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भारत-पाक पर ट्रंप के बयान के बहाने राहुल का हमला, कहा- सवालों से क्यों भाग रहे हैं पीएम?

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बार फिर भारत-पाकिस्तान संघर्ष विराम कराने के दावे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर हमला बोला है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि ट्रंप ने 25वीं बार यह बयान दिया। पीएम मोदी इस पर मौन हैं। इससे लगता है दाल में कुछ काला है। लोकसभा में विपक्ष के नेता ने सवाल किया कि ट्रंप युद्ध विराम कराने वाले कौन होते हैं? प्रधानमंत्री मोदी ने इस पर एक बार भी जवाब नहीं दिया है। प्रधानमंत्री कैसे बयान दे सकते हैं? वह क्या कहेंगे, ट्रंप ने संघर्ष विराम करवाया, वह ऐसा नहीं कह सकते। लेकिन यह सच्चाई है। ट्रंप ने संघर्ष विराम करवाया, पूरी दुनिया जानती है। यह वास्तविकता है। संसद भवन परिसर में  राहुल गांधी ने कहा कि यह सिर्फ संघर्ष विराम का मामला नहीं है। कई बड़ी समस्याएं हैं जिन पर हम चर्चा करना चाहते हैं। रक्षा, रक्षा उद्योग, ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी समस्याएं हैं। स्थिति अच्छी नहीं है और पूरी दुनिया जानती है। जो लोग खुद को देशभक्त कहते हैं, वे भाग गए हैं। प्रधानमंत्री एक बयान भी नहीं दे पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ट्रंप 25 बार कह चुके हैं कि मैंने संघर्ष विराम करवाया। संघर्ष विराम करवाने वाले ट्रंप कौन होते हैं? यह उनका काम नहीं है। लेकिन प्रधानमंत्री ने एक बार भी जवाब नहीं दिया। यह सच्चाई है, वह इसे छिपा नहीं सकते। सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी के विदेश से लौटने पर ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा करने की बात स्वीकार कर ली है। राहुल गांधी ने कहा कि एक तरफ सरकार कहती है कि ऑपरेशन सिंदूर जारी है और दूसरी तरफ कहा जाता है कि जीत हासिल हो गई है। या तो जीत हासिल हो गई है या ऑपरेशन सिंदूर जारी है। ट्रंप कह रहे हैं कि मैंने ऑपरेशन सिंदूर रोक दिया, वह यह 25 बार कह चुके हैं। इसलिए कुछ न कुछ तो दाल में काला है। भारत की विदेश नीति को लेकर कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार ने हमारी विदेश नीति को नष्ट कर दिया है। किसी ने हमारा समर्थन नहीं किया। कांग्रेस ने सरकार को घेरा इससे पहले ट्रंप के दावे के बाद कांग्रेस ने एक बार फिर मोदी सरकार को घेरा है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक्स पर लिखा कि एक ओर मोदी सरकार संसद में पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के मुद्दे पर बहस की निश्चित तारीखें देने से इनकार कर रही है और प्रधानमंत्री के जवाब देने को लेकर भी कोई आश्वासन नहीं दे रही है। वहीं दूसरी ओर राष्ट्रपति ट्रंप इस मुद्दे पर अपने दावों के साथ सिल्वर जुबली तक पहुंच चुके हैं। पिछले 73 दिनों में राष्ट्रपति ट्रंप इस विषय पर 25 बार ढिंढोरा पीट चुके हैं, लेकिन भारत के प्रधानमंत्री अब तक पूरी तरह मौन हैं। उन्हें केवल विदेश यात्राओं और देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं को अस्थिर करने के लिए ही समय मिल रहा है।

बुलेट ट्रेन कब होगी तैयार? रेल मंत्री ने दिया टाइमलाइन का अपडेट

नई दिल्ली रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को कहा कि वापी और साबरमती के बीच बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के गुजरात वाले हिस्से का काम दिसंबर, 2027 तक पूरा करने की योजना है और महाराष्ट्र से साबरमती सेक्शन तक पूरी परियोजना दिसंबर, 2029 तक पूरी होने की उम्मीद है। उन्होंने बुधवार को लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। वैष्णव ने बताया कि मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल (MAHSR) परियोजना (508 किलोमीटर) जापान से तकनीकी और वित्तीय सहायता के साथ निर्माणाधीन है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना गुजरात, महाराष्ट्र और दादरा एवं नगर हवेली से होकर गुजरेगी और इसके मुंबई, ठाणे, विरार, बोईसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आणंद, अहमदाबाद और साबरमती में 12 स्टेशनों पर ठहराव की योजना है। गुजरात वाला हिस्सा दिसंबर, 2027 तक होगा पूरा वैष्णव ने बताया, ‘‘वापी और साबरमती के बीच कॉरिडोर का गुजरात वाला हिस्सा दिसंबर, 2027 तक पूरा होने की योजना है। पूरी परियोजना (महाराष्ट्र से साबरमती खंड) दिसंबर, 2029 तक पूरी होने की उम्मीद है।’’ प्रोजेक्ट की कुल अनुमानित लागत लगभग 1.08 लाख करोड़ रुपये मंत्री ने कहा कि परियोजना की कुल अनुमानित लागत लगभग 1,08,000 करोड़ रुपये है, जिसमें से जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी 81 प्रतिशत यानी 88,000 करोड़ रुपये का वित्तपोषण कर रही है और शेष 19 प्रतिशत यानी 20,000 करोड़ रुपये रेल मंत्रालय (50 प्रतिशत) और महाराष्ट्र (25 प्रतिशत) तथा गुजरात (25 प्रतिशत) सरकारों के अंशदान के माध्यम से वित्त पोषित किए जाएंगे।

