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Vastu Tips: घर में ड्रेसिंग और डाइनिंग टेबल कहां रखें? जानें सही दिशा और जरूरी नियम

 घर को सजाते समय हम अक्सर फर्नीचर के डिजाइन और उसकी सुविधा पर ध्यान देते हैं, लेकिन वास्तु शास्त्र में सामान की दिशा और जगह को भी महत्वपूर्ण माना गया है. मान्यता है कि घर में रखी चीजों की सही जगह से सकारात्मक माहौल बना रहता है. खासतौर पर ड्रेसिंग टेबल और डाइनिंग टेबल को लेकर वास्तु में कुछ नियम बताए गए हैं. आइए जानते हैं इन दोनों को घर में किस दिशा और जगह पर रखना शुभ माना जाता है. ड्रेसिंग टेबल के लिए कौन सी दिशा शुभ? वास्तु मान्यताओं के अनुसार ड्रेसिंग टेबल को उत्तर या पूर्व दिशा में रखना अच्छा माना जाता है.  ड्रेसिंग टेबल में लगा आईना कमरे में रोशनी को प्रतिबिंबित करता है, इसलिए इसे रखने की जगह पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है. अगर ड्रेसिंग टेबल को बेडरूम में रखा जा रहा है तो कोशिश करें कि वह ऐसी जगह हो जहां कमरे में आने-जाने में परेशानी न हो.  साथ ही आईने की स्थिति भी सही रखें. बेड के सामने आईना क्यों न लगाने की सलाह? वास्तु शास्त्र में बेड के ठीक सामने आईना लगाने से बचने की सलाह दी जाती है.  मान्यता है कि सोते समय आईने में व्यक्ति का प्रतिबिंब दिखाई देने से कमरे की ऊर्जा प्रभावित हो सकती है. अगर कमरे की जगह ऐसी है कि आईने को बेड के सामने से हटाना संभव नहीं है तो रात में इसे कपड़े से ढकने की सलाह दी जाती है.  यह वास्तु से जुड़ी पारंपरिक मान्यता है.   ड्रेसिंग टेबल दरवाजे के सामने न रखें ड्रेसिंग टेबल को कमरे के दरवाजे के बिल्कुल सामने रखने से भी बचने की सलाह दी जाती है.  इसका एक व्यावहारिक कारण भी है, दरवाजा खोलने-बंद करने और कमरे में आने-जाने के दौरान रास्ता बाधित हो सकता है. इसलिए ड्रेसिंग टेबल ऐसी जगह रखना बेहतर है जहां आईने के साथ-साथ कमरे में पर्याप्त खुली जगह भी बनी रहे. डाइनिंग टेबल किस दिशा में रखें? वास्तु के अनुसार डाइनिंग टेबल के लिए पश्चिम दिशा को अनुकूल माना जाता है.  इसके अलावा उत्तर-पश्चिम दिशा में भी डाइनिंग एरिया बनाया जा सकता है. डाइनिंग एरिया का उद्देश्य केवल खाना खाने तक सीमित नहीं होता.  परिवार के लोग यहां साथ बैठकर भोजन करते हैं और बातचीत भी करते हैं.  इसलिए वास्तु मान्यताओं के साथ-साथ यह भी जरूरी है कि जगह आरामदायक और हवादार हो. डाइनिंग टेबल मुख्य दरवाजे के ठीक सामने न रखें वास्तु मान्यताओं के अनुसार डाइनिंग टेबल को घर के मुख्य प्रवेश द्वार के बिल्कुल सामने रखने से बचना चाहिए.  इसी तरह इसे पूजा स्थान के ठीक सामने रखना भी उचित नहीं माना जाता. व्यावहारिक रूप से भी डाइनिंग टेबल को प्रवेश द्वार से थोड़ा अलग रखना बेहतर होता है, ताकि घर में आने-जाने वालों के लिए पर्याप्त जगह बनी रहे. डाइनिंग टेबल का आकार भी रखें ध्यान डाइनिंग टेबल चुनते समय कमरे के आकार का ध्यान रखना जरूरी है.  बहुत बड़ी टेबल छोटे कमरे में रखने से जगह कम हो सकती है और लोगों के बैठने में परेशानी हो सकती है. वास्तु की मान्यताओं में डाइनिंग टेबल के लिए व्यवस्थित और साफ जगह रखने पर जोर दिया जाता है.  इसलिए टेबल पर अनावश्यक सामान जमा करने से बचें और भोजन के बाद इसे साफ रखें. आईने और डाइनिंग एरिया की साफ-सफाई जरूरी वास्तु से जुड़ी मान्यताओं में साफ-सफाई को विशेष महत्व दिया जाता है.  ड्रेसिंग टेबल का आईना साफ रखें, उसके आसपास सामान बिखरा हुआ न छोड़ें.  इसी तरह डाइनिंग टेबल पर लंबे समय तक गंदे बर्तन या बचा हुआ खाना रखने से बचना चाहिए. इसका फायदा व्यावहारिक रूप से भी है. फर्नीचर रखते समय इन बातों का भी ध्यान दें ड्रेसिंग और डाइनिंग टेबल की दिशा के अलावा घर में फर्नीचर रखते समय कुछ सामान्य बातों का ध्यान रखा जा सकता है.  फर्नीचर ऐसा न हो कि कमरे की आवाजाही बाधित हो.  खिड़कियों और दरवाजों के सामने अनावश्यक सामान रखने से बचें. घर के किसी हिस्से में बहुत ज्यादा सामान जमा करने के बजाय खुली जगह बनाए रखना भी बेहतर होता है.  इससे कमरे में प्राकृतिक रोशनी और हवा का प्रवाह बना रहता है. वास्तु में दिशा का क्यों है महत्व? वास्तु शास्त्र में घर की अलग-अलग दिशाओं को अलग-अलग तत्वों और ऊर्जाओं से जोड़कर देखा जाता है.  इसी आधार पर फर्नीचर और दूसरी वस्तुओं को रखने की दिशाओं के बारे में मान्यताएं बताई गई हैं. हालांकि, इन नियमों को धार्मिक और पारंपरिक मान्यता के रूप में देखना चाहिए.  ड्रेसिंग या डाइनिंग टेबल की किसी खास दिशा में रखने से सुख-समृद्धि या परेशानी निश्चित रूप से बढ़ती या घटती है.

