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करोड़ों के घोटाले पर CBI सख्त, हरियाणा-चंडीगढ़ के कई अफसरों पर गिर सकती है गाज

चंडीगढ़. आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़े हरियाणा के सरकारी विभागों और चंडीगढ़ नगर निगम समेत क्रेस्ट के खातों में हुए करोड़ों के घोटाले में सीबीआई अब बड़े एक्शन की तैयारी में है। आईएएस समेत कई अफसरों पर गिरफ्तारी की तलवार लटकी हुई है, जिससे उनकी नींद उड़ी हुई है। नगर निगम और स्मार्ट सिटी लिमिटेड से जुड़े 116 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले में सीबीआई की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है।  शुरुआत से ही कई वरिष्ठ अधिकारी जांच के दायरे में हैं और उनसे पूछताछ चल रही थी, लेकिन उन्हें इस मामले में न तो आरोपित बनाया गया और न ही गिरफ्तार किया। हाल ही में हरियाणा में हुए 650 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले में सीबीआई ने पंचकूला नगर निगम के तत्कालीन आयुक्त और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी आरके सिंह को गिरफ्तार किया। चंडीगढ़ में हुए घोटाले में भी अफसरों के नाम सामने आए हैं। सीबीआई जल्द उनके खिलाफ भी बड़ा एक्शन ले सकती है। दोनों मामले एक दूसरे से जुड़े हैं और सीबीआई दोनों की जांच कर रही है। ऐसे में दोनों मामलों में बड़े अधिकारियों की गिरफ्तारी हो सकती है। पिछले महीने सीबीआई को मिला केस सीबीआई ने पिछले महीने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच अपने हाथ में ली थी। इससे पहले मामले की जांच चंडीगढ़ पुलिस कर रही थी। जांच में सामने आया कि स्मार्ट सिटी परियोजना की एफडी में जमा करोड़ों रुपये का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया। आरोप है कि धनराशि को निकालकर निजी हितों के लिए इस्तेमाल किया गया और बाद में रिकार्ड में हेरफेर कर फर्जी एफडी दस्तावेज तैयार किए गए। स्मार्ट सिटी परियोजना खत्म होने के बाद शेष ग्रांट और बैंक जमा राशि को नगर निगम के खातों में स्थानांतरित किया जाना था। इसी प्रक्रिया के दौरान आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में दिखाई जा रही एफडी की रसीदें जाली पाई गईं। जांच में खुलासा हुआ कि एफडी में जमा रकम पहले ही निकाली जा चुकी थी। शेल कंपनियां बनाकर किया घोटाला आरोपितों ने इस रकम को विभिन्न शेल कंपनियों के खातों में ट्रांसफर किया और बाद में रियल एस्टेट सहित अन्य क्षेत्रों में निवेश कर मोटी कमाई की। मामला उजागर होने के बाद इसकी शिकायत पुलिस को दी गई थी। अब सीबीआई वित्तीय लेनदेन, बैंक रिकाॅर्ड, शेल कंपनियों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कर रही है। इस मामले में अब तक 10 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है जिनमें स्मार्ट सिटी और आइडीएफसी बैंक के अधिकारी भी शामिल हैं।

साय कैबिनेट की अहम बैठक 23 जून को, किसानों से जुड़े मुद्दों पर होगी विशेष चर्चा

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में 23 जून को सुबह 11:30 बजे नवा रायपुर स्थित मंत्रालय में राज्य मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक में मानसून की देरी को देखते हुए खरीफ सीजन की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। धान समेत अन्य फसलों की बुआई की स्थिति, किसानों के लिए खाद-बीज की उपलब्धता एवं वितरण व्यवस्था पर विशेष चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा 13 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र की तैयारियों पर भी मंत्रिमंडल मंथन करेगा। बैठक में अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े प्रस्तावों और संशोधित नियमों को मंजूरी मिल सकती है। वहीं, शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों के थोक तबादलों के लिए नई स्थानांतरण नीति पर भी कैबिनेट की मुहर लगने की संभावना जताई जा रही है।

