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छत्तीसगढ़ में मिला हीरों का खजाना! महासमुंद के बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक से विकास को मिलेगी नई रफ्तार

महासमुंद के बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में हीरों की प्राप्ति से छत्तीसगढ़ के विकास को मिलेगा नया आयाम प्रदेश में हीरा उद्योग, निवेश और रोजगार की संभावनाएं हुईं मजबूत वैज्ञानिक अन्वेषण की सफलता से खनिज क्षेत्र में खुलेंगे नए अवसर, राज्य को मिलेगा राजस्व एवं आर्थिक विकास का नया स्रोत खनिज संपदा की नई उपलब्धि से छत्तीसगढ़ के विकास को मिलेगा नया आयाम : मुख्यमंत्री रायपुर,   छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा में आज एक महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ गई है। महासमुंद जिले के सरायपाली क्षेत्र स्थित बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में वैज्ञानिक अन्वेषण के दौरान हीरों की प्राप्ति ने प्रदेश को खनिज संपदा के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड द्वारा 200 टन बल्क सैंपल के परीक्षण एवं प्रसंस्करण के बाद कुल 5 हीरे प्राप्त हुए हैं, जिनका कुल वजन 1.22 कैरेट है। यह उपलब्धि क्षेत्र में हीरा खनिजीकरण की संभावनाओं की पुष्टि करती है तथा भविष्य में बड़े पैमाने पर निवेश, राजस्व सृजन और रोजगार के नए अवसरों का आधार बन सकती है। एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड द्वारा राज्य शासन को उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, बलौदा-बेलमुंडी क्षेत्र में किए गए वैज्ञानिक सर्वेक्षण, स्ट्रीम सेडिमेंट सैंपलिंग, भू-भौतिकीय अध्ययन तथा अन्वेषण ड्रिलिंग के आधार पर चिन्हित क्षेत्र से लगभग 200 टन खनिज सामग्री का बल्क सैंपल एकत्रित कर परीक्षण किया गया। प्रसंस्करण के पश्चात प्राप्त पांच हीरों में दो जेम क्वालिटी तथा तीन अन्य श्रेणी के हीरे शामिल हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि को छत्तीसगढ़ के लिए अत्यंत उत्साहजनक बताते हुए कहा कि प्रदेश की आर्थिक क्षमता और प्राकृतिक संसाधनों के वैज्ञानिक दोहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार खनिज संसाधनों के वैज्ञानिक अन्वेषण, पारदर्शी प्रबंधन और मूल्य संवर्धन आधारित औद्योगिक विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ पहले से ही देश के प्रमुख खनिज उत्पादक राज्यों में शामिल है और लौह अयस्क, कोयला, बॉक्साइट तथा चूना पत्थर के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। अब हीरा संभावनाओं की पुष्टि से प्रदेश की खनिज विविधता और अधिक समृद्ध होगी तथा खनिज अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की नीति केवल खनिजों के उत्खनन तक सीमित नहीं है, बल्कि खनिज आधारित उद्योगों, मूल्य संवर्धन इकाइयों और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। प्रदेश में खनिज संसाधनों के माध्यम से निवेश, उद्योग और आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित कर विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य को साकार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए राज्य सरकार खनिज, कृषि, उद्योग, अधोसंरचना और मानव संसाधन विकास के सभी क्षेत्रों में समान रूप से कार्य कर रही है। बलौदा-बेलमुंडी क्षेत्र से प्राप्त यह सफलता प्रदेश की खनिज क्षमता को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाएगी तथा निवेश, रोजगार और समावेशी विकास के नए द्वार खोलेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वैज्ञानिक अन्वेषण और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से प्रदेश के अन्य संभावित क्षेत्रों में भी खनिज संपदा की खोज को गति मिलेगी, जिससे छत्तीसगढ़ आने वाले वर्षों में देश की खनिज आधारित अर्थव्यवस्था और औद्योगिक विकास का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रारंभिक चरण में प्राप्त यह सफलता भविष्य के विस्तृत अन्वेषण कार्यों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण संकेत है। इससे क्षेत्र की भूगर्भीय संरचना, संसाधन क्षमता और संभावित भंडारों के संबंध में व्यापक अध्ययन का मार्ग प्रशस्त होगा। आगामी सर्वेक्षणों एवं परीक्षणों से क्षेत्र की वास्तविक क्षमता का अधिक सटीक आकलन किया जा सकेगा। उल्लेखनीय है कि बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में किए गए बल्क सैंपल परीक्षण के परिणामस्वरूप प्राप्त हीरों को सुरक्षित अभिरक्षा में एनएमडीसी के पन्ना स्थित स्ट्रांग रूम में रखा गया है तथा आगे की कार्यवाही नियमानुसार और वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप की जाएगी।

एक रास्ता, ऊपर AC-एग्जॉस्ट और नीचे आग… लखनऊ अग्निकांड में 15 मौतों के बाद 4 पर FIR