पितृ पक्ष में खरीदारी से बचें! इन 5 चीजों को घर लाना माना जाता है अशुभ

 हिंदू धर्म में आश्विन माह का कृष्ण पक्ष हमारे पूर्वजों को समर्पित पितृ पक्ष के रूप में मनाया जाता है. इस दौरान पितरों की आत्मा की तृप्ति के लिए तर्पण, पिंडदान, ब्राह्मण भोजन और दान-पुण्य करने की समृद्ध परंपरा है. ज्योतिष और शास्त्रों के अनुसार, यह 16 दिनों की अवधि पूर्णतः संयम, सादगी और आत्म-स्मरण का समय होती है. मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान नई या भौतिक सुख-सुविधाओं की खरीदारी करना शुभ नहीं माना जाता है. ऐसा कहा जाता है कि इस समय अनजाने में खरीदी गई कुछ विशेष वस्तुएं घर में वास्तु दोष और आर्थिक तंगी का कारण बन सकती हैं. आइए जानते हैं कि पितृ पक्ष के दौरान किन 5 प्रमुख चीजों को घर लाने से बचना चाहिए. नए कपड़े और सोने-चांदी के गहने (New Clothes and Jewellery) पितृ पक्ष का समय किसी प्रकार का जश्न या उत्सव मनाने का नहीं, बल्कि पितरों के प्रति शोक, कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त करने का होता है. इस अवधि में स्वयं के उपयोग के लिए नए वस्त्र, सोने-चांदी के आभूषण या फैशनेबल वस्तुएं खरीदने से घर की सुख-समृद्धि प्रभावित हो सकती है. हालांकि, यदि आप पितरों के तर्पण, ब्राह्मणों या गरीबों को दान करने के उद्देश्य से वस्त्र खरीदते हैं, तो वह वर्जित नहीं है. नया वाहन और प्रॉपर्टी (Vehicle and Property) नई कार, बाइक, नया घर, दुकान या जमीन की खरीदारी को जीवन में किसी नए व शुभ कार्य की शुरुआत माना जाता है. श्राद्ध पक्ष में नए काम या अचल संपत्ति का सौदा करने से बचना चाहिए. मान्यता है कि इस समय संपत्ति में निवेश करने से उस स्थान या वाहन से पूर्ण शुभ फल प्राप्त नहीं होते हैं. नई झाड़ू (Broom) वास्तु और शास्त्रों में झाड़ू का सीधा संबंध धन की देवी मां लक्ष्मी से माना गया है. पितृ पक्ष के दौरान नई झाड़ू खरीदकर घर लाने की सख्त मनाही होती है. ऐसा माना जाता है कि श्राद्ध के दिनों में झाड़ू की खरीदारी करने से घर की बरकत रुक जाती है और अनचाहे खर्चे बढ़ने लगते हैं. लोहा और लोहे के सामान (Iron Items) ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पितृ कार्य में लोहे के बर्तनों या धातु का प्रयोग और इसकी खरीदारी दोनों ही शुभ नहीं माने जाते है. श्राद्ध पक्ष में लोहा या लोहे से बनी नई वस्तुएं घर लाने से जीवन में मानसिक तनाव और परेशानियां बढ़ सकती हैं. इलेक्ट्रॉनिक्स और नया फर्नीचर (Electronics and Furniture) नया टीवी, फ्रिज, सोफा, बेड या घर की सजावट का सामान भौतिक विलासिता (Luxury) को दर्शाता है. चूंकि, यह समय सादगी का है, इसलिए इस दौरान घर के लिए विलासिता से जुड़े उपकरण खरीदना वर्जित माना गया है. कब मनाई सर्वपितृ अमावस्या? इस वर्ष पितृ पक्ष का समापन 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा. जिन पूर्वजों की मृत्यु की सटीक तिथि ज्ञात न हो, उनका श्राद्ध अमावस्या के दिन किया जाना अत्यंत फलदायी माना जाता है.  

