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TATA गाड़ियों की कीमतों में बड़ी कटौती, GST छूट के बाद 1.55 लाख तक सस्ता हुआ कार

मुंबई  गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST Reforms) स्लैब में बड़े बदलाव के बाद देश की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनी टाटा मोटर्स ने आज आधिकारिक तौर पर अपनी कारों की कीमत में कटौती का ऐलान कर दिया है. टाटा मोटर्स ने अपनी सबसे सस्ती कार टाटा टिएगो से लेकर मशहूर एसयूवी टाटा सफारी तक, सभी वाहनों की कीमत में बदलाव किया है. कारों की कीमत में की गई ये कटौती आगामी 22 सितंबर 2025 से देश भर के डीलरशिप पर पर लागू होगी.  टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स लिमिटेड और टाटा पैसेंजर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक शैलेश चंद्रा ने अपने बयान में कहा है कि, "22 सितम्बर 2025 से लागू होने वाली पैसेंजर व्हीकल्स पर GST में कटौती एक प्रगतिशील और समयानुकूल फैसला है. जिससे देश भर में लाखों लोगों के लिए व्यक्तिगत मोबिलिटी और सुलभ हो जाएगी." उन्होंने कहा कि "कंपनी के कस्टमर फर्स्ट सिद्धांत के अनुरूप टाटा मोटर्स इस जीएसटी रिफॉर्म की पूरी भावना और उद्देश्य का सम्मान करती है. कंपनी अपने ग्राहकों को जीएसटी कटौती का पूरा लाभ देगी." शैलेश चंद्रा ने आगे कहा कि "इससे टाटा मोटर्स की लोकप्रिय कारों और एसयूवी रेंज और अधिक किफायती होगी, जिससे पहली बार वाहन खरीदने वाले ग्राहकों को प्रोत्साहन मिलेगा और देशभर में नई पीढ़ी की मोबिलिटी की ओर बदलाव और तेज होगा." किन कारों की कीमत में कितनी हुई कटौती? टाटा के मॉडल कीमतों में कटौती (रुपयों में) टिएगो  75,000 टिगोर 80,000 अल्ट्रोज  1,10,000 पंच 85,000 नेक्सन 1,55,000 कर्व   65,000 हैरियर   1,40,000 सफारी   1,45,000 नोट: कारों की एक्चुअल प्राइसिंग के लिए अपने नजदीकी डीलरशिप से संपर्क करें. फेस्टीव सीजन में मिलेगा लाभ टाटा मोटर्स का यह ऐलान भारत के त्योहारों के सीजन से ठीक पहले आया है. जो परंपरागत रूप से वाहनों की बिक्री का पीक पीरियड माना जाता है. कंपनी ने ग्राहकों को यह सलाह भी दी है कि संभावित बढ़ी हुई मांग को देखते हुए वे समय से पहले ही बुकिंग कर लें. जीएसटी कटौती टाटा मोटर्स की पूरी पैसेंजर व्हीकल रेंज पर लागू होगी. इसमें एंट्री-लेवल हैचबैक Tiago पर ग्राहकों को अधिकतम 75,000 रुपये तक की बचत होगी. इसी तरह Tigor पर अधिकतम 80,000 रुपये और लोकप्रिय कॉम्पैक्ट एसयूवी Punch पर 85,000 रुपये तक की राहत मिलेगी. वहीं सबसे बड़ी कटौती Nexon में देखने को मिली है, जिसके दाम 1.55 लाख रुपये तक घट गए हैं. बता दें कि, हाल ही में हुए जीएसटी काउंसिल की मीटिंग में यह फैसला लिया गया था कि, छोटी कारें, जिनमें 1200 सीसी तक के पेट्रोल इंजन, 1500 सीसी तक के डीजल इंजन और 4 मीटर से कम लंबाई वाली कारें शामिल हैं, उन पर अब केवल 18% जीएसटी लगेगा, जो पहले 28% था. इससे इस कैटेगरी में आने वाली कारों की कीमत में भारी कटौती हुई है.

GST का नया स्ट्रक्चर अब लागू, ईंधन दामों में बदलाव की संभावना!

