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सरिता को मिला पक्का घर, जनकल्याणकारी योजनाओं से बदली जिंदगी

अब बारिश की चिंता हुई दूर, सरिता के घर खुशियां देती हैं दस्तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जनकल्याणकारी योजनाओं से जनजातीय परिवार को मिला सुरक्षित आवास मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में योजनाओं का जमीनी असर रायपुर,  कभी बारिश की बूंदें सरिता बैगा के परिवार के लिए चिंता लेकर आती थीं। कच्ची दीवारों और खपरैल की छत वाले घर में रहने वाले इस परिवार को हर बरसात में छत टपकने और घर को सुरक्षित रखने की चिंता सताती थी। आज वही सरिता अपने पक्के घर के आंगन में खड़ी होकर अपने परिवार के साथ सुरक्षित और सुकून भरा जीवन जी रही हैं। यह बदलाव उनके लिए केवल एक पक्के मकान का मिलना नहीं, बल्कि वर्षों पुरानी चिंता से मुक्ति और सम्मान के साथ जीवन जीने का नया अवसर है। पेंड्रा-गौरेला-मरवाही जिले के गौरेला विकासखंड के ग्राम पंडरीपानी निवासी श्रीमती सरिता बैगा बताती हैं कि पहले उनका परिवार कच्चे घर में रहता था। बारिश शुरू होते ही घर की छत से पानी टपकने लगता था। खपरैल को संभालना और हर साल उसकी मरम्मत करना परिवार के लिए बड़ी परेशानी थी। बच्चों को बारिश से बचाने की चिंता अलग रहती थी। ऐसे समय में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा संचालित पीएम जनमन आवास योजना उनके परिवार के लिए उम्मीद की किरण बनकर आई। योजना के माध्यम से सरिता बैगा के परिवार को पक्का आवास मिला। अब उनका घर बारिश में नहीं टपकता। परिवार के पास एक सुरक्षित छत है, जहां बच्चे निश्चिंत होकर रह सकते हैं और पूरा परिवार सम्मान के साथ अपना जीवन आगे बढ़ा सकता है। सरिता के लिए यह बदलाव उनके चेहरे पर आई मुस्कान में साफ दिखाई देता है। सरिता कहती हैं कि पहले बारिश आते ही चिंता होने लगती थी कि घर की छत कहां से टपकेगी और बच्चों को कैसे सुरक्षित रखा जाएगा। अब पक्का घर मिलने के बाद बारिश का डर खत्म हो गया है। उनके लिए उनका नया घर सिर्फ ईंट और सीमेंट से बना मकान नहीं, बल्कि परिवार की सुरक्षा, बच्चों के बेहतर भविष्य और खुशहाल जीवन की मजबूत नींव है। महतारी वंदन योजना से मिला आर्थिक संबल सरिता बैगा को हर माह महतारी वंदन योजना की राशि भी नियमित रूप से प्राप्त हो रही है। इस राशि से उन्हें घरेलू जरूरतों और परिवार के छोटे-बड़े खर्चों को पूरा करने में सहूलियत मिल रही है। एक ओर पक्का आवास परिवार को सुरक्षा दे रहा है, वहीं नियमित आर्थिक सहायता ने घरेलू बजट को संभालने में उनका साथ दिया है। सरिता के जीवन में आया यह बदलाव केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के समन्वित प्रभाव को दर्शाता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय एवं वंचित परिवारों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। वहीं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार इन योजनाओं का लाभ पात्र परिवारों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। सरिता बैगा के लिए सरकार की योजनाएं अब कागज पर दर्ज प्रावधान नहीं, बल्कि उनके अपने जीवन में महसूस किया गया बदलाव हैं। पक्के घर की सुरक्षित छत और आर्थिक सहायता ने उनके परिवार में आत्मविश्वास बढ़ाया है। वह कहती हैं कि सरकार की योजनाओं ने उनके परिवार को नई उम्मीद दी है और बच्चों के भविष्य को लेकर उनका भरोसा मजबूत हुआ है। सरिता ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए सरकार की योजनाएं जीवन बदलने का माध्यम बन रही हैं। उनके लिए पक्का घर उस सपने के पूरा होने जैसा है, जिसे कभी उन्होंने केवल मन में संजोया था। कच्चे घर से पक्के आशियाने तक का यह सफर सरिता बैगा के परिवार की कहानी भर नहीं है। यह उस भरोसे की कहानी है, जब शासन की योजनाएं गांव के अंतिम छोर तक पहुंचकर किसी परिवार की जिंदगी में सुरक्षा, सम्मान और खुशियों की नई सुबह लेकर आती हैं।

