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मध्य प्रदेश में मातृत्व सुरक्षा की सफलता: संस्थानों में डिलीवरी दर हुई 88%

भोपाल। कभी प्रसव के लिए दाईयों और घर के पारंपरिक तरीकों पर निर्भर रहने वाला मध्य प्रदेश अब संस्थागत प्रसव (अस्पतालों में प्रसव) के मामले में देश के अग्रणी राज्यों की कतार में खड़ा है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-पांच की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में अब 88.5 प्रतिशत प्रसव अस्पतालों में हो रहे हैं। साल 2005-06 में यहां संस्थागत प्रसव का स्तर महज 26.2 प्रतिशत था। यानी अधिकांश प्रसव घरों के असुरक्षित वातावरण में होते थे, जिससे मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) और शिशु मृत्यु दर (आइएमआर) का जोखिम बना रहता था। पिछले दो दशकों में सरकार की सजगता और आशा-ऊषा कार्यकर्ताओं की मेहनत ने इस तस्वीर को बदल दिया है। योजनाओं ने दिया संबल, 16 हजार रुपये तक की मदद रिपोर्ट के अनुसार, 2015-16 में संस्थागत प्रसव का आंकड़ा 80 प्रतिशत था, जो अब 90 प्रतिशत के लक्ष्य को छूने के करीब है। हालांकि, इस मामले में प्रदेश अभी देश में 17वें स्थान पर आता है। सफलता के पीछे जननी सुरक्षा योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को अस्पताल में प्रसव पर मिलने वाली 1,400 रुपये की नकद राशि है। वहीं, मुख्यमंत्री श्रमिक सेवा प्रसूति सहायता योजना भी गरीब और श्रमिक परिवारों के लिए वरदान साबित हुई। इसमें प्रसूता को पोषण और देखरेख के लिए 16,000 रुपये की बड़ी आर्थिक सहायता दी जाती है। जननी एक्सप्रेस बनी जीवनरेखा दुर्गम इलाकों से गर्भवती महिलाओं को समय पर अस्पताल पहुंचाने में जननी एक्सप्रेस (108/102) ने अहम भूमिका निभाई है। निश्शुल्क एंबुलेंस सेवा के कारण देरी की वजह से होने वाली घटनाएं काफी कम हो गई हैं। प्रदेश के आदिवासी बहुल झाबुआ, अलीराजपुर और बड़वानी जिलो में भी महिलाएं प्रसव के लिए अस्पताल पहुंच रही हैं। पहले जीवित बच्चे के जन्म पर गर्भवती महिलाओं को तीन किस्तों में 5,000 रुपये की आर्थिक मदद दी जाती है। आधुनिक सुविधाओं का हुआ विस्तार प्रदेश के सरकारी अस्पतालों के लेबर रूम को लक्ष्य कार्यक्रम के तहत हाईटेक बनाया गया है। नर्सिंग स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है। परिणामस्वरूप, रतलाम और उज्जैन जिलों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) ने शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव के लक्ष्य को हासिल कर लिया। वहीं इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर जैसे शहरी क्षेत्रों में संस्थागत प्रसव का दर 95% से अधिक रहा। जबकि झाबुआ, धार और बड़वानी जिलों में घर पर प्रसव की दर में 40% तक की कमी आई है। देश में संस्थागत प्रसव में शीर्ष राज्य – केरल – 99.8% – तमिलनाडु – 99.7% – गोवा – 99.5% – तेलंगाना – 97.0% – आंध्र प्रदेश – 96.3% मध्य प्रदेश के शीर्ष पांच जिले – इंदौर – 98.2% – भोपाल – 97.6% – ग्वालियर – 96.4% – जबलपुर – 95.8% – रतलाम – 94.5% वर्तमान चुनौतियां – कठिन भौगोलिक क्षेत्र – डिंडोरी, मंडला और झाबुआ जैसे आदिवासी अंचलों में सुदूर वनांचल होने के कारण एंबुलेंस का पहुंचना चुनौतीपूर्ण होता है। – सामाजिक मान्यताएं – कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी पारंपरिक दाइयों से घर पर प्रसव कराने का चलन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। जागरूकता का अभाव हालांकि, सरकार 16,000 रुपये तक की सहायता दे रही है, लेकिन शिक्षा की कमी के कारण अभी भी लगभग 11% प्रसव अस्पतालों से बाहर हो रहे हैं। इनका कहना है कि जननी सुरक्षा और प्रसूति सहायता जैसी सरकारी योजनाओं ने महिलाओं में अस्पताल के प्रति विश्वास जगाया है। हम ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों में आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से निरंतर मानिटरिंग कर रहे हैं, ताकि कोई भी गर्भवती महिला स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित न रहे। आधुनिक लेबर रूम और बेहतर एंबुलेंस सेवा के समन्वय से हम मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए संकल्पित हैं – डॉ. मनीष शर्मा, सीएमएचओ, भोपाल

