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एडुटेक कंपनी फिजिक्सवाला पर ब्रोकरेज बुलिश, 140 रुपये का लक्ष्य मूल्य तय

एडुटेक कंपनी PhysicsWallah के शेयर में सुस्ती वाले माहौल के बीच ब्रोकरेज फर्म Elara सिक्योरिटीज ने इसे खरीदने की सलाह दी है। ब्रोकरेज ने इस शेयर के लिए एक टारगेट प्राइस भी दिया है जो वर्तमान कीमत से 35 पर्सेंट से भी अधिक है। शेयर का परफॉर्मेंस और टारगेट प्राइस फिजिक्सवाला के शेयर की बात करें तो अभी 101 रुपये पर है। शेयर के लिए ब्रोकरेज ने 'Buy' रेटिंग दी है। इसके साथ ही ₹140 प्रति शेयर के टारगेट प्राइस के साथ कवरेज शुरू किया है। इसका मतलब है कि मौजूदा स्तरों से इसमें लगभग 35% से अधिक बढ़त की संभावना है। इस शेयर के 52 हफ्ते का हाई 162.05 रुपये और 52 हफ्ते का लो 77.75 रुपये है। क्या कहा ब्रोकरेज ने? ब्रोकरेज का मानना ​​है कि इस कंपनी की ताकत उसके ओमनीचैनल मॉडल में निहित है, जिसके तहत वह सबसे पहले मुफ्त कंटेंट और जुड़ाव के जरिए बड़ा यूजर बेस तैयार करता है और फिर उन्हें पैसे देने वाले ग्राहकों में बदल देता है। इसके मुख्य ऑफर JEE और NEET कोर्स ही हैं जबकि यह क्षेत्रीय भाषाओं और नई कैटेगरीज में भी अपना विस्तार जारी रखे हुए है। ब्रोकरेज को क्या है उम्मीद? Elara को उम्मीद है कि विकास की मजबूत गति बनी रहेगी। ब्रोकरेज का अनुमान है कि FY25 और FY28 के बीच रेवेन्यू CAGR 27% और एबिटा CAGR लगभग 85% रहेगा। यह भी उम्मीद है कि FY27 तक कंपनी एडजस्टेड PAT लेवल पर मुनाफा कमाने लगेगी। अपने डिजिटल बिजनेस के साथ-साथ, कंपनी ने तेजी से बढ़ती हुई ऑफलाइन मौजूदगी भी बनाई है। कंपनी अब 200 शहरों में 300 से अधिक सेंटर चलाती है, जो क्लासरूम लर्निंग चाहने वाले स्टूडेंट्स को सेवा देते हैं। ब्रोकरेज ने मजबूत कैश जेनरेशन पर भी जोर दिया है। काफी कैश बैलेंस होने की वजह से कंपनी अपनी बैलेंस शीट पर बिना कोई दबाव डाले अपने विस्तार के लिए अंदरूनी तौर पर फंड जुटा रही है। Elara कंपनी के ऑनलाइन और ऑफलाइन बिजनेस की अलग-अलग वैल्यू लगाती है और मानती है कि इसकी ग्रोथ की संभावना और बढ़ते मुनाफे को देखते हुए, मौजूदा वैल्यूएशन अभी भी आकर्षक हैं। फिजिक्सवाला आईपीओ की डिटेल बता दें कि पिछले साल फिजिक्सवाला का आईपीओ आया था। यह ₹3480 करोड़ का एक बुक-बिल्डिंग इशू था, जिसमें ₹3100 करोड़ का नया इशू और प्रमोटर अलख पांडे और प्रतीक बूब द्वारा ₹380 करोड़ का 'ऑफर फॉर सेल' शामिल था। इसकी प्राइस बैंड ₹103 से ₹109 प्रति शेयर के बीच तय की गई थी।

