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दिग्विजय सिंह ने कहा: अयोध्या जाने की आवश्यकता नहीं, ‘अहं ब्रह्मास्मि’ का जिक्र किया

भोपाल  मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह एक बार फिर चर्चा में हैं. प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों ने दिग्विजय सिंह से राम मंदिर जाने को लेकर सवाल किया था. इसपर कांग्रेस नेता ने राम मंदिर जाने से इनकार कर दिया. दिग्विजय सिंह ने कहा कि मुझे कहीं जाने की जरूरत नहीं है. ‘शंकराचार्य का अद्वैत वेदांत का पाठ करवाएंगे’ राम मंदिर जाने के सवाल पर कांग्रेस नेता ये भी कहा कि वे शंकराचार्य का अद्वैत वेदांत का पाठ करवाएंगे. साथ ही प्रवचन भी करवाएंगे. इसमें लिखा है, ‘अहं ब्रह्मास्मि’. मतलब मुझमें ही ब्रह्म है, इसलिए मुझे कहीं और जाने की जरूरत नहीं है. लेकिन सनातन धर्म का पालन करने वाला हूं. ‘कमलनाथ सरकार पुजारियों को वेतनमान दे रही थी’ कांग्रेस नेता ने बीजेपी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ‘उज्जैन में मंदिरों में जो चढ़ावा आ रहा है, वो मंदिरों के रखरखाव में इस्तेमाल नहीं हो रहा है. मंदिरों के रखरखाव का पैसा कलेक्टर, SDM के खाते में जमा होता है, लेकिन अधिकारी साइन नहीं करते हैं. गुना में इसी तरह का मामला सामने आया है. मंदिरों की जमीन स्थापित इष्ट देव की है, ये बात सुप्रीम कोर्ट ने कही है. देवता के नाम दर्ज भूमि नीलाम नहीं हो सकती, लेकिन इसका उल्लंघन एमपी सरकार कर रही है. एमपी में 50 हजार पुजारी है उनके साथ कुठाराघात हो रहा है. वहीं कमलनाथ सरकार पुजारियों का वेतनमान समेत कई सुविधा दे रही थी. सांसद ने कहा- दिग्विजय सनातन समाज से माफी मांगे भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने दिग्विजय सिंह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा- मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम हम सबके आदर्श और श्रृद्धा के केन्द्र हैं। मैं दिग्विजय सिंह से पूछना चाहता हूं अगर अयोध्या में राम मंदिर नहीं जाओगे तो क्या दिल्ली की जामा मस्जिद में जाओगे? क्या मक्का-मदीना में जाओगे। देश की जनता इनके बारे में बहुत कुछ समझती है। इसलिए इनकी पार्टी और उनकी खुद की दुर्गति हो रही है। इस प्रकार के स्टेटमेंट के लिए उनको सनातन समाज से माफी मांगना चाहिए। ‘मैं सनातन धर्म का पालन करने वाला हूं’ दिग्विजय सिंह ने आगे कहा, ‘मैं जब मुख्यमंत्री था, तो मेरे खिलाफ विश्व हिंदू परिषद ने झूठा प्रचार किया था. मुझ पर आरोप लगाते हैं कि मैं मुस्लिम और ईसाई हूं. मैं सनातन धर्म का पालन करने वाला हूं. पुजारियों के साथ गलत हुआ है, तो हम लड़ाई लड़ेंगे. पुजारियों की जमीन कोई नहीं ले सकता है. जब सरकार बदलेगी तब सारी पोल खोलेंगे.  राम मंदिर के लिए दिग्विजय ने दिया था चंदा जनवरी 2021 में दिग्विजय सिंह ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के माध्यम से श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को 1,11,111 रुपए का चेक भेजा था। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री को एक पत्र भी लिखा था। दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में अपील की थी कि राम मंदिर के नाम पर चंदा संग्रह सौहार्दपूर्ण और पारदर्शी माहौल में किया जाए, ताकि समाज में किसी भी प्रकार का तनाव या विभाजन न हो। आस्था के इस विषय में सभी वर्गों की भावनाओं का सम्मान होना चाहिए। दिग्विजय ने चंदे का हिसाब भी मांगा था दिग्विजय सिंह ने पत्र के माध्यम से विश्व हिंदू परिषद द्वारा पूर्व में एकत्र किए गए चंदे का लेखा-जोखा सार्वजनिक करने की मांग भी उठाई थी। उन्होंने कहा था कि चंदे की पारदर्शिता से लोगों का विश्वास और मजबूत होगा। दिग्विजय सिंह का यह कदम उस समय चर्चा में रहा था, जब देशभर में राम मंदिर निर्माण के लिए बड़े पैमाने पर चंदा अभियान चलाया जा रहा था। उनके इस निर्णय को उन्होंने आस्था के सम्मान के साथ-साथ जवाबदेही और पारदर्शिता से जोड़कर बताया था।

