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बिना कोचिंग की पढ़ाई से रचा इतिहास! श्रद्धा पांडेय ने किया BPSC 70वीं परीक्षा टॉप

पटना  बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा का फाइनल रिजल्ट आ गया है. इसके बाद से उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में खुशी की लहर दौड़ गई है.  जिले के रानीगंज क्षेत्र के पचरास गांव की रहने वाली श्रद्धा पांडेय ने 593 अंक हासिल कर पूरे बिहार में पहला स्थान प्राप्त किया है. उनकी इस सफलता के बाद परिवार, रिश्तेदार और गांव के लोग मिठाइयां बांटकर जश्न मना रहे हैं. बताया जा रहा है कि इस उपलब्धि के बाद उन्हें SDM का पद मिल सकता है. खास बात यह है कि श्रद्धा पहले से ही उत्तर प्रदेश में असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर लखनऊ में तैनात हैं और अब उन्होंने BPSC में टॉप कर एक और बड़ी उपलब्ध हासिल की है।  शनिवार को जारी हुआ रिजल्ट  बिहार लोक सेवा आयोग ने शनिवार को 70वीं CCE का फाइनल रिजल्ट जारी किया. इस परीक्षा में श्रद्धा पांडेय ने कुल 593 अंक हासिल कर पहला स्थान प्राप्त किया. उन्हें SDM पद मिल सकता है. श्रद्धा प्रतापगढ़ के रानीगंज क्षेत्र के पचरास गांव की रहने वाली हैं.उन्होंने UPPSC संयुक्त राज्य सेवा परीक्षा 2024 में EWS कैटेगरी से 153वीं रैंक हासिल की थी. पहले ही अटेम्प्ट में यूपी PCS क्वालीफाई करने वाली श्रद्धा ने अब BPSC में भी परचम लहरा दिया।  दूसरे प्रयास में किया टॉप  श्रद्धा पांडेय की सफलता इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि वह लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं में अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं. उन्होंने UPPSC संयुक्त राज्य सेवा परीक्षा 2024 में EWS श्रेणी से 153वीं रैंक हासिल कर पहले ही प्रयास में यूपी PCS परीक्षा पास की थी. इसके बाद वह असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर नियुक्त हुईं. अब उन्होंने एक और कमाल कर दिखाया है. दूसरे प्रयास में BPSC 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में पहला स्थान हासिल कर उन्होंने अपनी मेहनत और तैयारी का एक और उदाहरण पेश किया है।  क्या करते हैं श्रद्धा के पिता?  श्रद्धा के पिता संतोष पांडेय वकील होने के साथ किसान भी हैं,जबकि मां सुनीता पांडेय हाउस वाइफ हैं.  श्रद्धा की शुरुआती पढ़ाई रानीगंज के मनीष मेमोरियल स्कूल से इंटर, संगम इंटरनेशनल स्कूल से और ग्रेजुएशन स्वामी करपात्री जी महाराज राजकीय महाविद्यालय से हुआ. खास बात यह कि श्रद्धा ने कही भी कोचिंग नहीं ली है और पहले ही कामयाबी में उन्होंने असिस्टेंट कमिश्नर निकला तो दूसरे प्रयास में बिहार पीसीएस टॉप कर दिया।  परिवार में खुशी की लहर  श्रद्धा की इस सफलता पर परिवार के लोग बेहद खुश हैं. घर पर मिठाइयां बांटी जा रही हैं और रिश्तेदार व शुभचिंतक लगातार बधाई देने पहुंच रहे हैं. बेटी की इस उपलब्धि पर पिता ने कहा कि बेटी ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर यह मुकाम हासिल किया है. उसने कभी कोचिंग की मदद नहीं ली है और हमेशा खुद पर भरोसा रखा. उसकी सफलता से पूरा परिवार गर्व महसूस कर रहा है. वहीं, गांव के लोगों का भी कहना है कि श्रद्धा की सफलता से पूरे क्षेत्र का नाम रोशन हुआ है। 

