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धराली के लिए सड़क मार्ग खुला, लेकिन संकट बरकरार — 11 सैनिकों समेत दर्जनों अब भी लापता

धराली  उत्तराखंड के धराली में तबाही के बाद अब जिंदगी की तलाश जारी है. रेस्क्यू ऑपरेशन में सात टीमें युद्ध स्तर पर जुटी हैं. सेना के 225 से ज्यादा जवान मौके पर हर मोर्चे पर डटे हैं. हादसे में अबतक 5 लोगों की मौत हुई है जबकि 11 जवान समेत 70 लोग लापता हैं. अभी तक 190 लोगों का रेस्क्यू कर लिया गया है. रास्ते बंद हो जाने से हेलिकॉप्टर से रेस्क्यू ही एक मात्र सहारा था. हेलिकॉप्टर से ही घायलों को अस्पताल पहुंचाया जा रहा था. हालांकि भटवारी में बह गया राजमार्ग अब खुल गया है, जिससे अब सड़क मार्ग से धराली जाना संभव हो सकेगा. भटवारी में पहली दरार को ठीक करने में बड़ी सफलता मिली है. राहत-बचाव कार्य का आज दूसरा दिन धराली और हर्षिल में राहत-बचाव कार्य का आज दूसरा दिन है और सड़क मार्ग खुलने से धराली और हर्शिल पहुंचना अब मुमकिन हो जाएगा. बता दें कि भटवारी में राजमार्ग बह गया था. BRO & GREF की टीमें रास्ते को और बेहतर बनाने के लिए लगातार संघर्ष कर रही हैं. दो जगहों पर पहाड़ काटकर सड़क खोलने की तैयारी हो रही थी, हालांकि सीमित संसाधनों के चलते इस काम में देरी हुई. राहत की बात ये है कि मौसम अभी साफ बना हुआ है. अब उम्मीद जागी है कि रेस्क्यू ऑपरेशन में तेजी आएगी. हवाई सेवाओं पर रहा सारा दारोमदार बता दें कि जब तक ये रास्ता नहीं खुलता, तब तक गंगवानी में बह गए पुल को रिस्टोर करने की शुरुआत नहीं हो सकती थी इसलिए सारा दारोमदार हवाई सेवाओं पर ही रहा. छोटे-छोटे हेलीकॉप्टर के ज़रिए राहत बचाव कर्मियों को भेजा जाता रहा. धीरे-धीरे करके बचाए गए लोगों को हवाई मार्ग से नीचे लाया जा गया. राहत बचाव कर्मियों की संख्या धराली और हर्षिल में बढ़ी तो थी लेकिन संसाधन सीमित होने के चलते रेस्क्यू मिशन रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा था. वहीं, कम्युनिकेशन और बिजली अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है. 'देखते ही देखते चंद सेकेंड में ही सैलाब में समा गया पूरा इलाका' धराली में जिस इलाके में सबके ज्यादा तबाही मची है, वहां का हाल देखा जा सकता है, कैसे सैलाब के मलबे में कैसे पूरा घर समा गया है. घर के चारों तरफ सिर्फ मलबा ही मलबा है. सैलाब की धार इतनी तेज थी कि इस इलाके में कई घर गिर गए या फिर बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए. धराली में बादल फटने के बाद का मंजर एकदम खौफनाक था. स्थानीय मंदिर के एक पुजारी के मुताबिक, देखते ही देखते चंद सेकेंड में ही पूरा इलाका सैलाब में समा गया. धराली के लोगों को कहना है कि उन्होंने अपने जीवन काल में अभी तक ऐसी तबाही नहीं देखी है. उनका कहना है कि देखते ही देखते सैकड़ों दुकान और घरों में पानी घुस गया. तबाही को लेकर धराली के एक और निवासी ने बताया कि आसपास अचानक मलबा आ गया. जिस वक्त ये हादसा हुआ करीब दो सौ लोग गांव में मौजूद थे. धराली में बादलफाड़ तबाही के बाद अब युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है. हेलिकॉप्टरों के जरिये पहुंचाई जा रही राहत सामग्री जहां चंद घंटों पहले होटलों की इमारतें खड़ी थीं, बाज़ार थे, दुकानें थी, कुदरत ने पलभर में सबकुछ मिटा डाला. अब वहां टीमें रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हैं और इस रेस्क्यू ऑपरेशन में एकमात्र सहारा हेलिकॉप्टर है क्योंकि यहां पहुंचनेवाली सड़कें पूरी तरह से टूट गई हैं. भारतीय सेना की 7 टीमें लगातार मोर्चे पर डटी हैं. 225 से ज़्यादा जवान राहत-बचाव में तैनात हैं. राहत की खबर ये है कि हर्षिल का मिलिट्री हेलीपैड पूरी तरह चालू कर दिया गया है. 3 सिविल हेलिकॉप्टरों के जरिये राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है. भटवाड़ी और हर्षिल में हेलिकॉप्टर लैंडिंग से रेस्क्यू ऑपरेशन में तेजी आई है. चिनूक, Mi-17 और ALH हेलिकॉप्टर स्टैंडबाय पर है. तीन जगह रेस्क्यू, बारिश और लैंडस्लाइड बनी मुसीबत आपको बता दें कि उत्तराकाशी ज़िले में तीन जगह विनाशकारी सैलाब आया. धराली, हर्षिल और सुखी टॉप. अब इन तीनों जगहों पर रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है. वहां पर लगातार लैंडस्लाइड हो रही है, बारिश हो रही है, इसलिए रेस्क्यू में दिक्कतें आ रही हैं. सैलाब में जो भारतीय सेना के 11 जवान लापता हुए हैं, उनकी तलाश भी अभी पूरी नहीं हो पाई है. कहा ये भी जा रहा है कि केरल के 28 टूरिस्ट् का ग्रुप धराली की घटना के बाद से लापता हैं.  हालांकि हादसे के बाद से ही राहत बचाव का काम युद्ध स्तर पर जारी है. पीड़ितों तक मदद पहुंचाने और जिंदगी की तलाश में रेस्क्यू टीमें जी जान से जुटी हैं.

