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नेतृत्व की आवाज दबाई गई? राहुल गांधी और खरगे बोले नहीं, विपक्ष ने सदन छोड़ा

नई दिल्ली संसद के बजट सत्र के दौरान दोनों ही सदनों में जमकर हंगामा हो रहा है। मंगलवार को कार्यवाही शुरू होते ही लोकसभा में हंगामे का दौर शुरू हो गया और थोड़ी ही देर बाद सदन को 2 बजे तक स्थगित करना पड़ा। दूसरी तरफ राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे को ना बोलने देने का आरोप लगाते हुए विपक्षी सांसदों ने वॉकआउट कर दिया। एक बार स्थगन के बाद बारह बजे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही पीठासीन अधिकारी कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने जरूरी कागजात सभा पटल पर रखवाए। उन्होंने उसके बाद आम बजट पर चर्चा की शुरुआत करने के लिए कांग्रेस के शशि थरूर का नाम पुकारा। इस बीच कांग्रेस के कयी सदस्य अपने स्थान से खड़े होकर शून्यकाल के साथ राहुल गांधी को अपनी बात रखने देने की मांग करने लगे। पीठासीन अधिकारी ने बार बार कहा कि यह समय बजट पर चर्चा के लिए निर्धारित किया गया है और विपक्ष के नेता बजट पर अपनी बात रख सकते हैं। इस पर कांग्रेस समेत विपक्ष के सदस्य श्री गांधी को अपनी बात रखने देने की मांग करने लगे। विपक्षी सदस्य अपने स्थान पर खड़े होकर अपनी मांग को लेकर शोरगुल करने लगे जिसके कारण सदन की कार्यवाही दो बजे तक स्थगित कर दी गई। इससे पहले कार्यवाही शुरू होते ही अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन को बताया कि छह फरवरी को अंडर-19 भारतीय क्रिकेट टीम ने विश्व कप जीता है इसके लिए उन्हें वह सदन की तरफ से बधाई देते हैं। युवा क्रिकेट टीम को बधाई देने के बाद श्री बिरला ने प्रश्न काल की कार्रवाई शुरू की तो विपक्षी दलों के सदस्य अपनी मांगों को लेकर सीटों पर खड़े हो गए और जोर-जोर से बोलने लगे। अध्यक्ष ने इसी बीच प्रश्न काल की कार्यवाही को आगे बढ़ाया लेकिन विपक्ष की तरफ से तेज हंगामा शुरू हो गया। बिरला ने हंगामा कर रहे सदस्यों से कहा कि प्रश्न काल के बाद सदस्यों को बोलने का अवसर दिया जाएगा। उनका कहना था कि वह हमेशा सब सदस्यों को बोलने का अवसर देते हैं इसलिए सदन को बाधित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि बजट पर चर्चा होगी तो सभी दलों को अपनी बात रखने का मौका मिलेगा इसलिए प्रश्न काल को चलने दें। उनका कहना था कि यह सदस्यों का समय होता है और सबको मौका मिलना चाहिए इसलिए वह सभी सदस्यों से सदन को बाधित न करने का आग्रह कर रहे है। सदन में सार्थक चर्चा के लिये सहयोग करें। उन्होंने तेज लहजे में कहा कि सदस्य नियमित सदन की कार्यवाही में अवरोध करने का प्रयास कर रहे हैं और उन्हें ऐसा नहीं होना चाहिए। इसी बीच सदस्य नारे लगाते हुए सदन के बीचों-बीच आ गये और शोर शराबा करने लगे। हंगामा और बढ़ने लगा तो श्री बिरला ने सदन की कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित कर दी।  

ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव: विपक्ष ने उठाए गंभीर सवाल, जानिए वजह