अभिभावकों को राहत! पंजाब में निजी स्कूल हर साल केवल 5% तक बढ़ा पाएंगे फीस

चंडीगढ़. पंजाब सरकार ने स्कूली छात्रों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। दरअसल, पंजाब सरकार ने पंजाब के अनएडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन्स द्वारा हर साल फीस और फंड के नाम पर की जाने वाली मनमानी वसूली और लूट को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। पंजाब सरकार ने अब इस गैर-कानूनी लूट पर रोक लगा दी है और फीस बढ़ाने पर रोक लगा दी है। अब पंजाब में कोई भी प्राइवेट या बिना मदद वाला एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन हर साल सिर्फ 5 प्रतिशत (5%) ही फीस बढ़ा सकेगा, इससे ज़्यादा फीस बढ़ाने की इजाजत नहीं होगी। इसके अलावा अगर पिछले 36 महीनों में यदि किसी स्कूल ने फीस में 15 प्रतिशत से अधिक वृद्धि की गई है तो उसे तुरन्त अभिभावकों को पैसे लौटाने होंगे। ये फैसला और नियम पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड, CBSE, ICSE और इंटरनेशनल बोर्ड सभी पर लागू होगा। फीस बढ़ाने से पहले करना होगा आवेदन पंजाब सरकार का कहना है कि, अगर किसी स्कूल को 5 प्रतिशत फीस बढ़ानी है तो उसके लिए कमेटी बनाई गई है। फीस बढ़ाने के लिए स्कूलों को 6 महीने पहले आवेदन करना होगा। यही नहीं स्कूलों अपना फाइनेंशियल ऑडिट करना होगा और बताना होगा आखिर फीस क्यों बढ़ाई गई है।  नियम तोड़े तो होगा जुर्माना पंजाब सरकार के आदेशों के मुताबिक नियम तोड़ने पर 5 कक्षा तक फीस बढ़ाने की मनमानी करने पर पहली बार 50 हजार और दूसरी बार 1 लाख रुपए जुर्मान, 8वीं कक्षा तक फीस बढ़ाने पर पहली बार एक लाख रुपए और दूसरी 3 लाख रुपए जुर्मान होगा, 12वीं कक्षा तक के लिए पहली बार 2 लाख रुपए और दूसरी बार 5 लाख रुपए जुर्मान होगा। वहीं अगर स्कूलों द्वारा तीसरी बार नियमों का उल्लंघन किया जाता है तो स्कूल की मान्यता वापस ले ली जाएगी।

महंगे पेट्रोल से परेशान गिग वर्कर्स का बड़ा फैसला, इलेक्ट्रिक व्हीकल अपनाकर बढ़ाई कमाई