 लखनऊ लखनऊ के अलीगंज इलाके के जिस कॉम्प्लेक्स में आग लगी, वहां नियम कायदे और सुरक्षा के मानकों की धज्जियां उड़ा दी गईं थीं. तीन मंजिला इस शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में बेसमेंट भी बनाया गया था. एंट्री एग्जिट के लिए सिर्फ एक छोटा सा रास्ता था और इस रास्ते के ऊपर 7 पैनल, 2 एग्जॉस्ट फैन, इलेक्ट्रिक कंट्रोल पैनल, लगाकर रास्ते को और छोटा कर दिया गया था।  बिना इमरजेंसी गेट के तैयार हुआ था कॉम्पलेक्स बिना किसी इमरजेंसी गेट के तैयार हुए इस रिहायशी इलाके के कमर्शियल कॉम्पलेक्स में आग लगी तो दूसरी मंजिल पर फंसे 15 लोगों की जान चली गई. अब इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है. 4 नामजद आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. आईएएस अमृत अभिजात और आईपीएस प्रवीण कुमार की एसआईटी गठित है।  आखिर 15 मौतों का जिम्मेदार कौन? एलडीए (लखनऊ डेवलपमेंट अथॉरिटी), बिजली विभाग और फायर के कुल चार अधिकारियों को सस्पेंड किया जा चुका है. साथ ही मामले में अन्य कार्रवाई भी जारी है. लेकिन रेजिडेंशियल नक्शा पास करवा कर बनाए गए इस कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में लगी आग में 15 लोगों की जान चली गई, उसके लिए जिम्मेदार कौन है? घटना के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण, जिला प्रशासन, नगर निगम, फायर डिपार्टमेंट पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।  इधर लखनऊ अग्निकांड में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को राज्य सरकार ने राहत राशि प्रदान की है. सरकार की ओर से प्रत्येक मृतक के परिजनों को 5 लाख रुपये की अनुग्रह सहायता दी गई है. विधायक नीरज बोरा पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और पीड़ित परिवारों को यह आर्थिक सहायता सौंपी. सरकार का कहना है कि यह राशि प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत पहुंचाने के उद्देश्य से दी जा रही है।  साथ ही सरकार ने हादसे से प्रभावित सभी परिवारों को हर संभव मदद का भरोसा दिया है. घायलों के बेहतर उपचार और आवश्यक सहायता सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।  SIT ने तेज की जांच, घटनास्थल पहुंचकर जुटाए सबूत अलीगंज अग्निकांड मामले में सीएम योगी के निर्देश पर गठित एसआईटी ने मामले की जांच तेज कर दी है. बताया जा रहा है कि जांच टीम घटनास्थल पर पहुंच गई है, जहां टीम बारीकी से निरीक्षण कर सबूत जुटा रही है।  बताया जा रहा है कि एसआईटी बिल्डिंग में आग लगने के कारणों और सुरक्षा मानकों में हुई लापरवाही की जांच करेगी. हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने पर जांच का फोकस रहेगा. इसके साथ ही एसआईटी ने सभी संबंधित विभागों से भी रिपोर्ट तलब की है।  लखनऊ के बाद कानपुर में जागा प्रशासन, फिजिक्स वाला समेत 22 कोचिंग सील लखनऊ में कोचिंग संस्थान से जुड़े हादसे के बाद कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) ने शहर के प्रमुख कोचिंग हब काकादेव में बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू कर दी है. सोमवार को चलाए गए विशेष अभियान के दौरान फिजिक्स वाला समेत 22 कोचिंग संस्थानों को सील कर दिया गया है. जांच में इन संस्थानों में भवन एवं सुरक्षा संबंधी मानकों के उल्लंघन की बात सामने आने पर ये कार्रवाई की गई।  केडीए अधिकारियों की टीम ने अलग-अलग क्षेत्रों में निरीक्षण कर उन संस्थानों को चिह्नित किया, जहां आवश्यक नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था. कार्रवाई के दौरान संस्थानों को खाली कराया गया और बाद में उन्हें सील कर दिया गया।  प्राधिकरण के अनुसार, अभियान के तहत विभिन्न जोनों में एक साथ कार्रवाई की गई. पहले चरण में 22 संस्थानों को चिह्नित किया गया है, जबकि अन्य कोचिंग संस्थानों की भी जांच की जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि मानकों की अनदेखी पाए जाने पर आगे भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी. सील किए गए संस्थानों में फिजिक्स वाला, वर्कस्पेस, महेंद्राज और केमिस्ट्री वाले संजीव राठौर जैसे चर्चित नाम शामिल हैं. कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी मौके पर मौजूद रहे।  टूटे सपने, बिखरे परिवार और अपनों की गूंजती चीख-पुकार…. लखनऊ में हर आंख नम, हर जुबां पर सवाल सागर, नीलेश, अनामिका, संयम, अनुष्का, सुखमनी, आदित्य श्रीवास्तव, ज्योति, भविश्य, अब्दुल रहमान, सूरज भाह, भाहजान, जयनिज चक्रवर्ती, मोहम्मद अम्मार और सुमल्या. ये सिर्फ नाम नहीं हैं. ये वे 15 जिंदगी थीं जिनके अपने-अपने सपने थे. किसी ने करियर की शुरुआत की थी, कोई परिवार की उम्मीद था, कोई अपने माता-पिता का सहारा बनने की तैयारी कर रहा था. लेकिन कुछ मिनटों में सब खत्म हो गया।   बिल्डिंग में आने-जाने का था एक संकरा रास्ता, जांच में खुलासा लखनऊ अग्निकांड की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. जांच में पता चला है कि जिस में कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में आग लगने से 15 लोगों की मौत हो गई, उसमें अंदर और बाहर आने-जाने के लिए एक सकरा रास्ता था, वही से सकरी सीढ़ियां पहली-दूसरी और तीसरी मंजिल पर जाने के लिए थीं. जांच में पता चला है कि यही वजह थी कि जब बिल्डिंग में आग लगी तो धुएं और आग ने रास्ता बंद कर दिया और परिसर में काम करने वाले, पढ़ने वाले लड़के-लड़कियां निकल नहीं पाए. जिससे उनकी मौत हो गई।  एलडीए ने जांच की तेज लखनऊ अग्निकांड मामले में एलडीए ने भी जांच तेज कर दी है. एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार ने घटना की जांच के लिए पांच सदस्यीय विशेष टीम का गठन किया है. ज्ञानेंद्र वर्मा के नेतृत्व में गठित इस टीम में के.के. गौतम, मानवेंद्र सिंह, मनोज सागर और रविनंदन सिंह को शामिल किया गया है. टीम घटना के सभी पहलुओं की विस्तृत जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी।  वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में एलडीए के एई और जेई को निलंबित कर दिया गया है. प्रशासनिक स्तर पर जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई भी शुरू हो गई है। 

CM डॉ. यादव का बड़ा निर्देश: हर जिले में बनेगी हैचरी, मछली पालन को मिलेगा नया बढ़ावा

मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए हर जिले में विकसित की जाए एक हैचरी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मछली पालन के लिए प्रदेश में होगा 9 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रदेश में मोती उत्पादन को किया जाए प्रोत्साहित मध्यप्रदेश बने मछली बीज उत्पादन में आत्मनिर्भर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की मछुआ कल्याण और मत्स्य विकास विभाग की समीक्षा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि एकीकृत मत्स्योघोग नीति : 2026 के कारण प्रदेश में मछली पालन सेक्टर में 9 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आ रहा है। प्रदेश में प्राप्त 2 लाख 91 हजार 9 सौ 38 केज के प्रस्तावों के लिए कार्यादेश जारी किए जा चुके हैं। प्रदेश में मोती उत्पादन को भी प्रोत्साहित किया जाये, इसके लिए अन्य राज्यों की बेस्ट प्रैक्टिसेस का अध्ययन कर उनका क्रियान्वयन प्रदेश में सुनिश्चित किया जायें। प्रदेश को मछली उत्पादन में आत्म निर्भर बनाना जरूरी है। अगले ढाई साल में हमें मछली बीज अन्य स्थानों से नहीं खरीदना पड़े, इस लक्ष्य को ध्यान में रखकर विभाग कार्य करे। हर जिले में एक हेचरी आवश्यक रूप से विकसित की जाये। जिलों में मछली बीज आसानी से मिलने से प्रदेश में मछली उत्पादन में और बढ़ोत्तरी होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह निर्देश मछुआ कल्याण तथा मत्यस्य विकास विभाग की समीक्षा बैठक में दिए। मंत्रालय में हुई बैठक में मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास राज्य मंत्री नारायण सिंह पवार, मुख्य सचिव अनुराग जैन, विभाग के सचिव स्वतंत्र कुमार सिंह तथा विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। मछुआ क्रेडिट कार्ड में मध्यप्रदेश, देश में दूसरे स्थान पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में बढ़ रहे मछली उत्पादन को दृष्टिगत रखते हुए कोल्ड चेन तथा अन्य आवश्यक इंफ्रास्टक्चर विकसित किया जाये। ब्रांडिंग और निर्यात के लिए आवश्यक नेटवर्किंग को भी प्रोत्साहित किया जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नदियों के पुनर्जीवन, जलीय जीवों के संरक्षण के लिए सभी संबंधित विभाग परस्पर समन्वय से कार्य करें। जलीय ईको सिस्टम को विकसित करने और जल सम्पदा पर आधारित पर्यटन गतिविधियों को विस्तार देने के लिए भी कार्य योजना बनाई जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में बताया गया कि मछुआ किसान क्रेडिट कार्ड के अंतर्गत अन्तर्देशीय जल क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश में दूसरे स्थान पर है। राष्ट्रीय स्तर पर अन्तर्देशीय मत्स्य पालन में सिवनी जिले को वर्ष 2023-24 के लिए प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। 

भोपाल स्टेशन बनेगा नए दौर की पहचान, 350 करोड़ की लागत से मिलेगा मंदिर जैसा स्वरूप

भोपाल राजधानी के मुख्य रेल द्वार भोपाल जंक्शन रेलवे स्टेशन को जल्द ही एक नया और भव्य स्वरूप मिलने जा रहा है। रेलवे ने इस स्टेशन के कायाकल्प के लिए करीब 350 करोड़ रुपये के पुनर्विकास प्रोजेक्ट का प्रस्ताव तैयार किया है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत भोपाल जंक्शन को एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान देते हुए भव्य मंदिर शैली के अग्रभाग के साथ अत्याधुनिक यात्री सुविधाओं से लैस किया जाएगा। पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर आधारित इस परियोजना के लिए टेंडर और बिड से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज फाइनल कर अंतिम मंजूरी के लिए रेलवे बोर्ड को भेज दिए गए हैं, जहां से हरी झंडी मिलते ही धरातल पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। रानी कमलापति के बाद दूसरा पीपीपी स्टेशन इस बड़े बदलाव के बाद भोपाल जंक्शन शहर का ऐसा दूसरा रेलवे स्टेशन बन जाएगा, जिसे पीपीपी मॉडल के तहत पुनर्विकसित किया जा रहा है। इससे पहले भोपाल के ही रानी कमलापति रेलवे स्टेशन को इसी मॉडल पर विश्वस्तरीय बनाया जा चुका है। अधिकारियों के मुताबिक, इस नए प्रोजेक्ट के जरिए स्टेशन के मौजूदा बिल्ट-अप एरिया को 4,238 वर्ग मीटर से बढ़ाकर 6,532 वर्ग मीटर किया जाएगा। इस बढ़े हुए दायरे से स्टेशन परिसर के भीतर यात्रियों को मिलने वाली सेवाओं और खाली स्पेस को बड़े पैमाने पर विस्तार देने में मदद मिलेगी। यात्रियों को मिलेंगी विश्वस्तरीय सुविधाएं स्टेशन के भीतर आधुनिक सुविधाओं को बढ़ाने के लिए व्यापक स्तर पर खाका तैयार किया गया है, जिससे यात्रियों का सफर और सुगम हो सके। परियोजना के प्रमुख बिंदुओं को इस प्रकार समझा जा सकता है:     स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार को पारंपरिक और भव्य मंदिर कला की थीम पर डिजाइन किया जाएगा।     यात्रियों की सुविधा के लिए पूरी तरह से वातानुकूलित (AC) प्रतीक्षालय और बेहतर बैठने की व्यवस्था होगी।     परिसर के भीतर आवागमन को आसान बनाने के लिए नए लिफ्ट और फुट ओवरब्रिज बनाए जाएंगे।     स्टेशन पर मौजूद प्रसाधनों को अपग्रेड कर विश्वस्तरीय और स्वच्छ बनाया जाएगा।     बढ़े हुए निर्मित क्षेत्र के कारण यात्रियों को विभिन्न प्रकार की कमर्शियल सेवाएं भी स्टेशन के भीतर मिल सकेंगी। मंजूरी मिलते ही शुरू होगा निर्माण रेलवे प्रशासन का कहना है कि जैसे ही रेलवे बोर्ड से इस 350 करोड़ रुपये के बजट वाले प्रोजेक्ट को क्लीयरेंस मिल जाएगा, निर्माण एजेंसियां जमीन पर काम शुरू कर देंगी। इस पुनर्विकास से न केवल भोपाल जंक्शन पर यात्रियों का दबाव कम करने में मदद मिलेगी, बल्कि भोपाल आने वाले पर्यटकों को स्टेशन से बाहर निकलते ही शहर की ऐतिहासिक और हेरिटेज पहचान की पहली झलक देखने को मिलेगी।

