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फसल नुकसान झेल रहे किसानों को सरकार का तोहफा, 13 जिलों में कृषि इनपुट अनुदान जारी

पटना खेतों में लगी फसल की क्षति के बाद मुआवजे के इंतजार कर रहे बिहार के किसानों को बड़ी राहत मिली है। मुख्यमंत्री मंत्री सम्राट चौधरी ने इन किसानों को फसल क्षति की राशि सीधे उनके खाते में भेज दी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को 13 जिलों के 3.96 लाख किसानों के खाते में 200 करोड़ की अनुदान राशि हस्तांतरित की है। यह राशि फसल क्षति के लिए कृषि इनपुट अनुदान के रूप में दी गई है। लोक सेवक आवास में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि है आगे भी जिन किसानों के आवेदन आए हैं, उन्हें कृष इनपुट अनुदान की राशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है की डबल इंजन की सरकार बिहार के किसानों के लाभ के लिए काम कर रही है। आपको बता दें कि हाल ही में बिहार समेत देश भर के करोड़ों किसानों के खाते में पीएम किसान सम्मान निधि की 23वीं किस्त आई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 जून को करीब साढ़े नौ लाख किसानों के खाते में 2-2 हजार रुपये ट्रांसफर किए थे। अब आज बिहार के किसानों को फसल क्षति अनुदान सीएम सम्राट चौधरी ने ट्रांसफर किया है। दरअसल 2025-26 के दौरान जिन किसानों की फसल को नुकसान पहुंचा था। उन्हीं किसानों को सरकार द्वारा यह जरूरी मदद दी जा रही है। मार्च के तीसरे और चौथे हफ्ते में अचानक आंधी-तूफान और बेमौसम बारिश तथा ओलावृष्टि से रबी की फसल को बिहार में काफी नुकसान पहुंचा था। जिन किसानों के फसल का नुकसान हुआ है सीएम ने उनके खाते में मुआवजे की राशि भेजी है। आपको बता दें कि कृषि इनपुट अनुदान योजना के तहत सरकार आंधी, बारिश या सूखाड़ समेत अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान किसानों के फसल का नुकसान होने पर उन्हें मुआवजा देती है। यह योजना करीब 2 हेक्टेयर भूमि में हुए फसल के नुकसान तक के लिए मान्य है। कृषि इनपुट अनुदान योजना में कितनी राशि मिलती है आपको यहां बता दें कि इस योजना के तहत सरकार ने न्यूनतम सहायता राशि भी तय कर दी है। इसके तहत असिंचित क्षेत्र के लिए कम से कम 1,000 रुपये, सिंचित क्षेत्र के लिए 2,000 रुपये और बहुवर्षीय फसलों के लिए न्यूनतम 2,500 रुपये का अनुदान दिया जाता है। इसकी एक खास बात यह भी है कि इस योजना का लाभ सिर्फ भू-स्वामी किसान ही नहीं बल्कि रैयत और गैर रैयत (बटाईदार या पट्टे पर खेती करने वाले) किसान भी ले सकते हैं।

उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने सड़क डामरीकरण का कार्य प्रारंभ कराया