 ग्वालियर पीठ पर भारी – भरकम डिलीवरी बैग, माथे पर पसीने की बूंदें और दिल में पेट्रोल के मीटर को देखकर बढ़ती धडकऩे…। ये आज के देशभर की सड़कों का कड़वा सच है। वहीं, बात करें मध्य प्रदेश के ग्वालियर की तो शहर में अचलेश्वर मंदिर की चौखट से लेकर महाराज बाड़े की तंग और व्यस्त गलियों तक जो युवा शहर की रफ्तार बने हुए थे, उनके बजट को भी पेट्रोल की लगातार बढ़ती कीमतों ने हिलाकर रख दिया है। आलम ये है कि, कमाई 'सेंटीमीटर' में सिमटती चली जा रही है और पेट्रोल के खर्च 'किलोमीटर' की रफ्तार से भागते चले जा रहा है, लेकिन ग्वालियर के बड़ी आबादी के युवाओं ने भी हार मानने के बजाय एक 'स्मार्ट' ऑप्शन खोज निकाला है। ईंधन की इस बेलगाम बढ़ती आग से बचने के लिए शहर के करीब 60 फीसदी गिग वर्कर्स ने पेट्रोल को 'बाय – बाय' कह दिया है और ईवी (इलेक्ट्रिक व्हीकल) की राह थाम ली है। जुगाड़ और स्मार्ट वर्क का नया फॉर्मूला ग्वालियर की इस गिग इकोनॉमी का पूरा गणित ही बदलकर रख दिया है। शहर में 750 से अधिक गिग वर्कर्स एक्टिव हैं, जो रोजाना डिलिवरी पहुंचाते हुए 50 से 80 किलो मीटर तक की यात्रा शहर के भीतर ही तय कर लेते हैं। दिनभर में 7 से 8 ऑडर्स निपटाने और प्रति ऑर्डर 50 से 100 रुपए कमाने वाले इन युवाओं के लिए पेट्रोल का खर्च एक गहरा आर्थिक घाव बन रहा था। ऐसे में उन्होंने तीन बड़े बदलाव किए हैं। बाइक को कहा अलविदा, ई-स्कूटर का स्वागत कई युवाओं ने अपनी पुरानी पेट्रोल बाइक बेच दी और बची – खुची जमा पूंजी से डाउन पेमेंट देकर नया ई-स्कूटर घर ले आए। किराए की सवारी का सहारा जो युवा नया वाहन खरीदने का जोखिम नहीं उठा सकते, वे अब किराए की ई – बाइक लेकर रोजाना की पेट्रोल की मार से खुद को बचा रहे हैं। लंबी दूरी को सीधे 'नो' अब आंख मूंदकर ऑडर्स नहीं उठाए जा रहे। युवाओं ने 'फिल्टरिंग' शुरू कर दी है। लंबी दूरी के ऑडर्स को छोड़कर कम दूरी वाले ट्रिप्स से ईंधन और समय का संतुलन बिठाया जा रहा है। रोजगार का बढ़ता ग्राफ और चुनौती… रोजगार कार्यालय के उप संचालक (रोजगार) पवन कुमार भिवटे कहते हैं कि, ग्वालियर में गिग वर्कर्स का काम तेजी से बढ़ता जा रहा है। एक सिंगल रोजगार मेले से ही कंपनियों को 20 – 25 युवा मिल जाते हैं और सालभर में 200 से ज्यादा युवा इस क्षेत्र से जुड़ रहे हैं। चूंकि, इनका पूरा काम दोपहिया वाहन पर ही टिका है, इसलिए पेट्रोल का महंगा होना सीधे इनके मुनाफे पर चोट कर रहा है। पेट्रोल की टंकी जेब खाली कर रही थी शहर के एक गिग वर्कर श्याम कुमार ने पत्रिका से बातचीत के दौरान बताया कि, पहले बाइक से ही दिनभर भागदौड़ होती थी, लेकिन जब पेट्रोल के दाम बजट से बाहर होने लगे तो ईवी ही एकमात्र रास्ता बचा। मैं रोजाना करीब 8 पार्सल डिलीवर करता हूं और हाल ही में इलेक्ट्रिक व्हीकल पर शिफ्ट हुआ हूं, जिससे अब कुछ बचत हो पाती है।

महिला स्व-सहायता समूहों की अनूठी पहल, डिप्टी सीएम अरुण साव को भेंट किया गया विशेष चावल

