samacharsecretary.com

CM यादव ने खनि निरीक्षकों को सौंपे नियुक्ति पत्र, 85 हजार युवाओं को रोजगार

मध्यप्रदेश सरकार ने विगत एक वर्ष में उपलब्ध कराये है 85 हजार युवाओं को रोजगार और सेवा के अवसर : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खनि निरीक्षकों को दिए नियुक्ति पत्र भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश खनिज के क्षेत्र में अग्रणी राज्य है। प्रदेश की धरती से हीरा भी निकलता है। कोयले के मामले में भी प्रदेश समृद्ध हैं। खनिज महत्वपूर्ण विभाग है जिसमें पारदर्शिता और दक्षता के साथ कार्य करने वाले प्रदेश की आर्थिक समृद्धि में भी सहायक होते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री निवास में नवनियुक्त 62 खनि निरीक्षकों को नियुक्ति पत्र वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। राज्य सरकार ने बीते एक वर्ष में 85 हजार युवाओं को रोजगार उपलब्ध करवाया है। कार्यक्रम में पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर भी उपस्थित थी।   मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रत्नगर्भा, वसुंधरा से जुड़कर नवनियुक्त खनि निरीक्षकों का भाग्योदय हो रहा है। आज का दिन इन युवाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, साथ ही उनके जीवन में नया प्रकाश लाने वाला दिन भी है। नवनियुक्त खनि निरीक्षक शासन से जुड़कर सिर्फ नौकरी ही प्राप्त नहीं कर रहे बल्कि सेवा का एक नया अवसर प्राप्त कर अपनी नई पहचान भी प्रारंभ कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नवनियुक्त खनि निरीक्षक आज जिस मुकाम पर पहुंचे हैं, उसमें उनके माता-पिता और परिजन का आशीर्वाद एवं सहयोग भी शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में राष्ट्र आगे बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश भी प्रगति के मार्ग पर तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी युवाओं को शासकीय सेवा में आने पर कर्मचारी नहीं बल्कि कर्मयोगी मानते हैं। मध्यप्रदेश सरकार ने खनि निरीक्षकों को नियुक्ति पत्र के साथ ही विश्वास पत्र भी सौंपा है। सुशासन और लोक कल्याण के उद्देश्य से कार्य करते हुए ये युवा निश्चित ही सभी के लिए गर्व का कारण बनेंगे।   खनिज आय में वृद्धि प्रमुख सचिव खनिज साधन विवेक पोरवाल ने कहा कि प्रदेश में खनिजों से होने वाली आय आठ-नौ हजार करोड़ से बढ़कर 12 हजार करोड़ रुपए हो गई है। वित्त वर्ष 2026-27 में 72 खनि निरीक्षकों की नियुक्ति की पहल की गई। नवनियुक्त खनि निरीक्षक प्रदेश के खनिज राजस्व को बढ़ाने का कार्य करेंगे। प्रमुख सचिव पोरवाल ने बताया कि भारत सरकार ने नीलामी के माध्यम से 33 कोयला खनन ब्लॉक आवंटित किए, जिसमें से 8 ब्लॉक में कोयला का उत्पादन शुरू हो गया हैं। छह अन्य कोयला खनन ब्लॉक में उत्पादन प्रारंभ करने के लिए माइन डेवलपमेंट का कार्य प्रारंभ किया गया है। छतरपुर जिले में 2 नए क्षेत्रों में हीरे की खोज के लिए अन्वेषण कार्य चल रहा है। पन्ना जिले के अंतर्गत एक हीरा ब्लॉक आवंटित किया गया है। स्वर्ण अयस्क की प्रोसेसिंग के लिए सिंगरौली में ग्रीनफील्ड गोल्ड कंसंट्रेट प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की जा रही है। सिंगरौली और कटनी में 6 स्वर्ण ब्लॉक नीलाम किए गए हैं। भारत सरकार ने खनन क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए मध्यप्रदेश को सम्मानित किया है। नीलामी प्रक्रिया और खनन क्षेत्र में सुधारों के लिए मध्यप्रदेश ने अग्रणी राज्य की पहचान बनाई है। नवनियुक्त खनि निरीक्षक बोले-"हमारे लिए आज होली और दीपावली दोनों की खुशी है" मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नवनियुक्त खनि निरीक्षकों में से 5 चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किया और नवनियुक्त खनि निरीक्षकों के साथ छायाचित्र खिंचवाया। कार्यक्रम में नवनियुक्त खनि निरीक्षकों ने कहा कि आज उनके लिए होली और दीपावली जैसा खुशी का दिन है। वे अपने दायित्व को पूरी लगन से पूरा करेंगे।      

