samacharsecretary.com

माइक्रोसॉफ्ट विवाद: कर्मचारियों ने मचाया बवाल, इज़राइली सेना के साथ प्रोजेक्ट पर कंपनी कर रही समीक्षा

 वॉशिंगटन माइक्रोसॉफ्ट मुख्यालय में बुधवार को कर्मचारियों ने जमकर बवाल किया। इस दौरान हुए विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस अधिकारियों ने 18 लोगों को गिरफ्तार किया। इस बीच तकनीकी कंपनी ने गाजा में चल रहे युद्ध के दौरान इस्राइली सेना की ओर से अपनी तकनीक के इस्तेमाल की तत्काल समीक्षा का वादा किया। वाशिंगटन के रेडमंड स्थित माइक्रोसॉफ्ट परिसर में लगातार दो दिनों तक चले विरोध प्रदर्शन के दौरान इस तकनीकी दिग्गज कंपनी से इस्राइल के साथ अपने व्यापारिक संबंध तुरंत समाप्त करने की मांग की गई। कंपनी के लोगो और नाम पर खून के रंग जैसा लाल रंग फेंका रेडमंड पुलिस विभाग के मुताबिक, मंगलवार के उलट जब कार्यालय भवनों के बीच एक प्लाजा पर कब्जा किए करीब 35 प्रदर्शनकारियों को माइक्रोसॉफ्ट की ओर से जाने के लिए कहने पर वे वहां से चले गए। इसके बाद जब बुधवार को कंपनी ने पुलिस को प्रदर्शनकारियों के और उग्र होने की जानकारी दी, तब प्रदर्शनकारियों और आक्रामक हो गए। प्रदर्शनकारियों ने कंपनी के लोगो और नाम पर खून के रंग जैसा लाल रंग फेंका। चेतावनी के बाद हिरासत में ले लिया गया पुलिस प्रवक्ता जिल ग्रीन ने कहा, 'हमने प्रदर्शनकारियों से वापस जाने को कहा। हमने अपील की कि कृपया वापस चले जाइए वरना आपको गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इसके बाद भी उन्होंने वहां से न जाने का फैसला किया। इसलिए उन्हें हिरासत में ले लिया गया।' पूरा मामला समझिए माइक्रोसॉफ्ट ने पिछले हफ्ते के अंत में कहा था कि वह ब्रिटिश अखबार 'द गार्जियन' की ओर से लगाए गए उन आरोपों की जांच के लिए एक कानूनी फर्म से संपर्क कर रहा है, जिनमें कहा गया था कि इस्राइली रक्षा बलों ने गाजा और पश्चिमी तट पर फलस्तीनियों की व्यापक निगरानी के जरिए प्राप्त फोन कॉल डेटा को संग्रहीत करने के लिए माइक्रोसॉफ्ट के एज्योर क्लाउड कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया था। कंपनी ने शुक्रवार को जारी एक बयान में कहा, 'माइक्रोसॉफ्ट की मानक सेवा शर्तें इस प्रकार के उपयोग को प्रतिबंधित करती हैं।' साथ ही यह भी कहा गया कि रिपोर्ट में जो आरोप लगाए गए हैं, जिनकी पूरी और तत्काल समीक्षा की जानी चाहिए।

एफबीआई और भारतीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई: सिंडी रोड्रिगेज गिरफ्तार, 6 वर्षीय बेटे की हत्या का आरोप

वॉशिंगटन अमेरिका की संघीय जांच एजेंसी एफबीआई ने भारतीय पुलिस के साथ समन्वय में एक ऑपरेशन चलाकर सिंडी रोड्रिगेज सिंह नामक महिला को गिरफ्तार किया है। सिंडी रोड्रिगेज अमेरिका में वांछित थी और उस पर अपने ही 6 साल के बेटे की हत्या का गंभीर आरोप है। एफबीआई ने भारतीय पुलिस, इंटरपोल के साथ समन्वय कर भारत से रोड्रिगेज को गिरफ्तार किया। रोड्रिगेज को अब वापस अमेरिका ले जाया जा रहा है। जहां एफबीआई सिंडी रोड्रिगेज को टेक्सास पुलिस को सौंपेगी। टेक्सास में ही सिंडी के खिलाफ मुकदमा दर्ज है। एफबीआई निदेशक काश पटेल ने दी जानकारी एफबीआई के निदेशक काश पटेल ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में बताया कि एफबीआई ने अमेरिका के शीर्ष 10 भगोड़े अपराधियों में से एक सिंडी रोड्रिगेज सिंह को गिरफ्तार किया है। सिंडी अपने बेटे की हत्या के आरोप में वांछित थी। काश पटेल ने बताया कि मार्च 2023 में टेक्सास के एवरमैन में पुलिस ने सिंडी के बेटे की तलाश शुरू की, क्योंकि वह कई दिनों से दिखाई नहीं दिया था। सिंडी ने पुलिस से बेटे के बारे झूठ बोला और पुलिस को गुमराह किया। पुलिस पूछताछ के बाद सिंडी अमेरिका से फरार होकर भारत पहुंच गई। अक्तूबर 2023 में सिंडी के खिलाफ बेटे की हत्या का मामला दर्ज किया गया। उसी साल नवंबर में पुलिस ने सिंडी की गिरफ्तारी का वारंट जारी कर दिया। काश पटेल ने बताया कि बीते सात महीनों में एफबीआई ने शीर्ष 10 भगोड़ों में से चार को गिरफ्तार किया गया है। काश पटेल ने सहयोग के लिए भारतीय पुलिस और प्रशासन को धन्यवाद भी दिया है। सिंडी रोड्रिगेज पर 25 हजार डॉलर का इनाम घोषित था। सिंडी रोड्रिगेज मेक्सिको और भारतीय मूल की है। 