रायपुर.  प्रदेश के उद्योग, वाणिज्य, श्रम, आबकारी एवं सार्वजनिक उपक्रम मंत्री लखनलाल देवांगन ने आज नगर निगम कोरबा के वार्ड क्र. 40 पाड़ीमार वार्ड में सड़क डामरीकरण का कार्य प्रारंभ किया गया। इस अवसर पर महापौर संजूदेवी राजपूत उपस्थित थी। उन्होंने डामरीकरण कार्य के दौरान गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने एवं शीघ्र कार्य को पूर्ण किये जाने के निर्देश मौके पर अधिकारियों को दिये।  नगर पालिक निगम कोरबा द्वारा अनवरत रूप से किये जा रहे विकास कार्यों की कड़ी में निगम के बालको जोन अंतर्गत वार्ड क्र. 40 पाड़ीमार क्रमांक 01 में 25 लाख रूपए की लागत से राजेश ठाकुर के घर से बरगद चौक होते हुये इंदिरा मार्केट मुख्य मार्ग तक सड़क डामरीकरण का कार्य कराया जा रहा है।  अब तक निगम क्षेत्र में 1000 करोड़ रूपए के विकास कार्य स्वीकृत उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने इस मौके पर अपने उद्बोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के आशीर्वाद से विगत ढाई वर्ष के दौरान नगर पालिक निगम कोरबा क्षेत्रंातर्गत विभिन्न मदों के अंतर्गत लगभग 1000 करोड़ रूपये के विकास कार्य स्वीकृत किये गये हैं, जिसमें अनेक कार्य पूर्ण कर लिये गये हैं, अनेक प्रगति पर हैं तथा शेष कार्य शीघ्र ही प्रारंभ होने जा रहे हैं। उद्योग मंत्री देवंागन ने अपने उद्बोधन में कहा कि निगम क्षेत्र में 15 करोड़ रूपये के सड़क डामरीकरण कार्य कराये जाने हैं, जिसमें अनेक कार्य पूर्ण भी कर लिये गये हैं, जैसे-जैसे डामर की उपलब्धता होती जायेगी, यह कार्य संपादित होंगे। उन्होेने आगे कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में हमारे छत्तीसगढ़ राज्य का तेजी से विकास हो रहा है तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में केन्द्र सरकार की दर्जनों जनकल्याणकारी योजनाओं व मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में राज्य की विभिन्न योजनाओं से प्रदेश व देश के करोड़ों लोग लाभान्वित हो रहे हैं।  बिना भेदभाव के हो रहे विकास कार्य इस अवसर पर महापौर संजूदेवी राजपूत ने अपने उद्बोधन में कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, नगरीय प्रशासन मंत्री व उप मुख्यमंत्री अरूण साव तथा उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन के आशीर्वाद से निगम क्षेत्र में व्यापक रूप से विकास कार्य हो रहे हैं तथा सभी 67 वार्डों में बिना किसी भेदभाव के विकास कार्य कराये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जब से हमारी सरकार बनी है, तभी से सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य के साथ-साथ हमारे कोरबा में भी विकास को तेज गति व सही दिशा मिली है, बरसों से व्याप्त समस्याएं दूर हो रही हैं तथा लोगों को आवश्यक   सुविधाएं सहज रूप से मुहैया हो रही है। उन्होंने कहा कि हमें कोरबा की जनता का जो भरपूर आशीर्वाद मिला, उन्होंने हम पर जो विश्वास जताया, वह विश्वास हमेेशा बना रहेगा, विश्वास टूटने नहीं दिया जाएगा, इस हेतु हम कृत संकल्पित हैं।  इस अवसर पर एमआईसी सदस्य हितानंद अग्रवाल, सत्येन्द्र दुबे, रजत खुंटे, मंगलराम बंदे, चेतन सिंह मैत्री, चंदादेवी रत्नाकर, तरूण राठौर के साथ ही दिलेन्द्र यादव, जिला उपाध्यक्ष प्रफुल्ल तिवारी, नरेन्द्र पाटनवार, आकाश श्रीवास्तव, मनोज सिंह, जय कुमार राठौर, प्रीति स्वर्णकार, रेणु प्रसाद, दीपक चन्द्रा, लखन चन्द्रा, हेमलता निर्मलकर, निगम के सहायक अभियंता मोतीलाल बरेठ, अंजूलता तिग्गा सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, निगम के अन्य कर्मचारीगण एवं काफी संख्या में नागरिकगण उपस्थित थे।

