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High Court Verdict: प्रोजेक्ट बंद होने पर संविदा वैज्ञानिक को नहीं मिली राहत, सेवा बहाली की याचिका खारिज

चंडीगढ़ पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब स्टेट काउंसिल फार साइंस एंड टेक्नोलॉजी में कार्यरत संविदा वैज्ञानिक दिव्या कौशिक को राहत देने से इनकार करते हुए उनकी  अपील   खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि जिस परियोजना के लिए उनकी नियुक्ति की गई थी, वह 31 मार्च 2026 को समाप्त हो चुकी है और ऐसी स्थिति में संविदा सेवा को जारी रखने का कोई आधार नहीं बनता। जस्टिस जसगुरप्रीत सिंह पुरी और जस्टिस अमरजोत भट्टी की खंडपीठ ने यह फैसला उस अपील पर सुनाया, जिसमें एकल पीठ द्वारा पारित 23 मार्च और 6 अप्रैल 2026 के अंतरिम आदेशों को चुनौती दी गई थी। अदालत ने कहा कि मूल  याचिका अभी भी एकल पीठ के समक्ष लंबित है और अपील केवल अंतरिम आदेशों के खिलाफ दायर की गई है, इसलिए हस्तक्षेप का कोई औचित्य नहीं है। 2011 में जॉइन की थी सेवा याचिकाकर्ता दिव्या कौशिक की ओर से कहा गया कि उन्हें वर्ष 2011 में पेटेंट इनफार्मेशन सेंटर (पीआईसी) में वैज्ञानिक के पद पर संविदा आधार पर नियुक्त किया गया था और समय-समय पर उनका कार्यकाल बढ़ाया जाता रहा। उन्होंने  याचिका में उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उनके पद को समाप्त कर दिया गया था। एकल पीठ ने 16 जुलाई 2024 को यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। हालांकि बाद में परिषद की ओर से दायर आवेदन पर एकल पीठ ने 23 मार्च 2026 को आदेश में संशोधन करते हुए कहा था कि यदि परियोजना 31 मार्च 2026 के बाद भी बढ़ाई जाती है तो यथास्थिति का आदेश जारी रहेगा, अन्यथा परिषद उस आदेश से बाध्य नहीं होगी। इस आदेश को वापस लेने की मांग भी 6 अप्रैल 2026 को खारिज कर दी गई थी। 5 वर्षों के लिए थी परियोजना सुनवाई के दौरान परिषद की ओर से अदालत को बताया गया कि 'पेटेंट इनफार्मेशन सेंटर' परियोजना पांच वर्ष की अवधि के लिए थी और यह 31 मार्च 2026 को पूरी हो चुकी है। इसलिए परियोजना के साथ सह-समाप्त (को-टर्मिनस) संविदा नियुक्ति भी स्वत  समाप्त हो गई। परिषद ने यह भी बताया कि नियुक्ति पत्र में स्पष्ट शर्त थी कि परियोजना की अवधि समाप्त होने पर अनुबंध समाप्त माना जाएगा। खंडपीठ ने कहा कि एकल पीठ द्वारा पारित आदेश न तो अवैध हैं और न ही उनमें किसी प्रकार की त्रुटि है। चूंकि परियोजना का विस्तार नहीं हुआ और वह पूर्ण हो चुकी है, इसलिए संविदा कर्मचारी की सेवा जारी रखने का कोई कानूनी आधार नहीं बचता। इन टिप्पणियों के साथ अदालत ने अपील खारिज कर दी

हरियाणा में HTET परीक्षा को लेकर तैयारी तेज, 4-5 जुलाई के एग्जाम से पहले अधिकारियों को सख्त आदेश

