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बजट कार्यों में तेजी लाने के निर्देश: प्राथमिकता से भेजें प्राक्कलन, सरकारी भवनों के आधुनिक और वर्टिकल डिजाइन पर जोर

बजट में शामिल कार्यों के प्राक्कलन प्राथमिकता क्रम में तत्काल भेजने के निर्देश, शासकीय भवनों के वर्टिकल व आधुनिक डिजाइन तथा नई तकनीक से निर्माण पर जोर लोक निर्माण विभाग के सचिव ने की कार्यों की समीक्षा, भू-अर्जन, वन-व्यपवर्तन, पोल शिफ्टिंग की बाधाओं को समय-सीमा में निराकृत करने के दिए निर्देश रायपुर लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार बंसल ने आज सभी मुख्य अभियंताओं की बैठक लेकर विभागीय कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने पीडब्लूडी मुख्यालय नवा रायपुर के निर्माण भवन में आयोजित बैठक में अधिकारियों को निर्माण कार्यों में भू-अर्जन, वन-व्यपवर्तन, पोल शिफ्टिंग आदि की बाधाओं को स्वयं रूचि लेते हुए समय-सीमा में त्वरित निराकरण करने के निर्देश दिए। उन्होंने डी.पी.आर. तैयार करने, एजेंसी निर्धारण, मार्गों एवं भवनों के मरम्मत तथा कार्य मेजरमेंट बुक के लिए नई तकनीक अपनाने पर जोर दिया। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता श्री वी.के. भतपहरी भी बैठक में मौजूद थे। सचिव श्री बंसल ने बैठक में हाई स्कूल भवनों, हायर सेकेण्डरी स्कूलों, शासकीय आवासगृहों, मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों व कम्पोजिट भवनों के निर्माण के लिए भूमि की उपलब्धता एवं उपयोगिता के अनुरूप हॉरिजांटल की जगह वर्टिकल निर्माण को बढ़ावा देते हुए आधुनिक डिजाइनों और नई तकनीकों से शासकीय भवनों के निर्माण की कार्ययोजना तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने वर्ष 2025-26 एवं 2026-27 के बजट में शामिल कार्यों के प्राक्कलन प्राथमिकता क्रम में तत्काल प्रेषित करने को कहा। उन्होंने लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को हर 15 दिनों में कोर्ट प्रकरणों, भू-अर्जन के मामलों तथा लोक सेवा गारंटी के लंबित प्रकरणों की समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने इन मामलों में आ रही बाधाओं से वरिष्ठ कार्यालयों को अवगत कराने को कहा, ताकि निराकरण की कार्यवाही उच्च स्तर पर यथासमय की जा सके। उन्होंने इनके निराकरण में किसी भी प्रकार की देरी नहीं करने को कहा। लोक निर्माण विभाग के सचिव ने भवनों, सड़कों और पुल-पुलियों के सभी प्रगतिरत कार्यों में निर्धारित मानक अनुसार पूर्ण मासिक कार्ययोजना बनाकर कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने विभाग के सभी कार्यपालन अभियंताओं, अनुविभागीय अधिकारियों तथा उप अभियंताओं को छुट्टी के दिनों में भी सतर्क रहने और बिना अनुमति के मुख्यालय नहीं छोड़ने को कहा। वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा किसी भी दिन निर्माण कार्यों का औचक निरीक्षण किया जा सकता है।

कोरबा के विकास में DMF की बड़ी भूमिका: मंत्री लखनलाल देवांगन बोले- जिले की तरक्की का मजबूत आधार बना फंड

