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OTT और वेबसाइट्स पर सेंसर का शिकंजा, 40 ऐप्स पर एक साथ बैन

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने सॉफ्ट पॉर्न और एडल्ट कंटेंट दिखाने के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए 25 ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की वेबसाइट्स और ऐप्स को ब्लॉक करने का फैसला किया है। जिन ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ ऐक्शन लिया गया है, उनमें उल्लू और ऑल्ट बालाजी (ALTT) जैसे कुछ चर्चित ओटीटी हैं। उल्लू के हाउस अरेस्ट शो के लेकर पिछले साल काफी बवाल भी हुआ था। सरकार की ओर से बताया गया कि यह ऐक्शन गृह मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, विधि मामलों के विभाग, उद्योग संगठनों (FICCI, CII) और महिला एवं बाल अधिकार विशेषज्ञों से विचार-विमर्श के बाद लिया गया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने निर्देश जारी करके सभी इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स से इन्हें ब्लॉक करने को कहा है। 'हाउस अरेस्ट' को लेकर हुआ था बवाल पिछले साल जुलाई-अगस्त में सरकार को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की ओर से उल्लू और ALTT प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ शिकायतें मिली थीं। दूसरे प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ भी कई सार्वजनिक शिकायतें आई थीं। मंत्रालय द्वारा मई 2025 में हस्तक्षेप के बाद उल्लू ने ‘हाउस अरेस्ट’ वेब सीरीज को हटाया था। अश्लील कंटेट को लेकर दी गई थी चेतावनी सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इस साल 19 फरवरी को सभी ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को आईटी नियम, 2021 के तहत निर्धारित कोड ऑफ कंडक्ट और भारत में लागू अश्लीलता से संबंधित कानूनों का पालन करने की एडवाइजरी जारी की गई थी। इससे पहले सितंबर 2024 में सभी 25 प्लेटफॉर्म्स को नोटिस जारी किया गया था। सरकार को दे रहे थे चकमा इसके बावजूद उन्होंने आपत्तिजनक कंटेंट प्रसारित करना जारी रखा। इसके अलावा, पहले से ब्लॉक किए गए पांच प्लेटफॉर्म्स ने नए डोमेन पर फिर से अश्लील कंटेंट दिखाना शुरू कर दिया। सरकार की चेतावनी के बाद उल्लू से 100 से अधिक वेब सीरीज हटाई गईं, लेकिन यह पाया गया कि प्लेटफॉर्म उन्हें अस्थायी रूप से हटाकर बाद में फिर से बिना एडिट किए प्रसारित कर देता था। कहानी नहीं, सिर्फ अश्लीलता सरकार का कहना है कि इन साइट्स और ऐप्स पर सेक्सुअल सीन्स और कई जगहों पर नग्नता दिखाई जाती थी, जिससे यह पोर्नोग्राफिक श्रेणी में आता है। कंटेंट में किसी भी प्रकार की ठोस कहानी, सामाजिक संदेश या थीम की कमी थी। ऐसे सीन्स सिर्फ व्यूरशिप के लिए दिखाए जाते थे और इसी वजह से इन्हें बैन किया है। इंटरनेट सर्विस कंपनियों को निर्देश सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने नोटिफिकेशन में इंटरनेट सर्विस देनी वाली कंपनियों को निर्देश दिया है कि प्रतिबंधित सामग्री होस्ट करने के लिए चिह्नित इन ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की ऐप्स-वेबसाइटों की सार्वजनिक पहुंच को प्रतिबंधित करें। सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि आईटी ऐक्ट 2000 और इन्फर्मेशन टेक्नॉलजी (इन्टर्मीडीएरी गाइडलाइंस और डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) नियम, 2021 के तहत इन्टर्मीडीएरी यानी इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स की जिम्मेदारी है कि वे अवैध जानकारी को हटाएं या उसकी पहुंच को बंद करें। इन ऐप्स पर लगा बैन सरकार ने जिन पर बैन लगाया है उनके नाम हैं- देसीफ्लिक्स, बूमेक्स, निऑनएक्स वीआईपी, नवरसा लाइट, गुलाब ऐप, कंगन ऐप, बुल ऐप, शो हिट, जलवा ऐप, वाउ एंटरटेनमेंट, लुक एंटरटेनमेंट, हिटप्राइम, फुगी, फेनेओ, शोएक्स, सोल टॉकीज, अड्डा टीवी, ऑल्ट बालाजी (ALTT), हॉटएक्स वीआईपी, हलचल ऐप,मूडएक्स, ट्राईफ्लिक्स, उल्लू और मोजफ्लिक्स।

भाषा बनी हिंसा की वजह? तमिलनाडु में बंगाली युवकों से मारपीट, पश्चिम बंगाल में केस