भिवानी. हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड भिवानी द्वारा आगामी 4 व 5 जुलाई, 2026 को आयोजित होने वाली हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा के सुव्यवस्थित व नकल विहीन संचालन हेतु बोर्ड मुख्यालय भिवानी पर जिला शिक्षा अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक की। बैठक की अध्यक्षता बोर्ड के चेयरमैन शंकर लाल धूपड़ ने की। धूपड़ ने बताया कि इस परीक्षा में प्रदेशभर में 2 लाख 33 हजार 294 अभ्यर्थी 383 परीक्षा केंद्रों पर प्रविष्ट होंगे। आगामी 4 जुलाई को सायंकालीन सत्र में लेवल-3 की परीक्षा होगी, जिसमें 73,091 अभ्यर्थी तथा 5 जुलाई को प्रातःकालीन सत्र में लेवल-2 की परीक्षा में 1, 19, 141 अभ्यर्थी एवं सायंकालीन सत्र में लैवल-1 की परीक्षा में 41,062 अभ्यर्थी शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा के अभ्यर्थी वीरवार सायं से बोर्ड की आधिकारिक वैबसाइट के माध्यम से अपने आवंटित परीक्षा-शहर की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि परीक्षा हेतु प्रवेश-पत्र बाद में जारी किए जाएंगे। बोर्ड अध्यक्ष ने वीडियो कांफ्रैंस के माध्यम से सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को संबोधित करते हुए एचटेट परीक्षा-2025 के सुसंचालन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। परीक्षा केंद्रों की निरीक्षण व्यवस्था को चाक-चौबंद किया गया है। नकल व अन्य अनियमितताओं पर सख्ती से रोक लगाने के लिए प्रभावशाली उडनदस्तों की नियुक्ति की जा रही है। प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर बोर्ड की ओर से एक-एक अधिकारी/कर्मचारी/प्रतिनिधि तथा जिला प्रशासन की ओर से भी एक-एक प्रशासनिक/राजपत्रित अधिकारी की नियुक्ति की गई है। जिला शिक्षा अधिकारी 3 से 5 जुलाई तक कंट्रोल रूम स्थापित करेंगे उन्होंने कहा कि सभी जिला शिक्षा अधिकारी 3 से 5 जुलाई, 2026 तक अपने कार्यालय में एक-एक कंट्रोल रूम स्थापित करेंगे। इस कंट्रोल रूम पर जिला शिक्षा अधिकारी अपने कार्यालय के 1 अधिकारी, 2 सहायक/लिपिक तथा 1 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को नियुक्त करेंगे। कंट्रोल रूम पर नियुक्त अधिकारी बोर्ड मुख्यालय पर स्थापित कंट्रोल रूम से सीधा संपर्क बनाए रखेंगे। नेत्रहीन/अशक्त अभ्यर्थियों को 50 मिनट अतिरिक्त समय मिलेगी बोर्ड अध्यक्ष ने बताया कि नेत्रहीन/अशक्त अभ्यर्थियों को 20 मिनट प्रति घंटा के हिसाब से कुल 50 मिनट अतिरिक्त समय दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि महिला अभ्यर्थियों को मंगलसूत्र पहनने, बिंदी व सिंदूर लगाने की ही छूट होगी। अन्य किसी प्रकार के आभूषण जैसे अंगूठी, चैन, बालियां इत्यादि ले जाने की स्वीकृति नहीं होगी। सिख अभ्यर्थियों को धार्मिक आस्था के चिन्ह की अनुमति होगी। उन्होंने बताया कि सभी उड़नदस्ते / ऑब्जर्वर द्वारा समय-समय पर जैमर, बायोमैट्रिक डाटा कैप्चरिंग, वीडियोग्राफी, सी.सी.टी.वी. कैमरों को चैक करना अति आवश्यक है कि वह भलीभांति कार्य कर रहे हैं। बिना पहचान-पत्र प्रवेश नहीं उन्होंने बताया कि परीक्षा केंद्र में बिना पहचान-पत्र किसी भी अधिकारी/कर्मचारी का प्रवेश नहीं होगा। फर्म की ओर से नियुक्त कर्मचारी जैसे कैमरा-मैन, बायोमैट्रिक-मैन, सी.सी.टी.वी. इत्यादि के लिए भी फोटोयुक्त पहचान-पत्र पहनना अनिवार्य है। परीक्षा के दौरान यदि किसी परीक्षा केंद्र पर कोई अप्रिय घटना घटित होती है तो उसकी सूचना भी अविलंब बोर्ड मुख्यालय के नियंत्रण कक्ष पर हैल्पलाइन नं 01664-254302, 254304, 254601, 254604 तथा व्हाट्सअप नबर 8816840349 पर दी जानी है।

Ratlam News: मुहर्रम जुलूस में दर्दनाक हादसा, ताजिया हाईटेंशन तार से टकराया; 3 की मौत, 20 से अधिक घायल

रतलाम रतलाम जिले के ग्राम हतनारा में मुहर्रम के अवसर पर गुरुवार को बड़ा हादसा हो गया। लगभग 10 फीट ऊंचा ताजिया पंचमुखी महादेव मंदिर के समीप से गुजर रहा था, तभी वह 11 केवी हाईटेंशन विद्युत लाइन की चपेट में आ गया। करंट फैलने से 3 लोगों की मौत हो गई और करीब 20 लोग झुलसकर घायल हो गए। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने तत्काल घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया। गंभीर रूप से घायल लोगों को बेहतर उपचार के लिए रतलाम मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया। हादसे में एक व्यक्ति की मौत की पुष्टि मेडिकल कॉलेज में उपचार के दौरान हुई है। पल भर में चीख-पुकार में बदल गया माहौल वहीं, दो अन्य गंभीर घायलों को निजी अस्पताल ले जाया गया था, जहां उनकी भी मृत्यु होने की सूचना सामने आ रही है। हालांकि प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग की ओर से इन दोनों मौतों की अधिकारिक पुष्टि नहीं की गई थी। हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस तथा विद्युत विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। घटना के बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल रहा तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण अस्पतालों की ओर पहुंच गए। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। घायलों का उपचार जारी है और मृतकों व घायलों की संख्या को लेकर अधिकारिक जानकारी का इंतजार किया जा रहा है। अधिकारिक पुष्टि के बाद आंकड़ों में परिवर्तन संभव है। यह दिल दहला देने वाली घटना पिपलौदा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले हतनारा गांव की है। बताया जा रहा है कि जुलूस में लगभग 200 लोग शामिल थे। लोग पूरे उत्साह और अकीदत के साथ ताजिया लेकर आगे बढ़ रहे थे। इसी दौरान ताजिये का ऊपरी हिस्सा करीब 20 फीट की ऊंचाई से गुजर रही हाईटेंशन बिजली की लाइन से छू गया। पलक झपकते ही पूरे ताजिये में तेज करंट दौड़ गया और जो लोग उसे कंधा दे रहे थे, वे इस जानलेवा करंट की चपेट में आ गए।

