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कंबोडिया-फिलीपींस से जुड़ा है ठगी का जाल,गुरुग्राम पुलिस ने 5 गुर्गों को दबोचा, भारी मात्रा में हाई-टेक गैजेट्स बरामद

 गुरुग्राम गुरुग्राम पुलिस ने कंबोडिया-फिलीपींस से संचालित साइबर फ्रॉड गिरोह का भंडाफोड़ किया, जिसमें 5 गिरफ्तार हुए. आरोपी 'सिम बॉक्स' से कॉल डायवर्ट कर 'डिजिटल अरेस्ट' का डर दिखाकर ठगी करते थे. गुरुग्राम में अंतरराष्ट्रीय साइबर ठग गिरोह का भंडाफोड़ दिल्ली से सटे साइबर सिटी गुरुग्राम में पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड गिरोह का पर्दाफाश किया है. यह नेटवर्क कंबोडिया और फिलीपींस से संचालित हो रहा था. पुलिस ने इस मामले में 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है और 5 अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं. शातिर आरोपी 'सिम बॉक्स' (SIM Box) के जरिए कॉल डायवर्ट कर लोगों को 'डिजिटल अरेस्ट' का डर दिखाते थे और लाखों रुपये की ठगी को अंजाम देते थे. गुरुग्राम पुलिस के डीसीपी ईस्ट (DCP East) गौरव राजपुरोहित ने बताया कि जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. गिरफ्तार आरोपी फिलीपींस और कंबोडिया में बैठे अपने विदेशी आकाओं के सीधे संपर्क में थे. ठगी के लिए इस्तेमाल होने वाले हाई-टेक उपकरण और अवैध मशीनें नेपाल-बिहार रूट के जरिए तस्करी कर भारत लाई जाती थीं. इस नेटवर्क के जरिए भारत में हजारों फर्जी सिम कार्ड एक्टिवेट किए गए थे. SIT की छापेमारी में मिला भारी जखीरा मामले की गंभीरता को देखते हुए गठित की गई एसआईटी (SIT) ने गुरुग्राम के यू-ब्लॉक और चकरपुर समेत कई ठिकानों पर अचानक छापेमारी की. इस रेड के दौरान पुलिस ने भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं, जिनका इस्तेमाल इंटरनेट के जरिए कॉल डायवर्ट करने और फर्जी कॉल करने में होता था. बरामद किए गए उपकरण:     15 सिम बॉक्स     504 फर्जी सिम कार्ड     7 वाई-फाई राउटर     29 वाई-फाई स्विच     7 TAPO कैमरे और 30 बैटरियां ये 5 शातिर आरोपी हुए गिरफ्तार पुलिस ने इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े पांच शातिर ठगों को गिरफ्तार किया है, जिनकी पहचान इस प्रकार हुई है:     राहुल कुमार (निवासी: कासगंज)     यश अमृत सिंह डुगर (निवासी: अहमदाबाद)     भाविका भगचंदानी (निवासी: कच्छ)     लितेश     सागर डीसीपी गौरव राजपुरोहित के अनुसार, फिलहाल गुरुग्राम पुलिस सभी आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ कर रही है. पुलिस इस पूरे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की गहन जांच कर रही है ताकि इसके मास्टरमाइंड और अन्य जुड़े लोगों तक पहुंचा जा सके.  

