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टैरिफ की राजनीति में भारत ने दिखाया कमाल, चीन को निर्यात बढ़ा 22%

नई दिल्ली एक ओर जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप टैरिफ-टैरिफ (Trump Tariff) खेल रहे हैं, तो वहीं भारत ने अपने निर्यातक देशों की लिस्ट में विविधता लाई है. इसका असर भी देखने को मिला है. अमेरिका के 50 फीसदी टैरिफ (US Tariff On India) का बड़ा असर झींगा निर्यात से लेकर टेक्सटाइल सेक्टर तक पर देखने को मिला. लेकिन भारतीय निर्यातकों ने अमेरिकी बाजार में दबाव के बीच दूसरे देशों के बाजारों का रुख किया. रिपोर्ट के मुताबिक, US Tariff Tension के बीच India-China के व्यापार संबंध सुधरे हैं और वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में भारत का चीन को निर्यात करीब 22% बढ़ा है.  टैरिफ टेंशन के बीच बढ़ा चीन से कारोबार रिपोर्ट्स की मानें तो India-China Trade में सुधार के चलते अप्रैल-सितंबर 2025 में चीन को भारत का निर्यात 8.41 अरब डॉलर रहा है, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की पहली छमाही अप्रैल-सितंबर 2024 के 6.90 अरब डॉलर से 22 फीसदी के आसपास की बढ़त दर्शाता है. खास तौर पर अमेरिकी टैरिफ के असर से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले सेक्टर्स के प्रोडक्ट्स की चीन में अच्छी खासी डिमांड देखने को मिली है. इनमें झींगा और एल्युमिनियम प्रमुख हैं. इसके अलावा और भी कई क्षेत्रों ने चीन को निर्यात में तेजी दिखाई है.  झींगा समेत इन सेक्टर्स को लगा था झटका बीते दिनों आईं अन्य रिपोर्ट्स पर नजर डालें, तो अमेरिका द्वारा भारत पर 50% का टैरिफ लगाने के बाद से भारतीय झींगा निर्यात पर बुरा असर देखने को मिला है. ग्लोबल डेटा के हवाले से ट्रंप के इस टैरिफ अटैक के चलते भारत से अमेरिका को एयर कार्गो निर्यात में 14 फीसदी की तगड़ी गिरावट दर्ज की गई है, तो आंध्र प्रदेश की झींगा इंडस्ट्री करीब 25,000 करोड़ रुपये के भारी नुकसान का अनुमान लगाया गया था. इनमें कहा गया था कि अमेरिका को झींगा निर्यात के 50 फीसदी ऑर्डर 50% टैरिफ के बाद से रद्द हुए. इसके अलावा अन्य सबसे प्रभावित सेक्टर्स में एल्युमिनियन और टेक्सटाइल रहा, जिनके लिए अमेरिका सबसे बड़ा बाजार रहा है. बीते दिनों कंफेडेरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री यानी CITI के एक सर्वे में इसके प्रभाव देखने को मिले थे. सर्वे के निष्कर्षों में सामने आया था कि निर्यात पर 50% टैरिफ के चलते कपड़ा और परिधान क्षेत्र कम ऑर्डर और कारोबार में करीब 50% की गिरावट से जूझ रहा है.  चीनी राजदूत बोले- 'भारतीय वस्तुओं का स्वागत' भारत में चीन के राजदूत श फीहोंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (पहले X) पर एक पोस्ट के जरिए भी India-China Trade बढ़ने पर खुशी जाहिर की है. उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि, 'वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में चीन को भारत का निर्यात 22% बढ़ा है. बीजिंग ज्यादा से ज्यादा भारतीय वस्तुओं का स्वागत करता है और अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव को कम करने में मदद के लिए तैयार है.' ट्रंप ने भारत पर टैरिफ किया था दोगुना बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी टैरिफ पॉलिसी के तहत शुरुआत में भारत पर 25 फीसदी का रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया था. लेकिन बाद में रूसी तेल और हथियारों की खरीद को मुद्दा बनाया और भारत पर इसकी खरीद बढ़ाकर यूक्रेन युद्ध में पुतिन की मदद करने का आरोप लगाया था. इसके चलते अमेरिका की ओर से भारत पर लागू टैरिफ को दोगुना करते हुए 50% कर दिया गया था, जो 27 अगस्त से लागू है. 

