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कड़ेल गांव में मुख्यमंत्री ने खाट पर बैठकर खाया खाना, सब्जियों की की तारीफ

 अजमेर जस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा रविवार को अजमेर जिले के दौरे पर रहे. इस दौरान मुख्यमंत्री का यह दौरा उस समय खास बन गया, जब अजमेर के कड़ेल गांव के एक घर में सीएम भजनलाल ने भोजन किया. मुख्यमंत्री ने कड़ेल गांव निवासी 59 वर्षीय लादूराम मेघवाल के घर पहुंचकर बेहद आत्मीय माहौल में खाना खाया. लादूराम मेघवाल गांव में मजदूरी और मकान निर्माण का कार्य करते हैं. उनके परिवार में चार बेटे, बहुएं और पोते-पोतियां शामिल हैं. इस दौरान सीएम भजनलाल घर की खाट पर परिवार के बीच बैठे और ग्रामीण परिवेश का आनंद लेते हुए पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लिया. मुख्यमंत्री ने की सब्जी की तारीफ भोजन करने के दौरान मुख्यमंत्री ने खास तौर पर काचरी और ग्वार फली की सब्जी की जमकर तारीफ की. लादूराम मेघवाल के घर में बने भोजन के स्वाद से प्रभावित होकर उन्होंने मुस्कुराते हुए पूछा कि यह स्वादिष्ट सब्जी किसने बनाई है. इस पर लादूराम की पत्नी गीता ने बताया कि भोजन उन्होंने स्वयं तैयार किया है. तभी मुख्यमंत्री ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि उनकी पत्नी का नाम भी गीता है. मुख्यमंत्री की इस बात पर घर में मौजूद सभी लोग हंस पड़े और माहौल ठहाकों से गूंज उठा. ग्रामीण परिवार और मुख्यमंत्री के बीच बना यह आत्मीय संवाद पूरे कार्यक्रम का सबसे यादगार पल बन गया. 3 दिन से सीएम के स्वागत चल रही थी तैयारी लादूराम मेघवाल की पत्नी गीता ने बताया कि मुख्यमंत्री के स्वागत और भोजन की तैयारी पिछले तीन दिनों से लगातार की जा रही थी. परिवार ने पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ पारंपरिक राजस्थानी व्यंजन तैयार किए. भोजन में काचरी की सब्जी, पनीर की सब्जी, ग्वार फली की सब्जी, ताजा रोटियां और चावल मुख्यमंत्री को परोसे गए. मुख्यमंत्री ने भोजन की सादगी और स्वाद की सराहना करते हुए परिवार की मेहनत की तारीफ की. गांव के एक सामान्य मजदूर परिवार के घर मुख्यमंत्री का इस तरह बैठकर भोजन करना ग्रामीणों के लिए भी चर्चा का विषय बना रहा और पूरे गांव में उत्साह का माहौल देखने को मिला. राजीविका से जुड़ी महिलाओं से संवाद इससे पहले कड़ेल ग्राम पंचायत में आयोजित ‘ग्राम विकास चौपाल' के दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल ने राजीविका से जुड़ी महिलाओं के साथ बातचीत की, जिसमें महिलाओं ने गृहणी से लखपति दीदी बनने के अपने सफर के अनुभव को साझा किया. महिलाओं से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि लखपति दीदी योजना में महिलाओं को मिलने वाले ऋण की सीमा को 1 लाख से बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपये किया गया है. वहीं, ब्याज को 2.5 प्रतिशत से घटाकर 1.5 प्रतिशत किया है.

पतरातू में राज्य स्तरीय इंफ्लुएंसर सम्मेलन, पर्यटन ब्रांडिंग पर होगी चर्चा

 रांची  राज्य सरकार राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए इंटरनेट मीडिया इंफ्लुएंसरों का भी सहयोग प्राप्त करेगी। इसे लेकर इंफ्लुएंसर इंगेजमेंट पॉलिसी लागू की जाएगी। पर्यटन, कला संस्कृति एवं खेलकूद विभाग ने सोमवार को राज्य स्तरीय इंफ्लुएंसर सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय लिया है, जिसमें इस पॉलिसी का शुभारंभ होगा। यह सम्मेलन पतरातू स्थित होटल पर्यटन विहार में आयोजित किया जाएगा। इस आयोजन का उद्देश्य राज्य के प्रमुख इंटरनेट मीडिया इंफ्लुएंसर्स को एक मंच पर लाना है, जहां झारखंड के ब्रांडिंग और प्रमोशन पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। विभागीय मंत्री सुदिव्य कुमार इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे। पॉलिसी के लागू होने के बाद राज्य के इन्फ्लुएंसर्स को पर्यटन विभाग के साथ जुड़कर काम करने का मौका मिल सकेगा। इंफ्लुएंसर को भी होगा फायदा विभाग का मानना है कि यह पॉलिसी डिजिटल क्रिएटर्स और पर्यटन विभाग के बीच औपचारिक साझेदारी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगी। पॉलिसी में झारखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों के डिजिटल माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार करने वाले इंफ्लुएंसर्स को पारिश्रमिक भी प्रदान किया जाएगा। साथ ही विभाग डिजिटल कंटेट के निर्माण में आवश्यक सहयोग भी प्रदान करेगा।