कोरबा जिले के विकास का महत्वपूर्ण आधार है डीएमएफ – मंत्री लखनलाल देवांगन डीएमएफ शासी परिषद की बैठक में वर्ष 2026-27 के प्रस्तावित कार्यों को मिली स्वीकृति रायपुर छत्तीसगढ़ शासन के वाणिज्य, उद्योग, आबकारी, सार्वजनिक उपक्रम एवं श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन की मुख्य उपस्थिति में आज कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) कोरबा की शासी परिषद की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 हेतु प्रस्तावित कार्यों की कार्ययोजना का अनुमोदन किया गया। इस अवसर पर कोरबा की सांसद श्रीमती ज्योत्सना महंत, कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल, पाली-तानाखार विधायक तुलेश्वर सिंह मरकाम, रामपुर विधायक फूल सिंह राठिया सहित शासी परिषद के सदस्य और अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। बैठक की अध्यक्षता कलेक्टर एवं पदेन अध्यक्ष कुणाल दुदावत ने की। बैठक में मंत्री देवांगन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए डीएमएफ योजना की व्यवस्था की है, जिसके माध्यम से कोरबा जिले को बड़ी राशि प्राप्त होती है। डीएमएफ अब कोरबा जिले की प्रगति का मजबूत आधार बन चुका है। जिले में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और अधोसंरचना विकास जैसे कार्यों को इससे नई गति मिली है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों के सहयोग और जनता की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए जिले में विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। डीएमएफ मद से स्कूल, आंगनबाड़ी भवन, स्वास्थ्य सेवाएं, पेयजल आपूर्ति, सड़क निर्माण तथा पुल-पुलियों के निर्माण जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। इसके साथ ही शिक्षकों की नियुक्ति भी की जा रही है। उन्होंने कहा कि स्वीकृत कार्यों का समय-सीमा में पूर्ण होना अत्यंत आवश्यक है, ताकि आमजन को शीघ्र लाभ मिल सके। मंत्री देवांगन ने बताया कि प्रदेश के मुख्यमंत्री की मंशा है कि कोरबा जिले में डीएमएफ के तहत होने वाले सभी कार्य पारदर्शिता और गुणवत्ता के साथ समय सीमा में पूरे हों। निर्माण पोर्टल के माध्यम से आम नागरिक भी डीएमएफ के कार्यों की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि स्वीकृत कार्यों की नियमित समीक्षा करते हुए निर्माण गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए और नए प्रस्तावों को बजट प्रावधान के अनुरूप प्रस्तुत किया जाए। सांसद श्रीमती ज्योत्सना महंत ने कहा कि डीएमएफ मद के माध्यम से कोरबा जिले को विकास की नई पहचान प्राप्त होगी। जिले में जहां भी शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल तथा अन्य आवश्यक क्षेत्रों में राशि की जरूरत है, वहां इस फंड का प्रभावी उपयोग होना चाहिए। उन्होंने सभी कार्यों को समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ पूरा करने पर विशेष जोर दिया। कलेक्टर कुणाल दुदावत ने बताया कि वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना मुख्य सचिव की अध्यक्षता में निर्धारित किए गए केपीआई के अनुरूप तैयार की गई है। जिले में उच्च प्राथमिकता वाले कार्यों को विशेष महत्व दिया गया है और सभी कार्यों को गुणवत्तापूर्वक तथा समय-सीमा में पूर्ण करने के प्रयास किए जाएंगे। कलेक्टर ने बताया कि डीएमएफ से संबंधित शिकायतों के निराकरण हेतु टोल-फ्री नंबर जारी किया गया है तथा निर्माण पोर्टल के माध्यम से सभी कार्यों की प्रगति देखी जा सकती है। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के अभिसरण के साथ उच्च प्राथमिकता वाले विकास कार्यों को तेजी से पूरा किया जाएगा। उन्होंने जिले शिक्षा,स्वास्थ्य, पेयजल, पर्यावरण संरक्षण, उच्च शिक्षा के क्षेत्र में खनन प्रभावित विद्यार्थियों को दिए जाने वाले लाभ,खेल,अधोसंरचना, बेसलाइन सर्वे, पंचवर्षीय परिपेक्ष्य परियोजना,सड़क सुरक्षा आदि के संबंध में विस्तार से बताया। इस दौरान वनमंडलाधिकारी श्रीमती प्रेमलता यादव, कुमार निशांत, जिला पंचायत सीईओ एवं पदेन सचिव दिनेश नाग, निगमायुक्त  आशुतोष  पाण्डेय, अपर कलेक्टर देवेन्द्र पटेल, प्रशिक्षु आईएएस तरूण किरण तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी डीएमएफ के सदस्य श्रीमती किरण मरकाम, पार्षद नरेन्द्र देवांगन भी बैठक में शामिल हुए। खनिज संपदा से जनकल्याण की नई उड़ान वर्ष 2026-27 के लिए विकास का खाका तैयार कलेक्टर सभाकक्ष में जिला खनिज संस्थान न्यास कोरबा की शासी परिषद की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें खनिज क्षेत्रों के सतत विकास और प्रभावित समुदायों के कल्याण के लिए वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में यह जानकारी दी गई कि खनन प्रभावित क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए तीन चरणों में एक व्यापक बेसलाइन सर्वे किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत 5 विकास खंडों के 782 गाँवों को कवर कर आगामी पाँच वर्षों की परिप्रेक्ष्य योजना तैयार की जाएगी। पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन द्वारा निर्माण पोर्टल का शुभारंभ किया गया है, जो एक डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम के रूप में जिले की सभी परियोजनाओं की रियल-टाइम ट्रैकिंग और फंड मॉनिटरिंग सुनिश्चित करेगा।वर्ष 2026-27 के लिए 70 प्रतिशत राशि सीधे तौर पर उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा और पेयजल के लिए आवंटित की गई है। शिक्षा के क्षेत्र में 255 करोड़ रुपये के बजट से 16 पीएम स्कूलों में वर्चुअल रियलिटी लैब और नीट-जेईई हेतु आवासीय कोचिंग की सुविधा प्रदान की जाएगी, जबकि स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए 67.18 करोड़ रुपये से मोबाइल मेडिकल यूनिट और एम्बुलेंस सेवाओं को सुदृढ़ किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, पेयजल संकट के समाधान हेतु 150 नए ट्यूबवेल और सौर ऊर्जा संचालित पंपों की स्थापना की जाएगी। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए एंटी-स्मॉग गन और सघन वृक्षारोपण के माध्यम से ग्रीन बेल्ट विकसित करने पर भी विशेष जोर दिया गया है। प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना के अनुरूप, इन सभी प्रयासों का मुख्य लक्ष्य खनन प्रभावित क्षेत्रों के लोगों के लिए स्थायी और आत्मनिर्भर आजीविका के नए अवसर सृजित करना है।

पटना में गर्मी का प्रकोप, मौसम विभाग ने 40-50 किमी प्रति घंटे की तेज हवाओं का यलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया

पटना पटना में सुबह से ही तेज धूप निकली है। पिछले 24 घंटे से अचानक गर्मी बढ़ गई। लोगों के घरों से एसी चलने लगे। आज भी वहीं स्थिति है। तेज धूप निकली है। इधर, मौसम विभाग ने 12, 13 और 14 मई को बिहार के कई जिलों में तेज हवा के साथ बारिश और वज्रपात का अलर्ट जारी किया गया है।  इस दौरान हवा की रफ्तार 40-50 किमी प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। मौसम विभाग ने आम लोगों से सावधान रहने की अपील की है। आज इन जिलों में बारिश का अलर्ट मौसम विभाग ने पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सीवान, सारण, सीतामढ़ी, शिवहर, मुजफ्फरपुर, वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, अररिया, पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज में ऑरेंज अलर्ट बारिश और वज्रपात का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं पटना, बक्सर, भोजपुर, कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद, गया, जहानाबाद, अरवल, नालंदा, नवादा, शेखपुरा, लखीसराय, बेगूसराय,  खगड़िया, भागलपुर, मुंगेर बांका और जमुई में बारिश और वज्रपात का यलो अलर्ट जारी किया गया। जानिए पटना के मौसम का हाल मौसम विज्ञान केंद्र, पटना द्वारा जारी पूर्वानुमान के अनुसार राजधानी पटना में अगले पांच दिनों तक गर्मी का असर बना रहेगा। अधिकतम तापमान 36 से 38 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है, जबकि न्यूनतम तापमान 25 से 27 डिग्री सेल्सियस तक रह सकता है। 12 मई को आंशिक बादल छाए रहने के साथ बारिश या गरज के आसार जताए गए हैं। इस दिन अधिकतम तापमान 36 डिग्री और न्यूनतम 27 डिग्री रहने का अनुमान है। 13 और 14 मई को मौसम मुख्यतः साफ रहने की संभावना है। दोनों दिनों में अधिकतम तापमान 37 डिग्री और न्यूनतम 26 डिग्री रह सकता है। 15 मई को आसमान में आंशिक बादल छाए रहेंगे। इस दिन अधिकतम तापमान 36 डिग्रीऔर न्यूनतम 25 डिग्री रहने का अनुमान है। 16 मई को फिर से मौसम साफ रहने की संभावना है और तापमान बढ़कर 38 डिग्री तक पहुंच सकता है, जबकि न्यूनतम तापमान 25 डिग्री रहेगा।  