15 अक्टूबर से पहले उज्जैन में UPI को लेकर बदला बाजार का माहौल

उज्जैन  15 अक्टूबर से 2 हजार रुपए से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट यूपीआई भुगतान पर एमडीआर लागू होने की सूचना का असर उज्जैन शहर के बाजार में अभी से दिखाई देने लगा है। कई व्यापारियों ने बड़े यूपीआई भुगतान स्वीकार करना बंद कर दिया है। इसका सीधा असर उन ग्राहकों पर पड़ रहा है, जो रोजमर्रा की तरह मोबाइल से भुगतान करने के भरोसे घर से निकल रहे है और कई बार जेब में नकद नहीं रखते। दुकान पर पहुंचने के बाद यूपीआई भुगतान स्वीकार नहीं किए जाने पर ग्राहकों को सामान छोड़े बिना लौटना पड़ रहा है। कुछ ग्राहको को एटीएम जाकर नकद निकालने के बाद दोबारा खरीदारी के लिए आना पड़ रहा है। व्यापारियों का कहना है संख्या में होने वाले भुगतान पर मासिक लागत बढ़ सकती है, इसलिए अभी से ग्राहकों को कैश भुगतान की आदत डालने की कोशिश कर रहे हैं। अभी से बदला भुगतान का तरीका शहर के इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़ा, मोबाइल, ऑटोमोबाइल और अन्य बड़े कारोबार से जुड़े कुछ व्यापारियों ने 2 हजार रुपए से अधिक के यूपीआई भुगतान लेना सीमित या बंद करना शुरू कर दिया है। व्यापारियों का तर्क है कि रोज बड़ी संख्या में ऐसे भुगतान होने पर छोटी प्रतिशत दर भी महीने में बड़ी राशि बन सकती है। उनका कहना है कि ग्राहक से अलग शुल्क नहीं लिया जा सकेगा, इसलिए लागत का असर सीधे व्यापार के खर्च लोगों को आदत में लाने के लिए कुछ दुकानों पर कैश भुगतान को प्राथमिकता देने की व्यवस्था अभी से लागू की जा रही है। कुछ व्यापारियों के अनुसार बड़े यूपीआई ट्रांजैक्शन की संख्या अधिक होने पर प्रतिदिन की संभावित लागत 400 से 500 रुपए तक पहुंच सकती है। व्यापारियो का अनुमान है कि महीनेभर में यह राशि एक कर्मचारी के वेतन के बराबर या उससे अधिक खर्च का रूप ले सकती है। हालांकि वास्तविक लागत कारोबार, पात्र ट्रांजैक्शन और लागू शुल्क की शर्तों पर निर्भर करेगी। व्यापारियों का कहना है कि इसी संभावित अतिरिक्त खर्च को देखते हुए वे अभी से बड़े भुगतान में नकद या अन्य माध्यमों को प्राथमिकता देने लगे हैं। ग्राहक बोले- यूपीआइ रोजमर्रा की जरूरत ग्राहकों के लिए परेशानी इसलिए बढ़ रही है क्योंकि यूपीआई भुगतान रोजमर्रा की खरीदारी का हिस्सा बन चुका है। कई लोग घर से निकलते समय नकद रखना जरूरी नहीं समझते और मोबाइल से भुगतान करने पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में दुकान पर यूपीआई स्वीकार नहीं होने की जानकारी मिलने पर उन्हें वापस लौटना पड़ता है। कपड़ों की खरीदी करने पहुंचे वीरेंद्र सिंह राणा ने बताया कि छोटी-बड़ी खरीदारी के लिए यूपीआई की आदत बनने के बाद अचानक कैश भुगतान पर लौटना असुविधाजनक है। व्यापारियों की नई व्यवस्था से ग्राहकों को भुगतान का तरीका पहले से पूछना पड़ रहा है। रोज के बड़े भुगतान से बढ़ेगा खर्च कपडे के व्यापारी संदीप जैन बताते है की हमारे यहां रोजाना बड़ी राशि के कई यूपीआई भुगतान होते हैं। यदि 2 हजार रुपए से अधिक के हर पात्र भुगतान पर शुल्क लगता है तो महीने का खर्च काफी बढ़ सकता है। व्यापारी के लिए यह अलग से कोई छोटी राशि नहीं है। इसलिए हमने बड़े भुगतान में अभी से कैश को प्राथमिकता देना शुरू किया है। ग्राहक को भी पहले ही बता रहे है कि बड़े भुगतान के लिए नकद लेकर आएं। अभी से कैश भुगतान की आदत डाल रहे थोक फल विक्रेता शहजाद लाला बताते है 15 अक्टूबर के बाद अचानक भुगतान का तरीका बदलने से ग्राहक और व्यापारी दोनों को परेशानी होगी। इसलिए हमने अभी से बड़े भुगतान में कैश लेना शुरू किया है। हमारा उद्देश्य ग्राहक को परेशान करना नहीं है, बल्कि संभावित अतिरिक्त लागत से बचना है। धीरे-धीरे ग्राहक भी समझेंगे कि बड़ी खरीदारी के लिए नकद या दूसरा भुगतान रखना जरूरी हो सकता है। त्योहारी सीजन में नए नियमों से होगी परेशानी किराना व्यापारी सारांश राठौर ने बताया 15 अक्टूबर से यह व्यवस्था ऐसे समय में लागू हो रही है, जब त्योहारी सीजन में बाजारों में खरीदारी बढ़ जाती है और लोग बड़ी राशि की खरीदारी के लिए निकलते हैं। ऐसे में अचानक यूपीआई भुगतान की स्थिति बदलने पर ग्राहक को परेशानी हो सकती है। इसलिए हम अभी से ग्राहकों को बड़े भुगतान के लिए नकद या अन्य विकल्प रखने की जानकारी दे रहे हैं, ताकि त्योहारी खरीदारी के समय उन्हें एटीएम जाने या बिना खरीदारी लौटने की स्थिति का सामना न करना पड़े।

