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12 हजार की नौकरी, लेकिन खाते से ₹165 करोड़ का ट्रांजैक्शन! CBI जांच में सामने आया पैसों का स्रोत

भिलाई खुर्सीपार निवासी अनिमेष सिंह के बैंक खाते में वर्ष 2020 में आए 165 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन मामले की जांच कर रहे केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो4 (सीबीआई) ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डबल बेंच के समक्ष बताया है कि उसे इस राशि के स्रोत और उसके आगे कहां-कहां हस्तांतरित किए जाने संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हो गई है। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति आर.के. अग्रवाल की खंडपीठ में हुई। सीबीआई ने न्यायालय को अवगत कराया कि जांच के दौरान बैंकिंग रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों का विश्लेषण किया गया है। एजेंसी को अब यह जानकारी मिल चुकी है कि संबंधित राशि किन माध्यमों से खाते में पहुंची और बाद में उसका उपयोग अथवा हस्तांतरण किस प्रकार किया गया। सीबीआई ने कोर्ट से कहा है कि वह अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट आगामी सुनवाई में प्रस्तुत करेगी। मामले की अगली सुनवाई जुलाई के अंतिम सप्ताह में प्रस्तावित है। यस बैंक के खाते में हुई थी धनवर्षा यह मामला वर्ष 2020 में तब चर्चा में आया था, जब लगभग 12 हजार रुपये प्रतिमाह आय वाले खुर्सीपार निवासी अनिमेष सिंह के यस बैंक खाते में 165 करोड़ रुपये के लेनदेन की जानकारी सामने आई थी। मामले को लेकर शिकायतें दर्ज कराई गईं और धन के स्रोत को लेकर सवाल उठे। इसके बाद अधिवक्ता सतीश त्रिपाठी, सामाजिक कार्यकर्ता प्रभु नाथ मिश्रा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की थी। शुरुआत से ही राज्य सरकार में स्पष्टता का अभाव अधिवक्ता सतीश त्रिपाठी का कहना है कि इस मामले में राज्य सरकार का रवैया शुरू से ही स्पष्ट नहीं रहा। उनके अनुसार, प्रारंभिक चरण में सरकार की ओर से न्यायालय को बताया गया था कि मामले की जांच आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (एसीबी-ईओडब्ल्यू) से कराई जा रही है, लेकिन बाद में जांच की प्रगति और निष्कर्षों को लेकर लगातार अस्पष्टता बनी रही। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले कांग्रेस सरकार और बाद में भाजपा सरकार के कार्यकाल में भी न्यायालय के समक्ष मामले से संबंधित पूरी और सटीक जानकारी प्रस्तुत नहीं की गई, जिसके कारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया अनावश्यक रूप से लंबी खिंचती रही। परत दर परत मामला उजागर होने की आशा त्रिपाठी का कहना है कि अब जब हाईकोर्ट के निर्देश पर सीबीआई जांच कर रही है, तब मामले की परत-दर-परत जानकारी सामने आ रही है। उनका दावा है कि जांच आगे बढ़ने के साथ कई महत्वपूर्ण तथ्य उजागर हो सकते हैं। फिलहाल सभी की निगाहें जुलाई के अंतिम सप्ताह में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जिसमें सीबीआई अपनी विस्तृत रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर सकती है।  