नई दिल्ली संसद का बजट सत्र 2026 अब तक काफी हंगामेदार रहा है. हर दिन सदन की कार्यवाही विपक्षी सांसदों के चलते स्थगित करनी पड़ रही है. आज सोमवार को भी लोकसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी गई. वहीं, सूत्रों से जानकारी मिली है कि विपक्षी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की योजना बनाई है. सूत्रों के मुताबिक, विपक्ष इसे बजट सेशन 2026 के दूसरे फेज में पेश करेगा, क्योंकि इसके लिए उसे 20 दिन का नोटिस देना होता है. वहीं, इस फैसले के लिए जो वजहें बताई गई हैं, उनमें सबसे पहले लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बोलने की इजाजत नहीं देना; दूसरा चेयर पर बैठे पीठासीन अधिकारी द्वारा महिला सांसदों का नाम लिया जाना; तीसरा कुछ ट्रेजरी बेंच सांसदों को हमेशा सदन में प्रिविलेज दिया जाना; और आखिरी जिस तरह से 8 विपक्षी सांसदों को पूरे सेशन के लिए सस्पेंड किया गया शामिल है. लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला तब हुआ जब विपक्ष ने आरोप लगाया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सदन में बोलने नहीं दिया गया. बता दें, पिछले हफ्ते, संसद के निचले सदन में उस समय नारेबाजी और हंगामा हुआ जब राहुल गांधी ने चीन के साथ 2020 के गतिरोध पर चर्चा करने के लिए पूर्व आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवणे की 'अनपब्लिश्ड' यादों का जिक्र किया. लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने एक आदेश पारित किया था, जिसमें राहुल गांधी से 'अनपब्लिश्ड' लिटरेचर का हवाला न देने को कहा गया था और पढ़ने की अनुमति देने से मना कर दिया था. वहीं, 5 फरवरी को स्पीकर बिरला ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सदन में न आने का आग्रह किया था, ताकि कोई भी अप्रिय घटना न हो, क्योंकि उन्हें जानकारी मिली थी कि कुछ कांग्रेसी सांसद सदन में पीएम मोदी की सीट तक आ सकते हैं और 'ऐसी घटना कर सकते हैं जो पहले कभी नहीं हुई.' आज सोमवार को लोकसभा की कार्यवाही में कोई कानूनी काम नहीं हुआ, क्योंकि स्पीकर बिरला ने विपक्ष के भारत-US अंतरिम ट्रेड फ्रेमवर्क पर चर्चा की मांग को लेकर नारेबाजी के बीच सदन को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया, जिससे प्रश्नकाल में रुकावट आई. आज सदन की कार्यवाही शुरू होने के करीब सात मिनट बाद ही स्थगित कर दी गई. जैसे ही प्रश्नकाल शुरू हुआ, विपक्षी बेंचों से नारेबाज़ी जारी रही, सांसदों ने मांग की कि उनके मुद्दों पर ध्यान दिया जाए. हालांकि, स्पीकर बिरला ने सांसदों से अपील की कि वे मर्यादा बनाए रखें, क्योंकि किसी भी सांसद को सदन में बोलने पर कोई रोक नहीं होगी. सदन में रुकावट डालने के लिए विपक्षी सांसदों की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि क्या आप सदन को स्थगित करना चाहते हैं? क्या आप काम नहीं करना चाहते? सदन बहस और चर्चा के लिए है, कृपया मुद्दों पर बात करें और उन्हें उठाएं. सभी को बोलने का मौका मिलेगा; किसी को भी बोलने से नहीं रोका जाएगा. लगातार नारेबाजी जारी रहने से स्पीकर बिरला ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी. संसद के दोनों सदनों में सोमवार को यूनियन बजट 2026-27 पर चर्चा जारी रहने वाली थी, जिसे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को पेश किया था. सीतारमण ने लगातार नौवीं बार लोकसभा में यूनियन बजट 2026-27 पेश किया.