दो पत्रकार सड़क हादसे में घायल, कार चालक पर जानबूझकर कुचलने के प्रयास का आरोप

डोंगरगढ़. राजनादगांव के सनसिटी क्षेत्र में बीती रात सड़क हादसा हुआ है. तेज रफ्तार कार और बाइक के बीच हुई टक्कर में दो पत्रकार घायल हो गए. एक के पैर में गंभीर चोट आई है. घटना के बाद उन्हें तत्काल उपचार के लिए अस्पताल लाया गया. आरोप है कि मौके पर कार चालक ने पत्रकारों को कथित तौर पर कुचलने की कोशिश की. इस घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आया है. जानकरी के अनुसार, एक कार्यक्रम की कवरेज के बाद पत्रकार योगेश साहू और सौरभ अपने घर लौट रहे थे. इसी दौरान सनसिटी के पास एक तेज रफ्तार सफेद रंग की ब्रेजा कार (क्रमांक CG 04 NE 1199) ने अचानक सामने आ गई, जिससे बाइक सवार जा टकराए. हादसे में पत्रकार सौरभ के पैर में गंभीर चोट आई है. पत्रकारों का आरोप है कि जब उन्होंने चालक को मोबाइल कैमरे में कैद करने की कोशिश की तब कार से कई बार कुचलने का प्रयास किया गया. घटना का वीडियो भी सामने आया है. वीडियो में सफेद रंग की कार तेज रफ्तार से पत्रकार की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है और पत्रकार जान बचाने के लिए दौड़ता नजर आता है. हालांकि वीडियो की सत्यता और परिस्थितियों की पुष्टि पुलिस जांच का विषय है. पत्रकारों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है.

लोकतंत्र सेनानी सम्मेलन में CM मोहन यादव का बड़ा बयान, कप्तान सिंह सोलंकी ने पेंशन टैक्स फ्री करने की उठाई मांग

