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दो साल में 128 प्रोजेक्ट पूरे करने का टारगेट, सिंहस्थ तैयारी में खर्च होंगे 3,000 करोड़

उज्जैन  प्रदेश सरकार ने आगामी सिंहस्थ महापर्व को भव्य, सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से बजट में बड़े पैमाने पर वित्तीय प्रावधान किए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सिंहस्थ क्षेत्र के समग्र विकास और आधारभूत संरचना को मजबूत करने के लिए कुल 13 हजार 851 करोड़ रुपये के विभिन्न कार्य स्वीकृत किए गए हैं। ये राशि पिछले बजट की तुलना में 1055 करोड़ रुपए ज्यादा है। अब तक सरकार सिंहस्थ के लिए 5570 करोड़ रुपए का बजटीय प्रावधान कर चुकी है।वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने अपने बजट भाषण में जिक्र किया कि सिंहस्थ के लिए पहले से ही 13 हजार 851 करोड़ के काम स्वीकृत किए जा चुके हैं। अलग-अलग विभागों के काम चल भी रहे हैं। वित्त मंत्री के दावों के उलट सरकार के ही आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया है कि घाटों की मरम्मत, पुल, सड़कों के अपग्रेडेशन का काम अभी भी पूरा नहीं हुआ है।आयोजन के लिए बनी कैबिनेट सब कमेटी अब तक 10 विभिन्न विभागों के 128 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दे चुकी है, जिनकी कुल अनुमानित लागत ₹13,752 करोड़ है। इनमें सबसे ज्यादा 42 प्रोजेक्ट नगरीय विकास एवं आवास विभाग के जिम्मे हैं। जिनमें 33 प्रोजेक्ट पर ही काम शुरू हुआ है। इन परियोजनाओं का मुख्य फोकस यातायात व्यवस्था को सुगम बनाना, श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुरक्षित करना और शहर की कनेक्टिविटी को बेहतर करना है। स्वीकृत कार्यों में 1,164 करोड़ रुपये की लागत से इंदौर-उज्जैन मार्ग का सिक्स लेन चौड़ीकरण, 1,370 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड हाईवे का निर्माण तथा 701 करोड़ रुपये की लागत से उज्जैन बायपास मार्ग का विकास शामिल हैं। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से सिंहस्थ के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही में सुविधा होगी और ट्रैफिक दबाव कम होगा। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए इन कार्यों हेतु 3 हजार 60 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है, जिससे निर्माण कार्यों को गति मिल सके। सरकार का लक्ष्य है कि सिंहस्थ महापर्व के दौरान देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सड़क नेटवर्क, सुगम परिवहन, सुव्यवस्थित प्रवेश मार्ग और सुरक्षित आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। सरकार का मानना है कि इन आधारभूत परियोजनाओं से न केवल सिंहस्थ की व्यवस्थाएं सुदृढ़ होंगी, बल्कि उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों के दीर्घकालीन शहरी विकास को भी नई दिशा मिलेगी।  समय कम, काम ज्यादा- 26 प्रोजेक्ट अभी कागजों में सिंहस्थ 2028 के शुरू होने में अब महज दो साल का वक्त बचा है, लेकिन स्वीकृत 128 प्रोजेक्ट्स में से केवल 102 पर ही काम शुरू हो पाया है। इसका मतलब है कि 26 महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट अभी भी फाइलों में ही अटके हैं। इन लंबित योजनाओं में सड़कें चौड़ी करने, नए पुलों का निर्माण, घाटों का विस्तार, ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार, श्रद्धालुओं के लिए आवास जैसे प्रोजेक्ट हैं। साथ ही पेयजल और सीवरेज लाइनों जैसी मूलभूत सुविधाओं का काम भी अभी पूरा नहीं हुआ है। योजनाएं जितनी बड़ी और महत्वपूर्ण हैं, उन्हें पूरा करने के लिए समय उतना ही कम बचा है, जो प्रशासनिक मशीनरी के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। हाल ही में मुख्य सचिव अनुराग जैन की अध्यक्षता में हुई विभागीय समीक्षा बैठक में यह बात सामने आई कि प्रदेश में पूंजीगत व्यय की सर्वाधिक 2300 करोड़ रुपए की राशि सिंहस्थ मद में ही बची हुई है, जिसे जल्द से जल्द खर्च करने की आवश्यकता है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग पर सिंहस्थ की तैयारियों का सबसे बड़ा जिम्मा है। नगरीय विकास विभाग, जिस पर सिंहस्थ की तैयारियों का सबसे बड़ा जिम्मा है, को 2760 करोड़ रुपए की लागत वाले 42 प्रोजेक्ट पूरे करने हैं। लेकिन विभाग अब तक केवल 33 प्रोजेक्ट ही धरातल पर उतार पाया है। शिप्रा का शुद्धिकरण: सरकार की सबसे बड़ी चुनौती सिंहस्थ की आत्मा शिप्रा नदी के पवित्र जल में स्नान से जुड़ी है, और सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती करोड़ों श्रद्धालुओं को स्वच्छ और निर्मल जल उपलब्ध कराना है। जल संसाधन विभाग इस दिशा में पांच बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है, लेकिन उनकी प्रगति की रफ्तार चिंताजनक है।     कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट: इंदौर से आने वाले कान्ह नदी के प्रदूषित पानी को शिप्रा में मिलने से रोकने के लिए यह ₹914 करोड़ की सबसे महत्वपूर्ण परियोजना है। सितंबर 2027 की डेडलाइन वाले इस प्रोजेक्ट का काम अब तक केवल 52% ही पूरा हो पाया है।     बैराज निर्माण: शिप्रा और कान्ह नदी पर पानी के बहाव को नियंत्रित करने के लिए बैराज बनाए जा रहे हैं। इंदौर में काम 75% पूरा हो चुका है, लेकिन उज्जैन में यह केवल 20% और देवास में महज 5% ही हुआ है।     शिप्रा को प्रवाहमान बनाना: सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी प्रोजेक्ट के तहत ₹614.53 करोड़ की लागत से शिप्रा को प्रवाहमान बनाने का काम चल रहा है, जो अभी 62% ही पूरा हुआ है।     घाट निर्माण: शिप्रा के दोनों ओर 30 किलोमीटर के क्षेत्र में ₹776 करोड़ की लागत से घाटों का निर्माण होना है, लेकिन यह काम अभी केवल 20% ही आगे बढ़ा है।     शिप्रा पर अतिरिक्त बैराज: उज्जैन और देवास जिले में शिप्रा पर बनने वाले अन्य बैराजों का काम भी केवल 15% ही हुआ है, जबकि इनकी डेडलाइन नवंबर 2027 है।     मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में इन प्रोजेक्ट्स की समीक्षा कर काम में तेजी लाने के सख्त निर्देश दिए हैं। केंद्र से मदद की उम्मीद इस महा-आयोजन के वित्तीय बोझ को कम करने के लिए राज्य सरकार पिछले तीन साल से केंद्र से मदद की गुहार लगा रही है। हालांकि केंद्रीय बजट में सीधे तौर पर कोई घोषणा नहीं हुई, लेकिन राज्य सरकार को उम्मीद है कि केंद्र से किस्तों में 6,000 से 7,000 करोड़ रुपए की राशि प्राप्त होगी।