बेसिक शिक्षा परिषद ने बीएसए से प्रमाणपत्रों की दोबारा जांच और एक्सेल डेटा मांगा

लखनऊ परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों के विशेष परिस्थितियों में होने वाले अंतरजनपदीय स्थानांतरण की प्रक्रिया फिलहाल दस्तावेजों की जांच में उलझ गई है। अधिकांश आवेदनों के साथ लगाए गए प्रमाणपत्र स्पष्ट नहीं होने के कारण उन्हें पढ़ने और सत्यापित करने में दिक्कत आ रही है। इसे देखते हुए बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव ने संबंधित जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) से प्रमाणपत्रों की प्रमाणित प्रतियां दोबारा भेजने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सभी जरूरी जानकारी एक्सेल शीट के माध्यम से भी उपलब्ध कराने को कहा गया है।विशेष परिस्थितियों में अंतरजनपदीय स्थानांतरण के लिए प्रदेशभर से करीब 7000 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें शिक्षक दंपती, दिव्यांग, कैंसर से पीड़ित व डायलिसिस करा रहे शिक्षकों के आवेदन शामिल हैं। इन सभी आवेदनों की स्क्रूटनी (जांच) की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि कई प्रमाणपत्र अस्पष्ट होने के कारण जांच पूरी करने में समय लग रहा है। स्थानांतरण प्रक्रिया में देरी होने की संभावना ऐसे में स्थानांतरण प्रक्रिया में देरी होने की संभावना है। इस बीच परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में नया शैक्षिक सत्र शुरू हो चुका है। ऐसे में परिषद शिक्षक-छात्र अनुपात (पीटीआर) के आधार पर आवेदन के आधार पर इन शिक्षकों का स्थानांतरण करना चाहती है, ताकि जिन जिलों में शिक्षकों की कमी है वहां संतुलन बनाया जा सके। प्रदेश में 1.11 लाख से अधिक परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय संचालित हैं। इनमें 93.91 लाख विद्यार्थी और 3.03 लाख शिक्षक हैं। पूरे प्रदेश का औसत पीटीआर 31 है, लेकिन जिलों के बीच इसमें बड़ा अंतर है। इटावा में एक शिक्षक पर औसतन 17 विद्यार्थी हैं। वहीं श्रावस्ती में सबसे अधिक 71 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक है। विद्यार्थियों की संख्या के लिहाज से सीतापुर सबसे बड़ा जिला है, जहां 3.26 लाख विद्यार्थी, 10,275 शिक्षक और 2,970 विद्यालय हैं। इसके बाद बहराइच में 3.23 लाख और लखीमपुर खीरी में 3.02 लाख विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। विद्यालयों की संख्या हरदोई में 2,825 और लखीमपुर खीरी में 2700 है। परिषद का प्रयास है कि स्थानांतरण के बाद जिलों के बीच शिक्षक-छात्र अनुपात को अधिक संतुलित बनाया जा सके।

राजस्थान में किसानों की आय बढ़ाने के लिए मशरूम खेती पर विशेष अभियान, व्यापक प्रशिक्षण की योजना

उदयपुर  कृषि आयुक्त श्री नरेश कुमार गोयल ने उदयपुर संभाग के दौरे के दौरान कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि में नवाचार, प्राकृतिक खेती तथा उच्च मूल्य वाली फसलों को प्राथमिकता दे रही है। इसी क्रम में प्रदेश के सभी जिलों में मशरूम की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा तथा किसानों को व्यापक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा। उदयपुर संभाग के कृषि अधिकारियों की समीक्षा बैठक में आयुक्त ने निर्देश दिए कि Farmers Fertilisers Framework (FFS) को संभाग के सभी जिलों में तत्काल प्रभाव से लागू किया जाएगा, ताकि उर्वरकों का पारदर्शी, वैज्ञानिक एवं प्रभावी वितरण सुनिश्चित हो सके और किसानों को समय पर आवश्यक सुविधाएं मिलें। बैठक में कृषि शिक्षा को अधिक सशक्त बनाने पर भी जोर देते हुए उन्होंने निर्देश दिए कि राजकीय कृषि महाविद्यालयों के व्याख्याता आधुनिक तकनीक के माध्यम से ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करें, जिससे विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण एवं नियमित शिक्षा उपलब्ध हो सके।  गोयल ने प्रताप विश्वविद्यालय को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर विकसित करने की दिशा में आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश भी दिए, जिससे कृषि शिक्षा, अनुसंधान एवं कौशल विकास को नई गति मिल सके। दौरे के दौरान उन्होंने मशरूम सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तथा प्राकृतिक खेती से संबंधित गतिविधियों का भी निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, प्राकृतिक खेती, मूल्य संवर्धन तथा मशरूम उत्पादन के संबंध में अधिक से अधिक प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाए। आयुक्त कृषि ने कहा कि कृषि विभाग का लक्ष्य किसानों तक नई तकनीक, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण एवं बेहतर सेवाएं पहुंचाकर कृषि को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाना है। इसके लिए सभी अधिकारी योजनाओं का समयबद्ध एवं प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें।

यूट्यूबर्स की बढ़ीं मुश्किलें, दूसरी FIR दर्ज; महिला से उगाही और वीडियो हटाने के बदले ₹2 लाख मांगने का आरोप

