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भारत-अमेरिका ऊर्जा साझेदारी: राजस्थान और कैलिफोर्निया मिलकर बनाएंगे स्मार्ट ग्रिड और क्लीन एनर्जी मॉडल

जयपुर राजस्थान की ऊर्जा यात्रा अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जो आने वाले वर्षों में प्रदेश की तस्वीर बदल सकता है। यह सिर्फ एक सरकारी समझौता नहीं, बल्कि उस भविष्य की शुरुआत है, जहां बिजली सिर्फ पैदा नहीं होगी, बल्कि नई तकनीक के सहारे ज्यादा सुरक्षित, सस्ती और भरोसेमंद भी बनेगी। इस बदलाव की कहानी हजारों किलोमीटर दूर अमेरिका के कैलिफोर्निया से जुड़ गई है। राजस्थान और अमेरिकी राज्य कैलिफोर्निया ने स्वच्छ और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में तकनीकी सहयोग के लिए बड़ा कदम उठाया है। राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग (RERC), कैलिफोर्निया ऊर्जा आयोग (CEC) और कैलिफोर्निया पब्लिक यूटिलिटीज कमीशन (CPUC) के बीच वर्चुअल माध्यम से सहमति पत्र (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस दौरान राजस्थान के ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर भी ऑनलाइन जुड़े और इसे दोनों राज्यों के लिए भविष्य की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण समझौता बताया। सिर्फ कागजों पर हस्ताक्षर नहीं, तकनीक का होगा सीधा आदान-प्रदान इस समझौते की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब राजस्थान को दुनिया के उन क्षेत्रों से सीखने का मौका मिलेगा, जिन्होंने ऊर्जा प्रबंधन में मिसाल कायम की है। कैलिफोर्निया लंबे समय से ग्रिड मॉडर्नाइजेशन, नवीकरणीय ऊर्जा और स्मार्ट बिजली व्यवस्था के लिए जाना जाता है। अब वही अनुभव राजस्थान के साथ साझा किया जाएगा। इस साझेदारी के तहत सौर और पवन ऊर्जा के बेहतर प्रबंधन, ऊर्जा भंडारण तकनीकों, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने, स्मार्ट ग्रिड सिस्टम विकसित करने और आधुनिक बिजली प्रबंधन से जुड़े शोध व अनुभव साझा किए जाएंगे। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे राजस्थान की ऊर्जा व्यवस्था और अधिक मजबूत और भविष्य के लिए तैयार हो सकेगी। हजारों किलोमीटर की दूरी, लेकिन सोच और लक्ष्य एक ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने कहा कि भले ही राजस्थान और कैलिफोर्निया भौगोलिक रूप से एक-दूसरे से काफी दूर हों, लेकिन दोनों का लक्ष्य समान है। दोनों स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना चाहते हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं टिकाऊ भविष्य तैयार करने की दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह समझौता केवल तकनीकी सहयोग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दोनों राज्यों के नियामक ढांचे, नीतिगत अनुभव और जमीनी स्तर पर किए गए सफल प्रयोगों को भी साझा करने का अवसर देगा। इससे राजस्थान को ऊर्जा क्षेत्र में नई दिशा और नई गति मिलने की उम्मीद है। राजस्थान पहले से बना रहा है हरित ऊर्जा में पहचान ऊर्जा मंत्री ने कहा कि राजस्थान आज देश के अग्रणी स्वच्छ ऊर्जा उत्पादक राज्यों में शामिल हो चुका है। प्रदेश में विशाल सौर ऊर्जा पार्क और अनुकूल पवन गति का लाभ उठाकर बड़े पैमाने पर हरित बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। सरकार केवल बिजली उत्पादन बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि आम लोगों तक सुरक्षित, किफायती और निर्बाध बिजली पहुंचाने पर भी लगातार काम कर रही है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए आधुनिक पावर ग्रिड, बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) और स्मार्ट मीटरिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों को तेजी से लागू किया जा रहा है। रिकॉर्ड बिजली उत्पादन पर मिला वैश्विक सम्मान इसी बीच राजस्थान के ऊर्जा क्षेत्र को एक और बड़ी उपलब्धि मिली है। राज्य विद्युत उत्पादन निगम के कोयला आधारित बिजली घरों ने रिकॉर्ड स्तर पर बिजली उत्पादन कर नया इतिहास रचा है। इस उपलब्धि के लिए ‘मल्टीनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ ने ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर को वैश्विक अवार्ड से सम्मानित किया। विद्युत भवन में आयोजित समारोह में संस्था के मैनेजर अरिहंत उपाध्याय और कोऑर्डिनेटर गरिमा जैन ने ऊर्जा मंत्री को सम्मान पत्र सौंपा। साथ ही उत्पादन निगम के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक देवेन्द्र श्रृंगी को भी इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए सम्मानित किया गया। 2 जून बना बिजली उत्पादन का ऐतिहासिक दिन ऊर्जा मंत्री ने बताया कि 2 जून 2026 को प्रदेश की 7580 मेगावाट क्षमता वाली सभी 23 थर्मल इकाइयों ने 94.60 प्रतिशत उपयोग क्षमता के साथ रिकॉर्ड 7171 मेगावाट बिजली उत्पादन किया। यह राजस्थान के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा उत्पादन माना जा रहा है। इतना ही नहीं, सूरतगढ़ थर्मल पावर स्टेशन की सभी आठ इकाइयों ने भी अपनी कुल 2820 मेगावाट क्षमता में से 2790 मेगावाट बिजली उत्पादन कर नया रिकॉर्ड बनाया। यह उपलब्धि बताती है कि प्रदेश न केवल हरित ऊर्जा में आगे बढ़ रहा है, बल्कि पारंपरिक ऊर्जा उत्पादन में भी नई मिसाल कायम कर रहा है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के साथ हुई यह तकनीकी साझेदारी और रिकॉर्ड बिजली उत्पादन, दोनों मिलकर राजस्थान को आने वाले वर्षों में देश के सबसे मजबूत और आधुनिक ऊर्जा राज्यों की कतार में खड़ा कर सकते हैं। अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग जमीन पर कितनी तेजी से बदलाव लाता है और प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं को इसका कितना फायदा मिलता है।

