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टाइगर टेरिटरी में खनन की मंजूरी, 2008 से एक भी कंजर्वेशन प्लान पास नहीं

जयपुर  राजस्थान के बाघ अभयारण्यों, कॉरिडोर और इको-सेंसिटिव जोन में खनन की मंजूरी के बीच वन्यजीव संरक्षण की व्यवस्था सवालों में है। विभागीय दस्तावेजों के अनुसार, 2008 से अब तक चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन कार्यालय ने एक भी 'वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन प्लान' (डब्ल्यूसीपी) को अंतिम मंजूरी नहीं दी। इस वजह से वन्यजीव विकास, हैबिटेट सुधार और वाटर होल निर्माण के लिए करीब 300 करोड़ रुपए फाइलों में अटके हैं। पर्यावरण मंजूरी देने वाले राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (सिया) ने इस बारे में वन विभाग को कई पत्र लिखे, लेकिन कोई ठोस जवाब नहीं मिला। दूसरी ओर, खदान मालिकों को एडवांस फंड जमा करने की बाध्यता से छूट दे दी गई। आदेश वापस लिया सिया ने 17 जुलाई 2025 को वन्यजीव संरक्षण मद की राशि अग्रिम जमा कराना अनिवार्य किया था और 3 नवंबर 2025 को नया कार्यालय आदेश (संख्या 1361) जारी कर यह आदेश वापस ले लिया। अब कंपनियों को सरकार को एडवांस पैसा नहीं देना है। उन्हें सिर्फ 'पर्यावरण प्रबंधन योजना' में लिखकर देना है कि वन्यजीवों के लिए बजट रखा गया है। प्रोजेक्ट को मंजूरी न मिलने पर कंपनी पर पैसा खर्च करने की बाध्यता नहीं रहती और कंपनियां इसी का फायदा उठाती हैं। चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन केसी अरुण प्रसाद ने कहा, हम इन सभी कंजर्वेशन प्लान्स को रिवाइज कर रहे हैं। इनमें जरूरी संशोधन ला रहे हैं, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी और व्यावहारिक बन सके। टाइगर टेरिटरी-इको-सेंसिटिव जोन में अनुमति जिला स्तरीय कमेटियों (डीईआईएए) ने शुरुआत में इको-सेंसिटिव जोन और टाइगर टेरिटरी के दायरे में 50 से 60 माइनिंग प्रोजेक्ट्स को खनन की अनुमति दे दी थी। सिया ने बाद में इन फाइलों की पुनर्समीक्षा की, तब यह चूक पकड़ में आई। सूत्रों के अनुसार, अब भी करीब 500 खदानें बिना उचित अनुमति के चल रही हैं। ग्राउंड स्टडी की जगह रेडीमेड रिपोर्ट राजस्थान में किसी भी खनन या प्रोजेक्ट को पर्यावरणीय मंजूरी से पहले केंद्र के पोर्टल से टीओआर जारी होता है। इसकी अहम शर्त है कि प्रोजेक्ट के 10 किमी दायरे में वन्यजीवों का अध्ययन कराया जाए, जिसे संबंधित डीएफओ सत्यापित करता है। इसके बाद कंजर्वेशन प्लान बनता है, जिसे चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन से मंजूर कराना होता है। मंजूरी के बाद ही कंपनी को अधिकतम राशि जमा करनी होती है। अधिकांश मामलों में ग्राउंड रिपोर्ट के बजाय कंसल्टेंट से तैयार रिपोर्ट ली जाती है। कागजात के मुताबिक, फाइलें डीएफओ स्तर पर सत्यापन के लिए जाती हैं और वहीं अटक जाती हैं। मुख्यालय स्तर पर कोई फॉलो-अप नहीं होता। कुछ अधिकारियों के अनुसार, सीमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर की बड़ी कंपनियां अपने प्रभाव से काम जल्दी करा लेती हैं, जबकि छोटे खननकर्ताओं के प्लान पास नहीं होते।