रांची में एचईसी की संपत्ति पर अतिक्रमण, हजारों एकड़ जमीन पर निगरानी पर सवाल

रांची हैवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचईसी) की जमीन अब अवैध निर्माण और किराये के कारोबार का अड्डा बनती जा रही है। कंपनी की खाली पड़ी जमीन पर कब्जा कर कई लोगों ने पक्के मकान, दुकान और छोटे-छोटे व्यावसायिक परिसर तक खड़े कर दिए हैं। स्थिति यह है कि जमीन कंपनी की, संसाधन कंपनी के और कमाई किसी और की हो रही है। एचईसी के आवासीय और आसपास के क्षेत्रों में ऐसे सैकड़ों मामले सामने आ चुके हैं, जहां लोग बिना किसी वैध अधिकार के कंपनी की जमीन पर निर्माण कर उसे किराये पर देकर हर माह हजारों रुपये कमा रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की बताई जा रही है जिनका एचईसी से प्रत्यक्ष रूप से कोई संबंध नहीं है। कई लोग वर्षों पहले रोजगार की तलाश में रांची आए थे और धीरे-धीरे खाली जमीन पर कब्जा कर स्थायी निवासी बन गए। किराये से लाखों की कमाई, कंपनी को नुकसान स्थानीय लोगों के अनुसार, कई अवैध कब्जाधारियों ने एक से अधिक कमरे बनाकर किराये पर दे रखे हैं। कुछ जगहों पर दुकानें, गोदाम और छोटे व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी संचालित हो रहे हैं। ऐसे निर्माणों से कब्जाधारियों को हर माह हजारों रुपये की आमदनी हो रही है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि कई मामलों में अवैध निर्माण करने वाले लोग खुद उस परिसर में नहीं रहते। उन्होंने कंपनी की जमीन पर मकान या दुकान बनाकर किराये पर दे दिया है और दूसरे स्थानों पर रहने लगे हैं। यानी एचईसी की संपत्ति निजी आय का साधन बन गई है। बिजली-पानी का भी हो रहा दुरुपयोग अवैध निर्माण के साथ-साथ बिजली और पानी के कनेक्शन को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। कई अवैध बस्तियों और निर्माण स्थलों पर कंपनी के संसाधनों का इस्तेमाल किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। आरोप है कि कई जगह बिना अनुमति पानी और बिजली की व्यवस्था कर ली गई है। जानकारों का कहना है कि किसी औद्योगिक प्रतिष्ठान की जमीन पर अवैध कब्जा सिर्फ जमीन का मामला नहीं होता, बल्कि इससे सुरक्षा, भविष्य की विकास योजनाओं और कंपनी की संपत्ति प्रबंधन व्यवस्था पर भी असर पड़ता है। हजारों एकड़ जमीन की सुरक्षा चुनौती एचईसी की स्थापना के समय कंपनी को बड़े क्षेत्रफल में जमीन उपलब्ध कराई गई थी। कंपनी के पास करीब हजारों एकड़ जमीन का बड़ा भू-भाग रहा है, जिसमें फैक्ट्री परिसर, आवासीय क्षेत्र और खाली जमीन शामिल हैं। समय के साथ आर्थिक संकट और निगरानी व्यवस्था कमजोर होने के कारण कई क्षेत्रों में अतिक्रमण बढ़ता गया। कंपनी के आवासीय परिसर में हजारों क्वार्टर हैं, लेकिन कई क्षेत्रों में खाली पड़ी जमीनों पर धीरे-धीरे अवैध बस्तियां विकसित हो गईं। कुछ स्थानों पर तो स्थायी बाजार और बहुमंजिली निर्माण तक हो चुके हैं। नगर प्रशासन विभाग पर भी सवाल अवैध निर्माण को लेकर एचईसी नगर प्रशासन विभाग की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि लंबे समय तक कार्रवाई नहीं होने के कारण कब्जाधारियों के हौसले बढ़ते गए। कुछ मामलों में विभागीय स्तर पर जांच भी चल रही है। हालांकि कंपनी प्रबंधन समय-समय पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करता रहा है, लेकिन जमीन की निगरानी और अवैध निर्माण रोकना बड़ी चुनौती बना हुआ है। कार्रवाई नहीं हुई तो बढ़ेगा संकट एचईसी की जमीन पर बढ़ते अवैध निर्माण को लेकर अब ठोस नीति की जरूरत महसूस की जा रही है। कंपनी की संपत्ति की पहचान, सीमांकन, डिजिटल रिकॉर्ड और नियमित निगरानी के बिना अतिक्रमण रोकना मुश्किल होगा। एचईसी की जमीन भविष्य की औद्योगिक गतिविधियों और पुनरुद्धार योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में जमीन को अवैध कब्जे और निजी कमाई के साधन से बचाना कंपनी के अस्तित्व और भविष्य दोनों के लिए जरूरी है।

