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TikTok इंडिया फिर लौट रहा, वेबसाइट एक्टिव होने से बढ़ी उम्मीदें

नईदिल्ली    TikTok की भारत वापसी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।  अभी तक कुछ भी पक्का नहीं है, लेकिन जो लोग TikTok को पसंद करते हैं, उनके लिए कुछ अच्छी खबरें जरूर सामने आई हैं। TikTok, जो एक चीनी कंपनी का ऐप है, 2020 में भारत में बैन कर दिया गया था।  TikTok की वेबसाइट फिर से दिखने लगी है! हाल ही में कुछ लोगों ने देखा कि TikTok की वेबसाइट (mobile और laptop पर) फिर से काम कर रही है। हालांकि, कुछ लोग अभी भी इसे नहीं खोल पा रहे हैं, जिससे लगता है कि शायद वेबसाइट कुछ चुनिंदा लोगों के लिए या टेस्टिंग के लिए खोली गई है। लेकिन TikTok का ऐप अभी भी Google Play Store या Apple App Store पर उपलब्ध नहीं है। इसलिए सिर्फ वेबसाइट का दिखना यह नहीं कह सकता कि TikTok पूरी तरह वापस आ गया है। भारत-चीन के रिश्तों में सुधार? TikTok की वापसी की चर्चा इसलिए भी हो रही है क्योंकि हाल ही में भारत और चीन के बीच रिश्ते थोड़े बेहतर होते दिख रहे हैं। सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं हालांकि TikTok की वेबसाइट दिख रही है, लेकिन भारत सरकार ने अभी तक TikTok की वापसी को मंजूरी नहीं दी है, और कंपनी की ओर से भी कोई घोषणा नहीं की गई है।इसका मतलब है कि TikTok अभी भी भारत में आधिकारिक रूप से बैन ही है, और वह बिना सरकार की इजाजत के काम नहीं कर सकता।

OpenAI भारत में खोलेगा अपना पहला ऑफिस, सैम ऑल्टमैन अगले महीने करेंगे दौरा

मुंबई  भारत में ओपनएआई अपना पहला दफ्तर खोलने वाला है, जिसके लिए कंपनी के सीईओ सैम ऑल्टमैन अगले महीने सितंबर में देश के दौरे पर आएंगे। ओपनएआई के सीईओ ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वह इस साल भारत में अपना पहला ऑफिस खोलेंगे। उन्होंने देश में चैटजीपीटी के बढ़ते यूजर्स पर बात की। एक्स पर उन्होंने लिखा, "हम इस साल के अंत में भारत में अपना पहला कार्यालय खोल रहे हैं! और मैं अगले महीने आने के लिए उत्सुक हूं। भारत में एआई को अपनाते हुए देखना अद्भुत रहा है-पिछले एक साल में चैटजीपीटी यूजर्स की संख्या चार गुना बढ़ी है-और हम भारत में और अधिक निवेश करने के लिए उत्साहित हैं!" केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने किया स्वागत केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारत में ओपनएआई का स्वागत किया और कहा कि भारत एआई-आधारित परिवर्तन की अगली लहर को आगे बढ़ाने के लिए अद्वितीय स्थिति में है। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "भारत एआई-आधारित परिवर्तन की अगली लहर को आगे बढ़ाने के लिए अद्वितीय स्थिति में है। इंडियाएआई मिशन के हिस्से के रूप में, हम विश्वसनीय और समावेशी एआई के लिए एक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण कर रहे हैं।" उन्होंने आगे कहा, "एआई के लाभों को प्रत्येक नागरिक तक पहुंचाने के इस दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में हम ओपनएआई की साझेदारी का स्वागत करते हैं।" फरवरी में ओपनएआई सीईओ से हुई थी मुलाकात इस साल फरवरी में, केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सैम ऑल्टमैन से मुलाकात की थी, जिसमें संपूर्ण एआई स्टैक – जीपीयू, मॉडल और ऐप्स – बनाने की भारत की रणनीति पर चर्चा हुई थी। केंद्रीय मंत्री ने एक्स पर लिखा कि ऑल्टमैन इन तीनों क्षेत्रों में भारत के साथ सहयोग करने को तैयार हैं। उन्होंने आगे कहा कि ओपनएआई के सीईओ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रौद्योगिकी के लोकतंत्रीकरण के दृष्टिकोण की सराहना की। बैठक के दौरान, जिसमें कई स्टार्टअप उपस्थित थे, वैष्णव ने स्टार्टअप समुदाय से अनूठे समाधान प्रस्तुत करने का अनुरोध किया। मंत्री ने ऑल्टमैन और स्टार्टअप समूह के साथ अपनी बातचीत का एक क्लिप साझा किया। वीडियो में मंत्री ने कहा, "हम बहुत जल्द (एआई के लिए) एक तरह की खुली प्रतियोगिता शुरू करने जा रहे हैं।"

