samacharsecretary.com

धरतीफोड़ महादेव का चमत्कार: छत्तीसगढ़ में साल में तीन बार रूप बदलने वाला शिवलिंग बना आस्था का केंद्र

खरोरा   बेलदार राजा की राजधानी बेलदार सिवनी में एक अद्भुत प्राचीन शिवलिंग है जो साल में तीन बार अपना स्वरूप बदलता है, इस प्रतिमा को लोग धरती फोड़ महादेव के नाम से भी जानते हैं।  खरोरा से 5 किलोमीटर की दूरी पर उत्तर पूर्व दिशा में स्थित इस गांव की आबादी करीब 5000 है यहां का प्राचीन शिव मंदिर कितना पुराना है इस बारे में तीन पीढ़ी के सियान भी कुछ नहीं बता पाते हैं ।   इस प्राचीन शिवलिंग को स्थानीय लोग 'धरतीफोड़ महादेव' के नाम से जानते हैं। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह साल में तीन बार अपना स्वरूप बदलता है:गर्मी में: प्रतिमा बीच से दो भागों में बंट जाती है, जिससे इसमें अर्धनारीश्वर (आधा शिव, आधा शक्ति) का रूप स्पष्ट दिखाई देता है। इस दौरान यह खुरदुरा भी हो जाता है।सावन (बरसात) में: यह वापस अपनी पूर्ण आकृति में आ जाता है, जिसे लोग 'जड़-महादेव' कहते हैं। ठंड में: शिवलिंग का रंग गहरा काला हो जाता है और इसकी सतह चिकनी व तैलीय दिखाई देने लगती है। प्राचीनता: यह मंदिर कितना पुराना है, इसके बारे में गांव के 80 साल के बुजुर्ग भी नहीं बता पाए। यह क्षेत्र कभी बेल्दार राजा की राजधानी हुआ करता था। पवित्र कुंड: मंदिर के चारों ओर लगभग 1000 वर्ग फीट में फैला एक कुंड है। कहा जाता है कि सावन के महीने में इस कुंड की गंदगी और दुर्गंध अपने आप गायब हो जाती है। नशामुक्त गांव: बेल्दारसिवनी अपनी पूर्ण शराबबंदी के लिए भी प्रसिद्ध है। सालों पहले गांव वालों ने कड़ा फैसला लेकर शराब बेचने और पीने वालों पर पाबंदी लगा दी थी जिसकी परंपरा आज भी जारी है।इस कुंड को अब शिव कुंड का नाम दिया गया है और इस कुंड के बीच में लक्ष्मी नारायण भगवान की प्रतिमा स्थापित है चारों ओर द्वादश ज्योतिर्लिंग के दर्शन देखने को मिलते हैं। बेलदार सिवनी के इस धरतीफोड़ महादेव जिसे अर्धनारीश्वर भी कहा जाता है इस प्रतिमा के बारे में ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार गर्मी के दिनों में ढाई फीट ऊंची और 8 इंच विकास की प्रतिमा बीचो-बीच दो भागों में विभक्त हो जाती है तब इस प्रतिभा में अर्धनारीश्वर महादेव की झलक स्पष्ट दिखाई देती है। सावन के महीने में यह प्रतिमा अपनी पूर्ण आकृति को प्राप्त करती है तब इसे जड़ महादेव के नाम से लोग जानते हैं। ठंड के दिनों में प्रतिमा चिकनी और तेली काले रंग की हो जाती है गर्मी में प्रतिमा खुरदुरा होकर अपना चोला छोड़ती है। इसके बावजूद इस मंदिर की सुरक्षा पर शासन या पुरातत्व विभाग का ध्यान अब तक नहीं गया है ग्रामीण खुद समय-समय पर इसका जीर्णोद्धार करते हैं। इसी तारतम्य में गांव के पूर्व सरपंच व वर्तमान जनपद सदस्य मुकेश वर्मा ने मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए संकल्प लिया एवं  बाबा अर्द्धनारीश्वर मंदिर जीर्णोद्धार निर्माण समिति बेलदार सिवनी के अध्यक्ष थनवार वर्मा सहित सदस्यों में उद्योराम वर्मा, मुकेश वर्मा, पन्नालाल वर्मा, कैलाश वर्मा, नारद वर्मा ,बलराम वर्मा,अरुण वर्मा, ईश्वरी वर्मा, दिनेश वर्मा, भूपेंद्र वर्मा, मनहरन वर्मा, छेदु वर्मा, सुनील वर्मा, रामकुमार रातड़े, उमेंद क्षत्रिय, अजय वर्मा, यशवंत क्षत्रिय, मनीराम वर्मा, लोकेश शर्मा, गजानंद वर्मा शामिल हैं।विगत 2 से 3 वर्ष में स्थानीय व क्षेत्रीय दानदाताओं के सहयोग से मंदिर का भव्य स्वरूप का निर्माण कराया |  मंदिर के जीर्णोद्धार से एक मनोहारी मंदिर का निर्माण हो गया है परिसर से लगे कुंड में ही 12 ज्योर्तिलिंग व शिव मंदिर में अन्य देवी देवताओं के प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन किया गया जिसमें 5 फरवरी को कलश यात्रा निकाली गई, जिसके बाद 6 फरवरी को द्वितीय दिवस के रूप में वेदी पूजन और आधिवास यज्ञ संपन्न हुआ। 7 फरवरी को प्रातः 10 बजे से भगवान की प्राण-प्रतिष्ठा, हवन-पूजन, पूर्णाहुति एवं विशाल भोग-भंडारे का आयोजन किया गया । दर्शनार्थियों ने मंदिर परिसर पर बने कुंड में म्यूजिकल फाउंटेन की मांग शासन से की है जिससे मंदिर की भव्यता और बढ़ जाए|मान्यता के अनुसार लोगों मांग भगवान भोलेनाथ जरूर सुनते है और उसकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है.. यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि समाज में संस्कार, एकता एवं सकारात्मक ऊर्जा के संचार का माध्यम भी है। समारोह में विभिन्न सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए , जिसमें स्थानीय और दूर-दराज के  श्रद्धालुओं ने भाग लिया। आगामी 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के अवसर पर विशाल मेले का आयोजन किया जायेगा जिसमें 14 व 15 फरवरी रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा | आयोजक समिति के संरक्षक एवं जनपद सदस्य शिवशंकर वर्मा ने बतलाया कि तीन दिन तक चले इस प्राण प्रतिष्ठा समारोह में विधायक अनुज शर्मा, पूर्व विधायक श्रीमती अनीता योगेंद्र शर्मा, रायपुर जिला पंचायत अध्यक्ष नवीन अग्रवाल, तिल्दा जनपद अध्यक्ष टिकेश्वर मनहरे, तिल्दा जनपद उपाध्यक्ष दुलारी सुरेंद्र वर्मा, संतोष शाह, रविंदर बबलू भाटिया, खूबी डहरिया, प्रवीण अग्रवाल, शेखर अग्रवाल, अनिल कुर्मी, प्रवीन लाटा सहित हजारों श्रद्धालुओं ने दर्शन लाभ प्राप्त  कर क्षेत्र में खुशहाली व सम्पन्नता के लिए भोलेनाथ से आशीर्वाद प्राप्त किया।  

