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शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का अनशन जारी, गंगा स्नान को लेकर नहीं माने

प्रयागराज  यूपी के प्रयागराज में ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का अनशन दूसरे दिन भी जारी है. वह रविवार दोपहर से ही अपने शिविर में अनशन पर बैठे हुए हैं और लगातार प्रशासन से गंगा स्नान को लेकर अपनी मांग पर अड़े हैं. शंकराचार्य की मांग है कि पुलिस और प्रशासन उन्हें पूरे प्रोटोकॉल के साथ संगम नोज तक ले जाकर गंगा स्नान कराए. इसी मुद्दे को लेकर आज दोपहर 12 बजे वह अपने शिविर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी बात रखेंगे. दरअसल, मौनी अमावस्या के दिन पालकी और अपने शिष्यों व भक्तों के साथ संगम में स्नान की अनुमति न मिलने पर विवाद हुआ था. इस दौरान शंकराचार्य के शिष्यों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी हुई थी. संगम नोज पर भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने शंकराचार्य को सीमित संख्या में पैदल जाकर स्नान करने का विकल्प दिया था, लेकिन वह इस पर राज़ी नहीं हुए. उनका कहना था कि उन्हें पूरे सम्मान और प्रोटोकॉल के साथ संगम ले जाया जाए, जो भीड़ की वजह से संभव नहीं बताया गया. इसके बाद शंकराचार्य को वापस लौटा दिया गया, तभी से वह माघ मेले में गंगा नदी के उस पार सेक्टर-4, त्रिवेणी रोड स्थित अपने शिविर में अनशन पर बैठे हैं. दूसरी ओर, प्रशासन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर साफ कहा है कि वे सभी साधु-संतों, कल्पवासियों और श्रद्धालुओं का पूरा सम्मान करते हैं, लेकिन किसी को भी अव्यवस्था फैलाने की इजाजत नहीं दी जा सकती. प्रशासन के मुताबिक, बीते दिन करीब 4.52 करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम में स्नान किया था, ऐसे में सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है. वहीं, देश के कई साधु-संतों ने भी शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के इस कदम की आलोचना की है. उनका कहना है कि यह कुंभ नहीं है, जहां अमृत स्नान के लिए विशेष प्रोटोकॉल दिया जाए. जब संगम पर इतनी भारी भीड़ हो, तो किसी को भी विशेष सुविधा की मांग नहीं करनी चाहिए और सिंहासन या शिष्यों के साथ स्नान के लिए जाना उचित नहीं है.

आधी राह पर इंदौर-उज्जैन सिक्स लेन, अधूरे ब्रिज-फ्लाईओवर से अटका काम; 2027 तक पूरा करने का दावा

