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वैश्विक बिकवाली का असर, भारतीय बाजार में भारी गिरावट; इन शेयरों को लगा तगड़ा झटका

मुंबई  अमेरिका से भारतीय शेयर बाजार तक कोहराम मचा हुआ है. इसकी सबसे बड़ी वजह AI को लेकर चिंता अब ग्‍लोबल स्‍तर पर आ चुकी है. एआई से मार्केट में भारी गिरावट देखी जा रही है. खासकर आईटी कंपनियों के लिए तो बड़ा संकट खड़ा हो चुका है. शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार भी खुलते ही तेजी से गिरा.  सेंसेक्‍स 772.19 अंक या 0.92% टूटकर 82,902.73 पर कारोबार कर रहा था. वहीं निफ्टी 0.78 फीसदी या 200.30 अंक गिरकर  25,606.90 पर कारोबार कर रहा था. सबसे ज्‍यादा गिरावट आईटी शेयरों में देखी जा रही है. टीसीएस इंफोस‍िस, एचसीएल टेक से लेकर महिंद्रा टेक के शेयर करीब 6 फीसदी तक गिरे हैं.   BSE के टॉप 30 शेयरों में से 24 शेयर गिरावट पर कारोबार कर रहे हैं. बाकी 6 शेयरों में तेजी है, जो मामूली तेजी पर हैं. Infosys में करीब 6 फीसदी, टीसीएस में 5 फीसदी से ज्‍यादा की गिरावट आई है. एचसीएल टेक 4.14 फीसदी और टेक महिंद्रा के शेयरों में करीब 3 फीसदी की गिरावट है.   बीएसई के 3,337  शेयरों में से 847 शेयरों में तेजी और 2,327 शेयर गिरावट पर कारोबार कर रहे हैं. 163 शेयर अनचेंज हैं. 41 शेयर 52 सप्‍ताह के हाई पर और 106 शेयर 52 सप्‍ताह के निचले स्‍तर पर हैं. वहीं 55 शेयरों में लोअर सर्किट और 79 शेयरों में अपर सर्किट है.                 अमेरिकी बाजार में 90 लाख करोड़ स्‍वाहा वहीं अमेरिका में लगातार तीसरे दिन गिरावट आई है. वहीं अब एशियाई मार्केट में भी गिरावट हावी है. निवेशकों को डर है कि नए AI टूल्स कई पारंपरिक बिजनेस मॉडल को भारी नुकसान पहुंचा सकता है और कंपनियों के मुनाफे को कम कर सकता है. AI का सबसे ज्‍यादा असबर ट्रकिंग, लॉजिस्टिक्स, रियल एस्टेट और सॉफ्टवेयर से जुड़े शेयरों में देखने को मिल रहा है. रिपोर्र्ट्स का दावा है कि अमेरिकी बाजार में आई गिरावट से करीब एक ट्रिलियन डॉलर या 90 लाख करोड़ रुपये साफ हो गए हैं.  अमेरिकी बाजार में कोहराम  अमेरिकी मार्केट में गुरुवार को डॉऊ जोंस 669.42 अंक या 1.34% गिरकर 49,451.98  पर क्‍लोज हुआ. नैसडैक में सबसे ज्‍यादा गिरावट रही, जो 469.32  अंक या 2.03% टूटकर 22,597.15 पर बंद हुआ. S&P 500 इंडेक्‍स 1.57% या 108.71 अंक टूटकर 6,832.76  पर क्‍लोज हुए.