नई दिल्ली  जीएसटी स्ट्रक्चर में हुए ऐतिहासिक बदलाव के लागू होते ही रोजमर्रा के कई सामान सस्ते हो जाएंगे। ये हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि ज्यादातर कंपनियां आम लोगों को इसका फायदा पहुंचाने के लिए तैयार हैं। वहीं, पेट्रोल-डीजल को लेकर कई लोगों के मन में संशय है। अब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस पर एक अहम बयान दिया है। क्या कहा वित्त मंत्री ने? निर्मला सीतारमण ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पेट्रोलियम उत्पाद और अल्कोहल निकट भविष्य में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे से बाहर रहेंगे। एक इंटरव्यू में वित्त मंत्री ने कहा कि निकट भविष्य में पेट्रोलियम या अल्कोहल को जीएसटी के दायरे में लाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। मतलब ये हुआ कि पेट्रोल और डीजल के दाम पहले की तरह रहेंगे। इसमें बदलाव तेल कंपनियां या सरकार अपने हिसाब से करेंगी। आम लोगों को राहत देने के लिए वित्त मंत्री क्या बोलीं? वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पीटीआई-भाषा को दिये साक्षात्कार में कहा कि हम दरों में कटौती का लाभ आम लोगों को देने के लिए उद्योग से बातचीत कर रहे हैं और 22 सितंबर से (जीएसटी दरों में कटौती के लागू होने की तिथि) हमारा पूरा ध्यान इसी पर होगा कि लोगों का इसका लाभ मिले। क्या हुआ है बदलाव केंद्र और राज्यों के वित्त मंत्रियों की भागीदारी वाली जीएसटी परिषद ने बुधवार को जीएसटी के चार स्लैब की जगह दो स्लैब करने का फैसला किया। अब टैक्स की दरें पांच और 18 प्रतिशत होंगी जबकि विलासिता एवं सिगरेट जैसी अहितकर वस्तुओं पर 40 प्रतिशत की विशेष दर लागू होगी। सिगरेट, तंबाकू और अन्य संबंधित वस्तुओं को छोड़कर नई कर दरें 22 सितंबर से प्रभावी हो जाएंगी। दरों को युक्तिसंगत बनाये जाने के तहत टेलीविजन एवं एयर कंडीशनर जैसे उपभोक्ता वस्तुओं के अलावा खानपान और रोजमर्रा के कई सामानों पर दरें कम की गयी हैं।

महिंद्रा ने घटाए वाहन दाम, GST लागू होने से पहले Thar और Scorpio पर बड़ी राहत

मुंबई गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) स्लैब स्ट्रक्चर में हुए बदलाव के रूझान आने शुरू हो गए हैं. बीते कल देर शाम टाटा मोटर्स ने अपने कारों की कीमतों में कटौती का ऐलान किया. आज प्रमुख एसयूवी निर्माता कंपनी महिंद्रा एक कदम और आगे बढ़ते हुए, GST डेडलाइन (22 सितंबर) से पहले ही कारों की कीमत में 1.56 लाख रुपये तक की कटौती का ऐलान किया है. जीएसटी में छूट के ऐलान के बाद कंपनी द्वारा कारों की कीमत में कटौती के बाद महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर शेयर किया है. जिसमें लिखा गया है कि, "सभी लोग 22 सितंबर कह रहे हैं… हमने कहा अभी. महिंद्रा लाइनअप पर सभी कारों पर जीएसटी बेनिफिट्स आज यानी 6 सितंबर से मिलेंगे." इस तस्वीर को शेयर करते हुए आनंद महिंद्रा ने कैप्शन में लिखा कि, "एक्शन, केवल वादा नहीं" किन कारों कितनी छूट? सबसे पहले बता दें कि, महिंद्रा अपने पूरे ICE (पेट्रोल-डीजल से चलने वाले वाहन) SUV पोर्टफोलियो पर ग्राहकों को जीएसटी 2.0 का पूरा लाभ तत्काल प्रभाव से पास-ऑन करेगी. जीएसटी में कटौती के चलते महिंद्रा के लोकप्रिय मॉडल्स जैसे थार, स्कॉर्पियो, बोलेरो, XUV700 और स्कॉर्पियो-एन अब ग्राहकों को 1.01 लाख रुपये से 1.56 लाख रुपये तक की बचत के साथ उपलब्ध होंगे, जो मॉडल और वेरिएंट पर निर्भर करेगा. कंपनी द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, बोलेरो और बोलेरो नियो की कीमतों में अधिकतम 1.27 लाख रुपये तक की कटौती हुई है. वहीं, XUV3XO पेट्रोल पर 1.40 लाख रुपये और XUV3XO डीजल पर सबसे ज्यादा 1.56 लाख रुपये की कटौती की गई है. नई कीमतें सभी डीलरशिप और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर पारदर्शी तरीके से अपडेट कर दी जाएंगी. यानी आप नजदीकी डीलरशिप पर जाकर नई कीमतों के साथ अपनी पसंदीदा कार बुक कर सकते हैं. टाटा मोटर्स ने भी 1.55 लाख तक घटाए दाम केंद्र सरकार द्वारा जीएसटी में छूट के ऐलान के बाद टाटा मोटर्स ने सबसे पहले अपने व्हीकल पोर्टफोलियो की कीमतों में कटौती की घोषणा की थी. टाटा मोटर्स अपने सबसे सस्ती कार टाटा टिएगो से लेकर टाटा नेक्सन और सफारी तक सभी मॉडलों पर 1.55 लाख रुपये तक की छूट का ऐलान किया है. हालांकि टाटा के कारों पर ये कटौती आगामी 22 सितंबर से लागू होगी. GST स्लैब को लेकर सरकार का ऐलान बता दें कि, बीते दिनों केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जीएसटी काउंसिल की मीटिंग के बाद गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) स्लैब के स्ट्रक्चर में बदलाव की घोषणा की थी. जिसमें उन्होंने कहा कि, "अब देश में 4 के बजाय केवल दो जीएसटी स्लैब (5% और 8%) ही रहेंगे. इसके अलावा लग्ज़री और सिन गुड्स को स्पेशल 40% जीएसटी के दायरे में रखा जाएगा." नए जीएसटी स्लैब को लागू किए जाने के बारे में उन्होंने कहा कि, "ये नया जीएसटी स्ट्रक्चर आगामी 22 सितंबर 2025 से देश भर में लागू किया जाएगा." क्या है नया नियम? नए नियम के अनुसार 1200 सीसी से कम पेट्रोल, 1500 सीसी से कम डीजल इंजन वाली कारें और जिनकी लंबाई 4 मीटर से कम हैं. उन पर अब 28% के बजाय केवल 18% जीएसटी लागू होगा. जिससे इन कारों की कीमतों में भारी कटौती हो रही है. एक डाटा रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल से जुलाई के बीच देश भर में बेची जाने वाली कुल पैसेंजर कारों में तकरीबन 61% वो कारें थीं, जिनकी लंबाई 4 मीटर से कम है. वहीं 4 मीटर से लंबी कारों का मार्केट शेयर केवल 39% है. ऐसे में सरकार के इस फैसले का असर बड़े ग्राहक वर्ग पर पड़ेगा. साथ ही त्योहारी सीजन में कार बाजार के गुलजार होने की पूरी संभावना है.

