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दो नाबालिग बहनों से दुष्कर्म मामले में आरोपी को उम्रकैद की सजा

बलौदा बाजार. दो नाबालिग सगी बहनों को शादी का प्रलोभन देकर ले जाने और बलात्संग कारित करने वाले आरोपी को अदालत ने आजीवन कारावास के साथ अर्थदंड लगाया है। विशेष लोक अभियोजक संजय बाजपेयी ने बताया कि मामला थाना सिमगा का है, जहाँ पीड़िता के पिता की रिपोर्ट पर सिमगा थाना पुलिस ने गुम इंसान दर्ज कर विवेचना के दौरान पीड़िता को नागपुर में बरामद किया। पीड़िता ने पूछताछ में आरोपी सनत साहू द्वारा उसे शादी का प्रलोभन देकर नागपुर भगाकर ले जाने और शारीरिक संबंध बनाने से गर्भवती होकर एक बालिका को जन्म देने और उसके बाद उसे छोड़कर वर्ष 2024 में उसकी छोटी बहन को भगाकर ले जाने व उसके साथ कहीं अलग जगह रहने की बात बताई। प्रकरण में तात्कालिक थाना प्रभारी डीएसपी योगिता खापर्डे, सहायक उपनिरीक्षक एसके कुरैशी एवं तत्कालिक एसडीओपी ऐश्वर्य चंद्राकर ने एक टीम बनाकर आरोपी की गिरफ्तारी एवं दोनों बहनों को नागपुर से बरामद कर सकुशल उनके परिजन को सौंपा गया। इसके साथ नाबालिग पीड़ितों के स्कूल के दाखिल खारिज रजिस्टर जप्त कर गवाहों के साक्ष्य लेखन कर न्यायालय के समक्ष आरोपी के विरुद्ध दोनों मामले में चलान पेश किया गया। अपर सत्र न्यायाधीश सतीश कुमार जायसवाल ने प्रकरण की गंभीरता एवं साक्ष्यों के परिशीलन करने बाद आरोपी द्वारा किया गया अपराध सिद्ध होना पाया और अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को दोनों मामले में आजीवन कारावास एवं अर्थदण्ड से दंडित किया गया है, तथा सभी सजाएं साथ- साथ भुगताए जाने का आदेश दिया गया।

नर्मदापुरम जिला एवं सत्र न्यायालय ने की अपील खारिज, 5 वर्ष के सश्रम कारावास और ₹10 हजार जुर्माने की मिली सजा

भोपाल  नर्मदापुरम के जिला एवं सत्र न्यायालय ने मध्यप्रदेश स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एमपीएसटीएफ) द्वारा गिरफ्तार किये गये बाघ के अवैध शिकार और उसकी हड्डियों की अंतर्राष्ट्रीय तस्करी के आरोपी ताशी शेरपा की अपील खारिज कर दी है। न्यायालय ने 17 सितंबर 2026 को निर्णय सुनाते हुए अंतर्राष्ट्रीय वन्यजीव तस्कर की 5 वर्ष के सश्रम कारावास और ₹10 हजार के अर्थदंड की सजा को बरकरार रखा। न्यायालय ने ताशी शेरपा को अंतर्राष्ट्रीय बाघ तस्करी गिरोह की एक महत्वपूर्ण कड़ी माना। मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद दिसंबर 2022 में नर्मदापुरम (होशंगाबाद) के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने 27 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 5-5 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। जांच के दौरान एमपीएसटीएफ ने इंटरपोल, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) सहित अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों से भी सहयोग प्राप्त किया। जुलाई 2015 में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व, नर्मदापुरम में बाघ के अवैध शिकार और उसकी हड्डियों की चीन में अवैध की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मामले की जांच एमपीएसटीएफ को सौंपी गई। लंबे समय से फरार चल रहे ताशी शेरपा को एमपीएसटीएफ की टीम ने लगातार प्रयासों के बाद 23 जनवरी 2024 को अंतर्राष्ट्रीय सीमा के समीप पानी टंकी, सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल) से गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से फर्जी भारतीय दस्तावेज, विदेशी मुद्रा, नेपाली-भूटानी मुद्रा और तीन मोबाइल फोन बरामद किए गए। जांच के दौरान एमपीएसटीएफ ने वैज्ञानिक एवं साइबर साक्ष्यों को इकठ्ठा किया। ताशी शेरपा के ब्रेन मैपिंग (बीईओएस) और नार्को एनालिसिस परीक्षण कराए गए। जांच में बाघ की हड्डियों और पैंगोलिन स्केल्स की तस्करी में उसकी संलिप्तता से संबंधित महत्वपूर्ण साक्ष्य प्राप्त हुए। साइबर डेटा को भी न्यायालय में महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया गया। जांच में एक संगठित गिरोह का भी पर्दाफाश हुआ, जिसमें कुल 30 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। ताशी शेरपा के गिरोह का नेटवर्क भारत, नेपाल, भूटान और चीन तक फैला हुआ था। वह चीन के स्वायत्त क्षेत्र तिब्बत का मूल निवासी है। मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद दिसंबर 2022 में नर्मदापुरम (होशंगाबाद) के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने 27 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 5-5 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। जांच के दौरान STSF ने इंटरपोल, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) सहित अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों से भी सहयोग प्राप्त किया। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, ताशी शेरपा को अंतरराष्ट्रीय बाघ तस्करी गिरोह की एक महत्वपूर्ण कड़ी माना गया है, जिसका नेटवर्क भारत, नेपाल, भूटान और चीन तक फैला हुआ था। वह चीन के स्वायत्त क्षेत्र तिब्बत का मूल निवासी है। जिला एवं सत्र न्यायालय ने मामले में STSF द्वारा प्रस्तुत मौखिक, दस्तावेजी और वैज्ञानिक साक्ष्यों को संदेह से परे पाया और ताशी शेरपा की अपील को निराधार मानते हुए खारिज कर दिया। इसके साथ ही पूर्व में सुनाई गई 5 वर्ष के सश्रम कारावास और ₹10 हजार अर्थदंड की सजा प्रभावी बनी रही।  

