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PM मोदी ने दिया करारा जवाब, बोले- मां राजनीति में नहीं थीं, फिर गाली क्यों?

नई दिल्ली बिहार में आरजेडी और कांग्रेस के एक मंच से पीएम नरेंद्र मोदी को मां की गाली दी गई थी। अब इस पर पीएम नरेंद्र मोदी ने भी जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि ये गालियां सिर्फ मेरी मां का अपमान नहीं है बल्कि यह देश की मां-बहन-बेटी का अपमान है। उन्होंने कहा, मां ही तो हमारा संसार होती है। मां ही हमारा स्वाभिमान होती है। इस समृद्ध परंपरा वाले बिहार में कुछ दिनों पहले जो हुआ, उसकी मैंने कल्पना भी नहीं की थी। बिहार में आरजेडी-कांग्रेस के मंच से मेरी मां को गालियां दी गईं। ये गालियां सिर्फ मेरी मां का अपमान नहीं है बल्कि ये देश की मां-बहन-बेटी का अपमान है। इसके आगे पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘मुझे पता है… आप सबको भी, बिहार की हर माँ को ये देख-सुनकर कितना बुरा लगा है! मैं जानता हूं, इसकी जितनी पीड़ा मेरे दिल में है, उतनी ही तकलीफ मेरे बिहार के लोगों को भी है।’ पीएम मोदी ने कहा कि मेरी मां का तो राजनीति से कोई लेना-देना भी नहीं रहा है, फिर उन्हें गालियां क्यों दी गईं। पीएम नरेंद्र मोदी ने बिहार राज्य जीविका निधि साख सहकारी संघ लिमिटेड का शुभारंभ करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि इतनी सारी माताओं और बहनों के आगे मैं अपना दुख साझा कर रहा हूं ताकि यह पीड़ा आप माताओं और बहनों के आशीर्वाद से झेल पाऊं। पीएम मोदी ने कहा, ‘माताओं-बहनों आज से 20 दिन बाद नवरात्रि शुरू हो रही है। उसके 50 दिन बाद छठी मैया की पूजा होगी। छठ का पर्व मनाया जाएगा। मैं बिहार की जनता के सामने मां को गाली देने वालों से कहना चाहता हूं कि मोदी तो तुम्हें एक बार माफ कर भी देगा, लेकिन भारत की धरती ने मां का अपमान कभी बर्दाश्त नहीं किया है। इसलिए आरजेडी और कांग्रेस को सात बहिनी से और छठी मैया से माफी मांगनी चाहिए।’ आरजेडी और कांग्रेस के नेता जहां भी जाएं, जिस गली में जाएं। उन्हें एक ही आवाज सुनाई देनी चाहिए कि मां को गाली नहीं सहेंगे-नहीं सहेंगे। इज्जत पर वार नहीं सहेंगे, नहीं सहेंगे। गाली देने वालों की सोच है- महिलाएं कमजोर होती हैं पीएम मोदी ने कहा कि देश की नारी का सशक्तीकरण हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उनके जीवन की मुश्किलें कम करने के लिए एनडीए सरकार लगातार काम कर रही है। मैं आपको वादा करता हूं कि बिना थके और बिना रुके मैं काम करता रहूंगा। पीएम मोदी ने कहा कि माताओं को गाली देने वाले लोगों का यह मानसिकता रही है कि महिलाएं कमजोर होती हैं।  