पंजाब में बीजेपी की बड़ी तैयारी, हर सीट का फीडबैक जुटाकर अमित शाह को भेजी जाएगी रिपोर्ट

चंडीगढ़  भारतीय जनता पार्टी ने मिशन फतेह पंजाब के तहत अपनी तैयारी तेज कर दी है। पंजाब में कमल कैसे खिलाना है और इसके लिए कितना प्रयास करना पड़ेगा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने पंजाब प्रवास के दौरान इस पर काम शुरू कर दिया है। वे यहां कार्यकर्ताओं, नेताओं, व्यापारियों, कृषि विशेषज्ञों और आम मतदाताओं से मिलकर पंजाब के मुद्दों को न केवल समझेंगे, बल्कि चुनाव से पहले पंजाब में पार्टी की स्थिति के मद्देनजर अपनी फीडबैक रिपोर्ट भी तैयार करेंगे जिसे वे भाजपा नेता अमित शाह को सौंपेंगे।  दरअसल, पश्चिम बंगाल के बाद इस बार भाजपा का फोकस पंजाब पर है। दोनों ही बॉर्डर स्टेट हैं। भाजपा ने पंजाब में अकेले दम पर सरकार कभी नहीं बनाई। इस बार पार्टी ने सत्ता पर काबिज होने का लक्ष्य रखा है। इसी के चलते भाजपा जमीनी स्तर पर हर तरह की संभावनाओं को खंगाल रही है। नितिन नबीन का दौरा भी इसी से संबंधित है। भाजपा पंजाब में एक-एक सीट पर अपनी कमजोर और मजबूत कड़ियों पर मंथन करेगी। इसके लिए केवल चंद नेताओं से ही चर्चा नहीं की जाएगी बल्कि प्रदेश के 3500 से अधिक शक्ति केंद्र प्रमुखों से पार्टी की मौजूदा सियासी पकड़ पर प्रतिक्रिया जुटाई जाएगी। इसके बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष सांसदों, पूर्व सांसदों, विधायकों, पूर्व विधायकों व युवा नेताओं से अलग-अलग मुलाकात करेंगे और उनसे मालवा, दोआबा व माझा में पार्टी की स्थिति जानेंगे और पंजाब उन मुद्दों व मांगों पर चर्चा करेंगे जिन्हें चुनाव में प्रमुखता से उठाया जा सके। इन नेताओं से नबीन विरोधियों की ताकत और उनकी कमजोरियों पर भी विमर्श करेंगे। हाल ही में हुए पंचायत और निकाय चुनाव की समीक्षा भी की जाएगी। उधर, पार्टी हाईकमान ने यह भी साफ कर दिया है कि मिशन पंजाब के लिए पार्टी के नए और पुराने कैडर में भी अच्छे तालमेल में रहे। पार्टी के पास जहां पहले से ही समर्पित नेताओं व कार्यकर्ताओं की फौज है। वहीं, पिछले कुछ समय से विभिन्न दलों को छोड़कर आए कई नेताओं ने भाजपा में अपना सियासी सफर शुरू किया है। उन्हें पूरा मान-सम्मान मिले, उनकी मौजूदगी का पार्टी को लाभ भी पहुंचे मगर पुराने नेताओं के साथ उनका बेहतर सामंजस्य बना रहे, इसके लिए भी राष्ट्रीय अध्यक्ष एकजुटता का पाठ पढ़ाकर जाएंगे। जोहल से समझेंगे किसानों के मुद्दे पंजाब में किसान और किसानी एक बड़ा फेक्टर रहे हैं। अपने प्रवास के दौरान नितिन नबीन पंजाब के किसानों से जुड़े मसलों को समझेंगे। केंद्र के तीन कृषि कानूनों के संदर्भ में हुए आंदोलन के बाद से पंजाब का किसान भाजपा से छिटका रहा है मगर पार्टी अब किसानों का समर्थन चाहती है। पंजाब में किसान और किसानों के मुद्दे क्या हैं, इस पर वे कृषि अर्थशास्त्री सरदारा सिंह जोहल से मिलकर विमर्श करेंगे। राज्यपाल से सूबे के जानेंगे हालात पंजाब प्रवास के दौरान नबीन पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से भी उनके आवास पर मुलाकात करेंगे। सूबे में इस वक्त क्या वर्तमान हालात हैं, इस पर एक औपचारिक चर्चा करेंगे। वे भाजपा के सभी जिलाध्यक्षों व पदाधिकारियों से भी सियासी हालात पर बात करेंगे। पंजाब के अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों राष्ट्रीय अध्यक्ष की मुलाकात पंजाब के कुछ प्रख्यात शख्सियतों से भी करवाएंगे। इस दौरान भी पंजाब में भाजपा की स्थिति पर बातचीत होगी।  

भोपाल मंडल के 15 स्टेशनों की बदलेगी तस्वीर, यात्रियों को मिलेंगे सिनेमाघर और गेमिंग जोन