मुसल्लहपुर हाट फायरिंग केस: एलसीआर मांग के बाद टली जमानत पर सुनवाई

 पटना  राजधानी के मुसल्‍लहपुर हाट में कोचिंग विवाद से जुड़े मामले में ज्ञान बिंदु के डायरेक्‍टर रौशन आनंद के भाई और स्‍टाफ को सोमवार को जमानत नहीं मिली। जिला एवं सत्र न्‍यायाधीश की बेंच में जमानत याचिका दाखिल की गई थी। एडीजी 33 की अदालत में अभ‍िषेक और गौरव की जमानत पर सुनवाई के दौरान दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने एलसीआर की मांग की है।   फर्स्‍ट क्‍लास मज‍िस्‍ट्रेट के यहां से एलसीआर (लोअर कोर्ट रिकॉर्ड) आने के बाद मामले में अगली तारीख को दोबारा बहस होगी। फर्स्‍ट क्‍लास मज‍िस्‍ट्रेट ने दोनों की बेल खारिज कर दी थी। फैजल खान मामले में 25 जून को सुनवाई 2 जून की रात खान ग्‍लोबल स्‍टडीज पर बवाल के बाद हुए फायरिंग मामले में फैजल खान उर्फ खान सर एवं उनके दो गार्डों की जमानत पर 25 जून को सुनवाई होनी है।   इस मामले में कोर्ट 25 जून तक गिरफ्तारी पर रोक लगा रखी है। पिछली सुनवाई में कोर्ट में पुलिस ने अपडेटेड केस डायरी सबम‍िट की थी।   क्‍या है पूरा मामला? बता दें कि कोचिंग संस्‍थान में हंगामा, मारपीट और फायरिंग मामले में ज्ञान बिंदु के डायरेक्‍टर रौशन आनंद व उनके भाई एवं स्‍टाफ को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। उस घटना में खान ग्‍लोबल के गार्ड चुनचुन यादव को चोटें आई थीं। इसके बाद फैजल खान के दो गार्डों ने दो-दो राउंड फायरिंग की थी।   पिछले दिनों रौशन आनंद के भाई प्रिंस यादव की नेपाल में संदिग्‍ध परि‍स्‍थ‍ित‍ियों में हुई मौत के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया। जमानत पर जेल से बाहर आए रौशन आनंद ने फैजल खान और कोल्‍ड स्‍टोरेज के मालिक पर अपने भाई की हत्‍या का आरोप लगाया था। 

सीएसआईडीसी संचालक मंडल की बैठक सम्पन्न

रायपुर.  छत्तीसगढ़ स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (सीएसआईडीसी) की 161वीं संचालक मंडल बैठक आज सोमवार को रायपुर स्थित उद्योग भवन में अध्यक्ष राजीव अग्रवाल (कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त) की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में राज्य के औद्योगिक विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। प्रमुख रूप से देवेन्द्र नगर (पंडरी), रायपुर में जेम्स एवं ज्वेलरी पार्क की स्थापना हेतु आगे की कार्यवाही के संबंध में निर्णय लिया गया। इसके साथ ही राज्य में टेक्सटाइल पार्क एवं रेडीमेड गारमेंट पार्क में निवेश आकर्षित करने तथा संबंधित प्रक्रियाओं को तेज करने पर भी विचार-विमर्श किया गया। बैठक में वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, प्रबंध संचालक सीएसआईडीसी विश्वेश कुमार, संचालक उद्योग संचालनालय प्रभात मलिक, संयुक्त सचिव वित्त विभाग श्रीमती श्रद्धा त्रिवेदी तथा अपर संचालक नगर एवं ग्राम निवेश संदीप बागड़े सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

लखनऊ आग हादसे से नाराज CM योगी, अधिकारियों को लगाई फटकार; जिम्मेदारों पर गिर सकती है गाज