ममता बनर्जी के लिए चुनौती: बंगाल में हुमायूं कबीर समेत तीन मुस्लिम नेताओं की सक्रियता

कलकत्ता पश्चिम बंगाल की राजनीति तेजी से गरमा रही है। इसका सबसे बड़ा कारण है कि अगले साल राज्य में विधानसभा चुनाव होना है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए यहां सत्ता बचाने की चुनौती है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (BJP) यहां पहली बार सरकार बनाने तमन्ना लिए बैठी है। इस सबके बीच चुनावी बिसात पर बागी विधायक हुमायूं कबीर ने ममता बनर्जी की दिक्कतें बढ़ा दी है। कबीर के एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन औवेसी और इंडिया सेकुलर फ्रंट (आईएसएफ) के प्रमुख पीरजादा अब्बास सिद्दीकी से संपर्क साधने से राज्य की राजनीति में गरमाहट आ गई है। दूसरी तरफ तो भाजपा ने अपने मजबूत बूथ प्रबंधन से बदलाव की स्थिति बनाने की कोशिशें तेज कर दी हैं। पश्चिम बंगाल में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच लगभग सीधा मुकाबला है। कांग्रेस और तीन दशक तक राज्य में सत्ता पर काबिज रही माकपा और उसके सहयोगी दल हाशिए पर जा चुके हैं। ऐसे में तृणमूल से बाहर निकले हुमायूं तीसरी ताकत के रूप में उभरने की कोशिश में है। हालांकि वह अकेले एक क्षेत्र विशेष तक सीमित है पर यदि उनको औवेसी व पीरजादा का साथ मिला तो कई सीटों पर समीकरण प्रभावित कर सकते हैं। तीन मुस्लिम नेता एक साथ औवेसी ने हाल में बिहार में जो सफलता हासिल की है उससे साफ हुआ है कि मुस्लिम मतदाताओं ने इस पार्टी को स्वीकार करना शुरू कर दिया है। आईएसएफ ने पिछले चुनाव में ही अपनी स्थिति साफ कर दी थी, जब उसने एक सीट जीत ली थी। ऐसे में अगर तीन प्रमुख मुस्लिम नेता एक मंच पर आते हैं तो मुसलमानों के बीच वह अपनी पैठ बढ़ा सकते हैं। ध्रुवीकरण से ममता को नुकसान बंगाल की लगभग 30% मुस्लिम आबादी है। हुमायूं कबीर जिस तरह से माहौल बना रहे हैं उसमें वह अगर मुस्लिम मतों का थोड़ा भी ध्रुवीकरण करने में सफल रहते हैं तो ममता बनर्जी को काफी नुकसान हो सकता है। इसका फायदा भाजपा को मिल सकता है। भाजपा विधायक भी मैदान में डटे भाजपा ने तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भी अपना विस्तार किया है। उसके विधायक मैदान में डटे रहे हैं। भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व पहले से ही आक्रामक और राज्य की मौजूदा स्थितियों में और ज्यादा आक्रामकता दिखाकर ममता बनर्जी की दिक्कतें बढ़ाएगा। पिछली बार भाजपा अपने बूथ प्रबंधन में कमजोर रही थी, इसलिए पार्टी ने इस बार पूरा जोर बूथ प्रबंधन पर लगाया है।

क्या RLM में बढ़ रही है टूट? तीन विधायकों की नितिन नवीन से मुलाकात, उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी से अलग राह

