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एमपी ट्रांसको के इंजीनियरों की केस स्टडी को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान

भोपाल.  मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) के इंजीनियरों द्वारा तैयार एक तकनीकी केस स्टडी प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय जर्नल, वॉटर एंड एनर्जी इंटरनेशनल में प्रकाशित हुई है। इसकी व्यापक सराहना इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग क्षेत्र मे देश -विदेश के नामी विशेषज्ञों ने भी की है। एमपी ट्रांसको के इंजीनियर जितेंद्र तिवारी एवं इंजीनियर आशुतोष राय द्वारा तैयार की गई यह स्टडी केस 35 वर्ष से अधिक पुराने ट्रांसमिशन लाइनों में बिजली गिरने से होने वाली समस्याओं के समाधान पर आधारित है। इसमें स्पेशल पिट आधारित अर्थिंग तकनीक के माध्यम से टॉवर फुटिंग इम्पीडेंस कम करने और फॉल्ट क्लियरिंग समय सुधारने का सफल प्रयोग प्रस्तुत किया गया है। इससे ट्रांसमिशन सिस्टम की स्थिरता और विश्वसनीयता में सुधार होता है। 

एक वक्त था जब ईसीजी भी नहीं था, आज वही प्रदेश जीवन की रक्षा कर रहा है

एक रात, जब ईसीजी भी नसीब नहीं था… आज वही प्रदेश जीवन बचा रहा डॉ. शरत चंद्रा ने सुनाया 2005 का अनुभव, बताया-कैसे बदली उत्तर प्रदेश में हृदय के उपचार की तस्वीर लखनऊ सीएसआई के एनआईसी-2026 सम्मेलन के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी के भीड़ भरे सभागार में जब डॉ. शरत चंद्रा ने बोलना शुरू किया, तो उनका स्वर सिर्फ एक डॉक्टर का नहीं, बल्कि एक बेटे का भी था जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था की सीमाओं को बहुत करीब से महसूस किया था। उन्होंने वर्ष 2005 की एक घटना साझा की।  उन्होंने बताया कि दिसंबर की एक रात करीब 10 बजे चंदौसी स्थित उनके घर से पिता का फोन आया कि बेटा सीने में दर्द हो रहा है, क्या करूं? एक डॉक्टर बेटे के रूप में उन्होंने सहज ही कहा- पापा, कहीं पास में जाकर ईसीजी करा लीजिए। पिता ने कहा कि इस समय रात में ईसीजी कहां हो पाएगा, सुबह ही कराएंगे। डॉ. चंद्रा ने कहा कि उस रात सिर्फ मेरे पिता ही नहीं, मैं भी जागता रहा। अगले दिन ईसीजी सामान्य आया, लेकिन वह रात उनके मन में एक सवाल छोड़ गई कि क्या हमारे पास समय पर इलाज की व्यवस्था है?  उन्होंने कहा कि आज, दो दशक बाद, उसी उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदल चुकी है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि अब दिल का दौरा पड़ने पर मरीज को सुबह का इंतजार नहीं करना पड़ता। ‘हृदय सेतु’ जैसे प्रयासों ने बड़े संस्थानों जैसे एसजीपीजीआई, केजीएमयू और डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस को जिला अस्पतालों से जोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि पहले जहां एंजियोप्लास्टी जैसे उपचार केवल बड़े शहरों तक सीमित थे, वहीं अब सुल्तानपुर, जौनपुर, बहराइच, गोंडा और बस्ती जैसे जिलों में भी यह सुविधा उपलब्ध है। अब मरीज को केवल दूरी नहीं, बल्कि समय से भी लड़ना नहीं पड़ता।  अपने संबोधन के अंत में डॉ. चंद्रा ने कहा कि यह बदलाव सिर्फ आंकड़ों का नहीं है, यह भरोसे का बदलाव है। एक समय था जब रात में ईसीजी भी संभव नहीं था, और आज वही प्रदेश जीवन बचाने के लिए हर पल तैयार खड़ा है। यही बदला हुआ उत्तर प्रदेश है, यही उत्तम प्रदेश है।