लखनऊ. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में सोमवार को तीन मंजिल की इमारत में लगी आग में झुलसकर 15 लोगों की मौत हो गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटनास्थल पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया और मामले की जांच के सख्त निर्देश दिए। मुख्यमंत्री अपना अलीगढ का दौरा बीच में ही छोडकर लखनऊ लौटे और घटनास्थल पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया। अधिकारियों के मुताबिक आदित्यनाथ ने पुलिस महानिदेशक और अपर मुख्य सचिव (गृह) मौके पर जाकर घटना का जायजा लेने और रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि इस मामले की तह में जाकर दोषियों को सजा दिलाई जाएगी। घटना से गुस्साए सीएम योगी ने अफसरों को कड़ी फटकार लगाई है। यह आग अलीगंज थाना इलाके में उषा मेहता मार्ग पर स्थित तीन मंजिला वाणिज्यिक इमारत में अपराह्न करीब तीन बजे लगी। आग पर काबू पाने के लिए कई दमकल वाहनों और 'हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म' वाली गाड़ी को अभियान पर लगाया गया। पुरनिया बाजार से चंद कदमों की दूरी पर स्थित यह इमारत अलीगंज के पॉश रिहायशी इलाके में है, जहां कोचिंग सेंटर और कैफे जैसी जगहें हैं। अधिकारियों के अनुसार बचाव अभियान के दौरान आग में फंसे लोगों को इमारत से बाहर निकाला गया। कुछ लोगों को 'बॉडी बैग' में लाया गया, जबकि कुछ को कंबल में लपेटा गया था और एम्बुलेंस में ले जाते समय वे बेहोश लग रहे थे। इन लोगों के शवों या घायलों को बगल की इमारत की छत से बाहर निकाला गया। प्रधानमंत्री ने जताया शोक, मृतकों के परिजन को दो-दो लाख रुपये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस घटना में लोगों की मौत पर दुख जाहिर करते हुए मृतकों के परिजन को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता देने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना पर दुख व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, ''लखनऊ में अग्नि दुर्घटना में हुई जनहानि अत्यंत दुखद एवं हृदय विदारक है। मेरी संवेदनाएं शोकाकुल परिजनों के साथ हैं। प्रभु श्रीराम से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्माओं को शांति तथा घायलों को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ प्रदान करें। अखिलेश यादव ने दुख व्यक्त किया सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस घटना पर दुख व्यक्त करते हुए 'एक्स' पर लिखा कि इस हादसे के पीछे के कारणों की ईमानदारी से जांच हो। उन्होंने आगे कहा कि भविष्य में ऐसे दर्दनाक हादसों से बचा जा सके, यही कोशिश होनी चाहिए। मायावती ने जताया शोक बसपा अध्यक्ष मायावती ने भी घटना पर शोक व्यक्त करते हुए 'एक्स' पर कहा, ''उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में आज दोपहर बाद हुई अग्निकाण्ड में अनेक लोगों की मौत तथा और भी कई लोगों के घायल हो जाने की घटना अति-दुखद। उन्होंने आगे कहा, ''इस प्रकार की जानलेवा घटनायें दिल को दहलाने वाली होती हैं तथा कितने ही परिवार की उम्मीदों को बिखेर देती हैं। ऐसी दुखद घटनाओं की रोकथाम के लिये सबको मिलकर सही से काम करने की ज़रूरत है। सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप से काम नहीं चलेगा। आग लगने के समय इमारत के अंदर मौजूद रहे युवकों और युवतियों के रिश्तेदार बताये जा रहे कुछ लोग घटनास्थल के पास खड़े होकर रोते-बिलखते और अधिकारियों से इमारत के अंदर जाने की गुहार लगाते नजर आये।

शिक्षकों को राहत: चाइल्ड केयर लीव पर DC की अनुमति की बाध्यता खत्म

चंडीगढ़. शिक्षा विभाग में अब शिक्षकों और गैर शिक्षक कर्मचारियों को बाल देखभाल अवकाश (सीसीएल) के लिए उपायुक्तों से मंजूरी नहीं लेनी पड़ेगी। शिक्षक संगठनों के विरोध के चलते शिक्षा विभाग ने नौ मार्च को जारी किया गया आदेश वापस ले लिया है, जिसमें बाल देखभाल अवकाश के लिए जिला उपायुक्त की अनुशंसा अनिवार्य की गई थी। माध्यमिक शिक्षा विभाग के महानिदेशक जितेंद्र कुमार ने सोमवार को पत्र जारी कर सभी उपायुक्तों और जिला शिक्षा अधिकारियों सहित सभी संबंधित अधिकारियों को नए फैसले से अवगत कराते हुए निर्देशों का पालन करने को कहा है। सीसीएल के लिए उपायुक्तों की अनुशंसा समाप्त किए जाने से अब शिक्षकों और गैर शिक्षक कर्मचारियों के आवेदन पर स्वीकृति मिलने में अनावश्यक देरी नहीं होगी। सीसीएल से संबंधित मामलों को जिला उपायुक्त की अनुशंसा के बाद मुख्यालय भेजने संबंधी आदेश को वापस लिए जाने का स्वागत करते हुए हरियाणा स्कूल लेक्चरर एसोसिएशन (हसला) के राज्य प्रधान सतपाल सिंधु ने कहा कि विगत 15 जून को उन्होंने शिक्षा महानिदेशक के साथ बैठक में यह मुद्दा उठाया था। सीसीएल फाइलों को उपायुक्त के माध्यम से भेजने संबंधी अनिवार्यता समाप्त होने के बाद अब उम्मीद है कि जल्द ही स्नातकोत्तर शिक्षक (पीजीटी) से प्रिंसिपल पदोन्नति (आरओएच) के मामले भी निपटाए जाएंगे। शिक्षा महानिदेशक की ओर से मेवात क्षेत्र के पीजीटी से प्रिंसिपल पदोन्नति संबंधी फाइल पर भी तेजी दिखाई गई है। इसके अलावा वर्ष 2016 से अब तक की वरिष्ठता सूची तैयार करने के लिए गठित समिति को भी निदेशक ने मंजूरी प्रदान कर दी है। समिति को तत्काल प्रभाव से कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि लंबे समय से लंबित इस प्रक्रिया को शीघ्र पूरा किया जा सके। यात्रा रियायत भत्ता (टीए) और महंगाई भत्ता (डीए) को वेतन की तर्ज पर नियमित रूप से वितरित करने के प्रस्ताव को अनुमति के लिए वित्त विभाग के समक्ष भेजा गया है।

