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यात्रियों के लिए खुशखबरी: आपदा के बाद चारधाम यात्रा कल से शुरू, यमुनोत्री का रास्ता भी खुला

उत्तराखंड उत्तराखंड में 13 सितंबर यानी शनिवार से एक बार फिर चार धाम की यात्रा शुरू होने जा रही है. उत्तरकाशी के धराली में आई आपदा के बाद से गंगोत्री और यमुनोत्री धाम जाने वाला हाईवे बुरी तरह छतिग्रस्त हुआ था, जिसके चलते यात्रा प्रभावित हुई थी. अब गंगोत्री धाम तक सड़क ठीक हो गई है, जिससे गंगोत्री धाम की यात्रा 9 सितंबर से शुरू हो चुकी है. अब यमुनोत्री धाम यात्रा को भी 13 सितंबर से शुरू करने की कवायद की जा रही है. यमुनोत्री धाम हाईवे को यातायात के लिए खोले जाने का काम लगभग पूरा हो चुका है. केदारनाथ और बद्रीनाथ तक भी सड़क लगभग सभी जगह पर खुल गई है. ऐसे में अब श्रद्धालु चारधाम यात्रा पर आ सकेंगे. 13 सितंबर से यमुनोत्री यात्रा शुरू इसको लेकर उत्तरकाशी के जिलाधिकारी ने बताया कि यमुनोत्री में जंगलचट्टी के पास करीब 150 मीटर सड़क टूटी थी. इसे ठीक करने का काम अंतिम चरण में है. यमुनोत्री धाम की यात्रा 13 सितंबर से शुरू कराने का निर्णय लिया गया है. इसको लेकर ऋषिकेश और हरिद्वार में बनाए गए ऑफलाइन यात्रा पंजीकरण काउंटर भी खोल दिया गया है. उन्होंने कहा कि मौसम और सड़क मार्ग की स्थिति को देखते हुए यात्रियों को सीमित संख्या में गंगोत्री धाम भेजा जा रहा है. वर्तमान में गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग धरासू, नालूपानी, हेलगुगाड़, डबरानी संवेदनशील स्थान हैं, जहां रुक-रुक के भूस्खलन हो रहा है. रखें इन बातों का ध्यान सुरक्षा के मद्देनजर और सड़क मार्ग को सुचारू करने के लिए पर्याप्त मशीनरी एवं टीमें तैनात की गई है. उन्होंने कहा श्रद्धालु घर से निकलने से पहले मौसम की जानकारी जरुर लें, ताकि सड़क बंद होने की स्थिति मे उन्हें परेशानियों का सामना ना करना पड़े. चारधाम यात्रा खत्म होने में अब सिर्फ दो महीने से कम का समय बाकी है. विजयादशमी 2 अक्टूबर को बद्रीनाथ धाम का कपाट बंद होने का मुहूर्त और दिन निकाला जाएगा. इसके बाद 23 अक्टूबर भाईदूज के मौके पर कपाट को बंद कर दिया जाएगा  

पोखरा में फंसी भारतीय टीम की आपबीती वायरल, उपासना गिल ने भावुक होकर मांगी मदद

काठमांडू  नेपाल में जारी हिंसक प्रदर्शनों के बीच भारतीय दूतावास ने एक बड़ी राहत भरी कार्रवाई करते हुए फंसी हुई भारतीय वॉलीबॉल टीम को सुरक्षित निकाला. यह कदम उस समय उठाया गया, जब टीवी प्रेजेंटर उपासना गिल का एक भावुक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया. गिल नेपाल में एक वॉलीबॉल लीग के लिए गई थीं, लेकिन अचानक फैली हिंसा में फंस गईं. उनके वीडियो अपील ने ही भारतीय दूतावास को सक्रिय किया और पूरी टीम की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकी. वीडियो अपील बनी सहारा उपासना गिल ने पोखरा से वीडियो जारी कर मदद की गुहार लगाई थी. उन्होंने कहा, 'मेरा नाम उपासना गिल है और मैं यह वीडियो प्रफुल्ल गर्ग को भेज रही हूं. मैं भारतीय दूतावास से मदद की अपील करती हूं. जो भी मदद कर सकते हैं, कृपया करें. मैं पोखरा, नेपाल में फंसी हुई हूं.'  गिल ने अपने होटल पर हुए हमले का भी जिक्र किया.उन्होंने बताया कि जिस होटल में वह ठहरी थीं, उसे प्रदर्शनकारियों ने आग के हवाले कर दिया. उन्होंने कहा, 'मेरे सारे सामान और सामान से भरा कमरा जल गया. मैं उस समय स्पा में थी और प्रदर्शनकारी बड़े-बड़े डंडों के साथ पीछा कर रहे थे. मैं मुश्किल से अपनी जान बचा पाई.' दूतावास की त्वरित कार्रवाई वीडियो सामने आते ही भारतीय दूतावास ने तुरंत हरकत में आते हुए वॉलीबॉल टीम को काठमांडू स्थित सुरक्षित घर में शिफ्ट किया. सूत्रों के मुताबिक टीम के अधिकांश सदस्य पहले ही भारत लौट चुके हैं और बाकी की वापसी की तैयारी की जा रही है. अधिकारियों ने बताया कि दूतावास लगातार टीम के सभी सदस्यों से संपर्क बनाए हुए है और उनकी सुरक्षा पर नजर रखे हुए है. नेपाल में क्यों भड़के प्रदर्शन? नेपाल में सोमवार को सरकार द्वारा सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे. लेकिन ये प्रदर्शन जल्दी ही भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के खिलाफ व्यापक जन आंदोलन में बदल गए. हालात इतने बिगड़े कि प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा. राजधानी काठमांडू से लेकर पोखरा तक प्रदर्शनकारियों ने सरकारी इमारतों और होटलों को निशाना बनाया, जिससे आम लोगों और पर्यटकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. फंसे भारतीयों के लिए हेल्पलाइन भारतीय दूतावास ने न सिर्फ टीम को बचाया, बल्कि नेपाल में फंसे अन्य भारतीयों की मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं. काठमांडू स्थित कंट्रोल रूम लगातार सक्रिय है और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता उपलब्ध करा रहा है. दूतावास के इस प्रयास ने एक बार फिर यह साबित किया कि संकट की घड़ी में विदेशों में फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकालना सरकार की प्राथमिकता रहती है. राहत की सांस वॉलीबॉल टीम के सुरक्षित निकलने के बाद उनके परिवारों ने राहत की सांस ली है. जिन खिलाड़ियों की वापसी अभी बाकी है, उनके लिए भी जल्द इंतजाम किए जा रहे हैं. उपासना गिल ने भी भारतीय दूतावास का धन्यवाद करते हुए कहा कि अगर समय रहते मदद न मिलती, तो हालात बेहद गंभीर हो सकते थे. नेपाल में भले ही हालात अभी सामान्य नहीं हैं, लेकिन भारतीय दूतावास की त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई ने न सिर्फ खिलाड़ियों की जान बचाई, बल्कि संकट में फंसे लोगों को भरोसा भी दिलाया कि भारत हमेशा अपने नागरिकों के साथ खड़ा है.