रायपुर.  गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले की ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार किया जा रहा जैविक विष्णुभोग चावल अब राज्य स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत महिला स्व-सहायता समूहों की आजीविका गतिविधियों को बढ़ावा देने के प्रयासों के तहत जिला पंचायत उपाध्यक्ष राजा उपेन्द्र बहादुर सिंह ने उप मुख्यमंत्री अरुण साव को जिले का प्रसिद्ध जैविक विष्णुभोग चावल भेंट किया। यह चावल अरपा बिहान महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा जैविक विधि से तैयार किया गया है। इस अवसर पर उपेन्द्र बहादुर सिंह ने उप मुख्यमंत्री को जिले में महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा संचालित आजीविका संवर्धन गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि स्थानीय स्तर पर पारंपरिक एवं विशिष्ट कृषि उत्पादों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विष्णुभोग धान का जैविक उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन किया जा रहा है। इस पहल से ग्रामीण महिलाओं को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं और उनकी आय में भी निरंतर वृद्धि हो रही है। उन्होंने बताया कि महिला समूहों द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पाद न केवल गुणवत्ता और शुद्धता के लिए पहचान बना रहे हैं, बल्कि स्थानीय कृषि परंपराओं को भी संरक्षित करने का कार्य कर रहे हैं। जैविक खेती को बढ़ावा देने के साथ-साथ समूहों द्वारा उत्पादों की पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे बाजार में उनकी मांग लगातार बढ़ रही है। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने महिला स्व-सहायता समूहों की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ग्रामीण महिलाओं के ऐसे प्रयास आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में प्रेरणादायी उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि महिला समूहों द्वारा तैयार किए जा रहे स्थानीय उत्पाद ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के साथ-साथ प्रदेश की विशिष्ट कृषि पहचान को भी राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित कर रहे हैं। साव ने जिले में संचालित इस अभिनव गतिविधि की प्रशंसा करते हुए महिला स्व-सहायता समूहों और जिला प्रशासन को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे प्रयासों से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध होगा। गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले में महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार किया जा रहा जैविक विष्णुभोग चावल आज ग्रामीण उद्यमिता, महिला सशक्तिकरण और स्थानीय कृषि उत्पादों के संवर्धन का सफल उदाहरण बनकर उभर रहा है। यह पहल न केवल महिलाओं की आजीविका को सुदृढ़ कर रही है, बल्कि जिले की विशिष्ट पहचान को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रही है।

सीएम योगी का विपक्ष पर हमला, सपा-बसपा-कांग्रेस पर विकास और कानून व्यवस्था को लेकर निशाना

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को फिरोजाबाद जिले को 658 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली 81 विकास परियोजनाओं की सौगात दी। टूंडला के उसायनी में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने विभिन्न परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार विकास और जनकल्याण को प्राथमिकता देते हुए बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए लगातार कार्य कर रही है। इस दौरान उनके निशाने पर विपक्ष रहा। सपा-बसपा और कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि समाजवादी पार्टी रामनवमी का तो विरोध करती ही थी, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाने का भी विरोध करती थी। कांवड यात्रा नहीं होने देती थी। गरीब को राशन नहीं मिलता था। आयुष्मान कार्ड,शौचाल, एलपीजी सिलेंडर की भी सुविधा नहीं थी। तब बिजली भी नहीं थी, क्योंकि सपा, कांग्रेस और बसपा के लोग अंधेरे में रहने के आदी थे। अंधेरे में ही इनकी डकैती कुशलतापूर्ण पड़ जाती थी। इसलिए चाहते ही नहीं थे बिजली आए। सपा-बसपा और कांग्रेस पर बरसे सीएम योगी मुख्यमंत्री योगी ने सपा को घेरते हुए कहा कि उनके एजेंडे में विकास नहीं है। उसका काम लोगों को बांटना, सामाजिक एकता को कमजोर करना, गुंडागर्दी को बढ़ावा देना और विकास योजनाओं में रोड़ा अटकाना रहा है। भाजपा सरकार वन डिस्ट्रिक्ट वन मेडिकल कॉलेज और वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट जैसी योजनाएं दे रही है, जबकि समाजवादी पार्टी के समय 'वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया' की स्थिति थी। हर जिले में एक चिन्हित माफिया अराजकता फैलाता था, जमीनों पर कब्जा करता था और व्यापारियों से वसूली करता था। अब यूपी में सब चंगा है- सीएम योगी उन्होने कहा कि आज उत्तर प्रदेश माफिया, गुंडागर्दी और उपद्रव से मुक्त हो चुका है। प्रदेश में अब न कर्फ्यू लगता है और न दंगे होते हैं। अब यूपी में सब चंगा है और जब सब चंगा होता है तो उपद्रव नहीं, उत्सव होते हैं। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पहले रामनवमी, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी समेत अन्य धार्मिक आयोजनों पर रोक लगाई जाती थी और गरीबों को राशन, आवास, शौचालय, आयुष्मान योजना तथा गैस कनेक्शन जैसी सुविधाओं से वंचित रखा जाता था। सरकार की गिनाईं उपलब्धियां मुख्यमंत्री ने सरकार की विभिन्न योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश के 15 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन, 10 करोड़ लोगों को आयुष्मान भारत योजना का लाभ दिया जा रहा है। इसके अलावा 65 लाख परिवारों को आवास, करीब दो करोड़ परिवारों को उज्ज्वला गैस कनेक्शन और डेढ़ करोड़ परिवारों को मुफ्त बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने बताया कि 16 लाख किसानों के निजी ट्यूबवेलों के बिजली बिल माफ किए गए हैं। किसानों को सॉइल हेल्थ कार्ड, खरीद नीति और किसान सम्मान निधि का लाभ भी मिल रहा है। हाल ही में किसान सम्मान निधि की 4300 करोड़ रुपये की राशि सीधे किसानों के खातों में भेजी गई है।