राजीविका से जुड़ी महिलाओं ने साझा किए अनुभव, सरकार की योजनाओं से बदली आर्थिक स्थिति

पुष्कर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा रविवार को पुष्कर के कड़ैल में ग्राम विकास चौपाल कार्यक्रम को संबोधित किया. इस दौरान मुख्यमंत्री ने राजीविका से जुड़ी महिलाओं से संवाद किया, जिसमें लखपति दीदियों ने अपने-अपने अनुभव साझा. सीएम भजनलाल ने कार्यक्रम के दौरान बताया कि केन्द्र व राज्य सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से समक्ष बनाने के लिए काम कर रही है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में महिला सशक्तीकरण के विभिन्न कार्य हो रहे हैं. जिसमें घर-घर शौचालय का निर्माण, उज्ज्वला योजना के तहत गैस सिलेंडर वितरण, हर घर नल से जल और जन-धन खाते खुलवाकर योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचाना शामिल है. महिलाओं के लिए मां वाउचर योजना शुरू सीएम भजनलाल ने कहा कि हमारी सरकार ने महिलाओं के लिए मा वाउचर योजना शुरू की है. बालिकाओं को साइकिल व स्कूटी वितरण किया जा रहा है. प्रधानमंत्री ने लखपति दीदी योजना प्रारंभ की. जिसमें महिलाएं कृषि सखी, बैंक सखी, पशु सखी, ड्रोन दीदी जैसी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं. राजीविका के माध्यम से प्रदेश में 17.5 लाख महिलाएं लखपति दीदी बनी हैं. हमारी सरकार महिलाओं को टेबलेट वितरण भी कर रही है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने महिला नेतृत्व की दिशा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के जरिए लोकसभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण की मजबूत पहल की. इससे पहले कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने ग्राम विकास रथ एवं कला जत्थों का अवलोकन किया. राजीविका से जुड़ी महिलाओं से संवाद मुख्यमंत्री से संवाद के दौरान डाटा सखी प्रियंका गोस्वामी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि स्वयं सहायता समूह से जुड़कर विभिन्न भूमिकाएं निभाई, जिससे मेरी आर्थिक स्थिति मजबूत बनी. राजीविका के तहत मुझे लोन मिला, जिससे मैंने पशुपालन करके अपनी आजीविका बढ़ाई. 2020 से मैं डाटा सखी का काम कर रही हूं. इससे भी मेरी आमदनी बढ़ी है. राज्य सरकार की ओर से डेढ़ लाख रुपये का लोन 1.5 प्रतिशत ब्याज पर हमे मिल रहा है. वहीं, पशु सखी लक्ष्मी कंवर ने बताया कि मैं पहले साधारण गृहणी थी, लेकिन राजीविका की वजह से आज लखपति दीदी हूं. परिवार की ओर से सहयोग मिला, जिससे मैं घर के बाहर जाकर काम कर पाई. पशु सखी के रूप में काम कर रही हूं. मुझे जो लोन मिला उससे मैंने पशुपालन करना शुरू किया. इससे आज मेरी आर्थिक स्थिति बेहतर हुई है. महिलाओं को आगे बढ़ने के अच्छे अवसर मिल रहे हैं.