वैष्णो देवी यात्रा 14 सितंबर से संभावित, मौसम ठीक रहा तो यात्रियों को मिलेगी हरी झंडी

कटरा  खराब मौसम और ट्रैक की आवश्यक मरम्मत कार्यों के चलते अस्थायी रूप से स्थगित की गई श्री माता वैष्णो देवी यात्रा के फिर से शुरू होने की खबर सामने आ चुकी है। अब जल्द ही फिर से 'जय माता दी' के नारों से पूरा मार्ग गूंज उठेगा। आपको बता दें कि हाल ही में पहाड़ों पर हुई जोरदार बारिश के कारण भूस्खलन की बड़ी घटना हुई। कई यात्रियों की जान भी चली गई। अब मौसम में बदलाव देखने को मिला है। बारिश के दौरान खराब हुआ ट्रैक की मरम्मत हो चुकी है। अब 14 सितंबर से पुनः यात्रा शुरू होगी। अगर मौसम विपरीत होती है तो श्राइन बोर्ड आगे निर्णय लेगा। श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने शुक्रवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए पिछले दिनों यात्रा को रोकना पड़ा था। ट्रैक पर मरम्मत और रखरखाव के कार्य पूरे कर लिए गए हैं। श्राइन बोर्ड ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे यात्रा पर निकलने से पहले मौसम की स्थिति और बोर्ड की ताजा एडवाइजरी अवश्य देखें। जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले के कटरा से श्री माता वैष्णो देवी यात्रा 26 अगस्त से स्थगित है। तीर्थयात्रा मार्ग पर भूस्खलन के कारण यात्रा स्थगित की गई है। उल्लेखनीय है कि 26 अगस्त को अर्धकुंवारी स्थित इंद्रप्रस्थ भोजनालय के निकट भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन में 34 लोग मारे गए थे जिनमें अधिकतर तीर्थयात्री शामिल थे जबकि कई अन्य घायल हुए थे। व्यापारियों की मांग थी कि श्राइन बोर्ड कम से कम यात्रा को पुनः शुरू करने के संदर्भ में स्थिति स्पष्ट करे, क्योंकि 22 सितंबर से नवरात्र भी शुरू होने वाले हैं। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल और श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के अध्यक्ष मनोज सिन्हा ने 26 अगस्त को हुए भूस्खलन के कारणों की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। जम्मू-कश्मीर जल शक्ति विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव शालीन काबरा की अध्यक्षता वाली समिति में जम्मू संभागीय आयुक्त रमेश कुमार और जम्मू के पुलिस महानिरीक्षक बीएस टूटी शामिल हैं और यह दो सप्ताह के भीतर उपराज्यपाल सिन्हा को एक व्यापक रिपोर्ट सौंपेगी।

दिल्ली और बॉम्बे हाईकोर्ट को बम की धमकी, ई-मेल के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर

नई दिल्ली/मुंबई  दिल्ली और बॉम्बे हाईकोर्ट में शुक्रवार दोपहर के दौरान मिली बम-धमकी की सूचना से हड़कंप मच गया. पुलिस सूत्रों के मुताबिक  एक धमकी भरा ई-मेल प्राप्त हुआ जिसमें दिल्ली हाईको कोर्ट परिसर में तीन बम रखे होने और दोपहर 2 बजे तक हाईकोर्ट खाली कराने का आदेश दिया गया था. इस धमकी के तुरंत बाद बॉम्बे हाईकोर्ट में भी बम की धमकी का मेल आया जिसके बाद तुरंत ही कोर्ट परिसर को खाली कराया गया और जजों तथा वकीलों को बाहर निकाला गया. पुलिस ने फौरन सुरक्षा-प्रोटोकॉल लागू करते हुए सभी जजों को कक्षों से बाहर निकाला और वकीलों, स्टाफ तथा लोगों को कोर्ट परिसर खाली करने का निर्देश दिया गया. मौके पर बम निरोधक दस्ते (Bomb Squad), स्पेशल सेल और दिल्ली पुलिस की कई यूनिट तैनात कर दी गईं और परिसर की बारी-बारी तलाशी चल रही है. पुलिस ने आसपास के इलाकों को भी सील कर सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं. दिल्ली हाईकोर्ट के बार एसोसिएशन के सचिव विक्रम सिंह पंवार ने आजतक से बातचीत करते हुए कहा, 'सुरक्षा तंत्र स्थिति का आंकलन कर रहा है. ईमेल को गंभीरता से लिया जा रहा है. फिलहाल घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है.' मेल की मुख्य बातें दिल्ली हाईकोर्ट को लेकर भेजे गए धमकी वाले मेल में दावा किया गया है कि हाईकोर्ट परिसर में 3 बम रखे गए हैं और सभी को दोपहर 2 बजे तक वहां से हटा लिया जाना चाहिए. मेल में एक असामाजिक/आक्रामक राजनीतिक संदेश भी था जिसमें कुछ नेताओं को निशाना बनाने जैसी कड़वी बातें लिखी गईं; कुछ विशिष्ट नामों का भी जिक्र था. अधिकारियों का कहना है कि मेल की भाषा और संदर्भ इस घटना को “इंसाइड जॉब” जैसा बताने की कोशिश करते हैं. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मेल में तमिलनाडु की राजनीतिक पार्टी डीएमके (DMK) का भी जिक्र है. मेल में कहा गया है, "हम प्रस्ताव करते हैं कि डॉ. एझिलान नागनाथन को डीएमके की कमान संभालनी चाहिए." इसके साथ ही, मेल में यह भी धमकी दी गई है कि उदयनिधि स्टालिन के बेटे इनबानिधि उदयनिधि को तेजाब से जलाया जाएगा. मेल में कहा गया है, 'एजेंसियों को इस बात की भनक तक नहीं लगेगी कि यह कोई अंदरूनी साजिश है.उदाहरण के तौर पर, आपके दिल्ली हाईकोर्ट में आज का धमाका पिछले झांसों के संदेह को दूर कर देगा. दोपहर की इस्लामी नमाज़ के तुरंत बाद जज चैंबर में धमाका होगा.' जांच में जुटी पुलिस पुलिस ने मेल को गंभीर मानते हुए उसकी फोरेंसिक जांच शुरू कर दी है. मेल किस आईपी एड्रेस/सर्वर से भेजा गया, क्या मेल-हेडर में छेड़छाड़ हुई है, और मेल भेजने वाले की पहचान कैसे की जाए, इन पहलुओं पर काम चल रहा है. साथ ही मेल में जिन नामों का जिक्र था, उन पर भी सुरक्षा बढ़ाई जा रही है और सम्बंधित चैनलों को सूचित कर प्रतिक्रिया मांगी गई है.

नेपाल की सियासत में नया मोड़: सुशीला को मिल सकती है पीएम की कुर्सी, सेना ने पलटी चाल