CM यादव ने की राजस्व प्राप्ति की समीक्षा, आय बढ़ाने पर जोर

विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं विभागों के आय वृद्धि के प्रयास मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की राजस्व प्राप्ति की समीक्षा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के विकास के लिए आय अर्जित करने वाले सहयोगी विभागों की महत्वपूर्ण भूमिका है। विभागों ने राजस्व में वृद्धि के लिए आवश्यक प्रयास किए हैं, जो सराहनीय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय में आयोजित बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा वित्त वर्ष के अंतर्गत अर्जित राजस्व आय की जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभिन्न मदों में अर्जित आय की विभागवार समीक्षा की। उन्होंने राजस्व प्राप्ति के लिये निरंतर प्रयास करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभिन्न विभागों द्वारा आय वृद्धि के लिए किए गए प्रयासों, नवाचारों और अर्जित उपलब्धियों की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने वित्त वर्ष के अंत तक शत्-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने के निर्देश दिए। बैठक में जानकारी दी गई कि अनेक विभागों द्वारा वित्त वर्ष में निर्धारित राजस्व प्राप्ति के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सतत् प्रयास किए जा रहे हैं। इन क्षेत्रों में अग्रणी है मध्यप्रदेश बैठक में बताया गया कि वाणिज्य कर, खनिज, आबकारी, परिवहन, वन, ऊर्जा आदि क्षेत्रों में प्रदेश कर संग्रहण में अग्रणी है। विभागों ने आय के निर्धारित वार्षिक लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए वित्त वर्ष के प्रारंभिक पांच महीनों में महत्वपूर्ण प्रयास किए हैं। आयकर फाइल रिटर्न करने के क्षेत्र में देश में, मध्यप्रदेश कभी 14 वें क्रम पर था। इस कार्य में प्रदेश अब पांचवें स्थान पर आ गया है। बैठक में मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, मुख्यमंत्री कार्यालय में अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

सेवा के रंग’ से गूंजा विकसित भारत का संकल्प: अरुण साव

‘सेवा के रंग’ से जन-जन तक पहुंचा रहे विकसित भारत का संकल्प : उप मुख्यमंत्री अरुण साव 'सेवा, स्वच्छता और नारी सशक्तिकरण के संदेशों को रंगोली में उकेर रहीं बेटियां' पौने दो क्विंटल सामग्री से बनी 'विकसित लोरमी, विकसित भारत' की भव्य रंगोली, आठ स्कूलों की बेटियों ने भी दिखाया हुनर ‘सेवा के रंग’ में दिखी विकसित भारत की झलक, जल संरक्षण से नारी सशक्तिकरण का दिया संदेश रायपुर.   उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने आज लोरमी के मानस मंच में सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित विकासखंड स्तरीय ‘सेवा का रंग’ रंगोली का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने कलाकारों और विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई आकर्षक रंगोलियों की सराहना की। साव ने छात्राओं से चर्चा कर उनकी बनाई रंगोलियों के विषय, उद्देश्य और संदेश की विस्तार से जानकारी ली। छात्राओं ने उन्हें बताया कि उन्होंने जल संरक्षण, विकसित भारत, नारी सशक्तिकरण, डिजिटल इंडिया और स्वच्छ भारत जैसे विषयों को रंगोली के माध्यम से प्रस्तुत किया है। उप मुख्यमंत्री ने छात्राओं की रचनात्मकता और उत्साह की प्रशंसा की। उप मुख्यमंत्री साव ने कहा कि रंगोली के माध्यम से सेवा के भाव और विकसित भारत की कल्पना को सुंदर तरीके से अभिव्यक्त किया गया है। कोटा के रंगोली कलाकार रवि पैकरा ने करीब पौने दो क्विंटल सामग्री से विकसित भारत की भव्य रंगोली तैयार की है। यह रंगोली विकसित भारत के संकल्प को आकर्षक रूप में प्रस्तुत करती है। कार्यक्रम में आठ विद्यालयों की बेटियों ने अलग-अलग विषयों पर रंगोलियां बनाईं। जल संरक्षण से लेकर डिजिटल इंडिया, स्वच्छ भारत और नारी सशक्तीकरण तक सेवा के विभिन्न रंगों को रंगोली के माध्यम से जीवंत किया गया।  साव ने कहा कि सेवा संकल्प अभियान का उद्देश्य विकसित भारत की कल्पना को जन-जन तक पहुंचाना है। हर व्यक्ति विकसित भारत क्या है और इसके निर्माण में उसकी भूमिका क्या है, इससे जुड़े। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सेवा भाव और जनकल्याण के संदेश को भी जन-जन तक पहुंचाना इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य है।

