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₹1,085 करोड़ फ्रॉड केस में अनिल अंबानी घिरे, PNB की शिकायत पर CBI ने दर्ज की नई FIR

 मुंबई केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने कारोबारी अनिल अंबानी (Anil Ambani) के खिलाफ आईपीसी की धारा-420 और 120बी के तहत एक नया मामला दर्ज किया है. यह एफआईआर पंजाब नेशनल बैंक के चीफ मैनेजर संतोषकृष्ण अन्नावरपू की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है. इस एफआईआर के मुताबिक, 2013 से 2017 के बीच अनिल अंबानी ने रिलायंस कम्‍युनिकेशंस (Reliance Communications) के अन्य तत्कालीन अधिकारियों के साथ मिलकर पीएनबी के साथ 1085 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की. बैंक ने क्या लगाया आरोप ? पंजाब नेशनल बैंक का आरोप है कि रिलायंस कम्युनिकेशंस ने 1085 करोड़ रुपये का लोन इस मंशा से लिया कि उसे वापस नहीं किया जाएगा. पीएनबी ने यह भी आरोप लगाया है कि कंपनी ने बैंक से लिए गए फंड को जानबूझकर दूसरी जगह डायवर्ट कर दिया. आरोप है कि अनिल कंपनी ने बैंक के पैसों का दुरुपयोग कर धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात (क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट) किया. एफआईआर में रिलायंस कम्युनिकेशंस, अनिल अंबानी और मझारी काकर समेत कुछ अन्य अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है. FIR में कहा गया है कि आरोपियों ने PNB को 621.39 करोड़ रुपए और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया (जिसका अब PNB में विलय हो चुका है) को 463.80 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाया है. रिलायंस पावर कंपनी के 12 ठिकानों पर मारी ताबड़तोड़ रेड बता दें कि, इससे पहले शुक्रवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अनिल अंबानी की रिलायंस पावर कंपनी के ठिकानों पर छापेमारी की. ये छापेमारी रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आरकॉम) से जुड़े बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रिलायंस पावर लिमिटेड से जुड़े लोगों के खिलाफ की गई. गौरतलब है कि इससे पहले 25 फरवरी ईडी ने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आरकॉम) से जुड़े बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अनिल अंबानी की मुंबई के पाली हिल स्थित आवासीय संपत्ति ‘अबोड’ को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया था, जिसकी अनुमानित कीमत 3,716.83 करोड़ रुपये है. इसके साथ ही इस समूह से जुड़ी अब तक कुर्क की गई कुल संपत्तियों का मूल्य 15,700 करोड़ रुपए से अधिक हो गया है.

मिडिल ईस्ट संकट के कारण कीमती धातुओं में बढ़त, सोना 1.70 लाख के करीब, चांदी 3 लाख तक पहुंची

मुंबई  मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के कारण निवेशकों ने सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) के रूप में कीमती धातुओं (सोना-चांदी) में खरीदारी का रुख किया, जिससे इस सप्ताह भी सोने-चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिली, साथ ही व्यापक कमोडिटी बाजार में अस्थिरता भी बढ़ी। हालांकि दिन के दौरान कुछ समय कीमतों में हल्की गिरावट और मुनाफावसूली देखने को मिली, लेकिन कुल मिलाकर सोने और चांदी की कीमतों का रुझान अभी भी मजबूत और तेजी वाला बना हुआ है। एमसीएक्स पर 2 अप्रैल की डिलीवरी वाले गोल्ड फ्यूचर्स में तेजी जारी रही और कीमतें 1,65,000 रुपए के रेजिस्टेंस स्तर को पार कर 1,69,880 रुपए तक पहुंच गईं। हालांकि शुक्रवार को कारोबार के अंत में सोना लगभग स्थिर रहा और 1,61,675 रुपए पर बंद हुआ, जो पिछले बंद स्तर से थोड़ा कम था। वहीं, एमसीएक्स पर 5 मई की डिलीवरी वाले सिल्वर फ्यूचर्स में भी तेजी का रुख जारी रहा। चांदी की कीमत 2,85,000 रुपए के स्तर को पार कर लगभग 3,00,000 रुपए के करीब पहुंच गई। बाजार में इस दौरान काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर के अनुसार, सोना और चांदी दोनों रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंचने के बाद इनमें हल्की गिरावट देखने को मिली, जबकि आपूर्ति बाधित होने की आशंका के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण ब्रेकआउट स्तरों के आसपास ट्रेडरों की भागीदारी बढ़ी है, लेकिन बाजार में अधिक अस्थिरता को देखते हुए जोखिम प्रबंधन पर ध्यान देना जरूरी है। एक्सपर्ट के अनुसार, तकनीकी संकेतक बताते हैं कि सोने की कीमतों में तेजी का रुझान बना हुआ है। अगर सपोर्ट स्तर मजबूत रहता है तो सोना 1,70,000 रुपए तक पहुंच सकता है। हालांकि यदि कीमत 1,57,000 रुपए से नीचे जाती है, तो गिरावट बढ़कर 1,50,000 रुपए तक जा सकती है। एक्सपर्ट का कहना है कि 2,55,000 से 2,65,000 रुपए का दायरा चांदी के लिए मजबूत मांग क्षेत्र बन चुका है। यदि तेजी जारी रहती है तो कीमत 3,00,000 से 3,05,000 रुपए तक जा सकती है। लेकिन यदि कीमत 2,60,000 रुपए से नीचे आती है, तो कुछ समय के लिए बाजार में स्थिरता या हल्की गिरावट देखी जा सकती है। इस सप्ताह अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कॉमेक्स गोल्ड फ्यूचर्स मजबूत रहे और 5,158 से 5,181 डॉलर के दायरे में कारोबार करते दिखे, जो पिछले बंद स्तर 5,078 से 5,099 डॉलर से अधिक है। वहीं, कॉमेक्स सिल्वर फ्यूचर्स में भी अच्छी तेजी देखी गई और यह लगभग 84.31 डॉलर पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान इसका उच्चतम स्तर 85.34 डॉलर और न्यूनतम स्तर 81.79 डॉलर रहा।