मध्यप्रदेश में फिर दौड़ेंगी सरकारी बसें, 21 साल बाद इंदौर से शुरू होगी नई पहल

भोपाल. मध्यप्रदेश के लोगों के लिए सार्वजनिक परिवहन को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। प्रदेश में 21 साल बाद सरकारी कंपनी की बसें दोबारा सड़कों पर दौड़ने जा रही हैं। इसकी शुरुआत इंदौर से जुलाई-अगस्त 2026 में प्रस्तावित है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ई-बस सेवा (PM E-Bus Service) के तहत इंदौर शहर में 150 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन भी जुलाई महीने से शुरू करने की तैयारी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 1 जून को मंत्रालय में मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के संचालक मंडल की बैठक ली थी। इस बैठक में प्रदेश की नई परिवहन व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। बैठक में बोर्ड के उपाध्यक्ष एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह, मुख्य सचिव अनुराग जैन समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में प्रबंध संचालक मनीष सिंह ने नई परिवहन व्यवस्था को लेकर प्रेजेंटेशन दिया। इसमें बताया गया कि प्रदेश को सात परिवहन क्षेत्रों में बांटा जाएगा। इनमें इंदौर, उज्जैन, भोपाल, जबलपुर, सागर, ग्वालियर और रीवा शामिल हैं। इंदौर से होगी मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की शुरुआत बैठक में बताया गया कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना और PM ई-बस सेवा के तहत बसों का संचालन सबसे पहले इंदौर क्षेत्र से शुरू किया जाएगा। इंदौर क्षेत्र के अंतर्गत इंदौर संभाग के सभी जिले और इंदौर स्थित अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड (AICTSL) मिलकर बस संचालन की जिम्मेदारी संभालेंगे। इंदौर से मध्यप्रदेश के अन्य जिलों को जोड़ने वाले इंटरसिटी मार्गों पर बसें चलाई जाएंगी। इसके अलावा इंदौर शहर में सिटी बस सेवा को भी मजबूत किया जाएगा। वहीं महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जाने वाले अंतरराज्यीय मार्गों पर भी अनुबंध के अनुसार बसों का संचालन किया जाएगा। PM ई-बस सेवा के तहत इंदौर में चलेंगी 150 इलेक्ट्रिक बसें प्रदेश सरकार की योजना के अनुसार इंदौर शहर में PM ई-बस सेवा की 150 इलेक्ट्रिक बसें जुलाई 2026 से चलाने का प्रस्ताव है। इन बसों का उद्देश्य शहर में सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाना और यात्रियों को आधुनिक सुविधा उपलब्ध कराना है। इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से शहर में परिवहन व्यवस्था को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। सात क्षेत्रों में 620 मार्गों पर चलेंगी 2432 बसें बैठक में बताया गया कि सात क्षेत्रीय मुख्यालयों के शहरों से प्रदेश के विभिन्न जिला मुख्यालयों तक जाने वाले कुल 620 मार्गों की पहचान की गई है। इन मार्गों पर कुल 2432 बसों के संचालन की योजना बनाई गई है। इंदौर क्षेत्र के लिए प्रदेश के अन्य जिलों को जोड़ने वाले 121 मार्ग चिन्हित किए गए हैं। इन मार्गों पर कुल 608 बसें संचालित की जाएंगी। इंदौर में सिटी बस सेवा का होगा विस्तार मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत सातों क्षेत्रीय मुख्यालयों में सिटी बस सेवा भी संचालित की जाएगी। इन बसों को केवल शहर तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि आसपास के महत्वपूर्ण उपनगरीय क्षेत्रों तक भी चलाया जाएगा ताकि अधिक से अधिक लोगों को सुविधा मिल सके। इंदौर में शहर और आसपास के क्षेत्रों