पटना  बिहार की सियासत से जुड़ी बड़ी खबर है। उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा के तीन विधायकों ने दिल्ली जाकर भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की तो दूसरी ओर अपनी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की लिट्टी चोखा पार्टी से किनारा कर लिया। पहले भी रालोमो के भीतर खटपट की खबरें आ चुकी हैं। हालांकि पार्टी नेतृत्व की ओर से हर बार एकजुटता का दावा और किसी की नाराजगी से इनकार किया जाता रहा है। उपेंद्र कुशवाहा पर बेटे दीपक प्रकाश को बिना चुनाव लड़ाए मंत्री बनाने से परिवारवाद के आरोप लग रहे हैं।   बुधवार की शाम पटना में राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा के आवास पर लिट्टी चोखा पार्टी का आयोजन किया गया। इसमें मीडिया जगत और राजनीति की कई हस्तियो ने शिरकत की और लिट्टी चोखा का आनंद लिया। न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक कुशवाहा की पार्टी के तीन विधायक माधव आनंद, रामेश्वर महतो और आलोक सिंह इस पार्टी में शामिल नहीं हुए। इसे लेकर चर्चा का बाजार गर्म रहा पर आधिकारिक रूप से ना किसी ने सवाल पूछा और ना कोई जवाब आया। गुरुवार को अचानक सियासत तब सुलग गई जब माधव आनंद के फेसबुक पर कुछ खास तस्वीरें शेयर की गईं। रालोमो के तीनों विधायक दिल्ली में थे। वे भारतीय जनता पार्टी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ दिखे। इन विधायकों ने नितिन नवीन से ना सिर्फ मुलाकात की बल्कि तस्वीरें शेयर कर देश को इसकी जानकारी भी दी। फेसबुक पोस्ट में माधव आनंद ने लिखा- "आज भारतीय जनता पार्टी के नवनिर्वाचित राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष माननीय श्री नितिन नवीन जी से उनके पदभार ग्रहण के उपरांत औपचारिक एवं शिष्टाचार भेंट कर उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी। इस अवसर पर बाजपट्टी विधानसभा के माननीय विधायक श्री रामेश्वर महतो जी, दिनारा विधानसभा से माननीय विधायक श्री आलोक सिंह जी भी उपस्थित रहे। हम सभी ने उनके नए दायित्व के सफल एवं प्रभावी निर्वहन हेतु शुभेच्छाएँ व्यक्त कीं।" रामेश्वर महतो भी कर चुके हैं फेसबुक पोस्ट रालोमो के चार विधायक हैं जिनमें एक कुशवाहा की पत्नी हैं। एक साथ तीन विधायकों की गैरहाजिरी रही। सोशल मीडिया पोस्ट बहुत सामान्य है पर इसकी टाइमिंग को लेकर बड़े कयास लगाए जा रहे हैं। परिवारवाद का आरोप झेल रहे उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी में ऑल इज वेल है या खटपट, यह सवाल सियासी गलियारे में हिलोरें ले रहा है। इससे पहले विधायक रामेश्वर महतो भी फेसबुक पर अपने दिल की बात बता चुके हैं। उन्होंने किसी का नाम लिए बगैर शीर्ष नेतृत्व की नीयत और नीति पर सवाल उठाया था।  

फैक्ट्री स्थापना की रफ्तार पर राहुल गांधी की तारीफ, मंत्री वैष्णव का जवाब— ‘धन्यवाद’