पंजाब में चुनावी माहौल, नगर निगम व काउंसिल चुनाव महीने के अंत तक हो सकते हैं

चंडीगढ़  पंजाब में नगर निगम और नगर काउंसिल चुनाव को लेकर आज आधिकारिक घोषणा की जाएगी। राज्य चुनाव आयुक्त राज कमल चौधरी ने इस संबंध में प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है, जो दोपहर 3:30 बजे चंडीगढ़ स्थित पंजाब भवन में आयोजित होगी। माना जा रहा है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चुनाव कार्यक्रम, नामांकन प्रक्रिया और मतदान की संभावित तारीखों की जानकारी साझा की जाएगी। राज्य में लंबे समय से स्थानीय निकाय चुनावों का इंतजार किया जा रहा था और अब प्रशासनिक तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। राजनीतिक दलों ने भी चुनावी रणनीति पर काम तेज कर दिया है। पंजाब में इस बार नौ नगर निगमों और 102 नगर काउंसिलों में चुनाव कराए जाने हैं। राज्य सरकार और प्रशासन की ओर से वार्डबंदी समेत जरूरी प्रक्रियाएं पहले ही पूरी की जा चुकी हैं। जिन शहरों में चुनाव होने हैं वहां राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। अमृतसर, लुधियाना, जालंधर, पटियाला और मोहाली जैसे प्रमुख शहरी इलाकों में राजनीतिक दल लगातार बैठकें कर रहे हैं। स्थानीय स्तर पर संभावित उम्मीदवारों ने भी जनता के बीच सक्रियता बढ़ा दी है। पार्टियों ने शुरू की चुनावी तैयारी नगर निकाय चुनाव को देखते हुए सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपने-अपने ऑब्जर्वर तैनात कर दिए हैं। कई इलाकों में संभावित उम्मीदवारों ने पोस्टर और बैनर लगाने शुरू कर दिए हैं। कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, भाजपा और शिरोमणि अकाली दल स्थानीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवारों के चयन पर मंथन कर रहे हैं। राजनीतिक दलों का फोकस खासतौर पर शहरी वोट बैंक पर बना हुआ है क्योंकि इन चुनावों का असर आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति पर भी पड़ सकता है। चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए प्रशासन की ओर से भी तैयारियां तेज कर दी गई हैं। अलग-अलग जिलों में अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है और संवेदनशील इलाकों की पहचान की जा रही है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को चुनाव संबंधी जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। चंडीगढ़ और मोहाली सहित कई शहरों में चुनावी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए विशेष टीमें भी बनाई गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि चुनाव आयोग की गाइडलाइन के अनुसार सभी तैयारियां पूरी की जाएंगी। स्थानीय निकाय मंत्री की गिरफ्तारी के बीच चुनाव यह चुनाव ऐसे समय में हो रहे हैं जब पंजाब के स्थानीय निकाय मंत्री को हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया है। उनकी गिरफ्तारी के बाद विभाग का अतिरिक्त प्रभार अब तक किसी अन्य मंत्री या अधिकारी को नहीं सौंपा गया है। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर चर्चा तेज है कि सरकार आगे इस विभाग की जिम्मेदारी किसे देगी। विपक्षी दल इस मुद्दे को चुनाव प्रचार में उठाने की तैयारी कर रहे हैं, जबकि सरकार प्रशासनिक कामकाज प्रभावित न होने का दावा कर रही है। 2027 विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माने जा रहे चुनाव राजनीतिक जानकार इन नगर निकाय चुनावों को 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा संकेत मान रहे हैं। चूंकि चुनाव शहरी क्षेत्रों में हो रहे हैं, इसलिए इन्हें सरकार के प्रदर्शन की परीक्षा के रूप में भी देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत मान पिछले दो महीनों में उन अधिकांश शहरों का दौरा कर चुके हैं जहां चुनाव प्रस्तावित हैं। आम आदमी पार्टी इन चुनावों में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है, जबकि विपक्ष इसे सरकार के खिलाफ माहौल बनाने का अवसर मान रहा है। पिछले चुनावों में सत्ताधारी दल को फायदा मिलता रहा है, लेकिन इस बार मुकाबला कड़ा होने की संभावना जताई जा रही है।