उपराष्ट्रपति चुनाव: सुदर्शन रेड्डी का नामांकन, विपक्ष के दिग्गज नेताओं की मौजूदगी

 नई दिल्ली INDIA ब्लॉक के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार  सुदर्शन रेड्डी ने अपना नामांकन दाखिल कर दिया है. इस मौके पर सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष-राज्यसभा नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, सपा नेता रामगोपाल यादव, एनसपी (SP) प्रमुख शरद पवार, शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत समेत विपक्ष के तमाम बड़े नेता मौजूद रहे. इससे पहले एनडीए उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन ने कल नामांकन दाखिल किया था. सूत्रों के अनुसार, सुदर्शन रेड्डी चार सेट में नामांकन दाखिल किया. सेट में 20 प्रस्तावक और 20 समर्थक शामिल रहे. बी. सुदर्शन रेड्डी ने नामांकन दाखिल करने से पहले स्वतंत्रता सेनानियों और महान नेताओं को श्रद्धांजलि अर्पित की. नंबर गेम में भले ही विपक्ष पीछे हो, लेकिन उसने भी मुकाबले को दिलचस्प बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है. खास बात यह है कि विपक्ष ने भी दक्षिण भारत से ही उम्मीदवार उतारा है. ऐसे में इस बार का चुनाव “दक्षिण बनाम दक्षिण” की तस्वीर पेश कर रहा है. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक्स (X) पर नामांकन का कार्यक्रम साझा किया. विपक्षी INDIA गठबंधन के तमाम नेता सुबह 11 बजे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कक्ष में एकत्र होंगे. इसके बाद वे सामूहिक रूप से राज्यसभा महासचिव और इस चुनाव के रिटर्निंग ऑफिसर पी.सी. मोदी के कार्यालय जाएंगे और नामांकन दाखिल करेंगे. विपक्ष के 'सुदर्शन चक्र' में कौन-कौन से दल उलझेंगे, कौन एनडीए का देगा साथ?  उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए ने सीपी राधाकृष्णन को उम्मीदवार बनाया तो कांग्रेस नेतृत्व वाले इंडिया ब्लॉक ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बी. सुदर्शन रेड्डी को संयुक्त उम्मीदवार बनाया है. इसके चलते उपराष्ट्रपति पद के चुनाव का मुकाबला अब काफी रोचक हो गया है, क्योंकि इंडिया ब्लॉक ने सुदर्शन के नाम का ऐलान करते हुए साफ कर दिया है कि यह वैचारिक लड़ाई है. सीपी राधाकृष्णन के ज़रिए बीजेपी के 'तमिल' दांव में फंसे इंडिया ब्लॉक ने मंगलवार को उपराष्ट्रपति पद के लिए गैर-राजनीतिक चेहरे पर भरोसा जताकर जबरदस्त 'सुदर्शन चक्र' चलाया है. बी. सुदर्शन को उम्मीदवार बनाकर विपक्ष को एकजुट रखने के साथ-साथ सत्तापक्ष के सहयोगी और समर्थक दलों को भी उलझा दिया है. एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन तमिलनाडु से आते हैं, जबकि इंडिया ब्लॉक के प्रत्याशी बी. सुदर्शन रेड्डी तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले से हैं, जो एक समय आंध्र प्रदेश में हुआ करता था. उपराष्ट्रपति चुनाव में बीजेपी का सियासी पलड़ा भले ही भारी हो, लेकिन कांग्रेस ने बी. सुदर्शन को उतारकर विपक्षी एकता का संदेश देने के साथ-साथ एनडीए के सहयोगी दलों को असमंजस में डाल दिया है. विपक्ष ने गैर-राजनीतिक चेहरे को उतारा इंडिया ब्लॉक के उम्मीदवार बी. सुदर्शन गैर-राजनीतिक चेहरे हैं, उनका किसी भी सियासी दल से जुड़ाव नहीं रहा है. यही वजह है कि विपक्ष पूरी तरह एक साथ खड़ा नजर आ रहा है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, एनसीपी के अध्यक्ष शरद पवार, सपा के सांसद धर्मेंद्र यादव, डीएमके सांसद कनिमोझी और टीएमसी सांसद शताब्दी रॉय सहित इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने उपराष्ट्रपति के लिए बी. सुदर्शन को विपक्ष का संयुक्त उम्मीदवार घोषित किया. 2022 के उपराष्ट्रपति चुनाव में वोटिंग से दूर रहने वाली ममता बनर्जी की पार्टी पूरी मुस्तैदी के साथ खड़ी है. रेड्डी पर आम सहमति बनने के बाद, आम आदमी पार्टी से लेकर ममता तक साथ हैं. टीएमसी नेता डेरेक ओ'ब्रायन ने अरविंद केजरीवाल से मुलाकात करके सुदर्शन रेड्डी के नाम पर समर्थन ले लिया है. बी. सुदर्शन के नाम पर इंडिया ब्लॉक पूरी तरह से एकजुट खड़ा नजर आ रहा है. इसके अलावा इंडिया ब्लॉक से अलग हो चुकी आम आदमी पार्टी ने बी. सुदर्शन को समर्थन दिया है. आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने कहा कि यह लड़ाई केवल उपराष्ट्रपति चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और संविधान के बीच की लड़ाई है. उनका कहना था कि बीजेपी के उम्मीदवार आरएसएस से जुड़े हुए हैं, जबकि विपक्षी दलों के साझा उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी कभी किसी राजनीतिक दल या किसी विशेष विचारधारा से नहीं जुड़े. वे सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश रह चुके हैं और हमेशा निष्पक्षता और ईमानदारी के लिए जाने जाते हैं. विपक्ष के 'सुदर्शन चक्र' में उलझे दल बीजेपी ने सीपी राधाकृष्णन के नाम का ऐलान कर डीएमके को जिस तरह से कशमकश में फंसा दिया था, उसी तरह अब इंडिया ब्लॉक की तरफ से बी. सुदर्शन के उम्मीदवार बनने के बाद चंद्रबाबू नायडू, जगन मोहन रेड्डी और केसीआर जैसे नेताओं के लिए धर्मसंकट पैदा हो गया है. बी. सुदर्शन रेड्डी का जन्म आंध्र प्रदेश के रंगारेड्डी जिले में हुआ है, जो फिलहाल अब तेलंगाना का हिस्सा है. इस तरह से तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के सियासी क्षत्रपों को भी साधने का दांव माना जा रहा है. आंध्र प्रदेश में टीडीपी सत्ता में है तो वाईएसआर कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल है. तेलंगाना में बीआरएस विपक्ष में है. बीआरएस और वाईएसआर न ही एनडीए के साथ हैं और न ही इंडिया ब्लॉक के साथ हैं. इस तरह से उपराष्ट्रपति के चुनाव में टीडीपी से लेकर वाईएसआर और केसीआर की भूमिका काफी अहम है. इसके अलावा बीजेडी भी किसी भी गठबंधन के साथ नहीं है. एनडीए के बड़े सहयोगी टीडीपी के प्रमुख चंद्रबाबू नायडू आंध्र प्रदेश के सीएम हैं. टीडीपी ने सुदर्शन रेड्डी के नाम से पहले एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन के साथ होने का दावा किया था, लेकिन अब उसके सामने कशमकश की स्थिति खड़ी हो गई है. यही धर्मसंकट वाईएसआर कांग्रेस के जगन मोहन रेड्डी के साथ भी खड़ी हो गई है. विपक्ष ने तेलुगू प्रत्याशी उतारकर जगन रेड्डी को सियासी तौर पर उलझा दिया है. तेलंगाना से ताल्लुक रखने वाले बी. सुदर्शन को प्रत्याशी बनाकर राज्य में मुख्य विपक्षी दल बीआरएस के सामने भी टेंशन बढ़ा दी है. केसीआर की बीआरएस के पास राज्यसभा में तीन सदस्य हैं और एक लोकसभा सांसद हैं. बीआरएस सांसद केआर सुरेश ने कहा कि वे राष्ट्रहित के मुद्दों पर सरकार का समर्थन करते रहे हैं, लेकिन उपराष्ट्रपति चुनाव में अब किसे समर्थन देना है, इस पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है. बीजेडी ने भी अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं, लेकिन 2024 में ओडिशा की सियासत में आए परिवर्तन के बाद नवीन पटनायक ने बीजेपी से दूरी बनाई है. विपक्ष ने जिस तरह गैर-राजनीतिक चेहरे … Read more