बिहार कैबिनेट अपडेट: आठ मंत्रियों को नए सरकारी आवास, कुमार शैलेंद्र ने संभाला पदभार

पटना बिहार सरकार के नए मंत्रियों को भवन निर्माण विभाग ने सरकारी बंगला आवंटित कर दिया है। स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार को दो देशरत्न मार्ग आवास तो शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी को 13 हार्डिंग रोड आवास आवंटित किया गया है। सोमवार को भवन निर्माण विभाग द्वारा जारी आवास आवंटन आदेश के अनुसार हार्डिंग रोड, देशरत्न मार्ग और गर्दनीबाग स्थित कई प्रमुख सरकारी आवास नए मंत्रियों को दिये गए हैं। कुल आठ मंत्रियों को नया आवास आवंटित किया गया है। पूर्व से जो मंत्री अपने सरकारी बंगले में रह रहे हैं, उन आवासों को पुन: उन्हें ही आवंटित कर दिया गया है। ऐसे 22 मंत्री हैं, जो पुराने बंगले में ही रहेंगे। विभाग के अनुसार, योजना एवं विकास मंत्री श्रीभगवान सिंह कुशवाहा को गर्दनीबाग स्थित 13/20 डुप्लेक्स आवंटित किया गया है। पथ निर्माण मंत्री कुमार शैलेंद्र को 12 हार्डिंग रोड स्थित आवास, डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन मंत्री नंद किशोर राम को 21 हार्डिंग रोड स्थित आवास, ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल को 33 हार्डिंग रोड स्थित आवास, समाज कल्याण मंत्री श्वेता गुप्ता को 15 हार्डिंग रोड स्थित आवास और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के मंत्री रामचंद्र प्रसाद को गर्दनीबाग स्थित 10/20 डुप्लेक्स आवास आवंटित किया गया है। अत्याधुनिक तकनीक से पुल और सड़कें बनेंगी – शैलेंद्र इधर म्राट कैबिनेट के कई मंत्रियों ने सोमवार को पदभार ग्रहण किया। पथ निर्माण मंत्री इं. कुमार शैलेंद्र ने कहा है कि सड़कों और पुलों के निर्माण में अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग होगा। इसके लिए राज्य के अभियंताओं को दूसरे राज्यों में प्रशिक्षण के लिए भी भेजा जाएगा। मंत्री सोमवार को पथ निर्माण विभाग में पदभार ग्रहण करने के बाद कहा कि महाराष्ट्र, गुजरात जैसे राज्यों में तकनीकी आधारित विकास कार्य हो रहे हैं, जिससे बिहार जैसा प्रदेश अभी अछूता है। मंत्री ने मीडिया से कहा कि वे खुद भी सिविल इंजीनियर हैं, इसलिए विकास कार्यों में अपनी दक्षता का इस्तेमाल करेंगे। किसी भी राष्ट्र के उत्थान के लिए सड़क मार्ग का सही होना जरूरी है। जनहित को प्राथमिकता दें अधिकारी – भगवान सिंह योजना एवं विकास विभाग के मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा ने कहा कि राज्य सरकार की विकासोन्मुख नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन, योजनाओं की समयबद्ध मॉनिटरिंग तथा डाटा आधारित नीति निर्माण को और अधिक सशक्त बनाया जाएगा। मंत्री ने सोमवार को पुराना सचिवालय स्थित विभागीय कार्यालय में पदभार ग्रहण करने के बाद योजनाओं की जानकारी ली और कई निर्देश दिये। विभाग की अपर मुख्य सचिव डॉ. एन विजयलक्ष्मी ने मंत्री को विभाग की संरचना, प्रमुख योजनाओं, सांख्यिकी एवं मूल्यांकन गतिविधियों तथा विभिन्न विकास कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी दी।