मिलेट उत्पादन में अग्रणी है सीधी

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि खेती का भविष्य उज्जवल है। किसानों को अपनी खेती को समय के साथ बदलते हुए नई तकनीक, फसल विविधीकरण और खाद्य प्रसंस्करण से जोड़ने की दिशा में पहल करनी होगी। अन्न, उद्यानिकी, पशुपालन और कृषि आधारित उद्योगों में रूचि लेकर किसान आमदनी के नए रास्तें खोल सकते हैं। सीधी मिलेट उत्पादन में अग्रणी है, यहां कोदो, कुटकी, सांवा, मिजरी और काकुन जैसी कई मिलेट फसलें पारंपरिक रूप से उगाई जाती हैं, जो यहां की संस्कृति का अहम हिस्सा हैं। प्रसन्नता का विषय है कि अन्न को बढ़ावा देने के लिए जिले में 2 हज़ार हेक्टेयर में रागी और लगभग ढाई हज़ार हेक्टेयर में कोदो की फसल को बढ़ावा दिया जा रहा है।  हमारा प्रयास है कि अन्न का उत्पादन बढ़ाने के साथ किसानों को प्रसंस्करण और बाजार से भी जोड़ा जाए, जिससे उनकी आमदनी के नए रास्तें खुलें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह विचार सीधी के बलराम कृषि महोत्सव को मंत्रालय भोपाल से वर्चुअली संबोधित करते हुए व्यक्त किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चंद्रेह शिव मंदिर में विराजे बाबा भोलेनाथ, बढ़ौरानाथ स्वामी और जगत जननी जगदंबा को नमन करते हुए कहा कि सीधी जिले में आदिशक्ति के अनेक पावन धाम हैं, प्रदेशवासियों पर सबकी कृपा बनी रहे, यही कामना है। इस अवसर पर मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री  नरेन्द्र शिवाजी पटेल, मुख्यमंत्री कार्यालय में अपर मुख्य सचिव  नीरज मंडलोई उपस्थित थे। खेती-किसानी के साथ पर्यटन और दरी कारीगरी के लिए भी प्रसिद्ध है सीधी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजातीय संस्कृति से सजे सीधी की संभावनाओं की सूची बहुत लंबी है। खेती-किसानी के साथ पर्यटन, दरी कारीगरी, प्रकृति के वैभव और लोक संस्कृति यहां की रीढ़ है। पंजा दरी कारीगरों ने अपनी मेहनत और कला के बल पर सीधी को नई पहचान दी है। सीधी जिला कालीन बुनकरों का घर है, पंजा दरी विश्व प्रसिद्ध है, इसकी मांग विदेश तक है। पंजा दरी और कालीन हथकरघा उत्पादों को 'एक जिला-एक उत्पाद' के तहत बढ़ावा दिया जा रहा है। रामपुर नैकिन के भरतपुर गांव में हथकरघा और आकर्षक खादी परिधान बनाने की इकाई भी संचालित है। इससे स्थानीय कारीगरों को आय के अवसर मिल रहे हैं। किसान नवाचार और तकनीक अपना रहे हैं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सीधी के किसान नवाचार और तकनीक अपना रहे हैं। जिले में धान, गेहूं, सरसों, चना, तिल और अरहर जैसी प्रमुख फसलों के साथ फल और सब्जियों का भी उत्पादन हो रहा है। टमाटर उत्पादन में सीधी की अपनी अलग ही पहचान है। प्याज, आलू, भिंडी, खीरा और बैंगन जैसी सब्जियों के साथ कटहल, कलमी आम, ग्राफ्टेड अमरूद, कलमी नींबू, फूलगोभी और चुकंदर जैसी उन्नत फसलों में मल्चिंग और ड्रिप सिंचाई को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे पानी की बचत के साथ पैदावार भी बढ़ रही है। समय पर पंजीयन कराएं किसान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों को दिन में 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। किसानों द्वारा लिए गए कृषि ऋण को चुकाने की व्यवस्था भी उनकी सुविधा की अनुसार की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों को अपनी फसल समर्थन मूल्य पर देने के लिए समय रहते पंजीयन कराने की समझाईश दी। किसान दुग्ध उत्पादन से जुड़कर आय बढ़ाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सीधी में पिछले 6 महीनों में महिला समूहों ने 24 क्विंटल महुआ लड्डू और 5 क्विंटल महुआ बिस्किट बेचकर करीब 13 लाख रुपए की आमदनी अर्जित की है। इस उपलब्धि के लिए महिला उद्यमी बधाई की पात्र हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए उन्हें दुग्ध उत्पादन से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस के अंतर्गत संचालित सेवा संकल्प अभियान से जुड़ने का भी किसानों से आह्वान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश में 25 सितम्बर से मुख्यमंत्री सुगम बस सेवा का संचालन आरंभ हो रहा है। राज्य सरकार किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। प्रगतिशील किसानों ने साझा किए अनुभव “खेती को लाभ का धंधा कैसे बनाएं” विषय पर संगीता मिश्रा मझरेटी खुर्द सिहावल, विपिन शुक्ला मनकीसर रामपुर नैकिन, सजन सिंह बरमानी सीधी, विष्णुकांत कुशवाह भैसरहा रामपुर नैकिन एवं आरती सिंह टीकटकला सीधी ने अपने अनुभव साझा किए। मत्स्यपालन, कस्टम हायरिंग सेंटर, प्राकृतिक खेती, दाल उत्पादन, बेसन प्रोसेसिंग, राइस मिल, भैंस पालन और सब्जी उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले स्वेता सिंह, सिद्धार्थ सिंह, विवेक सिंह चैहान, संगीता मिश्रा, रीतू सिंह, बैयंत सिंह, रोहित कुमार मिश्रा, उर्मिला साहू, सौखीलाल यादव एवं गुलाब सिंह को सम्मानित किया गया। कक्षा 10वीं में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए अभय गुप्ता, प्रिंस पटेल, चैतन्य सिंह चैहान, प्रिंस सिंह चैहान, आदित्य तिवारी, शिवाक्षत शुक्ला, आदर्श सिंह, आदर्श गुप्ता, यश चतुर्वेदी एवं गरिमा दुबे को सम्मानित किया गया। सीधी में आयोजित कार्यक्रम में सांसद डॉ. राजेश मिश्रा, विधायक  कुंवर सिंह टेकाम,  विश्वामित्र पाठक, जिला पंचायत अध्यक्ष मती मंजू रामजी सिंह, कलेक्टर  विकास मिश्रा तथा अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।  