सरकारी गड़बड़ी की हद! 96 वर्षीय बुजुर्ग महिला को थमा दिया मौत का नोटिस

राजनांदगांव जिले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण  सर्वे के दौरान एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने प्रशासनिक सत्यापन प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वार्ड नंबर 10 की रहने वाली 96 वर्षीय बुजुर्ग महिला नूरजहां को कागजों में 'मृतक' घोषित कर दिया गया है। अब इस बीमार बुजुर्ग महिला को खुद के जीवित होने का सुबूत देने के लिए सरकारी दफ्तर की पेशी पर जाना होगा। 96 वर्षीय नूरजहां (पति स्व. रफीक अहमद) का कहना है कि देश की आजादी के समय वह करीब 17 वर्ष की थीं। उन्होंने आजादी के बाद से अब तक हुए लगभग सभी चुनावों में मतदान किया है। नौ फरवरी को एसडीएम कार्यालय में होना होगा उपस्थित उनकी सामाजिक जड़ें और परिवार की कई पीढ़ियां इसी शहर से जुड़ी हैं। इसके बावजूद, किसी अज्ञात द्वेष या लापरवाही के चलते उन्हें मृत बताकर मतदाता सूची से नाम काटने की आपत्ति दर्ज कराई गई है। खराब स्वास्थ्य के बावजूद नूरजहां को नौ फरवरी को एसडीएम कार्यालय में उपस्थित होकर यह साबित करना होगा कि वह जीवित हैं।   बिना ठोस सुबूत के नाम काटने का अभियान जिले में मतदाता सूची से नाम काटने को लेकर गंभीर आरोप लग रहे हैं। आरोप है कि फॉर्म-सात के जरिए एक वर्ग विशेष और समाज के मतदाताओं को निशाना बनाया जा रहा है। आश्चर्यजनक यह है कि जमुना चौक और टिकरी पारा के कुछ सामान्य नागरिकों द्वारा बड़ी संख्या में स्थानीय निवासियों के खिलाफ सुनियोजित तरीके से आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। इनमें वे लोग भी शामिल हैं जिनके पूर्वज वर्षों से यहीं के निवासी रहे हैं। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि 2003 की मतदाता सूची जैसे पुख्ता दस्तावेज देने के बाद भी उन्हें बार-बार पेशी पर बुलाकर मानसिक दबाव बनाया जा रहा है। कल होगी मामले की पहली सुनवाई प्रशासन ने इस पूरे विवादित मामले में सोमवार (नौ फरवरी) को एसडीएम कार्यालय में पहली सुनवाई निर्धारित की है। नोटिस के अनुसार, शिकायतकर्ता और पीड़ित पक्ष दोनों को अपने दस्तावेजों के साथ उपस्थित रहना होगा। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि शहीद नगरी के नाम से मशहूर इस क्षेत्र में मतदाता सूची के नाम पर भेदभाव का वातावरण तैयार किया जा रहा है। पुनरीक्षण प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल शिकायतकर्ता किसी बड़े पद पर नहीं हैं, फिर भी उनकी थोक में दी गई शिकायतों पर जिस तरह से कार्रवाई हो रही है, उसने पूरी पुनरीक्षण प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों का दावा है कि यह केवल एक वार्ड का मामला नहीं है, बल्कि पूरे जिले में मतदाता सूची को प्रभावित करने के लिए इसी तरह का खेल चल रहा है। एक ही व्यक्ति द्वारा सैकड़ों लोगों के खिलाफ आपत्ति दर्ज कराना और प्रशासन द्वारा बिना स्थलीय सत्यापन के जीवित लोगों को नोटिस जारी करना गहरी लापरवाही को दर्शाता है।