महंगाई पर राहत की उम्मीद! SBI रिपोर्ट से सामने आया सबूत

नई दिल्ली  जीएसटी दरों में बड़ा बदलाव होने वाला है, जिससे आम घरेलू सामान और सेवाओं पर टैक्स कम होगा. इससे अगले वित्त वर्ष (2025-26) में रिटेल इंफ्लेशन 0.65 से 0.75 प्रतिशत तक घट सकता है. एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नए जीएसटी नियम लागू होने के बाद देश में महंगाई कम होगी जीएसटी काउंसिल की 56वीं मीटिंग में पुरानी चार स्तरीय टैक्स स्ट्रक्चर (5%, 12%, 18%, 28%) को हटाकर दो स्तरीय टैक्स स्ट्रक्चर (5% और 18%) को मंजूरी दी गई. साथ ही, कुछ लग्जरी सामान और सेवाओं के लिए 40% की स्पेशल टैक्स दर तय की गई है, जिसके तहत रोजमर्जा की काफी चीजें सस्ती हो गई हैं और कुछ तो टैक्स फ्री ही हो गई हैं. नई दरें कब से लागू होंगी? तंबाकू और उससे जुड़े प्रोडक्ट्स को छोड़कर नई टैक्स दरें 22 सितंबर 2025 से लागू होंगी. रिपोर्ट कहती है कि 453 सामानों की जीएसटी दर में बदलाव हुआ है. इनमें से 413 सामानों पर टैक्स कम हुआ है, जबकि सिर्फ 40 सामानों पर टैक्स बढ़ा है. करीब 295 जरूरी सामानों पर जीएसटी 12% से घटकर 5% या 0% हो गई है. इससे खासकर खाने-पीने की चीजों पर 60% फायदा ग्राहकों को मिलेगा, जिससे कंज्यूमर वैल्यू इंडेक्स आधारित इंफ्लेशन 0.25 से 0.30% तक कम हो सकती है. रिटेल इंफ्लेशन पर क्या असर होगा? एसबीआई रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया कि इसके अलावा, सेवाओं पर जीएसटी दरों को रेशनाइलज बनाने से अन्य वस्तुओं और सेवाओं पर खुदरा मुद्रास्फीति में 0.40 से 0.45 प्रतिशत की और कमी आएगी. इसमें ग्राहकों को लाभ 50 प्रतिशत मिलने का अनुमान लगाया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, कुल मिलाकर, वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान रिटेल इंफ्लेशन में 0.65 से 0.75 प्रतिशत तक कमी आ सकती है. जीएसटी की औसत दर कितनी हुई? जीएसटी काउंसिल के रेट रेशनलाइजेशन से सितंबर 2019 में औसत जीएसटी दर 14.4% से घटकर 11.6% हो गई थी. अब नए बदलावों के बाद ये और कम होकर 9.5% हो सकती है. नए जीएसटी नियमों से जरूरी सामान और सेवाएं सस्ती होंगी, जिससे महंगाई कम होगी और आम लोगों को फायदा होगा.  

