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हरियाणा राजनीति में हलचल: नायब सिंह सैनी ने बंसीलाल परिवार की वारिस पर जताया भरोसा, बदले समीकरण

चंडीगढ़. हरियाणा की राजनीति में एक समय जिस क्षेत्र को चौधरी बंसीलाल का अटूट गढ़ माना जाता था, उसी भिवानी-चरखी दादरी बेल्ट में अब भारतीय जनता पार्टी अपनी पकड़ को और मजबूत करने में जुटी है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी इस रणनीति को जमीनी स्तर पर लागू करते हुए राजनीतिक संतुलन और सामाजिक समीकरणों का विशेष ध्यान रख रहे हैं। भिवानी, चरखी दादरी, हिसार और महेंद्रगढ़ जैसे क्षेत्रों में भाजपा पहले से मजबूत स्थिति में है, लेकिन इन्हें पूरी तरह “भाजपामय” करने के लिए सैनी लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। श्रुति चौधरी को प्रमुखता: संदेश साफ इस राजनीतिक रणनीति का सबसे अहम संकेत तब मिला जब मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी दादरी रैली के लिए श्रुति चौधरी को अपने साथ विमान में लेकर गए। यह केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। श्रुति चौधरी, जो किरण चौधरी की बेटी और सुरेंद्र सिंह की पुत्री हैं, बंसीलाल परिवार की नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करती हैं। उन्हें लगातार मंच और महत्व देकर भाजपा इस क्षेत्र में पारंपरिक राजनीतिक प्रभाव को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है। तीन लालों से चौथे लाल तक: बदलती राजनीति हरियाणा की राजनीति लंबे समय तक तीन बड़े नेताओं—चौधरी देवीलाल, भजनलाल और चौधरी बंसीलाल—के इर्द-गिर्द घूमती रही। भाजपा के सत्ता में आने के बाद मनोहर लाल खट्टर के रूप में “चौथे लाल” का उदय हुआ और अब उसी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए सैनी नई रणनीतियों पर काम कर रहे हैं। संतुलन की राजनीति: जातीय और क्षेत्रीय समीकरण मुख्यमंत्री सैनी की कार्यशैली का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि वे केवल राजनीतिक विस्तार ही नहीं, बल्कि जातीय और भौगोलिक संतुलन को भी साध रहे हैं। अहीरवाल से लेकर बांगड़ बेल्ट तक विभिन्न क्षेत्रों में स्थानीय नेताओं को सम्मान और प्रतिनिधित्व देकर वे संगठन को मजबूत बना रहे हैं। उत्तराधिकार की घोषणा और भाजपा का लाभ हाल ही में किरण चौधरी ने अपनी बढ़ती आयु का हवाला देते हुए श्रुति चौधरी को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया है। इस फैसले के बाद सैनी द्वारा श्रुति को प्राथमिकता देना भाजपा के लिए एक रणनीतिक अवसर के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे भाजपा को भिवानी क्षेत्र में पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाने और अपनी स्थिति को और मजबूत करने में मदद मिलेगी। निष्कर्ष: रणनीति, सम्मान और विस्तार का संगम भिवानी बेल्ट में भाजपा का विस्तार केवल संगठनात्मक मजबूती का परिणाम नहीं है, बल्कि यह एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है जिसमें परंपरागत राजनीतिक परिवारों को सम्मान देकर नए समीकरण बनाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का यह दृष्टिकोण स्पष्ट करता है कि हरियाणा की राजनीति में अब केवल सत्ता नहीं, बल्कि संतुलन, सम्मान और सामंजस्य भी उतने ही महत्वपूर्ण हो गए हैं।