45 दिन बेहद खास! मंगल गोचर से इन 5 राशियों को करियर-धन में लाभ के योग

द्रिक ज्योतिष में मंगल ग्रह को ऊर्जा, साहस, पराक्रम, भूमि और भाई का कारक माना जाता है. जब भी मंगल अपनी राशि बदलते हैं, तो जातकों के जीवन में उत्साह और कार्यक्षमता पर सीधा प्रभाव पड़ता है. ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, ऊर्जा के कारक मंगल देव जल्द ही अपनी नीच राशि कर्क में प्रवेश करने जा रहे हैं, जहां वे अगले 45 दिनों तक विराजमान रहेंगे. मंगल का यह राशि परिवर्तन कई राशियों के लिए विशेष रूप से फलदायी साबित होगा. इन 45 दिनों के दौरान विशेष तौर पर 5 भाग्यशाली राशियों को करियर, व्यापार, संपत्ति और आर्थिक मामलों में बंपर लाभ मिलने के योग बन रहे हैं. आइए जानते हैं कि मंगल के इस गोचर से किन राशियों के दिन बदलने वाले हैं: मेष राशि (Aries) मंगल आपकी राशि के स्वामी हैं, ऐसे में कर्क राशि में उनका गोचर आपके लिए अड़चनों को दूर करने वाला साबित होगा. यदि आप लंबे समय से कोई नया मकान, जमीन या वाहन खरीदने का विचार कर रहे थे, तो इन 45 दिनों में आपकी यह इच्छा पूरी हो सकती है. कार्यक्षेत्र में आपके साहस और नेतृत्व क्षमता की सराहना होगी, जिससे अधिकारी वर्ग आपसे प्रसन्न रहेगा. वृषभ राशि (Taurus) वृषभ राशि के जातकों के लिए मंगल का यह गोचर संवाद और पराक्रम भाव को मजबूत करेगा, जिससे आपके संपर्कों का दायरा बढ़ेगा. व्यापार से जुड़े लोगों को नई साझेदारियों (Partnership) से जबरदस्त मुनाफा मिल सकता है. भाई-बहनों के सहयोग से कोई अटका हुआ पुराना काम पटरी पर आ जाएगा. सामाजिक मान-सम्मान में वृद्धि होगी और आर्थिक पक्ष मजबूत होगा. कर्क राशि (Cancer) मंगल आपकी ही राशि में गोचर कर रहे हैं, इसलिए आपके भीतर गजब की ऊर्जा और मानसिक दृढ़ता देखने को मिलेगी. नौकरीपेशा लोगों को कार्यक्षेत्र में कोई बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है. आपके फैसलों की लोग तारीफ करेंगे. हालांकि इस दौरान स्वभाव में थोड़ा उग्रपन आ सकता है, इसलिए धैर्य से काम लें. वैवाहिक जीवन में प्रेम और समझदारी बढ़ेगी. वृश्चिक राशि (Scorpio) मंगल आपकी राशि के भी स्वामी हैं. कर्क राशि में उनका गोचर आपके भाग्य स्थान को प्रभावित करेगा, जिससे किस्मत हर कदम पर आपका साथ देगी. प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों या उच्च शिक्षा की इच्छा रखने वालों के लिए यह 45 दिन बेहद अनुकूल रहेंगे. धार्मिक कार्यों में मन लगेगा और लंबी दूरी की यात्राएं लाभदायक साबित होंगी. लंबे समय से रुके हुए सरकारी काम भी आसानी से पूरे हो जाएंगे. मीन राशि (Pisces) मीन राशि के जातकों के लिए मंगल का यह गोचर आय के नए स्रोत खोलने के साथ-साथ रचनात्मक क्षेत्रों में बड़ी सफलता दिलाएगा. शेयर बाजार, पैतृक संपत्ति या पुराने निवेश से अचानक बड़ा वित्तीय लाभ मिल सकता है. संतान पक्ष से कोई सुखद समाचार मिलने से घर में उल्लास का माहौल रहेगा. आपके सोचे हुए सभी कार्य समय पर पूरे होंगे.

Aaj Ka Rashifal: 30 सितंबर को इन राशियों को मिलेगा लाभ, जानें सभी 12 राशियों का हाल

मेष आज मेष राशि वाले धन के मामले में अपने रिसोर्सेज को बेहतर मैनेज करने पर फोकस करें। संतुलित जीवनशैली बनाए रखें। सफलता मिलेगी। तनाव को प्रभावी ढंग से मैनेज करते हुए अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दें। वृषभ आज नए अवसरों की खोज करने और मौजूदा रिश्तों को मजबूत करने का दिन है। प्यार में आपको अपने साथी से जुड़ने के नए तरीके मिल सकते हैं। आपका करियर रोमांचक संभावनाओं से भरपूर रहेगा, जो आपके लक्ष्यों के अनुसार हैं। मिथुन आज सेहत को प्राथमिकता देना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह आपके दिन के अन्य पहलुओं को पॉजिटिव रूप से प्रभावित कर सकता है। नए अवसरों के लिए खुले रहें और खुद पर भरोसा करें। कर्क आज आपको अप्रत्याशित स्थानों पर सफलता मिलने की संभावना है। एक प्रोडक्टिव दिन के लिए अपनी फीलिंग्स और व्यावहारिक मामलों पर फोकस करें। सिंह आज का दिन आपके जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में पर्सनल ग्रोथ का अवसर प्रदान करता है। आप अपने रिलेशन पर विचार करते हुए, अपने करियर में महत्वपूर्ण प्रगति करते हुए और अपने धन को प्रभावी ढंग से मैनेज करते हुए पा सकते हैं। कन्या आज प्रगति की सोच को अपनाएं। आज की एनर्जी आपको अपने जीवन के विभिन्न पहलुओं में समझ और संतुलन की तलाश करने के लिए मोटिवेट करती है। आपको प्रोफेशनल व पर्सनल प्रयासों में विकास के अवसर मिल सकते हैं। तुला आज का दिन आपके जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में विकास की संभावनाओं से भरा हुआ है। आपको अपने जीवन में नए अवसर मिल सकते हैं। बदलावों के प्रति खुले रहें, संतुलन बनाए रखने पर ध्यान दें। वृश्चिक वृश्चिक राशि के लोग खुद को ऐसी सिचूऐशन में पा सकते हैं, जिनमें सोच और जरूरी फैसले लेने की आवश्यकता होती है। पर्सनल व प्रोफेशनल ग्रोथ के अवसर मौजूद हैं, लेकिन अपनी सेहत को प्राथमिकता देना महत्वपूर्ण है। धनु आज का दिन आपको अपने जीवन के विभिन्न पहलुओं में विकास के अवसरों की तलाश करने के लिए मोटिवेट करता है। प्यार में, कनेक्शन को गहरा करने पर फोकस करें। करियर के लिहाज से, सपोर्ट व गोल्स पर ध्यान दें। मकर आज खुद पर भरोसा करें और परिवर्तन के अनुकूल बने रहें। आर्थिक रूप से, सावधानी से डिसीजन लेना फायदेमंद रहेगा। अपनी दिनचर्या में सावधानी मेंटेन करते हुए अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दें। कुंभ आज रिलेशन में बातचीत और वित्तीय मैनेजमेंट पर ध्यान देने से पॉजिटिव परिणाम मिल सकते हैं। चुनौतियों को कॉन्फिडेंस के साथ स्वीकार करें। जरूरत पड़ने पर विश्वसनीय स्रोतों से सलाह लेने में संकोच न करें। मीन आर्थिक रूप से, यह सतर्क लेकिन पॉजिटिव रहने का दिन है। तनाव को कम करने और सेहत को बेहतर बनाने वाले अभ्यासों से आपके स्वास्थ्य को लाभ हो सकता है। दिन को पॉजिटिव सोच के साथ शुरू करें।

