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यूथ कांग्रेस में मचा हड़कंप, 200 से अधिक नेताओं पर गिरी निलंबन की गाज

नई दिल्ली  हाल ही में राष्ट्रीय राजधानी में विपक्षी इंडी गठबंधन की रैली में शामिल न होने के कारण इंडियन यूथ कांग्रेस ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए अपने 200 से ज्यादा सदस्यों को निलंबित कर दिया है। निलंबन पत्रों से पता चलता है कि अब तक सात राज्यों में कम से कम 185 सदस्यों को निलंबित किया गया है और उनसे उनकी अनुपस्थिति के बारे में स्पष्टीकरण मांगा गया है। सूत्रों के अनुसार, अनुशासनात्मक समीक्षा के बाद यह संख्या बढ़कर 500 तक पहुंच सकती है। निलंबित सदस्यों ने जताई हैरानी हालांकि, यूथ कांग्रेस के कुछ निलंबित सदस्यों ने इस बात पर हैरानी जताई है कि पार्टी ने उन्हें सिर्फ एक घटना के आधार पर कैसे आंक लिया, जबकि उन्होंने पार्टी की सेवा में अपने जीवन के कई साल दिए हैं। यूथ कांग्रेस के महासचिव रोहित राजोरिया को बिना अपनी बात रखने का मौका दिए उनके पद से हटा दिया गया। इस पर उन्होंने कहा, "हमने पार्टी के लिए एफआईआर का सामना किया और जेल भी गए। क्या हमें सिर्फ एक कार्यक्रम में शामिल न हो पाने की वजह से हटाया जा रहा है?" चाचा की तेरवीं में होना था शामिल राजोरिया ने बताया कि कांग्रेस पार्टी की युवा शाखा मनमाने ढंग से काम कर रही है, जबकि उन्होंने पार्टी के लिए 15 साल तक काम किया है। इस दौरान, पार्टी द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लेने की वजह से उनके खिलाफ 15 एफआईआर दर्ज हुईं और उन्हें तीन-चार बार जेल भी जाना पड़ा। उन्होंने एक कार्ड दिखाया, जिसमें लोगों से उनके दिवंगत चाचा की तेरवीं में शामिल होने का आग्रह किया गया था। उन्होंने बताया कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व को इस शोक के बारे में पहले ही सूचित कर दिया था और यह भी बता दिया था कि वे 1 नवंबर को रामलीला मैदान में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की रैली के लिए दिल्ली नहीं आ पाएंगे। सिर्फ एक कार्यक्रम में शामिल न होने पर तुरंत हटा दिए जाने के बाद राजोरिया ने सवाल उठाया है कि ऐसी परिस्थितियों में पार्टी सत्ता में लौटने की उम्मीद कैसे कर सकती है। किन राज्यों में की गई कार्रवाई? यूथ कांग्रेस ने सबसे बड़ी कार्रवाई मध्य प्रदेश में की है, जहां 60 सदस्यों को निलंबित किया गया है। इसके बाद गुजरात में 49 और पश्चिम बंगाल में 26 सदस्यों को निलंबित किया गया है। इसके अलावा, तेलंगाना में 14, मध्य उत्तर प्रदेश में 13, कांग्रेस शासित हिमाचल प्रदेश में 13 और हरियाणा में 10 सदस्यों को निलंबित किया गया है।  

