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सौरभ भारद्वाज की विवादित टिप्पणी: आखिर LG के लिए ऐसी कठोर कामना क्यों?

नई दिल्ली दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक सौरभ भारद्वाज एलजी वीके सक्सेना पर भगवान के प्रकोप और उन्हें पीड़ा मिलने की कामना कर रहे हैं। दिल्ली के पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने आप सरकार को पंगु बनाने का आरोप लगाते हुए कहा है कि जानबूझकर ऐसे अधिकारियों की तैनाती की गई जिससे कामकाज में बाधा आए। उन्होंने भाजपा और पीएम मोदी पर भी निशाना साधा है। दरअसल, सौरभ भारद्वाज की यह प्रतिक्रिया उस घटनाक्रम पर आई है जिसके तहत जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने दिल्ली जल बोर्ड के 4 अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है। आप नेता का कहना है कि उनकी सरकार से जो अधिकार छीन लिए गए थे उसका इस्तेमाल अब भाजपा सरकार कैसे कर रही है।   'ईश्वर से मेरी प्रार्थना' शीर्षक के साथ एक पोस्ट में सौरभ भारद्वाज ने कहा कि पिछले दस लंबे वर्षों से दिल्ली की AAP सरकार को जानबूझकर पंगु बना दिया गया। एक चुनी हुई राज्य सरकार की बुनियादी और जायज शक्तियों को छीनकर मोदी प्रशासन ने गवर्नेंस को एक संघर्ष में बदल दिया। उन्होंने कहा, ‘BJP और उसकी केंद्र सरकार ने बार बार यह तर्क दिया कि चूंकि दिल्ली एक राजधानी है इसलिए अधिकारियों के ट्रांसफर की शक्ति राज्य सरकार को नहीं दी जा सकती। उन्होंने चुनी हुई सरकार के प्रतिनिधियों के लिए भ्रष्ट या लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक ऐक्शन लेना असंभव बना दिया।’ 'सुप्रीम कोर्ट ने अधिकार लौटाए तो कानून बनाकर छीना' भारद्वाज ने कहा कि जब मई 2023 में सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच ने न्यायपूर्ण तरीके से ये शक्तियां दिल्ली सरकार को लौटा दी थीं तब उन्हें एक अनैतिक और असंवैधानिक कानून के जरिए फिर से छीन लिया गया। केंद्र सरकार ने मतदाताओं की आवाज को दबा दिया। उन्होंने पूछा कि आज आज उसी कानून के रहते एक मंत्री अधिकारियों का ट्रांसफर और सस्पेंशन कैसे कर सकता है? 'भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता को संरक्षण' भारद्वाज ने कहा कि एजी साब ने सिस्टेमैटिक तरीके से अकुशल और लापरवाह अधिकारियों को महत्वपूर्ण विभागों में तैनात किया था। भ्रष्टाचार और खुलेआम अनुशासनहीनता की अनगिनत शिकायतों के बावजूद उन अधिकारियों को LG द्वारा संरक्षण दिया गया और वे संवेदनशील पदों पर बने रहे। यह एक क्रूर विडंबना है कि मंत्रियों को एक चपरासी तक का तबादला करने की अनुमति नहीं दी गई फिर भी उनसे हर दिन डिलीवरी के बारे में सवाल पूछे गए। जानबूझकर ऐसी बाधाएं पैदा कीं जिससे गरीबों को कष्ट: भारद्वाज आप नेता ने पीएम पर निशाना साधाते हुए कहा, ‘यह श्री नरेंद्र मोदी के असली चेहरे और उनके गवर्नेंस के स्टाइल को उजागर करता है। यह एक ऐसे नेता को उजागर करता है जो राजनीतिक लाभ के लिए अपने ही देश के लोगों को दंडित करने के लिए तैयार है। इस प्रशासन ने जानबूझकर ऐसी बाधाएं पैदा कीं जिससे लाखों गरीब निवासियों को भारी कष्ट झेलना पड़ा। CS नरेश कुमार और हेल्थ सेक्रेटरी एसबी दीपक कुमार जैसे अधिकारियों की हरकतों ने (LG विनय सक्सेना के संरक्षण में) सबसे कमजोर वर्ग के लिए बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं का गला घोंट दिया। उन्होंने कैंसर के मरीजों या डायलिसिस पर निर्भर लोगों तक को नहीं बख्शा। यह पूरी तरह से संवेदनहीन और निर्दयी है।’ भारद्वाज ने कहा- भगवान के प्रकोप का सामना करना पड़े भारद्वाज ने एलजी और अन्य अधिकारियों को पीड़ा मिलने की प्रार्थना की। उन्होंने लिखा, 'मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि गरीबों की इस पीड़ा को पैदा करने के लिए जिम्मेदार सभी लोग (एलजी दिल्ली, नरेश कुमार और एसबी दीपक कुमार और अन्य) भगवान के प्रकोप का सामना करें और उन्हें उनकी इस क्रूरता के लिए वैसी ही पीड़ा मिले।'  