नया इलेक्ट्रिक स्कूटर लॉन्च, क्रूज कंट्रोल और हिल होल्ड फीचर; सिर्फ 999 यूनिट ही होंगी उपलब्ध

मुंबई  भारत में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों का बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है और कई नई कंपनियां इस क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रही हैं। इसी कड़ी में जेलो इलेक्ट्रिक ने अपने फ्लैगशिप स्कूटर का विशेष संस्करण नाइट+ रानी एडिशन पेश किया है। यह एक लिमिटेड एडिशन मॉडल है जिसे खास तौर पर अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर बाजार में उतारा गया है। कंपनी ने इस स्कूटर की कुल बिक्री को केवल 999 यूनिट तक सीमित रखा है। इसकी एक्स-शोरूम कीमत 69,990 रुपये तय की गई है और इसकी बुकिंग कंपनी के अधिकृत डीलर नेटवर्क के माध्यम से शुरू हो चुकी है। यह स्कूटर केवल बेबी पिंक रंग में उपलब्ध कराया गया है, जो इसे अन्य मॉडलों से अलग पहचान देता है।  सिंगल चार्ज पर मिलेगी 100 किलोमीटर तक की रेंज नाइट+ रानी एडिशन तकनीकी रूप से उसी प्लेटफॉर्म पर आधारित है जिस पर अगस्त 2025 में लॉन्च हुआ नाइट+ मॉडल बनाया गया था। इसमें 1.8 kWh क्षमता की पोर्टेबल लिथियम आयरन फॉस्फेट बैटरी दी गई है। कंपनी का दावा है कि एक बार पूरी तरह चार्ज होने के बाद यह स्कूटर लगभग 100 किलोमीटर तक चल सकता है। इस इलेक्ट्रिक स्कूटर में 1.5 kW क्षमता की मोटर लगाई गई है, जो इसे संतुलित प्रदर्शन देने में मदद करती है। इसकी अधिकतम रफ्तार करीब 55 किलोमीटर प्रति घंटा बताई गई है। इस मॉडल की खास बात यह है कि इसमें हटाने योग्य बैटरी दी गई है, जिसे उपयोगकर्ता आसानी से निकालकर घर या किसी अन्य स्थान पर चार्ज कर सकते हैं। क्रूज कंट्रोल और हिल होल्ड जैसे आधुनिक फीचर नाइट+ रानी एडिशन में कई ऐसे आधुनिक फीचर दिए गए हैं जिन्हें कंपनी इस श्रेणी में खास मानती है। इसमें हिल होल्ड कंट्रोल की सुविधा दी गई है, जो ढलान या चढ़ाई पर स्कूटर को स्थिर रखने में मदद करती है। इसके अलावा क्रूज कंट्रोल फीचर भी मौजूद है, जिसकी मदद से लंबी दूरी तय करते समय रफ्तार को स्थिर बनाए रखना आसान हो जाता है। स्कूटर में फॉलो-मी-होम हेडलैंप भी दिया गया है, जो अंधेरे में वाहन पार्क करने या घर तक पहुंचने के दौरान अतिरिक्त रोशनी प्रदान करता है। इसके साथ ही मोबाइल चार्ज करने के लिए यूएसबी चार्जिंग पोर्ट भी लगाया गया है, जिससे यात्रा के दौरान उपयोगकर्ताओं को सुविधा मिलती है। महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का उद्देश्य कंपनी के अनुसार इस स्कूटर के रंग और डिजाइन को भारतीय संस्कृति में “रानी” शब्द के प्रतीकात्मक महत्व को ध्यान में रखकर चुना गया है। इसका उद्देश्य आत्मविश्वास और स्वतंत्र पहचान को दर्शाना है। कंपनी का कहना है कि इस मॉडल को बाजार में लाने का मकसद इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करना भी है। हालांकि कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह स्कूटर सभी प्रकार के उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध रहेगा। कंपनी के पोर्टफोलियो में हैं कई मॉडल जेलो इलेक्ट्रिक, एसएलएसआर इलेक्ट्रो प्राइवेट लिमिटेड के अंतर्गत काम करने वाली कंपनी है। पिछले कुछ वर्षों में कंपनी ने भारत के विभिन्न शहरों में अपने डीलर नेटवर्क को विस्तार देने पर ध्यान दिया है। वर्तमान समय में कंपनी के पोर्टफोलियो में कुल पांच मॉडल शामिल हैं और नाइट+ रानी एडिशन इसी श्रृंखला का एक विशेष संस्करण है, जिसे सीमित संख्या में ग्राहकों के लिए उपलब्ध कराया गया है।