महाराष्ट्र में रेल निर्माण स्थल पर त्रासदी, 4 बच्चों की झुलसती मौत

यवतमाल  महाराष्ट्र के यवतमाल जिले के दारव्हा में एक दुखद घटना सामने आई है, जहां रेलवे निर्माण के लिए खोदे गए एक गहरे गड्ढे में डूबकर चार मासूम बच्चों की जान चली गई. यह हादसा बुधवार शाम को दारव्हा-नेर मार्ग के पास रेलवे स्टेशन परिसर में हुआ. इस घटना में मारे गए बच्चों की पहचान रिहान असलम खान (13), गोलू पांडुरंग नारनवरे (10), सोम्या सतीश खडसन (10) और वैभव आशीष बोधले (14) के रूप में हुई है, ये सभी दारव्हा के रहने वाले थे. दरअसल, वर्धा-यवतमाल-नांदेड रेलवे परियोजना का काम तेजी से चल रहा है. इस दौरान पुलों के खंभे बनाने के लिए कई गहरे गड्ढे खोदे गए हैं. गड्ढों में उतर गए थे बच्चे हाल की भारी बारिश के कारण ये गड्ढे पानी से भर गए थे, लेकिन इनके चारों ओर कोई भी सुरक्षा घेरा नहीं बनाया गया था. बुधवार दोपहर ये बच्चे नहाने के लिए इन गड्ढों में उतर गए. पानी की गहराई का अंदाजा न होने के कारण वे डूबने लगे. आसपास के लोगों ने उन्हें बाहर निकाला और तुरंत दारव्हा के उप जिला अस्पताल ले गए. बाद में, गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें यवतमाल के संजीवनी अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने चारों को मृत घोषित कर दिया.