राजस्थान के 76 कस्बे बने नगर पालिका, विकास और रोजगार को मिलेगी नई रफ्तार

जयपुर राजस्थान की राजनीति और प्रशासन में अक्सर बड़े फैसलों की चर्चा होती है, लेकिन इस बार जो हुआ, उसने सिर्फ सरकारी फाइलों का वजन नहीं बढ़ाया, बल्कि उन लाखों लोगों की उम्मीदों को भी नया पता दे दिया, जो वर्षों से अपने कस्बे को शहर बनते देखने का इंतजार कर रहे थे। कस्बों से शहर बनने का सफर सोचिए… एक छोटा कस्बा, जहां सड़कें तो हैं लेकिन शहर जैसी व्यवस्था नहीं। जहां आबादी बढ़ती रही, बाजार फैलते रहे, मकान ऊंचे होते गए, लेकिन सरकारी सुविधाएं वहीं की वहीं अटकी रहीं। अब यही कस्बे नगर पालिका बनने जा रहे हैं। यानी अब इनके पास अपना प्रशासन होगा, अपने विकास की रफ्तार होगी और योजनाओं को जमीन तक पहुंचाने का अलग तंत्र होगा। 15 साल का सबसे बड़ा नगरीय विस्तार राजस्थान सरकार ने प्रदेश में 76 नई नगरपालिकाओं के गठन को मंजूरी देकर पिछले 15 साल का सबसे बड़ा नगरीय विस्तार कर दिया है। इस फैसले के बाद राज्य में नगरीय निकायों की संख्या 309 से बढ़कर 385 हो जाएगी। इसके साथ ही इन नए निकायों के प्रशासनिक संचालन के लिए 684 नए पदों का भी सृजन किया गया है। यह सिर्फ एक सरकारी आदेश नहीं, बल्कि उन इलाकों के लिए नई शुरुआत माना जा रहा है, जो लंबे समय से शहर जैसी सुविधाओं की मांग कर रहे थे। सबसे ज्यादा फायदा किन जिलों को? सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस विस्तार का सबसे बड़ा फायदा जयपुर और झुंझुनूं को मिला है। दोनों जिलों में सात-सात नई नगरपालिकाओं का गठन किया गया है। जयपुर जिले में वाटिका, जमवारामगढ़, फागी, गट्टू, कानोता, खेजरोली और कालाडेरा को नगर पालिका का दर्जा मिला है। वहीं झुंझुनूं में सिंघाना, डूंडलोद, जाखल, सुलताना, बुहाना, मलसीसर और मण्ड्रेला अब नए शहरी निकायों के रूप में पहचान बनाएंगे। इन जिलों की भी बदलेगी तस्वीर दौसा, अलवर और टोंक में चार-चार नई नगरपालिकाएं बनाई गई हैं। अजमेर, बाड़मेर और बालोतरा में तीन-तीन नए निकाय बने हैं। इसके अलावा सीकर, बूंदी, जालौर, नागौर, बीकानेर, धौलपुर, करौली, उदयपुर, श्रीगंगानगर, कोटा, बारां, पाली, चूरू, प्रतापगढ़, सिरोही और कई अन्य जिलों के कस्बों को भी नगर पालिका का दर्जा देकर विकास की नई कतार में खड़ा कर दिया गया है। आम लोगों की जिंदगी में क्या बदलेगा? असल बदलाव अब इन कस्बों की तस्वीर में दिखाई देगा। नगर पालिका बनने के बाद स्थानीय स्तर पर सफाई व्यवस्था, सड़क निर्माण, स्ट्रीट लाइट, पेयजल, नालियां, कचरा प्रबंधन और शहरी योजनाओं को लागू करना पहले की तुलना में ज्यादा व्यवस्थित हो सकेगा। लंबे समय से गांव और शहर के बीच झूल रहे इन इलाकों को अब अपनी अलग प्रशासनिक पहचान मिलेगी। 684 नई नौकरियों का रास्ता खुला सरकार ने सिर्फ नगरपालिकाओं की घोषणा कर औपचारिकता पूरी नहीं की, बल्कि इनके संचालन के लिए 684 नए पदों को भी मंजूरी दी है। हर नई नगर पालिका में एक अधिशासी अधिकारी, सहायक राजस्व निरीक्षक, कनिष्ठ अभियंता (सिविल), कनिष्ठ लेखाकार, ठोस कचरा प्रबंधक (स्वास्थ्य निरीक्षक), वरिष्ठ प्रारूपकार, वरिष्ठ सहायक और दो कनिष्ठ सहायकों के पद स्वीकृत किए गए हैं। यानी नए निकाय शुरुआत से ही प्रशासनिक ढांचे के साथ काम करेंगे। युवाओं के लिए क्यों है बड़ी खबर? इन