योगी सरकार में जनसुनवाई व्यवस्था को प्रभावी बनाने पर जोर, ऊर्जा मंत्री ने अधिकारियों को दी चेतावनी

लखनऊ योगी सरकार प्रदेश में जनसमस्याओं के समयबद्ध, पारदर्शी और प्रभावी निस्तारण के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने संभव (शिकायत निस्तारण पोर्टल) के माध्यम से विभिन्न जिलों से प्राप्त शिकायतों की जनसुनवाई की। इस दौरान उन्होंने कई मामलों में मौके पर ही अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए, जबकि गंभीर और लंबित शिकायतों में जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए निर्देश दिए। अधिकारियों को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश संभव पोर्टल शिकायतों का समयबद्ध पारदर्शी और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करने का एक पोर्टल है। अब इस पोर्टल के माध्यम से निर्माणाधीन परियोजनाओं की निगरानी भी सुनिश्चित की जा सकेगी। जनसुनवाई के दौरान मंत्री ए.के. शर्मा ने विद्युत विभाग के अधिकारियों को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने कहा कि बिजली चोरी करने वालों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाए। अधिकारियों को मंत्री ने दी सख्त हिदायत नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ने जनपदीय अधिकारियों को अपनी कार्यशैली में सुधार लाने की सख्त हिदायत दी है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक प्रभाव के तहत जनता को परेशान किए जाने की शिकायतें किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं। जनहित से जुड़े कार्यों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने अधिकारियों को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा कि वे अपनी कार्यशैली में सुधार लाएं, अन्यथा संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। बजट की कोई कमी नहीं- मंत्री मंत्री ने कहा कि विभाग के पास जनहित के कार्यों के लिए बजट की कोई कमी नहीं है। जनता से जुड़े सभी आवश्यक कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर निर्धारित समय-सीमा में पूरा किया जाए। अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिकायतों का निस्तारण केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहे, बल्कि शिकायतकर्ता को वास्तविक राहत मिलनी चाहिए। शासन की मंशा स्पष्ट है कि जनता की समस्याओं का समाधान निचले स्तर पर ही प्रभावी ढंग से हो और किसी नागरिक को अपनी छोटी-छोटी समस्याओं के लिए उच्च स्तर तक आने की आवश्यकता न पड़े।

