामिन नेतन्याहू और अजरबैजान के इलहाम अलियेव ने भी की है। इसके अलावा पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने भी कहा था कि डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए। हालांकि डोनाल्ड ट्रंप को इस बार यह पुरस्कार मिलने की संभावना बहुत कम है। 31 जनवरी ही थी नोबेल पुरस्कार के नामांकन की आखिरी तारीख इसकी वजह यह है कि नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकन की आखिरी तारीख 31 जनवरी ही थी, जबकि उससे ठीक 11 दिन पहले ही डोनाल्ड ट्रंप ने पद संभाला था। ऐसे में माना जा रहा है कि यदि डोनाल्ड ट्रंप के नाम पर विचार भी होगा तो वह अगले साल होगा। इस बार उनके नाम के ऐलान की कोई संभावना नहीं है। जुलाई में ही नेतन्याहू ने कहा था कि उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप का नाम आगे बढ़ाया है। इसके लिए उन्होंने नॉर्वे की नोबेल समिति को लेटर भी भेजा था।  

मोहन भागवत का ट्रंप पर करारा कटाक्ष: डर है तो टैरिफ लगाओ!

नागपुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है. नागपुर में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि यह टैरिफ भारत के बढ़ते प्रभाव के डर का नतीजा है. भागवत ने कहा, "दुनिया में लोगों को डर लगता है, भारत बड़ा होगा तो हमारा क्या होगा? तो लगाओ टैरिफ, डर लगता है उनको." उन्होंने आगे कहा कि "हमे चाहिए, मुझे चाहिए, यही व्यक्ति के झगड़े से राष्ट्र झगड़े का कारण होता है." भागवत ने ज़ोर देकर कहा कि दुनिया को आज समाधान चाहिए और भारत ही पूरी दुनिया को सही रास्ता दिखा सकता है. उन्होंने भारत के लोगों की सराहना करते हुए कहा कि यहां लोग अभाव में भी खुश रहते हैं, और हालात बदलेंगे तो बदलेंगे. ट्रंप ने भारत पर लगाया है 50 फीसदी टैरिफ  आपको बता दें कि अमेरिका ने 2025 में भारत पर रिकॉर्ड स्तर के टैरिफ लगाए हैं. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन्हें “रिसिप्रोकल टैरिफ” नीति के तहत लागू किया है. पहली बार जुलाई 2025 में यह टैरिफ लगाया गया था, जो 1 अगस्त से प्रभावी हुआ. उस समय अमेरिका ने कारण बताया गया कि भारत के ऊंचे टैरिफ और व्यापार घाटे का जवाब देना जरूरी है. इसके बाद अगस्त 2025 में ट्रंप प्रशासन ने दूसरा टैरिफ लगाया, यह कहते हुए कि भारत रूस से तेल खरीद रहा है और इससे यूक्रेन युद्ध को फंड मिल रहा है. इन दोनों फैसलों के बाद अमेरिका ने भारतीय निर्यातों पर टैरिफ की दर 50% तक पहुंच गई है, जो अमेरिका के किसी भी बड़े व्यापारिक साझेदार पर लगाए गए सबसे ऊंचे टैरिफ हैं.  

धर्म और जाति भूलो, वर्दी की गरिमा निभाओ! सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र पुलिस को लगाई फटकार

मुंबई  सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र पुलिस को फटकार लगाई है. पुलिस को यह फटकार साल 2023 के मारपीट के एक मामले की जांच ना करने पर लगाई गई है. कोर्ट ने कहा, पुलिस की वर्दी पहनने के बाद व्यक्ति को धर्म और जाति सहित सभी तरह के पूर्वाग्रहों से ऊपर उठना चाहिए और कानून के अनुसार कर्तव्य निभाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के गृह सचिव को निर्देश दिया है. कोर्ट ने कहा है हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोगों के साथ वरिष्ठ अधिकारियों की एक SIT गठित कर जांच कराए. कोर्ट ने क्यों लगाई फटकार? दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश उस याचिका पर दिया है जिसमें मई 2023 में महाराष्ट्र के अकोला में हुए सांप्रदायिक दंगे की जांच में लापरवाह पुलिसवालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी. अपने कर्तव्यों की निष्क्रियता और पक्षपातपूर्ण जांच के लिए दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की गई थी. याचिकाकर्ता ने खुद को हत्या का चश्मदीद बताया और कहा कि असली दोषी के बजाय मुस्लिम व्यक्तियों पर FIR दर्ज की गई. याचिकाकर्ता ने दंगों के दौरान खुद पर हमले का भी आरोप लगाया था. इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी, यह कहते हुए कि याचिकाकर्ता ने समय पर पुलिस को जानकारी नहीं दी. हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि पीड़ित के परिजन खुद कोर्ट नहीं पहुंचे और याचिका किसी “छिपे मकसद” से दायर लगती है. क्या था पूरा मामला? दरअसल, महाराष्ट्र के अकोला में 13 मई को दो समुदाय में सांप्रदायिक हिंसा हुई थी. जिसमें एक शख्स की मौत हो गई थी और 8 लोग घायल हुए थे. इस मामले में शुरू में पुलिस ने 6 FIR दर्ज की थी. इस मामले में महाराष्ट्र के अकोला दंगों में गंभीर रूप से घायल मोहम्मद अफजल मोहम्मद शरीफ ने याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की थी. याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने मामले की सही जांच नहीं की और गंभीर चोटों के बावजूद मेडिकल रिपोर्ट की अनदेखी की. याचिका में पुलिस जांच में खामियों और न्याय मिलने में विफलता का मुद्दा उठाया गया है. याचिका में इसका भी ज़िक्र है कि घायल चश्मदीद गवाह (मो हम्मद अफ़ज़ल) को अभियोजन पक्ष के गवाहों की सूची से बाहर रखना और घटनाओं की जांच उसके पक्ष में न करना पुलिस अधिकारियों की बदनीयती का संकेत है. अब सुप्रीम कोर्ट नें इसी मामले में सुनवाई करते हुए पुलिस को फटकार लगाई है.  