ये राज्य हैं भारत के सबसे बड़े दाल उत्पादक, UP केवल 5वें स्थान पर

नई दिल्ली दालें भारत की प्रमुख फसलों में से एक हैं। इसकी खेती करके किसान अच्छा-खासा मुनाफा कमाते हैं। दालों की खेती कई राज्यों में की जाती है। खरीफ और रबी सीजन में अलग-अलग दालों की खेती की जाती हैं। सरकार दलहन की खेती को बढ़ावा भी दे रही है। इसके लिए सरकार किसानों को प्रोत्साहित भी करती है। अलग-अलग राज्य अलग-अलग तरह के दालों की खेती करते हैं। लेकिन सवाल यह है कि भारत का सबसे बड़ा दाल उत्पादक राज्य कौन सा है? अगर आप उत्तर प्रदेश के हैं और आपको लग रहा है कि यूपी ही दाल उत्पादन में नंबर वन होगा तो आप गलत हैं। आइए भारत के टॉप 5 दाल उत्पादक राज्यों के बारे में जानते हैं।   ये भारत के टॉप 5 दाल उत्पादक राज्य  सामान्य क्षेत्रफल लगभग 290 लाख हेक्टेयर (खरीफ- 140 लाख हेक्टेयर + रबी- 150 लाख हेक्टेयर) में दालों की खेती की जाती है।। खरीफ क्षेत्र का मौसमी प्रतिशत हिस्सा 48% है, शेष 52% क्षेत्र रबी दलहन के लिए जाता है।     Madhya Pradesh     Rajasthan     Maharashtra     Karnataka     Uttar Pradesh भारत का सबसे बड़ा दाल उत्पादक राज्य MP मध्य प्रदेश भारत का सबसे बड़ा दलहन उत्पादक राज्य है। वित्त वर्ष 2016-17 और 2020-21 के औसत की बात करें तो राज्य का वार्षिक दलहन उत्पादन लगभग 59.70 लाख टन रहा। चना, तुअर और उड़द दलहनों की सूची में सबसे ऊपर हैं। मध्य प्रदेश में इनकी खेती और उत्पादन काफी ज्यादा होती है। दाल उत्पादन में दूसरे और तीसरे नंबर पर राजस्थान और महाराष्ट्र दाल उत्पादन के मामले में दूसरे नंबर पर राजस्थान है। वित्त वर्ष 2016-17 और 2020-21 के औसत की बात करें तो राज्य का वार्षिक उत्पादन लगभग 38.19 लाख टन रहा है। राज्य रबी सीजन में मूंग, मोठ, मूंग और चना जैसी दालों और खरीफ सीजन में अरहर जैसी दालों का सबसे अधिक उत्पादन करता है। महाराष्ट्र भारत का तीसरा सबसे बड़ा दलहन उत्पादक राज्य है। वित्त वर्ष 2016-17 और 2020-21 के औसत की बात करें तो राज्य 35.71 लाख टन रहा है। महाराष्ट्र में लगभग 20 लाख हेक्टेयर भूमि पर मुख्यतः तुअर दाल की खेती होती है। दाल उत्पादन में चौथे पर कर्नाटक और पांचवें पर UP दाल उत्पादन के मामले में कर्नाटक चौथे नंबर पर है। वित्त वर्ष 2016-17 और 2020-21 के औसत की बात करें तो कर्नाटक में औसत दलहन उत्पादन 19.37 लाख टन रहा है। राज्य में चना और अरहर की फसलों की 60% वृद्धि होती है। यह राज्य चना, अरहर, कुलथी, उड़द और मूंग जैसी विभिन्न प्रकार की दालों की खेती के लिए जाना जाता है। दाल उत्पादन के मामले में उत्तर प्रदेश पांचवें नंबर पर है। वित्त वर्ष 2016-17 और 2020-21 के औसत की बात करें तो यूपी में औसत दलहन उत्पादन 23.43 लाख टन रहा है। दालों की सूची में चना सबसे ऊपर है क्योंकि इसका उत्पादन क्षेत्र सबसे अधिक है। भारत है दुनिया का सबसे बड़ा दाल उत्पादक देश भारत 28 मिलियन मीट्रिक टन दालों के उत्पादन के साथ दुनिया का सबसे बड़ा दाल उत्पादक देश है। पिछले 20 वर्षों में, भारत का दाल उत्पादन 2002 के 11.13 मिलियन मीट्रिक टन से दोगुने से भी ज़्यादा हो गया है। प्रमुख उत्पादक राज्यों में कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश शामिल हैं। भारत में चना, अरहर और मसूर जैसी विभिन्न दालें उगाई जाती हैं, जो इनकी व्यापक खपत को दर्शाता है।  