तिरुवल्लुर महाराष्ट्र में चल रहे भाषा विवाद की आग अब तमिलनाडु में भी पहुंच गई है। राज्य के तिरुवल्लुर जिले में पश्चिम बंगाल के चार युवकों को पीटने का मामला सामने आया है। चार युवकों बंगाली में बात करने के लिए पीटा गया है। बंगाली में बात कर रहे स्थानीय लोगों ने इन युवकों को बांग्लादेशी समझा और बेरहमी से पीट दिया। इस संबंध में पीड़ितों के परिवार ने मुर्शिदाबाद जिले में 17 जुलाई को पुलिस शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत के अनुसार, सुजान शेख, उनके भाई मिलन शेख, साहिल शेख और बाबू शेख तीन हफ्ते पहले चेन्नै गए थे। वहां पर वे निर्माण कार्य में लगे हुए थे। जहां उनकी पिटाई की गई। घटना 15 जुलाई की शाम की है, जब वे तिरुवल्लुर में थे। बंगाली में बात करते सुना तो पीट डाला सुजान के पिता द्वारा दर्ज शिकायत में कहा गया कि जब कुछ स्थानीय लोगों ने उनसे नाम और पता पूछा और बांग्ला में बात करते सुना, तो उन्होंने उन्हें बांग्लादेशी समझकर लोहे की छड़ों और लाठियों से पीटना शुरू कर दिया। इस हमले में चारों घायल हो गए और सरकारी मेडिकल कॉलेज तिरुवल्लुर में प्राथमिक उपचार के बाद वे तुरंत मुर्शिदाबाद लौट आए। पीड़ित सुजान और मिलन के पिता आशाबुल शेख ने बताया कि मेरे छोटे बेटे का हाथ टूट गया। उसकी सर्जरी हुई है और वह अब भी नर्सिंग होम में भर्ती है। बड़े बेटे को भी गंभीर चोटें आई हैं और दोनों को कई हफ्तों तक बिस्तर पर रहना होगा। मजदूरी भी नहीं मिली इस हमले में घायल मिलन शेख ने बताया कि हम बहुत डरे हुए थे। हम पहली बार चेन्नै काम करने गए थे। 11 दिन की मजदूरी भी नहीं मिली। घर लौटने के लिए मैंने अपने पिता से 12 हजार रुपये मंगवाए। पीड़ितों के परिवार ने प्रशासन से इस मामले में कड़ी कार्रवाई और मुआवजे की मांग की है। षा युद्ध की बात कर माहौल बनाने लगीं ममता पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में अब करीब 10 महीने का ही समय बचा है। अगले साल अप्रैल-मई में राज्य में इलेक्शन होने वाले हैं। इससे ठीक पहले उन्होंने बांग्ला भाषा का मसला उठाना तेज कर दिया है। देश के कई हिस्सों में अवैध बांग्लादेशियों का मुद्दा उठाए जाने को उन्होंने बंगालियों के उत्पीड़न से जोड़ दिया है। गुरुवार को कोलकाता में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि अब हमें फिर से एक भाषा आंदोलन करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भाजपा शासित राज्यों में बांग्ला भाषी लोगों को बांग्लादेशी कहकर हिरासत में लिया जा रहा है। उन्हें काम करने से रोका जा रहा है। ममता बनर्जी ने कहा कि यह स्थिति तो भाषाई आतंकवाद जैसी है। इस तरह भाषा को मुद्दा बनाना और एक नए आंदोलन की बात से ममता बनर्जी ने संदेश दे दिया है कि वह चुनाव तक इस मसले को खींचने की तैयारी में हैं। पहले भी ममता बनर्जी चुनावों में बांग्ला कार्ड चलती रही हैं। ऐसे में ममता बनर्जी का रुख एक बार फिर से उसी तरफ बढ़ता दिख रहा है। ममता दीदी ने कहा, 'बंगाली भाषा के खिलाफ जिस तरह का भाषायी आतंकवाद शुरू किया है, वह खतरनाक है। बंगाली भाषा दुनिया में 5वीं सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। देश में 30 करोड़ लोग बांग्लाभाषी हैं। फिर भी इन लोगों को जेल में डाला जा रहा है। हमें इसे स्वीकार नहीं कर सकते।' उन्होंने कहा कि यह सिर्फ मेरी ही बात नहीं है बल्कि तमाम बांग्ला भाषी लोगों की है। इस तरह हम लोगों की भाषा पर हमला नहीं हो सकता। बंगाल हम लोगों के लिए सब कुछ है और हम अपनी जमीन बचाने के लिए कुछ भी करेंगे। उन्होंने कहा कि बांग्ला भाषा के नाम पर किसी को हिरासत में रखे जाने को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। दरअसल हाल ही में एनसीआर के गुरुग्राम में बांग्ला भाषी कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया था। बता दें कि बांग्ला भाषी लोगों की आबादी बंगाल के अलावा बड़ी संख्या में असम, त्रिपुरा जैसे राज्यों में भी है।

सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी: माता-पिता की देखभाल के लिए मिलेगा एक महीने का अवकाश

नई दिल्ली केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्रीय कर्मी अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल सहित किसी भी व्यक्तिगत कारण का हवाला देकर हर साल अन्य पात्र अवकाशों के अलावा 30 दिन की अतिरिक्त छुट्टी ले सकते हैं। ये पात्र अवकाशों के अलावा प्रति वर्ष 30 दिन के अर्जित अवकाश के रूप में होगी। इसके अलावे कर्मचारी 20 दिन का अवकाश आधे वेतन के साथ ले सकते हैं। केंद्रीय कर्मियों को 8 दिन का आकस्मिक अवकाश और 2 दिन का प्रतिबंधित अवकाश लेने की भी छूट है। केंद्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह ने राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में बताया कि केंद्रीय सिविल सेवा (छुट्टी) नियम, 1972 में अन्य पात्र छुट्टियों के अलावा, केंद्र सरकार के कर्मचारियों को प्रति वर्ष 30 दिन की अर्जित छुट्टी, 20 दिन की आधे वेतन की छुट्टी, 8 दिन की आकस्मिक छुट्टी और 2 दिन की प्रतिबंधित छुट्टी का प्रावधान है। इसका लाभ वे अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल सहित किसी भी व्यक्तिगत कारणों से उठा सकते हैं।

