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मन ही बंधन और मोक्ष का कारण है, जानें धर्मशास्त्रों के विचार

मन के विषय में धर्मशास्त्रों से लेकर अनेक विद्वानों ने अपने-अपने मत व्यक्त किए हैं, मन ही बंधन मुक्ति या मोक्ष का कारण बनता है। मन को साध लेने से किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त की जा सकती है। मन ही परिस्थितियों का निर्माण कर सुख-दुःख की संरचना करता है। जो व्यक्ति अपने मन को नियंत्रित नहीं रख पाते हैं, वे सफलता से दूर होते चले जाते हैं। आइए जानें मन के विषय में महापुरुषों के विचार। ब्रह्माण्ड के गूढ़ रहस्य एवं गहराइयां मनुष्य के अंतर्मन में निहित हैं। मन ही परिस्थितियों का निर्माण कर सुख-दुःख की संरचना करता है। जीवन में प्राप्त होने वाली सफलता या असफलता, मानव मन पर निर्भर है। सृष्टि के नियम और मन का विज्ञान जानकर व्यक्ति किसी भी प्रकार की उन्नति कर सकता है, महत्वाकांक्षाओं को पूरा कर सकता है। यह पूरा ब्रह्माण्ड एक कल्पवृक्ष है, जो हमारे भावों के अनुरूप सृष्टि का निर्माण करता है। श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, मन बहुत चंचल है, मनुष्य को मथ डालता है। जैसे वायु को दबाना बहुत कठिन है, वैसे ही मन को वश में करना भी अत्यंत कठिन है। स्वामी विवेकानन्द कहते हैं कि मन लाडले बच्चे के समान है। जैसे लाडला बच्चा सदैव अतृप्त रहता है, उसी तरह हमारा मन भी अतृप्त रहता है, अतएव मन का लाड़ कम करके उसे दबाकर रखना चाहिए। धम्मपद के अनुसार जैसे कच्ची छत में पानी भरता है, वैसे ही अविवेकी मन में कामनाएं धंसती हैं। शेक्सपियर के अनुसार, मन को हर्ष और उल्लासमय बनाओ, इससे हजारों हानियों से बचोगे और लम्बी उम्र पाओगे। मनुस्मृति के अनुसार आकार, इंगित, गति, चेष्टा, वाणी एवं नेत्र और मुख के बदलते हुए भावों से मन के विचारों का पता लग जाता है। ज्योतिष शास्त्र में ज्योतिषी जन्मपत्री और ग्रहदशा के साथ व्यक्ति के मन की स्थिति को समझकर उसके भविष्य की व्याख्या करता है। रामकृष्ण परमहंस कहते हैं, जब तक मन अस्थिर और चंचल है, तब तक अच्छा गुरु और साधु संगति मिल जाने पर भी व्यक्ति को कोई लाभ नहीं होता। आदिगुरु शंकराचार्य के अनुसार जिसने मन को जीत लिया, उसने जगत को जीत लिया। विनोबा भावे कहते हैं, जब तक मन नहीं जीत जाता और राग-द्वेष शांत नहीं होते, तब तक मनुष्य इंद्रियों का गुलाम बना रहता है। गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं, जब तक मन में काम, क्रोध, मद और लोभ रहता है, तब तक ज्ञानी और अज्ञानी एक समान होते हैं। नीति शास्त्र के अनुसार मनुष्य का मन ही समूचा मनुष्य है।