नई दिल्ली  कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के बीच हल्की नोक-झोंक सामने आई है। लोकसभा नेता प्रतिपक्ष सोशल मीडिया पर किए एक पोस्ट में कर्नाटक सरकार की तारीफ की थी। उनकी यह तारीफ आईफोन निर्माता कंपनी फॉक्सकॉन द्वारा तेजी से लगाई गई फैक्ट्री और केवल 9 महीनों में करीब 30 हजार कर्मचारियों के भर्ती के संदर्भ में थी। इसमें से 80 फीसदी महिलाएं हैं। हालांकि, राहुल गांधी की इस तारीफ को केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मेक इन इंडिया की तारीफ बताते हुए धन्यवाद कह दिया।   राहुल गांधी के फेसबुक पोस्ट को रिपोस्ट करते हुए केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक्स पर इस उपलब्धि का श्रेय केंद्र की मोदी सरकार को दिया। उन्होंने लिखा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया कार्यक्रम की सफलता को स्वीकार करने के लिए राहुल गांधी का धन्यवाद करते हैं। उन्होंने अपनी पोस्ट में यह भी स्वीकार किया है कि भारत एक उत्पादक अर्थव्यवस्था बन रहा है।" वैष्णव ने कहा कि मेक इन इंडिया के जरिए देश की निर्माण क्षमता मजबूत हुई है और भारत वैश्विक स्तर पर लगातार उत्पादन का केंद्र बनता जा रहा है। क्या कहा था गांधी ने? कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोमवार को फेसबुक पर एक रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए कर्नाटक सरकार की तारीफ की थी। उन्होंने लिखा, "सिर्फ आठ-नौ महीनों में 30 हजार कर्मचारियों की भर्ती, यह भारत में अब तक का सबसे तेज फैक्ट्री रैंप अप है।" अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए राहुल ने लिखा, "यह सिर्फ आंकड़े नहीं है, यह रोजगार को बढ़ाने के लिए एक परिवर्तनकारी कदम है। इस यूनिट को बड़े पैमाने पर महिलाओं द्वारा संचालित किया जा रहा है। यह उपलब्धि इसे और भी ज्यादा खास बनाती है। कई युवतियों के लिए यह उनकी पहली नौकरी है। कर्नाटक एक ऐसा इकोसिस्टम बना रहा है, जहां मैन्यूफैक्चरिंग इस स्तर और रफ्तार के साथ आगे बढ़ रही है।" गांधी ने कहा, "यही वह भारत है, जिसे हम बनाना चाहते हैं गरिमा के साथ सभी के लिए नौकरी का अवसर।" गौरतलब है कि ताइवान स्थित फॉक्सकॉन एप्पल के उपकरणों की कॉन्ट्रेक्ट मैन्युफैक्चरर है। भारत में बड़े पैमाने पर इसका प्लांट लगाया गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह फैक्ट्री एप्पल की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वह चीन पर अपनी निर्भरता को कम करना चाहती है।

सांसद कंगना रनोट को लेकर मंडी में सियासी बवाल, युवा कांग्रेस ने चंदा अभियान चलाकर किया विरोध प्रदर्शन

मंडी हिमाचल प्रदेश युवा कांग्रेस ने अपने 90 दिवसीय एजेंडे के तहत शनिवार को मंडी में सांसद कंगना रनोट के कथित बयानों के विरोध में प्रदर्शन किया। इस दौरान युवा कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सांसद कंगना रनोट के निजी खर्चों को पूरा करने के नाम पर चंदा एकत्रित किया और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। यह प्रदर्शन युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव एवं हिमाचल प्रदेश के सह प्रभारी ज्योतिष एचएम के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम में जिला युवा कांग्रेस अध्यक्ष निखिल ठाकुर और प्रदेश उपाध्यक्ष चंद्रमणि कुलेठी भी मौजूद रहे। ज्योतिष एचएम ने बताया कि सांसद कंगना रनोट द्वारा हाल ही में दिए गए उस बयान के जवाब में यह चंदा अभियान शुरू किया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि सांसद के तौर पर मिलने वाले वेतन से उनके स्टाफ का खर्च भी पूरा नहीं हो पाता। कार्यक्रम के तहत युवा कांग्रेस ने मंडी शहर में रोष रैली भी निकाली। रैली के दौरान कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों को जनविरोधी बताते हुए डीसी कार्यालय के बाहर केंद्र सरकार का पुतला दहन किया। युवा कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष चंद्रमणि कुलेठी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार हिमाचल प्रदेश के साथ भेदभाव कर रही है। उन्होंने कहा कि आपदा प्रभावितों को अब तक केंद्र से कोई ठोस मदद नहीं मिली है, जिससे प्रदेश के युवाओं में भारी रोष है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जनहित के मुद्दों पर चुप्पी साधे हुए है और योजनाओं के नाम बदलकर लोगों का ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है। युवा कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि केंद्र सरकार हिमाचल प्रदेश के हितों को नजरअंदाज करना बंद करे और आपदा प्रभावितों सहित आम जनता को तुरंत राहत प्रदान करे।

राजनीति का ‘बैंक बैलेंस’ खेल: बीजेपी सबसे अमीर, कांग्रेस बेहद पीछे, आंकड़े कर देंगे हैरान