Baisakhi 2026: नंगल में उमड़ी भारी भीड़, सतलुज झील में श्रद्धालुओं का स्नान

नंगल/रूप नगर. पंजाब के नंगल में बैसाखी पर्व के अवसर पर आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है। बैसाखी के इस पावन दिन पर सतलुज झील में स्नान करने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। झील के किनारे स्थित विभोर साहिब घाट पर सुबह से ही धार्मिक माहौल बना हुआ है, जहां श्रद्धालु पूरी श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना कर रहे हैं। स्थानीय लोगों के साथ-साथ पंजाब के विभिन्न जिलों और पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं। तीन दिन तक चलने वाला पारंपरिक पंचगाठड़ा मेला इस अवसर का मुख्य आकर्षण बना हुआ है। मेले में धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिल रहा है। मान्यता के अनुसार बैसाखी के दिन सतलुज झील में स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी आस्था के चलते श्रद्धालु झील में डुबकी लगाने के बाद नाव में बैठे मलाहों को दान सामग्री अर्पित कर रहे हैं। घाट पर लगातार बढ़ती भीड़ के कारण पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा वातावरण बना हुआ है। सुरक्षा के कड़े प्रबंध श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष प्रबंध किए हैं। इस बार झील में बोटिंग करने वालों की संख्या सीमित कर दी गई है। पहले जहां एक नाव में 50 से अधिक लोग सवार हो जाते थे, वहीं अब सुरक्षा के मद्देनजर केवल 15 लोगों को ही अनुमति दी जा रही है। घाट पर पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। वृंदावन नांव घटना के बाद निगरानी तेज इस संबंध में एएसआई रामकुमार ने बताया कि सभी नियमों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके। झील में स्नान करने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए विशेष निगरानी रखी जा रही है। इसके अलावा सिविल डिफेंस विभाग के कर्मचारी भी मौके पर मौजूद हैं। दो गोताखोरों की तैनाती की गई है, जो किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा उनकी पहली प्राथमिकता है और इसके लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।

Raipur Heat Alert: पारा 41 डिग्री, 15 अप्रैल से लू चलेगी- सावधान रहने की सलाह

रायपुर. छत्तीसगढ़ में गर्मी अब अपने तेवर दिखा रहा है. राजधानी समेत प्रदेश के कई इलाकों में तेजी से तापमान में वृद्धि हो रही है. रविवार को सबसे ज्यादा गर्मी रायपुर में पड़ी, यहां सर्वाधिक अधिकतम तापमान 41 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. वहीं बिलासपुर और राजनांदगांव में भी 40 डिग्री का टार्चर लोगों को झेलना पड़ा. मध्य हिस्से में अगले कुछ दिनों में हीट वेव के हालात बनने के आसार हैं. रविवार को कैसा प्रदेश में मौसम ? प्रदेश में फिलहाल मौसम शुष्क बना हुआ है. पिछले 24 घंटों के दौरान कहीं भी बारिश नहीं हुई. सबसे ज्यादा दिन में तापमान रायपुर में 41 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ. वहीं सबसे कम न्यूनतम तापमान अंबिकापुर में 16.5 डिग्री सेल्यसियस दर्ज किया गया. मौसम विशेषज्ञ एचपी चंद्रा ने बताया कि एक द्रोणिका उत्तर पश्चिम विहार से मणिपुर तक 0.9 किलोमीटर ऊंचाई तक विस्तारित है. उत्तर पश्चिम से शुष्क और गर्म हवा आने के कारण प्रदेश में लगातार अधिकतम तापमान में वृद्धि होने की संभावना है. प्रदेश में 13 अप्रैल को मौसम शुष्क रह सकता है. मध्य भाग में 15 अप्रैल से ग्रीष्म लहर चलने और ग्रीष्म लहर जैसे स्थिति बनने की संभावना है. रायपुर में कैसा रहेगा मौसम ? मौसम विभाग ने राजधानी रायपुर में आज आकाश मुख्यतः साफ रहने की संभावना जताई है. अधिकतम तापमान 41 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है. 