जमुई छात्रा कांड पर बड़ा ऐलान, स्पीडी ट्रायल से 1 महीने में सजा

जमुई जमुई कांड की पीड़िता ने अपने माता-पिता और परिवार के लोगों के साथ गुरुवार को लोकसेवक आवास में मुख्यमंत्री से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने लोक सेवक आवास में पीड़िता और उसके परिवार से बात की। बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने उक्त घट की पूरी जानकारी ली और दुख व्यक्त किया और परिवार को हरसंभव सहायता का भरोसा जताया। साथ ही दोषियों को जल्द कानूनी दंड दिलाने का भरोसा दिया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि जमुई में छात्रा के साथ हुई घटना के मामले में दोषियों के खिलाफ स्पीडी ट्रायल के माध्यम से सुनवाई करा एक माह में सजा दिलाई जायेगी। मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद पीड़िता के माता-पिता ने पत्रकारों से बातचीत में सरकार की कार्रवाई पर संतोष जताया। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी के साथ बहुत गलत व्यवहार किया गया लेकिन, सरकार और प्रशासन ने काफी तेजी से कार्रवाई की। जिन लोगों ने बेटी को प्रताड़ित किया उनके खिलाफ कार्रवाई हो रही है। मुख्य आरोपी नंदन यादव के एनकाउंटर पर उन्होंने कहा कि इसकी जानकारी मिली तो खुशी मिली कि बदमाशों को सीख मिलेगी जो बेटियों पर बुरी नजर रखते हैं। किसी की बेटी के साथ ऐसा नहीं होना चाहिए। कार्रवाई होने के बाद अब डर नहीं लगता है। सीएम बुलाए थे। उनसे मिलकर काफी अच्छा लगा। सीएम ने मेरी बेटी को अपनी बेटी कहा पीड़िता की मां ने बताया कि मुख्यमंत्री ने मेरी बेटी को अपनी बेटी कहा। उन्होंने बिना डर भय के पढ़ाई करने और आगे बढ़ने की सीख दी है। इससे बेटी का मनोबल बढ़ा और वह पहले से ठीक हुई। परिजनों को सीएम ने आश्वासन दिया है कि कोई भी दिक्कत होगी तो सरकार उनके साथ है। बच्ची के पिता ने कहा कि जो भी आरोपी गिरफ्तार हुए हैं उन्हें कठोर सजा मिलना चाहिए। मामला सामने आने पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की जिससे कानून व्यवस्था पर भरोसा बढ़ा है। सीएम पर विश्वास करें परिजनों ने यह भी कहा कि सरकार सबकी सुनती है और कार्रवाई करती है। सम्राट चौधरी ऐसे मुख्यमंत्री हैं जो गलत करने वालों को सजा देते हैं। आमजनों को भी उनपर भरोसा करना चाहिए। वे सबकी बात अच्छे से सुनते हैं और समाधान करते हैं। 225 आईडी पर केस दर्ज जमुई छात्रा से छेड़खानी मामले में कुल 225 सोशल मीडिया आईडी पर भी मामला दर्ज किया है। साथ ही तीन लोगों को हिरासत में भी लिया गया है। जमुई के एसपी और डीएम ने कहा कि स्पीडी ट्रायल के लिए कोर्ट से समन्वय करने को एसडीपीओ और डीडीसी को नोडल अधिकारी बनाया गया है। इस केस में स्पीडी ट्रायल से सजा दिलाने की बात जमुई डीएम नवीन ने कही है। इसके लिए एक महिला आईएएस और महिला आईपीएस को जिम्मा दिया गया है कि कोर्ट से आग्रह करके 15 से 20 दिनों में सजा दिलाने का प्रयास करें।