अमेरिका का रूस पर वार तेज, जब्त संपत्तियों की बिक्री से बढ़ेगा तनाव, 29 अरब में बेचेगा लग्जरी नौका!

मॉस्को  अमेरिका अब रूस के साथ टेंशन बढ़ाने की राह पर चल रहा है. अमेरिका प्रशासन ने रूस की जब्त अरबों की संपत्तियों की नीलामी करने का फैसला शुरू किया है. इसी सिलसिले में अमेरिका रूस के एक जब्त लग्जरी नौका अमेडिया (Amadea) को नीलाम करने जा रहा है. रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद ये अमेरिका किसी रूसी संपत्ति की पहली बार नीलामी कर रहा है. विलासिता की सभी सुविधाओं से लैस इस नौका की कीमत अमेरिका ने 325 मिलियन डॉलर रखी है. रुपये में ये रकम लगभग 29 अरब होती है.   10 सितंबर को समाप्त होने वाली यह नीलामी ऐसे समय में हो रही है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर युद्ध समाप्त करने के लिए दबाव बढ़ाना चाहते हैं. अमेरिका ने कहा है कि वह अपने सहयोगियों के साथ मिलकर रूसी धनाढ्य वर्ग पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं. इनमें कुछ रईस पुतिन के करीबी हैं. अमेरिकी सरकार ने इन रईसों की लग्जरी नौकाएं जब्त कर ली है. ताकि ये अमीर लोग राष्ट्रपति पुतिन को युद्ध रोकने के लिए मजबूर करें. विलासिता का दूसरा नाम अमेडिया तीन साल पहले ज़ब्त की गई और वर्तमान में सैन डिएगो में खड़ी 106 मीटर लंबी नौका को जर्मन कंपनी लुर्सेन ने 2017 में विशेष रूप से निर्मित किया था.  फ़्रांस्वा ज़ुरेट्टी द्वारा डिजाइन की गई इस नौका में संगमरमर लगे हैं. इस लग्जरी जहाज में आठ राजकीय कक्ष, एक ब्यूटी सैलून, एक स्पा, एक जिम, एक हेलीपैड, एक स्विमिंग पूल और एक लिफ्ट है.  इसमें 16 मेहमानों और 36 चालक दल के सदस्यों के रहने की व्यवस्था है.  कौन है अमेडिया का मालिक? अमेडिया  का असली मालिक कौन है, ये निर्धारित करना काफी विवादास्पद रहा है. क्योंकि कई ट्रस्ट और शेल कंपनियों के नाम इस लग्जरी नौका से जुड़े हैं. यह नौका केमैन द्वीप समूह में पंजीकृत है और इसका स्वामित्व केमैन द्वीप समूह में ही स्थित मिलमारिन इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के पास है.  अमेरिका का दावा है कि अर्थशास्त्री और पूर्व रूसी राजनेता सुलेमान केरीमोव, जिस पर 2018 में कथित मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में अमेरिका ने प्रतिबंध लगाया था इस नौका के मालिक हैं. वहीं सरकारी नियंत्रण वाली रूसी तेल और गैस कंपनी रोसनेफ्ट के पूर्व अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी एडुआर्ड खुदैनातोव इस नौका के मालिक होने का दावा कर रहे हैं. एडुआर्ड खुदैनातोव अभी अमेरिकी प्रतिबंधों से मुक्त हैं.  अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि खुदैनातोव नौका के नकली मालिक हैं, इसका उद्देश्य नौका के असली मालिक केरीमोव को बचाना और छुपाना है. नौका के असली स्वामित्व को लेकर मुकदमा चल रहा है. खुदैनातोव के एक प्रतिनिधि ने बुधवार को ईमेल के ज़रिए दिए गए एक बयान में कहा कि नौका की बिक्री की योजना "अनुचित और समय से पहले" है क्योंकि खुदैनातोव इस ज़ब्ती के एक फैसले के ख़िलाफ़ अपील कर रहे हैं. प्रतिनिधि एडम फोर्ड ने कहा, "हमें संदेह है कि यह उचित बाजार मूल्य पर किसी भी तर्कसंगत खरीदार को आकर्षित करेगा, क्योंकि स्वामित्व को संयुक्त राज्य अमेरिका के बाहर की अदालतों में चुनौती दी जा सकती है और दी जाएगी, जिससे खरीदारों को कई वर्षों तक महंगी, अनिश्चित मुकदमेबाजी का सामना करना पड़ेगा." 2022 में अमेरिका ने किया था जब्त 2022 में नेशनल मेरीटाइम सर्विस के अधिकारियों ने इस नौका को अपने कब्जे में लिया था. इसके बाद से इसका उपयोग नहीं किया गया है. अब अमेरिका इसकी नीलामी कर रहा है. बोली लगाने वालों को सीलबंद लिफाफे में इस नौका की कीमत भेजनी होगी. इसके अलावा उन्हें पेशगी के तौर पर 11.6 मिलियन डॉलर भी जमा करने होंगे.  मई 2024 में अमेरिका ने यूक्रेन की मदद के लिए एक पैकेज दिया था. इसे यूएस में कानून का दर्जा दिया गया है. इसके आधार पर अमेरिकी क्षेत्र में मौजूद किसी भी रूसी संपत्ति को जब्त किया जा सकेगा और इसे बेचकर इसका इस्तेमाल यूक्रेन के फायदे के लिए किया जा सकेगा. 