पितृपक्ष में दोपहर को ही क्यों किया जाता है श्राद्ध? जानें शास्त्रों में बताई वजह

पितृपक्ष चल रहा है. यह समय पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का समय माना जाता है. इन दिनों पितरों के निमित्त तर्पण और श्राद्ध करने की परंपरा है. मान्यता है कि जिस तिथि को व्यक्ति का निधन हुआ हो, उसी तिथि पर उसका श्राद्ध करना चाहिए. अगर मृत्यु तिथि की जानकारी न हो तो अमावस्या के दिन श्राद्ध किया जा सकता है. आमतौर पर आपने देखा होगा कि ज्यादातर लोग दोपहर के समय ही श्राद्ध करते हैं. क्या आप जानते हैं कि पितरों का श्राद्ध दोपहर के वक्त करना क्यों श्रेष्ठ होता है. क्यों दोपहर को किया जाता है श्राद्ध? शास्त्रीय मान्यता के अनुसार, अलग-अलग समय को अलग-अलग कार्यों से जोड़ा गया है. सुबह और शाम का समय देव कार्यों के लिए उत्तम माना गया है. जबकि घोर अंधकार को आसुरी और नकारात्मक शक्तियों की सक्रियता से जोड़ा जाता है. वहीं दोपहर का समय पितरों को समर्पित माना गया है. इसलिए पितृपक्ष में लोग इसी पहर में श्राद्धकर्म करना उत्तम मानते हैं. इसके अलावा, शास्त्रों में पितृ लोक को मृत्युलोक और देवलोक के बीच तथा चंद्रमा के ऊपर स्थित बताया गया है. दिन का मध्य समय पितरों को समर्पित होने के कारण ही उन्हें इस पहर में भोजन अर्पित किया जाता है. सूर्य की किरणों से भोजन ग्रहण श्राद्ध भोज दोपहर में कराने के पीछे एक अन्य लोक मान्यता भी प्रचलित है. कहते हैं कि सूर्य देव पूर्व दिशा से उदित होते हैं और दोपहर तक आकाश के मध्य में पहुंच जाते हैं. पृथ्वी लोक पर पितृ सूर्य की किरणों के माध्यम से श्राद्ध में अर्पित भोजन ग्रहण करते हैं. इसी वजह से दोपहर के समय को श्राद्ध के लिए उपयुक्त माना जाता है. पितृपक्ष में श्राद्ध करने की सही विधि क्या है? पितृपक्ष में तिथिनुसार श्राद्ध वाले दिन घर की दक्षिण दिशा में पितरों के निमित्त पूजा करें. तिल मिले जल से तर्पण दें. पिंडदान करें और कुश के आसन पर बैठकर पितरों की शांति के लिए प्रार्थना करें. इसके बाद श्रद्धापूर्वक ब्राह्मण को सात्विक भोजन कराएं. इस दौरान गाय, कौवा, कुत्ता और चींटी के लिए भी अलग से भोजन निकालकर रखें, जिसे पंचबलि कहा जाता है. भोजन में प्याज-लहसुन का प्रयोग न करें. भोजन के बाद वस्त्र और दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद लें. अंत में पितरों से हुई किसी भूल के लिए क्षमा मांगें और शाम को दक्षिण दिशा में सरसों के तेल का दीपक जलाएं.