मुंबई फिर बारिश की मार में! हादसों की झड़ी और जलभराव, IMD ने जारी किया रेड अलर्ट

मुंबई देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में पिछले 24 घंटे से लगातार मूसलधार बारिश हो रही है, जिसने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। भारी बारिश के कारण कई निचले इलाकों में जलजमाव हो गया है, जिससे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जगह-जगह ट्रैफिक जाम और लोकल ट्रेन सेवाओं में देरी की खबरें भी सामने आ रही हैं, जिसने मुंबईकरों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। 24 घंटे में 20 मॉनसून से जुड़े हादसे बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में मुंबई शहर में 47.77 मिमी, पूर्वी उपनगरों में 33.1 मिमी और पश्चिमी उपनगरों में 53.92 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है। इस दौरान शहर में 20 मॉनसून से जुड़े हादसे भी सामने आए हैं, जिनमें 7 शॉर्ट सर्किट की घटनाएँ, 11 पेड़ या उनकी शाखाएँ गिरने की घटनाएँ और 2 मकान के हिस्से गिरने की घटनाएँ शामिल हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि BMC ने बताया है कि इन सभी घटनाओं में कोई भी व्यक्ति घायल नहीं हुआ है, जिससे एक बड़ी राहत मिली है। अगले 4-5 दिन भारी बारिश का अलर्ट भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी की है कि अगले 24 घंटे में मुंबई और आसपास के इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। IMD ने यह भी संभावना जताई है कि अगले 4-5 दिनों तक मुंबई और MMR (मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन) क्षेत्र में बारिश जारी रह सकती है। BMC की नागरिकों से अपील बिगड़ते मौसम को देखते हुए BMC ने नागरिकों से खास अपील की है कि वे केवल अत्यधिक आवश्यक होने पर ही अपने घरों से बाहर निकलें। साथ ही, जलभराव वाले इलाकों से बचकर चलने की सलाह भी दी गई है। किसी भी आपात स्थिति में, नागरिक BMC की आपात सेवा पर संपर्क कर सकते हैं, जिसके लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं।  

गलवान के बाद रिश्तों में बदलाव? भारत ने चीनी पर्यटकों के लिए वीजा पर लगाई रोक हटाई

नई दिल्ली  भारत और चीन ने अपने तनावपूर्ण संबंधों को सुधारने की दिशा में तेजी से कदम उठाए हैं। भारत सरकार चीनी पर्यटकों के लिए वीजा फिर से शुरू करने की दिशा में काम कर रही है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक पांच सालों के बाद भारत चीनी पर्यटकों के लिए टूरिस्ट वीजा फिर से जारी करने जा रहा है। बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास के हवाले से समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने इसकी जानकारी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक 24 जुलाई से चीनी पर्यटकों के लिए फिर से वीजा जारी होने लगेंगे। चीन की सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने चीन स्थित भारतीय दूतावास की तरफ से वीबो प्लेटफॉर्म पर शेयर की गई पोस्ट को शेयर किया है। भारतीय दूतावास की तरफ से जारी पोस्ट में कहा गया है कि "24 जुलाई 2025 से, चीनी नागरिक भारत आने के लिए पर्यटक वीजा के लिए आवेदन कर सकते हैं। उन्हें पहले वेब लिंक पर ऑनलाइन वीजा आवेदन पत्र भरना होगा और उसका प्रिंट आउट लेना होगा, और फिर वेब लिंक पर अपॉइंटमेंट लेना होगा। इसके बाद, उन्हें भारतीय वीजा आवेदन केंद्र में आवेदन जमा करने के लिए पासपोर्ट, वीजा आवेदन पत्र और अन्य संबंधित दस्तावेज साथ ले जाने होंगे।" भारत ने खोला चीन पर्यटकों के लिए दरवाजा भारत सरकार की तरफ से यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब दोनों देश आपसी रिश्ते को सामान्य करने के लिए लगातार बातचीत कर रहे हैं। साल 2020 में कोविड-19 महामारी के चलते भारत ने सभी पर्यटन वीजा पर रोक लगा दी थी। लेकिन अप्रैल 2022 में IATA (इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन) ने एक नोटिस जारी कर कहा था, कि चीन के नागरिकों के पर्यटक वीजा अभी मान्य नहीं रहेंगे। भारत ने वो कदम उस वक्त उठाया था, जब चीन ने 22,000 भारतीय छात्रों को वापस देश में आने के लिए वीजा देने से मना कर दिया था। भारत ने उसके बाद चीनी पर्यटकों को वीजा देना बंद कर दिया था। लेकिन पिछले कुछ महीनों से भारत और चीन के बीच रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिला है। पूर्वी लद्दाख के डेपसांग और डेमचोक इलाकों से दोनों देशों की सेनाएं पीछे हटी हैं। पिछले चार सालों से ये तनाव लगातार बना हुआ था और कभी भी जंग छिड़ने का खतरा था। सैनिकों की वापसी, दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की दिशा में एक बड़ा कदम माना गया था। इसके अलावा, जनवरी 2025 में भारत और चीन के बीच विमानों की उड़ाने भी शुरू हो गईं। यह फैसला भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री की चीन यात्रा के बाद सामने आया, जहां दोनों पक्षों ने कूटनीतिक स्तर पर कई सकारात्मक बातचीत की थी। इसी यात्रा के दौरान यह भी तय हुआ था कि भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए कैलाश मानसरोवर यात्रा को भी इस साल से फिर से शुरू किया जाएगा। इसके अलावा हाल ही में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भी चीन का दौरा किया, जहां वे शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) की विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल हुए थे।  

