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‘स्टूडेंट वीजा वाले गुंडों को डिपोर्ट करो’, कनाडा MP का बयान

चंडीगढ़. कनाडा में लॉरेंस गैंग को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। गैंग की ओर से कनाडा में राज करने की कथित धमकी वाला पत्र सामने आने के बाद सांसद ब्रैड विस ने गैंग के खिलाफ कार्रवाई की मांग को फिर से प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म पर एक वीडियो जारी किया है, जिसमें कनाडा में हुई गोलीबारी की 10 घटनाओं के फुटेज दिखाए गए हैं। वीडियो में शूटर मशीनगन से गोलियां चलाते नजर आ रहे हैं। सांसद ने कनाडा सरकार से मांग की है कि लॉरेंस गैंग से जुड़े ऐसे लोगों की तत्काल पहचान की जाए, जो छात्र वीजा अथवा किसी अन्य अस्थायी अनुमति के आधार पर कनाडा में रह रहे हैं। उनका कहना है कि यदि किसी व्यक्ति का आपराधिक गिरोह से संबंध सामने आता है और वह कनाडा में रहने का कानूनी अधिकार खो देता है तो इमिग्रेशन कानून के तहत उसे देश से बाहर किया जाना चाहिए। पंजाब से संचालित नेटवर्क बताया ब्रैड विस ने लॉरेंस गैंग को मुख्य रूप से पंजाब से संचालित होने वाला आपराधिक नेटवर्क बताया। उन्होंने गैंग पर जबरन वसूली, गोलीबारी और धमकियां देने के आरोप लगाए। सांसद के अनुसार, उनके गृह नगर में कारोबारियों को 10 लाख कनाडाई डॉलर तक की रंगदारी मांग वाले पत्र मिले। मांग पूरी नहीं करने पर परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकियां भी दी गईं। उन्होंने दावा किया कि कनाडा सरकार ने 29 सितंबर 2025 को लॉरेंस बिश्नोई गैंग को आतंकवादी संगठन के रूप में सूचीबद्ध किया था। अब उनकी मांग इस सूचीबद्धता के बाद इमिग्रेशन और कानून-व्यवस्था से जुड़े प्रावधानों को सख्ती से लागू करने की है। कारोबारियों को धमकी का भी दावा सांसद ने कहा कि कनाडा के रक्षा मंत्री और देशभर की पुलिस को भेजे गए एक कथित पत्र में गैंग ने खुद को भारतीय गैंग बताते हुए कनाडा में उसके खिलाफ कार्रवाई को चुनौती दी। उनके अनुसार पत्र में हिंसा जारी रखने, पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने और कारोबारियों से जबरन वसूली की धमकी दी गई। सीबीएसए और आरसीएमपी को कार्रवाई का अधिकार देने की मांग ब्रैड विस ने कनाडा बॉर्डर सर्विसेज एजेंसी (सीबीएसए) और रॉयल कनाडियन माउंटेड पुलिस (आरसीएमपी) को गैंग से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई के लिए विशेष अधिकार देने की मांग की। उन्होंने कहा कि छात्र वीजा या अन्य अस्थायी वीजा पर कनाडा पहुंचे और बाद में आपराधिक नेटवर्क से जुड़े लोगों के मामलों में इमिग्रेशन कानून का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। 100 से अधिक रंगदारी मामलों का उल्लेख कनाडा की वित्तीय खुफिया एजेंसी फिनट्रैक की अप्रैल 2026 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए सांसद ने कहा कि दक्षिण एशियाई समुदाय को निशाना बनाकर जबरन वसूली के 100 से अधिक मामले सामने आए। रिपोर्ट में 300 से अधिक संदिग्धों और करीब 63 हजार संदिग्ध लेनदेन का उल्लेख होने की बात कही गई है। अल्बर्टा, ब्रिटिश कोलंबिया और ओंटारियो में कारोबारियों के घरों पर आगजनी और गोलीबारी की घटनाओं का भी जिक्र किया गया है। रेस्टोरेंट और कैफे पर फायरिंग के मामले कनाडा में इस नेटवर्क से जुड़े होने के दावे वाले कई हमलों का भी सांसद ने उल्लेख किया। अक्टूबर 2025 में सरे में एक भारतीय रेस्टोरेंट संचालक के कई ठिकानों पर गोलीबारी हुई थी। इंटरनेट मीडिया पर गैंग से जुड़े बताए गए गोल्डी ढिल्लों ने इस हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया था। सरे स्थित कामेडियन कपिल शर्मा के कैप्स कैफे पर जुलाई से अक्टूबर 2025 के बीच तीन बार गोलीबारी की घटनाएं हुईं। इन हमलों की जिम्मेदारी भी गैंग से जुड़े शूटरों द्वारा लेने का दावा सामने आया था। इसके अलावा कनाडा में दक्षिण एशियाई मूल के कारोबारियों, राजनेताओं और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों को कथित रंगदारी के लिए निशाना बनाए जाने के मामले भी जांच एजेंसियों के सामने आए हैं। एडमंटन, कैलगरी और ओंटारियो में कुछ घरों पर गोलीबारी और आगजनी की घटनाओं की जिम्मेदारी इंटरनेट मीडिया पर गैंग से जुड़े हैंडलर्स द्वारा लेने के दावे भी किए गए हैं।