नई दिल्ली  दिल्ली में इस साल हुए विधानसभा चुनावों के बाद चुनाव आयोग को राजनीतिक दलों द्वारा सौंपे गए वित्तीय खुलासों में देश की प्रमुख पार्टियों की आर्थिक स्थिति का बड़ा अंतर सामने आया है। इन खुलासों के मुताबिक, केंद्र और अब दिल्ली की सत्ता में काबिज भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पास 6,900 करोड़ रुपये से अधिक की बैंक जमा राशि है। वहीं उसकी मुख्य प्रतिद्वंद्वी और देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस के पास पार्टी मुख्यालय से लेकर राज्य और जिला इकाइयों को मिलाकर मात्र 53 करोड़ रुपये की राशि है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, दिलचस्प तथ्य यह है कि सीमित चुनावी उपस्थिति के बावजूद बहुजन समाज पार्टी (BSP) के खातों में 580 करोड़ रुपये से अधिक की जमा राशि दर्ज की गई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि चुनावी प्रदर्शन और पार्टी की वित्तीय स्थिति के बीच सीधा संबंध हमेशा नहीं होता। अन्य दलों की स्थिति चुनाव आयोग को सौंपे गए विवरण के अनुसार,     आम आदमी पार्टी (AAP) की केंद्रीय इकाई के पास 9.9 करोड़ रुपये     भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (CPM) के पास 4 करोड़ रुपये     भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के पास मात्र 41 लाख रुपये     जबकि BSP के खाते में 580 करोड़ रुपये की राशि दर्ज की गई है। ये आंकड़े भारत निर्वाचन आयोग को दिल्ली विधानसभा चुनाव के बाद विभिन्न दलों द्वारा दिए गए बैंक बैलेंस विवरण पर आधारित हैं। कांग्रेस को 2024-25 में 517 करोड़ रुपये का चंदा इस बीच, 24 अक्टूबर को चुनाव आयोग में दाखिल योगदान विवरण (कंट्रीब्यूशन स्टेटमेंट) में कांग्रेस ने बताया कि उसे वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान 517 करोड़ रुपये का चंदा प्राप्त हुआ है। यह वह राशि है जो 20,000 रुपये से अधिक के व्यक्तिगत दान के रूप में मिली और जिसे कानून के तहत सार्वजनिक रूप से घोषित करना अनिवार्य है। नियमों के अनुसार, राजनीतिक दल 20,000 रुपये से कम के दान देने वालों का विवरण सार्वजनिक नहीं करते, जबकि कुल संग्रह का एक बड़ा हिस्सा इन्हीं छोटे-छोटे दानों से आता है। राजनीतिक दलों के फंड संग्रह के प्रमुख स्रोतों में व्यक्तिगत दानदाता, कॉरपोरेट संस्थान और विभिन्न ट्रस्ट शामिल होते हैं। बिहार चुनावों के बाद अब तक कोई रिपोर्ट नहीं उधर, बिहार में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के बाद अब तक किसी भी राजनीतिक दल ने चुनाव आयोग को योगदान या बैंक बैलेंस से जुड़ी कोई रिपोर्ट जमा नहीं कराई है। इससे वहां दलों की मौजूदा वित्तीय स्थिति को लेकर तस्वीर अभी साफ नहीं हो पाई है।

दिग्विजय सिंह का बयान: बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले भारत में अल्पसंख्यक मामलों से जुड़े