गलवान के बाद रिश्तों में बदलाव? भारत ने चीनी पर्यटकों के लिए वीजा पर लगाई रोक हटाई

नई दिल्ली  भारत और चीन ने अपने तनावपूर्ण संबंधों को सुधारने की दिशा में तेजी से कदम उठाए हैं। भारत सरकार चीनी पर्यटकों के लिए वीजा फिर से शुरू करने की दिशा में काम कर रही है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक पांच सालों के बाद भारत चीनी पर्यटकों के लिए टूरिस्ट वीजा फिर से जारी करने जा रहा है। बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास के हवाले से समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने इसकी जानकारी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक 24 जुलाई से चीनी पर्यटकों के लिए फिर से वीजा जारी होने लगेंगे। चीन की सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने चीन स्थित भारतीय दूतावास की तरफ से वीबो प्लेटफॉर्म पर शेयर की गई पोस्ट को शेयर किया है। भारतीय दूतावास की तरफ से जारी पोस्ट में कहा गया है कि "24 जुलाई 2025 से, चीनी नागरिक भारत आने के लिए पर्यटक वीजा के लिए आवेदन कर सकते हैं। उन्हें पहले वेब लिंक पर ऑनलाइन वीजा आवेदन पत्र भरना होगा और उसका प्रिंट आउट लेना होगा, और फिर वेब लिंक पर अपॉइंटमेंट लेना होगा। इसके बाद, उन्हें भारतीय वीजा आवेदन केंद्र में आवेदन जमा करने के लिए पासपोर्ट, वीजा आवेदन पत्र और अन्य संबंधित दस्तावेज साथ ले जाने होंगे।" भारत ने खोला चीन पर्यटकों के लिए दरवाजा भारत सरकार की तरफ से यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब दोनों देश आपसी रिश्ते को सामान्य करने के लिए लगातार बातचीत कर रहे हैं। साल 2020 में कोविड-19 महामारी के चलते भारत ने सभी पर्यटन वीजा पर रोक लगा दी थी। लेकिन अप्रैल 2022 में IATA (इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन) ने एक नोटिस जारी कर कहा था, कि चीन के नागरिकों के पर्यटक वीजा अभी मान्य नहीं रहेंगे। भारत ने वो कदम उस वक्त उठाया था, जब चीन ने 22,000 भारतीय छात्रों को वापस देश में आने के लिए वीजा देने से मना कर दिया था। भारत ने उसके बाद चीनी पर्यटकों को वीजा देना बंद कर दिया था। लेकिन पिछले कुछ महीनों से भारत और चीन के बीच रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिला है। पूर्वी लद्दाख के डेपसांग और डेमचोक इलाकों से दोनों देशों की सेनाएं पीछे हटी हैं। पिछले चार सालों से ये तनाव लगातार बना हुआ था और कभी भी जंग छिड़ने का खतरा था। सैनिकों की वापसी, दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की दिशा में एक बड़ा कदम माना गया था। इसके अलावा, जनवरी 2025 में भारत और चीन के बीच विमानों की उड़ाने भी शुरू हो गईं। यह फैसला भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री की चीन यात्रा के बाद सामने आया, जहां दोनों पक्षों ने कूटनीतिक स्तर पर कई सकारात्मक बातचीत की थी। इसी यात्रा के दौरान यह भी तय हुआ था कि भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए कैलाश मानसरोवर यात्रा को भी इस साल से फिर से शुरू किया जाएगा। इसके अलावा हाल ही में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भी चीन का दौरा किया, जहां वे शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) की विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल हुए थे।  