राज्यसभा में मनोज झा का सुझाव: विदेश व्यापार समझौते में पारदर्शिता जरूरी

नई दिल्ली राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने भारत-अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने टैरिफ को 2.9 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया था और अब 50 फीसदी से घटाकर टैरिफ को 18 प्रतिशत पर लाया गया है, जबकि इस बात पर भारत में सरकार जश्न मना रही है। मनोज झा ने कहा कि असल में यह सामूहिक चिंता का विषय होना चाहिए। समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में मनोज झा ने कहा कि केंद्रीय कैबिनेट के सामूहिक दायित्व को खत्म किया जा चुका है। सवाल विदेश मंत्री से पूछा जाता है तो वह वाणिज्य मंत्री का नाम लेते हैं और वाणिज्य मंत्री इस सवाल को विदेश मंत्री की तरफ बढ़ा देते हैं। राजद सांसद ने कहा कि व्यापार समझौते पर सरकार को संसद को विश्वास में लेना चाहिए और बिंदुवार एक सूची जारी करनी चाहिए, क्योंकि आशंकाओं को सरकार निर्मूल साबित नहीं कर पाई है। रुपए की गिरती कीमत पर भी मनोज झा ने सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि आज कैबिनेट के दो मंत्रियों की उम्र को मिला लें, तब भी रुपया उससे नीचा जा चुका है। संघ प्रमुख मोहन भागवत की टिप्पणी पर राजद सांसद ने कहा कि आजकल ऐसे लोग भी इतिहास और इतिहास के संदर्भों पर बयान देते हैं, जिन्होंने व्हाट्सअप के जरिए ही अपना भविष्य और वर्तमान देखा है। उन्होंने कहा, "जब हिंदू की बात होती है तो मोहन भागवत को बताना चाहिए कि सीवर में उतरकर जहरीली गैस से मरने वाला कौन है। क्या वह हिंदू नहीं है? वह व्यक्ति क्यों आपकी चिंताओं में शुमार नहीं है? अगर वह व्यक्ति आपकी चिंताओं में शुमार नहीं है तो स्पष्ट है कि आपने विसंगतियों से मुंह मोड़ लिया है।" इसी बीच, मनोज झा ने पूर्णिया से निर्दलीय सांसद और कांग्रेस नेता पप्पू यादव की गिरफ्तारी पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस गिरफ्तारी की टाइमिंग को लेकर सवाल उठाया। राजद नेता ने कहा कि मुकदमा लगभग 35 साल पुराना है। उसमें इतनी क्या जल्दी थी कि जब नीट छात्रा की मृत्यु पर बिहार की जनता आक्रोशित है और उस बीच गिरफ्तारी होती है? मनोज झा ने कहा कि इस प्रकरण में टाइमिंग ही महत्वपूर्ण हो चुकी है। क्या यह चुप कराने की कोशिश है?

‘सुपर फ्लॉप’ प्रेस कॉन्फ्रेंस! CM हिमंत के आरोपों पर गौरव गोगोई का कड़ा पलटवार

नई दिल्ली असम की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा रविवार को लोकसभा सांसद गौरव गोगोई पर गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद अब कांग्रेस नेता ने तीखा पलटवार किया है। मुख्यमंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस को गोगोई ने सदी की सबसे फ्लॉप प्रेस कॉन्फ्रेंस करार दिया। मुख्यमंत्री की ओर से लगाए गए आरोपों के बाद कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट करते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस की कड़ी आलोचना की। उन्होंने लिखा कि उन्हें दिल्ली और असम के उन पत्रकारों पर दया आती है, जिन्हें सदी की सबसे फ्लॉप प्रेस कॉन्फ्रेंस झेलनी पड़ी। बता दें कि प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सीएम सरमा ने कहा कि पाकिस्तानी नागरिक अली तौकीर शेख और एलिजाबेथ गोगोई, जो लोकसभा में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई की पत्नी हैं, से जुड़े आरोप बहुत गंभीर प्रकृति के हैं और इन्हें मामूली मुद्दा नहीं माना जाना चाहिए। एक मौजूदा सांसद की संलिप्तता ने इस मुद्दे को एक सामान्य जांच के दायरे से ऊपर उठा दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये आरोप गंभीर हैं। जब एक मौजूदा सांसद, जो संसद में कांग्रेस पार्टी के उप नेता भी हैं, किसी भी तरह से पाकिस्तान से जुड़े होते हैं, तो मामला अपने आप ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए गोगोई ने लिखा, "मुझे दिल्ली और असम के उन पत्रकारों पर दया आती है जिन्हें सदी की सबसे फ्लॉप प्रेस कॉन्फ्रेंस झेलनी पड़ी। यह एक सी-ग्रेड सिनेमा से भी बदतर था। तथाकथित राजनीतिक रूप से चतुर मुख्यमंत्री ने सबसे बेवकूफी भरे और फर्जी मुद्दे उठाए। यह सुपर फ्लॉप हमारी जोमोय परिवर्तन यात्रा के बिल्कुल उलट है, जो मुख्यमंत्री और उनके परिवार के सदस्यों द्वारा कब्जाई गई 12 हजार बीघा जमीन का खुलासा करने में हिट रही है।" सीएम सरमा ने आगे बताया कि इस मामले की शुरू में असम पुलिस द्वारा गठित एक विशेष जांच दल (एसआईटी) ने जांच की थी। एसआईटी की फाइंडिंग्स के आधार पर, आगे की जांच के लिए सीआईडी पुलिस स्टेशन में एक औपचारिक मामला दर्ज किया गया। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस मामले में एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी, जिसके बाद मामला असम कैबिनेट के सामने रखा गया। विचार-विमर्श के बाद, कैबिनेट ने निष्कर्ष निकाला कि आरोपों के दायरे, संवेदनशीलता और व्यापक प्रभावों के लिए एक केंद्रीय एजेंसी द्वारा जांच की आवश्यकता है।