‘सनातन धर्म और हिंदुत्व अलग-अलग’, दिग्विजय सिंह के बयान से फिर छिड़ा विवाद

उज्जैन पूर्व एमपी CM और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने हिंदुत्व को लेकर एक बार फिर विवादित बयान दिया है. उन्होंने लोगों को हिंदुत्व से दूर रहने की नसीहत दी है. दिग्विजय सिंह ने कहा कि हिंदुत्व की तरफ जाने वालों के दिल और दिमाग में नफरत होती है. उन्होंने सनातन धर्म और हिंदुत्व को अलग बताते हुए कहा कि सनातन को हिंदुत्व की तरह पेश किया जा रहा है. अगर इसे सही तरीके से नहीं समझाया गया, तो लोग हिंदुत्व की तरफ चले जाएंगे।  उज्जैन से अयोध्या तक 1000 किलोमीटर की यात्रा दिग्विजय सिंह ने यह बयान अपनी सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा के दौरान दिया. दरअसल, दिग्विजय सिंह उज्जैन से अयोध्या तक करीब 1000 किलोमीटर की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा पर निकले हैं. यात्रा के पहले पड़ाव के बाद वह अपने गृह नगर राघौगढ़ पहुंचे. यहां उनके बेटे जयवर्धन सिंह ने यात्रा का स्वागत किया. इसी दौरान एक सभा को संबोधित करते हुए दिग्विजय सिंह ने हिंदुत्व और सनातन धर्म को लेकर अपनी बात रखी. जब वह मंच से भाषण दे रहे थे, तब उनका पूरा परिवार भी मंच पर मौजूद था।  'सनातन का मतलब विश्व को कुटुंब मानना' दिग्विजय सिंह ने कहा कि सनातन धर्म का मतलब हिंदुत्व बिल्कुल नहीं है. उन्होंने कहा कि, सनातन धर्म को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है. इसे हिंदुत्व और नफरत से जोड़कर बताया जा रहा है. सनातन धर्म का असली संदेश पूरे विश्व को एक परिवार मानना है. सनातन धर्म को सही तरीके से लोगों के सामने रखना जरूरी है।  दिग्विजय सिंह ने बताया कि 80 साल की उम्र में 1000 किलोमीटर की पदयात्रा करने के पीछे उनके दो मुख्य कारण हैं. पहली वजह देश में लोकतंत्र की जगह एकतंत्र को बढ़ावा दिया जाना है. उन्होंने राहुल गांधी के वोट चोरी के आरोपों का जिक्र किया. दिग्विजय सिंह ने कहा कि वोट चोरी के जरिए लोकतंत्र को मजबूत नहीं किया जा सकता. उन्होंने EVM पर रोक लगाने और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की।  राम मंदिर के चंदे का भी उठाया मुद्दा दिग्विजय सिंह ने अपनी यात्रा का दूसरा मकसद सनातन धर्म के नाम पर हिंदुत्व को आगे बढ़ाने का विरोध बताया. उन्होंने 1992 में महंत लालदास की ओर से लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा का विरोध किए जाने का जिक्र किया. उन्होंने राम मंदिर के नाम पर जुटाए गए 1400 करोड़ रुपये के चंदे का भी मुद्दा उठाया।  दिग्विजय सिंह ने कहा कि, जब महंत लालदास ने हिसाब मांगा था, तब 8.29 करोड़ रुपये का हिसाब बताया गया था. सनातन धर्म को हिंदुत्व के नाम पर गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। 

‘वोट चोरी’ के आरोपों पर सरमा का राहुल गांधी को जवाब, मोदी और BJP को लेकर किया बड़ा दावा

नई दिल्ली असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने राहुल गांधी के बार-बार 'वोट चोरी' वाले आरोपों का मजाक उड़ाया और साफ कहा कि जब तक देश में सनातन धर्म रहेगा, तब तक भारतीय जनता पार्टी (BJP) मजबूत होती रहेगी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेतृत्व करते रहेंगे। बिहार के पूर्णिया में पदयात्रा के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए सरमा ने अमेरिका के हालिया चुनाव का जिक्र करते हुए राहुल गांधी पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि आज ट्रंप अमेरिका में चुनाव हार गए हैं। उन्होंने आज सुबह राहुल गांधी को फोन करके पूछा कि क्या आप मुझे बता सकते हैं कि मैं भी यहां ‘वोट चोरी’ का कैंपेन कैसे शुरू कर सकता हूं? सरमा ने आगे कहा कि राहुल गांधी अब लगातार हार से तय होने वाली राजनीति के लिए एक मॉडल बन चुके हैं। अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी को चेतावनी देते हुए कहा कि राहुल गांधी, ध्यान से सुनिए। जब तक सनातन धर्म रहेगा, BJP इस देश में फलती-फूलती रहेगी और प्रधानमंत्री मोदी आगे बढ़ते रहेंगे। कल सुबह राम मंदिर जाएं। कम से कम दस लाख लोग आपको वोट दे सकते हैं। सरमा ने राहुल गांधी के 'वोट चोरी' वाले बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि राहुल गांधी ने देश में एक नया आरोप लगाना शुरू कर दिया है कि वोट चुराए जा रहे हैं। लेकिन मुख्यमंत्री के मुताबिक, इस देश में कुछ और ही चुराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मैं सुन रहा हूं कि वोट चुराए जा रहे हैं, लेकिन मेरे हिसाब से इस देश में कुछ तो चुराया जा रहा है, लेकिन वह वोट नहीं है। जो हो रहा है वह 'दिल चुराना' है। इस दौरान उन्होंने राम मंदिर का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर राम मंदिर की जगह पर 500 साल तक बाबरी मस्जिद खड़ी रही और उस मस्जिद को तोड़कर राम मंदिर बनाया जाता है, तो क्या यह दिल चुराना है या नहीं? उन्होंने सीमांचल, असम और बंगाल के हालात का जिक्र करते हुए कहा कि अगर कोई बाबर और औरंगजेब का नाम हटा देता है, तो क्या इसे वोट चुराना माना जाएगा? सरमा ने साफ कहा कि मेरा पक्का मानना है कि यह सीधे शब्दों में दिल चुराना है। सरमा ने मजाकिया अंदाज में कहा कि चिंता मत करो, राहुल गांधी। मैं, सम्राट चौधरी और शुभेंदु अधिकारी सब मिलकर तुम्हें बांग्लादेश में पैराशूट से भेज देंगे। तुम वहां जरूर चुनाव जीतोगे। इस दैरान मुख्यमंत्री ने यह भी सवाल किया कि क्या राहुल गांधी अभी तक अयोध्या में राम मंदिर गए हैं। उन्होंने कहा कि क्या राहुल गांधी अभी तक राम मंदिर गए हैं? अगर वह राम मंदिर नहीं जाते हैं, तो क्या सनातनी लोग अगली बार उन्हें वोट देंगे? अगर वे उन्हें वोट नहीं देते हैं, तो उनका हारना तय है। वह पहले से ही हारने की बात कर रहे हैं। फिर भी वह दावा करते रहते हैं कि वोट चुराए जा रहे हैं। इस दौरान सरमा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लोगों के भरोसे का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब तक मोदी जी दिल चोरी करते रहेंगे, तब तक वोट-चोरी आंदोलन का कोई मतलब नहीं होगा। बहुत ज्यादा जोश है। लोग मोदी जी के साथ खड़े हैं और उन्होंने राहुल गांधी को सौ बार और हराने की कसम खाई है।