वास्तु शास्त्र: घर में जल तत्व से बढ़ती है सुख-समृद्धि, जानें सही दिशा

 अक्सर वास्तु वास्तु शास्त्र के जानकार घर में फव्वारा या जल से संबंधित सजावटी वस्तुएं रखने का सुझाव देते हैं. इसके पीछे की मुख्य वजह जल तत्व की सकारात्मक ऊर्जा है. कहा जाता है कि जीवन में सुख-शांति और समृद्धि के लिए , जब से जुड़े वास्तु उपाय बेहद कारगर होते हैं. हालांकि, वास्तु शास्त्र के जानकार बताते हैं कि जल का लाभ तभी मिलता है जब उसे सही दिशा और स्थान पर रखा जाए. गलत स्थान पर रखा गया जल आर्थिक और मानसिक समस्याओं का कारण भी बन सकता है. अधिकांश घरों में जल यानी पानी से जुड़े वास्तु दोष देखने को मिलते हैं. वास्तु शास्त्र के जानकारों की मानें तो जल से जुड़े वास्तु नियमों की अनदेखी करने से परिवार में कलह और क्लेश जैसी अनेक समस्या उत्पन्न होने लगती है. ऐसे में आइए जानते हैं कि पानी या जल का स्थान घर की किस दिशा में होना चाहिए और इससे जुड़े खास वास्तु नियम क्या हैं. वॉटरफॉल के लिए सही दिशा वास्तु शास्त्र के मुताबिक, अगर आपके घर में बगीचा है, तो वहां वॉटरफॉल लगाना अत्यंत शुभ होता है, लेकिन यहां एक जरूरी नियम का ध्यान रखें रखना चाहिए. पानी के बहाव की दिशा हमेशा घर के अंदर की ओर होनी चाहिए. अगर जल का प्रवाह घर के बाहर की तरफ दिखता है, तो धन भी उसी गति से बाहर चला जाता है. वास्तु शास्त्र के मुताबिक, घर में अंदर की तरफ बहता हुआ पानी मां लक्ष्मी के आगमन का प्रतीक है. पानी से जुड़े शोपीस कहां रखें वास्तु सास्त्र के नियम के अनुसार, किचन में अग्नि देवता का वास होता है, जबकि जल उसका विपरीत तत्व है.  इसलिए किचन में पीने या उपयोग के पानी के अलावा किसी प्रकार का जलीय शोपीस, नदी-झरने की तस्वीर नहीं लगानी चाहिए. क्योंकि ऐसा करने से जल और अग्नि तत्व का संतुलन बिगड़ जाता है. इसके अलावा सेहत पर भी नकारात्मक असर पड़ता है, जो कि आर्थिक स्थिति को बिगाड़ देता है. बुरी नजर और निगेटिव एनर्जी को दूर करने के लिए अगर आपके परिवार में लोग बार-बार बीमार पड़ रहे हैं या करियर में बाधाएं आ रही हैं, तो पानी का शोपीस एक प्रभावी उपाय हो सकता है. वास्तु नियम के मुताबिक, इसे घर के गलियारे या बालकनी में रखना शुभ होता है. कहा जाता है कि यहां जल की तत्व की मौजूदगी बुरी नजर के प्रभाव को कम करती है और सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को बढ़ाती है. किस दिशा में रखें मिट्टी का घड़ा या सुराही? वास्तु शास्त्र के अनुसार, मिट्टी के घड़े या सुराही को घर की उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा में रखना शुभ होता है. कहा जाता है कि इस दिशा में देवी-देवताओं का वास होता है. इसलिए यहां मिट्टी के बर्तन में पानी भरकर रखने से दुर्भाग्य दूर होता है. 

13 अप्रैल से शुरू हो रहा राज पंचक, जानें तिथि और महत्व

13 अप्रैल से राज पंचक की शुरुआत हो रही है, जो अपने साथ सुख-समृद्धि और सफलता के योग लेकर आ रहा है. हालांकि, इसकी शुभता बनाए रखने के लिए कुछ सावधानियां बरतना अनिवार्य है. जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में गोचर करता है, तो उस अवधि को पंचक कहा जाता है. चूंकि इस बार पंचक सोमवार 13 अप्रैल से शुरू हो रहा है, इसलिए इसे राज पंचक का नाम दिया गया है.  शास्त्रों में राज पंचक को अत्यंत लाभकारी माना गया है.  यह समय सरकारी कार्यों में सफलता, संपत्ति लाभ और करियर में उन्नति के लिए श्रेष्ठ होता है. राज पंचक कब से कब तक पंचांग के अनुसार, राज पंचक सोमवार, 13 अप्रैल 2026 से शुरू होगा, इसका समापन शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026 को होगा. भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां राज पंचक शुभ होने के बावजूद, ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार कुछ कार्यों पर सख्त मनाही होती है.  इन गलतियों से आपके बनते काम बिगड़ सकते हैं. ईंधन का इकट्ठा करना: पंचक के दौरान लकड़ी, घास या अन्य ज्वलनशील सामग्री इकट्ठा करना अशुभ होता है.  माना जाता है कि इससे अग्नि का डर बना रहता है. दक्षिण दिशा की यात्रा: दक्षिण को यम की दिशा माना जाता है.  पंचक के दौरान इस दिशा में यात्रा करने से दुर्घटना या धन हानि का खतरा रहता है. घर की छत डालना: यदि आप घर बनवा रहे हैं, तो इन पांच दिनों में छत (लंटर) डालने का काम रोक दें.  इससे घर में क्लेश और आर्थिक संकट आ सकता है. बिस्तर या चारपाई बनाना: पंचक काल में नया पलंग खरीदना या चारपाई बुनना वर्जित है.  यह परिवार के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है. अंतिम संस्कार के नियम: यदि इस अवधि में किसी का निधन हो जाए, तो अंतिम संस्कार विशेष विधि (कुश के पांच पुतले बनाकर) से ही करना चाहिए, वरना परिवार पर पंचक दोष लग सकता है. राज पंचक में क्या करें? यह समय निवेश करने, नया व्यापार शुरू करने और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए सर्वोत्तम है.  राज पंचक की शुभता का लाभ उठाने के लिए भगवान शिव की आराधना करें, क्योंकि सोमवार महादेव का दिन है.