कड़ी सुरक्षा के बीच भोजपुर-बक्सर विधान परिषद उपचुनाव, 25 बूथों पर मतदान जारी

भोजपुर-बक्सर  भोजपुर सह बक्सर विधान परिषद उप चुनाव में मंगलवार को जनप्रतिनिधि मतदाताओं के फैसले की घड़ी है। मतदान के बाद जदयू, राजद समेत छह प्रत्याशियों का भाग्य मतपेटियों में बंद हो जाएगा। इसे लेकर जिले के कलेक्ट्रेट से सोमवार को मतपेटी और मतदान सामग्री लेकर कर्मी और पुलिस बल के जवान मतदान केंद्रों के लिए रवाना हो गए। सुबह आठ बजे से शाम चार बजे तक मतदान किया जाएगा। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच दोनों जिलों के 25 बूथों पर 6084 वोटर वोट देंगे। दोनों जिलों में 14 जोनल दंडाधिकारी तैनात किये गये हैं। सभी बूथों पर निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाये गये हैं। मतदाता बैलेट मतदान पत्र पर अपने चहेते प्रत्याशियों के चुनाव चिह्न पर मुहर लगाकर उनकी किस्मत लिखेंगे। दोनों जिलों में भयमुक्त, निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण तरीके से मतदान की प्रशासनिक तैयारी पूरी कर ली गई है। प्रत्याशियों ने अपनी ओर से हर तरह से मतदाताओं को अपने पक्ष में रिझाने का हरसंभव प्रयास कर लिया है। इस दौरान डीएम ने बताया कि सभी मतदान केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, ताकि भयमुक्त, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव संपन्न हो सके। मतदान की मॉनिटरिंग सीधे आयोग की ओर से की जायेगी। मतदान की सारी प्रशासनिक तैयारी पूरी कर ली गई है। एसपी राज की ओर से जानकारी दी गई कि जिले में भयमुक्त, निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण मतदान के लिए सभी मतदान केंद्रों पर पर्याप्त संख्या में सशस्त्र बलों की तैनाती की गई है। इसे मतदान केंद्रों के लिए रवाना कर दिया गया है। बिहार विधान परिषद के भोजपुर सह बक्सर उप चुनाव को लेकर जिला निर्वाची पदाधिकारी सह डीएम तनय सुल्तानिया की ओर से कलेक्ट्रेट सभागार में सोमवार को ब्रीफिंग की गई। इस दौरान कई आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। जिला पदाधिकारी की ओर से सभी दंडाधिकारियों व पुलिस पदाधिकारियों को भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप निष्पक्ष, शांतिपूर्ण एवं भयमुक्त मतदान सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया गया। साथ ही सभी मतदान केंद्रों पर विधि-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ प्रत्येक गतिविधि पर निगरानी रखने का आदेश दिया जाए। मतदान केंद्रों पर लगाए गए सीसीटीवी कैमरों की दिशा सही रहे, ताकि मतदान प्रक्रिया की समुचित निगरानी सुनिश्चित की जा सके। साथ ही यह भी निर्देश दिया गया कि किसी भी अनधिकृत व्यक्ति को मतदान केंद्र के अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाए। इनके भाग्य का फैसला होगा प्रत्याशी – दल कन्हैया प्रसाद – जनता दल यूनाइटेड सोनू कुमार राय – राष्ट्रीय जनता दल कन्हैया प्रसाद – निर्दलीय निरंजन कुमार राय – निर्दलीय मनोज कुमार उपाध्याय – निर्दलीय लालू प्रसाद यादव – निर्दलीय आरा में 14 को राजकीय कन्या प्लस टू उच्च विद्यालय में होगी गिनती डीएम तनय सुल्तानिया की ओर से सभी मतदान कर्मियों को आदेश दिया गया कि मतदान संपन्न होने के उपरांत सभी पोलिंग पार्टियां यह सुनिश्चित करें कि समस्त मतदान सामग्री राजकीय कन्या +2 उच्च विद्यालय, आरा स्थित वज्रगृह में सुरक्षित रूप से जमा कराई जाए। यहीं पर 14 मई को वोटों की गिनती होगी। जिला नियंत्रण कक्ष की स्थापना भोजपुर सह बक्सर विधान परिषद उप चुनाव को लेकर जिला स्तर पर नियंत्रण कक्ष की स्थापना की गई है। इन नंबरों पर आम लोग चुनाव से जुड़ी शिकायत और सुझाव प्राप्त कर सकते हैं। जिला नियंत्रण कक्ष का दूरभाष संख्या 06182-222005 है। जिला नियंत्रण कक्ष के वरीय प्रभारी पदाधिकारी नगर आयुक्त, नगर निगम, आरा को बनाया गया है। इनका मो. नंबर 94314493468 है। प्रभारी पदाधिकारी परियोजना प्रबंधक, जिला उद्योग केन्द्र हैं। इनका मोबाइल नंबर 6205158960 है। किस जिले में कितने वोटर कुल – भोजपुर – बक्सर कुल मतदाता- 3779 – 2305 पुरुष मतदाता- 1750 – 1082 महिला मतदाता- 2029 – 1223 मतदान केंद्र – 14 – 11 दोनों जिलों में पुरुष मतदाता- 2832 दोनों जिलों में महिला मतदाता- 3262

तरबूज खाने से बच्चे की मौत, 3 अन्य बच्चे अस्पताल में भर्ती मामले में जांजगीर कलेक्टर ने लिया तत्काल संज्ञान

तरबूज खाने से बच्चे की मौत, 3 अन्य बच्चे अस्पताल में भर्ती मामले में जांजगीर कलेक्टर ने लिया तत्काल संज्ञान जांच के लिए भेजे गए तरबूज के सैंपल स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में कर रही अन्य लोगों के स्वास्थ्य की जांच रायपुर जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम धुरकोट में तरबूज खाने के बाद एक बच्चे की मृत्यु तथा 3 अन्य बच्चों के बीमार होने का मामला सामने आया है। घटना की जानकारी मिलते ही कलेक्टर श्री जन्मेजय महोबे ने तत्काल संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम एवं संबंधित एसडीएम को जिला चिकित्सालय जांजगीर भेजा , कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम जांजगीर ने मेडिकल टीम को गांव में संबंधित परिवार के सभी लोगों के स्वास्थ्य जांच के लिए रवाना किया तथा तहसीलदार को गांव में इस बाबत पूरे मामले पर लगातार निगरानी रखने हेतु निर्देशित किया गया। सिविल सर्जन श्री एस. कुजूर ने बताया बच्चों के तरबूज और चिकन खाने बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। एक बच्चे की अस्पताल पहुंचने से पहले ही मृत्यु हो गई, जबकि 3 अन्य बीमार बच्चों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है जिनकी हालत अब सामान्य है ।कलेक्टर के निर्देश पर संबंधित तरबूज के सैंपल जांच हेतु भेज दिए गए हैं। साथ ही मृत बच्चे का पोस्टमार्टम कराया गया है और विसरा सुरक्षित रखा गया है ताकि मृत्यु के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। जिला प्रशासन द्वारा पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है तथा जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में अन्य लोगों के स्वास्थ्य की जांच कर निगरानी भी कर रही है।

जिसके पास शक्ति होगी, वही करुणा और मैत्री का मार्ग भी प्रशस्त कर पाएगा: सीएम योगी