US चुनाव में अल-सैयद की जीत से गदगद ओवैसी, मुस्लिम राजनीति पर दिया बड़ा संदेश

नई दिल्ली अमेरिका के मिशिगन में सीनेट चुनाव में डेमोक्रेट उम्मीदवार अब्दुलरहमान मोहम्मद अल-सैयद की जीत की दुनियाभर में चर्चा हो रही है. वह अमेरिकी सीनेट के लिए चुने जाने वाले पहले मुस्लिम हैं. उनकी इस जीत पर भारत में भी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी अब्दुल अल-सैयद की जीत पर प्रतिक्रिया देते हुए उत्तर प्रदेश के मुसलमानों को राजनीतिक पहचान मजबूत करने का संदेश दिया है. ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "एक अब्दुल मिशिगन में जीत गया, अब उत्तर प्रदेश के अब्दुल को भी अपनी सियासी पहचान मज़बूत करनी होगी. संघियों ने 'अब्दुल' को एक तंज़ में बदलने की बहुत कोशिश की है. वक़्त आ गया है कि हम दिखाएं कि अब्दुल अल्लाह के सिवा किसी की ग़ुलामी नहीं करता. अब दरी नहीं बिछाएंगे." कौन हैं अब्दुल अल-सैयद? अब्दुल अल-सैयद मिस्र-अमेरिकी मूल के डॉक्टर और प्रगतिशील नेता हैं. उन्होंने मिशिगन में रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स के खिलाफ कड़े मुकाबले में जीत का दावा किया. उनकी इस जीत को अमेरिकी राजनीति में ऐतिहासिक माना जा रहा है. चुनाव प्रचार के दौरान उन्हें लगातार इस्लामोफोबिक हमलों का सामना करना पड़ा. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कई बार उन्हें निशाना बनाया और 'जिहादी' तक कहा. मिशिगन में एक चुनावी रैली के दौरान ट्रंप ने कहा था कि अल-सैयद सीनेट में जाने से पहले मेटल डिटेक्टर से गुजरने वाले इकलौते सीनेटर होंगे. उन्हें अपनी ही पार्टी के भीतर भी विरोध का सामना करना पड़ा. अगस्त में मिशिगन के डेमोक्रेटिक सीनेट प्राइमरी में उनसे हारने वाली हेली स्टीवंस ने पार्टी के उम्मीदवार का साथ देने के बजाय रिपब्लिकन माइक रोजर्स का समर्थन किया था. जीत के बाद क्या बोले अब्दुल अल-सैयद? जीत का दावा करने के बाद अल-सैयद ने अपने भाषण में अमेरिकी व्यवस्था पर कॉरपोरेट कंपनियों और अरबपतियों के प्रभाव को लेकर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि व्यवस्था को कॉरपोरेट और अरबपतियों के खास हितों ने अपने पक्ष में कर लिया है. उन्होंने अमेरिकी नागरिकों की महंगाई और रोजमर्रा की मुश्किलों का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया के सबसे अमीर और ताकतवर देश में लोगों के लिए राशन खरीदना, गाड़ी में पेट्रोल भरवाना, घर खरीदना और डॉक्टर को दिखाना इतना मुश्किल नहीं होना चाहिए. अल-सैयद ने कहा कि टैक्स का पैसा लोगों और उनके बच्चों पर खर्च होना चाहिए, न कि दूसरे देशों के बच्चों पर बम गिराने में. उन्होंने कहा कि अमेरिका की महानता अपनी कमियों को नजरअंदाज करने में नहीं, बल्कि उन्हें सुधारने की हिम्मत दिखाने में है.