ऊर्जा बचत के आसान उपाय: बिजली बिल होगा कम, जेब होगी भारी

नई दिल्ली   अक्सर ऐसा होता है कि घरों में बिजली बिल बहुत ज्यादा आ जाता है। लोग चाहते हुए भी बिजली की खपत कम नहीं कर पाते हैं और फिर उन्हें भारी-भरकम बिजली बिल भरना पड़ता है। हालांकि, आप चाहें तो अपना बिजली बिल बचा सकते हैं, इसके लिए आपको कुछ स्मार्ट टिप्स अपनानी होंगी, जो आपके बिजली बिल में बचत कर सकती हैं। कुछ टिप्स , जिन्हें फॉलो करके आप अपना बिजली बिल कम कर सकते हैं। ऑटोमेटिक डिवाइसेस का इस्तेमाल करें यदि आप कमरे या घर से निकलते हुए लाइट बंद करना भूल जाते हैं और दिन भर बत्ती जलती रहती है, तो आपके बिजली बिल में इजाफा होना लाजमी है। ऐसी स्थिति से बचने के लिए आप ऑटोमेटिक डिवाइसेस का इस्तेमाल कर सकते हैं, जैसे- इन्फ्रारेड सेंसर, मोशन सेंसर, ऑटोमेटिक टाइमर, डिमर और सोलर सेल। ऐसा इसलिए करें ताकि लाइट अपने आप भी चालू बंद हो जाए। सेंसर लगाने पर आप एंट्री करेंगे, तब बिजली अपने आप ऑन हो जाएगी, जब आप बाहर निकलेंगे तो लाइट खुद ही बंद हो जाएगी। फ्लोरोसेंट ट्यूब लाइट और CFL का इस्तेमाल करें कुछ बल्ब या ट्यूब लाइट आती हैं, जो खूब सारी बिजली खाती हैं, इनसे भी बिजली खपत बढ़ जाती है। आप फ्लोरोसेंट ट्यूब लाइट और CFL का इस्तेमाल करें, जो सामान्य बल्ब से 5 गुना ज्यादा कारगर हैं। ये 70% तक बिजली बचा सकती हैं। इनकैंडेसेंट लैंप 90% बिजली को हीट में बदलता है, ना कि रोशनी में। इसलिए इनकी जगह CFLका इस्तेमाल करें, कम बिजली खर्च करते हैं। इसे ऐसे समझें कि 15 वॉट का CFL 60 वॉट के सामान्य बल्ब जितनी रोशनी देता है। 20 वॉट का CFL इस्तेमाल करने से आप हर साल 700 रुपये तक बिजली बिल में बचा सकते हैं। फ्रिज का दरवाजा बार-बार ना खोलें घरों में फ्रिज पूरे दिन चलते हैं, इनमें भी बिजली की खपत होती है। इसकी बिजली खपत कम करने के लिए फ्रिज को खुले स्पेस में रखें। धूप, रेडिएटर, ओवन या कुकिंग रेंज जैसे गर्मी के सोर्स इससे दूर रखें। दरअसल, फ्रिज के अंदर की गर्मी बाहर नहीं निकलती है तो यह उतनी ही एनर्जी लगाता है, जिससे बिजली ज्यादा यूज होती है। कई लोगों की आदत होती है कि वे बार-बार फ्रिज का दरवाजा खोलते हैं, इससे फ्रिज के अंदर की ठंड बाहर आती है और यह फिर से ठंडा करने के लिए बिजली यूज करता है और खपत बढ़ जाती है।