फूड डिलीवरी की दुनिया में बड़ा बदलाव, मंगवाना होगा महंगा और डिलिवरी वालों की आमदनी घटेगी

नई दिल्ली ऑनलाइन खाना ऑर्डर करना आज हमारे रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बन चुका है. ऑफिस से थककर आने के बाद या वीकेंड पर दोस्तों संग पार्टी के लिए बस मोबाइल उठाइए और चंद मिनटों में खाना आपके दरवाज़े पर! लेकिन अब यह सुविधा शायद थोड़ी महंगी पड़ सकती है. सरकार के नए फैसले से जोमैटो और स्विगी जैसी बड़ी फूड डिलीवरी कंपनियों पर टैक्स का नया बोझ आ गया है. ये कंपनियां कह रही हैं कि वे यह खर्च अपने ग्राहकों से वसूल सकती हैं. यानी आने वाले दिनों में डिलीवरी चार्ज बढ़ सकते हैं और जेब पर थोड़ा और बोझ पड़ सकता है. 4 सिंतबर को जीएसटी काउंसिल ने स्पष्ट किया कि अब इन ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स को अपने डिलीवरी पार्टनर्स (जो ऑर्डर लेकर आते हैं) के लिए 18% GST खुद से भरना होगा. इसका मतलब यह है कि जोमैटो और स्विगी को हर साल लगभग 180-200 करोड़ रुपये अतिरिक्त टैक्स देना पड़ेगा. इससे पहले डिलीवरी बॉय पर यह टैक्स लागू नहीं था, यानी उनकी डिलीवरी फीस पर GST नहीं लगता था. अब सरकार ने कहा है कि प्लेटफॉर्म को उनकी डिलीवरी फीस पर 18 फीसदी GST देना होगा. उदाहरण के लिए मान लीजिए किसी ऑर्डर की डिलीवरी फीस 50 रुपये है. पहले Zomato/Swiggy यह 50 रुपये सीधे डिलीवरी पार्टनर को दे देते थे और इस पर कोई GST नहीं लगता था. अब सरकार के नियम के अनुसार इन प्लेटफॉर्म्स को इन 50 रुपयों पर 18 फीसदी यानी 9 रुपये सरकार को टैक्स के रूप में चुकाना होगा. जाहिर है कि इससे कंपनी का खर्च बढ़ जाएगा. क्या ये खर्च कंपनियां खुद उठाएंगी? जोमैटो के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि “इसका कुछ हिस्सा डिलीवरी वर्कर्स पर डाला जाएगा, जिससे उनकी कमाई थोड़ी कम हो सकती है. साथ ही ग्राहकों से भी अतिरिक्त चार्ज लेने पर विचार चल रहा है.” स्विगी के एक अधिकारी ने भी पुष्टि की कि कंपनी टैक्स का बोझ आगे बढ़ाने के बारे में सोच रही है. काउंसिल का यह फैसला लंबे समय से चल रहे उस विवाद को खत्म करने का काम करेगा कि डिलीवरी फीस पर टैक्स कौन भरेगा- प्लेटफॉर्म या डिलीवरी पार्टनर. दिसंबर 2024 में जोमैटो को GST अधिकारियों से 2019 से 2022 के समयांतराल के लिए 803 करोड़ रुपये टैक्स और पेनल्टी का नोटिस मिला था. स्विगी को भी इसी मुद्दे पर प्री-डिमांड नोटिस जारी हुआ था. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि नई स्पष्टता इन नोटिसों पर क्या असर डालती है. दोनों कंपनियों पर क्या असर होगा, ब्रोकरेज ने बताया ब्रोकरेज हाउस जैफरीज़ का मानना है कि यह फैसला जोमैटो और स्विगी दोनों के लिए हल्का निगेटिव साबित होगा, खासकर तब जब दोनों कंपनियों की ग्रोथ पहले से ही धीमी है. हाल के क्वार्टर में जोमैटो का ऑपरेटिंग प्रॉफिट 451 करोड़ रुपये और स्विगी का 192 करोड़ रुपये रहा. Morgan Stanley ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि कंपनियां यह अतिरिक्त बोझ ग्राहकों पर डाल सकती हैं, क्योंकि अब डिलीवरी फीस पर 18% जीएसटी चुकाना अनिवार्य होगा. मामले की जड़ सेंट्रल जीएसटी एक्ट की धारा 9(5) में है, जो डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को अपने सर्विस प्रोवाइडर्स की तरफ से टैक्स इकट्ठा कर सरकार को जमा करने का आदेश देती है. हालांकि अब तक डिलीवरी फीस को लेकर स्पष्टता नहीं थी. कंपनियों का कहना है कि ग्राहकों से ली गई डिलीवरी फीस वे सीधे डिलीवरी पार्टनर्स को देते हैं, और कई बार ग्राहकों से कोई फीस नहीं ली जाती या डिस्काउंट दिया जाता है, लेकिन पार्टनर्स को तय रेट पर भुगतान करना ही पड़ता है. कुल मिलाकर, यह फैसला ग्राहकों और डिलीवरी पार्टनर्स दोनों के लिए बदलाव लेकर आएगा. अब देखना यह है कि कंपनियां इसे किस तरह संभालती हैं ताकि न तो ग्राहकों की जेब ज्यादा खाली हो और न ही डिलीवरी पार्टनर्स की कमाई बहुत घटे.  