हमने पिछली सरकारों के गड्ढों को भरा, अब यूपी को बुलेट ट्रेन की स्पीड से आगे बढ़ाने की बारी: सीएम योगी दिल्ली में आयोजित सीआईआई की वार्षिक बिजनेस समिट में सम्मिलित हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जिसके पास शक्ति होगी, वही करुणा और मैत्री का मार्ग भी प्रशस्त कर पाएगा: सीएम योगी 9 वर्ष पहले प्रदेश के नाम के आगे “उत्तर” तो था, लेकिन स्वयं उसके ऊपर अनेक प्रश्नचिह्न लगे हुए थे: योगी आदित्यनाथ 2017 के पहले अंधेरा होते ही सड़कों पर गड्ढे देखकर लोग समझ जाते थे कि यूपी का बॉर्डर आ गया: सीएम योगी मठ के प्रबंधन का अनुभव प्रदेश के संचालन में मददगार: मुख्यमंत्री नई दिल्ली  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने  नई दिल्ली में आयोजित सीआईआई की वार्षिक बिजनेस समिट-2026 में उत्तर प्रदेश के आर्थिक और औद्योगिक परिवर्तन की विस्तृत तस्वीर पेश करते हुए कहा कि हमने अभी तक नींव को पुख्ता किया है, पिछली सरकारों के पाप के गड्ढों को भरा है। अब डबल इंजन की सरकार को बुलेट ट्रेन की स्पीड से आगे बढ़ाने की बारी है। किसी भी राष्ट्र की आर्थिक प्रगति उसकी मैन्युफैक्चरिंग शक्ति पर निर्भर करती है। उद्योग और उद्यमिता मजबूत होंगे तो रोजगार, निवेश और समृद्धि स्वतः बढ़ेगी। दुनिया के अधिसंख्य संघर्षों और युद्धों के पीछे भी आर्थिक हित ही प्रमुख कारण रहे हैं। ऐसे में कोई भी देश अपने उद्यमियों की उपेक्षा नहीं कर सकता। भारत की आर्थिक और सामरिक शक्ति ही मानवता व कल्याण का मार्ग प्रशस्त करेगी सीएम योगी ने कहा कि आज का दिन बहुत महत्वपूर्ण है। 75 वर्ष पहले आज के दिन ही प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ महादेव की प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी द्वारा पुनर्प्रतिष्ठा संपन्न हुई थी। आज ही के दिन अटल जी ने पोखरण में परमाणु परीक्षण के माध्यम से ‘ऑपरेशन शक्ति’ का प्रदर्शन किया था। भारत की यह ताकत न केवल उसके सामर्थ्य का प्रतीक है, बल्कि वैश्विक मानवता एवं कल्याण का मार्ग भी प्रशस्त करती है। जिसके पास शक्ति होगी, जो सामर्थ्यवान होगा, वही करुणा व मैत्री का मार्ग भी प्रशस्त कर पाएगा। केवल हाथ फैलाने, गिड़गिड़ाने से दुनिया हमें गंभीरता से नहीं लेगी। कोई हमारी बात नहीं मानेगा और न ही हम पर विश्वास करेगा। अनेक प्रश्नचिह्न लगे थे उत्तर प्रदेश पर मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय ऐसा था, जब उत्तर प्रदेश अपनी पहचान के संकट से जूझ रहा था। प्रदेश का नाम सुनते ही लोग दूरी बना लेते थे। कानून व्यवस्था की स्थिति इतनी खराब थी कि हर वर्ष 300 से अधिक दंगे होते थे, गुंडा टैक्स वसूला जाता था और उद्यमी पलायन करने को मजबूर थे। उत्तर प्रदेश के नाम के आगे ‘उत्तर’ था, लेकिन स्वयं उसके ऊपर अनेक प्रश्नचिह्न लगे हुए थे। प्रदेश दंगों, माफिया राज, गुंडा टैक्स और पलायन की पहचान बन चुका था। यात्रा कर रहे लोग अंधेरा होते ही सड़कों पर गड्ढे दिखने पर समझ जाते थे कि यूपी का बॉर्डर आ गया है। 2017 से पहले यही उत्तर प्रदेश की पहचान बनी थी। मठ का अनुभव प्रदेश के संचालन में सहायता कर रहा मुख्यमंत्री ने बताया कि जब वह पहली बार सांसद बने थे और गोरखपुर के बंद पड़े फर्टिलाइजर कारखाने को शुरू कराने के लिए तत्कालीन केंद्रीय मंत्री से मिले, तो उनसे पूछा गया कि “यूपी में चुनाव जीतकर आए हैं, कितने लोगों का मर्डर हुआ था?”  यह उस दौर के उत्तर प्रदेश की छवि थी। 2017 में प्रधानमंत्री ने जब उन्हें उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी सौंपी, तब उनके पास प्रशासनिक अनुभव नहीं था। सीएम योगी ने कहा कि मैं तो मठ चलाता था, लेकिन मठ प्रबंधन का अनुभव मुझे प्रदेश चलाने में बड़ी सहायता कर रहा है। क्योंकि किसी भी मठ का अपना एक अनुशासन होता है। समयबद्ध तरीके से कार्यक्रम संचालित होते हैं। वित्त का भी अनुशासन होता है और हर प्रकार की सुरक्षा के लिए भी उस अनुशासन को लागू करना पड़ता है। मैंने उसी अनुभव को प्रदेश प्रशासन में लागू किया। सबसे पहली प्राथमिकता सुरक्षा का वातावरण स्थापित करना था। रूल ऑफ लॉ को लागू करने, पॉलिसी पैरालिसिस समाप्त करने और सेक्टोरल पॉलिसी बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया। कभी माफिया के लिए रोका गया था चीफ जस्टिस का काफिला मुख्यमंत्री ने प्रयागराज का उदाहरण देते हुए कहा कि एक समय ऐसी स्थिति थी कि एक माफिया ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के काफिले तक को रुकवा दिया था। लेकिन आज उत्तर प्रदेश में कोई भी माफिया ऐसा दुस्साहस नहीं कर सकता। अब बेटियां सुरक्षित माहौल में स्कूल जा रही हैं और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से पलायन करने वाले परिवार लौट रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कैराना का उल्लेख करते हुए कहा कि 2015 में एक व्यापारी की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद पूरा परिवार प्रदेश छोड़कर चला गया। लेकिन अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के बाद वही परिवार वापस लौटा। किसी भी राज्य के विकास की पहली शर्त सुरक्षा का वातावरण है और सरकार का दायित्व है कि वह हर नागरिक को सुरक्षा प्रदान करे। उद्योगों को ठोस सुरक्षा, कनेक्टिविटी और मजबूत सप्लाई चेन मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षा के साथ-साथ सरकार ने कृषि और उद्योग दोनों क्षेत्रों में व्यापक सुधार किए। किसानों की आत्महत्या रोकने, खेती को तकनीक से जोड़ने और एमएसएमई सेक्टर को मजबूत करने पर विशेष काम हुआ। सरकार ने बड़े निवेशों को आकर्षित करने के लिए लैंड बैंक तैयार किया और उद्योगों के लिए स्पष्ट नीतियां बनाई। 2018 में शुरू की गई वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट योजना आज प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिला रही है। ओडीओपी के माध्यम से डिजाइन, पैकेजिंग, तकनीक और ब्रांडिंग को बढ़ावा दिया गया। 96 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयां प्रदेश में रोजगार और उत्पादन का आधार बन चुकी हैं। एमएसएमई सेक्टर लगभग 3 करोड़ युवाओं को रोजगार दे रहा है। इसलिए यह सरकार की जिम्मेदारी है कि उद्योगों को सुरक्षा, कनेक्टिविटी और मजबूत सप्लाई चेन उपलब्ध कराई जाए। सांस्कृतिक-धार्मिक विरासत को मिली वैश्विक पहचान मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश में 156 करोड़ पर्यटक आए, जिनमें महाकुंभ में आए 66-67 करोड़ श्रद्धालु भी शामिल थे। काशी, अयोध्या, मथुरा-वृंदावन, विंध्याचल, नैमिषारण्य, बौद्ध और जैन सर्किट सहित प्रदेश की सांस्कृतिक-धार्मिक विरासत को विश्वस्तरीय पहचान दिलाने का कार्य किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश … Read more