नक्सल मोर्चे पर अलर्ट: सीमा के जंगल में मिला विस्फोटक जखीरा, CRPF की सघन तलाशी अभियान जारी

गरियाबंद छत्तीसगढ़ के गरियाबंद और ओडिशा के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय नक्सली मंसूबों को नाकाम करने की दिशा में सुरक्षाबलों को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है. ओडिशा के कोमना पुलिस कैंप से निकली सीआरपीएफ (CRPF) की टीम ने एक संयुक्त तलाशी अभियान के दौरान सोनाबेड़ा अभ्यारण्य से लगे ढेकुनपानी के घने जंगलों में भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री (Naxal Explosive Material) और संदिग्ध सामान बरामद किया है. इस बरामदगी से इलाके में दहशत फैलाने की एक बड़ी साजिश विफल हो गई है. ​गुप्त सूचना के आधार पर हुई कार्रवाई ​जानकारी के अनुसार, सुरक्षाबलों को लंबे समय से छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा (Chhattisgarh Odisha Border) पर संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिल रही थी. इसी आधार पर सीआरपीएफ की टीम ने ढेकुनपानी जंगल (Dhekunpani Forest) के रणनीतिक स्थानों पर सर्चिंग अभियान (Search Operation) तेज किया. जंगलों के भीतर छिपाई गई विस्फोटक सामग्री को जवानों ने बेहद सावधानी के साथ बरामद किया. सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन सामग्रियों का इस्तेमाल सुरक्षाबलों के वाहनों को निशाना बनाने या किसी बड़े आईईडी (IED) ब्लास्ट के लिए किया जाना था. इलाके में हाई अलर्ट, सर्चिंग तेज ​इस बरामदगी के बाद सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर दिए गए हैं. कोमना पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त टीमें अब आसपास के अन्य संदिग्ध ठिकानों पर भी नजर रख रही हैं. सोनाबेड़ा अभ्यारण्य का इलाका अपनी दुर्गम भौगोलिक संरचना के कारण बेहद संवेदनशील माना जाता है, जिसका फायदा उठाकर अक्सर असामाजिक तत्व अपनी गतिविधियों को अंजाम देने की कोशिश करते हैं. जवानों की मुस्तैदी का परिणाम ​अधिकारियों का कहना है कि समय रहते विस्फोटक सामग्री का मिलना जवानों की मुस्तैदी का परिणाम है. फिलहाल, सुरक्षाबलों ने ढेकुनपानी और उसके आसपास के जंगलों में गश्त और सर्चिंग अभियान को और अधिक सघन कर दिया है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को टाला जा सके. सीमावर्ती थानों को भी सतर्क रहने के निर्देश जारी किए गए हैं. खतरनाक है नक्सलियों की समाग्री सुरक्षाबलों द्वारा मौके से जब्त की गई सामग्रियों की सूची जो नक्सलियों की खतरनाक तैयारी की ओर इशारा करती है. ​70 जिलेटिन की छड़ें हैं, जो एक उच्च क्षमता वाला विस्फोटक है. इसका उपयोग ब्लास्ट के लिए किया जाता है. ​3 स्टील कंटेनर बरामद हुए हैं. इनका उपयोग अक्सर 'टिफिन बम' बनाने के लिए किया जाता है, जो काफी घातक साबित होते हैं. ​4 बंडल इलेक्ट्रॉनिक वायर हैं, जिनका विस्फोटकों को दूर से नियंत्रित करने या सर्किट तैयार करने के लिए इन तारों का उपयोग किया जाता है.