पदों का एक और बड़ा असर युवाओं पर पड़ेगा। पिछले तीन वर्षों में स्वायत्त शासन विभाग में पहली बार इतनी बड़ी भर्ती का रास्ता खुला है। लंबे समय से सरकारी नौकरियों का इंतजार कर रहे युवाओं के लिए यह फैसला रोजगार की नई उम्मीद भी लेकर आया है। आउटसोर्सिंग पर भी बड़ा फैसला सरकार ने एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। पहले से गठित छह नगरपालिकाओं में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, चौकीदार, सफाई जमादार और सफाई कर्मचारियों की आउटसोर्सिंग व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया गया है। इन निकायों के लिए पहले स्वीकृत 54 पदों से जुड़ी व्यवस्था भी निरस्त कर दी गई है। इससे संकेत मिलता है कि सरकार अब नगरीय निकायों की प्रशासनिक संरचना को नए सिरे से व्यवस्थित करना चाहती है। आगे क्या बदलेगा? राजस्थान के तेजी से बढ़ते कस्बों के लिए यह फैसला सिर्फ सीमा बदलने का नहीं, बल्कि पहचान बदलने का है। जिन इलाकों में लोग वर्षों से बेहतर सड़क, नियमित सफाई, व्यवस्थित विकास और मजबूत स्थानीय प्रशासन की मांग कर रहे थे, वहां अब बदलाव की घड़ी शुरू हो चुकी है। आने वाले समय में यह फैसला जमीन पर कितना असर दिखाता है, इस पर पूरे प्रदेश की नजर रहेगी।

सरकारी स्कूलों के मिड-डे मील रसोइयों के लिए नया नियम, दस्तावेज अनिवार्य किए गए

 दारौंदा (सिवान)  बिहार के सरकारी विद्यालयों में कार्यरत रसोइयों के लिए शिक्षा विभाग ने नया निर्देश जारी किया है। विभाग ने सभी रसोइयों की पे-आईडी (Pay ID) बनाने की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला लिया है। इसके लिए स्कूलों को सभी आवश्यक दस्तावेज एकत्र करने का निर्देश दिया गया है। ये दस्तावेज जमा करना होगा अनिवार्य पे-आईडी बनाने के लिए प्रत्येक रसोइया को अपना आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक पासबुक की छायाप्रति संबंधित विद्यालय में जमा करनी होगी। विद्यालय प्रधानों को इन दस्तावेजों का सत्यापन कर उन्हें स्कूल के अभिलेख में सुरक्षित रखने का निर्देश दिया गया है। दस्तावेज नहीं तो अटक सकता है मानदेय शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन रसोइयों के पास आधार, पैन कार्ड या बैंक खाते से जुड़े दस्तावेज नहीं होंगे, उनकी पे-आईडी नहीं बन पाएगी ऐसे में भविष्य में मानदेय का भुगतान प्रभावित हो सकता है। इसलिए जिनके दस्तावेज अधूरे हैं, उन्हें जल्द से जल्द बनवाने की सलाह दी गई है। डिजिटल और पारदर्शी होगी भुगतान व्यवस्था विभाग का उद्देश्य रसोइयों के मानदेय भुगतान को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाना है। पे-आईडी बनने के बाद भुगतान प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी और रिकॉर्ड का रखरखाव भी आसान हो जाएगा। इससे भुगतान में होने वाली देरी और तकनीकी समस्याओं को भी कम किया जा सकेगा। स्कूलों में शुरू हुई दस्तावेज जुटाने की प्रक्रिया विभागीय आदेश के बाद प्रखंड के सरकारी विद्यालयों में रसोइयों से जरूरी दस्तावेज लेने की प्रक्रिया तेज हो गई है। स्कूल प्रबंधन सभी रसोइयों से समय पर दस्तावेज जमा कराने की अपील कर रहा है, ताकि पे-आईडी बनाने का काम तय समय पर पूरा हो सके और भविष्य में मानदेय भुगतान में किसी तरह की परेशानी न आए।  