आंगनबाड़ी केवल पोषण नहीं, बल्कि संस्कार निर्माण की पाठशाला बने : मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े

रायपुर.  महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों को केवल पोषण और पूर्व-प्राथमिक शिक्षा तक सीमित न रखते हुए उन्हें ‘संस्कार निर्माण की पाठशाला’ के रूप में विकसित करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि 3 से 6 वर्ष की आयु बच्चों के सर्वांगीण विकास की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है, जिसमें दिए गए संस्कार जीवनभर उनकी सोच और व्यवहार को दिशा देते हैं। मंत्री राजवाड़े अपने निवास कार्यालय में आयोजित बैठक में राज्य शैक्षणिक अनुसंधान केंद्र के ईसीसीई के राज्य स्तरीय रिसोर्स पर्सन एवं विभागीय अधिकारियों से चर्चा कर रही थीं। बैठक में प्रदेश के 52,518 आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों को संस्कारपरक शिक्षा से जोड़ने के लिए ठोस पहल करने पर विचार किया गया। उन्होंने कहा कि बच्चे का पहला विद्यालय उसका घर और आंगनबाड़ी होता है, इसलिए यहां दी जाने वाली शिक्षा में भारतीय जीवन मूल्यों का समावेश अत्यंत आवश्यक है। संस्कारपरक शिक्षा का उद्देश्य बच्चों में प्रारंभिक अवस्था से ही बड़ों का सम्मान, सत्य बोलना, स्वच्छता, अनुशासन, प्रकृति प्रेम तथा ‘धन्यवाद’ और ‘क्षमा’ जैसे व्यवहारिक गुणों का विकास करना है। मंत्री ने आंगनबाड़ी केंद्रों में इस प्रकार की शिक्षा को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए कई व्यवहारिक सुझाव दिए। उन्होंने दिन की शुरुआत प्रार्थना, योग और प्राणायाम से करने, पंचतंत्र एवं लोककथाओं के माध्यम से नैतिक शिक्षा देने, त्योहारों और महापुरुषों की जयंती के जरिए सांस्कृतिक जुड़ाव बढ़ाने, तथा दैनिक व्यवहार में ‘नमस्ते’, स्वच्छता और अनुशासन को शामिल करने पर बल दिया। साथ ही बच्चों में श्रम के प्रति सम्मान और प्रकृति प्रेम विकसित करने के लिए पौधारोपण एवं स्वच्छता जैसे छोटे-छोटे कार्यों को दिनचर्या का हिस्सा बनाने की बात कही। उन्होंने अभिभावकों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि महीने में ‘संस्कार सभा’ आयोजित कर माता-पिता को भी इस प्रक्रिया से जोड़ा जाए, ताकि घर और आंगनबाड़ी दोनों स्थानों पर बच्चों को समान वातावरण मिल सके। मंत्री राजवाड़े ने कहा कि इस पहल से बच्चों में आत्मविश्वास, भाषा कौशल और सामाजिक व्यवहार का विकास होगा, साथ ही कुपोषण के साथ ‘चरित्र पोषण’ भी सुनिश्चित किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि संस्कारित बच्चे आगे चलकर अनुशासित विद्यार्थी और जिम्मेदार नागरिक बनते हैं, जिससे समाज और राष्ट्र की मजबूत नींव तैयार होती है। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को ‘दूसरी माँ’ की भूमिका निभाते हुए बच्चों को प्रेमपूर्वक संस्कार देने का आह्वान किया। वर्तमान सामाजिक परिवेश में बढ़ती सामाजिक बुराइयों और मानवीय मूल्यों में गिरावट को देखते हुए उन्होंने प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र को ‘संस्कार-केन्द्र’ के रूप में विकसित करने पर जोर दिया।