₹31,500 करोड़ की डील रद्द कर भारत ने दिखाया सख्त रुख, बौखलाए ट्रंप ने दी तीखी प्रतिक्रिया

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत के खिलाफ हाथ धोकर पड़ गए हैं. उन्होंने रूस से तेल आयात करने के कारण भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा की है. लेकिन, पूरी दुनिया को पता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति का ये दोहरा रवैया है. अमेरिका और यूरोपीय देश खुद रूस से भारी मात्रा में तेल, गैस और फर्टिलाइजर खरीदते हैं. अमेरिका के इसी रवैये को भारत बार-बार दोहराता रहा है. यूरोपीय संस्था सीआरईए (सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर) ने भी एक खास रिपोर्ट में डोनाल्ड ट्रंप के इस दावे की पोल खोल दी है. खैर, अब भारत भी मन बना चुका है कि वह डोनाल्ड ट्रंप के इस दोगलापन के आगे नहीं झुकेगा. लंबे समय तक डोनाल्ड ट्रंप के बकवास पर चुप रहने के बाद भारत ने पिछले दिनों एक बयान जारी कर अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है. इसके साथ ही भारत ने एक्शन लेना भी शुरू कर दिया है. भारत ने लिया बड़ा एक्शन एक बड़ी डील रद्द कर दी है. दरअसल, भारत ने अपनी नौसेना के लिए अमेरिका की बोइंग कंपनी से छह पी-8I पोसेडन विमान खरीदने का सौदा किया था. ये विमान समंदर में निगरानी के लिए हैं. भारत के विशाल समुद्री क्षेत्र को देखते हुए नौसेना को ऐसे कई विमानों की जरूरत हैं. ये बेहद आधुनिक और उन्नत विमान हैं और अरब सागर से लेकर हिंद महासागर तक में चीन के बढ़ते प्रभाव पर नजर रखने के लिए इनकी बहुत जरूरत है. डिफेंस वेबसाइट आईडीआरडब्ल्यू की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने तीन अगस्त को सौदे को फिलहाल के लिए रोकने का फैसला कर लिया. नौसेना के पास 12 विमान भारतीय नौसेना के पास पहले से ही ऐसे 12 विमान है. भारत ने बोइंग से 2009 में ये विमान खरीदे थे. तब अमेरिका से इन विमानों को खरीदने वाला भारत पहला अंतरराष्ट्रीय खरीददार बना था. 2008 में पहले आठ विमानों का सौदा हुआ. उस वक्त इसकी लागत करीब 2.2 बिलियन डॉलर यानी करीब 19 हजार करोड़ रुपये आई थी. फिर 2016 में भारत ने ऐसे चार और विमान खरीदे. उस पर करीब 8500 करोड़ रुपये खर्च हुए. नौसेना के लिए बेहद अहम हैं ये विमान इसके बाद मई 2021 में अमेरिका ने भारत को ऐसे छह विमान बेचने को मंजूरी दे दी. इस सौदे पर करीब 2.42 अरब डॉलर (करीब 21 हजार करोड़ रुपये) की लागत आने वाली थी. यह सौदा ईस्टर्न नेवल कमांड के लिए था. लेकिन, बाद के दिनों लागत बढ़ने के कारण यह डील अटक गई. जुलाई 2025 तक इस सौदे की लागत बढ़कर 3.6 बिलियन डॉलर यानी करीब 31,500 करोड़ रुपये हो गई. बावजूद इसके भारत सरकार इस साल फिर से इस डील को फाइनल करने करने वाली थी. क्योंकि भारतीय नौसेना ने इस विमान को बेहतरीन बताया था. ये पी-8I पोसेडन विमान की क्षमता बेहद एडवांस है. इसमें एंटी शिप मिसाइल NASM-MR लगे है. इसकी रेंज 350 किमी है. यह हिंद महासागर में चीन के नौसैनिक गतिविधियों पर पैनी नजर रखने में बेहद कारगर है. लेकिन, अमेरिकी राष्ट्रपति के टैरिफ वार के कारण भारत ने इस सौदे पर रोक लगा दी है. अगर इस डील को पूरी तरह रद्द की जाती है तो यह अमेरिकी कंपनी बोइंग के लिए बड़ा झटका साबित होगी. बोइंग ने भारत में करीब पांच हजार लोगों को रोजगार दिया है. वह भारत की अर्थव्यवस्था में 1.7 बिलियन डॉलर यानी करीब 15 हजार करोड़ रुपये का कारोबार करती है. इस डील को रोके जाने से भारतीय नौसेना की ताकत पर असर पड़ सकता है. इन विमानों का भारत के समुद्री क्षेत्र में सैकड़ों नौसैनिक जहाजों और 20 हजार मर्चेंट जहाजों पर निगरानी में किया जाता है. हालांकि भारत खुद अपना निगरानी विमान बना रहा है. पी-8I पोसेडन को खरीदने में भारी लागत को देखते हुए माना जा रहा है कि भारत अपने स्वदेसी विमान को प्राथमिकता दे सकता है. डीआरडीओ और एचएएल ऐसे विमान विकसित कर रहे हैं.