ज्योतिर्लिंग भक्तों के लिए खुशखबरी: एमपी में नि:शुल्क वीआईपी दर्शन की सुविधा शुरू

खंडवा 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक में अब श्रद्धालु नि:शुल्क वीआइपी दर्शन का लाभ उठा सकेंगे। मध्यप्रदेश में मौजूद ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में प्रशासन ने एक अहम पहल शुरू की है। रक्तदान को बढ़ावा देने के लिए इस पहल को शुरू किया गया है। बता दें कि, ओंकारेश्वर में आने वाले श्रद्धालुओं को रक्तदान करने पर नि:शुल्क वीआइपी दर्शन कराए जाएंगे। इसके लिए यहां एक स्थाई ब्लड डोनेशन यूनिट भी मंदिर परिसर में स्थापित की जाएगी। कलेक्टर ने दिए निर्देश खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने इसके लिए श्रीजी मंदिर ट्रस्ट प्रबंधन को इसके लिए एक माह में स्थाई ब्लड डोनेशन यूनिट तैयार करने के निर्देश जारी किए है।   लंबे समय से की जा रही थी मांग लंबे समय से जय महाराणा रक्तदान समूह भारत खंडवा द्वारा भी इसकी मांग की जा रही थी। भारत में तिरूपति आंध्रप्रदेश, शिर्डी महाराष्ट्र के मंदिरों में वीआइपी दर्शन के लिए रक्तदान की पात्रता है। इसी आधार पर ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में भी रक्तदाताओं को वीआइपी दर्शन की मांग की जा रही थी। इन्हें मिलेगी मदद कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने यह व्यवस्था आरंभ करने को कहा है। रक्तमित्र शैलू मंडलोई ने बताया कि रक्तदान में मिले रक्त से गरीब और असहाय मरीजों की मदद की जा सकती है। थैलेसिमिया जैसी गंभीर बीमारी से ग्रसित बच्चों का जीवन बचया जा सकता है।