ऊर्जा मंत्री तोमर बोले – मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी ने रचा स्वर्णिम ऊर्जा वर्ष 2025-26

भोपाल.  ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड (MPPGCL) ने वित्तीय वर्ष 2025-26 का समापन अभूतपूर्व उपलब्धियों और उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ करते हुए विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। कंपनी के चारों ताप विद्युत गृहों अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई, सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी, संजय गांधी ताप विद्युत गृह बिरसिंगपुर व सिंगाजी ताप विद्युत गृह दोंगलिया ने सामूहिक रूप से वित्तीय वर्ष 2025-26 में 26,582.7 मिलियन यूनिट ताप विद्युत उत्पादन कर प्रदेश को निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की। इस दौरान चारों ताप विद्युत गृह ने 81.45 % प्लांट उपलब्धता फैक्टर (PAF) बनाए रखते हुए परिचालन दक्षता के उच्चतम मानक स्थापित किए। विद्युत गृहों की सभी इकाइयों ने निर्धारित मानकों के अनुरूप हीट रेट, विशिष्ट तेल खपत (Specific Oil Consumption) व ऑक्जलरी पावर कंजम्पशन हासिल करते हुए उत्कृष्ट तकनीकी प्रदर्शन किया। एमपीईआरसी के मानकों से बेहतर रहा प्रदर्शन परिचालन मानकों के संदर्भ में इस वर्ष अमरकंटक ताप विद्युत गृह फेज-III, सतपुड़ा ताप विद्युत गृह फेज-IV, सिंगाजी ताप विद्युत गृह फेज-II व फेज-I ने मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग (MPERC) द्वारा निर्धारित PAF मानकों से अधिक प्रदर्शन किया। सतपुड़ा ताप विद्युत गृह यूनिट-10 ने 98.29%, सिंगाजी सुपर ताप विद्युत परियोजना यूनिट-1 ने 94.55%, यूनिट-3 ने 88.77% और संजय गांधी ताप विद्युत गृह यूनिट-3 ने 85.92% PAF हासिल करते हुए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। विशिष्ट तेल खपत में भी कंपनी ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए MPERC मानकों से कम खपत दर्ज की। वहीं अमरकंटक ताप विद्युत गृह फेज-III एवं सतपुड़ा ताप विद्युत गृह फेज-IV का हीट रेट निर्धारित मानकों से बेहतर रहा जबकि सिंगाजी ताप विद्युत गृह फेज-III का हीट रेट MPERC मानकों के लगभग समतुल्य रहा। कंपनी कार्मिकों की कर्मठता को दिया श्रेय प्रबंध संचालक मनजीत सिंह ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में पॉवर जनरेटिंग कंपनी द्वारा किए गए उत्कृष्ट प्रदर्शन का श्रेय अभियंताओं, तकनीकी कार्मिकों व ठेका श्रमिकों को देते हुए कहा कि हमारा उद्देश्य न केवल प्रदेश की विद्युत आवश्यकताओं की सतत् आपूर्ति सुनिश्चित करना है बल्कि तकनीकी दक्षता, पर्यावरणीय जिम्मेदारी व परिचालन उत्कृष्टता के क्षेत्र में राज्य की विद्युत उत्पादन क्षमता को राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत पहचान भी स्थापित करना है। पॉवर जनरेटिंग कंपनी अपनी विभिन्न परियोजनाओं और नीतियों के विस्तार के साथ भविष्य में भी इसी प्रतिबद्धता के साथ विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करने के लिए सतत् प्रयासरत रहेगी।  