सीकर का लक्खी मेला: 21 फरवरी से खाटू श्याम दरबार रहेगा लगातार खुला, 18 किमी जिगजैग रास्ता तय करना होगा

सीकर/खाटू धाम राजस्थान के प्रसिद्ध खाटू श्याम मंदिर में इस बार फाल्गुन मेला (Fagun Mela Khatu Shyam 2026) की तैयारियाँ जोरों पर हैं। यह मेला, जिसे फाल्गुन लक्खी मेला भी कहा जाता है, 21 फरवरी से शुरू होकर 28 फरवरी 2026 तक चलेगा और देशभर से लाखों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करेगा। खाटू श्याम मेला कब से है? इस वर्ष खाटू श्याम जी का मेला ( Khatu Shyam Ji ka Mela Kab Hai ) 21 फरवरी 2026 (शनिवार) से 28 फरवरी 2026 (शनिवार) तक आयोजित किया जाएगा। मेला फाल्गुन महीने के दौरान मनाया जाता है, जो भक्ति, संगीत, पूजा एवं उत्सव का प्रतीक है। श्रद्धालु निशान यात्रा, भजन-कीर्तन तथा विशेष पूजा-अर्चना में भाग लेते हैं। खाटू श्याम मंदिर ( Khatu Shyam Mandir ) राजस्थान के सीकर जिले में स्थित है और यह धार्मिक स्थल “हारे का सहारा” के रूप में भक्तों की आस्था का केंद्र माना जाता है। सुरक्षा व्यवस्था एसपी प्रवीण नायक नूनावत ने सुरक्षा खाका खींचते हुए बताया कि इस बार सुरक्षा व्यवस्था को हाईटेक और सख्त रखा गया है. मेले की सुरक्षा के लिए करीब 6500 पुलिसकर्मियों का भारी जाब्ता तैनात किया जाएगा. पूरे मेला क्षेत्र को 22 सेक्टरों में बांटा गया है, ताकि हर कोने पर सीधी नजर रखी जा सके. श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए 400 सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के जरिए पल-पल की मॉनिटरिंग की जाएगी. दर्शन व्यवस्था अधिकारियों ने मंदिर परिसर के साथ-साथ 75 फीट चौड़े दर्शन मार्ग का जायजा लिया, जहां 14 कतारों में लगकर भक्त बाबा के दरबार तक पहुंचेंगे. बता दें कि मुख्य फोकस इस बात पर है कि दर्शन के बाद श्रद्धालुओं की निकासी बिना किसी रुकावट के हो. मंदिर कमेटी के पदाधिकारियों (मंत्री मानवेंद्र सिंह और कोषाध्यक्ष रवि सिंह) ने बताया कि पेयजल, छाया और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं. प्रशासन और मंदिर कमेटी का साझा संकल्प निरीक्षण के दौरान एएसपी दीपक गर्ग और थानाधिकारी पवन कुमार चौबे सहित पुलिस की पूरी टीम मौजूद रही. प्रशासन और श्री श्याम मंदिर कमेटी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि उनका एकमात्र लक्ष्य देशभर से आने वाले लाखों 'श्याम प्रेमियों' को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सुगम दर्शन कराना है. मेला अवधि के दौरान यातायात व्यवस्था को भी डायवर्ट किया जाएगा ताकि कस्बे में दबाव कम रहे. बाबा श्याम की नगरी अब पूरी तरह सज-धज कर अपने भक्तों के स्वागत के लिए तैयार है. राजस्व मंडल अजमेर के अध्यक्ष हेमंत गेरा ने सीकर कलेक्ट्रेट का वार्षिक निरीक्षण किया. जिला कलेक्टर मुकुल शर्मा ने उनका स्वागत किया और गार्ड ऑफ ऑनर दिया. गेरा ने परिसर के सभी कार्यालयों का दौरा किया. हर शाखा में जाकर उन्होंने कर्मचारियों से बात की. एलआर शाखा में फाइल निस्तारण, राजस्व कोर्ट के मामलों, लंबित पत्रावलियों, तामील और रिपोर्ट्स की स्थिति जांची. उन्होंने ई-फाइलों का जल्द निपटारा करने, फालतू फाइलें लटकाए नहीं रखने के निर्देश दिए. मुख्यमंत्री बजट की घोषणाओं और राजस्थान संपर्क पोर्टल के शिकायतों का समय पर समाधान करने को कहा. अतिरिक्त कलेक्टर रतन कुमार, अतिरिक्त कलेक्टर भावना शर्मा, एसडीएम निखिल कुमार सहित राजस्व अधिकारी उपस्थित थे. खाटू श्याम मेले में इस बार नई व्यवस्थाएं और सुविधाएं     इस बार प्रशासन ने मेले में भीड़ और सुरक्षा को देखते हुए कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं:     भीड़ नियंत्रण के लिए विशाल भक्ति मार्ग और अलग-अलग प्रवेश–निकास रूट बनाए गए हैं।     