गुरु-चंद्रमा की युति से बनेगा शुभ योग, करियर में तरक्की के संकेत

ज्योतिष शास्त्र में कई ऐसे शुभ योग बताए गए हैं, जो व्यक्ति के जीवन में तरक्की, सम्मान और सुख-सुविधाएं लेकर आते हैं. इन्हीं में से एक खास योग है गजकेसरी राजयोग, जो चंद्रमा और गुरु ग्रह के साथ आने से बनता है. अप्रैल 2026 में यह शुभ योग बनने जा रहा है. 21 अप्रैल को चंद्रमा मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे, जहां पहले से ही गुरु बृहस्पति मौजूद रहेंगे. इन दोनों ग्रहों की युति से गजकेसरी राजयोग बनेगा, जिसे बेहद शुभ माना जाता है. ज्योतिष के अनुसार चंद्रमा मन, भावनाएं और सुख का कारक होता है, जबकि गुरु ज्ञान, धन और भाग्य से जुड़ा ग्रह है. जब ये दोनों ग्रह साथ आते हैं, तो कई क्षेत्रों में सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है. इस योग का प्रभाव सभी राशियों पर पड़ेगा, लेकिन मिथुन, सिंह और कन्या राशि वालों के लिए यह समय ज्यादा फायदेमंद हो सकता है. कैसे बनता है गजकेसरी राजयोग? ज्योतिष के अनुसार जब गुरु और चंद्रमा एक ही राशि में हों या एक-दूसरे से केंद्र स्थान (1, 4, 7, 10 भाव) में हों, तब गजकेसरी राजयोग बनता है. यह योग कुंडली में शुभ परिणाम देने वाला माना जाता है और व्यक्ति को सफलता दिलाने में मदद करता है. मिथुन राशि (Gemini) मिथुन राशि के लोगों के लिए यह योग करियर में ग्रोथ लेकर आ सकता है. नौकरी में प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिलने के योग हैं. आपकी बात करने की क्षमता आपको आगे बढ़ने में मदद करेगी. बिजनेस में भी नए अवसर मिल सकते हैं और साझेदारी फायदेमंद साबित हो सकती है. हालांकि खर्च बढ़ सकते हैं, इसलिए बजट का ध्यान रखें और जरूरत से ज्यादा आत्मविश्वास से बचें. सिंह राशि (Leo) सिंह राशि वालों के लिए यह योग आय और लाभ के मामले में अच्छा साबित हो सकता है. इस दौरान आपकी मेहनत की सराहना होगी और ऑफिस में आपकी पहचान बढ़ सकती है. बिजनेस करने वालों को निवेश से फायदा मिलने के संकेत हैं और नए मौके भी मिल सकते हैं. परिवार में कोई अच्छी खबर मिल सकती है, लेकिन जल्दबाजी या अहंकार से बचना जरूरी होगा, वरना नुकसान हो सकता है. कन्या राशि (Virgo) कन्या राशि वालों के लिए यह समय भाग्य का साथ देने वाला हो सकता है. रुके हुए काम पूरे हो सकते हैं और करियर में स्थिरता आ सकती है. नई नौकरी या बिजनेस के अवसर मिल सकते हैं. इस दौरान यात्रा के योग बन रहे हैं और किसी धार्मिक कार्य में शामिल होने का मौका मिल सकता है. हालांकि काम का दबाव बढ़ सकता है, इसलिए सेहत का ध्यान रखें और पर्याप्त आराम करें.