‘भ्रष्टाचार की फेहरिस्त बताऊंगा तो जमीन खिसक जाएगी’, CM भजनलाल पर गहलोत का पलटवार

जयपुर राजस्थान की राजनीति में त्योहारी सीजन के बीच बड़ा भूचाल आ गया है। जोधपुर में आयोजित एक पदयात्रा के दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर लगाए गए गंभीर व्यक्तिगत और प्रशासनिक आरोपों के बाद प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के बीच तीखा जुबानी जंग शुरू हो गई है। एक तरफ जहां मुख्यमंत्री ने गहलोत पर पेपर लीक गिरोह, आरपीएससी सदस्य नियुक्तियों में लेन-देन और पुराने व्यापार को लेकर तल्ख हमले बोले, वहीं पलटवार करते हुए पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने आरोपों को कपोल-कल्पित और झूठा करार देते हुए मुख्यमंत्री को 24 घंटे के भीतर तथ्य सार्वजनिक करने या माफी मांगने का अल्टीमेटम दे दिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का बड़ा हमला, 'जो हाथ भ्रष्टाचार करेगा, काट दिया जाएगा' दिया कुमारी से बहस करते शिखर अग्रवाल की पुरानी तस्वीर जोधपुर में पदयात्रा के दौरान मीडिया और जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा, 'अरे गहलोत साहब, पूरी तरह से सुन लीजिए। अगर बायां हाथ गलती करेगा, भ्रष्टाचार करेगा तो बाएं हाथ को काट दिया जाएगा। अगर दायां हाथ भ्रष्टाचार करेगा तो दायां हाथ काट दिया जाएगा। यह ब्रजवासी है, किसान का बेटा है… भ्रष्टाचार की पूरी फेहरिस्त बताऊंगा तो आपके पैरों तले जमीन खिसक जाएगी। मैं किसी को छोड़ता नहीं, ब्याज सहित चुकाता हूं।" सीएम भजनलाल द्वारा लगाए गए मुख्य आरोप पेपर लीक और सीएमओ के तार: सीएम ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के दौरान हुए पेपर लीक गिरोह के तार पूर्व सीएमओ के ओएसडी शशिकांत और पीएसओ राजकुमार यादव से जुड़े हुए थे। आरपीएससी नियुक्तियां: पैसों के लेन-देन के आधार पर राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के सदस्यों की नियुक्तियां की गईं। व्यापारिक आरोप: पुराने खाद-बीज कारोबार में नकली माल बेचकर किसानों को लूटने का काम किया गया। 24 घंटे में सबूत दें या माफी मांगें: पूर्व सीएम अशोक गहलोत मुख्यमंत्री के तीखे बयानों पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर कड़ी प्रतिक्रिया दी। गहलोत ने कहा कि मुख्यमंत्री अपराधबोध और बौखलाहट में आकर भाषा की मर्यादा की सारी सीमाएं लांघ रहे हैं और जनता को भ्रमित करने का असफल प्रयास कर रहे हैं। "मुख्यमंत्री जी अपने आरोपों का विस्तृत विवरण, तथ्य और दस्तावेज मुझे भी दें और प्रदेश की जनता के सामने भी रखें, अन्यथा 24 घंटे के भीतर अपने दिए गए बयान के लिए माफी मांगें।"- अशोक गहलोत, पूर्व मुख्यमंत्री IAS शिखर अग्रवाल प्रकरण व अनंता रिसॉर्ट पर घेरा आइएएस शिखर अग्रवाल और अनंता रिसॉर्ट्स विवाद का जिक्र करते हुए गहलोत ने सवाल दागा, 'अनंता रिसॉर्ट को विशेष छूट देने वाले बोर्ड ऑफ इन्वेस्टमेंट के अध्यक्ष खुद मुख्यमंत्री हैं। ऐसे में उस कंपनी को विशेष पैकेज दिए जाने में उनकी क्या भूमिका रही, इसका जवाब दें? 'सरकार यदि पारदर्शी है तो इस पूरे हाई-प्रोफाइल मामले की जांच एसीबी (ACB) के बजाय केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई (CBI) को क्यों नहीं सौंप रही है?' बेढ़म बनाम टीकाराम जूली: खान आवंटन पर घमासान इस सियासी आतिशबाजी के बीच दोनों पक्षों के वरिष्ठ नेता भी खुलकर मैदान में आ गए हैं: गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म का आरोप: उन्होंने जोधपुर के बड़ा कांटेचा गांव में 37 खनन लीज में से 16 लीज गहलोत के रिश्तेदारों को आवंटित किए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि विवाद बढ़ने पर उस वक्त सरकार को इन्हें निरस्त करना पड़ा था, जिसका जवाब गहलोत को देना चाहिए। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली का बचाव: टीकाराम जूली ने मुख्यमंत्री के बयानों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि अशोक गहलोत का सार्वजनिक जीवन दशकों से बेदाग और अनुकरणीय रहा है। मुख्यमंत्री के इस तरह के गैर-जिम्मेदाराना बयान राजस्थान की स्वस्थ राजनीतिक परंपरा और स्तर को गिराने वाले हैं, जिसके लिए उन्हें तत्काल माफी मांगनी चाहिए।