सिर्फ 300 रुपये का निवेश, 600 करोड़ में डोमेन बेचकर बना अरबपति

 नई दिल्ली 1993 में 10 साल के एक लड़के ने AI.com नाम की वेबसाइट खरीदी थी. तब यह सिर्फ एक आम इंटरनेट एड्रेस था. उस समय AI कोई ट्रेंड नहीं था. न सोशल मीडिया था, न चैटबॉट्स, न लोग रोज AI की बातें करते थे. उस वक्त इस डोमेन की कीमत कुछ सौ रुपये से ज्यादा नहीं थी. आज वही AI.com डोमेन करीब 70 मिलियन डॉलर में बिक चुका है. भारतीय रुपये में देखें तो यह रकम 600 करोड़ रुपये से ज्यादा बैठती है. यह सिर्फ एक डोमेन की बिक्री नहीं है. यह बताता है कि इंटरनेट पर नाम की कीमत कैसे बदलती है. डोमेन खरीद फरोख्त की पूरी कहानी  जिस शख्स ने AI.com खरीदा था, उसका नाम अरस्यान इस्माइल है. वह मलेशिया का टेक एंटरप्रेन्योर हैं. 1993 में जब इंटरनेट नया-नया आया था, तब उन्होंने यह डोमेन सिर्फ शौक में रजिस्टर करा लिया था. उस वक्त किसी को अंदाजा नहीं था कि AI एक दिन इतना बड़ा ट्रेंड बनेगा. उस समय डोमेन खरीदने की फीस बहुत कम होती थी. रिपोर्ट्स के मुताबिक अरस्यान इस्माइल ने AI.com बहुत ही मामूली कीमत पर लिया था. आज के पैसों में देखें तो कुछ सौ रुपये से ज्यादा नहीं. तब यह एक आम टेक-टर्म जैसा नाम था. बीच के सालों में AI.com कई बार लीज पर भी दिया गया. अलग-अलग कंपनियों ने इस डोमेन को कुछ समय के लिए इस्तेमाल किया. लेकिन डोमेन की असली मालकिनी अरस्यान के पास ही रही. 80 करोड़ में दुबारा हासिल किया डोमेन 2025 में एक दिलचस्प मोड़ आया. AI.com कुछ समय के लिए उनके कंट्रोल से बाहर चला गया था. रिपोर्ट्स में बताया गया कि डोमेन पर कंट्रोल वापस पाने के लिए अरस्यान को करीब 10 मिलियन डॉलर चुकाने पड़े. यानी करीब 80 करोड़ रुपये से ज्यादा. मतलब जिस डोमेन को उन्होंने कभी मामूली रकम में खरीदा था, उसी को वापस पाने के लिए करोड़ों खर्च करने पड़े. लेकिन तब तक AI पूरी दुनिया में ट्रेंड बन चुका था. उन्हें पता था कि यह नाम आगे चलकर और बड़ा बन सकता है. Crypto.com के सीईओ ने खरीदा डोमेन डोमेन वापस लेने के बाद उन्होंने इसे कुछ समय तक होल्ड किया. फिर 2026 में यह डोमेन Crypto.com के CEO को करीब 70 मिलियन डॉलर में बेच दिया गया. AI.com को अब Crypto.com के CEO ने खरीदा है. Crypto.com पहले से डिजिटल फाइनेंस की दुनिया में बड़ा नाम है. अब कंपनी AI की तरफ भी कदम बढ़ा रही है. माना जा रहा है कि AI.com को एक नए AI प्लेटफॉर्म या सर्विस के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा. पिछले दो साल में AI अचानक हर जगह दिखने लगा है. लोग AI से फोटो बना रहे हैं. वीडियो बना रहे हैं. ऑफिस का काम कर रहे हैं. AI अब सिर्फ टेक का टूल नहीं रहा. AI एक ब्रांड बन चुका है. इसी वजह से AI.com जैसे नाम की कीमत अचानक आसमान पर पहुंच गई. जो कंपनी AI से जुड़ी सर्विस बनाना चाहती है, उसके लिए ऐसा नाम बहुत काम का होता है. यूजर को भी ऐसा नाम देखकर भरोसा जल्दी होता है. यह डील यह भी दिखाती है कि आने वाले समय में इंटरनेट पर ब्रांडिंग कितनी अहम होने वाली है. आज जमीन और फ्लैट की कीमत बढ़ती है. वैसे ही अब डिजिटल नामों की कीमत बढ़ रही है. आज जो डोमेन आम लगते हैं, कल वही करोड़ों में बिक सकते हैं. AI.com की कहानी सिर्फ किस्मत की कहानी नहीं है. यह आने वाले डिजिटल ट्रेंड की झलक भी है.  

सोना-चांदी में तेज गिरावट, निवेशकों को झटका या खरीदारी का मौका?

इंदौर  सोना-चांदी की कीमतों (Gold-Silver Rate) में उतार-चढ़ाव का सिलसिला जारी है. इस साल की शुरुआत में जहां दोनों कीमती धातुओं ने रॉकेट की रफ्तार से भागते हुए पहले रिकॉर्ड बनाए, फिर अचानक ये क्रैश (Gold-Silver Price Crash) नजर आईं. इसके बाद लगातार इसके भाव में उतार-चढ़ाव का सिलसिला जारी है. सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन गुरुवार को जहां चांदी फिर सस्ती (Silver Price Fall) हो गई, तो सोने का भाव भी कम (Gold Rate Fall) हुआ है. अब अपने हाई से चांदी 1.59 लाख रुपये से ज्यादा कम रेट पर मिल रही है.  कहां तक टूटेगा Silver Rate?  चांदी की कीमत में गुरुवार को फिर से गिरावट देखने को मिली है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर 5 मार्च की एक्सपायरी वाली चांदी का भाव बीते कारोबारी दिन 2,63,018 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ था और ये खुलने के साथ ही 2,60,453 रुपये तक फिसल गया. यानी एक झटके में 1 Kg Silver Price 2,565 रुपये कम हो गया. कुछ एक्सपर्ट्स का आने वाले समय में इसके 2 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर तक टूटने का अनुमान जता रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि ये एक बार फिर से तेज रफ्तार पकड़ सकती है.  हाई से अब इतनी सस्ती चांदी   इस साल के शुरुआती जनवरी महीने में ही चांदी ने लाइफ टाइम हाई लेवल छुआ था. बीते 29 जनवरी को Silver Price रॉकेट की रफ्तार से भागते हुए इतिहास में पहली बार 4 लाख रुपये के ऐतिहासिक स्तर के पार निकला था और 4,20,048 रुपये प्रति किलो के हाई लेवल पर पहुंचा था. हालांकि, इसके उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली. गुरुवार के ओपनिंग भाव से तुलना करें, तो अभी 1 किलो चांदी 1,59,595 रुपये तक सस्ती (Silver Cheaper) मिल रही है.  Gold Rate भी चांदी के साथ फिसला गुरुवार को कमोडिटी मार्केट में कारोबार की शुरुआत होने पर न सिर्फ चांदी की कीमत टूटी है, बल्कि सोने का भाव भी फिसला है और 1000 रुपये से ज्यादा सस्ता हो गया है. बीते कारोबारी दिन बुधवार को 2 अप्रैल की एक्सपायरी वाला 10 Gram 24 Karat Gold Rate 1,58,755 रुपये पर क्लोज हुआ था और ये ओपनिंग के साथ ही गिरकर 1,57,701 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया. यानी ये 1,054 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हो गया है.  सोना भी हाई से काफी सस्ता  चांदी की तरह ही सोने की कीमत ने भी बीते 29 जनवरी को ही अपना रिकॉर्ड हाई लेवल टच किया था. जी हां, ये तूफानी तेजी से भागते हुए 1,93,096 रुपये प्रति 10 ग्राम के लेवल पर जा पहुंचा था और इसमें भी लगातार गिरावट देखने को मिली. Gold Rate MCX High से तुलना करें, तो इसका वायदा भाव हाई से अभी 35,395 रुपये कम चल रहा है. 

