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वास्तु शास्त्र चेतावनी: दिन की शुरुआत में ये आदतें बिगाड़ सकती हैं आपका पूरा दिन, जानें किन चीजों से बचना जरूरी है

सुबह का जो समय होता है एक तरह से वही हमारे पूरे दिन की दिशा को तय करता है. अगर आपके दिन की शुरुआत पॉजिटिव और एनर्जेटिक होगी, तो आपका पूरा दिन खुशहाली और सफलताओं के साथ बीतेगा. हमारे वास्तु शास्त्र में सुबह के समय को लेकर कुछ खास नियम बताये गए हैं. कई बार ऐसा भी होता है कि हम अनजाने में सुबह सोकर उठते ही अनजाने में कुछ गलतियां कर देते हैं, जिनकी वजह से पूरे घर में निगेटिव एनर्जी का वास होने लग जाता है. अगर घर में निगेटिव एनर्जी बढ़ जाए तो इसकी वजह से बने हुए काम बिगड़ने लगते हैं, मेंटल स्ट्रेस बढ़ता है और साथ ही हमें पैसों से जुड़ी दिक्कतें भी होने लगती हैं. आपके साथ ऐसा न हो इसलिए आज हम आपको 5 ऐसे कामों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें आपको भूलकर भी सुबह सोकर उठने के बाद नहीं करना चाहिए. तो चलिए इन गलतियों के बारे में जान लेते हैं ताकि आप खुद को जीवन में आने वाली मुसीबतों से बचाकर रख सकें. सोकर उठते ही आईना न देखें बहुत से लोगों की यह आदत होती है कि वे सुबह आंखें खुलते ही सबसे पहले अपना चेहरा आईने में देखते हैं. वास्तु शास्त्र के अनुसार ऐसा करना बहुत अशुभ साबित हो सकता है। रात भर की नींद के बाद हमारे शरीर में और आसपास कुछ निगेटिव एनर्जी इकट्ठा हो जाती है, जो सुबह चेहरे पर दिखती है. जब हम उठते ही आईना देखते हैं, तो वह निगेटिव एनर्जी वापस हमारे अंदर चली जाती है. इससे पूरे दिन हमारे स्वभाव में चिड़चिड़ापन रहता है और काम में मन नहीं लगता. इसलिए सुबह उठकर सबसे पहले अपनी हथेलियों को देखना चाहिए या भगवान का नाम लेना चाहिए. गंदे और जूठे बर्तन देखने से बचें अक्सर लोग रात के बर्तनों को सिंक में ऐसे ही छोड़ देते हैं और सुबह उठते ही सबसे पहले उन पर नजर पड़ती है. वास्तु के अनुसार सुबह-सुबह गंदे बर्तनों को देखना या किचन में बिखरी हुई चीजों को देखना दरिद्रता को बुलावा देता है. इससे घर में माता लक्ष्मी का वास नहीं होता और राहु-केतु का निगेटिव इफेक्ट भी जीवन में बढ़ता है. कोशिश करें कि रात को ही रसोई साफ करके सोएं. अगर ऐसा पॉसिबल नहीं है, तो सुबह उठते ही सबसे पहले बर्तनों की तरफ न जाएं. सुबह उठकर सबसे पहले एक गिलास साफ पानी पिएं और पॉजिटिव चीजों के बारे में सोचें. अपनी या दूसरों की परछाईं देखने से बचें वास्तु शास्त्र के अनुसार सुबह के समय सूरज की रोशनी में या कमरे की लाइट में अपनी या परिवार के किसी सदस्य की परछाईं देखने से बचना चाहिए. मान्यताओं के अनुसार आप आप सुबह उठते ही अपनी या फिर किसी और की परछाईं देखते हैं, तो आपके जीवन में स्ट्रेस, डर और दुर्भाग्य बढ़ने लग जाता है. इसके अलावा अगर आप सुबह उठते ही सबसे पहले किसी की परछाईं देखते हैं, तो इससे आपसी रिश्तों में कड़वाहट और मतभेद पैदा होने की संभावना बढ़ जाती है. सुबह उठकर हमेशा सीधे सामने की तरफ देखना चाहिए, न कि दीवारों या फर्श पर बन रही परछाईं पर. आक्रामक जानवरों या तस्वीरों को न देखें कुछ लोगों के कमरों में हिंसक जानवरों, डूबते हुए सूरज, या उदास कर देने वाली तस्वीरें लगी हुई होती हैं. वास्तु शास्त्र के अनुसार सुबह उठते ही ऐसी तस्वीरों पर नजर पड़ना बहुत ही नुकसानदेह माना जाता है. इसके अलावा, अगर आपके घर में पालतू जानवर हैं, तो उठते ही सबसे पहले उनके हिंसक रूप या आपस में लड़ते हुए देखना भी सही नहीं माना जाता है. वास्तु के अनुसार इससे आपके भीतर गुस्से और निगेटिविटी का संचार होता है. सुबह की शुरुआत हमेशा किसी देवी-देवता की तस्वीर, हंसते हुए चेहरे या शांत नेचर के सुंदर सीन्स को देखकर करनी चाहिए. सुबह उठते ही विवाद या अपशब्दों से बचें सुबह का जो समय होता है वह ईश्वर की आराधना और मन को शांत रखने का समय होता है. सुबह उठते ही किसी से बहस करना, चिल्लाना या अपशब्दों का इस्तेमाल करना पूरे घर के माहौल को बिगाड़ देता है. वास्तु शास्त्र की अगर मानें तो जो लोग अपने दिन की शुरुआत विवाद से करते हैं, उनके घर से तरक्की चली जाती है और पैसों का नुकसान भी होने लगता है. सुबह के समय हमेशा मीठी बोली का इस्तेमाल करें. इसके अलावा परिवार के सभी मेंबर्स को मुस्कुराकर गुड मॉर्निंग भी कहें. जब आप ऐसा करते हैं तो आपके घर में पॉजिटिव एनर्जी का फ्लो बना हुआ रहता है. दिन की अच्छी शुरुआत के लिए क्या करें? वास्तु शास्त्र के अनुसार अगर आप नुकसानों से बचना और अपने दिन को बेहतर बनाना चाहते हैं तो सुबह उठकर सबसे पहले अपने दोनों हाथों की हथेलियों को मिलाकर देखें और भगवान का शुक्रिया अदा करें. इसके बाद धरती को छूकर उसे प्रणाम करें. यह छोटी सी आदत आपके जीवन में सुख, समृद्धि और शांति लेकर आएगी.