मंगलवार को चमकेगा इन राशियों का भाग्य, करियर में मिल सकती है बड़ी सफलता

मेष आपको सेल्फ लव पर फोकस करना चाहिए। दिन मिला-जुला रहने वाला है। आपको मेहनत का पूरा फल मिलेगा। मान-सम्मान बढ़ेगा। पैसों के लेन-देन से बचें। शादीशुदा लोगों की जिंदगी में खुशियां रहेंगी। वृषभ गुस्से और वाणी पर काबू रखें। आज के दिन पारिवारिक जीवन सुखद रहेगा। आज सेहत का खास ख्याल रखने की जरूरत है। शाम तक सुख- सुविधाओं से जुड़ी चीजों में पैसे खर्च हो सकते हैं। मिथुन आज दिन खत्म होते-होते आपको मनचाहा लाभ मिल सकता है। शुरुआत में नौकरी करने वाले जातकों पर काम का दवाब रहेगा। आज के दिन आपको सफल होने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है। कर्क आज के दिन आपके आय के साधन में वृद्धि होगी। व्यापारियों को मन चाहा लाभ होगा। परिश्रम का पूरा फल मिलेगा। दिन के मध्य में नौकरी करने वाले जातकों को नए अवसर मिलेंगे। सिंह आज के दिन आपका आर्थिक बजट बिगड़ सकता है। आप संतान की किसी बात से परेशान रहेंगे। दिन के मध्य में किसी विशेष काम में आपको सफलता मिल सकती है। आज दिन शुभ समाचार लेकर आ सकता है। कन्या आज किस्मत चमक सकती है। काम के दौरान आपको मनचाही सफलता हासिल होगी। रुके हुए कार्य पूरे होंगे। आज दोपहर में किसी विशेष व्यक्ति से मुलाकात हो सकती है। विवाहित जातकों की लव लाइफ अच्छी रहेगी। तुला आज सुख-सुविधा से जुड़ी किसी चीज में पैसे खर्च हो सकते हैं। दिन की शुरुआत में खर्चों का सामना करना पड़ सकता है। मन में नकारात्मक विचारों का प्रभाव भी हो सकता है। वृश्चिक किसी काम में लापरवाही करने से बचना चाहिए। नौकरी पेशा करने वाले जातकों को गुप्त शत्रुओं से बचना चाहिए। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले जातकों के लिए यह दिन शुभ साबित हो सकता है। धनु आज आपको कुछ बड़े खर्चों का सामना करना पड़ सकता है। शुरुआत में कुछ बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। छात्रों का मन पढ़ाई से उचट सकता है। परिवार के सदस्यों के बीच मतभेद हो सकते हैं। मकर आज उतार-चढ़ाव भरा दिन साबित हो सकता है। नौकरी करने वाले जातकों को नौकरी के नए अवसर मिल सकते हैं। कार्यस्थल पर प्रमोशन मिल सकता है। दिन के मध्य में गुप्त शत्रुओं से बचकर रहने की जरूरत है। कुंभ आज का दिन कुछ बड़े खर्चे लेकर आ सकता है। जिससे आपका आर्थिक बजट हिल सकता है। आज समय और धन दोनों को सोच-समझकर खर्च करें। शारीरिक व मानसिक रूप से परेशान हो सकते हैं। मीन आज का दिन आपके लिए मिले-जुले परिणाम लेकर आया है। काम के सिलसिले में ट्रैवल करना पड़ सकता है। दिन की शुरुआत में कुछ चुनौतियों आएंगी, जिनका सामना करना पड़ सकता है।

इस गुफा में आज भी मौजूद है गणेश जी का कटा हुआ सिर? जानें पाताल भुवनेश्वर का रहस्य