के लिए कुल 28 सिटी बस मार्ग चिन्हित किए गए हैं। इन मार्गों पर PM ई-बस सेवा की 150 बसों को मिलाकर कुल 784 बसें चलाने की योजना है। चार राज्यों के लिए चलेंगी अंतरराज्यीय बसें इंदौर क्षेत्र से महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जाने वाले मार्गों के लिए भी बस सेवा शुरू की जाएगी। इन राज्यों के लिए कुल 101 अंतरराज्यीय मार्ग चिन्हित किए गए हैं। इन मार्गों पर 276 बसों का संचालन अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड (AICTSL) द्वारा किया जाएगा। इस तरह इंदौर से शुरू होने वाली इंटरसिटी, सिटी और अंतरराज्यीय बस सेवाओं को मिलाकर कुल 250 मार्गों पर 1688 बसें संचालित करने की योजना है। पूरे प्रदेश में 1164 मार्गों पर चलेंगी 5206 बसें सरकार की योजना के अनुसार प्रदेश के सातों क्षेत्रों में सभी श्रेणी की बस सेवाओं के लिए कुल 1164 मार्ग चिन्हित किए गए हैं। इन मार्गों पर कुल 5206 बसों का संचालन किया जाएगा। अन्य छह क्षेत्रीय मुख्यालयों से भी इंदौर की तरह बस सेवा शुरू की जाएगी। संबंधित क्षेत्रीय कंपनियां अपने-अपने क्षेत्रों में बस संचालन की जिम्मेदारी संभालेंगी। निजी बस संचालकों पर नहीं पड़ेगा असर बैठक में स्पष्ट किया गया कि नई सरकारी बस सेवा शुरू होने से वर्तमान निजी बस संचालकों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। मोटरयान अधिनियम 1988 के प्रावधानों के अनुसार योजना लागू की जाएगी। निजी बसों के वर्तमान अनुज्ञा-पत्र पहले की व्यवस्था के अनुसार जारी रहेंगे और उनका संचालन जारी रहेगा। राज्य स्तरीय कंपनी और सात सहायक कंपनियां होंगी गठित बैठक में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के लिए गठित राज्य स्तरीय कंपनी और सात सहायक क्षेत्रीय कंपनियों के संगठनात्मक ढांचे को मंजूरी दी गई। मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड में सात विभाग काम करेंगे। इनमें आईटी एवं आईटीएमएस विभाग, प्लानिंग एवं अनुबंध विभाग, पॉलिसी एवं अनुसंधान, मानव संसाधन एवं विधि विभाग, अधोसंरचना विभाग, प्रवर्तन एवं गुणवत्ता विभाग और बिजनेस डेवलपमेंट विभाग शामिल हैं। इन विभागों के प्रमुख मुख्य महाप्रबंधक स्तर के अधिकारी होंगे। 1190 पदों को मिली मंजूरी, चार साल में होगी भर्ती राज्य स्तरीय होल्डिंग कंपनी में कुल 140 पद स्वीकृत किए गए हैं। वहीं सात क्षेत्रीय सहायक कंपनियों में 150 पदों को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा सात सहायक क्षेत्रीय कंपनियों में कुल 1190 पद विभिन्न विभागों के लिए सृजित करने की मंजूरी दी गई है। इन पदों पर अगले चार वर्षों में चरणबद्ध तरीके से भर्ती की जाएगी। भर्ती प्रतिनियुक्ति, संविदा और संविलयन के आधार पर की जा सकेगी। सुरक्षा और गुणवत्ता पर रहेगा विशेष ध्यान सरकार ने बस संचालन में यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता दी है। बसों की सुरक्षा और प्रवर्तन व्यवस्था के लिए पुलिस एवं विशेष सशस्त्र बल से अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रतिनियुक्ति पर लिया जा सकेगा। वहीं गुणवत्ता नियंत्रण के लिए अलग विभाग बनाया जाएगा। इन बसों की आवाजाही प्रदेश के सभी ISBT और बस स्टैंड तक हो सकेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिए जरूरी निर्देश मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत बस मार्गों और यात्री सुविधाओं को बेहतर तरीके से व्यवस्थित किया जाए। उन्होंने नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे को सात शहरों में स्थित कंपनियों की देनदारियों को लेकर … Read more