महंगाई भत्ते में देरी से बढ़ी चिंता, 8वें वेतन आयोग की बैठक पर नजर

नई दिल्ली केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ता यानी डीए में इजाफे का इंतजार बढ़ता जा रहा है। अप्रैल महीने के 10 दिन से भी ज्यादा बीत चुके हैं लेकिन अब तक कर्मचारियों के डीए बढ़ोतरी का ऐलान नहीं हुआ। इस देरी की वजह से अब केंद्रीय कर्मचारियों की अप्रैल की सैलरी पर भी असर पड़ने की आशंका है। आइए समझते हैं पूरा मामला। क्या है मामला? आमतौर पर केंद्र सरकार मार्च के महीने में होली के आसपास डीए बढ़ोतरी का ऐलान कर देती है। यह साल की पहली छमाही के लिए लागू होता है। मार्च महीने में डीए ऐलान के बाद कर्मचारियों की अगले महीने सैलरी बढ़कर आती है। इसमें जनवरी, फरवरी महीने का एरियर भी जुड़ा रहता है। हालांकि, इस बार भत्ते में देरी से अब केंद्रीय कर्मचारियों को मई महीने का इंतजार करना पड़ सकता है। दरअसल, केंद्र सरकार के कई ऐसे भी विभाग हैं जहां सैलरी कैल्कुलेशन 15 से 15 तारीख का चलता है। मतलब ये कि जो सैलरी बनती है वो पिछले महीने की 15 तारीख से चालू महीने की 15 तारीख तक की होती है। अगर डीए के ऐलान में देरी होती है तो यह संभव है कि केंद्रीय कर्मचारियों की मई की सैलरी 4 महीने यानी जनवरी, फरवरी, मार्च और अप्रैल का डीए एरियर जोड़कर बैंक अकाउंट में क्रेडिट हो। क्या कहते हैं एक्सपर्ट? फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स इस बात से सहमत हैं कि पिछले सालों के मुकाबले इस बार डीए में थोड़ी देरी हुई है। BankBazaar के CEO अधिल शेट्टी ने मनीकंट्रोल से इसकी वजह बताते हुए कहा- यह शायद एडमिनिस्ट्रेटिव सीक्वेंसिंग और 8वें CPC फ्रेमवर्क की ओर बदलाव की वजह से है, जिसके लिए अपडेटेड पे स्ट्रक्चर और महंगाई के डेटा के बीच तालमेल जरूरी होता है। उन्होंने आगे कहा कि यह देरी इरादे की नहीं, बल्कि टाइमिंग की बात लगती है। शेट्टी के अनुसार, मौजूदा रुझान लगभग 2-3 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी का संकेत दे रहे हैं जिससे DA का कुल स्तर 60 प्रतिशत के करीब या 61 प्रतिशत पहुंच जाएगा। सरकार से मांगा जा रहा स्पष्टीकरण केंद्र सरकार के कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले कई संगठनों ने वित्त मंत्रालय को पहले ही पत्र लिखकर महंगाई भत्ते (DA) के बारे में जल्द से जल्द घोषणा करने या स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। ऑल इंडिया NPS एम्प्लॉइज फेडरेशन के अध्यक्ष मंजीत सिंह पटेल ने कहा-केंद्र सरकार ने DA के बारे में कोई घोषणा नहीं की है और न ही देरी का कोई कारण बताया है। सरकार को इस देरी के बारे में तुरंत कोई घोषणा करनी चाहिए या स्पष्टीकरण जारी करना चाहिए। इसके अलावा, कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज एंड वर्कर्स के एक अन्य पत्र में कहा गया है कि DA आमतौर पर मार्च के आखिरी सप्ताह में घोषित किया जाता था और हर साल अप्रैल के पहले सप्ताह में तीन महीनों का बकाया भुगतान किया जाता था। इसकी घोषणा में हो रही देरी को लेकर कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच भारी बेचैनी और आशंका है। 8वें वेतन आयोग के लिए सोमवार को बड़ी बैठक, सैलरी से लेकर पेंशन तक पर होगी बात सोमवार को नेशनल काउंसिल ऑफ जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) की अहम बैठक होने वाली है। बता दें कि 13 अप्रैल की यह बैठक 12 मार्च को हुई पिछली चर्चाओं के बाद हो रही है। 