भाजपा संगठन में फेरबदल, 13 जिलों के लिए युवा अध्यक्षों की नई तैनाती

रायपुर  छत्तीसगढ़ भाजपा संगठन में बड़े स्तर पर नियुक्तियों का दौर जारी है। इसी कड़ी में भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के 13 जिलों के जिलाध्यक्षों की सूची आधिकारिक रूप से जारी कर दी गई है। लंबे समय से इस सूची का इंतजार किया जा रहा था, जो अब जाकर समाप्त हुआ है। भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद संगठनात्मक मजबूती की दिशा में यह एक अहम कदम माना जा रहा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, यह नियुक्तियां संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक सक्रिय व मजबूत बनाने के उद्देश्य से की गई हैं। प्रदेश नेतृत्व की अनुशंसा पर हुआ फैसला छत्तीसगढ़ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंहदेव की अनुशंसा पर यह नियुक्तियां फाइनल की गई हैं। पार्टी ने न केवल भाजयुमो बल्कि विभिन्न मोर्चों में भी संगठन विस्तार को गति दी है। सोशल मीडिया के जरिए जारी हुई सूची भाजपा की ओर से इन सभी नियुक्तियों की सूची आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा की गई है। सूची जारी होते ही राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है और कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। पार्टी का मानना है कि नए युवा चेहरों को जिम्मेदारी सौंपने से आने वाले समय में संगठन को नई ऊर्जा मिलेगी और आगामी चुनावों की तैयारियों को मजबूती मिलेगी।

जिसका डर था वही हुआ: अजित पवार के प्रस्थान के बाद NCP में उठे नए कदम, BJP भी सतर्क