महाकाल जाने वालों को झटका: उज्जैन स्टेशन पर 31 ट्रेनों का प्लेटफार्म परिवर्तन

उज्जैन रेलवे प्रशासन ने उज्जैन रेलवे स्टेशन पर आने वाली 31 ट्रेनों के प्लेटफार्म में बदलाव किया है। 10 फरवरी से ट्रेनें बदले हुए प्लेटफार्म पर ठहरेगी। इसके तहत सात ट्रेनें अब आठ नंबर प्लेटफार्म से संचालित होंगी। जबकि चार ट्रेनें सात नंबर प्लेटफार्म पर आएंगी। इस बदलाव से श्री महाकालेश्वर मंदिर दर्शन करने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को खासी परेशानी होगी। उन्हें अब सात व आठ नंबर से एक नंबर की ओर पैदल आना पड़ेगा। रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने बताया कि यात्रियों की सुविधा, सुगम आवागमन तथा सभी प्लेटफार्मों के समान उपयोग को करने के उद्देश्य से रतलाम मंडल द्वारा उज्जैन रेलवे स्टेशन पर एक महत्वपूर्ण सुधार किया गया है। इसके तहत स्टेशन पर 31 ट्रेनों के आगमन एवं प्रस्थान के प्लेटफार्म में परिवर्तन किया जा रहा है। यह बदलाव 10 फरवरी प्रभावी होगा।   इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य प्लेटफार्म क्रमांक एक पर बढ़ते यात्री दबाव को कम करना, भीड़ प्रबंधन को बेहतर बनाना तथा स्टेशन संचालन को अधिक व्यवस्थित बनाना है। प्लेटफार्म परिवर्तन के बाद यात्रियों को प्लेटफार्म तक पहुंचने में अधिक सुविधा होगी। इस बदलाव से विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं, बच्चों तथा दिव्यांग यात्रियों को लाभ होगा, क्योंकि अब उन्हें स्टेशन के अंतिम छोर तक जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। यात्री होंगे परेशान उज्जैन स्टेशन पर रोजाना 76 यात्री ट्रेनों को आवागमन होता है। इनमें अधिकांश यात्री उज्जैन में श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन करने के लिए आते है। रेलवे ने 31 ट्रेनों के प्लेटफार्म बदले हैं। यात्रियों को महाकाल जाने के लिए इंदौरगेट व मुख्य स्टेशन की ओर आना होगा। जिससे प्लेटफार्म नंबर सात व आठ से एक नंबर तक अपना सामान उठाकर पैदल आना होगा। नागदा एंड की ओर लिफ्ट व एस्केलेटर की सुविधा नहीं होने से उन्हें परेशानी होगी। इन ट्रेनों के प्लेटफार्म में किया बदलाव इंदौर शहीद कैप्टन तुषार महाजन सुपरफास्ट एक्सप्रेस प्लेटफार्म नंबर छह के बजाए पांच पर, कामाख्या-डा अंबेडकर नंबर एक्सप्रेस प्लेटफार्म नंबर छह के बजाए पांच पर, नागपुर-इंदौर सुपरफास्ट एक्सप्रेस प्लेटफार्म नंबर पांच के बजाए छह पर, प्रयागराज-डा अंबेडकर नंबर एक्सप्रेस प्लेटफार्म नंबर पांच के बजाए छह पर, गांधीधाम-इंदौर सुपरफास्ट एक्सप्रेस प्लेटफार्म नंबर एक के बजाए पांच पर, इंदौर-मुंबई सेंट्रल एक्सप्रेस प्लेटफार्म नंबर एक के बजाए आठ पर, इंदौर-दौंड एक्सप्रेस प्लेटफार्म नंबर चार के बजाए आठ पर, इंदौर-आसरवा एक्सप्रेस प्लेटफार्म नंबर एक के बजाए आठ पर आएगी। मन्नारगुड-जोधपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस प्लेटफार्म नंबर पांच के बजाए छह पर, वाराणसी-इंदौर एक्सप्रेस छह के बजाए चार पर, यशवंतपु-डॉ. अंबेडकर नगर एक्सप्रेस छह के बजाए पांच पर, बरेली-इंदौर एक्सप्रेस प्लेटफार्म नंबर चार से अब आठ पर, इंदौर-ऊना हिमाचल एक्सप्रेस प्लेटफार्म नंबर छह से अब आठ पर, मदुरै-बीकानेर सुपरफास्ट एक्सप्रेस छह के बजाए पांच पर, ग्वालियर-दौंड सुपरफास्ट एक्सप्रेस छह के बजाए पांच पर, तिरुवंतपुरम-इंदौर एक्सप्रेस छह के बजाए पांच पर, वाराणसी-इंदौर एक्सप्रेस छह के बजाए चार पर आएगी एवं जाएगी। इनमें भी बदलाव इसके अलावा रेलवे ने 12 पैसेंजर ट्रेनों के प्लेटफार्म भी बदले हैं। इनमें नागदा-उज्जैन पैसेंजर को प्लेटफार्म नंबर दो के बजाए छह पर, उज्जैन-रतलाम मेमू प्लेटफार्म नंबर पांच के बजाए दो पर, उज्जैन-इंदौर मेमू प्लेटफार्म नंबर पांच के बजाए आठ पर, उज्जैन-नागदा पैसेंजर पांच के बजाए छह पर, उज्जैन-इंदौर पैसेंजर आठ के बजाए सात पर, भोपाल-उज्जैन पैसेंजर पलेटफार्म नंबर दो के बजाए सात पर। इंदौर-उज्जैन मेमू प्लेटफार्म नंबर पांच से अब आठ पर, उज्जैन-भोपाल पैसेंजर प्लेटफार्म नंबर आठ से सात पर, नागदा-उज्जैन पैसेंजर पांच से अब सात पर, रतलाम-उज्जैन मेमू प्लेटफार्म पांच से दो तथा चित्तौड़गढ- उज्जैन मेमू प्लेटफार्म नंबर दो से आठ पर भेजा गया है।

मध्यप्रदेश में ठंड और कोहरे का कहर, मौसम विभाग ने 2 दिन में बारिश की चेतावनी जारी की

भोपाल   मध्य प्रदेश में जैसे-जैसे कोहरा छट रहा है ठंड के तीखे तेवर नजर आने लगे हैं। यानी आसमान साफ होते ही उत्तर भारत से आ रही बर्फीली हवाओं ने एक बार फिर न्यूनतम तापमान तेजी से नीचे गिराया है। आलम ये है कि, प्रदेश के कुछ हिस्सों में तो कोहरा है, लेकिन जहां कोहरा नहीं, वो इलाका ठंड की चपेट में है। सबसे सर्द रात उमरिया और रीवा जिले में दर्ज हुई। यहां न्यूनतम तापमान 7 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। वहीं, मौसम विभाग ने आगामी 48 घंटों तक मौसम शुष्क रहने और उसके बाद मावठी बारिश के आसार जताए हैं। मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश के उमरिया, रीवा सबसे ठंडे रहे। यहां न्यूनतम तापमान 7 डिग्री दर्ज हुआ। इसके बाद खजुराहो में भी खासा ठंड रही। यहां न्यूनतम तापमान 7.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल, इंदौर और ग्वालियर में पारा 11 डिग्री के आसपास रहा, जबकि जबलपुर में ये 10.8 डिग्री दर्ज किया गया। प्रदेश के पहाड़ी पर्यटन स्थल पचमढ़ी में भी पारा 9.4 डिग्री तक गिर गया है। इन जिलों में 10 डिग्री से कम तापमान, उज्जैन सबसे ज्यादा प्रदेश के कई जिलों में पारा 10 डिग्री के नीचे दर्ज हुआ। इनमें खजुराहो 7.4 डिग्री, मंडला 7.9 डिग्री, नौगांव 8.8 डिग्री और सतना 8.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। वहीं राजगढ़, शिवपुरी, पचमढ़ी, दमोह और मलाजखंड में भी तापमान 9 से 10 डिग्री के बीच दर्ज किया गया। उज्जैन में रात का पारा सबसे अधिक 13 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ।   कई जिलों में कोहरे का असर रविवार सुबह प्रदेश के करीब 10 जिलों में मध्यम कोहरा छाया रहा। इनमें भोपाल, उज्जैन, इंदौर, राजगढ़, रतलाम, मंडला और सतना में कोहरे की वजह से दृश्यता कम रही। हालांकि, मौसम विभाग का कहना है कि अगले 24 घंटों में कोहरा छंटने की संभावना है, लेकिन सुबह और रात के समय सिहरन बनी रहेगी।   10 फरवरी से फिर 'मावठा' गिरने के आसार मौसम विभाग की मानें तो हिमालयी क्षेत्र में 8 फरवरी से एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है। इस सिस्टम का असर 10 फरवरी तक एमपी में दिखाई देने लगेगा। इसके प्रभाव से प्रदेश के कई हिस्सों में मावठा वाली बारिश हो सकती है। हालांकि, आज और कल बारिश या ओलावृष्टि की संभावना कम है, लेकिन 10 फरवरी के बाद मौसम बदल सकता है।

हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद खुली चाईबासा की सच्चाई, पांच बच्चों को चढ़ाया गया था HIV संक्रमित ब्लड

 चाईबासा  पश्चिम सिंहभूम जिले में बच्चों को एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाने के कथित मामले में उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद शुक्रवार को चाईबासा सदर पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। ह्यूमन इम्यूनो डिफिशिएंसी वायरस (एचआईवी) से संक्रमित व्यक्ति में प्रतिरक्षा क्षमता क्षीण हो जाती है और व्यक्ति एड्स जैसी लाइलाज बीमारी की चपेट में आ जाता है। चाईबासा सदर पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी तरुण कुमार ने शनिवार को बताया कि पीड़ित बच्चों में शामिल पश्चिम सिंहभूम के हटगमहरिया निवासी एक बच्चे के पिता ने शुक्रवार देर शाम चाईबासा सदर अस्पताल के रक्त बैंक के निलंबित लैब तकनीशियन मनोज कुमार के खिलाफ कथित लापरवाही का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई। पुलिस अधिकारी ने कहा, ''हम आरोप की जांच कर रहे हैं और मनोज कुमार से पूछताछ कर रहे हैं, जो घटना के समय रक्त बैंक का तकनीशियन था, लेकिन अब निलंबित हैं। अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।'' अक्टूबर 2025 में सामने आई इस घटना से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया था। उच्च न्यायालय ने बुधवार को चाईबासा सदर पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी को प्राथमिकी दर्ज करने और दोषियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। इससे पहले अदालत की एक खंडपीठ ने झारखंड में पांच बच्चों में एचआईवी संक्रमण के कथित मामलों में रक्त चढ़ाने के दौरान मानक संचालन प्रक्रिया का पालन न किये जाने के लिए राज्य सरकार को फटकार लगाई थी। मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने स्वतः संज्ञान लेकर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए स्वास्थ्य सचिव अजय कुमार सिंह को फटकार लगाई थी। यह फटकार चाईबासा जिले के पांच बच्चों में रक्त चढ़ाए जाने के बाद उन्हें एचआईवी संक्रमित पाए जाने की खबरों के बाद लगाई गई थी। ये बच्चे थैलेसीमिया के मरीज थे और चाईबासा के सदर अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे थे, जहां उन्हें रक्त चढ़ाया गया था। झारखंड सरकार ने 26 अक्टूबर को इस घटना के संबंध में पश्चिम सिंहभूम के तत्कालीन सिविल सर्जन और कुछ अन्य अधिकारियों को निलंबित कर दिया था। घटना के सामने आने के बाद राज्य सरकार ने प्रत्येक प्रभावित परिवार के लिए दो लाख रुपये मुआवजे की घोषणा की।  