काठमांडू  नेपाल में सियासी संकट बरकरार है. Gen-Z प्रदर्शन के बाद नेपाल की कमान किसके हाथों में होगी, अब तक सस्पेंस से पर्दा नहीं हट पाया है. Gen-Z के विरोध प्रदर्शन के बाद ओली की सरकार गिर गई. केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद अंतरिम पीएम की तलाश जारी है. अंतरिम नेता चुनने को लेकर संवैधानिक संकट का समाधान ढूंढा जा रहा है. इस बीच नेपाल में एक और यूटर्न देखने को मिला है. नेपाल की पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की एक बार फिर नेपाली अंतरिम पीएम की रेस में आगे हो गई हैं. नेपाल में आधी रात को हुई एक बैठक में बाजी पलट गई. जी हां, नेपाल में अंतरिम सरकार के गठन को लेकर कवायद जारी है. सूत्रों का कहना है कि इसे लेकर गुरुवार देर रात एक सीक्रेट बैठक हुई. यह बैठक राष्ट्रपति भवन में हुई, जिसे शीतल निवास के नाम से जाना जाता है. इस अहम बैठक में नेपाली आर्मी चीफ अशोक राज सिग्देल और सुशीला कार्की मौजूद थीं. उनके अलावा, स्पीकर, राष्ट्रीय सभा के अध्यक्ष नारायण दहल और सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस प्रकाश सिंह राउत भी थे. इस मीटिंग में कई मसलों पर अलग-अलग संविधान विशेषज्ञों से बात हुई. बताया गया कि इस बैठक में भी यह सहमति बनी है कि सुशीला कार्की को ही नेपाल की कमान दी जाए. आधी रात वाली मीटिंग में बदली बाजी! सूत्रों का कहना है कि सुशीला कार्की पर ही अब तक सहमति बनती दिख रही है. नेपाल में ओली की सरकार को उखाड़ने वाले Gen-Z की भी पहली पसंद सुशीला कार्की ही हैं. शीर्ष सूत्रों के अनुसार, सुशीला कार्की के प्रधानमंत्री बनने की प्रबल संभावना है और गुरुवार रात ही इस पर सहमति बनी है. आज यानी शुक्रवार को इसका ऐलान हो सकता है. काठमांडू के मेयर बालेन उर्फ बालेंद्र शाह का भी सुशीला कार्की को समर्थन है. सूत्रों का दावा है कि बालेन शाह चुनाव जीत कर पीएम बनना चाहते हैं. यही कारण है कि उन्होंने खुद अंतरिम पीएम बनने के प्रस्ताव को ठुकराया है और सुशीला कार्की का समर्थन किया है. कैसे पीएम बनेंगी सुशीला कार्की? सूत्रों के मुताबिक, नेपाल सरकार चलाने के लिए अंतरिम प्रमुख के चयन को लेकर गतिरोध को दूर करने के लिए आधी रात को संकट प्रबंधन दल की बैठक हुई. इस अशांति के बीच राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने गुरुवार को शांति की अपील की और कहा कि उनका लक्ष्य संवैधानिक ढांचे के भीतर राजनीतिक संकट का समाधान खोजना है. सूत्रों ने न्यूज18 को बताया कि सुशीला कार्की को प्रधानमंत्री बनाया जाएगा और पहले उन्हें संसद के उच्च सदन में पेश किया जाएगा. आज होगा आधिकारिक ऐलान! सूत्रों ने बताया कि पौडेल 2015 के संविधान के आधार पर समाधान पर जोर दे रही हैं. उन्होंने बताया कि हालांकि राजनीतिक अंतरिम प्रधानमंत्री का कोई प्रावधान नहीं है, लेकिन कार्की को उच्च सदन में नामित करके एक जगह बनाई जाएगी और फिर उन्हें प्रधानमंत्री बनाया जाएगा. सूत्रों ने बताया कि इस प्रक्रिया के दौरान राष्ट्रपति आवश्यक प्रावधान करने के लिए एक अध्यादेश जारी कर सकते हैं. उन्होंने बताया कि यह घोषणा आज होने की संभावना है. सुशीला का हां ना और फिर  हां दरअसल, गुरुवार को दिन में खबर आई थी कि सुशीला कार्की ने पीएम की रेस से अपना नाम वापस ले लिया है. इसके बाद जेन जी ने कुलमन घिसिंग का नाम आगे बढ़ाया था. मगर कुलमन घिसिंग के नाम पर भी सहमति नहीं बनी. बताया जा रहा है कि आर्मी चीफ ने सुशीला कार्की को करीब 15 घंटे तक मनाया. फिलहाल, नेपाल में अब भी उथल-पुथल जारी है. आज का दिन नेपाल की सियासत में अहम है. आज आधिकारिक तौर पर ऐलान हो सकता है कि नेपाल का अंतरिम प्रधानमंत्री कौन होगा? यहां एक बात और सामने आई है कि नेपाल में अगले 6 महीने में चुनाव कराने की जिम्मेवारी अंतरिम सरकार पर ही होगी. नेपाल में आपस में ही भिड़े Gen-Z के गुट, सेना ने कर दिया 'खेला' नेपाल में भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर बैन के बाद भड़की Gen-Z ने सड़कों पर उतरकर प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को सत्ता की कुर्सी से उतरने पर मजबूर कर दिया. देश में जारी हिंसा और राजनीतिक उथल-पुथल के बीच अंतरिम सरकार के गठन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई है. केपी ओली ने मंगलवार (9 सितंबर 2025) को अपने पद से इस्तीफा दिया और तब से अंतरिम पीएम को लेकर कई नामों पर सियासी पारा चढ़ा हुआ है. आर्मी हेडक्वार्टर के बाहर भिड़े युवा काठमांडू में हुए हिंसक विरोध-प्रदर्शन के बाद अब नेपाल के युवा अंतरिम प्रधानमंत्री के नाम पर बंटे हुए नजर आ रहे हैं. आर्मी हेडक्वार्टर के बाहर उम्मीदवारों के नाम पर युवाओं के बीच हाथापाई हुई. 9 सितंबर को काठमांडू के मेयर और रैपर बैलेन शाह, 10 सितंबर को पूर्व चीफ जस्टिस सुशील कार्की और 11 सितंबर को कुलमान घीसिंग का नाम अंतरिम पीएम रेस में सबसे आगे रहा. अब इस लिस्ट में धरान के वर्तमान मेयर हरका राज संपांग राय उर्फ हरका संपांग का नाम भी शामिल हो गया है. पत्रकार से राजनेता बने रबी लामिछाने भी युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं, जिन्हें विरोध प्रदर्शन के दौरान जेल से छुड़ाया गया था. अंतरिम पीएम के नामों को लेकर मचा घमासान नेपाली मीडिया के मुताबिक कई युवा चाहते हैं कि बालेन, सुशीला कार्की या संपांग को अंतरिम पीएम बनाया जाए, जिसे लेकर गुरुवार (11 सितंबर 2025) को युवाओं में झड़प भी हुई. हालांकि अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है. फिलहाल Gen-Z, प्रतिनिधियों, राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल और सेना प्रमुख के बीच बातचीत चल रही है. पौडेल ने कहा, "मैं सभी पक्षों से अपील करता हूं कि वे इस बात पर विश्वास रखें कि आंदोलनकारी नागरिकों की मांगों को पूरा करने के लिए समस्या का जल्द से जल्द समाधान निकाला जा रहा है. संयम के साथ देश में शांति और व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें।" कई लोगों को उम्मीद थी कि राष्ट्रपति इस घटना के बाद सार्वजनिक रूप से सामने आएंगे और राष्ट्र को संबोधित करेंगे. आर्मी हेडक्वार्टर के बाहर इंतजार कर रहे युवा न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबकि सेना के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘‘हम अलग-अलग लोगों के साथ कई … Read more

उपराष्ट्रपति पद की शपथ ली सीपी राधाकृष्णन ने, जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के 53 दिन बाद दिखे सार्वजनिक रूप से