राष्ट्रीय सेवा योजना दिवस पर ग्वालियर किले की सफाई, दिया स्वच्छता संदेश

ग्वालियर किले पर राष्ट्रीय सेवा योजना दिवस पर चलाया स्वच्छता अभियान  माधव महाविद्यालय के स्वयंसेवकों ने श्रमदान कर दिया स्वच्छता एवं धरोहर संरक्षण का संदेश ग्वालियर राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) दिवस के अवसर पर माधव महाविद्यालय, ग्वालियर के तत्वावधान में ऐतिहासिक ग्वालियर किले स्थित मानसिंह पैलेस परिसर में विशेष स्वच्छता अभियान आयोजित किया गया। अभियान का उद्देश्य ऐतिहासिक धरोहरों की स्वच्छता एवं संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के साथ ही युवाओं में सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्रसेवा की भावना को प्रोत्साहित करना था। इस अवसर पर बड़ी संख्या में NSS स्वयंसेवकों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए किले के विभिन्न क्षेत्रों में श्रमदान किया। स्वयंसेवकों ने परिसर में स्वच्छता कार्य करते हुए पर्यटकों एवं आम नागरिकों को ऐतिहासिक स्थलों को स्वच्छ रखने और उनकी गरिमा बनाए रखने का संदेश दिया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. शिव कुमार शर्मा, वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी डॉ. संजय कुमार पांडे तथा कार्यक्रम अधिकारी डॉ. सरिता दीक्षित विशेष रूप से उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त पूर्व कार्यक्रम अधिकारी डॉ. दीपक शिंदे तथा पूर्व NSS स्वयंसेवक अनिरुद्ध शर्मा दिलीप चौहान और *गरिमा झा ने भी कार्यक्रम में सहभागिता कर स्वयंसेवकों का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अतिथियों ने कहा कि NSS युवाओं को सेवा, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। हमारी ऐतिहासिक धरोहरें केवल अतीत की पहचान नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी सांस्कृतिक विरासत हैं। इनके संरक्षण में स्वच्छता की महत्वपूर्ण भूमिका है। स्वच्छता अभियान के माध्यम से स्वयंसेवकों ने यह संदेश दिया कि ऐतिहासिक धरोहरों की रक्षा केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का सामूहिक दायित्व है। अभियान ने किले की स्वच्छता में योगदान देने के साथ-साथ पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों के बीच भी स्वच्छता एवं धरोहर संरक्षण के प्रति जागरूकता का संदेश पहुंचाया। कार्यक्रम के अंत में NSS स्वयंसेवकों ने ऐतिहासिक स्थलों को स्वच्छ रखने तथा समाज में स्वच्छता और जिम्मेदार नागरिकता की भावना को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।