कीमती धातुओं में गिरावट के साथ शेयर बाजार भी धड़ाम, निवेशकों की बढ़ी चिंता

मुंबई     सोना-चांदी की कीमतों में फिर से गिरावट (Gold-Silver Rate Fall) आई है. अपने हाई लेवल से दोनों कीमती धातुएं क्रैश नजर आ रही हैं. एक ओर जहां चांदी का भाव एमसीएक्स पर हाई से 1.59 लाख रुपये प्रति किलोग्राम कम है, तो वहीं सोना भी 35,000 रुपये से ज्यादा सस्ता मिल रहा है. कीमती धातुओं के भाव में नरमी के साथ ही भारतीय शेयर बाजार भी सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन गुरुवार को खुलने के साथ ही धड़ाम नजर आया. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के 30 शेयरों वाले सेंसेक्स (BSE Sensex) ने तो ओपनिंग के साथ ही 400 अंकों से ज्यादा का गोता लगा दिया.  सेंसेक्स-निफ्टी की खराब शुरुआत  शेयर मार्केट में कारोबार ओपन होने पर BSE Sensex अपने पिछले बंद 84,233.64 की तुलना में फिसलकर 83,968.43 पर खुला और फिर तेजी से फिसलता ही चला गया. ये शुरुआती कारोबार में ही 438 अंक की गिरावट लेकर 83,795.65 के लेवल पर आ गया. सेंसेक्स की तरह ही NSE Nifty का भी हाल नजर आया. ये 50 शेयरों वाला इंडेक्स अपने पिछले बंद 25,953.85के मुकाबले गिरावट के साथ 25,906.70 के स्तर पर ओपन हुआ और फिर गिरकर 25,822.30 तक टूट गया. इसके शुरुआती कारोबार में ही 131 अंक की गिरावट आई.  IT Stocks भर-भराकर टूटे मार्केट में गिरावट के बीच सबसे ज्यादा आईटी शेयर फिसले. बीएसई की लार्जकैप कैटेगरी में शामिल Infosys Share (4.50%), Tech Mahindra Share (4.20%), TCS Share (3.80%). HCL Tech Share (3.40%) की गिरावट लेकर कारोबार कर रहे थे. आईटी शेयरों में बीते सप्ताह भी तेज गिरावट देखने को मिली थी, जब अमेरिका में Anthropic AI Tools की एंट्री से कोहराम मचा था और NASDAQ लगातार कई दिन डेढ़ फीसदी के ज्यादा फिसला था.  ये 10 शेयर सबसे बड़े लूजर  भारतीय शेयर बाजार में गिरावट के बीच सबसे बड़े लूजर शेयरों की लिस्ट देखें, तो आईटी शेयरों के अलावा लार्जकैप में Eternal Share (2%), M&M Share (1.10%) फिसला. इसके अलावा मिडकैप कैटेगरी में शामिल Coforge Share (5%), Mphasis Share (4.10%), Presistent Share (3.90%), Godrej Properties Share (2%) फिसलकर कारोबार कर रहे थे. स्मॉलकैप शेयरों में देखें, तो ARE&M Share (4.10%), CYIENT Share (3.50%), KFintech Share (3%) और FSL Share (2.80%) की गिरावट में ट्रेड कर रहा था.  Gold-Silver हाई से इतना सस्ता  एक ओर जहां शेयर बाजार के दोनों इंडेक्स सेंसेक्स-निफ्टी रेड जोन में कारोबार करते नजर आ रहे हैं, तो वहीं मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर सोना-चांदी भी फिसल गए हैं. 5 मार्च की एक्सपायरी वाली चांदी का भाव बीते कारोबारी दिन के 2,63,018 रुपये प्रति किलोग्राम से टूटकर 2,60,453 रुपये पर आ गया और 1 Kg Silver Price 2,565 रुपये कम हो गया. वहीं हाई लेवल 4,20,048 रुपये प्रति किलो से ये 1,59,595 रुपये तक सस्ती (Silver Cheaper) हो चुकी है.  सोने का भाव भी फिसला है और 2 अप्रैल की एक्सपायरी वाला 10 Gram 24 Karat Gold Rate पिछले बंद 1,58,755 रुपये से गिरकर गुरुवार को खुलते ही 1,57,701 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया. यानी ये 1,054 रुपये सस्ता हुआ. वहीं हाई बीते 29 जनवरी के रिकॉर्ड हाई 1,93,096 रुपये प्रति 10 ग्राम के लेवल से ये अभी 35,395 रुपये सस्ता मिल रहा है. 