फैमिली बिजनेस के लिए ट्रंप ने भारत से दोस्ती की बलि दी: पूर्व NSA का बड़ा दावा

नई दिल्ली भारत के साथ टैरिफ वॉर छेड़कर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने ही मुल्क में घिर रहे हैं। अब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन का कहना है कि ट्रंप ने पाकिस्तान के साथ डील के कारण भारत से संबंधों को कुर्बान कर दिया। खास बात है कि ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाया है। जबकि, पाकिस्तान को राहत दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सुलिवन ने कहा, 'दशकों से अमेरिका ने भारत के साथ अपने संबंध मजबूत करने के लिए काम किया है। दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र, जो ऐसा देश है कि जिसके साथ तकनीक, हुनर, अर्थव्यवस्था और चीन के बदलते रुख का सामना करने के लिए एकजुट होना चाहिए।' उन्होंने कहा कि इस मोर्चे पर पहले से ज्यादा प्रगति हुई थी। भारत के साथ संबंध मजबूत करने के लिए किया है काम सुलिवन ने एक पॉडकास्ट में कहा, "दशकों से द्विपक्षीय आधार पर अमेरिका ने दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत के साथ अपने संबंध बनाने के लिए काम किया है। भारत एक ऐसा देश जिसके साथ हमें तकनीक, प्रतिभा, अर्थशास्त्र और कई अन्य मुद्दों पर एकजुट होना चाहिए और चीन से इस रणनीतिक खतरे से निपटने के लिए तैयार रहना चाहिए। और हम इस मामले में काफी आगे बढ़ चुके हैं।" ट्रंप ने परिवारिक बिजनेस के लिए भारत को किया दरकिनार उन्होंने कहा, "अब मुझे लगता है कि पाकिस्तान के ट्रंप परिवार के साथ व्यापारिक सौदे करने की इच्छा के कारण, ट्रंप ने भारत के साथ संबंधों को दरकिनार कर दिया है। यह अपने आप में एक बहुत बड़ा रणनीतिक कदम है क्योंकि एक मजबूत अमेरिका-भारत संबंध हमारे हितों की पूर्ति करता है। लेकिन दुनिया के हर दूसरे देश की कल्पना कीजिए, जर्मनी, जापान, कनाडा, आप उसे देखते हैं और कहते हैं कि कल हम भी ऐसा कर सकते हैं।" अमेरिका पर दोस्तों को भी भरोसा नहीं सुलिवन ने कहा कि भारत के खिलाफ ट्रंप प्रशासन का यह कदम उनके इस विचार को और पुष्ट करता है कि आपको अमेरिका के खिलाफ बचाव करना होगा। उन्होंने कहा, "दुनिया भर के हमारे सभी मित्र और देश यह तय कर चुके हैं कि वे किसी भी रूप में अमेरिका पर भरोसा नहीं कर सकते। यह अमेरिकी लोगों के दीर्घकालिक हित में नहीं है।" भारत के साथ जो हो रहा, उसका प्रत्यक्ष प्रभाव सुलिवन ने कहा, "हमारा वचन ही हमारा बंधन होना चाहिए। हमें अपनी बात पर खरा उतरना चाहिए। हमारे मित्रों को हम पर भरोसा करना चाहिए और यही हमारी हमेशा से ताकत रही है। और भारत के साथ अभी जो हो रहा है, उसका न केवल बहुत बड़ा प्रत्यक्ष प्रभाव है, बल्कि दुनिया भर में हमारे सभी रिश्तों और साझेदारियों पर भी इसका गहरा असर पड़ रहा है।" भारत और पाकिस्तान पर टैरिफ में अंतर ट्रंप ने शुरुआत में भारत पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाया था और रूसी तेल खरीद के चलते जुर्माना भी ठोका था। बाद में उन्होंने 25 फीसदी अतिरिक्त शुल्क का ऐलान किया, जिसके बाद कुल टैरिफ 50 प्रतिशत पर पहुंच गया। वह लगातार आरोप लगाते रहे कि भारत रूसी तेल खरीदकर यूक्रेन युद्ध में रूस की मदद कर रहा है। जबकि, भारत ने भी साफ किया था कि अमेरिका और यूरोपीय संघ भी रूस के साथ व्यापार करते हैं। खास बात है कि ट्रंप सरकार ने पाकिस्तान पर पहले 29 फीसदी जवाबी टैरिफ लगाया था, जिसे बाद में घटाकर 19 प्रतिशत कर दिया। पारिवारिक लोभ ने इंडिया-अमेरिका के संबंधों खत्म कर दिया उन्होंने आगे कहा, "अब मुख्य रूप से पाकिस्तान द्वारा ट्रंप परिवार के साथ व्यापारिक सौदे करने की इच्छा के कारण ट्रंप ने भारत के साथ संबंधों को दरकिनार कर दिया है. यह एक बड़ा रणनीतिक झटका है क्योंकि एक मजबूत भारत-अमेरिका साझेदारी हमारे हितों की रक्षा करता है." बता दें कि इस्लामाबाद ने न केवल ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया, बल्कि उनके परिवार और करीबी लोगों को अपनी नई पाकिस्तान क्रिप्टो काउंसिल में भी शामिल किया है. पहलगाम हमले के कुछ दिनों बाद ही ट्रंप के परिवार द्वारा समर्थित वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल ने पाकिस्तान क्रिप्टो काउंसिल के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए. सुलिवन सहित कई विशेषज्ञों ने ट्रंप परिवार के पाकिस्तानी बिजनेस में शामिल होने को उनके पाकिस्तान झुकाव से जोड़कर देखा है. भारत के साथ ट्रंप के संबंधों को बिगाड़ने पर सुलिवन ने कहा, "अगर हमारे सहयोगी यह निष्कर्ष निकालते हैं कि वे किसी भी तरह, किसी भी रूप में हम पर भरोसा नहीं कर सकते, तो यह अमेरिकी लोगों के दीर्घकालिक हित में नहीं है." सुलिवन ने कहा, "भारत के साथ जो हो रहा है, उसका दुनिया भर में हमारे सभी संबंधों और साझेदारियों पर सीधा और व्यापक प्रभाव पड़ेगा." ट्रंप के पाकिस्तान प्रेम की वजह समझिए बता दें कि पाकिस्तान ने 26 अप्रैल को वर्ल्ड लिबर्टी फ़ाइनेंशियल (WLF ) के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए. वर्ल्ड लिबर्टी फ़ाइनेंशियल एक ऐसी कंपनी है जिसमें ट्रंप के परिवार, जिसमें उनके बेटे एरिक और डोनाल्ड ट्रंप जूनियर, और दामाद जेरेड कुशनर शामिल हैं, की 60% हिस्सेदारी है. WLF के होमपेज पर अमेरिकी राष्ट्रपति के एक भव्य चित्र के साथ "डोनाल्ड जे ट्रंप से प्रेरित" शब्द को प्रमुखता से दिखाया गया है.  वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल एक विकेन्द्रीकृत वित्तीय परियोजना और एक क्रिप्टोकरेंसी कंपनी है जिसकी स्थापना 2024 में हुई थी. यह सौदा पाकिस्तान सरकार द्वारा क्रिप्टो करेंसी में लेनदेन को कानूनी बनाने के संकेत के तुरंत बाद हुआ है. इस डील के बाद इस कंपनी के लिए पाकिस्तान में पैसे कमाने के रास्ते खुल जाएंगे. विनाशकारी टैरिफ नीति से दशकों का प्रयास ध्वस्त अमेरिका के ही एक और पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बॉल्टन ने एक बार फिर से ट्रंप की आलोचना की है. उन्होंने कहा है कि ट्रंप की नीतियों ने भारत को एक बार फिर से रूस के पाले में जाने को मजबूर किया है. उन्होंने कहा है कि पश्चिम ने दशकों तक भारत को सोवियत संघ/रूस के साथ शीत युद्ध के लगाव से दूर करने की कोशिश की है और चीन से पैदा होने वाले खतरे के प्रति भारत को आगाह किया है. डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी विनाशकारी टैरिफ नीति से दशकों के प्रयासों को ध्वस्त कर … Read more