बायोमेट्रिक अपडेट नहीं कराया तो कट जाएगा राशन

 पटना सरकारी राशन का लाभ लेने वाले करोड़ों लाभार्थियों के लिए जरूरी खबर है। सरकार ने राशन वितरण प्रणाली (PDS) को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए ई-केवाईसी लागू कर दी है। अब तक ढिलाई बरत रहे कार्डधारकों के लिए राहत की बात यह है कि अंतिम तिथि को बढ़ाकर 30 अप्रैल कर दिया गया है, लेकिन इसके बाद कोई मौका नहीं मिलेगा। अगर इस डेडलाइन तक बायोमेट्रिक अपडेट नहीं हुआ, तो राशन कार्ड को 'अवैध' मानकर सूची से हटा दिया जाएगा। सरकार के इस कड़े कदम का सीधा उद्देश्य उन लोगों को सिस्टम से बाहर करना है जो गलत तरीके से योजना का लाभ उठा रहे हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, हजारों ऐसे मामले सामने आए हैं जहाँ मृत व्यक्तियों के नाम पर राशन उठाया जा रहा है या एक ही आधार कार्ड कई राशन कार्डों से लिंक है। ई-केवाईसी प्रक्रिया के जरिए सरकार 'एक व्यक्ति, एक पहचान' के नियम को सख्ती से लागू कर रही है। इससे फर्जी लाभार्थियों का पत्ता साफ होगा और सही मायने में जरूरतमंदों को अनाज मिल सकेगा। नाम कटा तो रुक जाएंगी ये सुविधाएं अगर आपका नाम राशन कार्ड से कट गया, तो डीलर की मशीन पर आपका नाम शो नहीं करेगा, जिससे आपका कोटा बंद हो जाएगा। इसके साथ ही, उज्ज्वला योजना (गैस सब्सिडी) और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं का डेटा अक्सर राशन कार्ड से जुड़ा होता है, वहां भी तकनीकी दिक्कतें आ सकती हैं। यहां तक राशन कार्ड को पते और पहचान के प्रमाण के तौर पर इस्तेमाल करना मुश्किल हो जाएगा। क्या करना होगा? इसकी प्रक्रिया बहुत आसान है। कार्ड में जितने भी सदस्यों के नाम दर्ज हैं, उन सभी को अपने आधार कार्ड के साथ राशन डीलर की दुकान पर जाना होगा। वहां पॉश मशीन पर अंगूठा लगाकर बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण करना होगा। याद रहे, घर के किसी एक सदस्य के जाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि उन सभी का वहां पहुंचना जरूरी है जिनका नाम कार्ड में है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अंतिम तिथि के बाद सर्वर डाउन होने या तकनीकी खराबी का बहाना नहीं चलेगा, इसलिए समय रहते इस जिम्मेदारी को पूरा कर लें। 30 तारीख तक सभी सदस्यों का बायोमेट्रिक अपडेट न होने पर राशन कार्ड से नाम काट दिया जाएगा।