नई दिल्ली   सी पी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को भारत के उपराष्ट्रपति पद की शपथ ली। राष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राधाकृष्णन को उप राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई। इस दौरान पूर्व उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी अपनी पत्नी के साथ मौजूद थे। राधाकृष्णन के शपथ के बाद धनखड़ लगातार ताली बजाकर स्वागत करते दिखे। पूर्व उपराष्ट्रपति कार्यक्रम में पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के साथ बैठे हुए थे। धनखड़ के बाई तरफ उनकी पत्नी बैठी थीं। लंबे समय बाद सार्वजनिक कार्यक्रम में हुए शामिल पूर्व उपराष्ट्रपति लंबे समय बाद किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में नजर आए। जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों से अचानक उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद से वह लंबे समय तक सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए थे। इसके साथ ही उनका किसी भी तरह का कोई बयान सामने नहीं आया था। विपक्ष ने धनखड़ के नजरबंद होने के भी आरोप लगाए थे। धनखड़ की चुप्पी पर उठाए थे सवाल कांग्रेस ने उपराष्ट्रपति चुनाव के दौरान भी जगदीप धनखड़ की चुप्पी को लेकर सवाल उठाए थे। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मंगलवार को कहा था कि देश पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अप्रत्याशित इस्तीफे पर उनके बयान का इंतजार कर रहा है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा था कि पिछले 50 दिनों से जगदीप धनखड़ ने अपनी असामान्य चुप्पी साध रखी है। वेणुगोपाल का कहना था कि जब उनके उत्तराधिकारी के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो रही है, तब भी देश उनके ऐतिहासिक और अप्रत्याशित इस्तीफे पर बयान का इंतजार कर रहा है। जब उन्होंने केंद्र सरकार की ओर से किसानों की घोर उपेक्षा, सत्ता में बैठे लोगों के 'अहंकार' से पैदा होने वाले खतरों और अन्य मुद्दों पर चिंता व्यक्त की थी। NDA उम्मीदवार को कितने वोट मिले? एनडीए की ओर से उपराष्ट्रपति के प्रत्याशी सीपी राधाकृष्णन को 452 मत प्राप्त हुए। वहीं, विपक्षी उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी को 300 मत मिले। 9 सितंबर को ही वोटिंग के बाद परिणामों में घोषणा की गई। उपराष्ट्रपति परिणामों की घोषणा के बाद पीएम मोदी ने सीपी राधाकृष्णन को बधाई दी। पीएम मोदी में विश्वास जताया कि नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति भारत के संवैधानिक मूल्यों को और मजबूत करेंगे तथा संसदीय संवाद में सकारात्मक योगदान देंगे। महाराष्ट्र के राज्यपाल थे सीपी राधाकृष्णन बता दें कि सीपी राधाकृष्णन महाराष्ट्र के राज्यपाल थे। अब चूंकि वह देश के उपराष्ट्रपति बन गए हैं। इस स्थिति में महाराष्ट्र में गवर्नर का पद खाली हो गया। नए राज्यपाल की नियुक्ति तक गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को अपने कर्तव्यों के अतिरिक्त, महाराष्ट्र के राज्यपाल के कार्यों का भी कार्यभार सौंपा गया है। राष्ट्रपति ने इस संबंध में एक आधिकारिक बयान भी जारी किया है। राधाकृष्णन ने एक दिन पहले राज्यपाल पद से इस्तीफा दिया अपनी नई जिम्मेदारी की तैयारी में राधाकृष्णन ने गुरुवार को महाराष्ट्र के राज्यपाल पद से औपचारिक रूप से इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी आधिकारिक बयान में इसकी पुष्टि की गई है। उनके इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति मुर्मू ने गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को महाराष्ट्र के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है। राधाकृष्णन को उम्मीद से ज्यादा 14 वोट ज्यादा मिले राज्यसभा के महासचिव और निर्वाचन अधिकारी पीसी मोदी के मुताबिक 781 में से 767 सांसदों ने वोट डाले, वोटिंग 98.2% हुई। इनमें से 752 मत वैलिड और 15 इनवैलिड थे। एनडीए को 427 सांसदों का समर्थन प्राप्त था, लेकिन YSRCP के 11 सांसदों ने भी राधाकृष्णन का समर्थन किया। 13 सांसदों ने चुनाव में मतदान से परहेज किया। इनमें बीजू जनता दल (BJD) के सात सांसद, भारत राष्ट्र समिति (BRS) के चार, शिरोमणि अकाली दल का एक सांसद और एक निर्दलीय सांसद शामिल हैं। दिलचस्प बात यह है कि एनडीए उम्मीदवार को उम्मीद से 14 वोट ज्यादा मिले, जिससे विपक्षी खेमे में क्रॉस-वोटिंग की अटकलें हैं।  