योगी सरकार की बड़ी डिजिटल पहल, 2026 में होगा अत्याधुनिक सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम का शुभारंभ

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को नई रफ्तार देगा ‘निवेश मित्र 3.0’ योगी सरकार की बड़ी डिजिटल पहल, 2026 में होगा अत्याधुनिक सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम का शुभारंभ निवेश मित्र 3.0 से निवेशकों को मिलेगा वन-स्टॉप समाधान आईजीआरएस और मुख्यमंत्री डैशबोर्ड से निवेश प्रक्रियाओं पर रखी जा सकेगी सीधी निगरानी एआई आधारित स्मार्ट डैशबोर्ड से रीयल-टाइम ट्रैकिंग और त्वरित निर्णय होगा संभव व्हाट्सएप, ईमेल और एसएमएस से निवेशकों को मिलेगी हर अपडेट की जानकारी डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में योगी सरकार का एक और बड़ा कदम राष्ट्रीय सिंगल विंडो सिस्टम से जुड़कर यूपी बनेगा निवेशकों की पहली पसंद लखनऊ  उत्तर प्रदेश को देश का सर्वश्रेष्ठ निवेश गंतव्य बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है। प्रदेश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (व्यवसाय सुगमता) को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी व निवेशक-अनुकूल बनाने के उद्देश्य से प्रमुख ऑनलाइन सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम ‘निवेश मित्र 3.0’ विकसित किया जा रहा है। यह नया संस्करण वर्ष 2026 में लॉन्च किया जा सकता है, जो निवेशकों को एक सहज, एकीकृत और इंटेलिजेंट डिजिटल अनुभव प्रदान करेगा। राज्य की निवेश नोडल विंग इन्वेस्ट यूपी इसके विकास को अंतिम रूप दे रही है और इसे बेहतर बनाने के लिए निवेशकों के साथ ही विशेषज्ञों की राय को भी इसमें समाहित किया जा रहा है।  राष्ट्रीय सिंगल विंडो सिस्टम से होगा पूर्ण एकीकरण ‘निवेश मित्र 3.0’ को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि यह राष्ट्रीय सिंगल विंडो सिस्टम (NSWS) से पूरी तरह एकीकृत हो। इससे केंद्र और राज्य स्तर की सभी आवश्यक अनुमतियां, स्वीकृतियां और सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगी। यह प्रणाली निवेशकों को बार-बार अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने से मुक्ति दिलाएगी और परियोजनाओं के क्रियान्वयन की गति को तेज करेगी। आईजीआरएस और मुख्यमंत्री डैशबोर्ड से बढ़ेगी जवाबदेही योगी सरकार की पारदर्शी एवं जवाबदेह प्रशासन प्रणाली को और मजबूत करने के लिए ‘निवेश मित्र 3.0’ का IGRS (इंटीग्रेटेड ग्रीवेंस रिड्रेसल सिस्टम), मुख्यमंत्री डैशबोर्ड (दर्पण), निवेश सारथी, OIMS और इंडिया इंडस्ट्रियल लैंड बैंक (IILB) से समग्र एकीकरण किया जाएगा। इससे निवेशकों की शिकायतें सीधे IGRS के माध्यम से दर्ज होंगी और उनका रीयल-टाइम मॉनिटरिंग मुख्यमंत्री कार्यालय स्तर तक संभव हो सकेगा। यही नहीं, मुख्यमंत्री डैशबोर्ड पर विभागवार प्रगति, लंबित मामलों और निर्णयों की स्थिति स्पष्ट रूप से दिखाई देगी, जिससे अधिकारियों की उत्तरदायित्व तय करने की व्यवस्था और मजबूत होगी। AI आधारित स्मार्ट डैशबोर्ड होगा खास आकर्षण ‘निवेश मित्र 3.0’ की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित स्मार्ट डैशबोर्ड होगा। इसके माध्यम से रीयल-टाइम डेटा एनालिसिस, निवेश प्रस्तावों की प्रगति की लाइव ट्रैकिंग, विभागीय प्रदर्शन का आंकलन सुनिश्चित होगा, जिससे संभावित अड़चनों की पूर्व पहचान संभव हो सकेगी। यह तकनीक नीति निर्माण से लेकर जमीनी क्रियान्वयन तक डाटा आधारित निर्णय को बढ़ावा देगी। व्हाट्सएप, ईमेल और एसएमएस से मिलेगी हर अपडेट निवेशकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस पोर्टल में मल्टी-चैनल कम्युनिकेशन सिस्टम विकसित किया जा रहा है। निवेशक अपने आवेदन की स्थिति, स्वीकृति, आपत्ति या शिकायत निवारण की जानकारी व्हाट्सएप, ईमेल और एसएमएस के माध्यम से सीधे प्राप्त कर सकेंगे। इससे संवाद प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और भरोसेमंद बनेगी। योगी सरकार की निवेश नीति को मिलेगा मजबूत आधार योगी सरकार पहले ही ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट, नीतिगत सुधारों, सरलीकृत प्रक्रियाओं और डिजिटल गवर्नेंस के माध्यम से उत्तर प्रदेश को निवेश के मानचित्र पर अग्रणी राज्य बना चुकी है। ‘निवेश मित्र 3.0’ इस दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा, जो न केवल निवेशकों का विश्वास बढ़ाएगा, बल्कि विभागीय दक्षता और प्रशासनिक पारदर्शिता को भी नई ऊंचाई देगा। आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की दिशा में बड़ा कदम विशेषज्ञों का मानना है कि ‘निवेश मित्र 3.0’ के माध्यम से उत्तर प्रदेश में उद्योग स्थापना की प्रक्रिया सरल, समयबद्ध और भ्रष्टाचार मुक्त होगी। यह पहल राज्य को आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ाएगी और रोजगार सृजन, औद्योगिक विकास व आर्थिक सशक्तिकरण को नई गति देगी।