अयोध्या राम मंदिर विवाद पर देवरिया से योगी आदित्यनाथ का बड़ा बयान

देवरिया  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को निशाना बनाया है। अयोध्या के दौर पर आए अरविंद केजरीवल ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की जांच करने वाली एसआईटी पर सवाल उठाए हैं। सीएम योगी ने कहा है कि, जब इन्हें कुछ नहीं मिला तो रामभक्तों पर आक्षेप कर रहे हैं,अयोध्या धाम को बदनाम कर रहे हैं। सीएम योगी ने देवरिया में एक जनसभा में यह बात कही। दिल्ली को बर्बादी के अलावा कुछ नहीं दिया सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि, 'एक दिल्ली से सज्जन वहां आए हैं, अयोध्या। दिल्ली की जनता ने उन्हें 15 वर्ष अवसर दिया,लेकिन दिल्ली को उन्होंने बर्बादी,भ्रष्टाचार के सिवा कुछ नहीं दिया, मैं उनसे पूछना चाहूंगा, डबल इंजन की सरकार ने 9 वर्ष में अयोध्या को जो सवांरा है, देखें इस मॉडल को। फिर अपने कारनामों पर पश्चाताप करो। यह न्याय अयोध्या के साथ जो डबल इंजन की सरकार ने किया, अगर यही न्याय आम आदमी पार्टी दिल्ली के साथ करती तो दिल्ली भी चमकती, जैसे आज अयोध्या चमक रही है।' जन आस्था के साथ खिलवाड़ न हो सीएम योगी ने कहा कि, मैंने 19 जून को अयोध्या के दौरे पर कहा था, जन आस्था के साथ खिलवाड़ न हो। अयोध्या हम सबकी आस्था की प्रतीक है। अयोध्या पर आक्षेप मत करो, श्रीराम की मर्यादा का पालन करना सीखो। मैंने कहा था कि एसआईटी की रिपोर्ट आने पर कार्रवाई होगी। एसआइटी रिपोर्ट आई, कार्रवाई प्रारंभ हो गई है। उन्होंने कहा कि, जन आस्था के साथ जो खिलवाड़ करेगा, उसके साथ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत काम करेंगे। आज मोहर्रम है, कहीं किसी का अता पता नहीं है, कोई शस्त्र नहीं निकल रहा, उत्सव के माहौल में कोई उपद्रव नहीं कर सकता, अगर करेगा तो सात पीढ़ियों तक भुगतेगा। आक्षेप लगाने वालों की मंशा अच्छी नहीं योगी ने कहा कि, जो लोग आज आक्षेप कर रहे हैं, इनकी मंशा अच्छी नहीं है। ये वे लोग हैं जो लोग भगवान राम को नकार चुके थे, कहते थे कि राम हुए ही नहीं। ये लोग अयोध्या को नकारते रहे। दूसरा पक्ष वह है जो जय श्रीराम पर लाठी गोली चलाते थे, तुम बताओगे हमें आस्था। रामनवमी पर दंगा करवाते थे, कावड़ यात्रा पर प्रतिबंध लगाते थे। कांग्रेस ने देश को लूटा ही नहीं था, बल्कि नोचा था। सरकार ने पहले दिन कहा था कि दूध का दूध पानी का पानी होगा। मैं फिर कहता हूं कि रामभक्तों की अग्निपरीक्षा मत लो, उनकी आस्था के साथ खिलवाड़ मत करो, प्रमाण है तो एसआईटी को सबूत पेश करो।  

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती, डेयरी यूनिट पर 5 लाख तक ऋण सुविधा