11 जुलाई 2026 को बन रहा त्रिपुष्कर योग, कई राशियों के लिए खुलेगा भाग्य का द्वार

11 जुलाई 2026 की सुबह ज्योतिष शास्त्र के लिहाज से बेहद खास और शुभ होने जा रही है. इस दिन सुबह 11 बजकर 03 मिनट पर एक अत्यंत दुर्लभ और शक्तिशाली योग का निर्माण होने जा रहा है, जिसे त्रिपुष्कर योग कहा जाता है. ज्योतिष शास्त्र में त्रिपुष्कर योग को एक 'मल्टीप्लायर' (गुना करने वाला) योग माना जाता है. मान्यता है कि इस योग के दौरान आप जो भी शुभ कार्य, निवेश या खरीदारी करते हैं, उसका फल आपको तीन गुना होकर वापस मिलता है. ऐसे में यह योग कई राशियों की किस्मत के बंद ताले खोलने आ रहा है, तो वहीं कुछ राशियों को इस दौरान बेहद संभलकर रहने की जरूरत होगी. आइए जानते हैं कि इस शक्तिशाली त्रिपुष्कर योग का आपकी राशि पर क्या गहरा प्रभाव पड़ने वाला है. मेष राशि (Aries) मेष राशि के जातकों के लिए यह योग धन लाभ के नए रास्ते खोलेगा. यदि आप इस समय कहीं निवेश (Investment) करते हैं, तो भविष्य में उससे तीन गुना लाभ मिलने के योग हैं. पैतृक संपत्ति से जुड़ा कोई पुराना विवाद सुलझ सकता है. इस दिन सोने के गहने, भूमि या वाहन खरीदना आपके लिए अत्यंत शुभ रहेगा. सिंह राशि (Leo) सिंह राशि के नौकरीपेशा और बिजनेसमैन लोगों के लिए यह समय स्वर्णिम साबित हो सकता है. कार्यक्षेत्र में आपकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी. व्यापार में कोई बड़ी डील फाइनल हो सकती है जिससे मुनाफा उम्मीद से तीन गुना ज्यादा हो सकता है. नए स्टार्टअप की शुरुआत के लिए दिन बेस्ट है. धनु राशि (Sagittarius) धनु राशि के जातकों को करियर और आर्थिक मोर्चे पर बड़ी सफलता हाथ लग सकती है. लंबे समय से अटका हुआ धन वापस मिलेगा. समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा और धार्मिक कार्यों की ओर झुकाव बढ़ेगा. कोई नया काम शुरू करना चाहते हैं तो इस समय का सदुपयोग करें. इन राशियों को रहना होगा सावधान! वृषभ राशि (Taurus) इस दिन पैसों के लेन-देन से पूरी तरह बचें. किसी को भी उधार न दें, अन्यथा वह पैसा तीन गुना होकर डूब सकता है. किसी भी तरह के कानूनी विवाद या झगड़े से दूर रहें, नहीं तो बात बहुत आगे बढ़ सकती है. वृश्चिक राशि (Scorpio) सेहत और यात्रा के मामले में आपको सावधान रहना होगा. वाहन चलाते समय लापरवाही न बरतें. इस दिन चोट लगने की आशंका रहेगी और अगर कोई बीमारी इस समय शुरू हुई तो वह लंबा खींच सकती है. त्रिपुष्कर योग में क्या करें और क्या न करें? क्या करें: बैंक में एफडी कराएं, कीमती धातुएं खरीदें, नए व्यापार का अनुबंध (Agreement) करें या कोई धार्मिक अनुष्ठान शुरू करें. इस समय किया गया दान भी तीन गुना पुण्य देता है. क्या न करें: इस दिन किसी से कर्ज या उधार न लें और न ही किसी को दें. कोई पुराना सामान या कबाड़ न बेचें और घर में क्लेश बिल्कुल न होने दें.

राखी के त्योहार पर ग्रहण की छाया, क्या बदलेगा रक्षाबंधन मनाने का तरीका?