अंतर्राष्ट्रीय रैपिड शतरंज टूर्नामेंट का आयोजन हरदा में, शतरंज प्रेमियों के लिए सुनहरा अवसर

भोपाल  अंतर्राष्ट्रीय शतरंज टूर्नामेंट का भव्य आयोजन हरदा जिले में होने जा रहा है। यह प्रतिष्ठित टूर्नामेंट हरदा जिला शतरंज संगठन के तत्वाधान में इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के अनुरूप संपन्न होगा, जिसमें देश-प्रदेश सहित विभिन्न स्थानों के ख्याति प्राप्त और रेटेड खिलाड़ी अपने खेल का जौहर दिखाएंगे। इस टूर्नामेंट की तिथि शतरंज फेडरेशन द्वारा 24 जनवरी शनिवार निर्धारित की गई है। यह टूर्नामेंट कलेक्टर निवास के सामने, इंदौर रोड हरदा डिग्री कॉलेज में होगा, जिसमें देश-विदेश के खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। यह इंटरनेशनल चेस टूर्नामेंट 24 जनवरी राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर बालिकाओं को समर्पित रहेगा। इसमें बड़ी संख्या में बालिकाओं की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए जिले एवं आसपास के विद्यालयों और महाविद्यालयों से संपर्क कर उन्हें प्रेरित किया जाएगा। साथ ही खिलाड़ियों के खेल स्तर को बेहतर बनाने हेतु पूर्व में प्रशिक्षण-सत्र भी आयोजित किए जाएंगे। कलेक्टर श्री सिद्धार्थ जैन ने बताया कि शतरंज के शौकीनों और खिलाड़ियों के लिए यह एक बेहतरीन मौका है, जहां वे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकते हैं। टूर्नामेंट में कुल 1 लाख 51 हजार रुपये की इनामी राशि और ट्रॉफियां रखी गई है। यह एक रेपिड टूर्नामेंट होगा, जिसमें प्रत्येक खिलाड़ी को 15 मिनट और प्रति चाल 5 सेकंड का अतिरिक्त समय मिलेगा। उन्होंने बताया कि टूर्नामेंट के लिये ओपन श्रेणी हेतु 750 रुपये तथा हरदा के स्थानीय खिलाड़ियों के लिये 500 रूपये एन्ट्री फीस निर्धारित की गई है। जीएम/डब्ल्यूजीएम/डब्ल्यूआईएम खिताब धारकों और 2300 से ऊपर रेटेड खिलाड़ियों के लिए प्रवेश निःशुल्क है। इसके अलावा दिव्यांग खिलाड़ियों को एंट्री फीस में 50 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। इच्छुक खिलाड़ी ब्रोशर लिंक https://circlechess.com/brochure?id=49722 व पंजीकरण लिंक https://circlechess.com/registration?id=49722 के माध्यम से टूर्नामेंट के आयोजन के संबंध में जानकारी प्राप्त कर अपना पंजीयन करा सकते हैं।  