इंदौर उज्जैन में होने वाले वर्ष 2028 के सिंहस्थ महाकुंभ को ध्यान में रखते हुए इंदौर से उज्जैन को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण सड़क को चार लेन से छह लेन में बदलने का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। पिछले साल जनवरी में शुरू हुए इस निर्माण कार्य को अब एक वर्ष पूरा हो चुका है। विभाग का दावा है कि अब तक परियोजना का लगभग 47 प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया गया है, हालांकि पुलों और फ्लाईओवर का काम अभी भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। तय समय सीमा और लक्ष्य इस महत्वाकांक्षी परियोजना का भूमि पूजन 15 जनवरी 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया था। लक्ष्य के अनुसार, इस सिक्स लेन सड़क का निर्माण 15 जनवरी तक पूरा किया जाना है। वर्तमान प्रगति को देखते हुए अधिकारियों का मानना है कि आने वाले एक साल में निर्माण की गति को और अधिक बढ़ाना होगा ताकि समय सीमा में प्रोजेक्ट को जनता को समर्पित किया जा सके। एमपीआरडीसी के डिविजनल मैनेजर गगन भंवर ने बताया कि सड़क और ब्रिज का काम तेजी से चल रहा है और लक्ष्य को समय पर पूरा करने के लिए निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है।   48 किलोमीटर का कायाकल्प गौरतलब है कि वर्ष 2016 के सिंहस्थ से पहले इस मार्ग को फोर लेन किया गया था। अब लवकुश चौराहा (इंदौर) से हरिफाटक ब्रिज (उज्जैन) तक की 48 किलोमीटर लंबी सड़क के दोनों ओर एक-एक अतिरिक्त लेन जोड़ी जा रही है। इस पूरी परियोजना में यातायात को सुगम बनाने के लिए तीन फ्लाईओवर, आठ अंडरपास और तीन बड़े ब्रिज का निर्माण शामिल है। फिलहाल निनौरा से बारोली के बीच सड़क चौड़ीकरण का कार्य दोनों दिशाओं में समानांतर रूप से चल रहा है। शुरुआती अड़चनें और मानसून का प्रभाव परियोजना की शुरुआत में निर्माण एजेंसी को कई जटिलताओं का सामना करना पड़ा। ट्रैफिक डायवर्जन की योजना बनाने, अतिक्रमण हटाने और स्थानीय व्यवस्थाओं के तालमेल के कारण शुरुआती महीनों में काम की गति प्रभावित हुई। इसके बाद मानसून की बारिश ने भी निर्माण कार्यों में बाधा डाली। हालांकि, अधिकारियों का दावा है कि अब सभी तकनीकी और प्राकृतिक अड़चनों को पार कर लिया गया है और एक साथ कई हिस्सों में निर्माण कार्य को गति दी गई है।   अतिक्रमण हटाने की चुनौती सड़क चौड़ीकरण के लिए राहत की बात यह है कि नई जमीन के अधिग्रहण की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि विभाग के पास पहले से ही पर्याप्त भूमि उपलब्ध है। हालांकि, वर्षों से खाली पड़ी इस जमीन पर कई स्थानों पर अतिक्रमण हो गया है। विशेषकर लवकुश चौराहा से बारोली तक के हिस्से में सड़क के दोनों ओर कई अवैध निर्माण खड़े हो गए हैं। प्रशासन का मानना है कि अतिक्रमण हटने के बाद ही इस महत्वपूर्ण हिस्से में काम तेजी पकड़ सकेगा। इसके लिए एमपीआरडीसी ने जिला प्रशासन को औपचारिक पत्र लिखकर अतिक्रमण हटाने की मांग की है।

कोहरे की चादर में लिपटा बिहार: 20 जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी, राहगीरों की बढ़ी मुश्किलें

पटना बिहार में एक बार फिर घने कोहरे ने दस्तक दे दी है। कई जिलों धूप पूरी तरह नहीं निकली इस कारण सुबह में पिछले चार दिनों की अपेक्षा अधिक ठंड महसूस हो रही है। मौसम विज्ञान केंद्र, पटना की ओर से आज कई जिलों में घने कोहरे का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार, राज्य के कई जिलों में अगले तीन घंटे के दौरान घना से बहुत घना कोहरा छाए रहने की संभावना है। इसे देखते हुए पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सिवान, सारण, सीतामढ़ी, शिवहर, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, वैशाली, पटना, जहानाबाद, गया, नालंदा, नवादा, शेखपुरा, लखीसराय, बेगूसराय, दरभंगा और मधुबनी जिलों के कुछ हिस्सों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, सहारसा, मधेपुरा, सुपौल, अररिया, पूर्णिया, किशनगंज और कटिहार जिलों के कुछ स्थानों पर घने कोहरे की आशंका को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने बताया है कि इन क्षेत्रों में दृश्यता काफी कम हो सकती है, जिससे सड़क, रेल और हवाई यातायात प्रभावित होने की संभावना है। मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। खासकर सुबह और देर रात यात्रा करने वालों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। 20 जनवरी के बाद और बढ़ेगी ठंड मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, उत्तर भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभों के प्रभाव से बिहार के मौसम में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। इसका असर राज्य के उत्तरी और पश्चिमी इलाकों में ज्यादा देखने को मिलेगा। आने वाले चार दिनों में राज्य के कुछ हिस्सों में हल्के से मध्यम स्तर का कोहरा छाने की आशंका बनी रहेगी। कई जिलों में दिन के तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, 20 और 21 जनवरी के बाद एक बार फिर ठंड का असर तेज होने की संभावना है। इसके बाद अगले कुछ दिनों तक तापमान में बड़े बदलाव के संकेत नहीं हैं। पटना में सुबह कोहरा, दिन में खिली धूप राजधानी पटना में अगले कुछ दिनों तक सुबह के समय कोहरा और धुंध छाए रहने की संभावना है, जबकि दिन चढ़ने के साथ मौसम साफ और धूप खिली रहेगी। मौसम विज्ञान केंद्र, पटना के अनुसार 18 से 22 जनवरी तक शहर में सुबह हल्का से मध्यम कोहरा रहेगा, जिससे दृश्यता प्रभावित हो सकती है। 18 जनवरी को अधिकतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 10 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। 19 जनaवरी को तापमान बढ़कर 23 डिग्री, जबकि 20 जनवरी को 24 डिग्री तक पहुंच सकता है। इसके बाद 21 और 22 जनवरी को अधिकतम तापमान क्रमश: 23 और 22 डिग्री रहने की संभावना है। न्यूनतम तापमान 10 से 11 डिग्री के आसपास बना रहेगा। सुबह सूर्योदय करीब 6:37 बजे और सूर्यास्त शाम 5:26 बजे के आसपास होगा। मौसम विभाग ने लोगों को सुबह और देर रात यात्रा करते समय सावधानी बरतने की सलाह दी है।