देश को मिलेगा नया उपराष्ट्रपति! चुनाव आयोग ने शुरू की प्रक्रिया, अधिसूचना शीघ्र

नई दिल्ली चुनाव आयोग ने देश का नया उपराष्ट्रपति चुनने के लिए इलेक्शन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आयोग की ओर से इस संबंध में प्रेस नोट जारी किया गया है। आयोग का कहना है कि गृह मंत्रालय से जानकारी मिली है कि उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने इस्तीफा दे दिया है। अब इस पद पर चुनाव के लिए हमारी ओर से प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जल्दी ही चुनाव की तारीख भी घोषित कर दी जाएगी। होम मिनिस्ट्री की ओर से 22 जुलाई यानी सोमवार को ही उपराष्ट्रपति पद रिक्त होने का नोटिफिकेशन जारी किया गया था। दरअसल, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार यानी 21 जुलाई 2025 को अचानक इस्तीफा दिया था. उनके इस्तीफे से राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई थी. किसी को भी भनक नहीं लगी थी कि ऐसा भी कुछ होगा. खुद राष्ट्रपति भवन के स्टाफ हैरान थे कि जगदीप धनखड़ अचानक राष्ट्रपति से मिलने क्यों पहुंचे थे. जगदीप धनखड़ ने कहा कि वह सेहत को प्राथमिकता देने के चलते इस्तीफा दे रहे हैं, मगर कांग्रेस को इस फैसले में कुछ दाला में काला जैसा दिख रहा है. चुनाव आयोग ने लिखा, 'आर्टिकल 324 के तहत उपराष्ट्रपति के निर्वाचन का कार्य चुनाव आयोग करता है। इसका निर्देशन राष्ट्रपति की ओर से किया जाता है। चुनाव आयोग ने अब उपराष्ट्रपति के इलेक्शन की तैयारी शुरू कर दी है। अभी इसकी तैयारी चल रही है और उसे पूरा करने के बाद जल्दी ही इलेक्शन की डेट का ऐलान किया जाएगा।' आयोग ने कहा कि इलेक्शन की तारीख का ऐलान करने से पहले हम कुछ चीजों पर काम कर रहे हैं। इनमें से एक है- इलेक्टोरल कॉलेज तैयार करना। इसके तहत लोकसभा और राज्यसभा सांसदों को मिलाकर एक वोटर लिस्ट तैयार की जाएगी। उपराष्ट्रपति चुनाव में राज्यसभा के नामित सदस्यों को भी वोटिंग का अधिकार होता है। अगर राष्ट्रपति के चुनाव में सभी सांसदों के साथ देशभर के विधानसभाओं के विधायक वोट डालते हैं तो उपराष्ट्रपति चुनाव में वोट डालने का काम केवल सांसद करते हैं. चूंकि ये पद 21 जुलाई को धनखड़ के इस्तीफे से खाली हो चुका है, लिहाजा देश को 21 जनवरी तक नया उप राष्ट्रपति मिल जाना चाहिए. उम्मीद करते हैं कि चुनाव आयोग जल्द ही इसका नोटिफिकेशन जारी करके इसकी प्रक्रिया शुरू करेगा. हालांकि अक्टूबर – नवंबरतक देश में बिहार में भी विधानसभा चुनाव होने हें. बैलेट बॉक्स से होता है ये चुनाव उपराष्ट्रपति का चुनाव सीक्रेट बैलेट बॉक्स के जरिए ही होता है. वोटिंग के बाद इसके वोटों की काउंटिंग होती है. उसी दिन रिजल्ट घोषित हो जाता है. उपराष्ट्रपति के चुनाव में रिटर्निंग अफसर की भूमिका लोकसभा के महासचिव निभाते हैं. पहली बार कब हुआ था उप राष्ट्रपति का चुनाव देश में पहली बार उपराष्ट्रपति का चुनाव 1952 में राष्ट्रपति चुनाव के साथ ही शुरू हुआ था. सर्वपल्ली राधाकृष्णन देश के पहले उपराष्ट्रपति बने थे. वो दो कार्यकाल तक इस पद पर रहे. उप राष्ट्रपति का कार्यकाल भी पांच साल का ही होता है. ये चुनाव इसलिए अहम है क्योंकि उप राष्ट्रपति राज्यसभा का सभापति भी होता है. उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद से ही उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों के सदस्यों से मिलकर बनने वाले निर्वाचक मंडल यानी इलेक्टोरल कॉलेज के जरिए आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति से होता है. संसद के दोनों सदनों के सदस्य इसमें हिस्सा लेते हैं और हर सदस्य केवल एक वोट ही डाल सकता है. राष्ट्रपति चुनाव में चुने हुए सांसदों के साथ विधायक भी मतदान करते हैं लेकिन उप राष्ट्रपति चुनाव में लोकसभा और राज्यसभा के सांसद ही वोट डाल सकते है. क्या मनोनीत सदस्य कर सकते हैं वोट दोनों सदनों के लिए मनोनीत सांसद राष्ट्रपति चुनाव में मतदान नहीं कर सकते लेकिन वे उप राष्ट्रपति चुनाव में वोटिंग कर सकते हैं. इस तरह से देखा जाए तो उप राष्ट्रपति चुनाव में दोनों सदनों के 790 निर्वाचक हिस्सा लेंगे. राज्यसभा – चुने हुए सदस्य: 233, मनोनीत सदस्य: 12 लोक सभा – चुने हुए सदस्य: 543, मनोनीत सदस्य: 2 कुल निर्वाचक: 790 तो इस बार क्या है वोट समीकरण लोकसभा में मौजूदा समय में 542 सांसद हैं तो राज्यसभा में 240 यानि कुल वोट 782 होंगे. इसमें मेजोरिटी मार्क 392 का होगा. एनडीए के पास 427 सांसद (लोकसभा में 293 और राज्यसभा में 134) हैं, जिसमें 10 नोमिनेटेड सदस्य भी हैं. विपक्ष के पास दोनों सदनों में 355 सांसद हैं (249 लोकसभा में और 106 राज्यसभा में). इसका मतलब ये हुआ कि एनडीए से इस पद के लिए खड़ा किया गया कोई भी उम्मीदवार आराम से जीत जाएगा. मौजूदा स्थिति राज्यसभा – सदस्य: 240 मनोनीत सदस्य: 10 लोक सभा – सदस्य: 542 कुल निर्वाचक सदस्य : 782 जीतने के लिए मेजोरिटी – 392 वोटिंग में अनुपातिक पद्धति क्या होती है उप राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव इलेक्शन अनुपातिक प्रतिनिधि पद्धति (proportional representation) से किया जाता है. इसमें वोटिंग खास तरीके से होती है जिसे सिंगल ट्रांसफ़रेबल वोट सिस्टम कहते हैं. – इसमें मतदाता को वोट तो एक ही देना होता है मगर उसे अपनी पसंद के आधार पर प्राथमिकता तय करनी होती है. – वह बैलट पेपर पर मौजूद उम्मीदवारों में अपनी पहली पसंद को 1, दूसरी पसंद को 2 और इसी तरह से आगे की प्राथमिकता देता है. प्रत्याशी के पास कितने प्रस्तावक और समर्थक – चुनाव में खड़े होने के लिए किसी भी व्यक्ति को कम से कम 20 संसद सदस्यों को प्रस्तावक और कम से कम 20 संसद सदस्यों को समर्थक के रूप में नामित कराना होता है – उपराष्ट्रपति के रूप में प्रत्याशी बनने वाले 15,000 रुपए की जमानत राशि जमा करनी होती है. – नामांकन के बाद फिर निर्वाचन अधिकारी नामांकन पत्रों की जांच करता है और योग्य उम्मीदवारों के नाम बैलट में शामिल किए जाते हैं. उप राष्ट्रपति पद के लिए पात्रता कोई व्यक्ति उपराष्ट्रपति होने का पात्र तभी होगा, अगर   1. भारत का नागरिक हो 2. 35 साल वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो 3. वह राज्यसभा के लिए चुने जाने की योग्यताओं को पूरा करता हो. 4. उसे उस राज्य या संघ राज्य क्षेत्र में संसदीय निर्वाचन क्षेत्र का मतदाता होना चाहिए 5. कोई व्यक्ति, जो भारत सरकार के या किसी राज्य सरकार के अधीन … Read more