अब लखनऊ में कट्टा-बम नहीं, बनेंगी ब्रह्मोस मिसाइल: CM योगी

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को कहा कि पिछली सरकारों की तरह अब लखनऊ में कट्टा और बम नहीं, बल्कि ब्रह्मोस मिसाइल बन रही है। एयरपोर्ट और मेट्रो का विस्तार हो रहा है तथा आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर लखनऊ को नई पहचान दे रहा है। दो नई योजनाओं से 10 लाख लोगों को घर की सौगात मिलेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगरा एक्सप्रेसवे के पास दोना गांव में 12 हजार करोड़ से 10,680 एकड़ में विकसित होने वाली लखनऊ विकास प्राधिकरण की वरुण विहार और नैमिष नगर आवासीय योजनाओं का भूमिपूजन करने के साथ भूखंडों के पंजीकरण का शुभारंभ किया। उन्होंने 2,166 करोड़ से प्रस्तावित पांच बहुमंजिला अपार्टमेंट का भी शिलान्यास किया। योजनाओं का लेआउट देखकर अधिकारियों को कई सुझाव दिए। अनियोजित विकास के परिणाम गलत मुख्यमंत्री ने कहा कि अनियोजित विकास के परिणाम गलत होते हैं। लोग जहां-तहां जमीन खरीद लेते थे, पर वहां सड़क, बिजली और पानी की व्यवस्था नहीं होती थी। जलभराव से लोगों को नारकीय जीवन व्यतीत करना पड़ता था। जमीन किसी दबंग या गुंडे को बेच दिए जाने पर नई समस्या खड़ी हो जाती थी। इसलिए बढ़ती आबादी के लिए नियोजित शहरी विकास आवश्यक है। गत वर्ष 785 एकड़ में अनंत नगर आवासीय परियोजना को 23 वर्ष बाद आगे बढ़ाया गया। अब दो बड़ी परियोजनाएं शुरू हो रही हैं। किसान पथ, ग्रीन कॉरिडोर दे रहे नई पहचान योगी ने कहा कि लखनऊ शिक्षा, हेल्थ केयर, आधुनिक तकनीक और मैन्युफैक्चरिंग के हब के रूप में आगे बढ़ा है। टाटा की ऑटोमोबाइल फैक्टरी, अशोक लीलैंड का इलेक्ट्रिक व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट, किसान पथ, ग्रीन कॉरिडोर और आईटी सिटी इसे नई पहचान दे रहे हैं। विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर, पब्लिक मोबिलिटी, शिक्षा, पर्यटन और बेहतर कनेक्टिविटी पर काम होगा। एससीआर से होगा छह जिलों का विकास सीएम ने कहा कि वरुण विहार 6,500 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में विकसित होगा, जहां छह लाख से अधिक लोगों के लिए आवासीय सुविधा होगी। नैमिष नगर 4,100 एकड़ में विकसित होगा और चार लाख से अधिक लोग इसका लाभ ले सकेंगे। लखनऊ को महानगर या जनपद तक सीमित न रख कर स्टेट कैपिटल रीजन के रूप में व्यवस्थित विकास किया जा रहा है। लखनऊ के साथ उन्नाव, हरदोई, सीतापुर, बाराबंकी व रायबरेली के क्षेत्रीय विकास की योजना बन रही है। वरुण देव-ऋषि की प्रतिमा लगेगी महत्वाकांक्षी आवासीय योजनाओं वरुण विहार और नैमिष नगर को उनकी विशिष्ट पहचान देने की तैयारी भी शुरू हो गई है। गुरुवार को आयोजित भूमि पूजन कार्यक्रम के दौरान दोनों योजनाओं के लिए तैयार कराई गई विशेष प्रतिमाएं कार्यक्रम स्थल पर प्रदर्शित की गईं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इनका अवलोकन किया और योजनाओं की अवधारणा से जुड़ी जानकारी प्राप्त की। वरुण विहार योजना में जल और जीवन के प्रतीक माने जाने वाले वरुण देव की प्रतिमा स्थापित की जाएगी, जबकि नैमिष नगर योजना के प्रवेश द्वार पर ऋषि की प्रतिमा लगाई जाएगी। इन प्रतिमाओं के माध्यम से दोनों योजनाओं की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को प्रमुखता से प्रदर्शित करने का प्रयास किया जा रहा है। फिलहाल प्रतिमाओं को कार्यक्रम स्थल पर अस्थायी रूप से रखा गया था ताकि आगंतुक अवलोकन कर सकें। भूमिपूजन में 50 हजार से ज्यादा लोग पहुंचे आवासीय योजनाओं के भूमिपूजन कार्यक्रम में 50 हजार से ज्यादा लोग पहुंचे। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा कि पहले किसी आवासीय योजना को लाने में 20 साल तक लग जाते थे, लेकिन अब स्थिति बदल गई है। अब एक साल भी नहीं लगता और नई योजनाएं सामने आ जाती हैं। एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार ने सीएम को योजनाओं की जानकारी दी। अदिति अपार्टमेंट में सबसे ज्यादा 1932 फ्लैट होंगे पांचों योजनाओं में सबसे अधिक फ्लैट अनंत नगर में प्रस्तावित अदिति अपार्टमेंट में 1932 प्रस्तावित हैं। गोमती नगर के विराज खंड में लेक व्यू अपार्टमेंट में 646 फ्लैट बनेंगे। शारदा नगर विस्तार में बागेश्वरी अपार्टमेंट में 824, ऐशबाग स्क्वायर में 384 फ्लैट, बसंत कुंज स्थित पार्क व्यू अपार्टमेंट में 364 फ्लैट प्रस्तावित हैं। एक माह तक खुला रहेगा भूखंडों का पंजीकरण दोनों योजनाओं में पंजीकरण 24 अक्तूबर तक खुला रहेगा। इच्छुक लोग अपनी जरूरत और बजट के अनुसार विभिन्न आकार के भूखंडों के लिए आवेदन कर सकेंगे। नैमिष नगर में 72 वर्गमीटर से 450 वर्गमीटर तक तथा वरुण विहार में 112.5 वर्गमीटर से 450 वर्गमीटर तक के भूखंड उपलब्ध हैं। भूमि पूजन के साथ ही पंजीकरण शुरू होने से लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। 14 हजार करोड़ से ज्यादा की परियोजना का शुभारंभ टाउनशिप और अपार्टमेंट परियोजनाओं को मिलाकर कुल 14,166 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शुभारंभ हुआ, जिन्हें राजधानी के साथ प्रदेश भर के लोगों की आवासीय जरूरतों को पूरा करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। मुख्यमन्त्री के शुभारम्भ करने के साथ दोनों टाउनशिप में 4526 भूखंडों के लिए पंजीकरण शुरू हो गया। नैमिष नगर और वरुण विहार परियोजनाएं करीब 10,680 एकड़ क्षेत्र में विकसित की जा रही हैं। इनके विकास पर लगभग 12,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। राजधानी विकास का प्रमुख केंद्र बनेंगी योजनाएं एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार के अनुसार दोनों परियोजनाएं आधुनिक आवासीय सुविधाओं के साथ विकसित की जा रही हैं और भविष्य में राजधानी के विस्तार का प्रमुख केंद्र बनेंगी। मुख्यमंत्री के भूमि पूजन के साथ ही दोनों योजनाओं में भूखंडों के लिए पंजीकरण भी शुरू कर दिया गया। वरुण विहार में 2,847 तथा नैमिष नगर में 1,679 भूखंडों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इस प्रकार कुल 4,526 भूखंडों के लिए पंजीकरण खोला गया है। वरुण विहार में 2800 और नैमिष नगर में 3800 रुपए प्रतिवर्ग फुट की दर से प्लॉट मिलेगा। कनेक्टिविटी पर सबसे ज्यादा जोर दोनों योजनाओं की सबसे बड़ी विशेषता उनकी कनेक्टिविटी मानी जा रही है। नैमिष नगर सीतापुर रोड पर भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) के निकट स्थित है। एलडीए वरुण विहार को सीधे आगरा एक्सप्रेसवे से जोड़ने की दिशा में भी काम कर रहा है। इसके लिए यूपीडा को पत्र भेजा जा चुका है। भविष्य के सुनियोजित विस्तार की आधारशिला हैं आवासीय योजनाएं सरोजनी नगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में उनके विधानसभा क्षेत्र में 5,700 कार्य और 48 हजार करोड़ के कार्य धरातल पर उतर रहे हैं। वरुण विहार और नैमिष नगर लखनऊ के भविष्य के सुनियोजित … Read more