जमीन-जायदाद से जुड़े काम क्यों अटकते हैं, जानें ज्योतिषीय कारण और उपाय

कई लोग ऐसे होते हैं जो सालों से एक ही परेशानी में फंसे रहते हैं-प्रॉपर्टी लेने की कोशिश करते हैं, लेकिन हर बार कोई न कोई रुकावट आ जाती है. कभी पैसा अटक जाता है, कभी डील टूट जाती है, तो कभी कानूनी झंझट सामने आ जाता है, अगर आप भी इसी दौर से गुजर रहे हैं, तो ये खबर आपके लिए है. ज्योतिष और पारंपरिक मान्यताओं में ऐसे कई आसान उपाय बताए गए हैं, जो जिंदगी में अटके कामों को आगे बढ़ाने में मदद कर सकते हैं. खासकर प्रॉपर्टी से जुड़े मामलों में कुछ छोटे-छोटे टोटके भी असर दिखा सकते हैं. हाल ही में एक ऐसा ही आसान उपाय चर्चा में है, जिसे लोग अपनाकर फायदा मिलने का दावा कर रहे हैं. क्यों अटकती है प्रॉपर्टी की डील? प्रॉपर्टी से जुड़ी परेशानियां सिर्फ पैसों की वजह से नहीं होतीं. कई बार ग्रह-नक्षत्र भी इसमें भूमिका निभाते हैं. खासकर मंगल ग्रह को जमीन-जायदाद का कारक माना जाता है, अगर आपकी कुंडली में मंगल कमजोर है या दोषपूर्ण स्थिति में है, तो प्रॉपर्टी से जुड़े काम बार-बार अटक सकते हैं. कई लोगों के साथ ऐसा होता है कि सब कुछ तय होने के बाद भी आखिरी समय में डील रुक जाती है. जैसे भोपाल के रहने वाले एक व्यक्ति बताते हैं कि उन्होंने तीन बार घर खरीदने की कोशिश की, लेकिन हर बार कोई न कोई समस्या आ गई-कभी बैंक लोन रुका, कभी कागजों में दिक्कत. आसान उपाय जो बदल सकता है स्थिति शनिवार की रात करें ये खास उपाय ज्योतिष के अनुसार, एक बेहद सरल उपाय अपनाकर इस समस्या को कम किया जा सकता है. इसके लिए आपको “मोलश्री” के फूल लेने हैं. ये फूल शांति और सकारात्मक ऊर्जा से जुड़े माने जाते हैं. शनिवार की रात सोते समय इन फूलों को अपने तकिए के नीचे रख लें. ऐसा खासतौर पर शनिवार को करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इस दिन का संबंध शनि और कर्म से होता है. कैसे करता है असर? माना जाता है कि ये उपाय आपके जीवन में चल रही नकारात्मक ऊर्जा को कम करता है. खासकर मंगल से जुड़े दोषों को शांत करने में मदद मिलती है. जब मंगल संतुलित होता है, तो जमीन-जायदाद से जुड़े काम धीरे-धीरे बनने लगते हैं. लोगों के अनुभव क्या कहते हैं? हालांकि ये पूरी तरह आस्था पर आधारित उपाय है, लेकिन कई लोग इसे अपनाकर सकारात्मक बदलाव महसूस करने की बात कहते हैं. कुछ लोगों का कहना है कि लंबे समय से रुकी डील अचानक आगे बढ़ गई, तो कुछ को नई प्रॉपर्टी के मौके मिलने लगे. इंदौर की एक महिला बताती हैं कि उन्होंने यह उपाय लगातार 3 शनिवार तक किया, जिसके बाद उनकी रुकी हुई प्लॉट की रजिस्ट्री पूरी हो गई. उनके मुताबिक, पहले जहां हर बार कोई बाधा आ जाती थी, वहीं इस बार सब कुछ आसानी से हो गया. ध्यान रखने वाली बातें सिर्फ उपाय पर निर्भर न रहें यह समझना जरूरी है कि ये उपाय आपकी कोशिशों का विकल्प नहीं है, अगर आप प्रॉपर्टी खरीदना चाहते हैं, तो सही प्लानिंग, कागजी जांच और फाइनेंशियल तैयारी बेहद जरूरी है. सकारात्मक सोच भी जरूरी उपाय के साथ-साथ आपका नजरिया भी मायने रखता है, अगर आप लगातार नकारात्मक सोचेंगे, तो उसका असर आपके फैसलों पर भी पड़ेगा. क्या सच में काम करता है ये उपाय? इस सवाल का कोई वैज्ञानिक जवाब नहीं है, लेकिन आस्था और विश्वास का असर कई बार मानसिक रूप से मजबूत बनाता है. जब आप किसी उपाय को पूरे विश्वास के साथ करते हैं, तो आपका आत्मविश्वास बढ़ता है और आप बेहतर फैसले ले पाते हैं. प्रॉपर्टी से जुड़ी परेशानियां आम हैं, लेकिन अगर बार-बार रुकावट आ रही है, तो थोड़ा अलग सोचने में हर्ज नहीं है. मोलश्री के फूल वाला यह आसान उपाय न सिर्फ करने में सरल है, बल्कि कई लोगों के अनुभव इसे आजमाने लायक बनाते हैं. हालांकि, इसे अपनाने के साथ अपनी मेहनत और समझदारी को भी साथ रखना जरूरी है.

12 अप्रैल 2026 राशिफल: मेष राशि में होगी भागदौड़, सिंह और मकर राशि वालों को मिलेगा मेहनत का फल