62 हजार करोड़ का करार: IAF को मिलेंगे 97 नए तेजस MK-1A लड़ाकू विमान

बेंगलुरु भारतीय वायुसेना (Indian Airforce) के लिए 97 और एलसीए तेजस मार्क 1ए लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी दी गई. 62,000 करोड़ रुपये की डील को एक उच्च स्तरीय बैठक में अंतिम मंजूरी मिली, जिससे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को इन विमानों के उत्पादन का रास्ता साफ हो गया. यह कदम मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत पहल को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है. यह कार्यक्रम न केवल भारतीय वायुसेना को आधुनिक बनाएगा, बल्कि देश के छोटे और मध्यम उद्यमों को भी रक्षा क्षेत्र में व्यापार का बड़ा अवसर देगा.  तेजस: मिग-21 का आधुनिक विकल्प भारतीय वायुसेना लंबे समय से अपने पुराने मिग-21 विमानों पर निर्भर रही है, जो 1960 के दशक के डिजाइन हैं. ये विमान अब पुराने हो चुके हैं. आधुनिक युद्ध की जरूरतों को पूरा करने में कमजोर पड़ रहे हैं. सरकार ने अगले कुछ हफ्तों में मिग-21 के बेड़े को पूरी तरह से हटाने का फैसला किया है. इसकी जगह लेने के लिए स्वदेशी तेजस मार्क 1ए को चुना गया है, जो एक चौथी पीढ़ी का बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान है. तेजस मार्क 1ए, पहले के 40 तेजस विमानों की तुलना में अधिक उन्नत है. इसमें बेहतर एवियोनिक्स (इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम) और रडार हैं, जो इसे आधुनिक हवाई युद्ध के लिए और सक्षम बनाते हैं. इस विमान में 65% से अधिक हिस्सा स्वदेशी है.   62,000 करोड़ की डील: दूसरा बड़ा ऑर्डर यह तेजस मार्क 1ए का दूसरा बड़ा ऑर्डर है. इससे पहले, कुछ साल पहले सरकार ने 48,000 करोड़ रुपये की लागत से 83 तेजस मार्क 1ए विमानों का ऑर्डर दिया था. नए ऑर्डर के साथ, भारतीय वायुसेना के पास अब कुल 180 तेजस मार्क 1ए विमान होंगे. यह डील हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को मिली है, जो भारत का प्रमुख रक्षा विमान निर्माता है. इस डील को मंगलवार को उच्च स्तरीय बैठक में मंजूरी दी गई, जिसके बाद HAL अब इन विमानों का उत्पादन शुरू करेगा. मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत पहल को रक्षा क्षेत्र में बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं. इस डील से न केवल भारतीय वायुसेना को आधुनिक विमान मिलेंगे, बल्कि देश के छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) को भी रक्षा क्षेत्र में व्यापार का बड़ा अवसर मिलेगा. तेजस मार्क 1ए में 65% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग होगा, जो भारत की तकनीकी और औद्योगिक क्षमता को बढ़ाएगा. HAL को न केवल तेजस विमानों के लिए, बल्कि स्वदेशी हेलीकॉप्टरों और उनके इंजनों के लिए भी ऑर्डर मिले हैं. रक्षा खरीद परिषद ने 156 LCH प्रचंड हेलीकॉप्टरों और 84 सुखोई-30 एमकेआई विमानों के लिए 1.6 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी थी.   प्रधानमंत्री का तेजस में उड़ान अनुभव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में तेजस के ट्रेनर संस्करण में उड़ान भरी थी, जो किसी भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा लड़ाकू विमान में पहली उड़ान थी. इस उड़ान ने तेजस की तकनीकी क्षमता और भारत के एयरोस्पेस क्षेत्र में प्रगति को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया.   तेजस मार्क 1ए की खासियत तेजस मार्क 1ए एक आधुनिक लड़ाकू विमान है, जिसमें कई उन्नत विशेषताएं हैं…     एडवांस एवियोनिक्स और रडार: यह विमान पहले के तेजस विमानों की तुलना में अधिक उन्नत रडार और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से लैस है, जो इसे लंबी दूरी के हवाई युद्ध (BVR) और हवाई निगरानी के लिए बेहतर है.     65% स्वदेशी सामग्री: इस विमान में 65% से अधिक हिस्सा भारत में बना है, जो देश की तकनीकी प्रगति को दर्शाता है.     मैन्यूवरिंग और डिजाइन: इसका डेल्टा-विंग डिजाइन इसे हल्का और तेज बनाता है, साथ ही इसका रडार क्रॉस-सेक्शन कम है, जिससे इसे दुश्मन के रडार में पकड़ना मुश्किल होता है.     हथियारों की क्षमता: यह विमान आर-73 क्लोज-कॉम्बैट मिसाइल, डर्बी बीवीआर मिसाइल और सटीक बमों को ले जाने में सक्षम है. हालांकि, कुछ विशेषज्ञों ने बताया कि तेजस मार्क 1ए में अभी मिसाइल अप्रोच वार्निंग सिस्टम (MAWS) की कमी है, जो मिसाइल हमले की चेतावनी देता है. इस सिस्टम पर डीआरडीओ और अन्य कंपनियों के साथ काम चल रहा है. भविष्य में इसे शामिल किया जा सकता है. तेजस का भविष्य और भारतीय वायुसेना तेजस कार्यक्रम भारतीय वायुसेना के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है. वर्तमान में, दो वायुसेना स्क्वाड्रन तेजस विमानों का संचालन कर रहे हैं. आने वाले वर्षों में यह वायुसेना का सबसे बड़ा लड़ाकू बेड़ा बन सकता है. 2016 में तेजस के पहले संस्करण को शामिल किया गया था. अब मार्क 1ए के साथ वायुसेना की ताकत और बढ़ेगी. इसके अलावा, HAL को 200 से अधिक तेजस मार्क 2 और उतनी ही संख्या में पांचवीं पीढ़ी के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के ऑर्डर मिलने की उम्मीद है. ये विमान और भी उन्नत होंगे और भारत को वैश्विक एयरोस्पेस शक्ति के रूप में स्थापित करेंगे.