विद्युत कर्मियों का प्रदेशव्यापी आंदोलन, 15 अप्रैल से जन-जागरण अभियान शुरू

 लखनऊ उत्पीड़न की कार्यवाहियां वापस न होने पर गर्मियों में बिजली व्यवस्था प्रभावित होने की जिम्मेदारी शीर्ष प्रबंधन की होगी। यह चेतावनी विद्युत कर्मियों ने रविवार को विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति की बैठक में दी है। समिति ने 15 अप्रैल से 21 मई तक प्रदेशव्यापी जन-जागरण अभियान चलाने का ऐलान किया है। सभी डिस्कॉम मुख्यालय पर प्रदर्शन होंगे। उत्पीड़न होने पर सीधी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। लखनऊ में हुई बैठक में प्रदेशभर से लगभग 1000 से अधिक बिजली कर्मचारी एवं अभियंता पदाधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि आंदोलन के फलस्वरूप बिजली कर्मियों पर की गई सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां तत्काल वापस नहीं ली गईं तो आने वाली भीषण गर्मियों में बिजली व्यवस्था प्रभावित होने की पूरी जिम्मेदारी पावर कॉरपोरेशन के शीर्ष प्रबंधन की होगी। चेतावनी दी गई है कि यदि प्रबंधन अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए किसी भी कर्मचारी या अभियंता पर उत्पीड़नात्मक कार्रवाई करता है, तो बिजली कर्मी कार्यस्थल पर काम छोड़कर बाहर आने को बाध्य होंगे। इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी। इन तिथियों में होगा डिस्कॉम मुख्यालयों पर प्रदर्शन जनजागरण अभियान के तहत 24 अप्रैल को मेरठ डिस्कॉम, 2 मई को केस्को, 6 मई को आगरा, 14 मई को लखनऊ और 21 मई को वाराणसी डिस्कॉम पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। अभियान के तहत केंद्रीय पदाधिकारी पूरे प्रदेश का दौरा करेंगे और प्रत्येक जनपद में बिजली उपभोक्ताओं एवं किसानों के साथ संयुक्त सभाएं आयोजित की जाएंगी। बैठक में पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की नीतियों की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा गया कि एक ओर बिजली कर्मियों का उत्पीड़न किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर बड़े पैमाने पर संविदा कर्मियों की छंटनी की जा रही है। जिससे तकनीकी कार्यों में बाधा आ रही है। यदि यही स्थिति रही तो मेंटेनेंस के अभाव में ट्रांसफार्मर जलने और लाइनों में फॉल्ट की समस्याएं बढ़ेंगी, जिसका खामियाजा प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ेगा। प्रबंधन की इसी 'हठधर्मी' नीति के विरोध में अब कर्मचारी सड़क पर उतरने को तैयार हैं। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह केवल कर्मचारियों की मांगों की लड़ाई नहीं है, बल्कि विभाग को बचाने की मुहिम है। बैठक में संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे, राहुल बाबू कटियार, जितेन्द्र सिंह गुर्जर, महेंद्र राय, पीके दीक्षित, सुहेल आबिद, अंकुर पांडेय, चन्द्र भूषण उपाध्याय, मोहम्मद वसीम, बिमल चन्द्र पाण्डेय, मोहम्मद इलियास, प्रेम नाथ राय, श्रीचंद, सरजू त्रिवेदी आदि मौजूद रहे।