शिवसेना की चुनावी रणनीति: BMC चुनाव के लिए एकनाथ शिंदे ने बनाई कमेटी, जानें क्या है प्लान

मुंबई  महाराष्ट्र में अगले कुछ महीनों में स्थानीय निकाय चुनाव हो सकते हैं. सभी दलों ने अब अपने-अपने स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं. महायुति के प्रमुख नेताओं की ओर से कई बार स्पष्ट किया जा चुका है कि हम राज्य में महायुति के रूप में चुनाव लड़ेंगे, वहीं दूसरी ओर, इन चुनावों को लेकर महाविकास अघाड़ी की तस्वीर साफ नहीं है, खासकर तब जब आज मनसे प्रमुख राज ठाकरे और शिवसेना ठाकरे गुट के प्रमुख उद्धव ठाकरे के बीच एक अहम बैठक हुई, जिसने उत्सुकता और बढ़ा दी है. इस पूरी पृष्ठभूमि में शिवसेना शिंदे गुट ने महानगरपालिका चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है. मुंबई महानगरपालिका चुनाव की पृष्ठभूमि में शिवसेना की मुख्य कार्यकारी समिति की घोषणा कर दी गई है. इस टीम में 21 प्रमुख नेताओं को शामिल किया गया है. आगामी मुंबई महानगरपालिका चुनावों की पृष्ठभूमि में, शिवसेना ने पार्टी की मुख्य कार्यकारी समिति का गठन किया है. इसमें पार्टी के प्रमुख नेता एकनाथ शिंदे समेत 21 शिलाधारक शामिल हैं. जानें मुख्य कार्यकारी समिति में कौन-कौन नेता हैं शामिल महानगरपालिका चुनावों में पार्टी स्तर पर महत्वपूर्ण निर्णय इसी समिति के माध्यम से लिए जाएंगे. इस समिति में शिवसेना के शीर्ष नेताओं, सांसदों, पूर्व सांसदों, विधायकों और पूर्व विधायकों को शामिल किया गया है. 1) एकनाथ शिंदे, प्रमुख नेता 2) रामदास कदम, नेता 3) गजानन कीर्तिकर, नेता 4) आनंदराव अडसुल, नेता 5) मीनाताई कांबले, नेता 6) डॉ. श्रीकांत शिंदे, सांसद 7) रवींद्र वायकर, सांसद 8) मिलिंद देवड़ा, राज्यसभा – सांसद 9) राहुल शेवाले, पूर्व सांसद 10) संजय निरुपम, पूर्व सांसद 11) प्रकाश सुर्वे, विधायक 12) अशोक पाटिल, विधायक 13) मुरजी पटेल, विधायक 14) दिलीप लांडे, विधायक 15) तुकाराम काटे, विधायक 16) मंगेश कुडालकर, विधायक 17) श्रीमती। मनीषा कायंदे, विधान परिषद, विधायक 18) सदा सरवणकर, पूर्व विधायक 19) यामिनी जाधव, पूर्व विधायक 20) दीपक सावंत, पूर्व विधायक 21) शिशिर शिंदे, पूर्व विधायक. महाराष्ट्र में जल्द निकाय चुनाव का होगा ऐलान पूर्व सांसद राहुल शेवाले, पूर्व विधायक सदा सर्वणकर, यामिनी जाधव और शिशिर शिंदे को भी समिति में जगह मिली है. भारत के सबसे धनी नगर निकाय, बीएमसी, जिसका 2025-26 का बजट 74,427 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया था, के चुनाव मार्च 2022 से होने हैं. बीएमसी के अलावा, महाराष्ट्र में कई ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकाय के चुनाव होने हैं.