डीएम डॉ. वीके सिंह का बड़ा एक्शन: जनशिकायत निस्तारण में ढिलाई पर अफसरों पर गिरी गाज

 मेरठ यूपी के मेरठ में अधिकारियों पर गाज गिरी है। डीएम डॉ. वीके सिंह ने जनशिकायतों (आईजीआरएस) के निस्तारण में लापरवाही को लेकर 9 अफसरों, अभियंताओं के एक दिन का वेतन कटौती, 155 अफसरों को कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है। विकास भवन सभागार में सोमवार को डीएम ने आईजीआरएस पोर्टल पर प्राप्त जनशिकायतों के निस्तारण की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में नौ विभागीय नोडल अधिकारियों, अभियंताओं को अनुपस्थित पाया गया। इन सभी के विरुद्ध कड़ा रुख अपनाते हुए डीएम ने उनके एक दिन के वेतन कटौती का निर्देश दिया। समीक्षा में पाया गया जनशिकायतों पर प्राप्त फीडबैक में 15 अधिकारियों के मामले में 100 प्रतिशत असंतुष्टि पाई गई। अर्थात शिकायतकर्ता संबंधित अधिकारी की कार्रवाई से 100 प्रतिशत असंतुष्ट है। डीएम ने इन सभी को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए स्पष्टीकरण प्राप्त करने के निर्देश दिए। डीएम ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे शिकायतों के निस्तारण में पारदर्शिता एवं गुणवत्ता बनाए रखें। यह सुनिश्चित करें कि प्रत्येक शिकायत का समाधान संतोषजनक रूप से हो। प्रत्येक शिकायतकर्ता से वार्ता की जाए और मौके पर जाकर सत्यापन कर रिपोर्ट लगाई जा सके। इन्हें जारी हुआ नोटिस जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, बीडीओ रजपुरा, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी सरूरपुर, बीडीओ हस्तिनापुर, बीडीओ दौराला, बीडीओ जानी, बीडीओ माछरा, बीडीओ मेरठ, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत, उप संचालक चकबंदी, मेरठ, जिला ग्राम्य विकास अभिकरण पीडी, पशु चिकित्सा अधिकारी मवाना, खंड शिक्षा अधिकारी मवाना, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (जिला चिकित्सालय) और सब रजिस्ट्रार, मवाना। इनके वेतन कटौती का निर्देश हुआ अधिशासी अभियंता, यांत्रिकी विभाग, अधिशासी अधिकारी, हस्तिनापुर, जिला कमांडेंट, होमगार्ड, खंड शिक्षा अधिकारी, माछरा, एआरटीओ (सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी), एआरएम रोडवेज, वरिष्ठ निरीक्षक बाट एवं माप विभाग, अधिशासी अभियंता जलकल विभाग और अधिशासी अधिकारी मवाना। कृषि विभाग ने नौ समितियों समेत 35 उर्वरक विक्रेताओं को नोटिस उधर, पीलीभीत में पिछले वर्ष के सापेक्ष वर्तमान वर्ष के अप्रैल महीने में 35 प्रतिशत अधिक यूरिया को खपा दिया गया। इस पर कृषि विभाग सतर्क हो गया। जिला कृषि अधिकारी ने नौ सहकारी समितियों समेत 35 उवर्रक विक्रेताओं को अधिक यूरिया बेचने पर नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। एम-पैक्स कैशोपुर, एम-पैक्स माधोटांडा, एम-पैक्स ललौरीखेड़ा, एम-पैक्स सुहास, एम-पैक्स ऐमी, एम-पैक्स चुटकुना, एम-पैक्स बीसलपुर, दीक्षित फर्टिलाइजर, मखदूम अशरफ खाद भंडार, श्रीराम खाद भंडार, शंकर इंटरप्राइजेज, गुरुनानक फर्टिलाइजर, गगन एग्री जंक्शन, सिंह फर्टिलाइजर, विपिन खाद भंडार, शर्मा खाद भंडार, न्यू सपन खाद भंडार से जवाब मांगा गया है। इन केंद्रों पर पीओएस मशीन के माध्यम से जो बिक्री दिखाई गई है। वह बीते साल के शून्य या बेहद कम आंकड़ों के मुकाबले इस बार कई गुना अधिक है। आईएफएमएस पोर्टल के माध्यम से कड़ी मानीटरिंग की जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, जिले में कुल यूरिया की खपत में 35 फीसदी की बढ़ोत्तरी पाई गई है। इस पर कृषि विभाग ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।