अब सिगरेट, तंबाकू और कोल्ड ड्रिंक पर सिर्फ GST नहीं, अतिरिक्त टैक्स भी लागू होगा!

नई दिल्ली  GST रिफॉर्म के तहत तंबाकू, सिगरेट और कोल्‍ड ड्रिंक्‍स जैसे सिन प्रोडक्‍ट्स पर 40 फीसदी जीएसटी लगाया गया है. लेकिन अब इन उत्‍पादों पर और भी ज्‍यादा टैक्‍स लग सकता है. बिजनेस टुडे की रिपोर्ट में ऐसा दावा किया गया है कि सरकार इन चीजों पर टैक्‍स को और भी अधिक बढ़ा सकती है.  सरकार तंबाकू और सिगरेट जैसे हानिकारक वस्‍तुओं पर टैक्‍स के इम्‍पैक्‍ट को वर्तमान स्‍तर पर बनाए रखने के लिए 40% GST के अलावा, सेस भी लगा सकती है. केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के अध्यक्ष संजय कुमार अग्रवाल ने कहा कि GST के तहत, 40% अधिकतम टैक्‍स लगाया जा सकता है. बाकी टैक्‍स को वर्तमान स्तर पर बनाए रखने के लिए कोई व्यवस्था करेंगे. हालांकि उन्‍होंने उस व्‍यवस्‍था के बारे में विस्‍तार से जानकारी नहीं दी है. उन्होंने बिजनेस टुडे को दिए एक इंटरव्‍यू में आगे कहा कि अगर विधायी संशोधन या विधेयक की आवश्यकता होगी तो उस पर ध्यान दिया जाएगा. लग्‍जरी कार-बाइक पर एक्‍स्‍ट्रा टैक्‍स नहीं उन्‍होंने यह भी स्‍पष्‍ट किया कि लग्‍जरी कारों, लग्‍जरी बाइक और सुपर लग्‍जरी अन्‍य वस्‍तुओं जैसी वस्‍तुओं एक्‍स्ट्रा टैक्‍स नहीं लगाया जाएगा. उनपर 40 फीसदी का ही टैक्‍स लगेगा.  नए जीएसटी रिफॉर्म के तहत हानिकारक वस्‍तुओं और सुपर लग्‍जरी आइटम्स पर मौजूदा 28% के बजाय 40% टैक्‍स लगेगा. अग्रवाल ने आगे बताया कि हानिकार सबटैक्‍स 28 फीसदी दिसंबर 2025 तक जारी रहने की संभावना है, जबकि पहले यह उम्मीद थी कि यह इस साल 31 अक्टूबर तक यह समाप्त हो जाएगा. 22 सितंबर से लागू करने पर चल रहा काम उन्‍होंने कहा कि CBIC जीएसटी की नई दरों को लागू करने के लिए भी काम कर रहा है, जो 22 सितंबर से लागू होंगी. अग्रवाल ने बताया कि वर्तमान में दो प्रॉसेस चल रही हैं. पहला- हमें आवश्यक नोटिफिकेशन जारी करनी होंगी, और केंद्र के साथ-साथ राज्यों द्वारा भी नोटिफाई किए जाएंगे. हम जल्द ही यह प्रक्रिया पूरी कर लेंगे. दूसरा- दरों में बदलाव, नया आसान रजिस्‍ट्रेशन प्रॉसेस और रिफंड प्रॉसेस को ध्यान में रखते हुए, हमारी आईटी सिस्‍टम में आवश्यक बदलाव किए जा रहे हैं.  उन्होंने आगे कहा कि उद्योग को भी 22 सितंबर से अपने ERP को नई दरों के साथ अपडेट करना होगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इनवॉयसिंग सही ढंग से की जा रही है. 

Tesla का रिकॉर्ड वेतन पैकेज: Elon Musk के हाथ में दुनिया का पहला खरबपति बनने का मौका