 पटना  राज्य के 22 हजार गांवों में डेयरी को ऑपरेटिव सोसाइटी का गठन हो गया है। ऐसे गांवों में रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए डेयरी व्‍यवसाय को बढ़ावा देने पर सरकार कार्य कर रही है। इसको गत‍ि देने के लिए सहकारिता विभाग इन गांवों में काम्फेड के सहयोग से दूध संग्रह का कार्य जल्द शुरू कराने की तैयारी में है। साथ ही, दुधारू पशुओं की डेयरी यूनिट लगाने के लिए महिलाओं, युवाओं और किसानों को प्रोत्साहन देने एवं सहकारी बैंकों के माध्यम से दुधारू पशुओं की खरीद हेतु ऋण सुविधा दिलाने के लिए विस्तृत कार्य योजना तैयार कराई जा रही है। महिलाओं, युवाओं और किसानों को दुधारू पशुओं का पालन कराने के लिए मिलेगा प्रोत्साहन सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव के मुताबिक गांवों में पशुपालन को बढ़ावा देने सरकार की प्राथमिकता में है। इसका लक्ष्य डेयरी के माध्यम से हर गांव को दूध उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना तथा ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देना है। खास बात यह कि डेयरी को ऑपरेटिव सोसाइटी में ग्रामीण महिलाओं को जोड़ने को प्राथमिकता दी जा रही है। अगले साल तक राज्य के शेष बचे 23 हजार राजस्व गांवों में डेयरी को ऑपरेटिव सोसाइटी का गठन कर दिया जाएगा। सहकारी बैंकों के माध्यम से ऋण सुविधा दिलाने को सहकारिता विभाग तैयार कर रहा प्रस्ताव राजस्व गांवों के अलावा दलित, महादलित और आदिवासी समेत अन्य टोलों को भी उसके पास के गांवों की डेयरी को-ऑपरेटिव सोसाइटी से जोड़ा जा रहा है। अभी राज्य सरकार ग्रामीण युवाओं और किसानों को दो दुधारू पशुओं की डेयरी यूनिट लगाने के लिए एक लाख 74 हजार तक अनुदान दे रही है। यह योजना पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के गव्य विकास निदेशालय के अधीन लागू है। सहकारिता विभाग सहकारी बैंकों के माध्यम से डेरी यूनिट को बढ़ावा देने की कार्य योजना पर कार्य कर हा है। पांच लाख रुपये तक मिलेगी ऋण सुविधा व‍िभागीय प्रस्ताव के मुताबिक दुधारू पशुओं का पालन और डेरी यूनिट लगाने पर सहकारी बैंकों से पांच लाख रुपये तक ऋण सुविधा मिलेगी। इसके लिए बैंक गारंटी सरकार लेगी। डेयरी यूनिट हर गांव में गठित को ऑपरेटिव सोसाइटी चलाएगी। अच्छे कार्य करने पर ऋण सुविधा बढ़ायी जाएगी।  

राजस्थान सरकार का बड़ा फैसला: 76 नई नगरपालिकाएं और 684 नए पद स्वीकृत

जयपुर राजस्थान में आगामी नगर निकाय चुनाव से पहले राज्य सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है. सरकार ने प्रदेश में 76 नई नगरपालिकाओं के गठन को मंजूरी दी है. स्वशासन विभाग की ओर से जारी आदेश में इन नई नगर पालिकाओं के गठन को मंजूरी दी गई है. यह घोषणा बजट घोषणाओं के तहत की गई है. नई नगरपालिकाओं के सुचारू संचालन के लिए स्वायत्त शासन विभाग ने 684 नए पदों के सृजन को भी स्वीकृति दी है. 385 हो जाएगी नगर निकाय की संख्या इस फैसले के बाद राज्य में नगर निकायों की कुल संख्या 309 से बढ़कर 385 हो जाएगी. जयपुर और झुंझुनूं जिलों में सबसे ज्यादा 7-7 नगरपालिकाओं का गठन हुआ है. इन निकायों में कुल 684 पद स्वीकृत हैं. जयपुर में वाटिका, जमवारामगढ़, फागी, दूदू, कानोता, खेजरोली और कालाडेरा नगर पालिकाओं का गठन हुआ है. युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर होंगे निकाय की संख्या में बढ़ोतरी से तेजी से शहरीकरण वाले क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर बेहतर प्रशासन, आधारभूत सुविधाओं का विस्तार और योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होगा. युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध होंगे. साथ ही निकाय में पदों पर भर्ती से प्रशासनिक कार्यों भी आसान होगा. इन पदों को मिली मंजूरी नवगठित पदों में अधिशाषी अधिकारी-चतुर्थ, सहायक राजस्व निरीक्षक, कनिष्ठ अभियंता (सिविल), कनिष्ठ लेखाकार, ठोस कचरा प्रबन्धक (स्वास्थ्य निरीक्षक- सेकंड), वरिष्ठ प्रारूपकार, वरिष्ठ सहायक, कनिष्ठ सहायक के 76-76 पदों का सृजन किया गया है.