ईरान संघर्ष के बीच तेल की बढ़ती कीमतें: $120 प्रति बैरल तक जाने की संभावना

नई दिल्ली इन्फोमेरिक्स रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मनोरंजन शर्मा का कहना है कि यदि ईरान संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है तो वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। उन्होंने कहा कि एक विस्तारित भू-राजनीतिक संकट वैश्विक आर्थिक गणनाओं को महत्वपूर्ण रूप से बाधित कर सकता है। एक विशेष बातचीत में शर्मा ने कहा कि तेल की कीमतें पहले ही एक छोटे समय में तेजी से बढ़ चुकी हैं। इस संघर्ष से पहले कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे थीं, लेकिन अब यह 90 डॉलर के पार पहुंच चुकी हैं।   ब्रेंट क्रूड का मूल्य 91.84 डॉलर प्रति बैरल शनिवार को ब्रेंट क्रूड का मूल्य 91.84 डॉलर प्रति बैरल और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडियएट (डब्ल्यूटीआई) का मूल्य 89.62 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच चुका था। शर्मा के अनुसार, पहले उम्मीद थी कि संघर्ष कुछ हफ्तों में समाप्त हो जाएगा, लेकिन अब स्थिति अधिक अनिश्चित लग रही है। शर्मा ने बताया कि देश के बजट अनुमानों और रिजर्व बैंक की गणनाएं तेल की कीमतों को लगभग 70 डॉलर या उससे कम मानकर की गई थीं। यदि कीमतें स्थायी रूप से बढ़ती हैं तो नीति निर्माताओं को अपने अनुमानों पर पुनर्विचार करना पड़ेगा। कीमतों में 10 डॉलर की वृद्धि से बढ़ेगी महंगाई हालांकि, उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से घरेलू मांग द्वारा संचालित होती है, जो सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि पर इस संकट के व्यापक प्रभाव को कम कर सकती है। लेकिन तेल की उच्च कीमतें व्यापार घाटा, चालू खाता घाटा और राजकोषीय घाटा को और बिगाड़ सकती हैं। कच्चे तेल की कीमतों में 10 डॉलर की वृद्धि से खुदरा महंगाई में 0.2-0.4 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है। एक दशक पहले भू-राजनीतिक अनिश्चितता के चलते कच्चे तेल की कीमत 145-147 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। उन्होंने उम्मीद जताई कि ऐसी स्थिति फिर से नहीं आएगी। लेकिन यदि संघर्ष बढ़ता है, तो तेल के 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की संभावना को नकारा नहीं जा सकता।  