भोपाल  लोकतंत्र सेनानी सम्मेलन में पूर्व राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी ने लोकतंत्र सेनानियों को स्वतंत्रता सेनानियों के समान सम्मान देने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों की लंबे समय से यह मांग है कि उन्हें भी स्वतंत्रता सेनानियों के बराबर दर्ज की  मांग उठाई।कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों को मिलने वाली 30 हजार रुपए मासिक पेंशन को आयकर से मुक्त किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि इस संबंध में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के समक्ष भी मांग रखी गई थी, लेकिन इसे स्वीकार नहीं किया गया। सम्मेलन में सोलंकी ने 95 वर्ष की आयु पूरी कर चुके लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा, “मैं सभी लोकतंत्र सेनानियों से कहता हूं कि खूब जियो और 95 वर्ष की आयु तक पहुंचकर सम्मान प्राप्त करो।” उन्होंने लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले सेनानियों के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनका सम्मान केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति देश की कृतज्ञता का प्रतीक है। वे राजधानी के रवीन्द्र भवन में आयोजित लोकतंत्र सेनानी सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विशेष रूप से पूर्व राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी, पूर्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता, 95 वर्षीय वरिष्ठ सेनानी शांतिलाल संघवी और 95 वर्षीय वरिष्ठ सेनानी लक्ष्मीनारायण पाटीदार का शाल श्रीफल देकर सम्मान किया। आपातकाल के सेनानियों (मीसाबंदियों) के अखिल भारतीय संगठन 'लोकतंत्र सेनानी संघ, मध्य प्रदेश' के तत्वावधान में आयोजित सम्मेलन में प्रदेशभर से लगभग दो हजार मीसाबंदी और उनके परिवार शामिल हुए हैं। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शिरकत कर रहे हैं। उनके साथ बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व सांसद कैलाश सोनी तथा संघ के प्रदेश अध्यक्ष तपन भौमिक भी मंच साझा कर रहे हैं। सीएम बोले-कांग्रेस ने आपातकाल में लोकतंत्र को कुचलने का प्रयास किया मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई लोकतंत्र सेनानियों ने लड़ी, जबकि कांग्रेस ने आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक व्यवस्था को रोकने और दबाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि भारत की आजादी के समय कई देश हमारे साथ या हमारे बाद स्वतंत्र हुए थे। इजरायल हमसे एक वर्ष बाद आजाद हुआ, लेकिन आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र बनकर खड़ा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस की पांचवीं पीढ़ी राजनीति में आ चुकी है, लेकिन उसकी कार्यशैली नहीं बदली। उन्होंने अपने बचपन का उल्लेख करते हुए कहा कि जब आपातकाल लगा, तब उनकी उम्र मात्र नौ वर्ष थी। उनके पिता 19 महीने तक जेल में रहे। उस समय परिवार कठिन परिस्थितियों से गुजरा, लेकिन थोड़ी-बहुत खेती होने के कारण घर का गुजारा चलता रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौर में कांग्रेस के लोग जेल में बंद लोगों से कांग्रेस की सदस्यता लेने की शर्त पर रिहाई की बात करते थे। डॉ. यादव ने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष की वजह से आज देश में लोकतंत्र सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देशों में लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर हुई, लेकिन भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। उन्होंने पाकिस्तान का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां की राजनीतिक स्थिति सभी के सामने है। लोकतंत्र की मशाल जलाए रखने का श्रेय लोकतंत्र सेनानियों को जाता है। मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र सेनानियों के लिए कई नई घोषणाएं भी कीं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों के लिए विशेष ट्रेन से तीर्थ यात्रा कराई जाएगी। उन्हें सरकारी रेस्ट हाउस में दो दिन तक निशुल्क ठहरने की सुविधा मिलेगी। दिवंगत लोकतंत्र सेनानियों की स्मृति में पार्क और मार्गों का नामकरण किया जाएगा। गंभीर बीमारी की स्थिति में सरकार इलाज का पूरा खर्च वहन करेगी और आवश्यकता पड़ने पर एयर एंबुलेंस से भी उपचार की व्यवस्था कराई जाएगी।उन्होंने यह भी घोषणा की कि अधिक आयु के कारण जिन लोकतंत्र सेनानियों को जिला या बैंक शाखा बदलने में परेशानी होती है, उनकी सुविधा के अनुसार व्यवस्था की जाएगी। जिन सेनानियों को अब तक ताम्रपत्र नहीं मिले हैं, उन्हें कलेक्टर के माध्यम से उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही सभी सरकारी कार्यालयों में लोकतंत्र सेनानियों को अधिकारी स्तर का सम्मान देने और उनकी समस्याओं का प्राथमिकता से निराकरण करने के निर्देश दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि आज कांग्रेस संविधान बचाने की बात करती है, लेकिन उसने हमेशा एक परिवार को आगे बढ़ाने और सत्ता के बल पर दूसरों को दबाने का प्रयास किया। इस सम्मेलन का मुख्य आकर्षण आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले वीर सेनानियों का सम्मान समारोह है। कार्यक्रम में सीएम डॉ मोहन यादव पूर्व राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी, डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा बीजेपी के प्रभारी डॉ महेंद्र सिंह मंत्री कृष्णा गौर पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष डॉ रामकृष्ण कुसमरिया विधायक रामेश्वर शर्मा मौजूद हैं। पूर्व मंत्री सहित तीन वयोवृद्ध लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विशेष रूप से पूर्व राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी, पूर्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता, 95 वर्षीय वरिष्ठ सेनानी शांतिलाल संघवी और 95 वर्षीय वरिष्ठ सेनानी लक्ष्मीनारायण पाटीदार का शाल श्रीफल देकर सम्मान किया। इमरजेंसी पर बनी फिल्म भी दिखाई कार्यक्रम में आपातकाल पर केंद्रित एक विशेष फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया, जिसे लोकतंत्र प्रहरी संघ के अध्यक्ष नरेन्द्र अग्रवाल द्वारा तैयार किया गया है।

छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी बोले- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ही भविष्य की सबसे बड़ी ताकत