मेष आज का दिन आपके लिए थोड़ा चुनौतीपूर्ण रह सकता है, इसलिए सावधानी बरतें। मन में बेचैनी या उलझन बनी रह सकती है, ऐसे में धैर्य से काम लेना जरूरी होगा। अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखें। सेहत को लेकर लापरवाही न करें। परिवार का सहयोग मिलेगा और आप मानसिक या बौद्धिक कार्यों में अधिक व्यस्त रह सकते हैं। वृषभ आज काम के लिहाज से दिन अच्छा है। नई शुरुआत के मौके मिल सकते हैं, लेकिन पुरानी आदतें आपको रोक सकती हैं। खुद को कम्फर्ट जोन से बाहर निकालें और कुछ नया करने की कोशिश करें। आर्थिक स्थिति बेहतर हो सकती है। छोटी शुरुआत भी बड़े फायदे दे सकती है। सेहत के लिए पर्याप्त पानी पिएं। मिथुन आज काम और जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं। जरूरत से ज्यादा काम लेने से बचें और हर किसी को ‘हां’ कहने की आदत पर नियंत्रण रखें। एक समय में एक काम करें, इससे बेहतर परिणाम मिलेंगे। बीच-बीच में आराम करें और खानपान का ध्यान रखें। कर्क दिन सामान्य रहेगा, लेकिन काम बढ़ सकता है। अचानक धन लाभ होने के संकेत हैं। कोई पुराना सपना फिर से याद आ सकता है—उसे धीरे-धीरे पूरा करने की शुरुआत करें। निवेश से पहले पूरी जानकारी लेना जरूरी है। सिंह आज आपके मन में उतार-चढ़ाव रह सकते हैं, इसलिए खुद को शांत और संतुलित रखें। धैर्य बनाए रखना जरूरी होगा। पढ़ाई या सीखने से जुड़े कामों में कुछ दिक्कतें आ सकती हैं, इसलिए सतर्क रहें। व्यापार के लिए माता-पिता से आर्थिक सहयोग मिल सकता है। कुल मिलाकर, आर्थिक स्थिति अच्छी रहने से आप संतुष्ट महसूस करेंगे। कन्या हर काम को परफेक्ट बनाने की चिंता छोड़ें। पहले काम पूरा करें, बाद में सुधार करें। सरल तरीके से काम करेंगे तो ज्यादा सफलता मिलेगी। आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है। नया काम शुरू करने से पहले पूरी जानकारी लें और सेहत का ध्यान रखें। तुला आज आपको साफ और मजबूत निर्णय लेने की जरूरत है। हर बार समझौता करना सही नहीं होता। आत्मविश्वास के साथ बात रखें, लोग आपकी कद्र करेंगे। परिवार से सलाह लेना फायदेमंद रहेगा। पार्टनर के साथ समय बिताएं और पैसों में जल्दबाजी न करें। धनु आज आपको गुस्से और बेवजह के विवादों से दूर रहना चाहिए। नौकरी में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं और तरक्की के अवसर भी सामने आ सकते हैं। कार्यक्षेत्र में प्रगति होगी। माता-पिता के सहयोग से कुछ लोगों के प्रेम संबंध विवाह की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। वृश्चिक हर बात पर तुरंत प्रतिक्रिया देने से बचें। पहले स्थिति को समझें, फिर निर्णय लें। रिश्तों में खुलकर बात करें और सामने वाले की भी सुनें। इससे संबंध मजबूत होंगे। काम के बीच में ब्रेक लें और रात में ज्यादा देर तक मोबाइल न चलाएं। मकर मकर राशि वालों को आज वाणी में मधुरता तो रहेगी, लेकिन धैर्यशीलता बनाए रखें। सेहत का ध्यान रखें। खर्चों में वृद्धि होगी। शैक्षिक कार्यों में सफल रहेंगे। कारोबार में भागदौड़ ज्यादा रहेगी। अपनों का साथ मिलेगा। धन लाभ हो सकता है। कुंभ आज सिर्फ सोचने से काम नहीं चलेगा, आपको अपने विचारों को अमल में लाना होगा। योजनाओं को पूरा करने पर ध्यान दें। मेहनत से ही सफलता मिलेगी। आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी और सेहत का ध्यान रखना जरूरी है। मीन मीन राशि वालों का आज मन अशांत रहेगा। धैर्यशीलता बनाए रखने का प्रयास करें। संतान की सेहत का ध्यान रखें। भागदौड़ अधिक रहेगी। कारोबार में सुधार होगा। जीवनसाथी की सेहत का ध्यान रखें। माता-पिता की सेहत का ध्यान रखें। वाहन सुख में वृद्धि हो सकती है। बौद्धिक कार्यों से आय वृद्धि होगी।