दुर्ग-भिलाई छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से जुड़े कथित इंस्टाग्राम चैट विवाद में फंसे 2 यूट्यूबर्स सागर साहू और पुष्पराज सिंह की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। महिला की शिकायत पर पुलिस ने दोनों के खिलाफ ब्लैकमेलिंग और उगाही के आरोप में दूसरी FIR दर्ज की है। दरअसल, महिला ग्राहक सेवा केंद्र चलाती हैं। यूट्यूबर्स ने आरोप लगाया था कि वह ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी कर उनके अंगूठे का निशान लगवाकर खाते से पैसे निकाल लेती है। जबकि महिला का आरोप था कि यूट्यूबर्स ने बातचीत को तोड़-मरोड़कर वीडियो तैयार किया। पीड़िता का कहना है कि सोशल मीडिया से वीडियो हटाने के बदले यूट्यूबर्स ने 50 हजार मांगे। 35 हजार रुपए देने के बाद वीडियो तो हटा दिया गया, लेकिन फिर से 2 लाख रुपए की डिमांड की, न देने पर बदनाम करने और नए वीडियो जारी करने की धमकी दी। पुलिस ने महिला की शिकायत पर आरोपी यूट्यूबर्स के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। मामला पुरानी भिलाई थाना क्षेत्र का है। हालांकि, दोनों ही आरोपी भूपेश बघेल से जुड़े कथित इंस्टाग्राम चैट मामले में जेल में हैं। ब्लैकमेलिंग की पूरी कहानी… जानकारी के मुताबिक शिकायतकर्ता महिला नाम का नेहा मिश्रा है, जो उमदा की रहने वाली है और पिछले 5 सालों से वह गांव में ग्राहक सेवा केंद्र चलाती है। 25 जून को उसने पुरानी भिलाई थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया है कि कुछ समय पहले सागर साहू अपने साथी पुष्पराज सिंह के साथ आधार कार्ड की फोटोकॉपी कराने के बहाने उनके दफ्तर पहुंचे थे। आरोप है कि उन्होंने बात को गलत तरीके से दिखाकर वीडियो बनाया और उसे खबर के रूप में वायरल किया। नेहा ने आरोप लगाया है कि 3 जून को वीडियो हटाने के बदले उनसे 50 हजार रुपए की मांग की गई। बदनामी के डर से उसने अपनी जमा पूंजी से 35 हजार रुपए आरोपियों को दे दिए। रकम मिलने के बाद वीडियो हटा दिया गया था। 2 लाख मांगे, नहीं देने पर नई वीडियो वायरल करने की धमकी यह भी आरोप है कि बाद में आरोपियों ने नेहा से फिर 2 लाख रुपए की मांग की। पैसे न देने पर बदनाम करने और नए वीडियो जारी करने की धमकी दी गई। पैसे न देने पर आरोपियों ने 3 से अधिक अलग-अलग वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए। इससे महिला की सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा और उन्हें अपने ग्राहक सेवा केंद्र जाने में भी शर्मिंदगी महसूस हो रही है। पीड़िता ने पुलिस से मांग की है कि आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। पुलिस बोली- जांच के बाद करेंगे आगे की कार्रवाई पुरानी भिलाई थाना पुलिस ने शिकायत की जांच के बाद शुरुआती तौर पर मामला दर्ज किया है। पुलिस ने सागर साहू और पुष्पराज सिंह के खिलाफ बीएनएस की धारा 308(2) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच तथ्यों और सबूतों के आधार पर की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। 9 दिन पहले भी मामला दर्ज हुआ था यह पहली बार नहीं है जब दोनों यूट्यूबर्स के खिलाफ पुलिस कार्रवाई हुई है। करीब 9 दिन पहले भी उनके खिलाफ एक और मामले में केस दर्ज किया गया था। यह मामला महादेव सट्टा ऐप के कथित संचालक सौरभ चंद्राकर के कथित इंस्टाग्राम अकाउंट से जुड़े वायरल स्क्रीनशॉट से संबंधित था। सोशल मीडिया पर वायरल स्क्रीनशॉट में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नाम से एक मैसेज दिखाया गया था, जिसमें लिखा था- “नंबर भेजो अपना, बात करना चाहते हैं।” इसी स्क्रीनशॉट के आधार पर दोनों यूट्यूबर्स ने खबरें वायरल की थीं। भूपेश बघेल ने बताया था फर्जी कंटेंट वायरल चैट सामने आने के बाद बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता भिलाई-3 थाने पहुंचे थे और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए प्रदर्शन किया था। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी वायरल चैट और उससे जुड़े कंटेंट को पूरी तरह फर्जी बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा था कि उनकी लीगल टीम फर्जी जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगी।