बैंक ट्रांसफर महंगा! जानिए SBI, HDFC, PNB और केनरा की नई चार्ज दरें

नई दिल्ली  अगर आप इंटरनेट या मोबाइल बैंकिंग के जरिए पैसे भेजते हैं, तो आपके लिए यह जरूरी खबर है. देश के कई बड़े बैंकों ने अब इमीडिएट पेमेंट सर्विस यानी आईएमपीएस (IMPS) पर चार्ज लगाने का फैसला लिया है. आईएमपीएस ट्रांजैक्शन करने वालों इन बैंकों के ग्राहकों को अब तय सीमा के हिसाब से फीस चुकानी होगी. पहले ज्यादातर बैंक इस सुविधा को बिल्कुल फ्री मुहैया कराते थे. देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने अपने करोड़ों ग्राहकों को बड़ा झटका दे दिया है. दरअसल, एसबीआई ने खुदरा ग्राहकों के लिए अपनी आईएमपीएस ट्रांजैक्शन चार्ज में बदलाव करने का ऐलान किया है. नए बदलाव 15 अगस्त, 2025 से लागू होंगे. SBI के नए चार्ज (15 अगस्त से लागू) 25,000 रुपये तक – कोई चार्ज नहीं 25,000 रुपये से 1 लाख रुपये तक – 2 रुपये + GST 1 लाख रुपये से 2 लाख रुपये तक – 6 रुपये + GST 2 लाख रुपये से 5 लाख रुपये तक – 10 रुपये + GST केनरा बैंक के नए चार्ज     1,000 रुपये तक: कोई चार्ज नहीं     1,000 रुपये – 10,000 रुपये तक: 3 रुपये + GST     10,000 रुपये – 25,000 रुपये तक: 5 रुपये + GST     25,000 रुपये – 1,00,000 रुपये तक: 8 रुपये + GST     1,00,000 रुपये – 2,00,000 रुपये तक: 15 रुपये + GST     2,00,000 रुपये – 5,00,000 रुपये तक: 20 रुपये + GST पंजाब नेशनल बैंक के नए चार्ज 1,000 रुपये तक: कोई चार्ज नहीं 1,001 रुपये – 1,00,000 रुपये तक: ब्रांच से 6 रुपये + GST, ऑनलाइन: 5 रुपये + GST 1,00,000 रुपये से ऊपर: ब्रांच से: 12 रुपये + GST, ऑनलाइन: 10 रुपये + GST HDFC बैंक के नए चार्ज (1 अगस्त 2025 से लागू)     1,000 रुपये तक: आम ग्राहक: 2.50 रुपये, वरिष्ठ नागरिक: 2.25 रुपये     1,000 रुपये – 1,00,000 रुपये तक: आम ग्राहक: 5 रुपये, वरिष्ठ नागरिक: 4.50 रुपये     1,00,000 रुपये से ऊपर: आम ग्राहक: 15 रुपये, वरिष्ठ नागरिक: 13.50 रुपये     HDFC बैंक के Gold और Platinum अकाउंट होल्डर्स को चार्ज नहीं देना होगा. क्या होता है IMPS बता दें कि इमीडिएट पेमेंट सर्विस यानी आईएमपीएस एक रियल टाइम पेमेंट सर्विस है. यह सर्विस 24 घंटे उपलब्‍ध होती है. इसे नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ऑपरेट करता है. इस सर्विस के जरिए ग्राहक किसी भी समय तुरंत पैसे भेज भी सकते हैं और हासिल भी कर सकते हैं.