इंदौर  रक्षाबंधन का पावन पर्व इस बार 28 अगस्त दिन शुक्रवार को सावन पूर्णिमा के दिन मनाया जाएगा. लेकिन इस दिन साल 2026 का अंतिम चंद्र ग्रहण भी लगने वाला है. यह ग्रहण कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में घटित होने वाला है. ऐसे में रक्षाबंधन के पर्व को लेकर लोगों के मन में बड़ा सवाल आ रहा है कि जब रक्षाबंधन के दिन चंद्र ग्रहण लग रहा है तो क्या राखी बांधने को लेकर नियम और तिथि बदल जाएगी. ज्योतिषीय और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के दौरान कई शुभ कार्यों से परहेज करने की सलाह दी जाती है, लेकिन इसकी मान्यता ग्रहण की दृश्यता पर भी निर्भर करती है. आइए जानते हैं रक्षाबंधन के दिन चंद्र ग्रहण होने से क्या राखी बांधने में कोई बाधा आएगी… इस समय लगेगा चंद्र ग्रहण भारतीय समय के अनुसार, रक्षाबंधन के दिन लगने वाले चंद्र ग्रहण की शुरुआत सुबह 6 बजकर 53 मिनट से होगी और दोपहर 12 बजकर 32 मिनट को ग्रहण का समापन होगा. ग्रहण की कुल अवधि लगभग 5 घंटे 39 मिनट बताई जा रही है और यह एक गहरा आंशिक ग्रहण होगा. इस दौरान चंद्रमा का बड़ा पृथ्वी की छाया में ढक जाएगा. इस दौरान चंद्रमा गहरा लाल या तांबे के रंग जैसा नजर आएगा, इसी वजह से इसे ब्लड मून भी कहा जाएगा. यह ग्रहण अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका, प्रशांत महासागर और अटलांटिक महासागर में पूरी तरह दिखाई देने वाला है।  इस राशि और नक्षत्र में लग रहा है चंद्र ग्रहण ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, रक्षाबंधन के दिन लगने वाला चंद्र ग्रहण कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में घटित होने वाला है. हालांकि, ग्रहण से जुड़े नियमों का पालन करने वाले कुछ लोग ग्रहण काल के दौरान भोजन ना करने, गर्भवती महिलाओं को घर पर रहने की सलाह, मंत्र जाप करने और भगवान का स्मरण करने जैसी परंपराओं का पालन करते हैं. लेकिन जहां ग्रहण दिखाई नहीं देता, वहां इन नियमों को अनिवार्य नहीं माना जाता।  किस राशि और नक्षत्र में लगेगा ग्रहण ज्योतिषीय नजरिए से देखा जाए, तो यह ग्रहण कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में होगा, जिससे यह इस राशि के जातकों के लिए खास रूप से महत्वपूर्ण है। हालांकि ग्रहण का असल प्रभाव हर व्यक्ति की कुंडली के मुताबिक भिन्न होता है, जिसका मतलब है कि, इसका प्रभाव सार्वभौमिक नहीं है। रक्षा बंधन पर चंद्र ग्रहण का प्रभाव विशेषज्ञों के मुताबिक, साल का दूसरा चंद्र ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, ग्रहण का असर सिर्फ उन्हीं हिस्सों में पड़ता है, जहां इसे देखा जा सकता है। इसलिए ग्रहण के दौरान अशुभ माने जाने वाला सूतक काल भी भारत में लागू नहीं होगा। इसका मतलब है कि रक्षा बंधन बिना किसी बाधा के मनाया जा सकता है। बहनें अपने भाइयों को शुभ अवसर पर राखी बांध सकती हैं। हालांकि भाद्र काल में राखी बांधने से सावधान रहने की जरूरत है, क्योंकि यह काल राखी के लिए काफी अशुभ माना जाता है। साल का दूसरा चंद्र कहां दिखाई देगा? साल का दूसरा चंद्र ग्रहण मुख्य रूप से अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका और प्रशांत एवं अटलांटिक महासागरों के आसपास के हिस्सों में दिखाई दे सकता है। इन स्थानों पर दर्शक चंद्रमा को एक अलग रंग में देखेंगे, जिससे इस खगोलीय घटना का आकर्षण और भी बढ़ जाएगा। कुल मिलाकर इस साल रक्षा बंधन पर चंद्र ग्रहण का साया रहने वाला है, लेकिन भारत में यह नहीं दिखाई देगा इसलिए इसके नकारात्मक प्रभाव मान्य नहीं होंगे। इस तरह भाई-बहन का त्योहार खुलकर मनाया जा सकेगा। भारत में दिखाई नहीं देगा चंद्र ग्रहण ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि इस बार लगने वाला चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा. ऐसे में देश के अधिकांश हिस्सों में रक्षाबंधन के पर्व पर ग्रहण का कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं माना जाएगा. बहनें शुभ मुहूर्त में अपने भाइयों को राखी बांध सकेंगी और पर्व की पारंपरिक रस्में सामान्य रूप से संपन्न की जा सकेंगी. चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए इस ग्रहण का सूतक काल भी मान्य नहीं होगा. जानकारी के लिए बता दें कि चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण से लगभग 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है।  श्रद्धालु अनावश्यक भ्रम से बचें रक्षाबंधन के दिन चंद्रग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा. ऐसे में आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है, बिना किसी संशय के आप भाई-बहन के इस पावन पर्व को मनाएं. लेकिन भद्राकाल का ध्यान जरूर रखें क्योंकि भद्रा के समय राखी बांधना अशुभ माना जाता है. रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक माना जाता है. इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनके सुख, समृद्धि और लंबी आयु की कामना करती हैं, जबकि भाई उनकी रक्षा का संकल्प लेते हैं. ऐसे में ग्रहण को लेकर फैली शंकाओं के बीच विद्वानों का कहना है कि श्रद्धालुओं को अनावश्यक भ्रम से बचना चाहिए। 

आज का राशिफल 17 जून: करियर, धन और सेहत के लिहाज से कैसा रहेगा आपका दिन?