भोपाल बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार को लेकर सियासत तेज हो गई है. मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इस मुद्दे पर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमले, भारत में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही कार्रवाइयों का “रिएक्शन” हैं. अल्पसंख्यकों पर कार्रवाई का असर पड़ोसी देश तक दिग्विजय सिंह ने कहा कि भारत में कट्टरपंथी ताकतें अल्पसंख्यकों पर लगातार कार्रवाई कर रही हैं. उनका दावा है कि इसी का असर पड़ोसी देश बांग्लादेश में देखने को मिल रहा है, जहां हिंदू समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है. हिंदुओं पर अत्याचार की घोर निंदा पूर्व मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हो रहे अत्याचार की वे घोर निंदा करते हैं. उन्होंने कहा कि किसी भी देश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा और भेदभाव स्वीकार्य नहीं है और इस तरह की घटनाएं मानवता पर धब्बा हैं. राजनीतिक बयान से बढ़ी बहस दिग्विजय सिंह के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बहस और तेज हो गई है. जहां एक तरफ उनके समर्थक इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बता रहे हैं, वहीं विरोधी दल इस बयान को लेकर सवाल उठा रहे हैं. दिग्विजय सिंह ने जोर देकर कहा कि यह मुद्दा सिर्फ राजनीति का नहीं, बल्कि मानवाधिकारों से जुड़ा हुआ है. उन्होंने केंद्र सरकार से भी अपील की कि वह इस मामले को गंभीरता से ले और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाए. भाजपा का पलटवार: ‘भूल से 10 साल मुख्यमंत्री रहे’ दिग्विजय सिंह के इस बयान पर भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने जोरदार हमला बोला. उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह “भूल से 10 साल तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे” और आज वे यह तय नहीं कर पा रहे कि वे हिंदुस्तान के नागरिक हैं या पाकिस्तान के एजेंट. आतंकवाद से जोड़ते हुए लगाए गंभीर आरोप रामेश्वर शर्मा ने आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय आतंकियों ने दिग्विजय सिंह को “सुपारी” दे रखी है और उन्हें अपना प्रवक्ता बना रखा है. उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह का बयान देशविरोधी ताकतों को बल देता है और अंतरराष्ट्रीय इस्लामी आतंकवाद को नैरेटिव मजबूत करने में मदद करता है. आतंकियों का साथ दिया’ का आरोप रामेश्वर शर्मा ने आरोप लगाया कि दिग्विजय सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन में आतंकियों का समर्थन किया और जब मौका मिला, उन्हें सम्मानित भी किया. उन्होंने चेतावनी दी कि आतंकवाद का समर्थन करने वालों को यह याद रखना चाहिए कि हिंदुस्तान की जनता सब जानती है और समय आने पर जवाब भी देती है. मानवाधिकार बनाम देशहित की बहस इस पूरे घटनाक्रम ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार को लेकर बहस को दो ध्रुवों में बांट दिया है. कांग्रेस इसे मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया से जोड़ रही है, जबकि भाजपा इसे देशविरोधी सोच और आतंकवाद को परोक्ष समर्थन बताकर हमलावर है.

बीजेपी के निशाने पर प्रियंका गांधी, कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने किया जवाबी हमला

 नई दिल्ली बांग्लादेश में एक हिंदू दीपू चंद्र दास की भीड़ ने ईश निंदा के कथित आरोप में पीट-पीटकर हत्या कर दी थी. इस मुद्दे पर देशभर में प्रोटेस्ट हो रहे हैं. इसे लेकर सियासत भी गर्मा गई है. केंद्र की सत्ता पर काबिज राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की अगुवाई कर रही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने विपक्षी कांग्रेस और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी पर निशाना साधा है. बीजेपी का आरोप है कि प्रियंका गांधी केवल गाजा पर ही बोलती हैं. बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति अनदेखा करती हैं. इसे लेकर अब कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने पलटवार किया है. कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि पिछली बार बांग्लादेश के अंदर जो हो रहा था, उस पर सबसे ज्यादा बोलने का काम प्रियंका गांधी ने किया. उन्होंने आगे कहा कि प्रियंका गांधी को प्रधानमंत्री बनाइए न, फिर देखिए कैसे जवाब देती हैं इंदिरा गांधी की तरह. इमरान मसूद ने कहा कि इंदिरा गांधी पाकिस्तान के दो टुकड़े कर के आई थीं न, ऐसे ही प्रियंका गांधी भी जवाब देंगी. उन्होंने कहा कि प्रियंका गांधी ऐसा इलाज करेंगी कि ये (बांग्लादेश) भारत विरोधी अड्डा नहीं बन पाएगा. प्रियंका गांधी अगर प्रधानमंत्री बन गईं, तो राहुल गांधी क्या करेंगे? इस सवाल पर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद की टोन बदल गई. उन्होंने जवाब में कहा कि राहुल गांधी भी वही करेंगे. इमरान मसूद ने कहा कि ये इंदिरा गांधी के पोता-पोती हैं. ये (राहुल गांधी और प्रियंका गांधी) एक चेहरे के ऊपर ही दो आंखें हैं. इनको अलग-अलग नहीं देखना चाहिए. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी हमारे नेता हैं, वह प्रियंका गांधी के भी नेता हैं. इमरान मसूद ने यह भी स्पष्ट किया कि कौन क्या रहेगा, यह पार्टी देखेगी. मैं तो छोटा सा सिपाही हूं. उन्होंने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि वह जब असम और बंगाल जाते हैं, तब चुनाव की बात करते हैं. अपना एजेंडा चलाने की कोशिश करते हैं. इमरान मसूद ने कहा कि बांग्लादेश से जब हिंदू भागकर आता है, तब हमारी सीमाएं बंद हो जाती हैं. उन्होंने कहा कि बांग्लादेश भारत विरोधी अड्डा बनता जा रहा है. यह बहुत ही दुखद है. इमरान मसूद ने कहा कि प्रियंका गांधी और राहुल गांधी को सब लोग जानते हैं. इनके हाथ में जब कमान होगी, पूरी दुनिया देखेगी.