अमृतसर में डॉक्टरों ने रचा इतिहास, 6 महीने के बच्चे की जटिल हार्ट सर्जरी सफल

अमृतसर. सरकारी मेडिकल कॉलेज गुरु नानक देव अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञों की टीम ने मात्र छह माह के शिशु के जन्मजात हृदय दोष का उपचार कर चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। शिशु का वजन केवल 4.5 किलोग्राम था और वह अपेक्षित शारीरिक विकास नहीं कर पा रहा था। चिकित्सकीय भाषा में इस स्थिति को पीडीए (पेटेंट डक्टस ऑर्टेरियोसस) कहा जाता है। यह एक जन्मजात हृदय विकार है, जिसमें जन्म के बाद हृदय से जुड़ी एक रक्तवाहिनी नहीं होती। कम वजन वाले शिशुओं में इस रोग का उपचार करने की प्रक्रिया और चुनौतीपूर्ण है। हृदय रोग विशेषज्ञ डा. परमिंदर सिंह मांगेड़ा के अनुसार, चिकित्सकों की टीम ने आधुनिक लाइफटेक वैस्कुलर प्लग उपकरण की सहायता से शिशु के हृदय दोष को सफलतापूर्वक बंद किया। चिकित्सा दल ने इस सफलता का श्रेय ईश्वर की कृपा, वरिष्ठ चिकित्सकों के मार्गदर्शन और पूरी टीम के सामूहिक प्रयास को दिया। इस प्रक्रिया में डा. वीना, डा. मिलिंद तथा एनेस्थीसिया विभाग की पूरी टीम का विशेष योगदान रहा।

किसानों के खातों में पहुंचेंगे 4352 करोड़ रुपये, पीएम मोदी करेंगे 23वीं किस्त जारी

लखनऊ यूपी के किसानों के लिए खुशखबरी है। शनिवार यानी आज प्रदेश के सवा दो करोड़ से अधिक किसानों के अकाउंट में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 23वीं किस्त के रूप में 4352.40 करोड़ रुपये ट्रांसफर किया जाएगा। पश्चिम बंगाल से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस किस्त को जारी करेंगे। बता दें कि पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत पात्र किसान परिवारों को हर साल 6 हजार रुपये की आर्थिक सहायता तीन किस्तों में दी जाती है। ये पैसे सीधे लाभार्थियों के बैंक अकाउंट में भेजी जाती है। अधिकारियों के मुताबिक उत्तर प्रदेश के 2.17 करोड़ से अधिक किसानों को 23वीं किस्त का लाभ मिलेगा। इसके तहत उनके खातों में 4352.40 करोड़ रुपये भेजे जाएंगे। इससे पहले मार्च 2026 में प्रधानमंत्री मोदी ने असम से योजना की पिछली किस्त जारी की थी। वहीं, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत 24 फरवरी 2019 को गोरखपुर से की गई थी। यूपी सरकार के अनुसार 22वीं किस्त तक उकिसानों को योजना के तहत कुल 99032.58 करोड़ रुपये की सहायता राशि प्रदान की जा चुकी है। वहीं, शनिवार को 4352.40 करोड़ रुपये जारी होने के बाद यह आंकड़ा बढ़कर 103391.24 करोड़ रुपये हो जाएगा। देशभर के 9.44 करोड़ किसानों को मिलेगा लाभ अगर कुल लाभार्थियों की बात करें तो 9.44 करोड़ से अधिक किसानों के अकाउंट में 18880 करोड़ से अधिक की धनराशइ हस्तांतरण की जाएगी। पीएम मोदी का ये कार्यक्रम करीब दोपहर के 3 बजकर 45 मिनट पर पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के तारकेश्वर में है झांसी में रहेंगे सीएम योगी शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ झांसी के रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में किसानों के बीच मौजूद रहेंगे। इस अवसर पर वह प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 23वीं किस्त वितरण कार्यक्रम से जुड़ेंगे तथा यूपी एग्रीज परियोजना के खरीफ संस्करण का शुभारंभ भी करेंगे। 2238.92 करोड़ से बढ़कर 13727.85 करोड़ हुई वर्षवार आंकड़ों की बात करें तो जानकारी के मुताबिक वर्ष 2018-19 में किसानों को 2238.92 करोड़ रुपये, 2019-20 में 11006.87 करोड़ रुपये, 2020-21 में 14432.14 करोड़ रुपये, 2021-22 में 15775.52 करोड़ रुपये, 2022-23 में 12454.32 करोड़ रुपये, 2023-24 में 13808.48 करोड़ रुपये, 2024-25 में 15594.74 करोड़ रुपये तथा 2025-26 में 13727.85 करोड़ रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई है। लिस्ट में ऐसे चेक करें अपना नाम पीएम किसान सम्मान निधि योजना में अपना चेक करने के लिए सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट https://pmkisan.gov.in/ पर जाएं। यहां Farmers Corner का ऑप्शन मिलेगा। इसमें Beneficiary Status पर क्लिक करें। यहां मांगी गई जानकारी जैसे आधार नंबर, रजिस्ट्रेशन नंबर, मोबाइल नंबर डालकर Get Report पर क्लिक कर दें। ऐसे में आपका स्टेट्स चेक हो जाएगा। वहीं, रजिस्ट्रेशन नंबर खो या भूल जाने पर आप अपना नंबर दोबारा पता कर सकते हैं। इसके लिए know your Registration number के ऑप्शन में जाकर मांगी गई जानकारी भरने के बाद आखिर में कैप्चा कोड और ओटीपी डालकर सबमिट कर दें।