CG में झमाझम बारिश, बस्तर-नारायणपुर समेत कई जिलों में बरसे बादल

छत्तीसगढ़ में मानसून मेहरबान  प्रदेश में 100.1% सामान्य वर्षा दर्ज  बस्तर, नारायणपुर और बलरामपुर में झमाझम बरसे बादल ​रायपुर       छत्तीसगढ़ में इस साल मानसून की बारिश ने राज्य स्तर पर सामान्य आंकड़े को छू लिया है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी 25 सितंबर 2026 तक की स्थिति के अनुसार प्रदेश में अब तक 100.1% यानी शत-प्रतिशत सामान्य वर्षा दर्ज की जा चुकी है। 1 जून से 25 सितंबर की अवधि में राज्य में औसतन 1082.4 मि.मी. वर्षा रिकॉर्ड की गई, जबकि बीते 10 वर्षों के आधार पर इस अवधि की संभावित औसत वर्षा 1081.5 मि.मी. मानी जाती है। बीते 24 घंटों में ही राज्य के विभिन्न हिस्सों में औसतन 52.8 मि.मी. पानी बरसा है।          ​क्षेत्रवार स्थिति पर नजर डालें तो इस बार सरगुजा, रायपुर और बस्तर संभाग के कई जिलों में बादलों ने जमकर मेहरबानी दिखाई है। बलरामपुर जिला 169.4% बारिश के साथ प्रदेश में प्रतिशत के हिसाब से सबसे आगे बना हुआ है, जहाँ अब तक 1527.7 मि.मी. पानी गिर चुका है। वहीं कुल वर्षा की मात्रा के मामले में नारायणपुर जिला शीर्ष पर है, जहाँ अब तक रिकॉर्ड 1600.4 मि.मी. बारिश दर्ज हो चुकी है। बस्तर जिले में एक ही दिन में सर्वाधिक 188.2 मि.मी. और कोंडागांव में 161.8 मि.मी. बारिश दर्ज की गई, जिसके बाद नारायणपुर में 151.9 मि.मी. तथा गरियाबंद में 110.3 मि.मी. बारिश हुई।          ​मध्य छत्तीसगढ़ के जिलों में भी बारिश की स्थिति संतोषजनक बनी हुई है। रायपुर जिले में अब तक 1180.2 मि.मी. (129.5%), गरियाबंद में 1357.7 मि.मी. (126.5%), धमतरी में 1201.7 मि.मी. (113.4%), महासमुंद में 1204.2 मि.मी. (121.7%), और बालोद में 1192.1 मि.मी. (115.0%) बारिश के साथ सामान्य से अधिक वर्षा हुई है।इसी तरह बिलासपुर संभाग के मुंगेली में 1026.5 मि.मी. (108.8%), सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 1161.3 मि.मी. (134.1%), तथा सूरजपुर में 1173.6 मि.मी. (111.2%) वर्षा दर्ज की जा चुकी है।  ​       राज्य के कुछ हिस्सों में बारिश का आंकड़ा अब भी सामान्य से पीछे चल रहा है। सरगुजा जिले में अब तक 606.6 मि.मी. (75.5%), जशपुर में 828.7 मि.मी. (79.7%), कबीरधाम में 672.0 मि.मी. (82.2%), बेमेतरा में 597.1 मि.मी. (74.5%), और कांकेर में 1110.7 मि.मी. (75.9%) बारिश दर्ज की गई है, जो औसत के मुकाबले कम की श्रेणी में आता है। इसी प्रकार मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी (74.7%) तथा बीजापुर (78.7%) में भी प्रतिशत के लिहाज से औसत से कम बारिश दर्ज हुई है। इसके बावजूद बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा, कोरबा, जांजगीर-चांपा, दुर्ग और राजनांदगांव जैसे जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य के काफी करीब बना हुआ है।           ​राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष और आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा प्रदेश भर की नदियों के जलस्तर और बारिश के आंकड़ों की लगातार निगरानी की जा रही है। जिन जिलों में हाल ही में भारी वर्षा हुई है, वहाँ निचले इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

पूर्व प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव की बढ़ीं मुश्किलें, हाईकोर्ट सख्त