बेमेतरा में गणतंत्र दिवस की तैयारियों ने पकड़ी रफ्तार, कलेक्टर ने व्यवस्थाओं का लिया जायजा

बेमेतरा 26 जनवरी को होने वाले गणतंत्र दिवस के जिला स्तरीय मुख्य समारोह के आयोजन को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। इस सिलसिले में, कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाई ने बेमेतरा के बेसिक ग्राउंड में प्रस्तावित कार्यक्रम स्थल का गहन निरीक्षण किया और तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने परेड, झांकियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, मंच व्यवस्था, ध्वजारोहण, अतिथि स्वागत, बैठक व्यवस्था, पेयजल, विद्युत आपूर्ति, स्वच्छता, यातायात प्रबंधन और सुरक्षा जैसे सभी आवश्यक पहलुओं पर संबंधित अधिकारियों से जानकारी ली। उन्होंने सभी अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए समारोह की गरिमा और अनुशासन बनाए रखने पर विशेष जोर दिया। कलेक्टर ममगाई ने परेड, सांस्कृतिक कार्यक्रम के नियमित रिहर्सल, मंच व मैदान की आकर्षक सजावट, ध्वनि, प्रकाश व्यवस्था को सुदृढ़ रखने के निर्देश दिए। पुलिस व होमगार्ड विभाग को सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रखने, स्वास्थ्य विभाग को आपात चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करने, नगर पालिका को साफ-सफाई, सौंदर्यीकरण पर विशेष ध्यान देने को कहा। साथ ही  उन्होंने आम नागरिकों, विद्यार्थियों और अतिथियों की सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया। अधिकारियों को दायित्व सौंपते हुए, कलेक्टर ने आपसी समन्वय से कार्य करने और किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतने की हिदायत दी।

सिरपुर महोत्सव 2026 की धूम: बॉलीवुड और छालीवुड कलाकारों की शानदार प्रस्तुतियां, कलेक्टर ने व्यवस्थाओं की समीक्षा की

महासमुंद छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में माघ पूर्णिमा पर सिरपुर महोत्सव का आगाज होने जा रहा है. तीन दिवसीय महोत्सव में बॉलीवुड कलाकारों से लेकर छत्तीसगढ़ के कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से समा बाधेंगे. 1 से 3 फरवरी तक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की आकर्षक छटा देखने को मिलेगी. कार्यक्रम की तैयारियां अब अंतिम रूप में आ चुकी हैं, जिसका जायजा लेने जिला कलेक्टर विनय कुमार लंगेह और अन्य अधिकारी कार्यक्रम स्थल पहुंचे. कार्यक्रम स्थल पहुंचे कलेक्टर, तैयारियों का लिया जायजा कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने कायक्रम की अंतिम चरण में पहुंच चुकी तैयारियों का जायजा लिया. इस दौरान उन्होंगे जिम्मेदार अधिकारियों को महोत्सव स्थल, स्टेज, डोम में साफ-सफाई, पेयजल, शौचालय, पार्किंग, विद्युत व्यवस्था और स्वास्थ्य सुविधाओं की चाक-चौबंद व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए. उन्होंने मुख्य मंच तक पहुंचने वाले मार्गों को पर्याप्त चौड़ा रखने, सुगम आवागमन तथा दर्शकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बैठने की समुचित व्यवस्था करने के निर्देश दिए. बॉलीवुड और छॉलीवुड सितारों से सजेगी शाम कार्यक्रम का आयोजन हर दिन शाम 4 बजे से रात 10 बजे तक होगा. इस अवसर पर प्रतिदिन महानदी आरती भी होगी. कलेक्टर ने मुख्य मंच को आकर्षक और सांस्कृतिक थीम आधारित सजावट देने के निर्देश दिए. महोत्सव परिसर में नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर, एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी.