इतिहास में नया मुकाम: इंदिरा गांधी को पीछे छोड़ PM मोदी बने दूसरे सबसे लंबे कार्यकाल वाले प्रधानमंत्री

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिटेन के दौरे पर हैं, इसी बीच उन्होंने एक और बेहद खास कीर्तिमान अपने नाम कर लिया है। उन्होंने पूर्व पीएम इंदिरा गांधी का खास रिकॉर्ड तोड़ दिया। नरेंद्र मोदी 25 जुलाई यानी आज भारत के दूसरे सबसे लंबे समय तक लगातार प्रधानमंत्री पद संभालने वाले पीएम बन गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इंदिरा गांधी के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए ये कामयाबी हासिल की है। इंदिरा गांधी सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने के मामले में दूसरे नंबर थीं। हालांकि, पीएम मोदी अब उनसे आगे निकल गए हैं। अब प्रधानमंत्री मोदी से आगे देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ही हैं। पीएम मोदी ने इस मामले में इंदिरा को पछाड़ा नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को यह मुकाम हासिल कर लिया। वह लगातार सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने के मामले में इंदिरा गांधी से आगे निकल गए हैं। इंदिरा गांधी 24 जनवरी 1966 से 24 मार्च 1977 तक, 4,077 दिनों तक प्रधानमंत्री रहीं। पीएम मोदी मोदी का 25 जुलाई को कार्यकाल 4,078 दिनों का हो गया है। लगातार तीसरी बार स्थिर सरकार नरेन्द्र मोदी ने लगातार तीन लोकसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को जीत दिलाकर प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के रिकॉर्ड की बराबरी की है. आजादी के बाद जन्मे पहले प्रधानमंत्री के रूप में पीएम मोदी ने गैर-कांग्रेसी नेताओं में सबसे लंबे समय तक सेवा देने का गौरव भी हासिल किया है. वह दो पूर्ण कार्यकाल पूरा करने वाले एकमात्र गैर-कांग्रेसी नेता हैं, जो उनकी राजनीतिक स्थिरता का प्रमाण है. पीएम मोदी ने जीते 6 चुनाव पीएम मोदी का राजनीतिक सफर साल 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शुरू हुआ, जहां उन्होंने 2002, 2007 और 2012 के विधानसभा चुनावों में जीत हासिल की. इसके बाद साल 2014 में केंद्र की सत्ता संभालने के बाद उन्होंने लगातार तीन आम चुनावों में भाजपा को विजय दिलाई. एक अधिकारी ने बताया कि मोदी एकमात्र ऐसे नेता हैं, जिन्होंने एक ही पार्टी के तहत छह विधानसभा और लोकसभा चुनावों में लगातार जीत दर्ज की है. यह उपलब्धि उनकी रणनीतिक कुशलता और जनता के बीच उनकी व्यापक स्वीकार्यता को दर्शाती है. पीएम मोदी की नीतियों पर जनता को विश्‍वास पीएम मोदी का यह रिकॉर्ड न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह भारत की बदलती राजनीतिक गतिशीलता को भी दर्शाता है. जहां नेहरू और इंदिरा गांधी के दौर में कांग्रेस का वर्चस्व था, वहीं मोदी ने गैर-कांग्रेसी नेतृत्व को एक नई ऊंचाई दी है. उनकी नीतियों, जैसे डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत, ने देश की प्रगति को नई दिशा दी है.यह उपलब्धि मोदी के नेतृत्व की स्थिरता और उनके सुधारवादी एजेंडे के प्रति जनता के विश्वास को दर्शाती है. हालांकि, विपक्षी दलों द्वारा उन पर लोकतांत्रिक संस्थानों को कमजोर करने और ध्रुवीकरण की राजनीति करने के आरोप भी लगते रहे हैं. फिर भी, यह ऐतिहासिक क्षण भारत के राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है. अब पीएम मोदी से आगे सिर्फ पहले प्रधानमंत्री नेहरू सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड अभी भी जवाहरलाल नेहरू के नाम है। पंडित नेहरू ने 1952 से 1964 तक देश के प्रधानमंत्री की जिम्मा संभाला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बात करें तो उन्होंने पीएम पद संभालने से पहले गुजरात के मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी भी संभाली है। वह 13 साल तक गुजरात के सीएम रहे। गैर कांग्रेसी पीएम के तौर पर सबसे लंबा कार्यकाल गैर कांग्रेस पीएम के तौर पर भी सबसे लंबा कार्यकाल भी प्रधानमंत्री मोदी का ही है। पीएम मोदी ने गुजरात में लगातार तीन बार BJP को जीत दिलाई। यह जीत 2002, 2007 और 2012 में मिली। उन्होंने केंद्र में भी यह कमाल किया। उनकी पार्टी बीजेपी ने 2014, 2019 और 2024 में लगातार तीन लोकसभा चुनाव जीते। मई 2026 में तोड़ देंगे पूर्व पीएम नेहरू का रिकॉर्ड जिस तरह से प्रधानमंत्री मोदी अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे जल्द ही वो नेहरू को भी पीछे छोड़ देंगे। पीएम मोदी मई 2026 में पूर्व पीएम नेहरू के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड तोड़ देंगे। इसी के साथ वो सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले व्यक्ति बन जाएंगे। यह एक बड़ी उपलब्धि होगी। दिलचस्प तथ्य यह भी है कि नरेंद्र मोदी बीते 24 सालों से सत्ता में हैं। वह पहले लगातार गुजरात के सीएम रहे और फिर लगातार करीब 11 सालों से प्रधानमंत्री बने हुए हैं। एक बात और है कि पीएम नरेंद्र मोदी देश की आजादी के बाद पैदा होने वाले पहले शख्स हैं, जो पीएम की कुर्सी तक बैठे हैं। आइए जानते हैं, उनसे जुड़े कुछ दिलचस्प तथ्य… – वह सबसे लंबे कार्यकाल वाले देश के पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री हैं। उनसे पहले यह रिकॉर्ड पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के नाम था। – गैर-हिंदी भाषी राज्य से आने वाले वह पहले प्रधानमंत्री हैं, जिनका कार्यकाल इतना लंबा रहा है। – यदि राज्य में उनके सीएम कार्यकाल को भी गिन लिया जाए तो वह पहले नेता हैं, जो किसी चुनी हुई सरकार के सबसे लंबे समय तक मुखिया रहे हैं। – वह ऐसे पहले और गैर-कांग्रेसी पीएम हैं, जिन्होंने अपने दो कार्यकाल लगातार पूरे किए हैं। – एक रिकॉर्ड यह भी है कि वह पहले ऐसे गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने अपने दम पर बहुमत हासिल करके दो बार सरकार बनाई। – इंदिरा गांधी के कार्य़काल के बाद वह पहले ऐसे पीएम हैं, जिन्होंने दोबारा बहुमत के साथ सत्ता हासिल की। इसके अलावा पंडित नेहरू के बाद वह दूसरे ऐसे नेता हैं, जो केंद्र सरकार का लगातार तीसरी बार चुनाव जीतकर नेतृत्व कर रहे हैं। – वह देश के पहले ऐसे नेता हैं, जिन्होंने लगातार 6 चुनाव जीते हैं। उन्हें 2002, 2207 और 2012 में गुजरात चुनाव में जीत मिली थी। इसके अलावा 2014, 2019 और 2024 में उन्हें लोकसभा चुनाव में जीत मिली थी।