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अपनाने वाले ही भविष्य का नेतृत्व करेंगे : वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी एआई से डरने की नहीं, उसे अवसर में बदलने की है जरूरत वित्त मंत्री ने मैक कॉलेज के राष्ट्रीय सम्मेलन में युवाओं से कहा- बदलती तकनीक के अनुरूप स्वयं को करें तैयार रायपुर,  वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने महाराजा अग्रसेन इंटरनेशनल कॉलेज (एमएआईसी) द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन "Artificial Intelligence & Digital Transformation: Opportunities, Challenges and Future Impact" में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होकर युवाओं का आह्वान किया कि वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और नई तकनीकों से भयभीत होने के बजाय उन्हें अपने भविष्य के निर्माण का सबसे बड़ा अवसर मानें। अपने संबोधन में मंत्री चौधरी ने कहा कि आज पूरी दुनिया तेजी से ज्ञान, तकनीक और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रही है। भारत का स्वर्णिम इतिहास भी ज्ञान, शिक्षा और नवाचार की नींव पर खड़ा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत लगभग 1600 वर्षों तक विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था इसलिए रहा क्योंकि यहां शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को सर्वोच्च स्थान दिया गया। मंत्री चौधरी ने युवाओं से कहा कि आज दुनिया के सबसे सफल उद्योगपति और उद्यमी वे हैं जिन्होंने नए विचारों और नवाचार के बल पर अपनी पहचान बनाई है। एलन मस्क, एनवीडिया और एप्पल जैसी कंपनियों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि आज तकनीक की शक्ति इतनी बड़ी हो चुकी है कि कई टेक्नोलॉजी कंपनियों का मूल्यांकन अनेक देशों की अर्थव्यवस्था से भी अधिक है। इसलिए युवाओं को समय रहते तकनीकी परिवर्तन को समझकर स्वयं को उसके अनुरूप तैयार करना होगा। वित्त मंत्री ने कहा कि "जो एआई को अपनाएगा वही भविष्य का नेतृत्व करेगा। जो इससे दूर भागेगा, वह प्रतिस्पर्धा में पीछे रह जाएगा।" उन्होंने कहा कि हर तकनीकी परिवर्तन चुनौतियां लेकर आता है, लेकिन वही परिवर्तन नए अवसर भी पैदा करता है। आवश्यकता इस बात की है कि युवा इन अवसरों का लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि एआई कई कार्यों को सरल बना सकता है, लेकिन मानवीय संवेदनशीलता, करुणा और मानवीय स्पर्श का विकल्प कभी नहीं बन सकता। इसलिए युवाओं को ऐसे क्षेत्रों में भी आगे बढ़ना चाहिए जहां मानवीय मूल्यों की महत्वपूर्ण भूमिका है, जैसे स्वास्थ्य सेवाएं, नर्सिंग और अन्य सेवा क्षेत्र। मंत्री चौधरी ने युवाओं से आग्रह किया कि वे केवल नौकरी तलाशने तक सीमित न रहें, बल्कि नवाचार और उद्यमिता की दिशा में भी आगे बढ़ें तथा विश्वस्तरीय स्टार्टअप और तकनीकी कंपनियां स्थापित करने का लक्ष्य रखें। उन्होंने कहा कि भारतीय युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है और पूरी दुनिया में भारतीय तकनीकी नेतृत्व का लोहा माना जाता है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत @2047 के विजन से प्रेरित होकर छत्तीसगढ़ सरकार भी मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में "छत्तीसगढ़ अंजोर विजन @2047" पर कार्य कर रही है। इस दिशा में नवा रायपुर को उभरते तकनीकी और नवाचार केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां सेमीकंडक्टर यूनिट, एआई डाटा सेंटर तथा ट्रिपल आईटी में अत्याधुनिक अनुसंधान सुविधाओं सहित अनेक महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर तेजी से कार्य हो रहा है। कार्यक्रम के अंत में वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए महाराजा अग्रसेन इंटरनेशनल कॉलेज प्रबंधन, आयोजकों एवं सभी प्रतिभागियों को बधाई देते हुए कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि छत्तीसगढ़ के युवा नवाचार और तकनीक के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेंगे।

आउटसोर्स नौकरी का इंतजार बढ़ा, यूपी में अगस्त के बाद ही शुरू होंगी नई भर्तियां

लखनऊ  उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम के माध्यम से सरकारी विभागों में आउटसोर्सिंग कार्मिक के रूप में काम करने की राह देख रहे युवाओं को अगस्त के बाद ही कोई मौका मिलेगा आउटसोर्स सेवा निगम का पोर्टल तैयार करने के लिए उत्तर प्रदेश डेवलपमेंट सिस्टम्स कारपोरेशन लि. (यूपीडेस्को) ने अगस्त तक का लिया है। पोर्टल तैयार हो जाने के बाद ही निगम आउटसोर्स के माध्यम से भर्तियां करेगा। पिछले वर्ष 20 सितंबर को आउटसोर्स सेवा निगम के गठन के लिए शासनादेश जारी किया गया था।जिसमें आउटसोर्सिंग की भर्तियों के लिए चार श्रेणिया बनाई गई हैं। श्रेणी एक के पदों के लिए 40 हजार रुपये, श्रेणी दो के पदों 25 हजार रुपये, श्रेणी तीन के पदों के लिए 22 हजार रुपये और श्रेणी चार के आउटसोर्स कार्मिकों के लिए 20 हजार रुपये मासिक मानदेय निर्धारित किया गया है। कंपनी अधिनियम के तहत आउटसोर्स सेवा निगम का गठन किया जा चुका है। बोर्ड आफ डायरेक्टर्स का चयन किया जा चुका है। इसके साथ ही निगम के प्रबंध निदेशक और कार्यकारी निदेशक की तैनाती भी की जा चुकी है। निगम के लिए पिकप भवन में कार्यालय बनाया जा रहा है। इतना सबकुछ हो जाने के बाद भी पोर्टल नहीं बन पाने की वजह से आउटसोर्स की भर्तियां निगम के माध्यम से नहीं हो पा रही हैं। उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक निगम का पोर्टल तैयार करने के लिए यूपीडेस्को ने अगस्त तक का समय लिया है।पोर्टल बन जाने के बाद ही निगम भर्ती की दिशा में आगे बढ़ेगा। सितंंबर से निगम आउटसोर्स के माध्यम से भर्ती की प्रक्रिया शुरू करने की स्थिति में आ जाएगा।  

कोयला गैसीकरण परियोजनाओं से बिहार में बड़े निवेश की संभावना, केंद्र ने जताया भरोसा