राजस्थान दहलाने की साजिश नाकाम? 150 किलो विस्फोटक से लदी कार पकड़ी गई, मकसद पर सस्पेंस

जयपुर  राजस्थान में नए साल पर अलर्ट पुलिस ने भारी मात्रा में विस्फोटक से लदी एक कार को बरामद किया है। राजस्थान के टोंक में पकड़ी गई कार में 150 किलो अमोनियम नाइट्रेट था, जिसे यूरिया के कट्टों में छिपा कर रखा गया था। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर इन विस्फोटकों को किस मकसद से और कहां ले जाया जा रहा था। टोंक के डीएसपी मृत्युंजय मिश्रा ने बताया कि मारुति सियाज गाड़ी बूंदी से रवाना हुई और टोंक जा रही थी। सूचना आधार पर बरौनी थाना क्षेत्र में नाकाबंदी कर इस कार को रोका गया। जांच में इसके अंदर भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद हुआ है। यह विस्फोटक 150 किलो अमोनियम नाइट्रेड था, जो यूरिया के कट्टों में छिपाकर रखा गया था। इसके साथ 200 डेंजर एक्सप्लोसिव कार्टेज और सेफ्टी फ्यूज वायर के 6 बंडल (कुल करीब 1100 मीटर) बरामद किए गए। पुलिस ने विस्फोटक ले जा रहे दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान सुरेंद्र (48) पुत्र भंवरलाल, और सुरेंद्र मोची (33) पुत्र दुलीलाल के रूप में हुई है। दोनों करवर बूंदी के रहने वाले हैं। पुलिस आरोपियों से विस्फोटक सामग्री की सप्लाई और इसके उपयोग को लेकर गहन पूछताछ कर रही है। पुलिस पता लगा रही है कि ये लोग विस्फोटक कहां से लाए थे और किसके पास ले जा रहे थे। पुलिस की जांच मुख्य रूप से इस बात पर केंद्रित है कि विस्फोटक किस मकसद से कहां ले जाया जा रहा था। क्या-क्या आशंकाएं, पुलिस बोली- हर पहलू से जांच डीएसपी ने कहा कि आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि इन्होंने पहले कब-कहां इस तरह विस्फोटक की आपूर्ति की है। अमोनियम नाइट्रेड किसी भी तरह की विस्फोटक घटना को अंजाम देने में काम आ सकता है। जब उनसे पूछा गया कि दिल्ली धमाकों में भी इसी का इस्तेमाल हुआ था तो उन्होंने कहा, 'जितने भी तथ्य हैं और जो भी पहलू हैं, सबकी जांच की जा रही है। इस पहलू की भी जांच की जा रही है। अरावली में खनने के लिए भी विस्फोटकों का इस्तेमाल होता है, इसको लेकर किए गए सवाल पर डीएसपी ने कहा कि आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि कहीं खनन के लिए तो नहीं ले जा रहे थे। इसके अलावा नए साले के पहलू को भी ध्यान में रखकर पूछताछ की जा रही है।