तबाही के साए में गाजा: इंसानियत रो रही, युद्धविराम की मांग हो रही, गाजा में तबाही की सारी हदें पार

गाजा  गाजा में इजरायली हमले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. यहां के लोग दोतरफा मार का शिकार हो रहे हैं. एक तरफ बारूद और दूसरी तरफ भूख, दोनों फिलिस्तीनियों की जान के दुश्मन बने हुए हैं. युद्ध की भयावहता अब उस स्तर पर पहुंच चुकी है, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती. इन हालातों को देखते हुए ब्रिटेन, कनाडा, जापान समेत 26 देशों ने गाजा में तत्काल युद्धविराम की अपील की है. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने गाजा में राहत की उम्मीद में खाने के लिए जुटे 800 से ज्यादा लोगों की मौत को असहनीय और अमानवीय करार देते हुए इजरायल की आलोचना की है. यह पहली बार नहीं है जब यूरोपीय देश युद्धविराम की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी आवाज इजरायली सत्ता के कानों तक नहीं पहुंच सकी. गाजा के लोगों के दर्द की गूंज ब्रिटिश संसद में भी गूंजी है. लंदन के सांसद एंडी स्लॉटर ने कहा, "हर सुबह नए कत्लेआम, नई विस्थापन की तस्वीरें आती हैं. लोग कतारों में लगकर रोटी मांगते हैं और वहीं गोली खा जाते हैं. अब वक्त है कि केवल बयान नहीं, ठोस कार्रवाई हो." उनकी यह अपील सीधे ब्रिटिश सरकार और विदेश मंत्रालय को थी कि अब केवल निंदा करने से काम नहीं चलेगा. सबको मिलकर इजरायल पर असरदार दबाव बनाने की कोशिश करनी चाहिए. पोप लियो की पुकार, बंद करो नरसंहार रविवार को वेटिकन से पोप लियो ने भी गाजा में हो रहे नरसंहार को लेकर अपनी एंजेलस प्रार्थना में तत्काल युद्धविराम की मांग की है. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर और मानवाधिकार कानूनों का सम्मान करते हुए निर्दोष नागरिकों की रक्षा की जाए. उनका कहना था कि राहत सामग्री के रास्ते खोले जाएं, ताकि फंसे हुए लोगों को तत्काल राहत सहायता मिल सके. कतर में हो रही अप्रत्यक्ष बातचीत जारी वहीं, कतर की राजधानी में अमेरिका की मध्यस्थता में हमास और इजरायल के बीच युद्धविराम को लेकर अप्रत्यक्ष वार्ता चल रही है. युद्धविराम और बंधकों की अदला-बदली को लेकर बातचीत जारी है, लेकिन अब तक कोई व्यावहारिक सफलता नहीं मिली है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी गाजा की स्थिति को अमानवीय और क्रूर बताते हुए युद्ध को तत्काल रोकने की मांग की है.  इलाज के बिना दम तोड़ रहे मासूम बच्चे उन्होंने कहा, "हमने गाजा में संयुक्त राष्ट्र की राहत कतारों पर लोगों को गोली मारते देखा है. यह एक बर्बर और नीच हरकत है, जिसकी मैं घोर निंदा करता हूं. युद्धविराम, बंधकों की रिहाई और मानवीय मदद की अबाध पहुंच प्राथमिक आवश्यकता है." गाजा के रंतिसी अस्पताल में कार्यरत डॉक्टर राघेब वारशाघा ने बताया कि गंभीर रूप से बीमार बच्चे इलाज के बिना दम तोड़ रहे हैं.  कुपोषण, दूध की कमी से जूझ रही मांएं नवजात बच्चों को जन्म देने वाली मांएं कुपोषण और दूध की कमी से जूझ रही हैं. अस्पतालों में दवाएं खत्म हो चुकी हैं. गाजा में अब भोजन का संकट जानलेवा हो चुका है. लोग अपने घरों से निकलकर बंद रसोई के बाहर लाइन लगाकर बैठ जाते हैं. हाथों में खाली बर्तन और आंखों में भूख. लेकिन रसोई भी अब खाली हो चुकी है. जो भी चूल्हा जलता था, अब वो राख हो चुका है. 59 हजार मौतें, खंडहर में तब्दील गाजा गाजा में इजरायली हमलों में अबतक 59 हजार से ज्यादा फिलिस्तीनियों की मौत हो चुकी है. इजरायली सेना जमीनी और हवाई दोनों मोर्चों पर हमले तेज कर चुकी है. महिलाओं और बच्चों को भी निशाना बनाया जा रहा है. जो जिंदा हैं, वे भूख से मरने को मजबूर हैं. दुनिया के 26 देशों का संयुक्त बयान, संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी, पोप लियो की प्रार्थना और कतर में चल रही बातचीत नरसंहार को रोकने की कोशिश है.