उप मुख्यमंत्री ने किया निःशुल्क विशाल दिव्यांग उपकरण वितरण शिविर का शुभारंभ

रायपुर जिन हाथों ने वर्षों से किसी का सहारा लिया, वही आज खुद गिलास उठाकर पानी पी रहे थे। जिन पैरों ने कभी साथ छोड़ दिया था, वही कृत्रिम पैर लगने के बाद बाइक चला रहे थे। कबीरधाम जिले के पीजी कॉलेज डोम कवर्धा में बुधवार को ये दृश्य सिर्फ एक शिविर की तस्वीर नहीं, बल्कि दिव्यांगजनों के जीवन में लौटती उम्मीद, बढ़ते आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की नई शुरुआत रही। इस बदलाव के बीच उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा दिव्यांगजनों के बीच पहुंचे और निःशुल्क विशाल दिव्यांग उपकरण वितरण शिविर का शुभारंभ करते हुए हितग्राहियों को कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण प्रदान किए। भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति जयपुर, सकल जैन समाज एवं भारतीय जैन संगटना (छत्तीसगढ़) और जिला प्रशासन के सहयोग से आयोजित शिविर में करीब एक हजार दिव्यांगजनों का पंजीयन हुआ है। उपकरण नहीं, आत्मनिर्भर जीवन की शुरुआत उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने शिविर में दिव्यांगजनों से मुलाकात की और उन्हें कृत्रिम हाथ-पैर सहित विभिन्न सहायक उपकरण प्रदान किए। शिविर में कृत्रिम हाथ-पैर, कैलिपर्स, ट्राइसाइकिल सहित जरूरत के अनुसार अन्य उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उपकरण प्राप्त करने के बाद हितग्राहियों ने उनका उपयोग कर अपनी क्षमता का प्रदर्शन भी किया। एक हितग्राही ने कृत्रिम पैर की सहायता से बाइक चलाकर दिखया, वहीं एक अन्य दिव्यांगजन ने कृत्रिम हाथ से पानी पीकर बताया कि यह सुविधा उसके दैनिक जीवन को किस तरह आसान बना सकती है।  उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि दिव्यांगजनों के लिए आयोजित यह शिविर अद्भुत सेवा का उदाहरण है। जैन समाज सेवा कार्यों में हमेशा आगे रहा है। उन्होंने कहा कि कवर्धा में रहते हुए उन्होंने जैन समाज को बहुत करीब से देखा है। जैन समाज के जीवन में एक ओर समृद्धि और सामाजिक दायित्व है, तो दूसरी ओर त्याग और सेवा की प्रबल भावना भी है। यही संतुलन समाज को सेवा कार्यों के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने बताया कि शिविर के लिए लगभग एक हजार दिव्यांगजनों का पंजीयन हुआ है। श्रवण, दृष्टि और अस्थि बाधित दिव्यांगजनों सहित जरूरत के अनुसार कैलिपर, कृत्रिम पैर, हाथ एवं अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उपकरण केवल हाथ-पैर का सहारा नहीं हैं, बल्कि इनके मिलने के बाद व्यक्ति के जीवन में आने वाला बदलाव अधिक महत्वपूर्ण है। उप मुख्यमंत्री शर्मा ने एक दिव्यांगजन का उदाहरण देते हुए बताया कि बिजली के तार की चपेट में आने से उसके दोनों हाथ चले गए थे। शिविर में कृत्रिम हाथ मिलने के बाद उसने पहली बार अपने हाथ से पानी का गिलास उठाया। उन्होंने कहा कि उस समय उसके मन में क्या भाव रहे होंगे, इसे वही व्यक्ति समझ सकता है। कृत्रिम हाथ-पैर की कीमत से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि इनके मिलने से दिव्यांगजन के जीवन में कितना बदलाव आता है और उसका आत्मविश्वास कितना बढ़ता है। उन्होंने कहा कि पिछले तीन-चार वर्षों से कवर्धा में इस तरह के सेवा कार्य लगातार हो रहे हैं। उन्होंने भारतीय जैन संगठन, भगवान महावीर विकलांग सेवा समिति, सकल जैन समाज और एनएसई फाउंडेशन के सहयोग की सराहना की। उन्होंने राजस्थान से आई विशेषज्ञ टीम द्वारा मौके पर ही कृत्रिम अंग तैयार करने की प्रक्रिया भी देखी। बस्तर में आईईडी विस्फोटों से