8वें वेतन आयोग के लिए सोमवार को बड़ी बैठक, सैलरी से लेकर पेंशन तक पर होगी बात 8th Pay Commission latest: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 13 अप्रैल की तारीख काफी अहम है। इस दिन आठवें वेतन आयोग के लिए अपना मेमोरेंडम फाइनल किया जाएगा। इसके लिए नेशनल काउंसिल ऑफ जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) की अहम बैठक होने वाली है। यह बैठक इसलिए अहम है क्योंकि कर्मचारियों के प्रतिनिधि सैलरी, पेंशन और सेवा शर्तों से जुड़ी अपनी मांगों को एक साझा मेमोरेंडम में इकट्ठा कर रहे हैं, जिसे 8वें वेतन आयोग को सौंपा जाएगा। ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF) के सी. श्रीकुमार ने इकोनॉमिक टाइम्स को बताया कि 13 अप्रैल की बैठक में संभवतः एक साझा ज्ञापन को अंतिम रूप दिया जाएगा। AIDEF, रेलवे, रक्षा और अन्य क्षेत्रों के कर्मचारी प्रतिनिधियों के साथ मिलकर इस बैठक में अपने प्रस्तावों पर चर्चा करेगा और उन्हें अंतिम रूप देगा।

कंपनी देगी 19वीं बार डिविडेंड, 1 शेयर पर 30 रुपये का लाभ, रिकॉर्ड डेट की घोषणा

मुंबई   Muthoot Finance Ltd ने एक बार फिर से डिविडेंड देने का फैसला किया है। कंपनी ने इस बार एक शेयर पर 30 रुपये डिविडेंड देने का ऐलान किया है। इस डिविडेंड के लिए Muthoot Finance Ltd की तरफ से रिकॉर्ड डेट की जानकारी दे दी गई है। जोकि अगले हफ्ते ही है। किस दिन है रिकॉर्ड डेट? (Muthoot Finance Dividend Record date) Muthoot Finance Ltd ने स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में बताया गया है कि एक शेयर पर 30 रुपये का डिविडेंड दिया जाएगा। इस डिविडेंड के लिए कंपनी ने 17 अप्रैल 2026 की तारीख को रिकॉर्ड डेट तय किया है। बता दें, कंपनी पहली बार इस साल एक्स-डिविडेंड ट्रेड करने जा रही है। 19वीं बार डिविडेंड देने जा रही है कंपनी इस कंपनी ने पहली बार 2012 में डिविडेंड दिया था। तब कंपनी ने एक शेयर पर 4 रुपये का डिविडेंड बांटा था। 2013 में कंपनी ने एक शेयर पर 4.5 रुपये का डिविडेंड दिया था। आखिरी बार Muthoot Finance Ltd के शेयर 25 अप्रैल 2025 को एक्स-डिविडेंड ट्रेड किए थे। तब कंपनी ने हर एक शेयर पर 26 रुपये का डिविडेंड दिया था। बता दें, कंपनी ने अबतक एक बार भी निवेशकों को बोनस शेयर नहीं दिया है। शेयरों का प्रदर्शन कैसा है? (Muthoot Finance Stock Performance) यह स्टॉक बीएसई के क्लोजिंग के टाइम पर 2 प्रतिशत से अधिक की उछाल के बाद 3572.55 रुपये के स्तर पर ट्रेड कर रहा था। पिछले एक हफ्ते में कंपनी के शेयरों की कीमतों में 12.41 प्रतिशत की तेजी आई है। वहीं, 6 महीने में यह स्टॉक 13.13 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। बता दें, एक साल में कंपनी के शेयरों की कीमतों में 66 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है। Muthoot Finance Ltd का बीएसई में 52 वीक हाई 4149 रुपये और 52 वीक लो लेवल 1964.35 रुपये है। कंपनी का मार्केट कैप 1.43 लाख करोड़ रुपये का है। 10 साल में 1896% की तेजी दो साल में Muthoot Finance Ltd ने 116 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। तीन साल में कंपनी के शेयरों का भाव 247 प्रतिशत बढ़ा है। बता दें, 10 साल से शेयरों को होल्ड करने वाले निवेशकों को अबतक 1896 प्रतिशत का फायदा मिला है।