80 साल के पूर्व राष्ट्रपति को खाली करना पड़ा सरकारी महल, श्रीलंका में बदला नियम

 कोलंबो  श्रीलंका की राजधानी कोलंबो के पॉश इलाके सिनामैन गार्डेन में मौजूद भव्य और महल जैसे दिखने वाले एक घर में सामान समेटे जा रहे हैं. यहां हलचल है. 10 सालों से ये घर पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे का निवास था. महिंदा राजपक्षे आने वाले नवंबर में 80 साल के हो जाएंगे, लेकिन बुढ़ापे में उन्हें अपना घर खाली करना पड़ रहा है. ये श्रीलंका में हाल ही में पास हुए एक कानून का असर है.  श्रीलंका में पूर्व राष्ट्रपतियों की सारी सुविधाएं छीन लेने वाला नया कानून Presidents' Entitlement (Repeal) Act पास हो गया है. इसके बाद पूर्व राष्ट्रपतियों और उनकी विधवाओं को आधिकारिक आवास, मासिक भत्ता, सुरक्षा स्टाफ, वाहन, सचिवालय सुविधाएं और अन्य लाभ मिलने बंद हो गए हैं. अब देश के सभी पूर्व राष्ट्रपतियों को सरकारी आवास खाली करना पड़ रहा है.  ऐसा ही माहौल पूर्व राष्ट्रपति चंद्रिका कुमार तुंगा के घर भी है. हालांकि उन्होंने मौजूदा सरकार से कुछ मोहलत मांग ली है. वे अपना घर 2 महीने में खाली करेंगी. दिवालिया होने के कगार पर पहुंच चुके श्रीलंका में जब पिछले साल चुनाव हुए थे तो राष्ट्रपति चुनाव लड़ रहे अनुरा कुमारा दिसानायके ने देश के लोगों से वादा किया था कि वे पूर्व राष्ट्रपतियों की शाहखर्ची पर लगाम लगाएंगे. महंगाई और नेताओं के मनमानी खर्चे से त्रस्त श्रीलंका की जनता ने अनुरा दिसानायके के इस चुनावी वादे को सपोर्ट किया.  राष्ट्रपति बनने के बाद अनुरा कुमारा दिसानायके ने इस बिल पर काम शुरू किया. श्रीलंका सरकार का एक आंकड़ा कहता है कि 2024 में पूर्व राष्ट्रपतियों के ताम-झाम में सरकारी खजाने से 11 अरब श्रीलंकाई रुपये खर्च हुए.  यह विधेयक जुलाई 2025 में कैबिनेट ने मंजूर किया और 31 जुलाई को गजट में प्रकाशित हुआ. सुप्रीम कोर्ट ने राजपक्षे परिवार की चुनौती को खारिज करते हुए 9 सितंबर को इसे साधारण बहुमत से पारित करने की मंजूरी दी. संसद ने 10 सितंबर को 151-1 के मतों से इसे पारित किया.  अब श्रीलंका में पूर्व राष्ट्रपतियों को सिर्फ पेंशन मिला करेगी. उनके सभी लाभ समाप्त हो गए हैं.   इसी के साथ पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने 11 सितंबर को कोलंबो का आधिकारिक निवास खाली कर दिया है. महिंदा राजपक्षे अब कोलंबो से 190 किलोमीटर दूर तंगाल्ले में रहेंगे. तंगाल्ले स्थित कार्लटन हाउस ही वह जगह है जहां राजपक्षे ने 1970 में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी. श्रीलंका की पूर्व राष्ट्रपति चंद्रिका कुमार तुंगा ने नया कानून लागू होने के बाद कहा है कि उन्हें कोलंबो में एक घर मिल गया है. इस घर का अभी नवीनीकरण चल रहा है. उन्होंने बताया कि नियमों के अनुसार सरकारी घर में रहने वाले किसी भी व्यक्ति को घर खाली करने से पहले तीन महीने का नोटिस देना ज़रूरी है. उन्होंने कहा कि उन्हें अभी तक इस बारे में कोई सूचना नहीं दी गई है.  हालाकि उन्होंने कहा कि उन्हें घर खाली करने में दो महीने से ज़्यादा समय नहीं लगेगा.  चंद्रिका कुमार तुंगा ने कहा है कि तीन हफ्ते पहले वे गिर गई थीं और इस दौरान उनकी कूल्हे की हड्डी टूट गई. उन्होंने श्रीलंका के अंग्रेजी अखबार डेली मिरर से बात करते हुए कहा, "मेरे कूल्हे की सर्जरी हुई. यह एक गंभीर सर्जरी है. मुझे दिन में दो-तीन बार फ़िज़ियोथेरेपी करवानी पड़ती है. इसलिए मैं इस समय उस नए घर में न तो जा सकती हूँ और न ही कोई काम कर सकती हू." चंद्रिका कुमार तुंगा ने नए कानून के लागू होने तक राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके को पत्र लिखकर सरकार द्वारा निर्धारित किराया देकर जीवन भर इसी जगह रहने की अनुमति मांगी थी. लेकिन इसे अस्वीकार कर दिया गया.  तब तुंगा ने कहा था कि वह नई व्यवस्था के तहत उसी जगह पर और रहने की इच्छा रखती है क्योंकि बुढ़ापे में और 15 सालों में दो बार कैंसर से जूझने के बाद उनके लिए घर से बाहर निकलना मुश्किल था.  श्रीलंका में वर्तमान में पांच जीवित पूर्व राष्ट्रपति हैं. हालांकि जब सरकार ने संसद में विधेयक पेश किया था तब उनमें से केवल तीन ही इन सुविधाओं का लाभ उठा रहे थे. 