कभी टेंपो चलाते थे श्रवण कुमार विश्वकर्मा, अब आसमान में उड़ान भरेगी शंख एयरलाइंस

कानपुर  पिछले दिनों देश के एविएशन सेक्टर में तब हड़कंप मच गई, जब इंडिगो की बड़ी संख्या में फ्लाइट्स तमाम वजहों से कैंसल होने लगीं। आम जनता से लेकर सरकार तक को परेशानी होने लगी। जैसे-तैसे कुछ दिनों में मामला पटरी पर लौट गया, लेकिन एक बड़ा सवाल पैदा हो गया कि क्या यह दिक्कत चंद एयरलाइंस होने की वजह से आई? ऐसे में सरकार ने भी सक्रियता दिखाते हुए कुछ नई एयरलाइंस के सेक्टर में एंट्री की हरी झंडी दिखा दी। इसी में एक शंख एयरलाइंस है, जिसे पिछले दिनों एनओसी दी गई और अब जल्द ही कंपनी के विमान उड़ान भरते हुए दिख सकते हैं। शंख एयरलाइंस के बनाए जाने के पीछे की कहानी काफी दिलचस्प है। दरअसल, यूपी के कानुपर का निकले एक नौजवान ने किस तरह कुछ समय तक टैंपो चलाई और फिर वहां से नई एयरलाइंस तक खड़ी कर दी।    कौन हैं श्रवण कुमार विश्वकर्मा, कैसे अपने बल-बूते खड़ी की एयरलाइंस कानपुर से ताल्लुक रखने वाले श्रवण कुमार विश्वकर्मा अभी भले ही ट्रांसपोर्ट की लाइन में बड़ा नाम हों, लेकिन कुछ समय पहले तक उन्हें अपनी फाइनेंशियल कंडीशन की वजह से टेंपो/ऑटो तक चलानी पड़ी। कानुपर में लगभग एक साल तक श्रवण कुमार ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर टेंपो चलाया। वे कहते हैं, ''मुझे यह बताने में बिल्कुल भी हिचक नहीं है कि मैंने सालभर तक टेम्पो चलाया था। फिर धीरे-धीरे समय बीता और सफलता मिलती गई।'' इसके बाद वे कानपुर से यूपी की राजधानी लखनऊ में शिफ्ट हुए और यहां उनकी जिंदगी ही बदल गई। यहां उन्होंने माइनिंग, सीमेंट, ट्रांसपोर्ट के क्षेत्र में जमकर सफलता मिली। 400 से ज्यादा हैं ट्रक, कैसे बदली किस्मत श्रवण कुमार बचपन में पढ़ने में काफी अच्छे नहीं थे। वे खुद बताते हैं कि स्कूलिंग कम रही उनकी। पढ़ाई में भी मन कम लगता था। टेंपो आदि चलाने के बाद उन्होंने अपने दोस्तों के साथ मिलकर कुछ व्यापार भी किए, लेकिन उसमें सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने 2015 में सीमेंट का काम शुरू किया और वहां से किस्मत बदल गई। इसके बाद टीएमटी के काम में गए। फिर माइनिंग में गए और जमकर तरक्की हुई। वहां से वे ट्रांसपोर्ट में गए और अभी उनके पास 400 से ज्यादा ट्रकों की फ्लीट है। धीरे-धीरे कारवां बढ़ता गया। 'एवएिशन सेक्टर में कैशफ्लो अच्छा है' बिजनेसमैन श्रवण का मानना है कि चूंकि एविएशन सेक्टर में उधारी पर काम नहीं होता है, इसलिए कैशफ्लो काफी अच्छा है। यही वजह है कि अन्य सेक्टर्स के मुकाबले इसमें सफल होने की उम्मीद ज्यादा है। साथ ही, जैसे अन्य सेक्टर में कम्प्टीशन बहुत ज्यादा है, उसकी तुलना में एविएशन में चुनिंदा ही एयरलाइंस है और ऐसे में सफल होने की उम्मीद अधिक है। वह कहते हैं, ''मेरा मानना है कि एविएशन आने वाले समय में सबसे बड़ा सेक्टर होगा। इसमें कैशफ्लो अच्छा है। एक भी पैसे की उधारी नहीं होती है। कई बिजनेस उधारी की वजह से बंद हो जाते हैं। इस सेक्टर में कम्प्टीशन बहुत कम है, जिसके सफल होने का चांसेस बढ़ जाता है।'' श्रवण का दावा- हर समय नहीं बदलेगा किराया एयरलाइंस सेक्टर में सबसे ज्यादा दिक्कत किराए की होती है। हर समय बदलता रहता है। श्रवण का कहना है कि वह अपनी फ्लाइट्स में डायनिमिक फेयर वाला सिस्टम नहीं रखेंगे। जो किराया सुबह होगा, वही शाम में भी होगा। ऐसा नहीं होगा कि समय के साथ इसमें बढ़ोतरी होने लगे। त्योहार से लेकर तमाम डिमांड वाले समय में ट्रांसपेरेंट किराए पर फोकस रखा जाएगा। शुरुआत में एयरबस कंपनी के विमान होंगे और संख्या भी कम ही होगी। लेकिन आने वाले समय में और विमानों की खरीद होगी और फिर कुछ सालों बाद इंटरनेशनल उड़ानों की शुरुआत होगी।  

दतिया में अनुपयोगी एंबुलेंस का नया रूप, अस्पताल आने वाले परिजनों के लिए रैन बसेरा तैयार