भीड़, सुरक्षा और आपातकालीन सहायता के लिए विशेष सीसीटीवी निगरानी और अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है।     मेले में VIP दर्शन की व्यवस्था हटाई गई है ताकि सभी श्रद्धालु समान रूप से दर्शन कर सकें। खाटू श्याम मेले में पहुंचने के लिए दिल्ली–जयपुर से ट्रेन और बस रूट खाटू श्याम वार्षिक मेले के लिए रेलवे और राजस्थान रोडवेज प्रशासन ने विशेष व्यवस्थाएं की हैं। मेला के दौरान यात्रा को सहज बनाने के लिए रेलवे विभाग विशेष इंतजाम किए हैं। फाल्गुन मेले का प्लान बनाने वालों के लिए खुशखबरी, शुरू हो रही हैं स्पेशल ट्रेनें खाटू श्यामजी के लिए यह है ट्रेन रूट भारतीय रेलवे ने मेले के लिए दो मुख्य विशेष ट्रेनें चलाई हैं। एक कुरुक्षेत्र से फुलेरा और दूसरी फुलेरा से दिल्ली सराय रोहिल्ला मार्ग पर, ताकि दिल्ली और आस-पास के इलाकों से श्रद्धालु आराम से पहुंचना सुनिश्चित कर सकें। इसके अलावा मेले के दौरान रोजाना कई ट्रेनें रिंगस स्टेशन तक चलेंगी, जिससे भक्तों को हर 20 मिनट में ट्रेन उपलब्ध होगी। रींगस से मंदिर तक का सफर मेले के दौरान भीड़ प्रबंधन के लिए रींगस रोड स्थित श्याम वाटिका के पीछे लगभग 40 बीघा भूमि पर तीन अतिरिक्त बैकअप ब्लॉक भी तैयार किए गए हैं. इनका उपयोग तब किया जाएगा जब लखदातार मैदान और चारण मेला मैदान में श्रद्धालुओं की संख्या क्षमता से अधिक हो जाएगी. मेले के दौरान पदयात्रियों को रींगस से खाटूधाम तक करीब 38 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी होगी. सुरक्षा के लिहाज से इस पूरे मार्ग को ‘नो व्हीकल्स जोन’ घोषित किया जाएगा, ताकि भक्तों को मार्ग में किसी वाहन के कारण परेशानी न हो. 18 किलोमीटर का जिगजैग मार्ग खाटू पहुँचने के बाद भी दर्शन की राह आसान नहीं होगी. प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए 6 ब्लॉकों के भीतर कुल 18 किलोमीटर लंबा जिगजैग मार्ग बनाया है. इस सर्पाकार मार्ग से गुजरते हुए ही भक्त मंदिर तक पहुँच पाएंगे. श्री श्याम मंदिर कमेटी ने लखदातार मैदान में रंग-रोगन, रोशनी और पेयजल जैसी सभी मूलभूत सुविधाओं का कार्य पूरा कर लिया है. मेले की सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल और स्वयंसेवकों की तैनाती की जाएगी ताकि उत्सव शांतिपूर्वक संपन्न हो सके. खाटू के लिए यह है बस रूट दिल्ली और जयपुर से हीरापुरा बस स्टैंड तथा अन्य रोडवेज डिपो से खाटू धाम के लिए नियमित बस सेवाएं उपलब्ध हैं। जयपुर से रींगत होते हुए स्थानीय बसें या साझा टैक्सी से खाटू तक की यात्रा आसान रहती है। इस बार जयपुर से सभी बसें अजमेर रोड स्थित नए बस स्टैंड से संचालित हो रही हैं। मेले का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व फाल्गुन मेला खाटू श्याम जी के प्रति श्रद्धा और भक्ति का प्रमुख उत्सव है। पुराणों के अनुसार श्याम जी हारे हुए व्यक्ति के सहारा देने वाले … Read more