FD करने वालों के लिए खुशखबरी! HDFC बैंक ने बढ़ाया ब्याज

नई दिल्ली सुरक्षित निवेश के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) आज भी लोगों की पसंदीदा स्कीम है। इसी को देखते हुए HDFC Bank ने अपनी कुछ एफडी योजनाओं पर ब्याज दर बढ़ा दी है। नई दरें 6 मार्च 2026 से लागू हो गई हैं और यह बदलाव 3 करोड़ रुपये से कम की रिटेल FD पर लागू होगा। इस अवधि की FD पर ज्यादा ब्याज बैंक ने 3 साल 1 दिन से लेकर 4 साल 7 महीने से कम की एफडी पर ब्याज दर 0.10% बढ़ाई है। पहले सामान्य ग्राहकों को 6.40% ब्याज मिलता था, अब 6.50% मिलेगा। वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह दर 6.90% से बढ़कर 7% हो गई है। अन्य FD पर ब्याज दर नई व्यवस्था के बाद बैंक में सामान्य ग्राहकों को लगभग 2.75% से 6.50% तक ब्याज मिलेगा, जबकि सीनियर सिटीजन को 3.25% से 7% तक ब्याज मिल सकता है। निवेश से पहले ध्यान रखें FD को सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन पैसा लगाने से पहले अलग-अलग बैंकों की ब्याज दरों की तुलना करना जरूरी है। साथ ही अपनी जरूरत और समय के हिसाब से ही FD की अवधि चुननी चाहिए, ताकि बेहतर रिटर्न मिल सके।

क्या बढ़ने वाले हैं पेट्रोल-डीजल के दाम? LPG के बाद सरकार का नया बयान

नई दिल्ली हाल ही में LPG गैस की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। गैस की इन कीमतों में वृद्धि के बाद अब ऐसा कहा जा रहा था कि पेट्रोल और डीज़ल के दाम भी बढ़ सकते हैं। आपको बता दें कि सरकारी गलियारों से ऐसी जानकारी सामने आ रही है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी अभी नहीं होगी।   पेट्रोल-डीजल के दाम पर सरकार का रुख पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद, भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रहेंगी। सूत्रों का कहना है कि Strait of Hormuz से कार्गो जहाजों की आवाजाही जल्द ही सुचारू रूप से शुरू होने की उम्मीद है, जिससे आपूर्ति बाधित नहीं होगी। ऐसे में कीमतों में इजाफे की संभावना न के बराबर है। LPG की कीमतों में क्यों हुआ इजाफा? लगभग 11 महीने के अंतराल के बाद सरकार ने रसोई गैस के दामों में बदलाव किया है। घरेलू उपयोग वाले 14.2 किलो के सिलेंडर पर 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई है, वहीं 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में 115 रुपये का इजाफा हुआ है। आंकड़ों की मानें तो पिछले 12 वर्षों में एलपीजी के दाम कुल 110 रुपये बढ़े हैं। सरकार ने अब तेल कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे अपना पूरा ध्यान एलपीजी के उत्पादन को अधिकतम करने पर लगाएं ताकि भविष्य में कीमतों को नियंत्रित रखा जा सके। भारत के पास सुरक्षित भंडार: हरदीप सिंह पुरी केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने देश को विश्वास किया है कि ईंधन की कमी को लेकर घबराने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत के पास कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और एटीएफ (हवाई ईंधन) का भरपूर भंडार है। देश के पास अगले 50 से 60 दिनों के लिए पर्याप्त बैकअप मौजूद है। सप्लाई चेन और रसद के मोर्चे पर स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की स्थिति पश्चिम एशिया के संघर्ष ने वैश्विक बाजार को हिलाकर रख दिया है। पिछले एक सप्ताह में ही कच्चे तेल की कीमतों में 39% का जबरदस्त उछाल आया है। शुक्रवार को कीमतें अपने एक साल के उच्चतम स्तर (52-week high) पर पहुंच गईं, जिसमें एक ही दिन में 3.50% की तेजी देखी गई। इसके बावजूद, भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता के बल पर घरेलू कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश कर रहा है।