फिलीपींस में भीषण तूफान से तबाही, 25 मृत; राहत और बचाव जारी

मनीला फिलीपींस में पिछले एक हफ्ते से जारी मूसलधार बारिश और भूस्खलन के बीच अब ट्रॉपिकल तूफान 'को-मे' ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे फिलीपींस के लिए यह तूफान एक और बड़ा झटका साबित हुआ है। ऐसे में सरकार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भूमिका अहम बन जाती है ताकि लाखों लोगों को सुरक्षित और आवश्यक मदद मिल सके। इस खतरनाक तूफान के कारण अब तक कम से कम 25 लोगों की जान जा चुकी है और लगभग 2.78 लाख लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा है। तूफान शुक्रवार को देश के उत्तरी पहाड़ी इलाकों से गुजरा। इतनी रफ्तार से आया तूफान 'को-मे' नाम का यह तूफान गुरुवार की रात पांगासिनान प्रांत के अग्नो कस्बे में 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से टकराया। इसके झोंकों की गति 165 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई थी। शुक्रवार सुबह तक इसकी ताकत थोड़ी कम हुई और यह 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पूर्वोत्तर दिशा की ओर बढ़ता दिखा। मॉनसून को भी किया और भयानक तूफान ने देश में पहले से ही चल रही मौसमी बारिश को और ज्यादा तीव्र बना दिया। पिछले एक हफ्ते से लगातार हो रही बारिश से कई इलाकों में बाढ़, पेड़ों के गिरने, भूस्खलन और बिजली के झटकों से लोगों की जान गई है। फिलहाल आठ लोग लापता हैं। हालांकि, तूफान 'को-मे' से सीधे मौत की कोई पुष्टि अब तक नहीं हुई है। स्कूल बंद, 35 प्रांतों में क्लास सस्पेंड सरकार ने राजधानी मनीला में शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन स्कूल बंद रखने का आदेश दिया है। लुजोन के मुख्य उत्तरी इलाके के 35 प्रांतों में कक्षाएं स्थगित कर दी गई हैं। कम से कम 77 शहरों और कस्बों में 'आपातकाल' घोषित किया गया है, जिससे राहत फंड जल्दी मिल सके और जरूरी सामान जैसे चावल की कीमतें न बढ़ें। 278,000 लोगों का विस्थापन, सेना तैनात सरकारी आपदा प्रबंधन एजेंसी के अनुसार, 2.78 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ और तूफान के कारण अपने घरों को छोड़ चुके हैं। इनमें से अधिकांश को आपातकालीन शेल्टर या रिश्तेदारों के घरों में शरण लेनी पड़ी। अब तक लगभग 3,000 घर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। राहत और बचाव के लिए सेना, पुलिस, कोस्ट गार्ड, दमकल कर्मियों और स्थानीय वॉलंटियरों को तैनात किया गया है। राष्ट्रपति की चेतावनी और अमेरिकी मदद का वादा राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर ने व्हाइट हाउस यात्रा से लौटने के बाद राहत शिविरों का दौरा किया और लोगों को खाद्य सामग्री वितरित की। उन्होंने एक आपात बैठक में कहा कि अब जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसी आपदाएं और ज्यादा और अनिश्चित होंगी। अमेरिकी सरकार ने राहत सामग्री और भोजन को दूर-दराज के क्षेत्रों में पहुंचाने के लिए अपने सैन्य विमानों की मदद देने का वादा किया है।