मुंबई   महाराष्ट्र की पॉलिटिक्स में जिसका डर था वही होता दिख रहा है. अजित पवार के निधन का अब उनकी पार्टी में साइड इफेक्ट दिखने लगा है. अजित पवार के जाते ही एनसीपी में दो फाड़ हो गया है. सूत्रों का कहना है कि अजित पवार की एनसीपी अब दो गुटों में बंट गई है. एक ग्रुप महायुति में साथ रहना चाहता है तो दूसरा शरद पवार के साथ जाना चाहते है. एनसीपी में इस बिखराव से भाजपा की टेंशन बढ़ गई है. अजित पवार गुरुवार को पंचतत्व में विलीन हुए. दरअसल, महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर हो गया है. डिप्टी सीएम अजित पवार का बुधवार यानी 28 जनवरी 2026 को बारामती में प्लेन क्रैश में निधन हो गया. अजित पवार के जाने के बाद उनकी एनसीपी गुट में खलबली मच गई है. सूत्रों के मुताबिक, अजित पवार गुट अब दो हिस्सों में बंट गया है. एक ग्रुप महायुति (बीजेपी-शिवसेना) के साथ रहना चाहता है, जबकि दूसरा ग्रुप शरद पवार के साथ वापस जाना चाहता है. यही वो डर था जो कई लोगों को सता रहा था कि अजित पवार के बिना उनका गुट बिखर सकता है. एनसीपी का होने वाला था मर्जर सूत्रों का कहना है कि अजित पवार के निधन से पहले खबरें थीं कि शरद पवार गुट और अजित पावर गुट फरवरी की दूसरे हफ्ते में साथ आने का ऐलान कर सकता है. सूत्रों का कहना है कि साथ आने की तारीख भी तय हो चुकी थी. आठ फरवरी को एनसीपी का मर्जर होना था. यह खबर तब से शुरू हो चुकी थी, जब अजित पवार गुट और शरद पवार गुट ने पुणे और पिंपरी चिंचवड़ के म्युनिसिपल चुनाव साथ में लड़ा. भाजपा की टेंशन क्यों बढ़ी? सूत्रों का कहना है कि दोनों के साथ आने की पूरी तैयारियां भी हो चुकी थी. मगर अचानक अजित पवार के निधन के बाद सब कुछ एक बार फिर बिखर गया है. अब सवाल है कि आखिर भाजपा क्या चाहती है? सूत्रों का कहना है कि बीजेपी चाहती है कि अजित पवार गुट उनके यानी महायुति में बना रहे. क्योंकि भाजपा को लगता है कि अगर अजित पवार गुट महायुति से बाहर होता है तो एकनाथ शिंदे की शिवसेना का बल बढ़ जाएगा. कौन होगा अजित वाली एनसीपी का चीफ? बहरहाल, अजित पवार के निधन के बाद शरद पवार गुट को मौका मिला है. कई लोग मानते हैं कि अब दोनों गुटों का मर्जर हो सकता है, क्योंकि अजित पवार की आखिरी इच्छा यही थी. लेकिन फैसला आसान नहीं है. अभी तो यह तय होना है कि आखिर अजित पवार वाली एनसीपी का लीडर बनेगा? अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है. हालांकि, एनसीपी चीफ के लिए प्रफुल पटेल, सुनील तटकरे का भी नाम चल रहा है. फिलहाल, अजित पवार वाली एनसीपी में लीडरशिप वैक्यूम है, और पार्टी को जल्द फैसला लेना होगा.

बंगाल चुनावी विवाद: सुवेंदु अधिकारी ने बताया वोटर वेरिफिकेशन में गड़बड़ी का प्रयास

  कोलकाता   पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बीच विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया है कि अधिकारियों की तरफ से वेरिफिकेशन प्रोसेस में हेराफेरी करने के गैर-कानूनी आदेश जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह टीएमसी और प्रशासन के बीच गठजोड़ को दर्शाता है। नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा, "एसआईआर प्रक्रिया में चौंकाने और बेशर्म 'टीएमसी-ममता प्रशासन का गठजोड़' सामने आया। साउथ 24 परगना के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (एडीएम) की ओर से भेजा गया एक कथित व्हाट्सएप मैसेज चुनावी लिस्ट के चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के पीछे की सच्चाई को उजागर करता है।"  सुवेंदु अधिकारी ने कहा, "एडीएम की तरफ से अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपनी टीम को बताएं कि अभी किसी भी हालत में 'नॉट वेरिफाइड' ऑप्शन पर क्लिक न करें। किसी भी कन्फ्यूजन की स्थिति में कृपया मेरे साथ या ओसी इलेक्शन के साथ मामला उठाएं। हर हाल में प्रतिदिन 3000 वेरिफिकेशन का टारगेट पूरा करना है।" भाजपा नेता ने कहा कि यह वेरिफिकेशन प्रक्रिया में हेराफेरी करने का सीधा और गैर-कानूनी आदेश है। अधिकारियों से कहा जा रहा है कि वे जानबूझकर 'नॉट वेरिफाइड' मार्क न करें, भले ही ठीक से वेरिफिकेशन न किया गया हो। उन्होंने कहा, "यह प्रशासनिक अधिकार का खुला दुरुपयोग है, जिसे तृणमूल कांग्रेस के इशारे पर अयोग्य मतदाताओं और फर्जी एंट्रीज को बचाने व छिपाने के लिए किया जा रहा है, जिन्हें टीएमसी की वोटबैंक की राजनीति को बनाए रखने के लिए व्यवस्थित तरीके से लिस्ट में जोड़ा गया है।" उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी सरकार भारत के चुनाव आयोग के साफ और पारदर्शी वोटर लिस्ट के आदेश को खराब करने के लिए जिला प्रशासन का हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रही है। टीएमसी डरी हुई है कि असली एसआईआर उनके लंबे समय से चल रहे चुनावी धोखाधड़ी को उजागर कर देगा। सुवेंदु अधिकारी ने चुनाव आयोग से अनुरोध करते हुए कहा कि वह इस तरह के अनौपचारिक प्रशासनिक दबाव के तरीकों के इस पैटर्न का तुरंत संज्ञान ले और एडीएम और इन गैर-कानूनी निर्देशों को जारी करने या उनका पालन करने में शामिल अन्य अधिकारियों की भूमिका की उच्च-स्तरीय जांच शुरू करे। उन्होंने यह भी मांग की कि सत्ताधारी पार्टी के इशारे पर लोकतंत्र को कमजोर करने वाले सभी दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाए।