MP में ‘अपनी बस’ सेवा की वापसी, शुभारंभ की तैयारियां पूरी

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार की शाम गोविंदपुरा, बीएचईएल क्षेत्र में स्थित दशहरा मैदान पहुंचकर शुक्रवार को होने वाली "मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा'' के शुभारंभ कार्यक्रम की तैयारी का जायजा लिया। प्रदेश में शहरों-गांवों में डायरेक्ट बस कनेक्टिविटी की शुरुआत के शुभारंभ का कार्यक्रम भव्य रूप में होगा। इस कार्यक्रम की तैयारियां पूर्ण हो गई हैं।भोपाल, इंदौर समेत 7 शहरों में कुल 351 बसें चलेंगी। परिवहन विभाग ने इंटरसिटी सेवा के लिए 2 रुपए प्रति किलोमीटर किराया तय किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केंद्रीय सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी बसों को हरी झंडी दिखाकर प्रदेशवासियों को सौगात देंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर नई बसों की विशेषताओं की जानकारी प्राप्त की और बसों में बैठकर भी आधुनिक तकनीक और यात्रियों के लिए की गई सुविधाओं का जायजा लिया। परिवहन सचिव मनीष सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को कार्यक्रम से जुड़ी आवश्यक जानकारियों से अवगत करवाया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी शुक्रवार को भोपाल के बीएचईएल दशहरा मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में बसों को हरी झंडी दिखाएंगे। सेवा शुरू होने से पहले गुरुवार शाम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बीएचईएल दशहरा मैदान पहुंचकर कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने मंच, सभा स्थल और अन्य व्यवस्थाएं देखीं। इसके बाद बसों का निरीक्षण भी किया और ड्राइवरों से बातचीत की। इस दौरान परिवहन सचिव मनीष सिंह मौजूद रहे। सीएम बोले- बेहतर सुविधा मिलेगी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि 21 साल बाद प्रदेश में लोक परिवहन बस सेवा फिर शुरू होना ऐतिहासिक निर्णय है। आधुनिक ई-बसों और सुविधायुक्त बसों का नेटवर्क चरणबद्ध तरीके से नगरों और जिलों तक पहुंचाया जाएगा। इसके तहत बस स्टॉप, बस स्टैंड, इलेक्ट्रॉनिक सुविधाओं और बेहतर कंट्रोलिंग व्यवस्था विकसित की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य स्तरीय कार्यक्रम के लिए तैयार किए गए मंच, सभा स्थल सहित अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस अवसर पर भोपाल नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन सहित संबंधित विभागों के  उपस्थित थे। 7 शहरों की 351 बसों को दिखाई जाएगी हरी झंडी मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के शुभारंभ अवसर पर प्रदेश के 7 शहरों की 351 इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसों को एक साथ हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा। इसमें इंदौर, भोपाल, जबलपुर, रीवा, देवास, कटनी और भिंड शामिल हैं। शुरुआती चरण में इंदौर में 145 बसें जिसमें 50 इंटरसिटी और 95 इंट्रासिटी, भोपाल में 106 बसें जिसमें 23 इंटरसिटी और 83 इंट्रासिटी, जबलपुर के लिए 67 बसें जिसमें 14 इंटरसिटी और 53 इंट्रासिटी, रीवा में 18 इंटरसिटी बसें, देवास में 10 इंटरसिटी बसें, कटनी में 3 और भिंड में 2 इंटरसिटी बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा।  