नई दिल्ली  टेस्ला के शेयरधारकों के सामने रखा गया एक नया प्रस्ताव एलोन मस्क को दुनिया का पहला ट्रिलियनेयर बना सकता है। इस प्रस्ताव में कहा गया है कि यदि कंपनी भविष्य में कुछ महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को हासिल कर लेती है, तो मस्क को अभूतपूर्व मात्रा में टेस्ला के शेयर मिल सकते हैं। इस प्रस्तावित वेतन पैकेज के तहत मस्क को 423.7 मिलियन अतिरिक्त टेस्ला शेयर दिए जा सकते हैं, जिनकी वर्तमान बाजार कीमत के अनुसार कुल वैल्यू $143.5 अरब डॉलर है। हालांकि, ये शेयर तभी मिलेंगे जब कंपनी की मार्केट वैल्यू में जबरदस्त वृद्धि होगी। मस्क को शेयर कब मिलेंगे? एलोन मस्क को यह पूरा शेयर पैकेज तभी मिलेगा, जब टेस्ला का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन $8.5 ट्रिलियन तक पहुंच जाएगा। वर्तमान में टेस्ला की वैल्यू $1.1 ट्रिलियन है, यानी उसे सात गुना से अधिक की छलांग लगानी होगी। यह आंकड़ा एनवीडिया (Nvidia) की मौजूदा मार्केट वैल्यू से करीब दोगुना है, जो इस समय दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी है। xAI और ट्विटर से जुड़ी नई योजनाएं टेस्ला के इस प्रस्ताव के साथ एक और सुझाव सामने आया है- कि कंपनी xAI में निवेश करे। xAI एलोन मस्क की निजी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी है। अगर यह प्रस्ताव पारित होता है, तो मस्क को अपने व्यापारिक साम्राज्य को और मजबूत करने का मौका मिल सकता है। बता दें कि हाल ही में xAI ने X (पूर्व में ट्विटर) को खरीद लिया है — वही प्लेटफॉर्म जिसे मस्क ने 2022 में $44 अरब डॉलर की निजी राशि से खरीदा था। हालांकि, टेस्ला ने xAI में निवेश के प्रस्ताव पर अभी कोई स्पष्ट पक्ष नहीं लिया है। शेयरधारकों के इस प्रस्ताव में यह भी नहीं बताया गया है कि टेस्ला को xAI में कितनी हिस्सेदारी लेनी चाहिए या उसका मूल्यांकन क्या होगा। बाजार की शुरुआती प्रतिक्रिया इस खबर के सामने आने के बाद टेस्ला के शेयरों में प्री-मार्केट ट्रेडिंग में हल्की तेजी देखी गई है।  

पेट्रोल और डीजल पर GST नहीं, वित्त मंत्री सीतारमण ने समझाया कारण

नई दिल्ली जीएसटी में बड़े सुधार के ऐलान के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को एक्‍सक्‍लूसिव बातचीत की. उन्‍होंने जीएसटी रेट कट को लेकर कई सवालों का जवाब दिया और कहा कि इसका लाभ सीधे आम जनता तक पहुंचेगा. अगर कोई कंपनी या संस्‍था इसका लाभ लोगों तक नहीं पहुंचाता है तो उसपर काईवाई की जा सकती है.  क्‍यों पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में नहीं रखा जाता है? इस सवाल के जवाब देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार इस योजना पर पूरी तरह तैयार है. सरकार आज भी इसे जीएसटी के दायरे में रख सकती है, लेकिन यह GST के प्रस्‍ताव में नहीं था. उन्‍होंने कहा कि जीएसटी लाने के समय भी हमने पेट्रोल-डीजल को इस कैटेगरी में रखने की कोशिश की थी, लेकिन राज्‍य तैयार नहीं हुए.   वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि जब कभी भी राज्य रेट को लेकर तैयार होंगे, तब पेट्रोल डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जा सकेगा. हालांकि अभी इसे जीएसटी में रखने का कोई प्रस्‍ताव नहीं है.  शेयर बाजार में तेजी क्‍यों नहीं?  जीएसटी सुधार के ऐलान पर भी शेयर बाजार में तेजी क्‍यों नहीं आ रही है? इस सवाल पर जवाब देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि मार्केट कभी एक फैक्‍टर्स पर काम नहीं करता है. इसके नहीं चलने के अलग-अलग कारण हो सकते हैं.  99 फीसदी चीजें हुईं सस्‍ती  वित्त मंत्री बातचीत में GST 2.0 पर सवालों का जवाब दे रही थीं. उन्‍होंने आगे कहा कि जीएसटी में नए सुधार से 99 फीसदी वस्‍तुओं को सस्‍ता किया गया है. फूड आइटम्‍स को ज्‍यादा से ज्‍यादा सस्‍ता करने का प्रयास किया गया है.  जनता के लिए टैक्‍स कटौती, कंपनियों के लिए नहीं उन्‍होंने कहा कि हमारी सरकार ने हर साल जीएसटी में टैक्‍स सुधार का प्रयास किया है और यह गुंजाइश देखी है कि कहां पर जीएसटी टैक्‍स रेट में कटौती हो सकती है. इस बार के सुधार में भी हमने यही किया है. यह जनता का के लिए टैक्‍स कटौती है, ना कि आम कंपनियों के लिए.  विपक्ष ले रहा क्रेडिट  वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विपक्ष की ओर से GST को गब्बर सिंह टैक्स कहने को लेकर कहा कि आज 91 फीसदी टैक्स लगाने वाले GST का श्रेय ले रहे हैं. विपक्षी दलों की ओर से GST को सपोर्ट मिल रहा है… वही काफी है. कांग्रेस पार्टी इंदिरा गांधी के समय इनकम टैक्स पर 91 फीसदी टैक्स लेती और आज जीएसटी को बेहतर बनाने का क्रेडिट ले रही है. 