श्रमिक सम्मेलन में विकास की नींव रखने वाले हाथों का सम्मान

रायपुर जगदलपुर के स्थानीय वीर सावरकर भवन में शुक्रवार को निर्माण श्रमिकों के सशक्तिकरण और उन्हें शासन की योजनाओं से जोड़ने के उद्देश्य से एक श्रमिक सम्मेलन का आयोजन किया गया। श्रम विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल के मार्गदर्शन में आयोजित इस गरिमामयी कार्यक्रम में विकास की रीढ़ कहे जाने वाले श्रमिकों का न केवल सम्मान किया गया, बल्कि उन्हें विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित भी किया गया। इस सम्मेलन में समूचे जिले के सुदूर अंचलों से आए बड़ी संख्या में श्रमिकों ने हिस्सा लिया, जिससे पूरा परिसर उनकी उत्साहजनक उपस्थिति से सराबोर नजर आया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित सांसद बस्तर महेश कश्यप और नगर निगम सभापति खेमसिंह देवांगन सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने दीप प्रज्वलित कर आयोजन का शुभारंभ किया। इस अवसर पर जन प्रतिनिधियों ने अपने संबोधन में श्रमिकों को राष्ट्र का असली निर्माता बताते हुए कहा कि सरकार का मुख्य लक्ष्य अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के जीवन स्तर में सुधार लाना है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद महेश कश्यप ने अपने उद्बोधन में कहा कि श्रमिक केवल मजदूरी करने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि नए भारत के निर्माण का आधार है। उन्होंने श्रमिकों को उनके अधिकारों के प्रति सजग रहने का आह्वान करते हुए विश्वास दिलाया कि सरकार सदैव उनके साथ खड़ी है। कश्यप ने शासन द्वारा श्रमिकों के लिए चलाए जा रहे विभिन्न 31 योजनाओं की जानकारी और अन्य सुरक्षा योजनाओं के लाभ पर जोर देते हुए कहा कि हर श्रमिक का पंजीकरण होना अनिवार्य है ताकि शासन की मदद उन तक बिना किसी बाधा के पहुँच सके। इस अवसर पर नगर निगम सभापति खेमसिंह देवांगन ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। मंच से जनप्रतिनिधियों के कर-कमलों द्वारा पात्र हितग्राहियों को विभिन्न विभागीय योजनाओं के तहत सहायता राशि के चेक वितरित किए गए, जिसे पाकर श्रमिकों के चेहरों पर संतोष और खुशी के भाव स्पष्ट नजर आए। इस सम्मेलन की सबसे बड़ी विशेषता मौके पर ही समाधान की रही, जहाँ श्रम विभाग द्वारा लगाए गए विशेष पंजीकरण शिविरों के माध्यम से नए श्रमिकों का तत्काल पंजीयन किया गया। श्रम पदाधिकारी भूपेंद्र नायक ने बताया कि इस मुहिम का उद्देश्य बस्तर के उन मेहनतकश लोगों को विभागीय योजनाओं के दायरे में लाना है जो अब तक जागरूकता के अभाव में लाभ से वंचित थे। इस सार्थक प्रयास से बस्तर के दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले श्रमिक भी अब सरकार की कल्याणकारी नीतियों से सीधे जुड़ सकेंगे। इस अवसर पर क्षेत्र के जनप्रतिनिधिगण, गणमान्य नागरिक और श्रम विभाग के अधिकारी कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में श्रमिक उपस्थित थे।

केमिकल और औद्योगिक आपदा के लिए सचेत रहने की जरूरत : राज्य स्तरीय मॉक एक्सरसाईज की जायेगी

रायपुर.  औद्योगिक एवं केमिकल डिजास्टर के संबंध में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में राज्य शासन के विभिन्न विभागों के अधिकारी कर्मचारियों के लिए राज्य स्तरीय औद्योगिक आपदा प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में भारत सरकार गृह मंत्रालय राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण नई दिल्ली के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा वीडियों कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मार्गदर्शन दिया गया। प्रशिक्षण में औद्योगिक या केमिकल आपदा के अवसर की जाने वाली सावधानियां डिजास्टर के समय की व्यापक तैयारियां पहले से करने के संबंध में विभिन्न विभागों के अधिकारियों को मार्गदर्शन दिया गया।  राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण नई दिल्ली के अधिकारियों ने वीडियों कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये जानकारी दी गई कि आगामी दिनों में छत्तीसगढ़ में केमिकल एवं औद्योगिक आपदा के संबंध में राज्य स्तरीय मॉक एक्सरसाईज कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें औद्योगिक या केमिकल आपदा के समय कैसे व्यापक प्रबंधन एवं सुरक्षा किया जाये। आपदा के समय आपातकालीन तैयारियां, अग्निशामक तैयारियां, आपदा के समय जन सामान्य में जागरूकता सहित विविध आपदा प्रबंधन के तौर-तरीकों और तैयारियां के संबध में व्यापक मार्गदर्शन दिया गया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आयोजित इस बैठक में गृह मंत्रालय भारत सरकार के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, राज्य शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, एन.डी.आर.एफ., एस.डी.आर.एफ. अन्य पुलिस फोर्सेस के अधिकारी सहित उद्योग, परिवहन, स्वास्थ्य, गृह, और राज्य शासन के विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं सभी जिलों के जिला आपदा प्राधिकरण के अधिकारी शामिल हुये। 