इस रहस्यमयी गुफा में लाखों साल से महादेव द्वारा काटा गया गणेश जी का सिर आज भी मौजूद होने की मान्यता है. यह जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे. क्या आप जानते हैं कि एक बार भगवान शिव ने क्रोध में आकर अपने ही पुत्र गणेश का सिर धड़ से अलग कर दिया था? हालांकि, इसके बाद उन्होंने हाथी का सिर उनके धड़ पर लगाकर उन्हें पुनः जीवित कर दिया था. लेकिन सवाल यह है कि भगवान शिव द्वारा काटा गया गणेश जी का वह सिर आखिर गया कहां और आज कहां मौजूद है? इस रहस्य को जानने से पहले आपको बताते हैं कि इस पूरी घटना की शुरुआत कैसे हुई. प्रचलित कथा के अनुसार, भगवान गणेश का सृजन माता पार्वती ने अपने हाथों से किया था. कथा के मुताबिक, एक दिन माता पार्वती स्नान करने जा रही थीं. उन्होंने अपने उबटन से एक बालक की आकृति बनाई और उसमें अपनी शक्तियों से प्राण प्रतिष्ठित किए. इस तरह एक बालक का जन्म हुआ, जिसका नाम माता पार्वती ने गणेश रखा था. माता पार्वती ने गणेश को आदेश दिया कि जब तक वह स्नान कर रही हैं, तब तक वह द्वार पर पहरा दें और किसी को भी अंदर प्रवेश न करने दें. बालक गणेश ने अपनी माता की आज्ञा मानी और द्वार पर पहरा देने लगे. इसी दौरान वहां भगवान शिव पहुंचे और उन्होंने अंदर जाने का प्रयास किया. बालक गणेश भगवान शिव को पहचानते नहीं थे. इसलिए उन्होंने माता पार्वती की आज्ञा का पालन करते हुए भगवान शिव को अंदर जाने से रोक दिया. भगवान शिव ने कई बार गणेश को समझाने की कोशिश की, लेकिन गणेश अपने स्थान से नहीं हटे. यह देखकर भगवान शिव को क्रोध आ गया. उन्होंने गणेश को चेतावनी दी, लेकिन इसके बावजूद जब गणेश नहीं माने तो भगवान शिव ने त्रिशूल से प्रहार कर उनका सिर धड़ से अलग कर दिया. मान्यता है कि भगवान शिव के त्रिशूल का प्रहार इतना तेज था कि बालक गणेश का मानव सिर धड़ से अलग होकर कैलाश पर्वत से दूर पाताल लोक में जा गिरा. जब माता पार्वती स्नान करके बाहर आईं और उन्हें इस घटना के बारे में पता चला तो वह बेहद दुखी और क्रोधित हो गईं. अपने पुत्र की ऐसी स्थिति देखकर माता पार्वती ने भगवान शिव से गणेश को पुनर्जीवित करने की मांग की. पार्वती का दुख देखकर भगवान शिव ने अपने गणों को गणेश का सिर खोजकर लाने का आदेश दिया. हालांकि, जब सभी गण खाली हाथ लौटे तो भगवान शिव ने उन्हें आदेश दिया कि रास्ते में जो भी प्राणी सबसे पहले दिखाई दे, उसका सिर लेकर आएं. इसके बाद गण एक हाथी के बच्चे का सिर लेकर आए. भगवान शिव ने उस हाथी के सिर को गणेश के धड़ पर स्थापित किया और उन्हें पुनः जीवित कर दिया. तभी से गणेश जी को गजानन के नाम से भी जाना जाता है. पाताल भुवनेश्वर में मौजूद है गणेश जी का सिर? आपको जानकर हैरानी होगी कि एक मान्यता के अनुसार, भगवान गणेश का असली मानव सिर आज भी एक गुफा में मौजूद है. कहा जाता है कि भगवान शिव ने क्रोध में आकर गणेश जी का जो मस्तक काटकर उनके शरीर से अलग किया था, उसे इसी गुफा में स्थापित कर दिया था. इस गुफा को पाताल भुवनेश्वर के नाम से जाना जाता है. यहां भगवान गणेश की एक शिला रूपी आकृति को आदि गणेश के नाम से जाना जाता है. यह गुफा उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में गंगोलीहाट से करीब 14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. मान्यता है कि कलयुग में इस गुफा की खोज आदि शंकराचार्य ने की थी. 108 पंखुड़ियों वाला ब्रह्म कमल मान्यता है कि पाताल भुवनेश्वर गुफा में भगवान गणेश के कटे हुए सिर की रक्षा स्वयं भगवान शिव करते हैं. यहां गणेश जी की शिला रूपी आकृति के ठीक ऊपर 108 पंखुड़ियों वाले ब्रह्म कमल के आकार की एक चट्टान है. कहा जाता है कि इस ब्रह्म कमल से दिव्य बूंदें लगातार भगवान गणेश की शिला रूपी आकृति पर टपकती रहती हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस ब्रह्म कमल को भगवान शिव ने स्वयं यहां स्थापित किया था. चारों युगों से जुड़ा है रहस्य इस गुफा में चारों युगों के प्रतीक के रूप में चार पत्थर स्थापित होने की भी मान्यता है. इनमें से एक पत्थर को कलयुग का प्रतीक माना जाता है. कहा जाता है कि यह पत्थर धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ रहा है. मान्यता है कि जिस दिन यह पत्थर गुफा की छत से टकरा जाएगा, उस दिन कलयुग का अंत हो जाएगा. हालांकि, यह धार्मिक मान्यता है, इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. गुफा में होते हैं कई धार्मिक प्रतीक पाताल भुवनेश्वर गुफा के अंदर कई धार्मिक प्रतीक और आकृतियां मौजूद हैं. मान्यता है कि यहां भगवान केदारनाथ, बद्रीनाथ और अमरनाथ के भी दर्शन होते हैं. बाबा अमरनाथ की गुफा से जुड़ी आकृति के पास पत्थर की बड़ी-बड़ी संरचनाएं दिखाई देती हैं, जिन्हें भगवान शिव की जटाओं का प्रतीक माना जाता है. इसके अलावा गुफा के भीतर भगवान शिव की तपस्या से जुड़े कमंडल और खड़ाऊं जैसी आकृतियां भी मौजूद होने की मान्यता है. इसी गुफा में काल भैरव की जीभ की आकृति के भी दर्शन होने की बात कही जाती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति काल भैरव के मुख से प्रवेश कर उनकी पूंछ तक पहुंच जाए तो उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है. कैलाश पर्वत तक जाता है गुप्त रास्ता? पाताल भुवनेश्वर गुफा से जुड़ी एक और मान्यता काफी रहस्यमयी है. कहा जाता है कि इस गुफा के अंदर से एक गुप्त रास्ता कैलाश पर्वत तक जाता है. हालांकि, इस दावे का भी कोई प्रमाणित वैज्ञानिक या ऐतिहासिक आधार नहीं है. महाभारत से जुड़ी एक मान्यता यह भी है कि स्वर्ग जाने के मार्ग पर पांडव इस गुफा के पास रुके थे. कहा जाता है कि उन्होंने यहां भगवान गणेश का आशीर्वाद लिया और भगवान शिव के साथ चौपड़ भी खेला था. आज पाताल भुवनेश्वर अपनी रहस्यमयी गुफा, धार्मिक मान्यताओं और अनोखी प्राकृतिक संरचनाओं के कारण श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. यहां मौजूद हर आकृति के साथ कोई … Read more