चार्ली कर्क पर जानलेवा हमला: गर्दन पर वार, कैमरे में कैद हुई वारदात

न्यूयॉर्क अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जिगरी दोस्त चार्ली कर्क (Charlie Kirk) की हत्या ने गन वायलेंस और सिक्योरिटी को लेकर नए सिरे से बहस छेड़ दी है. कर्क की यूटा यूनिवर्सिटी में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. अब शूटर का मौके से फरार होते एक वीडियो वायरल हो रहा है. कर्क की हत्या की जांच कर रही एफबीआई की टीम ने एक नया वीडिया जारी किया है, जिसमें कर्क की हत्या के कुछ सेकंड बाद ही एक एक संदिग्ध को यूटा यूनिवर्सिटी की छत से भागते देखा जा सकता है. इस वीडियो में देखा जा सकता है कि संदिग्ध पहले तो भागता है और फिर कैंपस से छत से छलांग लगा देता है. कंजरवेटिव चार्ली कर्क की यूटा वैली यूनिवर्सिटी में उस समय गोली मारकर हत्या कर दी गई, जब वह छात्रों के सवालों का जवाब दे रहे थे. उन्हें सुनने के लिए कैंपस में लगभग तीन हजार लोग जुटे थे. यह कार्यक्रम कैंपस में खुले में हो रहा था.  एफबीआई का कहना है कि यह काम किसी स्किल्ड शूटर का है, जो काले कपड़ों में छत पर छिपा था. FBI ने इसे प्रोफेशनल हिट बताया, लेकिन अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं है. एफबीआई ने एक लाख डॉलर का इनाम घोषित किया है.  चार्ली कर्क टर्निंग पॉइंट यूएसए (TPUSA) के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर थे. यह एक छात्र संगठन है जिसका मकसद लिबरल अमेरिकी कॉलेजों में कंजर्वेटिव विचारधारा का प्रचार-प्रसार करना है. वह 32 साल के थे और ट्रंप के करीबियों में से एक थे. वह अमेरिका के सबसे हाई प्रोफाइल कंजर्वेटिव एक्टिविस्ट और मीडिया पर्सनैलिटीज में से एक थे।. कर्क के पिता आर्किटेक्ट थे. उन्होंने शिकागो के एक कॉलेज से पढ़ाई की लेकिन राजनीति में आने के लिए पढ़ाई छोड़ दी. कर्क ने 2020 में 'The Maga Doctrine' किताब लिखी थी, जिसमें ट्रंप के 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' का भी जिक्र था. चार्ली और उनकी टीम ने पिछले साल हुए राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप और रिपब्लिकन उम्मीदवारों के लिए समर्थन जुटाने में भी अहम भूमिका निभाई थी.  कर्क अपने विवादित बयानबाजी के लिए हमेशा चर्चा में रहते थे. उनके धुर दक्षिणपंथी विचारों की वजह से वह हमेशा लिबरल्स के निशाने पर रहते थे. वह स्लेवरी से लेकर गर्भपात, महिला विरोधी बयानों और रंगभेद पर की गई अपनी टिप्पणियों की वजह से विवादित थे. कैसे दिया हत्या को अंजाम घटनास्थल के वीडियो में दिख रहा है कि चार्ली एक बड़ी भीड़ को संबोधित कर रहे हैं, तभी एक गोली चलने की आवाज आई. कैमरे के तेजी से हिलने से पहले चार्ली अपनी कुर्सी पर गिरता हुआ दिखे और दर्शकों में घबराहट की आवाजें आने लगीं. जांचकर्ताओं ने कहा कि उनका मानना ​​है कि गोली कैंपस की छत से चली थी, जो काले कपड़े पहने किसी व्यक्ति द्वारा चलाई गई थी. यह एक टारगेट बनाकर हत्या करने का मामला प्रतीत होता है. इस इवेंट में मौजूद यूटाह के पूर्व कांग्रेसी जेसन चाफेट्ज ने फॉक्स न्यूज को बताया कि गोली तब चली जब चार्ली कर्क भीड़ के साथ सवाल-जवाब सेशन कर रहे थे. बुरी तरह से सहमे हुए चाफेट्ज ने नेटवर्क को बताया, "पहला सवाल धर्म के बारे में था. वह लगभग 15-20 मिनट तक बोलते रहे. दिलचस्प बात यह है कि दूसरा सवाल ट्रांसजेंडर शूटर्स, सामूहिक शूटर्स के बारे में था और उसी के बीच में गोली चल गई… जैसे ही वह गोली चली, वह पीछे गिर गया. हर कोई डेक से टकराया… बहुत सारे लोग चिल्लाने लगे और फिर सभी लोग भागने लगे."

‘ज्ञान भारतम् पोर्टल’ का शुभारंभ आज, पीएम मोदी लेंगे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन की अध्यक्षता

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज दिल्ली के विज्ञान भवन में 'ज्ञान भारतम्' पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। सम्मेलन का उद्देश्य भारत की अमूल्य पांडुलिपि धरोहर को फिर से जीवंत बनाना और उसे वैश्विक ज्ञान संवाद के केंद्र में लाना है। पीएम मोदी इस अवसर पर 'ज्ञान भारतम् पोर्टल' का शुभारंभ करेंगे, जो पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण, संरक्षण और सार्वजनिक पहुंच को बढ़ावा देने के लिए एक समर्पित डिजिटल प्लेटफॉर्म होगा। सम्मेलन का आयोजन 11 सितंबर से शुरू हुआ है, जो 13 सितंबर तक चलेगा और इसका मुख्य विषय है "पांडुलिपि धरोहर के माध्यम से भारत के ज्ञान धरोहर को पुनः प्राप्त करना।" इस सम्मेलन में देश-विदेश के प्रमुख विद्वान, संरक्षणकर्मी, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ और नीति विशेषज्ञ एकत्र होंगे। वे भारत की बेजोड़ पांडुलिपि धरोहर को पुनर्जीवित करने के रास्तों पर चर्चा करेंगे और उसे वैश्विक ज्ञान चर्चा में एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाने के लिए विचार-विमर्श करेंगे। सम्मेलन के दौरान एक विशेष प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी, जिसमें दुर्लभ पांडुलिपियों को प्रदर्शित किया जाएगा। इसके अलावा, पांडुलिपि संरक्षण, डिजिटलीकरण प्रौद्योगिकियां, मेटाडेटा मानक, कानूनी ढांचे, सांस्कृतिक कूटनीति, और प्राचीन लिपियों का लेखन विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विद्वानों द्वारा प्रस्तुतियां भी दी जाएंगी। इस सम्मेलन का उद्देश्य भारत के प्राचीन ज्ञान और संस्कृति को पुनः जागृत करना है। पांडुलिपियां हमारे ऐतिहासिक ज्ञान, विज्ञान, चिकित्सा, साहित्य और दर्शन का अमूल्य स्रोत हैं, जिन्हें सुरक्षित रखने और उन्हें डिजिटल रूप में दुनिया भर में उपलब्ध कराने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम होगा। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से, पांडुलिपियों को डिजिटलीकरण के जरिये संरक्षित किया जाएगा, जिससे उन्हें कहीं से भी एक्सेस किया जा सकेगा और उनकी जानकारी दुनिया भर में साझा हो सकेगी। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन के दौरान, सरकार के इस कदम को लेकर संस्कृति, तकनीकी विकास और शोध जगत में एक नई दिशा दिखने की उम्मीद जताई जा रही है।