पंजाब सरकार की नई पहल: आंगनवाड़ी नेटवर्क से तैयार होगा ड्रग डेटा

चंडीगढ़. आंगनवाड़ी वर्करों के लिए स्मार्टफोन खरीद को लेकर पहले से चल रहे विवाद ने बुधवार को नया मोड़ ले लिया। पंजाब सरकार ने अब इन स्मार्टफोनों को ड्रग्स जनगणना में लगे एन्यूमरेटरों को देने का फैसला किया है। इस फैसले से पहले ही छह साल की देरी और दो आईएएस अधिकारियों के निलंबन को लेकर यह मामला चर्चा में रहा है। सरकार ने कुल 28,515 सैमसंग 5G स्मार्टफोन खरीदे थे। इनमें से करीब 28,000 फोन अब ड्रग्स जनगणना के एन्यूमरेटरों को दिए जाएंगे। ये फोन मूल रूप से सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से आंगनवाड़ी केंद्रों में वितरित किए जाने थे, लेकिन अब इन्हें ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग को सौंपने का निर्णय लिया गया है, जो ड्रग्स जनगणना का नोडल विभाग है। इन स्मार्टफोनों की खरीद पर लगभग 57 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं और यह योजना केंद्र सरकार की ओर से वित्तपोषित है। इन स्मार्ट फोनों को कम से कम पांच जिलों में भेजा भी गया था और बाकी जिलों में वितरण की तैयारी थी। इसी बीच सरकार ने इन्हें ड्रग्स जनगणना के लिए उपयोग करने का फैसला लिया। एन्यूमरेटर महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं, इसलिए उन्हें इन फोनों की जरूरत है। जनगणना पूरी होने के बाद ये फोन आंगनवाड़ी वर्करों को दे दिए जाएंगे। संसाधनों के बेहतर उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। वहीं, आंगनवाड़ी वर्कर हेल्पर यूनियन की पंजाब अध्यक्ष बरिंदरजीत कौर छीना ने इस फैसले पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि सोमवार को मंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया था कि फोन आंगनवाड़ी वर्करों को दिए जाएंगे, लेकिन अब जानकारी मिली है कि इन्हें ड्रग्स जनगणना में लगाया जा रहा है, जो अनुचित है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उनकी बैठक मंत्री डॉ. बलजीत कौर और विभाग के प्रशासनिक सचिव गुरकीरत किरपाल सिंह के साथ हुई थी, जिसमें उन्हें बताया गया था कि फोन खरीदे जा चुके हैं और वितरण प्रक्रिया शुरू हो रही है। यह खरीद पोषण अभियान के तहत की गई थी, जो केंद्र सरकार की प्रायोजित योजना है। इसका उद्देश्य आंगनवाड़ी वर्करों को फील्ड से डेटा भरने के लिए ऐप के माध्यम से सशक्त बनाना है, ताकि योजना की निगरानी बेहतर ढंग से हो सके। इस पूरे मामले में देरी को लेकर 7 फरवरी को आईएएस अधिकारी केके यादव और जसप्रीत सिंह को निलंबित किया गया था। उस समय वे क्रमशः उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के प्रशासनिक सचिव और इंफोटेक के एमडी थे। स्मार्टफोन की खरीद प्रक्रिया पंजाब इंफोटेक के जरिए की गई थी, जिसमें अनियमितताओं और देरी की बात सामने आई थी। शुरुआत में करीब 27,515 स्मार्टफोन के लिए टेंडर जारी किया गया था। उस समय 5G फोन उपलब्ध नहीं थे, इसलिए 4G फोन के लिए प्रक्रिया शुरू हुई और एक कंपनी को एल1 घोषित किया गया। बाद में 5G फोन की जरूरत बताते हुए नया टेंडर जारी किया गया, जिसके खिलाफ कंपनी हाई कोर्ट पहुंची थी। इसके बाद अधिकारियों पर कार्रवाई की गई और खरीद प्रक्रिया को तेज किया गया। प्रत्येक फोन की कीमत करीब 20,000 रुपये बताई गई है।

अब बिना अनुमति नहीं मिलेगा अवकाश: जनगणना तक लागू कड़े नियम

कोरबा. जनगणना 2027 के महत्वपूर्ण कार्य को सुचारू, व्यवस्थित और समयबद्ध तरीके से संपन्न कराने हेतु कोरबा जिला प्रशासन द्वारा विशेष – तैयारी शुरू की गई है. कलेक्टर एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन में अपर कलेक्टर एवं जिला जनगणना अधिकारी द्वारा अभियान की गंभीरता को देखते हुए आदेश जारी कर जिले के समस्त अधिकारियों कर्मचारियों के अवकाश पर प्रतिबंध लगाया गया है. जारी निर्देशानुसार जनगणना कार्य में किसी भी प्रकार के व्यवधान को रोकने और अपरिहार्य परिस्थितियों में प्राप्त होने वाले अवकाश आवेदनों के विधिवत – निराकरण हेतु जिला स्तर पर एक – समीक्षा समिति का गठन किया गया है. यह समिति जिले के विभिन्न विभागों के अधिकारी/कर्मचारियों से प्राप्त होने वाले अवकाश आवेदनों की गहन समीक्षा करेगी और अपनी अनुशंसा के साथ प्रस्ताव अंतिम निर्णय हेतु कलेक्टर एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी के – समक्ष प्रस्तुत करेगी. गठित समिति में तुलाराम भारद्वाज को अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. साथ ही जिला योजना एवं सांख्यिकी अधिकारी मोहन सिंह कंवर को सदस्य सचिव तथा जिला सूचना एवं विज्ञान अधिकारी हेमंत जायसवाल को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है. उल्लेखनीय है कि जनगणना में जिले के प्रत्येक शासकीय सेवक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि केवल विशेष और अत्यंत आवश्यक परिस्थितियों में ही समिति की अनुशंसा के आधार पर अवकाश पर विचार किया जाएगा, ताकि गणना कार्य की निरंतरता बनी रहे.