Master Plan-2031 में बड़े बदलाव की उठी मांग, फीस घटाने और FAR बढ़ाने से निवेश-रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

चंडीगढ़  चंडीगढ़ के उद्योग संगठनों ने मास्टर प्लान-2031, औद्योगिक नियमों और लैंड यूज पॉलिसी में ऐसे बदलाव करने की मांग की है, जिससे उद्योगों को लाभ हो। सार्वजनिक सुनवाई के दौरान व्यापारिक और औद्योगिक संगठनों ने स्क्रीनिंग कमेटी को अपने सुझाव दिए।  उद्योग संगठनों की ओर से प्रतिनिधि के रूप में चंडीगढ़ इंडस्ट्रियल कन्वर्टेड प्लॉट ओनर्स एसोसिएशन के चेयरमैन चंदर वर्मा ने कहा कि अतिरिक्त फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) देने के लिए प्रशासन द्वारा रखी गई शर्तें व्यावहारिक नहीं हैं। उनका कहना है कि शहर के बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) की क्षमता को आधार बनाकर FAR सीमित करना उचित नहीं है। यदि इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की आवश्यकता है, तो यह प्रशासन की जिम्मेदारी है और इसका बोझ उद्योगों पर नहीं डाला जाना चाहिए। उद्योग संगठनों ने मांग की है कि अतिरिक्त FAR के लिए ली जाने वाली फीस कम की जाए। उनका कहना है कि पंजाब और हरियाणा में यह शुल्क कम है, इसलिए चंडीगढ़ में भी इसे घटाया जाए, ताकि यहां के उद्योग अन्य राज्यों के उद्योगों के बराबर प्रतिस्पर्धा कर सकें। कन्वर्टेड इंडस्ट्रियल प्लॉट को मिले अतिरिक्त FAR व्यापार संगठनों ने सुझाव दिया कि जिन औद्योगिक प्लॉटों का उपयोग बदला गया है, उन्हें अनिवार्य सर्विस एरिया के कारण होने वाले स्थान के नुकसान की भरपाई के लिए 0.50 अतिरिक्त FAR दिया जाए। साथ ही, फैक्ट्री परिसर में कर्मचारियों के लिए बनाए गए आवास को कुल FAR की गणना से बाहर रखा जाए। उद्योग संगठनों ने प्रशासन के उस प्रस्ताव का भी विरोध किया है, जिसमें अधिक FAR का लाभ लेने के लिए पुरानी इमारत को गिराकर दोबारा निर्माण करना अनिवार्य बताया गया है। उनका कहना है कि मौजूदा इमारतों पर ही अतिरिक्त मंजिलें बनाने की अनुमति दी जाए और मंजूरी की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए। इससे उद्योगों का समय और पैसों दोनों की बचत होगी। ग्राउंड कवरेज और मिक्स्ड लैंड यूज में छूट की मांग संगठनों ने सक्रिय मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के लिए अधिक ग्राउंड कवरेज की अनुमति देने की मांग की है। इसके अलावा, फेज-3 की तरह फेज-1 और फेज-2 के औद्योगिक क्षेत्रों में भी मिक्स्ड लैंड यूज की सुविधा लागू करने का सुझाव दिया गया है। उद्योग संगठनों का कहना है कि अनिवार्य सेंट्रल कोर्टयार्ड (आंगन) जैसे नियमों से भवन का उपयोग प्रभावित होता है और उत्पादन क्षमता घटती है। इसलिए इन प्रावधानों में भी व्यावहारिक बदलाव किए जाने चाहिए। साथ ही, जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) या कब्जे के दस्तावेजों के आधार पर संपत्ति रखने वालों को भी अतिरिक्त FAR का लाभ देने, MSME अधिनियम के तहत सभी सेवा क्षेत्र की गतिविधियों को मान्यता देने तथा भवन उल्लंघन और मिसयूज से जुड़े लंबित नोटिस वापस लेने की मांग भी की गई। उनका कहना है कि यदि प्रशासन अधिक FAR, कम शुल्क, मिक्स्ड लैंड यूज और सरल नियमों वाली संतुलित नीति लागू करता है, तो चंडीगढ़ में नए निवेश को बढ़ावा मिलेगा, उद्योगों का विस्तार होगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