स्कूटर मार्केट में टीवीएस की तेजी, धीरे-धीरे 29% हिस्सेदारी पर पहुंची कंपनी

नई दिल्ली भारतीय स्कूटर उद्योग अब एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। लंबे समय से बाजार पर होंडा (Honda) का कब्जा रहा है, लेकिन FY2026 की पहली छमाही (H1 FY2026) के आंकड़ों ने दिखाया है कि अब TVS (टीवीएस) उसे कड़ी टक्कर दे रही है। स्कूटर बाजार में न केवल रिकॉर्डतोड़ बिक्री हो रही है, बल्कि कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी (Market Share) में भी बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं। भारतीय स्कूटर उद्योग ने FY2025 में 68.5 लाख यूनिट्स की रिकॉर्ड बिक्री की थी, अब FY2026 में पहली बार 70 लाख की बिक्री का आंकड़ा पार करने की ओर बढ़ रहा है। H1 FY2026 (अप्रैल-सितंबर 2025) में स्कूटर निर्माताओं ने कुल 37.21 लाख यूनिट्स की बिक्री की, जो पिछले साल के मुकाबले 6.42% ज्यादा है। GST 2.0 के तहत पेट्रोल इंजन वाले स्कूटरों पर कीमतों में कटौती के चलते सितंबर 2025 में रिकॉर्ड 7,33,391 यूनिट्स की बिक्री हुई, जो अब तक का सबसे बेहतरीन मासिक आंकड़ा है। बाजार में सबसे बड़ा बदलाव होंडा मोटरसाइकिल एंड & स्कूटर इंडिया (HMSI) और TVS मोटर कंपनी के प्रदर्शन में आया है। बाजार लीडर होंडा ने पिछले छह महीनों में 14.3 लाख स्कूटर बेचे, लेकिन यह पिछले साल (H1 FY2025) के मुकाबले 9% कम है। इस गिरावट के कारण होंडा की बाजार हिस्सेदारी 45% से गिरकर 39% पर आ गई है। यह दिखाता है कि कंपनी को अपने लोकप्रिय एक्टिवा (Activa) और डियो (Dio) मॉडलों पर कड़ा मुकाबला मिल रहा है। TVS मोटर ने इस दौरान 10.8 लाख स्कूटर बेचकर सबको चौंका दिया। यह पिछले साल के मुकाबले 27% की जबरदस्त वृद्धि है, जिसने कंपनी की बाजार हिस्सेदारी को 24% से बढ़ाकर 29% तक पहुंचा दिया है। इस शानदार प्रदर्शन में उसके पेट्रोल स्कूटरों (Jupiter, NTorq, Zest) के साथ-साथ इलेक्ट्रिक स्कूटर iQube का भी बड़ा हाथ है, जिसने 20% की सालाना वृद्धि दर्ज की है। होंडा और टीवीएस के अलावा अन्य कंपनियों ने भी बेहतरीन प्रदर्शन किया है। सुजुकी एक्सेस 125 (Access 125) की मजबूती के दम पर 11% की वृद्धि के साथ 5.63 लाख यूनिट्स बेचीं और हिस्सेदारी 15% तक बढ़ाई। सुजुकी भी जल्द ही ई-एक्सेस (e-Access) इलेक्ट्रिक स्कूटर लॉन्च करने की तैयारी में है। स्कूटर सेगमेंट में 32% की बड़ी छलांग लगाकर 2.41 लाख यूनिट्स बेचीं। इसकी वृद्धि में उसके इलेक्ट्रिक स्कूटर Vida (वीडा) की 132% की शानदार बिक्री का अहम योगदान रहा। इलेक्ट्रिक स्टार्ट-अप एथर ने रिज्टा (Rizta) जैसे फैमिली स्कूटर की बदौलत 70% की भारी वृद्धि दर्ज की और कुल 1.09 लाख यूनिट्स बेचीं। बजाज ऑटो (Bajaj Auto) के उत्पादन में आई दिक्कतों के कारण इसकी कुल बिक्री में 6% की मामूली गिरावट आई। हालांकि, कंपनी ने बाद में चेतक (Chetak) इलेक्ट्रिक स्कूटर के साथ वापसी की है। वहीं, यामाहा (Yamaha) की बिक्री में 6% की गिरावट के साथ इसकी हिस्सेदारी 4.07% रह गई। हालांकि, इसका प्रीमियम एरॉक्स 155 (Aerox 155) स्कूटर 16% की वृद्धि दर्ज करने में सफल रहा है। स्कूटर उद्योग की समग्र वृद्धि में इलेक्ट्रिक स्कूटर (e-2W) की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। H1 FY2026 में इलेक्ट्रिक स्कूटरों की बिक्री 4,42,640 यूनिट्स रही, जो पिछले साल के मुकाबले 29% ज्यादा है। इसने कुल स्कूटर बाजार में अपनी हिस्सेदारी 11% से बढ़ाकर 12% कर दी है। पेट्रोल और CNG की बढ़ती कीमतों को देखते हुए, ग्राहकों के बीच इलेक्ट्रिक स्कूटरों के लंबे समय के फायदे और किफायती मोबिलिटी के रूप में इसकी मांग लगातार बनी हुई है।

Kawasaki ने पेश की नई KLE500, जानें ग्लोबल मार्केट वेरिएंट का डिजाइन और दो वेरिएंट की खासियत