स्टॉक मार्केट फिसला, छह दिन की तेजी टूटी; जानें कौन से 10 शेयर बिखरे

मुंबई  शेयर बाजार (Stock Market) में बीते छह कारोबारी दिनों से जारी तेजी पर शुक्रवार को ब्रेक लगा नजर आया. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स (BSE Sensex) खुलने के साथ ही 400 अंक से ज्यादा फिसल गया, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी (NSE Nifty) भी पिछले बंद के मुकाबले 127 अंक की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था. शुरुआती कारोबार में ICICI Bank, Axis Bank, Reliance जैसे शेयर गिरावट के साथ ट्रेड करते दिखे.  धीमी शुरुआत के बाद फिसलते गए इंडेक्स बीएसई का सेंसेक्स इंडेक्स अपने पिछले कारोबारी बंद 82,000.71 की तुलना में गिरावट के साथ 81,951.48 के लेवल पर खुला और फिर कुछ ही मिनटों में ये 411 अंक से ज्यादा की गिरावट के साथ टूटकर 81,578 के स्तर पर कारोबार करता हुआ नजर आया. सेंसेक्स की तरह ही एनएसई निफ्टी की भी चाल रही और ये अपने पिछले बंद 25,083.75 की तुलना में 25,064.15 पर खुलने के बाद फिसलता चला गया और 25000 के स्तर के नीचे आ गया. महज 10 मिनट के कारोबार के दौरान ही ये 127 अंकों की गिरावट लेकर 24,950 पर ट्रेड कर रहा था.  खुलते ही बिखर गए ये बड़े शेयर  शुक्रवार को बाजार में आई इस गिरावट के चलते कई दिग्गज कंपनियों के शेयर खुलने के साथ ही बिखर गए. इनमें लार्जकैप कैटेगरी में शामिल HCL Tech Share (1.50%), Asian Paints Share (1.25%) फिसलकर कारोबार कर रहा था, तो दूसरी ओर ITC, HDFC Bank, ICICI Bank, NTPC, Tata Steel और Reliance शेयर भी रेड जोन में ओपन हुए. शुरुआती कारोबार में जहां 1362 कंपनियों के शेयरों ने ग्रीन जोन में ओपनिंग की, तो वहीं 920 कंपनियों के स्टॉक्स गिरावट के साथ खुले. 151 शेयरों की स्थिति फ्लैट रही.  सबसे ज्यादा टूटने वाले 10 शेयर सबसे ज्यादा फिसलने वाले शेयरों की बात करें, तो एचसीएल और एशियन पेंट्स के अलावा मिडकैप कैटेगरी में शामिल Ramco Cement Share (2.42%), LIC Housing Finance Share (2%), Relaxo Share (1.40%), Bandhan Bank Share (1.35%) और Hindustan Petro Share (1.30%) की गिरावट लेकर कारोबार कर रहा था. स्मॉलकैप कैटेगरी में शामिल शेयरों में भी जोरदार गिरावट देखने को मिली और खुलने के साथ ही Vimta Labs Share (6%), Force Motors Share (5.10%) और Everest India Share (3.90%) फिसल गया.  इस गेमिंग स्टॉक में गिरावट जारी सरकार के ऑनलाइन गेमिंग बिल 2025 का असर ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर से जुड़ी कंपनी Nazara Tech के शेयर पर कम होने का नाम नहीं ले रहा है और लगातार तीसरे दिन इस शेयर में गिरावट देखने को मिली. सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भी ये खुलते ही 4 फीसदी के आस-पास फिसल गया. तीन दिन में ये करीब 19 फीसदी टूट चुका है और इसका मार्केट कैप कम होकर 10740 करोड़ रुपये रह गया है. 

इस दीवाली सस्ती होंगी कारें-बाइकें? टैक्स बदलाव से बढ़ी उम्मीदें

नई दिल्ली ऑटो सेक्टर इस साल की शुरुआत से ही सुस्ती झेल रहा है. लेकिन अब उम्मीद की किरण नजर आ रही है. माना जा रहा है कि इस दीवाली सरकार GST दरों में बदलाव कर सकती है, जिससे गाड़ियों की कीमतों में बड़ी कटौती देखने को मिल सकती है. मौजूदा समय में छोटी कारों और टू-व्हीलर्स पर 28% GST लगाया जाता है. खबर है कि सरकार इस टैक्स को घटाकर 18% तक लाने पर विचार कर रही है. अगर ऐसा हुआ तो ऑटो इंडस्ट्री को जबरदस्त राहत मिलेगी और ग्राहकों के लिए भी गाड़ियां खरीदना आसान हो जाएगा. सेल्स का हाल – गिरावट से जूझ रहा सेक्टर ऑटो सेक्टर पिछले कुछ समय से दबाव में है. ट्रैक्टर को छोड़कर लगभग सभी सेगमेंट की सेल्स में कमी आई है. टू-व्हीलर की बिक्री में लगभग 4% की गिरावट दर्ज की गई है. पैसेंजर व्हीकल की सेल्स भी सालाना आधार पर करीब 1% घट गई है. वहीं, कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट अपेक्षाकृत स्थिर नजर आया है. टैक्स कटौती से क्या होगा असर? अगर टू-व्हीलर्स और छोटी कारों पर GST घटकर 18% हो जाता है, तो सीधा फायदा ग्राहकों और कंपनियों दोनों को मिलेगा. वाहनों की कीमतें करीब 7% तक सस्ती हो सकती हैं. कीमत घटने से त्योहारों के सीजन में डिमांड में उछाल आएगा. टू-व्हीलर और पैसेंजर कार की बिक्री बढ़ने से ऑटो सेक्टर को दोबारा रफ्तार मिल सकती है. फेस्टिव सीजन में बढ़ सकती है चमक दीवाली का समय वैसे भी गाड़ियों की बिक्री के लिए अहम माना जाता है. अगर इस बार GST में कटौती लागू होती है, तो ग्राहक ज्यादा संख्या में गाड़ियां खरीदने आगे बढ़ेंगे. इससे न केवल ऑटो कंपनियों की बिक्री में तेजी आएगी बल्कि बाजार का समग्र माहौल भी सकारात्मक होगा.