मेष 17 जून के दिन आप खुलकर बात करेंगे। मददगार दोस्तों को आकर्षित कर सकते हैं। नई स्किल्स सीखना आपके मन को उत्साहित करेगी। किसी रोमांचक टास्क की जिम्मेदारी लेने से पहले समझदारी से योजना बनाएं। तैयारी आपके लिए नए द्वार खोलती है। वृषभ 17 जून के दिन दिल खोलकर सोचें। आप गहरी रचनात्मकता और कोमल भावनाओं का अनुभव करेंगे। अपनी एनर्जी स्टेबल रखने के लिए कला और आराम के बीच संतुलन बनाए रखें। देखभाल करने वाले दोस्तों के माध्यम से सरप्राइज मिल सकते हैं। मिथुन 17 जून के दिन बड़े सपने देखें। घर और स्कूल की लाइफस्टाइल शांति दिला सकती है। चुनाव करते समय खुद पर भरोसा करें। दयालु कार्य सकारात्मक भावना फैलाते हैं। चुनाव करते समय अपनी भावनाओं पर भरोसा करें। कर्क 17 जून के दिन दोस्तों के साथ मधुर संबंध पूरे दिन खुशियां महसूस कराएंगे। नए विचार उत्साह जगाते हैं। आपकी एनर्जी उच्च स्तर पर है। आज का दिन आपके लिए अच्छा मूड और रोमांच की भावना लेकर आएगा। सिंह 17 जून के दिन आप क्रिएटिव सोच या दिलचस्प बातचीत की ओर आकर्षित हो सकते हैं। आपकी जिज्ञासा आपको नई चीजें आजमाने के लिए मोटिवेट कर सकती है। दोस्तों या सहकर्मियों का सपोर्ट आपको कॉन्फिडेंट महसूस कराता है। कन्या 17 जून के दिन आपको अपनी भावनाओं पर भरोसा करने की जरूरत है। आप शांत पलों में शांति पा सकते हैं। आपके आस-पास के लोग आपकी सलाह ले सकते हैं, और आप दयालुता के साथ उन्हें ज्ञान प्रदान करेंगे। तुला 17 जून के दिन आज बारीकियों पर आपका ध्यान समस्या-समाधान कौशल को निखारता है। आप उन पैटर्न पर ध्यान दे सकते हैं, जो दूसरे लोग अनदेखा कर देते हैं, जिससे समाधान निकलते हैं। आत्मविश्वास और प्रगति के लिए धैर्य बनाए रखे और व्यवस्थित रहें। वृश्चिक 17 जून के दिन शांत रहें, जो सबसे सबसे मायने रखता है, उस पर ध्यान केंद्रित करें और ध्यान भटकाने से बचें। आपका देखभाल करने वाला स्वभाव काम आएगा। आज रिश्तों से जुड़ी समस्याओं का समाधान करें। बेहतर करियर ग्रोथ के लिए प्रोफेशनल मौकों का उपयोग करें। धनु 17 जून के दिन पूरे दिन पॉजिटिव रहेंगे। धैर्य से आप कार्यों, रिश्तों और स्वास्थ्य को आसानी से संभाल पाएंगे और क्लेरिटी लाएंगे। आपकी एनर्जी और सोच-समझकर लिए गए फैसलों के साथ दिन सुचारू रूप से बीतेगा। मकर 17 जून के दिन एक शांत और प्रोडक्टिव वातावरण रहेगा। जैसे-जैसे आप अपनी लाइफस्टाइल में स्टेबल होंगे, आपको छोटी-छोटी सफलता मिलती जाएगी। आपके आस-पास के लोग सहयोगी रहेंगे और आपके प्रयासों की तारीफ की जाएगी। कुंभ 17 जून के दिन पॉजिटिव दृष्टिकोण और व्यवस्थित मन तनाव को दूर रखेगा। आज का दिन आपको प्यार, काम और स्वास्थ्य के मामले में सही डिसीजन लेने में मदद करता है। इमोशनल संतुलन आपके दिन में सुकून और शांति लाता है। अचानक से धन लाभ हो सकता है। मीन 17 जून के दिन नौकरी में उत्पादकता संबंधी समस्याओं पर काबू पाएं। छोटी-मोटी आर्थिक समस्याएं हो सकती हैं और आपका स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। लव लाइफ में समस्याओं को सुलझाएं और अपने साथी के साथ एक्स्ट्रा टाइम स्पेंड करें।  