सोने के भंडार में कौन टॉप पर? चीन टॉप-5 में नहीं, जानिए पाकिस्तान, बांग्लादेश और भारत की स्थिति

इंदौर  सोना मुसीबत का सहारा होता है. परिवार हो या देश, दोनों सोना खरीदने से पीछे नहीं हटता. लेकिन क्या आप जानते दुनिया में सबसे ज्यादा सोना किस देश के पास है? भारत के पास कितना सोना है? चीन के पास कितना सोना है? पाकिस्तान और बांग्लादेश के पास कितना सोना है? और पिछले कुछ महीनों में किस देश ने सबसे ज्यादा सोना खरीदा है?  हालिया दौर में गोल्ड और सिल्वर के दाम में लंबी छलांग देखने को मिली है. सोने के साथ चांदी की कीमत आसमान छू रही हैं.  आंकड़े बताते हैं कि बीते 5 साल में ही इसमें 265 फीसदी से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई है. चीन, पोलैंड और तुर्की से लेकर भारत ने गोल्ड रिजर्व में इजाफा किया है. यहां के सेंट्रल बैंक गोल्ड खरीदने में आगे रहे, जबकि कई देशों ने गोल्ड रिजर्व को घटाया है, इनमें फिलीपींस से लेकर श्रीलंका का नाम शामिल है.  आइए जानते हैं सोना खरीदने और बेचने में कौन से देश सबसे आगे हैं और भारत किस नंबर पर आता है।  किसने देश ने खरीदा सबसे ज्यादा सोना? वर्ल्ड ऑफ स्टेटिक की रिपोर्ट के मुताबिक, बीते पांच साल यानी 2020 से लेकर 2025 तक सोना खरीदने के मामले में चीन नंबर वन पर है. चीन ने बीते पांच साल में 357.1 टन गोल्ड की खरीदारी की है. हालांकि जानकारों की मानें तो यह इससे भी ज्यादा हो सकता है. चीन के बाद गोल्ड खरीदने में पोलैंड का दूसरा स्थान है, जिसने बीते पांच साल के भीतर 314.6 टन सोना खरीदा है. तीसरे नंबर पर तुर्की का नंबर आता है, जिसने 251.8 टन गोल्ड खरीदा है।  अमेरिका के पास सबसे ज्यादा सोना अब आइए जानते हैं कि दुनिया में सबसे ज्यादा सोना किस देश के पास पड़ा है. अमेरिका सबसे बड़े सोने के भंडार पर बैठा है, अमेरिका के पास दुनिया में सबसे ज्यादा 8,133 टन सोना है,  यह भंडार मुख्य रूप से 'फोर्ट नॉक्स' में सुरक्षित है।    जर्मनी के पास अकूत सोना  अमेरिका के बाद सबसे ज्यादा सोना जर्मनी के पास करीब 3,350 टन है, जो कि उसे यूरोप में सबसे बड़ा स्वर्ण धारक बनाता है. वहीं इटली 2,452 टन सोने के साथ तीसरे स्थान पर बना हुआ है. फ्रांस के पास करीब 2,437 टन सोने का भंडार है।         चीन भी जमकर खरीद रहा है सोना सोने के भंडार में 5वें नंबर पर रूस का नंबर आता है, वर्तमान में रूस के पास करीब 2,330 टन सोना है. यानी टॉप-5 में अभी भी चीन नहीं है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से चीन लगातार सोने का भंडार अपने यहां बढ़ा रहा है. चीन के पास वर्तमान में लगभग 2,313.5 टन सोना है. चीन पिछले 17 महीनों से लगातार अपने भंडार में सोना जोड़ रहा है. अगर चीन इसी गति से खरीदारी जारी रखता है, तो वह जल्द ही टॉप-5 देशों में शामिल हो सकता है।                 भारत के पास सोने का बड़ा भंडार भारत का स्वर्ण भंडार (Gold Reserves) साल 2026 में नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पास लगभग 880 टन सोना है. भारत लगातार अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने के लिए सोना खरीद रहा है. भारत न केवल सरकारी स्तर पर बल्कि निजी तौर पर भी दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ताओं में से एक है।  भारत भी खूब खरीद रहा है सोना दरअसल, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी खरीदारी की रफ्तार तेज कर दी है. फरवरी 2026 में भारत ने करीब 18 टन सोना खरीदा है. भारत पिछले कई महीनों से लगातार सोना खरीद रहा है ताकि अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम की जा सके और अपने पोर्टफोलियो को सुरक्षित किया जा सके. भारत, चीन और रूस जैसे देश डॉलर के प्रभाव को कम करने के लिए सोने को एक ठोस विकल्प के रूप में देख रहे हैं।        पाकिस्तान के पास महज इतना सोना  पाकिस्तान के पास बेहद कम सोने का भंडार है, वैसे भी देश आर्थिक तौर पर बदहाल है. फिलहाल पाकिस्तान के पास लगभग 64.77 टन सोना सुरक्षित है. जो कि भारत के मुकाबले काफी कम है. बांग्लादेश के पास महज लगभग 14.28 टन सोना है।                 पोलैंड (Poland) सोना खरीदने में आगे साल 2026 की शुरुआती आंकड़ों (फरवरी-मार्च 2026) के मुताबिक दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों में सोना खरीदने की होड़ मची हुई है. पिछले एक से दो महीनों में जिन देशों ने सबसे ज्यादा सोना खरीदा है, उसमें पोलैंड का नाम सबसे ऊपर है. फरवरी 2026 में पोलैंड के केंद्रीय बैंक ने अकेले 20 टन सोना खरीदा है, पोलैंड का लक्ष्य अपने कुल विदेशी मुद्रा भंडार का 20% हिस्सा सोने में बदलना है।        उज्बेकिस्तान (Uzbekistan) ने खरीदा सोना  उज्बेकिस्तान ने फरवरी-मार्च के दौरान लगभग 8 टन सोना अपने भंडार में जोड़ा है. यह पिछले लगातार 5 महीनों से सोने का शुद्ध खरीदार बना हुआ है. कजाकिस्तान ने भी हाल ही में अपनी सक्रियता बढ़ाई है और पिछले महीने लगभग 8 टन सोना खरीदा है।   गोल्ड खरीदने में भारत किस नंबर पर? चौथे नंबर पर भारत है, जिसने 245.3 टन सोना खरीदा. इसके अलावा ब्राजील ने 105.1 टन, अजरबैजान ने 83.6 टन, थाईलैंड ने 80.6 टन, हंगरी ने 78.5 टन सोने और सिंगापुर ने 77.3 टन गोल्ड खरीदा है. ईरान ने 74.612, कतर ने 73.013, रूस ने 55.4 टन और यूएई ने 51.7 टन सोना खरीदा. टॉप-15 की लिस्ट में पाकिस्तान का नाम शामिल नहीं है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट के मुताबिक 2020 के बाद सोने के दाम में 265 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली है।  सोना बेचने में कौन से देश आगे? बीते पांच साल में गोल्ड बेचने के मामले में फिलीपींस पहले स्थान पर है, उसने 65.2 टन गोल्ड बेचा है. दूसरे नंबर पर कजाकिस्तान है, जिसने इस दौरान 52.4 टन सोना बेचा. श्रीलंका ने 19.1 टन गोल्ड की बिक्री की. जर्मनी का गोल्ड रिजर्व भी 16.3 टन घटा है. मंगोलिया ने 15.9 टन सोना बेचा. इसके अलावा ताजिकिस्तान ने 11.9 टन, कोलंबिया ने 9.2 टन और फिनलैंड ने 5.4 टन गोल्ड की बिक्री की।   