MARUTI की रफ्तार अब रेल की पटरियों पर भी, जानें नया रिकॉर्ड

 नई दिल्ली आपने सड़क पर दौड़ती मारु़ति की रफ्तार तो खूब देखी होगी. लेकिन अब रेल की पटरियों पर भी मारुति की स्पीड देख लीजिए. मारुति सुजुकी ने साल 2025 में गाड़ियों की ढुलाई के मामले में एक नया कीर्तिमान बना दिया है. कंपनी ने कैलेंडर ईयर 2025 में रेल के जरिए 5.85 लाख से ज्यादा गाड़ियां भेजी हैं. यह अब तक का सबसे बड़ा रेल डिस्पैच आंकड़ा है. साल 2024 के मुकाबले इसमें 18 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इससे साफ है कि मारुति के लॉजिस्टिक्स सिस्टम में रेलवे की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है. रेल से भेजी जा रही हर चौथी कार अब मारुति सुजुकी की कुल गाड़ियों में से करीब 26 फीसदी गाड़ियां रेल के जरिए डिस्पैच हो रही हैं. साल 2016 में यह हिस्सा सिर्फ 5.1 फीसदी था. आंकड़ों के हिसाब से देखें तो पिछले 10 साल में रेल से भेजी जाने वाली गाड़ियों की संख्या सात गुना से भी ज्यादा बढ़ गई है. 2016 में जहां यह संख्या करीब 77 हजार यूनिट थी, वहीं 2025 में यह बढ़कर 5.85 लाख यूनिट से ज्यादा हो गई. कंपनी के मुताबिक रेल ट्रांसपोर्ट के बढ़ते इस्तेमाल से साल 2025 में करीब 88 हजार मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन से बचाव हुआ. इसके साथ ही 6.8 करोड़ लीटर से ज्यादा ईंधन की बचत भी हुई. माना जा रहा है कि इससे देश के कई बड़े वाहन कॉरिडोर पर सड़क ट्रैफिक का दबाव भी कम हुआ है. साल 2025 में मारुति सुजुकी के रेल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में दो अहम बदलाव देखने को मिले. कंपनी ने अपने मानेसर प्लांट में इन प्लांट रेलवे साइडिंग शुरू की, जिसे भारत में ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग के लिए सबसे बड़ी साइडिंग बताया जा रहा है. इसके अलावा मारुति ने पहली बार कश्मीर घाटी तक रेल के जरिए गाड़ियों की डिलीवरी की. यह खेप चिनाब रेल ब्रिज के रास्ते भेजी गई. फैक्ट्री से सीधे रेल कनेक्शन का असर गुजरात और मानेसर प्लांट में मौजूद इन प्लांट रेलवे साइडिंग से भेजी गई गाड़ियों का हिस्सा 2025 में मारुति के कुल रेल डिस्पैच का 53 फीसदी रहा. यह दिखाता है कि कंपनी अब सीधे फैक्ट्री से जुड़े रेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज्यादा भरोसा कर रही है. मारुति सुजुकी साल 2013 से रेलवे के जरिए वाहन ढुलाई कर रही है. उस वक्त मारुति देश की पहली कार कंपनी बनी थी, जिसे ऑटोमोबाइल फ्रेट ट्रेन ऑपरेटर का लाइसेंस मिला.  फाइनेंशियल ईयर 2014-15 से अब तक कंपनी 22 डिस्पैच लोकेशन से 28 लाख से ज्यादा गाड़ियां रेल के जरिए भेज चुकी है. ये गाड़ियां देश के 600 से ज्यादा शहरों तक पहुंचाई गई हैं. फिलहाल कंपनी के पास 45 से ज्यादा फ्लेक्सी डेक रेक हैं, जिनमें हर एक रेक करीब 260 गाड़ियां एक बार में ले जाने की क्षमता रखता है. मारुति सुजुकी का कहना है कि आने वाले सालों में वह रेल के जरिए होने वाली गाड़ियों की ढुलाई को और बढ़ाएगी. कंपनी का लक्ष्य वित्त वर्ष 2031 तक अपने कुल आउटबाउंड लॉजिस्टिक्स में रेल का हिस्सा करीब 35 फीसदी तक पहुंचाने का है.  जाहिर है कि, इतनी भारी मात्रा में यदि कारों को आम ट्रांसपोर्ट (ट्रकों) द्वारा एक जगह से दूसरी जगह तक भेजा जाता तो इससे लाखों लीटर डीजल की खपत होती. साथ ही भारी वाहनों की सड़क पर मौजूदगी से जो ट्रैफिक जाम जैसी समस्या होती वो अलग. इसके अलावा रोड ट्रांसपोर्ट के चलते वाहनों की डिलीवरी में भी देरी होती, जिसका सीधा असर कारों के वेटिंग पीरियड पर भी देखने को मिलता. 