भारत-मालदीव संबंधों में गर्मजोशी की वापसी? मुइज्जू ने एयरपोर्ट पर किया मोदी का स्वागत

माले  मालदीव दौरे पर पहुंचे भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का माले एयरपोर्ट पर भव्य स्वागत किया गया है। मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू खुद एयरपोर्ट पर पहुंचे और प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया है। जिसके बाद अब संभावना है कि दोनों देशों के संबंध, जो मुइज्जू के राष्ट्रपति बनने के बाद खराब होने लगे थे, वो फिर से सुधर गये हैं। मुइज्जू ने एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया है। राष्ट्रपति मुइज्जू के साथ-साथ मालदीव सरकार के कई शीर्ष मंत्री, जिनमें विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री, वित्त मंत्री और गृह सुरक्षा मंत्री शामिह हैं, वो भी प्रधानमंत्री मोदी की आगवानी के लिए एयरपोर्ट पर मौजूद थे। यह साफ संकेत है कि द्विपक्षीय रिश्तों को नई ऊर्जा देने के लिए दोनों देशों में राजनीतिक इच्छाशक्ति मौजूद है। आपको बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब पिछले कुछ महीनों में भारत और मालदीव के रिश्तों में सुधार होने लगा है। मोहम्मद मुइज्जू ने 2023 में हुए राष्ट्रपति चुनाव के दौरान 'इंडिया ऑउट' कैम्पेन चलाया था। राष्ट्रपति बनने के बाद मोहम्मद मुइज्जू ने पहला द्विपक्षीय विदेशी दौरा चीन का किया था। इसके अलावा उन्होंने अपरोक्ष तौर पर भारत के खिलाफ कुछ बयान भी दिए थे। वहीं जनवरी 2024 में मालदीव के कुछ मंत्रियों ने प्रधानमंत्री मोदी के लक्षद्वीप दौरे को लेकर अपमानजनक टिप्पणियां की थी, जिसके बाद दोनों देशों के संबंध काफी खराब होने लगे थे। भारत में 'मालदीव का बहिष्कार' करने की मुहिम भी चलाई गई थी। मालदीव और भारत के सुधर रहे हैं रिश्ते एक्सपर्ट्स का कहना है कि मालदीव के राष्ट्रपति ने पहले चीन और तुर्की जैसे देशों से संबंध बढ़ाने की कोशिश की थी। उनका मकसद भारत को दरकिनार करना था। लेकिन बहुत जल्द उन्हें अहसास हो गया कि भारत के बिना स्थिति काफी मुश्किल हो सकती है। क्योंकि मालदीव हिंद महासागर के बीच में है और कई द्वीपों में बिखरा देश है। यहां भारत की मदद के बिना मालदीव को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। किसी भी आपत स्थिति में सबसे पहले भारतीय मदद ही पहुंच सकती है। श्रीलंका ने भी मालदीव के राष्ट्रपति को भारत के साथ संबंध सुधारने की सलाह दी थी। जिसके बाद प्रधानमंत्री मोदी के तीसरी बार शपथ ग्रहण समारोह में मोहम्मद मुइज्जू दिल्ली आए थे। इसके अगले महीने फिर से मोहम्मद मुइज्जू ने दिल्ली का द्विपक्षीय दौरा किया था। फिर धीरे धीरे संबंध सुधरने लगे। प्रधानमंत्री मोदी को मालदीव ने इस बार स्वतंत्रता दिवस पर राजकीय मेहमान के तौर पर आमंत्रित किया है। इस दौरान दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग बढ़ाने, समुद्री निगरानी और आतंकवाद विरोधी रणनीति, आर्थिक सहायता और बुनियादी ढांचे के प्रोजेक्ट्स, स्वास्थ्य और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में समझौते या घोषणाएं हो सकती हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि क्षेत्रीय दबाव और घरेलू आर्थिक चुनौतियों के चलते मालदीव को भारत जैसे पड़ोसी और सहयोगी की आवश्यकता है। रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी इस