निवेशकों के लिए खुशखबरी: अब IPO से पहले भी खरीद-बिक्री कर सकेंगे शेयर

नई दिल्ली शेयर बाजार नियामक सेबी जल्द ही एक विनियमित प्लेटफॉर्म लॉन्च कर सकता है, जहां प्री-आईपीओ (आरंभिक सार्वजनिक पेशकश से पहले) कंपनियां कुछ खुलासे करने के बाद कारोबार कर सकेंगी। नियामक के अध्यक्ष तुहिन कांत पांडे ने गुरुवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह पहल पायलट आधार पर होगी। फिक्की की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए पांडे ने कहा कि निवेशकों के लिए निवेश निर्णय लेने के लिए कंपनियों की लिस्टिंग से पहले अक्सर पर्याप्त नहीं होती है। सेबी प्रमुख ने संकेत दिया कि हम पायलट आधार पर एक ऐसा प्लेटफॉर्म ला सकते हैं, जहां आईपीओ से पहले कंपनियां कुछ खुलासे कर व्यापार करने का विकल्प चुन सकती हैं।" सेबी प्रमुख ने कहा कि इस पहल के अनावश्यक प्रक्रियाओं और समस्याओं के दूर करने की उम्मीद है। यह धन जुटाने, प्रकटीकरण और निवेशक को शामिल करने में अनावश्यक परेशानी पैदा करती हैं। इसके अलावे यह प्लेटफॉर्म उन उभरते क्षेत्रों, उत्पादों और परिसंपत्ति वर्गों का पता लगाएगी जो पूंजी की मांग और आपूर्ति दोनों का सृजन करते हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या प्री-आईपीओ ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर डिपॉजिटरीज के साथ कोई चर्चा हुई है, तो उन्होंने कहा, "यह केवल सिद्धांत रूप में है, जो मैं कह रहा हूं।" यह नया प्लेटफॉर्म निवेशकों को आईपीओ आवंटन और लिस्टिंग के बीच तीन दिनों की अवधि में विनियमित तरीके से शेयरों का व्यापार करने की अनुमति दे सकता है। यह पहल मौजूदा अनियमित ग्रे मार्केट की जगह ले सकती है, जो वर्तमान में इस अवधि के दौरान संचालित होता है।

त्यौहारी सीजन से पहले सरकार ने दी आम जनता को राहत, 12% और 28% वाले GST स्लैब खत्म