शेखावाटी को सर्दी से राहत, मौसम करवट लेने को तैयार, बारिश के संकेत

सीकर शेखावाटी क्षेत्र में पिछले करीब दो सप्ताह से कड़ाके की सर्दी का दौर जारी है, लेकिन अब लोगों को इस तेज ठंड से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। प्रदेश में एक के बाद एक दो वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय होने के कारण तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। शनिवार सुबह शेखावाटी के कई इलाकों में आसमान में बादल छाए रहे। इसके साथ ही न्यूनतम तापमान में भी मामूली बढ़ोतरी देखी गई। शेखावाटी के सबसे ठंडे इलाकों में शामिल फतेहपुर में शनिवार को न्यूनतम तापमान 6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वर्तमान में प्रदेश में एक कमजोर वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय है। इसके प्रभाव के चलते बारिश की संभावना बेहद कम है, हालांकि आगामी दो दिनों तक बादल छाए रह सकते हैं। मौसम विभाग के अनुसार, इस सिस्टम का असर खत्म होने के बाद 22 जनवरी से एक मजबूत वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय होगा। इस मजबूत वेस्टर्न डिस्टरबेंस के प्रभाव से 22 से 25 जनवरी के बीच शेखावाटी क्षेत्र और जयपुर संभाग के कई इलाकों में तेज बारिश होने की संभावना जताई जा रही है। बारिश के दौरान तापमान में खास उतार-चढ़ाव नहीं होगा, लेकिन सिस्टम के कमजोर पड़ते ही मौसम साफ होने लगेगा और उत्तरी हवाओं का असर बढ़ेगा। मौसम साफ होते ही एक बार फिर शेखावाटी में सर्दी का असर तेज हो सकता है और तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है। जयपुर मौसम केंद्र के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि मौजूदा वेस्टर्न डिस्टरबेंस कमजोर है, इसलिए इससे बारिश की संभावना कम है, लेकिन 22 से 25 जनवरी के बीच सक्रिय होने वाला वेस्टर्न डिस्टरबेंस प्रदेश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश करा सकता है।  

ई-बस योजना पर ब्रेक! मध्यप्रदेश के 8 शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी से लटकी सेवा