नई दिल्ली हैदराबाद: दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी Kawasaki ने अपनी नई Kawasaki KLE500 का खुलासा कर दिया है. इस मोटरसाइकिल को EICMA 2024 में पहली बार प्रदर्शित किया गया था. कंपनी ने मोटरसाइकिल को अभी अमेरिकी बाज़ार में लॉन्च किया गया है, और इसे दो वेरिएंट – स्टैंडर्ड और SE में उतारा गया है. 2026 Kawasaki KLE500 का इंजन नई Kawasaki KLE500 में वही 451cc, पैरेलल-ट्विन, लिक्विड-कूल्ड इंजन इस्तेमाल किया गया है, जो Kawasaki Ninja 500 और Eliminator 500 में भी मिलता है. हालांकि कंपनी ने अधिकतम आउटपुट आंकड़ों की पुष्टि नहीं की है, लेकिन यह इंजन 45.4 bhp की पावर और 42.6 Nm का टॉर्क उत्पन्न करता है. कंपनी ने KLE में Versys 650 जैसे बड़े फ्रंट और रियर स्प्रोकेट दिए हैं. 2026 Kawasaki KLE500 का डिजाइन इसके डिज़ाइन की बात करें तो, Kawasaki KLE500 में कॉम्पैक्ट हेडलाइट, लंबी विंडस्क्रीन और पतले फ्यूल टैंक के साथ रैली से प्रेरित स्टाइलिंग दी गई है. इसे स्टील ट्रेलिस फ्रेम पर बनाया गया है, जिसका वज़न लगभग 19 किलोग्राम है. मोटरसाइकिल में सस्पेंशन के लिए 210 मिमी ट्रेवल वाला नॉन-एडजस्टेबल 43 मिमी KYB USD फोर्क इस्तेमाल किया गया है, जबकि बाइक के रियर में 200 मिमी ट्रेवल वाला प्रीलोड-एडजस्टेबल मोनोशॉक मिलता है. Kawasaki ने बताया है कि सीट की ऊंचाई 860 मिमी रखी है, जबकि इसका ग्राउंड क्लीयरेंस अपेक्षाकृत कम 172 मिमी है. तुलना के लिए, Royal Enfield Himalayan 450 में 230 मिमी का ग्राउंड क्लीयरेंस मिलता है. दोनों बाइक्स में 21-इंच का फ्रंट और 17-इंच का रियर व्हील सेटअप समान है. Kawasaki KLE500 के मानक वेरिएंट में एलसीडी इंस्ट्रूमेंट कंसोल है, जबकि SE वेरिएंट में 4.3 इंच का TFT डिस्प्ले इस्तेमाल किया गया है. इसके SE वेरिएंट में लंबी विंडस्क्रीन, नकल गार्ड, बड़ी स्किड प्लेट और फुल एलईडी लाइटिंग भी दी गई है. 2026 Kawasaki KLE500 की कीमत कीमत की बात करें तोअमेरिका में इसके बेस KLE500 को 6,599 अमेरिकी डॉलर यानी लगभग 5.80 लाख रुपये है, जबकि हाई-स्पेक SE वेरिएंट की कीमत 7,499 अमेरिकी डॉलर यानी करीब 6.58 लाख रुपये है. तुलना के लिए, अमेरिका में Kawasaki Ninja 500 की रीटेल कीमत 5,799 अमेरिकी डॉलर यानी करीब 5.09 लाख रुपये है. वहीं, भारत में CKD आयात के रूप में इसकी कीमत 5.66 लाख रुपये है. इसके आधार पर, अगर कंपनी नई Kawasaki KLE500 को इसी रास्ते से भारत लाती है, तो इसकी कीमत लगभग 6.50 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) हो सकती है. Kawasaki KLE500 के साल 2026 में भारत आने की उम्मीद है.

शेयर बाजार में जोश बरकरार — निफ्टी 26,000 के करीब, इन स्टॉक्स ने मचाया धमाल

मुंबई  स्‍टॉक मार्केट में आज अच्‍छी तेजी देखी जा रही है. शुक्रवार को आई गिरावट के बाद आज सेंसेक्‍स और निफ्टी अच्‍छी दौड़ लगाते हुए दिखाई दे रहे हैं. सेंसेक्‍स 446 अंक चढ़कर 84,660 के ऊपर कारोबार कर रहा है, तो वहीं निफ्टी 145 अंक उछलकर 25,940 पर कारोबार कर रहा है. बैंक निफ्टी में भी अच्‍छी उछाल है, जो 300 अंक चढ़कर कारोबार कर रहा है.  बीएसई टॉप 30 में से सिर्फ 10 शेयर ही गिरावट पर कारोबार कर रहे हैं, बाकी के 20 शेयरों में उछाल है. सबसे ज्‍यादा तेजी टाटा स्‍टील के शेयर में में 1.30 फीसदी की है. इसके बार रिलायंस, भारतीय एयरटेल और एसबीआई के शेयरों में करीब एक फीसदी की तेजी आई है. इंफोसिस के शेयरों में 1 फीसदी से ज्‍यादा की गिरावट देखी जा रही है.  FMCG, फार्मा और हेल्‍थकेयर को छोड़कर बाकी सभी सेक्‍टर्स में तेजी देखी जा रही है. गिरावट वाले सेक्‍टर्स में बिकवाली आई है. मीडिया, मेटल, आईटी और पीएसयू बैंक सेक्‍टर्स में तेजी आई है.  इन शेयरों में उछाल आर-आर केबल, eClerx Service के शेयर में 5 फीसदी से ज्‍यादा की उछाल आई है. रतन इंटरप्राइजेज के शेयरों में 4 फीसदी की तेजी आई है. पूनावाला फाइनेंस के शेयर में 4 प्रतिशत से ज्‍यादा की उछाल आई है. डॉ. लाल पैथलैब्‍स के शेयर में 4 फीसदी की उछाल देखी जा रही है. कोफोर्ज के शेयर में भी 4 फीसदी की उछाल है. एसबीआई लाइफ इंश्‍योरेंस के शेयर में 3 प्रतिशत से ज्‍यादा की उछाल आई है. 128 शेयरों में अपर सर्किट  बीएसई पर एक्टिव 3,728 शेयरों में से 2,164 शेयर तेजी पर कारोबार कर रहे हैं, जबकि 1,350 स्‍टॉक में गिरावट आई है. 214 शेयर अनचेंज हैं और 92 शेयर 52 सप्‍ताह के हाई लेवल पर कारोबार रक रहे हैं. 43 शेयर 52 सप्‍ताह के निचले स्‍तर पर हैं. 128 शेयरों में अपर सर्किट लगा है और 110 शेयरों में लोअर सर्किट है.  आज क्‍यों आई तेजी?  शेयर बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह अच्‍छे ग्‍लोबल संकेत हैं. अमेरिका और चीन के बीच डील की संभावना बन रही है. वहीं भारत और अमेरिका में भी डील जल्‍द होने की उम्‍मीद जताई जा रही है. घरेलू खपत भी बढ़ रहा है. रुपये में तेजी आई है. इन सभी कारणों से शेयर बाजार में आज अच्‍छे संकेत दिख रहे हैं. 