नई दिल्ली  महंगाई के मोर्चे पर आम आदमी को बड़ी राहत देने की तैयारी है। जीएसटी स्लैब की संख्या घटाकर दो यानी 5% और 18% कर दी जाएगी।12% और 28% वाले स्लैब को पूरी तरह से खत्म कर दिया जाएगा। बता दें कि आज 21 अगस्त 2025 को हुई बैठक में ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स (GoM) ने केंद्र सरकार का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया, जिसमें मौजूदा चार GST स्लैब (5%, 12%, 18%, 28%) को केवल दो—5% और 18% में बदलने की बात कही गई है। इस प्रस्ताव में 12% और 28% स्लैब को पूरी तरह से समाप्त करने की सिफारिश की गई है। बता दें कि इससे आम लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। 12% स्लैब में आने वाले अधिकतर सामान और सेवाएं 5% में आ जाएंगी, जबकि 28% स्लैब की लगभग 90% वस्तुएं और सेवाएं 18% में आ जाएंगी। केवल तंबाकू, पान मसाला जैसे सिन गुड्स पर ऊंची दरें जारी रहेंगी। जीएसटी मीटिंग में ऐलान संभव केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ मंत्रिसमूह की बैठक में बिहार के उप-मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा, "हमने भारत सरकार के 12% और 28% के जीएसटी स्लैब को खत्म करने के दो प्रस्तावों का समर्थन किया है।" सम्राट चौधरी ने कहा कि सभी ने केंद्र द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों पर सुझाव दिए। कुछ राज्यों की टिप्पणियां भी थीं। इसे जीएसटी काउंसिल को भेज दिया गया है। अब आगे का फैसला काउंसिल करेगी। केंद्र सरकार द्वारा 2 स्लैब समाप्त करने के प्रस्ताव पर विचार-विमर्श किया गया और उसका समर्थन किया गया। हमने केंद्र सरकार द्वारा 12% और 28% के जीएसटी स्लैब को समाप्त करने के दो प्रस्तावों का समर्थन किया है।" क्या होगा सस्ता – जानिए 12% स्लैब से 5% स्लैब में आने वाले सामान 12% वाले टैक्स स्लैब को खत्म करके उन्हें 5% में लाने का मतलब है कि इन पर लगने वाला टैक्स लगभग 7% कम हो जाएगा। इससे ये चीजें सस्ती हो जाएंगी- • कपड़े और रेडीमेड गारमेंट्स (₹1,000 से ऊपर के कपड़े भी अब सस्ते हो सकते हैं) • जूते-चप्पल • प्रिंटिंग और स्टेशनरी आइटम्स • काफी सारे प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स • होम अप्लायंसेज की कुछ कैटेगरी (जिन पर 12% लगता था) इस बदलाव का सीधा असर मध्यम वर्ग और आम उपभोक्ता पर पड़ेगा क्योंकि रोजाना इस्तेमाल वाली कई चीजें इस श्रेणी में आती हैं। 2. 28% स्लैब से 18% स्लैब में आने वाले सामान 28% स्लैब की लगभग 90% चीज़ों को 18% में लाने का मतलब है कि इनकी कीमत पर टैक्स का बोझ 10% कम हो जाएगा। इससे निम्न चीज़ें सस्ती हो सकती हैं- • टू-व्हीलर और कारें (खासकर छोटे वाहन और एंट्री-लेवल मॉडल) • सीमेंट और बिल्डिंग मटेरियल (हाउसिंग और रियल एस्टेट सेक्टर को बड़ा फायदा) • कंज़्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे फ्रिज, वॉशिंग मशीन, एयर कंडीशनर, टीवी आदि • कुछ पैकेज्ड फूड और बेवरेजेस • पेंट्स और वार्निश इससे न केवल उपभोक्ता को राहत मिलेगी बल्कि रियल एस्टेट और ऑटोमोबाइल सेक्टर की बिक्री में भी तेजी आ सकती है।  

Reliance और Bajaj Finserv की रफ्तार से शेयर बाजार में जोरदार उछाल

मुंबई  शेयर बाजार (Stock Market) में लगातार चौथे कारोबारी दिन गुरुवार को तेजी के साथ कारोबार की शुरुआत हुई. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स इंडेक्स (BSE Sensex) जहां खुलने के बाद कुछ ही मिनटों में 200 अंक से ज्यादा की छलांग लगा गया, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी (NSE Nifty) ने भी ग्रीन जोन में कारोबार की शुरुआत की. इस बीच मार्केट ओपन होने के साथ ही मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर 1 फीसदी से ज्यादा चढ़ गया.  तेजी के साथ खुले 1542 शेयर  शेयर मार्केट (Share Market) में कारोबार की शुरुआत के दौरान 1542 कंपनियों के शेयरों ने अपने पिछले बंद के मुकाबले मामूली या तेज बढ़त लेकर ओपनिंग की, जबकि 653 कंपनियों के स्टॉक्स गिरावट के साथ लाल निशान पर ओपन हुए. इसके अलावा मार्केट में 146 कंपनियों के शेयर से रही, जिनकी स्थिति में किसी भी तरह का कोई बदलाव देखने को नहीं मिला, यानी इनकी फ्लैट ओपनिंग हुई. शुरुआती कारोबार में सबसे तेज भागने वाले शेयरों में बजाज फिनसर्व, रिलायंस, एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस, टाटा मोटर्स और कोटक महिंद्रा बैंक रहे.  82000 के पार खुला सेंसेक्स  बीएसई का सेंसेक्स अपने पिछले बंद 81,857.84 की तुलना में उछलकर गुरुवार को 82,220.46 के स्तर पर खुला और लगातार ग्रीन जोन में कारोबार करता दिखाई दिया. सेंसेक्स की तरह ही एनएसई का निफ्टी-50 इंडेक्स भी अपने पिछले कारोबारी बंद 25,050.55 की तुलना में तेजी लेते हुए 25,142 के स्तर पर खुला. खास बात ये है कि अमेरिका से लेकर एशिया तक के बाजार में सुस्ती के बावजूद भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) में तेजी का सिलसिला जारी है.  रिलायंस समेत ये 10 शेयर उछले बात करें, सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन शुरुआती कारोबार में सबसे तेज रफ्तार से भागने वाले शेयरों के बारे में, तो बीएसई के लार्जकैप कैटेगरी में शामिल Bajaj Finserv Share (1.50%), Reliance Share (1.30%) और Trent Share (1.27%) तक उछलकर कारोबार कर रहा था. इसके अलावा मिडकैप कंपनियों में शामिल NIACL Share (7.60%), JSL Share (3.62%), Godrej Properties Share (2.40%) और GoDigit Share (2%) की तेजी लेकर ट्रेड कर रहे थे. स्मॉलकैप में भी हरियाली देखने को मिली और इसमें शामिल Raclgear Share (18%), JWL Share (11%) और Jai Corp Ltd Share (9.78%) चढ़ा.  ये शेयर खुलते ही फिसले यहां बाजार में तेजी के बीच गिरावट के साथ कारोबार करने वाले शेयरों के बारे में बात कर लेना भी जरूरी है, तो बता दें कि लार्जकैप में Eternal Share 1.60% और HUL Share 1.40% फिसलकर कारोबार कर रहा था. तो वहीं एचसीएल टेक, इंफोसिस, टेक महिंद्रा और टीसीएस जैसे टेक कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट देखने को मिली. मिडकैप में शामिल Ola Electric Share लगातार दो दिन तूफानी तेजी के साथ भागने के बाद गुरुवार को खुलते ही 5% से ज्यादा फिसल गया, तो Voltas Share में करीब 2% की गिरावट आई. ऑनलाइन गेमिंग (Online Gaming) से जुड़ी कंपनी Nazara Tech का शेयर आज भी ओपनिंग के साथ ही 10% फिसल गया. 