छत्तीसगढ़ के गांव बने विदेशी पर्यटकों की पसंद, ग्रामीण पर्यटन मॉडल दे रहा नई पहचान

विदेशी पर्यटकों को आकर्षित कर रहा छत्तीसगढ़ का ग्रामीण पर्यटन मॉडल लमना विलेज स्टे में ब्रिटेन के अतिथियों ने ग्रामीण जीवन, स्थानीय संस्कृति और हाट-बाजार का लिया अनुभव लमना में दिखी संस्कृति और अपनत्व की खूबसूरत तस्वीर रायपुर छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, ग्रामीण जीवनशैली, लोक संस्कृति और आत्मीय आतिथ्य अब देश ही नहीं, बल्कि विदेशी पर्यटकों को भी आकर्षित कर रहा है। पर्यटन के बदलते स्वरूप में अब पर्यटक केवल बड़े शहरों और प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे गांवों की मिट्टी की खुशबू, स्थानीय खान-पान, परंपराओं, हस्तशिल्प और ग्रामीण जीवन को करीब से अनुभव करने में भी रुचि ले रहे हैं। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के लमना विलेज स्टे में ब्रिटेन से पहुंचे पर्यटकों का प्रवास इसी बदलती पर्यटन तस्वीर की जीवंत मिसाल है। ब्रिटेन से आए श्री फ्रैंक रोजर मार्सटन और श्रीमती जेनिफर मार्गरेट रेनफ्रू मार्सटन का लमना गांव पहुंचने पर ग्रामीणो ने पारंपरिक आत्मीयता के साथ तिलक लगाकर तथा ढोल-नगाड़ों की थाप के बीच स्वागत किया। विदेशी अतिथियों ने भी ग्रामीणों के इस आत्मीय स्वागत का आनंद लिया और स्थानीय लोगों के साथ सहजता से घुल-मिलकर छत्तीसगढ़ की ग्रामीण संस्कृति को करीब से महसूस किया। लमना विलेज स्टे में अतिथियों का  अनुभव केवल ठहरने तक सीमित नहीं रहा। उन्हें गांव की गलियों, खेत-खलिहानों, पारंपरिक परिवेश और स्थानीय जीवन से परिचित कराने के लिए ‘विलेज वॉक’ कराया गया। इस दौरान अतिथियों ने ग्रामीणों से संवाद किया, स्थानीय जीवनशैली को समझा और गांव के सहज वातावरण का आनंद लिया।  अतिथियों ने ग्रामीण परिवारों, बच्चों, महिलाओं और स्थानीय लोगों के साथ आत्मीय संवाद भी किया।  ग्रामीण हाट बना खास आकर्षण लमना प्रवास के दौरान स्थानीय ग्रामीण हाट का भ्रमण विदेशी मेहमानों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। हाट में उन्होंने स्थानीय दुकानदारों और ग्रामीणों से बातचीत की तथा मिट्टी के बर्तन, बांस से बने सामान, घरेलू उपयोग की वस्तुएं, स्थानीय खाद्य सामग्री, सब्जियों और अन्य ग्रामीण उत्पादों को करीब से देखा। ग्रामीण बाजार की चहल-पहल, स्थानीय उत्पादों की विविधता और लोगों के सहज व्यवहार ने अतिथियों को भारतीय गांव के वास्तविक जीवन का अनुभव कराया।   ग्रामीण जीवन से सीधे जुड़ने का अनुभव लमना विलेज स्टे की खासियत यह है कि यहां पर्यटक केवल किसी स्थान को देखने नहीं आते, बल्कि स्थानीय जीवन का हिस्सा बनकर उसे महसूस करते हैं। ब्रिटिश अतिथियों ने ग्रामीण परिवेश में समय बिताया, स्थानीय लोगों के साथ बैठकर बातचीत की और पारंपरिक ग्रामीण वातावरण को नजदीक से जाना। गांव की सादगी, प्राकृतिक परिवेश और लोगों की सहज आत्मीयता ने उनके प्रवास को एक अलग तरह का अनुभव दिया। छत्तीसगढ़ के पर्यटन पहचान में जुड़ रहा नया अध्याय छत्तीसगढ़ में पर्यटन अब प्रकृति और दर्शनीय स्थलों से आगे बढ़कर अनुभव आधारित पर्यटन की ओर विस्तार कर रहा है। छत्तीसगढ़ में प्रकृति, जनजातीय संस्कृति, हस्तशिल्प, होमस्टे और इको-टूरिज्म को पर्यटन अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में प्रयास हो रहे हैं। इससे स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार और उद्यमिता के अवसरों को जोड़ने वाले पर्यटन मॉडल को महत्व मिल रहा है।  प्रकृति, संस्कृति और ग्रामीण आतिथ्य का संगम है लमना गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में मैकल पर्वत श्रृंखला, जंगल, जलप्रपात, धार्मिक स्थल और प्राकृतिक पर्यटन की विविध संभावनाएं मौजूद हैं। शिवघाट मनौरा, जलेश्वर धाम, लक्ष्मणधारा, झोजा जलप्रपात और धनपुर सहित अनेक प्राकृतिक एवं धार्मिक स्थल शामिल हैं।  लमना विलेज स्टे जैसे ग्रामीण पर्यटन केंद्र पर्यटकों को  प्रकृति और स्थानीय जीवन से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। बस्तर से लमना तक—छत्तीसगढ़ में अनुभव आधारित पर्यटन की बढ़ती तस्वीर पर्यटक अब केवल पर्यटन स्थलों के दर्शन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्थानीय जीवन, खान-पान, हस्तशिल्प, लोक संस्कृति और समुदाय के साथ जुड़ने वाले अनुभवों को भी महत्व दे रहे हैं। होमस्टे और ग्रामीण पर्यटन इस बदलाव की महत्वपूर्ण कड़ी बन रहे हैं।  लमना में ब्रिटेन के पर्यटकों का अनुभव इसी सोच को आगे बढ़ाता दिखाई देता है। यहां विदेशी मेहमानों ने किसी पर्यटन स्थल को दूर से देखने के बजाय गांव के बीच जाकर लोगों से मुलाकात की, ग्रामीण हाट में स्थानीय गतिविधियों को समझा और छत्तीसगढ़ के ग्रामीण जीवन की सहजता को महसूस किया। विदेशी मेहमानों के लिए यादगार बना छत्तीसगढ़ का अपनापन लमना प्रवास के दौरान श्री फ्रैंक रोजर मार्सटन और श्रीमती जेनिफर मार्गरेट रेनफ्रू मार्सटन ग्रामीणों के साथ तस्वीरें खिंचवाते, बच्चों से बातचीत करते और स्थानीय परिवारों के साथ समय बिताते नजर आए।  वे ग्रामीण महिलाओं और बच्चों के साथ आत्मीयता से मिले ।  विदेशी पर्यटकों का गांवों तक पहुंचना इस बात का संकेत है कि छत्तीसगढ़ में पर्यटन की संभावनाएं अब नए क्षेत्रों और नए अनुभवों तक विस्तार पा रही हैं। ग्रामीण पर्यटन के विस्तार से स्थानीय परिवारों, छोटे व्यवसायों, हस्तशिल्पकारों, ग्रामीण बाजारों, स्थानीय गाइडों और होमस्टे संचालकों के लिए आय एवं रोजगार के नए अवसर तैयार हो रहे हैं।  लमना में ब्रिटेन के मेहमानों की यह यात्रा छत्तीसगढ़ के उस पर्यटन मॉडल की खूबसूरत झलक है, जहां प्रकृति के साथ संस्कृति, गांव के साथ आतिथ्य और पर्यटन के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था आगे बढ़ती है। छत्तीसगढ़ की यही सहज, आत्मीय और जीवंत पहचान देश-दुनिया के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है।