LIC ने हाथ खींचा, अमेरिकी बीमा कंपनियों ने अडानी पर लगाया बड़ा निवेश

नई दिल्ली  अडानी समूह की कंपनियों में भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) का निवेश भले ही सुर्खियों में हो, लेकिन हालिया आंकड़े बताते हैं कि अरबपति गौतम अडानी द्वारा नियंत्रित इकाइयों में कुछ सबसे बड़े निवेश सरकारी बीमा कंपनी से नहीं, बल्कि प्रमुख अमेरिकी और वैश्विक बीमा कंपनियों से आए हैं। इस कंपनी में 6650 करोड़ रुपये का निवेश जून, 2025 में, अडानी पोर्ट्स एंड एसईजेड में भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) द्वारा 57 करोड़ अमेरिकी डॉलर (5,000 करोड़ रुपये) के निवेश के एक महीने बाद, अमेरिका स्थित एथेन इंश्योरेंस ने अडानी के मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे में 6,650 करोड़ रुपये (75 करोड़ डॉलर) के लोन निवेश का नेतृत्व किया, जिसमें कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बीमा कंपनियां शामिल हुईं। एथेन की मूल कंपनी – अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट – ने 23 जून को एक बयान में कहा कि उसके प्रबंधित फंड, सहयोगी और अन्य दीर्घकालिक निवेशकों ने मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा लिमिटेड (मायल) के लिए 75 करोड़ डॉलर का ‘निवेश ग्रेड रेटेड वित्तपोषण’ पूरा कर लिया है। यह अपोलो द्वारा मायल के लिए दूसरा बड़ा फंडिंग था। अन्य फंड जुटाने में अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड द्वारा डीबीएस बैंक, डीजेड बैंक, राबोबैंक और बैंक सिनोपैक कंपनी लिमिटेड सहित वैश्विक कर्जदाताओं के एक समूह से लगभग 25 करोड़ डॉलर जुटाना शामिल था। 10 लाख अमेरिकी डॉलर के लोन डॉक्यूमेंट पर हुआ साइन एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स की अगस्त की एक रिपोर्ट के अनुसार, समूह ने वर्ष की पहली छमाही में बंदरगाह इकाई (एपीएसईजेड), ग्रीन ऊर्जा एनर्जी (एजीईएल), प्रमुख कंपनी (अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड) और अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड में कुल मिलाकर 10 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की नई लोन सुविधाओं पर हस्ताक्षर किए। एलआईसी ने आरोपों पर क्या कहा था? ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ग्लोबल इंवेस्टर्स की हिचकिचाहट के बीच सरकारी अधिकारियों ने एलआईसी के निवेश निर्णयों को प्रभावित किया। इससे अडानी समूह में एलआईसी का निवेश सुर्खियों में आ गया। शनिवार को, एलआईसी ने इस रिपोर्ट को ‘झूठा, निराधार और सच्चाई से कोसों दूर’ बताया और कहा कि अडानी समूह की कंपनियों में उसका निवेश स्वतंत्र रूप से और विस्तृत जांच-पड़ताल के बाद उसके निदेशक मंडल द्वारा अनुमोदित नीतियों के अनुसार किया गया था। भारत की सबसे बड़ी बीमा कंपनी ने पिछले कुछ वर्षों में, बुनियादी बातों और विस्तृत जांच-पड़ताल के आधार पर विभिन्न कंपनियों में निवेश के फैसले लिए हैं। भारत की शीर्ष 500 कंपनियों में इसका निवेश मूल्य 2014 से 10 गुना बढ़कर 1.56 लाख करोड़ रुपये से 15.6 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जो मजबूत फंड मैनेजमेंट को दर्शाता है। अडानी समूह में इसका निवेश समूह के कुल 2.6 लाख रुपये के कर्ज के दो प्रतिशत से भी कम है। इसके अलावा, अडानी एलआईसी की सबसे बड़ी होल्डिंग नहीं है – रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड, आईटीसी और टाटा समूह हैं। किस कंपनी में एलआईसी का कितना निवेश एलआईसी के पास अडानी के चार प्रतिशत (60,000 करोड़ रुपये मूल्य के) शेयर हैं, जबकि रिलायंस में 6.94 प्रतिशत (1.33 लाख करोड़ रुपये), आईटीसी लिमिटेड में 15.86 प्रतिशत (82,800 करोड़ रुपये), एचडीएफसी बैंक में 4.89 प्रतिशत (64,725 करोड़ रुपये) और एसबीआई में 9.59 प्रतिशत (79,361 करोड़ रुपये) शेयर हैं। एलआईसी के पास टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) में 5.02 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जिसका मूल्य 5.7 लाख करोड़ रुपये है।  