मध्य प्रदेश में बाघों की मौत पर बड़ा खुलासा, हाईकोर्ट में NTCA ने माना- शिकार भी है बड़ी वजह

 जबलपुर  देशभर में बाघों की लगातार हो रही अप्राकृतिक मौतों के बीच राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने हाई कोर्ट के समक्ष एक महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाली स्वीकारोक्ति की है। अप्राकृतिक मौतों में अवैध शिकार प्रमुख कारण अदालत में दायर हलफनामे में एनटीसीए ने स्पष्ट रूप से माना है कि संरक्षित बाघ अभ्यारण्यों तथा उनके आसपास बाघों की हालिया अप्राकृतिक मौतों में अवैध शिकार प्रमुख कारणों में से एक है। स्वयं शीर्ष संरक्षण संस्था ने शिकार की गंभीरता को रेखांकित किया यह स्वीकारोक्ति इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि अब तक बाघों की मौतों को लेकर विभिन्न कारण सामने आते रहे थे, लेकिन कोर्ट के समक्ष स्वयं शीर्ष संरक्षण संस्था ने शिकार की गंभीरता को रेखांकित किया है। संदिग्ध मौतों की न्यायिक समीक्षा की मांग की थी कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया की अध्यक्षता वाली की युगलपीठ के समक्ष यह हलफनामा उस जनहित याचिका के जवाब में प्रस्तुत किया गया, जिसे वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने दायर कर बाघ अभ्यारण्यों के भीतर और आसपास लगातार हो रही संदिग्ध मौतों की न्यायिक समीक्षा की मांग की थी। याचिका में दावा किया गया था कि अनेक मामलों में मौतें संगठित शिकार का परिणाम हैं। भारतीय बाघों के अस्तित्व के लिए सबसे गंभीर खतर एनटीसीए ने अपने जवाब में कहा कि देश के बाहर बाघों के अंगों और उनसे निर्मित उत्पादों की अवैध मांग आज भी भारतीय बाघों के अस्तित्व के लिए सबसे गंभीर खतरों में शामिल है। यही कारण है कि इस चुनौती को प्राधिकरण ने अपनी सर्वोच्च संरक्षण प्राथमिकताओं में रखा है। राज्यों को लगातार अलर्ट जारी किए जा रहा है हलफनामे के अनुसार शिकार और वन्यजीव तस्करी के नेटवर्क पर अंकुश लगाने के लिए राज्यों को लगातार अलर्ट जारी किए जा रहे हैं तथा सीबीआई, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो, डब्ल्यूसीसीबी और संबंधित राज्यों की पुलिस के साथ समन्वित अभियान संचालित किए जा रहे हैं। अब हाई कोर्ट की निगाह केवल इस स्वीकारोक्ति पर नहीं मामले की अगली सुनवाई में अब हाई कोर्ट की निगाह केवल इस स्वीकारोक्ति पर नहीं, बल्कि इस पर भी रहेगी कि देश के राष्ट्रीय पशु की सुरक्षा के लिए घोषित रणनीतियां धरातल पर कितनी प्रभावी सिद्ध होती हैं।

राजस्थान क्रीड़ा अधिनियम के तहत RCA में चुनाव प्रक्रिया में देरी, प्रशासनिक जांच बनी वजह