श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में अति पिछड़ा सम्मेलन, सीएम ने विपक्ष पर साधा निशाना

 पटना मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अति पिछड़ा महासम्मेलन के मंच से पूर्व सीएम लालू यादव और रबड़ी देवी पर बड़ा हमला किया है। कहा है कि उनकी सुरक्षा में डेढ़ सौ पुलिस कर्मी आज भी तैनात हैं फिर भी सुरक्षा में कटौती की बात करते हैं। यह भी कहा है कि पटना से लेकर गोपालगंज और दिल्ली तक उनके कितने मकान हैं इसकी गिनती नहीं है। फिर भी परिवार के सभी लोगों को अलग-अलग बंगला चाहिए। पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में सोमवार को भारतीय जनता पार्टी(बीजेपी) की ओर से अतिपिछड़ा समाज के सम्मेलन होगा सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में नवनिर्वाचित विधान परिषद सदस्यों का अभिनंदन किया गया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और भाजपा के शीर्ष नेता शामिल हुए। मंच से सम्मेलन को संबोधित करते हुए सीएम सम्राट चौधरी ने विपक्ष खासकर लालू परिवार पर जोरदार हमला किया। उन्होंने कहा कि इन दिनों इनके बंगले और सुरक्षा का मामला चर्चा में है। सबको पता होना चाहिए कि आज भी करीब डेढ़ सौ पुलिस कर्मी उनके आवास के बाहर तैनात हैं। अब पूरे बिहार की पुलिस इनकी सुरक्षा में तैनात कर दें तो अति पिछड़ा समाज की सुरक्षा कौन करेगा। उनको बुलेटप्रूफ गाड़ी और जरूरत के मुताबिक पुलिस बल तैनात है। अब और कितना चाहिए। सीएम ने कहा कि लालू परिवार सरकारी बंगला छोड़ने को तैयार नहीं है। अब माताजी, बेटा, बेटी सब को सेपरेट बंगला चाहिए। इनके पास अपना कितना मकान है इसकी गिनती नहीं है। माता और पुत्रों को सरकारी बंगला मिला है। इनका महुआबाग में बड़ा सा मकान है। कौटिल्य नगर में पांच बंगलों को मिलाकर एक मकान है। राजाबाजार में एक अलग घर। गोपालगंज और दिल्ली में कब्जा कर लिए हैं। अब और कितना बंगला चाहिए। सीएम ने राजद प्रमुख के शासन काल का इतिहास निकाला जा रहा है। सबका पूरा हिसाब किया जाएगा। सीएम ने कहा कि बिहार को अपराध मुक्त बनाना हमारा पहला लक्ष्य है। अपराध के मसले पर कोई समझौता नहीं होगा। जब तक मैं मुख्यमंत्री की कुर्सी पर हूं त अति पिछड़ों का कोई बाल बांका भी नहीं कर सकता। जरूरत होगी तो हम इस समाज के लिए खून भी देंगे। अपराध के खिलाफ हमारा ऑपरेशन आज भी जारी है। नीट परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों को जेल भेजा गया है। विपक्ष पर प्रहार करते हुए कहा कि कांग्रेस और राजद ने देश को लूटा है। कर्पूरी ठाकुर के नाम पर राजनीति की लेकिन उनको सम्मान मोदी सरकार ने दिया। अतिपिछड़ा समाज की ओर से भाजपा के केंद्रीय एवं प्रदेश नेतृत्व के प्रति हार्दिक आभार एवं अभिनंदन समारोह का आयोजन श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजन किया गया है। कार्यक्रम के आयोजनकर्ता कला संस्कृति मंत्री डॉ प्रमोद कुमार चंद्रवंशी हैं। थोड़ी देर में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी आयेंगे। भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेताओं का आगमन शुरू है। समारोह में अतिपिछड़ा समाज के विधायकों का सम्मान किया जाएगा। समारोह में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय, केंद्रीय मंत्री राजभूषण निषाद, पूर्व मंत्री राधामोहन सिंह सहित अन्य नेता पहुंचे। समारोह में सीएम को भाषण देने के लिए पोडियम विशेष पोडियम बनवाया गया। सीएम की सुरक्षा में लगे जवानों की देखरेख में इसे तैयार किया गया। बिहार में ऐसा पहली बार हो रहा है जब सीएम के सुरक्षाकर्मी अपनी देखरेख में पोडियम बनवाया गया।

