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किसानों को बड़ी राहत, बिजली की लागत बढ़ी पर नहीं बढ़ेंगे दाम

  हरियाणा हरियाणा में किसानों को 10 पैसे प्रति यूनिट की दर से ट्यूबवेल बिजली मिलती रहेगी, जिससे उन्हें बड़ी राहत मिलेगी. बढ़ती लागत के बावजूद सरकार सब्सिडी बढ़ाकर बिजली दरें स्थिर रखेगी. हरियाणा में किसानों को बड़ी राहत देते हुए सरकार ने 2026-27 के लिए बिजली दरों को लेकर अहम फैसला लिया है. हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) के आदेश के मुताबिक, किसानों को ट्यूबवेल कनेक्शन पर 10 पैसे प्रति यूनिट की रियायती दर पर बिजली मिलती रहेगी. यह फैसला राज्यभर के लाखों किसानों को सीधे फायदा पहुंचाएगा. क्या है नया टैरिफ आदेश? हरियाणा विद्युत नियामक आयोग ने बिजली वितरण कंपनियों के लिए 2026-27 का टैरिफ आदेश जारी किया है. इसके तहत कृषि क्षेत्र को राहत जारी रखते हुए सब्सिडी व्यवस्था को और मजबूत किया गया है. राज्य में कुल 83.79 लाख से अधिक बिजली उपभोक्ता हैं, जिनमें लगभग 7.15 लाख किसान ट्यूबवेल कनेक्शन के जरिए बिजली का उपयोग करते हैं.   सब्सिडी और लागत का पूरा गणित बिजली आपूर्ति की लागत 7.35 रुपये से बढ़कर 7.48 रुपये प्रति यूनिट हो गई है, जिससे सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ा है. इस बढ़ी हुई लागत को संतुलित करने के लिए राज्य सरकार 1,088.61 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी देगी. इसके साथ ही 2026-27 में कुल सब्सिडी बढ़कर 7,870.32 करोड़ रुपये हो जाएगी, जो पिछले साल 6,781.71 करोड़ रुपये थी. किसानों और उपभोक्ताओं को मिलने वाले फायदे कृषि क्षेत्र को 2026-27 के लिए 1068.664 करोड़ यूनिट बिजली आवंटित की गई है, जो पिछले वर्ष के 930.427 करोड़ यूनिट से ज्यादा है. किसानों के लिए कुल बिजली लागत करीब 7,993.61 करोड़ रुपये आंकी गई है, जिसमें से केवल 123.30 करोड़ रुपये किसानों से वसूले जाएंगे, जबकि बाकी राशि सरकार सब्सिडी के रूप में वहन करेगी. इससे किसानों पर आर्थिक बोझ कम रहेगा और बिजली दरें स्थिर बनी रहेंगी. अतिरिक्त सुविधाएं और नई पहल सरकार ने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए कुछ और फैसले भी लिए हैं. ट्यूबवेल कनेक्शन के पात्र आवेदकों को 31 मई 2026 तक एक बार लोड बढ़ाने की अनुमति दी गई है. इसके अलावा, प्रीपेड स्मार्ट मीटर उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं को ऊर्जा और फिक्स्ड चार्ज पर 5 प्रतिशत की छूट मिलेगी. साथ ही, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख शहरों में EV चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के निर्देश भी दिए गए हैं.

भारतीय सेना ने खराब गुणवत्ता के कारण वेरका दूध पाउडर की खेप वापस की, 125 टन पाउडर रद