GST सुधार से छोटे वाहनों पर असर: कीमतें घटेंगी, राजस्व में 6 अरब डॉलर की कमी

नई दिल्ली स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री द्वारा जब गुड्स एंड सर्विस टैक्स में सुधार (GST Reforms) का ऐलान किया गया, जब से देश भर में कुछ ख़ास वस्तुओं और सर्विसेज के सस्ते होने की चर्चा हो रही है. पीएम मोदी ने लालकिले के प्राचरी से कहा कि, ये जीएसटी रिफॉर्म अक्टूबर में दिवाली से पहले किया जा सकता है, जो आम आदमी के लिए दिवाली गिफ्ट जैसा होगा. इस जीएसटी सुधार के दायरे में वाहन भी शामिल हैं, जिनकी कीमतों में भारी गिरावट की उम्मीद की जा रही है. एचएसबीसी की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत में वाहनों पर जीएसटी में संभावित कमी से छोटी कारों की कीमतों में उल्लेखनीय कमी आ सकती है. रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि अगर छोटी कारों पर जीएसटी की दर मौजूदा 28% से घटाकर 18% कर दी जाए, तो इन वाहनों की कीमतों में लगभग 8% की कमी देखने को मिल सकती है.  बताया जा रहा है केंद्र सरकार ने जीएसटी स्लैब में सुधार के लिए प्रस्ताव दिया है और यदि यह प्रस्ताव माना जाता है तो छोटी कारों की कीमत में तगड़ी कमी आएगी. इससे फेस्टिव सीजन के मौके पर ऑटो सेक्टर को तगड़ा लाभ मिल सकता है. बशर्ते जीएसटी सुधार में ये ऐलान दिवाली के पहले घोषित किया जाए. इस बार दिवाली 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी. भारत में ज्यादातर लोग इस धनतेरस और दिवाली के मौके पर अपने घर में नए वाहन लाते हैं. मौजूदा समय में, पैसेंजर व्हीकल्स पर 28% से 50% तक जीएसटी टैक्स लगाया जाता है, जो वाहन के साइज, फ्यूल टाइप और इंजन क्षमता पर निर्भर करता है. जीएसटी के अलावा इन वाहनों पर सेस (Cess) भी लगाया जाता है, जो 1% से 5% है. इससे वाहनों की कीमत में और भी इजाफा हो जाता है. ख़बर है कि, छोटी कारें, जिन पर वर्तमान में 28 प्रतिशत जीएसटी और 1-3 प्रतिशत की सेस (Cess) दरें लागू होती हैं, नए बदलाव के बाद ये 18 प्रतिशत टैक्स स्लैब में आ सकती हैं. रिपोर्ट में छोटी कारों की कीमतों में 8% की संभावित गिरावट का अनुमान लगाया गया है, जबकि बड़ी कारों की कीमतों में 3% से 5% तक की कमी की उम्मीद है. रिपोर्ट में जीएसटी में एकसमान कटौती की संभावना पर भी विचार करने की बात कही गई है. अगर सभी वाहन श्रेणियों पर जीएसटी 28% से घटाकर 18% कर दिया जाए, तो सभी कारों के लिए कीमतों में लगभग 6% से 8% का लाभ हो सकता है.  