योगी सरकार काउंसलिंग, संरक्षण और पुनर्वास भी सुनिश्चित करेगी, 7 माह में 51 हजार से ज्यादा गुमशुदगी के मामलों का समाधान

लखनऊ बच्चे की गुमशुदगी परिवार के लिए किसी सदमे से कम नहीं होती, लेकिन उसकी सकुशल बरामदगी के बाद भी जिम्मेदारी खत्म नहीं होती। योगी सरकार ने बाल संरक्षण की व्यवस्था को इस सोच के साथ मजबूत किया है कि बच्चे को केवल परिवार तक पहुंचाना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि जरूरत के अनुसार उसकी काउंसलिंग, संरक्षण और पुनर्वास भी सुनिश्चित किया जाए। बाल हेल्पलाइन 1098 के माध्यम से संकट में फंसे बच्चों तक मदद पहुंचाने के साथ उनकी सुरक्षित वापसी और आगे की जरूरतों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। काउंसलिंग से सामान्य जीवन की ओर वापसी गुमशुदगी या संकट की परिस्थितियों से गुजरने वाले बच्चे कई बार मानसिक और भावनात्मक दबाव का सामना करते हैं। ऐसे में जरूरत के अनुसार काउंसलिंग उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बच्चे की स्थिति और जरूरत का आकलन कर उसे आवश्यक संरक्षण एवं पुनर्वास सेवाओं से जोड़ने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। इससे परिवार में वापसी के बाद बच्चे को सामान्य जीवन में लौटने के लिए जरूरी भावनात्मक सहारा मिल सके। बरामदगी के बाद भी सुरक्षा की जिम्मेदारी 1 जनवरी से 1 अगस्त 2026 तक बाल हेल्पलाइन पर बच्चों से संबंधित कुल 55,791 मामले प्राप्त हुए, जिनमें 51,402 मामलों का निस्तारण किया जा चुका है। इनमें बच्चों के गुम होने से संबंधित करीब 19,811 मामले शामिल रहे, जबकि 18,230 मामलों का सफलतापूर्वक निस्तारण किया गया। इसके अलावा बच्चों के मिलने से संबंधित 8,714 मामले हेल्पलाइन तक पहुंचे, जिनमें 8,335 मामलों का समाधान किया गया। सरकार का जोर अब केवल बच्चे को तलाशने तक सीमित नहीं, बल्कि उसे सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने पर भी है। 1098 बनी बच्चों की समस्याओं तक पहुंचने की कड़ी बाल हेल्पलाइन 1098 को बच्चों की समस्याओं को सुनने और उन्हें संबंधित स्तर तक पहुंचाने के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में विकसित किया गया है। हेल्पलाइन पर केवल गुमशुदगी के मामले ही नहीं, बल्कि बच्चों से जुड़ी अन्य समस्याओं की सूचनाएं भी प्राप्त होती हैं। इन मामलों में संबंधित विभागों और संस्थाओं के समन्वय से आवश्यक कार्रवाई की जाती है। प्राप्त शिकायतों की प्रगति पर नजर रखकर समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। सुरक्षित बचपन के साथ सुरक्षित भविष्य पर फोकस महिला कल्याण विभाग की निदेशक सी. इंदुमति ने बताया कि प्रदेश सरकार बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। गुमशुदा बच्चों से संबंधित प्रत्येक सूचना को गंभीरता से लेते हुए संबंधित स्तर पर कार्रवाई की जाती है। बच्चों की तलाश और सुरक्षित वापसी के साथ परिवार से पुनर्मिलन, काउंसलिंग और जरूरत के अनुसार पुनर्वास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