लुधियाना भारतीय सेना को भेजे वेरका ब्रांड के दूध पाउडर की गुणवत्ता खराब मिलने पर पंजाब मिल्कफेड ने कड़ी कार्रवाई की है। मिल्कफेड के लुधियाना वेरका प्लांट के जनरल मैनेजर (जीएम) दलजीत सिंह, मैनेजर क्वालिटी कंट्रोल गुरइकबाल सिंह और मैनेजर प्रोडक्शन परितोष मिश्रा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। मिल्कफेड के एमडी राहुल गुप्ता ने कहा कि यह गंभीर चूक है, जिससे संगठन की साख को नुकसान पहुंचा है। बता दें कि वेरका की लुधियाना यूनिट द्वारा सप्लाई किया गया करीब 125 टन दूध पाउडर का ऑर्डर सेना ने रद किया था। इसे दो बैच (एक 58.338 टन का और दूसरा 66.654 टन) में सप्लाई किया गया था। गुणवत्ता खराब मिलने के बाद सेना ने दूध पाउडर को वापस कर दिया था। मिल्कफेड के एम डी बताया कि मामले में अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। सेना को दो अलग-अलग लॉट (58.338 MT और 66.654 MT) में दूध पाउडर की आपूर्ति की गई थी. जांच के बाद सेना के कमांडिंग अधिकारी ने लुधियाना जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ को पत्र भेजकर खेप को अस्वीकार करने की सूचना दी. इसकी प्रति रक्षा मंत्रालय के मुख्य खरीद निदेशक को भी भेजी गई है।  मिल्कफेड के प्रबंध निदेशक (MD) राहुल गुप्ता ने बचाव करते हुए कहा कि वेरका उत्पादों की क्वालिटी सबसे बड़ी प्राथमिकता है. उन्होंने बताया कि प्रोडक्ट्स को सेना के पास भेजने से पहले NABL-अप्रूव्ड लैब में जांचा गया था।  अब इन नमूनों को दोबारा जांच के लिए गुजरात स्थित NDDB की प्रतिष्ठित लैब 'CALF' भेजा जाएगा. यह पता लगाने के लिए एक 'फैक्ट फाइंडिंग कमेटी' बनाई गई है कि सेना ने इसे आखिर किस आधार पर रिजेक्ट किया।  विपक्ष का तीखा हमला इस बीच, विपक्षी दलों के नेताओं ने दूध पाउडर की खेप को अस्वीकार किए जाने के मुद्दे पर AAP सरकार पर जमकर निशाना साधा. शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने इस मुद्दे पर भगवंत मान सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि सशस्त्र बलों की ओर से इतनी बड़ी मात्रा में खेप को अस्वीकार किया जाना, किसी राज्य-संचालित संस्था में क्वालिटी कंट्रोल की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करता है।  उन्होंने एक बयान में दावा किया, "यह न सिर्फ करोड़ों रुपये का नुकसान है, बल्कि पंजाब की साख और विश्वसनीयता को भी एक गहरा आघात है।  मजीठिया ने आरोप लगाया, "इस घटनाक्रम ने सरकार की नाकामी को उजागर कर दिया है, खासकर तब जब वही दूध के उत्पाद पंजाब में उपभोक्ताओं को बेचे जा रहे हैं. जरा सोचिए, जो चीज हमारे सैनिकों के लिए अस्वीकार कर दी गई, वही पंजाब के लोग इस्तेमाल कर रहे हैं. यह पूरी तरह से जवाबदेही की कमी और जन-स्वास्थ्य के प्रति घोर लापरवाही को दर्शाता है।  कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने भी इसे मान सरकार के लिए बड़ी शर्मिंदगी बताया. रंधावा ने X पर एक पोस्ट में पूछा, ''यह कोई छोटी-मोटी चूक नहीं है; यह क्वालिटी कंट्रोल और जवाबदेही की पूरी तरह से विफलता को दर्शाता है. जब हमारे सशस्त्र बलों के लिए आपूर्ति की बात आती है, तो इसमें जरा भी समझौता नहीं किया जा सकता. पंजाब सरकार को जवाब देना होगा कि इसके लिए कौन जिम्मेदार है और क्या कार्रवाई की जाएगी?"    