जबलपुर   मध्य प्रदेश हाई कोर्ट जस्टिस विवेक जैन की एकलपीठ ने आदेश का पालन नहीं किये जाने को गंभीरता से लिया है. वेटरनरी विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करते हुए उन्हें पेश करने के आदेश जारी किये हैं. हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को उन्हें पेश करने के आदेश जारी किये हैं. वारंट तामील की जिम्मेदारी भोपाल पुलिस आयुक्त सौंपी गयी है।  आदेश का पालन नहीं करने पर फिर याचिका जबलपुर के सेवानिवृत्त असिस्टेंट वेटरनरी फील्ड ऑफिसर केके गर्ग की तरफ से दायर अवमानना में कहा गया "वेतन से राशि कटौती किए जाने के खिलाफ उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी. हाई कोर्ट ने कटौती की गयी राशि को 90 दिन में वापस करने के आदेश जारी किये थे. आदेश का पालन नहीं किये जाने कारण अवमानना याचिका दायर की गयी." एकलपीठ ने याचिका की सुनवाई के दौरान पाया "अवमानना याचिका पर दिसंबर 2025 को नोटिस जारी किये गये थे।  हाई कोर्ट में पेश होने से बचते रहे भोपाल के पशु चिकित्सा और डेयरी विकास विभाग के अपर सचिव ने हाई कोर्ट के विशेष कर्तव्य अधिकारी को 22 दिसंबर 2025 को पत्र भेजाकर नोटिस प्राप्त होने तथा पशु चिकित्सा सेवाओं के उप निदेशक जबलपुर को संपर्क अधिकारी नियुक्त किये जाने की जानकारी दी थी. एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा "इसके बाद प्रतिवादियों और संपर्क अधिकारी ने मामले में किसी वकील को नियुक्त करने या अदालत में उपस्थिति दर्ज कराने की जहमत उठाई है. उन्होंने केवल इस अदालत की रजिस्ट्री को पत्र लिखकर मामले से पल्ला झाड़ लिया।  कोर्ट ने कहा- बगैर गैर जमानती वारंट के नहीं सुधरेंगे हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा "तत्कालीन प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव ने कोर्ट में उपस्थिति दर्ज कराने और कोई अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने की परवाह नहीं की. ऐसा लगता है कि गैरजमानती वारंट जारी किए बिना प्रतिवादी अदालत में पेश नहीं होंगे और रिट याचिका में पारित आदेश का पालन करते हुए अवमानना याचिका में सहयोग नहीं करेंगे। 

एशियाई खेलों में पंजाब की धूम, परिनाज और सतनाम ने दिलाया ब्रॉन्ज

अमृतसर  जापान के आइची-नागोया में आयोजित हो रहे 20वें एशियाई खेलों के मंच पर पंजाब के जांबाज खिलाड़ियों ने अपनी अद्भुत प्रतिभा, अदम्य साहस और बेजोड़ खेल कौशल का ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए पूरे देश में गौरव और उत्साह की एक नई लहर पैदा कर दी है। एथलेटिक्स के रेस ट्रैक से लेकर निशानेबाजी की शूटिंग रेंज तक, और रोइंग के वाटर कोर्स से लेकर हॉकी के मैदान तक, पंजाब की मिट्टी से निकले इन होनहार एथलीटों ने हर जगह अपनी धाक जमाई है। जालंधर, पटियाला, मानसा और संगरूर जैसे जिलों से आए खिलाड़ियों ने न केवल व्यक्तिगत स्तर पर नए मुकाम हासिल किए, बल्कि महत्वपूर्ण मुकाबलों में पदक जीतकर और निर्णायक जीत दर्ज कराकर यह साबित कर दिया कि भारतीय खेल जगत में पंजाब का दबदबा आज भी अटूट है। 100 मीटर की दौड़ में सेमीफाइनल का टिकट पक्का करने से लेकर रोइंग और निशानेबाजी में ऐतिहासिक कांस्य पदक जीतने और हॉकी में गोलों की बरसात करने तक, गुरुवार का पूरा दिन पंजाब के गबरूओं के शानदार नाम रहा, जिससे पूरे राज्य में जश्न का माहौल बना हुआ है। 100 मीटर में गुरिंदरवीर सिंह चमके एथलेटिक्स के मैदान में पुरुष वर्ग की सबसे रोमांचक मानी जाने वाली 100 मीटर रेस में पंजाब के जालंधर के रहने वाले राष्ट्रीय रिकॉर्डधारी एथलीट गुरिंदरवीर सिंह ने अपनी रफ्तार से सभी को आश्चर्यचकित कर दिया। चौथी हीट में शानदार प्रदर्शन करते हुए गुरिंदरवीर सिंह ने 10.38 सेकंड का समय निकाला और दूसरे स्थान पर रहते हुए सेमीफाइनल का टिकट पक्का कर लिया। उनके इस प्रदर्शन से भारतीय खेमे के साथ-साथ पूरे पंजाब के खेल प्रेमियों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। पटियाला की परिनाज ने साधा निशाना  स्कीट निशानेबाजी की मिश्रित स्पर्धा में पंजाब के शाही शहर पटियाला की परिनाज धालीवाल ने इतिहास रच दिया है। शुरुआती दौर के भारी दबाव के बावजूद परिनाज ने अपने जोड़ीदार अनंतजीत सिंह नरूका के साथ मिलकर गजब का धैर्य और तालमेल दिखाया। इस जोड़ी ने शानदार वापसी करते हुए कांस्य पदक हासिल किया। एशियाई खेलों के इतिहास में भारत का इस स्पर्धा में यह पहला पदक है, जिसे दिलाकर परिनाज ने पूरे राज्य का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। रोइंग में मानसा के सतनाम सिंह चमके पानी की लहरों पर अपनी नाव को रफ्तार देते हुए मानसा जिले के गांव फता मालोका के रहने वाले सतनाम सिंह ने देश और पंजाब को एक और गौरवशाली पल दिया। रोइंग के पुरुष डबल स्कल्स इवेंट में सतनाम सिंह ने अपने साथी सलमान खान के साथ मिलकर 6:13.25 मिनट का समय निकाला और कांस्य पदक पर कब्जा जमाया। पूर्व हैंडबॉल खिलाड़ी रहे सतनाम की इस उपलब्धि ने साबित कर दिया कि पंजाब के एथलीट हर खेल में देश का प्रतिनिधित्व करने में सक्षम हैं। हॉकी में दिलप्रीत सिंह की हैट्रिक पुरुष हॉकी स्पर्धा में भारतीय टीम ने दक्षिण कोरिया को 8-2 के बड़े अंतर से मात देकर अपनी लगातार तीसरी जीत दर्ज की और सेमीफाइनल में अपनी जगह लगभग पक्की कर ली। इस बड़ी जीत के नायक रहे पंजाब के स्टार फॉरवर्ड दिलप्रीत सिंह, जिन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए तीन गोल (10वें, 26वें और 32वें मिनट में) दागकर अपनी हैट्रिक पूरी की। इसके अलावा टीम के अन्य अनुभवी खिलाड़ियों सुखजीत सिंह, कप्तान हरमनप्रीत सिंह और राजिंदर सिंह ने भी एक-एक गोल करके विरोधी टीम को पस्त करने में अहम भूमिका निभाई। पंजाब के खिलाड़ियों के इस सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के चलते राज्य भर में जश्न का माहौल है।