जुमे की नमाज अनिवार्य: मलेशिया में न पढ़ने वालों को होगी जेल

टेरेंगानु मलेशिया के टेरेंगानु राज्य में जुमे की नमाज न पढ़ने वाले मुस्लिम पुरुषों को दो साल तक की जेल हो सकती है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार ने शरिया कानून को सख्ती से लागू करने की चेतावनी दी है। बिना किसी उचित कारण के शुक्रवार की नमाज छोड़ने पर दो साल की कैद की सजा हो सकती है। जुमे की नमाज न पढ़ने पर सजा रिपोर्ट के मुताबिक, टेरेंगानु में पैन-मलेशियाई इस्लामिक पार्टी (पीएएस) की सरकार है। इसने घोषणा की कि पहली बार जुमे की नमाज न पढ़ने वाला व्यक्ति 3,000 रिंगिट (लगभग 710 अमेरिकी डॉलर) तक के जुर्माने, जेल की सजा, या दोनों का सामना कर सकता है। यह सजा तब लागू होगी, जब कोई बिना वैध कारण के नमाज में शामिल न हो। पहले तीन बार चूकने पर ही सजा राज्य की कार्यकारी परिषद के सदस्य मुहम्मद खलील अब्दुल हादी ने बेरिटा हरियन अखबार को बताया कि शुक्रवार की नमाज न केवल एक धार्मिक प्रतीक है, बल्कि मुसलमानों के लिए आज्ञाकारिता का प्रतीक भी है। पहले, केवल वे लोग जो लगातार तीन शुक्रवार को नमाज छोड़ते थे, उन्हें सजा दी जाती थी। मलेशियाई वकील अजीरा अजीज ने तर्क दिया कि यह कुरान के सिद्धांत 'धर्म में कोई ज़बरदस्ती नहीं' के खिलाफ है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि जुमे की नमाज अनिवार्य है, लेकिन इसे अपराध बनाना जरूरी नहीं। जागरूकता कार्यक्रम ही पर्याप्त हैं। हम तालिबान बन जाएंगे एससीएमपी के अनुसार, अहमद अजहर ने कहा कि हमें सभी मलेशियाई लोगों की चिंताओं को आवाज़ देनी होगी, वरना हम तालिबान बन जाएंगे। कुछ लोगों का मानना है कि कानूनी दबाव सच्ची धार्मिकता को कमजोर करता है। एक आलोचक ने कहा कि धार्मिकता दिल से आनी चाहिए, डर से नहीं। वहीं, केनी टैन ने लिखा कि मुसलमानों को यह मामला संभालने दें। हमें अनावश्यक टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। टेरेंगानु में कोई विपक्ष नहीं रिपोर्ट के अनुसार, टेरेंगानु की 12 लाख की आबादी में अधिकतर मलय मुस्लिम हैं। यह मलेशिया का एकमात्र राज्य है, जहां विधानसभा में कोई विपक्ष नहीं है। 2022 के चुनाव में पीएएस ने सभी 32 सीटें जीतीं। उल्लेखनीय है कि इस्लाम मलेशिया का आधिकारिक धर्म है, लेकिन देश का समाज धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों पर आधारित है।

मुंबई में मूसलाधार बारिश, बीएमसी सतर्क; हेल्पलाइन नंबर जनता के लिए जारी

मुंबई,  मुंबई और इसके उपनगरीय इलाकों में पिछले कई दिनों से भारी बारिश हो रही है। बुधवार मध्यरात्रि से लगातार बारिश जारी है। इसके बावजूद, शहर में जनजीवन सामान्य बना हुआ है। मध्य रेलवे, पश्चिम रेलवे, हार्बर रेलवे और ‘बेस्ट’ बस सेवाएं सुचारू रूप से चल रही हैं। प्रशासन की तरफ से यह पूरी कोशिश की जा रही है कि किसी भी व्यक्ति को किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं हो। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने बारिश के मद्देनजर सभी जरूरी इंतजाम किए हैं। नगर निगम की टीमें आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार और सतर्क हैं। बीएमसी ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें। आपात स्थिति में सहायता या जानकारी के लिए बीएमसी के आपातकालीन नियंत्रण कक्ष के हेल्पलाइन नंबर 1916 पर संपर्क करने को कहा गया है। इसके अलावा, मुंबई में बारिश के कारण अभी तक किसी बड़े जलभराव या अन्य समस्या की खबर नहीं है। बीएमसी की जल निकासी व्यवस्था और अन्य प्रणालियां पूरी तत्परता से काम कर रही हैं। नगर निगम ने नालों की सफाई, पानी निकासी पंपों और अन्य संसाधनों को पहले से तैयार रखा है, ताकि किसी भी स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके। मुंबई पुलिस और अन्य आपातकालीन सेवाएं भी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। लोगों से अनुरोध है कि वे बारिश के दौरान सावधानी बरतें और बिना जरूरत घर से बाहर न निकलें। बीएमसी ने यह भी कहा है कि मौसम विभाग की चेतावनी के अनुसार, अगले कुछ घंटों तक बारिश जारी रह सकती है। लोगों से अपील है कि वे सतर्क रहें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करें। बीएमसी और अन्य प्रशासनिक टीमें स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पूरी तरह से सक्रिय हैं। मुंबई वासियों का सहयोग और सावधानी इस स्थिति में महत्वपूर्ण है।  

लोकसभा में ‘दागी नेता हटाओ’ बिल पेश, विपक्षी सांसदों ने कॉपी फाड़ी, शाह पर कागज फेंके