महाभारत के वो 5 गांव आज कहां हैं और क्या हैं उनके आधुनिक नाम? पूरी जानकारी

 महाभारत की कथा से जुड़ी एक बेहद प्रसिद्ध पंक्ति आपने जरूर सुनी होगी, 'जब भगवान श्रीकृष्ण हस्तिनापुर की सभा में पांडवों के लिए मात्र पांच गांव की मांग करते हैं. लेकिन दुर्योधन अहंकार में आकर वह पांच गांव भी देने से मना कर देता है.' इसके बाद क्या हुआ, यह हम सभी जानते हैं महाभारत का विनाशकारी युद्ध. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज के समय में वे पांच गांव कहां स्थित हैं और उनके नाम क्या हैं? आइए जानते हैं इस रोचक और ऐतिहासिक तथ्य को. जब पांडवों को हस्तिनापुर से निकाला गया था, तब उन्होंने इंद्रप्रस्थ को अपनी राजधानी बनाया था. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इंद्रप्रस्थ पहले खांडवप्रस्थ था, जिसे पांडवों ने विकसित किया था. माना जाता है कि आज की दिल्ली का पुराना किला ही प्राचीन इंद्रप्रस्थ का स्थान है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अनुसार, पुराना किला यमुना नदी के किनारे स्थित था. यहां खुदाई में टेराकोटा के खिलौने और चित्रित मिट्टी के बर्तन मिले हैं, जिनका काल लगभग 1000 ईसा पूर्व माना गया है. ये प्रमाण इंद्रप्रस्थ की ऐतिहासिकता को मजबूत करते हैं. अब बात करते हैं उन पांच गांवों की व्याघ्रप्रस्थ पहला गांव था व्याघ्रप्रस्थ, जिसे आज बागपत के नाम से जाना जाता है. व्याघ्र का अर्थ होता है बाघ, और कहा जाता है कि यहां प्राचीन समय में बाघ पाए जाते थे. इसी स्थान को लाक्षागृह की घटना से भी जोड़ा जाता है, जहां पांडवों को जलाने की साजिश रची गई थी. स्वर्णप्रस्थ दूसरा गांव था स्वर्णप्रस्थ, जिसे आज सोनीपत कहा जाता है. समय के साथ इसका नाम बदलते-बदलते सोनीपत हो गया. यह हरियाणा का एक प्रमुख शहर है. पांडुप्रस्थ तीसरा गांव था पांडुप्रस्थ, जिसे आज पानीपत के नाम से जाना जाता है. यह स्थान नई दिल्ली से लगभग 90 किलोमीटर दूर है और इसके पास ही कुरुक्षेत्र स्थित है, जहां महाभारत का युद्ध हुआ था. तिलप्रस्थ चौथा गांव था तिलप्रस्थ, जिसे आज फरीदाबाद जिले का तिलपत कहा जाता है. यह स्थान बहुत प्राचीन है और यहां से महाभारत काल से भी पहले की सभ्यता के प्रमाण मिले हैं. इन सभी गांवों में तिलपत को सबसे प्राचीन माना जाता है. यह कभी इंद्रप्रस्थ राज्य के अधीन था. कुरुक्षेत्र कुरुक्षेत्र हरियाणा का एक प्रमुख तीर्थस्थल है. यहीं ज्योतिसर में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को भगवद्गीता का उपदेश दिया था. कहा जाता है कि यह पूरा क्षेत्र 48 कोस में फैला हुआ था. इन पांच गांवों के अलावा, महाभारत में सबसे महत्वपूर्ण स्थान हस्तिनापुर को माना जाता है. यह कौरवों की राजधानी थी और पूरा महाभारत इसी के इर्द-गिर्द घूमता है. आज हस्तिनापुर उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में स्थित है और एक प्रमुख तीर्थस्थल के रूप में जाना जाता है. मान्यता है कि एक समय गंगा नदी की भयंकर बाढ़ ने इस पूरे नगर को नष्ट कर दिया था.

चाणक्य नीति: इन 4 बातों में शर्म करना नुकसानदायक

 आचार्य चाणक्य ने न केवल राजनीति और कूटनीति के गुण सिखाए हैं, बल्कि एक सुखी और सफल जीवन जीने के लिए कई व्यावहारिक सुझाव भी दिए हैं.  चाणक्य नीति के अनुसार, व्यक्ति की सबसे बड़ी बाधा उसकी झिझक या शर्म होती है. कई बार हम समाज और लोगों की परवाह में वे काम नहीं कर पाते जो हमारे भविष्य और खुशहाली के लिए अनिवार्य हैं. 1. धन के लेन-देन में स्पष्टता अक्सर लोग पैसे के लेन-देन में शर्म महसूस करते हैं. अगर आपने किसी को उधार दिया है और उसे मांगने में आप संकोच कर रहे हैं, तो यह आपकी आर्थिक स्थिति बिगाड़ सकता है. आचार्य चाणक्य का स्पष्ट मानना है कि अपना पैसा मांगने में कभी शर्म नहीं करनी चाहिए. जो व्यक्ति अपना हक मांगने में हिचकिचाता है, वह धीरे-धीरे अपनी जमा-पूंजी गंवा देता है. 2. भोजन करने में संकोच न करें पुराने समय में माना जाता था कि अतिथि के सामने या किसी के घर पर भोजन करने में अधिक औपचारिकताएं नहीं बरतनी चाहिए. चाणक्य कहते हैं कि भूख लगने पर भोजन मांगने या खाना खाने में कभी शर्म नहीं करनी चाहिए. जो व्यक्ति अपनी भूख छिपाता है, वह खुद को कष्ट ही देता है. एक स्वस्थ शरीर के लिए समय पर भोजन करना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए. 3. सीखने और ज्ञान प्राप्त करने में शर्म ज्ञान का कोई अंत नहीं है. यदि आप किसी नई चीज़ को सीखने के लिए उत्सुक हैं, तो सवाल पूछने में बिल्कुल न झिझकें. चाहे आप अपने से छोटे व्यक्ति से ही क्यों न सीख रहे हों, ज्ञान के मामले में शर्म करने वाला व्यक्ति कभी आगे नहीं बढ़ सकता. जिज्ञासा ही उन्नति का मार्ग है, इसलिए हमेशा सीखते रहें. 4. काम के चुनाव में हिचकिचाहट आज के दौर में कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता. यदि आप मेहनत से अपनी आजीविका चला रहे हैं, तो उसमें शर्म कैसी? चाणक्य का मानना है कि ईमानदारी से किया गया हर काम सम्मान के योग्य है. जो व्यक्ति काम में शर्म करता है, वह कभी आत्मनिर्भर नहीं बन पाता. याद रखें, खाली बैठने से बेहतर है कि आप अपने हुनर और मेहनत पर विश्वास रखें.