संजय राउत का दावा—मराठी वोट बैंक के चलते बीजेपी को झुकना पड़ा, रितु तावड़े बनीं मुंबई मेयर

नई दिल्ली शिवसेना-उद्धव बालासाहेब ठाकरे (उबाठा) नेता संजय राउत ने रविवार को दावा किया कि बृह्नमुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) चुनाव में उनकी पार्टी और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) को मिले मराठी लोगों के भारी समर्थन के कारण भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को मुंबई के महापौर के रूप में एक मराठी व्यक्ति को चुनना पड़ा। राउत ने पत्रकारों से बात करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर भी कटाक्ष किया। शनिवार को आरएसएस शताब्दी समारोह के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में अभिनेता सलमान खान को संघ प्रमुख मोहन भगवत से बातचीत करते देखा गया था। राज्यसभा सदस्य ने पूछा, "क्या यह फिल्म अभिनेता सलमान खान का स्वागत था या (यह संदेश था कि) संघ व उसकी शाखाओं में मुसलमानों का भी स्वागत है?" उन्होंने आरोप लगाया कि भागवत को इस बारे में स्पष्टीकरण देना चाहिए क्योंकि जिस तरह से हिंदू-मुस्लिम नफरत और बदले की भावना से प्रेरित दुष्प्रचार फैलाया जा रहा है, उसमें संघ भी शामिल है। राउत ने मुंबई के महापौर पद के लिए भाजपा द्वारा रितु तावडे (53) को उम्मीदवार बनाए जाने पर कहा कि वह मूल रूप से कांग्रेस से हैं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा के पास अपना कोई उम्मीदवार नहीं है। राज्यसभा सदस्य ने कहा, "जिस तरह से मराठी लोगों ने भारी बहुमत से शिवसेना (उबाठा) और मनसे को वोट दिया, भाजपा को मुंबई में एक मराठी महापौर बनाना ही पड़ा।" रितु तावडे, मुंबई की महापौर बनने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और शिवसेना (उबाठा) द्वारा किसी प्रतिद्वंद्वी को मैदान में नहीं उतारने के फैसले के बाद चार दशकों में सत्तारूढ़ पार्टी की वह पहली महापौर बनेंगी। रितु के निर्विरोध चुने जाने से ठाकरे परिवार का बीएमसी पर 25 साल का वर्चस्व समाप्त हो गया।  

मायावती ने लखनऊ में बुलाई अहम बैठक, 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी की तैयारियों पर होगी चर्चा