यूपी सरकार सख्त: 30 घंटे की ऑनलाइन ट्रेनिंग अनिवार्य, तभी जारी होगा लोन

लखनऊ मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास योजना के तहत अब किसी अभ्यर्थी को लोन आनलाइन प्रशिक्षण के बाद ही मिलेगा। यह राशि बैंक को प्रशिक्षण का प्रमाणपत्र मिलने के बाद जारी करेगी। राज्य सरकार ने इसके लिए नियमों में बदलाव कर दिया है। योजना के तहत किसी युवा उद्यमी को अब लोन स्वीकृत होने के बाद चुनिंदा तीन संस्थानों से 30 घंटे का प्रशिक्षण सत्र पूरा करना अनिवार्य होगा। विशेषज्ञों की खास ट्रेनिंग के बाद प्रमाणपत्र आनलाइन ही बैंक को प्राप्त हो जाएगा, जिसके मिलने पर बैंक लोन राशि आवेदक के खाते में ट्रांसफर कर देगा। कहीं कोई गड़बड़ी न हो इसके लिए विभाग ने फेस रिक्ग्नीशन प्रणाली अपनाई है। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत बैंकों के बड़ी संख्या में आवेदनों को निरस्त किए जाने और युवाओं को अलग-अलग सेक्टर में बेहतर प्रशिक्षण के लिए प्रणाली में बड़ा सुधार किया गया है। सीएम युवा योजना के तहत बिना बैंक गारंटी पांच लाख रुपये तक ब्याज मुक्त लोन हासिल करने में युवाओं को कोई कठिनाई न हो और कहीं कोई तकनीकी बाधा न आए, इसके लिए बड़ी पहल की गई है। योजना के तहत 28 अप्रैल तक लगभग 530487 आवेदन आए थे, जिनमें 448577 आवेदनों को बैंक को भेजा गया। इनमें बैंक ने करीब 180756 आवेदनों को स्वीकृति दी और 168516 आवेदनों के तहत 5913.13 करोड़ रुपये का लोन वितरित किया गया। लगभग 2.67 लाख आवेदनों को बैंक के स्तर से स्वीकृति न मिल पाने पर चिंता जताई गई थी। बैंक अधिकारियों ने आवेदनों में प्रोजेक्ट रिपोर्ट व अन्य तकनीकी खामियां बताई थीं। मिशन निदेशक के विजयेन्द्र पांडियन ने आवश्यक बदलाव कराकर एक मई से नई व्यवस्था लागू कराई है। एनसीवीटी के पाठ्यक्रम पर आधारित प्रशिक्षण सीएम युवा योजना के आवेदकों को प्रशिक्षण के लिए समाधान समिति, यूपीआईकान (यूपी इंडस्ट्रियल कंसल्टेंट्स लिमिटेड) और उद्यमिता विकास संस्थान को चुना गया है। तीनों संस्थानों को 25-25 जिले प्रदान किए गए हैं। बैंक से लोन स्वीकृत होने के बाद आवेदकों की उनके चुने हुए सेक्टर के अनुरूप पांच दिनों में 30 घंटे की आनलाइन ट्रेनिंग कराई जा रही है। अंतिम दिन लाइव सत्र में विशेषज्ञ भी जुड़े हैं, जो आवेदकों के प्रश्नों का समाधान भी करते हैं। सीएम युवा के नोडल अधिकारी सर्वेश्वर शुक्ला के अनुसार बैंक जिस सेक्टर या कारोबार के लिए लोन स्वीकृत करता है, उसके लिए विशेषज्ञों से खास ट्रेनिंग का माड्यूल एनसीवीटी के पाठ्यक्रम पर आधारित है। पंजीकरण से पहले 30 मिनट का वीडियो देखना अनिवार्य पोर्टल पर पंजीकरण के लिए भी काउंसलिंग सत्र के तहत आधे घंटे का प्रारंभिक वीडियो देखना अनिवार्य कर दिया गया है। पंजीकरण के लिए आवेदक को पहले उसके चुने गए उद्यम की बारीकियों व बैंक से लोन लेने के सेक्टर की जरूरी जानकारी अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जा रही है। विभाग प्रोजेक्ट रिपोर्ट भी उपलब्ध करा रहा है। मानक विहीन लैब व प्रशिक्षण देने वाली 400 कंपनियां हटाई गईं लखनऊ। यूपी में युवाओं को कौशल विकास का प्रशिक्षण देने में गड़बड़ी व लापरवाही करने वाली 400 प्रशिक्षण प्रदाता कंपनियों को हटा दिया गया है। लैब व प्रशिक्षण कार्यक्रम दोनों मानकों को पूरा नहीं कर रहे थे। ऐसे में उप्र कौशल विकास मिशन की ओर से इस बार बड़ी कार्रवाई की है। गुणवत्तापूर्ण ढंग से प्रशिक्षण दिलाने के सभी जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं। उप्र कौशल विकास मिशन की ओर से जिलों में युवाओं को कौशल विकास का प्रशिक्षण देने के लिए प्रशिक्षण प्रदाता कंपनियों का चयन किया जाता है। प्रशिक्षण के दौरान मिशन की ओर से टीमें भेजकर मानकों की जांच कराई जाती है। जांच में 400 प्रशिक्षण प्रदाता कंपनियां ऐसी पाईं गईं जिनके यहां लैब में प्रशिक्षण देने के पर्याप्त संसाधन तक नहीं थे। यही नहीं मनमाने ढंग से प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा था और सरकार से इसकी एवज में धन लिया जा रहा था। मिशन निदेशक पुलकित खरे की ओर से सत्र 2026-27 से कौशल प्रशिक्षण को लेकर पर्याप्त सख्ती की जा रही है। जिसका नतीजा है कि मानकों की जांच सख्ती से कर गड़बड़ी व लापरवाही करने वाली प्रशिक्षण प्रदाता कंपनियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। करीब 900 से अधिक कंपनियों को कौशल प्रशिक्षण देने के लिए चयनित किया जा चुका है और आगे मांग के अनुसार प्रशिक्षण लक्ष्य दिए जाएंगे। अच्छा कार्य करने पर टॉपअप की सुविधा भी है, यानी उन्हें और युवाओं को ट्रेनिंग देने का लक्ष्य दिया जाएगा। कौशल दृष्टि पोर्टल से प्रशिक्षण की निगरानी की जा रही है। जिस पर जियो टैगिंग के साथ प्रशिक्षण प्रदाताओं को प्रशिक्षण करते युवाओं की फोटो अनिवार्य रूप से अपलोड करनी होगी। फिलहाल अब गड़बड़ी नहीं चलेगी।