वास्तु के अनुसार किस दिशा में सोना है सबसे सही? जानिए पूरा नियम

क्या आपने कभी सोचा है कि सोते समय आपके सिर और पैरों की दिशा क्या होनी चाहिए? हम रोज की जिंदगी में सोते हैं, जागते हैं, खाना खाते हैं और फिर सो जाते हैं. लेकिन अक्सर इस बात पर ध्यान नहीं देते कि हमारी सोने की दिशा भी हमारे स्वास्थ्य और ऊर्जा पर असर डालती है. ज्योतिष और वास्तु शास्त्र का नजरिया ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, जिस दिशा में हम अपने पैर रखते हैं, उसी दिशा में ऊर्जा का प्रवाह होता है. इसलिए सही दिशा में सोना बेहद जरूरी माना गया है. आपको हमेशा अपने सिर को दक्षिण दिशा की ओर और पैरों को उत्तर दिशा की ओर करके सोना चाहिए. इसका कारण यह है कि पृथ्वी की चुंबकीय तरंगें उत्तर से दक्षिण दिशा की ओर प्रवाहित होती हैं. जब हम इसी दिशा के अनुरूप सोते हैं, तो शरीर और प्रकृति के बीच संतुलन बना रहता है. इस दिशा में सोने से सुख-समृद्धि, सेहत और आयु में वृद्धि होती है. वास्तु शास्त्र में दिशाओं के देवताओं का विशेष महत्व है. दक्षिण दिशा को 'यम' (मृत्यु और न्याय के देवता) और 'पितरों' की दिशा माना गया है. वहीं, उत्तर दिशा को 'कुबेर' (धन के देवता) की दिशा माना जाता है. जब हम दक्षिण की तरफ सिर करके सोते हैं, तो हमारे पैर उत्तर यानी कुबेर की दिशा की तरफ होते हैं. शास्त्र कहते हैं कि सोते समय पैरों के जरिए सकारात्मक ऊर्जा शरीर में प्रवेश करती है. कुबेर की दिशा से आने वाली ऊर्जा जब पैरों के माध्यम से शरीर में जाती है, तो यह व्यक्ति की बुद्धि, स्वास्थ्य और समृद्धि को बढ़ाती है. यही कारण है कि इस दिशा में सोने वाले घरों में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती है और अकाल मृत्यु का भय टल जाता है. पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र और हमारा शरीर हमारी पृथ्वी एक बहुत बड़े चुंबक (Giant Magnet) की तरह काम करती है. इसका अपना एक चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) है, जिसमें चुंबकीय तरंगें लगातार उत्तर ध्रुव (North Pole) से दक्षिण ध्रुव (South Pole) की ओर प्रवाहित होती हैं. ठीक इसी तरह, मानव शरीर का भी अपना एक चुंबकीय प्रवाह होता है. हमारा सिर 'उत्तरी ध्रुव' और पैर 'दक्षिणी ध्रुव' की तरह काम करते हैं. तो हमारे शरीर का चुंबकीय प्रवाह और पृथ्वी का चुंबकीय प्रवाह एक ही दिशा में आ जाते हैं. इससे प्रकृति और शरीर के बीच एक बेहतरीन संतुलन (Harmony) बनता है. इस दिशा में सोने से हमारे शरीर का ब्लड सर्कुलेशन (रक्त प्रवाह) बिल्कुल सामान्य रहता है. दिल पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता, जिससे हार्ट हेल्थ अच्छी रहती है और सुबह उठने पर व्यक्ति खुद को ऊर्जावान महसूस करता है. गलत दिशा में सोने के गंभीर नुकसान यदि आप इसके विपरीत, यानी उत्तर दिशा में सिर करके सोते हैं, तो विज्ञान और वास्तु दोनों इसे बेहद खतरनाक मानते हैं. जब शरीर का उत्तरी ध्रुव (सिर) और पृथ्वी का उत्तरी ध्रुव एक साथ आते हैं, तो वे एक-दूसरे को ढकेलते हैं . इस खिंचाव के कारण शरीर का खून दिमाग की तरफ तेजी से भागता है. चूंकि दिमाग की नसें बहुत पतली होती हैं, इसलिए इस दिशा में लंबे समय तक सोने से अनिद्रा, डरावने सपने आना, लगातार सिरदर्द, चिड़चिड़ापन और भविष्य में ब्रेन हैमरेज या पैरालिसिस जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. जीवन में सफलता का आधार है 'सही नींद' आप जीवन में कितना कमाएंगे, आपका करियर कैसा रहेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपका दिमाग कितना शांत और एक्टिव है. दक्षिण दिशा में सिर रखकर सोने से मिलने वाली गहरी नींद (Deep Sleep) आपके मानसिक तनाव को जड़ से खत्म करती है. जब आप सुबह बिना किसी भारीपन के उठते हैं, तो आपकी कार्यक्षमता (Productivity) दोगुनी हो जाती है.