52 गांवों की समस्याओं को लेकर आदिवासियों और कांग्रेस का प्रदर्शन, कलेक्ट्रेट पहुंचे सैकड़ों लोग

धमतरी. जिले के आदिवासी अंचलों में मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश आखिरकार सोमवार को फूट पड़ा। लगभग 52 गांवों के आदिवासी ग्रामीणों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया और कलेक्ट्रेट घेराव के लिए बड़ी संख्या में धमतरी पहुंचे। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणों ने पैदल मार्च निकालकर प्रशासन के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से सड़क, पेयजल, बिजली, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं की मांग की जा रही है, लेकिन प्रशासन और शासन की ओर से केवल आश्वासन ही दिए गए हैं। धरातल पर कोई ठोस काम नहीं होने से लोगों में भारी नाराजगी है। जानकारी के अनुसार, आदिवासी ग्रामीण बड़ी संख्या में वाहनों के माध्यम से धमतरी पहुंचे थे। इसके बाद उन्होंने शोभाराम देवांगन चौक के पास एकत्र होकर कलेक्ट्रेट की ओर कूच किया। प्रशासन और पुलिस ने उन्हें रोकने तथा समझाने का प्रयास किया, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे और पैदल मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट घेराव के लिए आगे बढ़ गए। प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों का कहना है कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं, तो आने वाले दिनों में और भी उग्र आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीनी स्तर पर विकास कार्य दिखाई देने चाहिए। प्रदर्शन में शामिल लोगों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आ रहे हैं। अनुमान है कि प्रदर्शन में 500 से 2000 तक ग्रामीण शामिल है। बड़ी संख्या में आदिवासियों के जुटने को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया और सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी की गई। वहीं, प्रदर्शनकारी ग्रामीण कलेक्टर से सीधे मुलाकात कर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपने पर अड़े हुए हैं। उनका कहना है कि जब तक जिला प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं सुनेगा और समाधान का भरोसा नहीं देगा, तब तक वे वापस नहीं लौटेंगे। फिलहाल प्रशासनिक अधिकारी ग्रामीणों को समझाने और शांतिपूर्ण समाधान निकालने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि आंदोलनकारी अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं, जिससे जिले में स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

UP में राज्यसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज, टिकटों पर मंथन और नए चेहरों की तलाश