आपातकाल में अब मिलेगी तेज राहत: बस्तर को मिली 15 नई एम्बुलेंस

जगदलपुर. जगदलपुर में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए 15 नई एम्बुलेंस की सौगात दी गई है, महारानी अस्पताल से इन एम्बुलेंसों को विधिवत रवाना किया गया जिससे दूरस्थ क्षेत्रों तक त्वरित चिकित्सा सहायता पहुंच सकेगी, अब हर जिले में एडवांस लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस तैनात की जा रही हैं जिनमें वेंटिलेटर, कार्डियक मॉनिटर और डिफिब्रिलेटर जैसी सुविधाएं मौजूद हैं. यह गाड़ियां चलते-फिरते आईसीयू की तरह काम करेंगी, कुल 69 एम्बुलेंस के नेटवर्क से एएलएस और बीएलएस के बीच बेहतर तालमेल बनेगा, गंभीर मरीजों को मौके पर ही प्राथमिक इलाज मिलने से गोल्डन ऑवर में जान बचाना आसान होगा, इससे निजी एम्बुलेंसों की मनमानी पर भी रोक लगेगी और ग्रामीणों को आर्थिक राहत मिलेगी, जनप्रतिनिधियों और स्वास्थ्य अधिकारियों ने इसे बस्तर के लिए जीवनदायिनी पहल बताया है, यह कदम स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांतिकारी बदलाव लाने की दिशा में अहम माना जा रहा है. 16 नई एम्बुलेंस को शामिल बिलासपुर। जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक मजबूत व प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. 108 एम्बुलेंस सेवा में 16 नई एम्बुलेंस को शामिल किया गया है. इन एम्बुलेंसों को बुधवार को जिला कलेक्टोरेट परिसर से विधिवत हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया. नई एम्बुलेंस के शामिल होने से जिले में आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की पहुंच और गति दोनों में सुधार होने की उम्मीद जताई जा रही है. मौके पर ही मिलेगा उन्नत इलाज नई 16 एम्बुलेंस में से 3 एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) प्रणाली से लैस हैं, जो किसी चलती-फिरती आईसीयू की तरह कार्य करेंगी. इनमें वेंटिलेटर, मॉनिटरिंग सिस्टम, ऑक्सीजन सपोर्ट, डिफिब्रिलेटर सहित अन्य जीवनरक्षक उपकरण उपलब्ध हैं. इससे गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचने से पहले ही बेहतर प्राथमिक उपचार मिल सकेगा, जो कई मामलों में जीवनरक्षक साबित हो सकता है. बस्तर में बढ़ी सुपर स्पेशियलिटी ताकत जगदलपुर. जगदलपुर के कांटीनेंटल छत्तीसगढ़ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल ने स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में नई शुरुआत करते हुए ऑर्थोपेडिक्स विभाग की पहली सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी कर ली है, हिप जॉइंट ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार ने यह संकेत दे दिया है कि अब बस्तर के मरीजों को बड़े शहरों की ओर भागने की जरूरत कम होगी. डॉ. पुष्पेंद्र राठौर की अगुवाई में यह उपलब्धि अस्पताल के लिए मील का पत्थर साबित हो रही है, अस्पताल में ऑर्थो, गैस्ट्रो, यूरो और न्यूरो की नियमित ओपीडी शुरू होने से मरीजों को एक ही छत के नीचे बेहतर इलाज मिल रहा है, प्रबंधन ने रियायती दरों पर सेवाएं देने की बात भी कही है जिससे आम लोगों को राहत मिलेगी, आने वाले समय में डायलिसिस सुविधा शुरू करने की तैयारी पूरी कर ली गई है. नेफ्रोलॉजी विशेषज्ञों की नियुक्ति से गंभीर मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी, यह पहल बस्तर में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है, अब क्षेत्र में इलाज की उपलब्धता और भरोसे दोनों में इजाफा हो रहा है, जिससे स्थानीय लोगों की निर्भरता बाहर के शहरों पर कम होगी.