अब न अमेरिका पर निर्भरता, न फ्रांस पर… भारत के फाइटर जेट को मिलेगा स्वदेशी इंजन

नई दिल्ली भारत हमेशा से अपने फाइटर जेट इंजन को स्वदेशी बनाने की कोशिश कर रहा है, ताकि अमेरिका या अन्य देशों पर निर्भरता खत्म हो. हाल ही में फ्रांस की कंपनी साफरान (Safran) के साथ 120 kN थ्रस्ट वाले इंजन के विकास का समझौता हुआ है, जो एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के लिए बनेगा.  यह प्रोजेक्ट 61,000 करोड़ रुपये का है. 10 साल में पूरा होगा. आइए, समझतें हैं कि यह प्रोजेक्ट भारत के लिए कितना महत्वपूर्ण है?  भारत की इंजन समस्या: विदेशी निर्भरता भारत के फाइटर जेट्स जैसे तेजस, सुखोई-30 और राफेल में ज्यादातर इंजन विदेशी हैं. तेजस में GE F404 (अमेरिका) और सुखोई में AL-31FP (रूस) लगे हैं. कावेरी इंजन प्रोजेक्ट 1980 के दशक से चल रहा है, लेकिन यह 90-100 kN थ्रस्ट नहीं दे पाया. कावेरी को तेजस से अलग कर दिया गया. अब इसका डेरिवेटिव वर्जन ड्रोन (Ghatak UCAV) के लिए इस्तेमाल हो रहा है. कावेरी पर 35 साल और 400 मिलियन डॉलर खर्च हुए, लेकिन तकनीकी चुनौतियां (जैसे सिंगल क्रिस्टल ब्लेड और थर्मल कोटिंग) ने इसे रोक दिया. इस निर्भरता से समस्या बढ़ी. 2021 में GE F404 इंजन की डिलीवरी में देरी हुई, जिससे तेजस Mk1A प्रोडक्शन रुका. रूस-यूक्रेन युद्ध ने AL-31FP की सप्लाई प्रभावित की. AMCA (5th जेनरेशन स्टील्थ फाइटर) के लिए 110-120 kN इंजन चाहिए, जो स्वदेशी न होने से देरी हो रही है. साफरान प्रोजेक्ट इसी समस्या का समाधान है. साफरान प्रोजेक्ट: क्या है और कैसे काम करेगा? साफरान (फ्रांस की कंपनी, जो राफेल के M88 इंजन बनाती है) के साथ यह प्रोजेक्ट 22 अगस्त 2025 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने घोषित किया. यह 120 kN थ्रस्ट वाला टर्बोफैन इंजन AMCA Mk2 के लिए बनेगा. लागत 7 बिलियन डॉलर (लगभग 61,000 करोड़ रुपये) है. 100% टेक्नोलॉजी ट्रांसफर होगा. समझौते की मुख्य बातें     10 साल का विकास: 2035 तक इंजन तैयार. AMCA के साथ एकीकृत.     सह-विकास: GTRE (DRDO का लैब) और साफरान मिलकर डिजाइन करेंगे.     स्वदेशी निर्माण: भारत में ही इंजन बनेंगे, जिसमें सिंगल क्रिस्टल ब्लेड, थर्मल बैरियर कोटिंग और एडवांस्ड कॉम्बस्टर जैसी तकनीकें शामिल.     निर्यात संभावना: AMCA के साथ निर्यात बढ़ेगा, क्योंकि स्वदेशी इंजन से लागत कम होगी. रक्षा मंत्रालय ने साफरान को चुना क्योंकि इसका प्रस्ताव सबसे फायदेमंद था. अमेरिका की GE और ब्रिटेन की Rolls-Royce भी दौड़ में थे, लेकिन साफरान ने 100% ट्रांसफर और कावेरी से लिंकेज का वादा किया. साफरान पहले कावेरी पर सहयोग कर चुकी है (2016 में €1 बिलियन का ऑफर). साफरान प्रोजेक्ट का महत्व: आत्मनिर्भर भारत के लिए मील का पत्थर यह प्रोजेक्ट भारत के रक्षा क्षेत्र के लिए क्रांतिकारी है. इसके फायदे… विदेशी निर्भरता खत्म: कावेरी की असफलता के बाद भारत GE, Safran और Rolls-Royce पर निर्भर था. अब AMCA, TEDBF और भविष्य के फाइटर जेट्स के लिए स्वदेशी इंजन मिलेगा. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह 5th जेनरेशन फाइटर के लिए बड़ा कदम है. AMCA प्रोग्राम को गति: AMCA (5th जेनरेशन स्टील्थ फाइटर) 2035 तक तैयार होगा. पहले GE F414 इंजन इस्तेमाल होगा, लेकिन साफरान इंजन से AMCA Mk2 स्वदेशी बनेगा. लागत 15,000 करोड़ रुपये की और 5 प्रोटोटाइप बनेंगे. तकनीकी आत्मनिर्भरता: इंजन सबसे जटिल भाग है. साफरान से 100% ट्रांसफर मिलने से भारत सिंगल क्रिस्टल ब्लेड, लेजर ड्रिलिंग और हॉट-एंड कोटिंग जैसी तकनीक सीखेगा. कावेरी का अनुभव (49 kN थ्रस्ट) साफरान प्रोजेक्ट को मदद करेगा. आर्थिक और निर्यात लाभ: इंजन 40% लागत होता है. स्वदेशी इंजन से AMCA सस्ता बनेगा. निर्यात बढ़ेगा. HAL और GTRE को नया बिजनेस मिलेगा. MSMEs को भी अवसर. रणनीतिक सुरक्षा: युद्ध या प्रतिबंध के समय विदेशी इंजन की सप्लाई रुक सकती है. स्वदेशी इंजन से भारत सुरक्षित रहेगा. चुनौतियां और भविष्य प्रोजेक्ट में चुनौतियां हैं: फंडिंग (केवरी पर 35 साल में $400 मिलियन खर्च, लेकिन असफल), तकनीकी जटिलताएं और समय (10 साल). लेकिन साफरान का अनुभव (M88 इंजन) मदद करेगा. कावेरी डेरिवेटिव इंजन अब ड्रोन (Ghatak UCAV) के लिए इस्तेमाल हो रहा है. भविष्य में कावेरी 2 (90-110 kN) और कावेरी 3 (125 kN) साफरान से प्रेरित होंगे. 2025 में साफरान हैदराबाद में मेंटेनेंस सेंटर खोलेगा.