भोपाल  यदि आप एक व्यापारी हैं, स्टार्टअप चलाते हैं या निवेश के लिए किसी बड़े और गारंटीड फुटफॉल (ग्राहकों की भारी मौजूदगी) वाले स्थान की तलाश में हैं, तो भारतीय रेलवे आपके लिए एक बेहतरीन मौका लेकर आया है। पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल मंडल ने 'अमृत भारत स्टेशन योजना' के तहत पुनर्विकसित हो रहे 15 रेलवे स्टेशनों पर उपलब्ध वाणिज्यिक स्थानों (कमर्शियल स्पेस) के उपयोग के लिए बिज़नेस प्रपोजल मांगे हैं। यानी अब रेलवे स्टेशन सिर्फ ट्रेनों के आने-जाने का जरिया नहीं, बल्कि शहर के बड़े आर्थिक और व्यापारिक केंद्र (सिटी सेंटर) बनने जा रहे हैं। ड्राइव-इन सिनेमा से लेकर गेमिंग जोन तक रेल प्रशासन पारंपरिक दुकानों के ढर्रे से अलग हटकर ऐसे आधुनिक और यात्री-केंद्रित व्यावसायिक प्रस्तावों को बढ़ावा दे रहा है, जो स्टेशन परिसर को हाई-टेक लुक दे सकें। उद्यमी नीचे दी गई श्रेणियों या किसी अन्य नए आइडिया पर अपने प्रस्ताव दे सकते हैं। मनोरंजन और गैजेट्स: ड्राइव-इन सिनेमा, गेमिंग जोन, बाल मनोरंजन केंद्र और डिजिटल एक्सपीरियंस सेंटर। सुविधाएं और आतिथ्य: आधुनिक प्रतीक्षालय/लाउंज, पर्यटन एवं आतिथ्य सेवाएं और मल्टीफंक्शनल कॉम्प्लेक्स। बैंकिंग और टेक: डिजिटल बैंकिंग यूनिट, ई-लॉबी और हाई-टेक एटीएम। भोपाल मंडल के ये 15 स्टेशन बनेंगे 'बिजनेस हब' अमृत भारत योजना के तहत जहां नर्मदापुरम और शाजापुर स्टेशनों का पुनर्विकास पूरा कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका लोकार्पण कर चुके हैं, वहीं 13 अन्य स्टेशनों पर काम तेजी से जारी है। इनमें शामिल हैं। हरदा, खिरकिया, बनापुरा, इटारसी, साँची, विदिशा, गंजबासौदा, अशोकनगर, गुना, रुठियाई, शिवपुरी, ब्यावरा-राजगढ़ और संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़) स्टेशन पर बिजनेस सेंटर विकसित किए जाएंगे। टेंडर और ई-नीलामी से अलॉट होगी जगह, ऐसे करें शुरुआत पारदर्शी प्रक्रिया : इच्छुक कारोबारी संबंधित स्टेशन के मंडल वाणिज्य निरीक्षक से सीधे संपर्क कर सकते हैं। वे वहां उपलब्ध खाली स्थानों का निरीक्षण और सर्वेक्षण कर अपनी व्यावसायिक आवश्यकताओं के अनुसार प्रस्ताव तैयार कर सकते हैं। ऐसे होगा चयन : प्राप्त सभी प्रस्तावों का रेलवे बोर्ड की नीतियों के अनुसार परीक्षण किया जाएगा। जो प्रस्ताव व्यवहार्य पाए जाएंगे, उन्हें ई-नीलामी या टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा।     अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत स्टेशन केवल यात्री सुविधाओं के केंद्र ही नहीं, बल्कि व्यापार, निवेश एवं आर्थिक विकास के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित किए जा रहे। रेलवे पारंपरिक व्यावसायिक गतिविधियों के साथ-साथ नवाचारी व्यावसायिक अवधारणाओं का स्वागत ही नहीं बल्कि बढ़ावा दे रहा है जिससे शहर के विकास में रेलवे और अधिक योगदान दे सके। – सौरभ कटारिया, वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक, भोपाल मंडल  

भाजपा का बूथ स्तर पर बड़ा अभियान, MP में ‘बूथ गौरव दिवस’ के तहत होंगे विशेष कार्यक्रम

भोपाल  भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 की समाप्ति और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में एक बड़ा अभियान शुरू का फैसला किया है। बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह द्वारा जारी पत्र के अनुसार आगामी 23 जून से 6 जुलाई तक पूरे देश सहित मध्य प्रदेश में 'डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी संस्मरण पक्ष' का भव्य आयोजन किया जा रहा है। मध्य प्रदेश भाजपा इस पखवाड़े को जमीनी स्तर पर 'बूथ गौरव दिवस' और विशेष वैचारिक व्याख्यानों के रूप में मनाने जा रही है। राष्ट्रीय स्तर पर गठित केंद्रीय संचालन टोली में मध्य प्रदेश के प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह को शामिल किया है, जो राज्य में इन सभी कार्यक्रमों की सीधी मॉनिटरिंग कर रहे हैं। धारा 370 की समाप्ति और 'राष्ट्र प्रथम' पर केंद्रित विशेष व्याख्यान इस पखवाड़े का सबसे मुख्य वैचारिक केंद्र धारा 370 की समाप्ति रहेगा। व्याख्यानों और सम्मेलनों के माध्यम से कार्यकर्ताओं और जनता को बताया जाएगा कि कैसे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाकर डॉ. मुखर्जी के अखंड भारत के सपने को साकार किया गया है। इन विशेष व्याख्यानों के जरिए यह संदेश घर-घर पहुँचाया जाएगा कि 'राष्ट्र प्रथम' अब केवल एक भावना नहीं, बल्कि देश की जीवनधारा बन चुका है। तीन प्रमुख विषयों पर जिला कार्यकर्ता सम्मेलन राज्य के सभी जिलों में बड़े पैमाने पर जिला कार्यकर्ता सम्मेलनों की रूपरेखा तैयार की गई है। इन सम्मेलनों में तीन अलग-अलग प्रबुद्ध वक्ताओं द्वारा डॉ. मुखर्जी के सामाजिक एवं राजनीतिक योगदान, एक केंद्रीय मंत्री के रूप में उनकी कार्यशैली और भारतीय जनसंघ के संस्थापक अध्यक्ष के रूप में उनके ऐतिहासिक योगदान पर केंद्रित विशेष व्याख्यान दिए जाएंगे। युवा मोर्चा के नेतृत्व में 'बाहरी परिसर' छात्र सम्मेलन प्रदेश के सभी प्रमुख शैक्षणिक केंद्रों के बाहर युवा पीढ़ी और छात्रों को इस विचारधारा से जोड़ने के लिए छात्र सम्मेलनों का आयोजन किया जाएगा। केंद्रीय नेतृत्व के निर्देशों के अनुसार यह सभी कार्यक्रम शैक्षणिक परिसरों की सीमा से बाहर (आउटसाइड कैंपस) आयोजित होंगे, जिसकी पूरी कमान और नेतृत्व भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के जिम्मे सौंपा गया है। शहरों में नामकरण, प्रतिमा अनावरण और महा-वृक्षारोपण अभियान इस पखवाड़े के दौरान मध्य प्रदेश के प्रत्येक नगर और शहर में किसी प्रमुख चौराहे, उद्यान अथवा मार्ग का नामकरण डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर किया जाएगा और उनकी प्रतिमा या चित्र का अनावरण भी होगा। इसके साथ ही, चूंकि राज्य में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो चुका है, इसलिए पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ प्रत्येक बूथ पर प्रभावी रूप से व्यापक वृक्षारोपण अभियान भी चलाया जाएगा।