कटनी के मार्बल को GI पहचान दिलाने की कवायद, कलेक्टर ने दिए निर्देश

कटनी कटनी का मार्बल एक बार फिर सुर्खियों में है। अपनी बेहतर गुणवत्ता के लिए देशभर में पहचाने जाने वाले इस पत्थर को अब अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की तैयारी शुरू हो गई है। वर्षों से सुस्त पड़े मार्बल कारोबार को नई उड़ान देने के लिए जिला प्रशासन ने जीआई (जियोग्राफिकल इंडिकेशन) टैग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। यदि यह प्रक्रिया पूरी होती है तो कटनी का मार्बल भी उन चुनिंदा उत्पादों की श्रेणी में शामिल हो सकता है, जिनकी पहचान उनके भौगोलिक क्षेत्र से होती है। उद्यमी संवाद में कारोबारियों ने रखी जीआई टैग की मांग मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान-2026 के तहत बहोरीबंद की ग्राम पंचायत गुदरी में आयोजित उद्यमी संवाद में जिलेभर के मार्बल खदान संचालकों और व्यापारियों ने कलेक्टर आशीष तिवारी के सामने जीआई टैग की मांग रखी। कारोबारियों का कहना था कि कटनी के मार्बल की गुणवत्ता किसी से कम नहीं है, लेकिन ब्रांड पहचान और व्यवस्थित मार्केटिंग के अभाव में उद्योग लगातार पिछड़ रहा है। पूरी मांग को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर आशीष तिवारी ने महाप्रबंधक उद्योग ज्योति सिंह को सभी मार्बल उद्यमियों को एक मंच पर लाकर मार्बल एसोसिएशन का गठन एवं पंजीयन कराने के निर्देश दिए। इसके बाद यही पंजीकृत एसोसिएशन जीआई टैग के लिए औपचारिक आवेदन करेगा। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि आवेदन से लेकर पूरी प्रक्रिया तक जिला प्रशासन हर संभव सहयोग देगा। कलेक्टर बोले- अब ब्रांड बनेगा कटनी मार्बल कलेक्टर आशीष तिवारी ने कहा कि कटनी का मार्बल अपनी गुणवत्ता और प्राकृतिक विशेषताओं के कारण अलग पहचान रखता है। अब आवश्यकता इसे एक मजबूत ब्रांड के रूप में स्थापित करने की है। उन्होंने कहा कि कटनी मार्बल एसोसिएशन बनने और जीआई टैग मिलने के बाद कटनी मार्बल की ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर विशेष अभियान चलाया जाएगा, ताकि राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार में इसकी अलग पहचान बन सके।  उद्यमियों ने रखीं मार्बल उद्योग की बड़ी समस्याएं संवाद के दौरान कारोबारियों ने केवल जीआई टैग ही नहीं, बल्कि उद्योग से जुड़ी कई व्यावहारिक समस्याएं भी प्रशासन के सामने रखीं। इनमें माइनिंग डेडरेंट की दर कम करना, मार्बल माइंस के वेस्ट मटेरियल के निस्तारण के लिए ईटीपी की व्यवस्था, कटनी स्टोन प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना, नए भवनों में स्थानीय मार्बल के उपयोग को बढ़ावा देना, निर्बाध बिजली आपूर्ति और ई-खनिज पोर्टल के अपडेट जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। वहीं, कलेक्टर ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को सभी बिंदुओं पर नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए और कहा कि उद्देश्य केवल समस्याओं का समाधान नहीं, बल्कि कटनी के मार्बल उद्योग को फिर से आर्थिक मजबूती देना है। 