लखनऊ  बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती आज लखनऊ में संगठन की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक करेंगी। इस बैठक में प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों के साथ-साथ सभी जिलों और विधानसभा क्षेत्रों के अध्यक्षों को शामिल होने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर पार्टी की तैयारियों की समीक्षा करना है। बसपा लंबे समय से चुनावों की रणनीति पर काम कर रही बसपा लंबे समय से आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति पर काम कर रही है। इसके तहत पहले ही जिला और विधानसभा स्तर की इकाइयों को संगठन विस्तार, समर्थक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में जुड़वाने तथा बूथ स्तर पर सक्रियता बढ़ाने जैसे निर्देश दिए जा चुके हैं। साथ ही, भाईचारा कमेटियों को भी पार्टी की चुनावी रणनीति के अनुरूप जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। अब तक हुए कार्यों की विस्तृत रिपोर्ट लेंगी आज की बैठक में मायावती अब तक हुए कार्यों की विस्तृत रिपोर्ट लेंगी और संगठन की कमजोरियों व मजबूती दोनों पर मंथन करेंगी। इसके साथ ही वे कोर वोट बैंक को मजबूत बनाए रखने और सोशल इंजीनियरिंग के जरिए नए वर्गों को जोड़ने की रणनीति स्पष्ट करेंगी। ब्राह्मण मतदाताओं को पार्टी से जोड़ने पर विशेष जोर सूत्रों के अनुसार, इस बार बसपा प्रमुख ब्राह्मण मतदाताओं को पार्टी से जोड़ने पर विशेष जोर दे रही हैं। बैठक में इस दिशा में भी संगठन को ठोस दिशा-निर्देश दिए जाने की संभावना है।

‘सिद्धारमैया ने 2.5 साल का फॉर्मूला तय किया था…’, DK कैंप का आरोप

बेंगलुरु कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर चल रही अटकलों के बीच एक बार फिर मुख्यमंत्री पद का मुद्दा सतह पर आ गया है. DK शिवकुमार कैंप के विधायक बसवराज शिवगंगा ने दावा किया है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री DK शिवकुमार के बीच 2.5-2.5 साल का पावर-शेयरिंग समझौता हुआ था. बसवराज शिवगंगा ने साफ शब्दों में कहा कि मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री को लेकर किसी भी बयान को तब तक गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए, जब तक वो कांग्रेस हाईकमान की ओर से ना आया हो. उन्होंने यथींद्रा के बयानों को भी हल्के में लेने की बात कही. शिवगंगा ने कहा, हाईकमान के अलावा किसी के बयान को गंभीरता से मत लीजिए. कम से कम मेरे बयान को तो गंभीरता से लिया जाना चाहिए, क्योंकि मैं एक विधायक हूं और मुख्यमंत्री चुनने में मेरा वोट है. यथींद्रा के पास ऐसा कोई वोट नहीं है. मीडिया को तय करना है कि किसके बयान को तवज्जो देनी है. उन्होंने आगे दावा किया कि उन्हें यह संदेश मिला है कि मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के बीच 2.5 साल का फॉर्मूला वास्तव में तय हुआ था. शिवगंगा के मुताबिक, सिद्धारमैया ने इस पावर शेयरिंग व्यवस्था का वादा किया था. इस बीच, DK शिवकुमार के समर्थन में एक और विधायक सामने आ गए हैं. मंगलुरु से कांग्रेस विधायक अशोक राय ने खुले मंच से DK शिवकुमार को लेकर बड़ा बयान दिया है. अशोक राय ने कहा कि DK शिवकुमार छह महीने के भीतर मुख्यमंत्री के रूप में मंगलुरु लौटेंगे. मंगलुरु में एक कार्यक्रम के दौरान अशोक राय ने DK शिवकुमार के साथ मंच साझा करते हुए कहा, हम छह महीने में इस कांग्रेस भवन का निर्माण पूरा कर लेंगे और जब आप मुख्यमंत्री बनकर आएंगे, तब इसी भवन का उद्घाटन करेंगे. अशोक राय का यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर पहले से ही अंदरूनी खींचतान की खबरें सामने आ रही हैं. एक के बाद एक विधायकों के बयान पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही असहमति को सार्वजनिक रूप से उजागर कर रहे हैं. हालांकि पार्टी नेतृत्व की ओर से अब तक किसी भी तरह के पावर शेयरिंग फॉर्मूले या नेतृत्व परिवर्तन को लेकर आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है. कांग्रेस हाईकमान लगातार यह दोहराता रहा है कि सरकार स्थिर है और मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई बदलाव तय नहीं है.