क्रेडिट की होड़ में ट्रंप ने टैरिफ को बनाया हथियार: माइकल कुगलमैन ने अमेरिका की खिंचाई की

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को भारत को झटका देते हुए अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान किया. रूस से लगातार सस्ते दाम पर कच्चा तेल खरीदने से भड़के ट्रंप ने भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया है. इस कदम को एनालिस्ट ट्रंप की खुन्नस के तौर पर देख रहे हैं. साउथ एशिया इंस्टीट्यूट के निदेशक माइकल कुगलमैन (Michael Kugelman) ने भारत और अमेरिका के बीच के स्ट्रैटेजिक संबंधों को बीते दो दशक का सबसे खराब संकट बताया. उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि दोनों देशों की पार्टनरशिप का यह सबसे खराब दौर है. इससे दोनों के रिश्ते रसातल तक पहुंच सकते हैं. कुगलमैन ने कहा कि दुर्भाग्य से पिछले कुछ समय से दोनों देशों के रिश्ते जिस तरह से खराब दौर से गुजर रहे हैं. ट्रंप का यह ताजा फैसला हैरान करने वाला नहीं है. इस फैसल के हानिकारक प्रभाव के बावजूद…मुझे यह ज्यादा आश्चर्यजनक नहीं लगता कि अंत में राष्ट्रपति ने अपनी धमकी को पूरा करने का फैसला किया. राष्ट्रपति ट्रंप भारत जैसे अपने करीबी साझेदार पर भी अधिकतम दबाव बनाने से नहीं झिझकता. ट्रंप चाहते हैं कि भारत किसी तरह से रूस से कच्चा तेल खरीदना कम कर दे. इससे रूस को यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में मदद मिल रही है. हालांकि, उन्होंने कहा कि अमेरिका और भारत के संबंध बहुआयामी हैं और अलग-अलग क्षेत्रों में दोनों देश एक दूसरे का सहयोग कर रहे हैं. ऐसे में रिश्तों में उतार-चढ़ाव जायज है. यह पूछे जाने पर कि रूस से लगातार कच्चा तेल खरीदने पर राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन को नहीं बल्कि भारत को सजा देने का फैसला क्यों किया? इसका जवाब देते हुए कुगलमैन ने कहा कि भारत ने जो किया, वो चीन ने नहीं किया. चीन ने सीजफायर कराने में राष्ट्रपति ट्रंप की भूमिका पर सवाल खड़े नहीं किए लेकिन भारत ने किए. इसलिए मुझे लगता है कि ट्रंप ने ट्रेड की आड़ में भारत पर अपनी खुन्नस निकाली है. यह हालांकि, दोहर मापदंड है. पाखंड है.. फिर इसे जो चाहे कह लें.  क्या चीन पर भारत की तरह लगेगा टैरिफ? ट्रंप की ओर से 50 फीसदी टैरिफ लगाए जाने पर भारत सरकार ने खुलकर आपत्ति जाहिर की है. ऐसे में जब रिपोटर्स ने ट्रंप से पूछा कि क्या चीन पर भी अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा? इस पर ट्रंप ने जवाब दिया कि हो सकता है. 