वर्षा और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों के हित में तत्पर है सरकार: कृषि मंत्री कंषाना

वर्षा एवं ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों के हित में तत्पर है राज्य सरकार : कृषि मंत्री  कंषाना भोपाल किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री  एदल सिंह कंषाना ने कहा है कि राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है और हर परिस्थिति में किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है। हाल ही में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में हुई वर्षा एवं ओलावृष्टि से प्रभावित फसलों के नुकसान की राहत राशि देने के लिए गंभीरता से कार्य किया जाएगा। कृषि मंत्री  कंषाना ने कहा कि जिन-जिन जिलों में वर्षा और ओलावृष्टि की घटनाएं सामने आई हैं, वहां तत्काल प्रभाव से जांच के आदेश दे दिए गए हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि सर्वे कार्य पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ शीघ्र पूर्ण किया जाए, ताकि प्रभावित किसानों को राहत राशि का भुगतान समय पर किया जा सके। मंत्री  कंषाना ने आश्वासन दिया कि किसी भी किसान को नुकसान की स्थिति में अकेला नहीं छोड़ा जाएगा और राज्य सरकार हर संभव सहायता प्रदान करेगी। कृषि मंत्री  कंषाना ने किसानों से अपील की है कि वे धैर्य बनाए रखें तथा स्थानीय प्रशासन के साथ सहयोग करें। सरकार की प्राथमिकता है कि किसानों को शीघ्र राहत प्रदान कर उनकी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ किया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हित में निरंतर कार्य कर रही है और भविष्य में भी किसान कल्याण के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगी।  

रोबोडॉग विवाद पर चिराग पासवान का सख्त रुख, समिट खत्म होते ही जांच और एक्शन

पटना केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने एआई समिट में प्रदर्शित चीनी रोबोटिक डॉग को लेकर उठे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे 'बड़ी लापरवाही' बताया। उन्होंने कहा कि समिट समाप्त होने के बाद सरकार इस मामले में आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेगी। गलगोटिया यूनिवर्सिटी से जुड़ा यह विवाद इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान सामने आया, जहां एक रोबोटिक डॉग को विश्वविद्यालय के 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' द्वारा विकसित बताया गया था। बाद में स्पष्ट हुआ कि यह प्रोडक्ट चीन की कंपनी यूनिट्री रोबोटिक्स द्वारा विकसित यूनिट्री जीओ2 मॉडल है। पत्रकारों से बातचीत में चिराग पासवान ने कहा कि किसी विश्वविद्यालय द्वारा किसी प्रोडक्ट को प्रदर्शित कर उसका स्वामित्व गलत तरीके से लेना पूरी तरह अनुचित है। यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि समिट एक वैश्विक मंच है और पूरी दुनिया की नजर इस पर रहती है। ऐसे घटनाक्रम भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने उस प्रतिनिधि के बयान का भी जिक्र किया, जिसने रोबोटिक डॉग के बारे में जानकारी दी थी। चिराग ने कहा कि वह शब्दों के चयन से स्थिति को उचित ठहराने की कोशिश करती दिखीं और बाद में इसे गलतफहमी बताया गया। जब देश में इतने बड़े स्तर का एआई सम्मेलन हो रहा हो, तब इस तरह की घटनाएं चिंता का विषय बन जाती हैं। केंद्र सरकार ने भी अपनी पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया में कहा कि ऐसे मंचों पर केवल वास्तविक और प्रमाणिक कार्यों को ही प्रदर्शित किया जाना चाहिए और किसी भी प्रकार की भ्रामक जानकारी को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा। विवाद उस समय शुरू हुआ जब विश्वविद्यालय के पवेलियन में मौजूद कम्युनिकेशन प्रोफेसर नेहा सिंह ने एक साक्षात्कार में दावा किया कि प्रदर्शित रोबोटिक डॉग विश्वविद्यालय द्वारा विकसित किया गया है और उसका नाम 'ओरियन' बताया। बाद में उन्होंने इसे संचार की गलती बताया। विश्वविद्यालय ने भी आधिकारिक बयान जारी कर भ्रम के लिए माफी मांगी और कहा कि संबंधित प्रतिनिधि को तकनीकी जानकारी नहीं थी और उन्हें मीडिया से बात करने की अनुमति भी नहीं थी।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल: MYH अस्पताल की HIV यूनिट तक पहुंचीं बिल्लियां