धरती का कहर! सूडान में भूस्खलन से गांव तबाह, 1000 लोगों की जान गई

  खारर्तूम  पश्चिमी सूडान के Marra Mountains इलाके में भीषण भूस्खलन ने एक पूरे गांव को तबाह कर दिया. इस हादसे में कम से कम 1,000 लोगों की मौत हो गई, जबकि केवल एक व्यक्ति जिंदा बचा है. यह जानकारी सोमवार को सूडान लिबरेशन मूवमेंट/आर्मी ने एक बयान में दी है. सूडानी मूवमेंट ने का नेतृत्व अब्दुलवाहिद मोहम्मद नूर कर रहे हैं और उन्होंने बताया कि कि यह हादसा 31 अगस्त को हुआ. क्षेत्र में लगातार कई दिनों से भारी बारिश हो रही थी, जिसके बाद यह भूस्खलन आया. मूवमेंट की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि गांव अब पूरी तरह से जमीनदोज हो चुका है. संगठन ने संयुक्त राष्ट्र (UN) और अन्य अंतरराष्ट्रीय राहत एजेंसियों से अपील की है कि वे मृतकों के शवों को निकालने और प्रभावित परिवारों को सहायता देने के लिए तुरंत कदम उठाएं. संगठन ने यह भी कहा कि मारे गए लोगों में बड़ी संख्या में पुरुष, महिलाएं और बच्चे शामिल हैं. वैश्विक समुदाय से मदद की अपील दारफुर क्षेत्र में स्थित इस क्षेत्र पर नियंत्रण रखने वाले इस आंदोलन ने संयुक्त राष्ट्र और अंतर्राष्ट्रीय सहायता एजेंसियों से पीड़ितों के शवों को बरामद करने में मदद की अपील की है। मरने वालों में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। उत्तरी दारफुर राज्य में सूडानी सेना और अर्धसैनिक रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (आरएसएफ) के बीच चल रहे युद्ध से भागकर निवासियों ने मार्रा पर्वतीय क्षेत्र में शरण ली है। यहां भोजन और दवाइयां ना होने से लोगों को मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। सूडान में बीते दो साल से चल रहे गृहयुद्ध के कारण आधी से ज्यादा आबादी भुखमरी के संकट से जूझ रही है। इसके चलते लाखों लोग अपने घरों से बेघर हो गए हैं। उत्तरी दारफुर राज्य की राजधानी अल-फशीर पर भी लगातार गोलाबारी हो रही है। सूडान में दो साल से जारी है गृहयुद्ध यह हादसा ऐसे समय हुआ है जब सूडान पहले से ही गंभीर संकट का सामना कर रहा है. सूडानी सेना और पैरामिलिट्री रैपिड सपोर्ट फोर्स (RSF) के बीच पिछले दो साल से जारी गृहयुद्ध ने देश की स्थिति और बिगाड़ दी है. गृहयुद्ध से बचने के लिए उत्तर दारफुर राज्य से बड़ी संख्या में लोग Marra Mountains में शरण लेने पहुंचे थे. हालांकि, यहां खाद्य सामग्री और दवाइयों की भारी कमी है. सूडान में आधे से ज्यादा लोग भुखमरी की चपेट में गृहयुद्ध ने सूडान की आबादी पर गहरा असर डाला है. आधे से ज्यादा लोग भुखमरी के संकट का सामना कर रहे हैं और लाखों लोग अपने घर छोड़कर पलायन कर चुके हैं. उत्तर दारफुर की राजधानी अल-फाशिर भी लगातार हमलों की चपेट में है. SLM/A ने कहा कि भूस्खलन की यह त्रासदी देश की मौजूदा मानवीय स्थिति को और भयावह बना रही है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए.