Royal Enfield Flying Flea C6 इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल भारत में हुई लॉन्च, कीमत और रेंज जानें

मुंबई  लंबे समय के इंतजार के बाद आखिरकार, दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी Royal Enfield ने अपनी पहली इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल Royal Enfield Flying Flea C6 को भारतीय बाजार में लॉन्च कर दिया है. हालांकि इसे सिर्फ एक शहर में उतारा गया है. बता दें कि Flying Flea C6 को साल 2024 में पहली बार पेश किया गया था।  कंपनी ने इस मोटरसाइकिल को 2.79 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) की कीमत पर लॉन्च किया है. इसे 'बैटरी-एज़-ए-सर्विस' प्लान के साथ भी खरीदा जा सकता है, जिसके चलते इसकी शुरुआती कीमत घटकर 1.99 लाख रुपये हो जाती है. यह बात Royal Enfield की पहली EV को एक अनोखी स्थिति में ला खड़ा करती है. भारत में भले ही इसका कोई सीधा प्रतिद्वंद्वी न हो, लेकिन इसकी कीमत Ultraviolette F77 के काफी करीब है।  लेकिन Flying Flea C6 के मुकाबले Ultraviolette F77 कहीं ज़्यादा दमदार इलेक्ट्रिक स्पोर्ट्स बाइक है. खास बात यह है कि नई Flea C6 की बिक्री Flying Flea के खास स्टोर्स के ज़रिए की जाएगी, जिनमें से पहला स्टोर इसकी लॉन्च के साथ ही बेंगलुरु के जयनगर में खोला गया है. कंपनी ने एक बयान में बताया कि इसकी डिलीवरी मई में शुरू होगी, और इस मोटरसाइकिल को चरणबद्ध तरीके से अन्य शहरों में भी बिक्री के लिए पेश किया जाएगा।  2026 Royal Enfield Flying Flea C6 का डिजाइन नई Flea C6 का डिजाइन 1940 के दशक की मूल 'Flying Flea' मोटरसाइकिल से प्रेरित लगता है, जिसे युद्ध के मैदान के लिए तैयार किया गया था. नई Flea C6 के डिज़ाइन में बीते ज़माने की झलक साफ़ नज़र आती है. यह दिखने में बहुत ही बेहतरीन लगती है, और खासकर जब बात इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिलों की हो. इसके डिज़ाइन की सबसे खास बात है, इसका 'फोर्ज्ड एल्युमिनियम गर्डर फोर्क' है, जिसके साथ एक 'आर्टिकुलेटिंग मडगार्ड' लगाया गया है।  इसके अलावा, बैटरी के लिए इस्तेमाल की गई 'फिन वाली मैग्नीशियम केसिंग' भी इसके लुक को बेहद खास बनाती हैं. नई Flea C6 के दोनों सिरों पर 19-इंच के व्हील लगाए गए हैं, जिन पर 90/90-सेक्शन के पतले Ceat टायर लगे हैं. बाइक की सीट हाइट 823 mm रखी गई है, जबकि इसका ग्राउंड क्लीयरेंस 207 mm है।  मोटरसाइकिल के टैंक वाले हिस्से में बाइक का स्टार्ट बटन और साथ ही 15-वॉट का वायरलेस फ़ोन चार्जिंग पैड लगाया गया है. मोटरसाइकिल में पीछे वाली सीट को हटाया जा सकता है, और इसके फ़ुटपेग्स को भी एडजस्ट किया जा सकता है।  2026 Royal Enfield Flying Flea C6 की टेक और सेफ्टी बाइक की रेट्रो थीम को ध्यान में रखते हुए, Flying Flea C6 में 3.5-इंच का गोल TFT टचस्क्रीन इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर दिया गया है, जिसमें गाड़ी के कई फ़ंक्शन मौजूद हैं, इस फंक्शन में एनर्जी रीजेनरेशन के अलग-अलग लेवल चुनने का विकल्प भी मिलता है. कार में वायरलेस चार्जर के अलावा, Flea C6 में 27-वॉट का USB-C चार्ज पोर्ट भी दिया गया है।  इस बाइक के साथ एक इलेक्ट्रॉनिक हैंडलबार लॉक भी मिलता है. मोटरसाइकिल में मिलने वाले सेफ्टी फीचर्स की बात करें तो नई Flea C6 के दोनों सिरों पर डिस्क ब्रेक लगाए गए हैं, जिनके साथ लीन एंगल-सेंसिंग एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (ABS) और ट्रैक्शन कंट्रोल (TCS) जैसे फीचर्स दिए गए हैं।  2026 Royal Enfield Flying Flea C6 की बैटरी और परफॉर्मेंस बैटरी पैक की बात करें तो Flying Flea C6 के सेंटर में 3.91 kWh का बैटरी पैक मिलता है, जो एक परमानेंट मैग्नेट मोटर को पावर देती है. यह मोटर 3,500 rpm पर 20.6 bhp की अधिकतम पावर और 60 Nm का अधिकतम टॉर्क उत्पन्न करती है, जो बेल्ट ड्राइव के ज़रिए पिछले व्हील्स को पावर देते हैं. चूंकि Flea C6 का वज़न सिर्फ़ 124 kg है, इसलिए यह महज़ 3.7 सेकंड में 0 से 60 kmph की रफ़्तार पकड़ सकती है और इसकी टॉप-स्पीड 115 kmph तक पहुंच सकती है।  2026 Royal Enfield Flying Flea C6 की रेंज और चार्जिंग मोटरसाइकिल का वज़न कम होने का मतलब यह भी है कि एक तेज़ रफ़्तार वाली मोटरसाइकिल होने के बावजूद, इसकी रेंज काफ़ी अच्छी है. रेंज की बात करें तो Royal Enfield 154 km तक की रेंज (Indian Driving Cycle के अनुसार) का दावा करती है, और असल दुनिया में भी इसकी रेंज तीन अंकों में ही होनी चाहिए।  Royal Enfield ने Flying Flea C6 में 2.2 kW का ऑनबोर्ड चार्जर लगाया है, जो 16-amp के वॉल सॉकेट से जोड़ने पर मोटरसाइकिल को दो घंटे 15 मिनट में पूरी तरह चार्ज कर सकता है. कंपनी का कहना है कि 20 से 80 प्रतिशत तक चार्ज होने में बस एक घंटे से थोड़ा ज़्यादा समय लगता है, और यह मोटरसाइकिल तीन चुनने लायक चार्जिंग स्पीड – Rapid, Standard और Trickle के साथ भी आएगी। 

Mercedes-AMG GLE Coupe Performance Edition और A45 S Aero Track Edition भारत में लॉन्च, जानें कीमत