नई दिल्ली प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को अपराध के गंभीर आरोपों के बाद पद से हटाने वाला बिल बुधवार को अमित शाह ने लोकसभा में पेश किया। कांग्रेस, सपा समेत सभी विपक्षी दलों ने बिल का पुरजोर विरोध किया। कांग्रेस ने बिल को पूरी तरह से विनाशकारी बताया, जबकि अमित शाह ने कहा कि बिल को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) में भेजा जाएगा। बिल में प्रस्तावित किया गया है कि अगर कोई मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री या फिर मंत्री पर गंभीर आरोप हैं और उसकी गिरफ्तारी होती है तो 30 दिनों तक जेल में रहने के बाद 31वें दिन उसके इस्तीफा देना पड़ेगा या फिर उसे बर्खास्त कर दिया जाएगा। अमित शाह की तरफ उछाले कागज विपक्ष के कुछ सांसद लोकसभा की वेल में आकर नारेबाजी करने लगे. इस दौरान कुछ विपक्षी सांसदों ने बिल की कॉपी भी फाड़ दी और कागज के टुकड़े अमित शाह की तरफ उछाले. हालांकि अमित शाह ने बिल पेश करने के दौरान कहा कि सरकार इस बिल को जेपीसी को भेजने का प्रस्ताव रखती है. बावजूद इसके बिल को विरोध का सामना करना पड़ा. संविधान के 130वें संशोधन विधेयक पेश होने के दौरान सदन में लगातार नारेबाजी होती रही. विपक्षी सांसदों ने सत्ता पक्ष को घेर लिया और गृह मंत्री का माइक मोड़ने की कोशिश की. इस पर काफी हंगामा हुआ और सदन के अंदर स्थिति तनावपूर्ण हो गई. इस दौरान सत्ता पक्ष के कई सांसद, गृह मंत्री का बचाव करने के लिए आगे आकर विपक्षी सांसदों को रोकने की कोशिश करने लगे. लोकसभा में अमित शाह के बिल पेश करने के बाद विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी समेत समूचे विपक्ष का हंगामा देखने को मिला, जिसके बाद सदन की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा। अमित शाह ने कहा कि दागी सीएम-पीएम और मंत्रियों को हटाने वाला बिल संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के सामने विचार के लिए भेजा जाएगा। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने बिल को "पूरी तरह से विनाशकारी" बताया। कांग्रेस सांसद ने कहा, ''भारतीय संविधान कहता है कि कानून का शासन होना चाहिए, और इसका आधार यह है कि जब तक दोषी साबित न हो जाए, तब तक आप निर्दोष हैं। यह विधेयक इसमें बदलाव की उम्मीद करता है। यह एक कार्यकारी एजेंसी के अधिकारी को प्रधानमंत्री का बॉस बनाता है।'' बिल का विरोध करते हुए एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, "मैं जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2025, केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक 2025 और संविधान (एक सौ तीसवां संशोधन) विधेयक 2025 को पेश किए जाने का विरोध करता हूं। यह सरकार चुनने के अधिकार को कमजोर करता है। यह कार्यकारी एजेंसियों को तुच्छ आरोपों और संदेह के आधार पर न्यायाधीश और जल्लाद बनने की खुली छूट देता है। सरकार पुलिस राज्य बनाने पर तुली हुई है। यह निर्वाचित सरकार के लिए मौत की कील होगी। इस देश को पुलिस राज्य में बदलने के लिए भारत के संविधान में संशोधन किया जा रहा है।" आम आदमी पार्टी ने भी बिल का विरोध किया है। इंडिया गठबंधन का हिस्सा न होने पर भी आप ने कहा कि वह इसका कड़ा विरोध करती है। 'आप' नेता अनुराग ढांडा ने कहा, “केंद्र सरकार संसद में जो बिल पेश करेगी, उसका 'आप' कड़ा विरोध करती है। यह बिल तानाशाही लागू करने का तरीका है। केंद्र सरकार विपक्षी नेताओं के खिलाफ एजेंसियों का दुरुपयोग करती रही है। कभी मंत्रियों को गिरफ्तार करती है, तो कभी दूसरी पार्टियों के मुख्यमंत्रियों को। सत्येंद्र जैन पर फर्जी केस लगाकर उन्हें डेढ़ साल से ज़्यादा जेल में रखा और कुछ दिन पहले कहा कि उनके पास उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं है। इस बिल के मुताबिक, निर्दोष होते हुए भी सत्येंद्र जैन को मंत्री पद से हटाया जा सकता है। इस बिल का इस्तेमाल करके वे पूरी सरकार भी गिरा सकते हैं।” केंद्रीय गृह मंत्री ने लोकसभा में बुधवार को कुल तीन बिल पेश किए। ये तीनों बिल संविधान (एक सौ तीसवां संशोधन) विधेयक, 2025, केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक, 2025, जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक हैं। सरकार ने तीनों बिलों में सख्त प्रावधान किए हैं। वेल में आकर विपक्ष की नारेबाजी सत्ता पक्ष की ओर से रवनीत बिट्टू, कमलेश पासवान, किरेन रिजिजू, सतीश गौतम ने गृह मंत्री के पास नारेबाजी कर रहे आक्रामक सांसदों को रोकने की कोशिश की. लोकसभा की वेल में नारेबाजी की शुरुआत टीएमसी सांसदों ने की और कल्याण बनर्जी ने विधेयक पेश होते ही नारेबाजी शुरू कर दी. बाद में, कांग्रेस सांसद और महासचिव केसी वेणुगोपाल ने अपनी सीट से बिल की कॉपी फाड़कर फेंक दी. इसके बाद सभी कांग्रेस सांसद वेल में आ गए. केसी वेणुगोपाल के बाद सपा के धर्मेंद्र यादव ने भी अपनी सीट से बिल की कॉपी फाड़कर फेंक दी और समाजवादी पार्टी के सभी सदस्य संसद वेल में आ गए. इसके बाद जब गृह मंत्री अमित शाह विधेयक पेश कर रहे थे, तो सभी विपक्षी दल के सदस्य लोकसभा की वेल में आ गए और हंगामा करने लगे. स्थिति बिगड़ती देख लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी. 'जेल जाने पर मैंने दिया था इस्तीफा' अमित शाह बिल पेश करते हुए कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल की आलोचना की और कहा कि मैं जब झूठे मामले में जेल गया था, तब नैतिकता के आधार पर पद से इस्तीफा देकर गया था. उन्होंने कहा कि जब तक अदालत ने मुझे निर्दोष साबित नहीं किया, तब तक किसी भी संवैधानिक पद को ग्रहण नहीं किया. हम इतने बेशर्म नहीं हैं, कि हम पर आरोप लगें और पद पर बने रहें. उन्होंने कहा कि विपक्षी नेता हमें नैतिकता का पाठ नहीं पढ़ा सकते. अमित शाह ने कहा कि मैं चाहता हूं कि ये नैतिकता के मूल्य बढ़ें.   अमित शाह ने बिल पेश करते हुए इसे 21 सदस्यों वाली जेपीसी के पास भेजने का प्रस्ताव पेश किया. इस पर ध्वनिमत से मतदान के दौरान विपक्ष ने वेल से ही विरोध दर्ज किया. लेकिन प्रस्ताव के ध्वनिमत से पारित होने के बाद स्पीकर ओम बिड़ला ने कहा कि कुछ विधेयक राजनीति में शुचिता और नैतिकता के लिए आते हैं, क्योंकि राजनीति में शुचिता और नैतिकता जरूरी है. अब ये बिल जेपीसी के पास चर्चा के लिए भेजे गए … Read more