दिल्ली-खजुराहो से अयोध्या-कटरा तक वंदे भारत का नया शेड्यूल

ग्वालियर   खजुराहो से दिल्ली के बीच सफर करने वाले यात्रियों के लिए खुशखबरी है. सप्ताह में 6 दिन चलने वाली रेलवे की प्रीमियम ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस जल्द ही सातों दिन चलेगी. इस संबंध में उत्तर रेलवे ने प्रपोजल बनाकर रेलवे बोर्ड को भेजा है. इसके लिए इस ट्रेन के एक अतिरिक्त रैक की व्यवस्था करनी पड़ेगी।  अभी देश में 162 वंदे भारत एक्सप्रेस का संचालन सेमी हाई स्पीड और प्रीमियम सफ़र के लिए देश का गौरव बनी वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन रेलवे की शान बन चुकी है. ये ट्रेन खजुराहो से दिल्ली, इसी तरह दिल्ली से वाराणसी समेत देश के 79 अलग-अलग रूट्स पर संचालित हैं. अब तक 162 रैक हफ़्ते में 6 दिन यात्रियों को गंतव्य तक तेज़ी से पहुंचाती हैं. लेकिन अब रेलवे यात्रियों की सुविधा के लिए सभी 7 दिन चलाने की प्लानिंग की जा रही है. इसी के तहत जल्द ही खजुराहो और नई दिल्ली के बीच सफ़र करने वाले यात्रियों को ये ट्रेन पूरे सप्ताह मिलेगी।  एक दिन क्यों नहीं होता ट्रेन का संचालन? रेलवे इस प्रीमियम ट्रेन को 6 दिन संचालित करता है और एक दिन ट्रेन मेंटिनेंस के चलते बंद रखी जाती है. इसके रखरखाव, मरम्मत और दूसरे मेंटिनेंस समय पर करना जरूरी है. लेकिन अब उत्तर रेलवे ने इसका विकल्प निकालते हुए वंदे भारत का एक अतिरिक्त रैक चलाने का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेजा है. इससे मेंटेनेंस के दिन अतिरिक्त रैक यात्रियों को सफ़र कराने के लिए उपलब्ध रहेगा।  इस तरह ट्रेन पूरे सप्ताह यात्रियों के लिए उपलब्ध होगी. साथ ही ट्रेन का रखरखाव भी समय पर होगा. फिलहाल ये ट्रेन मंगलवार से रविवार तक संचालित होती है. सोमवार को इसका मेंटेनेस किया जाता है. अतिरिक्त रैक उपलब्ध होने से सोमवार को भी खजुराहो और दिल्ली के बीच इस ट्रेन सफर लोग कर सकेंगे।  इन चार रूट पर भी प्लानिंग झांसी रेल मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह के मुताबिक़ "उत्तर रेलवे द्वारा इसके लिए प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेजा गया है." हालांकि प्रस्ताव के मुताबिक़ ये नई व्यवस्था खजुराहो से दिल्ली के बीच चलने वाली वंदेभारत एक्सप्रेस (22469/22470) के साथ ही देश के 4 और रूट की वंदे भारत एक्सप्रेस पर लागू करने की तैयारी है. खजुराहो के साथ ऐसी ही प्लानिंग नई दिल्ली से अंदौरा, वैष्णो देवी कटरा, वाराणसी और अयोध्या (प्रयागराज) रूट पर लागू होगी।  तीन वेरिएंट में दौड़ रही वंदे भारत एक्सप्रेस वर्तमान में तीन अलग-अलग कोच कैटेगरी में वंदे भारत एक्सप्रेस देशभर में दौड़ रही है. इनमे 8 कोच वेरिएंट की वंदे भारत एक्सप्रेस 45 ट्रेन, 16 कोच वेरिएंट की 34 और 20 कोच वेरिएंट की 38 वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन हैं. फ़िलहाल अतिरिक्त रैक का प्रस्ताव इन 5 रूट्स पर है. यदि इस पर मोहर लगी और ये व्यवस्था काम कर गई तो भविष्य में इसी की तर्ज पर अन्य रूट्स पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है। 