संवेदनशील कदम: चाइल्ड हेल्पलाइन के जरिए 5 महीने के मासूम को लौटा परिवार

योगी सरकार की संवेदनशील पहल: चाइल्ड हेल्पलाइन ने 5 महीने के मासूम को मां की गोद वापस दिलाई तत्काल कार्रवाई होने से फईमा खातून ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का धन्यवाद व्यक्त किया पारिवारिक विवाद में पिता ने दुधमुंहे बच्चे को मां से किया था अलग चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 ने एएचटीयू और बाल कल्याण अधिकारी के साथ त्वरित हस्तक्षेप किया काउंसलिंग के बाद शहाबुद्दीन ने बच्चे को पत्नी को सौंपा मिशन वात्सल्य योजना के तहत बच्चों की सुरक्षा पर सरकार का विशेष फोकस लखनऊ   उत्तर प्रदेश की योगी सरकार महिला एवं बाल कल्याण के क्षेत्र में लगातार संवेदनशील और प्रभावी कदम उठा रही है। खासतौर पर बच्चों की सुरक्षा, गुमशुदा बच्चों की तलाश और पारिवारिक विवाद के चलते मां से अलग हुए मासूमों की मदद को लेकर राज्य सरकार की पहल लगातार असर दिखा रही है। इसका ताजा उदाहरण बिजनौर जिले में सामने आया, जहां चाइल्ड हेल्पलाइन की सक्रियता से 5 माह के दुधमुंहे बच्चे को उसकी मां से मिलाया गया है।  बच्चे को अपने पास रख पत्नी को घर से दिया था निकाल दरअसल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संचालित महिला कल्याण विभाग की मिशन वात्सल्य योजना के अंतर्गत चल रही चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 अब जरूरतमंद बच्चों और परिवारों के लिए बड़ी राहत बनकर उभर रही है। बीती 3 मई चाइल्ड हेल्पलाइन टीम को सूचना मिली थी कि बिजनौर जिले में पारिवारिक विवाद के चलते शहाबुद्दीन नाम के शख्स ने अपने पांच महीने के बच्चे को अपने पास रख उसकी मां को घर से निकाल दिया है। मामला बेहद संवेदनशील था, क्योंकि बच्चा बहुत कम उम्र का था और पूरी तरह अपनी मां की देखभाल और मातृ दुग्ध पर निर्भर था। सूचना मिलते ही चाइल्ड हेल्पलाइन टीम ने इसे गंभीरता से लिया और आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी। बताते चलें कि योगी सरकार के निर्देश पर प्रदेश में महिला एवं बाल संरक्षण से जुड़े मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।  अधिकारियों ने माता-पिता से अलग-अलग बातचीत कर समझाया इसी क्रम में चाइल्डलाइन टीम ने बिना देरी किए संबंधित एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट और स्थानीय थाना के बाल कल्याण अधिकारी से संपर्क किया। संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का आकलन किया और दोनों पक्षों से अलग-अलग एवं संयुक्त रूप से बातचीत की। पारिवारिक विवाद का सीधा असर पांच माह के मासूम पर पड़ रहा था। शिशु की उम्र बेहद कम होने के कारण उसे मां की गोद, मातृ दुग्ध और निरंतर देखभाल की जरूरत थी। अधिकारियों ने बच्चे के पिता शहाबुद्दीन को समझाया कि इतनी कम उम्र में बच्चे को मां से अलग रखना उसके शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास के लिए नुकसानदायक हो सकता है। काउंसलिंग के बाद पिता ने बच्चे को मां के सुपुर्द किया चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम और बाल कल्याण अधिकारियों ने कानूनी एवं सामाजिक पहलुओं से भी पिता को अवगत कराया। टीम ने काउंसलिंग करते हुए मां फईमा और पिता शहाबुद्दीन के बीच संवाद स्थापित कराया और विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने का प्रयास किया। इसका नतीजा यह रहा है कि शहाबुद्दीन बच्चे को अपनी पत्नी फईमा को सुपुर्द करने के लिए सहमत हो गया था। संयुक्त टीम की मौजूदगी में 5 महीने के मासूम को सुरक्षित रूप से उसकी मां की देखरेख में सौंप दिया गया। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया कि बच्चे को आवश्यक मातृ पोषण और उचित देखभाल मिलती रहे। फिलहाल मिशन वात्सल्य योजना के अंतर्गत संचालित चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 लगातार ऐसे मामलों में अहम भूमिका निभा रही है।  फईमा ने बच्चे के पालन पोषण के लिए मुख्यमंत्री से लगाई गुहार गाजियाबाद के लोनी की रहने वाली फईमा खातून ने बताया कि परिवारिक विवाद के चलते पति शहाबुद्दीन ने उन्हें घर से बाहर निकाल दिया था और बच्चा भी छीन लिया था। जिसकी शिकायत उन्होंने चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर की थी। चाइल्ड हेल्पलाइन ने तत्काल मामले को संज्ञान लेते हुए आवश्यक कार्रवाई की थी। उन्होंने बताया कि अधिकारियों ने मुझे मेरा बच्चा दिला दिया है। जिसके लिए मैं माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी और उनकी टीम का धन्यवाद व्यक्त करती हूं। हम सदैव उनके आभारी रहेंगे। फिलहाल पीड़ित फईमा बच्चे को लेकर अपने मायके चली गई है। उन्होंने बच्चे के पालन-पोषण के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मदद की गुहार लगाई है।  भविष्य में भी ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई जारी रहेगीः उप निदेशक महिला कल्याण निदेशालय के उप निदेशक पुष्पेंद्र सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। बिजनौर में 5 माह के शिशु को उसकी मां से मिलाने का मामला इसी संवेदनशील और प्रभावी कार्यप्रणाली का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि शिशु की कम आयु को देखते हुए उसकी सुरक्षा, पोषण और मातृ देखभाल सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक था। चाइल्ड हेल्पलाइन टीम, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट और बाल कल्याण अधिकारियों के समन्वित प्रयास से मामले का शांतिपूर्ण समाधान निकाला गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार बच्चों के सर्वोत्तम हितों की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है और भविष्य में भी ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई जारी रहेगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने घोषणा: यूपी में फिल्म ‘कृष्णावतारम्’ अब टैक्स फ्री