Bhagalpur ROB Update: तकनीकी स्वीकृति मिली, अगले साल शुरू होगा सुगम सफर

भागलपुर. भागलपुर शहर सहित बाइपास को जोड़ने वाले भागलपुर-गोराडीह मार्ग में बौंसी रेल पुल संख्या-टू पर बन रहे रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) के लिए रेलवे ने बेयरिंग फोर्स कैलकुलेशन को मंजूरी दे दी है। पूर्व रेलवे के मुख्य ब्रिज इंजीनियर (CBE) ने मंजूरी दी है। इस स्वीकृति के साथ इस परियोजना के तकनीकी पहलू को हरी झंडी मिल गई है। बेयरिंग फोर्स कैलकुलेशन में पुल पर पड़ने वाले भार और दबाव का आकलन किया जाता है। अभियंता (Engineer) यह सुनिश्चित करते हैं कि संरचना ट्रेन के दबाव को सुरक्षित रूप से सह सके। अधिकारियों के अनुसार, रेलवे ब्रिज में लगे बेयरिंग का काम पुल पर पड़ने वाले भार को सुरक्षित तरीके से नीचे तक पहुंचाना होता है। इसके लिए अभियंता यह गणना करते हैं कि ट्रेन गुजरने के दौरान कितना दबाव पड़ेगा और क्या संरचना उसे सुरक्षित रूप से संभाल सकती है। इस कैलकुलेशन के सही पाये जाने के बाद ही निर्माण कार्य को अंतिम रूप दिया जाता है। 2027 तक निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य इधर, रेलवे की मंजूरी से परियोजना की सुरक्षा और मानकों की पुष्टि भी हो गई है। यह स्वीकृति परियोजना के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीकी चरण माना जा रहा है। रेलवे की मंजूरी मिलने से अब ROB निर्माण कार्य को गति मिलेगी। पांचवें पिलर को खड़े करने का काम चल रहा है। पिलर के कैब की ढलाई की गई है। अब तक 30 प्रतिशत फाउंडेशन का कार्य पूरा कर लिया गया है। यह कार्य शत प्रतिशत पूरा होने के बाद सब स्ट्रक्चर व सुपर स्ट्रक्चर का कार्य कराया जाएगा। 2027 तक आरओबी का निर्माण पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित है। शहर की कनेक्टिविटी में होगा सुधार मिरजानहाट शीतला स्थान से भीखनपुर गुमटी नंबर तीन के बीच बन रहे भोलानाथ फ्लाइओवर से यह आरओबी जुड़ेगा। कचहरी चौक से भोलानाथ आरओबी होते हुए बाइपास तक सीधी कनेक्टिविटी मिल जाएगी। जिससे लोगों को बिना किसी परेशानी के कचहरी चौक से बाइपास रोड तक पहुंचना आसान होगा। इसके साथ ही आवागमन अधिक सुगम हो जाएगा और मुख्य शहर से दक्षिणी इलाके की कनेक्टिविटी भी बेहतर हो जाएगी।

Fuel Tax Row: भूपेश का बयान- कटौती बेअसर, वित्त मंत्री ने कांग्रेस के पुराने फैसलों पर उठाए सवाल

रायपुर. पेट्रोल और डीजल में एक्साइज ड्यूटी करने पर सियासत गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि जिन जिन लोगों को इस कटौती से राहत मिले वे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का सार्वजनिक अभिनंदन करें और अगर न मिले तो उनको लानत भेजें सांय सांय। बघेल ने कहा, तेल कंपनियों के लिए राहत दी गई और चाटुकारिता करने के लिए जनता को लाभ मिलने की अफवाह फैला रहे हैं। जनता को एक कौड़ी राहत नहीं मिलने वाली। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री के पोस्ट पर वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने पलटवार किया है और जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया है। मंत्री ओपी चौधरी ने कहा है कि आपकी इन्हीं हरकतों के कारण जनता ने लानत भेजकर आपको बाहर का रास्ता तो पहले ही दिखा दिया। फिर भी जनता जनार्दन को गुमराह करने से पहले अपना इतिहास तो याद कर लिया करें। कोविड जैसी आपदा के समय जब पूरी दुनिया संकट से जूझ रही थी और लोग आर्थिक मुश्किलों में थे, तब आपने पेट्रोल पर वैट बढ़ाकर आपदा को अवसर बनाकर वसूली की थी। मंत्री चौधरी ने कहा, आज जब दुनिया युद्ध और वैश्विक हालात के कारण महंगे तेल से जूझ रही है, तब केवल भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों पर बोझ न बढ़े, इसलिए एक्साइज ड्यूटी कम करने का फैसला लिया है, लेकिन आपको तकलीफ इस बात से है कि जनता को राहत मिल रही है। साफ है कि आपके समय में आपदा वसूली का अवसर थी, मोदी जी के नेतृत्व में संकट में भी जनता को राहत देने का संकल्प है।