इंदौर महाराजा यशवंतराव अस्पताल (एमवायएच) में एक बार फिर लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। इस बार एचआइवी संक्रमित मरीजों की यूनिट और दवा कक्ष तक बिल्लियों की पहुंच देखी गई। इतना ही नहीं, अस्पताल के ओपीडी परिसर में एक बिल्ली ने तीन बच्चों को जन्म भी दिया। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब करीब छह महीने पहले इसी अस्पताल के नवजात वार्ड में चूहों द्वारा दो नवजातों को कुतरने से उनकी मौत हो गई थी। ओपीडी में बिल्ली ने दिए तीन बच्चे अस्पताल के बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) में एक बिल्ली ने तीन बच्चों को जन्म दिया। इसके बाद ओपीडी और आसपास के हिस्सों में बिल्लियों की आवाजाही लगातार देखी गई। अस्पताल प्रबंधन ने तीन में से दो बच्चों को रेस्क्यू कर लिया है, जबकि तीसरे को पकड़ने की कार्रवाई जारी है। एचआईवी दवा कक्ष तक पहुंचीं बिल्लियां जानकारी के अनुसार एचआईवी संक्रमित मरीजों को हर महीने मुफ्त दवाएं देने वाले दवा कक्ष में भी बिल्लियों के घूमने और गंदगी फैलाने की शिकायत मिली है। इसी कक्ष में नवजात शिशुओं को दी जाने वाली सेप्ट्रोन दवाएं भी रखी जाती हैं। इससे संक्रमण नियंत्रण और स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। एआरटी केंद्र के कर्मचारी करते मिले देखभाल अस्पताल के एआरटी (एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी) एकीकृत परामर्श केंद्र के कुछ कर्मचारी बिल्लियों की देखभाल करते नजर आए। इससे दवा कक्ष की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंताएं जताई जा रही हैं। पुरानी घटनाओं से नहीं लिया सबक करीब छह महीने पहले अस्पताल के नवजात वार्ड में चूहों ने दो बच्चों को कुतर दिया था, जिससे उनकी मौत हो गई थी। उस घटना के बाद भी अस्पताल परिसर में जानवरों की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी है। लगातार सामने आ रही घटनाओं ने अस्पताल की स्वच्छता और प्रबंधन व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रबंधन की कार्रवाई और जुर्माना मामले संज्ञान में आते ही हाउसकीपिंग कंपनी को परिसर खाली कराने और बिल्लियों को पकड़ने के लिए पिंजरे लगाने के निर्देश दिए गए हैं। एमजीएम डीन डा. अरविंद घनघोरिया ने कहा कि इस मामले में जीरो टालरेंस की नीति अपना रहे हैं। ओपीडी दोपहर दो बजे के बाद बंद हो जाती है, इसलिए संक्रमण का खतरा नहीं है। साथ ही पेस्ट और एनिमल कंट्रोल एजेंसी की जवाबदेही भी तय की जाएगी। कंपनी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

भीषण सड़क हादसा: बसों की भिड़ंत में टेंपो के उड़े टुकड़े, 2 लोगों ने तोड़ा दम

पटना बिहार के दरभंगा में गुरुवार को तेज रफ्तार और लापरवाही ने दो जिंदगियां खत्म कर दी। ओवरटेक के दौरान दो तेज रफ्तार बसों की टक्कर से टेंपो के परखच्चे उड़ गए और उस पर सवार दो लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। मंजर देख लोग सिहर उठे। बसों के बीच ओवरटेक की वजह से हुआ हादसा मिली जानकारी के अनुसार, घटना सोनकी थाना क्षेत्र के ग्रीन सिटी के समीप की है। मृतकों की पहचान बहेड़ा थाना क्षेत्र के रढ़ियाम गांव निवासी गंगा साफी (37 वर्ष) और जमालपुर के खैसा गांव निवासी टेंपो चालक जदी अहमद (30 वर्ष) के रूप में हुई है। घटना के संबंध में बताया जा रहा है कि  कुशेश्वरस्थान से दरभंगा की ओर आ रही दो बसें दरभंगा–बेनीपुर स्टेट हाईवे-56 पर खतरनाक तरीके से एक-दूसरे को ओवरटेक कर रही थीं। इसी दौरान संतुलन बिगड़ा और तेज रफ्तार बस ने आगे चल रहे टेंपो को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भयानक थी कि टेंपो पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसमें सवार दोनों व्यक्तियों ने मौके पर दम तोड़ दिया। पुलिस ने दोनों बसों और क्षतिग्रस्त टेंपो को कब्जे में लिया हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। सूचना मिलते ही सोनकी थानाध्यक्ष शशिकांत झा पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों बसों और क्षतिग्रस्त टेंपो को अपने कब्जे में ले लिया है। पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए दरभंगा मेडिकल  पुलिस का कहना है कि मामला दर्ज कर लिया गया है और दोषी बस चालकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