मध्यप्रदेश में ओले और आंधी-बारिश का दौर, 30 जिलों में बारिश और निमाड़ में ओले गिरने का अलर्ट

भोपाल  मध्यप्रदेश में मौसम ने करवट लेकर राहत और आफत दोनों का माहौल बना दिया है। प्रदेश में सक्रिय मजबूत वेदर सिस्टम के चलते आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का सिलसिला जारी है, जो 5 अप्रैल तक थमने के आसार नहीं हैं। गुरुवार को राजधानी भोपाल, इंदौर समेत करीब 30 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, जबकि निमाड़ क्षेत्र के धार, बड़वानी और झाबुआ में ओले गिरने की संभावना जताई गई है। पिछले 72 घंटों से प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में तेज हवाओं, गरज-चमक और बारिश ने मौसम को अस्थिर बनाए रखा है। बुधवार को भी आधे प्रदेश में बादल, बारिश और आंधी का असर देखने को मिला। अगले 24 घंटे के दौरान जिन जिलों में बारिश हो सकती है, उनमें ग्वालियर, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, मुरैना, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, नीमच, मंदसौर, रतलाम, अलीराजपुर, झाबुआ, धार, बड़वानी, आगर-मालवा, राजगढ़, विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, बैतूल, हरदा, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, देवास, शाजापुर शामिल हैं। 50Km/प्रतिघंटा से चलेगी आंधी मौसम विभाग के अनुसार, गुरुवार को छिंदवाड़ा, सिवनी और पांढुर्णा में तेज आंधी चलेगी। इसकी रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटा तक रह सकती है। बाकी जिलों में 30 से 40 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से आंधी चलेगी। इससे पहले बुधवार को भोपाल में गरज-चमक के साथ बारिश हुई। सीहोर में आंधी-बारिश के साथ ओले गिरे। इंदौर, देवास, उज्जैन, खंडवा, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, जबलपुर, सिवनी, मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर, रायसेन, विदिशा, रतलाम, मंदसौर, खरगोन, बड़वानी, शहडोल, शाजापुर और बालाघाट समेत कई जिलों में मौसम बदला रहा। तेज हवाओं का भी खतरा मौसम विभाग के अनुसार छिंदवाड़ा, सिवनी और पांढुर्णा में आंधी की रफ्तार 40 से 50 किमी प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। अन्य जिलों में 30 से 40 किमी प्रति घंटा की गति से हवाएं चलेंगी, जिससे फसलों और कमजोर ढांचों को नुकसान की आशंका है। बारिश के साथ गर्मी भी बरकरार अजीब मौसम के बीच गर्मी का असर भी बना हुआ है। नर्मदापुरम में तापमान 40 डिग्री तक पहुंच गया, जबकि रतलाम, मंडला, खजुराहो, रायसेन, दमोह और सागर में भी पारा 38-39 डिग्री के बीच रहा। बड़े शहरों में जबलपुर 38.4°C, भोपाल 37.4°C, इंदौर 36.5°C, ग्वालियर 36.1°C और उज्जैन 35.6°C दर्ज किया गया। क्यों बदल रहा मौसम? प्रदेश में साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ लाइन सक्रिय है, वहीं उत्तर-पश्चिमी हिस्से में भी दो सिस्टम काम कर रहे हैं। 7 अप्रैल से एक नया पश्चिमी विक्षोभ भी एक्टिव होगा, जिससे 10 अप्रैल तक मौसम ऐसा ही बना रह सकता है। अप्रैल के दूसरे हफ्ते से सिस्टम कमजोर पड़ते ही तेज गर्मी का दौर शुरू होगा। महीने के आखिरी तक ग्वालियर, धार, खरगोन और बड़वानी जैसे जिलों में तापमान 44-45 डिग्री तक पहुंच सकता है। 

नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद कौन बनेगा सीएम, भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने दिए अहम संकेत