आर्थिक तंगी के बावजूद झारखंड के वेटलिफ्टर बाबूलाल हेम्ब्रम एक-एक मेडल से बना रहे हैं अपनी पहचान

आर्थिक तंगी से जूझते हुए झारखंड के वेटलिफ्टर बाबूलाल हेम्ब्रम एक-एक मेडल के साथ बना रहे हैं अपनी पहचान  खेलो इंडिया एथलीट बाबूलाल हेम्ब्रम झारखंड के केरिबांदा गांव से आते हैं 2024 में 49 किग्रा वर्ग में खेलो इंडिया यूथ गेम्स का स्वर्ण पदक जीत चुके हैं, साथ ही एशियाई और विश्व युवा चैंपियनशिप में भी पदक हासिल किए अब सीनियर सर्किट में भारत का प्रतिनिधित्व करने पर नजर रायपुर जब पूर्व आर्मी कोच गुरविंदर सिंह ने बाबूलाल हेम्ब्रम को उनकी शारीरिक बनावट के आधार पर अन्य खेल छोड़कर वेटलिफ्टिंग अपनाने की सलाह दी, तब झारखंड के रामगढ़ जिले के केरिबांदा गांव के इस किशोर के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी—इस खेल को जारी रखने के लिए पैसे जुटाना।  लेकिन हार मानने के बजाय बाबूलाल ने निर्माण स्थलों पर बांस की लकड़ियों और लोहे की रॉड से अभ्यास शुरू किया। बाद में उन्होंने झारखंड स्टेट स्पोर्ट्स प्रमोशन सोसाइटी (JSPS) के कोचिंग सेंटर में दाखिला लिया, जिसके लिए उन्हें रोज़ 60 किलोमीटर का सफर तय कर कोच गुरविंदर के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लेना पड़ता था।      बाबूलाल, जिन्होंने यहां आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में पुरुषों के 60 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीता ने कहा, “2018 में जब मैंने इस खेल को अपनाया, वह समय मेरे लिए बहुत कठिन था। हमारे पास ट्रेनिंग के लिए उपकरण और किट खरीदने के पैसे नहीं थे, इसलिए मैं बांस और लोहे की रॉड से ही अभ्यास करता था। फिर जीएसपीएस और अपने कोच का साथ मिला और आज मैं यहां हूं।”     19 वर्षीय बाबूलाल, जो पांच भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं, ने बताया, “मेरी मां एक स्थानीय स्कूल में रसोइया हैं और पिता छोटे-मोटे काम करते हैं। आर्थिक स्थिति हमेशा चुनौतीपूर्ण रही है। लेकिन मुझे भरोसा है कि खेलो इंडिया जैसे आयोजनों में मिल रही सफलता से हमारी स्थिति बदलेगी।”       बाबूलाल हेम्ब्रोम ने उम्र-आधारित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहले ही अपनी छाप छोड़ी है। 2024 में उन्होंने चेन्नई में आयोजित खेलो इंडिया यूथ गेम्स में 49 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद उन्होंने आईडब्ल्यूएफ़ वर्ल्ड यूथ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप और एशियन जूनियर एवं यूथ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में भी पदक हासिल किए। अब बाबूलाल सीनियर सर्किट में कदम रख रहे हैं और बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स में भारतीय टीम में जगह बनाने का लक्ष्य रख रहे हैं। फिलहाल वह पटियाला में राष्ट्रीय शिविर का हिस्सा हैं।                बाबूलाल ने कहा, “खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में यह रजत पदक मेरे लिए आत्मविश्वास बढ़ाने वाला है कि मैं सही दिशा में जा रहा हूं। राष्ट्रीय शिविर में लौटकर मैं अपने कोच से भविष्य के लक्ष्यों पर चर्चा करूंगा और उसी के अनुसार तैयारी करूंगा। मेरा सपना है कि मैं कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स और वर्ल्ड चैंपियनशिप जैसे बड़े मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व करूं।”