MP में सुगम परिवहन की नई शुरुआत, CM मोहन यादव बोले- हम जो कहते हैं, करके भी दिखाते हैं

हम जो कहते हैं,करके भी दिखाते हैं – मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा एवं पीएम ई-बस सेवा की शुरुआत पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों को दी बधाई भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश की बहुप्रतीक्षित मांग (शासकीय बसों का संचालन) पूरी होने पर इस स्वर्णिम सौगात के लिए प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 'एक्स' पर कहा कि हम जो कहते हैं, वो करके भी दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि 'मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा' एवं 'पीएम ई-बस सेवा' के जरिए हमने अनंत चतुर्दशी के मंगल अवसर पर प्रदेशवासियों को खुशियों की अनंत सौगात दी है। उन्होंने कहा कि 25 सितम्बर को मध्यप्रदेश के नागरिकों, विशेष रूप से दूरस्थ एवं ग्रामीण अंचलों में रहने वाले हमारे भाई-बहनों के जीवन में सुगम परिवहन से सहज परिवर्तन लाने की दिशा में एक ऐतिहासिक शुरुआत हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पिछले दो दशकों में शासकीय बसों का संचालन बंद होने के कारण हमारे ग्रामीण अंचलों में सार्वजनिक परिवहन का बड़ा अभाव बना हुआ था। दूर-दराज के कई गांव मुख्य सड़कों से कट गए थे। गांव-देहात के हमारे गरीबों, किसानों एवं छात्र-छात्राओं को आने-जाने के लिए सीमित साधनों पर निर्भर रहना पड़ता था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमने अपने 'संकल्प पत्र' में भी यह सेवा प्रारंभ करने का उल्लेख किया था। गत दिवस शुक्रवार को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के साथ इस सेवा का मंगल आरम्भ करते हुए संकल्प को धरातल पर साकार कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि शुक्रवार को राज्यभर में 1,500 बसों से शुरू हुई इस सेवा को हमने वर्ष 2029 तक 15,000 बसों तक ले जाने का लक्ष्य रखा है, ताकि प्रदेश के हर व्यक्ति तक सुगम बस परिवहन की सुविधा पहुंच सके।  