दिल्ली की वोट चोरी रैली से गैरहाजिर रहे 9 जिलाध्यक्ष समेत 60 पदाधिकारियों पर कार्रवाई

भोपाल मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस ने दिल्ली के रामलीला मैदान में एक नवंबर को आयोजित कांग्रेस की 'वोट चोरी' रैली में शामिल न होने वाले 60 पदाधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें सस्पेंड कर दिया है। संगठन ने निलंबन आदेश जारी करके इन सभी पदाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से आगामी आदेश तक पद से हटा दिया है। भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व से मिले निर्देशों के अनुपालन में मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस ने यह कदम उठाया है। अनुशासनहीनता पर सख्त कार्रवाई आदेश में कहा गया है कि दिल्ली में आयोजित 'वोट चोरी' रैली से अनुपस्थित रहने के कारण संगठनात्मक अनुशासनहीनता सामने आई है। इसी वजह से राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई है। निलंबित 60 पदाधिकारियों में नौ जिलाध्यक्ष, पांच उपाध्यक्ष, 14 महासचिव और 32 सचिव शामिल हैं। संगठन ने अनुशासनहीनता के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए सभी को तत्काल प्रभाव से जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया है। उपाध्यक्ष और महासचिव भी निलंबित सस्पेंड किए गए नेताओं में पांच उपाध्यक्ष और 14 महासचिव भी शामिल हैं। उपाध्यक्ष पद से निलंबित होने वालों में शिवराज यादव, राजवीर सिंह कुड़िया, योगिता सिंह परिहार, प्रमोद सिंह खरे और नीरज पटेल शामिल हैं। इसके अलावा महासचिव पद पर तैनात रोहित राजोरिया, अब्दुल करीम कुरैशी, विनय पांडे और राहुल हितेश ठाकुर सहित कुल 14 महासचिवों पर यह कार्रवाई हुई है। साथ ही संगठन ने 32 सचिवों को भी रैली में अनुपस्थित रहने के कारण पद से हटा दिया है। नौ जिलाध्यक्षों पर गिरी गाज मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस ने रैली में शामिल न होने वाले नौ जिलाध्यक्षों को भी निलंबित कर दिया है। इनमें मैहर के जिलाध्यक्ष सौरभ शर्मा, आगर के जिलाध्यक्ष पृथ्वीराज चौहान, नीमच के जिलाध्यक्ष मनमोहन शक्तावत, बुरहानपुर के जिलाध्यक्ष अर्जुन जंगले, अनूपपुर के जिलाध्यक्ष मनवेंद्र मिश्रा, गुना के जिलाध्यक्ष पंचम भील, बड़वानी के जिलाध्यक्ष आदित्य गोयल, छतरपुर के जिलाध्यक्ष मनवेंद्र सिंह परमार और भिंड के जिलाध्यक्ष मनीष पुरोहित शामिल हैं। राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देश पर लिया गया फैसला युवा कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर जारी आदेश में कहा कि यह कार्रवाई संगठनात्मक अनुशासन बनाए रखने और राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए की गई है. आदेश 3 नवंबर 2026 को जारी किया गया।  फिलहाल जारी आदेश में निलंबित पदाधिकारियों के नामों और उनके जवाब का विवरण नहीं दिया गया है. यह भी स्पष्ट नहीं है कि निलंबन कितने समय तक जारी रहेगा. आदेश में उन्हें आगामी निर्देश तक निलंबित रखने की बात कही गई है।     

जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस को झटका, आगा सैयद ने दिया इस्तीफा