क्या 22 सितंबर से पहले गिरेंगे FMCG और इलेक्ट्रॉनिक्स के दाम?

नई दिल्ली  केंद्र सरकार ने करीब 400 वस्‍तुओं और सेवाओं पर जीएसटी (GST) दरों में बड़ी कटौती कर दी है. जीएसटी की नई दरें 22 सितंबर से लागू होगी. खाने-पीने के सामान से लेकर रोजमर्रा की चीज़ें, इलेक्ट्रॉनिक्स, गाडियां और बीमा सस्ते हो जाएंगे. सरकार चाहती है कि इस कटौती का लाभ सीधे आम जनता तक पहुंचे और जीएसटी कटौती का असर 22 सितंबर को दिखना लग जाए. लेकिन, सवाल यह है कि आने वाले 17 दिनों में लोगों को जीएसटी में कमी का फायदा देने के लिए कंपनियां और दुकानदार कितने तैयार हैं और वो कैसे इसे आम आदमी तक पहुंचाएंगे? यह प्रश्‍न इसलिए उठ रहा है क्‍योंकि पहले ही हजारों टन पुराना माल दुकानों और गोदामों तक पहुंच चुका है, जिन पर पुरानी दर का टैग लगा हुआ है. ऐसे में कंपनियों और दुकानदारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे दाम कैसे घटाएं और उपभोक्ताओं को इसका सीधा लाभ कैसे दें. कंपनियों कैसे करेगी फायदा पास ऑन इसका पहला तरीका है कीमतों का समायोजन यानी प्राइस एडजेस्‍टमेंट (Price Adjustment). कंपनियां पुरानी दर वाले माल के लिए डीलरों को क्रेडिट नोट देंगी. उदाहरण के लिए, अगर किसी डीलर ने साबुन का एक कार्टन पुराने टैक्स पर खरीदा है और अब उसकी कीमत घट गई है, तो कंपनी उसे बराबर का क्रेडिट देगी. इससे डीलर नुकसान में नहीं रहेगा और ग्राहकों को सस्ता दाम मिल सकेगा. सॉफ्टवेयर और बिलिंग अपडेट बड़ी रिटेल चेन जैसे बिग बाजार, रिलायंस या डीमार्ट जैसी कंपनियों के पास तकनीकी सिस्टम हैं. ये अपने बिलिंग सॉफ्टवेयर और पॉइंट-ऑफ-सेल मशीनों को तुरंत अपडेट कर सकती हैं. 22 सितंबर से इनके बिल पर सीधे नए रेट दिखाई देंगे. हालांकि छोटे किराना और मोहल्ले की दुकानों को यह बदलाव करने में थोड़ी मुश्किल होगी, क्योंकि उनके पास उतना तकनीकी ढांचा नहीं है. नई स्टिकरिंग और पैकिंग साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट जैसे उत्पादों पर नई एमआरपी (MRP) वाली स्टिकर चिपकाई जाएगी. कंपनियों ने टीम लगाई हैं जो गोदाम और दुकानों में जाकर पुराने पैक पर नई कीमत की स्टिकर लगाएंगे. कई कंपनियां ट्रेड स्कीम्स और प्रमोशन को फिर से तय कर रही हैं. हो सकता है कि कुछ जगह कीमत घटाने की बजाय पैक का वजन बढ़ा दिया जाए. जैसे, 10 रुपये वाले बिस्किट पैक में पहले से ज्यादा बिस्किट मिल सकते हैं. किन-किन क्षेत्रों में असर दिखेगा रोजमर्रा के सामान (FMCG): नमकीन, बिस्किट जैसे तय दाम वाले पैक में वजन बढ़ेगा. वहीं शैंपू, साबुन, टूथपेस्ट जैसी चीज़ों पर सीधे नए दाम चिपका दिए जाएंगे. दुकानदारों को कंपनी से रेट डिफरेंस का क्रेडिट मिलेगा. कंज्यूमर ड्यूरेबल्स : इन पर जीएसटी 28% से घटाकर 18% कर दिया गया है. कंपनियां कह रही हैं कि त्योहारी सीजन में बिक्री तेज होगी. उदाहरण के लिए, पहले 20,000 रुपये का एसी पर 5,600 रुपये टैक्स लगता था, अब 3,600 रुपये लगेगा. 2,000 रुपये का सीधा फायदा उपभोक्ता को मिलेगा. होटल और हवाई यात्रा: 7,500 रुपये प्रति रात से कम वाले होटल रूम अब 12% की बजाय 5% जीएसटी पर मिलेंगे. लेकिन फायदा सिर्फ उन ग्राहकों को होगा जो होटल पर पहुंचकर पेमेंट करेंगे. पहले से बुक और पेमेंट किए कमरे पर पुरानी दर ही लागू होगी. हवाई यात्रा में उल्टा असर है. प्रीमियम इकोनॉमी, बिजनेस और फर्स्ट क्लास टिकट पर जीएसटी 12% से बढ़ाकर 18% कर दिया गया है. बीमा (Insurance): हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी अब पूरी तरह जीएसटी से मुक्त होंगी. इसका मतलब है कि उपभोक्ता को 18% की सीधी बचत होगी. हालांकि कंपनियां प्रीमियम घटाने की बजाय अतिरिक्त सुविधाएं जैसे पर्सनल एक्सीडेंट कवर या ज्यादा अस्पतालों में कैशलेस सुविधा दे सकती हैं. ऑटो सेक्टर: यह क्षेत्र फिलहाल थोड़ी परेशानी में है. पीएम मोदी के 15 अगस्त वाले भाषण के बाद से डीलरों ने भारी स्टॉक जमा कर लिया था. अब दरें घटने से पुराने स्टॉक पर उन्हें नुकसान हो रहा है. जैसे पहले जिस कार पर 50% टैक्स लगता था, अब 40% लगेगा. लेकिन डीलर ने पहले ही पुराना टैक्स भर दिया है, उसका रिफंड नहीं मिलेगा.