भोपाल भारत सरकार ने प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के अंतर्गत मध्य प्रदेश के आठ शहरों के लिए 972 ई-बसें स्वीकृत की हैं। इनमें से 472 बसें इन शहरों में चलने को तो तैयार हैं, लेकिन डिपो और चार्जिंग स्टेशन न होने से बसों का संचालन रुका हुआ है। प्रदेश की नगर सरकारें यहां अब तक डिपो ही नहीं बना सकी हैं। इंदौर और भोपाल में बस डिपो बनाने का केवल 15-15 प्रतिशत तो ग्वालियर में पांच प्रतिशत ही काम हो पाया है। इंदौर, भोपाल और ग्वालियर पिछड़े चार्जिंग स्टेशनों के निर्माण में भी इंदौर, भोपाल और ग्वालियर पिछड़े हैं। केवल जबलपुर का काम संतोषजनक है। यहां कंठौंदा बस डिपो का निर्माण कार्य 70 प्रतिशत हो चुका है। इन शहरों की हवा दूषित है, इसलिए इन्हें राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत चिह्नित किया है और इस दिशा में ई-बसों का संचालन महत्वपूर्ण माना जा रहा है लेकिन ई-बस संचालन में डिपो के निर्माण की धीमी गति बताती है कि इन शहरों के आमजनों को ई-बस सेवा की सुविधा के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा।   उज्जैन और सागर में टेंडर ही नहीं हो पाया उज्जैन में 100 ई-बस चलनी है। इसके लिए ओल्ड बस डिपो मक्सी रोड पर डिपो निर्माण किया जाना है, लेकिन यहां मेयर इन काउंसिल (एमआइसी) में दर स्वीकृति ही नहीं हो सकी। यही हाल यहां चार्जिंग स्टेशन का है। इसी तरह सागर में 32 ई-बस संचालन के लिए नवीन आरटीओ कार्यालय तिलीमाफी में बस डिपो और चार्जिंग स्टेशन का अधोसंरचना विकास होना है। सागर नगर निगम इसकी निविदा ही जारी नहीं कर सका है। इन आठ शहरों में 972 इलेक्ट्रिक बस स्वीकृत भोपाल 195, इंदौर 270, ग्वालियर 100, जबलपुर 200, उज्जैन 100, सागर 32, देवास 55 एवं सतना में 20 कुल 972 इलेक्ट्रिक बस स्वीकृत की गई है। इनमें भोपाल के लिए 100, इंदौर 150, ग्वालियर 60, जबलपुर 100, उज्जैन 30 एवं सागर में 32 इस तरह 472 ई बस के लिए सफल निविदाकार को लेटर ऑफ अवार्ड (एलओए) जारी किए जा चुके हैं। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में में दो-दो उज्जैन व सागर में एक-एक कुल 10 डिपो के लिए सिविल एवं चार्जिंग अधोसंरचना निर्माण के लिए कार्रवाई चल रही है।   ई-बस डिपो एवं चार्जिंग स्टेशनों की अधोसंरचना की प्रगति शहर — बस डिपो– डिपो निर्माण प्रगति– चार्जिंग स्टेशन निर्माण प्रगति जबलपुर — कठौंदा — 70 — 60 आइएसबीटी — 10– 00 इंदौर — आइएसबीटी नायतामुंडला — 15 — 15 देवास नाका निरंजनपुर — 15– 15 भोपाल — संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़) — 15– 15 कस्तुरबा नगर आइएसबीटी– 0 — 10 ग्वालियर — रमौआ — 5 — 5 आइएसबीटी– 50– 10

प्रोफेसर भर्ती परीक्षा: आयु सीमा मामले में हाई कोर्ट ने हस्तक्षेप से झाड़े हाथ

इंदौर मप्र लोकसेवा आयोग (एमपीपीएससी) की सहायक प्राध्यापक (समाजशास्त्र) पद की भर्ती में आयु-सीमा को चुनौती देने वाली याचिका हाई कोर्ट ने निरस्त कर दी है। कोर्ट ने कहा कि भर्ती विज्ञापन में तय पात्रता शर्तों में कोर्ट हस्तक्षेप नहीं कर सकता। हाई कोर्ट में यह याचिका कुक्षी निवासी विजयेंद्रपाल सिंह अजनारिया ने दायर की थी। मांग की थी कि भर्ती प्रक्रिया में 50 वर्ष तक आयु-सीमा में छूट दी जाए। याचिकाकर्ता के तर्क और पृष्ठभूमि तर्क दिया गया था कि वर्ष 2022 में शुरू हुई भर्ती प्रक्रिया को पीएससी ने समय पर पूरा नहीं किया। इसके चलते याचिकाकर्ता वर्ष 2024 में हुई नई भर्ती में 45 वर्ष की अधिकतम आयु-सीमा पार कर चुका है। याचिकाकर्ता अनुसूचित जनजाति वर्ग से है और वर्तमान में वन विभाग में शासकीय सेवक के रूप में पदस्थ है।   याचिका में यह भी कहा गया था कि पूर्व की भर्ती परीक्षाओं में आरक्षित वर्ग के लिए अधिकतम आयु-सीमा 50 वर्ष रखी गई थी। याचिकाकर्ता को भविष्य में भी इसी तरह की व्यवस्था की अपेक्षा थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। वर्ष 2022 की भर्ती परीक्षा में याचिकाकर्ता लिखित परीक्षा उत्तीर्ण कर साक्षात्कार के लिए चयनित हुआ था, लेकिन साक्षात्कार सितंबर 2025 में तय होने के कारण पूरी प्रक्रिया लंबित रही। कोर्ट का निर्णय और वैधानिक टिप्पणी कोर्ट ने सभी पक्षों के तर्क सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था, जो अब जारी हुआ है। कोर्ट ने कहा कि भर्ती की प्रक्रिया एक स्वतंत्र प्रक्रिया है। उसकी अपनी पात्रता शर्तें हैं जो सभी अभ्यर्थियों पर समान रूप से लागू होती हैं। किसी भी अभ्यर्थी को निर्धारित कट-आफ तिथि पर तय आयु-सीमा का पालन करना अनिवार्य है। प्रशासनिक देरी, चाहे वह कितनी भी दुर्भाग्यपूर्ण क्यों न हो, अदालत को भर्ती नियमों को दोबारा लिखने या उनमें छूट देने का अधिकार नहीं देती। कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता ने 45 वर्ष की नई आयु-सीमा की संवैधानिक वैधता को चुनौती नहीं दी है। ऐसे में कोर्ट न तो नीति की समीक्षा कर सकता है और न ही व्यक्तिगत स्तर पर आयु-छूट दे सकता है।