iPhone खोना पड़ा भारी? नहीं! Apple ने थमा दिया 2TB का नया मॉडल

नई दिल्ली एक शख्स के लिए उसके iPhone का खो जाना बेहद फायदेमंद साबित हुआ। दरअसल Reddit यूजर 'ScienceFuture2300' ने आप बीती शेयर करते हुए बताया कि किस तरह उसका 256GB स्टोरेज वाला iPhone 17 Pro Max खो गया था। इसके बाद जब उसने AppleCare+ प्लान के तरह फोन के चोरी या गुमशुदगी का क्लेम फाइल किया, तो ऐपल ने उसे 8 गुना ज्यादा स्टोरेज वाला iPhone लौटा दिया। गौर करने वाली बात है कि इस शख्स का iPhone सिर्फ 256 GB का था लेकिन बदले में उसे 2TB वाला मॉडल मिल गया। सर्विस सेंटर की गलती से यूजर की मौज रेडिट पर शेयर किया गया ये मामला,(REF.) काफी दिलचस्प है। Reddit यूजर 'ScienceFuture2300' को उनके 256GB वाले iPhone 17 Pro Max के बदले 2TB वाला मॉडल थमा दिया गया। इसे लेकर यूजर ने अपने पोस्ट में फोन के सीरियल नंबर और स्टोरेज से जुड़ी तस्वीरें भी शेयर की हैं। बता दें कि iPhone के सीरियल नंबर के जरिए पता लगाया जा सकता है कि फोन नया है या Apple द्वारा रिप्लेस किया गया यूनिट। खोने पर क्यों मिला रिप्लेसमेंट? आपके मन में सवाल आ सकता है कि इस यूजर को आखिर फोन खोने पर रिप्लेसमेंट क्यों मिला। बता दें कि AppleCare+ प्लान लेने पर यूजर फोन खराब होने, टूटने और खो जाने पर ऐपल से रिप्लेसमेंट मांग सकता है। iPhone के टूटने या खराब होने पर अगर फोन रिपेयर हो सकता है, तो ऐपल फोन ठीक करके देता है। वहीं अगर फोन ठीक होने की हालत में न हो या खो जाए, तो AppleCare+ प्लान के तहत बदले में फोन उपलब्ध कराया जाता है। इसके लिए कुछ चार्ज ऐपल लेता है। हालांकि जिस फोन के खोने की शिकायत की जाती है, उसे ऐपल बैकएंड से ब्लॉक कर देता है ताकि उसका इस्तेमाल कोई न कर पाए। ऐपल ने क्यों दिया ज्यादा महंगा फोन? कई बार यूजर जिस फोन के लिए क्लेम करता है, वह अगर ऐपल के पास न हो तो ऐपल हर्जाने के तौर पर उससे बेहतर मॉडल अपने यूजर को उपलब्ध कराता है। ऐसा कयास लगाया जा रहा है कि संभव है इस यूजर के फोन का मॉडल ऐपल के पास स्टॉक में नहीं होगा। इसके साथ ही ऐसा होने पर ऐपल किसी तरह का एक्सट्रा चार्ज नहीं लेता। ऐसा ही इस यूजर के साथ भी हुआ है। Apple ने पहले भी दिखाई है उदारता ऐसा पहली बार नहीं है कि ऐपल ने किसी के साथ इतनी उदारता दिखाई हो। 2018 में इंटेल मैकबुक प्रो के मालिक को रिपेयर के बदले सीधे M4 Max चिप वाला मैकबुक प्रो दे दिया गया था। इसी तरह 2019 में मैकबुक प्रो के मालिक को M5 मॉडल वाला लेटेस्ट मैकबुक प्रो रिप्लेसमेंट में मिला था। यही वजह है कि अक्सर लोग ऐपल के प्रोडक्ट लेते समय Apple का Care+ प्लान जरूर लेते हैं।

सोने में तेजी, चांदी में राहत बरकरार! 10 ग्राम गोल्ड का नया भाव क्या है?

नई दिल्ली  सोना-चांदी की कीमतों (Gold-Silver Rates) में उतार-चढ़ाव का सिलसिला जारी है. इस साल बीते 29 जनवरी को लाइफ टाइम हाई छूने के बाद अचानक दोनों कीमती धातुएं क्रैश (Gold-Silver Price Crash) हो गई थीं, लेकिन बुधवार को इनमें एक बार फिर से तेज उछाल देखने को मिला है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सिल्वर प्राइस खुलने के साथ ही झटके में 8200 रुपये से ज्यादा चढ़ गया, तो सोना भी महंगा हुआ है. हालांकि, अगर गोल्ड-सिल्वर हाई रेट्स से तुलना करें, तो चांदी अभी भी 1.60 लाख रुपये प्रति किलो से ज्यादा सस्ती (Silver Cheaper From High) मिल रही है.  चांदी की ये लेटेस्ट कीमत सबसे पहले बात करते हैं, सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन बुधवार को एमसीएक्स पर चांदी के ओपनिंग कारोबार के बारे में, तो 5 मार्च की एक्सपायरी वाला MCX Silver Price अपने पिछले कारोबारी बंद 2,52,548 रुपये की तुलना में ओपन होते ही एक झटके में 2,60,838 रुपये के लेवल पर जा पहुंचा. इस हिसाब से कैलकुलेट करें, तो 1 Kg Silver 8,290 रुपये मंहगी हो गई है.  हाई से अभी भी इतनी सस्ती चांदी भले ही चांदी की कीमत में बुधवार को तेज उछाल देखने को मिला है, लेकिन ये अपने लाइफ टाइम हाई लेवल से अभी भी करीब 1.60 लाख रुपये के आसपास सस्ती मिल रही है. दरअसल, बीते 29 जनवरी को चांदी ने तूफानी रफ्तार से भागते हुए पहली बार 4 लाख का स्तर पार किया था और 4,20,048 रुपये के हाई पर पहुंच गई थी. लेकिन ये स्तर छूने के बाद से ही Silver Crash होने का सिलसिला शुरु हो गया. फिलहाल, हाई से गिरावट देखें, तो चांदी 1,59,210 रुपये प्रति किलो सस्ती है.  Gold Rate का आज का हाल  चांदी के बाद बताते हैं बुधवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर 2 अप्रैल की एक्सपायरी वाले सोने के वायदा भाव के बारे में, तो MCX पर सोना ओपनिंग के साथ ही 1633 रुपये उछल गया. बीते कारोबारी दिन मंगलवार को 10 Gram 24 Karat Gold Rate 1,56,803 रुपये पर क्लोज हुआ था और ये खुलने के साथ ही उछलकर 1,58,436 रुपये पर पहुंच गया.  हाई लेवल से इतना सस्ता सोना चांदी की तरह ही सोने की कीमतों में ताजा उछाल के बावजूद ये कीमती धातु अपने लाइफ टाइम हाई लेवल से सस्ती बनी हुई है. जी हां, बीते 29 जनवरी को जहां Silver Price 4 लाख रुपये के पार निकला था, तो इसके कदम से कदम मिलाकर चलते हुए Gold Rate भी 1,93,096 रुपये प्रति 10 ग्राम के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था. इस हाई से अभी भी वायदा सोना 34,660 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता बना हुआ है.