बेंगलुरु के रेंटल रेट्स पर हंगामा, 70,000 किराया-5 लाख डिपॉजिट से भड़की बहस

बेंगलुरु बेंगलुरु में घरों का किराया और सिक्योरिटी डिपॉजिट जिस तेजी से बढ़ रहा है, उसने एक बार फिर बहस छेड़ दी है. हाल ही में, शहर के एक इलाके में एक अपार्टमेंट की लिस्टिंग ने Reddit पर खूब हलचल मचाई. पूर्वी बेंगलुरु के Panathur इलाके में एक 2BHK फ्लैट का मासिक किराया 70,000 और 5 लाख का डिपॉजिट मांगा गया है. Reddit पर शेयर की गई इस पोस्ट पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि पहले से ही आवास संकट से जूझ रहे टेक हब में इतना महंगा किराया कौन दे पाएगा.  लोग यूरोप से कर रहे हैं तुलना लोग इस फ्लैट की तुलना यूरोपीय शहरों से कर रहे हैं. वे मजाक उड़ाते हुए कह रहे हैं कि मकान मालिक को लगता है कि महंगा फर्नीचर लगा देने से किराया दोगुना करना जायज है. कुछ लोगों का मानना है कि अब 'बेंगलुरु और मुंबई में कोई फर्क नहीं रह गया है. यह मामला तब सामने आया जब एक Reddit यूजर ने 'इंडियन रियल एस्टेट' कम्युनिटी में इसका स्क्रीनशॉट शेयर किया. लोगों का गुस्सा इस बात पर था कि यह फ्लैट ऐसे इलाके में है, जो अपने ट्रैफिक जाम और बाढ़ की समस्या के लिए बदनाम है, फिर भी इसका किराया इतना ज्यादा है. इस लिस्टिंग ने बेंगलुरु में रहने की बढ़ती लागत और मकान मालिकों की मनमानी पर एक नई बहस को जन्म दिया है.  जिस Reddit यूजर ने यह पोस्ट किया था, उसने लिखा, "₹70,000 का किराया? यह तो कई यूरोपीय अपार्टमेंट से भी ज्यादा है." उसने Panathur को "सोमालियाई भारत की परिभाषा" बताया और इस किराए को "पूरी तरह से बेतुका" कहा. इस पोस्ट पर सैकड़ों लोगों ने प्रतिक्रिया दी. कई लोगों ने इस कीमत का मजाक उड़ाया और इसकी वजह पर सवाल उठाए. एक व्यक्ति ने टिप्पणी की, "लोग अपनी ऑफिस के पास होने के कारण इस छोटे से घर के लिए इतना ज्यादा पैसा देते हैं, लेकिन रेलवे अंडरपास पर फंस जाते हैं." इस इलाके में अक्सर लगा रहता है जाम एक और व्यक्ति ने लिखा, "एक ऐसे इलाके के लिए ₹70,000 का किराया, जहां हमेशा ट्रैफिक जाम रहता है… वाह! मालिक को सलाम". कुछ स्थानीय लोगों ने भी इस पर अपनी राय दी. एक यूजर ने बताया, "मैं SDA में रहता हूं और 41,000 किराया देता हूं. मुझे नहीं लगता कि कोई यहां 70,000 किराया देगा." उसने यह भी अनुमान लगाया कि जल्द ही इस कीमत को कम करना पड़ेगा. Panathur में इसी तरह के अपार्टमेंट का किराया आमतौर पर 40,000 से 45,000 के बीच रहता है, जिससे 70,000 का किराया और इतना ज्यादा डिपॉजिट काफी अजीब लगता है. इस वायरल पोस्ट ने एक बार फिर से बेंगलुरु में घर ढूंढने की समस्या को उजागर किया है, खासकर उन इलाकों में जो टेक कंपनियों के पास हैं. इन जगहों पर मांग तो बहुत है, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर खराब है और किराए की कीमतें भी मनमानी हैं.