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की सियासत में आने वाले दिन बेहद सरगर्मियों से भरे रहने वाले हैं. अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से ठीक पहले राज्य में राज्यसभा की 10 सीटों पर चुनाव होंगे. राज्यसभा चुनाव ने राज्य की राजनीतिक हलचल को चरम पर पहुंचा दिया है. इस चुनाव को केवल संसद के ऊपरी सदन का समीकरण बदलने के तौर पर नहीं, बल्कि 2027 के महामुकाबले से पहले भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच सेमीफाइनल के रूप में देखा जा रहा है. जिन 10 सांसदों का कार्यकाल पूरा हो रहा है, उनमें भाजपा के हरदीप सिंह पुरी, अरुण सिंह, बृजलाल, नीरज शेखर, सीमा द्विवेदी, गीता शाक्य, बनवारी लाल वर्मा और दिनेश शर्मा शामिल हैं. वहीं समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव और रामजी गौतम का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है।  आइए समझते हैं कि इस बार उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों का पूरा गणित क्या है, किसका पत्ता साफ होने जा रहा है और दोनों दल किस रणनीति पर काम कर रहे हैं. भाजपा के मौजूदा सांसदों में से कई ऐसे चेहरे हैं जिनका कार्यकाल खत्म हो रहा है, लेकिन पार्टी को दोबारा राज्यसभा भेजना मजबूरी है. हालांकि, पार्टी इस बार कई नए चेहरों को मौका देने की तैयारी में भी है. इससे कुछ मौजूदा सांसदों का पत्ता साफ होना लगभग तय माना जा रहा है. वहीं, समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो अखिलेश यादव भी इस बार कम से कम दो नए वफादारों जिसमें पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक चेहरों को दिल्ली भेजने की तैयारी में हैं।  राज्यसभा की 10 सीटों के लिए किसका दावा कितना मजबूत? विधानसभा में वर्तमान संख्या बल को देखें तो भाजपा और उसके सहयोगियों के पास करीब 290 विधायक हैं, जबकि समाजवादी पार्टी के पास लगभग 102 विधायक हैं. ऐसे में गणित भाजपा के पक्ष में दिखाई देता है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा 8 सीटें जीतने की रणनीति पर काम कर सकती है, जबकि सपा के लिए 2 सीटें सुरक्षित मानी जा रही हैं. सबसे ज्यादा चर्चा उन नेताओं को लेकर है जिनकी दोबारा राज्यसभा वापसी हो सकती है. केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और और पूर्व आईपीएस बृजलाल के नाम फिर से चर्चा में हैं. जबकि, संगठन में मजबूत पकड़ रखने वाले अरुण सिंह का पत्ता कट सकता है. बीजेपी सामाजिक समीकरणों और 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति को ध्यान में रखते हुए कई नए चेहरों को भी मौका दे सकती है।  संख्याबल और संभावित जीत यूपी विधानसभा में 403 सदस्य हैं. एनडीए (बीजेपी + सहयोगी): 290-294 MLAs सपा + सहयोगी: 103-105 (सपा 101-102 + कांग्रेस 2) अन्य बसपा 1, JD(L) आदि, कुछ खाली एक सीट जीतने के लिए लगभग 37 वोट चाहिए. ऐसे में मौजूदा गणित के आधार पर बीजेपी/एनडीए 7-8 सीटें आसानी से जीत सकती हैं. सपा 2 सीटें और अधिकतम 3 जीत सकती हैं, अगर बागी न हों और गठबंधन मजबूत हो।  सपा प्रमुख अखिलेश यादव अपने कोर ‘PDA’ फॉर्मूले को मजबूत करने के लिए किसी बड़े अति-पिछड़े या दलित चेहरे को उच्च सदन भेज सकते हैं. वहीं बीजेपी भी पश्चिम से लेकर पूर्व तक के जातीय संतुलन को साधने वाले नेताओं पर दांव लगाएगी. अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले यह राज्यसभा चुनाव दोनों पार्टियों के लिए नाक का सवाल बन चुका है. जो भी पार्टी उम्मीद से ज्यादा सीटें जीतने में कामयाब होगी, वह राज्य में यह नैरेटिव बनाने में सफल रहेगी कि ‘हवा’ उसके पक्ष में बह रही है. बगावत या क्रॉस वोटिंग के जरिए यदि किसी दल ने दूसरे को पटखनी दी, तो विरोधी खेमे के कैडर का मनोबल टूट जाएगा।  बीजेपी और सपा का सीट गणित उत्तर प्रदेश विधानसभा में विधायकों की मौजूदा संख्या के आधार पर ही राज्यसभा की इन 10 सीटों का फैसला होगा. एक राज्यसभा सीट को जीतने के लिए तय प्रथम वरीयता के वोटों की आवश्यकता होती है. बीजेपी अपने मजबूत संख्याबल और सहयोगी दलों जैसे रालोद, सुभासपा, अपना दल के दम पर कम से कम 7 सीटें जीतने का लक्ष्य लेकर चल रही है. पार्टी इसके लिए अतिरिक्त वोटों का इंतजाम करने और विपक्षी खेमे में सेंधमारी की रणनीति पर भी काम कर सकती है. वहीं समाजवादी पार्टी के पास पिछले चुनावों के मुकाबले विधायकों की संख्या बेहतर है. कांग्रेस के साथ गठबंधन के बाद सपा आसानी से 3 सीटें अपने दम पर जीतने की स्थिति में है. यदि विपक्ष एकजुट रहता है और कुछ असंतुष्ट विधायक साथ आते हैं, तो सपा चौथी सीट के लिए भी कड़ा मुकाबला पेश करेगी।  किसका चमकेगा भाग्य और किसका कटेगा टिकट? राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इस बार दोनों ही दल किसी भी ऐसे चेहरे को दोबारा मौका नहीं देना चाहेंगे जो आगामी विधानसभा चुनाव में जमीन पर जातीय या क्षेत्रीय समीकरणों को फिट न बैठता हो. जो नेता पिछले कुछ समय से संगठन में निष्क्रिय रहे हैं या जिनका स्थानीय स्तर पर विरोध है, उनका टिकट कटना तय माना जा रहा है. बीजेपी कुछ बुजुर्ग नेताओं को मार्गदर्शक मंडल या संगठन में भेजकर नए और युवा चेहरों को मैदान में उतार सकती है। 