गांव की महिलाओं को अब पानी के लिए नहीं तलाश करने पड़ते कुंए

सिर्फ आधार कार्ड दिया और कनैक्शन हो गया, सार्वजनिक नल भी लगे लखनऊ, बुंदेलखंड के लोगों के लिए यह किसी सपने से कम नहीं कि आज उन्हें उनके घर में ही पानी मिल रहा है। इस क्षेत्र में पानी की किल्लत से भुखमरी और गरीबी की जाने कितनी कहानियां हैं। सिर पर घड़ा रखकर दूरदराज से पानी लाती एक महिला की तस्वीर ही यहां के जिलों की पहचान बन गई थी। सालों साल तक यहां की महिलाओं ने पानी का संकट भुगता है। दूरदराज के कुंओं तक जाकर पानी खींचने के साथ ही हैंडपंप पर पानी के लिए लाइनें लगाई हैं। लेकिन अब यह सब अतीत की बातें हैं। अब सड़कों पर दूर से ही दिखनेवाली पानी की टंकियां उम्मीदों की जलधारा हैं। बात महोबा की करें तो यहां के लोगों ने पानी की किल्लत से लंबे समय तक दुर्दिन भरे दिन देखे हैं। कभी यहां वाटर ट्रेन से पानी पहुंचाने की नौबत आ गई थी। लोग घड़ा भर पानी के लिए जाने कहां-कहां तक भटकते थे। अब यहां दूर से ही दिखाई देने वाले वाटर टैंक नई कहानी कहते हैं। इस जिले में जल जीवन मिशन के तहत पांच परियोजनाओं के सहारे एक लाख 12 हजार से अधिक घरों को पाइपलाइन की कनेक्टिविटी दी जा चुकी है। हालांकि इसके लिए 1131 किलोमीटर सड़कों को क्षतिग्रस्त किया गया। क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत के दौरान लोगों को थोड़ी परेशानी का सामना अवश्य करना पड़ा। महोबा के अरशद कहते हैं कि कोई योजना शुरू होने पर थोड़ी-बहुत परेशानी तो होती ही है। लेकिन, अब हर घर नल यहां के लिए एक बहुत बड़ी उम्मीद है। चित्रकूट में सिलौटा ग्राम मुस्तकिल समूह योजना की बात करें तो इससे जुड़े विकास खंड पहाड़ी, रामनगर और मानिकपुर में सवा लाख लोगों के लिए पानी की समस्या खत्म हो गई है। मानिकपुर के उन लोगों का दर्द महसूस कीजिए जो कभी लगभग एक किमी दूर से पानी लाया करते थे।…और इस समस्या की वजह से वहां लोग अपनी बेटियां ब्याहने को आसानी से तैयार नहीं होते थे। उनके लिए यह पानी जिंदगी है, बच्चों का भविष्य है। योजना के तहत पूरे क्षेत्र में 576 किमी की पाइप लाइन बिछाई जानी है, जिसमें 572 किमी बिछा दी गई है। 17 ओवरहेड टैंक हैं जहां वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से रोज पानी लाया जा रहा। यमुना नदी से पानी लाकर इस प्लांट में संशोधित करके टैंकों में चढ़ाकर लोगों के घरों तक पहुंचाया जा रहा। बरहट की ग्राम प्रधान श्रीमती रज्जन देवी इस योजना का चर्चा करते हुए भावुक हो जाती हैं। कहती हैं कि हम योगी-मोदी सरकार के कृतज्ञ हैं कि उन्होंने हमारे बच्चों को बीमारियों से बचाने का इंतजाम कर दिया। हमारे बच्चे अब नहो-धोकर स्कूल जाते हैं। उनमें स्वच्छता का भाव स्वतः ही आने लगा है। चित्रकूट में सिलौटा के साथ ही रैपुरा, चांदी बांगर ग्राम समूह पेयजल योजनाएं चल रही हैं और यह सारी योजनाएं उम्मीद की वह धारा हैं जिसके बारे में लोगों ने सोचा तक नहीं था। रैपुरा ग्राम समूह पेयजल योजना के तहत 19570 परिवारों को नल से पानी उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इन सभी घरों में नल लग गए हैं और 60 राजस्व ग्रामों में जलापूर्ति शुरू कर दी गई है। योजना के तहत आच्छादित मदना गांव के निवासी चुनबाद यादव बताते हैं कि हमारी बड़ी समस्या दूर हुई है। अपने लिए पानी का इंतजाम मुश्किल था, जानवरों की तो बात ही दूर। अब हमें परेशान नहीं होना पड़ रहा। लोगों के लिए यह सिर्फ एक नल की बात हो सकती है लेकिन बुंदेलखंड के लिए यह वरदान है। यह वस्तुतः उस संकल्प की सिद्धि है, जिसे मोदी-योगी सरकार ने साधना के रूप में लिया। झांसी के बडा गांव, चिरगांव और बंगरा में अंतिम छोर के गांव तक जल जीवन मिशन की पाइप लाइन बिछ गई है। झासी जिले के बंगरा विकासखंड में स्थित गैरहा ग्राम पंचायत के 65 साल के कामता प्रसाद भावुक हो गए। बोले कि यह दिन देखने के लिए आंखें तरस गईं थीं। जिला मुख्यालय से दूर बसे इस गांव की विवाहिता शगुन बताती हैं कि उन्हें पहले गांव से आधा किमी दूर पानी लेना जाना पड़ता था और बारिश के समय बड़ी मुश्किल होती थी। झांसी जिले के बंगरा ब्लाक की ग्राम पंचायत पचवारा में बहू बन कर जब रागिनी आईं तो उन्हें सरकारी हैंड पंप से पानी ले जाना पडता था। अब वे टोंटी खोलते हुए दिखाती हैं कि देखिये कितना साफ पानी है। गरीब परिवार की बहू खुश है कि मजदूरी करने वाले उनके पति मुकेश कुमार को एक पैसा तक नहीं देना पड़ा और नल का कनेक्शन हो गया। ग्राम पंचायत प्रधान अखिलेश रावत बताते हैं कि उनके गांव में एक हजार कनेक्शन हुए हैं। दलित बाहुल्य गांव में योगी सरकार में बनाए गए आरोग्य मंदिर में भी जल जीवन मिशन के तहत नल लगा है, जहां मरीजों, तीमारदारों के लिए स्वच्छ जल उपलब्ध है। सरकारी स्कूलों में भी बच्चे स्वच्छ पानी पी रहे हैं। जल जीवन मिशन के अधिशाषी अभियंता रणविजय सिंह बताते हैं कि इस स्कीम के तहत 42 गांव आच्छादित हैं और इन गांवों में 11 हजार 437 कनेक्शन हुए हैं। बांदा का नाम आते ही सूखा, पानी की कमी और प्यास आदि शब्द अपने आप दिमाग में कौंधने लगते थे। अब यहां अमलीकौर पेयजल परियोजना और खटान पेयजल परियोजना से 544 गावों में पानी पहुंचा है। 82266 घरों में कनेक्शन किए जा चुके हैं। बड़ोखर खुर्द ब्लाक के बांधा पुरवा गांव के रहने वाले परदेशी ने बताया कि पहले हमें पानी के लिए पहले परेशान होना पड़ता था। वहीं अब हमको हमारे घरों में ही स्वच्छ पानी मिल रहा है। जल निगम के अधिशासी अभियंता विमल कुमार वर्मा ने बताया कि पाइपलाइन डालने के लिए जिन सड़कों को खोदा गया था। उनको भी ठीक कर दिया गया है। हमीरपुर में भी दो पेयजल परियोजनाएं चल रही हैं जहां 322 में से 320 गांवों में घरों तक नल से पानी पहुंचाया जा रहा है। यहां के लोगों की जिंदगी में यह योजना बहुत महत्वपूर्ण होने जा रही है।