दतिया: मध्य प्रदेश के दतिया कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े नवाचार के लिए जाने जाते हैं। इस बार जिला अस्पताल में उन्होंने ऐसा काम करवाया है, जिसकी हर तरफ चर्चा हो रही है। वर्षों से कबाड़ में पड़ी अनुपयोगी एंबुलेंस को उन्होंने रैन बसेरा के रूप में विकसित करवा दिया है। अब अस्पताल आने वाले लोगों को एक नया ठिकाना मिला जाएगा। खुले आसमान के नीचे सोते थे परिजन दरअसल, दतिया अस्पताल परिसर में उपचार के दौरान मरीजों के परिजन अक्सर ठंडी रातों में खुले आसमान के नीचे या फर्श पर सोने को मजबूर रहते हैं। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने कबाड़ संसाधनों के रचनात्मक उपयोग का यह अनूठा मॉडल तैयार किया है। मरम्मत और आवश्यक सुधार के बाद तैयार की गई प्रत्येक एंबुलेंस में चार लोगों के आराम से सोने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। अंदर साफ-सफाई, रोशनी और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया गया है, जिससे परिजनों को सम्मानजनक आवासीय सुविधा मिल सके। अनुपयोगी एंबुलेंस बनी रैन बसेरा फिलहाल एक एंबुलेंस को पूरी तरह रैन बसेरा के रूप में तैयार कर लिया गया है, जबकि तीन से चार अतिरिक्त एंबुलेंसों को भी जल्द ही इसी उद्देश्य से विकसित करने की प्रक्रिया चल रही है। यह पहल न केवल कम लागत में अधिक लाभ देने वाली है, बल्कि प्रशासन की संवेदनशील सोच और सेवा भावना का भी परिचायक है। इस संबंध में कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े ने बताया कि प्रशासन का निरंतर प्रयास है कि अनुपयोगी या कबाड़ हो चुके संसाधनों का जनहित में रचनात्मक उपयोग किया जाए, ताकि आम नागरिकों को सीधा लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था खासतौर पर उन गरीब और दूर-दराज से आने वाले परिवारों के लिए राहत का माध्यम बनेगी, जिनके पास ठहरने की कोई व्यवस्था नहीं होती। दतिया प्रशासन की यह पहल अस्पताल आने वाले सैकड़ों मरीजों के परिजनों के लिए सहारा बनेगी और मानवीय शासन, संवेदनशील प्रशासन और संसाधनों के सदुपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

चलती कार में स्टंटबाजी का वीडियो बना रहे थे Reel, पुलिस की कार्रवाई में 5 कार जब्त, चालक अरेस्ट

राजनांदगांव सोशल मीडिया पर लाइक और व्यूज़ की होड़ में कानून को ताक पर रखने वालों पर राजनांदगांव पुलिस ने सख्त शिकंजा कस दिया है. इंस्टाग्राम पर वायरल हुए एक वीडियो ने पुलिस को सतर्क किया, जिसमें कुछ युवक तेज रफ्तार गाड़ियों में स्टंट करते और नाबालिगों की जान खतरे में डालते नजर आए. वीडियो सामने आते ही पुलिस ने बिना देर किए कार्रवाई शुरू कर दी. जांच में सामने आया कि कुछ वाहन चालक सार्वजनिक सड़क को स्टंट ट्रैक समझ बैठे थे. तेज रफ्तार, लापरवाही और नियमों की खुलेआम अनदेखी करते हुए वाहन दौड़ाए जा रहे थे, जिनमें नाबालिग बच्चे भी सवार थे. यह न सिर्फ कानून का उल्लंघन था, बल्कि आम लोगों की जान के लिए भी गंभीर खतरा बन चुका था. पांच वाहन जब्त, चालकों को किया गया गिरफ्तार पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा के निर्देश पर थाना बसंतपुर पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए कार्रवाई की. वायरल वीडियो के आधार पर छह वाहनों की पहचान की गई, जिनमें क्रेटा, जिप्सी और स्कॉर्पियो जैसे वाहन शामिल थे. इन सभी के खिलाफ थाना बसंतपुर में अपराध क्रमांक 611/2025 दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता की धारा 281, 285 एवं मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 184, 182(1)(क) के तहत केस दर्ज किया गया. पुलिस की टीम ने पांच वाहनों को जब्त किया और चालकों को गिरफ्तार कर जमानत पर रिहा किया गया. एक अन्य आरोपी की तलाश अभी जारी है. एसपी ने की नाबालिग और उनके परिजनों की काउंसलिंग मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा ने स्वयं नाबालिग बच्चों और उनके परिजनों की काउंसलिंग की. बच्चों को समझाया गया कि रील और रोमांच के चक्कर में अपनी और दूसरों की जिंदगी से खिलवाड़ करना अपराध है. वहीं अभिभावकों को सड़क सुरक्षा, जिम्मेदार परवरिश और सतर्कता का पाठ पढ़ाया गया. राजनांदगांव पुलिस ने साफ संदेश दिया है कि सड़क स्टंट, लापरवाही और नियमों की अनदेखी किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी. पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि ऐसी किसी भी गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें, ताकि समय रहते हादसों को रोका जा सके. जनसहयोग से ही सुरक्षित सड़क और सुरक्षित शहर संभव है,इसी विश्वास के साथ राजनांदगांव पुलिस ने आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रखने की बात कही है.