जयपुर-बीकानेर में सुरक्षा अलर्ट, विधानसभा और न्यायालयों की हुई सघन तलाशी

जयपुर राजस्थान में पिछले कुछ समय से सरकारी संस्थानों और न्यायिक परिसरों को निशाना बनाने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार सुबह प्रदेश की 'लोकतंत्र की सबसे बड़ी पंचायत' यानी राजस्थान विधानसभा और जयपुर-बीकानेर के जिला व सत्र न्यायालयों को बम से उड़ाने की धमकी मिलने से पूरे राज्य में हड़कंप मच गया। सुरक्षा एजेंसियां घंटों तक हलकान रहीं, हालांकि सघन तलाशी के बाद कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला विधानसभा को RDX से उड़ाने की धमकी दहशत की शुरुआत सोमवार सुबह उस वक्त हुई जब जयपुर स्थित विधानसभा सचिवालय के आधिकारिक ईमेल पर एक संदेश प्राप्त हुआ। इस ईमेल में दावा किया गया कि अगले 3 घंटे में विधानसभा भवन को आरडीएक्स से उड़ा दिया जाएगा। इस सूचना के बाद परिसर में अफरा-तफरी मच गई। सुरक्षा घेरा कड़ा कर दिया गया और आनन-फानन में कर्मचारियों को भवन से बाहर निकाला गया। बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वॉड ने चप्पे-चप्पे को खंगाला, लेकिन राहत की बात यह रही कि कोई विस्फोटक नहीं मिला। जयपुर सेशन कोर्ट: सुनवाई के बीच मची भगदड़ जयपुर जिला एवं सत्र न्यायालय को भी उनके ऑफिशियल आईडी पर इसी तरह का धमकी भरा मेल प्राप्त हुआ। गौरतलब है कि सोमवार से ही अदालतों का समय बदलकर सुबह 7:30 से दोपहर 1:00 बजे तक का हुआ है। ऐसे में जिस वक्त धमकी मिली, कोर्ट परिसर अधिवक्ताओं और परिवादियों से खचाखच भरा हुआ था। पुलिस ने तुरंत मोर्चा संभाला और पूरे परिसर को खाली कराया। भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच सुरक्षा एजेंसियों ने घंटों तक सर्च ऑपरेशन चलाया। सर्च के दौरान हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया, जिससे न्यायिक कामकाज पूरी तरह प्रभावित रहा। बीकानेर में फिर लौटी दहशत राजधानी के साथ-साथ बीकानेर के जिला एवं सत्र न्यायालय को भी बम से उड़ाने की धमकी मिली। बीकानेर में यह सूचना मिलते ही न्यायिक और प्रशासनिक महकमे में खलबली मच गई। जिला एवं सत्र न्यायाधीश की सूचना पर बार एसोसिएशन ने तत्काल अलर्ट जारी किया। यहां भी सुरक्षा एजेंसियों ने एडवोकेट चैंबर, न्यायिक अधिकारियों के कक्ष और कोर्ट रूम की बारीकी से जांच की। कई घंटों की मशक्कत के बाद जब कुछ नहीं मिला, तब जाकर प्रशासन ने राहत की सांस ली। जांच के घेरे में 'डिजिटल टेरर' सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, ये सभी धमकियां ईमेल के जरिए भेजी गई थीं। पुलिस अब साइबर सेल की मदद से इन ईमेल्स के आईपी एड्रेस को ट्रेस करने में जुटी है। प्राथमिक तौर पर इसे शरारत माना जा रहा है, लेकिन बार-बार महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को इस तरह निशाना बनाए जाने से सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

एससी-एसटी छात्रों की स्कॉलरशिप में देरी, केंद्रांश अगले महीने खाते में आने की संभावना

लखनऊ  प्रदेश में छात्रवृत्ति एवं शुल्क भरपाई योजना के तहत अनुसूचित जाति व जनजाति के छात्रों को केंद्रांश की राशि अगले माह मिलने की संभावना है। पांच लाख से ज्यादा छात्रों के खातों में अब तक केंद्रांश नहीं पहुंचा है। इससे छात्रों को दिक्कतों का सामना भी करना पड़ रहा है प्रदेश में ढाई लाख रुपये तक सालाना आमदनी वाले एससी-एसटी परिवारों के विद्यार्थियों को शुल्क की भरपाई के साथ छात्रवृत्ति का भुगतान किया जाता है। इस वर्ग के विद्यार्थियों को होने वाले भुगतान का 60 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार और शेष 40 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार देती है। राज्य सरकार ने विद्यार्थियों के खातों में 40 फीसदी हिस्सा भेज दिया है, लेकिन अभी काफी विद्यार्थी बचे हैं, जिनके खातों में केंद्रांश नहीं पहुंचा है। समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष में जिन विद्यार्थियों के खातों में अभी तक केंद्रांश नहीं पहुंचा है, वो 15 मई तक पहुंचने की उम्मीद है। जब राज्य सरकार भुगतान करती है, तो वही डाटा ऑटो फेच होकर केंद्र के पोर्टल पर चला जाता है। इस प्रक्रिया के पूरा होने में थोड़ा वक्त लगता है। इसलिए विद्यार्थी परेशान न हों, शीघ्र ही उनके खातों में शेष राशि भी पहुंच जाएगी।  

Sand Mining Update: बिहार में नीलामी रुकी, अब आसान होगी पर्यावरणीय क्लियरेंस प्रक्रिया