दूल्हे के पिता ने दांव पलटा: ‘मुझे बहू नहीं बेटी चाहिए’, 51 लाख वापस किए

भिंड मध्यप्रदेश के भिंड में एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जहां शादी का मंडप सजा चुका था, मेहमान मौजूद थे और रस्में चल रही थीं। तभी एक वाक्या हुआ, जिसने पूरी शादी का माहौल बदल दिया। अनोज पाठक जो भिंड की एक मार्केटिंग सोसायटी में असिस्टेंट मैनेजर हैं। उन्होंने शादी में मिले दहेज के 51 लाख रूपये लौटा दिए। पाठक परिवार के इस कदम ने स्पष्ट कर दिया कि शादी किसी लेन-देन नहीं बल्कि दो परिवारों और संस्कारों का मेल है। अनोज पाठक ने दहेज के 51 लाख रूपये ठुकराकर केवल 1 रूपये और एक नारियल स्वीकार किया। दहेज लौटाया तो हैरानी में पड़ा परिवार शादी के दौरान जब लड़के पक्ष ने लड़की पक्ष को दहेज की राशि लौटाई तो वह हैरानी में पड़ गए। उन्हें लगा कि कहीं किसी बात पर लड़की वाले बिफर तो नहीं गए, लेकिन अनोज पाठक और उनकी मनोरमा पाठक ने लड़की वालों को बताया कि यह फैसला नाराजगी में नहीं, बल्कि समाज को नई दिशा देने के लिए लिया है। दहेज के कारण परिवारों योग्य रिश्ते नहीं मिलते दादा सुरेश पाठक ने कहा कि आज भी दहेज के कारण मध्यमवर्गीय और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों को अच्छे रिश्ते नहीं मिल पाते हैं। इसको देखते हुए हमने फैसला लिया है कि हम अपने इंजीनियर पोते की शादी जानबूझकर मध्यवर्गीय परिवार में बिना दहेज के की है। हमारे समाज में जब तक बहू को घर में बेटी की तरह सम्मान नहीं मिलेगा। तब तक समाज आगे नहीं बढ़ेगा।   दूल्हा है इंजीनियर दूल्हा आकर्ष पाठक छत्तीसगढ़ इंजीनियर है। उसके पिता अनोज पाठक मार्केटिंग सोसायटी में असिस्टेंट मैनेजर हैं। पिता का कहना था कि ये कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था। ये सालों पुराना संकल्प था। लड़के के पिता बोले- बेटी बोझ नहीं लड़के के पिता अनोज पाठक ने बताया कि बेटियां कोई बोझ नहीं है और विवाह कोई लेन-देन का सौदा नहीं है। दूल्हे के पिता ने मेरे दो बेटे हैं। मैं चाहता था कि अपने बेटों की शादी में बहू के रूप में बेटी लेकर आऊंगा। अक्सर मध्यमवर्गीय परिवार संकोच में रहते हैं कि शादी में अगर ज्यादा दहेज नहीं देंगे। तो अच्छे घर में बेटियों की शादी नहीं होगी।

ऑडिट से पहले हादसा! आबकारी भवन के ऑडिट रूम में आग, अहम दस्तावेज राख

रायपुर राजधानी रायपुर के लाभांडी स्थित आबकारी भवन में रविवार और सोमवार की दरमियानी रात भीषण आग लग गई। आग भवन की तीसरी मंजिल पर स्थित छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (CSMCL) के कार्यालय में लगी, जिसने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया। कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आग ऑडिट रूम में लगी है। जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह से ही विभाग का महत्वपूर्ण ऑडिट शुरू होना था, लेकिन उससे पहले ही आधी रात को लगी इस आग में ऑडिट से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण फाइलें और दस्तावेज जलकर स्वाहा हो गए। घटना की सूचना मिलते ही दमकल की दो गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।   पुलिस और एफएसएल की टीम कर रही जांच फिलहाल आग लगने का कारण अज्ञात बताया जा रहा है, लेकिन ऑडिट से ठीक पहले फाइलों का जलना कई संदेहों को जन्म दे रहा है। मामला तेलीबांधा थाना इलाके का है। पुलिस और एफएसएल की टीम घटना की जांच कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यह महज एक दुर्घटना है या किसी साजिश के तहत फाइलों को नष्ट किया गया है।