CM साय आज जशपुर में, जैविक खेती को देंगे बढ़ावा; जनकल्याण शिविर में भी होंगे शामिल

रायपुर. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज जशपुर जिले के दौरे पर रहेंगे। CM साय सुबह करीब 11:30 बजे बगिया से कुनकुरी के पण्डरीपानी पहुंचेंगे। यहां वे जैविक खेती कार्यशाला, जनकल्याणकारी शिविर और भूमिपूजन व लोकार्पण कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। इसके बाद दोपहर ढाई बजे वे बेमताटोली जाएंगे, जहां उत्कल ब्राह्मण समाज सेवा समिति के सामाजिक भवन का भूमिपूजन करेंगे। दोपहर बाद CM साय गिनाबहार में निर्माणाधीन MCH, BPHU, चराईडांड में निर्माणाधीन 220 बिस्तर अस्पताल, फिजियोथेरेपी और नर्सिंग कॉलेज, सलियाटोली में निर्माणाधीन स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और नालंदा परिसर का निरीक्षण करेंगे। सलियाटोली में पौने तीन बजे आयोजित ‘PM किसान उत्सव दिवस’ कार्यक्रम में शामिल होने के बाद, वे करीब 5:30 बजे अंबिकापुर के लिए रवाना हो जाएंगे।

पेंशन-पीएफ का झंझट होगा खत्म, मध्यप्रदेश में कर्मचारियों के लिए नया ऑनलाइन सिस्टम लागू

भोपाल. सेवानिवृत्त या मृत्यु की स्थिति में कर्मचारियों को किए जाने वाले अंतिम भुगतान की व्यवस्था में प्रदेश सरकार ने परिवर्तन किया है। अब अंतिम भुगतान के प्रकरणों के निराकरण के लिए कोषालयीन कंप्यूटर प्रणाली के माध्यम से ऑनलाइन प्रक्रिया निर्धारित की गई है। संचालक पेंशन, भविष्य निधि एवं बीमा को भुगतान सहित अन्य सभी प्रक्रियाओं के लिए अधिकृत किया गया है। वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव मनीष रस्तोगी द्वारा जारी किए गए निर्देश के अनुसार भविष्य निधि कटौती का विवरण कर्मचारी प्रतिमाह कोषालयीन कंप्यूटर प्रणाली के माध्यम से देख सकेंगे। चार महीने पहले करना होगा आवेदन कोई गड़बड़ी नजर आने पर अभ्यावेदन आहरण एवं संवितरण अधिकारी को देंगे। सेवानिवृत्ति से चार माह पूर्व जब अंशदान की कटौती बंद कर दी जाती है, तक कर्मचारी ब्याज की गणना का सत्यापन करेंगे। चार माह पहले ही अपना अंतिम भुगतान आवेदन प्रस्तुत करेंगे। ऑनलाइन आवेदन जमा होने और वास्तविक भुगतान प्राप्त होने तक अपने वेतन से संबंध बैंक खाते में किसी प्रकार का कोई परिवर्तन करने की अनुमति नहीं रहेगी। ऑनलाइन आवेदन के समय ओटीपी प्राप्त होगा, जिसे सुरक्षित रखने का दायित्व कर्मचारी का होगा। सीधे खाते में आएगी राशि कर्मचारी से प्राप्त आवेदन का मिलान विभाग में संधारित निधि की पासबुक एवं सेवा पुस्तिका से होगा और उसकी प्रविष्टि कराई जाएगी। सत्यापित पृष्ठों को स्कैन कर कोषालयीन कंप्यूटर प्रणाली पर अपलोड किया जाएगा। आहरण एवं संवितरण अधिकारी से प्राप्त प्रकरणों का परीक्षण करने के बाद संचालक पेंशन के द्वारा भुगतान संबंधी आदेश जारी किए जाएंगे। भुगतान की राशि सीधे कर्मचारियों के उसे खाते में अंतरित की जाएगी, जहां सेवानिवृत्ति से पूर्व निरंतर छह माह का वेतन जमा किया गया हो। कर्मचारियों की मृत्यु होने की स्थिति में संबंधित कार्यालय द्वारा नाम, जन्मतिथि, बैंक खाते का सत्यापन किया जाएगा। विवरण अपूर्ण होने पर स्वजन से जानकारी प्राप्त कर उसे अद्यतन किया जाएगा। नामांकित व्यक्ति के बैंक खाते में भुगतान होगा। नामांकित व्यक्ति के अल्पायु होने पर वैध संरक्षक के साथ संयुक्त बैंक खाते में राशि जमा कराई जाएगी। एक जुलाई 2026 के बाद विभागीय भविष्य निधि जमाशेष में किसी भी प्रकार का संशोधन केवल प्रमाणित साक्ष्यों और विभागाध्यक्ष की अनुशंसा के आधार पर संचालक पेंशन के स्तर से किया जा सकेगा। आनलाइन की प्राधिकार पत्र जारी होने की तिथि से छह माह की अवधि के लिए ही वैद्य रहेगा।