तत्काल टिकट जालसाजी का खुलासा, दलाल बना रहे फर्जी प्रिंट और बेच रहे महंगे दामों पर

गोरखपुर रेलवे ने तत्काल टिकट के लिए आधार प्रमाणीकरण अनिवार्य किया तो दलालों ने जालसाजी का नया तरीका खोज लिया। अब वे मुंबई से असली तत्काल टिकट बुक कर उसका स्कैन लेकर दूसरे शहरों में भेज रहे हैं, जहां हूबहू विंडो टिकट जैसा प्रिंट निकालकर यात्रियों को ऊंचे दाम पर बेचा जा रहा है। यह पूरा खेल 10 सेकेंड का है। मुंबई में रेलवे का पीआरएस सिस्टम मुंबई में बाकी स्टेशनों से 10 से 12 सेकेंड पहले खुल जाता है। इसी तकनीकी अंतर का फायदा उठाकर दलाल मुंबई के अलग-अलग काउंटरों से तत्काल टिकट तुरंत बुक कर लेते हैं। फिर उस टिकट का स्कैन लेकर व्हाट्सएप या अन्य माध्यम से गोरखपुर, लखनऊ, पटना, मुजफ्फरपुर जैसे दूर के शहरों में अपने एजेंटों को भेजते हैं। गोरखपुर में मामला सामने आया इसका खुलासा कुशीनगर एक्सप्रेस के एक यात्री के पास से मिले स्कैन टिकट से हुआ। इसके बाद इस नेटवर्क को पकड़ने के लिए रेलवे ने अपने वाणिज्य विभाग को अलर्ट किया है। साथ ही स्कैन टिकट के लिए इस्तेमाल हो रहे रेलवे जैसे मिलते-जुलते कागज कहां से उपलब्ध हो रहे हैं, इसकी गोपनीय जांच शुरू की गई है। आरपीएफ गोरखपुर के प्रभारी दशरथ प्रसाद ने बताया कि टिकट दलालों का संगठित गिरोह यात्रियों को दूसरे राज्य से टिकट बुक कर भेज रहा है। उक्त टिकट भी स्कैन किया गया बताया गया है। गोरखपुर में मामला सामने आया है। इनका एक बड़ा नेटवर्क है। इसकी कई स्तर पर पूरे देश में जांच हो रही है। कुशीनगर के यात्री के पास मिला स्कैन टिकट गोरखपुर से एलटीटी जा रही कुशीनगर एक्सप्रेस में एक यात्री स्कैन टिकट के साथ पकड़ा गया। टीटीई को चेकिंग के दौरान टिकट पर बार कोड नहीं दिखा। बारीकी से जांच में पता चला कि असली नहीं है। इसे कंप्यूटर से स्कैन कर निकाला गया है। पूछताछ में यात्री ने माना कि उसने एक दलाल से टिकट खरीदा था। फिर इसकी जानकारी गोरखपुर आरपीएफ को दी गई। सैकड़ों यात्रियों को उपलब्ध करा चुका स्कैन टिकट जांच में खुलासा हुआ कि यह खेल लंबे समय से चल रहा है। यह नेटवर्क अब तक सैकड़ों यात्रियों को स्कैन टिकट उपलब्ध करा चुका है। तत्काल टिकट एक दिन पहले ही बनता है। मुंबई से यूपी या बिहार टिकट की हार्ड कॉपी भेजना संभव नहीं है, इसलिए दलालों ने स्कैन-प्रिंट वाला फार्मूला निकाला। मुंबई से बुक टिकट का पीडीएफ बना कर अपने नेटवर्क के एजेंट को भेज देते हैं। स्थानीय एजेंट आरक्षित टिकट प्रिंट करने के लिए इस्तेमाल हो रहे कागज से मिलते जुलते कागज पर कलर प्रिंट निकालकर दे देते हैं। यह देखने में असली विंडो टिकट जैसा ही लगता है।

जेल कक्षपाल भर्ती नियमों में बदलाव, भूतपूर्व सैनिकों का कोटा अब दो हिस्सों में बंटेगा