सुरक्षा एजेंसियों ने उजागर किया जैश-ए-मोहम्मद का योजना, 313 नए ठिकाने तैयार करने की कोशिश

नई दिल्ली आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) ने पाकिस्तान में अपनी गतिविधियों को फैलाने के लिए गुप्त रूप से एक बड़े फंडरेजिंग अभियान की साजिश रची थी. खुफिया सूत्रों के अनुसार, संगठन का मकसद पीकेआर 3.91 अरब रुपये जुटाकर पाकिस्तान भर में 313 नए मार्कज (ट्रेनिंग कैंप और सुरक्षित ठिकाने) स्थापित करना था. जैश सरगना मौलाना मसूद अजहर और उसके भाई तल्हा अल सैफ ने अभियान का नेतृत्व किया और समर्थकों से बढ़-चढ़कर दान करने की अपील की. इसके लिए डिजिटल वॉलेट्स जैसे ईज़ीपैसा और सदापे का इस्तेमाल किया गया, ताकि लेन-देन को FATF (Financial Action Task Force) की निगरानी से बचाया जा सके. जांच में सामने आया कि ये डिजिटल वॉलेट्स मसूद अजहर के परिवार से जुड़े मोबाइल नंबरों पर रजिस्टर्ड थे, जिनमें उसके भाई तल्हा अल सैफ और बेटे अब्दुल्ला अजहर के नंबर भी शामिल थे. इसके अलावा, हर शुक्रवार पाकिस्तान की मस्जिदों में गाजा के लिए चंदा बताकर नकद धन जुटाया गया, जबकि असल में ये रकम जैश की आतंकी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल हुई. इसी दौरान अल रहमत ट्रस्ट, जो जैश से जुड़ा हुआ संगठन है, बहावलपुर स्थित एक बैंक खाते के जरिए भी धन इकट्ठा कर रहा था. यह ट्रस्ट खुद मसूद अजहर और उसके नजदीकी सहयोगी चलाते हैं. फंडरेजिंग अभियान के आगे बढ़ते ही जैश नेताओं ने खुलासा किया कि नए बनाए जा रहे मार्कज मसूद अजहर और उसके परिवार के लिए सुरक्षित ठिकाने साबित होंगे, जिससे वे अपनी मौजूदगी छिपाकर रख सकें. इन्हीं ठिकानों का इस्तेमाल नए आतंकियों की भर्ती और प्रशिक्षण के लिए भी किया जाना था. सूत्रों के मुताबिक, यह फंडरेजिंग अभियान पूरी तरह सफल रहा और जैश ने पाकिस्तान और विदेशों से भारी मात्रा में धन इकट्ठा कर लिया. इस रकम से संगठन ने मशीन गन, रॉकेट लॉन्चर और मोर्टार जैसी आधुनिक हथियार खरीद लिए. अब अपने नए हथियारों और विस्तारित ढांचे के साथ जैश-ए-मोहम्मद एक नई आतंकी लहर छेड़ने की तैयारी में है. संगठन के नेताओं को भरोसा है कि उनकी परिष्कृत फंडिंग व्यवस्था और गुप्त कम्युनिकेशन चैनल्स की वजह से उनकी गतिविधियां लंबे समय तक नजरों से बची रहेंगी.