तलाक के एक दशक बाद हुआ पुनर्मिलन, बेटियों की खातिर फिर साथ आए पति-पत्नी

10 साल पहले हुआ था तलाक सखी की समझाइश से बेटियों के लिए फिर एक हुआ परिवार भोपाल  मध्यप्रदेश में संकटग्रस्त, पीड़ित और असहाय महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए संचालित 'वन स्टॉप सेंटर' (सखी) मील का पत्थर साबित हो रहे हैं। ऐसा ही एक अविश्वसनीय और दिल को छू लेने वाला मामला मध्यप्रदेश के दतिया जिले से सामने आया है, जहां कानूनी तौर पर तलाक होने के 10 वर्ष बाद वन स्टॉप सेंटर के प्रयासों से एक परिवार को पुनः मिलाया गया। इस पहल ने न सिर्फ दो मासूम बच्चियों को उनके पिता का साया वापस दिलाया, बल्कि टूट चुके एक वैवाहिक रिश्ते में फिर से खुशियों के रंग भर दिए। यह कहानी दतिया की रहने वाली 36 वर्षीय उर्मिला (बदला हुआ नाम) की है। 10 वर्ष पूर्व न्यायालय द्वारा पति से तलाक होने के बाद उर्मिला अपनी दो मासूम बच्चियों के साथ मायके में रह रही थी। उर्मिला के वृद्ध पिता मजदूरी करके किसी तरह अपनी बेटी और दोनों नातिनों का पेट पाल रहे थे और तंगहाली के बावजूद बच्चियों को अच्छे स्कूल में पढ़ा रहे थे। वर्तमान समय में महंगाई और बढ़ती उम्र के कारण वृद्ध पिता के लिए पूरे परिवार का खर्च उठाना असंभव हो गया। अपनी बच्चियों के भविष्य को अंधकार में डूबता देख, उर्मिला ने हिम्मत जुटाई और दतिया कलेक्टर की जनसुनवाई में न्याय की गुहार लगाते हुए एक शिकायती पत्र सौंपा। वन स्टॉप सेंटर से मिली मदद महिला एवं बाल विकास विभाग दतिया के जिला कार्यक्रम अधिकारी अरविंद कुमार उपाध्याय के माध्यम से यह संवेदनशील मामला तुरंत 'वन स्टॉप सेंटर' को ट्रांसफर किया गया। सेंटर पर जब उर्मिला को काउंसलिंग के लिए बुलाया गया, तो 10 साल का दर्द और भविष्य की चिंता उसकी आँखों से बह निकली। उसकी बस यही चिंता थी कि क्या तलाक के इतने सालों बाद उसका पति उसे और बच्चियों को स्वीकार करेगा? वन स्टॉप सेंटर की प्रशासक सुरीना गौतम ने उर्मिला को ढांढस बंधाया और हर संभव प्रयास कर उसका हक दिलाने का अटूट विश्वास दिलाया। कानूनी पेचीदगियों पर भारी पड़ी 'समझाइश' वन स्टॉप सेंटर की टीम ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की मदद से उर्मिला के पति और उसके परिवारजनों को कार्यालय आमंत्रित किया। काउंसलिंग के दौरान पति ने 10 साल पुराने तलाक के कानूनी दस्तावेज पेश किए। कानूनी रूप से रिश्ता खत्म हो चुका था, लेकिन मानवीय दृष्टिकोण अभी बाकी था। विभाग के अधिकारियों और वन स्टॉप सेंटर की टीम ने कड़े वैधानिक रुख के बजाय बेहद संवेदनशील तरीके से संयुक्त काउंसलिंग की। उन्होंने पति और उसके परिवार को बच्चियों के भरण-पोषण, शिक्षा और उनके सुरक्षित भविष्य का अहसास कराया। और खिल उठे चेहरे, लौट आई खुशियां इस मैराथन काउंसलिंग और मानवीय समझाइश का असर यह हुआ कि पति और उसके भाइयों का दिल पिघल गया। पति न केवल कानूनी तलाक को भुलाकर उर्मिला को पत्नी के रूप में दोबारा स्वीकार करने को राजी हुआ, बल्कि दोनों बच्चियों की पढ़ाई और पूरी जिम्मेदारी उठाने की सहर्ष सहमति दे दी। 10 साल से मायूसी का जीवन जी रही उर्मिला का चेहरा उम्मीद की नई किरण से खिल उठा। वन स्टॉप सेंटर के दफ्तर में जो परिवार कभी कानूनी तौर पर अलग हुआ था, वह एक-दूसरे का हाथ थामकर, खुशी-खुशी अपने घर के लिए रवाना हुआ। उर्मिला ने नम आंखों से दतिया प्रशासन और वन स्टॉप सेंटर का आभार व्यक्त किया।  