बेंगलुरु  लग्जरी कार निर्माता कंपनी Mercedes-Benz India ने भारत में दो स्पेशल एडिशन परफॉर्मेंस कार्स बाजार में उतारी हैं. कार निर्माता कंपनी ने भारत में हॉट हैच Mercedes-Benz AMG A45 4MATIC Aero Track Edition और AMG GLE 53 4MATIC Performance Edition पेश की हैं, जो AMG के शौकीनों को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं।  जर्मन लग्ज़री कार निर्माता कंपनी का दावा है कि इन कारों में AMG की खास पहचान और मोटरस्पोर्ट से प्रेरित विशिष्टता के साथ-साथ एक स्पोर्टी ड्राइविंग एक्सपीरिएंस भी मिलता है. कीमत की बात करें तो Mercedes-AMG A45 S Aero Track Edition 4MATIC+ की कीमत 87 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) है, जबकि Mercedes-AMG GLE 53 Coupe Performance Edition की कीमत 1.52 करोड़ रुपये (एक्स-शोरूम) रखी गई है।  Mercedes-AMG A45 S Aero Track Edition 4MATIC+ नई Mercedes-AMG A45 S Aero Track Edition 4MATIC+ हॉट हैच, की कीमत 87 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) है. यह एक स्पोर्टी फ्रंट एप्रन के साथ आती है, जिसमें एक बड़ा स्प्लिटर और हाई-ग्लॉस ब्लैक कलर के अतिरिक्त फ्लिक्स लगाए हैं. इस बाइक में हाई-ग्लॉस ब्लैक कलर का एक फिक्स्ड AMG रियर विंग भी दिया गया है।  कार में बेहतर स्टेबिलिटी के लिए इसके रियर एप्रन पर लैटरल एयरफ्लो ब्रेकअवे एज दिए गए हैं, जबकि हाई-ग्लॉस ब्लैक कलर का डिफ्यूज़र ब्लेड कार की एयरोडायनामिक दक्षता को बढ़ाने के लिए है. इसमें 19-इंच के ब्लैक अलॉय व्हील्स लगाए गए हैं. AMG पैकेज न केवल कार को एक शानदार विज़ुअल लुक देता है, बल्कि इसके फ़ंक्शनल फ़ायदों को भी बढ़ाता है।  इंजन की बात करें तो इस परफॉर्मेंस कार में 2.0-लीटर, चार-सिलेंडर वाला इंजन लगाया गया है, जो 6,750 rpm पर 415 bhp की पीक पावर और 5,000-5,250 rpm के बीच 500 Nm का अधिकतम टॉर्क उत्पन्न करता है. यह कार 270 kmph की टॉप स्पीड हासिल कर सकती है, जबकि सिर्फ 3.9 सेकंड में 0 से 100 kmph की रफ्तार पकड़ सकती है।  Mercedes-AMG GLE 53 Coupe Performance Edition वहीं, Mercedes-AMG GLE 53 Coupe Performance Edition की बात करें तो कंपनी ने इसे 1.52 करोड़ रुपये (एक्स-शोरूम) की कीमत पर उतारा है. इस कार में AMG Dynamic Plus Package मिलता है, जिसमें हाई-परफॉर्मेंस वाले पार्ट्स दिए गए हैं, जिससे इसकी स्पोर्टीनेस में साफ़ तौर पर बढ़ोतरी देखने को मिलती है. इसके अलावा, कार में AMG Active Ride Control दिया गया है, जिससे कार को ज़्यादा फुर्ती और स्टेबिलिटी मिलती है।  कंपनी इस कार में AMG हाई-परफॉर्मेंस कम्पोजिट ब्रेकिंग सिस्टम देती है, जिसमें अंदर से हवादार और छेद वाले ब्रेक डिस्क लगाए गए हैं. कार के अन्य खास फीचर्स की बात करें तो इसमें AMG परफॉर्मेंस स्टीयरिंग व्हील, MBUX इंफोटेनमेंट सिस्टम में पूरी तरह से इंटीग्रेटेड परफॉर्मेंस डेटा सिस्टम, और रियल-टाइम टेलीमेट्री (जिसमें लैप टाइम, एक्सीलरेशन, स्टीयरिंग इनपुट और ब्रेकिंग डेटा वगैरह शामिल हैं) जैसे फीचर्स मिलते हैं।  इस मॉडल मिलने वाले इंजन की बात करें तो इसमें 3.0-लीटर का सिक्स-सिलेंडर इंजन इस्तेमाल किया गया है, जिसकी मदद से यह कार सिर्फ 5.3 सेकंड में 0 से 100 kmph की रफ़्तार पकड़ सकती है, और इसकी टॉप स्पीड 250 kmph है. यह इंजन 6,100 rpm पर 429 bhp की पीक पावर और 1,800 rpm से 5,800 rpm के बीच 520 Nm का टॉर्क प्रदान करता है। 

आज के बाजार में निवेशकों ने झटके में कमाए 6.40 लाख करोड़, हुई शानदार कमाई!

मुंबई  इस सप्‍ताह को शेयर बाजार ने शानदार तेजी पर खत्‍म किया है. आखिरी कारोबारी दिन सेंसेक्‍स और निफ्टी पॉजिटिव रहे. सेंसेक्‍स 918 अंक या 1.20 प्रतिशत चढ़कर 77,550 पर क्‍लोज हुआ, जबकि निफ्टी 275 अंक या 1.16 फीसदी चढ़कर 24,050 के ऊपर बंद हुआ. निफ्टी बैंक में 1091 अंकों की उछाल रही।  BSE के टॉप 30 शेयरों में से 25 शेयर तेजी पर बंद हुए और बाकी 5 शेयरों में गिरावट देखने को मिली. सनफार्मा के शेयर करीब 4 फीसदी तक गिरे हुए थे और आईसीआईसीआई बैंक के शेयर 3 प्रतिशत से ज्‍यादा चढ़े हुए थे. इस तेजी के साथ ही बीएसई मार्केट कैप 444.79 लाख करोड़ से बढ़कर 451.20 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया. यानी सप्‍ताह के आखिरी कारोबारी दिन  निवेशकों को 6.40 लाख करोड़ रुपये की कमाई हुई।  बीएसई पर 4,449 स्‍टॉक ट्रेडेड में से 3,362 शेयर तेजी पर रहे. 944 शेयरों में गिरावट रही और 143 शेयर अनचेंज रहे. 110 शेयर 52 सप्‍ताह के ऊपर कारोबार कर रहे थे और 20 शेयर 52 वीक के लो पर थे. 85 शेयरों में लोअर सर्किट और 334 शेयरों में अपर सर्किट रहा।  क्‍यों आई शेयर बाजार में तेजी?      फाइनेंस कंपनियों के शेयरों में शानदार खरीदारी देखी जा रही है, जिसने आज मार्केट को सपोर्ट किया है. फाइनेंस सेक्‍टर आज 1.6 फीसदी चढ़कर और इस स्‍प्‍ताह 8.2 फीसदी चढ़ चुका है. निफ्टी पीएसयू बैंक और प्राइवेट सेक्‍टर बैंक इंडेक्‍स 1.80 फीसदी तक चढ़ गए।      पूरे एशियाई बाजारों में हरियाली है. साउथ एशिया का कोस्‍पी, जापान का निक्‍केई, चीन का शंघाई और हॉन्‍गकांग का हैंग सेंग में अच्‍छी तेजी देखने को मिली थी. अमेरिकी बाजार में भी प्रमुख इंडेक्‍स डाऊ और एस एंड पी में भी शानदार तेजी रही थी।      सप्‍ताह के आखिरी कारोबारी दिन रुपये में भी उछाल रहा. रुपया 10 पैसा ऊपर चढ़कर 92.41 पर कारोबार कर रहा था. पिछले कुछ दिनों में डॉलर की तुलना में रुपये ने शानदार रिकवरी दिखाई है।  आईटी शेयरों में गिरावट  आईटी इंडेक्‍स में 1.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिसका मुख्य कारण टीसीएस का प्रदर्शन था. मार्च तिमाही में राजस्व में 9.7 प्रतिशत और नेट प्रॉफिट में 12.2 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई. इसके बाद भी यह शेयर 2 प्रतिशत की गिर गया। 