पटना बिहार के नए मुख्यमंत्री का ऐलान आगामी 10 अप्रैल को हो सकता है, भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने इस बारे में सकेत दिए हैं। मौजूदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का राज्यसभा सांसद का कार्यकाल भी 10 अप्रैल से शुरू होने की संभावना है। 10 अप्रैल को होगा बिहार के नए मुख्यमंत्री का ऐलान? भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने दिए संकेत  नीतीश कुमार के बाद बिहार का मुख्यमंत्री कौन होगा, इस पर अटकलों का दौर चल रहा है। इस बीच भारतीय जनता पार्टी के सांसद एवं भोजपुरी स्टार मनोज तिवारी ने बता दिया कि नए सीएम पर स्थिति कब साफ होगी। उन्होंने कहा कि नीतीश के बाद बिहार का सीएम कौन होगा, इस पर अभी कुछ नहीं बता सकते हैं, 10 तारीख को पता चल जाएगा। ऐसे में माना जा रहा है कि नए सीएम का ऐलान 10 अप्रैल को होगा। नीतीश कुमार ने बीते 16 मार्च को राज्यसभा चुनाव जीता था। राज्यसभा सांसद बनने के लिए उन्हें नियमानुसार 14 दिनों के भीतर एमएलसी पद से इस्तीफा देना था। सीएम ने 30 मार्च को विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। अब आगामी दिनों में उनका राज्यसभा का कार्यकाल शुरू हो जाएगा। चर्चा है कि राज्यसभा सांसद की शपथ लेते ही वे मुख्यमंत्री पद भी छोड़ देंगे। इसके बाद बिहार में नया सीएम बनेगा। बिहार दौरे पर पहुंचे दिल्ली से भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने भी कहा है कि 10 तारीख तक स्थिति साफ हो जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत यह सब होना है, इसलिए अभी इस पर वे कुछ नहीं बोल सकते हैं। पूर्व में भाजपा एवं जेडीयू (जनता दल यूनाइटेड) के नेताओं ने कहा था कि एनडीए के शीर्ष नेता मिलकर बिहार के नए सीएम का चुनाव करेंगे। भाजपा से हो सकता है नया मुख्यमंत्री बिहार का अगला मुख्यमंत्री भाजपा से हो सकता है। पिछले महीने नीतीश के राज्यसभा जाने की घोषणा के बाद से ही सियासी गलियारों में इस पर चर्चा जोरों से हो रही है। भाजपा में डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी का नाम रेस में सबसे टॉप पर माना जा रहा है। उनके अलावा केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय का भी नाम चल रहा है। इसके अलावा, दूसरे डिप्टी सीएम विजय सिन्हा, मंत्री दिलीप जायसवाल, मंगल पांडेय समेत कई अन्य नेताओं का नाम भी रेस में है। वहीं, भाजपा किसी नए चेहरे को मुख्यमंत्री बनाकर चौंका भी सकती है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, दिल्ली जैसे राज्य इसके उदाहरण हैं। हालांकि, रिपोर्ट्स में एनडीए सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि भाजपा बिहार में ऐसा प्रयोग नहीं करेगी। क्योंकि भाजपा बिहार में जेडीयू समेत अन्य सहयोगी दलों के बलबूते सरकार चला रही है। यहां की जनसांख्यिकी और जातिगत समीकरण को ध्यान में रखते हुए नए सीएम के नाम पर मुहर लगाई जाएगी। जेडीयू के वरीय नेताओं का यह भी कहना है कि बिहार का अगला सीएम, नीतीश कुमार की मर्जी से ही बनेगा।

वोटर लिस्ट विवाद,सुप्रीम कोर्ट ने ठुकराई TMC की दलील, कहा- नामांकन के आखिरी दिन तक जुड़ सकते हैं नाम