दौरे के दौरान मालदीव के लिए आर्थिक सहायता का ऐलान कर सकते हैं, जो क्रेडिन लाइन के जरिए होने की संभावना है। मोहम्मद मुइज्जू को चीन का हिमायती माना जाता था, उन्होंने मालदीव चुनाव में भारतीय कंपनियों की मौजूदगी का मुद्दा बढ़ चढ़कर उठाया था. राष्ट्रपति बनने के बाद मोहम्मद मुइज्जू परंपरा को बदलते हुए अपनी पहली यात्रा पर दिसंबर 2023 में तुर्की गए, फिर जनवरी 2024 में उन्होंने चीन की यात्रा की. जबकि मालदीव में रवायत ये थी कि नए राष्ट्राध्यक्ष पहले भारत का दौरा करते थे.  मोहम्मद मुइज्जू  का ये कदम बताता था कि वे मालदीव को भारत से दूर ले जा रहे हैं. इसके बाद मालदीव के मंत्रियों के बयान पीएम मोदी को लेकर आए जो गरिमा के विपरीत थे.  लेकिन साल 2023 से 2025 के बीच राष्ट्रपति मोइज्जू को और मालदीव के थिंक टैंक को भारत को नजरअंदाज करने का मतलब समझ में आ गया. शुक्रवार को पीएम मोदी जब मालदीव की राजधानी माले पहुंचे तो उनके स्वागत के लिए मालदीव की पूरी सरकार पलक पांवड़े बिछाए तैयार थी.  खुद राष्ट्रपति मुइज्जू, मालदीव के विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री, वित्त मंत्री, गृह मंत्री एयरपोर्ट पर मौजूद थे. दो साल से कम समय में भी मोइज्जू की बायकॉट इंडिया की नीति, 'वेलकम मोदी' में तब्दील हो गई. आखिर क्या वजह रही जो राष्ट्रपति मोइज्जू को 18-20 महीनों में भारत को लेकर अपनी गलतियों को सुधारने पर मजूबर होना पड़ा.  आर्थिक संकट: कोरोना खत्म हो गया है लेकिन असर से मालदीव की अर्थव्यवस्था निकल नहीं पा रही है.  मालदीव की अर्थव्यवस्था संकट में है, विदेशी मुद्रा भंडार सितंबर 2024 में मात्र $440 मिलियन था जो डेढ़ महीने के आयात के लिए पर्याप्त था. ऐसे मुश्किल मौके पर भारत ने मालदीव की मदद की. भारत ने 750 मिलियन डॉलर की करेंसी स्वैप की सुविधा दी और 100 मिलियन डॉलक ट्रेजरी बिल रोलओवर के साथ महत्वपूर्ण सहायता प्रदान की. इसके अलावा भारत अरबों रुपये का प्रोजेक्ट मालदीव में चला रहा है. ये प्रोजेक्ट मालदीव में बुनियाद ढांचे के विकास में अहम रोल अदा करेंगे. थिंक टैंक ओआरएफ ऑनलाइन के अनुसार मालदीव में भारत के सहयोग से बनाए जा रहे हनीमाधू हवाई अड्डा परियोजना और साथ ही 4,000 घरों के अगस्त 2025 से पूरी तरह से चालू होने की उम्मीद है. भारत यहां  ग्रेटर माले कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट (जीएमसीपी) पर काम कर रहा है. इसके जरिये एक पुल बनाया जा रहा है जो सितंबर 2026 तक पूरा हो जाएगा. मालदीव के अड्डू में भारत ने अगस्त 2024 में एक लिंक ब्रिज परियोजना का उद्घाटन किया है. भारत यहां 29 मिलियन अमेरिकी डॉलर की लागत से एक हवाई अड्डा भी विकसित कर रहा है. भारत से रिश्तों में खटास की वजह से मालदीव के ये सारे प्रोजेक्ट फंस गए थे. 2025 में भारत और मालदीव ने मालदीव में नौका सेवाओं के विस्तार के लिए 13 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए, जिसमें 56 करोड़ रुपये की अनुदान सहायता शामिल है. भारत मालदीव के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है, जिसका व्यापार मूल्य 548 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक है. ऐसे स्थिति में मालदीव का इंडिया बायकॉट का नारा महज चुनावी प्रोपगेंडा साबित हुआ. पर्यटन पर निर्भरता: मालदीव की अर्थव्यवस्था में पर्यटन का योगदान 28% है, जिसमें भारतीय … Read more