लक्ष्मण तिवारी के इस्तीफे से कांग्रेस में संकट, भाजपा ने जीतू पटवारी की कार्यकुशलता पर सवाल उठाए

 भोपाल मध्य प्रदेश में कांग्रेस एक ओर संगठन को सशक्त बनाने के लिए संगठन सृजन अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर गुटबाजी के आरोप लग रहे हैं। मऊगंज विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक लक्ष्मण तिवारी ने गुटबाजी का आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ दी। उनके आरोप से भाजपा के निशाने पर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी आ गए हैं। भाजपा नेताओं ने कहा है कि प्रदेश नेतृत्व की 'कार्यकुशलता' से कांग्रेस के नेता ही आहत हैं। यह प्रदेश अध्यक्ष की 'कार्यकुशलता' पर सवाल है। लोकसभा चुनाव से पहले पूर्व विधायक लक्ष्मण तिवारी कांग्रेस में शामिल हुए थे। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने ही उन्हें सदस्यता दिलाई थी। भारतीय जनशक्ति पार्टी के टिकट पर विधायक वह 2008 में उमा भारती की भारतीय जनशक्ति पार्टी के टिकट पर मऊगंज से विधायक बने। 2013 के विधानसभा चुनाव में मऊगंज सीट से ही भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े लेकिन हार गए। 2018 में टिकट नहीं मिलने पर भाजपा से बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़ा और 10 हजार मत प्राप्त किए। 2023 में समाजवादी पार्टी से होते हुए कांग्रेस में आए। अब उन्होंने कांग्रेस भी छोड़ दी। गुरुवार को रीवा में पत्रकार वार्ता में तिवारी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस जमीनी मुद्दों से भटक गई है। गुटबाजी हावी है। पार्टी में खींचतान चल रही है, जो भविष्य के लिए हानिकारक है। ईमानदारी से काम करने वालों की बात नहीं सुनी जाती है। भाजपा का हमला इस आरोप को आधार बनाकर भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने कहा है कि दिग्विजय सिंह ने मंच से, हरीश चौधरी व उमंग सिंघार ने दिल्ली में मल्लिकार्जुन खरगे-राहुल गांधी के सामने, कमलेश्वर पटेल ने मीडिया में जीतू पटवारी की कार्यकुशलता पर सवाल उठाए हैं। अब अपनी उपेक्षा से आहत पूर्व विधायक लक्ष्मण तिवारी का पार्टी से त्यागपत्र दे दिया जो प्रदेश नेतृत्व की विफलता का प्रमाण है। अब उन्हें झूठ और भ्रम फैलाने के बजाय आत्ममंथन करना चाहिए।

महिला वोटरों पर तृणमूल कांग्रेस की बड़ी नजर, 2.42 करोड़ वोटर्स को ध्यान में रखते हुए बढ़ाया लक्खी भंडार का अनुदान

कलकत्ता  पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में राज्य की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस सरकार की निगाहें महिला वोट बैंक पर टिकी हुई हैं. महिला वोटरों को लुभाने के लिए तृणमूल कांग्रेस सरकार ने अंतरिम बजट में लक्खी भंडार (लक्ष्मीर भंडार) योजना की राशि बढ़ाने की घोषणा की है. राज्य सरकार ने लक्खी भंडार के अनुदान की राशि में 500 रुपए की बढ़ोतरी की है. महिलाओं को अब मिलेंगे 1500 रुपए बजट घोषणा के अनुसार, सामान्य श्रेणी की महिलाओं को 1000 रुपए की वित्तीय सहायता दी जाती थी. उन्हें अब 1500 रुपए मिलेंगे. इसके साथ ही अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग की महिलाओं को इस परियोजना के तहत 1700 रुपए मिलेंगे. फरवरी से ही महिलाओं को बढ़ी हुई राशि मिलने लगेगी. इस योजना के लिए ममता बनर्जी की सरकार ने वर्ष 2026-27 में 15 हजार करोड़ रुपए का अतिरिक्त फंड अलॉट किया है. 2021 में ममता बनर्जी ने की थी योजना की शुरुआत वर्ष 2021 के विधानसभा चुनावों के ठीक पहले ममता बनर्जी ने लक्खी भंडार योजना की घोषणा की थी. विधानसभा चुनाव जीतने के बाद ही उन्होंने महिलाओं के खाते में 500 रुपए भेजने शुरू कर दिये थे. फिर 2024 में लोकसभा चुनाव में इस राशि को बढ़ाकर 1000 रुपए कर दिया. 2.21 करोड़ महिलाओं को अभी मिल रहा योजना का लाभ अब 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले इसमें फिर 500 रुपए की वृद्धि की गयी है. फिलहाल राज्य की 2 करोड़ 21 लाख महिलाओं को योजना का लाभ मिल रहा है. 20.62 लाख नये आवेदन स्वीकार किये गये हैं. इसके बाद अब योजना की लाभुकों की संख्या बढ़कर 2.42 करोड़ हो जायेगी.