महिलाओं ने संवारा हरित अभियान, 2170 पौधों की होगी जियो-ट्रैकिंग

महिलाओं ने संवारा हरित अभियान, 2170 पौधों की अब जियो ट्रैकिंग से होगी निगरानी -निवी ट्रंचिंग ग्राउंड और देवरी गौशाला में लगाए गए पौधों की लोकेशन होगी दर्ज, जीवित पौधों की स्थिति भी सामने आएगी मुरैना  शहर को हरा-भरा बनाने के उद्देश्य से अमृत हरित महा अभियान एवं वूमेन फॉर ट्री योजना के तहत स्व सहायता समूह की महिलाओं द्वारा लगाए गए 2170 पौधों की अब जियो ट्रैकिंग की जाएगी। नगर निगम द्वारा लगाए गए पौधों को अमृत मित्र पोर्टल के माध्यम से जियो टैग किया जाएगा। इससे पौधों की वास्तविक लोकेशन दर्ज होने के साथ उनकी स्थिति की निगरानी भी की जा सकेगी। पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी स्व सहायता समूह की महिलाओं को सौंपी गई है। नगर निगम क्षेत्र में वूमेन फॉर ट्री अभियान के तहत स्व सहायता समूह की महिलाओं को कुल 2170 पौधे लगाने का लक्ष्य दिया गया था। महिलाओं ने निर्धारित लक्ष्य को पूरा करते हुए निवी ट्रंचिंग ग्राउंड में 1070 और देवरी गौशाला में 1000 पौधे लगाए हैं। पौधरोपण के बाद अब नगर निगम प्रशासन इनकी निगरानी और संरक्षण पर जोर दे रहा है। तीन माह बाद होगी स्थिति की निगरानी नगर निगम आयुक्त सत्येंद्र धाकरे ने बताया कि शासन के निर्देश के अनुसार लगाए गए पौधों की जियो ट्रैकिंग किया जाना अनिवार्य है। लगाए गए पौधे करीब तीन माह पुराने हो चुके हैं। ऐसे में इनकी जियो ट्रैकिंग कर लोकेशन दर्ज की जा रही है। इससे भविष्य में यह पता लगाने में आसानी होगी कि पौधरोपण वाले स्थान पर कितने पौधे मौजूद हैं और कितने पौधे जीवित हैं। महिलाओं के जिम्मे पौधों की देखभाल अभियान के तहत केवल पौधे लगाने तक ही जिम्मेदारी सीमित नहीं रखी गई है, बल्कि पौधों की देखभाल का जिम्मा भी स्व सहायता समूह की महिलाओं को दिया गया है। महिलाओं द्वारा लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल की जा रही है। नगर निगम का उद्देश्य पौधरोपण के साथ इन पौधों को संरक्षित कर उन्हें पेड़ के रूप में विकसित करना है।  जियो ट्रैकिंग से सामने आएगी वास्तविक स्थिति जियो ट्रैकिंग के बाद प्रत्येक पौधे की लोकेशन डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज हो जाएगी। आगे पौधों के बड़े होने के बाद उनकी स्थिति की दोबारा निगरानी की जाएगी। इससे पौधरोपण अभियान के परिणामों का आकलन करने और पौधों के जीवित रहने की स्थिति का रिकॉर्ड तैयार करने में मदद मिलेगी।