गीता का संदेश: सुख-दुख और समय सब परिवर्तनशील है, आत्मा शाश्वत है

याद रहे, पुण्य और पाप कर्म दोनों ही बांधते है। एक लोहे की जंजीर है तो एक सोने की। लोहे की जंजीर से छुटकारा पाने का मन भी करता है। लेकिन अगर जंजीर सोने की हो, तो छूटने का मन नहीं करेगा। पाप कर्म बंधन है तो पुण्यकर्म भी बंधन है। जब तुम सुख में होते हो तो इसमें एक इच्छा होती है। फिर मन करता है कि अब यह परिस्थिति बनी रहे। हमेशा सुख बना रहे। यह कामना जब मन में उत्पन्न होती है तो हम भूल जाते हैं कि परिस्थिति परिवर्तनशील होती है। कोई भी परिस्थिति कायम नहीं रहती। कभी राजा, कभी रंक, कभी बहुत कुछ, कभी कुछ भी नहीं। क्या समुद्र में रहकर कोई जहाज एकदम शांत रह सकता है? जब समुद्र के पानी में ही लहरें उठ रही हों, तो भला जहाज कैसे शांत रह सकता है। समय बदलता रहता है। बदलाव समय का स्वरूप है। इक्कीस साल पहले हमारा जो शरीर था, वह आज नहीं है। गंगा के घाट पर बैठकर गंगाजी को देखते हो तो तुम्हें लगता है कि गंगा वही है, ऐसा नहीं है। गंगा वही नहीं है, बल्कि घाट वही है। देखते-देखते गंगा में बहुत जल बह गया। समय का चक्र चलता ही रहता है। हमारी दृष्टि में वर्तमान, भूत, भविष्य काल ऐसे भेद हो सकते हैं। समय अपने आप में न भूत है, न वर्तमान है, न भविष्य है। सब कुछ समय के भीतर हो रहा है, और समय में सब बदल रहा है। लेकिन समय नहीं बदलता। वह अव्यय, अखंड है। यह समय, यह काल परमात्मा का ही स्वरूप है। गीता में कहा गया है कि परमात्मा सबके भीतर है, सबके बाहर भी है। जो भीतर है उसको हम अंतर्यामी कहते हैं, और जो बाहर है उसको हम काल स्वरूप कहते हैं। अंतर्यामी हैं प्रभु। तुम्हारे भावों, तुम्हारे विचारों सबके वह साक्षी हैं। तुम उनसे कुछ छिपा नहीं सकते। बाहर वह काल स्वरूप हैं। भीतर हैं तो तुम्हारी सांसें चल रही हैं। मजे की बात है, भीतर रहकर वह जीवन दे रहे और बाहर रहकर वो जीवन हर रहे हैं। हर सांस के साथ तुम्हारा जीवन नष्ट होता जा रहा है। जिस तरह से प्रकाश और सागर की तरंगें होती हैं। वैसे ही हम भी एक तरंग हैं चैतन्य के महासागर की। उठी हुई तरंग को जीवन कह दो, लेकिन वास्तव में वह तरंग पैदा नहीं हुई। वह उसी चैतन्य के महासागर में तुम्हें दिखी। वह दिखना जब बंद हो गई तो उसको चाहे तुम मृत्यु कह लो। वास्तव में मृत्यु जैसी कोई चीज है ही नहीं। गीता में भगवान श्रीकृष्ण समझाते हैं, आत्मा किसी काल में भी न तो जन्म लेती है, न मरती है और न उत्पन्न होकर फिर होने वाली ही है। यह अजन्मी, नित्य, सनातन और पुरातन है। शरीर के मारे जाने पर भी यह नहीं मरती। मनुष्य के जीवन में तीन बातें है। शोक, मोह और भय। शोक इसलिए कि आनंद नहीं है। मोह इसलिए कि सुख नहीं है, और भय इसलिए कि शांति नहीं है। तुम चाहते हो आनंद, सुख-शांति और ये तीनों स्थायी हों तो शोक, मोह, भय को छोड़ो। ईश्वर हम सभी के हृदय में है पर हमारा अहंकार उन्हें प्रकट नहीं होने देता। अहंकार को त्यागना है क्योंकि मन की ऐसी स्थिति में मनुष्य सोचने लगता है कि सब मेरा है। यह विनाश का मूल है।