बाल आयोग के ‘रक्षक’ अभियान को मिला गोल्डन अवार्ड

रायपुर. छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। आयोग के अभिनव नवाचार ‘रक्षक’ कार्यक्रम को देश के प्रतिष्ठित SKOCH गोल्डन अवार्ड से सम्मानित किया गया है। आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के नेतृत्व में यह सम्मान प्राप्त हुआ है। बाल अधिकारों के क्षेत्र में यह पुरस्कार पाने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बन गया है। इस उपलब्धि पर आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि अवार्ड के लिए चयन प्रक्रिया काफी कठोर थी। सर्वप्रथम आयोग की ओर से जूरी के समक्ष ‘रक्षक’ पाठ्यक्रम पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया, जिसके बाद कड़े परीक्षण के उपरांत इसे गोल्ड श्रेणी के लिए चुना गया है। SKOCH गोल्डन अवार्ड प्रसिद्ध पर्यावरणविद सुनीता नारायण, पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया की पूनम मुटरेजा, भारत सरकार के पूर्व सचिव संजय कुमार और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के पूर्व महासचिव भरत लाल की गरिमामयी उपस्थिति में SKOCH ग्रुप के चेयरमैन समीर कोचर द्वारा प्रदान किया गया। SKOCH अवार्ड क्या है? SKOCH ग्रुप 1997 से कार्यरत देश का एक प्रमुख स्वतंत्र थिंक-टैंक है। यह वर्ष 2003 से सुशासन, डिजिटल गवर्नेंस और प्रशासनिक सुधारों में उत्कृष्ट योगदान के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार प्रदान करता है, जिसे देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में गिना जाता है। क्या है ‘रक्षक’ पाठ्यक्रम? ‘रक्षक’ का पूरा नाम Post Graduation Diploma in Protection of Child Rights (PGDPCR) है। यह एक वर्षीय (2 सेमेस्टर) डिप्लोमा कोर्स है, जिसकी न्यूनतम योग्यता स्नातक है। डॉ. वर्णिका शर्मा ने बताया कि बाल संरक्षण के क्षेत्र में प्रशिक्षित मानव संसाधन की कमी को देखते हुए यह पाठ्यक्रम तैयार किया गया है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसका प्रैक्टिकल मॉडल है। छात्र केवल सैद्धांतिक ज्ञान नहीं लेंगे, बल्कि आयोग की संवाद इकाइयों के माध्यम से बाल कल्याण समिति, किशोर न्याय बोर्ड, चाइल्ड केयर संस्थानों और स्वैच्छिक संगठनों के साथ सीधे जुड़कर फील्ड वर्क, केस स्टडी और प्रोजेक्ट रिपोर्ट पर कार्य करेंगे। पाठ्यक्रम में पॉक्सो एक्ट, किशोर न्याय अधिनियम 2015, बाल विवाह एवं बाल श्रम प्रतिषेध, दत्तक ग्रहण कानून, शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 और पुनर्वास योजनाओं जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। यह पाठ्यक्रम प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में उनके बोर्ड/परिषद की अनुमति से प्रारंभ किया जा रहा है। इससे युवाओं के लिए बाल संरक्षण, काउंसलिंग और सामाजिक कार्य के क्षेत्र में रोजगार के नए द्वार खुलेंगे।

हाईस्कूल शिक्षक नियुक्ति में गड़बड़ी की जांच तेज, संशोधित मेरिट लिस्ट होगी ऑनलाइन

रांची स्नातक स्तरीय प्रशिक्षित शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2016 में हुई गड़बड़ियों की जांच कर रही वन मैन फैक्ट फाइंडिंग कमीशन ने शनिवार को सुनवाई की. इस दौरान झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की ओर से संशोधित स्टेट मेरिट लिस्ट सौंपा गया. कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में विषय वार और कोटिवार स्टेट मेरिट लिस्ट तैयार किया गया है, जिसका पालन कर लिया गया है. वहीं राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि अभ्यर्थियों को जेएसएससी द्वारा उपलब्ध कराए गए डाटा के आधार पर शपथ पत्र दाखिल किया गया है. संशोधित मेरिट लिस्ट ऑनलाइन, 4 अक्टूबर से सुनवाई सरकार और जेएसएससी का पक्ष सुनने के बाद कमीशन के अध्यक्ष रिटायर जस्टिस गौतम कुमार चौधरी ने कहा कि जेएसएससी द्वारा सोप गई संशोधित स्टेट मेरिट लिस्ट अभ्यर्थियों को नेट के माध्यम से उपलब्ध करा दिया जाएगा तथा मामले की फाइनल सुनवाई डोरंडा स्थित हाईकोर्ट के पुराने बिल्डिंग में 4 अक्टूबर से की जाएगी. इससे पूर्व ऑनलाइन सुनवाई के दौरान प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स, अधिवक्ता शेखर प्रसाद गुप्ता, अधिवक्ता राजेश कुमार व अन्य ने कमीशन के समक्ष पक्ष रखा. उल्लेखनीय हैं कि हाइकोर्ट के आदेश के बाद वन मैन फैक्ट फाइंडिंग कमीशन द्वारा हाइस्कूल शिक्षक नियुक्ति में हुई गड़बड़ियों की जांच की जा रही है. 10 हजार नियुक्तियां, हजारों योग्य अभ्यर्थी अब भी वंचित वर्ष 2016 में जेएसएससी ने स्नातक प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की थी. इसके माध्यम से 17,752 शिक्षकों की नियुक्ति होनी थी. लगभग 10000 सीटों पर नियुक्ति हुई है. शेष पद रिक्त पड़े हुए हैं. यह नियुक्ति जिलावर मेरिट लिस्ट और स्टेट वाइज मेरिट लिस्ट के आधार पर की गयी है. एक ही नियुक्ति परीक्षा में दो तरह का मेरिट लिस्ट होने से हजारों योग्य अभ्यर्थी नियुक्ति से अभी भी वंचित हैं.