शेयर बाजार में उछाल, सेंसेक्स 785 अंक मजबूत, निफ्टी 24,000 के आंकड़े को पार किया

मुंबई  बिजनेस डेस्कः एशियाई बाजारों से मिले पॉजिटिव संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार ने हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार (10 अप्रैल) को मजबूती के साथ शुरुआत की। बैंकिंग और इंडेक्स हैवीवेट शेयरों में खरीदारी के चलते बाजार को अच्छा सपोर्ट मिला, हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के कारण निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है। 30 शेयरों वाला BSE Sensex बढ़त के साथ 77,198 अंक पर खुला, जबकि पिछले सत्र में यह 76,631 अंक पर बंद हुआ था। खबर लिखे जाने के समय सेंसेक्स 785.40 अंक यानी 1.02% की तेजी के साथ 77,417.05 पर कारोबार कर रहा था। वहीं Nifty 50 ने भी मजबूती दिखाई और 23,880 पर ओपन हुआ। पिछले सत्र में यह 23,775 पर बंद हुआ था। इस समय निफ्टी 241.35  अंक यानी 1% की बढ़त के साथ 24,017.45 पर ट्रेड कर रहा था। ग्लोबल मार्केट का हाल एशियाई बाजारों में भी मजबूती का रुख देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का KOSPI करीब 2.18% चढ़ा, जबकि जापान का Nikkei 225 1.78% और हांगकांग का Hang Seng Index 1.11% की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा था। अमेरिकी बाजार भी पिछले सत्र में बढ़त के साथ बंद हुए। S&P 500 0.62%, Dow Jones Industrial Average 0.58% और Nasdaq Composite 0.83% ऊपर बंद हुए।हालांकि, निवेशकों की नजर अब भी अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे सीजफायर पर बनी हुई है, जिसे फिलहाल नाजुक माना जा रहा है।

सेंसेक्स में 1100 अंक की गिरावट, जानिए 5 कारण जो बने वजह

मुंबई  शेयर बाजार में लगातार 5 दिनों की तेजी पर ब्रेक लग गया है. आज सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट देखने को मिली है. सेंसेक्स 1012 अंक फिसलकर 76,631.65 पर बंद हुआ और निफ्टी 222 अंक से ज्यादा फिसलकर 23,775 के पास क्लोज हुआ है. निफ्टी टॉप गेनर्स में हिंडाल्को, बजाज-ऑटो, BEL शामिल हैं. इनके शेयर्स में 3-1 फीसदी की बढ़त देखने को मिली और निफ्टी टॉप लूजर्स में इंडिगो और जियो फाइनेंस शामिल हैं. इनके शेयर्स में 3-3 फीसदी की गिरावट देखी गई।  निफ्टी के सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो निफ्टी ऑटो, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेस, निफ्टी एफएमसीजी, बैंकिंग, रिएल्टी में बिकवाली देखने को मिली. वहीं, मेटल, फार्मा और आईटी में खरीदारी के साथ कारोबार होता हुआ नजर आया. शेयर बाजार में आज आई भारी गिरावट के पीछे 5 अहम वजह शामिल हैं।  कच्चे तेल में लगी आग ईरान और इजराइल के बीच सीजफायर होने के बावजूद दोनों देशों के बीच एक बार फिर से अनिश्चितता देखने को मिली जिसकी वजह से होर्मुज मार्ग फिर से बंद हो गया है. ऐसे में ब्रेंट का भाव 2 फीसदी चढ़कर 96 डॉलर के पार निकल गया है. साथ ही, WTI क्रूड की कीमत भी 2.60 डॉलर बढ़ गई है।  ईरान और इजराइल के बीच तनाव जारी ईरान और इजराइल के बीच सीजफायदा हो गया था लेकिन एक बार फिर से दोनों देशों के बीच तनाव का मौहाल बन गया है. ईरान का कहना है कि अमेरिका ने सीजफायर के बावजूद बेमानी की है और कमिटमेंट्स का उल्लंघन किया है. वहीं, अमेरिका का कहना है कि ईरान ने द्विपक्षीय बातचीत होने के बावजूद सर्तक रुख अपनाया है. मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, इस सीजफायर को लेकर अभी निवेशकों के बीच कंफ्यूजन बनी हुई है. इसी वजह से सुबह गिफ्ट निफ्टी में भी 140 अंकों की गिरावट देखने को मिल रही थी।  रुपया में आई गिरावट आरबीआई की कोशिशों के बाद भी भारतीय रुपया में गिरावट देखने को मिली है. गुरुवार को शुरुआती कोराबार में भारतीय रुपया 17 पैसे टूटकर 92.71 प्रति डॉलर पर आ गया. मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, फॉरेन करेंसी कारोबारियों के अनुसार, मिडिल ईस्ट में स्थिति नाजुक है और बाजार मजबूत रुख अपनाने की बजाय वेट एंड वाच की स्थिति में है. बुधवार को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 92.54 पर बंद हुआ था. भारतीय रुपए में 2 अप्रैल को डॉलर के मुकाबले जोरदार तेजी देखने को मिली. 2 अप्रैल को रुपया करीब 2% बढ़कर 92.94 प्रति डॉलर पर पहुंच गया था, जो सितंबर 2013 के बाद एक दिन की सबसे बड़ी मजबूती रही थी।  ग्लोबल मार्केट में कमजोरी ग्लोबल मार्केट्स में आज कमजोरी देखने को मिल रही है. एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी, जापान का निक्केई , चीन का एसएसई कम्पोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग गिरावट के साथ कारोबार करते हुए नजर आए. खासकर कोस्पी में करीब 2% की गिरावट दर्ज की गई है. हालांकि, पिछले कारोबारी सत्र में इन बाजारों में तेज उछाल देखने को मिला था. वहीं, अमेरिकी और यूरोपीय बाजार बढ़त के साथ बंद हुए थे, जिससे ग्लोबल संकेत मिले-जुले बने हुए हैं। 