यूपी में फिल्म कृष्णावतारम् टैक्स फ्री लोकभवन सभागार में फिल्म देखने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने की घोषणा फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग में राज्यपाल आनंदीबेन, दोनों डिप्टी सीएम, अन्य मंत्रीगण और जनप्रतिनिधि भी रहे शामिल नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से जोड़ने का संदेश, सीएम योगी ने मंच पर कलाकारों का किया सम्मान   कृष्णा-कृष्णा, राधे-राधे से गूंजा लोकभवन सभागार, भक्तिमय रहा माहौल भगवान कृष्ण के जीवन को मानवीय दृष्टिकोण से दिखाती है फिल्म लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फिल्म कृष्णावतारम् को उत्तर प्रदेश में टैक्स फ्री कर दिया है।  मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद राज्यपाल आनंदीबेन व सीएम योगी ने दोनों उप मुख्यमंत्री, मंत्रीगण और जनप्रतिनिधियों ने एक साथ यह फिल्म देखी। इसके बाद मुख्यमंत्री ने इसे टैक्स फ्री करने को घोषणा की। राजधानी स्थित लोकभवन सभागार उस समय पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में डूब गया, जब फिल्म ‘कृष्णावतारम्’ की विशेष स्क्रीनिंग के दौरान “कृष्णा कृष्णा, राधे राधे” के जयघोष से पूरा सभागार गूंज उठा। इस दौरान सभागार खचाखच भरा रहा और फिल्म को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। इस दौरान सीएम योगी ने मंच पर कलाकारों का सम्मान भी किया।   फिल्म में द्वापर युग और सनातन संस्कृति की झलक फिल्म ‘कृष्णावतारम्’ में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन को मानवीय दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया है। फिल्म में द्वापर युग, भारतीय पुरातन संस्कृति और सनातन परंपरा के विभिन्न आयामों को भव्यता के साथ दर्शाया गया है। फिल्म की सबसे खास बात यह रही कि इसमें भगवान कृष्ण के साथ राधा, रुक्मिणी और सत्यभामा की प्रेम कथाओं को अलग-अलग स्वरूपों में प्रस्तुत किया गया है।  इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वृंदावन बिहारी लाल की जय और भारत माता के जयकारे लगाए। उन्होंने कहा कि यह अद्भुत संयोग है कि आज मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद शपथ ग्रहण करने वाले सभी मंत्री पूरे मंत्रिमंडल के साथ इस अद्भुत कार्यक्रम में सहभागी बने। करीब ढाई घंटे तक सभी एक साथ यहां बैठे रहे और हर एक चेहरे पर नई रौनक दिखाई दे रही थी। उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा और संस्कृति से जुड़ी भगवान कृष्ण पर आधारित इस फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग के साथ हम सभी यहां जुड़े हैं। फिल्म के कलाकार भी यहां उपस्थित हैं। उन्होंने कहा कि फिल्म में मुख्य अभिनेत्री के रूप में सत्यभामा का किरदार निभाने वाली कलाकार का नाम भी संस्कृति है, जिन्होंने इस भूमिका को बेहद प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है। मुख्य अभिनेत्री संस्कृति ने लिया सीएम योगी से आशीर्वाद सीएम योगी ने कहा कि मंत्रिमंडल विस्तार के बाद हम सभी ने एक साथ इस फिल्म को देखा। यह भारत की संस्कृति और परंपराओं से जुड़े इतिहास को समेटते हुए तथा पुरातन विरासत को मुख्य धारा में प्रस्तुत करने वाली फिल्म है। इस दौरान फिल्म की मुख्य अभिनेत्री संस्कृति ने सीएम योगी से आशीर्वाद लिया। सीएम योगी ने निर्माता-निर्देशक और फिल्म से जुड़े सभी कलाकारों को धन्यवाद भी दिया।  जो नए मंत्री बने हैं, उनके स्वागत के लिए यादगार क्षण मुख्यमंत्री ने फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग के लिए पूरी टीम को हृदय से धन्यवाद दिया। इसी के साथ उन्होंने उत्तर प्रदेश में इस फिल्म को टैक्स फ्री करने की घोषणा भी की। उन्होंने सूचना विभाग को प्रत्येक जनपद में इस फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग आयोजित कराने में सहयोग करने का निर्देश दिया, जिससे बच्चे और युवा इसे देखकर अपनी संस्कृति, परंपरा और सनातन विरासत के बारे में समझ सकें। उन्होंने कहा कि जब हम बरसाना, मथुरा और वृंदावन में जाते हैं तो वहां संबोधन राधे-राधे का ही होता है। उन्होंने राज्यपाल आनंदी बेन पटेल का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया।  मुख्यमंत्री ने कहा कि कृष्णावतारम् की मुख्य पात्र संस्कृति राज्यपाल की नातिन हैं और किसी भी नानी के लिए इससे अद्भुत क्षण और कोई नहीं होगा कि पालन-पोषण कर जिस बच्ची को आगे बढ़ाया है, आज उसे इतना बेहतर काम करते हुए वे देख रहीं हैं। उन्होंने कहा कि कलाकार को सम्मान मिलना चाहिए।  हमें अपनी संस्कृति और परंपरा को लेकर ऐसी फिल्में बनानी चाहिए : राज्यपाल राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हमें अपनी संस्कृति और परंपरा को लेकर ऐसी फिल्में बनानी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने नए मंत्रियों को शुभकामनाएं भी दीं।  इस अवसर पर विधान परिषद सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह, केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक सहित कई मंत्री और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। हिंदी, तमिल और तेलुगु में की गई रिलीज यह फिल्म हिंदी, तमिल और तेलुगु भाषाओं में रिलीज की गई है। फिल्म के निर्देशक हार्दिक गज्जर हैं। फिल्म में सिद्धार्थ गुप्ता, संस्कृति, सुष्मिता भट्ट और निवासिनी कृष्णन मुख्य भूमिकाओं में हैं। वहीं, जैकी श्रॉफ और आशुतोष राणा समेत कई बड़े कलाकार अपने किरदारों के जरिये छाप छोड़ने में सफल रहे।