रिलायंस समेत कंपनियां तैयार, रूसी तेल की कमी में भी जारी रहेगा उत्पादन

 नई दिल्ली रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने कहा कि उसने रूसी तेल निर्यातक कंपनियों रोजनेफ्ट और लुकोइल पर लगाए गए नए प्रतिबंधों को ध्यान में रखते हुए अपने रिफाइनरी संचालन को बदलाव की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल इन प्रतिबंधों का असर भारत में ईंधन उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा, क्योंकि सरकारी तेल कंपनियां जैसे- इंडियनऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम बढ़ी हुई लागत को कुछ समय तक अपने स्तर पर ही हैंडल कर सकती हैं। अमेरिकी OFAC नोटिफिकेशन की समीक्षा में जुटे रिफाइनर्स  सूत्रों के हवाले से लिखा है कि देश की तेल कंपनियां अमेरिकी प्रतिबंधों के असर को अच्छे से अध्ययन कर रही हैं- खासकर भुगतान चैनलों और अन्य अनुपालन आवश्यकताओं के संदर्भ में। कंपनियां साथ ही अपनी रिफाइनरियों को 21 नवंबर की कटऑफ तिथि के बाद रूसी कच्चे तेल के बिना संचालन के लिए तैयार कर रही हैं। यानी अमेरिकी प्रतिबंध 21 नवंबर से लागू होंगे। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, “रिलायंस अपने रिफाइनरी संचालन को लागू प्रतिबंधों और विनियामक आवश्यकताओं के अनुरूप ढाल रही है, जिनमें यूरोपीय संघ द्वारा परिष्कृत उत्पादों के आयात पर लगाए गए प्रतिबंध और किसी भी सरकारी दिशा-निर्देश का अनुपालन शामिल है।” कंपनी ने आगे कहा कि, “जैसा कि उद्योग में सामान्य है, सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट समय-समय पर बदलती बाजार और नियामकीय परिस्थितियों को दर्शाने के लिए विकसित होते हैं। रिलायंस इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अपने आपूर्तिकर्ताओं के साथ संबंध बनाए रखेगी।” यह बयान कंपनी के रूसी तेल कंपनी रोजनेफ्ट के साथ उसके लगभग 5 लाख बैरल प्रतिदिन के कच्चे तेल सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट की ओर अप्रत्यक्ष रूप से संकेत करता है। तेल कीमतों में बढ़ोतरी, वैश्विक बाजार में अस्थिरता रोजनेफ्ट और लुकोइल जैसी कंपनियां वैश्विक स्तर पर 3-4 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल निर्यात करती हैं। ऐसे में इनकी आपूर्ति रुकने से वैश्विक तेल बाजार में 3-4% की कमी आने की संभावना ने कीमतों को फिर से ऊपर धकेल दिया है। बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड शुक्रवार को $66 प्रति बैरल के पार चला गया, जबकि गुरुवार को इसमें 5% की तेजी दर्ज की गई थी। भारत की निर्भरता और विकल्प अब तक इस वर्ष भारत के कुल कच्चे तेल आयात में लगभग 34% हिस्सा रूस से आया है, जिसमें रोजनेफ्ट और लुकोइल का योगदान करीब 60% है। इंडियनऑयल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “रूस के विकल्प के रूप में पश्चिम एशिया, अफ्रीका या अमेरिका से सप्लाई हासिल करना संभव है। लेकिन बाकी देश भी इन्हीं स्रोतों की ओर रुख करेंगे, जिससे तेल कीमतों और प्रीमियम दोनों में बढ़ोतरी होगी।” उन्होंने आगे कहा कि यदि कच्चे तेल की कीमत $70 प्रति बैरल से अधिक नहीं जाती, तो लाभांश (मार्जिन) पर इसका असर सीमित रहेगा। आयात बिल में संभावित बढ़ोतरी रेटिंग एजेंसी ICRA का अनुमान है कि बाजार दर पर विकल्पी आपूर्ति हासिल करने से भारत का तेल आयात बिल लगभग 2% तक बढ़ सकता है, जिसका असर व्यापक आर्थिक संकेतकों पर पड़ेगा। रूस के विकल्प तलाशने की संभावना हालांकि यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों के कारण रूस के "शैडो फ्लीट" यानी गुप्त जहाज नेटवर्क पर कुछ असर पड़ा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि मॉस्को अभी भी बड़ी मात्रा में तेल वैश्विक बाजार में भेजने में सक्षम रहेगा। रूस नए मध्यस्थों और ट्रांसशिपमेंट रूट्स के जरिए अपनी आपूर्ति को रोज़नेफ्ट और लुकोइल से अलग दिखाकर बाजार में बनाए रख सकता है। फिर भी, वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिकी ट्रेजरी विभाग इन प्रतिबंधों को कितनी कड़ाई से लागू करता है।