इंडिगो एयरलाइन को बीजेपी नेता नाजिया खान की दो टूक— ‘कठमुल्लों के आगे झुको मत’, चुनौती से गरमाई राजनीति

नई दिल्ली  भारतीय जनता पार्टी (BJP) अल्पसंख्यक सेल की नेता नाजिया इलाही खान ने आरोप लगाया है कि मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से निकलते समय इंडिगो के कर्मचारियों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। उन्होंने इंडिगो के मालिक पर हमला करते हुए कहा कि इंडिगो का रवैया हर मामले में दोहरा रहता है। उन्होंने कहा कि अगर हिम्मत है तो इंडिगो उन्हें ब्लैकलिस्ट करके दिखाए। उन्होंने इंडिगो पर मुस्लिमों और पाकिस्तान का समर्थन करने का भी आरोप लगाया है। खान ने सोमवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस घटना जानकारी देते हुए एक वीडियो क्लिप पोस्ट की। इसमें वह हवाई अड्डे के टर्मिनल पर एयरलाइन कर्मचारियों के साथ बहस करती दिख रही हैं। उन्होंने बताया कि दुर्व्यवहार चेक-इन काउंटर से शुरू हुआ और बोर्डिंग प्रक्रिया तक जारी रहा। खान ने कहा कि वह किसी भी कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार हैं। नाजिया इलाही खान ने कहा, इंडिगो के मालिक को भारत और पाकिस्तान दोनों के मुस्लिम समर्थकों की बात सुननी चाहिए और मैं चुप नहीं रहने वाली हूं। उन्होंने कहा कि जब भी इंडिगो के उम्माह कर्मचारी अपनी जिहादी मानसिकता का प्रदर्शन करेंगे, तब मैं उनके हिजाब उतार दूंगी। यह मेरी चुनौती है। उन्होंने कहा कि एयरलाइन मुस्लिम कर्मचारियों का पक्ष लेती है। खान ने कहा कि अपना बयान डिलीट करने के लिए उन्हें धमकी दी जा रही है। एक्स पर साझा किए गए पोस्ट में उन्होंने कहा, अब मुझे समझ में आने लगा है कि इंडिगो का संचालन कैसे होता है और इसके मुस्लिमों के साथ कितने गहरे संबंध हैं। इंडिगो अब अपने मुस्लिम समर्थकों की बात ही सुने और मुझे ब्लैकलिस्ट कर दे। इंडिगो बड़ी संख्या में मुस्लिम कर्मचारियों की भर्ती करता है। इंडिगो एयरलाइन या तो उन्हें कंट्रोल कर ले या फिर उनकी भर्ती बंद कर दे। उन्होंने कहा, मैंने जैसे ही इंडोगो की तीन मुसलमानों पर बोला, सोशल मीडिया पर मुझ सुअरों की झुंड ने घेरना शुरू कर दिया। इंडिगो को टैग करके कठमुल्लों ने कहा कि नाजिया को इंडिगो से ब्लैकलिस्ट कर दो। मैं भी कह रही हूं इंडिगो से कि मुझे ब्लैकलिस्ट कर दो। क्योंकि अगर तुमने ऐसा नहीं किया तो जितनी बार मैं इंडिगो से यात्रा करूंगी और मुसलमानों कि जिहादी मानसिकता सामने आएगी, उतनी बार मैं वीडियो बनाकर पोस्ट करूंगी। अगर हमें पाकिस्तान से धमकियां आती हैं तो हम इन धमकियों से डरने वाले नहीं हैं। खान ने तीन एयरलाइन कर्मचारियों का नाम लेते हुए आरोप लगाया था कि यात्रा के विभिन्न चरणों में कर्मचारियों ने बार-बार और जानबूझकर उनके साथ दुर्व्यवहार किया। उन्होंने बताया कि वह आपातकालीन परिस्थितियों में यात्रा कर रही थीं। यह वीडियो वायरल हो गया और इस पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। इस टिप्पणी से बहस छिड़ गयी है। इसमें यूजर्स ने एयरलाइन स्टाफ के कथित बर्ताव और बातचीत में इस्तेमाल की गई भाषा दोनों पर अलग-अलग राय व्यक्त की है। खान ने आरोप लगाया है कि उन्हें उनकी राजनीतिक पहचान और देशभक्ति के कारण निशाना बनाया गया है। उन्होंने एयरलाइन की आंतरिक प्रक्रियाओं पर सवाल उठाया और जवाबदेही की मांग की और कहा कि गलती साबित हुई तो सिर्फ माफी पर्याप्त नहीं होगी। इंडिगो की तरफ से खान के आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के अधिकारियों ने भी इस घटना के संबंध में कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज होने की पुष्टि नहीं की है।  