मणिपुर में शांति बहाली तक राष्ट्रपति शासन जारी रहेगा, अवधि छह महीने और बढ़ी

 नई दिल्ली मणिपुर में राष्ट्रपति शासन को छह महीने के लिए और बढ़ा दिया गया है. यह विस्तार 13 अगस्त 2025 से प्रभावी होगा. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस संबंध में राज्यसभा में एक प्रस्ताव पेश किया, जिसे सदन ने स्वीकार कर लिया. सदन में पेश किए गए नोटिस में कहा गया, 'यह सदन, संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति की ओर से मणिपुर के संबंध में 13 फरवरी 2025 को जारी उद्घोषणा को 13 अगस्त 2025 से प्रभावी छह माह की और अवधि तक जारी रखने की स्वीकृति प्रदान करता है.' 2023 में हुई थी हिंसा की शुरुआत राज्य में हिंसा की शुरुआत 2023 में तब हुई जब हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ एक 'जनजातीय एकजुटता मार्च' आयोजित किया गया. मणिपुर में 13 फरवरी 2025 को पहली बार राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था. यह फैसला राज्य में लंबे समय से जारी जातीय हिंसा और प्रशासनिक विफलता के चलते लिया गया था. कानून-व्यवस्था स्थिर करने की कोशिश में सरकार हालांकि शांति और सुलह की कोशिशें अभी भी जारी हैं, लेकिन मणिपुर के कई हिस्सों में सुरक्षा हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं. इस अवधि में केंद्र सरकार कानून-व्यवस्था को स्थिर करने और भविष्य में विधानसभा चुनाव कराने की संभावनाओं का मूल्यांकन करने की योजना बना रही है. दरअसल, इस संबंध में सदन ने नोटिस स्वीकार किया और प्रस्ताव पारित किया, जिसमें कहा गया, "यह सदन राष्ट्रपति द्वारा संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत मणिपुर के संबंध में 13 फ़रवरी 2025 को जारी की गई उद्घोषणा को 13 अगस्त 2025 से अगले छह महीनों के लिए लागू रखने का अनुमोदन करता है। फरवरी में मणिपुर में लगा था राष्ट्रपति शासन जानकारी दें कि मणिपुर में इसी साल 13 फरवरी को राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था। राज्य के तत्कालीन सीएम एन बीरेन सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दिया, जिसके बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करना पड़ा था। ध्यान देने वाली बात है कि राष्ट्रपति शासन राज्य में केवल छः महीने के लिए ही लगाया जा सकता है। मणिपुर में भी राष्ट्रपति शासन की अवधि 31 अगस्त को पूरी होने जा रही थी। इससे पहले ही राज्य में एक बार फिर राष्ट्रपति शासन छः महीने के लिए विस्तारित कर दिया गया है। मणिपुर में मैतई और कुकी संघर्ष में 260 से अधिक लोगों की मौत गौरतलब है कि मणिपुर में मई 2023 में कुकी और मैतेई समुदायों के बीच जातीय हिंसा फैल गई। इस संघर्ष में अभी तक 260 लोगों की जान जा चुकी है। इसके अलावा 1000 से अधिक लोगों को अपना घर छोड़कर दूसरी जगहों पर शिफ्ट होना पड़ा। इस जातीय हिंसा पर काबू पाने की कोशिशें की जा रही थीं। इसी बीच इसी साल फरवरी में मणिपुर के मुख्‍यमंत्री एन बीरेन सिंह ने इसी साल फरवरी में इस्‍तीफा दे दिया था। इसके बाद 13 फरवरी 2025 को केंद्र सरकार ने राज्य में विधानसभा को भंग कर दिया और राष्ट्रपति शासन लगा दिया था। 

BS-6 वाहन भी हो सकते हैं बैन? सुप्रीम कोर्ट में 28 जुलाई को तय होगा भविष्य

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट 28 जुलाई को उस याचिका पर सुनवाई करेगा जिसमें यह सवाल उठाया गया है कि BS-VI (बीएस-6) मानकों वाली गाड़ियों पर भी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में पेट्रोल गाड़ियों के लिए 15 साल और डीजल गाड़ियों के लिए 10 साल की तय उम्र सीमा लागू होनी चाहिए या नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने दी जल्दी सुनवाई की मंजूरी मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने गुरुवार को इस याचिका को जल्दी सुनवाई के लिए मंजूरी दी। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि यह मामला बेहद जरूरी है, क्योंकि सरकार कोर्ट के पहले दिए गए निर्देशों को नजरअंदाज करके अपने नियम लागू नहीं कर सकती। कोर्ट के पुराने आदेशों से नहीं हट सकती सरकार वकील ने दलील दी कि दिल्ली में प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही गाड़ियों की उम्र को लेकर जो सीमाएं तय की थीं, सरकार को उन्हें बिना कोर्ट की मंजूरी के बदलने का अधिकार नहीं है। ऐसे में यह साफ किया जाना जरूरी है कि बीएस-6 मानकों को पूरा करने वाली नई तकनीक की गाड़ियों पर भी पुराने नियम लागू होंगे या नहीं। अब सबकी नजर 28 जुलाई की सुनवाई पर टिकी है, जहां यह तय हो सकता है कि एनसीआर में चल रही नई BS-VI गाड़ियों को भी तय वर्षों के बाद बंद करना पड़ेगा या उन्हें राहत मिलेगी। क्या है मौजूदा नियम कानून के अनुसार, दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में डीजल वाहनों के लिए वर्तमान एंड ऑफ लाइफ (जीवन अवधि) 10 वर्ष और सभी पेट्रोल वाहनों के लिए 15 वर्ष है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2015 में, भारत के राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने निर्देश दिया था कि शहर में बढ़ते प्रदूषण स्तर को कम करने के प्रयास में 10 वर्ष से अधिक पुराने डीजल वाहनों और 15 वर्ष से अधिक पुराने पेट्रोल वाहनों को दिल्ली-एनसीआर में चलने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। 