डिजिटल युग की शुरुआत: छत्तीसगढ़ प्रशासन में ई-ऑफिस का प्रभाव

विशेष लेख ई-ऑफिस का विस्तार: छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक कार्यसंस्कृति में डिजिटल क्रांति का आगाज "पारदर्शिता की नई पहचान 'ई-ऑफिस' रायपुर छत्तीसगढ़ में 'ई-ऑफिस' (e-Office) प्रणाली सरकारी कामकाज में पारदर्शिता, गति और जवाबदेही लाकर सुशासन (Good Governance) का नया सवेरा लेकर आई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में, यह डिजिटल पहल भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस और सरकारी प्रक्रियाओं को सरल बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। फाइलों का डिजिटल होना फाइलों में हेराफेरी की गुंजाइश को लगभग खत्म कर देता है, जिससे शासन में पारदर्शिता आती है। कागजी फाइलों के भौतिक परिवहन में लगने वाला समय बचता है, जिससे फाइलें तेजी से आगे बढ़ती हैं और निर्णय जल्दी लिए जाते हैं।            डिजिटल तकनीक आज केवल सूचनाओं के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शासन की कार्यप्रणाली को नया आयाम दे रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया विजन और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन, पारदर्शिता एवं जवाबदेही के संकल्प को साकार करते हुए राज्य में ई-ऑफिस (e-Office) प्रणाली प्रशासनिक व्यवस्था का अनिवार्य हिस्सा बन चुकी है। फाइलों के अंबार से डिजिटल रफ्तार तक           छत्तीसगढ़ में अब शासकीय दफ्तरों की तस्वीर बदल रही है। वह दौर बीत रहा है जब कार्यालयों में धूल खाती फाइलों के ढेर और कछुआ गति से चलने वाली प्रक्रियाएं सामान्य मानी जाती थीं। अब डिजिटल फाइलों के माध्यम से कार्यों में न केवल तेजी आई है, बल्कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता भी सुनिश्चित हुई है। सक्ती जिला रहा अव्वल          ई-ऑफिस प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन से राज्य ने डिजिटल गवर्नेंस में नए मानक स्थापित किए हैं। व्यापक नेटवर्क के तहत प्रदेश के 87 हजार 222 से अधिक अधिकारी-कर्मचारी इस डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ चुके हैं। अब तक 5 लाख 46 हजार 903 से अधिक फाइलों का सफल डिजिटल संचालन किया गया है। 30 अप्रैल 2026 की स्थिति में प्रदेश का 33 वां जिला सक्ती 15 हजार 735 फाइलों के डिजिटल संचालन के साथ राज्य में अग्रणी रहा है। ई-ऑफिस के प्रमुख लाभ         ऑनलाइन फाइल ट्रैकिंग की सुविधा से अब यह जानना आसान है कि कौन सी फाइल किस अधिकारी के पास कितने समय से लंबित है। इससे कार्य के प्रति जवाबदेही बढ़ी है। कुशल निर्णय प्रक्रिया सचिवालय से लेकर जिला स्तर तक फाइलों की आवाजाही त्वरित होने से निर्णय लेने की प्रक्रिया व्यवस्थित और समयबद्ध हुई है। कागज के उपयोग में भारी कमी आने से यह प्रणाली पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा योगदान दे रही है। डिजिटल संधारण (Storage) के कारण दस्तावेजों के फटने, खोने या खराब होने का डर खत्म हो गया है और भंडारण की समस्या भी सुलझ गई है। प्रशिक्षण और तकनीकी मजबूती          किसी भी नवाचार की सफलता उसके उपयोगकर्ताओं पर निर्भर करती है। इसी उद्देश्य से राज्य शासन ने अधिकारी-कर्मचारियों के लिए चरणबद्ध प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए हैं। इस व्यवस्था को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने में एनआईसी (NIC) और चिप्स (CHiPS) की टीमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। भविष्य की राह पूर्णतः डिजिटल प्रशासन          मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ का लक्ष्य आगामी समय में समस्त शासकीय पत्राचार को शत-प्रतिशत ई-ऑफिस के माध्यम से संचालित करना है। यह बदलाव केवल एक तकनीकी सुधार नहीं है, बल्कि यह नागरिक-केंद्रित प्रशासन की ओर बढ़ता एक ठोस कदम है। ऑफिस ने यह सिद्ध कर दिया है कि तकनीक का सही समन्वय प्रशासन को प्रभावी और जनोन्मुखी बना सकता है। छत्तीसगढ़ का यह मॉडल आने वाले समय में सुशासन की एक नई और आधुनिक परिभाषा लिखने के लिए तैयार है।  नितेश चक्रधारी  (सहायक जनसंपर्क अधिकारी)