बंगाल चुनाव में यूपी के 54 भाजपाई लेंगे मोर्चा, 47 विधानसभा सीटों का मिलेगा जिम्मा

कलकत्ता  बिहार विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत से उत्साहित भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल के चुनावी रण में भी पूरी ताकत झोंक दी है। पार्टी ने उत्तर प्रदेश से मंत्रियों, संगठनात्मक अनुभव रखने वाले नेताओं और रणनीतिकारों की एक जंबो टीम बंगाल भेजी है, ताकि चुनावी जमीन मजबूत की जा सके। भाजपा ने चुनावी रणनीति के तहत बंगाल को छह क्षेत्रों में विभाजित किया है। इनमें से तीन क्षेत्रों की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री जेपीएस राठौर, पूर्व कैबिनेट मंत्री सुरेश राणा और उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत को सौंपी गई है। इनके साथ संबंधित राज्यों के संगठन महामंत्री भी तैनात किए गए हैं।  47 सीटों का दायित्व यूपी के नेताओं को पार्टी ने 244 विधानसभा सीटों में से 47 सीटों का दायित्व यूपी के नेताओं को सौंपा है। बंगाल का चुनाव भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बना हुआ है और देशभर की निगाहें यहां के नतीजों पर टिकी हैं। उत्तर प्रदेश में लंबे समय तक प्रदेश महामंत्री रह चुके जेपीएस राठौर को उनकी मजबूत संगठनात्मक पकड़ को देखते हुए अक्टूबर में ही बंगाल भेज दिया गया था। वे कोलकाता दक्षिण क्षेत्र का प्रभार संभाल रहे हैं और इससे पहले भी विधानसभा चुनाव के दौरान यहां सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। 44 जिलों में से पांच जिलों का प्रभार भी यूपी के नेताओं पूर्व गन्ना विकास मंत्री और प्रदेश उपाध्यक्ष रह चुके सुरेश राणा को कोलकाता उत्तर की जिम्मेदारी दी गई है। इससे पहले वे हरियाणा विधानसभा चुनाव में भी पार्टी के लिए अहम सीटों पर काम कर चुके हैं। राज्य के 44 जिलों में से पांच जिलों का प्रभार भी यूपी के नेताओं के पास है। इनमें राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’, राज्यमंत्री दिनेश खटीक, संजय गंगवार, पूर्व सांसद अजय मिश्र टेनी और सुब्रत पाठक शामिल हैं। सुब्रत पाठक को हुगली जिले की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जहां की सात विधानसभा सीटों पर फिलहाल भाजपा का कोई विधायक नहीं है, हालांकि 2019 के लोकसभा चुनाव में यहां से भाजपा सांसद जीत दर्ज कर चुके हैं।पूर्व मंत्री स्वाति सिंह को कोलकाता दक्षिण की बिहाला सीट, उपेंद्र तिवारी को हावड़ा टाउन की संकरेल सीट और आनंद शुक्ला को हाबरा सीट का दायित्व दिया गया है। वहीं मेरठ-गाजियाबाद क्षेत्र से एमएलसी धर्मेंद्र भारद्वाज बैरकपुर जिले की जगतदल विधानसभा सीट और कानपुर से एमएलसी अरुण पाठक नईहाटी सीट पर कैंप किए हुए हैं। इसके अतिरिक्त जिला, क्षेत्र और प्रदेश स्तर के संगठनात्मक पदाधिकारियों को भी चुनावी रणनीति के तहत पश्चिम बंगाल भेजा गया है।