सोने के बढ़ते दामों के बीच ट्रेंड बदला — लोग पुराने गहने एक्सचेंज कर खरीद रहे नए

नई दिल्ली इस साल सोना ने अपनी चमक से नहीं बल्कि अपनी कीमतों से लोगों का ध्यान आकर्षित किया। 2025 में इसकी कीमतें 50 फीसदी से अधिक भाग चुकी हैं। सोना इस समय लोअर मिडिल क्लास की पहुंच से कोसो दूर है। जिनके यहां शादियां हैं वो नए गहने बनवाने की बजाए पुराने गहनों को बदलकर ही नए गहने बनवा रहे हैं। यानी यहां पर कहावत ओल्ड इज गोल्ड (Old is Gold) आज सच में गोल्ड के संदर्भ में सही साबित होती दिख रही है।यानी लोगों के लिए पुराना सोना आज भी बहुत कीमती है। वही, उनके लिए सच में नए गोल्ड जैसा ही है। टाटा की कंपनी तनिष्क को उम्मीद है कि इस साल धनतेरस पर बिक्री का लगभग 50% हिस्सा एक्सचेंज से आया, जो पिछले साल के 35% से काफी ज्यादा है। रिलायंस रिटेल ने बताया कि अब उसकी ज्वेलरी बिक्री का लगभग एक तिहाई हिस्सा एक्सचेंज से आता है, जो पहले 22% था, जबकि कोलकाता की सेन्को गोल्ड ने कहा कि यह हिस्सा 35% से बढ़कर 45% हो गया है। "Old सच में है Gold" रिलायंस रिटेल के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर दिनेश तालुजा ने कहा कि बढ़ती कीमतों के कारण कस्टमर्स नई ज्वेलरी खरीदने के बजाय पुरानी सोने की ज्वेलरी को रीसायकल कर रहे हैं। पिछले हफ़्ते उन्होंने एनालिस्ट्स से कहा, "कीमतें बढ़ने की वजह से एवरेज बिल वैल्यू काफी बढ़ गई है। अब पूरी इंडस्ट्री में यह हुआ है कि वॉल्यूम कम हो गया है क्योंकि सोने की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के कारण खरीदने की पावर पर असर पड़ा है।" ET के अनुसार, धनतेरस (18 अक्टूबर) पर सोने की कीमतें 3% GST मिलाकर 1.34 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गईं। धनतेरस भारत में कीमती धातु खरीदने के लिए सबसे शुभ दिनों में से एक है। यह पिछले साल इसी दिन दर्ज की गई 80,469 रुपये की कीमत से 69% ज्यादा है। सरकार और इंडस्ट्री के अनुमानों से पता चलता है कि भारतीय घरों में कुल मिलाकर लगभग 22,000 टन बेकार सोना पड़ा हुआ है, और हाल ही में कीमतों में हुई बढ़ोतरी के कारण कई लोग पुराने पारिवारिक गहनों को नए डिजाइन के गहनों से बदल रहे हैं। कस्टमर्स को अट्रैक्ट करने के लिए, तनिष्क ने फेस्टिव सीजन के दौरान सभी कैरेट के गोल्ड एक्सचेंज पर जीरो प्राइस-डिडक्शन प्रोग्राम शुरू किया था। धनतेरस से पहले ET को दिए एक इंटरव्यू में, चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर अजय चावला ने कहा कि नवरात्रि के दौरान, तनिष्क की कुल बिक्री में पुराने सोने के एक्सचेंज का योगदान 38-40% रहा। उन्होंने आगे कहा, "हमें उम्मीद है कि दिवाली के आखिर तक यह आंकड़ा कुल बिक्री का लगभग 50% तक पहुंच जाएगा।" सोने में गिरावट का दौर शुरू इस हफ्ते सोने की कीमतों में गिरावट से ज्वैलर्स को राहत मिली है। उन्हें उम्मीद है कि शादी के सीजन में बिक्री बढ़ेगी और कुल कंजम्पशन में भी तेजी आएगी। रिपोर्ट के मुताबिक,  शाम को सोना 10 ग्राम के लिए करीब 1.26 लाख रुपये (GST मिलाकर) पर ट्रेड कर रहा था, जो धनतेरस के लेवल से 7,900 रुपये से ज्यादा कम था। ग्लोबल फाइनेंशियल एडवाइजरी फर्म डेवेरे ग्रुप के CEO नाइजल ग्रीन ने कहा, "एक जबरदस्त तेजी के बाद, मार्केट को एक ब्रेक की जरूरत थी, थोड़ा आराम करने का मौका चाहिए था, और अभी हम वही देख रहे हैं।"