Revenue Surge! दुर्ग निगम रोज कमा रहा 50 लाख, फाइनेंशियल ईयर एंड में पूरी ताकत झोंकी

दुर्ग. वर्तमान वित्तीय वर्ष के अंतिम सप्ताह में राजस्व वसूली पर निगम प्रशासन ने पूरा जोर लगा दिया है। रोजाना 50 लाख की वसूली का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वैसे सभी टैक्स को मिलकर इस बार वसूली का लक्ष्य 47 करोड़ रुपए है। इनमें संपत्ति कर करीब 30 करोड़ आंकी गई है। जानकारी के मुताबिक अब तक 23 करोड़ संपत्ति कर की वसूली हुई है। निगम आयुक्त सुमित अग्रवाल ने राजस्व विभाग के सभी अधिकारियों को तय समय में शत प्रतिशत राजस्व वसूली किए जाने के सख्त निर्देश दिए हैं। यही वजह है कि पिछले 10 दिनों में रोजाना अच्छी खासी राजस्व की वसूली की जा रही है। वर्तमान वित्तीय वर्ष का मात्र 4 दिन शेष है। इसमें भी अवकाश आड़े आ रहा है, नगर निगम प्रशासन ने अवकाश के दिनों में भी काउंटर खोले जाने के निर्देश दिए हैं। नगर निगम दुर्ग द्वारा शहर के समस्त करदाताओं को सूचित किया जाता है कि वित्तीय वर्ष की समाप्ति के पूर्व संपत्ति कर / अन्य निगम कर जमा करने हेतु अब केवल अंतिम 4 दिन शेष रह गए हैं। निगम प्रशासन द्वारा करदाताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विशेष व्यवस्था की गई है, जिसके अंतर्गत नगर निगम परिसर के टैक्स निरंतर शनिवार-रविवार खुले रखे जा रहे हैं, ताकि नागरिक बिना किसी असुविधा के अपना कर जमा कर सकें। अतिरिक्त कर्मचारियों की ड्यूटी निगम आयुक्त सुमित अग्रवाल ने बताया कि कर संग्रहण को सुचारू एवं व्यवस्थित बनाने के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है तथा काउंटरों पर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। नागरिकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए समय-समय पर व्यवस्था का निरीक्षण भी किया जा रहा है, जिससे करदाताओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। पेनाल्टी एवं फाइन से बचे राजस्व अधिकारी आर. के. बोरकर ने कहा है कि समय सीमा के भीतर कर जमा करने से करदाता अनावश्यक पेनाल्टी एवं फाइन से बच सकते हैं, वहीं अंतिम तिथि के पश्चात निगम द्वारा नियमानुसार दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी, जिसमें जुर्माना, अधिभार एवं अन्य विधिक कार्रवाई शामिल हो सकती है। करदाता अपना टैक्स ऑनलाइन घर बैठे जमा कर सकते है।

पंजाब में 292 करोड़ रुपये के मुफ्त इलाज को मिली मंजूरी, 3 महीने में 1.77 लाख मरीजों को हुआ फायदा