खातीपुरा मेगा कोचिंग टर्मिनल का उद्घाटन, रेल सुविधाओं को मिला नया आयाम

पटना जयपुर (खातीपुरा)-दरभंगा अमृत भारत एक्सप्रेस रेल सेवा का शुभारंभ हो गया है। यह ट्रेन यात्रा को एक नया आयाम देगी। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, राजस्थान के सीएम भजनलाल शर्मा तथा बिहार के सीएम सम्राट चौधरी ने रविवार को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर खातीपुरा में देश के पहले मेगा कोचिंग टर्मिनल और विभिन्न रेलवे स्टेशनों पर विकसित यात्री सुविधाओं का भी उद्घाटन किया गया। राजस्‍थान और म‍िथ‍िला के संबंधों को मजबूती कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि नई ट्रेन राजस्थान और बिहार के मिथिला क्षेत्र के बीच सांस्कृतिक एवं सामाजिक संबंधों को मजबूत करेगी। उन्होंने बताया कि खातीपुरा में 205 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित मेगा कोचिंग टर्मिनल देश का पहला ऐसा आधुनिक केंद्र है, जहां वंदे भारत, एलएचबी, डेमू सहित विभिन्न प्रकार की ट्रेनों का अनुरक्षण एक ही स्थान पर किया जा सकेगा। बिहारवासियों को होगा विशेष लाभ इसकी क्षमता प्रति माह लगभग 450 ट्रेनों के रखरखाव की है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि इस ट्रेन से राजस्थान में कार्यरत प्रवासी बिहारवासियों को विशेष लाभ मिलेगा। उन्‍होंने कहा कि यह ट्रेन बिहार के लोगों के लिए एक सौगात की तरह है। सप्ताह में छह दिन चलने वाली यह अमृत भारत एक्सप्रेस रोजगार, शिक्षा, व्यापार और पारिवारिक कारणों से यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए सुविधाजनक विकल्प साबित होगी। इसके साथ ही उत्तर पश्चिम रेलवे के 41 छोटे और मध्यम स्टेशनों पर भी यात्री सुविधाओं का विस्तार किया गया है, जिससे रेल यात्रियों को बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि ने बदली दुर्गेश यादव के खेती की तस्वीर