महिला स्व-सहायता समूहों की सफलता: सीताफल से बढ़ी आमदनी

सफलता की कहानी सीताफल उत्पादन एवं प्रसंस्करण से महिला स्व-सहायता समूहों की आर्थिक स्थिति में सुधार सिवनी जिला आजीविका संवर्धन के क्षेत्र में एक आदर्श मॉडल के रूप में उभरा भोपाल  वर्तमान में मांगलिक आयोजनों, विशेषकर विवाह समारोहों में सीताफल से निर्मित व्यंजनों, जैसे सीताफल रबड़ी की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है। इस बढ़ती मांग की पूर्ति के लिये ऑफ-सीज़न में भी सीताफल पल्प का प्रसंस्करण किया जा रहा है। मध्यप्रदेश के सिवनी जिला में उत्पादित सीताफल ने स्थानीय स्तर पर महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आजीविका संवर्धन का प्रभावी माध्यम स्थापित किया है। पूर्व में आर्थिक रूप से कमजोर स्थिति में जीवन यापन कर रहीं महिलाओं की आय एवं जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार आया है। आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में पहल सिवनी जिले के वन क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से उत्पन्न होने वाले सीताफल के संग्रहण, प्रसंस्करण एवं विपणन का कार्य वर्तमान में स्व-सहायता समूहों द्वारा संचालित किया जा रहा है। छपारा विकासखंड के अंतर्गत खेरमटाकोल (भूतबंधानी) स्थित महादेव ग्राम संगठन की अध्यक्ष श्रीमती अभिलाषा ने बताया कि समूह से जुड़ने के पश्चात महिलाओं को स्थायी रोजगार उपलब्ध हुआ है। वे सीताफल की पैकिंग एवं विपणन के माध्यम से वार्षिक रूप से उल्लेखनीय आय अर्जित कर रही हैं। उत्पादों का विपणन स्थानीय बाजारों के साथ-साथ राज्य के प्रमुख शहरों एवं छत्तीसगढ़ तक किया जा रहा है। सिवनी जिले में उत्पादित सीताफल की गुणवत्ता एवं स्वाद के कारण इसकी मांग राष्ट्रीय स्तर, विशेषकर महानगरों में भी बढ़ रही है। वन क्षेत्रों में सीताफल पौधों के संरक्षण एवं रखरखाव का कार्य भी महिला समूहों द्वारा किया जा रहा है। आय के स्थायी स्रोत का सृजन बरोड़ा सिवनी विकासखंड के मां दुर्गा महिला आजीविका ग्राम संगठन की अध्यक्ष श्रीमती रामप्यारी ने बताया कि सीताफल आधारित गतिविधियों से महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है तथा वे प्रतिवर्ष एक से डेढ़ लाख रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं। रोजगार सृजन एवं कौशल विकास आजीविका मिशन के अंतर्गत छपारा विकासखंड में 13 स्व-सहायता समूहों से जुड़ी सैकड़ों महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। प्रारंभिक चरण में 200 से अधिक महिलाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिला। समूहों को विपणन, ग्रेडिंग, प्रसंस्करण एवं पैकेजिंग संबंधी प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। गुणवत्तापूर्ण पैकेजिंग के माध्यम से उत्पादों को अन्य राज्यों तक सफलतापूर्वक भेजा जा रहा है। जिला परियोजना प्रबंधक श्री संजय रस्तोगी ने बताया कि सिवनी का सीताफल प्राकृतिक रूप से अत्यंत स्वादिष्ट एवं मीठा होता है। इस उत्पाद को “एक जिला एक उत्पाद” योजना में भी शामिल किया गया है, जिससे इसकी ब्रांड पहचान सुदृढ़ हुई है। सीताफल पल्प प्रसंस्करण की व्यवस्था बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए सीताफल के गूदे (पल्प) का प्रसंस्करण एवं संरक्षण किया जा रहा है। जिले में स्थापित दो प्रसंस्करण इकाइयों में पल्प को निम्न तापमान पर संरक्षित कर वर्षभर उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है। इससे बड़े आयोजनों एवं बाजार की मांग के अनुरूप निरंतर आपूर्ति संभव हो पाती है। आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर सिवनी एसआरएलएम भोपाल के राज्य परियोजना प्रबंधक (कृषि) श्री मनीष पंवार ने बताया कि सिवनी जिले की महिलाएं स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति कर रही हैं। अनुकूल जलवायु के कारण यहां उत्पादित सीताफल की गुणवत्ता उत्कृष्ट है, जिससे इसकी मांग निरंतर बढ़ रही है। सिवनी जिला वर्तमान में आजीविका संवर्धन के क्षेत्र में एक आदर्श मॉडल के रूप में उभर रहा है।