70 हजार शिक्षकों को राहत! ₹15-20 हजार तक बढ़ सकती है सैलरी

 जबलपुर मध्य प्रदेश के करीब 70 हजार शिक्षकों के लिए बड़ी राहत देने वाली खबर सामने आई है। दरअसल, जबलपुर हाईकोर्ट ने शिक्षकों की पहली नियुक्ति तिथि से सेवा अवधि की गणना करने के मामले में सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति दीपक खोट की एकलपीठ ने प्रदेश सरकार को अदालती आदेश का अनुपालन करने के लिए 4 हफ्तों का आखिरी समय दिया है। अदालत के इस फैसले से शिक्षकों की वरिष्ठता, वेतन बढ़ोतरी, पेंशन और एरियर जैसे लंबित वित्तीय और सेवा संबंधी फायदे मिलने का रास्ता खुलने की संभावना है। ऐसे में प्रदेश के संबंधित शिक्षकों को पहली नियुक्ति तारीख से सेवा लाभ मिलने पर सैलरी में हर महीने 15 से 20 हजार रुपए तक की बढ़ोतरी होने की उम्मीद बनी है। इसके अलावा, 6वें वेतनमान की पात्रता 1 जनवरी 2006 से माने जाने पर करीब 10 साल का एरियर भी मिल सकेगा, जो हर शिक्षक लगभग 7 से 8 लाख रुपए (12 प्रतिशत संभावित ब्याज की दर से) मिलना संभव है। प्रदेश सरकार को दिये 4 सप्ताह आपको बता दें कि, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के पिछले फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने उच्चतम न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 24 अगस्त 2026 को खारिज कर दिया था। इसके बाद दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सरकार को 4 हफ्तों का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 21 अक्टूबर 2026 को होगी। यहां से शुरु हुआ पूरा विवाद इस मामले में शिक्षक राजेश पांडेय समेत एमपी के 497 अध्यापकों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपनी 2018 से पहले की शिक्षकीय सेवाओं को संविलियन में शामिल न करने वाले सरकारी फैसले को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि, पहली नियुक्ति की तिथि से सेवा अवधि की गणना कर वरिष्ठता और सभी देय लाभ दिए जाएं। वहीं, अब इस मामले में हाईकोर्ट का रुख सामने आने के बाज शिक्षक नेताओं का कहना है कि, सुप्रीम कोर्ट से अपील निरस्त होने के बाद अब सरकार को बिना विलंब किए हाईकोर्ट के आदेश पर अमल करना चाहिए। शिक्षक संगठनों ने जताया आभार दूसरी तरफ प्रदेश के विभिन्न शिक्षक संगठनों ने स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 2 दिनों में 600 से अधिक दिवंगत शिक्षकों और कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति पत्र देने के त्वरित फैसले का स्वागत किया। संगठनों ने इस मानवीय पहल के लिए राज्य सरकार और विभागीय अधिकारियों का आभार जताया है।

प्रधानमंत्री आवास योजना से अशफाक खान का पक्के घर का सपना हुआ साकार

रायपुर गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के ग्राम पंचायत गोरखपुर निवासी  अशफाक खान के लिए अपना पक्का मकान होना वर्षों पुराना सपना था। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे अपने परिवार के लिए पक्का घर बनाने में असमर्थ थे। ऐसे समय में प्रधानमंत्री आवास योजना उनके परिवार के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई और उनके पक्के घर का सपना साकार हुआ।  अशफाक खान ने पक्का मकान बनाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवेदन किया। पात्रता पूरी होने के बाद उनका नाम आवास सूची में शामिल हुआ और उन्हें योजना के तहत आवास निर्माण के लिए सहायता प्राप्त हुई। योजना से मिले सहयोग से उन्होंने अपने परिवार के लिए पक्के मकान का निर्माण कराया। कुछ ही समय में उनका वर्षों पुराना सपना हकीकत में बदल गया। नए घर में परिवार के साथ रहने की खुशी  अशफाक खान के चेहरे पर साफ दिखाई देती है। वे बताते हैं कि आर्थिक परेशानियों के कारण पक्का मकान बनाना उनके लिए मुश्किल था, लेकिन प्रधानमंत्री आवास योजना से मिली सहायता ने इस कठिनाई को दूर कर दिया। आज उनका परिवार अपने पक्के और सुरक्षित घर में सुख-शांति के साथ जीवन व्यतीत कर रहा है।  अशफाक खान ने कहा कि पक्का मकान मिलने से उनके परिवार को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिला है। उन्होंने इस सहयोग के लिए प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। प्रधानमंत्री आवास योजना जरूरतमंद परिवारों को पक्की छत उपलब्ध कराने के साथ उनके जीवन में सुरक्षा, स्थायित्व और आत्मविश्वास भी ला रही है।  अशफाक खान का परिवार भी इस योजना से लाभान्वित होकर बेहतर और सुरक्षित भविष्य की ओर आगे बढ़ रहा है।