रियल एस्टेट घोटाले में फंसे बिल्डर-बैंक अफसर, CBI को सुप्रीम कोर्ट से मिली छानबीन की अनुमति

नई दिल्ली बिल्डर-बैंक गठजोड़ के मामले में दर्ज मुकदमों की सुनवाई के दौरान सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह दिल्ली-एनसीआर में 22 केस दर्ज करने जा रही है. कई बिल्डरों और बैंक अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोपों में शिकंजा कस सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को हरी झंडी दे दी है. सीबीआई की सीलबंद रिपोर्ट मिलने के बाद कोर्ट ने कहा कि यह रिपोर्ट आंखें खोल देने वाली है. सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को मुकदमे दर्ज करने के बाद प्रारंभिक जांच के निर्देश दिए थे. कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि कुछ रियल एस्टेट कंपनियां बैंकों के साथ मिलीभगत कर घर खरीदारों को अपनी परियोजनाओं के लिए कर्ज दिलाती हैं. ये प्रोजेक्ट कभी पूरे नहीं होते, जिससे आम आदमी कर्ज लेकर फंस जाता है, क्योंकि बैंक और बिल्डर मिलकर धन हड़प लेते हैं. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की जांच पर संतोष जताया और आगे की जांच के लिए समय भी दिया. और बिल्डरों के खिलाफ हो सकती है कार्रवाई जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने आदेश दिया कि अगर जांच में कोई बाधा आती है, तो सीबीआई को कभी भी अदालत आने की छूट है. घर खरीदारों को परेशान करने और उनसे धन ऐंठने के लिए बैंकों के साथ साठगांठ के मामले में सीबीआई की जांच के दायरे में और भी बिल्डर आ सकते हैं. केंद्रीय एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह दिल्ली-एनसीआर में विभिन्न बिल्डरों के खिलाफ 22 मामले दर्ज करने की योजना बना रही है. इसके अलावा, अन्य शहरों के बिल्डरों की जांच के लिए भी उसने और समय मांगा है. सीबीआई की पैरवी करते हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने पीठ को बताया कि जांच को आगे बढ़ाकर निष्कर्ष तक पहुंचाने में और समय लगेगा. उन्होंने कोर्ट को सूचित किया कि सीबीआई ने अब तक 58 से अधिक संपत्तियों की जांच की है और एक हजार से ज्यादा गवाहों से पूछताछ की है. सीबीआई ने पूरे मामले की सीलबंद रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी है. बेंच ने सीबीआई की जांच पर संतुष्टि जताते हुए जांच पूरी करने के लिए 6 हफ्ते का समय दिया है.