राजस्वर में 6 अरब डॉलर की कमी हालाँकि, वाहन के साइज के आधार पर मौजूदा उपकर यानी 'Cess' को बनाए रखने का मतलब है कि ऐसी स्थिति की संभावना कम है. रिपोर्ट में सरकार खजाने में होने वाले संभावित नुकसान की तरफ भी इशारा किया गया है. जिसके अनुसार इस तरह की किसी भी व्यापक टैक्स कटौती से सरकार को अनुमानित 5 अरब से 6 अरब अमेरिकी डॉलर के बीच राजस्व में गिरावट का सामना करना पड़ेगा. रिपोर्ट में एक रिवाइज़्ड टैक्सेशन मैकेनिज़्म का भी सुझाव दिया गया है, जिसके तहत छोटी कारों पर 18% की कम दर से कर लगाया जा सकता है, जबकि बड़े वाहनों पर 40% की "स्पेशल रेट" लागू हो सकती है, और मौजूदा उपकर समाप्त कर दिया जाएगा. इस प्रस्ताव का उद्देश्य यह है कि, वाहनों के साइज और टाइप के अनुसार टैक्सेशन के तरीके को अनुकूलित करना है. जिससे बाजार में संतुलन बना रहे. इस सेग्मेंट में सबसे बड़े खरीदार भारत में 1000 सीसी से लेकर 1500 सीसी (1.0 लीटर से 1.5 लीटर इंजन) वाली कारों की डिमांड सबसे ज्यादा है. जिसमें सबसे सस्ती कार मारुति ऑटो के10 से लेकर हुंडई क्रेटा जैसी एसयूवी शामिल हैं. बीते जुलाई की टॉप 10 बेस्ट सेलिंग कारों की लिस्ट से यदि केवल महिंद्रा स्कॉर्पियो को बाहर कर दें तो कुल 10 में से 9 कारें 1.0 लीटर से 1.5 लीटर इंजन क्षमता के बीच आती हैं. इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि, जीएसटी में इस सुधार का आम आदमी को किस कदर लाभ मिलेगा. इस समय कारों पर कितना लगता है GST नए वाहनों के लिए, जीएसटी दरें कार के कैटेगरी और साइज के आधार पर अलग-अलग हैं. 1200 सीसी तक की इंजन क्षमता और 4 मीटर से कम लंबाई वाली छोटी पेट्रोल कारों पर 28% जीएसटी और 1% उपकर लगता है. जबकि छोटी डीजल कारों (1500 सीसी तक, 4 मीटर से कम) पर 3% उपकर के साथ 28% जीएसटी लगता है.  वहीं मिड-साइज की कारों पर कुल 43%, लग्ज़री कारों पर 48% और एसयूवी पर सबसे ज़्यादा 50% तक का टैक्स लगता है. दूसरी ओर, इलेक्ट्रिक वाहनों पर केवल 5% जीएसटी टैक्स लागू होता है. जिससे वे अधिक किफायती हो जाते हैं. जीएसटी से पहले के दौर की तुलना में, छोटी कारों और लग्ज़री कारों पर कर का बोझ कम हुआ है, जबकि मिड-साइज की कारें थोड़ी महंगी हुई हैं. वाहन कैटेगरी इंजन क्षमता और लंबाई GST रेट उपकर  टोटल टैक्स छोटी पेट्रोल कारें 1200 सीसी तक, 4 मीटर से कम 28% 1% 29% छोटी डीजल कारें 1500 सीसी तक, 4 मीटर से कम 28% 3% 31% मिड-साइज कारें 1200 सीसी (पेट्रोल) और 1500 सीसी (डीजल) 28% 15% 43% लग्ज़री कारें 1500 सीसी तक   28% 20% 48% एसयूवी वाहन  1500 सीसी तक, 4 मीटर से ज्यादा  28% 22% 50% इलेक्ट्रिक वाहन  सभी क्षमता वाले  5% 0% 5% संभल जाएगा छोटी कारों का बाजार पिछले कुछ सालों में एंट्री लेवल छोटी कारों का बिजनेस बुरी तरह प्रभावित हुआ है. 5 लाख रुपये से भी कम कीमत में आने वाली एंट्री लेवल कारें, जिनकी बिक्री वित्तीय वर्ष-16 में 10 लाख से ज्यादा यूनिट्स की थी वो वित्तीय वर्ष-25 में घटकर 25,402 यूनिट पर आ गिरी हैं. कुल कार बिक्री में हैचबैक कारों की हिस्सेदारी आधी रह गई है, जो 2020 में 47 प्रतिशत से घटकर 2024 में 24 प्रतिशत हो गई है. ऐसे में यदि छोटी कारों पर टैक्स का बोझ कम होता है तो लोग इन कारों की तरफ मुखर होंगे और इनकी बिक्री बढ़ने की उम्मीद है.