कुपोषण के खिलाफ मैदानी स्तर पर मजबूत हो रही पोषण व्यवस्था : सचिव रश्मि

भोपाल  मध्यप्रदेश में बच्चों के पोषण स्तर में सुधार और कुपोषण की चुनौती से निपटने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आंगनबाड़ी केन्द्रों पर पोषण व्यवस्था को लगातार मजबूत किया जा रहा है। बच्चों को गुणवत्तापूर्ण एवं पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के साथ कुपोषित बच्चों की पहचान, उपचार, पुनर्वास और निरंतर निगरानी पर भी विभाग का विशेष फोकस है। महिला एवं बाल विकास सचिव जी.वी. रश्मि ने शुक्रवार को विदिशा जिले का भ्रमण कर आंगनबाड़ी केन्द्रों, पोषण पुनर्वास केन्द्र और सामुदायिक रसोई की व्यवस्थाओं का मैदानी स्तर पर जायजा लिया। कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता ने उनके साथ भ्रमण कर जिले में संचालित विभागीय योजनाओं की जानकारी दी। सचिव जी.वी. रश्मि ने ग्राम कुंआखेड़ी स्थित सक्षम आंगनबाड़ी के न्द्र का निरीक्षण कर बच्चों के लिए उपलब्ध सुविधाओं, पोषण आहार और शैक्षणिक गतिविधियों की जानकारी ली। इसके बाद विदिशा ग्रामीण परियोजना के अंतर्गत खरी तथा ग्यारसपुर परियोजना के अटारीखेजड़ा क्रमांक-2 एवं 3 और मानोरा क्रमांक-2 स्थित सक्षम आंगनबाड़ी केन्द्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने केन्द्रों में बच्चों की उपस्थिति, पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं तथा विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति को मौके पर देखा। कुपोषित बच्चों के उपचार से लेकर पुनर्वास तक पर नजर ग्यारसपुर स्थित पोषण पुनर्वास केन्द्र का निरीक्षण करते हुए सचिव ने अतिगंभीर एवं कुपोषित बच्चों के उपचार, पोषण आहार, स्वास्थ्य सेवाओं और पुनर्वास की व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उन्होंने बच्चों और उनके परिवारों से संवाद कर उपचार एवं पोषण की स्थिति जानी तथा संबंधित अधिकारियों से बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार और उपचार के बाद उनकी निरंतर निगरानी की व्यवस्था के बारे में जानकारी प्राप्त की। सचिव रश्मि ने कहा कि कुपोषण से निपटने के लिए बच्चों को केवल भोजन उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी पोषण स्थिति की नियमित निगरानी, समय पर कुपोषण की पहचान, आवश्यक उपचार और परिवार की सहभागिता भी जरूरी है। आंगनबाड़ी केन्द्रों को बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा से जुड़ी सेवाओं का प्रभावी केन्द्र बनाने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। पौष्टिक पोहा चखकर परखी भोजन की गुणवत्ता सचिव जी.वी. रश्मि ने ग्यारसपुर में अमेरिकन इंडिया फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में लक्ष्मी स्व-सहायता समूह द्वारा संचालित सामुदायिक रसोई का भी निरीक्षण किया। उन्होंने आंगनबाड़ी केन्द्रों के बच्चों के लिए तैयार किए जा रहे भोजन की निर्माण प्रक्रिया, स्वच्छता, पोषण गुणवत्ता और केन्द्रों तक वितरण व्यवस्था की जानकारी ली। सामुदायिक रसोई में तैयार किए जा रहे पौष्टिक पोहा को सचिव जी.वी. रश्मि और कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता ने स्वयं चखकर उसकी गुणवत्ता का जायजा लिया। उन्होंने समूह की महिलाओं से चर्चा कर जाना कि बच्चों की पोषण आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए भोजन में किन पोषक तत्वों और खाद्य सामग्री का समावेश किया जा रहा है। सचिव ने भोजन निर्माण से लेकर आंगनबाड़ी केन्द्र तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया में गुणवत्ता, स्वच्छता और निर्धारित पोषण मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। प्रदेश में पोषण सेवाओं को प्रभावी बनाने पर जोर प्रदेश के आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से बच्चों, गर्भवती एवं धात्री माताओं तथा अन्य पात्र हितग्राहियों तक पोषण सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। विभाग का प्रयास है कि पोषण आहार की गुणवत्ता और वितरण व्यवस्था के साथ-साथ कुपोषित बच्चों की पहचान एवं उपचार की प्रक्रिया भी प्रभावी हो। मैदानी स्तर पर केन्द्रों के निरीक्षण के माध्यम से व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति की समीक्षा की जा रही है और जहां आवश्यक है, वहां सुधार के निर्देश दिए जा रहे हैं। सामुदायिक रसोई के माध्यम से एक ओर जहां बच्चों को पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था को मजबूती मिल रही है, वहीं स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को स्थानीय स्तर पर आजीविका से जोड़ने का अवसर भी मिल रहा है। इस प्रकार बाल पोषण के साथ महिला सशक्तिकरण को भी एक साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता ने सचिव श्रीमति जी वी रश्मि को जिले में संचालित योजनाओं, आंगनबाड़ी केन्द्रों, पोषण पुनर्वास केन्द्र और सामुदायिक रसोई की व्यवस्थाओं की जानकारी दी। उन्होंने बच्चों के पोषण स्तर में सुधार तथा हितग्राहियों को शासन की योजनाओं का लाभ समय पर उपलब्ध कराने के लिए किए जा रहे प्रयासों से भी अवगत कराया।