ट्रंप को आई अक्ल? PM मोदी के कदम और US एंबेसी की पोस्ट ने बढ़ाई हलचल

नई दिल्ली चीन में SCO शिखर सम्मेलन के बैनर तले जब दुनिया की तीन महाशक्तियां मिल रही हैं तो इसका प्रभाव अमेरिका तक देखने को मिल रहा है. भारत, चीन और रूस के राष्ट्राध्यक्षों पीएम मोदी, राष्ट्रपति जिनपिंग और राष्ट्रपति पुतिन की मुलाकात के बीच भारत में अमेरिकी दूतावास की ओर से एक बेहद अहम पोस्ट किया गया है. इस ट्वीट की टाइमिंग और इसका कंटेट भारत-अमेरिका संबंधों के लिए निर्णायक है.  भारत में अमेरिकी दूतावास की ओर से किए गए इस पोस्ट में कहा गया है कि संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत के बीच साझेदारी लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है, जो 21वीं सदी का एक निर्णायक रिश्ता है. अमेरिकी दूतावास ने कहा है कि यह हमारे दोनों देशों के लोगों के बीच की स्थायी मित्रता ही है जो इस यात्रा को ऊर्जा प्रदान करती है.  इस पोस्ट में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो का एक बयान भी है. इसमें उन्होंने कहा है कि भारत और अमेरिका के लोगों के बीच गहरी दोस्ती हमारे संबंधों का आधार है.  भारत में अमेरिकी दूतावास का ये ट्वीट तब आया है जब सोमवार सुबह ही चीन में पीएम मोदी, राष्ट्रपति जिनपिंग और राष्ट्रपति पुतिन की गर्मजोशी भरी मुलाकात हुई है. ये मुलाकात तब हो रही है जब ट्रंप ने भारत पर 50 फीसदी का हैवी टैरिफ लगाया है और ट्रंप के सलाहकार और रणनीतिकार भारत के खिलाफ सख्त बयान दे रहे हैं.  चीन के तियानजिन में पीएम मोदी, राष्ट्रपति पुतिन और राष्ट्रपति जिनपिंग की मुलाकात की चर्चा दुनिया की राजनीति और कूटनीति को प्रभावित करने वाले हर देश की राजधानियों में हो रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (1 सितंबर 2025) सुबह को SCO के संबोधन में कहा कि ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं को आउटडेटेड फ्रेमवर्क्स में कैद रखना भावी पीढ़ियों के प्रति घोर अन्याय है. उन्हें दुनिया को बदलाव को स्वीकार करने का संदेश देते हुए कहा कि नई पीढ़ी के बहुरंगी सपनों को हम पुराने जमाने की ब्लैक-एंड व्हाइट स्क्रीन पर नहीं दिखा सकते. इसके लिए स्क्रीन बदलनी होगी.  प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र में रिफॉर्म्स का आह्वान करते हुए कहा कि इसकी 80वीं वर्षगांठ पर हम इसकी शुरुआत कर सकते हैं.  SCO में प्रधानमंत्री मोदी ने रूस के राष्ट्रपति पुतिन से भी गर्मजोशी भरी मुलाकात की. पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन एक ही कार में बैठकर मीटिंग वैन्यू तक पहुंचे. इसके बाद अमेरिकी दूतावास से ये ट्ववीट आया है. अमेरिकी दूतावास ने इस ट्वीट में भारत के साथ व्यापारिक साझीदारी की दुहाई दी है. इस पोस्ट में भारत में अमेरिकी दूतावास ने लिखा है, "संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत के बीच साझेदारी लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है — जो 21वीं सदी का एक निर्णायक रिश्ता है. इस महीने हम उन लोगों, प्रगति और संभावनाओं पर प्रकाश डाल रहे हैं जो हमें आगे बढ़ा रहे हैं. नवाचार और उद्यमिता से लेकर रक्षा और द्विपक्षीय संबंधों तक, यह हमारे दोनों देशों के लोगों के बीच की स्थायी मित्रता ही है जो इस यात्रा को ऊर्जा प्रदान करती है." आगे इस पोस्ट में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का बयान है. इस बयान में रुबियो ने कहा है कि, 'दोनों देशों के लोगों के बीच स्थायी मैत्री हमारे सहयोग का आधार है और यह हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है, क्योंकि हम अपने आर्थिक संबंधों की अपार संभावनाओं को साकार करते हैं.' चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने SCO के संबोधन में अमेरिका का नाम लिए बिना 'चौधराहट''शीत युद्ध मानसिकता' और 'धमकाने वाली प्रथाओं' का विरोध करने का संदेश दिया. उन्होंने कहा, "हमें विश्व के एक समान और व्यवस्थित बहुध्रुवीय स्वरूप, तथा सभी के लिए लाभकारी और समावेशी आर्थिक वैश्वीकरण की वकालत करनी चाहिए और वैश्विक शासन प्रणाली को अधिक न्यायसंगत और समतापूर्ण बनाना चाहिए." शी जिनपिंग की भावनाओं से सहमति जताते हुए रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने SCO से यूरोप और एशिया में सुरक्षा की एक "नई प्रणाली" बनाने का आह्वान किया. उन्होंने इसे पश्चिमी नेतृत्व वाले गठबंधनों के विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया, जिसका वे लंबे समय से विरोध करते रहे हैं. 