भारत ने UN में खोली पाकिस्तान की पोल, कहा — ‘उधारी पर पलता, आतंक फैलाता देश’

 नई दिल्ली पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान को एक बार फिर संयु्क्त राष्ट्र में पानी-पानी होना पड़ा है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की बैठक में भारत ने पाकिस्तान को एक बार फिर आड़े हाथों लेते हुए आईना दिखाया.  संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने पाकिस्तान पर आतंकवाद को सपोर्ट करने और अपनी अर्थव्यवस्था का बेड़ा गर्क करने पर फटकार लगाई. शांति और बहुपक्षवाद पर एक उच्चस्तरीय डिबेट में हिस्सा लेते हुए भारत ने पाकिस्तान को आईएमएफ से बार-बार कर्ज लेने वाला देश और कट्टरता एवं आतंकवाद में डूबा हुआ राष्ट्र बताया.  उन्होंने कहा कि एक तरफ भारत का परिपक्व लोकतंत्र, उभरती अर्थव्यवस्था और समावेशी समाज है. दूसरी तरफ पाकिस्तान कट्टरता और आतंकवाद में डूबा हुआ है, जो आईएमएफ के कर्ज पर चल रहा है. वह बार-बार आईएमएफ से कर्ज लेता है. हम जब अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने पर चर्चा कर रहे हैं तो यह समझना जरूरी है कि कुछ बुनियादी सिद्धांतों को सार्वभौमिक रूप से सम्मान किया जाना चाहिए. इनमें एक बेहद महत्वपूर्ण सिद्धांत आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता का है, जो पाकिस्तान के लिए यह उचित नहीं है. UN में पहलगाम हमले का जिक्र पर्वतनेनी हरीश ने 22 अप्रैल को जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का हवाला देते हुए आतंकी मामलों में जवाबदेही की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देकर अच्छे पड़ोसी और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों की भावना का उल्लंघन करने वाले मुल्कों को इसकी भारी कीमत चुकानी होगी.  उन्होंने कहा कि आतंक को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. इससे पहले पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर मुद्दा और भारत के साथ सिंधु जल संधि पर चल रहे विवाद को उठाया.

पाकिस्तान की बड़ी चूक! न्यूक्लियर ज़ोन के पास गिरी खुद की मिसाइल, शाहीन-3 टेस्ट में खामी