चंडीगढ़  पंजाब सरकार ने मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत बड़े स्तर पर जनस्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। गत आठ जनवरी को योजना की शुरुआत के बाद तीन महीनों के भीतर ही 30.51 लाख से अधिक परिवारों का पंजीकरण किया गया है। इस योजना के तहत 292 करोड़ रुपये के मुफ्त इलाज को मंजूरी दी गई है। पंजाब भवन में  पत्रकार वार्ता में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि अब तक 1,77,097 लोगों के मुफ्त उपचार की मंजूरी दी गई है। 71,000 दावों का निपटारा कर दिया गया है। सूचीबद्ध अस्पतालों को 60 करोड़ का भुगतान भी किया जा चुका है। अस्पतालों को समय पर भुगतान का आश्वासन देते हुए डॉ. बलबीर ने कहा कि भगवंत मान सरकार ने बकाया भुगतान के लिए एक मजबूत प्रणाली विकसित की है। अस्पतालों को 31 मार्च तक के सभी बकाया 15 अप्रैल तक चुका दिए जाएंगे। CM स्वास्थ्य योजना के तहत 3 महीनों से कम समय में 30.51 लाख से अधिक परिवारों का पंजीकरण मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार ने मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत बड़े स्तर पर जनस्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर एक नया मानक स्थापित किया है और 8 जनवरी 2026 को योजना की शुरुआत के बाद तीन महीनों के भीतर ही 30.51 लाख से अधिक परिवारों का पंजीकरण किया गया है और 292 करोड़ रुपये के मुफ्त इलाज को मंजूरी देकर पूरे देश में एक उदाहरण प्रस्तुत किया गया है। इस योजना के क्रियान्वयन के पैमाने और गति के बारे में जानकारी देते हुए पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि यह योजना तेजी से पंजाब के लाखों परिवारों को वास्तविक वित्तीय राहत और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रही है। पंजाब भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए डॉ. बलबीर सिंह ने बताया, “इस योजना के तहत अब तक 30,51,325 लाभार्थियों का पंजीकरण किया जा चुका है और 1,77,097 मुफ्त उपचारों को मंजूरी दी गई है। इलाज की कुल स्वीकृत लागत 292 करोड़ रुपये है, जिसमें से 267 करोड़ रुपये पहले ही स्वीकृत किए जा चुके हैं। हमने 71,000 दावों का निपटारा कर दिया है और सूचीबद्ध अस्पतालों को 60 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।” इस उपलब्धि के महत्व को रेखांकित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार ने हर मानक पर अन्य राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने कहा, “यह पंजाब के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। चाहे पंजीकरण की बात हो, कवर किए गए परिवारों की संख्या हो या उपचार प्राप्त करने वाले मरीजों की संख्या—हर मामले में पंजाब पहले स्थान पर है।” अस्पतालों को समय पर भुगतान का भरोसा दिलाते हुए डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि भगवंत मान सरकार ने बकाया भुगतान के लिए एक मजबूत प्रणाली विकसित की है। उन्होंने बताया कि 31 मार्च तक के सभी बकाया 15 अप्रैल तक चुका दिए जाएंगे, जिससे किसी भी अस्पताल का एक भी रुपया बकाया नहीं रहेगा। उन्होंने 1 अप्रैल से लागू होने वाले नए भुगतान ढांचे की जानकारी देते हुए बताया कि 1 लाख रुपये तक के दावों का निपटारा 15 दिनों के भीतर किया जाएगा, जबकि 1 लाख रुपये से अधिक के बिल एक सप्ताह के भीतर निपटाए जाएंगे। विवादित या सत्यापन की आवश्यकता वाले मामलों में यह प्रक्रिया एक महीने के भीतर पूरी कर ली जाएगी। योजना के वास्तविक प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि यह योजना पहले ही हर आयु वर्ग के लोगों को लाभ पहुंचा रही है। इसके लाभार्थियों में एक वर्ष के बच्चे से लेकर 99 वर्ष की बुजुर्ग महिला तक शामिल हैं, जिन्होंने इस योजना के तहत कैंसर का इलाज करवाया है। उन्होंने बताया कि इस योजना में दिल से जुड़ी 100 से अधिक गंभीर बीमारियों सहित जटिल प्रक्रियाओं को भी कवर किया गया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि योजना के तहत पटियाला मेडिकल कॉलेज में “रप्चर्ड साइनस” जैसी गंभीर स्थिति वाले मरीज का सफल इलाज किया गया है। डॉ. बलबीर सिंह ने आगे कहा कि जब सरकार मुफ्त इलाज सेवाओं पर 292 करोड़ रुपये खर्च कर रही है, तो इसका सीधा अर्थ है कि आम जनता का पैसा बच रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य स्वास्थ्य एजेंसी, यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस के सहयोग से पूरे पंजाब में सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की निर्बाध सुविधा सुनिश्चित कर रही है।