मौसम विभाग का अलर्ट: सितंबर में भारी बारिश, इन फसलों पर पड़ेगा असर

नई दिल्ली अगस्त का पूरा महीना देश के विभिन्न राज्यों के लिए मॉनसूनी बारिश से भीगा रहा तो वहीं कई राज्यों में बाढ़ के प्रकोप ने रिकॉर्ड तोड़े हैं. अब सितंबर में भारत के किस क्षेत्र में कैसा मौसम रहेगा? देश में बारिश की क्या  स्थिति होगी? इसके लिए भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अनुमान जारी किए हैं.  सितंबर में कैसा रहेगा मौसम? IMD का कहना है कि देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश होने की उम्मीद है. लेकिन, पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों समेत दक्षिण भारत के कुछ दूरदराज के इलाकों में बारिश सामान्य से कम रह सकती है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, सितंबर 2025 में पूरे देश में मासिक औसत वर्षा दीर्घावधि औसत 109% (सामान्य से अधिक) रहने की संभावना है. साल 1971 से 2020 के बीच भारत में सितंबर महीने में बारिश का औसत आंकड़ा 167.9 मिमी रहा है. इन फसलों के लिए किसानों को रहना होगा सतर्क सामान्य से अधिक बारिश कुछ फसलों के लिए नुकसानदायक हो सकती है. ऐसे में किसानों को सतर्क रहने की जरूरत है. भारत में ग्रीष्मकालीन फसलों जैसे चावल, कपास, सोयाबीन, मक्का और दालों को नुकसान हो सकता है. दरअसल, इन फसलों की कटाई आमतौर पर मध्य सितंबर से की जाती है. कितना रहेगा तापमान? तापमान के मामले में, सितंबर के दौरान पश्चिम-मध्य, उत्तर-पश्चिम और दक्षिण भारत के कई इलाकों में औसत अधिकतम तापमान सामान्य से कम या सामान्य के आसपास रहने की संभावना है. जबकि पूर्व-मध्य, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों, उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ क्षेत्रों और पश्चिमी तटीय इलाकों में औसत अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है. औसत न्यूनतम तापमान की बात करें तो देश के अधिकांश हिस्सों में यह सामान्य से अधिक या सामान्य के करीब रहने की संभावना है. हालांकि, उत्तर-पश्चिम भारत और दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत के कुछ क्षेत्रों में रात का तापमान सामान्य से कम रह सकता है. किसानों के लिए राहत की खबर सामान्य से अधिक बारिश खरीफ की फसलों के लिए अच्छी है और इससे बंपर पैदावार की उम्मीद बढ़ सकती है.सितंबर का यह मौसम पूर्वानुमान किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह खरीफ फसलों के सीजन का चरम समय है. सामान्य से अधिक बारिश उन फसलों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है जिन्हें अधिक पानी की जरूरत होती है. हालांकि, कुछ इलाकों में बाढ़ जैसी स्थितियों का जोखिम भी बना रह सकता है. वहीं, पूर्वोत्तर, पूर्वी और दक्षिणी भारत में कम बारिश का खेती पर असर भी पड़ सकता है.  