शेयर बाजार हरे निशान पर बंद, GST कट से कुछ स्टॉक्स चमके तो कुछ लुढ़के

मुंबई  जीएसटी सुधार के ऐलान के बाद आज लगातार दूसरे दिन शेयर बाजार में तेजी जारी है, लेकिन निवेशकों को जैसी उम्‍मीद थी, वैसी तेजी नहीं देखी जा रही है. सेंसेक्‍स-निफ्टी आज भी ग्रीन जोन में खुले हैं. लार्ज कैप स्‍टॉक में अच्‍छी है. सेंसेक्‍स 266.27 अंक चढ़कर 80,982.96 पर कारोबार कर रहा है, जबकि निफ्टी 69 अंक चढ़कर 24803 लेवल पर कारोबार कर रहा है. निफ्टी बैंक में भी 89  अंकों की उछाल है.  बीएसई टॉप 30 शेयरों की बात करें तो इसमें से सिर्फ 2 शेयर ही गिरावट पर हैं, बाकी सभी शेयरों में तेजी बढ़ रही है. महिंद्रा एंड महिंद्रा, एशियन पेंट्स, पावरग्रिड और रिलायंस जैसे शेयरों में 1 फीसदी तक की तेजी आई है. खासकर ऑटो, FMCG और बैंकिंग के शेयरों में तेजी है, लेकिन उतना भी नहीं जितनी कि निवेशक उम्‍मीद जता रहे थे.  इन टॉप 10 शेयरों में उछाल  अम्‍बर एंटरप्राइजेज, पीजी इलेक्‍ट्रोपास्‍ट, रिलायंस पावर जैसे शेयरों में 1 फीसदी से ज्‍यादा तेजी आई है. इसके अलावा, बीएसई, विशाल मेगा मार्ट, ग्‍लेनमार्क और मैक्‍स फाइनेंस सर्विसेज में 2 फीसदी से ज्‍यादा की तेजी है. वही लार्जकैप स्‍टॉक- महिंद्रा एंड महिंद्रा, डीएलएफ और आईसर मोटर्स के शेयर में 1.50 फीसदी से ज्‍यादा की उछाल आई है.  इन शेयरों में गिरावट जीएसटी कटौती के बाद गिरावट वाले शेयरों की बात करें तो वरुण वेबरेज के शेयर में 2.42 फीसदी, ITC में 2 फीसदी, एलआईसी में 1 फीसदी, ओला इलेक्‍ट्र‍िक में 4 फीसदी, मारिको में 1.14 फीसदी और प्रीमियर एनर्जीज में 1 फीसदी की गिरावट आई है.  जीएसटी कटौती से किस सेक्‍टर में तेजी और कौन गिरा?  GST कट के ऐलान के बाद से ऑटो शेयरों में कल और आज तेजी देखी गई है. FMCG सेक्‍टर्स में गिरावट है, जबकि हेल्‍थकेयर,  बैंकिंग और ऑटो सेक्‍टर अच्‍छे चल रहे हैं. सबसे ज्‍यादा तेजी ऑटो सेक्‍टर में 1.32 फीसदी की है. इसके बाद 1 फीसदी से ज्‍यादा की तेजी फाइनेंशियल सर्विसेज में है. ऑयल एंड गैस के शेयर भी शानदार ग्रोथ दिखा रहे हैं.