कुमारी सैलजा का सरकार पर हमला: लाडो लक्ष्मी योजना में संशोधन से महिलाओं का भरोसा टूटा

चंडीगढ़ कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव एवं सिरसा की सांसद तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा ने हरियाणा सरकार द्वारा लाडो लक्ष्मी योजना में बार-बार किए जा रहे बदलावों को महिलाओं के साथ खुला धोखा बताया है। कुमारी सैलजा ने कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा सरकार ने प्रदेश की सभी महिलाओं को 2100 प्रतिमाह देने का वादा किया था, लेकिन सत्ता में आने के लगभग एक वर्ष बाद भी सरकार अपने वादे से लगातार पीछे हटती जा रही है। पहले यह शर्त लगाई गई कि जिन महिलाओं की वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक है, उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। इसके बाद तीन-तीन महीने की किस्तों में राशि डालने की व्यवस्था की गई। उन्होंने कहा कि इसके पश्चात सरकार ने योजना में फिर बदलाव करते हुए यह प्रावधान कर दिया कि केवल बीपीएल परिवारों से संबंधित महिलाओं को ही लाभ मिलेगा और वह भी तब, जब उनके बच्चे 10वीं व 12वीं कक्षा में 80 प्रतिशत से अधिक अंक लाएंगे। इस स्थिति में 1100 नकद और 1000 की एफडी कराने की बात कही गई। अब तीसरी बार योजना में परिवर्तन करते हुए सरकार ने सभी महिलाओं को मात्र 1100 देने और शेष 1000 की दीर्घकालीन एफडी करने की घोषणा कर दी है। कुमारी सैलजा ने कहा कि बार-बार नियम बदलना यह साबित करता है कि सरकार की नीयत महिलाओं को सशक्त करने की नहीं, बल्कि उन्हें भ्रमित करने की है। चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करना और बाद में शर्तों में उलझाकर लाभ से वंचित करना महिलाओं के साथ अन्याय है। उन्होंने मांग की कि हरियाणा सरकार बिना किसी शर्त के अपने मूल वादे को पूरा करे और प्रदेश की सभी महिलाओं को प्रतिमाह 2100 की राशि देना तुरंत शुरू करे। कांग्रेस पार्टी महिलाओं के सम्मान और अधिकारों के लिए इस मुद्दे पर संघर्ष करती रहेगी। सांसद सैलजा ने कहा कि हरियाणा सरकार द्वारा वित्त वर्ष 2025-26 के लिए घरेलू बिजली उपभोक्ताओं पर नई दरें लागू करना जनविरोधी कदम है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में की गई है जब महंगाई पहले से ही आम आदमी की कमर तोड़ रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने चुपचाप 1 अप्रैल 2025 से नई दरें लागू कर दीं, जिससे मध्यम वर्ग, गरीब परिवार, बुजुर्ग, किसान और छोटे दुकानदार सबसे अधिक प्रभावित होंगे। घरेलू श्रेणी-2 और श्रेणी-3 के उपभोक्ताओं पर फिक्स्ड चार्ज और प्रति यूनिट दरों में की गई बढ़ोतरी पूरी तरह अन्यायपूर्ण है। उन्होंने कहा कि चुनावों के समय सस्ती बिजली और राहत के बड़े-बड़े वादे किए गए थे, लेकिन सत्ता में आते ही भाजपा सरकार ने जनता से किए अपने वादे भुला दिए। बिजली जैसी बुनियादी जरूरत को महंगा करना सीधे-सीधे जनता के साथ विश्वासघात है। कुमारी सैलजा ने यह भी कहा कि हरियाणा में पहले ही बेरोजगारी और महंगाई चरम पर है। ऐसे में बिजली बिल बढ़ाकर सरकार ने आम आदमी के घर का बजट बिगाड़ दिया है। सरकार को चाहिए था कि वह बिजली कंपनियों की कार्यप्रणाली सुधारे, लाइन लॉस कम करे और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाए, न कि उसकी कीमत जनता से वसूले। उन्होंने मांग की कि घरेलू उपभोक्ताओं पर बढ़ाई गई बिजली दरें तुरंत वापस ली जाएं। फिक्स्ड चार्ज समाप्त किया जाए। गरीब और मध्यम वर्ग को राहत देने के लिए सब्सिडी बढ़ाई जाए।