उमंग सिंघार की याचिका पर बहस खत्म, विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता पर हाई कोर्ट का फैसला सुरक्षित

 जबलपुर  मप्र हाई कोर्ट ने गुरुवार को मध्य प्रदेश की राजनीति से जुड़े बहुचर्चित दलबदल प्रकरण में सुनवाई पूरी कर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। सागर जिले की बीना सीट से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता समाप्त करने की मांग वाली याचिका पर हुई सुनवाई के बाद अब सभी की निगाहें कोर्ट के फैसले पर टिक गई हैं। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे ने पार्टी विरोधी गतिविधियों में भाग लेकर दलबदल कानून का उल्लंघन किया है। याचिका में उनकी विधानसभा सदस्यता शून्य घोषित करने की मांग की गई है। विधानसभा अध्यक्ष की देरी पर कोर्ट जता चुका है नाराजगी दरअसल, मामले ने तब और गंभीर स्वरूप ग्रहण कर लिया था, जब पिछली सुनवाई में हाई कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के समक्ष लंबित कार्रवाई में हो रही देरी पर तीखी नाराजगी व्यक्त की थी। न्यायालय ने स्पष्ट पूछा था कि जब दलबदल संबंधी मामलों में सुप्रीम कोर्ट 90 दिनों के भीतर निर्णय का मानक तय कर चुका है, तब लगभग दो वर्ष बाद भी अंतिम निर्णय क्यों नहीं हो पाया। याचिका के अनुसार, 30 जून 2024 को विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष दलबदल संबंधी आवेदन प्रस्तुत किया गया था। आरोप है कि लोकसभा चुनाव के दौरान पांच मई 2024 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के के एक कार्यक्रम में सार्वजनिक रूप से भाजपा के मंच पर पहुंचकर निर्मला सप्रे ने अपनी राजनीतिक निष्ठा बदलने का संकेत दिया था। इसके बावजूद उन्होंने विधायक पद से त्यागपत्र नहीं दिया।  