उधमपुर में हुआ बड़ा हादसा, CRPF बंकर व्हीकल पलटा – 2 की जान गई, 12 घायल

उधमपुर  जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में बड़ा हादसा हो गया. यहां सीआरपीएफ का एक बंकर व्हीकल दुर्घटनाग्रस्त हो गया. हादसा बसंतगढ़ इलाके के कंडवा क्षेत्र में हुआ, जहां सड़क पर अचानक वाहन बेकाबू होने के बाद पलट गया. इस हादसे में 2 सीआरपीएफ जवानों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 12 अन्य जवान घायल हो गए. जानकारी के अनुसार, बंकर वाहन में कुल 23 जवान सवार थे. जैसे ही वाहन कंडवा-बसंतगढ़ मार्ग पर पहुंचा, तो वहां वाहन अनियंत्रित होकर पलट गया. हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई. स्थानीय लोगों को पता चला तो तुरंत मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी गई. पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया. सभी घायल जवानों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है. इस मामले को लेकर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) संदीप भट ने कहा कि हादसे में दो जवानों की जान चली गई और घायल जवानों का इलाज जारी है. वहीं केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भी हादसे को लेकर अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर एक पोस्ट में दुख व्यक्त किया है. उन्होंने personally जिला उपायुक्त सलोनी राय से बात की है. उन्होंने कहा कि राहत कार्यों की निगरानी की जा रही है. मंत्री ने यह भी बताया कि स्थानीय लोग भी सहायता के लिए आगे आए हैं. फिलहाल पुलिस दुर्घटना के कारणों की जांच कर रही है. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, खराब सड़क और वाहन का बैलेंस बिगड़ना हादसे की वजह मानी जा रही है.

हाईकोर्ट जज नियुक्ति पर विवाद: आरती अरुण साठे के चयन पर विपक्ष की आपत्ति, भाजपा ने दी सफाई

मुंबई बॉम्बे हाई कोर्ट में अधिवक्ता और भाजपा की पूर्व प्रवक्ता आरती अरुण साठे की बतौर न्यायाधीश नियुक्ति को लेकर देश में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। विपक्ष ने इस पर गहरी आपत्ति जताते हुए न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं, वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने स्पष्ट किया है कि आरती साठे ने पार्टी से पिछले वर्ष ही इस्तीफा दे दिया था। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 28 जुलाई 2025 को आरती साठे को बॉम्बे हाई कोर्ट में न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की थी। कॉलेजियम में शामिल चीफ जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस बी.आर. गवई ने यह निर्णय लिया था। कॉलेजियम के अनुसार, उनकी नियुक्ति योग्यता, अनुभव और पेशेवर दक्षता के आधार पर की गई है। विपक्ष ने क्या कहा? विपक्षी दलों ने आरती साठे की नियुक्ति को “राजनीतिक पूर्वाग्रह” से प्रेरित बताया है। कांग्रेस के प्रवक्ता ने कहा, “एक राजनीतिक पार्टी की पूर्व प्रवक्ता अगर न्यायपालिका में बैठेंगी, तो आम नागरिक कैसे निष्पक्ष न्याय की उम्मीद कर सकता है?” कुछ नेताओं ने यह भी मांग की है कि इस नियुक्ति की नैतिक जांच की जाए। भाजपा की प्रतिक्रिया भाजपा की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि, “आरती साठे एक योग्य और प्रतिष्ठित अधिवक्ता हैं, और उन्होंने पार्टी से पिछले वर्ष त्यागपत्र दे दिया था। उनकी नियुक्ति पूरी तरह से संवैधानिक प्रक्रिया और सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की अनुशंसा के आधार पर की गई है।” आरती साठे का प्रोफाइल आरती अरुण साठे एक वरिष्ठ अधिवक्ता हैं और उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में कर, वित्तीय और वाणिज्यिक मामलों में विशेष अनुभव हासिल किया है। वे पूर्व में भाजपा की प्रवक्ता रही हैं लेकिन उन्होंने 2024 में पार्टी पद से इस्तीफा दे दिया था। उनके समर्थकों का कहना है कि उनकी नियुक्ति योग्यता और पेशेवर दक्षता के आधार पर हुई है, न कि किसी राजनीतिक प्रभाव के चलते। निष्कर्ष: आरती साठे की नियुक्ति पर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज है, लेकिन कानूनी प्रक्रिया और सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के चलते यह नियुक्ति फिलहाल आगे बढ़ती दिख रही है। देखना यह होगा कि क्या भविष्य में इस पर न्यायिक या संवैधानिक बहस और तेज होती है।