अब मौके पर होगी दूध में फार्मेलिन की जांच, NDRI की पेपर स्ट्रिप तकनीक तैयार

 करनाल दूध में मिलावट की जांच के लिए अब हर बार नमूना प्रयोगशाला भेजने और रिपोर्ट का इंतजार करने की जरूरत नहीं होगी। राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान करनाल ने दूध में फार्मेलिन की मौजूदगी का मौके पर पता लगाने के लिए विकसित पेपर आधारित स्ट्रिप तकनीक के व्यावसायिक उपयोग की दिशा में कदम बढ़ाया है। संस्थान ने अहमदाबाद की एवरेस्ट इंस्ट्रूमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ इसके लिए समझौता ज्ञापन किया है। तकनीक में दूध के नमूने में फार्मेलिन होने पर स्ट्रिप के रंग में बदलाव के आधार पर प्राथमिक स्तर पर इसकी पहचान की जा सकती है। शुक्रवार को एनडीआरआइ में अयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में इस तकनीक का हस्तांतरण किया गया। एनडीआरआइ के शोध के मुताबिक जांच में करीब सात से आठ मिनट का समय लगता है और तकनीक की पहचान सीमा 0.05 प्रतिशत तक बताई गई है। स्ट्रिप की न्यूनतम शेल्फ लाइफ छह महीने है। खास बात यह है कि इसके लिए किसी बड़े उपकरण या जटिल प्रयोगशाला व्यवस्था की जरूरत नहीं पड़ती। यही वजह है कि इसे दूध संग्रह केंद्रों, डेयरी प्रतिष्ठानों और उपभोक्ताओं के स्तर पर प्राथमिक जांच के लिए उपयोगी माना जा रहा है। दूध की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए इस्तेमाल होता है फार्मेलिन फार्मेलिन का इस्तेमाल दूध को लंबे समय तक खराब होने से बचाने और उसकी संरक्षण अवधि बढ़ाने के लिए किया जा सकता है, लेकिन खाद्य सुरक्षा के लिहाज से दूध में इसका इस्तेमाल स्वीकार्य नहीं है। ऐसे में इसकी मौके पर पहचान की सुविधा दूध की गुणवत्ता जांच व्यवस्था को मजबूत कर सकती है। एनडीआरआइ की तकनीक में दूध की बूंद या नमूने के साथ पेपर स्ट्रिप की प्रतिक्रिया के आधार पर फार्मेलिन की मौजूदगी का संकेत मिलता है। शोध में स्ट्रिप पर अन्य सामान्य मिलावटकारकों की मौजूदगी के बावजूद फार्मेलिन की पहचान प्रभावित नहीं होने की बात सामने आई है। इसका अर्थ है कि जांच केवल प्रयोगशाला तक सीमित न रहकर प्राथमिक स्तर की स्क्रीनिंग में भी इस्तेमाल की जा सकती है। दूध में सार्बिटोल की पहचान के लिए पेपर आधारित डिस्क संस्थान के निदेशक डॉ. धीर सिंह के अनुसार इस समझौते की एक और खास बात यह है कि 2025 से अब तक एवरेस्ट इंस्ट्रूमेंट्स को एनडीआरआइ की हस्तांतरित होने वाली यह 10वीं तकनीक है। इससे पहले संस्थान ने कंपनी को दूध में न्यूट्रलाइजर, यूरिया, ग्लूकोज, हाइड्रोजन पेराक्साइड, माल्टोडेक्सट्रिन, सुक्रोज और सोडियम क्लोराइड की पहचान से जुड़ी स्ट्रिप तकनीकें हस्तांतरित की थीं। इसके अलावा दूध में सार्बिटोल की पहचान के लिए पेपर आधारित डिस्क और पशुओं में सब-क्लिनिकल व क्लिनिकल मास्टाइटिस की शुरुआती पहचान से जुड़ी स्ट्रिप तकनीक भी कंपनी को दी गई थी।  