UP Politics: चुनावी गर्मी के बीच NDA की OBC रणनीति ने बढ़ाया सियासी तापमान, अखिलेश पर दबाव

 नई दिल्ली उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का भले ही औपचारिक ऐलान न हुआ हो, लेकिन सियासी बिसात अभी से ही बिछाई जाने लगी है. लोकसभा चुनाव में सपा ने पीडीए समीकरण के जरिए बीजेपी को मात देने में सफल रहे थे. अब चुनावी तपिश बढ़ने के साथ ही डिप्टीसीएम केशव प्रसाद मौर्य, संजय निषाद और ओम प्रकाश राजभर की तिकड़ी इन दिनों अखिलेश यादव के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है और सपा के 'पीडीए फार्मूले' को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं?  अखिलेश यादव 2024 के फार्मूले से ही 2027 का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं. सपा की कोशिश पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के साथ ब्राह्मण वोटों को जोड़ने की है. इसके अलावा अखिलेश यादव इन दिनों 'विजन इंडिया' के जरिए बीजेपी के कोर वोटबैंक माने जाने वाले व्यापारियों को अपने पाले में करने की रणनीति है।  सपा एक मजबूत सोशल इंजीनियरिंग के साथ विधानसभा चुनाव में उतरना चाहती है, जिसके समझते हुए बीजेपी ने अपने ओबीसी नेताओं की एक पूरी फौज सियासी रण में उतार दिया है. इसी के तहत केशव प्रसाद से लेकर संजय निषाद और ओम प्रकाश राजभर हर रोज अखिलेश की सियासी केमिस्ट्री पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।  अखिलेश के सिरदर्द बने राजभर योगी सरकार में मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने 2022 में सपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, लेकिन सरकार बनने के बाद बीजेपी के साथ हो गए थे. वो पूर्वांचल से आते हैं और राजभर समाज के बड़े चेहरे माने जाते हैं. ओबीसी के मुद्दे पर राजभर आक्रमक रहते हैं. 2024 में एनडीए को बिगड़े हुए समीकरण को दुरुस्त करने के मद्देनजर से ओमप्रकाश राजभर  एक तरफ सपा में बगावत की चिंगारी भड़का रहे हैं तो दूसरी ओर अखिलेश के पीडीए पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है।  राजभर यह कह रहे हैं कि सपा में बहुत जल्द बगावत होने वाली है, तमाम लोकसभा सांसद अखिलेश यादव का साथ छोड़ देंगे. इसके लिए कभी बलिया के किसी नेता की तरफ इशारा करते हैं तो कभी मुरादाबाद की सांसद रूची वीरा की तरफ इशारा करते हैं. साथ ही सपा के पीडीए फार्मूले को कठघरे में  खड़ा कर रहे हैं. राजभर ने कहा कि पीडीए का मतलब 'पीट देगा अहीर' और 'पीट देगा अल्पसंख्यक' है।  ओम प्रकाश राजभर कहते हैं कि सपा नेताओं को यह गलतफहमी नहीं पालनी चाहिए कि वो दलितों पर होने वाले अत्याचारों के मामलों को सार्वजनिक नहीं करेंगे. उन्होंने कहा कि यूपी पुलिस के आंकड़े बताता हैं कि प्रदेश में दलितों और शोषितों पर अत्याचार करने के मामले में सबसे ज्यादा यादव और मुस्लिम लोग हैं. ओपी राजभर ने दलित उत्पीड़न के आंकड़े भी गिना रहे हैं. इस तरह राजभर बताना चाहते हैं कि दलितों पर होने वाले अत्याचार यादव और मुस्लिम कर रहे हैं, जो सपा का वोटबैंक है।  संजय निषाद भी सपा पर हमलावर योगी सरकार में मंत्री और निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद भी फ्रंटफुट पर उतर गए हैं और अखिलेश यादव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने कहा कि सपा के कई बड़े नेता उनके संपर्क में हैं. राजभर से दो हाथ आगे निकलते हुए निषाद कहते हैं कि सपा के 25 सांसद हमारे संपर्क में है, जिसके जरिए बता रहे हैं कि सपा में बड़ी फूट होने वाली है।