ममता बनर्जी vs भाजपा — नया सर्वे संकेत दे रहा क्या? पश्चिम बंगाल का चुनावी रुझान

कलकत्ता इंडिया टुडे और सी वोटर के द्वारा कराए गए हालिया सर्वे मूड ऑफ द नेशन (MOTN) के अनुसार, अगर आज की तारीख में लोकसभा चुनाव होते हैं तो चुनावी राज्य पश्चिम बंगाल में फिर से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) अपना 2024 का पुराना प्रदर्शन दोहरा सकती है और जीती हुई लगभग सभी सीटें बरकरार रख सकती है। यह दावा इंडिया टुडे–सी वोटर के ‘मूड ऑफ द नेशन’ (MOTN) के ताजा सर्वे में किया गया है। 2024 के लोकसभा चुनावों में दीदी यामी ममता बनर्जी की पार्टी TMC ने पश्चिम बंगाल की कुल 42 में से 29 लोकसभा सीटें जीतकर 2019 के अपने प्रदर्शन को और बेहतर बनाया था, जबकि बीजेपी 12 सीटों के साथ काफी पीछे दूसरे स्थान पर रही थी। नवीनतम 2026 के MOTN सर्वे के मुताबिक, TMC 28 सीटें, जबकि BJP 14 सीटें जीत सकती है। यानी TMC की एक सीट कम हो सकती है, जबकि भाजपा को 2 सीटों का फायदा मिलने का अनुमान है। भाजपा के वोट शेयर में बढ़त हालांकि, सर्वे के अनुसार भाजपा के नेतृत्व वाले NDA का वोट शेयर 39% से बढ़कर 42% हो सकता है। यह करीब 3 फीसदी की बढ़त है, जो भाजपा के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। बावजूद इसके सर्वे यह भी साफ करता है कि भाजपा बंगाल में कोई बड़ा उलटफेर करती नहीं दिख रही और भद्रलोक पर ममता बनर्जी और उनकी पार्टी TMC की पकड़ अब भी मजबूत बनी हुई है। बंगाल में मुकाबला अब पूरी तरह द्विध्रुवीय सी वोटर के संस्थापक निदेशक यशवंत देशमुख के अनुसार, “पश्चिम बंगाल अब पूरी तरह TMC और BJP के बीच द्विध्रुवीय मुकाबले की ओर बढ़ रहा है। और हाल के दिनों में राज्य में राजनीतिक ध्रुवीकरण काफी तेज हुआ है।” फरवरी 2024 में हुए सर्वे के मुताबिक, TMC 22 सीटें जीत रही थीं, जबकि भाजपा को 19 सीटें मिल रही थीं। इसके बाद उसी साल अगस्त 2024 में हुए सर्वे के मुताबिक, TMC को 32 सीटें और BJP को 8 सीटें, जबकि कांग्रेस को 2 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया था। अब ताजा सर्वे में तस्वीर कुछ बदली है, लेकिन सत्ता की धुरी अब भी ममता बनर्जी के इर्द-गिर्द ही घूमती दिख रही है। चुनाव से पहले बड़ा संकेत यह सर्वे ऐसे समय सामने आया है, जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सिर्फ दो महीने बचे हैं। ऐसे में इसे जनता के मौजूदा राजनीतिक मूड का संकेत माना जा रहा है, हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि चुनावी नतीजे कई कारकों पर निर्भर करेंगे। ताजा सर्वे संकेत देता है कि तृणमूल कांग्रेस बंगाल में अब भी सबसे मजबूत ताकत है, वहीं भाजपा धीरे-धीरे अपना आधार बढ़ा रही है लेकिन सत्ता में बदलाव की संभावना फिलहाल कम दिखती है। अगर बंगला जानमानस का मूड ऐसा ही बना रहा तो इस राज्य में कमल फूल खिलाने और भगवा झंडा लहराने का भाजपा का सपना अधूरा रह सकता है।