पटना  कोयला गैसीकरण से संबंधित परियोजनाओं के माध्यम से बिहार में 8000 से 12000 करोड़ के निवेश की संभावना है। यह आकलन केंद्र सरकार का है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मिलकर केंद्रीय कोयला व खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे इस संदर्भ में विचार-विमर्श भी कर चुके हैं। आकलन है कि इस परियोजना के क्रियान्वयन से बिहार में 2500 लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। देश में कोयले का प्रचुर भंडार है, लेकिन कच्चा तेल, एलपीजी, प्राकृतिक गैस, मेथनाल आदि के लिए आयात पर अत्यधिक निर्भरता है। वित्त वर्ष 2025 में मेथनाल, अमोनिया, अमोनियम नाइट्रेट और अन्य प्रतिस्थापन योग्य उत्पादों के लिए भारत का आयात बिल 2.77 लाख करोड़ रुपये रहा था। कोयला गैसीकरण सीधे तौर पर इस बिल को प्रभावित करेगा। ऐसे में सरकार यह मानकर चल रही कि अगले दशक में कोयला गैसीकरण भारत के सबसे उभरते क्षेत्रों में से एक होगा। कई प्रकार के उत्पाद देने वाली इस तकनीकी के जरिये तीन लाख करोड़ तक के आयात को प्रतिस्थापित करने की क्षमता है। इसीलिए सरकार ने भी खजाने का मुंह खोल दिया है। इस वर्ष 37500 करोड़ से पहले जनवरी, 2024 में 8500 करोड़ रुपये के पैकेज को स्वीकृति दी गई थी। बिहार से विशेष अपेक्षा दुबे ने बताया कि भारत में 2021 में राष्ट्रीय कोयला गैसीकरण मिशन शुरू हुआ। 2030 तक प्रतिवर्ष 10 करोड़ टन कोयले के गैसीकरण का लक्ष्य निर्धारित है। बहरहाल परियोजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय ने आरएफपी को सार्वजनिक किया है और सभी हितधारकों से सुझाव मांगा है। इसी क्रम में बिहार से भी अपेक्षा है। जोखिम भी अधिक वर्ष 2024 में कोयला मंत्रालय ने झारखंड में भारत की पहली भूमिगत कोयला गैसीकरण पायलट परियोजना शुरू की थी। 2030 तक 25 परियोजनाओं की स्थापना का लक्ष्य है। इसका आशय यह नहीं कि सब कुछ सहजता से हो जाएगा। इसमें पूंजीगत लागत अधिक है, क्रियान्वयन का जोखिम वास्तविक है और नीतिगत समर्थन महत्वपूर्ण। कोयला गैसीकरण संयंत्रों का निर्माण एक लंबी प्रक्रिया है और बड़े पैमाने पर इन्हें स्थापित करने में 10 से 15 वर्ष लग सकते हैं। बहरहाल इस मिशन को गति देने और उद्योग जगत की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से 18 जून को मुंबई में तीसरा रोड-शो भी हो चुका है। क्या है कोयला गैसीकरण इसमें कोयले को सीधे जलाने के बजाय उसे सिंथेटिक गैस (मुख्य रूप से कार्बन मोनोआक्साइड और हाइड्रोजन) में बदला जाता है। उस गैस का उपयोग ईंधन, उर्वरक और रसायन बनाने में होता है। जैसे कि मेथनाल, अमोनिया, यूरिया, हाइड्रोजन, तरल ईंधन आदि। संभावना कभी बिहार का अंश रहे झारखंड में भी कोयला के बड़े खदान हैं। ओडिशा भी निकटवर्ती है। बिहार तक कोयला आपूर्ति में अपेक्षाकृत कम लागत आएगी, लिहाजा उत्पाद का मूल्य नियंत्रण में होगा। l कोयले के गैसीकरण में पर्याप्त मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। बिहार जल संसाधन से समृद्ध है। कमी यहां पानी के संचयन की है। संरचना बनाकर बाढ़ का पानी संचय किया जा सकता है। समस्या 20 लाख टन प्रतिवर्ष क्षमता वाले संयंत्र की स्थापना पर 600 करोड़ से 2000 करोड़ रुपये के बीच लागत आती है। इतनी बड़ी पूंजी लगाने से पहले निवेशक औद्योगिक परिवेश का आकलन करेंगे। बड़े व्यावसायिक संयंत्र के लिए लगभग 250 से 500 एकड़ भूमि की आवश्यकता होती है। बिहार की विपुल जनसंख्या और कृषि पर निर्भरता के कारण भूमि अधिग्रहण तनिक दुरुह है।  