रतलाम की बालम ककड़ी और गराडू का डंका विदेशों तक, GI टैग मिलने से बढ़ा सम्मान

रतलाम   मध्य प्रदेश को देश विदेश में पहचान दिलाने वाली रतलाम की बालम ककड़ी और रतलामी गराडू को जीआई टैग मिल गया है. इससे पहले रतलाम की सेव और रियावन सिल्वर लहसुन को भी जीआई टैग मिला था. रतलाम मध्य प्रदेश का ऐसा पहला जिला है जहां की चार-चार यूनिक प्रोडक्ट को जीआई टैग मिला है. GI टैग मिलने से रतलाम के गराडू और सैलाना की बालम ककड़ी के उत्पादक किसानों को फायदा मिलेगा और मांग बढ़ने से इनके बेहतर दाम भी किसानों को मिल सकेंगे।  भारत सरकार से मिला GI टैग, किसानों को फायदा उद्यानिकी विभाग के उपसंचालक मंगल सिंह डुडवे ने इसकी जानकारी देते हुए बताया, '' सैलाना क्षेत्र में उगाई जाने वाली बालम ककड़ी और रतलाम जिले के बांगरोद के गराडू को भारत सरकार से जीआई टैग मिल गया है. वर्तमान में रतलाम जिले में बालम ककड़ी लगभग 100 हेक्टेयर और गराडू लगभग 120 हेक्टेयर में बोए जा रहे हैं. इन फसलों के उत्पादन से जिले के बड़ी संख्या में किसान जुड़े हुए हैं. अब इन्हें रतलाम के नाम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिल सकेगी. दोनों फसलों की मांग बढ़ने से किसानों को फायदा मिलेगा और जिले के अन्य किसान भी इसकी खेती के लिए प्रोत्साहित होंगे।  क्यों खास है रतलाम की बालम ककड़ी? सैलाना क्षेत्र के आदिवासी अंचल में उगाई जाने वाली एक खास किस्म की ककड़ी जिसे बालम ककड़ी के नाम से जाना जाता है. अपने खास स्वाद और भीतर से निकलने वाले केसरिया और हरे रंग के लिए प्रसिद्ध है. वैसे तो ककड़ी को सलाद के रूप में उपयोग किया जाता है लेकिन इस बालम ककड़ी को लोग नाश्ते के तौर पर खाने में उपयोग करते हैं. बालम ककड़ी के खास स्वाद का आनंद बारिश के मौसम में केवल एक महीने के लिए ही लेने को मिलता है. अगस्त से सितंबर महीने के बीच बालम ककड़ी की बहार आती है।  रतलाम के नाम से जाना जाएगा मालवी गराडू रतलाम के बांदगरोद, खेतलपुर, सेजावता और धमोतर क्षेत्र में उगाया जाने वाला यह खास किस्म का कंदमूल फ्राई करके स्नैक्स के रूप में उपयोग किया जाता है. गराडू अपने बेहतरीन स्वाद, अंदर से मुलायम व बाहर से कुरकुरा होने की वजह से लोगों को खूब पसंद आता है. ठंड के मौसम में आने वाले इस फल के स्वाद का आनंद लेने के लिए देश के बड़े शहरों सहित दुबई तक से आर्डर आते हैं. गराडू विटामिन मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होता है. वैसे तो मालवा के अन्य जिलों में भी गराडू की खेती की जाती है लेकिन रतलाम के आसपास के गांव में उत्पादित किए जाने वाले गराडू की साइज और क्वालिटी अच्छी होती है इसलिए रतलाम के गराडू की मांग अधिक बनी रहती है।  क्या होता है जीआई टैग? जीआई टैग (GI Tag) यानी जियोग्राफिकल इंडिकेशन टैग. जैसा की नाम से समझ आता है यहा किसी उत्पाद का 'भौगोलिक संकेतक' होता है. यह टैग प्रमाणित करता है कि वह उत्पाद उसी स्थान से आया है, जिसका दावा किया जा रह है.जीआई टैग आमतौर पर उत्पादके विशिष्ट भौगोलिक मूल स्थान, पारंपरिक गुणवत्ता और ख्याति के आधार पर दिया जाता है।  रतलाम के गराडू और सैलाना की बालम ककड़ी को जीआई टैग दिलवाने के प्रयास मध्य प्रदेश शासन के एमएसएमई मंत्री चेतन्य काश्यप ने शुरू किए थे. इसके बाद अब रतलाम जिले के पास चार-चार यूनिक प्रोडक्ट के जीआई टैग मौजूद है। 

मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में छाई ‘Y64 – व्हिस्पर्स ऑफ द अनसीन’, 64 योगिनी पर बनी डॉक्यूमेंट्री को मिली सराहना

अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव मुंबई में प्रदर्शित हुई 64 योगिनी पर बनी डॉक्यूमेंट्री ‘Y64 – व्हिस्पर्स ऑफ द अनसीन’ संस्कृति विभाग एवं काली ट्रस्ट के सहयोग से निर्मित डॉक्यूमेंट्री का अंतर्राष्ट्रीय दर्शकों के बीच 64 कैनवास से 15,000 किलोमीटर की आध्यात्मिक यात्रा से सिनेमा तक का सफर भोपाल 19वें अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (MIFF) 2026 मुंबई में कलाकार एवं साधक डॉ. बीना उन्नीकृष्णन की 64 योगिनी प्रदेश के मितावली स्थित मंदिर पर बनी डॉक्यूमेंट्री ‘Y64 – व्हिस्पर्स ऑफ द अनसीन’ का प्रदर्शन हुआ। संस्कृति विभाग एवं काली ट्रस्ट के सहयोग से निर्मित यह डॉक्यूमेंट्री अंतर्राष्ट्रीय दर्शकों के लिए पहली बार प्रदर्शित की गई। मुंबई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (Mumbai International Film Festival – MIFF) दक्षिण एशिया का सबसे पुराना और सबसे बड़ा फिल्म समारोह है। यह विशेष रूप से वृत्तचित्र, लघु कथा और एनीमेशन फिल्मों को समर्पित है। इस अवसर पर भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) के अतिरिक्त सचिव प्रभात ने डॉ. बीना उन्नीकृष्णन एवं उनकी टीम को सम्मानित किया। कार्यक्रम में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव एवं वित्तीय सलाहकार दीपक नारायण, एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर सुदीप्ति चावला, डॉ. बीना उन्नीकृष्णन, सिनेमैटोग्राफर प्रदीप सहित अन्य अतिथियों की उपस्थिति रही। हमारी पुरातन स्थापत्य कला के उत्कृष्ट उदाहरण हैं 64 योगिनी मंदिर: अपर मुख्य सचिव शुक्ला मध्यप्रदेश के अपर मुख्य सचिव, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व तथा सामान्य प्रशासन शिव शेखर शुक्ला ने कहा कि मध्यप्रदेश के मितावली (मुरैना), जबलपुर और खजुराहो के 64 योगिनी मंदिर हमारी पुरातन स्थापत्य कला के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। मितावली का 64 योगिनी मंदिर, जिसने भारत की पुरानी संसद भवन की वास्तुकला को प्रेरित किया, यह आज यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल की अस्थायी सूचि में भी शामिल है। ‘Y64 – Whispers of the Unseen’ जैसी परियोजना इस अद्वितीय विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचा रही है। डॉ. बीना उन्नीकृष्णन की कलात्मक यात्रा के माध्यम से यह फिल्म युवाओं को भारत की सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हुए सृजनशीलता, साहस, आत्म-अन्वेषण और स्त्री शक्ति जैसे सार्वभौमिक मूल्यों से परिचित कराती है। 64 योगिनियों ने मुझे इस कार्य के लिए चुना, यह मेरा सौभाग्य : डॉ. बीना उन्नीकृष्णन डॉ. बीना उन्नीकृष्णन ने बताया कि लगभग साढ़े बारह वर्ष पूर्व उन्होंने 64 योगिनियों के चित्रांकन की प्रक्रिया को केवल एक दस्तावेज़ के रूप में संजोने की शुरुआत की थी, लेकिन समय के साथ यह प्रयास समर्पण, धैर्य और आत्म-परिवर्तन की प्रेरणादायक सिनेमाई यात्रा बन गया। इस वर्ष उन्होंने 64 मूल चित्रों के साथ भारत के 14 शहरों में लगभग 15,000 किलोमीटर की सड़क यात्रा कर हजारों लोगों को योगिनी परंपरा से परिचित कराया तथा कला, संस्कृति और अध्यात्म पर व्यापक संवाद स्थापित किया। उन्होंने कहा “जब मैंने यह यात्रा शुरू की थी, तब मैं केवल उत्तर खोजती एक कलाकार थी। मैंने कभी नहीं सोचा था कि यह एक पुस्तक, प्रदर्शनी, हजारों किलोमीटर की यात्रा और अंततः एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म का रूप ले लेगी। योगिनियों ने मुझे भय से परे जाना और अपने स्त्रीत्व तथा अदृश्य मार्ग पर विश्वास करना सिखाया। मैं हमेशा कहती हूँ कि मैंने योगिनियों को नहीं चुना, बल्कि योगिनियों ने मुझे चुना है। उन्होंने बताया कि यह डॉक्यूमेंट्री केवल योगिनी मंदिरों के इतिहास और रहस्य को नहीं, बल्कि आध्यात्मिक आह्वान को पूरा करने के लिए आवश्यक साहस और समर्पण की कहानी भी प्रस्तुत करती है। इस उपलब्धि के लिए उन्होंने मध्यप्रदेश पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया। विरासत और संस्कृति का अद्भुत संगम है फिल्म 64 योगिनि मंदिरों से प्रेरित यह अनूठी फिल्म, संस्कृति, अध्यात्म और विरासत का अद्भुत संगम है। कंकाली ट्रस्ट और मध्यप्रदेश शासन के सहयोग से निर्मित यह डॉक्यूमेंट्री भारत के योगिनी मंदिरों से जुड़ी समृद्ध सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत का उत्सव भी है। यह डॉक्यूमेंट्री दर्शकों को ऐसे संसार में ले जाती है, जहाँ कला, आस्था, इतिहास और आत्म-परिवर्तन एक-दूसरे से जुड़कर एक अद्वितीय अनुभव का निर्माण करते हैं। 

मोहन कैबिनेट में नए चेहरे, पुराने मंत्रियों पर संकट! 3 सीनियर मंत्रियों के विभाग बदलने की चर्चा