गुरु का पुष्य नक्षत्र गोचर, 4 राशियों की बदलेगी किस्मत

 18 जून 2026 को देवगुरु बृहस्पति का शनि के स्वामित्व वाले पुष्य नक्षत्र में प्रवेश ज्योतिषीय दृष्टिकोण से एक बेहद महत्वपूर्ण घटना है. पुष्य को नक्षत्रों का राजा माना जाता है, जो पोषण, समृद्धि और विकास का प्रतीक है. गुरु और पुष्य नक्षत्र का यह संयोग कई राशियों के लिए भाग्य के द्वार खोलने वाला साबित होगा. पुष्य नक्षत्र में गुरु का गोचर शुभ कार्यों, निवेश और नए बदलावों के लिए एक अत्यंत पवित्र समय माना जाता है. इन चार राशियों के जातकों को इस सकारात्मक ऊर्जा का लाभ उठाने के लिए अपने प्रयासों को और तेज कर देना चाहिए. इस गोचर से मुख्य रूप से 4 राशियों के जीवन में बड़ा और सकारात्मक बदलाव आने की संभावना है. आइए जानते हैं वे भाग्यशाली राशियां कौन सी हैं. मेष राशि (Aries) गुरु का यह नक्षत्र परिवर्तन मेष राशि के जातकों के लिए आर्थिक और व्यावसायिक मोर्चे पर सुनहरे अवसर लेकर आएगा. नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या नई नौकरी के बेहतरीन ऑफर मिल सकते हैं. व्यावसायिक क्षेत्र में अटके हुए काम तेजी से पूरे होंगे. आय के नए स्रोत बनेंगे. पुराना फंसा हुआ धन वापस मिल सकता है. निवेश के लिए यह समय बेहद अनुकूल है. समाज और कार्यस्थल पर आपकी प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी. मिथुन राशि (Gemini) मिथुन राशि वालों के लिए यह गोचर मानसिक शांति और पारिवारिक खुशहाली लेकर आ रहा है. परिवार में चल रहे आपसी मतभेद समाप्त होंगे और सौहार्द बढ़ेगा. मांगलिक कार्यों का आयोजन हो सकता है. छात्रों और ज्ञानार्जन से जुड़े लोगों के लिए यह समय वरदान साबित होगा. आपकी निर्णय क्षमता और बौद्धिक कौशल की सराहना होगी. लंबे समय से चली आ रही किसी स्वास्थ्य समस्या से राहत मिलने के योग हैं. सिंह राशि (Leo) सिंह राशि के जातकों के लिए गुरु का पुष्य नक्षत्र में जाना भाग्य में वृद्धि और आत्मविश्वास की सौगात लाएगा. लंबे समय से रुके हुए प्रोजेक्ट्स और सरकारी काम इस अवधि में बिना किसी बाधा के पूरे हो जाएंगे. आपका झुकाव धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों की तरफ बढ़ेगा, जिससे मानसिक सुकून मिलेगा. व्यापार या शिक्षा के सिलसिले में की गई यात्राएं अत्यधिक लाभकारी और सुखद रहेंगी. तुला राशि (Libra) तुला राशि वालों के लिए यह गोचर भौतिक सुख-सुविधाओं और करियर में स्थिरता लाने वाला रहेगा. नया मकान, जमीन या वाहन खरीदने के प्रबल योग बन रहे हैं. पैतृक संपत्ति से भी लाभ हो सकता है. यदि आप बिजनेस पार्टनरशिप में हैं, तो आपसी तालमेल बेहतर होगा और मुनाफा बढ़ेगा. जीवनसाथी के साथ रिश्ते मजबूत होंगे और उनका भरपूर सहयोग मिलेगा.