दिव्यांग हुए लोगों तक भी पहुंचेगी सेवा उप मुख्यमंत्री ने बताया कि इसी तरह के शिविर जगदलपुर और दंतेवाड़ा में भी आयोजित किए जाएंगे। बस्तर में आईईडी विस्फोटों के कारण दिव्यांग हुए लोगों को चिन्हांकित कर कृत्रिम हाथ-पैर उपलब्ध कराने की योजना पर काम किया जा रहा है। ग्राम पंचायतों के माध्यम से ऐसे दिव्यांगजनों की जानकारी जुटाई जा रही है, ताकि उन्हें शिविर तक लाकर कृत्रिम अंग उपलब्ध कराए जा सकें। उन्होंने कहा कि बस्तर के अंदरूनी गांवों में आईईडी विस्फोटों से दिव्यांग हुए लोगों को कृत्रिम हाथ-पैर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि वे दोबारा अपने पैरों पर खड़े हो सकें और आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ सकें। उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि शिविर का लाभ अधिक से अधिक जरूरतमंद दिव्यांगजनों तक पहुंचे, इसके लिए सभी लोग इसकी जानकारी अपने स्तर पर साझा करें। उन्होंने समाज, संस्थाओं और आयोजन से जुड़े सभी लोगों को सेवा कार्य के लिए शुभकामनाएं दीं। दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष लोकेश कावड़िया ने कहा कि छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में दिव्यांगजन हैं, जिन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। दिव्यांगजनों को केवल सहायक उपकरण उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि उन्हें कौशल प्रशिक्षण, स्वरोजगार और रोजगार के अवसरों से जोड़ना भी जरूरी है। रायपुर में दिव्यांगजनों के लिए कौशल विकास केंद्र तैयार किया जा रहा है, जहां विभिन्न ट्रेड के साथ डिजिटल मार्केटिंग और वित्तीय प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि स्वरोजगार के लिए दिव्यांगजनों को कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था है तथा पात्र हितग्राहियों को ऋण पर अनुदान भी दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य दिव्यांगजनों को किसी पर निर्भर रहने वाला नहीं, बल्कि स्वाभिमान के साथ अपने परिवार और समाज को योगदान देने वाला बनाना है।   इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष ईश्वरी साहू, नगर पालिका परिषद कवर्धा के अध्यक्ष चंद्रप्रकाश चंद्रवंशी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष कैलाश चंद्रवंशी, कलेक्टरमती तुलिका प्रजापति, पुलिस अधीक्षक जितेन्द्र यादव, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक अग्रवाल, भारतीय जैन संगटना राष्ट्रीय सचिव पंकज लूकड़, प्रदेश अध्यक्ष विजय गंगवाल, प्रदेश महासचिव सीए विकास गोलछा, सकल जैन संघ कवर्धा के अध्यक्ष नेमीचंद गोलछा, जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ कवर्धा के अध्यक्ष खुशाल टाटिया, सकल जैन संघ कवर्धा के सचिव अतुल देशलहरा तथा स्वास्थ्य एवं शिविर प्रोग्राम के प्रदेश प्रमुख डॉ. अतुल जैन सहित जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी एवं अधिकारी उपस्थित रहे। 23 से 26 सितंबर तक चलेगा शिविर  शिविर में राजस्थान से आई विशेषज्ञ टीम द्वारा मौके पर ही कृत्रिम अंग तैयार कर जरूरत के अनुसार उनका परीक्षण और फिटिंग की जा रही है। इससे हितग्राहियों को उनकी शारीरिक आवश्यकता के अनुरूप उपकरण उपलब्ध कराने में सुविधा मिल रही है। शिविर में श्रवण, दृष्टि एवं अस्थि बाधित दिव्यांगजनों सहित विभिन्न श्रेणी के दिव्यांग हितग्राहियों ने पंजीयन कराया है। बड़ी संख्या में पहुंचे हितग्राहियों की जरूरत के अनुसार कृत्रिम अंग एवं अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। चार दिवसीय शिविर में 23 से 26 … Read more