 पटना बिहार सरकार ने राज्य की काराओं (Jail) में कक्षपाल नियुक्ति प्रक्रिया में पूर्व अग्निवीरों को आरक्षण का लाभ देने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इसके लिए बकायदा बिहार कक्षपाल संवर्ग (संशोधन) नियमावली, 2026 स्वीकृत की गई है। सरकार के फैसले के अनुसार कक्षपाल भर्ती में भूतपूर्व सैनिकों के लिए पहले से लागू 25 प्रतिशत आरक्षण को दो बराबर भागों में बांटा जाएगा। जानकारी के अनुसार अभी कक्षपाल भर्ती में भूतपूर्व सैनिकों को 25 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है। इसी आरक्षण को दो बराबर भाग में बांटा जाएगा। बिहार के पूर्व अग्‍नि‍वीरों को फायदा इसके तहत 12.5 प्रतिशत पद भूतपूर्व सैनिकों के लिए आरक्षित रहेंगे, जबकि शेष 12.5 प्रतिशत पद बिहार राज्य के पूर्व अग्निवीरों के लिए सुरक्षित किए जाएंगे। इस संशोधन के बाद अग्निवीर योजना के तहत सेना में सेवा पूरी कर चुके युवाओं को राज्य सरकार की कारा सेवा में रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकेंगे। सरकार के अनुरार पूर्व अग्निवीर अनुशासन, प्रशिक्षण और सुरक्षा संबंधी अनुभव के कारण कारा प्रशासन की जिम्मेदारियों के लिए उपयुक्त होंगे। जल्‍द संकल्‍प जारी कर सकती है सरकार नई व्यवस्था से उन्हें सरकारी सेवा में समायोजन का अवसर मिलेगा और उनके कौशल का उपयोग राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में किया जा सकेगा। इस निर्णय को अग्निवीरों के पुनर्वास और रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में राज्य सरकार का एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। संशोधित नियमावली लागू होने के बाद भविष्य की कक्षपाल भर्तियों में इसका लाभ पूर्व अग्निवीरों को मिलेगा। संभावना जताई गई है कि इस प्रस्ताव को अनुमोदन मिल चुका है जल्दी ही इस संबंध में सरकार संकल्प भी जारी करेगी।

बठिंडा पुलिस में बड़ा फेरबदल, 7 SHO सहित 10 अधिकारियों का ट्रांसफर

बठिंडा. पंजाब के बठिंडा जिले में पुलिस व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से एसएसपी बठिंडा ने बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए सात थाना प्रभारियों (एसएचओ) सहित 10 पुलिस अधिकारियों के तबादले किए हैं। जारी आदेशों के अनुसार कई थाना प्रभारियों के साथ-साथ डीसीआर, चुनाव सेल और अन्य शाखाओं में भी नई तैनातियां की हैं। आदेशों के अनुसार इंस्पेक्टर दलजीत सिंह को चुनाव सेल से स्थानांतरित कर थाना कैनाल कालोनी का एसएचओ नियुक्त किया गया है। थाना कैनाल कालोनी के एसएचओ हरजोत सिंह को थाना थर्मल का प्रभारी बनाया गया है। वहीं, डीसीआर प्रभारी दलजीत सिंह को थाना सदर रामपुरा का एसएचओ नियुक्त किया गया है। इंस्पेक्टर जगदीप सिंह को थाना सदर रामपुरा से थाना संगत मंडी भेजा गया है, जबकि इंस्पेक्टर सुखविंदर सिंह को थाना संगत से डीसीआर प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इंस्पेक्टर जसविंदर सिंह को थाना नथाना से एंटी लिकर एंड एंटी नारकोटिक्स सेल में तैनात किया गया है, जबकि इंस्पेक्टर हरजीवन सिंह को थाना थर्मल से थाना नथाना का एसएचओ बनाया गया है। इसके अलावा सब-इंस्पेक्टर अमरीक सिंह को पुलिस लाइन से थाना तलवंडी साबो का एसएचओ तथा सब-इंस्पेक्टर दिलबाग सिंह को पुलिस लाइन से थाना रामा मंडी का एसएचओ नियुक्त किया गया है। पुलिस विभाग के अनुसार ये तबादले प्रशासनिक आधार पर किए गए हैं।

UCC पर छत्तीसगढ़ में सियासत तेज, डिप्टी CM साव ने कांग्रेस को घेरा; केदार गुप्ता ने आदिवासी परंपराओं पर दिया भरोसा