जनजातीय छात्रों के सपनों को पंख: भजनलाल शर्मा सरकार में एकलव्य स्कूल बने शिक्षा की उम्मीद

जयपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य के सुदूर जनजाति अंचलों में एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल (ईएमआरएस) शिक्षा, समरसता और सामाजिक सुरक्षा के क्षितिज पर सूरज की तरह चमक रहे हैं। राज्य के 31 एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूलों में अनुसूचित जनजाति वर्ग के बच्चे नीट, आईआईटी, जेईई जैसी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। वहीं, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, कंप्यूटर लैब, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जैसे नवाचार जनजातीय बालक-बालिकाओं के सपनों में नए रंग भर रहे हैं। ईएमआरएस में पढ़ रहे 11 हजार 619 अनुसूचित जनजाति वर्ग के छात्र-छात्राओं की प्रतिभा की रोशनी से जनजाति क्षेत्रों में हजारों घर-परिवार भी उम्मीदों से रोशन हैं। इनमें 6 हजार 710 बालक और 4 हजार 909 बालिकाएं शामिल हैं। अभावों में अपने बच्चों के भविष्य को लेकर आशंकित माता-पिता की आंखों में नौनिहालों के सुनहरे भविष्य की चमक और चेहरे पर आत्मविश्वास की झलक साफ देखी जा सकती है। राज्य के ईएमआरएस में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुरक्षित भविष्य की गारंटी का असर है कि सत्र 2024-25 में 9 हजार 999 बच्चों के मुकाबले शैक्षणिक सत्र 2025-26 में 1 हजार 620 अधिक विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। प्रवेश परीक्षा में बैठने वाले बच्चों की संख्या भी साल दर साल बढ़ी है। शिक्षा के साथ आवास, भोजन और किताबें भी निःशुल्क राजस्थान स्टेट एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल सोसायटी द्वारा राज्य में संचालित सीबीएसई से संबद्ध 31 एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल विद्यालयों में से नवीनतम 31वां विद्यालय जमवारामगढ़ (जयपुर) में जून 2025 से प्रारंभ किया गया है। सभी ईएमआरएस विद्यालयों में कक्षा 6 से 12 तक कक्षाएं संचालित होती हैं। कक्षा 11 एवं 12 में विज्ञान और कला संकाय उपलब्ध हैं। विद्यार्थियों को निःशुल्क शिक्षा, पाठ्यपुस्तकें, आवास, भोजन, पौष्टिक आहार, जूते-मौजे सहित दैनिक उपयोग की सामग्री उपलब्ध करवाई जाती है। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस एंड वर्चुअल रिएलिटी, इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर, ब्यूटी एंड वेलनेस, एग्रीकल्चर तथा ऑटोमोटिव स्किल लैब्स में इन विद्यालयों में संचालित की जा रही हैं। इन विद्यालयों में शिक्षा के साथ-साथ खेल-कूद और सह-शैक्षिक गतिविधियों पर भी पूरा ध्यान दिया जाता है। शैक्षणिक सत्र 2025-26 में राज्य स्तरीय स्टेट स्पोर्ट्स मीट-2025 उदयपुर में से चयनित 154 विद्यार्थियों ने ओडिशा के राउरकेला में आयोजित नेशनल स्पोर्ट्स मीट-2025 में राज्य का प्रतिनिधित्व करते हुए 9 इवेंट्स में पदक अर्जित किए। वहीं, राज्य स्तरीय सांस्कृतिक एवं साहित्यिक फेस्ट-2025 उदयपुर में से चयनित 59 विद्यार्थियों