कोर्ट ने पीएम की मिमिक्री करने वाले शिक्षक के सस्पेंशन पर लगाई रोक, अधिकारियों को दी चेतावनी

शिवपुरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमक्री करने वाले वीडियो पर निलंबित किए मध्यप्रदेश के एक शासकीय शिक्षक को ग्वालियर हाई कोर्ट से राहत मिली है। कोर्ट ने शिक्षक के निलंबन पर रोक लगा दी है। साथ ही मामले की सुनवाई के दौरान टिप्पणी की है कि किसी अधिकारी द्वारा बिना सोचे-समझे या बाहरी दबाव में आकर इस तरह की कार्रवाई सिर्फ इसलिए नहीं की जानी चाहिए की वह उसके अधिकार क्षेत्र में है। बीते 12 मार्च को शिवपुरी के पोहरी विकासखंड में पदस्थ शिक्षक साकेत पुरोहित द्वारा एलपीजी संकट के दौर में चल रहे हालात पर पीएम मोदी की मिमक्री करते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड किया गया था इसके अगले ही दिन शिवपुरी जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा उन्हें निलंबित कर दिया गया। निलंबन आदेश में तर्क दिया गया था कि, उनके इस कृत्य से विभाग की छवि धूमिल हुई है। शिक्षक साकेत पुरोहित ने इस निलंबन आदेश को ग्वालियर हाईकोर्ट में चैलेंज किया जिस पर गुरुवार को हाईकोर्ट ने फैसला देते हुए निलंबन पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने कहा- सिर्फ अधिकार में है इसलिए नहीं कर सकते सस्पेंड साकेत पुरोहित की और से ग्वालियर हाईकोर्ट में पैरवी कर रहे वकील कृष्ण कार्तिकेय शर्मा ने बताया कि, "साकेत पुरोहित के निलंबन पर उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी है। मामले में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि निलंबन कार्रवाई कोई अधिकारी किसी भी स्थिति में सिर्फ इसलिए नहीं कर सकता की उसके पास ऐसा करने का अधिकार है। हाईकोर्ट ने कहा है कि अधिकारी को निलंबन की कार्रवाई करने से पहले ये सोच विचार करना पड़ेगा कि क्या वाकई समबंधित विषय निलंबन का आधार है आपको देखना होगा की सस्पेंशन जरूरी भी है या नहीं। कोर्ट ने माना कि यह कार्रवाई जल्दबाजी और किसी दबाव में की गई है। कोर्ट ने माना जल्दबाजी और बाहरी दबाव में की गई कार्रवाई एडवोकेट शर्मा के मुताबिक साकेत पुरोहित के मामले में शिकायतकर्ता पिछोर विधायक प्रीतम लोधी थे जिनकी शिकायत पर यह निलंबन की कार्रवाई की गई। याचिकाकर्ता ने 12 मार्च को वीडियो अपलोड किया था और 13 मार्च को ही डीईओ द्वारा उन्हें निलंबन आदेश जारी कर दिया गया था। इस पर कोर्ट ने भी टिप्पणी कि है कि आप बाहरी दबाव में नहीं बल्कि सस्पेंड करने से पहले आपको तथ्य देखने होंगे। सिर्फ इसलिए कि एक विधायक ने शिकायत की और आपने अगले ही दिन कर्मचारी को निलंबित कर दिया। ये अधिकारी का स्वविवेक होना चाहिए। विधायक ने शिक्षक को बताया कांग्रेसी मानसिकता वाला व्यक्ति वकील कृष्ण कार्तिकेय शर्मा ने बताया कि विधायक प्रीतम लोधी ने जो शिकायत की वह भी एक तरह से राजनीतिक एजेंडा आधारित थी। उन्होंने अपनी शिकायत में याचिकाकर्ता साकेत पुरोहित को कांग्रेसी मानसिकता वाला व्यक्ति बताया था। ये शिकायत भी कोर्ट दस्तावेजों में लगाई गई थी और ये बात हाईकोर्ट के संज्ञान में थी जिसका उल्लेख भी किया था। सावधानी और तर्क के साथ होना चाहिए सस्पेंशन वकील के मुताबिक याचिका पर फैसला देते हुए हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह दोहराया कि अधिकारियों के पास कर्मचारियों को सस्पेंड करने की शक्ति होती है, लेकिन इस शक्ति का इस्तेमाल पूरी सावधानी और तर्क के साथ किया जाना चाहिए बेंच ने इस बात पर जोर दिया कि सस्पेंशन का सहारा आमतौर पर तभी लिया जाना चाहिए जब कोई गंभीर आरोप हों, जिनके लिए बड़ी सजा की जरूरत हो, या जब कर्मचारी की मौजूदगी से जांच प्रक्रिया में बाधा पड़ने की संभावना हो। कोर्ट ने कहा कि रूटीन या बिना सोचे-समझे किया गया सस्पेंशन स्वीकार्य नहीं।