टैरिफ नीति पर IMF ने जताई राय, भारत पर असर न के बराबर, ट्रंप को झटका

नई दिल्‍ली जिस टैरिफ के बल पर अमेरिकी राष्‍ट्रपति भारत को झुकाना चाहते हैं, उसकी हवा अंतरराष्‍ट्रीय मुद्रा कोष की नवीनतम वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक (WEO) रिपोर्ट ने निकाल दी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका के टैरिफ का भारतीय अर्थव्यवस्था पर खास असर नहीं दिख रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, भारत 2025–26 तक दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में बना रहेगा. इंडिया की ग्रोथ मौजूदा वित्त वर्ष में चीन से ज्‍यादा बनी रहेगी. IMF चीन की विकास दर 2025–26 में 4.8 प्रतिशत मान रहा है. आईएमएफ ने भारत के जीडीपी ग्रोथ अनुमान को भी बढा दिया है. रिपोर्ट के अनुसार भारत की जीडीपी चालू वित्‍त वर्ष में 6.6 फीसदी की दर से बढ़ने का अनुमान है. आईएमएफी की रिपोर्ट रिपोर्ट शुक्रवार को बाजार बंद होने के बाद आई है. इसका असर अगले सत्र में देखने को मिल सकता है. जीडीपी ग्रोथ को लेकर पॉजिटिव खबरों से सेंटीमेंट्स और मजबूत होंगे. टैरिफ का झटका सह गया भारत रिपोर्ट के मुताबिक घरेलू अर्थव्यवस्था की पहली तिमाही की मजबूत ग्रोथ ने टैरिफ के असर को काफी हद तक संतुलित कर दिया है. अमेरिका द्वारा भारतीय और चीनी वस्तुओं पर टैरिफ बढ़ाए जाने के बाद तेज़ आर्थिक मंदी की आशंका थी, लेकिन IMF का मानना है कि वास्तविक नुकसान सीमित रहा. भारत में मज़बूत घरेलू खपत, विनिर्माण गतिविधियां और निजी निवेश में बढ़ोतरी ने इस झटके को काफी हद तक झेल लिया. IMF ने नोट किया कि “टैरिफ के प्रभाव अपेक्षा से कम गंभीर रहे, जिसके पीछे लचीली घरेलू मांग और व्यापार विविधीकरण महत्वपूर्ण कारक रहे.” चीन से आगे रहेगा भारत नए अनुमानों के अनुसार, भारत चीन से आगे रहेगा, जिसके लिए आईएमएफ ने 4.8 फीसदी का ग्रोथ अनुमान दिया है. आईएमएफ ने भारत की मजबूती का श्रेय मजबूत घरेलू खपत, मैन्युफैक्चरिंग में सुधार और सेवा क्षेत्र के विस्तार को दिया है. हालांकि, IMF ने भारत की 2026 की वृद्धि दर का अनुमान घटाकर 6.2 प्रतिशत कर दिया है. फंड के मुताबिक शुरुआती तेजी लंबे समय तक बनी नहीं रह सकती. भारत की अर्थव्यवस्था FY25 में 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ी थी और FY26 के लिए सरकार के 6.3–6.8 प्रतिशत के दायरे में बनी हुई है. ये ग्रोथ तब है जब दुनिया भर में अनिश्चितता बढ़ रही है.  

6 महीने में सस्ता हुआ Samsung Galaxy S25 Edge, ग्राहकों के लिए 24 हजार का बड़ा ऑफर

मुंबई  Samsung Galaxy S25 Edge पर बंपर डिस्काउंट मिल रहा है. इस फोन को आप कई हजार रुपये के डिस्काउंट पर खरीद सकते हैं. Samsung ने Galaxy S25 Edge को इस साल मई में ही लॉन्च किया है, जो अब कई हजार रुपये सस्ता हो गया है. ये फोन दमदार फीचर्स और स्लिम डिजाइन के साथ आता है. डिस्कउंट पर आप इसे Flipkart से खरीद सकते हैं.  स्मार्टफोन में Qualcomm Snapdragon 8 Elite प्रोसेसर मिलता है. ये फोन 200MP के प्राइमरी रियर कैमरा के साथ आता है. Galaxy S25 Edge ब्रांड का सबसे पतला फोन है. आइए जानते हैं इस स्मार्टफोन पर मिल रहे डिस्काउंट ऑफर की डिटेल्स.  कितने में खरीद सकते हैं स्मार्टफोन?  Samsung Galaxy S25 Edge 5G को कंपनी ने 1,09,999 रुपये की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया था. ये कीमत फोन के 12GB RAM + 256GB स्टोरेज वेरिएंट की है. हालांकि, Flipkart पर ये स्मार्टफोन इस वक्त 89,999 रुपये की कीमत पर लिस्ट है. यानी आपको 20 हजार रुपये का फ्लैट डिस्काउंट मिल रहा है.  इसके अलावा 4000 रुपये तक का डिस्काउंट विभिन्न बैंक कार्ड्स पर मिल रहा है. इस तरह से आप 24000 रुपये की बचत कर सकते हैं. वहीं 512GB स्टोरेज वाला वेरिएंट फ्लिपकार्ट पर 1,01,999 रुपये में मिल रहा है. इस पर भी आपको बैंक डिस्काउंट मिल जाएगा.  क्या हैं स्पेसिफिकेशन्स?  Samsung Galaxy S25 Edge 5G में 6.7-inch का LTPO AMOLED डिस्प्ले मिलता है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट सपोर्ट के साथ आता है. स्क्रीन की प्रोटेक्शन के लिए गोरिल्ला ग्लास सिरेमिक 2 का इस्तेमाल किया गया है. स्मार्टफोन Android 15 पर बेस्ड OneUI 7 के साथ आता है. कंपनी इसे 7 साल तक एंड्रॉयड अपडेट देगी.  हैंडसेट Qualcomm Snapdragon 8 Elite प्रोसेसर पर काम करता है. इसमें 200MP का प्राइमरी कैमरा और 12MP का अल्ट्रा वाइड एंगल लेंस मिलेगा. वहीं फ्रंट में कंपनी ने 12MP का सेल्फी कैमरा दिया है. फोन को पावर देने के लिए 3900mAh की बैटरी दी गई है, जो 25W की वायर्ड चार्जिंग और 15W की वायरलेस चार्जिंग मिलती है.