किसानों को बड़ी राहत, कृषक समृद्धि योजना से 6% ब्याज पर मिलेगा कर्ज

योगी सरकार में 18 से छह प्रतिशत पर आया किसानों के कर्ज का ब्याज   मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना से छोटे और सीमांत किसानों को सस्ता दीर्घकालिक ऋण   11 प्रतिशत से घटाकर छह प्रतिशत की गई ब्याज दर, पांच लाख किसानों को लाभ देने का लक्ष्य   10 लाख के ऋण पर सालाना ब्याज में 50 हजार रुपये का अंतर   लखनऊ खेती के लिए ट्रैक्टर लेना हो, कृषि यंत्र खरीदने हों या खेत से जुड़ा कोई दूसरा बड़ा काम करना हो, छोटे और सीमांत किसानों के लिए पूंजी जुटाना अब पहले के मुकाबले सस्ता होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के जरिए उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम्य विकास बैंक यानी एलडीबी से मिलने वाले दीर्घकालिक ऋण की ब्याज दर घटाकर छह प्रतिशत कर दी है। कभी यही कर्ज किसानों को 18 प्रतिशत तक के ब्याज पर मिलता था। बाद में यह दर 14 प्रतिशत और फिर करीब 11 प्रतिशत तक पहुंची। अब किसान को छह प्रतिशत ब्याज पर ऋण मिलेगा।   ब्याज दर में पांच प्रतिशत अंक की कमी का असर किसान की जेब पर सीधे पड़ेगा। इसे 10 लाख रुपये के ऋण से समझें तो 11 प्रतिशत की दर पर एक वर्ष का साधारण ब्याज 1.10 लाख रुपये बनता है। छह प्रतिशत की दर पर यह 60 हजार रुपये होगा। यानी समान मूलधन पर एक वर्ष में ब्याज का अंतर 50 हजार रुपये है। वास्तविक बचत ऋण की अवधि, किस्त और बकाया मूलधन के आधार पर अलग होगी।   पांच लाख किसानों तक पहुंचेगा सस्ता कर्ज मुख्यमंत्री योगी ने योजना के शुभारंभ पर अगले कुछ वर्षों में पांच लाख लघु और सीमांत किसानों को इस ऋण सुविधा से जोड़ने का लक्ष्य रखा है। खेती-बाड़ी और कृषि मशीनरी के लिए किसानों को कम ब्याज पर दीर्घकालिक पूंजी उपलब्ध कराई जाएगी। कार्यक्रम में पांच किसानों को ऋण स्वीकृति पत्र देकर इसकी शुरुआत भी कर दी गई।   मुख्यमंत्री का कहना है कि अन्नदाता किसान खुशहाल होगा तो भारत खुशहाल होगा और किसान समृद्ध होगा तो भारत भी समृद्ध होगा। इसी सोच के साथ किसानों की पूंजी की जरूरत को कम ब्याज वाले ऋण से पूरा करने पर जोर दिया गया है।   18 से छह प्रतिशत तक ऐसे घटा ब्याज एलडीबी से किसानों को मिलने वाले ऋण पर ब्याज दर एक समय 18 प्रतिशत तक थी। इसे पहले घटाकर 14 प्रतिशत किया गया और बाद में करीब 11 प्रतिशत तक लाया गया। मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के बाद अब यह छह प्रतिशत रह गई है। यानी 18 प्रतिशत के पुराने स्तर के मुकाबले ब्याज दर एक तिहाई रह गई है।   सस्ते दीर्घकालिक कर्ज का सबसे अधिक लाभ उन छोटे और सीमांत किसानों को मिलेगा, जिन्हें खेती में एकमुश्त बड़े निवेश की जरूरत पड़ती है। कृषि मशीनरी और खेती की दूसरी जरूरतों के लिए कम ब्याज पर पूंजी मिलने से उन पर ब्याज का बोझ घटेगा। मुख्यमंत्री योगी का लक्ष्य इस व्यवस्था के जरिए किसान को खेती में निवेश के लिए सस्ता और संस्थागत ऋण उपलब्ध कराना है।

सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने कहा—किसानों की मेहनत, तकनीकी दक्षता और बेहतर प्रबंधन से मिली उपलब्धि

रायपुर कवर्धा के भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाने को लगातार दो पेराई सत्रों—2024-25 और 2025-26—के लिए ‘हाइएस्ट शुगर रिकवरी–अदर एरिया’ श्रेणी में राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है। नेशनल को-ऑपरेटिव शुगर फेडरेशन ने नई दिल्ली के डॉ. आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित शुगर फैक्ट्री एफिशिएंसी अवॉर्ड समारोह में कारखाने को सम्मानित किया।  समारोह में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने यह पुरस्कार प्रदान किया। इस अवसर पर केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर भी उपस्थित रहे। छत्तीसगढ़ के सहकारिता मंत्री केदार कश्यप समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।  छत्तीसगढ़ के लिए यह विशेष गौरव का अवसर है कि राज्य में पहली बार किसी सहकारी शक्कर कारखाने को इस श्रेणी में राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ है। सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने इस उपलब्धि पर कारखाने से जुड़े गन्ना उत्पादक किसानों और कारखाना प्रबंधन को बधाई देते हुए कहा कि किसानों द्वारा गुणवत्तापूर्ण गन्ने की आपूर्ति, कारखाने की तकनीकी दक्षता और बेहतर प्रबंधन से यह उपलब्धि हासिल हुई है। उन्होंने कहा, यह सम्मान किसानों की मेहनत और सहकारिता व्यवस्था की सामूहिक शक्ति का सम्मान है। सहकारिता मंत्री कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में 'सहकार से समृद्धि’ के संकल्प के अनुरूप सहकारी व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। राज्य सरकार सहकारी संस्थाओं को किसानों की आर्थिक प्रगति और ग्रामीण विकास का मजबूत माध्यम बनाने के लिए काम कर रही है। हमारा प्रयास है कि संस्थाएं आधुनिक, पारदर्शी, जवाबदेह और किसान हितैषी बनें तथा उनके काम का सीधा लाभ किसानों तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि सहकारिता को गांवों की अर्थव्यवस्था से अधिक प्रभावी ढंग से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। सहकारिता मंत्री कश्यप ने कहा कि सहकारिता विभाग में डिजिटलीकरण, प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स) के कम्प्यूटरीकरण और आधुनिक बैंकिंग सुविधाओं के विस्तार पर काम किया जा रहा है। इससे सहकारी संस्थाओं की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि ‘भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाने की सफलता प्रदेश की अन्य सहकारी संस्थाओं को भी बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करेगी। लगातार दो वर्षों के लिए मिला राष्ट्रीय सम्मान समारोह में भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना, कवर्धा को दो पेराई सत्रों वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 के लिए “हाईएस्ट शुगर रिकवरी इन अदर एरिया” का नेशनल अवॉर्ड प्राप्त हुआ। कारखाने की ओर से यह पुरस्कार आयुक्त सहकारिता रमेश शर्मा, विभागीय अधिकारियों और कारखाना प्रबंधन के द्वारा  संयुक्त रूप से ग्रहण किया गया।