नई दिल्ली टीएमसी का पक्ष रख रहे वकील कल्याण बनर्जी ने एक मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि एक ही व्यक्ति ने 30 हजार फॉर्म 6 जमा किए हैं। फॉर्म 6 का प्रयोग वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने या फिर संसदीय क्षेत्र बदलने की स्थिति में किया जाता है। बेंच ने कहा कि यह प्रक्रिया पहली बार नहीं हो रही। हमेशा ऐसा होता है। ऐसा हर बार होता है; वोटर लिस्ट वाली TMC की आपत्तियों पर SC की दोटूक, नसीहत भी दी तृणमूल कांग्रेस की ओर से ऐतराज जताया गया था कि भाजपा के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में फॉर्म 6 जमा करा रहे हैं। इसके जरिए मतदाताओं के नाम लिस्ट में जुड़वाए जा रहे हैं। उसकी इस दलील पर सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि इसमें कुछ गलत नहीं है और ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। इस तरह ममता बनर्जी की पार्टी को करारा झटका लगा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने राज्य में SIR के खिलाफ दायर याचिकाओं की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। चीफ जस्टिस ने कहा, 'ऐसा हर बार होता है। पहली बार नहीं हो रहा है। आप आपत्तियां दायर कर सकते हैं।' बेंच का कहना था कि यदि आपको किसी का नाम जोड़े जाने से आपत्ति है तो उस पर चुनाव आयोग में रिपोर्ट कर सकते हैं। टीएमसी का पक्ष रख रहे वकील कल्याण बनर्जी ने एक मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि एक ही व्यक्ति ने 30 हजार फॉर्म 6 जमा किए हैं। फॉर्म 6 का प्रयोग वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने या फिर संसदीय क्षेत्र बदलने की स्थिति में किया जाता है। अधिवक्ता ने कहा कि पूरक सूचियां आ चुकी हैं। इसके बाद भी चुनाव आयोग के नए नोटिफिकेशन में फॉर्म 6 स्वीकार करने की बात कही गई है। लेकिन जब वोटर लिस्ट की पूरक सूची आ गई है और प्रक्रिया बढ़ चुकी है तो फिर फॉर्म 6 क्यों मंगाए जा रहे हैं। उनके बंडल तैयार होकर आ रहे हैं। मैं किसी राजनीतिक दल पर इसके लिए आरोप नहीं लगा रहा। हालांकि चीफ जस्टिस ने टीएमसी की इन आपत्तियों को गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने कहा कि इस तरह की बात करना जल्दबाजी होगा। पहले पूरी प्रक्रिया को समझने की जरूरत है। अदालत ने कहा कि हम इस मामले को बंद नहीं कर रहे हैं, लेकिन समय आने पर देखेंगे। वहीं चुनाव आयोग का पक्ष रखने वाले वकील डीएस नायडू ने कहा कि नियम यह कहता है कि मतदाताओं के नाम उम्मीदवारों के नामांकन के आखिरी दिन तक शामिल किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोई आज ही 18 साल का हुआ है और वह मतदाता के तौर पर नाम जुड़वाना चाहता है तो वह ऐसा कर सकता है। इस पर बनर्जी ने कहा कि नए नाम जिनके शामिल किए जा रहे हैं। उनके बारे में हर बूथ पर सार्वजनिक सूचना जारी होना चाहिए। ऐसा होने पर ही आपत्तियां दायर हो सकेंगी। इस पर जस्टिस बागची ने दखल दिया। उन्होंने कहा कि एक चीज मतदाता सूची में संशोधन है। दूसरी चीज वह वोटर लिस्ट है, जिसके आधार पर चुनाव होना है। चुनाव उसी सूची के आधार पर होते हैं, जो आयोग की ओर से तय तारीख तक अपडेट हो जाती है। इसलिए यदि कोई उसके बाद शामिल भी हुआ तो वह इलेक्शन में मतदान का अधिकार नहीं रखता। इससे पहले शीर्ष अदालत ने कहा था कि बंगाल में SIR की प्रक्रिया को पूर्ण कराने के लिए न्यायिक अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे। आज चीफ जस्टिस ने कहा कि सभी आपत्तियों पर 7 अप्रैल तक फैसला लिया जाएगा।

आसिफ उर्फ बम का शॉर्ट एनकाउंटर, पुलिस ने किया दावा – आरोपी भागने की कोशिश कर रहा था