खेत तालाब, अमृत सरोवर से किसानों को सिंचाई के लिए मिलेगा पानी

भोपाल.  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में 19 मार्च से जल गंगा संवर्धन अभियान का तीसरा चरण चलाया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत पुरानी जल संरचनाओं को नया जीवन देने के साथ ही बारिश के पानी की प्रत्येक बूंद को बचाने का कार्य किया जा रहा है। कूप रिचार्ज पिट, खेत तालाब, अमृत सरोवार, तालाब निर्माण, कंटूर ट्रेंच सहित तालाबों, बावड़ियों, नदियों की सफाई, रैन वाटर हार्वेस्टिंग जैसे कार्य किए जा रहे हैं। अभियान में प्रदेश के 18 विभाग सहभागिता निभा रहे हैं। अभियान अंतर्गत अकेले सागर जिले में 5800 से अधिक जल संरचनाओं पर कार्य किया जा रहा है। इसमें कूप रिचार्ज पिट, खेत तालाब, अमृत सरोवार, तालाब निर्माण, कंटूर ट्रेंच के कार्य शामिल हैं। कार्यों के पूरा हो जाने से सागर जिले में सूख पड़े कुओं को नया जीवन मिलेगा। कूप रिचार्ज पिट बनने से कुओं का जल स्तर बढ़ेगा। साथ ही अमृत सरोवर, खेत तालाब और तालाबों में बारिश का पानी जमा होने से किसानों को सिंचाई, उद्यानिकी व मछली पालन जैसे कार्यों के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी मिलेगा।  