होमगार्ड सुनील कुमार पर कार्रवाई, वीडियो सामने आने के बाद जांच तेज

 गोरखपुर यूपी के गोरखपुर के एक थाने में बैठकर खुलेआम घूस लेते होमगार्ड का वीडियो वायरल होने पर पुलिस महकमे में हड़कम्प मच गया है। पता चला है कि पासपोर्ट सत्यापन के नाम पर यह पैसा लिया जा रहा था। वीडियो पीपीगंज थाने के अंदर की थी। हालांकि लाइव हिन्दुस्तान इस वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं करता है। वीडियो सामने आने के बाद एसपी नार्थ ने जांच शुरू करा दी है। सीओ कैम्पियरगंज की रिपोर्ट के आधार पर एसएसपी ने पासपोर्ट सत्यापन का काम देखने वाले मुंशी को सस्पेंड कर दिया। दरअसल, घूसखोरी के मामले में पब्लिक जागरूक हो गई है। घूसखोरों को पैसा देने के साथ उनका वीडियो भी बना रही है। पुलिसवालों को भी यह पता है इस वजह से पैसे की वसूली के लिए होमगार्ड या अन्य को वह जिम्मेदारी सौंप रखी है। रविवार को पीपीगंज थाने में तैनात होमगार्ड सुनील कुमार का वीडियो सामने आया। कुर्सी पर बैठा होमगार्ड पैसा लेकर जेब में रख रहा है। पता चला कि पासपोर्ट सत्यापन का काम देखने वाले मुंशी सूर्यकांत भारती ने उसे यह जिम्मेदारी दी थी। वीडियो सामने आने बाद सीओ कैम्पियरगंज अनुराग सिंह ने थाने पर पहुंच कर जांच करने के बाद अपनी रिपोर्ट अधिकारियों को दे दी है। जिसके बाद एसएसपी डॉ. कौस्तुभ ने होमगार्ड को थाने से हटाने के साथ ही उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए कमांडेंट को पत्र लिखा है, वहीं पासपोर्ट का काम देखने वाले मुंशी सूर्यकांत भारती को सस्पेंड कर दिया। इसके साथ ही थाने में हो रही इस वसूली में और किन-किन लोगों की भूमिका है इसकी भी जांच भी शुरू करा दी है। वीडियो पर हो चुकी है कार्रवाई नौसढ़ इलाके में एक ट्रैफिक सिपाही का भी वीडियो सामने आया था जिसमें डीसीएम चालक उसके सामने गिड़गिड़ा रहा था। एसएसपी ने ट्रैफिक सिपाही को निलम्बित कर दिया था। पहले भी हुई है कार्रवाई पूर्व एसएसपी गौरव ग्रोवर के थाने में निरीक्षण के दौरान भी पासपोर्ट के मामले में पैसा लेने की शिकायत मिली थी। तत्कालीन एसएसपी ने पासपोर्ट रजिस्ट्रर पर दर्ज एक नम्बर पर फोन कर पूछा आप का पासपोर्ट मिल गया है कोई खर्च तो नहीं लगा है। पीड़ित ने बताया था कि पांच सौ रुपये मुंशी जी को दिया था। गौरव ग्रोवर ने उस समय भी पासपोर्ट मुंशी को निलंबित किया था।

ग्रामीण सड़क निर्माण में बिहार अव्वल, राष्ट्रीय स्तर पर मिला सर्वोच्च सम्मान

पटना ग्रामीण बसावटों को पक्की सड़क से जोड़ने में बिहार को देश में अव्वल स्थान मिला है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर 10 मई को मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के भेरूंदा में आयोजित राष्ट्रीय समारोह का आयोजन किया गया। इसमें बिहार के ग्रामीण कार्य विभाग को इसके लिए राष्ट्रीय स्तर का सर्वोच्च सम्मान मिला है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत सर्वाधिक गांव और टोलों को पक्की सड़कों से जोड़ने के मामले में बिहार ने यह कीर्तिमान स्थापित किया है। बिहार ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत अब तक 31,287 ग्रामीण बसावटों को बारहमासी पक्की सड़कों से जोड़कर देश भर में सर्वोच्च स्थान हासिल किया है। इस राष्ट्रीय रैंकिंग में मध्य प्रदेश 17,493 बसावटों के साथ दूसरे तथा ओडिशा 16,990 बसावटों के साथ तीसरे स्थान पर रहा है। इसके साथ बिहार ने केवल ग्रामीण सड़कों के निर्माण में ही नहीं, बल्कि उनके गुणवत्तापूर्ण अनुरक्षण में भी राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत ग्रामीण सड़कों के अनुरक्षण एवं रखरखाव की श्रेणी में भी बिहार ने बड़े राज्यों के बीच पूरे देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। रखरखाव के मामले में बिहार दूसरे नंबर पर बिहार के ग्रामीण कार्य विभाग ने 553 करोड़ रुपये खर्च कर ग्रामीण सड़कों का रखरखाव सुनिश्चित किया है। इस श्रेणी में उत्तर प्रदेश 654 करोड़ रुपये के व्यय के साथ प्रथम, बिहार दूसरे तथा पश्चिम बंगाल 497.62 करोड़ रुपये के साथ तीसरे स्थान पर रहा है। विभागीय पदाधिकारी बताते हैं कि ग्रामीण कार्य विभाग के सतत प्रयास से राज्य के हर गांव तक सुरक्षित, सुगम और बारहमासी सड़क संपर्कता सुनिश्चित हो रही है।  