कितने वादे हुए पूरे? बजट से पहले डिंपल यादव ने सरकार को घेरा

नई दिल्ली संसद के बजट सत्र और आर्थिक सर्वेक्षण को लेकर विपक्षी दलों के नेताओं ने सरकार से आम जनता के हितों पर ध्यान देने की मांग की है। समाजवादी पार्टी और बीजू जनता दल के सांसदों ने कहा कि बजट और सर्वे केवल आंकड़ों तक सीमित न रहें, बल्कि जमीन पर लोगों को मिलने वाले लाभों की सच्ची तस्वीर सामने आए। समाजवादी पार्टी (सपा) की सांसद डिंपल यादव ने कहा कि बजट में इस बात को प्रमुखता से दिखाया जाना चाहिए कि आम लोगों को कौन-कौन सी सुविधाएं मिल रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह सराहनीय है कि देश की एक महिला वित्त मंत्री बजट पेश कर रही हैं, लेकिन इससे ज्यादा जरूरी यह है कि जनता को वास्तविक लाभ क्या मिल रहा है। डिंपल यादव ने सवाल उठाया कि पिछले बजटों में किए गए वादे कितने पूरे हुए हैं और उन योजनाओं का असर लोगों की जिंदगी में कितना दिख रहा है। समाजवादी पार्टी के ही सांसद जियाउर रहमान बर्क ने भी इसी तरह की बात दोहराई। उन्होंने कहा कि महिला वित्त मंत्री द्वारा बजट पेश किया जाना खुशी की बात है, लेकिन असली मुद्दा बजट की सामग्री है। उन्होंने सवाल किया कि इस बजट में युवाओं, महिलाओं, किसानों, गरीबों और मजदूरों के लिए क्या खास है। उनके मुताबिक, बजट का असली मूल्यांकन इस बात से होगा कि वह आम लोगों के हितों को कितनी मजबूती से आगे बढ़ाता है। उधर, राज्यसभा सदस्य और बीजू जनता दल के नेता सस्मित पात्रा ने संसद में पेश हो रहे आर्थिक सर्वेक्षण को लेकर अपनी उम्मीदें जाहिर कीं। उन्होंने कहा कि यह सर्वे देश की वास्तविक आर्थिक स्थिति को ईमानदारी से सामने रखे और मौजूदा चुनौतियों को नजरअंदाज न करे। सस्मित पात्रा ने महंगाई, बेरोजगारी, डॉलर के मुकाबले रुपए के अवमूल्यन, पूंजी निवेश से जुड़ी दिक्कतों और वित्तीय ढांचे से संबंधित समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि इन सभी मुद्दों पर स्पष्ट और सच्ची तस्वीर पेश की जानी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से गरमाई सियासत: भाजपा ने विपक्ष पर साधा तीखा निशाना