ड्रम फटने से सूरत की मिल में लगी आग, 2 की मौत, 22 घायल

गुजरात  सूरत के पलसाना इलाके के जोलवा गांव में सोमवार को एक कपड़ा मिल में भीषण हादसा हो गया। मिल में काम के दौरान अचानक एक ड्रम फट गया, जिससे जोरदार धमाका हुआ। धमाका इतना तीव्र था कि मिल की दीवारें तक हिल गईं और अंदर काम कर रहे मजदूरों में अफरा-तफरी मच गई। धमाके के तुरंत बाद मिल के अंदर आग लग गई। आग की लपटें और घना धुआं देखकर मजदूर जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। लेकिन इस भयावह हादसे में दो मजदूरों की मौत हो गई, जबकि करीब 22 लोग घायल हो गए। सभी घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं हादसे की सूचना मिलते ही दमकल विभाग और 108 एंबुलेंस सेवा की टीमें मौके पर पहुंच गईं। दमकलकर्मियों ने आग पर काबू पाने की पूरी कोशिश की, लेकिन लपटें बार-बार भड़कती रहीं। आग बुझाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। धमाके से मची भगदड़ प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, धमाके के वक्त का मंजर बेहद भयावह था। आग और धुएं के कारण मिल के अंदर भगदड़ मच गई। धुएं का गुबार इतना घना था कि दूर-दूर तक दिखाई देना मुश्किल हो गया। पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है। फिलहाल धमाके की असली वजह सामने नहीं आ सकी है। प्रशासन और फायर डिपार्टमेंट की टीम मामले की जांच कर रही है। माना जा रहा है कि ड्रम में कोई रासायनिक पदार्थ हो सकता है, जिसकी वजह से यह हादसा हुआ। 

पीएम मोदी के हर एक्शन ने भेजा संदेश: SCO समिट में हाथ मिलाना और पुतिन से गले मिलना चर्चा में

नई दिल्ली चीन के तियानजन में हुई शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अंदाज अलग ही दिखा, जिसमे साफ संदेश छिपा था कि कौन भारत का करीबी दोस्त है और कौन नहीं। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से गले मिलना, चीनी राष्ट्रपति शि चिनफिंग से हाथ मिलाना, तुर्किये के राष्ट्रपति एर्दोआम की पीठ थपथपाना और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की ओर देखना तक नहीं, ये सब इशारे अपने आप में काफी कुछ कह गए। 45 मिनट तक कार में साथ थे पीएम मोदी-पुतिन समिट में पीएम मोदी और पुतिन की नजदीकी सबसे अलग दिखी। दोनों नेता एक ही गाड़ी में साथ पहुंचे। जानकारी के मुताबिक, पुतिन करीब 10 मिनट तक पीएम मोदी का इंतजार करते रहे और फिर दोनों 45 मिनट तक कार में बैठकर बातचीत करते रहे। बाद में उनकी द्विपक्षीय बैठक भी एक घंटे से ज्यादा चली। इसके अलावा, कई मौकों पर पीएम मोदी और पुतिन हंसी-मजाक भी करते नजर आए। इसी दौरान पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ किनारे खड़े नजर आए और वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि पीएम मोदी और पुतिन गहरी बातचीत में डूबे हुए आगे बढ़ गए, जबकि शरीफ सिर्फ देखते रह गए। पाकिस्तानी पीएम को किया नजरअंदाज समिट में पीएम मोदी का शरीफ को नजरअंदाज करना ही काफी नहीं था, बल्कि अपने संबोधन में उन्होंने आतंकवाद का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुआ आतंकी हमला सिर्फ भारत की आत्मा पर हमला नहीं था, बल्कि पूरी इंसानियत के लिए चुनौती है। पीएम मोदी ने SCO देशों से अपील की है कि वे आतंकवाद के खिलाफ डबल स्टैंडर्ड छोड़े और एकजुट होकर काम करें। यह बयान शरीफ की मौजूदगी में दिया गया, जिससे संदेश और भी तीखा हो गया। तुर्किये के राष्ट्रपति की थपथपाई पीठ तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन से भी पीएम मोदी ने गर्मजोशी दिखाई। उन्होंने उनसे हाथ मिलाया और पीठ थपथपाई। यह सीन काफी खास था क्योंकि तुर्किये अक्सर पाकिस्तान के पक्ष में खड़ा होता है और भारत के साथ मतभेद रखता है। वहीं, चीन के राष्ट्रपति के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ भी पीएम मोदी की बातचीत हंसी-मजाक भरी रही। अमेरिका की भारी टैरिफ नीति के बीच इन मुलाकातों ने यह संदेश दिया कि भारत बड़े खिलाड़ियों के साथ रिश्ते मजबूत करने में आगे हैं। भारत की बातों को मिली अहमियत समिट के अंत में जारी तियानजन घोषणा में भी भारत की बातों को अहमियत मिली। इसमें 22 अप्रैल को पहलगाम हमले की कड़ी निंदा की गई और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताई गई।  