चार साल बाद चीन जाएंगे पीएम मोदी, एससीओ समिट में करेंगे भारत का प्रतिनिधित्व

नई दिल्ली  पीएम मोदी चीन दौरा 2025: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए 31 अगस्त से 1 सितंबर तक चीन का दौरा करेंगे, जैसा कि बुधवार को बताया गया। शिखर सम्मेलन टियांजिन में आयोजित किया जाएगा, और यह दौरा 2019 के बाद मोदी की पहली चीन यात्रा है, और 2020 के गलवान घाटी संघर्ष के बाद पहली यात्रा है। यह उच्च-स्तरीय राजनयिक जुड़ाव दोनों एशियाई दिग्गजों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में एक संभावित सुधार का संकेत देता है, जो पूर्वी लद्दाख में घातक सीमा गतिरोध के बाद से तनावपूर्ण बने हुए हैं।   पूर्व चीनी सैनिक वांग छी को भारत छोड़ने का मिला नोटिस, परिवार ने लगाई मदद की गुहार यह दौरा पूर्वी लद्दाख और व्यापक हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सीमा विवादों को लेकर भारत और चीन के बीच जारी तनाव की पृष्ठभूमि में हो रहा है। इस पर वैश्विक और क्षेत्रीय खिलाड़ी बारीकी से नजर रखे हुए हैं, खासकर क्योंकि दोनों एशियाई शक्तियां बहुपक्षीय मंचों के माध्यम से जुड़ाव करते हुए तनावपूर्ण संबंधों को प्रबंधित करने की कोशिश कर रही हैं। बीजिंग में आयोजित होने वाले शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन में आठ सदस्य देशों के नेता शामिल होंगे, जिनमें रूस, पाकिस्तान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, उज्बेकिस्तान, ताजिकिस्तान और ईरान शामिल हैं, जिन्होंने हाल ही में पूर्ण सदस्यता प्राप्त की है। मोदी-शी जिनपिंग की मुलाकात? पीएम मोदी का चीन दौरा चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ 2020 के गलवान घाटी संघर्ष के बाद पहली बार एक दुर्लभ व्यक्तिगत बैठक का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। जबकि दोनों नेता अन्य वैश्विक शिखर सम्मेलनों में एक-दूसरे से मिले हैं, तब से कोई औपचारिक द्विपक्षीय वार्ता नहीं हुई है। हालांकि इसकी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन शिखर सम्मेलन के मौके पर पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच बातचीत होने की संभावना है। भारत-चीन संबंध गलवान से धीरे-धीरे जुड़ाव तक मई 2020 के गलवान टकराव के बाद भारत-चीन संबंध बदतर हो गए हैं, जिसके दौरान 20 भारतीय सैनिक मारे गए थे। चीन के भी सैनिक मारे गए, हालांकि संख्या का सार्वजनिक रूप से खुलासा नहीं किया गया है। हिंसक टकराव दशकों में द्विपक्षीय संबंधों में सबसे निचले बिंदु को चिह्नित करता है। तब से, दोनों पक्षों ने सीमावर्ती क्षेत्रों में तनाव कम करने के लिए सैन्य और राजनयिक वार्ता की है। पिछले कुछ महीनों में, तनाव कम होने के संकेत मिले हैं: • भारत और चीन के बीच सीधी हवाई संपर्क फिर से खोलना • भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू करने का निर्णय • वीजा में ढील देने और सीमा पार नदियों पर जानकारी साझा करने के प्रस्ताव • भारत ने हाल ही में चीनी नागरिकों के लिए पर्यटक वीजा बहाल करने की घोषणा की। एससीओ शिखर सम्मेलन 2025 सामरिक महत्व टियांजिन में एससीओ शिखर सम्मेलन में सभी आठ सदस्य देशों – भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, उज्बेकिस्तान और ईरान के नेता शामिल होंगे, जो अभी पूर्ण सदस्य बना है। 2017 से सदस्य भारत ने इस मंच का इस्तेमाल सीमा पार आतंकवाद, विशेष रूप से पाकिस्तान से, के मुद्दों को उठाने और संप्रभुता का सम्मान करते हुए क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ावा देने के लिए किया है, जो चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) की स्पष्ट निंदा है। आगामी शिखर सम्मेलन भारत की रणनीतिक कूटनीति पर ध्यान केंद्रित करता है, एससीओ जैसे बहुपक्षीय संरचनाओं के साथ सक्रिय जुड़ाव रखते हुए, क्वाड (भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका) जैसे अमेरिका के नेतृत्व वाले हिंद-प्रशांत समूहों के साथ संबंधों को मजबूत करता है। इसके बाद, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर इस साल की शुरुआत में एससीओ रक्षा और विदेश मंत्रियों की बैठकों में सक्रिय रूप से भाग लेते रहे हैं। जयशंकर ने एक प्रारंभिक यात्रा पर बीजिंग में राष्ट्रपति शी से भी मुलाकात की, जिसमें संबंधों में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए नेतृत्व के नेतृत्व वाले संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया। शिखर सम्मेलन में प्रमुख क्षेत्रीय मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने की उम्मीद है जैसे: • क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी सहयोग • अफगानिस्तान में स्थिरता की बहाली • बहुपक्षीय व्यापार और ऊर्जा सहयोग • एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की ओर बढ़ना • यूरेशिया में संपर्क परियोजनाएं भारत के चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव, विशेष रूप से इसके पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) कॉरिडोर के विरोध को दोहराने की संभावना है, जिसमें संप्रभुता के मुद्दे उठाए गए हैं। पीएम मोदी का दौरा एक राजनयिक सफलता और चीन के साथ संबंधों को सामान्य करने के नए प्रयासों का संकेत देता है, भले ही भारत अपने रणनीतिक और क्षेत्रीय हितों की रक्षा करता रहे।