जयपुर राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के चुनाव अगले 3 महीने के लिए टल गए हैं. इस दौरान आरसीए की एडहॉक कमेटी का कार्यकाल बरकरार रहेगा. सहकारिता विभाग के रजिस्ट्रार डॉ. समित शर्मा ने आदेश जारी कर कार्यकाल को एक बार फिर अगले तीन महीनों के लिए बढ़ा दिया है. हालांकि, इसमें चुनाव से जुड़ी एक और बड़ी अपडेट है. राजस्थान क्रीड़ा अधिनियम, 2005 की धारा 24 (1) (क) के तहत मिली शक्तियों का प्रयोग करते हुए रजिस्ट्रार ने समिति की अवधि को आगे बढ़ाने का फैसला लिया. विवादित मामलों को बताया चुनाव में देरी की वजह एडहॉक कमेटी के कार्यकाल बढ़ाने के पीछे कई अहम वजह बताई जा रही हैं. इसमें पूर्ववर्ती कार्यकारिणी की वित्तीय व प्रशासनिक गड़बड़ियों की जांच करना शामिल है. इसके साथ ही राज्य के विभिन्न जिला स्तरीय खेल संघों के विवादित मामलों की जांच भी अभी प्रक्रियाधीन है, ताकि आरसीए के चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष और नियमों के मुताबिक हो सकें. चुनाव कराने के लिए भी निर्देश जारी इससे पहले, मार्च-2024 में आरसीए के निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए इस तीन महीने की कमेटी का गठन हुआ था. लेकिन कई अपरिहार्य और तकनीकी कारणों से समय सीमा के भीतर चुनाव संपन्न नहीं हो सके. इसके बाद से लगातार 3-3 महीनों के लिए समिति का कार्यकाल बढ़ाया जा रहा है. अब इस ताजा आदेश के बाद समिति को अगले तीन महीनों के भीतर अनिवार्य रूप से चुनाव प्रक्रिया पूरी करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं. इस वजह से फिलहाल चुनाव संभव नहीं इस फैसले के पीछे समिति ने क्रिक्रेट टूर्नामेंट्स को भी अहम वजह बताया है. कमेटी की ओर से तर्क दिया कि वर्तमान खेल सत्र के दौरान खिलाड़ियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए क्रिकेट टूर्नामेंट्स का लगातार आयोजन कराया जा रहा है. इसकी वजह से सीमित समय में चुनाव कराना संभव नहीं हो पाया.

विवेकानंद स्कूल मोड़ से नयासराय तक 6.089 किमी सिक्स लेन सड़क, रांची में यातायात को मिलेगा नया स्वरूप

रांची झारखंड की राजधानी रांची में सड़क ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ी परियोजना शुरू होने जा रही है. करीब 177 करोड़ रुपये की लागत से शहर का पहला सिक्स लेन स्मार्ट रोड बनाया जाएगा. यह परियोजना पथ निर्माण विभाग के तहत स्टेट हाईवे अथॉरिटी ऑफ झारखंड द्वारा क्रियान्वित की जाएगी. टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और सितंबर तक इसे अंतिम रूप देने की योजना है. इसके बाद इसी वर्ष निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना जताई जा रही है. किन इलाकों से होकर गुजरेगी यह सड़क यह प्रस्तावित सिक्स लेन सड़क विवेकानंद स्कूल मोड़ से शुरू होकर जगन्नाथ मंदिर, झारखंड हाईकोर्ट के पास से गुजरते हुए नयासराय आरओबी तक जाएगी. कुल 6.089 किलोमीटर हिस्से को सिक्स लेन में विकसित किया जाएगा. इसके बाद नयासराय आरओबी से आगे रिंग रोड तक लगभग 2.12 किलोमीटर हिस्से का चौड़ीकरण किया जाएगा, जिसे टू लेन के रूप में विकसित किया जाएगा. आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा सड़क ढांचा इस स्मार्ट रोड परियोजना में सिर्फ सड़क चौड़ीकरण ही नहीं बल्कि आधुनिक शहरी सुविधाओं का भी समावेश किया गया है. सड़क के दोनों ओर सर्विस रोड बनाए जाएंगे ताकि स्थानीय यातायात को सुगम बनाया जा सके. इसके साथ ही साइकिल ट्रैक और पैदल यात्रियों के लिए फुटपाथ का निर्माण भी किया जाएगा, जिससे शहर में सुरक्षित और व्यवस्थित आवागमन को बढ़ावा मिलेगा. सौर ऊर्जा से जगमगाएगी सड़क इस परियोजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता सड़क किनारे लगाई जाने वाली सोलर लाइटिंग व्यवस्था है. पूरी सड़क को सौर ऊर्जा आधारित प्रकाश व्यवस्था से रोशन किया जाएगा, जिससे ऊर्जा की बचत होगी और पर्यावरण के अनुकूल व्यवस्था विकसित की जा सकेगी. यह पहल रांची को स्मार्ट सिटी की दिशा में एक कदम और आगे ले जाएगी. सुरक्षा और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान परियोजना में उच्च गुणवत्ता वाली निर्माण सामग्री के उपयोग के साथ-साथ सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा जाएगा. सड़क डिजाइन को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि यातायात दबाव को आसानी से संभाला जा सके और दुर्घटनाओं की संभावना कम हो. पथ निर्माण विभाग ने स्पष्ट किया है कि काम की गुणवत्ता में किसी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी. शहर के विकास में अहम भूमिका यह सड़क न केवल रांची के यातायात को सुगम बनाएगी, बल्कि शहर के विभिन्न हिस्सों को बेहतर तरीके से जोड़ने में भी मदद करेगी. इससे हाईकोर्ट, शैक्षणिक संस्थानों और प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान होगी. साथ ही, यह परियोजना स्थानीय अर्थव्यवस्था और शहरी विकास को भी गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.