पटना. बिहार में बालू घाटों की नीलामी में आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए सरकार ने अब तेज़ी से कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। उप मुख्यमंत्री सह खान एवं भू-तत्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि पर्यावरणीय मंजूरी की जटिल प्रक्रियाओं को आसान और समयबद्ध बनाया जाए, ताकि नीलामी में हो रही देरी खत्म हो सके। राज्य में कुल 463 पीले बालू घाट चिन्हित हैं, लेकिन अब तक केवल 360 घाटों की ही नीलामी पूरी हो पाई है। शेष घाट पर्यावरणीय स्वीकृतियों में उलझे हुए हैं। सीटीई-सीटीओ प्रक्रिया आसान करने का निर्देश खासकर स्थापना की सहमति (CTE) और संचालन की सहमति (CTO) की लंबी प्रक्रिया नीलामी में सबसे बड़ी बाधा बन रही है। मंत्री ने इस स्थिति पर सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित विभागों को आपसी समन्वय बढ़ाने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि सभी जरूरी अनुमतियां तय समय सीमा के भीतर दी जाएं, ताकि प्रक्रिया में पारदर्शिता और गति दोनों सुनिश्चित हो सके। इसके साथ ही राज्य सरकार ने केंद्र के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को पत्र लिखकर मंजूरी प्रक्रिया को सरल और तेज करने का आग्रह भी किया है। निर्माण कार्यों को मिलेगी रफ्तार  सरकार का मानना है कि अगर पर्यावरणीय अनुमति की प्रक्रिया सुगम होती है, तो बचे हुए घाटों की नीलामी जल्द पूरी हो जाएगी। सरकार के इस कदम से न सिर्फ राज्य के राजस्व में बढ़ोतरी की उम्मीद है, बल्कि निर्माण कार्यों—खासकर सड़क, पुल और भवन निर्माण को भी नई रफ्तार मिलेगी। साथ ही, बालू की उपलब्धता बढ़ने से बाजार में कीमतों पर भी नियंत्रण संभव हो सकेगा।

Punjab Assembly में कड़ा कदम: भगवंत मान सरकार लाई सख्त बेअदबी कानून, उम्रकैद तक सजा संभव

चंडीगढ़. पंजाब विधानसभा के सत्र में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बेअदबी की घटनाओं को रोकने के लिए अहम विधेयक सदन में पेश किया गया। इस दौरान उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वह वॉक आउट न करे और इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा में भाग ले। बिल पेश होने के बाद सदन में इस पर विचार-विमर्श शुरू हो गया है। विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने सरकार से मांग की कि पिछले वर्ष गठित सेलेक्ट कमेटी की रिपोर्ट पहले सदन में पेश की जाए। उन्होंने कहा कि कमेटी को बने नौ महीने हो चुके हैं, इसलिए उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने सत्र की अवधि एक दिन बढ़ाने का सुझाव भी दिया। इस पर स्पीकर ने जवाब देते हुए कहा कि कमेटी अपना कार्य कर रही है और उचित समय पर रिपोर्ट सदन के समक्ष रखी जाएगी। वहीं, मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने इस विधेयक को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह एक व्यापक और पवित्र कानून है, जिसमें बेअदबी के मामलों की जांच तय समय सीमा में पूरी की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच किसी भी स्थिति में उच्च स्तर से नीचे के अधिकारी द्वारा नहीं की जाएगी और इसमें किसी तरह का समझौता नहीं होगा। कैबिनेट द्वारा पहले ही मंजूर किए जा चुके इस संशोधन विधेयक में ‘जगत ज्योति श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार अधिनियम-2008’ को और मजबूत बनाने का प्रावधान किया गया है। प्रस्तावित संशोधन के तहत बेअदबी के दोषियों के लिए उम्रकैद जैसी कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। उद्देश्य: धार्मिक ग्रंथों की पवित्रता की रक्षा करना इस सत्र में सबसे अहम मुद्दा रहा श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी से जुड़ा प्रस्तावित नया कानून। कैबिनेट द्वारा पहले ही मंजूरी दिए गए इस विधेयक को अब विधानसभा में पेश किया गया है। इसका नाम ‘जागत ज्योति श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक 2026' रखा गया है। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य धार्मिक ग्रंथों की पवित्रता की रक्षा करना और बेअदबी जैसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाना है। संशोधन समय की जरूरत  सरकार का कहना है कि पिछले वर्षों में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की कई घटनाएं सामने आई हैं, जिनसे समाज में गहरी नाराजगी और तनाव की स्थिति पैदा हुई है। इन घटनाओं ने न केवल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है बल्कि सामाजिक सद्भाव को भी प्रभावित किया है। सरकार ने यह भी कहा कि मौजूदा कानूनों में ऐसे मामलों के लिए सज़ा पर्याप्त कठोर नहीं है, इसलिए सख्त संशोधन की आवश्यकता महसूस की गई। कई कठोर दंडात्मक प्रावधान भी हैं शामिल प्रस्तावित संशोधन के तहत बेअदबी के मामलों में दोषी पाए जाने पर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा अन्य कठोर दंडात्मक प्रावधान भी शामिल किए गए हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। सरकार का दावा है कि यह कानून समाज में शांति, भाईचारे और धार्मिक सम्मान को मजबूत करेगा। मंत्रिमंडल ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह कदम किसी भी समुदाय को निशाना बनाने के लिए नहीं बल्कि धार्मिक पवित्रता और सामाजिक संतुलन बनाए रखने के लिए उठाया गया है। विधेयक के अनुसार, जानबूझकर धार्मिक ग्रंथों की अवमानना करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