अपराधियों तक पहुंची देवास पुलिस, साहस और सूझबूझ की अद्भुत कहानी

देवास कहा जाता है कि पुलिस के हाथ बहुत लम्बे होते हैं। इस कहावत को देवास पुलिस ने चरितार्थ कर दिखाया है। जनवरी में हुई दो लूट की वारदातों के आरोपितों को पुलिस ने देश के पूर्वी तट उड़ीसा और पश्चिमी तट गुजरात से पकड़ा है। आरोपितों से लूट का पूरा माल भी बरामद किया गया और वाहनों को भी जब्त किया गया है। जनवरी महीने में शहर की सर्द शामें यूं तो सामान्य थीं लेकिन 8 जनवरी की शाम राधागंज क्षेत्र में एक वारदात ने माहौल गर्मा दिया। यहां एक बुजुर्ग महिला अपने पोते को स्कूल से लेकर घर जा रही थीं, तभी दो बाइक सवारों ने उनकी चेन लूट ली और पलक झपकते ही ओझल हो गए। घटना के कुछ ही दिन बाद 19 जनवरी को मंदिर जा रहीं उषा नवरंगे भी इसी अंदाज में लुटेरों का शिकार बन गईं। कुछ ही दिनों के अंतर में एक ही तरीके से हुई दो घटनाओं ने पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल बना दिया। पहली घटना राधागंज निवासी रुकमणी शर्मा के साथ और दूसरी घटना उषा नवरंगे के साथ हुई थी। दोनों बुजुर्ग महिलाओं को बीएनपी थाना क्षेत्र के राधागंज में मोटरसाइकिल सवार बदमाशों का शिकार बनी। बदमाशों ने उनके गले से सोने की चेन झपट ली और भाग निकले। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक पुनीत गेहलोद ने इसे प्रतिष्ठा का प्रश्न मान लिया। उन्होंने साफ शब्दों में निर्देश दिए कि चेन लूटने करने वाले आरोपितों को हर हाल में गिरफ्तार किया जाए और महिलाओं में भरोसा लौटाया जाए। एसपी ने स्वयं मानिटरिंग शुरू की, रोजाना प्रगति की समीक्षा की और तकनीकी तथा फील्ड दोनों स्तर पर समंवय बढ़ाया। एएसपी जयवीरसिंह भदौरिया और डीएसपी संजय शर्मा के मार्गदर्शन में चार टीमें गठित की गईं। शहर में जनसहयोग से लगे सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालना शुरू हुआ। करीब 800 से अधिक कैमरों की रिकार्डिंग देखी गई। दिन-रात एक कर पुलिसकर्मी स्क्रीन पर नजरें गड़ाए रहे। मोटरसाइकिल का रूट, संदिग्धों की चाल, कपड़े, भागने का पैटर्न— हर छोटी से छोटी बात को जोड़ा गया। आखिरकार कैमरों की तीसरी आंख ने उन चेहरों की पहचान कर ली जो हर वारदात के बाद गायब हो जाते थे। तकनीकी साक्ष्यों ने पुलिस को मध्यप्रदेश की सीमाओं से बाहर का रास्ता दिखाया। सुराग गुजरात और उड़ीसा तक जा पहुंचे। एसपी गेहलोद ने खुद उड़ीसा के वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क कर स्थानीय सहयोग सुनिश्चित किया। पुलिस की टीमें सादे कपड़ों में 1300 किलोमीटर दूर गंजम जिला पहुंचीं। कई दिन तक हुलिया बदलकर, कभी होटल तो कभी ढाबों में रुकते हुए निगरानी की गई। आखिरकार आरोपित कान्हू चरण बधई निवासी ग्राम झिटीकाबाड़ी जिला गंजम को पकड़ा गया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह का दूसरा सदस्य गुजरात के सूरत में छिपा है। देवास पुलिस की टीम ने सूरत में भी कई दिनों तक डेरा डाला। स्थानीय गलियों की खाक छानी गई। अंततः वहां से धवल कुमार पारेख और उसकी पत्नी रेखाबाई को गिरफ्तार किया गया। जांच में सामने आया कि पत्नी को गिरोह की हर गतिविधि की जानकारी थी और चोरी का माल ठिकाने लगाने में उसकी अहम भूमिका रहती थी। देश के कई राज्यों में घूमे आरोपी गिरफ्तार आरोपितों ने देवास और रतलाम सहित कई क्षेत्रों में वारदातें करना स्वीकार किया है। जांच में पता चला कि यह अंतरराज्यीय गिरोह गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश, तेलंगाना में 50 से अधिक वारदातों को अंजाम दे चुका है। कई बार पकड़े जाने और जमानत पर छूटने के बाद भी उन्होंने अपराध का रास्ता नहीं छोड़ा। देवास पुलिस ने न केवल देवास में हुई वारदातों को ट्रेस किया, बल्कि रतलाम की वारदात का खुलासा भी किया और लूटी गई सोने की चेन और पेंडेंट सहित कुल 6 लाख 45 हजार रुपये का माल बरामद कर लिया।  

‘जनहित भूल चुकी है सरकार’— शिवपाल यादव ने बीजेपी पर साधा निशाना

लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाज़ी तेज हो गई है। शिवपाल यादव ने राज्य सरकार और उपमुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोलते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठी सरकार जनता के मूल मुद्दों से भटक चुकी है और जमीनी हकीकत से पूरी तरह कटी हुई है। सरकार को जनता के प्रति जवाबदेही तय करनी होगी समाजवादी पार्टी के महासचिव एवं वरिष्ठ नेता शिवपाल यादव ने डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल बयानबाज़ी से काम नहीं चलेगा, सरकार को जनता के प्रति जवाबदेही तय करनी होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार गंभीर नहीं है। शंकराचार्य का अपमान हुआ शिवपाल यादव ने हाल ही में शंकराचार्य से जुड़े विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि “पूजनीय शंकराचार्य जी का अपमान हुआ है।” उन्होंने यह भी कहा कि “डिप्टी सीएम बटुको को लाकर कितना भी ढकने की कोशिश कर लें, लेकिन अपमान हो चुका है।” साथ ही उन्होंने कहा कि डिप्टी सीएम भी सरकार का हिस्सा हैं, इसलिए इस पूरे प्रकरण की जिम्मेदारी सरकार पर है। नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई हो वेब सीरीज को लेकर भी उन्होंने टिप्पणी की। शिवपाल यादव ने कहा कि किसी भी वेब सीरीज या फिल्म के निर्माण में कानून का पालन अनिवार्य है। जो लोग नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि यह उनका आंतरिक मामला है और इस पर उन्हें कुछ नहीं कहना है। शिवपाल यादव के इस बयान के बाद प्रदेश की सियासत में एक बार फिर गर्माहट बढ़ गई है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाज़ी और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