ने उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में आयोजित राष्ट्रीय स्तर के सांस्कृतिक एवं साहित्यिक फेस्ट-2025 में भाग लिया। जेईई और नीट की तैयारी के लिए विशेष व्यवस्था एकलव्य विद्यालयों में बच्चों के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ करियर मार्गदर्शन देकर भविष्य के लिए सही दिशा भी दिखाई जाती है। इन विद्यालयों में कक्षा 9 से 11 तक अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए इनेबल कार्यक्रम के अंतर्गत टाटा मोटर्स के सहयोग से आईआईटी-जेईई और नीट की तैयारी के लिए प्रतिदिन ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। दक्षणा कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित नेशनल लेवल परीक्षा में चयनित 12 विद्यार्थियों को भोपाल (मध्यप्रदेश) में आईआईटी, जेईई और नीट की विशेष कोचिंग दी जा रही है। ईएमआरएस बिहारीपुरा, जयपुर के छात्र मोहनलाल मीना, अनिकेश मीना और ईएमआरएस बरनाला, सवाईमाधोपुर की छात्रा राजकुमारी मीना ने नेशनल एलीजिबिलिटी कम एंट्रेस टेस्ट (नीट) परीक्षा में चयनित होकर राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालयों से एमबीबीएस कर रहे हैं। ईएमआरएस से एमबीबीएस तक का सफर सवाईमाधोपुर जिले में बामनवास तहसील के बरनाला के पास एक गांव की रहने वाली राजकुमारी मीना के किसान पिता का सपना था कि उनकी बेटी बड़ी होकर डॉक्टर बने। राजकुमारी ने बताया कि उनके गांव में बायोलॉजी नहीं थी। सरकारी स्कूल से दसवीं में 93 फीसदी से उत्तीर्ण होने के बाद ईएमआरएस प्रवेश परीक्षा दी और ईएमआरएस बरनाला में उनको प्रवेश मिल गया। आज वे गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, भावनगर में एमबीबीएस सैकंड ईयर की छात्रा हैं। राजकुमारी ने बताया कि हर कोई प्राइवेट स्कूल में नहीं पढ़ सकता और न ही महंगी कोचिंग कर सकता। एमबीबीएस के बाद वे एमडी मेडिसिन करना चाहती हैं। राजकुमारी का छोटा भाई भी ईएमआरएस में पढ़ रहा है। इसी तरह ईएमआरएस बिहारीपुरा, जयपुर के छात्र अनिकेश मीना पश्चिम बंगाल के चौबीस परगना जिले में डायमंड हार्बर गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस कर रहे हैं। अनिकेश ने बताया कि वे करौली के नादौती के पास एक गांव के रहने वाले हैं। पिताजी किसान हैं। ईएमआरएस में छठी कक्षा में प्रवेश लेने के बाद से उनकी जिंदगी बदल गई। ईएमआरएस की बदौलत ही उन्हें नीट परीक्षा में सफलता मिली। अनिकेश कार्डियोलॉजिस्ट बनना चाहते हैं। पिता गुजरात में हमाली करते हैं, बेटा पढ़ रहा डॉक्टरी जयपुर के बस्सी के पास के किशनपुरा गांव के रहने वाले मोहनलाल मीना के पिता गुजरात के सिद्धपुर में ईसबगोल की बोरियां उठाते हैं। मोहन ने बताया कि उन्होंने छठी कक्षा में ईएमआरएस में दाखिला लिया। ईएमआरएस में शिक्षकों ने ही उन्होंने बताया कि डॉक्टर कैसे बन सकते हैं। ईएमआरएस में रहकर ही नीट की तैयारी की और आज वे पंजाब के फरीदकोट में गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस कर रहे हैं। मोहन एमबीबीएस के बाद जनरल फिजिशियन बनना चाहते हैं।