13 साल बाद TESLA के VP राज जगन्नाथन ने इस्तीफा दिया, जानें क्या है इसका मतलब

 नई दिल्ली  इलेक्ट्रिक कार बनाने वाली दिग्गज अमेरिकन कंपनी टेस्ला के लिए यह समय आसान नहीं चल रहा है. इसी बीच कंपनी को एक और बड़ा झटका लगा है. टेस्ला के वाइस प्रेसिडेंट राज जगन्नाथन (Raj Jegannathan) ने 13 साल तक काम करने के बाद कंपनी छोड़ने का ऐलान कर दिया है. उन्होंने यह जानकारी लिंक्डइन पर एक छोटे से पोस्ट के जरिए दी. राज जगन्नाथन ने टेस्ला में अपने सफर को “लगातार बदलते और आगे बढ़ते रहने वाली जर्नी” बताया. राज जगन्नाथन ने अपने लिंक्डइन पोस्ट में लिखा कि, "13 साल के सफर को एक ही पोस्ट में समेटना आसान नहीं है. टेस्ला में यह यात्रा लगातार बदलाव और आगे बढ़ने की रही है. दुनिया के सबसे बड़े एआई क्लस्टर में से एक को डिजाइन करने, तैयार करने और चलाने की तकनीकी चुनौतियों से लेकर आईटी, सिक्योरिटी, सेल्स और सर्विस में अहम योगदान देना मेरे लिए एक सम्मान की बात रही है." हालांकि उन्होंने कंपनी छोड़ने की वजह को लेकर ज्यादा जानकारी साझा नहीं की. क्या थी राज जगन्नाथन की भूमिका राज जगन्नाथन टेस्ला में वाइस प्रेसिडेंट के तौर पर आईटी, एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, बिजनेस एप्लीकेशंस और इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. पिछले साल उन्हें टेस्ला की सेल्स टीम को लीड करने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी. यह जिम्मेदारी उन्हें तब मिली थी जब नॉर्थ अमेरिका के सेल्स हेड ट्रॉय जोन्स को कंपनी से हटा दिया गया था. टेस्ला की गिरती बिक्री  इस समय टेस्ला कई चुनौतियों से जूझ रही है. कंपनी की इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री में गिरावट देखी जा रही है. इसकी एक बड़ी वजह टेस्ला के पुराने हो चुके इलेक्ट्रिक वाहन मॉडल माने जा रहे हैं. इसके अलावा सीईओ एलन मस्क के राजनीतिक बयानों और गतिविधियों को लेकर भी कंपनी को आलोचना का सामना करना पड़ा है. इससे टेस्ला की ब्रांड इमेज को काफी नुकसान पहुंचा है. यूरोपीय बाजार में भी टेस्ला की कारों की बिक्री गिर चुकी है. EV के गढ़ में लड़खड़ाई टेस्ला  Tesla कारों की बिक्री में आई सुस्ती का असर अब उन बाजारों में भी नजर आने लगा है, जिन्हें टेस्ला का गढ़ माना जाता था. नॉर्वे ऐसा ही एक देश है, जहां इलेक्ट्रिक गाड़ियों की जबरदस्त मांग रहती है, लेकिन अब यहां भी टेस्ला की पकड़ ढीली पड़ती दिख रही है. जनवरी 2026 के नए रजिस्ट्रेशन आंकड़ों के अनुसार, नॉर्वे में Tesla Model Y की सिर्फ 62 यूनिट्स बिकीं. यह कुल नई कार बिक्री का केवल 2.8 प्रतिशत है. पूरी टेस्ला रेंज की बात करें तो कंपनी ने कुल 83 कारें बेचीं, जो पिछले साल जनवरी में बेचे गए कारों के मुकाबले 88 प्रतिशत की बड़ी गिरावट है. पहली बार घटा रेवेन्यू टेस्ला के लिए 2025 एक अहम साल साबित हुआ. इस साल कंपनी का रेवेन्यू 3 प्रतिशत गिर गया, जो अब तक का पहला मौका है जब टेस्ला की कमाई में गिरावट दर्ज की गई. अब कंपनी पर दबाव है कि वह इलेक्ट्रिक वाहन बिक्री को दोबारा रफ्तार दे और लंबे समय से किए जा रहे ड्राइवरलेस तकनीक के वादों को पूरा करे. कौन हैं राज जगन्नाथन राज जगन्नाथन ने साल 2012 में टेस्ला जॉइन की थी. उस समय वे क्लाउड सिक्योरिटी और आईटी के तकनीकी विशेषज्ञ थे. धीरे धीरे उन्होंने कंपनी में ऊंचे पद हासिल किए और वाइस प्रेसिडेंट बने. टेस्ला से पहले भी उन्होंने बड़ी टेक कंपनियों के साथ काम किया. उन्होंने ओरेकल में सीनियर प्रोडक्ट मैनेजर के तौर पर काम किया और माइक्रोसॉफ्ट के एज़्योर एआई प्रोजेक्ट्स से भी जुड़े रहे. राज जगन्नाथन ने आईआईटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया है और स्टैनफोर्ड ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस से एमबीए किया है. अपने करियर की शुरुआत उन्होंने भारत में इंफोसिस से की थी, जहां वे सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट टीम को लीड कर चुके हैं. राज जगन्नाथन का जाना टेस्ला के लिए ऐसे समय में हुआ है जब कंपनी पहले से दबाव में है. अमेरिका में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग में सुस्ती है. वहीं एलन मस्क का फोकस अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेल्फ ड्राइविंग सिस्टम और ह्यूमनॉइड रोबोट्स पर ज्यादा नजर आ रहा है. पिछले साल टेस्ला दुनिया की सबसे बड़ी ईवी कंपनी का खिताब भी चीन की बीवाईडी के हाथों गंवा चुकी है. दुनिया के इलेक्ट्रिक कार बाजार में BYD का दबदबा बढ़ रहा है.  टेस्ला में लगातार हो रहे बड़े इस्तीफे राज जगन्नाथन अकेले ऐसे सीनियर अधिकारी नहीं हैं जिन्होंने हाल के समय में टेस्ला छोड़ी है. पिछले कुछ सालों में कई बड़े नाम कंपनी से बाहर हो चुके हैं. एलन मस्क के करीबी माने जाने वाले ओमेद अफशार भी पिछले साल कंपनी छोड़ चुके हैं. इसके अलावा ऑप्टिमस रोबोट प्रोजेक्ट के इंजीनियरिंग हेड मिलान कोवाक और लंबे समय तक सॉफ्टवेयर टीम संभालने वाले डेविड लॉ भी टेस्ला से विदा ले चुके हैं. इन लगातार हो रहे इस्तीफों ने टेस्ला के भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. अब सबकी नजर इस पर है कि कंपनी इन चुनौतियों से कैसे उबरती है और क्या एक बार फिर अपनी खोई हुई रफ्तार हासिल कर पाती है. भारत में भी टेस्ला की शुरुआत बेहद धीमी रही है. पिछले साल जुलाई में टेस्ला ने मुंबई के बांद्र कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) में देश का पहला शोरूम शुरू किया. इस दौरान कंपनी ने Tesla Model Y को इंडियन मार्केट में लॉन्च किया है, जिसकी शुरुआती कीमत 59.89 लाख रुपये है. हाई इंपोर्ट ड्यूटी के चलते कार की कीमत काफी ज्यादा है, और इसका असर कार सेल्स पर भी देखने को मिल रहा है. फिलहाल कंपनी इस कार की खरीद पर एक्सचेंज ऑफर भी दे रही है, ताकि बिक्री को रफ्तार दी जा सके. 