बीजेपी कार्यकर्ताओं ने कोतमा थाना में सौंपा ज्ञापन, पुलिस अधीक्षक को किए गए क्षेत्रीय मुद्दों के प्रति जागरूक

कोतमा आज भारतीय जनता पार्टी विधानसभा क्षेत्र कोतमा, जिला अनूपपुर के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं द्वारा कोतमा थाना पहुंचकर माननीय पुलिस अधीक्षक अनूपपुर के नाम ज्ञापन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महोदय को सौंपा गया। यह ज्ञापन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं कोतमा विधायक आदरणीय श्री दिलीप जायसवाल जी के विरुद्ध सोशल मीडिया पर की गई अमर्यादित, आपत्तिजनक तथा अशोभनीय टिप्पणियों के विरोध में सौंपा गया। पार्टी पदाधिकारियों ने बताया कि सोशल मीडिया पर की गई यह टिप्पणी न केवल जनप्रतिनिधि के सम्मान को ठेस पहुँचाने वाली है, बल्कि समाज में वैमनस्य एवं अशांति फैलाने का भी प्रयास है। इस प्रकार की गतिविधियाँ लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विरुद्ध हैं। ज्ञापन के माध्यम से यह मांग की गई कि—     •    आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले सर्वोच्च सत्ता नाम के अख़बार की जांच की जाए कि यह नियम अनुसार चल रहा है या नहीं      •    रामबाबू चौबे जो कि सर्वोच्च सत्ता का संपादक बताता है अपने आप को उसके विरुद्ध FIR दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए     •    भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु सख्त कदम उठाए जाएँ भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ताओं ने कहा कि इस प्रकार की सोशल मीडिया पोस्ट से कानून-व्यवस्था प्रभावित होती है, इसलिए दोषियों के विरुद्ध शीघ्र कार्रवाई अपेक्षित है।

सरकारी कर्मचारियों की संपत्ति पर नजर: 31 जनवरी डेडलाइन, अचल संपत्ति विवरण अनिवार्य

रायपुर राज्य सरकार के तमाम अधिकारी-कर्मचारी को 31 जनवरी तक अनिवार्य रूप से अपनी अचल सम्पत्ति का वार्षिक विवरण प्रस्तुत करना होगा. इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से तमाम अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव, विशेष सचिव को तीन बिंदुओं में निर्देश जारी किया गया है. सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी पत्र में छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-19(1) के तहत प्रत्येक शासकीय सेवकों को अपने अचल संपत्ति के संबंध में वार्षिक विवरण 31 जनवरी तक प्रस्तुत करना अनिवार्य बताया है. जनवरी 2026 से समस्त सचिवालय सेवा के अधिकारियों-कर्मचारियों के कैलेण्डर वर्ष 1.1.2025 से 31.12.2025 तक की स्थिति में धारित किए वार्षिक अचल संपत्ति का विवरण एनआईसी द्वारा संचालित SPARROW (epar.cg.gov.in) पोर्टल के माध्यम से प्रस्तुत करना होगा.