बढ़ती दौलत की रफ्तार: भारत में 308 अरबपति, वैश्विक रैंकिंग में तीसरा स्थान

नई दिल्ली भारत में अरबपतियों की संख्या बढ़कर 308 हो गई है, जो पिछले साल के मुकाबले 24 ज्यादा है। यह जानकारी हुरुन रिसर्च इंस्टीट्यूट की 'हुरुन ग्लोबल रिच लिस्ट 2026' में सामने आई है। इस बढ़ोतरी के साथ भारत अरबपतियों की संख्या के मामले में दुनिया में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। इस लिस्ट में अमेरिका और चीन क्रमशः पहले और दूसरे स्थान पर हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय अरबपतियों की कुल संपत्ति में सालाना आधार पर 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और यह बढ़कर 112.6 लाख करोड़ रुपए हो गई है। इनमें से 199 अरबपतियों की संपत्ति में वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि 109 अरबपतियों की संपत्ति में गिरावट आई या उनकी संपत्ति स्थिर रही। रिपोर्ट के अनुसार, भारत के अरबपतियों में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 7 प्रतिशत है। हुरुन रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में अरबपतियों की संख्या अब पारंपरिक उद्योगों से आगे बढ़कर कई नए क्षेत्रों में भी बढ़ रही है। इससे यह संकेत मिलता है कि देश में आर्थिक विकास कई अलग-अलग सेक्टरों में हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, हेल्थकेयर सेक्टर से सबसे ज्यादा 53 नए अरबपति सामने आए। इसके बाद इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स सेक्टर से 36 और कंज्यूमर गुड्स सेक्टर से 31 नए अरबपति जुड़े। हालांकि नए अरबपतियों की संख्या कम होने के बावजूद ऊर्जा सेक्टर के पास सबसे ज्यादा संपत्ति है। इस सेक्टर के सिर्फ 8 अरबपतियों के पास कुल 18.3 लाख करोड़ रुपए की संपत्ति है, जो भारत के कुल अरबपतियों की संपत्ति का लगभग 16 प्रतिशत है। भारत में मुंबई अब भी अरबपतियों का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है, जहां 95 अरबपति रहते हैं। हालांकि एशिया में अरबपतियों की राजधानी का दर्जा अब चीन के शेन्जेन को मिल गया है, जहां 133 अरबपति हैं। मुंबई में इस साल 15 नए अरबपति जुड़े, जो न्यूयॉर्क (14) और लंदन (9) से भी ज्यादा हैं। वैश्विक स्तर पर न्यूयॉर्क अरबपतियों के शहरों की सूची में पहले स्थान पर है, जहां 146 अरबपति रहते हैं। इसके बाद शंघाई (120), बीजिंग (107) और लंदन (102) का स्थान है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारतीय अरबपतियों की औसत उम्र 67 वर्ष है, जो वैश्विक औसत 65 वर्ष से थोड़ी ज्यादा है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत की 23 महिला अरबपतियों के पास कुल मिलाकर 9.8 लाख करोड़ रुपए की संपत्ति है।

तेल सप्लाई बहाल: होर्मुज से पहली खेप निकली, पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की आशंका टली

नई दिल्ली शनिवार को सरकारी सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। सूत्रों ने बताया कि भारत की ऊर्जा भंडार स्थिति लगातार बेहतर हो रही है और हालात पहले की तुलना में ज्यादा स्थिर हो रहे हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार, ऊर्जा भंडार की स्थिति में सुधार होने से सरकार को ईंधन आपूर्ति को संभालने में ज्यादा भरोसा मिला है। उन्होंने बताया कि भारत ने कच्चे तेल के आयात को विविध बनाने के लिए कदम उठाए हैं ताकि संवेदनशील समुद्री मार्गों पर निर्भरता कम हो सके। सूत्रों ने कहा कि पहले भारत के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर के स्रोतों से आता था, लेकिन अब यह हिस्सा बढ़कर करीब 70 प्रतिशत हो गया है। उन्होंने यह भी बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से पहली तेल खेप रवाना हो चुकी है, जिससे संकेत मिलता है कि तेल की आपूर्ति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। सरकार की यह सफाई उस समय आई जब विपक्षी राजनीतिक दलों ने आरोप लगाया था कि ईंधन की कीमतें बढ़ सकती हैं। इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए सरकारी सूत्रों ने कहा कि यह पूरी तरह बेबुनियाद आरोप हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले दिया गया आश्वासन सिर्फ पेट्रोल और डीजल की कीमतों से संबंधित था, यह एलपीजी के बारे में नहीं था। सूत्रों ने फिर से दोहराया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। उन्होंने कहा, "यह बात सिर्फ पेट्रोल और डीजल के लिए कही गई थी। इसका संबंध एलपीजी से नहीं था। आज हम फिर से भरोसा दिलाते हैं कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें नहीं बढ़ेंगी।" रसोई गैस के मुद्दे पर सूत्रों ने कहा कि सरकार फिलहाल एलपीजी उत्पादन को प्राथमिकता देने की दिशा में काम कर रही है, ताकि इसकी पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले 12 वर्षों में एलपीजी सिलेंडर की कीमत लगभग 110 रुपए बढ़ी है। सूत्रों के अनुसार, सरकार ऊर्जा क्षेत्र की स्थिति पर करीबी नजर रख रही है और ईंधन की आपूर्ति और कीमतों को स्थिर बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठा रही है।