रायपुर के 60 गांवों को बड़ी सौगात! पंडरीपानी में खुली SBI शाखा, किसानों-महिलाओं को मिलेगा फायदा

 रायपुर : पंडरीपानी में एसबीआई की नई शाखा से 60 गांवों को मिली बैंकिंग सुविधा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल से क्षेत्रवासियों की वर्षों पुरानी मांग हुई पूरी किसानों, महिलाओं, व्यापारियों और पेंशनधारियों को स्थानीय स्तर पर मिलेंगी बैंकिंग सेवाएं, समय और यात्रा खर्च की होगी बचत     रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय की पहल से जशपुर जिले के फरसाबहार तहसील क्षेत्र के पंडरीपानी में भारतीय स्टेट बैंक की नई शाखा शुरू होने से क्षेत्रवासियों की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी हो गई है। नई शाखा शुरू होने से पंडरीपानी सहित आसपास के करीब 60 गांवों के ग्रामीणों को अब अपने क्षेत्र में ही बैंकिंग सेवाओं का लाभ मिल रहा है। इससे बैंकिंग कार्यों के लिए दूर जाने की परेशानी कम होने के साथ ही ग्रामीणों के समय और यात्रा खर्च की भी बचत होगी।     पंडरीपानी और आसपास के ग्रामीणों को अब तक बैंकिंग कार्यों के लिए करीब 5 किलोमीटर दूर फरसाबहार जाना पड़ता था। पंडरीपानी में एसबीआई की शाखा शुरू होने के बाद अब उन्हें अपने क्षेत्र में ही आवश्यक बैंकिंग सुविधाएं मिल रही हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्र में बैंकिंग सेवाओं की पहुंच आसान और सुविधाजनक हुई है। किसानों से लेकर पेंशनधारियों तक को मिलेगा सीधा लाभ     नई बैंक शाखा से किसानों, मजदूरों, व्यापारियों, महिलाओं, कर्मचारियों और पेंशनधारियों सहित विभिन्न वर्गों को सीधा लाभ मिलेगा। स्थानीय स्तर पर बैंकिंग सुविधा उपलब्ध होने से किसानों को कृषि ऋण सहित अन्य बैंकिंग सेवाओं के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। वहीं व्यापारियों और ग्रामीणों के लिए लेन-देन तथा अन्य वित्तीय कार्य भी अधिक सुविधाजनक होंगे। होम, कार और शिक्षा ऋण जैसी सुविधाएं भी होंगी सुलभ     नई शाखा के माध्यम से पात्र हितग्राहियों को विभिन्न प्रकार की ऋण सुविधाओं का लाभ भी स्थानीय स्तर पर मिल सकेगा। इनमें होम लोन, कार लोन और शिक्षा ऋण सहित अन्य बैंकिंग सुविधाएं शामिल हैं। इससे क्षेत्रवासियों को अपनी वित्तीय आवश्यकताओं के लिए दूर जाने के बजाय नजदीक ही बैंकिंग सेवाएं प्राप्त करने में सहूलियत होगी।     पंडरीपानी में एसबीआई की नई शाखा शुरू होने पर क्षेत्रवासियों ने प्रसन्नता व्यक्त की है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के नजदीक बैंकिंग सुविधा मिलने से अब उन्हें सामान्य बैंकिंग कार्यों के लिए फरसाबहार नहीं जाना पड़ेगा। इससे उनके समय और धन दोनों की बचत होगी।