एक विभाग के अंडर में आएंगी बसें सुगम परिवहन सेवा के तहत अलग-अलग बस एजेंसियों की सेवाओं को एक व्यवस्था के तहत लाया जाएगा। भोपाल में भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड के साथ पीएम बस सेवा का संचालन किया जा रहा है। इसी तरह इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन समेत अन्य शहरों में भी बस सेवाएं एक विभाग के अंडर में होंगी। बसों को एकरूपता देने के लिए एक ही रंग में पेंट या स्टीकर लगाने का काम किया गया है। सोशल मीडिया पर इससे जुड़े फोटो और वीडियो सामने आने के बाद अधिकारियों ने बताया कि संबंधित बस एजेंसियों ने ही यह काम किया है। इलेक्ट्रिक बसें भी चलेंगी सुगम परिवहन सेवा में ईजी मायट्रिप की सहायक कंपनी ईएमटीईवी/ईजी ग्रीनमोबिलिटी की बसें भी शामिल हैं। कंपनी की 12 मीटर इलेक्ट्रिक सीटर बस को लंबी दूरी के सार्वजनिक परिवहन के लिए तैयार किया गया है। बस में प्रीमियम और एर्गोनॉमिक सीटिंग, व्यक्तिगत एयर वेंट और यात्रियों के लिए पर्याप्त बैठने की जगह दी गई है। प्रवेश और आवागमन को भी सुविधाजनक बनाने की व्यवस्था की गई है। पहले चरण में 7 शहरों में 351 बसों से शुभारंभ योजना के पहले चरण में 7 शहरों की 351 इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसों को एक साथ रवाना किया जाएगा। इसमें इंदौर, भोपाल, जबलपुर, रीवा, देवास, कटनी और भिंड शामिल हैं।  शुरुआती चरण में इंदौर में 145 बसें चलेंगी। इनमें 50 इंटरसिटी और 95 इंट्रासिटी रूट पर दौड़ेगी। भोपाल से 106 बसें (23 इंटरसिटी-83 इंट्रासिटी), जबलपुर के लिए 67 बसें (14 इंटरसिटी और 53 इंट्रासिटी), रीवा में 18 इंटरसिटी बसें, देवास में 10 इंटरसिटी बसें, कटनी में 3 और भिंड में 2 इंटरसिटी बसें दौड़ेंगी। 3-पीपीपी मॉडल.. ट्रेनिंग, इन्फ्रास्ट्रक्चर और मॉडर्न सुविधाएं बसों का संचालन पप्बिलक- प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर होगा। इसके लिए अलग- अलग एजेंसियों से 3 सेवाओं और सुविधाओं के विकास के लिए अनुबंध किए हैं। पहला- निजी ऑपरेटरों से अनुबंध किया। दूसरा, इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम के लिए अनुबंध किया है। इसके तहत बसों की लाइव लोकेशन, स्पीड, ड्राइविंग ट्रेनिंग आदि शामिल है। तीसरे मॉडल में इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए अनुबंध है। इसके तहत बस टर्मिनल, डिपो, बस स्टॉप और सड़क किनारे सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसके लिए पारदर्शी अनुबंध प्रणाली और प्रोत्साहन योजनाएं लागू की जाएंगी। सरकार की त्रिस्तरीय निगरानी बसों के सुगम संचालन के लिए सरकार ने राज्य स्तरीय मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एवं इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड कंपनी बनाई है। यह रणनीति और नीति तय करेगी। निगरानी करेगी। इसके अधीन 7 क्षेत्रीय कंपनियां इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, रीवा, उज्जैन और सागर में बनाई गई हैं। इसके साथ ही कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला स्तरीय परिवहन सलाहकार समिति भी बनाई है। यह जमीनी निगरानी करेगी। मुख्यमंत्री सुगम बस सेवा के तहत हर साल बढ़ाई जाएंगी 2,500 से 3,000 बसें। ऐसी सुविधाएं-सुरक्षा इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम से बसों का संचालन, लोकेशन, टाइमिंग की रियल टाइम निगरानी होगी। मप्र यात्री परिवहन इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड एवं 7 सहायक कंपनियों में कमांड-कंट्रोल सेंटर बनाए हैं। यात्रियों की सुरक्षा के लिए हर बस में सीसीटीवी कैमरे। इमरजेंसी में तुरंत सहायता देने के लिए पैनिक बटन। व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस से बस की लाइव लोकेशन। यात्रियों को बस संचालन एवं यात्रा से जुड़ी जानकारी देने पैसेंजर इन्फॉर्मेशन सिस्टम।