राज्यसभा और विधानसभा चुनाव 2026: पश्चिम बंगाल, असम और तमिलनाडु में हलचल बढ़ने की संभावना

नई दिल्ली आने वाला साल 2026 चुनावी हलचल से भरा होने वाला है। 2026 में संसद के ऊपरी सदन में भी बड़ा परिवर्तन हो सकता है। अगले साल जहां पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु औऱ असम में विधानसभा के चुनाव होने हैं तो वहीं राज्यसभा में भी लगभग 75 सीटों पर चुनाव होने हैं। ये सीटें अप्रैल, जून और नवंबर में खाली होने वाली हैं। इसके बाद देखना होगा कि राज्यसभा में एनडीए और इंडिया गठबंधन का क्या समीकरण बनता है। आने वाले समय में बिहार से पांच और उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटें खाली हो जाएंगी। इसके अलावा महाराष्ट्र, झारखंड, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल औऱ तमिलनाडु के साथ कई पूर्वोत्तर के राज्यों की सीटें भी खाली होने वाली हैं। इन दिग्गज नेताओं को खत्म हो रहा कार्यकाल 2026 में राज्यसभा चुनाव का बड़ा महत्व होने वाला है। इससे ही संसद का आगे का लेजिस्लेटिव अजेंडा तय होने वाला है। 2026 में जिन दिग्गज नेताओं का कार्यकाल खत्म हो रहा है उनमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा, दिग्वजिय सिंह, शरद पवार और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, बीएल वर्मा, रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन शामिल हैं। यह अभी नहीं कहा जा सकता है कि इनमें से कितने नेताओँ की सदन में वापसी होगी और कितने की जगह नए चेहरे ले लेंगे। अप्रैल से जून तक और फिर नवंबर में बिहार से पांच सीटें खाली हो जाएंगी। ये सीटें अप्रैल में ही खालीहोंगी। इसके अलावा झारखंड, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल औ तमिलनाडु के सांसदों का भी कार्यकाल खत्म हो रहा है। नवंबर में उत्तर प्रदेश की सीटें भी खाली होंगी। इसके अलावा मध्य प्रदेश, असम, अरुणाचल प्रदेशष मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ की भी कई सीटें खाली होने वाली हैं। फिलहाल राज्यसभा में एनडीए की 129 सीटें हैं। वहीं विपक्षी दलों के केवल 78 सांसद राज्यसभा में हैं। 2026 में होने वाले चुनाव राज्यसभा में ताकत को बैलेंस भी कर सकते हैं। इसके अलावा विधानसभा के चुनाव भी राजनीतिक दलों की रणनीति में परिवर्तन करेंगे। बिहार की पांचों सीटें 9 अप्रैल को खाली हो जाएंगी। आरजेडी के प्रेम चंद गुप्ता, अमरेंद्र धारी सिंह, जेडीयू के हरिवंश नारायण सिंह और केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर के साथ उपेंद्र कुशवाहा का कार्यकाल अप्रैल में खत्म हो रहा है। बिहार विधानसभा में एनडीए की ताबड़तोड़ जीत के बाद संभव है कि बीजेपी और जेडूयी दो-दो सीटों पर काबिज हो जाए। उपेंद्र कुशवाहा के अलावा कुछ नेताओं की सदन में वापसी भी हो सकती है। महाराष्ट्र की सात राज्यसभा सीटों के लिए अप्रैल में चुनाव हो सकते हैं। शरद पवार, प्रियंका चतुर्वेदी और केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले का कार्यकाल समाप्त हो रहा है।