एशियन गेम्स में पंजाब का जलवा, परिनाज और सतनाम ने जीते ब्रॉन्ज

अमृतसर. जापान के आइची-नागोया में आयोजित हो रहे 20वें एशियाई खेलों के मंच पर पंजाब के जांबाज खिलाड़ियों ने अपनी अद्भुत प्रतिभा, अदम्य साहस और बेजोड़ खेल कौशल का ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए पूरे देश में गौरव और उत्साह की एक नई लहर पैदा कर दी है। एथलेटिक्स के रेस ट्रैक से लेकर निशानेबाजी की शूटिंग रेंज तक, और रोइंग के वाटर कोर्स से लेकर हॉकी के मैदान तक, पंजाब की मिट्टी से निकले इन होनहार एथलीटों ने हर जगह अपनी धाक जमाई है। जालंधर, पटियाला, मानसा और संगरूर जैसे जिलों से आए खिलाड़ियों ने न केवल व्यक्तिगत स्तर पर नए मुकाम हासिल किए, बल्कि महत्वपूर्ण मुकाबलों में पदक जीतकर और निर्णायक जीत दर्ज कराकर यह साबित कर दिया कि भारतीय खेल जगत में पंजाब का दबदबा आज भी अटूट है।

India-WI T20 टिकटों की धूम, सुबह से ही 80% टिकट sold out

इंदौर   इंदौर के होलकर स्टेडियम में 11 अक्टूबर को प्रस्तावित भारत-वेस्टइंडीज T20 मुकाबले के टिकटों की ऑनलाइन बिक्री शुक्रवार सुबह 6 बजे शुरू हो गई। बिक्री शुरू होने के पहले दो घंटे में सामान्य गैलरी कैटेगरी के करीब 80% टिकट बिक गए। टिकटों की बिक्री अधिकृत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म District by Zomato के जरिए की जा रही है। टिकट बिक्री शुरू होते ही क्रिकेट प्रेमियों ने बुकिंग शुरू कर दी। शुरुआती घंटों में कई कैटेगरी के टिकटों की मांग तेजी से बढ़ी। अलग-अलग स्टैंड की लाइव उपलब्धता मांग के अनुसार लगातार बदल रही है। एक हजार से 12,500 तक टिकट मैच के लिए टिकटों की कीमत अलग-अलग कैटेगरी के अनुसार तय की गई है। सामान्य गैलरी के टिकट करीब 1,000 से 1,800 रुपए तक है। पवेलियन की टिकट कीमत ₹5,500 से ₹8,500 तक रखी गई है, जबकि हॉस्पिटैलिटी कैटेगरी के टिकट ₹11,000 और ₹12,500 तक हैं। एक व्यक्ति अधिकतम 4 टिकट खरीद सकता है। स्टूडेंट टिकट के लिए भी रही जबरदस्त मांग स्टूडेंट और विशेष रूप से दिव्यांग दर्शकों के लिए आरक्षित रियायती टिकटों की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी थी। स्टूडेंट कोटे के करीब 1,200 रजिस्ट्रेशन कुछ ही समय में पूरे हो गए। दस्तावेज सत्यापन के बाद करीब 1,000 छात्रों को टिकट दिए जाने हैं। ऑनलाइन बिक्री शुरू होने के बाद टिकटों की उपलब्धता मांग के अनुसार बदल रही है। 11 अक्टूबर को होगा मुकाबला भारत और वेस्टइंडीज के बीच यह T-20 मुकाबला 11 अक्टूबर को शाम 7 बजे इंदौर के होलकर स्टेडियम में खेला जाएगा। मैच को लेकर शहर में क्रिकेट प्रेमियों के बीच खासा उत्साह है और ऑनलाइन टिकट बिक्री शुरू होने के साथ स्टेडियम में मुकाबला देखने की होड़ भी बढ़ गई है।

LKG को लेकर हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, स्कूलों को निर्देश