नशे पर जीरो टॉलरेंस, यूपी में कार्रवाई तेज

नशे के खिलाफ योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति, लगातार तेज हुई कार्रवाई उत्तर प्रदेश को वर्ष 2029 तक नशामुक्त बनाने का लक्ष्य: डीजीपी नशे के सौदागरों पर दोहरी मार, तस्करों का निरुद्धीकरण और अवैध संपत्ति जब्ती तेज 2026 में उत्तर प्रदेश में 78.5 करोड़ की अवैध संपत्ति जब्त की गई लखनऊ,   योगी सरकार की नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का असर उत्तर प्रदेश में लगातार दिखाई दे रहा है। यूपी पुलिस और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) ने नशीले पदार्थों के कारोबार में शामिल तस्करों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने के साथ उनकी अवैध संपत्तियों पर भी शिकंजा कसा है। मादक पदार्थों के तस्करों के विरुद्ध निरुद्धीकरण की कार्रवाई में तेजी आई है। वर्ष 2026 में 23 सितंबर तक प्रदेश में 71 तस्करों के खिलाफ पीआईटी एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई की गई। यूपी डीजीपी राजीव कृष्ण ने बताया कि नशे के खिलाफ कार्रवाई का उद्देश्य केवल तस्करों को गिरफ्तार करना नहीं, बल्कि उनके पूरे नेटवर्क को तोड़ना और नशे के कारोबार से अर्जित अवैध संपत्ति को जब्त करना भी है। उत्तर प्रदेश को वर्ष 2029 तक नशामुक्त बनाने के लक्ष्य की दिशा में कार्रवाई तेज की जा रही है। अवैध संपत्ति जब्ती में भी बड़ी कार्रवाई नशे के कारोबार से कमाई गई अवैध संपत्ति को जब्त कर तस्करों की आर्थिक कमर तोड़ने पर भी जोर दिया गया। वर्ष 2025 में 29 मामलों में करीब 11 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त हुई। वहीं वर्ष 2026 में 23 सितंबर तक 88 मामलों में करीब 78.5 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति जब्त की गई।  लगातार कार्रवाई से दिखा योगी सरकार का सख्त रुख योगी सरकार में पीआईटी एनडीपीएस एक्ट के तहत वर्ष 2024 में प्रदेश में सात तस्करों के खिलाफ कार्रवाई हुई, जिसमें एएनटीएफ की पांच कार्रवाई शामिल थीं। वर्ष 2025 में प्रदेश में 19 और वर्ष 2026 में 71 तस्करों के खिलाफ निरुद्धीकरण की कार्रवाई की गई। इनमें वर्ष 2026 में एएनटीएफ ने 33 तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की। प्रदेश में अवैध संपत्ति जब्ती के मामले में भी कार्रवाई लगातार बढ़ी है। वर्ष 2024 में एएनटीएफ ने चार मामलों में करीब एक करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की। वर्ष 2025 में 29 मामलों में करीब 11 करोड़ रुपये और वर्ष 2026 में 50 मामलों में करीब 10 करोड़ रुपये की कार्रवाई एएनटीएफ ने की। पुलिस और एएनटीएफ की संयुक्त कार्रवाई के आंकड़ों में वर्ष 2026 में कुल जब्ती करीब 78.5 करोड़ रुपये हुई। कुख्यात तस्करों के नेटवर्क पर सीधा प्रहार पीआईटी एनडीपीएस एक्ट के तहत गुरुमेल सिंह, भोला प्रसाद, संजीव राणा, विभोर राणा, शेरमणि पटेल और परमानंद उर्फ पप्पू जैसे कुख्यात मादक पदार्थ तस्करों के खिलाफ निरुद्धीकरण (गिरफ्तारी) की कार्रवाई की गई है। बॉक्स नशे के कारोबार की जड़ पर वार डीजीपी ने कहा कि हमारी कार्रवाई केवल तस्करों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। एनडीपीएस एक्ट की धारा 68(ई) और 68(एफ) के तहत नशीले पदार्थों की तस्करी से अर्जित अवैध संपत्ति को पहले अस्थायी रूप से फ्रीज और जांच व सुनवाई के बाद स्थायी रूप से जब्त किया जा रहा है। इसके जरिए तस्करों को आर्थिक रूप से कमजोर भी किया जा रहा है।