हाईकोर्ट बार एसोसिएशन में महिलाओं के लिए दो नए पद, रजिस्ट्रार को भेजी गई जानकारी

इंदौर  सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर कार्यकारिणी में महिला आरक्षण को लेकर हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने भी चार नए पद आरक्षित करने का निर्णय लिया है। इसमें कोषाध्यक्ष और पुस्तकालय सचिव के दो नए पद सृजित किए जाएंगे जबकि दो पद कार्यकारिणी सदस्य के लिए रहेंगे। इस संबंध मे हाई कोर्ट रजिस्ट्रार द्वारा मांगी गई जानकारी के मुताबिक हाई कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा यह जानकारी भेज दी गई। बार अध्यक्ष मनीष यादव ने बताया कि वर्तमान में कोषाध्यक्ष और पुस्तकालय सचिव के पद हाई कोर्ट बार में नहीं है, इसलिए इनका सृजन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि वर्तमान में हाई कोर्ट बार में कुल करीब 6 हजार सदस्यों में से 1165 महिला वकील सदस्य हैं। इधर, कल इंदौर अभिभाषक संघ में भी कोषाध्यक्ष का पद और कार्यकारिणी सदस्य के तीन पद महिला वकीलों के लिए आरक्षित करने पर सहमति हुई है। उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने बार एसोसिएशन में महिलाओं को 30% आरक्षण के निर्देश दिए गए हैं। इसी के चलते स्टेट बार काउंसिल के आगामी 12 मई को होने जा रहे 25 सदस्यों के चुनाव में 7 पद महिला वकीलों के लिए आरक्षित किए गए हैं।  

डॉ. रवजोत सिंह ने पंजाब के जेल मंत्री के तौर पर कार्यभार संभाला, जेलों को सुधार केंद्र बनाने की योजना

चंडीगढ़ पंजाब सरकार में नए जेल मंत्री के रूप में डॉ. रवजोत सिंह ने आज पंजाब सिविल सचिवालय में अपने पद का कार्यभार संभाल लिया। इसके अलावा वे एनआरआई और संसदीय मामलों जैसे विभागों की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं। कार्यभार संभालने के बाद डॉ. रवजोत जेल विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें विभाग के चल रहे कार्यों, उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर विचार-विमर्श किया गया। उन्होंने कहा कि जेल विभाग को और अधिक सुदृढ़ बनाया जाएगा तथा कैदियों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और सुधारात्मक प्रणाली को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि जेलों को केवल सजा के केंद्र नहीं, बल्कि सुधार के केंद्र के रूप में विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। बैठक के दौरान जेल विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा एक प्रस्तुति के माध्यम से विभाग के चल रहे प्रोजेक्ट्स, पहल और चुनौतियों के बारे में नए मंत्री को विस्तृत जानकारी दी गई। नए जेल मंत्री डॉ. रवजोत सिंह ने अधिकारियों को विभाग में पारदर्शिता, जवाबदेही और मानवाधिकारों का पालन सुनिश्चित करने तथा जेल प्रणाली को आधुनिक और प्रभावी बनाने के निर्देश भी दिए। इस मौके पर जेल विभाग की प्रमुख सचिव भावना गर्ग, सचिव मोहम्मद तैयब और एडीजीपी जेल अरुणपाल सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।