 बलूचिस्तान  पाकिस्तान की सेना ने हाल ही में अपनी शाहीन-3 मिसाइल का टेस्ट किया, जो परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है. लेकिन ये टेस्ट बुरी तरह नाकाम रहा. मिसाइल निशाना चूक गई और डेरा गाजी खान (पंजाब प्रांत) में एक परमाणु केंद्र के पास धमाका हुआ. इसका मलबा बलूचिस्तान के डेरा बुगटी जिले में गिरा, जो नागरिक बस्तियों के बेहद करीब था. इस घटना ने न सिर्फ पाकिस्तान की सैन्य क्षमता पर सवाल उठाए, बल्कि बलूचिस्तान के लोगों की सुरक्षा को भी खतरे में डाल दिया. 22 जुलाई 2025 को हुए इस हादसे के बाद पाकिस्तानी सेना ने इलाके में इंटरनेट बंद कर दिया, मीडिया को रोका और लोगों को घरों में रहने को कहा.  शाहीन-3 मिसाइल क्या है? शाहीन-3 पाकिस्तान की सबसे ताकतवर मिसाइलों में से एक है. ये एक सतह से सतह (सरफेस-टू-सरफेस) बैलिस्टिक मिसाइल है, जो 2750 किलोमीटर तक मार कर सकती है. यानी ये भारत के कई शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु तक पहुंच सकती है. इसकी खासियतें हैं…     परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता: ये 20-25 से 300-500 किलोटन तक के परमाणु हथियार ले जा सकती है.     सॉलिड फ्यूल: ये ठोस ईंधन पर चलती है, जो इसे जल्दी लॉन्च करने में मदद करता है.     चीन की मदद: पाकिस्तान ने इसे 2000 के दशक में चीन की तकनीकी मदद से बनाना शुरू किया. पाकिस्तान इसे अपनी रक्षा रणनीति का हिस्सा मानता है, खासकर भारत की सैन्य ताकत का जवाब देने के लिए. लेकिन बार-बार टेस्ट फेल होने से इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं. क्या हुआ 22 जुलाई 2025 को? 22 जुलाई 2025 को पाकिस्तान ने डेरा गाजी खान के राखी इलाके से शाहीन-3 मिसाइल का टेस्ट किया. लेकिन मिसाइल अपने निशाने से भटक गई. बलूचिस्तान के डेरा बुगटी जिले में मट्ट इलाके में जा गिरी. ये जगह नागरिक बस्तियों से सिर्फ 500 मीटर दूर थी. लूप सेहरानी लेवी स्टेशन के पास ग्रेपन रवाइन में मलबा गिरा, जिससे बड़ा धमाका हुआ.     धमाके की आवाज: धमाका इतना जोरदार था कि 20-50 किलोमीटर दूर तक सुनाई दिया, जिसमें बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा के इलाके भी शामिल थे.     सोशल मीडिया पर हंगामा: कुछ वीडियो में लोग डरकर भागते दिखे. कुछ ने दावा किया कि मिसाइल डेरा गाजी खान के परमाणु केंद्र पर गिरी, तो कुछ ने कहा कि ये किसी दुश्मन ड्रोन का हमला था.     पाकिस्तानी सेना की प्रतिक्रिया: सेना ने तुरंत इलाके में इंटरनेट बंद कर दिया, मीडिया को रोका और लोगों को घरों में रहने को कहा.     DG खान कमिश्नर के प्रवक्ता मझर शीरानी ने कहा कि ये शायद किसी फाइटर जेट की सोनिक बूम (ध्वनि की दीवार टूटने की आवाज) थी, लेकिन पक्की जांच का इंतजार है.  रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान नाम के संगठन ने इस टेस्ट की कड़ी निंदा की. उन्होंने कहा कि मिसाइल टेस्ट ने बलूचिस्तान के लोगों की जान खतरे में डाली. अगर मलबा थोड़ा और इधर-उधर गिरता, तो सैकड़ों लोग मारे जा सकते थे. डेरा गाजी खान क्यों खास है? डेरा गाजी खान पाकिस्तान का सबसे बड़ा परमाणु केंद्र है. यहां यूरेनियम का भंडारण और प्रोसेसिंग होती है. 1970 में पाकिस्तान एटॉमिक एनर्जी कमीशन (PAEC) ने यहां एक पायलट प्लांट बनाया था, जो रोजाना 10,000 पाउंड यूरेनियम प्रोसेस करता है. ये जगह पाकिस्तान के परमाणु हथियार प्रोग्राम का दिल है. अगर मिसाइल सचमुच इस केंद्र पर गिरी, तो ये बहुत बड़ा हादसा हो सकता था. लेकिन अधिकारियों ने दावा किया कि कोई नुकसान नहीं हुआ. पहले भी हुए हैं ऐसे हादसे ये पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान का मिसाइल टेस्ट फेल हुआ. पहले भी कई बार ऐसा हो चुका है…     2023 में डेरा गाजी खान: अक्टूबर 2023 में भी शाहीन-3 का टेस्ट फेल हुआ था. उस बार भी धमाका डेरा गाजी खान के पास हुआ, जिसकी आवाज 30-50 किलोमीटर दूर तक सुनाई दी. कुछ ने दावा किया कि मिसाइल परमाणु केंद्र पर गिरी, लेकिन सरकार ने इसे सोनिक बूम बताया.     2021 में डेरा बुगटी: जनवरी 2021 में शाहीन-3 का टेस्ट फेल हुआ और मिसाइल डेरा बुगटी के नागरिक इलाके में गिरी. कई घर तबाह हुए और लोग घायल हुए. बलूच रिपब्लिकन पार्टी ने इसे बलूचिस्तान को पाकिस्तानी सेना की प्रयोगशाला बनाने का सबूत बताया.     2020 में बाबर-II मिसाइल: बाबर-II मिसाइल, जो जमीन और समुद्र से लॉन्च हो सकती है, बलूचिस्तान में टेस्ट के दौरान क्रैश हो गई.     2022 में जमशोरो: एक अज्ञात मिसाइल सिंध के जमशोरो शहर में गिरी. कुछ का दावा था कि ये भारत के ब्रह्मोस मिसाइल हादसे का जवाब देने की कोशिश थी. ये हादसे दिखाते हैं कि पाकिस्तान की मिसाइल तकनीक में अभी भी खामियां हैं. बलूचिस्तान का गुस्सा रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान और स्थानीय लोग इस टेस्ट से बहुत नाराज हैं. उनका कहना है… बलूचिस्तान को प्रयोगशाला बनाया जा रहा है: पाकिस्तानी सेना बार-बार बलूचिस्तान में मिसाइल और परमाणु टेस्ट करती है, जिससे वहां के लोग खतरे में रहते हैं. 1998 में छागाई में हुए परमाणु टेस्ट की वजह से आज भी वहां कैंसर और त्वचा रोग जैसी बीमारियां फैली हैं. जबरन विस्थापन: सेना टेस्ट से पहले बलूच लोगों को उनके घरों से निकाल देती है. डेरा बुगटी और काहन जैसे इलाकों में ये आम बात हो गई है. इसका मकसद वहां के प्राकृतिक संसाधनों (जैसे गैस और खनिज) का दोहन करना बताया जाता है. सुरक्षा की कमी: मिसाइल टेस्ट के दौरान नागरिकों को पहले से नहीं बताया जाता, जिससे उनकी जान जोखिम में पड़ती है. बलूच रिपब्लिकन पार्टी के प्रवक्ता शेर मोहम्मद बुगटी ने कहा कि पाकिस्तान ने बलूचिस्तान को अपनी हथियारों की प्रयोगशाला बना दिया है. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों से इसकी जांच करने की मांग की. पाकिस्तान का परमाणु प्रोग्राम पाकिस्तान दुनिया के उन नौ देशों में शामिल है, जिनके पास परमाणु हथियार हैं. 2025 तक उसके पास 170 परमाणु हथियार होने का अनुमान है, जो 2026 तक 200 तक पहुंच सकते हैं. पाकिस्तान की नीति न्यूनतम विश्वसनीय प्रतिरोध (मिनिमम क्रेडिबल डिटरेंस) की है, यानी वो भारत जैसे पड़ोसियों के खिलाफ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है.     शाहीन सीरीज: ये मिसाइलें 1250 से 2750 … Read more