पीपल-बरगद काटना माना गया अशुभ, जानिए वास्तु में क्या कहते हैं नियम

घर के आसपास या किसी प्लॉट पर लगे पेड़-पौधों को कई बार काटना मजबूरी हो जाता है। वैसे तो हम बिना सोचे-समझे पुराने पेड़ को काट देते हैं। लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार, पेड़ काटना कोई साधारण काम नहीं है। गलत तरीके से पेड़ काटने से वास्तु दोष पैदा होता है, जिसका प्रभाव पूरे परिवार पर पड़ता है। इससे मानसिक तनाव, आर्थिक हानि, स्वास्थ्य समस्या और पारिवारिक कलह बढ़ सकती है। सही नियमों का पालन करके हम प्रकृति का सम्मान कर सकते हैं और घर की सकारात्मक ऊर्जा को बचाए रख सकते हैं। पेड़ का अपना आभामंडल और ऊर्जा वास्तु शास्त्र के अनुसार, हर पेड़ का अपना आभामंडल होता है। जब हम बिना किसी नियमों का ध्यान रखे पेड़ काटते हैं, तो वह स्थान शोक और नकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है। इसका सबसे ज्यादा असर घर के मुखिया पर पड़ता है। ऐसे में पेड़ काटने से पहले वास्तु नियमों को समझना बहुत जरूरी है। देव वृक्षों को काटने का महापाप पीपल, बरगद और गूलर को देव वृक्ष माना गया है। इनमें देवताओं और पितरों का वास होता है। इन्हें काटने से भारी वास्तु दोष, पितृ दोष और संतान संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। अगर इन पेड़ों की शाखाएं दीवार या तारों को नुकसान पहुंचा रही हों, तब भी इन्हें काटने से पहले विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए। बिना पूजा के इन पेड़ों को काटना बहुत अशुभ माना जाता है। पेड़ काटने से पहले माफी और पूजा पेड़ काटने से पहले उसकी पूजा जरूर करें। पूजा के दौरान पेड़ को गंध, पुष्प और नैवेद्य अर्पित करें। तने को सफेद कपड़े से ढककर उस पर सफेद सूत लपेटें। इसके बाद पेड़ से प्रार्थना करें कि उस पर रहने वाले सूक्ष्म जीव दूसरे स्थान पर चले जाएं। पूजा के बाद ही काटने का कार्य शुरू करें। कहा जाता है कि ऐसा करने से वास्तु दोष की संभावना काफी कम हो जाती है। शुभ समय और निषिद्ध दिन पेड़ काटने के लिए कुछ दिन और नक्षत्र विशेष रूप से शुभ माने गए हैं। चतुर्थी, नवमी या चतुर्दशी तिथि अच्छी मानी जाती है। शुभ नक्षत्रों में मृगशिरा, पुनर्वसु, अनुराधा, हस्त, मूल, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद, स्वाति और श्रवण शामिल हैं। पेड़ काटने के लिए सुबह का समय सबसे अच्छा होता है। निषिद्ध दिन: भूलकर भी मंगलवार, शनिवार या अमावस्या को पेड़ ना काटें। गुरुवार और रविवार को भी बचना चाहिए। दोपहर में पेड़ काटने से बचें। दिशाओं का महत्व और क्षतिपूर्ति ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में स्थित पेड़ काटना सबसे हानिकारक माना जाता है। यह सात्विक ऊर्जा का द्वार है, इसलिए यहां का पेड़ काटने से किस्मत पर बुरा प्रभाव पड़ता है। दक्षिण दिशा में पेड़ हटाना अपेक्षाकृत कम हानिकारक होता है। पेड़ को हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर से काटना शुरू करें। वास्तु शास्त्र में प्रकृति के ऋण का भुगतान का नियम है। अगर एक पेड़ काटना पड़े, तो उसके बदले कम से कम 10 नए पौधे लगाएं। जब ये पौधे फलने-फूलने लगें, तब क्षतिपूर्ति पूरी मानी जाती है। सही विधि और शुभ मुहूर्त में पेड़ काटने से वास्तु दोष नहीं लगता। इससे घर की सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और परिवार पर संकट के बादल नहीं मंडराते हैं। वास्तु विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पेड़ काटने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी या वास्तु विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें।

बुध का मीन राशि में गोचर: सभी 12 राशियों पर असर, कुछ को मिलेगा नीचभंग राजयोग का लाभ

 बुध ग्रह कुंभ राशि से निकलकर मीन राशि में प्रवेश करेंगे और 30 अप्रैल तक यहीं रहेंगे. इस दौरान बुध का गोचर सभी 12 राशियों पर असर डालेगा. ज्योतिष के अनुसार, मीन राशि में बुध कमजोर स्थिति (नीच) में होते हैं, लेकिन खास बात यह है कि यह राशि बृहस्पति की है. ऐसे में कई लोगों के लिए नीचभंग राजयोग बनने की संभावना रहती है, जिससे अच्छे परिणाम भी मिल सकते हैं. बुध को बुद्धि, तर्क, व्यापार, गणना और कम्युनिकेशन का ग्रह माना जाता है. वहीं, बृहस्पति ज्ञान, धर्म और सकारात्मक सोच के कारक हैं. जब बुध मीन राशि में आता है, तो लोगों की सोच में आध्यात्मिकता और सकारात्मकता बढ़ सकती है. आइए पंडित प्रवीण मिश्र से जानते हैं कि सभी राशियों पर बुध का क्या असर पड़ेगा. मेष राशि- आपको काम में जल्दबाजी से बचना होगा. सोच-समझकर फैसले लें. विदेश से जुड़े कामों में फायदा मिल सकता है. दुश्मनों पर जीत मिलेगी. अचानक धन लाभ भी हो सकता है. वृषभ राशि– आपके रुके हुए काम पूरे होंगे. मेहनत का फल मिलेगा. आमदनी बढ़ सकती है. मानसिक तनाव कम होगा. सेहत में सुधार आएगा. मिथुन राशि– करियर के लिए अच्छा समय है. नौकरी या प्रमोशन के मौके मिल सकते हैं. बिजनेस में भी फायदा होगा. बस बेकार के विवाद से दूर रहें. कर्क राशि– शांत मन से काम करना आपके लिए फायदेमंद रहेगा. आपकी किस्मत साथ देगी. बिना सोचे कुछ भी बोलने से बचें. नेगेटिव सोच से दूर रहें. सिंह राशि– काम में सावधानी जरूरी है. बड़े फैसले सोच-समझकर लें. परिवार में रिश्तों को संभालकर रखें. अचानक धन लाभ के मौके मिल सकते हैं. कन्या राशि– मेहनत का अच्छा परिणाम मिलेगा. अपने काम पर फोकस रखें. दूसरों पर निर्भर न रहें. जल्दबाजी से बचें. तुला राशि- इस समय आपको थोड़ा संभलकर चलना होगा. झगड़े और उधार लेन-देन से बचें. सेहत का ध्यान रखें. पढ़ाई करने वालों को सफलता मिल सकती है. वृश्चिक राशि– धन लाभ के मौके मिलेंगे. सही प्लानिंग से काम करेंगे तो सफलता मिलेगी. परिवार का साथ मिलेगा. धनु राशि- घर-परिवार से जुड़े काम पूरे होंगे. प्रॉपर्टी खरीदने के लिए समय अच्छा है. करियर में भी प्रगति होगी. नेगेटिव सोच से दूर रहें. मकर राशि- रुके हुए काम पूरे होंगे और धन की स्थिति सुधरेगी. दोस्तों की सलाह फायदेमंद रहेगी. जल्दबाजी में फैसले लेने से बचें. कुंभ राशि– मान-सम्मान बढ़ेगा और धन लाभ के योग बनेंगे. रुका हुआ पैसा वापस मिल सकता है. बोलचाल में संयम रखें. मीन राशि– आपके लिए यह समय खास रहेगा. रुके हुए काम पूरे होंगे और करियर में सफलता मिलेगी. मन की चिंता दूर होगी और आर्थिक स्थिति बेहतर होगी.