घर में भूलकर भी न लगाएं ये 5 पौधे! वास्तु के अनुसार बढ़ सकती हैं परेशानियां

 घर को खूबसूरत और हरा-भरा बनाने के लिए लोग तरह-तरह के पौधे लगाते हैं. लेकिन वास्तु शास्त्र में हर पौधे को घर के लिए शुभ नहीं माना गया है. कुछ पौधों को लेकर ऐसी मान्यताएं हैं कि इन्हें घर के अंदर या गलत जगह लगाने से नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है.  खासकर कांटेदार, सूखे और कुछ खास तरह के पौधों को लेकर वास्तु में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है. ऐसी मान्यताओं में कुछ पौधों को घर की सुख-शांति, आर्थिक स्थिति और तरक्की से जोड़कर देखा जाता है. आइए जानते हैं किन पौधों को घर में लगाने से बचने की सलाह दी जाती है और अगर पौधे पहले से लगे हैं तो किन बातों का ध्यान रखना चाहिए. कैक्टस और कांटेदार पौधे वास्तु के अनुसार घर के अंदर कैक्टस, नागफनी या दूसरे कांटेदार पौधे रखना शुभ नहीं माना जाता. मान्यता है कि इनके कारण घर में तनाव और आपसी मतभेद बढ़ सकते हैं. अगर घर में सजावट के लिए ऐसे पौधे लगाए हैं तो उन्हें बेडरूम या लिविंग एरिया के बजाय बाहर रखने की सलाह दी जाती है.  हालांकि पौधों की वास्तविक देखभाल और सुरक्षा को ध्यान में रखना भी जरूरी है, खासकर अगर घर में छोटे बच्चे या पालतू जानवर हों. घर में पीपल का पौधा पीपल का धार्मिक महत्व काफी अधिक है, लेकिन वास्तु की कुछ मान्यताओं में इसे घर के अंदर लगाने से बचने की सलाह दी जाती है.  माना जाता है कि घर में पीपल का पेड़ होने से आर्थिक परेशानियां बढ़ सकती हैं. अगर पीपल का पौधा घर की दीवार या किसी कोने में अपने आप उग आए तो उसे नजरअंदाज न करें.  व्यावहारिक रूप से भी दीवारों में उगने वाले पेड़ की जड़ों से संरचना को नुकसान हो सकता है.  इसलिए उसे हटाने के लिए सुरक्षित और उचित तरीका अपनाना बेहतर है. सूखे और मुरझाए पौधे घर में पौधे लगाने के बाद उनकी नियमित देखभाल भी जरूरी है.  वास्तु मान्यताओं में सूखे और मृत पौधों को शुभ नहीं माना जाता.  ऐसे पौधों को नकारात्मकता और ठहराव से जोड़कर देखा जाता है. इसलिए बालकनी, खिड़की या घर के किसी कोने में रखा पौधा अगर पूरी तरह सूख चुका है और उसके दोबारा ठीक होने की संभावना नहीं है, तो उसे हटा दें.  स्वस्थ और हरे-भरे पौधों को ही घर की सजावट का हिस्सा बनाएं. मेहंदी का पौधा मेहंदी का पौधा खुशबू और खूबसूरत पत्तियों के लिए जाना जाता है.  लेकिन वास्तु की कुछ मान्यताओं में इसे घर के अंदर लगाने से बचने की सलाह दी जाती है.  मूल लेख में मेहंदी को नकारात्मक ऊर्जा से जोड़ा गया है. हालांकि इस तरह की मान्यताओं का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है.  अगर कोई व्यक्ति वास्तु के नियमों को मानता है, तो वह मेहंदी के पौधे को घर के अंदर रखने के बजाय खुले स्थान पर रखने का विकल्प चुन सकता है. बोनसाई पौधा बोनसाई आजकल घर की सजावट में काफी लोकप्रिय है.  छोटा आकार होने के कारण इसे टेबल, बालकनी या लिविंग रूम में आसानी से रखा जा सकता है.  लेकिन वास्तु मान्यताओं के अनुसार बोनसाई को घर में रखना प्रगति में रुकावट से जोड़ा जाता है. वास्तु में इसके छोटे और सीमित आकार को विकास के रुकने के प्रतीक के तौर पर देखा जाता है.  दूसरी ओर, बोनसाई को लेकर सकारात्मक धारणाएं भी मौजूद हैं और कई लोग इसे केवल सजावटी पौधे के रूप में रखते हैं. घर में पौधे लगाते समय इन बातों का रखें ध्यान सिर्फ पौधे का चुनाव ही नहीं, उसकी जगह और देखभाल भी महत्वपूर्ण है.  वास्तु संबंधी मान्यताओं के अनुसार घर में हरे-भरे और स्वस्थ पौधे रखना बेहतर माना जाता है.  पौधों को ऐसी जगह रखना चाहिए जहां उन्हें उनकी प्रजाति के मुताबिक पर्याप्त रोशनी और हवा मिल सके. घर में पौधे लगाने से पहले यह भी देख लें कि उनकी जड़ें दीवार, फर्श या पाइपलाइन को नुकसान न पहुंचाएं.  सूखे पत्ते और गिरे हुए हिस्से नियमित रूप से साफ करते रहें. वास्तु में कुछ पौधों को शुभ भी माना गया है.  तुलसी, जेड प्लांट, बांस और सफेद अपराजिता जैसे पौधों को अलग-अलग मान्यताओं में सकारात्मकता, समृद्धि या सौभाग्य से जोड़ा जाता है.  इन पौधों के लिए भी दिशा संबंधी अलग-अलग वास्तु मान्यताएं बताई गई हैं.

पितृपक्ष में 28 सितंबर को द्वितीया श्राद्ध, जानें कुतुप काल और पूजा विधि

 पितृपक्ष में 28 सितंबर को द्वितीया तिथि का श्राद्ध किया जाएगा. इस दिन उन पितरों का श्राद्ध किया जाता है, जिनकी मृत्यु हिंदू पंचांग के अनुसार किसी भी महीने के कृष्ण पक्ष या शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को होती है. इस दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं. मान्यता है कि चावल, दूध, शहद, घी और काले तिल से बना पिंड पाकर हमारे पितृ शांत होते हैं और अपनी कृपा बनाए रखते हैं. द्वितीया तिथि श्राद्ध आश्विन कृष्ण द्वितीया तिथि 27 सितंबर को रात 08 बजकर 58 मिनट से लेकर 28 सितंबर को शाम 07 बजकर 13 मिनट तक रहेगी. ऐसे में उदिया तिथि के अनुसार, द्वितीया तिथि का श्राद्ध 28 सितंबर दिन सोमवार को किया जाएगा. श्राद्ध और तर्पण का श्रेष्ठ मुहूर्त शास्त्रों में पितरों के तर्पण और श्राद्ध के लिए कुतुप वेला को सबसे उत्तम माना गया है. यह समय दोपहर के आस-पास पड़ता है. 28 सितंबर को कुतुप काल दोपहर 11:48 बजे से दोपहर 12:36 बजे तक रहेगा. लेकिन अलग-अलग शहरों में इसका समय एक-दूसरे से थोड़ा अलग हो सकता है. इसलिए पंचांग देखकर समय सुनिश्चित कर लें. द्वितीया तिथि के श्राद्ध की विधि? द्वितीया तिथि के श्राद्ध में आटे, चावल या जौ से बनाए गए गोल पिंड पितरों को अर्पित करने की परंपरा है. पिंडदान करने के बाद जल में काले तिल मिलाकर पितरों का तर्पण किया जाता है. पितरों का तर्पण करते वक्त हाथ में कुशा जरूर रखें. कुश एक प्रकार की घास होती है, जिसकी अंगूठी बनाकर दाएं हाथ की अनामिका उंगली में पहनी जाती है. श्राद्ध के बाद गरीब ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दान-दक्षिणा दें. आखिर में पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें. श्राद्ध के दौरान गाय, कुत्ते, कौवे और चींटियों के लिए भोजन का एक अंश निकालकर अलग रख दिया जाता है, जिसे पंचबलि कहा जाता है. कहते हैं कि इन जीवों के माध्यम से हमारे पितृ भोजन ग्रहण करते हैं और प्रसन्न होते हैं. इससे पितृ दोष समाप्त हो जाता है और उन्हें शांति मिलती है.