सूर्य का आर्द्रा नक्षत्र गोचर, 4 राशियों की चमकेगी किस्मत

ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के राजा सूर्य देव का नक्षत्र परिवर्तन एक बेहद महत्वपूर्ण घटना माना जाता है. द्रिक पंचांग के अनुसार, 22 जून 2026, दिन सोमवार को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट पर सूर्य देव मृगशिरा नक्षत्र से निकलकर राहु के नक्षत्र आर्द्रा में प्रवेश करने जा रहे हैं. सूर्य का आर्द्रा नक्षत्र में जाना 'मकर संक्रांति' की तरह ही बेहद खास माना जाता है, क्योंकि इसी दिन से वर्षा ऋतु की औपचारिक शुरुआत भी होती है. राहु के नक्षत्र में सूर्य का यह गोचर सभी 12 राशियों पर गहरा असर डालेगा, लेकिन 4 विशेष राशियां ऐसी हैं जिनके लिए यह गोचर किसी वरदान से कम नहीं होने वाला है. इस दौरान इन राशियों को भाग्य का भरपूर साथ मिलेगा और करियर से लेकर आर्थिक स्थिति में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है. मेष राशि (Aries) मेष राशि के जातकों के लिए सूर्य का यह गोचर बेहद शुभ रहने वाला है. आपके पराक्रम और साहस में वृद्धि होगी. करियर: कार्यक्षेत्र में आपकी लीडरशिप क्वालिटी की सराहना होगी. सीनियर अधिकारियों का पूरा सहयोग मिलेगा. आर्थिक लाभ: अटके हुए काम पूरे होने से धन लाभ के योग बनेंगे. निवेश के लिए यह समय उत्तम है. मिथुन राशि (Gemini) चूंकि सूर्य आपकी ही राशि में गोचर करते हुए आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे, इसलिए इसका सीधा और सकारात्मक प्रभाव आपके व्यक्तित्व पर दिखेगा. मान-सम्मान: समाज और कार्यक्षेत्र में आपका मान-सम्मान बढ़ेगा. आपकी वाणी का प्रभाव लोगों पर पड़ेगा. भाग्य का साथ: जो काम लंबे समय से रुके हुए थे, वे अचानक गति पकड़ेंगे. कारोबारी यात्राएं लाभदायक सिद्ध होंगी. सिंह राशि (Leo) सूर्य आपकी राशि के स्वामी हैं, इसलिए आपके लिए यह नक्षत्र परिवर्तन विशेष रूप से फलदायी होने जा रहा है. आर्थिक पक्ष: आपकी आमदनी के स्रोतों में वृद्धि होगी. पुराना कर्ज चुकाने में आप सफल रहेंगे. सफलता: नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति (Promotion) या इंक्रीमेंट की खुशखबरी मिल सकती है. सरकारी क्षेत्रों से जुड़े कामों में बड़ी सफलता हाथ लगेगी. धनु राशि (Sagittarius) धनु राशि के जातकों के लिए सूर्य का आर्द्रा नक्षत्र में आना भाग्य के द्वार खोलने जैसा होगा. वैवाहिक जीवन व साझेदारी: व्यापार में नए पार्टनर्स जुड़ सकते हैं, जिससे भविष्य में बड़ा मुनाफा होगा. जीवनसाथी के साथ रिश्ते मजबूत होंगे. भाग्य का सहयोग: किस्मत का पूरा साथ मिलने से आपके सोचे हुए प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे होंगे. पैतृक संपत्ति से भी लाभ होने के संकेत हैं.

वास्तु के अनुसार घर के लिए शुभ पौधे और सही दिशा

 वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के भीतर पेड़-पौधों का सही चयन जीवन में खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा लाता है. सही दिशा में रखे गए पौधे न केवल घर के वातावरण को शुद्ध रखते हैं, बल्कि सुख, समृद्धि और अच्छी सेहत का भी प्रतीक माने जाते हैं. घर के लिए सबसे शुभ पौधे और उनकी दिशा तुलसी (Tulsi): इसे घर में सबसे पवित्र माना जाता है. इसे हमेशा उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में रखना चाहिए.  इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. मनी प्लांट (Money Plant): आर्थिक उन्नति के लिए इसे दक्षिण-पूर्व दिशा में रखना सबसे अच्छा माना जाता है. यह धन के नए स्रोत खोलता है. लकी बैम्बू (Lucky Bamboo): सौभाग्य के लिए इसे पूर्व या दक्षिण-पूर्व दिशा में रखें. यह घर के सदस्यों की समृद्धि बढ़ाता है. स्नेक प्लांट (Snake Plant): यह पौधा हवा को शुद्ध करता है और तनाव दूर करता है. इसे दक्षिण या दक्षिण-पूर्व दिशा में रखने से लाभ होता है. जेड प्लांट (Jade Plant): यदि आप इसे घर के प्रवेश द्वार पर (पूर्व दिशा में) रखते हैं, तो यह व्यापार और सफलता को आकर्षित करता है. एलोवेरा (Aloe Vera): स्वास्थ्य और शांति के लिए इसे पूर्व या उत्तर दिशा में लगाना चाहिए. अरेका पाम (Areca Palm): इसे उत्तर या पूर्व दिशा में रखने से घर में शांति और ताज़गी बनी रहती है. पीस लिली (Peace Lily): घर में शांति और प्यार के लिए इसे बेडरूम की खिड़की के पास रखना बहुत शुभ है. किन पौधों से बचें? वास्तु शास्त्र कुछ पौधों को घर के लिए नकारात्मक मानता है. कांटेदार पौधे (जैसे कैक्टस) से घर के भीतर तनाव पैदा हो सकता है.  इसी तरह, बोनसाई (Bonsai) पौधे प्रगति में बाधक माने जाते हैं, इसलिए इन्हें घर में लगाने से परहेज करना चाहिए. कॉटन प्लांट और इमली जैसे पौधों को भी वास्तु के अनुसार घर के अंदर नहीं लगाना चाहिए. पौधों की देखभाल के जरूरी टिप्स वास्तु का लाभ तभी मिलता है जब पौधे स्वस्थ हों. हमेशा सुनिश्चित करें कि गमलों के आसपास सफाई रहे और कोई भी पौधा सूखने न पाए. यदि कोई पौधा मुरझा गया है, तो उसे तुरंत हटा दें, क्योंकि मृत पौधे नकारात्मकता फैलाते हैं. इसके अलावा, पौधों को सही दिशा में रखने के साथ-साथ उन्हें पर्याप्त धूप और पानी देना भी जरूरी है.