जम्मू  जम्मू-कश्मीर की सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस को बड़ा झटका लगा है। श्रीनगर के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने पार्टी छोड़ने और लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने का एलान किया है। उन्होंने बडगाम में पिता आगा सैयद मेहदी की पुण्यतिथि पर आयोजित जनसभा में यह घोषणा की। इस दौरान बेहिश्त-ए-ज़हरा पार्क में समर्थकों की भारी भीड़ जमा हो गई है। आगा रुहुल्ला ने जनता को इस्तीफा दिखाते हुए एलान किया कि मैं इस्तीफा दे रहा हूं। उन्होंने अपने इस्तीफे को आजादीनामा का नाम दिया। उन्होंने मोहम्मद अशरफ मट्टू के जरिए पार्टी को इस्तीफा दिया। CM उमर अब्दुल्ला पर खूब बरसे रुहुल्लाह इससे पहले आगा रुहुल्लाह मेहदी CM उमर अब्दुल्ला पर खूब बरसे। उन्होंने कहा कि जिस कुर्सी पर उमर बैठे हैं, वह सबके लिए दुख का कारण बन गई है। उन्होंने आगे कहा कि उमर अब्दुल्ला को अपनी सत्ता और पद बचाए रखने के लिए अपनी टोपी और सम्मान दूसरों के कदमों में रखने की जरूरत नहीं थी। नेकां नेतृत्व पर जनादेश से विश्वासघात का आरोप रुहुल्लाह ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व पर जनता के जनादेश के साथ विश्वासघात करने और चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व के साथ उनके मतभेद व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सिद्धांतों और राजनीतिक प्रतिबद्धताओं से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 की बहाली, संवैधानिक अधिकारों की रक्षा, आरक्षण नीति और जेलों में बंद कैदियों की रिहाई जैसे अहम मुद्दों पर पार्टी ने जनता से जो वादे किए थे, उन्हें पूरा करने में वह नाकाम रही है। इन मुद्दों पर समझौता करना उनके लिए संभव नहीं है, क्योंकि इन्हीं आश्वासनों के आधार पर नेशनल कॉन्फ्रेंस ने जनता से समर्थन मांगा था। दूसरी पार्टी में जाने के बजाय नया राजनीतिक मंच बनाने की तैयारी रुहुल्लाह ने स्पष्ट किया कि उनका फैसला पार्टी में किसी पद से वंचित रहने या किसी व्यक्तिगत नाराजगी का नतीजा नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके लिए राजनीतिक पद से ज्यादा महत्वपूर्ण वे मुद्दे हैं, जिनके आधार पर लोगों ने पार्टी को समर्थन दिया था। सांसद ने यह भी कहा कि उनका मकसद केवल एक राजनीतिक पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में शामिल होना नहीं है। वह जम्मू-कश्मीर के ऐसे ईमानदार, प्रतिबद्ध और जागरूक युवाओं को एक मंच पर लाना चाहते हैं, जो अपने वतन और यहां के लोगों के दर्द को समझते हैं तथा समाज में बदलाव लाने की इच्छा रखते हैं। 'अब जम्मू-कश्मीर के लिए जिम्मेदारी निभाने का वक्त' उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को समाज के हित में आगे आने के लिए प्रोत्साहित करें। उन्होंने कहा कि जिन बच्चों को माता-पिता ने ईमानदारी और मेहनत के साथ पाला-पोसा है, उन्हें अब समाज और जम्मू-कश्मीर की बेहतरी के लिए अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। रुहुल्लाह ने कहा कि वह युवाओं का ऐसा मंच तैयार करना चाहते हैं, जो पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ जनकल्याण तथा जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए काम करे। हालांकि श्रीनगर लोकसभा सीट फिलहाल खाली नहीं होगी। इसके लिए लोकसभा अध्यक्ष की ओर से रुहुल्लाह का औपचारिक इस्तीफा स्वीकार किया जाना जरूरी है। इस्तीफा स्वीकार होने और सीट रिक्त घोषित किए जाने के बाद संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत उपचुनाव कराया जा सकेगा।  