20 फरवरी के बाद झारखंड में ‘मई जैसी’ तपिश, पारा 34°C तक चढ़ने का अनुमान

रांची झारखंड में अब मौसम तेजी से बदल रहा है। दिन में तेज धूप लोगों को परेशान कर रही है, तो शाम होते ही ठंड का अहसास होने लगता है। राज्य के कई जिलों में दिन और रात के तापमान में बड़ा अंतर देखा जा रहा है, जिससे लोगों को सेहत को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। तापमान 30 से 34 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान झारखंड में धीरे-धीरे गर्मी बढ़ने लगी है। खासकर दोपहर के समय कड़ी धूप निकल रही है, जिससे गर्मी महसूस हो रही है, लेकिन जैसे ही शाम होती है, मौसम अचानक ठंडा हो जाता है। कई जगहों पर तो लोगों को सुबह-शाम अब भी स्वेटर पहनना पड़ रहा है। रांची, खूंटी, लोहरदगा, पलामू और राज्य के मध्य व पश्चिमी हिस्सों में ऐसा मौसम ज्यादा देखने को मिल रहा है। उत्तर-पूर्वी झारखंड के देवघर, धनबाद, दुमका, गिरिडीह, गोड्डा, जामताड़ा, पाकुड़ और साहिबगंज जिलों में तापमान में हल्की बढ़ोतरी हो रही है। इन इलाकों में अधिकतम तापमान 30 से 34 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। गोड्डा और पाकुड़ में 20 फरवरी तक तापमान 34 डिग्री तक पहुंच सकता है। वहीं, न्यूनतम तापमान 12 से 16 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। सुबह के समय हल्का कुहासा छाए रहने की संभावना है, जिससे दृश्यता पर असर पड़ सकता है। उत्तर-पश्चिमी जिलों में दिन-रात के तापमान में बड़ा अंतर पलामू, कोडरमा, गढ़वा, लातेहार और लोहरदगा में दिन का तापमान 30 से 33 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। जबकि रात में तापमान 10 से 12 डिग्री तक गिर सकता है। दिन और रात के तापमान में ज्यादा अंतर होने के कारण लोगों को सेहत का खास ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि इस बदलाव से सर्दी-जुकाम या अन्य मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। दक्षिणी जिलों में गर्मी का असर ज्यादा जमशेदपुर, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां में न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस या उससे थोड़ा ज्यादा रह सकता है। यहां के लोगों को अभी से गर्मी का एहसास होने लगा है। हालांकि शाम के समय हल्की ठंड राहत दे रही है। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दो-तीन दिनों में न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक और बढ़ोतरी हो सकती है।  

7 पद्मश्री एवं 6 संगीत नाटक अकादमी अवॉर्डी नृत्य कलाकारों के साथ ही उदीयमान कलाकारों की प्रस्तुतियाँ