योगी सरकार 13 से 19 मई तक परिषदीय और कस्तूरबा विद्यालयों में आयोजित करेगी ‘भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर-2026’

अब स्कूलों में बच्चों को पढ़ाई के साथ मिलेगी भारतीय भाषाओं और सांकेतिक संवाद की सीख  योगी सरकार 13 से 19 मई तक परिषदीय और कस्तूरबा विद्यालयों में आयोजित करेगी 'भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर-2026'  नई शिक्षा नीति-2020 को जमीन पर उतारते हुए बहुभाषावाद और समावेशी शिक्षा पर जोर – पहली बार इंडियन साइन लैंग्वेज को भी शिविर से जोड़कर बच्चों को दिया जाएगा व्यावहारिक प्रशिक्षण – भविष्य में बच्चों में संवाद क्षमता, भाषाई समझ और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करने वाला बड़ा अभियान बनेगा 'भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर-2026' लखनऊ  योगी सरकार अब शिक्षा को भारतीय संस्कृति, संवाद कौशल और सामाजिक समावेश से जोड़ते हुए नई पीढ़ी को भारतीय भाषाई विरासत से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। इसी क्रम में प्रदेश के परिषदीय और कस्तूरबा विद्यालयों में 13 से 19 मई तक 'भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर-2026' आयोजित किए जाएंगे, जहां बच्चों को पढ़ाई के साथ भारतीय भाषाओं और सांकेतिक संवाद की भी सीख दी जाएगी। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), बीएसए, खंड शिक्षा अधिकारियों और अन्य अधिकारियों को मॉनिटरिंग के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार नई शिक्षा नीति-2020 के विजन को जमीनी स्तर पर लागू करते हुए बहुभाषावाद और समावेशी शिक्षा को बढ़ावा दे रही है। शिविर के दौरान बच्चे अपनी मातृभाषा के साथ दूसरी भारतीय भाषाओं से परिचित होंगे। संवाद कौशल विकसित करेंगे और पहली बार इंडियन साइन लैंग्वेज (आईएसएल) की बुनियादी जानकारी भी प्राप्त करेंगे। योगी सरकार शिक्षा को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखकर बच्चों को भारतीय संस्कृति, विविधता और सामाजिक संवेदनशीलता से जोड़ने का माध्यम भी बना रही है। यह शिविर भाषा सीखने के कार्यक्रम के साथ-साथ नई पीढ़ी को भारतीयता, सांस्कृतिक समरसता और राष्ट्रीय एकता से जोड़ने वाले अभियान के रूप में भी स्थापित हो रहा है। योगी सरकार अब प्रदेश में शिक्षा को भारतीयता, सांस्कृतिक जुड़ाव और सामाजिक समावेश से जोड़कर नई दिशा देने की ओर अग्रसर हो चुकी है। 'भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर-2026' आने वाले समय में बच्चों में संवाद क्षमता, भाषाई समझ और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करने वाला बड़ा अभियान बन सकता है। बहुभाषावाद और भारतीय संस्कृति को मिलेगा बढ़ावा शिविर का उद्देश्य बच्चों में भारतीय भाषाओं के प्रति सम्मान और बहुभाषावाद की समझ विकसित करना है। इसके माध्यम से छात्र-छात्राओं को अपनी मातृभाषा के अलावा दूसरी भारतीय भाषाओं में भी बुनियादी संवाद कौशल विकसित करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और राष्ट्रीय एकता की सबसे मजबूत कड़ी है। इसी सोच के अंतर्गत योगी सरकार द्वारा स्कूलों में यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है। समावेशी शिक्षा को मजबूत करेगी सांकेतिक भाषा की पहल शिविर में इंडियन साइन लैंग्वेज को शामिल किया जाना योगी सरकार की समावेशी शिक्षा नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और आरपीडब्ल्यूडी  एक्ट-2016 के अनुरूप बच्चों को सांकेतिक भाषा के प्रति जागरूक किया जाएगा, ताकि समाज में संवेदनशीलता और समावेश की भावना को बढ़ावा मिल सके। एससीईआरटी द्वारा पीएम ई-विद्या चैनल के माध्यम से इंडियन साइन लैंग्वेज से जुड़ी शैक्षिक सामग्री भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे शिक्षक और छात्र दोनों इसका प्रभावी उपयोग कर सकें।