स्वर्ण पदक विजेता टीम की सदस्य संजू देवी को वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने दी बधाई

रायपुर : एशियन गेम्स में छत्तीसगढ़ की बेटी संजू देवी का स्वर्णिम परचम, भारतीय महिला कबड्डी टीम ने बढ़ाया देश का मान स्वर्ण पदक विजेता टीम की सदस्य संजू देवी को वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने दी बधाई बेटियों का जज्बा, अनुशासन और समर्पण देश के युवाओं के लिए प्रेरणादायी-चौधरी     रायपुर वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने जापान में आयोजित एशियन गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय महिला कबड्डी टीम की सदस्य एवं छत्तीसगढ़ की बेटी संजू देवी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।     चौधरी ने कहा कि भारतीय महिला कबड्डी टीम की यह स्वर्णिम उपलब्धि पूरे देश के लिए गौरव का क्षण है। इस ऐतिहासिक सफलता में छत्तीसगढ़ की बेटी संजू देवी की भागीदारी ने प्रदेशवासियों की खुशी और गौरव को और बढ़ा दिया है। अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर तिरंगे की शान बढ़ाने वाली संजू देवी ने अपनी मेहनत, अनुशासन और खेल प्रतिभा से छत्तीसगढ़ का नाम भी रोशन किया है।     वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि देश की बेटियां आज खेल सहित प्रत्येक क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और सामर्थ्य का लोहा मनवा रही हैं। उनका जज्बा, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण देश के अन्य युवाओं के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने भारतीय महिला कबड्डी टीम की सभी खिलाडि़यों को स्वर्ण पदक की शानदार उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए संजू देवी के उज्ज्वल भविष्य और आगामी प्रतियोगिताओं में निरंतर सफलता की कामना की।

सड़क निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण, ₹1.28 करोड़ मुआवजा

सोनीपत. हरियाणा में एक्सप्रेसवे और हाईवे की वजह से गांव की तस्वीर बदल रही है. इससे गांव के आसपास भी प्रॉपर्टी के दामों में खासा उछाल देखने को मिल रहा है.ऐसे में जिन जमीनों के दामल छह-सात साल पहले एक करोड़ रुपये प्रति एकड़ के आसपास थे, अब सात से 10 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक कीमत जा पहुंची है. गोहाना में 1 करोड़ की जमीन अब 10 करोड़ में- हरियाणा में एक्सप्रेसवे और हाईवे की वजह से गांव की तस्वीर बदल रही है. दरअसल, रोहतक-पानीपत हाईवे के साथ हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी)  की ओर से दो सेक्टर विकसित किए जा रहे हैं और इस वजह से आसपास की जमीन के रेट ब़ढ़ गए हैं. अब बाईपास और दो हाईवे के साथ कनेक्टिंग की वजह से नगर, बड़ौता, सिकंदरपुर माजरा और आसपास के गांवों की जमीन पर प्रापर्टी डीलरों की नजर है. यहां पर दीनदयाल आवासीय क्षेत्र भी विकसित किया जा रहा है. इस वजह से लोग भी जमीन की खरीद फरोख्त में रुचि दिखा रहे हैं. इसके अलावा, पानीपत-रोहतक हाईवे के बाईपास और गोहाना- सोनीपत हाईवे के आसपास एग्रीकल्चर लैंड है. लेकिन हाईवे और बाइपास और सेक्टरों के चलते अब जमीन की कीमतें बढ़ी हैं. क्योंकि प्राइम लोकेशन के तौर पर यह इलाका उभर रहा है. अहम बात है कि रजिस्ट्री के दौरान कीमत कम दिखाई जाती है, लेकिन नकद में कैश लिया जाता है. लोकेशन के अनुसार सात से 10 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक जमीन के रेट पहुंच रहे हैं. हैं। हाईवे से नजदीकी, सड़क की पहुंच और प्रस्तावित शहरी विकास के कारण जमीन के भाव में अंतर है. कुछ जगह हाईवे से दूरी और जमीन की स्थिति के अनुसार भाव कम हैं. अवैध कब्जे के भी मामले उधर नगर और बड़ौता के क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग के मामले सामने आने पर जिला नगर योजनाकार (डीटीपी) विभाग कार्रवाई कर चुका है. कई जगह अवैध रास्तों और निर्माणों पर बुलडोजर भी चलाया गया. क्योंकि लोग जमीन पर इसलिए भी अवैध निर्माण करने की फिराक में हैं, ताकि बाद में उंचे दाम पर खरीदफरोख्त कर सकते हैं. क्विक आंसर्स हरियाणा के गोहाना क्षेत्र में एक्सप्रेसवे और हाईवे के विकास के कारण छह-सात साल पहले जो जमीनें एक करोड़ रुपये प्रति एकड़ बिकती थीं, उनके दाम अब बढ़कर सात से 10 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक पहुंच गए हैं। रोहतक-पानीपत हाईवे के साथ हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण द्वारा सेक्टरों के विकास, बाईपास निर्माण, दो हाईवे की कनेक्टिविटी और दीनदयाल आवासीय क्षेत्र के विकसित होने से यह इलाका प्राइम लोकेशन बन गया है, जिससे जमीन के दाम बढ़े हैं। जिला नगर योजनाकार विभाग ने नगर और बड़ौता क्षेत्रों में अवैध प्लॉटिंग के मामलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है, जिसके तहत बुलडोजर चलाकर अवैध सड़कों और निर्माण कार्यों को गिराया गया है।