जयपुर में ताजिया जुलूस को लेकर सुरक्षा कड़ी, ट्रैफिक डायवर्जन और पार्किंग पर रोक

जयपुर जयपुर में मुहर्रम के अवसर पर निकलने वाले ताजिया जुलूसों को लेकर इस बार सुरक्षा व्यवस्था पहले से कहीं अधिक कड़ी कर दी गई है। शहर की संवेदनशीलता और लाखों लोगों की आवाजाही को देखते हुए पुलिस और जिला प्रशासन ने ऐसा सुरक्षा घेरा तैयार किया है, जिसमें जमीन से लेकर आसमान तक हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी। करीब तीन हजार पुलिसकर्मी पूरे शहर में तैनात रहेंगे, जबकि ड्रोन कैमरे, सीसीटीवी नेटवर्क और सादा वर्दी में मौजूद इंटेलिजेंस टीम हर संदिग्ध गतिविधि पर निगरानी रखेगी। प्रशासन का कहना है कि उद्देश्य केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना ही नहीं, बल्कि धार्मिक आयोजन को शांतिपूर्ण और सुरक्षित माहौल में संपन्न कराना भी है। आस्था और परंपरा का दिन मुहर्रम का दिन मुस्लिम समाज के लिए गहरी आस्था और शहादत की याद का प्रतीक माना जाता है। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की स्मृति में शहर के अलग-अलग इलाकों से ताजिए निकलेंगे और कर्बला तक पहुंचेंगे। इस दौरान हजारों लोग जुलूस में शामिल होंगे, वहीं बड़ी संख्या में लोग रास्तों के किनारे खड़े होकर इस धार्मिक आयोजन के साक्षी बनेंगे। इसी भीड़ और सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने पहले से ही विस्तृत योजना तैयार की है। परकोटे में ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह बदलेगी परकोटा क्षेत्र में आज पूरे दिन यातायात व्यवस्था पूरी तरह बदली हुई नजर आएगी। संजय सर्किल, अजमेरी गेट, न्यू गेट, सांगानेरी गेट, घाट गेट, गलता गेट और रामगढ़ मोड़ से परकोटे में सभी प्रकार के वाहनों की एंट्री बंद रहेगी। जरूरत पड़ने पर अन्य मार्गों से आने वाले ट्रैफिक को भी वैकल्पिक रास्तों पर डायवर्ट किया जाएगा। पुलिस ने आमजन से अपील की है कि वे यात्रा से पहले ट्रैफिक डायवर्जन की जानकारी लेकर ही घर से निकलें। भारी वाहनों पर भी रहेगा प्रतिबंध भारी मालवाहक वाहनों के लिए भी शहर के प्रमुख प्रवेश मार्गों पर रोक लगा दी गई है। रोड नंबर-14 वीकेआई, कालवाड़ पुलिया, सिरसी पुलिया, 200 फीट अजमेर रोड, न्यू सांगानेर मोड़, गोपालपुरा मोड़, ट्रांसपोर्ट नगर चौराहा, धोबीघाट, रामगढ़ मोड़, गलता गेट चौराहा और आमेर तिराहे सहित कई स्थानों से भारी वाहनों को शहर में प्रवेश नहीं मिलेगा। इससे जुलूस मार्ग पर ट्रैफिक का दबाव कम रखने की कोशिश की जाएगी। इन बाजारों में पार्किंग पूरी तरह बंद ताजिया जुलूस के दौरान शहर के प्रमुख बाजारों में पार्किंग भी पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। चौड़ा रास्ता, बड़ी चौपड़, बापू बाजार, जौहरी बाजार, हवामहल बाजार, सुभाष चौक, रामगंज बाजार, घाट गेट बाजार, चांदपोल बाजार, छोटी चौपड़, त्रिपोलिया बाजार, गणगौरी बाजार, इंदिरा बाजार, किशनपोल बाजार, गोपीनाथ मार्ग, एमआई रोड और एमडी रोड सहित कई क्षेत्रों में वाहन खड़े करने की अनुमति नहीं होगी। प्रशासन का मानना है कि इससे जुलूस के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था से बचा जा सकेगा। कर्बला तक निकलेगा ताजिया जुलूस आज दोपहर बाद शहर के विभिन्न इलाकों से ताजिए बड़ी चौपड़ पहुंचेंगे। यहां से पारंपरिक मार्ग से होते हुए जुलूस हवामहल बाजार, चांदी की टकसाल, सुभाष चौक, जोरावर सिंह गेट और रामगढ़ मोड़ के रास्ते कर्बला पहुंचेगा। इस पूरे मार्ग पर दोपहर से देर रात तक यातायात प्रभावित रहेगा और पुलिस लगातार ट्रैफिक को नियंत्रित करती रहेगी। ड्रोन, सीसीटीवी और QRT रहेगी अलर्ट पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर इस बार सुरक्षा व्यवस्था में आधुनिक तकनीक का भी व्यापक इस्तेमाल किया जाएगा। एडिशनल कमिश्नर लॉ एंड ऑर्डर राजीव पचार के अनुसार शहर के भीतर और बाहरी इलाकों में करीब तीन हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। इसके अलावा क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) और इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (ERT) को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके। संवेदनशील इलाकों में सादा वर्दी में पुलिस और इंटेलिजेंस के जवान भी तैनात रहेंगे। 17 ताजियों के लाइसेंस रद्द प्रशासन ने साफ कर दिया है कि केवल लाइसेंसधारी ताजियों को ही जुलूस निकालने की अनुमति होगी। सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए 17 ताजियों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि यह फैसला पूरी तरह कानून-व्यवस्था और सुरक्षा के मद्देनजर लिया गया है। जुलूस मार्ग पर बिजली, पानी और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभागों को भी निर्देश जारी किए गए हैं अफवाह फैलाने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों को रोकने के लिए भी पुलिस विशेष सतर्क रहेगी। अभय कमांड सेंटर, शहरभर में लगे सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन कैमरों से पूरे आयोजन की लाइव निगरानी की जाएगी। साइबर सेल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नजर रखेगी और भ्रामक पोस्ट, अफवाह फैलाने या सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आमजन से सहयोग की अपील यातायात पुलिस ने आमजन से अपील की है कि वे प्रतिबंधित मार्गों पर वाहन लेकर न जाएं, ट्रैफिक पुलिस के निर्देशों का पालन करें और भीड़भाड़ वाले इलाकों में जाने से पहले वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें। प्रशासन का कहना है कि सभी के सहयोग से ही मुहर्रम का यह पारंपरिक और श्रद्धापूर्ण आयोजन शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न कराया जा सकेगा।