निर्माण और जन सुविधाएं विकसित करने के कार्यों को गति देने सक्रियता से करें मॉनिटरिंग – शंगीता आर

रायपुर.  नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की सचिव शंगीता आर. ने नगरीय निकायों के कार्यों की मॉनिटरिंग व समन्वय के लिए जिलेवार नियुक्त नोडल अधिकारियों की बैठक लेकर उनके कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने मंत्रालय में आयोजित बैठक में सभी नोडल अधिकारियों को नगर निगमों, नगर पालिकाओं तथा नगर पंचायतों में निर्माण और जन सुविधाएं विकसित करने के कार्यों को गति देने सक्रियता एवं गंभीरता से मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। उन्होंने निकायों की समस्याओं का हल निकालकर विकास कार्यों और योजनाओं के क्रियान्वयन को प्रभावी तरीके से धरातल पर उतारने को कहा। उन्होंने नगरीय निकायों में मैदानी निरीक्षण के दौरान वहां की जरूरतों और व्यवस्थाओं का आकलन भी करने को कहा। नगरीय प्रशासन विभाग की सचिव शंगीता आर. ने बैठक में नोडल अधिकारियों से उनके नगरीय निकायों के भ्रमण और बैठकों का फीडबैक लेकर निकायों में कार्यों की वस्तुस्थिति जानी। उन्होंने कहा कि निकायों में कार्यों के निरीक्षण के लिए पूरी तैयारी से जाएं। विभिन्न निर्माण और विकास कार्यों के लिए पिछले दो वित्तीय वर्षों में कितनी राशि जारी की गई है, इसकी भी जानकारी रखें। उन्होंने निकायों में प्रगतिरत निर्माण कार्यों के साथ ही केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन की भी हर महीने समीक्षा करने के निर्देश दिए। शंगीता आर. ने नोडल अधिकारियों को आबंटित जिले के आय-व्यय की स्थिति पर भी नजर रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जो निकाय खुद की आय से अपनी सभी व्यवस्थाएं कर सकते हैं, उन्हें इसके लिए प्रोत्साहित करें। उन्होंने निकायों में लक्ष्य निर्धारित कर वार्डवार प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) को सेचुरेट करने को कहा। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक आर. एक्का, उप सचिव भागवत जायसवाल, राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) के सीईओ शशांक पाण्डेय, नगरीय प्रशासन विभाग के अपर संचालक पुलक भट्टाचार्य और मुख्य अभियंता राजेश शर्मा भी बैठक में मौजूद थे। शहरी विकास योजनाओं की निगरानी को और सशक्त करने नोडल अधिकारी कर रहे स्थल निरीक्षण, अब तक 103 निकायों का निरीक्षण कर चुके नोडल अधिकारी  नगरीय प्रशासन विभाग ने विकास कार्यों और योजनाओं की जमीनी स्तर पर निगरानी को सुदृढ़ करने सभी राज्य स्तरीय नोडल अधिकारियों को अपने-अपने आबंटित जिलों के नगरीय निकायों के नियमित भ्रमण के निर्देश दिए हैं। विगत 6 जून को एक साथ सभी नोडल अधिकारियों ने अपने जिलों में पहुंचकर योजनाओं की प्रगति, चुनौतियों और क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति का आकलन किया। विभाग की इस पहल का उद्देश्य योजनाओं की प्रभावी निगरानी, समस्याओं का त्वरित समाधान तथा मैदानी स्तर पर कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है। अलग-अलग जिलों के नोडल अधिकारी अब तक राज्य के 194 नगरीय निकायों में से 103 में मैदानी निरीक्षण के लिए जा चुके हैं।

32348 मेगावाट की ऐतिहासिक उपलब्धि: योगी सरकार ने बिजली आपूर्ति में बनाया राष्ट्रीय रिकॉर्ड