मेरठ में खेती की चुनौतियों पर हुआ मंथन, गन्ने से बासमती तक, कृषि मुद्दों पर चर्चा

गन्ने से बासमती तक, खेती की चुनौतियों पर मेरठ में हुआ मंथन -किसान कारवां 2.0 के दूसरे पड़ाव में कृषिवीरों को किया गया सम्मानित -खेती किसानी की क्विज में 15 किसानों ने जीते एक-एक हजार रुपये मेरठ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों से खेती की मौजूदा चुनौतियों, तकनीक और बाजार से जुड़े मुद्दों पर सीधे संवाद के लिए शुरू किया गया किसान कारवां 2.0 गुरुवार को मेरठ पहुंचा। आईआईएमटी विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में आयोजित क्षेत्रीय किसान महासभा में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया। किसान तक और उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से हुए आयोजन में गन्ना, बासमती, फसल सुरक्षा, प्राकृतिक खेती और आधुनिक कृषि तकनीक जैसे विषयों पर विशेषज्ञों और किसानों ने विचार साझा किए।कार्यक्रम की शुरुआत सुबह करीब 10 बजे हुई। कृषि से जुड़े संदेशों को मनोरंजन के माध्यम से किसानों तक पहुंचाने के लिए जादूगर सलमान ने कृषि विषयों पर आधारित प्रस्तुति दी। जादू के जरिए खेती से जुड़े संदेशों को रोचक अंदाज में पेश किया गया। बासमती को बाजार और निर्यात से जोड़ने पर जोर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बासमती धान की खेती की विशेष पहचान को देखते हुए ‘बासमती के बादशाह-खुशबू से बाजार तक’ विषय पर पैनल चर्चा हुई। किसान तक के संपादक ओमप्रकाश ने इसका संचालन किया। बीईडीएफ के निदेशक डॉ. रितेश शर्मा, प्रगतिशील किसान प्रीतम सिंह और विनोद सैनी ने चर्चा में हिस्सा लिया। डॉ. रितेश शर्मा ने बेहतर बाजार, मजबूत सप्लाई चेन और किसानों को सीधे निर्यात से जोड़ने की संभावनाओं पर जानकारी दी। हापुड़ को बासमती निर्यात और बेहतर मार्केट एक्सेस के संभावित मॉडल हब के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। गन्ना भुगतान से फसल रोग तक उठे सवाल पश्चिमी यूपी की कृषि अर्थव्यवस्था में गन्ने की भूमिका को देखते हुए ‘गन्ने का गढ़—मिठास के साथ चुनौतियों का हल’ विषय पर अलग सत्र हुआ। किसान तक के वरिष्ठ संवाददाता जेपी सिंह के संचालन में हुए पैनल में गुड़ उत्पादक किसान केपी सिंह, किसान नेता धर्मेंद्र मलिक, प्रगतिशील गन्ना किसान ओमकार त्यागी और आईसीआर-आईआईएसआर के कृषि वैज्ञानिक रघुवीर सिंह शामिल हुए। चर्चा में गन्ना भुगतान व्यवस्था में सुधार, रेड रॉट जैसी बीमारियों से बचाव, रोग प्रतिरोधी नई किस्मों को किसानों तक पहुंचाने और मशीनों से गन्ने की सूखी पत्तियों के बेहतर प्रबंधन के उपायों पर मंथन किया गया। खेती में बढ़ते जोखिम के बीच ‘खेती की सुरक्षा—बीमा, तकनीक और कुदरत का साथ’ विषय पर भी विशेषज्ञों ने चर्चा की। किसान तक की उप संपादक हिमानी दीवान ने सत्र का संचालन किया। इसमें जैविक किसान अनु त्यागी, हेड-पोटैटो सेंटर मोडीपुरम के डॉ. आर.के. सिंह, केवीके शामली के डॉ. संदीप चौधरी और कृषि निदेशक प्रमोद सिरोही शामिल रहे। फसल बीमा की पहुंच बढ़ाने, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने तथा सोलर पंप, ड्रोन और नैनो यूरिया जैसी तकनीकों को किसानों तक प्रभावी तरीके से पहुंचाने पर विचार हुआ। क्विज में 15 किसानों को मिला नकद पुरस्कार किसान महासभा में किसानों की भागीदारी बढ़ाने के लिए खेती-किसानी पर आधारित क्विज भी कराई गई। किसानों ने क्यूआर कोड स्कैन कर इसमें हिस्सा लिया। तीन क्विज में प्रत्येक से पांच विजेताओं का चयन हुआ। इस तरह कुल 15 किसानों को एक-एक हजार रुपये का नकद पुरस्कार दिया गया। पश्चिमी यूपी के 10 किसान बने ‘कृषिवीर’ किसान कारवां 2.0 के तहत प्रदेश के नौ कृषि जलवायु क्षेत्रों में क्षेत्रीय किसान महासभाओं का आयोजन किया जा रहा है। मेरठ में आयोजित महासभा में पश्चिमी क्षेत्र के विभिन्न जिलों से चयनित 10 किसानों को ‘कृषिवीर’ सम्मान दिया गया। सम्मानित किसानों में मंजू कश्यप, ओमवीर सिंह, प्रीतम सिंह, विनोद सैनी, नीलम त्यागी, नीरजा शर्मा, श्याम सिंह, ठाकुर धर्मपाल, जुनैद फरीदी अली और विनोद पवार शामिल रहे। सभी को प्रशस्ति पत्र और ट्रॉफी प्रदान की गई। इस दौरान किसानों की समस्याओं और जमीनी जरूरतों को संबंधित स्तर तक पहुंचाने के लिए 20 सदस्यीय किसान परिषद का गठन भी किया गया। इसमें कृषि अधिकारियों और कृषि वैज्ञानिकों के साथ प्रगतिशील किसानों को शामिल किया गया है। मेरठ में हुए किसान कारवां 2.0 के दूसरे पड़ाव में पश्चिमी यूपी की खेती की चुनौतियों के साथ किसानों की सफलता, नई कृषि तकनीक और बेहतर बाजार से जुड़ने के अवसरों पर चर्चा हुई। गन्ना और बासमती की पारंपरिक ताकत को आधुनिक तकनीक और बाजार से जोड़ना आयोजन का प्रमुख केंद्र रहा।