ठगी का शिकार हुआ छात्र बना मास्टरमाइंड, 9 राज्यों में फैलाया जाल

 पटना पटना साइबर पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। उसने नौ राज्यों के लोगों से करोड़ों की ठगी करने वाले तीन साइबर ठग को गिरफ्तार किया है। आरोपित प्लेब्वॉय बनाने और धनी एप द्वारा लोन दिलाने के नाम पर झांसा देकर लोगों को अपना शिकार बनाते थे। चार महीने से पटना में बैठ दिल्ली, यूपी, केरल समेत नौ राज्यों के लोगों से ठगी कर रहे थे। आरोपितों की पहचान नवादा के वारिसलीगंज निवासी गुलशन कुमार व शुभम राज और इसी जिले के शाहपुर के रहने वाले विक्की कुमार के रूप में हुई है। उनके पास से एक लैपटॉप, 11 मोबाइल फोन और दस्तावेज आदि बरामद हुए हैं। डीएसपी व साइबर थाना प्रभारी नीतीश चंद्र धारिया ने बताया कि अन्य राज्यों की साइबर पुलिस को सूचना मिली थी की पटना के साइबर ठग प्लेब्वॉय बनाने और धनी एप द्वारा लोन दिलाने के नाम पर लोगों से ठगी कर रहे हैं। साइबर पुलिस ने जानकारी जुटाई तो पता चला कि बेऊर स्थित एक अपार्टमेंट से गिरोह का संचालन हो रहा है। इसके बाद पुलिस ने बुधवार को शिव नगर स्थित ममता कुंज अपार्टमेंट में छापा मारा। वहां से गुलशन कुमार, शुभम राज और विक्की कुमार पकड़े गए। उनके पास से मोबाइल और लैपटॉप आदि बरामद हुए। जालसजों में दो स्नातक और एक इंटर का है छात्र गुलशन कुमार, शुभम राज ने स्नातक तक पढ़ाई की है। वहीं विक्की कुमार इंटर का छात्र है। गुलशन गिरोह का मास्टर माइंड है। साइबर पुलिस अन्य राज्यों की पुलिस से संपर्क कर यह जानकारी जुटा रही है कि इन ठगों ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है खुद हुआ शिकार तो बन गया ठगी का मास्टरमाइंड नौ राज्यों में साइबर ठगी के लिए करोड़ों रुपये उगाहने वाले गैंग के सरगना की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है। गिरोह का मास्टरमाइंड गुलशन कुमार कभी खुद साइबर ठगी का शिकार हुआ था। पूछताछ में उसने पुलिस को बताया कि वह पटना में आकर प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहा था। इसी दौरान उसके साथ साइबर ठगी हुई। एक बार पैसे गंवाने के बाद उसने खुद ही साइबर ठगी का मायाजाल बुनना शुरू कर दिया। एपीके फाइल भेज बनाते थे शिकार पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि उन्होंने खुद को छात्र बताकर बेऊर में फ्लैट लिया था। वे सोशल मीडिया पर प्लेब्वॉय बनाने और धनी एप द्वारा आसानी से लोन दिलाने का विज्ञापन देते थे। विज्ञापन देखकर जो भी प्लेब्वॉय बनने या लोन लेने की इच्छा जताता था उनसे वे प्रोसेसिंग फीस व अन्य बहाने से रुपये अपने खाते में मंगाते थे। इसके बाद लोगों से संपर्क खत्म कर लेते थे। यही नहीं गिरोह के सदस्य प्लेब्वॉय और लोन संबंधी एपीके फाइल लोगों के फेसबुक, टेलीग्राम और व्हाट्स एप पर भी भेजते थे। एपीके फाइल पर क्लिक करते ही मोबाइल फोन हैक हो जाता था। बाद में वे उनका बैंक खाता खाली कर देते थे। टेलीग्राम एप से सीखी ठगी, फिर दोस्तों को जोड़ा उसने टेलीग्राम एप पर साइबर ठगी के वीडियो देखने शुरू कर दिए। वीडियो देखने के बाद उसे लगा कि साइबर ठगी कर आसानी से रुपये बनाए जा सकते हैं। आरोपितों ने पुलिस को बताया कि टेलीग्राम पर हर प्रकार की साइबर ठगी के वीडियो अपलोड हैं। उन वीडियो को देखने के बाद उन्हें ठगी के अलग-अलग तरीका के बारे में पता चला।

लखीमपुर खीरी में 1311 करोड़ की 538 परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास करेंगे सीएम योगी