सिरोही जिले के मांडवरिया गांव में मृत्युभोज विवाद: आर्थिक तंगी बनी सामाजिक बहिष्कार की वजह

सिरोही राजस्थान के सिरोही जिले के एक गांव में अंतिम संस्कार के बाद आयोजित मृत्युभोज में पारंपरिक घी के मालपुए नहीं परोसने पर 43 परिवारों का कथित तौर पर सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। यह मामला जिले के बरलूट थाना क्षेत्र के मांडवरिया गांव का है, जहां आर्थिक रूप से कमजोर एक परिवार ने इसी महीने अपने एक सदस्य के निधन के बाद मृत्युभोज में सादा भोजन परोसा था। बरलूट थाने के सहायक उपनिरीक्षक रमेश कुमार ने बताया, ''हमें शिकायत मिली है और मामले की जांच की जा रही है। प्रथम दृष्टया यह मामला पुराने विवाद से जुड़ा प्रतीत होता है। जांच पूरी होने के बाद प्राथमिकी दर्ज की जाएगी।'' शिकायत में ये बताया गया शिकायत के अनुसार, आर्थिक तंगी के कारण परिवार मृत्युभोज में परंपरा के अनुरूप घी के मालपुए नहीं बनवा सका और उसकी जगह सामान्य भोजन की व्यवस्था की गई। इससे समुदाय के एक दर्जन से अधिक पंच कथित तौर पर नाराज हो गए और 18 जून को शोकाकुल परिवार के साथ-साथ उसका समर्थन करने वाले 42 अन्य परिवारों के सामाजिक बहिष्कार का फरमान जारी कर दिया। आवश्यक सुविधाओं से भी वंचित किया जा रहा मृतक सदर राम का पांच जून को निधन हुआ था, जबकि मृत्युभोज का आयोजन 17 जून को किया गया। प्रभावित परिवारों का आरोप है कि सामाजिक बहिष्कार के बाद उन्हें आवश्यक सुविधाओं से भी वंचित किया जा रहा है। उनका कहना है कि गांव के दुकानदार उन्हें राशन नहीं बेच रहे हैं, उन्हें गांव के कुएं से पानी भरने नहीं दिया जा रहा है और खेत मालिकों ने उन्हें काम पर रखना भी बंद कर दिया है। प्रभावित परिवारों का क्या कहना? प्रभावित परिवारों में शामिल तेजाराम ने संवाददाताओं से कहा, ''स्थिति बहुत कठिन हो गई है। हमें राशन नहीं दिया जा रहा है और यहां तक कि कुएं से पानी भी नहीं भरने दिया जा रहा सामाजिक बहिष्कार का असर पारिवारिक और सामाजिक संबंधों पर भी पड़ा है। एक अन्य प्रभावित व्यक्ति गोपाल ने कहा, ''20 जून को मेरे एक रिश्तेदार की शादी थी, लेकिन पंचों द्वारा जुर्माना लगाए जाने के डर से मैं उसमें शामिल नहीं हो सका।'' 11 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा ऐसा बताया गया है कि पंचायत के कथित फरमान में चेतावनी दी गई है कि जो भी व्यक्ति इस बहिष्कार का उल्लंघन करेगा, उस पर 11 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा और उसे पूरे समाज के लिए भोज भी कराना होगा। कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है? प्रभावित परिवारों ने 20 जून को बरलूट थाने में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन उनका आरोप है कि अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। बृहस्पतिवार को सभी 43 परिवारों के सदस्य न्याय की मांग को लेकर सिरोही के जिलाधिकारी से भी मिले। इस संबंध में जिलाधिकारी रोहिताश्व सिंह से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी टिप्पणी उपलब्ध नहीं हो सकी।  