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में हत्या के आरोपी आसिफ उर्फ बम का शॉर्ट एनकाउंटर होने का मामला सामने आया है. यह घटना उस समय हुई, जब पुलिस उसे पकड़कर शहर ला रही थी और उसने रास्ते में भागने की कोशिश की. इसी दौरान पुलिस की गोली लगने से वह घायल हो गया।  आरोपी आसिफ उर्फ बम को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस टीम उसे भोपाल ला रही थी. इसी दौरान रातीबड़ इलाके के पास उसने अचानक पुलिस को चकमा देकर फरार होने की कोशिश की. पुलिस ने उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं माना, जिसके बाद हालात को काबू में करने के लिए पुलिस को गोली चलानी पड़ी।  पुलिस की गोली आसिफ के पैर में लगी, जिससे वह घायल हो गया और मौके पर ही गिर पड़ा. इसके बाद पुलिस ने उसे तुरंत पकड़ लिया और घायल हालत में इलाज के लिए हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसका इलाज चल रहा है।  गौरतलब है कि आसिफ उर्फ बम पर हाल ही में एक सनसनीखेज हत्या का आरोप है. बीते रविवार की रात अशोका गार्डन इलाके में मामूली विवाद के बाद उसने अपने दो अन्य साथियों के साथ मिलकर 35 साल के चाय कारोबारी पर चाकू से हमला कर दिया था. इस हमले में कारोबारी की मौके पर ही मौत हो गई थी, जिसके बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया था।  घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपियों की तलाश शुरू की थी. इसी क्रम में आसिफ को पकड़ा गया था. पुलिस उसे आगे की पूछताछ के लिए भोपाल ला रही थी, लेकिन रास्ते में उसने भागने की कोशिश की।  पुलिस का कहना है कि आरोपी के खिलाफ हत्या समेत अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज है और उसके आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है. वहीं, इस शॉर्ट एनकाउंटर के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सतर्कता बढ़ा दी गई है. फिलहाल, मामले की जांच जारी है और पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश में भी जुटी हुई है। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में ग्रामीणों को मिला पेयजल संकट से मुक्ति

नक्सल प्रभावित सालातोंग में बहने लगी विकास की धारा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में ग्रामीणों को मिला पेयजल संकट से मुक्ति  जल जीवन मिशन से हर घर पहुंचा नल जल नक्सल प्रभावित सालातोंग में बहने लगी विकास की धारा, क्षेत्र में बदलाव की शुरुआत रायपुर  केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन ने सुकमा जिले के नक्सल प्रभावित ग्राम सालातोंग में बदलाव की नई इबारत लिख दी है। 15 अगस्त 2019 को शुरू किए गए इस मिशन का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को प्रति व्यक्ति प्रतिदिन न्यूनतम 55 लीटर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना है। कलेक्टर अमित कुमार के मार्गदर्शन में इसी लक्ष्य को साकार करते हुए नियद नेल्लानार योजना अंतर्गत कोंटा ब्लॉक के दूरस्थ ग्राम सालातोंग में अब हर घर तक नल से स्वच्छ पानी पहुंच रहा है। ग्राम सालातोंग, जो कोंटा से लगभग 100 किमी तथा जिला मुख्यालय सुकमा से 90 किमी दूर स्थित है, लंबे समय तक नक्सल समस्या और पेयजल संकट से जूझता रहा। गांव के लगभग 80 घरों के लोग पीने और घरेलू उपयोग के लिए एक छोटे नाले पर निर्भर थे। गर्मी के मौसम में जब महीनों तक बारिश नहीं होती थी, तब नाले का जलस्तर इतना घट जाता था कि ग्रामीणों को बेहद सीमित मात्रा में पानी निकालना पड़ता था। कई बार पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, जिससे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को विशेष परेशानी होती थी। अब जल जीवन मिशन के माध्यम से गांव में 100 नल कनेक्शन प्रदान करने का लक्ष्य निर्धारित कर कार्य तेजी से किया गया, जिससे ग्रामीणों को घर बैठे शुद्ध जल उपलब्ध होने लगा है। मिशन के लागू होने के बाद गांव में न केवल जल संकट दूर हुआ, बल्कि स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता से स्वास्थ्य में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। जलजनित बीमारियों में कमी आई है और ग्रामीणों की जीवनशैली में सकारात्मक परिवर्तन हुआ है। जल जीवन मिशन के तहत सालातोंग में जल संरक्षण और जल सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी गई है। गांव के जल स्रोतों सोलर आधारित सिस्टम एवं हैंडपंप का नियमित रूप से जल गुणवत्ता परीक्षण किया जा रहा है। इस कार्य में “जल बहिनियाँ” भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं, जिनमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन और गांव की शिक्षित महिलाएं शामिल हैं। इन्हें जल गुणवत्ता परीक्षण का प्रशिक्षण देकर सशक्त बनाया गया है, ताकि वे स्वयं पानी की जांच कर ग्रामीणों को सुरक्षित जल उपलब्धता सुनिश्चित कर सकें। ग्रामीणों ने इस मिशन के लिए मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब पानी के लिए भटकना नहीं पड़ता, घर में नल से पानी मिल रहा है, जिससे हमारा जीवन आसान और सुरक्षित हुआ है। जल जीवन मिशन ने सालातोंग में स्वच्छ जल पहुंचाकर यह साबित कर दिया है कि सरकार की योजनाएं जब जमीन पर उतरती हैं, तो दूरस्थ और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी विकास की नई रोशनी पहुंचती है।