भोपाल  मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार पहले बड़े मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की तैयारी में है। 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद बनने जा रही इस नई कैबिनेट में बड़ा उलटफेर देखने को मिलेगा। कयास लगाए जा रहे हैं कि 23 से 30 जून के बीच यह विस्तार हो सकता है। इस बड़े फेरबदल में बेहतर परफॉर्मेंस न देने वाले 5 से 6 मंत्रियों की छुट्टी की जा सकती है, जबकि 7 से 8 नए विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई जाएगी। फिलहाल मुख्यमंत्री समेत कैबिनेट की संख्या 31 है, जबकि 4 पद खाली चल रहे हैं। वरिष्ठ मंत्रियों को मिल सकती है नई जिम्मेदारी सियासी गलियारों में चर्चा है कि मोहन यादव कैबिनेट के कुछ बेहद सीनियर मंत्री मुख्यमंत्री से ज्यादा अपनी वरिष्ठता के कारण असहज महसूस कर रहे हैं। ऐसे में पूर्व राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को राज्यसभा भेजा जा सकता है, जबकि पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल को केंद्र में संगठन की कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।  इसके अलावा, सेना की महिला अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी करने वाले जनजातीय कल्याण मंत्री विजय शाह की कुर्सी पर भी खतरा मंडरा रहा है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट कई बार सरकार को फटकार लगा चुका है। विभाग की समीक्षा रिपोर्ट के आधार पर राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार, राधा सिंह और प्रतिमा बागरी पर भी गाज गिर सकती है। इन नए चेहरों की हो सकती है एंट्री नए चेहरों की बात करें तो सागर से शैलेंद्र जैन या प्रदीप लारिया में से किसी एक को मौका मिल सकता है। बुंदेलखंड से पूर्व मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह का नाम भी रेस में आगे चल रहा है। वहीं, ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी की भी कैबिनेट में वापसी की पूरी उम्मीद है। सूत्रों के मुताबिक, इस बार केवल मंत्रियों के चेहरे ही नहीं बदलेंगे, बल्कि लगभग सभी मंत्रियों के विभागों में भी भारी फेरबदल किया जाएगा। सीएम बोले- परफॉर्मेंस बनेगा आधार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मंत्रिमंडल फेरबदल का मुख्य आधार मंत्रियों का कामकाज रहेगा। अंतिम निर्णय पार्टी संगठन और केंद्रीय नेतृत्व से चर्चा के बाद लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर मंत्रियों व विधायकों के प्रदर्शन की नियमित समीक्षा होती है, जिसमें शीर्ष नेतृत्व के सुझाव भी शामिल रहते हैं। बीजेपी के सामने प्रमुख राजनीतिक समीकरण जानकारों के अनुसार इस फेरबदल के जरिए बीजेपी कई राजनीतिक और संगठनात्मक समीकरण साधना चाहती है।     बुंदेलखंड का प्रतिनिधित्व बढ़ाना: क्षेत्र की सीमित हिस्सेदारी से उपजी नाराजगी दूर करने के लिए सागर, दमोह, पन्ना और टीकमगढ़ से नए मंत्रियों को मौका दिया जा सकता है।     महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाना: महिला मतदाताओं को ध्यान में रखते हुए रीती पाठक, अर्चना चिटनीस और मालिनी गौड़ को अवसर मिल सकता है।     ओबीसी समीकरण और 2028 की तैयारी: आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए पार्टी ओबीसी वर्ग में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।     निकाय चुनाव की तैयारी: अगले वर्ष होने वाले नगरीय निकाय चुनावों को देखते हुए संगठन सीटों की स्थिति, प्रत्याशी चयन, बूथ प्रबंधन और चुनावी रणनीति पर फीडबैक जुटा रहा है।     सिंधिया खेमे और मूल संगठन में संतुलन: मौजूदा कैबिनेट में सिंधिया समर्थक नेताओं की मजबूत मौजूदगी है। फेरबदल में पार्टी को यह प्रभाव बनाए रखते हुए संगठन के पुराने नेताओं को भी संतुलित प्रतिनिधित्व देना होगा। इन मंत्रियों पर हटने का खतरा समीक्षा रिपोर्ट और विवादों के आधार पर कुछ मंत्रियों की भूमिका पर सवाल उठे हैं। प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:     विजय शाह: कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी के बाद वे आलोचनाओं के केंद्र में रहे। मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां और संगठन की नाराजगी भी सामने आई। पूर्व में भी उनके कुछ बयान पार्टी के लिए असहजता का कारण बने थे।     दिलीप अहिरवार: पहली बार विधायक बने अहिरवार को कैबिनेट में जगह मिली थी। हालांकि हालिया समीक्षा में उनके कामकाज को अपेक्षित स्तर का नहीं माना गया, जिससे उनकी स्थिति कमजोर बताई जा रही है।     प्रतिमा बागरी: उनका नाम जाति प्रमाण पत्र संबंधी विवाद में चर्चा में रहा है, जिसमें हाईकोर्ट ने राज्य स्तरीय जांच समिति से रिपोर्ट मांगी है। उनके भाई की गिरफ्तारी का मामला भी राजनीतिक चर्चा का विषय बना।     राधा सिंह: पहली बार विधायक बनीं राधा सिंह के विभाग के प्रदर्शन को लेकर हालिया समीक्षा में सवाल उठे हैं। इसके बाद उनके भविष्य को लेकर अटकलें तेज हुई हैं।     एदल सिंह कंषाना : रेत खनन और माफिया को लेकर विवादित बयान दे चुके हैं। विभाग के प्रदर्शन को लेकर हालिया समीक्षा में सवाल उठे हैं। उनके स्टाफ के सदस्य तबादलों के एवज में रिश्वत मांगते के खुफिया कैमरे में कैद हुए। इन मंत्रियों के विभागों में हो सकता है बदलाव     प्रहलाद पटेल: उन्हें संगठन या सरकार में बड़ी जिम्मेदारी मिलने की संभावना जताई जा रही है। राज्य मंत्रिमंडल में बने रहने पर उनके अनुभव के आधार पर अतिरिक्त विभाग भी दिए जा सकते हैं।     कैलाश विजयवर्गीय: विभागों में बदलाव संभव है, लेकिन उनकी राजनीतिक भूमिका और जिम्मेदारियां क्या होंगी इसे लेकर अभी संशय की स्थिति है।     तुलसीराम सिलावट: विभागीय पुनर्संतुलन के तहत उनके विभाग में बदलाव की संभावना बताई जा रही है। वरिष्ठ पत्रकार एन के सिंह कहते हैं कि एमपी के मुख्यमंत्री मोहन यादव देश के उन चुनिंदा मुख्यमंत्रियों में हैं, जिन्होंने सपने में भी मुख्यमंत्री बनने की कल्पना नहीं की थी। पार्टी ने उन्हें तीसरी या चौथी पंक्ति से उठाकर इतने बड़े पद पर बैठाया है। उनके साथ प्रहलाद पटेल और कैलाश विजयवर्गीय जैसे दिग्गज नेता काम कर रहे हैं, जो अनुभव और कद में उनसे कहीं ज्यादा हैं। ऐसे में इन नेताओं का असहज होना लाजमी है। यह उस समय का पॉलिटकल कंपल्शन या मजबूरी थी। यह चल रहा था और आगे भी चल सकता है। नए चेहरों की एंट्री: कौन हैं दावेदार? संभावित नए चेहरों में सागर के प्रदीप लारिया प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। बुंदेलखंड से पूर्व मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह का नाम भी चर्चा में है। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम … Read more