रायपुर. भारतीय जनता पार्टी की सरकार प्रदेश में समान नागरिक संहिता याने UCC लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है. सरकार की तैयारियों के साथ ही राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है. पूर्व मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अमरजीत भगत ने इसे सत्ता बचाने के लिए भाजपा का प्रपंच करार दिया है. इस पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कांग्रेस पर हर बात पर गलत प्रचार करने का आरोप मढ़ा है. वहीं भाजपा नेता केदार गुप्ता ने प्रदेश में UCC लागू होने के बाद भी आदिवासी समाज की परंपराओं के पूरी तरह सुरक्षित रहने का भरोसा दिलाया है. समान नागरिक संहिता पर कांग्रेस नेता अमरजीत भगत ने मीडिया से चर्चा में कहा कि UCC देश के लिए एक पेचीदा विषय है. भारत विविधताओं का देश है, जहां सभी पर एक कानून उचित नहीं है. जंगल में रहने वाले आदिवासी को UCC की जानकारी तक नहीं है, ऐसे में जनता पर UCC का सकारात्मक असर नहीं होगा. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के बयान पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने पलटवार करते हुए कहा कि UCC लागू करने के लिए कमेटी का गठन किया गया है, जो विभिन्न वर्गों के लोगों से बातचीत करेगी. कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर सरकार आगे की कार्रवाई करेगी. रही बात अमरजीत भगत के बयान की तो कांग्रेस पार्टी हर बात पर भ्रम फैलाने का काम करती है. UCC से आदिवासी समाज को कोई फर्क नहीं पड़ेगा. वहीं केदार गुप्ता ने कहा कि अमरजीत भगत आदिवासी समाज से आते हैं, फिर भी आदिवासियों की समझ पर सवाल उठाना दुर्भाग्यपूर्ण है. आदिवासी समाज की संस्कृति और परंपरा बेहद समृद्ध है. UCC लागू होने पर भी आदिवासी समाज की परंपराएं पूरी तरह सुरक्षित रहेंगी. UCC लव जिहाद और धर्मांतरण जैसी घटनाओं पर रोक लगाने में भी मददगार होगा. अगर कांग्रेस इन सब बातों को समय रहते समझ जाती, तो आज उसकी यह दुर्गति नहीं होती. कांग्रेस के प्रशिक्षण शिविर से बढ़ा BJP का BP पूर्व मंत्री अमरजीत ने मीडिया से चर्चा में कांग्रेस के प्रशिक्षण शिविर के संबंध में कहा कि इससे भाजपा का BP बढ़ेगा. भाजपा कांग्रेस की विचारधारा से घबराई हुई है. भाजपा नेता डॉक्टरों से बीपी चेक करा कर देखें. उन्होंने कहा कि कांग्रेस मजबूत हो रही है, इसलिए भाजपा बेचैन है. सरकार के खिलाफ कांग्रेस ने जमीनी लड़ाई तेज कर दी है. प्रशिक्षण के बाद जिलाध्यक्षों का नया कलेवर दिखेगा. भगत के बयान पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि बीपी किसका बढ़ा हुआ है, यह प्रदेश की जनता बता देगी. देश की लगभग 80 प्रतिशत आबादी पर बीजेपी की सरकार है. इनके गठबंधन के दल इनको छोड़कर जा रहे हैं. बीपी तो कांग्रेस का बढ़ा हुआ है. वहीं बीपी बढ़ने वाले बयान पर केदार गुप्ता ने कहा कि भाजपा का ब्लड प्रेशर, शुगर और मेंटल लेवल एक जैसा रहता है. कांग्रेस को पूरा बॉडी चेकअप करवाना चाहिए. 22 राज्यों में उन्हें खदेड़ दिया गया है. उन्होंने कहा कि यह बात भूपेश बघेल के बयान में दिखता है, जब वह बार-बार कहते है ‘कका अभी जिंदा है.’ भूपेश बघेल दीर्घायु हों, चिरायु हों, पर अमरजीत भगत को उनके स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए. कांग्रेस का स्वास्थ्य इससे पता चल रहा है. खाद-बीज संकट पर सरकार असहाय कांग्रेस नेता अमरजीत भगत ने प्रदेश में खाद-बीज के संकट के साथ मानसून की बेरुखी का जिक्र करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ धान का कटोरा है. कृषि पर आधारित जीवन है. अगर खेती नहीं हो रही है, तो समस्या खड़ी हो जाएगी. किसान को खाद-बीज और पानी चाहिए. कांग्रेस सरकार ने अच्छी व्यवस्था की थी, लेकिन इस सरकार में खाद नहीं मिल रहा है. बड़े पैमाने पर काला बाजारी हो रही है. किसान आखिर कहां जाएगा. पूरी परिस्थिति प्रदेश के किसानों के विरुद्ध है. कुछ करने में सरकार निसहाय दिख रही है. इस विषय पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि सरकार ने खाद बीज के वितरण की पूरी व्यवस्था की है. किसानों को किसी तरह की कोई परेशानी नहीं है. कांग्रेस किसानों को भ्रमित करने का काम कर रही है. किसान समझ रहे हैं. इसके साथ उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन्होंने किसानों को परेशान किया, आज किस मुँह से किसानों की बात कर रहे हैं.