लखनऊ.  उत्तर प्रदेश ने बिजली आपूर्ति के क्षेत्र में एक नया राष्ट्रीय कीर्तिमान स्थापित करते हुए देशभर में अपनी मजबूत पहचान दर्ज कराई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड ने 21 जून को रात 10:48 बजे 32,348 मेगावाट की रिकॉर्ड बिजली मांग की सफल एवं निर्बाध पूर्ति कर इतिहास रच दिया है। इस उपलब्धि के साथ उत्तर प्रदेश देश में अब तक की सर्वाधिक पीक पावर डिमांड पूरी करने वाला राज्य बन गया है। इससे पहले 13 मई 2026 को महाराष्ट्र ने 32,317 मेगावाट की अधिकतम बिजली मांग पूरी कर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था।  मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश में बिजली व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी और उपभोक्ता केंद्रित बनाने की दिशा में लगातार प्रभावी कदम उठाए गए हैं। 21 जून को रात 10:48 बजे 32,348 मेगावाट रिकॉर्ड पीक डिमांड आपूर्ति की गई है। जोकि अब तक के इतिहास में सबसे अधिक है। यूपी पीक डिमांड बिजली आपूर्ति करने में लगातार सबसे आगे हैं। 20 जून को यूपी में 31549 मेगावाट बिजली आपूर्ति की गई। 19 जून को भी प्रदेश में 30968 मेगावाट बिजली आपूर्ति की गई थी। इससे पहले 24 मई को यूपी में सबसे अधिक 31824 मेगावाट पीक डिमांड बिजली आपूर्ति की गई थी। साल 2025 में 11 जून को 31486 मेगावाट पीक डिमांड बिजली आपूर्ति की गई थी। इस तरह 21 जून 2026 को डिमांड बिजली आपूर्ति ने अभी तक के सभी रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। प्रचंड गर्मी में बिजली की मांग चरम पर यूपी जैसे विशाल राज्य में निर्बाध बिजली आपूर्ति करना एक बड़ी चुनौती रही है। लेकिन योगी सरकार की दूरदर्शी नीतियों और प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था ने इस चुनौती को अवसर में बदल दिया है। प्रदेश में बिजली अवसंरचना को मजबूत करने के लिए लगातार नए उपकेंद्र स्थापित किए गए हैं। ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाई गई है और पुराने उपकरणों को आधुनिक तकनीक से अपग्रेड किया गया है। उत्तर प्रदेश ने रिकॉर्ड मांग को सफलतापूर्वक पूरा कर यह साबित कर दिया है कि प्रदेश की ऊर्जा व्यवस्था अब पहले से कहीं अधिक मजबूत और सक्षम हो चुकी है। बिजलीकर्मी दिन-रात फील्ड में डटे प्रदेश भर में बिजलीकर्मी दिन-रात मैदान में डटे हुए हैं। चाहे तूफानी रात हो, भारी बारिश हो या चिलचिलाती गर्मी, बिजलीकर्मी हर परिस्थिति में उपभोक्ताओं तक सुरक्षित और सुचारु बिजली आपूर्ति करने में जुटे हैं। रात्रिकालीन मेंटेनेंस कार्यों के माध्यम से विभिन्न जिलों में बिजली लाइनों, ट्रांसफार्मरों और उपकेंद्रों की नियमित जांच की जा रही है। ट्रांसफार्मरों की सुरक्षित और प्रभावी कार्यप्रणाली बनाए रखने के लिए उनकी अर्थिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विभागीय टीमों द्वारा नियमित रूप से अर्थिंग में पानी डालकर सिस्टम को सुरक्षित और स्थिर रखा जा रहा है। उपकेंद्रों का अधिकारी कर रहे लगातार निरीक्षण प्रदेश भर में वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा उपकेंद्रों का निरीक्षण भी लगातार किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि उपभोक्ताओं को हर स्थिति में गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित और निरंतर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। शिकायतों के त्वरित निस्तारण और फील्ड रिस्पॉन्स टाइम को बेहतर बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अपर मुख्य सचिव ऊर्जा एवं यूपीपीसीएल के चेयरमैन डॉ. आशीष कुमार गोयल ने कहा कि 32,348 मेगावाट की रिकॉर्ड बिजली मांग की सफल पूर्ति उत्तर प्रदेश के बिजली क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।  रोस्टर से अधिक बिजली आपूर्ति की जा रही चेयरमैन डॉ. गोयल ने कहा कि प्रदेश के लाखों उपभोक्ताओं तक निर्बाध, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण बिजली पहुंचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। यूपीपीसीएल के निदेशक वितरण ज्ञानेंद्र धर द्विवेदी ने बताया कि रोस्टर से अधिक बिजली आपूर्ति की जा रही है। पूरे प्रदेश में ब्रेक डाउन में आये फीडरों को छोड़कर अन्य कार्यों के लिए शटडाउन लेने पर रोक लगाई गई है। उन्होंने बताया कि फीडरों के शटडाउन के लेने के लिए अधिशाषी अभियंताओं को अधिकृत किया गया है। जिससे शटडाउन महत्वपूर्ण व आवश्यक है, यह सुनिश्चित किया जा सकें।