भारत बना संकट में सहारा, अफगानिस्तान को भेजी राहत सामग्री और तंबू

नई दिल्ली  अफगानिस्तान में रविवार देर रात आए भीषण भूकंप ने पूर्वी इलाकों में जमकर तबाही मचाई है। रिक्टर स्केल पर 6.0 तीव्रता वाले इस भूकंप ने नंगरहार प्रांत के जलालाबाद शहर और कुनार प्रांत के कई कस्बों को प्रभावित किया। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अब तक 800 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 1,300 से अधिक लोग घायल हुए हैं। कई गांवों में भारी तबाही हुई है। इस विनाशकारी आपदा के बाद भारत ने तत्परता से राहत सहायता भेजी है। भारत सरकार की ओर से 1,000 फैमिली टेंट और 15 टन खाद्य सामग्री काबुल पहुंचाई गई है। इसके अलावा, आने वाले दिनों में और अधिक राहत सामग्री भेजी जाएगी। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दी जानकारी विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी देते हुए बताया, "आज अफगानिस्तान के विदेश मंत्री मौलवी अमीर खान मुत्तकी से बात की। भूकंप में हुई जान-माल की हानि पर संवेदना व्यक्त की। भारत ने आज काबुल में 1000 परिवारों के लिए तंबू पहुंचाए हैं। भारतीय मिशन द्वारा काबुल से कुनार तक 15 टन खाद्य सामग्री भी तुरंत पहुंचाई जा रही है। कल से भारत से और राहत सामग्री भेजी जाएगी। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं। इस कठिन समय में भारत अफगानिस्तान के साथ है।" प्रधानमंत्री मोदी ने जताया दुख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस त्रासदी पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने एक्स पर लिखा, "अफगानिस्तान में आए भूकंप में हुई जानमाल की हानि से गहरा दुख हुआ है। इस कठिन घड़ी में हमारी संवेदनाएं और प्रार्थनाएं शोक संतप्त परिवारों के साथ हैं, और हम घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं। भारत प्रभावित लोगों को हर संभव मानवीय सहायता और राहत प्रदान करने के लिए तैयार है।" तालिबान सरकार का बयान तालिबान प्रशासन के प्रवक्ता के अनुसार, भूकंप ने पूर्वी अफगानिस्तान के कई हिस्सों में तबाही मचाई है। सैकड़ों मकान ढह गए हैं और राहत एवं बचाव कार्य जारी है। सबसे ज्यादा प्रभावित इलाके जलालाबाद और कुनार प्रांत के कस्बे बताए जा रहे हैं।  

पाक-अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान में हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त, पांच सैनिक शहीद

इस्लामाबाद  पाकिस्तान-अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान के दीमर जिले में सोमवार को पाकिस्तानी सेना का एक हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें सवार सभी पांचों क्रू सदस्य मारे गए। स्थानीय मीडिया ने अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी दी। पाकिस्तानी दैनिक डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, यह हेलीकॉप्टर दीमर जिले के चिलास कस्बे में एक नवनिर्मित प्रस्तावित हेलिपैड पर परीक्षण लैंडिंग कर रहा था, तभी हादसा हो गया। दीमर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) अब्दुल हामिद ने कहा, “रिपोर्ट के अनुसार, इस हादसे में पांच लोगों की मौत हुई है। पुलिस और रेस्क्यू टीमें मौके पर पहुंच चुकी हैं और राहत कार्य जारी है।” हादसे के तुरंत बाद एफसीएनए कमांडर, डीजी जीबी स्काउट्स, दीमर के कमिश्नर और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे। रेस्क्यू दल जलते हुए मलबे को बुझाने में जुटे रहे। अधिकारियों ने बताया कि हादसे की वजह अभी साफ नहीं हो पाई है, लेकिन प्राथमिक रूप से “तकनीकी खराबी” को कारण माना जा रहा है। सूचना अधिकारी फराक ने इस दुर्घटना को “दुर्भाग्यपूर्ण” बताते हुए मृतकों के प्रति संवेदना व्यक्त की। वहीं, स्थानीय नेता हाजी गुलबर खान ने भी पुष्टि की कि “हादर क्षेत्र में सेना का एविएशन हेलीकॉप्टर तकनीकी खराबी के कारण दुर्घटनाग्रस्त हुआ।” उन्होंने चिलास अस्पताल में आपातकाल लगाने और सभी चिकित्सा कर्मचारियों को ड्यूटी पर तैनात रहने के निर्देश दिए। गौरतलब है कि यह हादसा ऐसे समय हुआ है जब कुछ ही सप्ताह पहले खैबर पख्तूनख्वा के बाजौर जिले में एक और सेना का हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें दो पायलट और तीन क्रू सदस्य मारे गए थे। वह हेलीकॉप्टर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री लेकर गया था। साल 2024 में भी खैबर पख्तूनख्वा के उत्तरी वजीरिस्तान में एक पेट्रोलियम कंपनी का हेलीकॉप्टर श्वा ऑयल फील्ड के पास दुर्घटनाग्रस्त हुआ था, जिसमें छह लोगों की मौत और आठ लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।