रायपुर. ,  प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना छोटे और सीमांत किसानों के लिए आर्थिक सहारे का मजबूत आधार बन रही है। गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के ग्राम बिजरवार निवासी किसान दुर्गेश यादव भी उन लाभार्थियों में शामिल हैं, जिनके जीवन में इस योजना ने सकारात्मक बदलाव लाया है। सीमित कृषि भूमि होने के बावजूद वे खेती-किसानी से अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। पहले खेती के लिए बीज, खाद और अन्य आवश्यक कृषि सामग्री की व्यवस्था करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण था, लेकिन अब प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से मिलने वाली सहायता ने उनकी राह आसान कर दी है। दुर्गेश यादव बताते हैं कि योजना के तहत उन्हें प्रत्येक तीन माह में दो हजार रुपये की राशि सीधे उनके बैंक खाते में प्राप्त होती है। समय पर मिलने वाली यह आर्थिक सहायता खेती के मौसम में आवश्यक कृषि सामग्री खरीदने में मददगार साबित हो रही है। इससे खेती की लागत का बोझ कम हुआ है और उन्हें आर्थिक परेशानियों से काफी राहत मिली है। उन्होंने बताया कि पहले कृषि कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने में कठिनाई होती थी, लेकिन अब योजना से मिलने वाली राशि का उपयोग बीज, उर्वरक और अन्य कृषि जरूरतों को पूरा करने में किया जा रहा है। इससे खेती का कार्य अधिक व्यवस्थित ढंग से हो पा रहा है और उत्पादन बढ़ाने की दिशा में भी मदद मिल रही है। दुर्गेश यादव का कहना है कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ केवल उन्हें ही नहीं, बल्कि क्षेत्र के अनेक किसानों को मिल रहा है। नियमित आर्थिक सहायता मिलने से किसानों का आत्मविश्वास बढ़ा है और वे खेती के कार्यों को बेहतर योजना और उत्साह के साथ कर पा रहे हैं। किसानों की आय में वृद्धि के साथ-साथ उनकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है। उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना को किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी और सराहनीय पहल बताते हुए कहा कि यह योजना छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक संबल प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। योजना के माध्यम से किसानों को समय पर सहायता मिल रही है, जिससे वे खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बना पा रहे हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना आज ग्रामीण भारत के लाखों किसानों की तरह गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के किसान दुर्गेश यादव के जीवन में भी नई उम्मीद, आत्मविश्वास और आर्थिक मजबूती का आधार बन रही है।

मानसून में वन संरक्षण को प्राथमिकता, झारखंड में एक करोड़ से अधिक पौधारोपण की तैयारी

रांची राज्य के वनों में होने वाली पर्यटन समेत अन्य गतिविधियां एक जुलाई से 30 सितंबर तक बंद रहेंगी। वन क्षेत्र में रहने वाले जीवों की सुरक्षा और नए लगने वाले पौधों को बारिश में पनपने के लिए गतिविधियों पर रोक लगाई जाती है। पलामू टाइगर रिजर्व, दलमा समेत सभी वन क्षेत्र में इस दौरान सड़क निर्माण, बिजली के टावर लगाने जैसे कार्य भी बंद रहेंगे। मानसून और बारिश के इन तीन महीनों में वनक्षेत्र में दस लाख से ज्यादा नए पौधे भी लगाए जाएंगे। कच्ची संरचना में होगा पानी का संचयन वन एवं पर्यावरण विभाग ने इस दौरान वनों के विकास और नए पौधों के संरक्षण उपाय किए हैं। वर्षा के समय कच्ची संरचना में पानी का संचयन किया जाएगा। जून तक पलामू क्षेत्र में औसत से कम बारिश हुई है। ऐसे में नए लगने वाले पौधों की सिंचाई के लिए स्थानीय स्तर पर उपाय किए जा रहे हैं। कृषि वानिकी विशेषज्ञ संजय पांडे ने बताया कि राज्य के वनों में जुलाई से सितंबर कर ज्यादा बारिश होती है। लेकिन जून में लगने वाले पौधों को बचाने के लिए टैंकरों या अन्य माध्यम से पानी पहुंचाना ही विकल्प है। इको टूरिज्म का बढ़ेगा दायरा राज्य के वन क्षेत्र में मानसून के बाद होने वाली पर्यटन गतिविधियों में इको टूरिज्म का दायरा बढ़ाया जाएगा। जंगल सफारी के लिए बैट्री चालित वाहनों की संख्या 25 तक करने की योजना है। इसके अलावा वन क्षेत्र में आवासीय क्षेत्र में सोलर आधारित विद्युत व्यवस्था की जाएगी। पलामू टाइगर रिजर्व के साथ लातेहार में बनने वाली सफारी का काम भी मानसून के बाद तेज किया जाएगा।