Indore News: सिंगापुर टाउनशिप में चल रही थी नकली नोट छापने की फैक्ट्री, मास्टरमाइंड गिरफ्तार

इंदौर इंदौर के गांधीनगर थाना क्षेत्र में 200 रुपये का नकली नोट चलाने की कोशिश एक बड़े खुलासे का कारण बन गई। रेस्टोरेंट संचालक की सतर्कता से पहले एक युवक पकड़ा गया और उसकी निशानदेही पर पुलिस ने जाली नोट छापने वाले गिरोह के मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उसके कब्जे से करीब 44 हजार रुपये के नकली नोट, नोट छापने में इस्तेमाल होने वाली प्रिंटिंग मशीन तथा अन्य सामग्री जब्त की है।गांधीनगर थाना प्रभारी अनिल यादव के अनुसार राजनगर सेक्टर-ए, चंदन नगर निवासी यशवंत यादव ने शिकायत दर्ज कराई कि 25 जून को वह रिजलाय फाटा-नावदा पंथ रोड स्थित सांवरिया रेस्टोरेंट पर मौजूद था। इसी दौरान एक युवक चाय-नाश्ता करने के बाद भुगतान के लिए 200 रुपये का नोट देने लगा। रेस्टोरेंट संचालक को हुआ शक, मौके पर पकड़ लिया नोट देखते ही रेस्टोरेंट संचालक यशवंत यादव को उसके नकली होने का संदेह हुआ। उन्होंने कर्मचारी आशीष चौहान की मदद से युवक को मौके पर ही रोक लिया और तत्काल पुलिस को सूचना दी। पुलिस पूछताछ में आरोपी ने अपनी पहचान ग्राम अटाहेड़ा, थाना देपालपुर निवासी दीपक पटेल के रूप में बताई। उसने खुद को मजदूर बताते हुए दावा किया कि यह नोट उसे मजदूरी के भुगतान में मिले थे। हालांकि तलाशी के दौरान उसके पास से 4 हजार रुपये के नकली नोट बरामद हुए। खंडवा एसटीएफ ने भी पकड़ा था पुलिस के मुताबिक, मुख्य आरोपी संजय वैष्णव पहले भी नकली नोट के मामले में पकड़ा जा चुका है। इसे खंडवा एसटीएफ ने गिरफ्तार किया था। जेल से जमानत पर छूटने के बाद उसने फिर से यही अवैध कारोबार शुरू कर दिया। अब पुलिस उसके पूरे नेटवर्क और अन्य साथियों की भी जांच कर रही है। पूछताछ में खुला मास्टरमाइंड का नाम सख्ती से पूछताछ करने पर दीपक ने खुलासा किया कि नकली नोट उसे सिंगापुर टाउनशिप निवासी संजय पुत्र महेश वैष्णव ने दिए थे। इसके बाद पुलिस ने संजय को भी गिरफ्तार कर लिया। संजय के कब्जे से करीब 40 हजार रुपये के नकली नोट और उन्हें तैयार करने में इस्तेमाल की जा रही प्रिंटिंग मशीन जब्त की गई। पुलिस के अनुसार संजय दीपक को बाजार में जाली नोट चलाने के लिए देता था। पहले भी नकली नोट मामले में जा चुका है जेल पुलिस जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी संजय वैष्णव का आपराधिक रिकॉर्ड पहले से मौजूद है। उसे पूर्व में एसटीएफ खंडवा नकली नोटों के मामले में गिरफ्तार कर चुकी है। उस समय भी उसके पास से जाली नोट बरामद हुए थे और जेल भेजा गया था। जमानत पर रिहा होने के बाद वह फिर से नकली नोट छापने और उन्हें बाजार में खपाने के अवैध कारोबार में सक्रिय हो गया। पुलिस अब उसके पूरे नेटवर्क, आपराधिक रिकॉर्ड और अन्य साथियों की तलाश में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में आगे और भी महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।