BS-6 वाहन भी हो सकते हैं बैन? सुप्रीम कोर्ट में 28 जुलाई को तय होगा भविष्य

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट 28 जुलाई को उस याचिका पर सुनवाई करेगा जिसमें यह सवाल उठाया गया है कि BS-VI (बीएस-6) मानकों वाली गाड़ियों पर भी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में पेट्रोल गाड़ियों के लिए 15 साल और डीजल गाड़ियों के लिए 10 साल की तय उम्र सीमा लागू होनी चाहिए या नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने दी जल्दी सुनवाई की मंजूरी मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने गुरुवार को इस याचिका को जल्दी सुनवाई के लिए मंजूरी दी। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि यह मामला बेहद जरूरी है, क्योंकि सरकार कोर्ट के पहले दिए गए निर्देशों को नजरअंदाज करके अपने नियम लागू नहीं कर सकती। कोर्ट के पुराने आदेशों से नहीं हट सकती सरकार वकील ने दलील दी कि दिल्ली में प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही गाड़ियों की उम्र को लेकर जो सीमाएं तय की थीं, सरकार को उन्हें बिना कोर्ट की मंजूरी के बदलने का अधिकार नहीं है। ऐसे में यह साफ किया जाना जरूरी है कि बीएस-6 मानकों को पूरा करने वाली नई तकनीक की गाड़ियों पर भी पुराने नियम लागू होंगे या नहीं। अब सबकी नजर 28 जुलाई की सुनवाई पर टिकी है, जहां यह तय हो सकता है कि एनसीआर में चल रही नई BS-VI गाड़ियों को भी तय वर्षों के बाद बंद करना पड़ेगा या उन्हें राहत मिलेगी। क्या है मौजूदा नियम कानून के अनुसार, दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में डीजल वाहनों के लिए वर्तमान एंड ऑफ लाइफ (जीवन अवधि) 10 वर्ष और सभी पेट्रोल वाहनों के लिए 15 वर्ष है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2015 में, भारत के राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने निर्देश दिया था कि शहर में बढ़ते प्रदूषण स्तर को कम करने के प्रयास में 10 वर्ष से अधिक पुराने डीजल वाहनों और 15 वर्ष से अधिक पुराने पेट्रोल वाहनों को दिल्ली-एनसीआर में चलने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। 

नौकरीपेशा के दिन बहुरेंगे! 8वें वेतन आयोग से ₹51,000 बेसिक सैलरी की उम्मीद

नई दिल्ली आठवें वेतन आयोग का गठन जल्‍द होने जा रहा है. जनवरी 2026 तक इसे लागू करने का प्रस्‍ताव रखा गया है, जिसे लेकर राज्‍य वित्त मंत्री पंकज चौधरी ने जानकारी दी है कि 8th Pay Commission को लेकर राज्‍य सरकारों, वित्त मंत्रालय और संबंधित विभागों से परामर्श की प्रक्रिया चल रही है. जल्‍द ही इसे लागू कर दिया जाएगा.  इस आयोग के तहत केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन, पेंशन और भत्तों में इजाफा हो जाएगा. कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में जबरदस्‍त उछाल देखने को मिलेगी. साथ ही महंगाई भत्ता और फिटमेंट फैक्‍टर भी बढ़ेगा, जिससे कर्मचारियों और पेंशनर्स को लाभ मिलेगा. आइए समझते हैं, आपकी सैलरी कितनी बढ़ सकती है…  इस फॉर्मूले से बढ़ेगी कर्मचारियों की सैलरी 8वें वेतन आयोग के तहत सैलरी में ठीक वैसे ही इजाफा होगा, जैसे 7वें वेतन आयोग (7th Pay Commission) के लागू होने पर हुआ था. कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन में बढ़ोतरी के लिए एक्रोयड फॉर्मूले का उपयोग किया जाएगा.  क्‍या है ये फॉर्मूला?  डॉ वालेस एक्रोयड ने यह फॉर्मूला पेश किया था, जिसे जीवन के न्‍यूनतम लागत तय करने के लिए डिजाइन किया गया था. इस फॉर्मूले में यह बताया गया था कि एवरेज कर्मचारियों की पोषण संबंधी जरूरतों के आधार पर सैलरी का कैलकुलेशन किया जाना चाहिए. इस फॉर्मूले को बनाते वक्‍त भोजन, कपड़ा और मकान जैसी कर्मचारियों की जरूरतों को ध्‍यान में रखा गया था. 15वें भारतीय श्रम सम्मेलन (ILC) ने 1957 में इस फॉर्मूले को अपनाया गया था.  7वें वेतन आयोग पर भी लागू हुआ था ये फॉर्मूला  इस फॉर्मूले का उपयोग करते हुए 7वें वेतन आयोग (7th Pay Commission) के तहत भी कर्मचारियों की सैलरी में इजाफा किया गया था. 7वें वेतन आयोग लागू होने के बाद कर्मचारियों की बेसिक सैलरी 7000 रुपये से बढ़कर 18000 रुपये हो गई थी. कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन को अपडेट करने के लिए 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था. ये फिटमेंट फैक्‍टर एक्रोयड फॉर्मूला से तय किया गया था.  8वें वेतन आयोग के तहत 3 गुना बढ़ जाएगी सैलरी!  अनुमान है कि 8th Pay Commission के लागू होते ही कर्मचारियों की सैलरी में बंपर उछाल देखने को मिलेगी. बेसिक सैलरी में करीब 3 गुना बढ़ोतरी हो सकती है, जो एक्रोयड फॉर्मूला के तहत संभव होगा. अगर ये फॉर्मूला 8वां वेतन आयोग के तहत भी यूज किया जाता है तो सैलरी और पेंशन का कैलकुलेशन 2.86 फिटमेंट के आधार पर होगा. इसका मतलब है कि न्‍यूनतम बेसिक सैलरी 18000 रुपये से बढ़कर 51480 रुपये तक हो सकती है. वहीं पेंशन 9000 रुपये से बढ़कर 25740 रुपये हो जाएगी.