भोपाल. विश्वविख्यात मंदिर की पृष्ठभूमि में आयोजित होने वाला 52वां अंतर्राष्ट्रीय खजुराहो नृत्य समारोह इस वर्ष भी भारतीय शास्त्रीय नृत्य की विविध शैलियों का अद्भुत संगम प्रस्तुत करेगा। इस 7 दिवसीय सांस्कृतिक महोत्सव में देश-विदेश के ख्यातिप्राप्त कलाकार अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगे। समारोह में भरतनाट्यम, कथक, ओडिसी, कुचिपुड़ी, मणिपुरी और मोहिनीअट्टम जैसी प्रमुख शास्त्रीय शैलियों की प्रस्तुति दी जाएगी। प्राचीन मंदिरों की भव्यता और प्रकाश सज्जा के बीच कलाकारों की अभिव्यक्ति भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपरा को जीवंत करेगी। हर वर्ष की तरह इस बार भी देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक और कलारसिक शामिल होंगे। यह समारोह न केवल सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देता है, बल्कि भारतीय शास्त्रीय नृत्य की वैश्विक पहचान को भी सशक्त करता है। संस्कृति विभाग की उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी द्वारा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग, दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, नागपुर एवं जिला प्रशासन – छतरपुर के सहयोग से ‘52वाँ खजुराहो नृत्य समारोह’ 20 से 26 फरवरी, 2026 तक मंदिर परिसर, खजुराहो में आयोजित किया जा रहा है। इस 7 दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त आयोजन में देश के सुप्रतिष्ठित एवं उदीयमान नर्तक – नृत्यांगनाएं अपनी साधनारत प्रस्तुतियों से भारतीय शास्त्रीय नृत्य की विविध परम्पराओं को मंच पर साकार करेंगी। साथ ही इस समारोह को सांस्कृतिक समागम बनाने की दृष्टि से विविध कला विधाओं से सम्बंधित गतिविधियों को आयोजित किया जा रहा है, ताकि यह समारोह भव्य और स्मरणीय बन सके। ‘नटराज’ थीम : नृत्य, लय और सृजन का प्रतीक मुख्यमंत्री डॉ. यादव के विजन अनुसार इस वर्ष खजुराहो नृत्य समारोह को शास्त्रीय नृत्य की प्रेरणा और आधार ‘नटराज’ की थीम पर केंद्रित किया गया है। यह थीम भारतीय दर्शन, सृजन और लयबद्ध जीवन दृष्टि का प्रतीक है, जो समारोह को एक गहन आध्यात्मिक आयाम प्रदान करेगा। पद्म पुरस्कार प्राप्त, संगीत नाटक अकादमी सम्मानित एवं राष्ट्रीय – राज्य स्तरीय अलंकरणों से विभूषित कलाकारों के साथ उदीयमान प्रतिभाओं को समान मंच प्रदान किया जा रहा है, जिससे नृत्य की गुरु – शिष्य परम्परा और निरंतर एवं सुदृढ़ हो सके। समारोह में कथक की 6, भरतनाट्यम की 4, ओडिसी की 5, मणिपुरी की 2, कथकली की 1, कुचिपुड़ी की 2, मोहिनीअट्टम की 1, सत्रिया की 1 एवं छाऊ नृत्य की 1 प्रस्तुतियाँ होगी। 52वें खजुराहो नृत्य समारोह में प्रथम बार सांस्कृतिक रैली में विभिन्न विधाओं एवं परंपराओं के नृत्य कलाकार खजुराहो के विभिन्न मार्गों से होते हुए मुख्य कार्यक्रम स्थल तक पहुंचेंगे। महोत्सव में देश के 10 से 16 वर्ष आयु वर्ग के युवा शास्त्रीय नृत्य कलाकारों को सहभागिता के लिए एक राष्ट्रीय मंच "राष्ट्रीय बाल नृत्य महोत्सव – 2026" प्रदान किया जा रहा है। प्रस्तुति देने के लिए वरिष्ठ कला गुरुओं द्वारा 31 नृत्य कलाकारों का चयन किया गया है। पर्यटकों और संस्कृति प्रेमियों के लिए खजुराहो नृत्य समारोह के दौरान आनुषंगिक गतिविधियों का संचालन किया जाएगा। इसमें खजुराहो कार्निवाल, ‘नटराज’ प्रदर्शनी में 50 नृत्यरूपों का प्रदर्शन, लयशाला : नृत्य शैलियों के श्रेष्ठ गुरुओं एवं शिष्यों का संगम, कलावार्ता : कलाविदों एवं कलाकारों के मध्य संवाद, आर्ट – मार्ट : चित्रकला प्रदर्शनी, सृजन : पारम्परिक शिल्प निर्माण तकनीक का प्रदर्शन, हुनर : पारम्परिक शिल्पों का प्रदर्शन सह विक्रय और स्वाद : देशज व्यंजन प्रमुख आकर्ष होंगे। खजुराहो पर्यटन की दृष्टि से आकर्षक एवं लोकप्रिय स्थल है। खजुराहो नृत्य समारोह के दौरान मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग की ओर से विशेष गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। विगत वर्षों में भी पर्यटन गतिविधियों ने पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित किया है। इस वर्ष विशेष रूप से घुमन्तू समुदायों के साथ गाँवों की सैर, एक दिवसीय भ्रमण कार्यक्रम (कैम्पिंग गतिविधि), नेचर वॉक, खजुराहो विलेज टूर, ई – बाइक टूर, वॉटर स्पोर्ट्स, हॉट एयर बैलून एवं फेम टूर जैसी रोमांचकारी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। 20 से 26 फरवरी तक की नृत्य प्रस्तुतियां सायं 6:30 बजे से 20 फरवरी, 2026 पद्मश्री ममता शंकर, कोलकत्ता – कथक अनुराधा वेंकटरमन, चेन्नई – भरतनाट्यम शुभदा वराडकर, मुम्बई – ओडिसी 21 फरवरी, 2026 विश्वदीप, दिल्ली – कथक अक्मादल काईनारोवा, कजाकिस्तान – भरतनाट्यम प्रभात मेहतो, झारखंड – छाऊ 22 फरवरी, 2026 एसएनए अवार्डी थोकचोम इवेमुबि देवी, मणिपुर – मणिपुरी पद्मश्री दुर्गाचरण रनवीर, ओडिसा – ओडिसी सत्रिया केन्द्र समूह, असम – सत्रिया 23 फरवरी, 2026 नव्या नायर, चेन्नई – भरतनाट्यम एसएनए अवार्डी कोट्टक्कल नंदकुमार नायर, केरल – कथकली पद्मश्री पद्मजा रेड्डी, हैदराबाद – कुचिपुड़ी 24 फरवरी, 2026 शिंजनी कुलकर्णी, दिल्ली – कथक पद्मश्री इलियाना सिटर, भुवनेश्वर – ओडिसी पद्मश्री कलामंडलम क्षमावेती, केरल – मोहिनीअट्टम 25 फरवरी, 2026 एसएनए अवार्डी शाश्वती सेन, दिल्ली – कथक मोहंती, भुवनेश्वर – ओडिसी एसएनए अवार्डी नयनसखी देवी, मणिपुर – मणिपुरी खुशबू पांचाल, उज्जैन – कथक समूह   26 फरवरी, 2026 सुनयना हजारीलाल, मुम्बई – कथक पद्मश्री प्रतिभा प्रहलाद, बैंगलुरु – भरतनाट्यम एसएनए अवार्डी सुश्री भावना रेड्डी, दिल्ली – कुचीपुड़ी प्रभुतोष पाण्डा, भुवनेश्वर – ओडिसी।