हिंसा को पीछे छोड़, कांकेर में नक्सल प्रभावितों को मिल रही नई दिशा और रोजगार के अवसर

हिंसा छोड़कर नई दिशा, नई राह की ओर बढ़ रहे कदम आत्मसमर्पित व नक्सल पीड़ितों को कलेक्टर ने सौंपा नियुक्ति पत्र प्रशिक्षण उपरांत रोजगार देने वाला पहला जिला बना कांकेर रायपुर  मानव समाज का सबसे उत्कृष्ट पहलू सकारात्मक परिवर्तन है, जिससे जीवन में नवाचार और नए विचार जन्म लेते हैं। ऐसा ही बदलाव आत्मसमर्पित माओवादियों के जीवन में दिखाई दे रहा है। जिला प्रशासन की पहल पर उन्हें पहले प्रशिक्षित किया गया और अब कुशल होने के बाद रोजगार भी मुहैया हो रहा है। आत्मसमर्पित माओवादियों को भानुप्रतापपुर के ग्राम मुल्ला (चौगेल) के कैम्प में विभिन्न व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें पारंगत होने के बाद प्रशासन के प्रयासों से रोजगार भी दिलाया जा रहा है। मुख्यधारा में लौटकर प्रशिक्षण के उपरांत रोजगार प्रदान करने के मामले में उत्तर बस्तर कांकेर पहला जिला है। कलेक्टर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर और जिला पंचायत के सीईओ श्री हरेश मंडावी ने आज कलेक्टर कक्ष में आज सुबह 04 आत्मसमर्पित माओवादी व पीड़ितों को नियुक्ति पत्र सौंपा तथा उन्हें नई शुरूआत के लिए अपनी शुभकामनाएं दीं। इनमें पुनर्वासित सगनूराम आंचला एवं नक्सल पीड़ित रोशन नेताम, बीरसिंह मंडावी और संजय नेताम शामिल थे। इन सभी को निजी फर्म का नियुक्ति पत्र प्रदाय किया गया, जहां 15 हजार रूपए प्रतिमाह मानदेय और अन्य प्रकार की वित्तीय सुविधाएं प्राप्त होंगी। श्री आंचला ने बताया कि शिक्षा और सही-गलत की जानकारी के अभाव में माओवादी संगठन से जुड़ गया था। उन्हांने कहा कि मनुष्य की अहमियत मुख्यधारा में जुड़ने के बाद ही पता चली। जीवन के अलग-अलग रंगों व वास्तविक खुशियों की पहचान अब जाकर हुई। श्री आंचला ने शासन-प्रशासन का आभार मानते हुए कहा कि जीने का असली मकसद अब मिला है। इसी तरह माओवाद पीड़ित श्री बीरसिंह मंडावी ने कहा कि ग्राम मुल्ला (चौगेल) के कैम्प में पुनर्जीवन मिला है, जहां निःशुल्क प्रशिक्षण देकर उन्हें कुशल एवं पारंगत बनाया गया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के बाद जिला प्रशासन द्वारा रोजगार भी दिया जा रहा है। प्रदेश सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर हिंसा का मार्ग छोड़ समाज की मुख्यधारा में लौट रहे हैं। ज्ञात हो कि प्रशिक्षण देकर उन्हें नियोजित करने के मामले में कांकेर बस्तर संभाग का पहला जिला बन गया है। यह शासन की विशिष्ट पहल है, जिसके चलते उन्हें अपनी प्रतिभा निखारने व तराशने तथा उसे नई दिशा देने की कवायद हो रही है। इस प्रकार शासन की सकारात्मक पहल का प्रत्यक्ष लाभ पुनर्वासितों व पीड़ितों को मिल रहा है।