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसदों ने विश्‍वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों पर रोक लगाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि यह निर्णय भारत की सांस्कृतिक एकता और सनातन मूल्यों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण है। इसी बीच, सांसद निशिकांत दुबे ने विपक्षी दलों पर निशाना साधा है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि सनातन को बांटने वाले यूजीसी के नियम पर सर्वोच्च न्यायालय की ओर से रोक लगाए जाने पर हार्दिक आभार। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "यह निर्णय भारत की सांस्कृतिक एकता और सनातन मूल्यों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण है। मोदी सरकार की पहचान सबका साथ, सबका विकास और सनातन की अखंड एकता की है।" भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने 'एक्स' पर लिखा, "यूजीसी पर गाली देने वाले सभी ज्ञानी, पिछले 2 दिनों से संसद जा रहा हूं। किसी राजनीतिक दल के किसी सदस्य ने इस पर चर्चा तक करना मुनासिब नहीं समझा? उल्टा जिस सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में ईडब्ल्यूएस को 10 प्रतिशत आरक्षण देकर गरीब की सुध ली, उसी को गाली।" निशिकांत दुबे ने आगे कहा, "मैं दोबारा आपसे करबद्ध निवेदन करता हूं कि मोदी जी पर भरोसा रखिए, संविधान की धारा 14 और 15 के तहत ही देश के कानून चलेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने वही किया जो मैंने कहा।" सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी किया। इसके साथ ही, शीर्ष अदालत ने यूजीसी के नए रेगुलेशन पर रोक लगाई और स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि तब तक 2012 के यूजीसी रेगुलेशन ही लागू रहेंगे। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इस मामले में सुनवाई की। चीफ जस्टिस ने कहा कि रेगुलेशन में इस्तेमाल किए गए शब्दों से यह संकेत मिलता है कि इसके दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं, जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने टिप्पणी की कि अदालत समाज में एक निष्पक्ष और समावेशी माहौल बनाने पर विचार कर रही है।

अजित पवार की मौत पर उठे सवाल: संजय राउत बोले– सहानुभूति नहीं, सच्चाई चाहिए

मुंबई महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और कद्दावर नेता अजित पवार का बुधवार को बारामती एयरपोर्ट पर एक विमान दुर्घटना में निधन हो गया। वह जिला परिषद चुनावों के लिए एक सार्वजनिक रैली में शामिल होने के लिए बारामती जा रहे थे। यह खबर सामने आते ही न केवल महाराष्ट्र बल्कि पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। आज बारामती के विद्या प्रतिष्ठान मैदान में उनका अंतिम संस्कार किया गया, जहां उन्हें अंतिम विदाई दी गई। इस बीच शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने घटना की जांच की मांग की है। संजय राउत की मांग: सिर्फ संवेदनाएं काफी नहीं संजय राउत ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए जांच की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि अजित पवार जैसे बड़े और लोकप्रिय नेता की मौत महज एक 'हादसा' कहकर नहीं छोड़ी जा सकती। उन्होंने मांग की कि इस दुर्घटना की पूरी और पारदर्शी जांच होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह विमान की तकनीकी खराबी थी, रडार की विफलता थी या एयरपोर्ट मैनेजमेंट की कोई चूक? उन्होंने कहा- सच्चाई जनता के सामने आनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोका जा सके। राउत ने अहमदाबाद में हुए पिछले विमान हादसों का जिक्र करते हुए पूछा कि क्या उन जांचों से कभी कुछ हासिल हुआ? उन्होंने जोर देकर कहा कि जड़ तक जाना जरूरी है। संजय राउत ने कहा- अजित पवार महाराष्ट्र के एक कद्दावर और लोकप्रिय नेता थे। पूरा देश सदमे में है। सिर्फ संवेदना जताने से क्या होगा? अगर यह तकनीकी खराबी थी, तो हमें इसका मूल कारण जानना ही होगा। प्रशासन और पुलिस इस मामले की गंभीरता से जांच कर रहे हैं। ब्लैक बॉक्स बरामद जांच अधिकारियों ने दुर्घटना स्थल से वॉयस रिकॉर्डर और फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (ब्लैक बॉक्स) बरामद कर लिया है। इससे विमान के अंतिम क्षणों की सटीक जानकारी मिल सकेगी। पुणे ग्रामीण पुलिस ने बारामती तालुका पुलिस स्टेशन में आकस्मिक मृत्यु रिपोर्ट (ADR) दर्ज की है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और अन्य तकनीकी टीमें इस बात की जांच कर रही हैं कि क्या दुर्घटना मानवीय चूक के कारण हुई या किसी यांत्रिक विफलता के कारण। अजित पवार का जाना महाराष्ट्र की राजनीति में एक ऐसे शून्य को छोड़ गया है जिसे भरना मुश्किल होगा। उनके राजनीतिक करियर में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन उनकी प्रशासनिक पकड़ और जमीनी लोकप्रियता हमेशा बनी रही।  