बिलासपुर. हाईकोर्ट ने बेमेतरा जिले में स्वामी आत्मानंद एक्सीलेंट इंग्लिश मीडियम स्कूलों में एलकेजी कक्षाएं तुरंत शुरु करने का आदेश दिया है। यह फैसला जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच ने फैसला सुनाया। बता दें कि बेमेतरा के ग्राम साजा के रहने वाले सुदर्शन लोढ़ी, सूरज साहू, गोविंद पटेल, दकवार बंजारे, लालाराम सोनी, चंद्र प्रकाश, मुकेश सोनी, आत्माराम साहू, भारत साहू, ओम प्रकाश सोनी, सुनीला वर्मा और देकोराम ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया कि उनके बच्चे आर्थिक रूप से कमजोर और सामान्य आय वाले परिवारों से हैं। वे अपने बच्चों को गुणवत्तापूर्ण अंग्रेजी माध्यम शिक्षा दिलाने के लिए स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में एलकेजी में एडमिशन दिलाना चाहते हैं, लेकिन बेमेतरा जिले एलकेजी की प्रवेश प्रक्रिया ही शुरू नहीं की गई है। याचिका में लगाया गया था ये आरोप याचिका में आरोप लगाया गया था कि राज्य के अन्य जिलों में एलकेजी में दाखिले हो रहे हैं, लेकिन बेमेतरा में जिला शिक्षा अधिकारी और स्कूल प्रबंधन ने बजट और स्टाफ की कमी का हवाला देकर दाखिला प्रक्रिया शुरु नहीं किया है। मामले में हाईकोर्ट ने कहा कि एक बार राज्य सरकार ने सभी जिलों में गुणवत्तापूर्ण अंग्रेजी माध्यम शिक्षा देने की नीति बनाई है, तो बेमेतरा को इससे वंचित नहीं रखा जा सकता। यह अनुच्छेद 14 और 21ए का उल्लंघन है। कोर्ट ने चार सप्ताह के भीतर व्यवस्था पूरी कर दाखिला शुरु करने का निर्देश  दिया। राज्य सरकार की ओर से डिप्टी एजी डॉ. सौरभ कुमार पांडेय ने तर्क दिया कि एलकेजी पर आरटीआई का अनिवार्य  प्रावधान लागू नहीं होता, लेकिन कोर्ट ने  इसे अस्वीकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि क्षेत्रीय भेदभाव किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं है।

CM साय बोले- विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में रियल एस्टेट बनेगा भागीदार

विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में रियल एस्टेट सेक्टर की होगी अहम भूमिका : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्यमंत्री क्रेडाई छत्तीसगढ़ स्टेटकॉन-2026 ‘बिल्डिंग विकसित छत्तीसगढ़’ कार्यक्रम में हुए शामिल मुख्यमंत्री ने कहा – 2047 के विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में आधुनिक शहरों, गुणवत्तापूर्ण आवास और मजबूत अधोसंरचना पर रहेगा विशेष जोर स्टेट कैपिटल रीजन बनेगा प्रदेश के विकास का नया ग्रोथ इंजन, रायपुर के साथ दुर्ग-भिलाई और राजनांदगांव के विकास को मिलेगी नई गति सुशासन और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए 400 से अधिक सुधार, प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण से बढ़ी पारदर्शिता नई औद्योगिक विकास नीति के बाद छत्तीसगढ़ को मिले 8 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव रायपुर,  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज नवा रायपुर के एक निजी होटल में आयोजित क्रेडाई छत्तीसगढ़ स्टेटकॉन-2026 ‘बिल्डिंग विकसित छत्तीसगढ़’ कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लक्ष्य को हासिल करने में रियल एस्टेट सेक्टर की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और शहरीकरण के साथ प्रदेश में आधुनिक शहरों, गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ आवास तथा मजबूत अधोसंरचना की आवश्यकता भी बढ़ रही है। राज्य सरकार रियल एस्टेट सेक्टर के विकास के लिए पारदर्शी व्यवस्था, सरल प्रक्रियाओं और निवेश के अनुकूल वातावरण के निर्माण की दिशा में लगातार काम कर रही है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अपना घर प्रत्येक परिवार का सपना होता है। समाज के हर वर्ग की आकांक्षा होती है कि उसके पास सुरक्षित और सुविधाजनक आवास हो। पिछले पौने तीन वर्षों में छत्तीसगढ़ में रियल एस्टेट सेक्टर ने तेजी से प्रगति की है। आने वाले वर्षों में प्रदेश में बढ़ते निवेश, औद्योगिकीकरण, बेहतर कनेक्टिविटी और नए शहरी केंद्रों के विकास के साथ इस क्षेत्र में संभावनाएं और बढ़ेंगी। उन्होंने रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़े उद्यमियों से कहा कि वे प्रदेश के विकास में भागीदार बनें और गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक तथा भविष्य की जरूरतों के अनुरूप आवासीय एवं व्यावसायिक परियोजनाओं के निर्माण में योगदान दें। विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप तैयार किया ‘छत्तीसगढ़ अंजोर’ मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है। इसी संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ सरकार ने विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए विजन डॉक्यूमेंट ‘छत्तीसगढ़ अंजोर’ तैयार किया है। राज्य ने अपनी अर्थव्यवस्था को वर्ष 2047 तक 75 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के पास इस लक्ष्य को प्राप्त करने की अपार क्षमता है। प्रदेश का लगभग 44 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित है। यहां प्रचुर खनिज संपदा, पर्याप्त बिजली और जल संसाधन उपलब्ध हैं। देश के प्रमुख क्षेत्रों से प्रदेश की कनेक्टिविटी लगातार मजबूत हो रही है और यहां के मेहनतकश लोग हमारी सबसे बड़ी शक्ति हैं। उन्होंने कहा कि ‘छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया’ केवल एक कहावत नहीं, बल्कि प्रदेशवासियों की सरलता, परिश्रम और सामर्थ्य की पहचान है। मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में कार्य करने के अपने अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री की कार्यशैली को निकट से देखा है। प्रधानमंत्री देश के 140 करोड़ नागरिकों को अपना परिवार मानकर उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में भारत आधुनिक अधोसंरचना, आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था और जनकल्याण के नए अध्याय लिख रहा है। हर परिवार के पक्के घर का सपना हो रहा साकार मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना ने देश के करोड़ों परिवारों के पक्के घर के सपने को साकार किया है। प्रदेश में प्रतिदिन लगभग 1600 प्रधानमंत्री आवास बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि गांवों में भी बड़ा परिवर्तन दिखाई दे रहा है और पक्के आवास तेजी से ग्रामीण जीवन की तस्वीर बदल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने छत्तीसगढ़ के लिए 3.65 लाख अतिरिक्त आवासों की स्वीकृति दी है। प्रधानमंत्री जनमन योजना के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजातियों के परिवारों के लिए भी आवास बनाए जा रहे हैं। आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास के लिए तैयार नीति के अंतर्गत 15 हजार आवासों के निर्माण को भी स्वीकृति मिली है। स्टेट कैपिटल रीजन बनेगा छत्तीसगढ़ का नया ग्रोथ इंजन मुख्यमंत्री साय ने कहा कि रायपुर और उसके आसपास के क्षेत्रों के सुनियोजित एवं दीर्घकालीन विकास के लिए स्टेट कैपिटल रीजन विकसित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत रायपुर के साथ दुर्ग, भिलाई और राजनांदगांव क्षेत्र को जोड़ते हुए भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकास की योजना बनाई जा रही है। स्टेट कैपिटल रीजन से आवास, उद्योग, व्यापार, परिवहन और सेवा क्षेत्रों में नई संभावनाएं विकसित होंगी तथा यह प्रदेश की अर्थव्यवस्था के प्रमुख ग्रोथ इंजन के रूप में उभरेगा। उन्होंने कहा कि बढ़ते शहरीकरण को अवसर में बदलने के लिए सुनियोजित विकास आवश्यक है। शहरों में नागरिक सुविधाओं, परिवहन, आवास और अन्य बुनियादी अधोसंरचनाओं का विकास भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। इसमें रियल एस्टेट सेक्टर की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। नक्सलवाद की समाप्ति के साथ बस्तर में खुल रहे विकास के नए द्वार मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नक्सलवाद लंबे समय तक छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर के विकास में बड़ी बाधा रहा।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति और हमारे सुरक्षा बलों के अदम्य साहस से नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता मिली है और आज छत्तीसगढ़ नक्सलमुक्त होकर विकास के नए दौर में प्रवेश कर रहा है। उन्होंने कहा कि बस्तर की जनता ने लगभग चार दशकों तक नक्सल हिंसा का दंश झेला। नक्सलियों द्वारा स्कूल, अस्पताल, सड़क और अन्य विकास कार्यों का विरोध किए जाने के कारण अनेक क्षेत्र बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहे। राज्य सरकार ने नक्सलवाद के खिलाफ अभियान के साथ-साथ विकास को भी समान प्राथमिकता दी। मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘नियद नेल्लानार’ योजना के माध्यम से दूरस्थ गांवों में सड़क, बिजली, पेयजल सहित विभिन्न मूलभूत सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। गोंडी भाषा में ‘नियद नेल्लानार’ का अर्थ ‘आपका अच्छा गांव’ है। मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के अंतर्गत 34 लाख लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया है और लगभग 40 हजार लोगों का उपचार किया गया है। ‘बस्तर मुन्ने’ कार्यक्रम के माध्यम से शासकीय अमला गांवों में ठहरकर पात्र परिवारों … Read more

CM साय ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय को जयंती पर किया नमन

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर उन्हें किया नमन अंत्योदय के संकल्प के साथ समाज के अंतिम व्यक्ति के उत्थान के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री साय रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में एकात्म मानववाद के प्रणेता और प्रखर राष्ट्रचिंतक पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर उनके छायाचित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया।             मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने अपने विचारों और सिद्धांतों के माध्यम से राष्ट्र के समग्र विकास की ऐसी दृष्टि प्रस्तुत की, जिसके केंद्र में समाज का अंतिम व्यक्ति है। उनका संपूर्ण जीवन राष्ट्रसेवा, जनकल्याण और समाज के कमजोर एवं वंचित वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित रहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का मानना था कि विकास की सार्थकता तभी है, जब उसका लाभ समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचे। उनका ‘अंत्योदय’ का सिद्धांत गरीबों, वंचितों और जरूरतमंदों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ते हुए उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की प्रेरणा देता है।               मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती को ‘अंत्योदय दिवस’ के रूप में मनाना उनके विचारों के अनुरूप समाज के अंतिम व्यक्ति के कल्याण और उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के संकल्प को अभिव्यक्त करता है। एकात्म मानववाद और अंत्योदय का उनका दर्शन आज भी राष्ट्र निर्माण और जनकल्याण की दिशा में प्रेरणास्रोत है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय के सिद्धांतों को आत्मसात करते हुए राज्य सरकार समाज के प्रत्येक वर्ग के कल्याण और विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचार, आदर्श और राष्ट्रसेवा का भाव सदैव देश और समाज को प्रेरित करता रहेगा।