IAS नागार्जुन बी. गौड़ा के नेतृत्व में खंडवा में जल संरक्षण की मिसाल, साइकिल पर पानी ढोने वाले बच्चे की कहानी

खंडवा  राष्ट्रीय जल पुरस्कार मिलने से मध्यप्रदेश के खंडवा जिले का नाम रोशन हुआ है। यह सफलता सिर्फ एक सरकारी योजना का नतीजा नहीं, बल्कि जिला पंचायत सीईओ IAS डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा के व्यक्तिगत संघर्ष और बचपन के अनुभवों का परिणाम है। कर्नाटक के सूखाग्रस्त तिप्तूर से आए नागार्जुन गौड़ा ने पानी की किल्लत को करीब से देखा है, जिसने उन्हें जल संरक्षण को अपना मिशन बनाने के लिए प्रेरित किया। कौन हैं नागार्जुन गौड़ा IAS नागार्जुन गौड़ा का जन्म 5 मई 1992 को कर्नाटक के तुमकुरु जिले के एक छोटे से गांव में हुआ था। उनके माता-पिता शिक्षक हैं। उनके गांव में पानी की कमी एक बड़ी समस्या थी, जिसे उन्होंने बचपन में खुद झेला। यही अनुभव उन्हें जल संरक्षण के प्रति समर्पित करने का कारण बना। नतीजा यह निकला कि खंडवा को 'सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला जिला' घोषित किया गया और 2 करोड़ रुपये का राष्ट्रीय जल पुरस्कार मिला। यह पुरस्कार केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के वर्षा जल संचयन कार्यक्रम के तहत दिया गया। 18 नवंबर 2025 को दिल्ली में राष्ट्रपति से पुरस्कार लेते हुए IAS नागार्जुन गौड़ा ने कहा था, 'जब जल संचय, जन भागीदारी योजना शुरू हुई, तो यह मेरे लिए व्यक्तिगत हो गया।' पानी के लिए करना पड़ता था संघर्ष नागार्जुन गौड़ा बताते हैं कि उन्हें अपने बचपन में पानी के लिए बोरवेल से कुछ बाल्टी पानी लाने के लिए साइकिल से लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। वे कहते हैं, “कभी-कभी मैं उस बोरवेल के लीवर को 10 मिनट तक खींचता था, तब जाकर एक-दो बाल्टी पानी मिल पाता था।” उन्होंने चित्रदुर्ग जैसे सूखे इलाकों का भी जिक्र किया, जो दशकों से सूखे की मार झेल रहे हैं। पत्नी भी हैं आईएएस डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी करने के बाद नागार्जुन गौड़ा ने UPSC की परीक्षा दी और 2019 बैच के IAS अधिकारी बने। उनकी पत्नी सृष्टि जयंत देशमुख ने भी UPSC में अच्छी रैंक हासिल की थी। बाद में नागार्जुन गौड़ा का कैडर मध्य प्रदेश ट्रांसफर हो गया। खंडवा में जिला पंचायत सीईओ के पद पर रहते हुए, नागार्जुन गौड़ा ने 'जल संचय, जन भागीदारी' (JSJB) अभियान को एक बड़े आंदोलन का रूप दिया। इस अभियान में गांव के कर्मचारियों से लेकर जिला स्तर के अधिकारियों तक, सभी ने मिलकर किसानों, स्कूलों और आम लोगों को वर्षा जल संचयन अपनाने के लिए प्रेरित किया। जिले में 1.25 लाख से अधिक काम इस अभियान के कारण खंडवा जिले में 1.25 लाख से अधिक जल संरक्षण के काम हुए, जिनमें रूफटॉप रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, रिचार्ज पिट और ट्रेंच जैसे 40 हजार से ज्यादा काम शामिल थे। इसी मेहनत के दम पर खंडवा को राष्ट्रीय जल पुरस्कार मिला। एआई तस्वीरों को लेकर विवाद हालांकि, हाल ही में यह पुरस्कार AI-जनरेटेड तस्वीरों को लेकर विवादों में आ गया है। सोशल मीडिया पर IAS नागार्जुन गौड़ा को ट्रोल भी किया जा रहा है। इस पर उन्होंने और खंडवा जिला प्रशासन ने सफाई दी है कि JSJB पोर्टल और ‘कैच द रेन' (CTR) पोर्टल अलग-अलग हैं। खंडवा जिला प्रशासन के अनुसार, JSJB अवार्ड के मूल्यांकन में केवल असली तस्वीरों का ही इस्तेमाल हुआ था, जबकि CTR पोर्टल पर कुछ AI तस्वीरें शैक्षणिक उद्देश्य से अपलोड की गई थीं, जिनका राष्ट्रीय जल अवार्ड से कोई लेना-देना नहीं है। एक मीडिया रिपोर्ट में गलत खबरें छापी गई थीं, जिसका खंडवा जिला प्रशासन ने खंडन किया है।