थरूर बोले ‘Thank You Rahul’ — कांग्रेस में सब ठीक? मीटिंग के बाद बदले रिश्तों के संकेत

नई दिल्ली कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने उन अटकलों पर विराम लगाने की कोशिश की हैं जिनमें उनकी पार्टी आलाकमान के साथ नाराजगी की बात कही जा रही थी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने गुरुवार को पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की है। इस मुलाकात के बाद थरूर ने कहा है कि पार्टी में सब कुछ ठीक है और वे एक साथ आगे बढ़ रहे हैं। शशि थरूर ने राहुल गांधी और खरगे के प्रति आभार भी जताया है।   इससे पहले शशि थरूर, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे की मुलाकात संसद भवन स्थित खरगे के कार्यालय में हुई। शशि थरूर ने इस मुलाकात को सार्थक और सकारात्मक करार दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में थरूर ने इस मुलाकात की एक तस्वीर शेयर की और लिखा, “आज कई विषयों पर गर्मजोशी भरी और रचनात्मक चर्चा के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे जी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जी का धन्यवाद। हम सभी भारत के लोगों की सेवा में आगे बढ़ रहे हैं और इस मामले में हम साथ ही हैं।” आलाकमान से नाराजगी की खबरें इस बैठक के बाद शशि थरूर ने संवाददाताओं से यह भी कहा है कि सब कुछ ठीक है और वे सब एकसाथ आगे बढ़ रहे हैं। वहीं मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी दावेदारी से इनकार करते हुए शशि थरूर ने कहा कि यह उनके लिए कभी मुद्दा नहीं रहा। इससे पहले कांग्रेस पार्टी की कई बैठकों में थरूर के गायब रहने के बाद इस तरह की चर्चाएं हैं कि वे कांग्रेस आलाकमान से नाराज हैं। इस बीच बीते दिनों रिपोर्ट्स में यह दावा भी किया गया कि केरल के कोच्चि में हाल ही में एक कार्यक्रम में राहुल गांधी द्वारा 'नजरअंदाज' किए जाने के कारण शशि थरूर पार्टी नेतृत्व से नाराज थे। थरूर ने दी थी सफाई हालांकि इन खबरों पर थरूर से स्पष्ट तौर पर कुछ नहीं कहा है। उन्होंने हालिया बैठक में ना पहुंचने को लेकर कहा था कि दिल्ली में हुई कांग्रेस की उच्च स्तरीय बैठक में उनकी अनुपस्थिति महज समय ना मिल पाने की बात थी। पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए थरूर ने यह भी कहा था कि उनका इरादा अपने विचारों के बारे में पार्टी नेतृत्व से सीधे बात करने का है और बुधवार से शुरू हो रहा संसद सत्र इन चर्चाओं के लिए बिल्कुल सही समय होगा। देर से मिला आमंत्रण? शशि थरूर के मुताबिक, इस बैठक का आमंत्रण इतनी देर से आया कि उनके पास अपने पूर्व के कार्यक्रम को बदलने का कोई विकल्प नहीं था। उन्होंने बताया, "मुझे रणनीतिक बैठक में एक-दो दिन पहले ही आमंत्रित किया गया था। तक मैं दुबई से वापसी के लिए विमान का टिकट बुक करा चुका था।"  