लखनऊ/लखीमपुर खीरी.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को लखीमपुर खीरी के दौरे पर रहेंगे, जहां वह पलिया व मोहम्मदी विधानसभा क्षेत्रों में जनसभाओं को संबोधित करने के साथ सात विधानसभा क्षेत्रों को करोड़ों रुपये की विकास परियोजनाओं के लोकार्पण/शिलान्यास की सौगात देंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री विभिन्न लाभार्थी परिवारों को भूमि आवंटन पत्र, आवास की चाबी और चेक भी सौंपेंगे।  मुख्यमंत्री यहां कुल 1311 करोड़ रुपये की 538 परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास करेंगे। इनमें 356 करोड़ रुपये की 345 परियोजनाओं का लोकार्पण और 955 करोड़ रुपये की 193 परियोजनाओं का शिलान्यास शामिल है। इन परियोजनाओं का लाभ जिले के सात विधानसभा क्षेत्रों लखीमपुर, गोला, श्रीनगर, पलिया, निघासन, मोहम्मदी और धौरहरा के लोगों को मिलेगा। कार्यक्रम की शुरुआत चंदन चौकी (पलिया) से होगी, जहां मुख्यमंत्री जनसभा को संबोधित करने के साथ ही थारू जनजाति के परिवारों को भूमि स्वामित्व अधिकार पत्र तथा लाभार्थियों को डेमो चेक प्रदान करेंगे। इसके अलावा मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत लाभार्थियों को आवास की चाबी का वितरण और निर्माण कार्यों का लोकार्पण/शिलान्यास भी करेंगे। इस दौरान बच्चों द्वारा मुख्यमंत्री का स्वागत ‘ओडीओपी’ योजना के तहत निर्मित हैट पहनाकर किया जाएगा। इसके बाद मुख्यमंत्री मियांपुर (मोहम्मदी) में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचेंगे, जहां वह विस्थापित परिवारों को भूमि अधिकार पत्र प्रदान कर एक ऐतिहासिक पहल करेंगे। यहां विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को डेमो चेक वितरित किए जाएंगे और मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत लाभार्थियों को उनके आवास की चाबी सौंपी जाएगी। साथ ही सीएम योगी कई विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास करेंगे। थारू जनजाति के परिवारों को मिलेगा पूर्ण स्वामित्व अधिकार थारू जनजाति के परिवारों के प्रति मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए योगी सरकार ने उन्हें पूर्ण स्वामित्व के साथ भूमि अधिकार देने का निर्णय किया है। इसके तहत तहसील पलिया में थारू जनजाति के 34 गांवों के 4356 परिवारों को 5338 हेक्टेयर भूमि पर भौमिक अधिकार प्रदान किए हैं। वर्ष 1976 में इन परिवारों को भूमि उपयोग का अधिकार मिला था, लेकिन अब योगी सरकार उन्हें पूर्ण स्वामित्व अधिकार देने जा रही है। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि उन्हें सामाजिक सुरक्षा और सम्मान भी मिलेगा। उपनिवेश योजना के तहत 2350 परिवारों को मिला अधिकार इसी तरह, उपनिवेश योजना के तहत नदी कटान से प्रभावित परिवारों को बसाने के लिए 12 उपनिवेश (कालोनियों) में बसे 2350 परिवारों को 4251 हेक्टेयर भूमि का आवंटन किया गया। इनमें अनुसूचित जाति के 1077 और पिछड़े वर्ग के 874 परिवार शामिल हैं। वर्षों से इन परिवारों के पास भूमि उपयोग का अधिकार तो था, लेकिन स्वामित्व नहीं था। अब इसी भूमि पर उन्हें मालिकाना अधिकार प्रदान किया जा रहा है। यह निर्णय उनके जीवन में स्थायित्व और सुरक्षा लेकर आएगा और उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर देगा। पूर्वी पाकिस्तान से विस्थापित 331 हिंदू परिवारों का पुनर्वास इसी प्रकार पूर्वी पाकिस्तान/बांग्लादेश से विस्थापित होकर आए 331 हिंदू परिवारों का पुनर्वास भी लखीमपुर खीरी में किया गया है। इन परिवारों को जिले की विभिन्न तहसीलों धौरहरा, मोहम्मदी और गोला में बसाया गया था, जहां उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर कृषि योग्य भूमि भी उपलब्ध कराई गई है। मियांपुर में बसे 156 परिवारों को प्रति परिवार करीब 4.75 एकड़ भूमि दी गई है, जबकि अन्य गांवों में भी परिवारों को औसतन 3 से 7 एकड़ तक जमीन आवंटित की गई है। बुनियादी सुविधाएं इन गांवों तक पहुंचाई योगी सरकार द्वारा इन परिवारों को केवल जमीन ही नहीं दी गई, बल्कि उन्हें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, किसान क्रेडिट कार्ड, पेंशन योजनाएं और सुकन्या समृद्धि योजना समेत कई कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी प्रदान किया जा रहा है। साथ ही, राशन, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, सड़क और रोजगार से जुड़ी बुनियादी सुविधाएं भी इन गांवों तक पहुंचाई गई हैं। हर वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ना योगी सरकार की प्राथमिकता मुख्यमंत्री का यह दौरा विकास, पुनर्वास और सामाजिक न्याय के समेकित मॉडल को जमीन पर उतारने का प्रयास है। भूमि स्वामित्व अधिकार, आवास, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के माध्यम से योगी सरकार ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि विकास के साथ-साथ समाज के हर वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ना योगी सरकार की प्राथमिकता है।