शेयर बाजार में लगातार उछाल, सेंसेक्स 84,300 के पार, रुपया 90.77 पर टूटा

मुंबई  एशियाई बाजारों में मजबूती और विदेशी निवेशकों के लगातार निवेश से मंगलवार को घरेलू शेयर बाजार में तेजी का रुख बना रहा. सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में बढ़त देखने को मिली. शुरुआती कारोबार में निवेशकों का रुझान बड़े शेयरों की ओर रहा, जिससे प्रमुख सूचकांक नई ऊंचाइयों के करीब पहुंच गए. बीएसई सेंसेक्स मंगलवार को शुरुआती कारोबार में 247.01 अंक यानी 0.29 प्रतिशत की बढ़त के साथ 84,312.76 अंक पर पहुंच गया. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 80.25 अंक या 0.31 प्रतिशत चढ़कर 25,947.55 अंक पर कारोबार करता दिखा. इन शेयरों में रही मजबूती सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से अधिकांश के शेयर हरे निशान में रहे. इटर्नल, टाइटन, एक्सिस बैंक, एनटीपीसी, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, सन फार्मास्युटिकल्स, पावरग्रिड, मारुति सुजुकी, महिंद्रा एंड महिंद्रा, लार्सन एंड टुब्रो, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, रिलायंस इंडस्ट्रीज, भारती एयरटेल और टाटा स्टील के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली. कुछ दिग्गज शेयरों में दबाव हालांकि, सभी शेयरों में तेजी नहीं रही. बजाज फाइनेंस, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, एशियन पेंट्स, इंडिगो, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और एचडीएफसी बैंक के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जिससे बाजार की तेजी कुछ हद तक सीमित रही. एशियाई और अमेरिकी बाजारों का असर एशियाई बाजारों में जापान का निक्की 225, हांगकांग का हैंग सेंग और दक्षिण कोरिया का कॉस्पी मजबूती के साथ कारोबार करते दिखे. वहीं चीन का एसएसई कंपोजिट लगभग स्थिर रहा. अमेरिकी शेयर बाजार भी सोमवार को बढ़त के साथ बंद हुए, जिसका सकारात्मक असर घरेलू बाजारों पर पड़ा. कच्चे तेल और रुपये की चाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल 0.28 प्रतिशत की गिरावट के साथ 68.85 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था. वहीं मुद्रा बाजार में रुपया दबाव में रहा. मंगलवार को शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 11 पैसे टूटकर 90.77 के स्तर पर पहुंच गया. विदेशी निवेशकों की बढ़ती भागीदारी शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) सोमवार को शुद्ध खरीदार रहे. उन्होंने 2,254.64 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे. इस महीने अब तक विदेशी निवेशकों का निवेश करीब दो अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच चुका है, जिससे बाजार को मजबूती मिल रही है.