हाई-टेक नहीं, स्टॉक मॉडल ने किया कमाल: Skoda Superb ने फुल टैंक में 2,831 किलोमीटर की दूरी पूरी

मुंबई  हर दौर में कुछ मशीनें ऐसी होती हैं जो सीमाओं को तोड़ने के लिए ही बनती हैं. एक लग्ज़री सेडान कार ने भी ऐसा ही कारनामा कर दिखाया. हम बात कर रहे हैं Skoda Superb डीजल की. इस लग्ज़री सेडान ने एक बार फिर साबित किया कि कुशल इंजीनियरिंग और सटीक ड्राइविंग के मेल से चमत्कार भी संभव हैं.  फुल टैंक में 2,831 किलोमीटर की दूरी तय कर इस कार ने न सिर्फ अपना नाम गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराया है, बल्कि यह भी दिखाया कि डीज़ल तकनीक आज भी फ्यूल इफिशिएंसी में बेजोड़ है. Skoda Superb के जिस मॉडल ने ये रिकॉर्ड बनाया है वो कोई खास मॉडिफाई की गई या रेसिंग मशीन नहीं थी. यह एक स्टैंडर्ड प्रोडक्शन मॉडल है. रेगुलर इंजन से लैस कार इस कार में रेगुलर 2.0 लीटर चार सिलिंडर डीज़ल इंजन दिया गया है. जो 148 बीएचपी की पावर और 360 एनएम टॉर्क जनरेट करता है. इसमें 7-स्पीड DSG ऑटोमैटिक गियरबॉक्स दिया गया है जो परफॉर्मेंस और फ्यूल एफिशिएंसी दोनों का संतुलन बनाए रखता है. इस कार ने यह दिखा दिया कि अगर इंजीनियरिंग, एयरोडायनामिक्स और ड्राइविंग अनुशासन एक साथ हों, तो अद्भुत परिणाम मिल सकते हैं. ख़ास तरह से की गई ड्राइविंग इस रिकॉर्ड के पीछे ख़ास प्लानिंग ने काम किया है. ड्राइवरों ने कार को ‘ईको मोड’ में चलाया और थ्रॉटल रिस्पॉन्स को बेहद संतुलित रखा. गियर शिफ्टिंग को स्मूथ बनाए रखने पर ध्यान दिया गया. औसत गति लगभग 80 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई ताकि इंजन बेहतर माइलेज दे सके. कार में कम रोलिंग रेसिस्टेंस वाले टायर लगाए गए थे और टायर प्रेशर फैक्ट्री रेट पर रखा गया था. एयर रेसिस्टेंस कम करने के लिए कार को आगे चल रही गाड़ियों के पीछे चलाया गया. इन छोटे-छोटे उपायों ने मिलकर बड़ी सफलता का रास्ता तैयार किया.  कहां… किसने और कैसे बनाया ये रिकॉर्ड इस अद्भुत उपलब्धि के पीछे हैं यूरोपियन रैली चैम्पियन मिको मार्चिक (Miko Marczyk), जिन्होंने इस कार को चलाया. उन्होंने इस कार को पोलैंड से चलाना शुरू किया और जर्मनी और पेरिस तक यात्रा की. इसके बाद वो वापस लौटते हुए नीदरलैंड्स, बेल्जियम और फिर जर्मनी के रास्ते पोलैंड पहुंचे. इस दौरान उन्होंने तकरीबन 2831 किलोमीटर तक का सफर किया. अपने सटीक ड्राइविंग स्किल और डिसिप्लिन ड्राइविंग के दम पर उन्होंने स्कोडा सुपर्ब डीजल सेडान से वो कर दिखाया जो अब तक असंभव माना जा रहा था. यह ऐतिहासिक यात्रा यूरोप में हुई, जहाँ मौसम की स्थिति लगातार बदलती रही. कई हिस्सों में तापमान मात्र 1 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया. जबकि कुछ इलाकों में कार को पहाड़ी रास्तों पर चढ़ाई का सामना करना पड़ा. लेकिन इन तमाम परिस्थितियों के बीच Superb Diesel ने कमाल की स्टेबिलिटी बनाए रखी. कुछ हिस्सों में तो इस कार ने मात्र 2.2 लीटर प्रति 100 किलोमीटर की डीजल खपत दर्ज की, जो अपने आप में एक शानदार आंकड़ा है. करीब 1.6 टन वज़न वाली यह लग्ज़री सेडान आमतौर पर अपने आराम और स्टाइल के लिए जानी जाती है, लेकिन इस रिकॉर्ड ने साबित कर दिया कि सही ड्राइविंग और संतुलित सेटअप के साथ यह माइलेज के मामले में किसी हैचबैक को भी टक्कर दे सकती है. Skoda Superb Diesel की यह उपलब्धि न सिर्फ कंपनी के लिए बल्कि पूरी ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए प्रेरणादायक है. यह याद दिलाती है कि किसी भी तकनीक को अगर सही दिशा और सोच दी जाए, तो उसकी संभावनाएं अनंत होती हैं. तो अगली बार जब कोई पूछे “कितना देती है?”, तो Skoda Superb डीजल का यह रिकॉर्ड जवाब बनकर सामने आएगा. यह सिर्फ एक कार की कहानी नहीं, बल्कि आधुनिक इंजीनियरिंग की जीत का प्रतीक है.