बिहार में मत्स्य उत्पादन बढ़ाने की योजना तेज, 2 हजार पंचायतों में सहायकों की तैनाती का प्रस्ताव कैबिनेट को भेजा गया

पटना बिहार के पंचायतों में दो हजार मत्स्य सहायक की नियुक्ति होगी। फिलहाल दो हजार पंचायतों में मत्स्य सहायकों की नियुक्ति की जाएगी। इससे मछली उत्पादक किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने से लेकर तालाब और मत्स्य पालन संबंधी समस्याओं के समाधान तक समय पर सहायता मिल सकेगी। साथ ही, राज्य में मछली उत्पादन बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। मत्स्य सहायक के पदों के लिए डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर वित्त विभाग की प्रशासी पदवर्ग समिति को भेज दिया है। प्रशासी पदवर्ग समिति से हरी झंडी मिलने के बाद विभाग इसे कैबिनेट की स्वीकृति के लिए भेजेगा। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद इन पदों पर नियुक्ति तकनीकी सेवा आयोग के माध्यम से की जाएगी। पहले मत्स्य सहायकों की नियुक्ति संविदा के आधार पर करने की तैयारी थी, लेकिन अब इन्हें नियमित आधार पर नियुक्त करने का निर्णय लिया गया है। योग्यता और वेतन फिशरीज (मात्स्यिकी) में स्नातक या समकक्ष डिग्री अथवा इससे उच्च डिग्री रखने वाले अभ्यर्थी इस पद के लिए पात्र होंगे। वेतन एवं अन्य भत्ते कृषि विभाग के कृषि समन्वयक के समान होंगे। कृषि समन्वयक का पे ग्रेड 2800 रुपये है तथा मूल वेतन 5200 से 20200 रुपये है। क्यों है जरूरत राज्य सरकार ने अगले तीन वर्षों में सालाना 25 लाख टन मछली उत्पादन का लक्ष्य रखा है। वर्तमान में राज्य में मछली उत्पादन 10 लाख 28 हजार टन है। आवश्यकता की पूर्ति के लिए अभी आंध्रप्रदेश सहित अन्य राज्यों से मछली मंगानी पड़ती है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने डेयरी, फिशरीज एवं पशु संसाधन विभाग की समीक्षा बैठक में मछली उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य दिया था। वर्तमान में पंचायत स्तर पर मत्स्य अधिकारी नहीं होने के कारण मछली उत्पादक किसानों को समय पर उचित सलाह नहीं मिल पाती। मत्स्य सहायकों की नियुक्ति होने पर वे किसानों को समेकित खेती के तहत तालाब निर्माण और मछली पालन के लिए प्रोत्साहित करेंगे। बिहार में फिलहाल दो हजार पंचायतों में मत्स्य सहायकों की नियुक्ति की जाएगी। इससे मछली उत्पादक किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने से लेकर तालाब और मत्स्य पालन संबंधी समस्याओं के समाधान तक समय पर सहायता मिल सकेगी। साथ ही, राज्य में मछली उत्पादन बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। कैबिनेट से मंजूरी का इंतजार मत्स्य सहायक के पदों के लिए डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर वित्त विभाग की प्रशासी पदवर्ग समिति को भेज दिया है। प्रशासी पदवर्ग समिति से हरी झंडी मिलने के बाद विभाग इसे कैबिनेट की स्वीकृति के लिए भेजेगा। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद इन पदों पर नियुक्ति तकनीकी सेवा आयोग के माध्यम से की जाएगी। पहले मत्स्य सहायकों की नियुक्ति संविदा के आधार पर करने की तैयारी थी, लेकिन अब इन्हें नियमित आधार पर नियुक्त करने का निर्णय लिया गया है। फिशरीज (मात्स्यिकी) में स्नातक या समकक्ष डिग्री अथवा इससे उच्च डिग्री रखने वाले अभ्यर्थी इस पद के लिए पात्र होंगे। वेतन एवं अन्य भत्ते कृषि विभाग के कृषि समन्वयक के समान होंगे। कृषि समन्वयक का पे ग्रेड 2800 रुपये है तथा मूल वेतन 5200 से 20200 रुपये है। आयोग द्वारा आयोजित लिखित परीक्षा के आधार पर अभ्यर्थियों का चयन किया जाएगा।