पारा शिक्षकों को राहत, हाईकोर्ट ने अप्रैल 2025 से बकाया मानदेय देने का दिया आदेश

रांची झारखंड हाइकोर्ट ने पूर्वी सिंहभूम के डीएसइ की ओर से पारा शिक्षकों को नौकरी से हटाने और मानदेय नहीं देने के आदेश को निरस्त कर दिया है. डीएसइ ने संबंधित आदेश शैक्षणिक प्रमाण पत्र सही नहीं होने का हवाला देते हुए दिया था. इससे पहले हाइकोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में मामले में सुनवाई हुई. पारा शिक्षकों की ओर से मानदेय रोकने और काम से हटाने के आदेश को चुनौती देते हुए याचिका दायर की गयी थी. अदालत ने आदेश दिया कि प्रार्थियों को अप्रैल 2025 से बकाया मानदेय का भुगतान किया जाये. डीएसइ के आदेश को याचिका के जरिए दी गयी चुनौती प्रार्थी मेरी मुर्मूव अन्य की ओर से याचिका दायर कर डीएसइ के आदेश को चुनौती दी गयी थी. पूर्व में सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. मामले में सुनवाई के दौरान प्रार्थ की ओर से अधिवक्ता राजेश कुमार ने पक्ष रखा था. विवादित प्रमाणपत्र पर पारा शिक्षकों के खिलाफ हुई कार्रवाई इंटर प्रयाग महिला विद्यापीठ इलाहाबाद, हिंदी महिला विद्यापीठ इलाहाबाद, हिंदी विद्यापीठ देवघर आदि संस्थानों से मैट्रिक व इंटरमीडिएट का सर्टिफिकेट वाले पारा शिक्षकों (कक्षा एक से पांच और कक्षा छह से आठ) पर कार्रवाई की गयी थी. उनका शैक्षणिक प्रमाण पत्र सही नहीं बताते हुए काम से हटाने और मानदेय रोकने को लेकर झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने सात नवंबर 2025 को पत्र जारी किया था. इसके आलोक में पूर्वी सिंहभूम के डीएसइ ने पारा शिक्षकों को काम से हटाने एवं मानदेय रोकने का आदेश दिया था.