अक्षय तृतीया 2026: जानें शुभ मुहूर्त, सोना खरीदने का सही समय और 5 खास दान

अक्षय तृतीया का मतलब है वह तिथि जिसका कभी क्षय (नाश) न हो.  इस दिन आप जो भी अच्छा काम करते हैं या निवेश करते हैं, उसका फल आपको जीवनभर मिलता है. साल 2026 में 19 अप्रैल को यह पर्व मनाया जाएगा. अक्षय तृतीया पर सोना खरीदना परंपरा है, लेकिन इसे सही समय पर खरीदना ही फायदेमंद होता है. अक्षय तृतीया पर सोना खरीदने का शुभ मुहूर्त 19 अप्रैल को सुबह 10 बजकर 49 मिनट से लेकर 20 अप्रैल को सुबह 05:40 से दोपहर 12:20 तक का समय सबसे उत्तम माना जा रहा है. इस दिन दान करना भी बेहद लाभकारी माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन किया गया दान जन्म-जन्मान्तर के लिए आपके पुण्य के खाते में जुड़ जाता है. भीषण गर्मी के समय जल, मिट्टी के घड़े, सत्तू और पंखे का दान करने से न केवल पितृ तृप्त होकर आशीर्वाद देते हैं, बल्कि इससे कुंडली के ग्रह दोष भी शांत होते हैं. धार्मिक दृष्टि से यह दिन मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने और अपने धन की शुद्धि का सबसे बड़ा अवसर माना जाता है, जिससे घर में सुख-समृद्धि हमेशा बनी रहती है. जानते हैं उन पांच चीजों के दान के बारे में जिन्हें अक्षय तृतीया के दिन करना उत्तम माना गया है. जौ का दान: सोने के बराबर फल हिंदू शास्त्रों में जौ (Barley) को कनक यानी सोना माना गया है. अक्षय तृतीया के दिन जौ खरीदना और उसे भगवान विष्णु को अर्पित करना दरिद्रता दूर करता है. पूजा के बाद इस जौ को लाल कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी में रखें, इससे साल भर धन की आवक बनी रहती है. मिट्टी के घड़े का खास महत्व वैशाख की गर्मी में शीतल जल का दान सबसे बड़ा पुण्य है. इस दिन मिट्टी का नया घड़ा (मटका) खरीदकर उसमें पानी भरकर दान करने से न केवल पितृ तृप्त होते हैं, बल्कि कुंडली में चंद्रमा और मंगल की स्थिति भी शुभ होती है. घर के लिए भी नया मटका लाना सुख-समृद्धि का प्रतीक है. दक्षिणावर्ती शंख और कौड़ियां माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए इस दिन घर में दक्षिणावर्ती शंख या सफेद कौड़ियां जरूर लाएं. कौड़ियों की केसर और हल्दी से पूजा करने के बाद उन्हें धन रखने के स्थान पर रखने से व्यापार और नौकरी में आ रही रुकावटें खत्म होती हैं. सत्तू और गुड़ का सेवन इस दिन सत्तू खाने और दान करने की भी पुरानी परंपरा है. इसे अक्षय भोजन माना जाता है. नईगुड़ के साथ सत्तू का दान करने से स्वास्थ्य बेहतर रहता है. इससे ग्रहों के दोष शांत होते हैं. अक्षय तृतीया पर क्या न करें?     इस दिन घर में अंधेरा न रखें, शाम को घी का दीपक जरूर जलाएं.     किसी को उधार न दें, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इस दिन लक्ष्मी घर से बाहर नहीं भेजनी चाहिए.     घर के मुख्य द्वार पर गंदगी न रहने दें, क्योंकि माँ लक्ष्मी का आगमन वहीं से होता है.