मौसम विभाग की बड़ी चेतावनी: कई राज्यों में 12 अगस्त तक भारी बारिश का खतरा

उत्तराखंड उत्तराखंड में इस समय मौसम लगातार खराब बना हुआ है और स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 6 से 12 अगस्त तक राज्य के सभी जिलों के लिए भारी से अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इसके अलावा कई जगहों पर गर्जना और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना भी जताई गई है। अगले सात दिनों का मौसम पूर्वानुमान 6 अगस्त: सभी जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश के साथ कहीं-कहीं अत्यंत भारी बारिश की संभावना है। गरज-चमक और तेज बारिश के दौर भी रहेंगे। 7 अगस्त: देहरादून, पौड़ी, बागेश्वर, चम्पावत और नैनीताल जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। पूरे राज्य में गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना है। 8 अगस्त: उत्तरकाशी, देहरादून, पौड़ी, बागेश्वर, चम्पावत और नैनीताल में भारी बारिश हो सकती है। तेज बारिश के साथ बिजली गिरने के भी आसार हैं।   9 अगस्त: देहरादून और बागेश्वर में भारी बारिश की चेतावनी है। बाकी जिलों में भी गरज और तेज बारिश के दौर रहेंगे। 10 अगस्त: उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली और बागेश्वर जिलों में भारी बारिश की संभावना है। पूरे राज्य में आकाशीय बिजली और तेज बारिश की चेतावनी जारी की गई है। 11 और 12 अगस्त: सभी जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज और बौछारें पड़ने की संभावना है। मौसम विभाग की चेतावनी IMD ने बताया है कि भारी बारिश से राज्य में भूस्खलन, नदियों का जलस्तर बढ़ना, सड़कों के अवरुद्ध होने, और निचले इलाकों में जलभराव जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। हाल ही में धराली और हरिद्वार में ऐसे हालात देखे जा चुके हैं। लोगों के लिए जरूरी सलाह     नदी और नालों के किनारे जाने से बचें।     पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा न करें।     मौसम की अपडेट पर नज़र रखें और अफवाहों से दूर रहें।     बच्चे और बुजुर्ग घरों में सुरक्षित रहें।     किसान फसलों को बचाने के लिए तिरपाल आदि का उपयोग करें।     मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर रखें।     किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन या स्थानीय अधिकारियों से तुरंत संपर्क करें। प्रशासन सतर्क रक्षाबंधन और स्वतंत्रता दिवस जैसे त्योहारों को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को बढ़ा दिया है। आपदा प्रबंधन टीमों को अलर्ट पर रखा गया है और संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त निगरानी की जा रही है।

पाकिस्तान में मानसून की मार, जनजीवन अस्त-व्यस्त, बाढ़ को लेकर रेड अलर्ट

नई दिल्ली पाकिस्तान में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने कई क्षेत्रों में बाढ़ की चेतावनी जारी की है। ये चेतावनी ऐसे समय में जारी की गई है जब 5 से 8 अगस्त तक पाकिस्तान के ऊपरी और मध्य भागों में तीव्र मानसून के प्रभाव की आशंका है। इसके अलावा उत्तरी पाकिस्तान पर मानसूनी धाराओं और पश्चिमी द्रोणिका के प्रभाव से भारी बारिश होने की संभावना है। भारी बारिश के कारण पाकिस्तान में बाढ़ का अलर्ट भारी बारिश की वजह से सिंधु, चिनाब और रावी सहित पाकिस्तान की सभी प्रमुख नदियों में जल स्तर बढ़ने की संभावना है, जबकि रावी और चिनाब की सहायक नदियों में बाढ़ की संभावना जताई गई है। दूसरी तरफ, तरबेला, गुड्डू और सुक्कुर बैराज में बाढ़ फिलहाल निम्न स्तर पर है, लेकिन लगातार बारिश चश्मा और ताउंसा को भी निम्न बाढ़ स्तर की ओर धकेल सकती है। इसके अलावा, नौशेरा में काबुल नदी, स्वात नदी और पंजकोरा और उनसे जुड़ी धाराओं और नालों में लगातार बारिश के कारण जल स्तर में वृद्धि देखी जा सकती है। बारिश से बढ़ सकता है बाधों का जल स्तर मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में, हुंजा, शिगर और घांचे जिलों में जलधाराओं के नेटवर्क में पानी का प्रवाह सहायक नदियों के साथ संभावित बाढ़ का कारण बन सकता है। साथ ही बांधों में मौजूदा भंडारण से संकेत मिलता है कि खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में तरबेला जलाशय 94% पर है और भारी बारिश के कारण इसका जल स्तर बढ़ने की संभावना है। एनडीएमए लोगों के सतर्क रहने की चेतावनी दी एनडीएमए ने नदियों और नालों के पास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने के लिए कहा है, क्योंकि रात में भारी बारिश के कारण अचानक जल स्तर बढ़ सकता है। बारिश के कारण अबतक कितना नुकसान? एनडीएमए की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, 26 जून से अब तक मूसलाधार मानसूनी बारिश के कारण 140 बच्चों सहित कम से कम 299 लोगों की जान चली गई और 715 अन्य घायल हो गए। रिपोर्ट की मानें तो बारिश के कारण होने वाली घटनाओं में 715 लोग घायल हुए हैं, जिनमें 239 बच्चे, 204 महिलाएं और 272 पुरुष शामिल हैं। अबतक, अचानक आई बाढ़ और भारी बारिश के कारण कुल 1,676 घर क्षतिग्रस्त हो गए और 428 जानवर मारे गए। इस बाढ़ के कारण कई क्षेत्रों में व्यापक विनाश हुआ है और स्थानीय समुदायों को भारी नुकसान पहुंचा है।