कानून पर हमला! तस्करों और भीड़ की हिंसा में पुलिस टीम जख्मी, 10 गिरफ्तार

महासमुंद. छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में फरार आरोपियों को गिरफ्तारी करने पहुंची पुलिस टीम पर भीड़ ने हमला कर दिया. घटना में टीआई समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए. इसके बावजूद बहादुर पुलिसकर्मियों ने किसी तरह आरोपियों को थाने लेकर आई. मामले में 10 आरोपियों को गिरफ्तारी के बाद जेल भेज दिया है. पूरा मामला पटेवा थाना अंतर्गत पचारी ग्राम का है. जानकारी के अनुसार, थाना पटेवा के आबकारी एक्ट के एक मामले में फरार आरोपी विजय मारकण्डेय और विनोद मारकण्डेय की गिरफ्तारी के लिए सांकरा थाना के टीआई  उत्तम तिवारी समेत अन्य पुलिसकर्मी पहुंचे थे. पटेवा में अलग-अलग थाना और पुलिस इकाइयों के बल की संयुक्त टीम ने ग्राम पचरी में दबिश दी थी. पुलिस ने आरोपियों को घेराबंदी कर दबोच लिया. वाहन में बैठाने के दौरान आरोपियों ने विरोध करते हुए पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट शुरू (Attack On Police In CG) कर दी. साथ ही उन्होंने अपने परिजनों और आसपास के लोगों को उकसाया, जिसके बाद बड़ी संख्या में लोग लाठी-डंडों, लोहे की छड़ और ईंट-पत्थरों के साथ मौके पर पहुंच गए. भीड़ ने पुलिस टीम पर हमला कर दिया, जिसमें थाना प्रभारी उत्तम तिवारी को सिर, गले और सीने में गंभीर चोटें आईं. वहीं महिला आरक्षक समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए. पुलिस वाहन में भी की तोड़फोड़ भीड़ के हमले के दौरान पुलिस वाहनों को भी नुकसान पहुंचाया गया, जिसमें हाईवे पेट्रोलिंग वाहन का कांच टूट गया. घटना के दौरान आरोपियों के परिजनों ने उन्हें छुड़ाने की कोशिश करते हुए पुलिस कार्रवाई में बाधा डाली. हालांकि पुलिस टीम ने किसी तरह स्थिति को संभालते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर थाना पटेवा ले आई. पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी विजय मारकण्डेय, विनोद मारकण्डेय सहित उनके परिजनों और अन्य लोगों के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा, जानलेवा हमला, मारपीट और अन्य सुसंगत धाराओं में मामला दर्ज कर दस लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है. वहीं फरार तीन आरोपी की तलाश में जुटी है.