ज़करबर्ग का AI कदम: ‘Muse Spark’ के साथ गूगल और ओपनएआई को चुनौती

वाशिंगटन फेसबुक की पेरेंटल कंपनी मेटा ने बुधवार को आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) की इंडस्ट्री में बड़ा ऐलान किया है. कंपनी ने नए AI मॉडल को लॉन्च किया है, जिसका नाम म्यूज स्पार्क है. यह कंपनी के न्यू AI डिविजन का बनाया नया प्रोडक्ट है, जिसको लेकर कंपनी ने बीते करीब एक साल में बड़े स्तर पर इनवेस्टमेंट की है।  लॉन्चिंग से पहले इस प्रोजेक्ट को इंटरनल नाम दिया गया था, जो 'एवोकाडो' था. अब म्यूज स्पार्क को मेटा के स्टैंडअलोन AI ऐप पर लॉन्च कर दिया है. अब आने वाले दिनों में इसको को मेटा के ऐप के लिए जारी किया जाएगा, जिसमें वॉट्सऐप, इंस्टाग्राम और मेटा एआई स्मार्ट ग्लास के नाम शामिल हैं।  गूगल और ओपनएआई को देगा टक्कर  वॉट्सऐप, इंस्टाग्राम में मिलने वाला मेटा एआई कई जगह पिछड़ने लगा था. अब म्यूज स्पार्क की मदद से कंपनी को बड़े फायदे की उम्मीद कर रही है. राइटिंग और रीजनिंग के मामले में म्यूज स्पार्क ने बेहतर रिजल्ट दिया है, जिसकी वजह से यह ओपनएआई, गूगल और एंथ्रोपिक के बेहतरीन मॉडल के लेवल के आसपास पहुंच चुका है।  रिपोर्ट्स में कोडिंग को लेकर बड़ा अंतर दिखाया गया है. मौजूदा समय में एआई रेस में कोडिंग काबिलियत एक जरूरी स्टैंडर्ड बन चुके हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, कोडिंग के मामले में म्यूज स्पार्क अपने राइवल्स से थोड़ा पीछे रह गया है।  मार्क जकरबर्ग ने बीते साल बनाई AI टीम मार्क जकरबर्ग AI को लेकर बीते करीब एक साल से बड़ी इनवेस्टमेंट कर रहे हैं और इंडस्ट्री के कई बड़े टैलेंट को उन्होंने अपनी AI टीम में मोटी रकम देकर शामिल किया है. जकरबर्ग ने 29 साल के एलेक्जेंटर वांग को मोटी रकम देकर कंपनी में शामिल कर चुके हैं और उनको चीफ एआई ऑफिसर की पोस्ट दी, साथ ही कंपनी ने लामा-4 मॉडल पर काम करने वाली पुरानी टीम को बदल दिया. नए टीम में ओपनएआई, गूगल और अन्य राइवल्स कंपनियों से नए लोगों को मोटी रकम देकर मेटा में शामिल किया गया।  म्यूज स्पार्क को अभी बंद मॉडल रखा  मेटा ने म्यूज स्पार्क के साथ एक बड़ा बदलाव किया है और इसके कोड को मौजूदा समय में प्राइवेट रखा है. इसको क्लोज्ड मॉडल भी कह सकते हैं. बताते चलें कि मेटा अपने एआई मॉडल्स को ओपेन सोर्स करता था, जिसकी मदद से डेवलपर्स को कोड यूज करने की परमिशन मिलती थी।  मेटा का बड़ा इनवेस्टमेंट  जकरबर्ग ने एआई डेवलपमेंट के लिए बड़े इनवेस्टमेंट की तैयारी करके रखी है. एआई डेवलपमेंट के नए डेटा सेंटर पर 600 अरब डॉलर खर्च करने का प्लान बनाया हुआ है. साल 2026 में मेटा लगभग 135 अरब डॉलर तक खर्च करने का प्लान बनाया है, जो बीते साल की तुलना में लगभग दोगुना है. बीते साल कंपनी ने 72 अरब डॉलर की इनवेस्टमेंट की थी।  म्यूज स्पार्क को लेकर कंपनी ने बड़ा दांव लगाया है और इससे कंपनी अपने राइवल्स से आगे निकलना चाहती है. गूगल, ओपनएआई और एन्थ्रॉपिक जैसे नाम मेटा से काफी आगे निकल चुके थे. म्यूज स्पार्क कंपनी के लिए कितना फायदेमंद साबित होगा, वो तो आने वाले दिनों में ही पता चलेगा।