महाराष्ट्र राजनीति में बड़ा बदलाव संभव, सुनेत्रा पवार को डिप्टी CM बनाने का प्रस्ताव

मुंबई  महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का प्लेन क्रैश में निधन के बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार राज्य की डिप्टी सीएम बन सकती हैं. प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल, धनंजय मुंडे ने सुनेत्रा से मुलाकात की. सूत्रों के मुताबिक, सुनेत्रा को डिप्टी सीएम बनाए जाने का प्रस्ताव दिया जाएगा।  महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार में उपमुख्यमंत्री अजीत पवार का बारामती में हुए विमान हादसे में निधन हो गया. वहीं अजीत पवार के निधन के बाद उपमुख्यमंत्री का पद खाली हो गया है, जिसके लिए नए नाम की चर्चा भी महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में शुरू हो गई है और चर्चा में सबसे पहला नाम अजीत पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार का है. अटकलें लगाई जा रही हैं कि सुनेत्रा पवार को फडणवीस सरकार में जगह मिल सकती है. आइए सुनेत्रा पवार के बारे में विस्तार से जानते हैं… राजनीतिक परिवार में जन्मी, राजनीतिक परिवार की बहू बता दें कि सुनेत्रा पवार पूर्व राज्य मंत्री और लोकसभा सांसद पद्मसिंह पाटिल की बेटी हैं और 1985 में उनकी शादी अजीत पवार से हुई थी. सुनेत्रा के 2 बेटे पार्थ और जय पवार हैं, लेकिन राजनीतिक परिवार में जन्मी और राजनीतिक परिवार की बहू होने के नाते सुनेत्रा पवार का राजनीति से खास कनेक्शन है और वह यह है कि सुनेत्रा अपने दिवंगत पति अजीत पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) से महाराष्ट्र की राज्यसभा सांसद भी हैं. वे प्रफुल्ल पटेल के बाद साल 2024 में निर्विरोध राज्यसभा सांसद चुनी गई थीं. लोकसभा चुनाव हारी थीं, राज्यसभा सांसद चुनी गई थीं बता दें कि सुनेत्रा ने साल 2024 का लोकसभा चुनाव बारामती सीट से अपनी ननद सुप्रिया सुले के खिलाफ लड़ा था, जिसमें वे हार गई थीं. राजनेता होने के अलावा सुनेत्रा पवार बारामती टेक्सटाइल कंपनी की अध्यक्ष हैं. एनवायरनमेंटल फोरम ऑफ इंडिया (EFOI) की CEO हैं, जिसकी नींव उन्होंने ही साल 2010 में रखी थी. वे शरद पवार के मशहूर शिक्षण संस्थान ‘विद्या प्रतिष्ठान’ की ट्रस्ट भी हैं. को-ऑपरेटिव बैंक मामले में आरोपी भी लगे थे सुनेत्रा पर सुनेत्रा पवार साल 2017 से सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी में सीनेट की मेंबर भी हैं. साल 2011 से सुनेत्रा में विश्व उद्यमिता मंच की थिंक टैंक मेंबर भी हैं. सुनेत्रा को ग्रीन वॉरियर अवार्ड भी मिल चुका है. इतनी अचीवमेंट के बाद सुनेत्रा कानूनी पचड़ों में भी फंसी थीं. महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक मामले में सुनेत्रा पवार पर भी आरोप लगे थे, लेकिन आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने उन्हें क्लीन चिट दे दी थी.