मिडिल ईस्ट तनाव का असर: युद्ध लंबा खिंचा तो महंगाई बढ़ने के संकेत, भारत पर सीमित प्रभाव— SBI

नई दिल्ली. खाड़ी क्षेत्र में चल रहा संघर्ष, जिसमें इजरायल, ईरान और अमेरिका से जुड़े सैन्य ठिकाने शामिल हैं, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर डाल सकता है। शनिवार को जारी एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार, यदि यह संघर्ष लंबा चलता है तो इससे वैश्विक मंदी का दबाव, महंगाई में वृद्धि और वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है। हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के घरेलू वित्तीय बाजारों को फिलहाल भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के कदमों से सपोर्ट मिला है। आरबीआई ने सरकारी बॉन्ड (जी-सेक) यील्ड को संतुलित रखने और रुपए की अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए हस्तक्षेप किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर यह संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है तो इससे भारत के मैक्रो-इकोनॉमिक संकेतकों पर भी दबाव पड़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आरबीआई ने स्पॉट मार्केट में हस्तक्षेप करके रुपए की अधिक अस्थिरता को कम किया है और इसे 92 के स्तर से नीचे रखने में सफलता हासिल की है। रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा अनिश्चितता के बीच यह कदम काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर पड़ा है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल का व्यापार इसी मार्ग से होता है, इसलिए यहां बाधा आने से तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। फिलहाल ब्रेंट क्रूड की कीमत 91.84 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई 89.62 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुकी है। एसबीआई रिसर्च के अनुसार, अगर कच्चे तेल की कीमत में प्रति बैरल 10 डॉलर की बढ़ोतरी होती है, तो वित्त वर्ष 2027 में चालू खाते का घाटा (सीएडी) करीब 36 बेसिस प्वाइंट तक बढ़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि तेल की कीमत 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाती है, तो भारत की जीडीपी वृद्धि दर घटकर लगभग 6 प्रतिशत तक आ सकती है। एसबीआई रिसर्च ने ऐतिहासिक दृष्टिकोण से भी इस संघर्ष का विश्लेषण किया है। रिपोर्ट के अनुसार, यह युद्ध कोंड्राटिएफ वेव के अंतिम चरण के दौरान हो रहा है, जो लंबे समय तक चलने वाले आर्थिक चक्र का सिद्धांत है। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संरचनात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इस संघर्ष में कुछ देशों को फायदा भी हो सकता है। उदाहरण के लिए, अमेरिका को तेल और गैस की कीमतें बढ़ने से लाभ मिल सकता है। साथ ही, यूरोप की रूसी ऊर्जा पर निर्भरता कम होने से अमेरिका के लिए नए अवसर बन सकते हैं। वहीं, दुनिया के अधिकांश अन्य क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बाजार में बढ़ती अस्थिरता के बीच कई केंद्रीय बैंक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने का भंडार बढ़ा रहे हैं। भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में फिलहाल लगभग 17.6 प्रतिशत हिस्सा सोने का है। रिपोर्ट के अनुसार, इस संघर्ष का असर भारत पर कई तरीकों से पड़ सकता है। इसमें खाड़ी देशों से आने वाली रेमिटेंस, कच्चे तेल का आयात और पश्चिम एशियाई देशों के साथ व्यापार शामिल हैं। हालांकि रूसी कच्चे तेल की खरीद और फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स जैसे कदमों के कारण आपूर्ति से जुड़े जोखिम कुछ हद तक कम हो सकते हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय बैंक और निजी कंपनियां भी उन क्षेत्रों से जुड़ी हैं जो इस संघर्ष से प्रभावित हो सकते हैं। रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया कि खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती अनिश्चितता तेल की कीमतों, महंगाई की उम्मीदों और निवेशकों के भरोसे को आने वाले समय में प्रभावित करती रहेगी। इसलिए नीति निर्माताओं और निवेशकों को इस स्थिति पर करीबी नजर बनाए रखने की जरूरत है।