महिला आयोग की संयुक्त बैंच में 38 प्रकरणों की सुनवाई, प्रताड़ना और दहेज मामलों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश

भोपाल मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग की संयुक्त बैंच ने बुधवार को महिलाओं से जुड़े विभिन्न गंभीर मामलों की सुनवाई की। बैंच के समक्ष कुल 38 प्रकरणों में आवेदक और अनावेदक उपस्थित हुए। इनमें महिला प्रताड़ना, दहेज प्रताड़ना, घरेलू अत्याचार, बलात्कार, यौन शोषण, हिंसा, हत्या और विभागीय विवाद सहित अन्य मामले शामिल थे। आयोग की अध्यक्ष श्रीमती रेखा यादव, सदस्य श्रीमती साधना स्थापक ने प्रकरणों की सुनवाई करते हुए संबंधित मामलों में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। सुनवाई के दौरान महिला प्रताड़ना के 10, दहेज प्रताड़ना के 5, घरेलू अत्याचार के 5 और बलात्कार के 3 प्रकरण सामने आए। इसके अलावा मारपीट, विभागीय प्रकरण, पारिवारिक विवाद, हत्या, यौन शोषण, हिंसा और अन्य श्रेणी से संबंधित एक-एक प्रकरण की भी सुनवाई हुई। आयोग ने दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद प्रकरणों की प्रकृति के अनुसार संबंधित अधिकारियों से आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। कार्यस्थल पर मानसिक प्रताड़ना के आरोप संयुक्त बैंच के समक्ष कार्यस्थल प्रताड़ना से जुड़ा एक मामला आया, जिसमें एक स्टाफ नर्स ने अस्पताल की प्रभारी मेट्रन और वार्ड इंचार्ज पर लंबे समय से मानसिक प्रताड़ना किए जाने तथा निजी जीवन को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां करने के आरोप लगाए। शिकायतकर्ता ने बताया कि स्वास्थ्य संबंधी कारणों से डॉक्टर की सलाह पर नाइट ड्यूटी से राहत मांगे जाने के बाद उसके साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार किया गया। नर्स ने संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई के साथ कार्यस्थल पर सुरक्षा सुनिश्चित किए जाने की मांग आयोग के समक्ष रखी। दहेज प्रताड़ना मामले में स्त्रीधन वापस दिलाने की मांग दहेज प्रताड़ना के एक अन्य प्रकरण में महिला ने अपने पति और ससुराल पक्ष पर दहेज की मांग को लेकर मानसिक एवं शारीरिक प्रताड़ना किए जाने तथा स्त्रीधन और आभूषण अपने पास रखे जाने के आरोप लगाए। महिला ने आयोग को बताया कि उसने पूर्व में पुलिस और महिला थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच राजीनामा हुआ, लेकिन महिला के अनुसार विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ। उसने पति द्वारा लगातार संपर्क किए जाने और बिना बताए मिलने आने का भी आरोप लगाया। महिला ने आयोग से मामले में उचित कार्रवाई और न्याय दिलाने की मांग की। आयोग की बैंच ने सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों से तथ्य प्राप्त किए और संबंधित मामलों में नियमानुसार कार्रवाई के लिए आवश्यक निर्देश दिए। आयोग ने स्पष्ट किया कि उसके समक्ष आने वाले मामलों में शिकायतकर्ता और संबंधित पक्षों की बात सुनकर तथ्यों के आधार पर आवश्यक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।  