7500 गोशालाएं बनेंगी कैटल फूड सिक्योरिटी हब

हर गोशाला से जुड़ेंगे 50-100 किसान, संरक्षण केंद्र के साथ गोशालाओं को हरा चारा उत्पादन का बेहतर स्रोत बनाएगी योगी सरकार गोशालाओं में बड़े पैमाने पर लगाए जाएंगे सहजन के पौधे व नेपियर घास, किसानों की आमदनी व ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती लखनऊ, प्रदेश की गोशालाओं को अब केवल गोवंश संरक्षण तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें कैटल फूड सिक्योरिटी हब के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। योगी सरकार की इस दूरदर्शी पहल के तहत प्रदेश की 7500 गोशालाओं और उनके आसपास के क्षेत्र को हरा चारा उत्पादन का सशक्त केंद्र बनाया जाएगा, जिससे गोवंश संरक्षण के साथ-साथ किसानों की आमदनी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। संरक्षण से उत्पादन की ओर गोशालाएं उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि “मिशन फॉडर” के नाम से शुरू हो रहे इस प्रदेशव्यापी अभियान का उद्देश्य गोशालाओं को आत्मनिर्भर इकाइयों के रूप में विकसित करना है। इसके तहत हर गोशाला को 50 से 100 किसानों के नेटवर्क से जोड़ा जाएगा, ताकि चारा उत्पादन, विपणन और उचित मूल्य की व्यवस्थित श्रृंखला तैयार हो सके। इससे किसान भी आत्मनिर्भर बनेंगे और गोशालाओं को सतत रूप से पौष्टिक हरा चारा उपलब्ध होगा। मोरिंगा-नेपियर से बदलेगी तस्वीर मिशन फॉडर के अंतर्गत गोशालाओं की उपलब्ध भूमि का अधिकतम उपयोग करते हुए मोरिंगा (सहजन) और नेपियर घास का बड़े पैमाने पर रोपण कराया जाएगा। इसमें गन्ना घास, सुबबूल, ढैंचा और मौसमी चारे जैसे लोबिया, मक्का, ज्वार, बाजरा, बरसीम आदि को भी शामिल किया गया है। उत्तर प्रदेश की जलवायु में लगभग 50 प्रकार के पशु चारे सहज रूप से उगाए जा सकते हैं, जिनमें एकदलीय और बहुदलीय दोनों प्रकार के चारे शामिल हैं। यही विविधता इस मिशन की सबसे बड़ी ताकत बनेगी। दीर्घकालिक समाधान, कम लागत मोरिंगा पौधे लगभग 12–15 वर्षों और नेपियर घास 7–8 वर्षों तक लगातार हरा चारा उपलब्ध कराने में सक्षम हैं। मोरिंगा न केवल उच्च प्रोटीन और खनिज तत्वों से भरपूर है, बल्कि गोशालाओं में प्राकृतिक छाया और जैविक फेंसिंग का भी काम करेगा। वहीं नेपियर घास अपनी उच्च उत्पादन क्षमता और नियमित कटिंग के कारण सतत चारा स्रोत के रूप में महत्वपूर्ण है। हर गोवंश को पर्याप्त हरा चारा योजना के अनुसार गोशालाओं में संरक्षित प्रत्येक गोवंश को पर्याप्त हरा चारा प्रतिदिन उपलब्ध कराया जाएगा। हरा चारा पोषण की दृष्टि से सूखे चारे की तुलना में अधिक लाभकारी है। इससे गोवंश के स्वास्थ्य तथा दुग्ध उत्पादन में उल्लेखनीय सुधार होगा। साथ ही चारा उत्पादन में आत्मनिर्भरता से बाहरी निर्भरता घटेगी और गोशालाओं की संचालन लागत में कमी आएगी। हरित आवरण बढ़ेगा, भूमि की उर्वरता सुधरेगी श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में तैयार इस समग्र कार्ययोजना के केंद्र में गोवंश संरक्षण, पोषण सुरक्षा, प्राकृतिक खेती, पर्यावरण संतुलन और ग्रामीण-शहरी सहभागिता को रखा गया है। मिशन फॉडर के माध्यम से न केवल गोशालाओं का दीर्घकालिक संचालन मजबूत होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर हरित आवरण बढ़ेगा और भूमि की उर्वरता सुधरेगी। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी योजना प्रदेश सरकार के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग इस योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू करेगा। यह पहल आत्मनिर्भर गोशाला, प्राकृतिक खेती और सशक्त ग्रामीण अर्थव्यवस्था के उस विजन को जमीन पर उतारने की दिशा में निर्णायक कदम मानी जा रही है, जिसकी नींव योगी सरकार ने रखी है।