राहुल गांधी, केजरीवाल या ममता बनर्जी? उमर अब्दुल्ला ने बताई अपनी पसंद

श्रीनगर  जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बता दिया है कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने विपक्षा का बेहतर नेता किसे मानते हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान उनके सामने तीन नामों की लिस्ट रखी गई थी, जिसमें से एक चुनने के लिए कहा गया था। इस लिस्ट में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, लोकसभा सांसद राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल थे। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस लिस्ट में से लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी को चुना है। साथ ही उन्होंने इसकी वजह भी बताई है और कहा है कि भारत में सिर्फ दो ऐसे दल हैं, जो पूरे देश में हैं। शुभांकर मिश्रा के पॉडकास्ट में उन्होंने कहा कि बाकी सभी को इस बात का भ्रम है कि वो राष्ट्रीय नेता हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। क्यों हैं राहुल गांधी बेहतर विकल्प सीएम उमर ने कहा, 'राहुल गांधी। जो भी आप कहें भारत में दो ही पार्टियां हैं, जिनकी पूरे देश में मौजूदगी है। कम ज्यादा हो सकती है, लेकिन पूरे देश में मौजूदगी है। कांग्रेस और भाजपा। बाकी सभी को बड़ा होने का भ्रम है। मैं आपको बता रहा हूं कि हम कहीं एक छोटे हिस्से को कंट्रोल करते हैं, लेकिन समझते हैं कि राष्ट्रीय पार्टी हैं। ऐसा नहीं है।' उन्होंने कहा, 'हम राष्ट्रीय पार्टी नहीं चलाते, इसलिए राष्ट्रीय नेता भी नहीं हैं। हम तब ही राष्ट्रीय नेता कहलाएंगे, जब हमारी पार्टी राष्ट्रीय होगी। मैं राष्ट्रीय नेता नहीं हूं, मैं जम्मू और कश्मीर तक सीमित हूं। मुझे भ्रम हो सकता है कि मैं राष्ट्रीय नेता हूं, लेकिन ऐसा नहीं है। राहुल गांधी राष्ट्रीय पार्टी का हिस्सा हैं। यह बात उन्हें फायदा पहुंचाती है, जो किसी के पास नहीं है।' राहुल गांधी की तारीफ इस दौरान उन्होंने राहुल गांधी की जमकर तारीफ भी की। जब पूछा गया कि राहुल बेहतर नेता हैं या इंसान, तो इसपर उन्होंने कहा, 'बेहतर इंसान हैं, लेकिन तेजी से खुद को तैयार करते राजनेता भी हैं।' उन्होंने कहा, 'सिर्फ कहने के लिए ही नहीं। आप देखिए वो लोगों से किस तरह से मिलते हैं, कैसे बात करते हैं और बैठते हैं। वो लोगों के साथ गहराई से बात करते हैं, जो करने के लिए हम से कई लोगों के पास समय नहीं है। मेरे पास ऐसा करने के लिए समय नहीं है।' उन्होंने यह भी कहा है कि हाल के समय में राहुल गांधी का ग्राफ बढ़ा है। उन्होंने कांग्रेस सांसद को लेकर कहा, 'मुझे तो ऐसा लग रहा है और इससे इनकार करना गलत होगा।' उन्होंने यह भी कहा कि अब राहुल को सरकार ज्यादा गंभीरता से ले रही है। हाल ही में विपक्षी गठबंधन ने दिल्ली में प्रदर्शन बुलाया था, जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के काम करने के तरीकों पर सवाल उठाए गए थे। कांग्रेस के साथ चला रहे हैं सरकार 90 सीटों वाली जम्मू और कश्मीर विधानसभा में उमर अब्दुल्ला की नेशनल कॉन्फ्रेंस सबसे बड़ी पार्टी है, लेकिन उसके पास पूर्ण बहुमत नहीं है। पार्टी के पास कुल 41 विधायक हैं और राज्य में एनसी कांग्रेस समेत कई छोटे दलों के साथ मिलकर सरकार चला रहे हैं। फिलहाल, जम्मू और कश्मीर में पूर्ण राज्य के दर्जे का मुद्दा गरमाया हुआ है। वहीं, अटकलें हैं कि एनसी भी बगावत का सामना कर रही है। जबकि, पार्टी नेता इससे इनकार कर रहे हैं।

मूर्तिजापुर में शिवसेना का बढ़ा कुनबा, पांच निर्दलीय पार्षदों ने थामा एकनाथ शिंदे का दामन