युवाओं के लिए बड़ा मौका, रायपुर रोजगार मेले में 8 हजार से अधिक नौकरियां

राज्य स्तरीय रोजगार मेला 7 एवं 8 अक्टूबर को रायपुर में 8 हजार से अधिक पदों पर मिलेंगे रोजगार के अवसर अधिकाधिक युवाओं की सहभागिता सुनिश्चित करने और व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश रायपुर  प्रदेश के युवाओं को रोजगार के अधिकाधिक अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग द्वारा राज्य स्तरीय रोजगार मेले का आयोजन 7 एवं 8 अक्टूबर 2026 को राजधानी रायपुर स्थित बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में किया जाएगा। यह आयोजन मुख्यमंत्री  श्री विष्णु देव साय के मुख्य आतिथ्य में होगा। रोजगार मेले में तकनीकी एवं गैर-तकनीकी क्षेत्रों के 8 हजार से अधिक पदों की रिक्तियां में रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे । कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग द्वारा रोजगार मेले में प्रदेश के वृहद उद्योगों एवं निजी प्रतिष्ठानों को शामिल कर अधिक से अधिक रिक्त पद युवाओं के लिए उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इच्छुक युवा ई-रोजगार पोर्टल पर उपलब्ध रिक्तियों की जानकारी प्राप्त करने के साथ ही रोजगार मेले के लिए अपना पंजीयन भी करा सकते हैं। राज्य एवं जिला स्तरीय रोजगार मेलों में चयनित आवेदकों को कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री के करकमलों से ऑफर लेटर वितरित किए जाने की भी तैयारी है। इसके लिए जिलों से चयनित अभ्यर्थियों की सूची 01 अक्टूबर 2026 तक प्रेषित करने के निर्देश दिए गए हैं। रोजगार मेले में अधिकाधिक युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सभी जिलों में ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकायों के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार करने को कहा गया है। साथ ही जिला एवं राज्य स्तरीय रोजगार मेलों में चयनित युवाओं की कार्यक्रम में उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।शासन ने इस महत्वपूर्ण आयोजन को सफल बनाने तथा प्रदेश के अधिकाधिक युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए जिला स्तर पर विशेष प्रयास करने को कहा गया है।

ऊर्जा क्षेत्र के आंकड़ों और उपलब्धियों का दस्तावेज ‘प्रमुख विद्युत समंक 2026’ जारी, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया विमोचन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गत दिवस मध्यप्रदेश के विद्युत सेक्टर की जानकारियों व नवीनतम आंकड़ों से परिपूर्ण प्रमुख विद्युत समंक 2026 (सैलियंट पावर स्टैटिस्टिक्स) का ऑल इंडिया डिस्काम एसोसिएशन कॉन्फ्रेंस में विमोचन किया। कार्यक्रम में ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर वर्चुअली शामिल हुए। विद्युत उत्पादन, उपलब्धता, ट्रांसमिशन, डिस्ट्रीब्यूशन के नवीनतम आंकड़ों से समाहित बारह पृष्ठीय प्रमुख विद्युत समंक 2026 का प्रकाशन एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी के स्टेट प्लानिंग सेल ने किया है। प्रमुख विद्युत समंक 2026 पुस्त‍िका में राज्य विद्युत क्षेत्र में वर्ष 2025-26 में अर्जित की गई प्रमुख उपलब्ध‍ियों के आंकड़ों को शामिल किया गया है। इस पुस्त‍िका में वित्तीय वर्ष 2024-25 व वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के तुलनात्मक विश्लेषण को समाहित किया गया है। प्रमुख विद्युत समंक 2026 में दी गई जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश में घरेलू बिजली उपभोक्ता की संख्या 1 करोड़ 32 लाख 70 हजार है, वहीं प्रति व्यक्त‍ि विद्युत खपत 1393 किलोवाट प्रति घंटा हो गई। मध्य प्रदेश की उपलब्ध उत्पादन क्षमता वर्ष 2025-26 में बढ़ कर 26023 मेगावाट हो गई। प्रमुख समंक 2026 में मध्यप्रदेश के विद्युत उत्पादन, उपलब्धता, ट्रांसमिशन व डिस्ट्रीब्यूशन क्षेत्र में अर्जित की गई उपलब्ध‍ि‍यों के आंकड़ों को टेबल, चार्ट, ग्राफ व नक्शे के द्वारा रोचक व आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। समंक में प्रदेश की विद्युत उत्पादन क्षमता में हुई वृद्ध‍ि, प्रदाय की गई बिजली, शीर्ष मांग, उपभोक्ताओं की संख्या, विभिन्न श्रेणी के उपभोक्ताओं द्वारा उपभोग की गई बिजली, ट्रांसमिशन व डिस्ट्रीब्यूशन सिस्ट्म के विकास, प्रति व्यक्त‍ि बिजली खपत इत्यादि आंकड़ों को प्रदर्श‍ित किया गया है। समंक में प्रदेश की तीनों विद्युत वितरण कंपनियों पूर्व क्षेत्र, मध्य क्षेत्र व पश्च‍िम क्षेत्र द्वारा किए गए कार्यों व अर्जित उपलब्ध‍ियों को कंपनीवार दर्शाया गया है। समंक 2026 की विशेषता इसमें प्रदर्श‍ित किया गया पावर मेप ऑफ मध्यप्रदेश है। इस अवसर पर प्रमुख सचिव ऊर्जा श्री मनीष सिंह, सचिव ऊर्जा व एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी के प्रबंध संचालक श्री विशेष गढ़पाले, ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोसिएशन के डायरेक्टर जनरल श्री आलोक कुमार और वरिष्ठ विद्युत अभियंता एवं विशेषज्ञ उपस्थि‍त थे।