क्या ट्रंप की नीति से अमेरिका खुद फंसेगा जाल में? भारत नहीं, खुद पर पड़ेगा असर

नई दिल्ली प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) की सदस्य शामिका रवि ने कहा है कि अमेरिका की तरफ से टैरिफ में किसी भी तरह की वृद्धि का बोझ कम आया वाले अमेरिकी परिवारों पर पड़ेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि भारत एक अच्छा व्यापारिक साझेदार नहीं रहा। उन्होंने एलान किया कि वह अगले 24 घंटों में भारत पर टैरिफ में काफी वृद्धि करेंगे। ट्रंप का टैरिफ वास्तव में वैश्विक बाजारों में उपलब्ध सस्ते सामानों पर एक कर है, जिसका बोझ कम आय वाले अमेरिकी परिवारों पर पड़ेगा। रवि ने इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'ये टैरिफ अंतत: कम आय वाले अमेरिकी परिवारों से वहां की सरकार को हस्तांतरित होते हैं।'   भारत पर 25 फीसदी टैरिफ एक अगस्त को ट्रंप ने पारस्परिक टैरिफ दरों में संशोधन शीर्षक से एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें भारत के लिए 25 प्रतिशत की भारी वृद्धि सहित पांच दर्जन से अधिक देशों के लिए टैरिफ बढ़ा दिया गया था। हालांकि, कार्यकारी आदेश में उस जुर्माने का उल्लेख नहीं था, जो ट्रंप ने कहा था कि भारत को रूसी सैन्य उपकरण और ऊर्जा की खरीद के कारण चुकाना होगा। पिछले हफ्ते, ट्रंप ने भारत और रूस के घनिष्ठ संबंधों पर तीखा हमला करते हुए दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को मृत बताया था। इस टिप्पणी ने नई दिल्ली को यह कहने के लिए प्रेरित किया कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है भारत की जीडीपी पर नहीं पड़ेगा असर     उद्योग संगठन पीएचडीसीसीआई के एक अध्ययन के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय वस्तुओं पर घोषित 25 प्रतिशत टैरिफ का देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पर प्रभाव नगण्य रहेगा। संगठन ने कहा कि इसकी वजह यह है कि इससे अमेरिका को केवल 8.1 अरब डॉलर का निर्यात प्रभावित होगा। अमेरिका द्वारा घोषित टैरिफ गुरुवार से प्रभावी होने की संभावना है।     पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) द्वारा जारी इस शोध पत्र में अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव को कम करने के लिए कई उपायों की भी सिफारिश की गई है। पीएचडीसीसीआई के प्रेसिडेंट हेमंत जैन ने कहा, 'हमारा विश्लेषण दर्शाता है कि अमेरिका द्वारा भारत पर घोषित 25 प्रतिशत टैरिफ के परिणामस्वरूप भारत के कुल वैश्विक व्यापारिक निर्यात पर केवल 1.87 प्रतिशत और भारत के सकल घरेलू उत्पाद पर बहुत मामूली 0.19 प्रतिशत का प्रभाव पड़ेगा।'     अध्ययन में कहा गया है कि 2024-25 में भारत ने अमेरिका को 86.5 अरब डॉलर (भारत के कुल वैश्विक निर्यात का 1.87 प्रतिशत) का निर्यात किया था और जिस तरह के टैरिफ का एलान किया गया है, उससे 8.1 अरब डॉलर का निर्यात प्रभावित होगा। टैरिफ का असर जिन सेक्टर के निर्यात पर पड़ेगा, उसमें इंजीनियरिंग सामान पर 1.8 अरब डॉलर का, रत्न एवं आभूषण पर 93.2 करोड़ डॉलर का और सिले-सिलाए कपड़ों पर 50 करोड़ डॉलर का असर पड़ेगा।