अक्टूबर में बनेंगे कई दुर्लभ राजयोग, इन 4 राशियों की चमकेगी किस्मत

जल्द ही अक्टूबर का महीना शुरू होने वाला है. अक्टूबर 2026 का महीना वैदिक ज्योतिष के दृष्टिकोण से बेहद हलचल भरा और दुर्लभ राजयोगों का निर्माण करने वाला रहेगा. इस महीने कई बड़े ग्रह अपनी चाल और राशि बदलकर अत्यंत शुभ योगों का निर्माण करेंगे. आइए जानते हैं अक्टूबर 2026 में कौन सी तारीख को कौन सा ग्रह राजयोग बनाएगा और किन राशियों को इसका सबसे बड़ा लाभ मिलेगा. बुधादित्य राजयोग (17 अक्टूबर 2026) ग्रह व स्थिति: 17 अक्टूबर को सूर्य देव कन्या राशि से निकलकर तुला राशि में प्रवेश करेंगे, जहाँ बुध देव पहले से ही विराजमान रहेंगे. सूर्य और बुध की इस युति से 'बुधादित्य राजयोग' का निर्माण होगा. लक्ष्मी नारायण राजयोग (20 अक्टूबर 2026) ग्रह व स्थिति: 20 अक्टूबर को धन, वैभव व सौंदर्य के कारक शुक्र देव अपनी स्वराशि तुला में गोचर करेंगे, जहाँ बुध पहले से मौजूद होंगे. जब भी बुध और शुक्र एक साथ आते हैं, तो 'लक्ष्मी नारायण राजयोग' बनता है. मालव्य राजयोग (20 अक्टूबर 2026) ग्रह व स्थिति: 20 अक्टूबर को शुक्र देव अपनी स्वयं की राशि तुला में प्रवेश कर केंद्र भाव को प्रभावित करेंगे. जब शुक्र अपनी स्वराशि या उच्च राशि में होकर केंद्र भाव (1, 4, 7, 10) में विराजमान होते हैं, तो पंच महापुरुष योगों में से एक 'मालव्य राजयोग' बनता है. त्रिग्रही शुभ योग (04 अक्टूबर से 06 अक्टूबर 2026) ग्रह व स्थिति: 4 अक्टूबर को चंद्रमा का प्रवेश कर्क राशि में होगा, जहाँ देवगुरु बृहस्पति और मंगल देव पहले से विराजमान रहेंगे. गुरु, मंगल और चंद्र की इस त्रिकोणीय युति से त्रिग्रही शुभ योग का निर्माण होगा. देवगुरु बृहस्पति का सिंह राशि में महागोचर (31 अक्टूबर 2026) ग्रह व स्थिति: 31 अक्टूबर को ज्ञान और समृद्धि के कारक देवगुरु बृहस्पति (Jupiter) कर्क राशि से निकलकर मित्र ग्रह सूर्य की राशि सिंह में प्रवेश करेंगे. सिंह राशि में गुरु का आगमन एक अत्यंत शक्तिशाली शुभ स्थिति का निर्माण करेगा. ये राशियां पाएंगी लाभ कर्क राशि (Cancer) कर्क राशि के जातकों के लिए अक्टूबर का महीना किस्मत के नए दरवाजे खोलने वाला है. नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन (पदोन्नति), इंक्रीमेंट और मनचाहा ट्रांसफर मिल सकता है. निर्णय लेने की क्षमता और आत्मविश्वास में अद्भुत सुधार देखने को मिलेगा. आर्थिक तंगी पूरी तरह दूर होगी और आय के नए स्रोत बनेंगे. सिंह राशि (Leo) अक्टूबर के अंत में देवगुरु बृहस्पति का आपकी ही राशि में प्रवेश आपके लिए स्वर्णिम काल की शुरुआत करेगा. लंबे समय से अटके या रुके हुए काम तेजी से पूरे होने लगेंगे. विदेश यात्रा या उच्च शिक्षा से जुड़े सपने पूरे होंगे. व्यापार में अचानक बड़ा धन-लाभ होगा और संतान पक्ष से कोई बड़ी खुशखबरी मिलेगी. तुला राशि (Libra) अक्टूबर का महीना तुला राशि वालों के लिए अब तक का सबसे बेहतरीन महीना साबित हो सकता है. समाज में पद, प्रतिष्ठा और आकर्षण में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी. नया वाहन, संपत्ति या लग्जरी वस्तुएं खरीदने के मजबूत योग बनेंगे. बिजनेस करने वालों को नए प्रोजेक्ट्स और पार्टनरशिप से भारी मुनाफा होगा. वृश्चिक राशि (Scorpio) वृश्चिक राशि वालों के लिए अक्टूबर का महीना आर्थिक दृष्टिकोण से सबसे ज्यादा फायदेमंद रहेगा. वर्षों से अटका हुआ या फंसा हुआ पैसा वापस मिलेगा. शेयर बाजार, रियल एस्टेट या पुराने निवेश से बंपर रिटर्न (मुनाफा) मिलने की संभावना है. कार्यस्थल पर आपकी कार्यशैली और लीडरशिप की जमकर तारीफ होगी.