सोना और चांदी में गिरावट, चांदी ₹1.63 लाख सस्ती, सोना भी धड़ाम—5500 रुपये की गिरावट

इंदौर  सोना-चांदी की कीमतें लगातार क्रैश (Gold-Silver Price Crash) होने के बाद बीते कुछ दिनों में रफ्तार पकड़ती हुई नजर आ रही थीं, लेकिन सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को ये फिर से बिखरी हुई नजर आ रही हैं. जी हां, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर चांदी की कीमत ओपनिंग के साथ ही करीब 5500 रुपये प्रति किलोग्राम से ज्यादा सस्ती हो गई (Silver Price Fall), तो वहीं सोने की कीमत ने भी 2000 रुपये प्रति 10 ग्राम का गोता लगा दिया. अपने हाई लेवल से दोनों कीमती धातुएं अब तक काफी सस्ती हो चुकी हैं. चांदी का वायदा भाव को 1.63 लाख रुपये तक कम हुआ है.  चांदी में तेजी पर अचानक ब्रेक  सबसे पहले बात करते हैं चांदी की कीमतों में बीते कुछ समय में आए क्रैश, तेजी और फिर गिरावट के बारे में, तो बीते 29 जनवरी को Silver Price रॉकेट की रफ्तार से भागते हुए पहले बार ऐतिहासिक 4 लाख रुपये के स्तर के पार निकला था और 4,20,048 रुपये का लाइफ टाइम हाई लेवल छू लिया था. इस स्तर को छूने के बाद ये कीमती धातु सिल्वर अगले ही दिन से क्रैश होनी शुरू हो गई, लेकिन बीते कुछ दिनों में ये ग्रीन जोन में भी नजर आई थी.  बात कमोडिटी मार्केट में कारोबार की करें, तो ओपन होने के साथ ही Silver Price अपने पिछले कारोबारी बंद के मुकाबले बुरी तरह टूट गया. सोमवार को ये एमसीएक्स पर 2,62,620 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थी और मंगलवार को ये खुलने के साथ ही सस्ती होकर 2,56,864 रुपये तक फिसल गई. इस हिसाब से देखें, तो झटके में 5 मार्च की एक्सपायरी वाली 1 Kg Silver Price 5,756 रुपये कम हो गया. वहीं हाई से ये 1,63,184 रुपये कम हो चुका है.  Gold रेट भी हो गया इतना कम  चांदी के बाद अब बात करें, सोने की कीमत में आई गिरावट (Gold Rate Fall) के बारे में, तो ये येलो मेटल सोमवार को एमसीएक्स पर तेजी के साथ कारोबार करते हुए 1,58,066 रुपये प्रति 10 ग्राम पर क्लोज हुआ था और मंगलवार को खुलने के साथ ही गिरकर 1,56,001 रुपये पर आ गया. ऐसे में 2 अप्रैल की एक्सपायरी वाला 10 Gram 24 Karat Gold Rate 2,065 रुपये कम हो गया.  हाई से अब इतना सस्ता Gold सिल्वर प्राइस की तरह ही सोने ने भी बीते 29 जनवरी को ही अपना लाइफ टाइम हाई लेवल छुआ था और 1,93,096 रुपये प्रति 10 ग्राम के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया था. इस लेवल पर पहुंचने के बाद Gold Rate Crash होना शुरू हो गया, लेकिन बीते हफ्ते इसमें फिर उछाल देखने को मिला था, तो सोमवार तक जारी रहा. अगर हाई  से गिरावट की बात करें, तो सोना 37,095 रुपये तक सस्ता हो चुका है.  विदेशी बाजार में भी हुआ सस्ता मंगलवार को सोने की कीमतों में आई गिरावट के बावजूद अतंरराष्ट्रीय बाजार में ये 5,000 डॉलर प्रति औंस के स्तर से ऊपर बना हुआ है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुाबिक, स्पॉट गोल्ड की कीमत 0.7% गिरकर 5,029.49 डॉलर प्रति औंस (करीब 28 ग्राम) हो गई. इससे पहले सोमवार को डॉलर के एक सप्ताह से अधिक के निचले स्तर पर कमजोर होने के कारण सोना 2% उछला था, जबकि 29 जनवरी को कॉमेक्स पर इसने 5,594.82 डॉलर प्रति औंस का रिकॉर्ड हाई टच किया था. गिरावट के पीछे की वजह देखें, तो निवेशक इस सप्ताह के अंत में जारी होने वाले महत्वपूर्ण अमेरिकी रोजगार और महंगाई के आंकड़ों से पहले सतर्क मोड में है.