मुंबई महाराष्ट्र के अकोला जिले की राजनीति से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना की ताकत बढ़ गई है। मूर्तिजापुर नगर पालिका के पांच निर्दलीय पार्षदों ने अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ शिवसेना का दामन थाम लिया है। इन सभी नेताओं ने शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में रविवार को पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। मूर्तिजापुर के 5 निर्दलीय पार्षद शिवसेना में शामिल शिवसेना में शामिल होने वाले पांच पार्षदों में संदीप दौलतराव सरनाईक, सारिता काले पाटील, पूनम रवि माडक, ममता कैलास महाजन और शुभांगी संदीप सरनाईक शामिल हैं। इन सभी ने अपने समर्थकों के साथ पार्टी में प्रवेश किया। इस सामूहिक दल-बदल को मूर्तिजापुर और अकोला जिले की स्थानीय राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पांच निर्दलीय पार्षदों के एक साथ शिवसेना में शामिल होने से जिले में पार्टी का राजनीतिक आधार मजबूत होने की चर्चा है। एकनाथ शिंदे ने सोशल मीडिया पर पक्ष प्रवेश की तस्वीरें शेयर की और लिखा, "अकोला जिले के मूर्तिजापुर नगर पालिका के निर्दलीय पार्षद संदीप सरनाईक, सरिता काले पाटील, पूनम माडक, ममता महाजन, शुभांगी सरनाईक और राष्ट्रवादी यूथ कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष तथा अकोला दूध महासंघ के संचालक शिवा मोहोड ने अपने समर्थकों के साथ भगवा ध्वज हाथ में लेकर शिवसेना में आधिकारिक रूप से प्रवेश किया। इस अवसर पर सभी का पार्टी में स्वागत किया और उनके भविष्य के सफल राजनीतिक सफर के लिए शुभकामनाएं दीं।" शिंदे के करीबी से मुलाकात के बाद लिया था फैसला जानकारी के मुताबिक, इन पांचों पार्षदों ने इसी महीने की शुरुआत में अकोला में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के करीबी सहयोगी एडवोकेट निलेश देशमुख से मुलाकात की थी। इस दौरान उनके बीच बैठक हुई थी। बताया जा रहा है कि इसी के बाद सभी ने शिवसेना में शामिल होने का निर्णय लिया। अब एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में हुए इस पार्टी प्रवेश से अकोला जिले खासकर मूर्तिजापुर नगर पालिका में शिवसेना को नई ताकत मिली है।

राहुल गांधी पर बीजेपी नेता का तीखा हमला, बोले- लगातार तीन चुनाव हारने के बाद अंगूर खट्टे बता रही कांग्रेस

 फरीदाबाद हरियाणा के फरीदाबाद में बीजेपी नेता धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने लगातार तीन चुनावों में हार का जिक्र करते हुए राहुल गांधी पर तंज कसा और कहा कि प्रधानमंत्री बनने के लिए उन्होंने महंगे कपड़े डिजाइन करवाए थे, लेकिन अब उनकी असलियत सामने आ गई है। धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस पर देश में अराजकता फैलाने और भीड़तंत्र में विश्वास करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने चुनाव आयोग को लेकर कांग्रेस के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी चुनाव जीतने पर आयोग को सही बताती है, लेकिन हारने पर उसी पर सवाल उठाने लगती है। 'अंगूर नहीं मिले तो खट्टे बता दिए', राहुल गांधी पर तंज फरीदाबाद में मीडिया से बातचीत के दौरान धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस की मौजूदा राजनीतिक स्थिति की तुलना गांवों में प्रचलित एक कहावत से की। उन्होंने कहा कि जब अंगूर नहीं मिलते तो उन्हें खट्टा बता दिया जाता है। साथ ही यह भी कहा कि कांग्रेस चुनाव में हार मिलने के बाद इसी तरह का रवैया अपना रही है। बीजेपी नेता ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि लगातार तीन चुनाव हारने के बाद अब उनकी राजनीतिक स्थिति सामने आ गई है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी ने देश का प्रधानमंत्री बनने के लिए कथित तौर पर महंगे कपड़े तक डिजाइन करवाए थे, लेकिन अब कांग्रेस के पास कोई राजनीतिक विचार और मुद्दा नहीं बचा है। कांग्रेस पर अराजकता फैलाने का आरोप धर्मेंद्र प्रधान ने आरोप लगाया कि कांग्रेस जनता का समर्थन खो चुकी है और इसी वजह से देश में अराजकता फैलाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अब लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने के बजाय भीड़तंत्र में विश्वास करने लगी है। उन्होंने संसद के मानसून सत्र का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौरान भी कांग्रेस का यही रवैया देखने को मिला था। धर्मेंद्र प्रधान के अनुसार, कांग्रेस के पास जनता से जुड़े मुद्दे नहीं हैं और वह संसद में भी अपनी जिम्मेदारी निभाने से पीछे हटती रही है। चुनाव आयोग पर कांग्रेस के दोहरे रवैये का आरोप बीजेपी नेता ने चुनाव आयोग को लेकर कांग्रेस के रुख पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस केरल में चुनाव जीतती है तो उसे चुनाव आयोग की व्यवस्था में कोई परेशानी नहीं होती। कर्नाटक में जीत मिलने पर भी आयोग पर सवाल नहीं उठाए जाते। लेकिन जब पार्टी को बंगाल या हरियाणा में हार का सामना करना पड़ता है तो, इसके लिए चुनाव आयोग को दोषी ठहराते हैं।