भाजपा विधायक का निधन, मुख्यमंत्री ने जताया शोक

भाजपा विधायक का निधन, मुख्यमंत्री ने जताया शोक आगरा की फतेहाबाद विधानसभा सीट से निर्वाचित हुए थे विधायक छोटेलाल वर्मा  लखनऊ आगरा की फतेहाबाद सीट से भारतीय जनता पार्टी के विधायक छोटेलाल वर्मा का गुरुवार को निधन हो गया। उनके निधन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शोक जताया।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया अकाउंट 'एक्स' पर पोस्ट कर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने लिखा कि जनपद आगरा के फतेहाबाद विधानसभा क्षेत्र के विधायक छोटे लाल वर्मा जी का निधन अत्यंत दुःखद है। विनम्र श्रद्धांजलि। मुख्यमंत्री ने प्रभु श्री राम से प्रार्थना की कि दिवंगत पुण्यात्मा को सद्गति तथा शोकाकुल परिजनों को यह अथाह दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें। ॐ शांति!

वेटिंग लिस्ट में नंबर-1 अभ्यर्थी को मिलेगी नौकरी, पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट का आदेश

  चंडीगढ़  पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब वक्फ बोर्ड में चपरासी पद की भर्ती से जुड़े मामले में फैसला सुनाते हुए वेटिंग लिस्ट में पहले स्थान पर रहे अभ्यर्थी को नियुक्ति के लिए विचार करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि जब चयनित अभ्यर्थियों में से कोई उम्मीदवार उपलब्ध पद पर नियुक्ति ग्रहण नहीं करता है और उसकी जगह रिक्ति बनी रहती है, तो मेरिट के अनुसार वेटिंग लिस्ट के अगले उम्मीदवार को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। छह साल पहले शुरू हुई भर्ती की प्रक्रिया जस्टिस नामित कुमार की पीठ ने यह आदेश प्रदीप कुमार की याचिका पर सुनाया। पंजाब वक्फ बोर्ड ने 30 अगस्त 2020 को विभिन्न पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी, जिसमें चपरासी के 34 पद शामिल थे। बाद में इन पदों की संख्या घटाकर 24 कर दी गई। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद 24 उम्मीदवारों का चयन किया गया, जबकि पांच अभ्यर्थियों को वेटिंग लिस्ट में रखा गया। प्रदीप कुमार वेटिंग लिस्ट में पहले नंबर पर थे। याचिकाकर्ता के अनुसार चयनित 24 उम्मीदवारों में से केवल 23 ने चपरासी पद पर ज्वाइन किया। एक चयनित उम्मीदवार करनवीर सिंह ने चपरासी के पद पर ज्वाइन नहीं किया, बल्कि किसी अन्य पद पर नियुक्त हुआ। सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी में भी 24 में से 23 नियुक्तियां चपरासी पद पर होने और बाद में चार लोगों के इस्तीफा देने की बात सामने आई थी। इस तरह पांच पद रिक्त बताए गए थे। वेटिंग लिस्ट की अवधि एक वर्ष थी पंजाब वक्फ बोर्ड ने हाई कोर्ट में दलील दी कि वेटिंग लिस्ट की अवधि एक वर्ष थी और याचिकाकर्ता की ओर से प्रस्तुत अभ्यावेदन दिसंबर 2022 में प्राप्त हुआ था। इसी आधार पर उसकी नियुक्ति के दावे को फरवरी 2023 में खारिज कर दिया गया था। हाई कोर्ट ने हालांकि पूर्व के न्यायिक फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि वेटिंग लिस्ट में नाम होने मात्र से नियुक्ति का स्वत अधिकार नहीं बनता, लेकिन नियुक्ति प्राधिकारी को उपलब्ध रिक्ति और अभ्यर्थी की मेरिट को नजरअंदाज कर मनमाने ढंग से कार्रवाई करने की छूट भी नहीं है। अदालत ने कहा कि रिक्ति उपलब्ध होने पर मेरिट के अनुसार अगले अभ्यर्थी को नियुक्ति की पेशकश की जानी चाहिए। प्रदीप कुमार की नियुक्ति का दावा खारिज वाला आदेश रद हाई कोर्ट ने प्रदीप कुमार की नियुक्ति का दावा खारिज करने वाला आदेश रद कर दिया। पंजाब वक्फ बोर्ड को निर्देश दिया गया कि वह चपरासी पद पर उनकी नियुक्ति के मामले पर विचार करे और अन्य 23 उम्मीदवारों को नियुक्ति दिए जाने की तारीख से वरिष्ठता, वेतन निर्धारण समेत सभी काल्पनिक लाभ देने पर निर्णय ले। यह पूरी कार्रवाई आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के दो महीने के भीतर करनी होगी।  

Wife Medical Test: गवाही पूरी होने के बाद मेडिकल जांच की मांग खारिज, हाईकोर्ट का फैसला

ग्वालियर ग्वालियर खंडपीठ की सिंगल बेंच ने वैवाहिक विवाद से जुड़े मामले में ऐसा फैसला सुनाया है जिसने तलाक की कार्यवाही को लेकर सवाल खड़े कर दिए है। हाईकोर्ट में एक मामला पहुंचा जहां, निचली कोर्ट ने तलाक की कार्यवाही के दौरान महिला का मेडिकल टेस्ट कराने की अनुमति दे दी थी। इस मामले में जरुरी बात ये है कि कोर्ट द्वारा यह अनुमति तब दी गई थी जब, पति-पत्नी अपनी गवाही दे चुके थे और साक्ष्य की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी। पत्नी ने निचली अदालत के इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनती देते हुए अपनी दलील रखी। मेडिकल टेस्ट की अनुमति नहीं दी सकती- हाईकोर्ट का फैसला हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने वैवाहिक विवाद और शारीरिक स्वायत्तता से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के ने अशोकनगर जिला अदालत के उस आदेश को निरस्त कर दिया है, जिसके तहत तलाक के मुकदमे में पत्नी का मेडिकल परीक्षण कराने की अनुमति दी गई थी। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब दोनों पक्षों की गवाही पूरी हो चुकी हो और मामला अंतिम बहस के स्तर पर पहुंच गया हो, तब किसी पक्षकार को अपनी खामियां छिपाने या नए सबूत जुटाने के लिए मेडिकल टेस्ट की अनुमति नहीं दी जा सकती। यह है मामला याचिकाकर्ता का विवाह 28 अप्रैल 2004 को हुआ था। जुलाई 2011 में अलग होने के बाद पति ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 के तहत क्रूरता का आरोप लगाते हुए तलाक की अर्जी दाखिल की। पति का आरोप था कि पत्नी के तीन ऑपरेशन हो चुके है और शारीरिक स्थिति के कारण वैवाहिक संबंध सामान्य नहीं है। वहीं, पत्नी ने इन आरोपों को नकारते हुए साथ रहने की इच्छा जताई थी और बताया कि शादी के बाद अपेंडिक्स का इलाज हुआ था, जिसकी जानकारी पति को पहले से थी। निचली अदालत दी थे अनुमति, पत्नी ने दी चुनौती निचली अदालत में दोनों पक्षों की गवाहियां और साक्ष्य दर्ज होने के बाद जब केस अंतिम बहस के लिए तय हुआ, तब 22 जून 2012 को पति ने धारा 151 सीपीसी के तहत पत्नी के मेडिकल परीक्षण के लिए आवेदन दिया। जिला अदालत अशोकनगर ने 2 जुलाई 2012 को इस आवेदन को स्वीकार कर लिया था, जिसके खिलाफ पत्नी ने अधिवक्ता मधुर भार्गव के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की।